•   Friday Apr 04
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Will the Congress Organization Return to the Sukhu Formula?
In Politics

क्या सुक्खू फार्मूला पर दोबारा लौटेगा कांग्रेस का संगठन ?

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव होने की चर्चा है। चर्चा है कि एक बार फिर कांग्रेस संगठन के 'सुक्खू फार्मूला' पर लौटने जा रही है। अलबत्ता संगठन की कमान प्रतिभा सिंह के हाथ में हो, लेकिन माना जा रहा है कि संगठन का ढांचा सीएम सुक्खू की मर्जी के मुताबिक बदलने जा रहा है।  वर्तमान के शह-मात के खेल को समझना है तो बात अतीत से शुरू करनी होगी। तब सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री नहीं थे, हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। उन्होंने तय किया कि बीजेपी की तर्ज पर कांग्रेस में संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाकर 17 कर देनी चाहिए। तब कांग्रेस की राजनीति में वीरभद्र सिंह का बोलबाला था, जो उस वक्त सीएम भी थे। वीरभद्र सिंह इसके खिलाफ थे, खासतौर पर कांगड़ा को चार हिस्सों में बांटने के। कांगड़ा का सबसे बड़ा चेहरा, यानी जी.एस. बाली भी वीरभद्र सिंह से इत्तेफाक रखते थे। लेकिन दिग्गजों की राय दरकिनार कर आलाकमान ने सुक्खू की सुनी और कांग्रेस में संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाकर 17 कर दी गई। कांगड़ा को चार जिले और मंडी व शिमला को दो-दो संगठनात्मक जिलों में बांट दिया गया। तब कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को यह फैसला रास नहीं आया। नतीजतन, जब साल 2019 में कुलदीप राठौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने तो फिर संगठनात्मक जिलों और ब्लॉकों की संख्या घटा दी गई। अब वक्त ने फिर करवट ली है। सुक्खू अब प्रदेश अध्यक्ष तो नहीं, मगर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सीधे कहें तो प्रदेश कांग्रेस के सर्वेसर्वा वही दिखते हैं। ऐसे में फिर सुगबुगाहट है कि कांग्रेस संगठन के ढांचे में बदलाव होगा और एक बार फिर कांग्रेस 'सुक्खू फार्मूला' पर लौटने जा रही है। वर्तमान में, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के 13 संगठनात्मक जिले हैं, जबकि बीजेपी के 17 संगठनात्मक जिले हैं। कांग्रेस भी अब इसी तर्ज पर 17 संगठनात्मक जिले बनाना चाहती है। कांगड़ा को फिर कांगड़ा, नूरपुर, पालमपुर और देहरा जिलों में बांटा जा सकता है, जबकि मंडी में सुंदरनगर को अलग संगठनात्मक जिला बनाया जा सकता है। साथ ही, मंडलों की संख्या में भी भारी इजाफा हो सकता है। इसके पीछे मुख्य दो तर्क हैं—एक, माइक्रो मैनेजमेंट को और मजबूत करना, और दूसरा, अधिक से अधिक लोगों को पद देकर एडजस्ट करना। हालांकि इसमें सबकी सहमति नहीं दिखती। कांग्रेस के ही कुछ नेता दबे सुर में इसका विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी की नकल करना कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं होगा, क्योंकि बीजेपी कैडर बेस्ड पार्टी है, उसकी कार्यप्रणाली अलग है। कांग्रेस को जिले विभाजित कर कुछ भी नहीं मिलने वाला। बहरहाल, कोई यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और किसी को बदलाव की दरकार है। इन दोनों के बीच कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो चाहते हैं कि जो भी हो, जल्द हो। अब क्या होगा और कब, इसका इंतजार बना हुआ है।

Solan: Under-the -de-addiction- campaign, police -will -adopt- various- government- schools-, know- the- full -news
In Education

सोलन : नशा मुक्ति अभियान के तहत पुलिस विभिन्न सरकारी स्कूलों को लेगी गोद, जानिए पूरी खबर

प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार नशे के खिलाफ कार्यवाही में स्कूली छात्रों की महत्वपूर्ण सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सोलन पुलिस के सभी अधिकारियों द्वारा एक एक स्कूल को अडॉप्ट किया गया है। वीरवार को पुलिस अधीक्षक सोलन गौरव सिंह द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, सुलतानपुर को गोद लेकर नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति जागरूकता फैलाने और छात्र छात्राओं में अकेडमिक्स , खेल कूद, एनसीसी,एनएसएस, स्वास्थ्य आदि के प्रति रुचि विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई। इस अवसर पर छात्रों और शिक्षकों के साथ वन टू वन संवाद किया गया। इस पहल के तहत, पुलिस विभाग द्वारा पाठशाला प्रबंधन से पाठशाला में नियमित रुप से जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार तथा छात्रों को खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनके व्यक्तित्व विकास पर भी बल दिया गया ।  इस अवसर पर शिक्षकों से भी अपील की गई कि वे बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें। वही संवाद में छात्रों को बिना संकोच के पुलिस विभाग के साथ अपने विचार साझा करने बारे भी प्रोतसाहित किया गया । इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी धर्मपुर व स्कूल प्रिंसिपल दया पंवार, स्कूल स्टाफ तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इसके साथ ही इस मुहिम में जिला पुलिस के अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राज कुमार द्वारा GSSS गुग्गाघाट, सहायक पुलिस अधीक्षक मेहर पंवार GSSS धर्मपुर, उप पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार  GSSS कंडाघाट, उप पुलिस अधीक्षक अशोक चौहान GSSS कुनिहार व  उप पुलिस अधीक्षक संदीप शर्मा द्वारा GSSS चंडी कषलोग विद्यालय को अडॉप्ट किया गया है ।

The weather is bad in many districts of Himachal Pradesh today, know when it will rain
In News

हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में आज मौसम ख़राब, जानिए कब से होगी बारिश

