शिमला। हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रभारी श्रीकांत शर्मा 19 अक्टूबर से प्रदेश के नौ दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वह पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे और संगठन की जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। उनके दौरे में जनजातीय क्षेत्रों किन्नौर, लाहौल-स्पीति और पांगी पर विशेष फोकस रहने की बात कही गई है। भाजपा प्रदेश में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में श्रीकांत शर्मा का यह दौरा पार्टी के संगठनात्मक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान श्रीकांत शर्मा पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर संगठन की गतिविधियों, स्थानीय मुद्दों और जनता से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे। इस संवाद के जरिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सुझावों को समझने पर जोर रहेगा। किन्नौर, लाहौल-स्पीति और पांगी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करना दौरे का अहम हिस्सा होगा। इन इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियों और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंच की चुनौतियों को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। 2027 के चुनावों की तैयारी भाजपा ने हिमाचल प्रदेश की सभी 68 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। पार्टी नेतृत्व बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं से नियमित संपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है। श्रीकांत शर्मा को सितंबर 2026 में दोबारा हिमाचल भाजपा का प्रभारी बनाया गया था। उनके साथ राज्यसभा सांसद दर्शना सिंह को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नौ दिवसीय दौरे के दौरान होने वाली बैठकों और संवाद से प्रदेश में भाजपा की आगामी संगठनात्मक रणनीति को दिशा मिलने की उम्मीद है।
रामपुर बुशहर। हिमाचल प्रदेश के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे-5 पर ब्रौनी खड्ड के पास 305 मीटर लंबा थ्री-लेन पुल बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना पर करीब 127.66 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पुल बनने से बरसात के दौरान बार-बार बाधित होने वाले सड़क मार्ग की समस्या का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा है। परियोजना को एनएचएआई की वार्षिक योजना में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और बजट का प्रावधान जरूरी है। ब्रौनी खड्ड के आसपास हर साल बरसात के दौरान भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण यातायात प्रभावित होता है। कई बार सड़क बंद होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस क्षेत्र को भू-वैज्ञानिक दृष्टि से भी असुरक्षित माना गया है। समस्या के समाधान के लिए पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे में नए पुल के निर्माण को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है I प्रस्तावित पुल बनने से नेशनल हाईवे की दूरी करीब 700 मीटर कम हो जाएगी। इससे किन्नौर, शिमला जिले और लाहौल-स्पीति के काजा क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा पर्यटकों, किसानों और बागवानों को भी राहत मिलेगी। नेशनल हाईवे-5 सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है। पुल बनने से भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों की आवाजाही को भी सुविधा मिल सकती है। एनएचएआई रामपुर के सहायक अभियंता प्रदीप कौशल के अनुसार, पुल निर्माण की योजना वार्षिक योजना में शामिल है। केंद्रीय स्तर से अंतिम मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में कैबिनेट रैंक प्राप्त विधायक रघुवीर सिंह बाली का विक्रमादित्य सिंह को लेकर बयान चर्चा में है। बाली ने विक्रमादित्य को अपना छोटा भाई बताते हुए उनके साथ खड़े रहने को अपना फर्ज बताया है। रघुवीर सिंह बाली कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं। उन्हें जनवरी 2023 में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड का उपाध्यक्ष और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के निदेशक मंडल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस नियुक्ति के साथ उन्हें कैबिनेट रैंक दिया गया था। विक्रमादित्य से रिश्तों पर पहले भी हुई है चर्चा लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और रघुवीर सिंह बाली के संबंध पहले भी चर्चा में रहे हैं। मई 2023 में अमर उजाला को दिए एक साक्षात्कार में विक्रमादित्य सिंह ने रघुवीर बाली को अपना बड़ा भाई और सम्मानित नेता बताया था। अब बाली के बयान में विक्रमादित्य को छोटा भाई बताने और उनके साथ खड़े रहने की बात सामने आई है। इस बयान को दोनों नेताओं के आपसी संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। कांग्रेस की राजनीति में दोनों नेताओं की भूमिका रघुवीर सिंह बाली पूर्व मंत्री जीएस बाली के बेटे हैं, जबकि विक्रमादित्य सिंह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे हैं। दोनों कांग्रेस की हिमाचल प्रदेश इकाई के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने कहा है कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई पुलिस अकेले नहीं जीत सकती। प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए हर घर, स्कूल, अभिभावक और शिक्षक की भागीदारी जरूरी है। डीजीपी अशोक तिवारी ने शनिवार को शिमला के चेल्सी स्थित कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल के वार्षिक समारोह में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने सभी से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चल रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। डीजीपी ने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने की शुरुआत घर और स्कूल से होनी चाहिए। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करना, उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना और समय रहते जरूरी कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ समय बिताने, उनकी समस्याओं को समझने और ऐसा माहौल बनाने की अपील की, जिसमें बच्चे बिना किसी झिझक के अपनी परेशानियां साझा कर सकें। अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों से नकारात्मक दबाव से दूर रहने और सही फैसले लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि असफलताओं को अपने भविष्य पर हावी न होने दें और जीवन में साहस, संवेदनशीलता तथा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ केवल नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने की सामूहिक मुहिम है इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पुलिस की ओर से आपातकालीन सेवा ईआरएसएस-112 के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए स्कूल परिसर में स्टॉल भी लगाया गया। विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपात स्थिति में हेल्पलाइन के इस्तेमाल तथा उपलब्ध सहायता सुविधाओं की जानकारी दी गई। डीजीपी ने संदेश दिया कि चिट्टे के खिलाफ लड़ाई में पुलिस अपनी कार्रवाई जारी रखेगी, लेकिन इस मुहिम को सफल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग जरूरी है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने रेजिडेंट डॉक्टर्स नीति-2025 में संशोधन करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले डॉक्टरों को भर्ती प्रक्रिया में छूट दी है। अब इन डॉक्टरों को कुछ निर्धारित पदों पर नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू नहीं देना होगा। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इन डॉक्टरों की नियुक्ति एमबीबीएस और पोस्ट ग्रेजुएशन में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर की जाएगी। इसके तहत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, ट्यूटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरा जाएगा। डॉक्टरों की कमी दूर करने का प्रयास प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देश पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने नीति में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से योग्य डॉक्टरों की नियुक्ति का रास्ता आसान होगा और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी जोर हिमाचल सरकार मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने पर भी काम कर रही है। अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी और थ्री टेस्ला एमआरआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। वहीं, पेट स्कैन मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। सरकार का लक्ष्य डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना है।
