हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार अनुराग शर्मा को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया है। रिटर्निंग ऑफिसर एवं विधानसभा सचिव ने सोमवार को उन्हें निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र जारी किया। अनुराग शर्मा ने नामांकन के दौरान तीन सेट दाखिल किए थे। अन्य नामांकन वापस लिए जाने के बाद वे मैदान में एकमात्र उम्मीदवार रह गए, जिसके चलते उन्हें निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिया गया।
निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र लेने के बाद शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय में अनुराग शर्मा के सम्मान में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, कैबिनेट मंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार तथा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान सभी ने नए राज्यसभा सांसद का गर्मजोशी से स्वागत किया। गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र से संबंध रखने वाले युवा नेता अनुराग शर्मा को राज्यसभा भेजने का फैसला किया था। उन्होंने 5 मार्च को नामांकन पत्र दाखिल किया था। सांसद निर्वाचित होने के बाद सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। मंगलवार को वे बैजनाथ जाएंगे, जहां रास्ते में विभिन्न स्थानों पर कांग्रेस कार्यकर्ता उनका स्वागत करेंगे।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल 6 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने पहले ही नए सांसद के चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। नामांकन वापसी के बाद अनुराग शर्मा के निर्विरोध चुने जाने की आधिकारिक घोषणा की गई। प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद अनुराग शर्मा ने विधानसभा में अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें गुलदस्ता भेंट कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उम्मीद जताई कि अनुराग शर्मा राज्यसभा में हिमाचल प्रदेश से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे और प्रदेश के हितों की प्रभावी पैरवी करेंगे।
हिमाचल प्रदेश के नए राज्यपाल कविंद्र गुप्ता आज शिमला पहुंचेंगे। कल सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। शपथ ग्रहण समारोह शिमला स्थित राज भवन शिमला में आयोजित होगा। कविंद्र गुप्ता राज्य के 30वें राज्यपाल होंगे। पूर्व राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल की विदाई के साथ ही राजभवन में नए राज्यपाल के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आज शाम 6 बजकर 30 मिनट पर राजभवन में उनके स्वागत के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट, सेना और पुलिस के अधिकारी तथा भाजपा नेता मौजूद रहेंगे।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार देर रात शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का राज्यपाल और कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया। इससे पहले कविंद्र गुप्ता लद्दाख के उपराज्यपाल रह चुके हैं। उन्होंने 18 जुलाई को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली थी और करीब नौ महीने तक इस पद पर सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया और उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
कविंद्र गुप्ता आपातकाल के दौरान 13 महीने जेल में भी रह चुके हैं। उनका RSS से गहरा जुड़ाव रहा है और वे मात्र 13 वर्ष की उम्र में ही इससे जुड़ गए थे। वे लगातार तीन बार जम्मू के महापौर भी रहे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई के महासचिव के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा 1993 से 1998 तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रहे। कविंद्र गुप्ता साल 2014 के विधानसभा चुनाव में गांधी नगर सीट से पहली बार MLA चुने गए थे। इसके बाद, उन्हें विधानसभा स्पीकर चुना गया। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए हुई थी।
हिमाचल प्रदेश में बीते कई दिनों से मौसम शुष्क बना हुआ है। जिससे प्रदेश के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में आज हीटवेव का यलो अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। राहत की खबर यह है कि कल से एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है। जिससे बारिश-बर्फबारी की संभावना है। बारिश-बर्फबारी के बाद लोगों को गर्मी से राहत मिलने मिलेगी।