हिमाचल प्रदेश के आसमान में आज फिर से बदलाव का मौसम है। मौसम विभाग के मुताबिक, चंबा, कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू के कुछ ऊँचाई वाले इलाकों में बारिश हो सकती है। शिमला में आज सुबह से ही धूप का कमाल दिख रहा है, लेकिन ऊँचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान में हल्की गिरावट की उम्मीद है। मौसम विभाग के संभावना जताई है कि  8 अप्रैल से प्रदेश मेंवेस्टर्न डिस्टरबेंस फिर से एक्टिव होगा। इस दौरान प्रदेश के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में इस बार गर्मी सामान्य से ज्यादा पड़ेगी। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। हीट वेव के दिन भी 10 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा होंगे। मौसम विभाग ने इस बार प्रदेश में अप्रैल से जून तक प्रचंड गर्मी पड़ने की चेतावनी दी है। अप्रैल से जून तक सामान्य की अपेक्षा ज्यादा दिन तक गर्म हवाएं चलने का अनुमान है। ऐसे में गर्मी प्रचंड रूप दिखाएगी और पसीना छुड़ाएगी। बीते एक सप्ताह से मौसम साफ रहने और धूप खिलने के बावजूद न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस कम है। अधिकतम तापमान सामान्य से दो से चार डिग्री सेल्सियस अधिक है। पिछले सप्ताह से किसी भी स्थान पर तापमान मानइस में नहीं था, मंगलवार को लाहुल स्पीति के केलंग में न्यूनतम तापमान -0.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कुकुमसेरी में 2.5, मनाली में 7.5 डिग्री रहा।

Himachal: Schools from pre-nursery to 12th class will come under the Directorate of School Education, a separate directorate will be formed for college and higher education
In News

हिमाचल: स्कूल शिक्षा निदेशालय के अधीन आएंगे प्री नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के स्कूल, कॉलेज और उच्च शिक्षा के लिए बनेगा अलग निदेशालय

हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को अपग्रेड कर स्कूल शिक्षा निदेशालय बना दिया है। अब प्री नर्सरी से बारहवीं कक्षा तक के सभी स्कूल इस नए निदेशालय के अधीन आएंगे। वहीं, कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए एक अलग निदेशालय का गठन किया गया है, जिससे शिक्षा प्रणाली के प्रबंधन में अधिक दक्षता और व्यवस्था लाई जा सके। कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले के तहत सरकार ने स्कूल और कॉलेज के लिए अलग-अलग निदेशालय बनाने का निर्णय लिया है। पहले प्री नर्सरी से आठवीं कक्षा को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और नौवीं से बारहवीं कक्षा, साथ ही कॉलेज और उच्च शिक्षा को उच्च शिक्षा निदेशालय के तहत रखा गया था। अब दोनों निदेशालयों के कार्यक्षेत्र को स्पष्ट किया गया है, और इनमें आईएएस अधिकारियों को निदेशक पद पर नियुक्त किया जा सकेगा, जिससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि की उम्मीद है। वर्तमान में एचएएस अधिकारी आशीष कोहली स्कूल शिक्षा निदेशालय का कार्यभार संभाल रहे हैं, जबकि अमरजीत कुमार शर्मा उच्च शिक्षा निदेशालय के निदेशक हैं। दोनों निदेशालयों के गठन और कार्यक्षेत्र के बंटवारे के लिए शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिसमें स्कूल निदेशालय, उच्च शिक्षा निदेशालय और समग्र शिक्षा के निदेशकों के अलावा अतिरिक्त सचिव, अवर सचिव शिक्षा और समग्र शिक्षा के संयुक्त नियंत्रण लेखा सदस्य बनाए गए हैं।   

Waqf-(Amendment_Bill _2025 _passed _in _Lok_ Sabha, _may _be _discussed _in _Rajya _Sabha _today
In National News

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 लोकसभा में पास, राज्यसभा में हो सकती है आज चर्चा

  वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को आज राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया जा सकता है। लोकसभा में बुधवार को 12 घंटे से अधिक चली बहस के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला ने सभी सांसदों को विधेयक पर बोलने का अवसर दिया, जिसके बाद चर्चा पूरी होने पर वोटिंग कराई गई। इस दौरान विधेयक के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। सत्तारूढ़ एनडीए ने विधेयक के समर्थन में इसे अल्पसंख्यकों के लिए लाभकारी बताते हुए जोरदार बचाव किया, जबकि विपक्ष ने इसे 'मुस्लिम विरोधी' करार देते हुए आलोचना की। विपक्षी सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सभी संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया, और इसके बाद विधेयक पारित हो गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस के दौरान कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के लिए दुनिया में सबसे सुरक्षित कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत का बहुसंख्यक समाज पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है, और इसलिए यहां के अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं।" रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत में शरण लेने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को उत्पीड़न से बचने का ठिकाना मिलता है, जैसा कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार और श्रीलंका के अल्पसंख्यक समुदायों ने अनुभव किया। विधेयक के माध्यम से एनडीए सरकार का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यकों को एकजुट करना है, और वक्फ न्यायाधिकरणों में लंबित विवादों के शीघ्र समाधान के लिए कदम उठाना है। रिजिजू ने यह भी कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है, और इस विधेयक के जरिए इस समस्या का समाधान किया जाएगा। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विवादों के त्वरित निपटारे के लिए है, और इसका मुख्य उद्देश्य देश के सभी अल्पसंख्यक समुदायों की भलाई सुनिश्चित करना है।

Shimla: BJP will take out a candle march today in Vimal Negi death case
In News

शिमला: विमल नेगी मौत मामले में आज बीजेपी निकालेगी कैंडल मार्च

 शिमला में भारतीय जनता पार्टी चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले पर गुरुवार को सड़कों पर उतरने जा रही है। शिमला में भारतीय जनता पार्टी गुरुवार शाम कैंडल मार्च आयोजित करने जा रही है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस सरकार इस पूरे मामले हमें न्याय देने से पीछे हट रही है। विमल नेगी की मौत के मामले में भाजपा CBI जांच की मांग उठा रही है। भाजपा शिमला मंडल के अध्यक्ष राजीव पंडित ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस पूरे मामले में CBI जांच की मांग उठा रही है। विमल नेगी के परिवार को न्याय मिल सके, इसके लिए गुरुवार को कैंडल मार्च आयोजित की जा रही है। 