नशे के खिलाफ जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘चिट्टा मुक्त नूरपुर, नशा मुक्त नूरपुर’ अभियान ने भड़वार पंचायत के साथ अपनी 19वीं पंचायत का पड़ाव पूरा किया। आइडिया ऑफ भारत फाउंडेशन के 60 दिवसीय अभियान के अंतर्गत गांव और बाजार में स्थानीय लोगों से मुलाकात कर नशे के विरुद्ध जागरूकता का संदेश दिया गया। अभियान के दौरान लोगों से सीधे संवाद करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि नशे की समस्या से निपटने के लिए समाज को केवल चिंता व्यक्त करने तक सीमित न रहकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। परिवारों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के सहयोग से ही युवाओं के लिए सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है। इस अवसर पर ग्राम पंचायत प्रधान पिंकी शर्मा और उपप्रधान जनक राज ने सहभागिता निभाई।आइडिया ऑफ भारत फाउंडेशन के अध्यक्ष राहुल शर्मा ने कहा कि अभियान का प्रत्येक पड़ाव समाज के साथ जुड़ने और नशे के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का अवसर है। गांवों से लेकर बाजारों तक लोगों से संपर्क करने का उद्देश्य इस विषय पर खुलकर संवाद को प्रोत्साहित करना और समाज को समाधान की दिशा में एकजुट करना है।उन्होंने कहा कि नशामुक्त नूरपुर का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हर नागरिक इस मुहिम को अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे बढ़ेगा।19 पंचायतों तक पहुँचा जागरूकता का संदेश—अब हर घर और हर युवा तक पहुँचने का संकल्प।
शिमला। जिला शिमला में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ठियोग पुलिस ने छैला क्षेत्र में एक युवक को चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 9 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, 16 अक्टूबर को ठियोग पुलिस की टीम ने छैला क्षेत्र में संदेह के आधार पर एक युवक को रोका। स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में उसकी तलाशी ली गई। इस दौरान युवक के कब्जे से करीब 9 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। आरोपी की पहचान निक्षित चौहान पुत्र विजय चौहान, निवासी तहसील कोटखाई, जिला शिमला के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। मामले की जांच जारी है। शिमला पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। नशा तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन की गेहूं बिजाई की तैयारियों के बीच किसानों के लिए अहम खबर है। प्रदेश सरकार ने गेहूं के बीज पर सब्सिडी की दर तय कर दी है। इस बार किसानों को गेहूं का बीज पिछले साल के मुकाबले 3 रुपये महंगा मिलेगा। सरकार के नए निर्णय के अनुसार किसानों को सब्सिडी वाला गेहूं बीज 33 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जाएगा। पिछले साल यही बीज किसानों को 30 रुपये प्रति किलो मिला था। दरअसल, दो दिन पहले गेहूं के बीज की कीमत 41.50 रुपये प्रति किलो तय की गई थी, लेकिन सब्सिडी की दर तय न होने के कारण किसानों को बीज वितरण शुरू नहीं हो पाया था। अब सरकार ने सब्सिडी तय कर दी है और सभी जिलों में गेहूं के बीज की खेप भेजी जा रही है। कुल्लू जिले में 450 क्विंटल गेहूं का बीज पहुंच चुका है, जबकि आने वाले दो-तीन दिनों में करीब 600 क्विंटल और बीज पहुंचने की उम्मीद है। यहां किसानों को एचडी-3226 किस्म का बीज उपलब्ध करवाया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान रबी सीजन में गेहूं की खेती करते हैं। ऐसे में सब्सिडी की दर तय होने से किसानों को अब समय पर बीज मिलने और बिजाई शुरू करने में राहत मिलेगी।
मिलेट्स के नाम पर ‘अनहेल्दी’ फूड! IGMC शोध में चौंकाने वाला खुलासा शिमला के आईजीएमसी के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के शोध में मिलेट्स से तैयार किए जा रहे रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों को लेकर अहम खुलासा हुआ है। शोध के अनुसार बाजार में मिलेट्स के नाम पर बिक रहे कुरकुरे, चिप्स, बिस्कुट, नूडल्स और सूप को कई प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है, जिससे इनमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व कम हो सकते हैं। शोध के मुताबिक मिलेट्स को अल्ट्रा-प्रोसेस करने के दौरान पॉलिशिंग, अधिक तापमान और मशीनरी प्रक्रिया के साथ कई उत्पादों में पाम ऑयल और आर्टिफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे प्राकृतिक फाइबर, मिनरल्स, विटामिन और अन्य माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की मात्रा घट सकती है। शोध में यह भी बताया गया है कि मोटे अनाज से आटा तैयार करते समय अगर उसकी बाहरी परत, चोकर और अंकुर हटा दिए जाएं तो प्राकृतिक फाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्वों का नुकसान होता है। ऐसे में सिर्फ ‘मिलेट्स’ नाम देखकर पैकेटबंद या अत्यधिक प्रोसेस्ड उत्पादों को हेल्दी मानना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजरा, रागी, ज्वार, कंगनी और अन्य मोटे अनाज को प्राकृतिक रूप में या कम से कम प्रोसेसिंग के साथ खाना ज्यादा बेहतर विकल्प है। आईजीएमसी के डॉ. अमित सचदेवा ने भी बाजार में मिलेट्स के नाम पर बिक रहे महंगे और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पादों से सावधानी बरतने की सलाह दी है।
शिमला में खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग ने त्योहारी सीजन के बीच मिठाई की दुकानों पर कार्रवाई तेज कर दी है। बालूगंज में मिठाइयों में कॉकरोच मिलने के बाद विभाग ने दो प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिए। दोनों दुकानदारों को ऑनलाइन नोटिस भी जारी किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान एक मिठाई प्रतिष्ठान में गुलाब जामुन और रसगुल्लों की चाशनी में कॉकरोच पाए गए। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से मिठाइयों को अनुपयुक्त मानते हुए करीब दो क्विंटल मिठाई मौके पर ही नष्ट करवाई गई विभाग की टीम ने अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण किया और अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। अधिकारियों ने दुकानदारों को साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय उपमंडल पांगी की ग्राम पंचायत करयूनी-कोठी के सेरी गांव में शनिवार सुबह भीषण अग्निकांड हुआ। आग लगने से देवी सिंह पुत्र फत्तु राम का दो मंजिला मकान पूरी तरह जलकर राख हो गया। हादसे में करीब 20 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है। जानकारी के अनुसार, मकान में अचानक आग भड़क उठी। आग की लपटें देखकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए। सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। ग्रामीणों, पुलिस और अग्निशमन कर्मियों की मदद से आग पर काबू पाया गया, जिससे आग को आसपास के मकानों तक फैलने से रोका जा सका। अग्निकांड में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने की कार्रवाई की जा रही है। विधायक डॉ. जनक राज ने भी प्रशासन को परिवार की मदद के निर्देश दिए हैं। मकान जलने के बाद परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। ठंड के बीच परिवार को सिर छिपाने के लिए सुरक्षित ठिकाने की जरूरत है।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के भराड़ी थाना क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है। बरोटा पंचायत के बरोटा गांव में बिजली बोर्ड में फोरमैन के पद पर कार्यरत 28 वर्षीय शुभम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव शुक्रवार रात करीब आठ बजे घर के कमरे में फंदे से लटका मिला। जानकारी के अनुसार, शुभम शुक्रवार शाम घर पर मौजूद थे। रात करीब आठ बजे उनकी मां और पत्नी कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फंदे से लटका देखकर घबरा गईं। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे। परिजनों और ग्रामीणों ने शुभम को नीचे उतारा और तुरंत घुमारवीं अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। अभी तक आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चुराह क्षेत्र में शिक्षक और विद्यार्थियों के रिश्ते की भावुक तस्वीर सामने आई है। जसौरगढ़ पंचायत के मांजू गांव स्थित राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला में शिक्षक के तबादले पर विद्यार्थी फूट-फूटकर रोने लगे। जानकारी के अनुसार, कनिष्ठ अध्यापक पिछले 19 वर्षों से इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे थे। इतने लंबे समय में उनका विद्यार्थियों और ग्रामीणों से गहरा आत्मीय रिश्ता बन गया था। शिक्षक के तबादले की खबर मिलते ही बच्चे भावुक हो गए और विदाई के दौरान अपने आंसू नहीं रोक पाए। विदाई के दौरान बच्चों का रोना देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। शिक्षक ने भी इस मौके को यादगार बताते हुए कहा कि मांजू गांव के लोगों और बच्चों से मिला प्यार, स्नेह और आशीर्वाद वह जीवनभर नहीं भूलेंगे। शिक्षक ने कहा कि गांववासियों ने स्कूल के लिए हमेशा सहयोग दिया और बच्चों का यह निस्वार्थ स्नेह उनके लिए सबसे बड़ी याद बनकर रहेगा। गुरुजी की विदाई का यह भावुक वीडियो अब लोगों का ध्यान खींच रहा है।
हिमाचल प्रदेश में महिला विकास निगम की शिक्षा ऋण योजना का लाभ लेने वाली युवतियों की संख्या बेहद कम सामने आई है। अब तक प्रदेश में सिर्फ दो युवतियों ने उच्च शिक्षा के लिए इस योजना के तहत ऋण लिया है। महिला विकास निगम की ओर से पात्र युवतियों को शिक्षा के लिए 75 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में आर्थिक मदद देना है। हालांकि, योजना का प्रावधान होने के बावजूद इसका लाभ लेने वाली युवतियों की संख्या काफी कम है। ऐसे में योजना के प्रचार-प्रसार और पात्र लाभार्थियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की ओर से युवतियों को योजना की जानकारी देने और अधिक से अधिक पात्र छात्राओं को इसका लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान आई आपदा से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी के उपस्थित न होने पर NGT ने नाराजगी जताई और मुख्य सचिव को आवश्यक निर्देश दिए। ट्रिब्यूनल ने मामले से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित रिकॉर्ड और जानकारी पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि आपदा से जुड़े मामलों में विभागों को गंभीरता से कार्रवाई करनी होगी और मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध करानी होगी। अधिकारी की गैरहाजिरी को लेकर NGT ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब अगली सुनवाई में संबंधित विभाग की ओर से रिकॉर्ड और जवाब पेश किया जाना है।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की तालाबंदी का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। स्कूल बंद होने के बाद कुछ लोग अब स्कूल के लिए दान की गई जमीन वापस मांग रहे हैं। मामले को लेकर विवाद बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज किए जाने के फैसले के बाद दानदाताओं की ओर से जमीन वापस लेने की मांग उठाई गई है। उनका तर्क है कि जमीन स्कूल के संचालन के उद्देश्य से दी गई थी और अब जब स्कूल ही बंद हो रहे हैं तो जमीन का क्या होगा, यह स्पष्ट किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है। शिक्षा विभाग अब स्कूलों की जमीन, दान से जुड़े दस्तावेज और स्कूल बंद करने से संबंधित रिकॉर्ड जुटा रहा है। अब पूरे मामले में यह तय होना है कि स्कूल बंद होने की स्थिति में दान की गई जमीन पर किसका अधिकार रहेगा और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा सकता है। विभागीय रिकॉर्ड और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
काजा में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के नाम पर कथित तौर पर की जा रही वसूली के मामले की जांच होगी। ग्रामसभा, NGO और वन अधिकार समितियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने के बाद प्रशासन ने जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। मामले में आरोप है कि FRA से जुड़े काम के नाम पर लोगों से पैसे लिए गए। अब यह पता लगाया जाएगा कि वसूली किसके स्तर पर और किस आधार पर की गई। साथ ही, ग्रामसभा, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और वन अधिकार समितियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जांच में यदि किसी की संलिप्तता या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों के खिलाफ किसी भी तरह की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हमीरपुर जिले के बड़सर उपमंडल की जजरी पंचायत में खेत में ट्रैक्टर पलटने से 58 वर्षीय चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान मदन चंद पुत्र आत्माराम निवासी जजरी के रूप में हुई है। मदन चंद वीरवार शाम खेत में गेहूं की बिजाई करने गए थे। इसी दौरान ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया और वह उसके नीचे दब गए। हादसे का रातभर किसी को पता नहीं चल सका। देर रात तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। पत्नी ने फोन भी किया, लेकिन मोबाइल वाइब्रेशन मोड पर होने के कारण आवाज नहीं सुनाई दी। शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने खेत में पलटा हुआ ट्रैक्टर देखा, जिसके बाद हादसे का पता चला और पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मदन चंद अपने पीछे पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है।
जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं और 11वीं की रिक्त सीटों पर दाखिले के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत की खबर है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए लेटरल एंट्री चयन परीक्षा (LEST-2027) के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 22 अक्तूबर 2026 कर दी गई है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर थी। पात्र विद्यार्थी नवोदय विद्यालय समिति की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया निशुल्क है। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर 23 से 25 अक्तूबर तक सुधार का मौका भी दिया जाएगा। हालांकि, इस दौरान केवल श्रेणी, लिंग, क्षेत्र और दिव्यांगता से जुड़ी जानकारी में सुधार किया जा सकेगा। कक्षा 9वीं के लिए विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में संबंधित जिले के सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में 8वीं कक्षा में अध्ययनरत होना जरूरी है। वहीं कक्षा 11वीं के लिए विद्यार्थी का 2026-27 सत्र में 10वीं कक्षा में अध्ययनरत होना आवश्यक है। दोनों कक्षाओं के लिए चयन परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को आयोजित की जाएगी। इच्छुक विद्यार्थी अंतिम तारीख का इंतजार न करते हुए समय पर आवेदन पूरा कर लें। जिला: शिमला — हिमाचल की खबर के तौर पर यह सूचना जवाहर नवोदय विद्यालय ठियोग, शिमला की ओर से भी जारी की गई है।
हिमाचल प्रदेश में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। लाहौल-स्पीति के केलांग में न्यूनतम तापमान माइनस 1.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं कुकुमसेरी में भी पारा माइनस 1.2 डिग्री तक पहुंच गया। बीते 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी दर्ज की गई। केलांग में करीब 7 सेंटीमीटर बर्फबारी हुई। कुल्लू के कोठी में सबसे अधिक 26.2 मिलीमीटर बारिश, जबकि मनाली में 17 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश-बर्फबारी के कारण प्रदेश के अधिकांश मौसम केंद्रों में अधिकतम तापमान में 5 से 15 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। मनाली में न्यूनतम तापमान 5.9, कल्पा में 3.8 और शिमला में 11 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार 17 से 22 अक्तूबर तक प्रदेश में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान कम रहने से ठंड का असर जारी रहेगा। जिला: लाहौल-स्पीति (मुख्य रूप से केलांग), लेकिन खबर पूरे हिमाचल के मौसम से जुड़ी है।