वर्तमान में प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 7.5 डिग्री सेल्सियस अधिक और न्यूनतम तापमान भी नॉर्मल से 5 डिग्री ज्यादा हो गया है। लाहौल-स्पीति के केलांग में अधिकतम तापमान सामान्य से 11.7 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 14.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजधानी शिमला का अधिकतम तापमान भी सामान्य से 8.9 डिग्री ज्यादा दर्ज करते हुए 24.7 डिग्री तक पहुंच गया है और कल्पा का पारा 11.2 डिग्री अधिक के साथ 21.8 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के 13 शहरों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। ऊना में सबसे अधिक 33.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार 10 मार्च से प्रदेश में मौसम बदलना शुरू हो जाएगा। इस दिन अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है। 11 मार्च को पूरे प्रदेश में बारिश होने का पूर्वानुमान है, जबकि 12 मार्च को भी अधिक ऊंचाई और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 13 और 14 मार्च को अधिक ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी जारी रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने 11 और 12 मार्च को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में आंधी-तूफान चलने का यलो अलर्ट जारी किया है। वहीं लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम में इस बदलाव के बाद प्रदेश में तापमान में हल्की गिरावट आएगी और लोगों को मौजूदा गर्मी से काफी हद तक राहत मिल सकती है।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से मार्च में आयोजित की जा रही 10वीं और 12वीं कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं को परीक्षाओं के दौरान ही एकत्रित करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षा बोर्ड ने 30 अप्रैल तक परीक्षाओं का परिणाम घोषित करने की योजना बनाई है। 17 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं के पैकेटों को रिसीव करने और उन्हें खोलने का कार्य शुरू होगा, जबकि दो अप्रैल से प्रदेशभर में बनाए गए 41 मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षा बोर्ड यह सब रिकॉर्ड समय में परीक्षा परिणाम घोषित करने के लिए कर रहा है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं तीन मार्च से शुरू हुई हैं। 10वीं कक्षा की अंतिम परीक्षा 28 मार्च को है, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षाएं पहली अप्रैल को समाप्त होंगी। प्रदेशभर में इन परीक्षाओं के लिए नियमित विद्यार्थियों में 10वीं कक्षा में 93,564 और 12वीं कक्षा में 81,411 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण करवाया है। इसके अलावा एसओएस के तहत 10वीं कक्षा में 3,984, 12वीं में 5,442 और 8वीं कक्षा में 217 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि परीक्षा परिणाम के लिए विद्यार्थियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। परिणाम जल्द घोषित हो, इसके लिए शिक्षा बोर्ड ने पहले से ही योजना बनाई है कि किस दिन से उत्तरपुस्तिकाओं को एकत्रित करने का कार्य शुरू किया जाएगा, किस दिन से मूल्यांकन का कार्य शुरू होगा और कब परिणाम घोषित किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और चीटिंग-प्रूफ बनाने के लिए बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने अब तकनीक का मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात सुपरिटेंडेंट और डिप्टी सुपरिटेंडेंट के लिए बोर्ड द्वारा विकसित एग्जाम मित्र ऐप का उपयोग करना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य शर्त है। डॉ. शर्मा ने दो-टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इस एप पर नियमित अपडेट देना होगा।
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि परीक्षा केंद्रों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रियल-टाइम सूचना बेहद जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा से संबंधित हर आवश्यक जानकारी और अपडेट को तुरंत एग्जाम मित्र एप पर अपलोड किया जाए। इससे न केवल बोर्ड मुख्यालय को केंद्रों की पल-पल की जानकारी मिलेगी, बल्कि परीक्षा के दौरान होने वाली किसी भी संभावित गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सकेगा। अध्यक्ष ने सख्त लहजे में सुपरिटेंडेंट एवं डिप्टी सुपरिटेंडेंट को आगाह किया कि रिपोर्टिंग में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इस डिजिटल प्रक्रिया की निगरानी के लिए केंद्र समन्वयकों को विशेष अधिकार दिए हैं। ये समन्वयक सीधे तौर पर नजर रखेंगे कि एप पर विवरण सही और समयबद्ध तरीके से अपडेट हो रहे हैं या नहीं। डॉ. शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा
हिमाचल प्रदेश में अब सरकारी विभागों, निर्माण इकाइयों और निजी संस्थानों को डीजल-पेट्रोल के लिए अपनी जेबें तुरंत ढीली करनी होंगी। वैश्विक युद्ध के चलते पैदा हुए संकट और तेल कंपनियों के भारी घाटे के कारण हिमाचल प्रदेश पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने क्रेडिट सुविधा पर पूरी तरह से रोक लगाने का बड़ा निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था आगामी सोमवार से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगी। एसोसिएशन अध्यक्ष सुकुमार सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान के कारण यह कदम उठाना पड़ा। अब तक तेल कंपनियां डीलरों को 2 से 4 दिनों की उधार सुविधा देती थीं, उसे अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। कंपनियों को समय पर भुगतान न मिलने के कारण उन्होंने कैश एंड कैरी मॉडल अपनाया है। अब डीलरों को तेल का स्टॉक उठाने के लिए तुरंत या अग्रिम भुगतान करना होगा। इसी वजह से डीलरों ने भी किसी भी संस्थान को आगे से उधार तेल न देने का फैसला किया है।