In Politics

15 दिन का वादा कर लौटी थी पाटिल, एक महीने में भी नहीं बना संगठन

वही पुराने दावे और वही सुस्त चाल, हिमाचल कांग्रेस को नई प्रभारी तो मिल गई, मगर कांग्रेस की व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं दिखा। ठीक एक महीने पहले हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल यह दावा कर दिल्ली लौटी थीं कि 15 दिन में संगठन का गठन कर दिया जाएगा। जब दावा किया गया था, तो कार्यकर्ताओं में उम्मीद भी जगी—उम्मीद यह कि प्रदेश प्रभारी बदलने के साथ शायद सुस्त कांग्रेस में कुछ चुस्ती दिखे और तेज़ गति से संगठन का गठन हो। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हां, ज़िला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कुछ सुगबुगाहट ज़रूर हुई, लेकिन निष्कर्ष की बात करें तो वही ढ़ाक के तीन पात। अब कांग्रेस भले ही इस विलंब का कारण विधानसभा के बजट सत्र की व्यस्तता बताए या कोई और बहाना दे, लेकिन सत्य यह है कि इसी दौरान पार्टी के कई नेता आलाकमान से मिलने दिल्ली भी पहुंचे थे। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह तो खुद सदन का हिस्सा भी नहीं हैं। तो फिर सवाल बनता है कि आखिर संगठन के गठन में ऐसी कौन-सी उलझन है, जिसे कांग्रेस अब तक सुलझा नहीं पाई? यह सवाल अब इसलिए भी बड़ा है क्योंकि करीब चार महीने बीत चुके हैं और हिमाचल में कांग्रेस बिना संगठन के है। बीती 6 नवंबर को आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस की राज्य, ज़िला और ब्लॉक इकाइयां भंग कर दी थीं, तब से अकेली पीसीसी चीफ प्रतिभा सिंह ही पद पर बनी हुई हैं। राजीव शुक्ला के रहते संगठन के गठन की प्रक्रिया शुरू हुई थी और फिर एक महीने पहले अपने दो दिन के हिमाचल दौरे में रजनी पाटिल ने कांग्रेस नेताओं के साथ बैठकें कीं। पाटिल ने नाराज़ नेताओं की शिकायतें सुनीं, वरिष्ठ नेताओं के सुझाव लिए और जल्द संगठन गठन का वादा किया। इसके बाद पीसीसी चीफ प्रतिभा सिंह ने अपनी लिस्ट आलाकमान को सौंपी, सीएम सुक्खू और डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री भी दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करने पहुंचे, लेकिन अब तक संगठन का गठन नहीं हुआ। राजनीतिक माहिर मानते हैं कि इस विलंब का कारण कुछ और नहीं, बल्कि कांग्रेस की वही आंतरिक कलह है, जिसे ढांकने की जद्दोजहद में पार्टी अक्सर लगी रहती है। दरअसल, कांग्रेस को विभिन्न गुटों के बीच संतुलन स्थापित कर नया संगठन खड़ा करना है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और होली लॉज—जाहिर है, तीनों ही गुट संगठन में अपने लोगों को एडजस्ट करना चाहते हैं। तीनों के लिए कम-ज्यादा की कोई गुंजाइश नहीं और यह वर्चस्व का सवाल भी है। लाजिमी है कि ऐसे में संतुलन बनाना आलाकमान के लिए सिरदर्द बना हुआ है। उधर, आलाकमान के इस लेट-लतीफ रवैये का खामियाजा निश्चित तौर पर पार्टी भुगत रही है। कार्यकर्ता दिशाहीन हैं और कई वरिष्ठ नेता भी इस देरी पर खुलकर आवाज़ उठा चुके हैं। इस बीच, बीते कल सीएम सुक्खू के दिल्ली पहुंचने के बाद फिर अटकलों का बाज़ार गर्म है। क्या अब संगठन गठन को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा, या यह इंतज़ार और लंबा खिंचेगा? फिलहाल, सबकी नज़रें इसी पर टिकी हैं।

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क्या सुक्खू फार्मूला पर दोबारा लौटेगा कांग्रेस का संगठन ?

In Politics
Will the Congress Organization Return to the Sukhu Formula?