हिमाचल का विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव इस बार और भी भव्य होने जा रहा है। सात दिवसीय उत्सव 21 से 27 अक्टूबर तक आयोजित होगा। इस बार उत्सव का मुख्य आकर्षण ग्लोबल डांस रहेगा, जिसमें विदेशी कलाकारों के साथ हिमाचल के लोक कलाकार भी एक मंच पर प्रस्तुति देंगे। आयोजन समिति के अनुसार, अब तक 12 देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है, जबकि कुल 24 देशों के शामिल होने की उम्मीद है। अमेरिका, थाईलैंड, मिस्र, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान सहित कई देशों के कलाकार उत्सव में अपनी संस्कृति की झलक दिखाएंगे। ग्लोबल डांस के लिए ढालपुर मैदान में अलग मंच तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा उत्सव में ड्रोन और लेजर शो भी आकर्षण का केंद्र होंगे। करीब 500 ड्रोन के जरिए आसमान में भव्य प्रस्तुति देने की तैयारी है। उत्सव की शुरुआत 21 अक्टूबर को भगवान रघुनाथ की रथयात्रा के साथ होगी, जबकि 27 अक्टूबर को समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान 346 स्थानीय देवी-देवताओं को भी आमंत्रित किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ स्थानीय खेल प्रतियोगिताएं और नशामुक्ति अभियान भी उत्सव का हिस्सा होंगे।
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए इसे चुनावी साल में जनता को गुमराह करने की कोशिश बताया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पिछले विधानसभा चुनाव में दी गई गारंटियां अभी पूरी नहीं की हैं और अब नए जिलों के गठन की बात कर रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार वास्तव में नए जिले बनाना चाहती थी तो इस प्रक्रिया की शुरुआत कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही की जानी चाहिए थी। उन्होंने नए जिलों के गठन के लिए आयोग बनाने के समय पर भी सवाल उठाए। जयराम ने कहा कि देशभर में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है और ऐसे समय में प्रशासनिक व राजस्व सीमाओं से जुड़े फैसले लेना समझ से परे है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में झटके के बाद सरकार अब नए जिलों के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब सरकार की ऐसी घोषणाओं को समझ रही है। बता दें कि हिमाचल सरकार ने नए जिलों के गठन और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में आयोग गठित किया है, जिसे छह महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है
त्योहारी सीजन को देखते हुए हिमाचल में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच तेज कर दी है। विभाग की टीमें बाजारों में खुले के साथ पैकेट बंद दूध के भी सैंपल लेंगी। दूध, पनीर, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए दूध और मिठाइयों के सैंपल लिए हैं। सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। मानकों पर खरा न उतरने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। घर बैठे ऐसे कर सकते हैं प्राथमिक दूध में पानी की मिलावट का अंदाजा लगाने के लिए कांच की साफ ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालकर देखें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे नीचे की ओर बहते हुए सफेद निशान छोड़ सकता है, जबकि ज्यादा पानी मिला दूध तेजी से बह सकता है। हालांकि, यह सिर्फ प्राथमिक घरेलू जांच है और इससे मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं होती। रासायनिक मिलावट की सही पहचान के लिए लैब टेस्ट जरूरी है। त्योहारों के दौरान दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाना है।
इंदौरा, 15 अक्तूबर। विधायक मलेंद्र राजन ने आज वन विश्राम गृह इंदौरा में ग्राम पंचायत भपू और डाहकुलाड़ा के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान पंचायतों में आवश्यक विकास कार्यों, सड़क निर्माण तथा स्थानीय समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की विकास संबंधी आवश्यकताओं और विभिन्न समस्याओं से विधायक को अवगत करवाया। विधायक ने संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए विकास कार्यों को गति देने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकताएं निर्धारित करने पर बल दिया। मलेंद्र राजन ने कहा कि खाड़ी युद्ध के चलते कोलतार के दामों में अचानक हुई बढ़ोतरी से सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। अब इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों के निर्माण एवं सुधार कार्य करवाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सड़कों की स्थिति में सुधार होने से लोगों को आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में भी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के सुझावों और स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जा रहा है। विधायक ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं और जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं। उनके साथ संवाद से विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने तथा आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने में सहायता मिलती है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को क्षेत्र की विकास संबंधी जरूरतों और जनसमस्याओं को निरंतर सामने लाने का आग्रह किया, ताकि इनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। बैठक में ग्राम पंचायत भपू के प्रधान प्रताप सिंह, उपप्रधान धर्मेंद्र, संदन शर्मा, प्रेम कुमार, ग्राम पंचायत डाहकुलाड़ा की प्रधान सोनिया, उपप्रधान देवेंद्र, जोगिंदर, सुभाष कालरा, चंद्रमोहन तथा युद्धवीर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों और प्रशासनिक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। इसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रिटायर्ड जस्टिस धर्मचंद चौधरी करेंगे। आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। आयोग मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों की समीक्षा करेगा। इसके बाद नए जिले या अन्य प्रशासनिक इकाइयां बनाने, मौजूदा इकाइयों को विभाजित करने या जरूरत के अनुसार विलय करने को लेकर सिफारिशें दी जाएंगी। इसमें आबादी, भौगोलिक परिस्थितियां, लोगों की प्रशासन तक पहुंच और सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। कौन हैं जस्टिस धर्मचंद चौधरी? जस्टिस धर्मचंद चौधरी का संबंध मंडी जिले के लोहरा गांव से है। उनका जन्म 12 मार्च 1958 को हुआ। उन्होंने शुरुआती शिक्षा लोहरा में, मैट्रिक हटगढ़ से, स्नातक की पढ़ाई कुल्लू से और एलएलबी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से 1983 में की। इसके बाद उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में वकालत की और 1995 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। वर्ष 2012 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश और 2014 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया। धर्मचंद चौधरी का सीजेआई सूर्यकांत से भी खास पेशेवर कनेक्शन रहा है। जब सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने, तब जस्टिस धर्मचंद चौधरी ने 2019 में हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का दायित्व संभाला था। हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। देहरा-गोपीपुर, नूरपुर, सुंदरनगर, पालमपुर, रोहड़ू और आनी समेत कई क्षेत्रों से लंबे समय से नए जिले बनाने की मांग उठती रही है। अब आयोग की रिपोर्ट के बाद इस दिशा में सरकार आगे फैसला लेगी।