वैश्विक युद्ध और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। क्रेडिट सुविधा बंद होने के कारण व्यापारिक तंत्र और विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि सरकारी विभागों और निर्माण इकाइयों ने समय रहते नकद भुगतान की व्यवस्था नहीं की, तो सड़क निर्माण, जल शक्ति परियोजनाएं और परिवहन सेवाएं ठप होने का खतरा है। कहा कि हम ग्राहकों को और अधिक उधार देने की स्थिति में नहीं हैं।
सभी विभाग और संस्थान सोमवार से पहले अपनी बैंकिंग और नकद भुगतान की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि ईंधन आपूर्ति में कोई व्यवधान न आए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन में भारी रुकावट आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नकद भुगतान की बाध्यता से प्रदेश के छोटे व्यवसाय और निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में अब रसोई गैस सिलिंडर डिलिवरी के 25 दिन बाद बुक होगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हिमाचल में घरेलू गैस सिलिंडरों की बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव हो गया है। पहले सिलिंडर की डिलिवरी होने के साथ ही नई बुकिंग हो जाती थी, लेकिन अब उपभोक्ताओं का इंतजार बढ़ेगा। तेल कंपनियों ने गैस वितरकों को इस बाबत निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में शनिवार से यह व्यवस्था लागू हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच तेल कंपनियों ने यह कदम उठाया है।
उद्देश्य घरेलू गैस की उपलब्धता को संतुलित रखना और जरूरत के मुताबिक आपूर्ति सुनिश्चित करना है। गैस वितरकों को कंपनियों की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि डिलिवरी की तारीख के आधार पर ही बुकिंग की अनुमति दी जाए। यानी उपभोक्ता को सिलिंडर मिलने के 25 दिन पूरे होने के बाद ही सिस्टम में अगली बुकिंग स्वीकार की जाएगी। अब यदि कोई उपभोक्ता 25 दिन पूरे होने से पहले बुकिंग करने का प्रयास करेगा तो ऑनलाइन, फोन बुकिंग सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा। कंपनियों का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी भी हो सकती है। आपूर्ति की स्थिति सामान्य रहने पर आगे इसमें बदलाव किया जा सकता है।
प्रदेश में रसोई सिलिंडर का दाम 957 रुपये पहुंच गया है। 60 रुपये की बढ़ोतरी के साथ अब शिमला सहित अन्य क्षेत्रों में होम डिलिवरी के साथ घरेलू उपभोक्ताओं को 1015 रुपये देने पड़ेंगे। राजधानी शिमला में 57.75 रुपये डिलिवरी चार्ज तय है। घरेलू उपभोक्ताओं को 31 रुपये की सब्सिडी बैंक खातों में वापस मिलेगी। हिमाचल में व्यावसायिक गैस सिलिंडर 114 रुपये महंगा हो गया है। अब डिलिवरी सहित उपभोक्ताओं को सिलिंडर लेने के लिए 2075 रुपये चुकाने होंगे। शनिवार से शादियों का सीजन शुरू हो गया है। इस दौरान कॉमर्शियल सिलिंडरों की मांग भी कई गुना बढ़ जाती है। बुकिंग पर पाबंदी लगने से ऐन वक्त पर आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे आयोजनों में समस्या आ सकती है।
हिमाचल प्रदेश में बीते कई दिनों से मौसम शुष्क बना हुआ है। वहीं आज मौसम विभाग ने प्रदेश के चार जिलों में हीट वेव के चलने का अलर्ट जारी किया है। IMD के अनुसार आज (रविवार) को प्रदेश के कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, और सोलन जिला में हीटवेव लने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार इसके बाद प्रदेश में मौसम में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा। 11 मार्च से प्रदेश पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होगा। इसका प्रदेश में बड़ा असर देखने को मिलेगा। इसके बाद प्रदेश में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू होने की संभावना है। IMD का पूर्वानुमान है कि 11 से 13 मार्च के बीच प्रदेश में मौसम में बड़ा बदलाव आ सकता है।