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव होने की चर्चा है। चर्चा है कि एक बार फिर कांग्रेस संगठन के 'सुक्खू फार्मूला' पर लौटने जा रही है। अलबत्ता संगठन की कमान प्रतिभा सिंह के हाथ में हो, लेकिन माना जा रहा है कि संगठन का ढांचा सीएम सुक्खू की मर्जी के मुताबिक बदलने जा रहा है।  वर्तमान के शह-मात के खेल को समझना है तो बात अतीत से शुरू करनी होगी। तब सुखविंदर सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री नहीं थे, हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। उन्होंने तय किया कि बीजेपी की तर्ज पर कांग्रेस में संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाकर 17 कर देनी चाहिए। तब कांग्रेस की राजनीति में वीरभद्र सिंह का बोलबाला था, जो उस वक्त सीएम भी थे। वीरभद्र सिंह इसके खिलाफ थे, खासतौर पर कांगड़ा को चार हिस्सों में बांटने के। कांगड़ा का सबसे बड़ा चेहरा, यानी जी.एस. बाली भी वीरभद्र सिंह से इत्तेफाक रखते थे। लेकिन दिग्गजों की राय दरकिनार कर आलाकमान ने सुक्खू की सुनी और कांग्रेस में संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाकर 17 कर दी गई। कांगड़ा को चार जिले और मंडी व शिमला को दो-दो संगठनात्मक जिलों में बांट दिया गया। तब कांग्रेस के कई बड़े नेताओं को यह फैसला रास नहीं आया। नतीजतन, जब साल 2019 में कुलदीप राठौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने तो फिर संगठनात्मक जिलों और ब्लॉकों की संख्या घटा दी गई। अब वक्त ने फिर करवट ली है। सुक्खू अब प्रदेश अध्यक्ष तो नहीं, मगर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सीधे कहें तो प्रदेश कांग्रेस के सर्वेसर्वा वही दिखते हैं। ऐसे में फिर सुगबुगाहट है कि कांग्रेस संगठन के ढांचे में बदलाव होगा और एक बार फिर कांग्रेस 'सुक्खू फार्मूला' पर लौटने जा रही है। वर्तमान में, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के 13 संगठनात्मक जिले हैं, जबकि बीजेपी के 17 संगठनात्मक जिले हैं। कांग्रेस भी अब इसी तर्ज पर 17 संगठनात्मक जिले बनाना चाहती है। कांगड़ा को फिर कांगड़ा, नूरपुर, पालमपुर और देहरा जिलों में बांटा जा सकता है, जबकि मंडी में सुंदरनगर को अलग संगठनात्मक जिला बनाया जा सकता है। साथ ही, मंडलों की संख्या में भी भारी इजाफा हो सकता है। इसके पीछे मुख्य दो तर्क हैं—एक, माइक्रो मैनेजमेंट को और मजबूत करना, और दूसरा, अधिक से अधिक लोगों को पद देकर एडजस्ट करना। हालांकि इसमें सबकी सहमति नहीं दिखती। कांग्रेस के ही कुछ नेता दबे सुर में इसका विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी की नकल करना कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं होगा, क्योंकि बीजेपी कैडर बेस्ड पार्टी है, उसकी कार्यप्रणाली अलग है। कांग्रेस को जिले विभाजित कर कुछ भी नहीं मिलने वाला। बहरहाल, कोई यथास्थिति बनाए रखना चाहता है और किसी को बदलाव की दरकार है। इन दोनों के बीच कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो चाहते हैं कि जो भी हो, जल्द हो। अब क्या होगा और कब, इसका इंतजार बना हुआ है।

मोदी की स्वास्थ्य गारंटी : आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े 56.67 करोड़ लोग

In Health
guarantee: 56.67 crore people connected to Ayushman Bharat Digital Mission

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है। क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।    भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।        

सोलन : नशा मुक्ति अभियान के तहत पुलिस विभिन्न सरकारी स्कूलों को लेगी गोद, जानिए पूरी खबर

In Education
Solan: Under-the -de-addiction- campaign, police -will -adopt- various- government- schools-, know- the- full -news

प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार नशे के खिलाफ कार्यवाही में स्कूली छात्रों की महत्वपूर्ण सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सोलन पुलिस के सभी अधिकारियों द्वारा एक एक स्कूल को अडॉप्ट किया गया है। वीरवार को पुलिस अधीक्षक सोलन गौरव सिंह द्वारा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, सुलतानपुर को गोद लेकर नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के प्रति जागरूकता फैलाने और छात्र छात्राओं में अकेडमिक्स , खेल कूद, एनसीसी,एनएसएस, स्वास्थ्य आदि के प्रति रुचि विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई। इस अवसर पर छात्रों और शिक्षकों के साथ वन टू वन संवाद किया गया। इस पहल के तहत, पुलिस विभाग द्वारा पाठशाला प्रबंधन से पाठशाला में नियमित रुप से जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार तथा छात्रों को खेल और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उनके व्यक्तित्व विकास पर भी बल दिया गया ।  इस अवसर पर शिक्षकों से भी अपील की गई कि वे बच्चों के व्यवहार पर नजर रखें। वही संवाद में छात्रों को बिना संकोच के पुलिस विभाग के साथ अपने विचार साझा करने बारे भी प्रोतसाहित किया गया । इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी धर्मपुर व स्कूल प्रिंसिपल दया पंवार, स्कूल स्टाफ तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इसके साथ ही इस मुहिम में जिला पुलिस के अधिकारियों द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राज कुमार द्वारा GSSS गुग्गाघाट, सहायक पुलिस अधीक्षक मेहर पंवार GSSS धर्मपुर, उप पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार  GSSS कंडाघाट, उप पुलिस अधीक्षक अशोक चौहान GSSS कुनिहार व  उप पुलिस अधीक्षक संदीप शर्मा द्वारा GSSS चंडी कषलोग विद्यालय को अडॉप्ट किया गया है ।

धर्मशाला को मिली 3 IPL मैचों की मेजबानी

In Sports
DHRAMSHALA-TO-HOST-THREE-IPL-MATCHES-IN-2025

 बीसीसीआई द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग के 18वें सीजन आईपीएल-2025 के शैड्यूल का ऐलान कर दिया गया है।  एचपीसीए स्टेडियम धर्मशाला को 3 आईपीएल मैचों की मेजबानी करने का मौका मिला है।  धर्मशाला स्टेडियम में 4 मई को  पंजाब किंग्स की टीम लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ अपना लीग मैच खेलेगी, जबकि 8 मई को पंजाब का मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स के साथ होगा। ये दोनों ही मुकाबले शाम साढ़े 7 बजे शुरू होंगे। वहीं 11 मई को दोपहर साढ़े 3 बजे पंजाब की टीम मुंबई इंडियंस के खिलाफ स्टेडियम में उतरेगी। आईपीएल  चेयरमैन अरुण धूमल ने बीते दिनों बिलासपुर में आयोजित सांसद खेल महाकुंभ के शुभारंभ पर ही धर्मशाला स्टेडियम को आईपीएल के 3 मैचों की मेजबानी के संकेत दे दिए थे। अब इस पर आधिकारिक मुहर लग चुकी है। आईपीएल 2024 में धर्मशाला को मिले थे दो मैच वर्ष 2024 में धर्मशाला में पंजाब किंग्स की टीम के दो मैच चेन्नई सुपर किंग्स और रायल चैलेंजर बेंगलुरु से हुए थे। पहला मुकाबला पांच मई को भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स के साथ हुआ था। नौ मई को पंजाब का मुकाबला आरसीबी के साथ खेला गया था।