हिमाचल प्रदेश में दो अलग-अलग मामलों में SSB जवान और एक युवक के लापता होने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है। दोनों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार, SSB का एक जवान ट्रेनिंग के लिए रवाना हुआ था, लेकिन इसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस को सूचित किया गया। वहीं, दूसरा युवक रामलीला देखने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने आसपास और संभावित स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस में गुमशुदगी की सूचना दी गई। पुलिस दोनों मामलों में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है और लापता लोगों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों के साथ-साथ अन्य माध्यमों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल दोनों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने खनन गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन, निगरानी और नियंत्रण के लिए उद्योग विभाग के तहत अलग खनन निदेशालय स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। नए निदेशालय की कमान IAS कैडर के अधिकारी को दी जाएगी। इसके लिए ग्रुप-ए स्तर पर निदेशक (खनन) का पद सृजित किया गया है। निदेशक ही निदेशालय के विभागाध्यक्ष होंगे, जबकि इसका समग्र प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग विभाग के पास रहेगा। निदेशालय के संचालन के लिए उद्योग विभाग से 8 पद स्थानांतरित किए गए हैं। इनमें संयुक्त निदेशक, सहायक नियंत्रक (वित्त एवं लेखा), अधीक्षक ग्रेड-1, वरिष्ठ सहायक, तीन जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और एक चपरासी शामिल हैं। इसके अलावा 4 मल्टी टास्क वर्कर आउटसोर्स आधार पर रखने की मंजूरी दी गई है। सरकार जल्द ही संबंधित वैधानिक नियमों में संशोधन करेगी, ताकि निदेशक को खनन गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक अधिकार और जिम्मेदारियां दी जा सकें। अलग निदेशालय बनने से अवैध खनन पर निगरानी, खनिज संसाधनों के प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने के प्रयासों को बेहतर तरीके से संचालित करने की उम्मीद है।
शिमला: राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना ईस्ट की टीम ने पंथाघाटी में 505 ग्राम चरस के साथ 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, 14 अक्तूबर को टीम पंथाघाटी स्थित हेतविक सुपर मार्ट के पास जांच कर रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति की तलाशी ली गई, जिसमें उसके कब्जे से 505 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विजय बाथा मगर (22) निवासी जिला सल्यान, नेपाल के रूप में हुई है। वर्तमान में वह शिमला जिले की चिड़गांव तहसील में रह रहा था। पुलिस थाना ईस्ट शिमला में 15 अक्तूबर को एफआईआर संख्या 96/2026 दर्ज की गई है। मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत दर्ज हुआ है। आरोपी को आगामी कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पास चरस कहां से पहुंची और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या नशा तस्करी का नेटवर्क भी जुड़ा हुआ है। मामले की जांच जारी है।
हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा से भाजपा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना तय है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर कांगड़ा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी और क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता मिलेगी। भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए उसके कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और जनता सरकार की नीतियों से परेशान है। भाजपा सांसद ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से तैयारियों में जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और जनता के बीच केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ प्रदेश सरकार के कामकाज से जुड़े मुद्दे भी उठाए जाएंगे। गौरतलब है कि हिमाचल भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने प्रदेश के 171 मंडलों में विस्तारकों की नियुक्ति की योजना बनाई है और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। राजीव भारद्वाज कांगड़ा लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं और मौजूदा लोकसभा में उनका पहला कार्यकाल है। हालांकि, भाजपा की सरकार बनने का दावा भारद्वाज का राजनीतिक बयान है। आगामी विधानसभा चुनाव का परिणाम मतदाताओं के निर्णय पर निर्भर करेगा।
शिमला: राजधानी शिमला के IGMC और अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को फॉलोअप के दौरान फीस चुकानी पड़ रही है। बार-बार जांच और डॉक्टर से परामर्श के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि इन शुल्कों से उनके इलाज का खर्च बढ़ रहा है। आईजीएमसी में ओपीडी पंजीकरण के लिए 10 रुपये शुल्क लागू किया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह पर्ची 14 दिनों तक वैध रहती है। वहीं, चमियाणा अस्पताल में भी ओपीडी पर्ची के लिए पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों से लिए जा रहे यूजर चार्ज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पर्ची के लिए 10 रुपये का शुल्क निर्धारित है, जिसमें शिमला का IGMC और चमियाणा भी शामिल हैं। इसके अलावा IGMC में रोगी कल्याण समिति की बैठकों के बाद कुछ जांच और अन्य सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। स्पेशल वार्ड और विभिन्न जांचों की दरों में बढ़ोतरी की जानकारी भी सामने आई है। मरीजों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में एक ही मरीज को कई बार अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में पर्ची, जांच और अन्य शुल्क मिलाकर इलाज का कुल खर्च बढ़ जाता है। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार से फॉलोअप मरीजों के लिए शुल्क में राहत देने की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि ओपीडी पंजीकरण शुल्क व्यवस्था को व्यवस्थित करने और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
हिमाचल: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पूर्व विधायक इंद्रदत्त लखनपाल पर निशाना साधते हुए उन पर कांग्रेस के साथ दगाबाजी करने का आरोप लगाया। सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस ने लखनपाल को सम्मान और जिम्मेदारी दी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में रहते हुए लखनपाल को पूरा मान-सम्मान मिला और उनके क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर सरकार ने कोई कमी नहीं छोड़ी। इसके बावजूद उन्होंने भाजपा के साथ जाने का फैसला किया। सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस ने माता और बेटे दोनों को राजनीतिक सम्मान दिया, लेकिन इसके बावजूद पूर्व विधायक ने पार्टी का साथ छोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक भाजपा के हाथों बिक गए और कांग्रेस तथा सरकार के खिलाफ षड्यंत्र में शामिल हुए। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद हिमाचल की राजनीति में एक बार फिर पूर्व विधायकों के भाजपा में शामिल होने का मुद्दा चर्चा में आ गया है। गौरतलब है कि इंद्रदत्त लखनपाल ने 2024 में बड़सर विधानसभा सीट से विधायक पद से इस्तीफा दिया था और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। सुक्खू पहले भी लखनपाल पर भाजपा के साथ राजनीतिक सौदेबाजी के आरोप लगा चुके हैं। हालांकि, ये आरोप मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान हैं और इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित पक्षों के दावों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। हिमाचल हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी आयोग के अध्यक्ष होंगे। आयोग में अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है, जबकि निदेशक भू-अभिलेख विभाग आयोग के सदस्य सचिव होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में रहेगा। जिलों से लेकर विकास खंडों तक की होगी समीक्षा आयोग प्रदेश के मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की व्यवस्था की समीक्षा करेगा। जरूरत के अनुसार नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, मौजूदा इकाइयों के विलय, विभाजन या पुनर्गठन को लेकर सरकार को सिफारिशें दी जाएंगी। इस दौरान जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियां, आवागमन की सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और आम लोगों की सुविधा को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। आयोग जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों से भी सुझाव लेगा। छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट सरकार ने आयोग को छह महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का समय दिया है। आयोग नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने के लिए जरूरी भवन, कर्मचारियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर होने वाले खर्च का भी आकलन करेगा। हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। लंबे समय से नूरपुर, देहरा, पालमपुर, सुंदरनगर, रामपुर और बद्दी जैसे क्षेत्रों को जिला बनाने की मांग और चर्चा होती रही है। हालांकि, अभी किसी नए जिले के गठन का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार के निर्णय से साफ होगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल भर्ती की तैयारी कर रहे होमगार्ड जवानों के लिए राहत की खबर है। राज्य मंत्रिमंडल ने होमगार्ड जवानों को भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक परीक्षा और ग्राउंड टेस्ट से छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस संबंध में गृह विभाग की ओर से डीजीपी को पत्र जारी किया गया है। अब तक होमगार्ड जवानों को भी पुलिस भर्ती के दौरान शारीरिक मानक और दक्षता परीक्षा से गुजरना पड़ता था। इसमें कद-छाती की माप, दौड़, ऊंची कूद और लंबी कूद जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं। नए फैसले के बाद इन परीक्षाओं से उन्हें राहत मिलेगी। हालांकि, छूट लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया और शर्तें आधिकारिक आदेश में स्पष्ट की जाएंगी। पुलिस कांस्टेबल भर्ती में होमगार्ड स्वयंसेवकों के लिए 15 प्रतिशत पद आरक्षित रखने का प्रावधान है। इसके अलावा सरकार ने हाल ही में होमगार्ड जवानों को ऊपरी आयु सीमा में एकमुश्त पांच वर्ष की छूट भी दी थी। ड्यूटी के दौरान मौत पर भी आर्थिक सहायता होमगार्ड जवानों के कल्याण के लिए सरकार ने एक और फैसला लिया है। ड्यूटी के दौरान जवान की मौत होने पर उसके परिवार को एक लाख रुपये, जबकि ड्यूटी के दौरान घायल होने पर 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता होमगार्ड वेलफेयर फंड से दी जाएगी। सरकार के इस फैसले से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे होमगार्ड जवानों को शारीरिक परीक्षा को लेकर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भर्ती के अन्य नियम और चयन प्रक्रिया आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही लागू होंगे।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के जनजातीय क्षेत्रों पांगी और भरमौर में मौसम ने करवट ली है। ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी के बाद पहाड़ बर्फ की सफेद चादर से ढक गए हैं। चोटियों पर करीब तीन इंच तक हिमपात दर्ज किया गया है। वहीं, पांगी की सुराल घाटी में भी बर्फबारी शुरू होने की सूचना है। बर्फबारी के साथ ही जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ गई है। वहीं, निचले क्षेत्रों में बारिश होने से तापमान में गिरावट आई है और सुबह-शाम ठिठुरन बढ़ गई है। बर्फबारी के बीच दिखे दो स्नो लेपर्ड चंबा की पहाड़ियों में बर्फबारी के बीच दो स्नो लेपर्ड नजर आने की सूचना भी सामने आई है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच स्नो लेपर्ड दिखाई देने से क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमियों की दिलचस्पी भी बढ़ गई है। हालांकि, दोनों स्नो लेपर्ड किस सटीक स्थान पर देखे गए, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। मौसम में आए बदलाव के चलते ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को ठंड से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बारिश और बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले मार्गों पर फिसलन बढ़ सकती है, इसलिए यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही सफर करने की सलाह है। मौसम विभाग ने भी हिमाचल में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है।
किन्नौर: जिले के निगुलसरी में बुधवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे में चौपाल के एक युवक की मौत हो गई। हादसा निगुलसरी के ओल्ड ब्लॉक पॉइंट के पास हुआ, जहां एक पिकअप वाहन सड़क से लुढ़ककर करीब 500 से 600 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में वाहन चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान अभय रांटा, पुत्र सुरेश, निवासी रोशल, चौपाल, जिला शिमला के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त पिकअप का नंबर HP-63C-6811 बताया गया है। हादसे की सूचना बुधवार सुबह करीब 9 बजे भावानगर पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही एएसआई हेमराज के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। गहरी और दुर्गम खाई होने के कारण शव को बाहर निकालना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बना रहा। पुलिस जवानों के साथ होमगार्ड और अन्य रेस्क्यू टीम ने करीब आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद अभय रांटा के शव को खाई से बाहर निकाला। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भावानगर पहुंचाया गया। हादसे की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन भी चौपाल से किन्नौर पहुंचे। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त पिकअप को मंगलवार देर शाम चौरा से रामपुर की ओर जाते हुए देखा गया था। वाहन किस दिशा में जाते समय हादसे का शिकार हुआ, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। एसपी किन्नौर सुशील कुमार ने हादसे की पुष्टि की है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। प्रशासन की ओर से मृतक के परिवार को 25 हजार रुपये की फौरी राहत भी प्रदान की गई है। हादसे के वास्तविक कारणों की पुलिस जांच कर रही है।
लाहौल-स्पीति के केलांग में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ICMR सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च (ICMR-CHAMP) का शिलान्यास किया। यह ICMR का उच्च हिमालयी चिकित्सा और जनस्वास्थ्य अनुसंधान पर केंद्रित पहला समर्पित केंद्र होगा। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य हिमालयी और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर वैज्ञानिक शोध करना है। यहां हाई एल्टीट्यूड फिजियोलॉजी, पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु से जुड़ी बीमारियों, संक्रामक रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और आपदा चिकित्सा जैसे विषयों पर अध्ययन किया जाएगा। केंद्र से दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, ड्रोन के जरिए दवाओं और स्वास्थ्य सामग्री की पहुंच तथा रियल-टाइम हेल्थ सर्विलांस जैसी तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। इसका फायदा स्थानीय लोगों के साथ-साथ ऊंचाई वाले और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना के जवानों को भी मिलने की उम्मीद है। केंद्र में ऊंचाई पर शरीर में होने वाले बदलाव, अनुकूलन और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस जैसी समस्याओं पर शोध किया जाएगा। इसके लिए सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। केलांग में इस केंद्र की स्थापना से हिमाचल के जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य अनुसंधान, आपदा प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में सोमवार को कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में हिमाचल से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 2,000 कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और कई मंत्री-विधायक भी प्रदर्शन में शामिल रहे। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के SIR और कथित वोट चोरी से जुड़े मामलों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताते हैं। दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च भी किया। प्रदर्शन के चलते मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई और कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा गया। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हिमाचल कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर पहले जिला स्तर पर प्रदर्शन कर चुकी है।