इस अवधि में मध्य और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज के साथ आंधी और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों के कुछ क्षेत्रों में 11 मार्च के आसपास गरज और तेज हवाओं के लिए चेतावनी जारी की है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में भी तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन से चार दिनों तक न्यूनतम और अधिकतम तापमान में विशेष बदलाव नहीं होगा। हालांकि, मौसम बदलने के बाद मध्य और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तापमान में 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में तय किया गया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में प्रस्तावित बदलावों पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार, जो पंचायतें बेस ईयर 2010 से लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रही हैं, उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में फिर से आरक्षित नहीं किया जाएगा। कैबिनेट ने सोशल सिक्योरिटी पेंशन नियम, 2010 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत ‘बेसहारा’ शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और लाभ लेने के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नए नियमों के अनुसार जिन महिलाओं को उनके पति ने छोड़ दिया है, जो उनके साथ नहीं रह रही हैं और जिनके पास आय का कोई अलग स्रोत नहीं है, उन्हें बेसहारा महिला माना जाएगा।
सरकार ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति के तहत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का भी फैसला किया है, जिससे राज्य के बच्चों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने वन-टाइम एमनेस्टी स्कीम का लाभ लेने के बावजूद शुरू न हो सके 15 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को रद्द करने की मंजूरी दी। साथ ही मंडी जिले के पंडोह में 10 मेगावाट का छोटा जलविद्युत परियोजना भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है, बशर्ते बोर्ड राज्य सरकार को अनुपयोगी जमीन वापस करेगा। इसके बदले राज्य को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली और 5 प्रतिशत बिजली अपने हिस्से के रूप में मिलेगी। कैबिनेट ने सिंगल विलेज और मल्टी विलेज जल योजनाओं के इन-विलेज इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्राम पंचायतों को सौंपने के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस पॉलिसी को मंजूरी दी।
दूध उत्पादकों को संगठित करने के लिए कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के डेयरी किसानों को मिलाकर धगवार में रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड बनाने की स्वीकृति दी गई। धगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन और प्रबंधन के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। कैबिनेट ने चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर हेली-टैक्सी सेवा की उड़ानों को सप्ताह में तीन से बढ़ाकर 12 करने का फैसला किया। अब सप्ताह में छह दिन रोज़ दो उड़ानें संचालित होंगी और राज्य सरकार ऑपरेशन के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग देगी। जल शक्ति विभाग में जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन केंद्र से फंड न मिलने के कारण राज्य के संसाधनों से जारी करने का निर्णय लिया गया।
मंत्रिमंडल ने तकनीकी शिक्षा विभाग के सरकारी इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में 60 जूनियर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भरने को मंजूरी दी। वहीं सहकारिता विभाग में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के दो और इंस्पेक्टर कोऑपरेटिव सोसाइटीज के 30 पद भरने की अनुमति दी गई। शिक्षा विभाग के स्पोर्ट्स हॉस्टलों में 16 कोचों की भर्ती को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही हमीरपुर जिले के खरड़ी स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल की क्षमता बढ़ाकर 100 बेड करने और इसका नाम स्टेट लेवल स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रखने का फैसला किया गया। कैबिनेट ने ऊना जिले के गगरेट में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिस स्थापित करने, नूरपुर में पुलिस पोस्ट कोटला को पुलिस स्टेशन में अपग्रेड करने और टाहलीवाल में फायर पोस्ट को सब फायर स्टेशन में बदलने को भी मंजूरी दी।
शिमला जिले की कोटखाई तहसील के मौजा कुफ्टू और सिरमौर जिले के पांवटा साहिब तहसील के मौजा हरिपुर टोहाना में जमीन केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए शिक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित करने का निर्णय भी लिया गया।मंत्रिमंडल ने लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों के लिए वर्ष 2016 में चयनित बचे सात उम्मीदवारों को पटवारी के रिक्त पदों पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश लीज नियम, 2013 में संशोधन कर हिमुडा को 80 वर्ष तक की भूमि लीज देने की अनुमति भी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत उन पार्ट-टाइम वाटर कैरियर्स की सेवाएं नियमित करने का निर्णय लिया गया है, जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक 11 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।
पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है।
क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।
भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।
आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।
आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।
पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।
आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।
आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।
पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।
एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में आज मैच होने वाला है। भारत-पाकिस्तान के बीच मैच का मुकाबला हमेशा से रोमांचक रहा है। इसे देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह देखा जाता था। लेकिन इस बार इस मैच को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोग भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर गुस्से में है। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस मैच का जोरो से बहिष्कार किया जा रहा है। साथ ही पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों ने भी इस मैच पर कड़ा विरोध जताया है। अब तो भाजपा के कई सहयोगी भी इस मैच के विरोध में हैं। हालांकि क्रिकेट फैंस इसे लेकर अलग बंटे हुए हैं। इस मैच का कहीं विरोध किया जा रहा है, तो कहीं टीम इंडिया की जीत के लिए पूजा भी हो रही है।
नई खेल नीति के मुताबिक
सरकार की नई खेल नीति के मुताबिक भारत ने फैसला किया है भारत पाकिस्तान के साथ कोई भी द्विपक्षीय मैच नहीं खेलेगा पर बहुपक्षीय टूर्नामेंट जैसे कि एशिया कप या ICC प्रतियोगिता में पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।
विरोध की वजह
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच यह पहला इंटरनेशनल मैच है। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमला हुआ था जिसमें कई भारतीय मरे थे और कहा जा रहा था कि इस हमले के पीछे पकिस्तान का हाथ है। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर किया। इसी वजह से भारत के लोगों में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर नाराजगी और गुस्सा है।
ओवैसी की पार्टी AIMIM ने किया प्रदर्शन
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या मैच से कमाया जाने वाला मुनाफ़ा पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों की जान से ज्यादा कीमती है। अहमदाबाद में AIMIM ने भारत-पाकिस्तान मैच के खिलाफ प्रदर्शन किया।
AAP कार्यकर्ताओं ने किया बहिष्कार
चंडीगढ़ में AAP कार्यकर्ताओं ने भी 'BCCI शर्म करो' के नारे लगाए
शिंदे शिवसेना नेता ने किया विरोध
शिंदे शिवसेना के नेता संजय निरूपम ने इस मैच के विरोध में कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत को क्षति पहुंचाने वाली नीति अपनाई है, पाकिस्तान ने आतंकियों को पाला पोषा है और इन आतंकियों ने भारत के निर्दोष लोगों पर हमले किए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहिए।
शिवसेना उद्धव गुट ने मैच के विरोध में तोड़ डाले टीवी
पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने किया बहिष्कार
पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि वे भारत-पाकिस्तान मैच के साथ पूरे एशिया कप का बहिष्कार कर रहे हैं हूं। उन्होंने कहा कि पुलवामा, पहलगाम, पठानकोट जैसे आतंकी हमलों को भुलाया नहीं जा सकता।
पीड़ित परिवारों ने जाहिर किया गुस्सा
पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पुणे के संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने कहा कि यह मैच नहीं होना चाहिए था। यह बहुत ही शर्मनाक है। अभी हाल में पहलगाम हमला हुआ और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। तो इसके बाद यह मैच नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा यह भी कहा कि इन्हें परवाह नहीं कि कोई मर गया।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड दोनों ही देवताओं की भूमि है जहाँ प्रत्येक पर्वत, प्रत्येक घाटी और प्रत्येक गाँव में देवताओं की समृद्ध परंपराएँ आज भी जीवंत हैं। बता दें कि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से श्री चालदा महासू सोमवार को हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो चुके है। इतिहास में देवता पहली बार हिमाचल पहुंच रहे है। हिमालयी लोक संस्कृति में महासू देवता न्याय, आस्था और परंपरा के प्रतीक माने जाते हैं। चालदा महासू देवता जिन्हें न्याय का देवता कहा जाता है, जो एक स्थान पर स्थिर नहीं रहते है। वे भगवान शिव के अंश माने जाते है। चालदा महासू महाराज पालकी में बैठकर पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते है, लोगों की समस्याएं सुनते है, न्याय करते है और अपराधियों को दंड देते है।
विशेषकर जौनसार बावर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और शिमला जिले में चालदा महाराज को लेकर लोगों में असीम आस्था है। चालदा महासू को छत्रधारी भी कहा जाता है। चालदा महासू की यात्रा जौनसार बावर, और सिरमौर में एक पर्व के जैसे मनाई जाती है। उनकी वार्षिक प्रवास यात्रा बरवांश कहलाती है जिसमें विशेष पूजा का आयोजन होता है। यात्रा में फाड़का (तांबे का बर्तन) छत्र और पालकी आगे चलती है जिसके पीछे भक्त चलते हैं।