स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक, नीम करोली बाबा के आश्रम में सब नतमस्तक

In First Blessing
NEEM-KARORI-BABA

  नीम करोली बाबा के आश्रम में स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग को मिली आध्यात्मिक शान्ति भारत में कई ऐसे पावन तीर्थ हैं, जहां पर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ जाने मात्र से व्यक्ति के समस्त मनोरथ पूरे हो जाते हैं। ऐसा ही एक पावन तीर्थ देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में है, जिसे लोग 'कैंची धाम' के नाम से जानते हैं। कैंची धाम के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है। नैनीताल से लगभग 65 किलोमीटर दूर कैंची धाम को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला व्यक्ति कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता। यहां पर हर मन्नत पूर्णतया फलदायी होती है। यही कारण है कि देश-विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा के भक्तों में एक आम आदमी से लेकर अरबपति-खरबपति तक शामिल हैं। बाबा के इस पावन धाम में होने वाले नित-नये चमत्कारों को सुनकर दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के भक्त और जाने-माने लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में बाबा नीब करौरी के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है। इनके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी बड़ी विदेशी हस्तियां बाबा के भक्त हैं।  कुछ माह पूर्व स्टार क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के यहां पहुंचते ही इस धाम को देखने और बाबा के दर्शन करने वालों की होड़ सी लग गई। 1964 में बाबा ने की थी आश्रम की स्थापना  नीम करोली बाबा या नीब करोली बाबा की गणना बीसवीं शताब्दी के सबसे महान संतों में की जाती है। इनका जन्म स्थान ग्राम अकबरपुर जिला फ़िरोज़ाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ था। कैंची, नैनीताल, भुवाली से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी। बाबा नीम करौरी 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया। इस धाम को कैंची मंदिर, नीम करौली धाम और नीम करौली आश्रम के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी में बसा एक छोटा सा आश्रम है नीम करोली बाबा आश्रम। मंदिर के आंगन और चारों ओर से साफ सुथरे कमरों में रसीली हरियाली के साथ, आश्रम एक शांत और एकांत विश्राम के लिए एकदम सही जगह प्रस्तुत करता है। यहाँ कोई टेलीफोन लाइनें नहीं हैं, इसलिए किसी को बाहरी दुनिया से परेशान नहीं किया जा सकता है। श्री हनुमान जी के अवतार माने जाने वाले नीम करोरी बाबा के इस पावन धाम पर पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन हर साल 15 जून को यहां पर एक विशाल मेले व भंडारे का आयोजन होता है। यहां इस दिन इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। कई चमत्कारों के किस्से सुन खींचे आते है भक्त  मान्यता है कि बाबा नीम करौरी को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। हालांकि वह आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे। बाबा नीब करौरी के इस पावन धाम को लेकर तमाम तरह के चमत्कार जुड़े हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार भंडारे के दौरान कैंची धाम में घी की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो वह जल घी में बदल गया। ऐसे ही एक बार बाबा नीब करौरी महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए उसे बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुंचवाया। ऐसे न जाने कितने किस्से बाबा और उनके पावन धाम से जुड़े हुए हैं, जिन्हें सुनकर लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के दुनियाभर में 108 आश्रम  बाबा नीब करौरी को कैंची धाम बहुत प्रिय था। अक्सर गर्मियों में वे यहीं आकर रहते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। उस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं। यहां बाबा नीब करौरी की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। बाबा नीब करौरी महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम तथा अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है। स्टीव जॉब्स को आश्रम से मिला एप्पल के लोगो का आईडिया ! भारत की धरती सदा से ही अध्यात्म के खोजियों को अपनी ओर खींचती रही है। दुनिया की कई बड़ी हस्तियों में भारत भूमि पर ही अपना सच्चा आध्यात्मिक गुरु पाया है। एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 से 1976 के बीच भारत भ्रमण पर निकले। वह पर्यटन के मकसद से भारत नहीं आए थे, बल्कि आध्यात्मिक खोज में यहां आए थे। उन्हें एक सच्चे गुरु की तलाश थी।स्टीव पहले हरिद्वार पहुंचे और इसके बाद वह कैंची धाम तक पहुंच गए। यहां पहुंचकर उन्हें पता लगा कि बाबा समाधि ले चुके हैं। कहते है कि स्टीव को एप्पल के लोगो का आइडिया बाबा के आश्रम से ही मिला था। नीम करौली बाबा को कथित तौर पर सेब बहुत पसंद थे और यही वजह थी कि स्टीव ने अपनी कंपनी के लोगों के लिए कटे हुए एप्पल को चुना। हालांकि इस कहानी की सत्यता के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। जुकरबर्ग को मिली आध्यात्मिक शांति, शीर्ष पर पहुंचा फेसबुक  बाबा से जुड़ा एक किस्सा फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने 27 सितंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताया था, तब पीएम मोदी फेसबुक के मुख्यालय में गए थे। इस दौरान जुकरबर्ग ने पीएम को भारत भ्रमण की बात बताई। उन्होंने कहा कि जब वे इस संशय में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत में नीम करोली बाबा के स्थान पर  जाने की सलाह दी थी। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान वह नीम करोली बाबा के मंदिर में भी गए थे। जुकरबर्ग आए तो यहां एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहां दो दिन रुके थे। जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली। बाबा की तस्वीर को देख जूलिया ने अपनाया हिन्दू धर्म  हॉलिवुड की मशहूर अदाकारा जूलिया रॉबर्ट्स ने 2009 में हिंदू धर्म अपना लिया था। वह फिल्म ‘ईट, प्रे, लव’ की शूटिंग के लिए भारत आईं थीं। जूलिया रॉबर्ट्स ने एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया था कि वह नीम करौली बाबा की तस्वीर से इतना प्रभावित हुई थीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म अपनाने का फैसला कर डाला। जूलिया इन दिनों हिन्दू धर्म का पालन कर रही हैं।    