ऊना: ऊना रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह रेल स्विच पॉइंट से छेड़छाड़ के चलते दौलतपुर चौक से नई दिल्ली जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस निर्धारित प्लेटफॉर्म के बजाय दूसरे ट्रैक पर पहुंच गई। अचानक प्लेटफॉर्म बदलने से स्टेशन पर यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। यात्री प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे और अनाउंसमेंट भी इसी प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने की हो रही थी। इसी बीच ट्रेन मुख्य लाइन से प्लेटफॉर्म-1 की जगह प्लेटफॉर्म-2 की लूप लाइन की ओर चली गई। इसके बाद यात्रियों को फुटओवर ब्रिज के जरिए दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर भागना पड़ा। इस दौरान कुछ यात्री ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी में पटरी पार करते हुए भी नजर आए। छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रही महिलाओं और भारी सामान वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। रेल स्विच पॉइंट से छेड़छाड़ ऊना के स्टेशन अधीक्षक विक्रम के अनुसार, असामाजिक तत्वों द्वारा रेल स्विच पॉइंट से छेड़छाड़ की गई थी। इसी वजह से ट्रेन को तत्काल दूसरे प्लेटफॉर्म की दिशा में डायवर्ट करना पड़ा। उनका कहना है कि समय रहते ट्रेन को दूसरे ट्रैक की ओर नहीं मोड़ा जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऊना स्टेशन से रोजाना वंदे भारत समेत कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की आवाजाही होती है। ऐसे में रेल ट्रैक और स्विच पॉइंट जैसे संवेदनशील हिस्सों से छेड़छाड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत करवाए गए करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक जमा नहीं हो पाए हैं। केंद्र सरकार ने इन कार्यों का रिकॉर्ड और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है। दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र के जरिए यह प्रमाणित किया जाता है कि योजना के तहत मिली राशि निर्धारित उद्देश्य पर खर्च की गई है। इसके साथ संबंधित कार्यों का विवरण, बिल और खर्च का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होता है। बताया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में लगे समय और विकास कार्यों में हुई देरी के कारण बड़ी राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं हो सके। अब पंचायतों को बिलों सहित रिकॉर्ड जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। 15वें वित्त आयोग की राशि का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना था। वहीं, शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल की जा सकती थी। पुराने फंड का हिसाब लंबित रहने से अगली वित्त आयोग की किस्तों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर मामले में राशि अपने आप रुकना तय नहीं है; इसका असर संबंधित अनुदान की शर्तों और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने बताया कि पुराने वित्तीय वर्ष के करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाए जाने हैं और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) में अधिकारियों और कर्मचारियों के युक्तीकरण (Rationalization) को मंजूरी दे दी है। इसके तहत स्वीकृत पदों से अधिक तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरत वाले क्षेत्रों में भेजा जाएगा। सरकार के फैसले के बाद उन मंडलों, उपमंडलों और विंग में तैनात अतिरिक्त स्टाफ का समायोजन किया जाएगा, जहां स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारी अधिक हैं। वहीं, जिन क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहां इन कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, कई जिला मुख्यालयों और सुविधाजनक मंडलों में एक ही स्वीकृत पद के मुकाबले दो से तीन अधिकारी या कर्मचारी संबद्ध हैं। इसके विपरीत चंबा, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और शिमला के दूरदराज क्षेत्रों में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के पद खाली हैं। NH विंग में भी होगा स्टाफ का समायोजन नेशनल हाईवे विंग में भी सड़कों की जिम्मेदारी कम होने के कारण स्टाफ का पुनर्समायोजन किया जाएगा। तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग NHAI को सौंपे जाने के बाद PWD के NH विंग के पास अब 779 किलोमीटर सड़कों की जिम्मेदारी रह गई है। वहीं NHAI के पास 1,244 किलोमीटर और BRO के पास 569 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध मानव संसाधन का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना और दूरदराज क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी को दूर करना है, ताकि सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने युवाओं की भूमिका और उनकी आवाज को लेकर चिंता जताई। एनआईटी हमीरपुर में आयोजित शिक्षा महाकुंभ 6.0 में उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में लगाना जरूरी है और राष्ट्र निर्माण में उनकी अहम भूमिका है। राज्यपाल ने युवाओं से शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज तकनीक तेजी से दुनिया को बदल रही है, ऐसे में युवाओं को अपनी क्षमता का इस्तेमाल देश के विकास के लिए करना चाहिए। इससे पहले भी राज्यपाल युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कह चुके हैं कि युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय हित की दिशा में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि भटके हुए युवाओं को सही मार्गदर्शन और सकारात्मक प्रेरणा की जरूरत है। राज्यपाल ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा, कौशल, तकनीक और राष्ट्र निर्माण को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश में बंदरों की बढ़ती समस्या पर नियंत्रण के लिए चलाया जा रहा नसबंदी अभियान अब फंडिंग की चुनौती से जूझ रहा है। वन विभाग के अनुसार, पहले बंदरों की नसबंदी के लिए CAMPA से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब विभाग को इस अभियान को जारी रखने के लिए वैकल्पिक फंडिंग की तलाश करनी पड़ रही है। नसबंदी अभियान बंद होने या इसकी रफ्तार कम होने से भविष्य में बंदरों की आबादी को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बंदरों की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी। इसका असर नसबंदी की गति, प्रजनन दर और अन्य आबादी नियंत्रण उपायों पर निर्भर करेगा। हिमाचल में वर्ष 2007 से बंदर नसबंदी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 1.86 लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके चलते प्रदेश में रीसस मकाक की आबादी में लंबे समय में गिरावट दर्ज की गई है। 2004 में अनुमानित आबादी करीब 3.17 लाख थी, जो 2020 में घटकर 1.36 लाख रह गई। हाल के वर्षों में अभियान की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। 2024-25 में 8,800 बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन केवल 2,284 बंदरों की नसबंदी हो सकी। इसके पीछे फंडिंग के साथ-साथ बंदरों को पकड़ने और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आई हैं। फिलहाल वन एवं वन्यजीव विभाग ने प्रदेश के सभी सात नसबंदी केंद्रों को चालू रखने का फैसला किया है। इन केंद्रों के जरिए बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने और मानव-बंदर संघर्ष को कम करने की कोशिश जारी रखने की बात कही गई है। विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन केंद्रों और नसबंदी अभियान के लिए लगातार फंडिंग, स्टाफ और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना है। 2024 में बंदरों की आबादी का नया सर्वे भी कराया गया था, जिसके आंकड़ों का इस्तेमाल आगे की रणनीति तय करने में किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने करवट लेते हुए बर्फबारी शुरू कर दी है। लगातार बर्फबारी से कई सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं, जबकि खराब मौसम के चलते उड़ानें भी रद्द करनी पड़ीं। इससे लोगों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। चूड़धार और शिंकुला दर्रे में बर्फबारी के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। प्रशासन और राहत-बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। कई मार्गों पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से मौसम को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं, बर्फबारी के बाद हिमाचल की चोटियों ने सफेद चादर ओढ़ ली है, जिससे पर्यटन स्थलों पर खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है।