मूवी RRR के नाटू-नाटू सॉन्ग ने जीता ऑस्कर अवॉर्ड

In Entertainment
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एसएस राजामौली की चर्चित मूवी ररर के नाटू-नाटू गाने को ऑस्कर अवॉर्ड मिला है। भारत के लिए ये ऐतिहासिक पल है। फिल्ममेकर नाटू नाटू ने ओरिजनल सॉन्ग कैटेगिरी में अवॉर्ड जीता है। एमएम कीरावणी अवॉर्ड लेते हुए बेहद एक्साइटेड नजर आए। उनकी स्पीच भी चर्चा में बनी हुई है। इस जीत के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल है। मेकर्स ने RRR मूवी के ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर जीत की खुशी जताई है। उन्होंने लिखा- 'हम धन्य हैं कि आरआरआर सॉन्ग नाटू-नाटू के साथ बेस्ट सॉन्ग कैटेगरी में भारत का पहला ऑस्कर लाने वाली पहली फीचर फिल्म है। कोई भी शब्द इस अलौकिक पल को बयां नहीं कर सकते। धन्यवाद। जय हिंद। 'वहीं 'नाटू नाटू' के ऑस्कर जीतने पर फिल्म के लीड एक्टर जूनियर एनटीआर ने भी रिएक्ट किया है। उन्होंने कहा- 'मेरे पास अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। ये सिर्फ आरआरआर की जीत नहीं है बल्कि एक देश के तौर पर भारत की जीत है। ये तो अभी शुरुआत है कि भारतीय सिनेमा कितनी दूर जा सकता है। एमएम कीरावनी और चंद्रबोस को बधाई।'

हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में आज मौसम ख़राब, जानिए कब से होगी बारिश

In News
The weather is bad in many districts of Himachal Pradesh today, know when it will rain

हिमाचल प्रदेश के आसमान में आज फिर से बदलाव का मौसम है। मौसम विभाग के मुताबिक, चंबा, कांगड़ा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू के कुछ ऊँचाई वाले इलाकों में बारिश हो सकती है। शिमला में आज सुबह से ही धूप का कमाल दिख रहा है, लेकिन ऊँचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान में हल्की गिरावट की उम्मीद है। मौसम विभाग के संभावना जताई है कि  8 अप्रैल से प्रदेश मेंवेस्टर्न डिस्टरबेंस फिर से एक्टिव होगा। इस दौरान प्रदेश के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में इस बार गर्मी सामान्य से ज्यादा पड़ेगी। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। हीट वेव के दिन भी 10 से 20 प्रतिशत तक ज्यादा होंगे। मौसम विभाग ने इस बार प्रदेश में अप्रैल से जून तक प्रचंड गर्मी पड़ने की चेतावनी दी है। अप्रैल से जून तक सामान्य की अपेक्षा ज्यादा दिन तक गर्म हवाएं चलने का अनुमान है। ऐसे में गर्मी प्रचंड रूप दिखाएगी और पसीना छुड़ाएगी। बीते एक सप्ताह से मौसम साफ रहने और धूप खिलने के बावजूद न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस कम है। अधिकतम तापमान सामान्य से दो से चार डिग्री सेल्सियस अधिक है। पिछले सप्ताह से किसी भी स्थान पर तापमान मानइस में नहीं था, मंगलवार को लाहुल स्पीति के केलंग में न्यूनतम तापमान -0.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कुकुमसेरी में 2.5, मनाली में 7.5 डिग्री रहा।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 लोकसभा में पास, राज्यसभा में हो सकती है आज चर्चा

In National News
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  वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को आज राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया जा सकता है। लोकसभा में बुधवार को 12 घंटे से अधिक चली बहस के बाद इस विधेयक को पारित कर दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला ने सभी सांसदों को विधेयक पर बोलने का अवसर दिया, जिसके बाद चर्चा पूरी होने पर वोटिंग कराई गई। इस दौरान विधेयक के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। सत्तारूढ़ एनडीए ने विधेयक के समर्थन में इसे अल्पसंख्यकों के लिए लाभकारी बताते हुए जोरदार बचाव किया, जबकि विपक्ष ने इसे 'मुस्लिम विरोधी' करार देते हुए आलोचना की। विपक्षी सदस्यों द्वारा प्रस्तुत सभी संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया, और इसके बाद विधेयक पारित हो गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस के दौरान कहा कि भारत में अल्पसंख्यकों के लिए दुनिया में सबसे सुरक्षित कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत का बहुसंख्यक समाज पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है, और इसलिए यहां के अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं।" रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत में शरण लेने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को उत्पीड़न से बचने का ठिकाना मिलता है, जैसा कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार और श्रीलंका के अल्पसंख्यक समुदायों ने अनुभव किया। विधेयक के माध्यम से एनडीए सरकार का उद्देश्य सभी अल्पसंख्यकों को एकजुट करना है, और वक्फ न्यायाधिकरणों में लंबित विवादों के शीघ्र समाधान के लिए कदम उठाना है। रिजिजू ने यह भी कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है, और इस विधेयक के जरिए इस समस्या का समाधान किया जाएगा। सरकार ने यह स्पष्ट किया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विवादों के त्वरित निपटारे के लिए है, और इसका मुख्य उद्देश्य देश के सभी अल्पसंख्यक समुदायों की भलाई सुनिश्चित करना है।

टेलर स्विफ्ट का Swift-Effect....... वो मॉडर्न पॉप सेंसेशन जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में फूंक देती हैं जान

In International News
taylor swift swiftnomics

टेलर स्विफ्ट कई देशों को मंदी के दौर से उबार रही हैं... यह सुनने में काफी अजीब लग रहा है... मगर बिल्कुल सच है। दरअसल, टेलर स्विफ्ट की लोकप्रियता का आलम यह है कि वह जिस भी शहर या देश में परफॉर्म करती हैं, वहां की जीडीपी को एकदम से बूस्ट कर देती हैं। यह कहानी शुरू हुई दक्षिण-पूर्व एशिया के छोटे से देश सिंगापुर से, जिसे 2023 में मंदी का खतरा नजर आने लगा था। यह वह समय था जब टेलर स्विफ्ट अपने वर्ल्ड टूर की योजना बना रही थीं। जब सिंगापुर की सरकार को पता चला कि टेलर स्विफ्ट कॉन्सर्ट के लिए एशिया के किसी ऐसे देश की तलाश कर रही हैं, तो सिंगापुर के प्रधानमंत्री ने टेलर स्विफ्ट के साथ छह शो को लेकर एक एग्रीमेंट साइन किया। इस एग्रीमेंट के तहत सिंगापुर में एक शो के बदले स्विफ्ट को लाखों डॉलर दिए गए, लेकिन साथ ही शर्त रखी गई कि वह अपने Eras Tour को सिंगापुर के अलावा किसी अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देश में लेकर नहीं जाएंगी। स्विफ्ट मान गईं। सिंगापुर में टेलर स्विफ्ट के छह शो ने कमाल कर दिया और हिचकोले खा रही सिंगापुर की अर्थव्यवस्था को इससे 375 मिलियन डॉलर (37.5 करोड़ डॉलर) का सीधा फायदा हुआ। कैसे? वह भी समझते हैं। कई सालों से मंदी की आशंका से घिरे देश में लोग कंजूस बन बैठे थे। बाजार वीरान पड़े थे, लोग खरीदारी करने से परहेज कर रहे थे। लेकिन जैसे ही टेलर स्विफ्ट के कॉन्सर्ट की खबर सार्वजनिक हुई, लोग टिकट खरीदने के लिए उमड़ पड़े। आसपास के देशों से पर्यटक सिंगापुर पहुंचने लगे। होटलों की बुकिंग में तेजी से इजाफा हुआ। तीन लाख से ज्यादा लोग इस कॉन्सर्ट में शामिल हुए थे। अकेले मार्च 2024 में सिंगापुर में 14 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे थे। फूड और ड्रिंक्स पर खर्च 30% बढ़ गया। होटलों के किराए में 10% तक की वृद्धि हुई थी। टेलर स्विफ्ट का The Eras Tour अब तक पांच महाद्वीपों की यात्रा कर चुका है और टेलर अलग-अलग देशों में 149 शो कर चुकी हैं। स्विफ्ट की इसी लोकप्रियता को दुनियाभर में Swift-Effect और Swiftonomics का नाम दिया गया है। इसे कॉन्सर्ट इकोनॉमी भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में 'कॉन्सर्ट इकोनॉमी' का जिक्र किया था। उन्होंने यह जिक्र भारत में कोल्डप्ले बैंड के कॉन्सर्ट की शानदार सफलता के बाद किया था और कॉन्सर्ट इकोनॉमी में जबरदस्त संभावनाओं पर जोर दिया था। यह कॉन्सर्ट इकोनॉमी भारत की जीडीपी के लिए भी बूस्टर का काम कर सकती है। उदाहरण के तौर पर, भारतीय कलाकार दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट्स से भी इकोनॉमी को बढ़ावा मिला है। इसी तरह, यह छोटे राज्यों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य में भी इस तरह के कॉन्सर्ट्स आयोजित किए जाएं, तो यहां भी पर्यटन और अर्थव्यवस्था दोनों का विकास होगा।

शायरी के बादशाह कहलाते है वसीम बरेलवी, पढ़े उनके कुछ चुनिंदा शेर

In Kavya Rath
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  वसीम बरेलवी उर्दू के बेहद लोकप्रिय शायर हैं। उनकी ग़ज़लें बेहद मक़बूल हैं जिन्हें जगजीत सिंह से लेकर कई अजीज़ गायकों ने अपनी आवाज़ दी है। वसीम बरेलवी अपनी शायरी और गजल के जरिए लाखों दिलों पर राज करते हैं। कोई भी मुशायरा उनके बगैर पूरा नहीं माना जाता।     18 फरवरी 1940 को वसीम बरेलवी का जन्म बरेली में हुआ था।  पिता जनाब शाहिद हसन  के रईस अमरोहवी और जिगर मुरादाबादी से बहुत अच्छे संबंध थे। दोनों का आना-जाना अक्सर उनके घर पर होता रहता था। इसी के चलते वसीम बरेलवी का झुकाव बचपन से शेर-ओ-शायरी की ओर हो गया। वसीम बरेलवी ने अपनी पढ़ाई बरेली के ही बरेली कॉलेज से की। उन्होंने एमए उर्दू में गोल्ड मेडल हासिल किया। बाद में इसी कॉलेज में वो उर्दू विभाग के अध्यक्ष भी बने।  60 के दशक में वसीम बरेलवी मुशायरों में जाने लगे। आहिस्ता आहिस्ता ये शौक उनका जुनून बन गया। पेश हैं उनके कुछ चुनिंदा शेर   अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे   जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता     आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है   ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं तेरा होना भी नहीं और तेरा कहलाना भी   ग़म और होता सुन के गर आते न वो 'वसीम' अच्छा है मेरे हाल की उन को ख़बर नहीं   जहाँ रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा किसी चराग़ का अपना मकाँ नहीं होता     जो मुझ में तुझ में चला आ रहा है बरसों से कहीं हयात इसी फ़ासले का नाम न हो     कुछ है कि जो घर दे नहीं पाता है किसी को वर्ना कोई ऐसे तो सफ़र में नहीं रहता                         उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए       दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता     वो मेरे सामने ही गया और मैं रास्ते की तरह देखता रह गया   अपने अंदाज़ का अकेला था इसलिए मैं बड़ा अकेला था  