ऊना: जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में अब बच्चों को ज्यादा चीनी के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके लिए स्कूल परिसरों में ‘शुगर बोर्ड’ लगाए जाएंगे। इन बोर्ड के जरिए विद्यार्थियों को अलग-अलग खाद्य और पेय पदार्थों में मौजूद चीनी की मात्रा तथा इसके अधिक सेवन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। बच्चों को स्वस्थ खान-पान अपनाने और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को कम उम्र से ही स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार के प्रति जागरूक करना है। स्कूलों में लगाए जाने वाले शुगर बोर्ड बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी ज्यादा चीनी के सेवन के प्रति सावधान करेंगे।
छात्रों ने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य को आसान बनाने के लिए एक खास ‘प्रहरी रोबोट’ तैयार किया है। यह रोबोट मलबे में दबे लोगों की सांसों और हलचल का पता लगाने में मदद करेगा। साथ ही 3D मैपिंग तकनीक के जरिए मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता तलाशकर बचाव दल तक जानकारी पहुंचाएगा। रोबोट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उन जगहों पर भी पहुंच सके, जहां इंसानों का जाना जोखिम भरा हो सकता है। मलबे के भीतर फंसे लोगों की मौजूदगी का पता लगाकर यह राहत टीम को संभावित स्थान की जानकारी देगा। 3D मैपिंग की मदद से रोबोट आसपास के क्षेत्र का नक्शा तैयार करेगा, जिससे बचावकर्मियों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। छात्रों का यह नवाचार भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के दौरान जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार मौसम की मार का सीधा असर सेब कारोबार पर पड़ा है। प्रतिकूल मौसम के चलते सेब उत्पादन और कारोबार प्रभावित हुआ, जिससे बागवानों की कमाई में भी बड़ी गिरावट आई है। सेब कारोबार के आधा रह जाने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। मौसम की खराब परिस्थितियों का असर सेब की पैदावार, गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच पर पड़ा। कई क्षेत्रों में बागवानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाया, वहीं अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की मात्रा घटने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सेब हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इससे केवल बागवान ही नहीं, बल्कि पैकिंग, परिवहन, मजदूरी, आढ़ती और अन्य कारोबार से जुड़े हजारों लोगों की आय भी प्रभावित होती है। ऐसे में सेब कारोबार में आई गिरावट का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिला है। बागवानों का कहना है कि बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच कम उत्पादन ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सरकार से बागवानों को राहत और मौसम से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU) शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने न्यायपालिका और सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक फैसलों से कई बार सरकार के सामने व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। सीएम सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कोर्ट को भर्ती एवं सेवा नियमों के दायरे में रहना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2003 की उस नीति का जिक्र किया, जिसमें अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब दो दशक बाद अदालत के आदेश से ऐसे वित्तीय लाभ देने की स्थिति बनी, जबकि उस समय के भर्ती नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके जायज वित्तीय लाभों से वंचित नहीं करना चाहती, लेकिन सरकार को राजकोष और प्रदेश की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनहित, नियमों और वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन जरूरी है। स्कूलों के खेल मैदानों पर भी बोले सीएम सुक्खू ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी राज्य में पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्कूलों और सामुदायिक खेल मैदानों का बेहतर और साझा उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए एक सरकारी स्कूल के खेल मैदान के इस्तेमाल की अनुमति लेने के लिए सरकार को 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान करना पड़ा। हाईकोर्ट ने हमीरपुर के बरसर स्थित सरकारी स्कूल के मैदान में राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह की अनुमति देते हुए छात्रों के वेलफेयर फंड में 5 लाख रुपये जमा कराने की शर्त रखी थी। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया समेत कई न्यायिक हस्तियां मौजूद रहीं। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कानून के विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का वाहक बनने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
हिमाचल प्रदेश में अक्टूबर के महीने में ही मौसम ने करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। रोहतांग, कुंजम, बारालाचा और शिंकुला दर्रे की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को हिमाचल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं अगले कुछ दिनों तक भी मौसम खराब रह सकता है। 13 और 14 अक्टूबर को कुछ क्षेत्रों में अंधड़ को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान बारिश और ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना है। बारिश और बर्फबारी के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। जनजातीय और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रातें काफी ठंडी होने लगी हैं। कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि केलांग में 4.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। उधर, खराब मौसम का असर पहाड़ी मार्गों पर भी पड़ा है। शिंकुला और बारालाचा दर्रे में बर्फबारी के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और पुलिस ने फंसे पर्यटकों व वाहनों को रेस्क्यू किया। लोगों को खराब मौसम के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के दौरान 33 वर्षीय रीना देवी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में हिमाचल सरकार ने महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रीना देवी को 7 अक्तूबर को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जबकि 9 अक्तूबर को उनकी और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मामले के बाद परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास चौहान की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान डॉ. प्रियंका शर्मा उपलब्ध नहीं थीं और उनके दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। ड्यूटी से गैरहाजिरी और जांच में उपलब्ध न होने को देखते हुए सरकार ने निलंबन की कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, शिमला रहेगा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले मौत के लिए चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
हिमाचल प्रदेश में कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नई किताबें लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में इन कक्षाओं की पढ़ाई को एनसीईआरटी पैटर्न के अनुरूप किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आधुनिक और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप पढ़ाई करवाने पर जोर रहेगा। नई किताबों और सिलेबस को तैयार करने की प्रक्रिया के बाद इन्हें स्कूलों में लागू किया जाएगा। इससे हिमाचल के विद्यार्थियों की पढ़ाई को एनसीईआरटी के पैटर्न के साथ जोड़ा जा सकेगा।


















