पोस्ट कोड 928 के अंतर्गत स्टेनो टाइपिस्ट भर्ती का परिणाम घोषित

In Job
 Result -of -Steno -Typist- Recruitment -declared -under- post -code -928

हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने पोस्ट कोड 928 के तहत स्टेनो टाइपिस्ट के 66 पदों की भर्ती के लिए अन्तिम परीक्षा परिणाम आज घोषित कर दिया है। प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों, बोर्डां और निगमों ने इन पदों को भरने के लिए सिफारिश की थी जिसके लिए 1 दिसंबर, 2021 को विज्ञापन जारी किया गया था। इनमें सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) के 16 पद, सामान्य श्रेणी (आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग) के सात पद, सामान्य श्रेणी (स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित) का एक पद, सामान्य श्रेणी (पूर्व सैनिकों के आश्रित) के आठ पद, अन्य पिछड़ा वर्ग (अनारक्षित) के 11 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग (बीपीएल) के पद, अन्य पिछड़ा वर्ग (पूर्व सैनिकों के आश्रित) के दो पद, अनुसूचित जाति (अनारक्षित) के 11 पद, अनुसूचित जाति (पूर्व सैनिकों के आश्रित) के तीन पद, अनुसूचित जनजाति (बीपीएल) का एक पद और अनुसूचित जनजाति (पूर्व सैनिकों के आश्रित) का एक पद शामिल हैं। पोस्ट कोड 928 के तहत स्टेनो टाइपिस्ट के 66 पदों में से 15 पद सक्षम उम्मीदवार न मिलने के कारण रिक्त रखे गए हैं। लिए विज्ञप्ति परीक्षा परिणाम हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की अधिकारिक वेबसाइट www.hprca.hp.gov.in  पर भी उपलब्ध है।

शिमला:जवाहर बाल मंच के स्टेट चीफ कॉडिनेटर बने महेश सिंह ठाकुर

In Banka Himachal
शिमला:जवाहर बाल मंच के स्टेट चीफ कॉडिनेटर बने महेश सिंह ठाकुर

हिमाचल प्रदेश यूथ कांग्रेस के महासचिव एवं सिस्को संस्था के अध्यक्ष महेश सिंह ठाकुर को जवाहर बाल मंच का राज्य मुख्य संयोजक नियुक्त किया गया है। चीफ स्टेट कॉडिनेटर बनाए जाने पर महेश सिंह ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष  मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी,प्रदेश के सीएम सुखविन्दर सिंह सूक्खु , राष्ट्रीय प्रभारी केसी वेणुगोपाल,जवाहर बाल मंच के राष्टीय अध्यक्ष जी.वी. हरि. सहित अन्य नेताओं के प्रति आभार जताया है।  महेश ठाकुर ने कहा कि जवाहर बाल मंच का मुख्य उद्देश्य 7 वर्षों से लेकर 17 वर्ष के आयु के लड़के लड़कियां तक भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचार को पहुंचना।  उन्होंने कहा कि जिस तरीके से मौजूदा सरकार के द्वारा देश के इतिहास के साथ छेड़छाड़ हो रहा है देश के युवाओं को भटकाया जा रहा है जो की देश के लिए एक बहुत बड़ा चिन्ता का विषय है कांग्रेस पार्टी ने इस विषय को गंभीरता से लिया और राहुल गांधी के निर्देश पर डॉ जीवी हरी के अध्यक्षता में देशभर में जवाहर बाल मंच के द्वारा युवाओं के बीच में नेहरू जी के विचारों को पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा वर्ष 2024 के चुनाव में कांग्रेस भारी बहुमत हासिल कर केंद्र से भाजपा को हटाने का काम करेगी। इसमें हिमाचल प्रदेश राज्य की भी प्रमुख भुमिका रहेगी।  उन्होंने कहा कि पूरे देश में महंगाई के कारण आमलोगों का जीना मुश्किल हो गया है। गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार पर इस महंगाई का व्यापक असर पड़ रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।  

पिता सरकार में मंत्री, पुत्र खफा -खफा ...अब आगे क्या ?

In Siyasatnama
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मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा के बीच चौधरी चंद्र कुमार भी दिखा चुके है पार्टी को आईना ! नीरज भारती की लम्बे वक्त बाद टूटी चुप्पी, अपनी ही सरकार से खफा ! काफी वक्त चुप्पी  साधने के बाद बीते दिनों पूर्व सीपीएस नीरज भारती फिर बोले है और अपनी ही सरकार के खिलाफ बोले है। उसी सरकार के खिलाफ जिसमें उनके पिता चौधरी खुद मंत्री है। हालाँकि माहिर मान रहे है कि असल खबर ये नहीं है कि नीरज फिर बोले, या कितना और क्या-क्या बोले है । खबर दरअसल ये है कि उनसे पहले चौधरी चंद्र कुमार खुद बोले और अब उनके बेटे नीरज बोल रहे है। अब जब पिता-पुत्र दोनों कांग्रेस के हालातों पर टिपण्णी कर रहे है, तो ज़ाहिर है की इसके सियासी मायने भी गहरे हैं।   देखा जाए तो मंत्री चौधरी चंद्र कुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है, उन्होंने पूरी जिंदगी कांग्रेस में खपाई है और बीते दिनों पार्टी की स्थिति को लेकर छलका उनका दर्द भी समझा जा सकता है। वहीँ उनके पुत्र भी अपनी ही पार्टी की सरकार से खफा है। एक मलाल ये है कि अपनी ही सरकार में कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे और दूसरा ये की मंत्री की बिना कंसेंट के उनके ही क्षेत्र में तबादले हो रहे है। वैसे इन दोनों ने जो भी कहा है वो निसंदेह कांग्रेस की वास्विकता है, पर वास्विकता तो ये भी है कि आईना दिखाने वाले कांग्रेस को रास कम ही आते है।     बहरहाल मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा के बीच पिता -पुत्र की ये नसीहत और नाराजगी क्या रंग लाएगी, ये देखना रोचक होगा। खासतौर से सरकार के दो मंत्री अस्सी पार है जिनमें से एक चंद्र कुमार भी है। हालांकि चौधरी चंद्र कुमार कांग्रेस का सबसे बड़ा ओबीसी चेहरा है, पर ये नए दौर की सियासत है, न जाने कब, क्या हो जाए।

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