कौन है चालदा महासू देवता:
चालदा महासू चार महासू भाइयों में सबसे छोटे भाई है अन्य तीन भाई बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू (बौठा महासू) भी भगवान शिव के ही रूप माने गए हैं। इनमें बासिक महासू सबसे बड़े हैं, जबकि बौठा महासू, पबासिक महासू दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। बौठा महासू का मंदिर हनोल में, बासिक महासू का मैंद्रथ में और पबासिक महासू का मंदिर बंगाण क्षेत्र के ठडियार व देवती-देववन में है। जबकि, चालदा महासू हमेशा जौनसार-बावर, बंगाण, फतह-पर्वत व हिमाचल क्षेत्र के प्रवास पर रहते हैं।
इनकी पालकी को क्षेत्रीय लोग पूजा-अर्चना के लिए नियमित अंतराल पर एक जगह से दूसरी जगह प्रवास पर ले जाते हैं। देवता के प्रवास पर रहने से कई क्षेत्रों में दशकों बाद चालदा महासू के दर्शन नसीब हो पाते हैं। कुछ इलाकों में तो देवता के दर्शन की चाह में पीढ़ियां गुजर जाती हैं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना के साथ साथ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर, सोलन, शिमला, और जुब्बल तक महासू देवता को इष्ट देव (कुल देवता) के रूप में पूजा जाता है। इन क्षेत्रों में महासू देवता को न्याय के देवता और मंदिर को न्यायालय के रूप में मान्यता मिली हुई है।
कहां स्थित है चारों महासू का मुख्य मंदिर:
उत्तराखंड के हनोल में चारों महासू भाइयों का मुख्य मंदिर स्थित है। इस मंदिर में मुख्य रूप से बूठिया महासू (बौठा महासू) की पूजा होती है। मैंद्रथ नामक स्थान पर बासिक महासू की पूजा होती है। टोंस नदी के दायें तट पर बंगाण क्षेत्र में स्थित ठडियार (उत्तरकाशी) गांव में पबासिक महासू पूजे जाते हैं। सबसे छोटे भाई चालदा महासू भ्रमणप्रिय देवता हैं, जो कि 12 वर्ष तक उत्तरकाशी और 12 वर्ष तक देहरादून जिले में भ्रमण करते हैं। इनकी एक-एक वर्ष तक अलग-अलग स्थानों पर पूजा होती है, जिनमें हाजा, बिशोई, कोटी कनासर, मशक, उदपाल्टा, मौना आदि पूजा स्थल प्रमुख हैं। महासू के मुख्य धाम हनोल मंदिर में सुबह-शाम नौबत बजती है और दीया-बत्ती की जाती है।
कुछ सप्ताह पहले पहुंच जाता है बकरा:
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि चालदा महासू का बकरा कुछ सप्ताह पूर्व ही उस स्थान पर पहुंच जाता जाता है जिस स्थान पर महाराज की अगली देव यात्रा होती है। यह बकरा देवता की इच्छा और संकेत का प्रतीक होता है। हैरानी की बात यह है की ये बकरा बिना किसी मानवीय निर्देश के अपनी यात्रा पूरी करता है और सही स्थान पर पहुंच जाता है।
क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।
यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।
कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?
यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 30 दिसंबर से इस मामले में अंतिम सुनवाई शुरू करने के आदेश जारी किए हैं। सरकारी व अर्ध-सरकारी विभागों, निगमों और बोर्डों में की जा रही आउटसोर्स भर्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने मामले में आंशिक सुनवाई की। खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे सरकार द्वारा लागू की गई आउटसोर्स नीति की वैधता के प्रश्न तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य में आउटसोर्स भर्तियों की आड़ में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। कई गैर-पंजीकृत और अनुभवहीन संस्थाओं को मैनपावर उपलब्ध कराने का जिम्मा सौंपा गया है।
अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि नई टेंडर प्रक्रिया के बावजूद अधिकांश मामलों में आउटसोर्स कर्मचारी वही रहते हैं, केवल ठेकेदार बदल जाते हैं, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कमीशन के लेन-देन तक सीमित होकर रह जाती है। कई कर्मचारी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया कि हजारों नियमित पदों के बावजूद उनके विरुद्ध आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्तियां की गई हैं, जबकि नियमों के अनुसार आउटसोर्स व्यवस्था केवल आपात परिस्थितियों में ही लागू की जानी चाहिए। याचिकाओं में इस पूरे मामले की एसआईटी जांच की मांग की गई थी, हालांकि अदालत ने इसे फिलहाल उचित नहीं माना।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विस्तृत जांच के बजाय अभी आउटसोर्स नीति की वैधता पर ही विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2024 को आउटसोर्स भर्तियों पर पूर्ण रोक लगाई थी और 8 जनवरी 2025 को इस रोक को हटाने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार ने इन आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगा दी थी।
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के नौगाम पुलिस थाने में शुक्रवार रात करीब 11:20 बजे भारी विस्फोट हुआ। इसमें नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 पुलिसकर्मियों समेत 32 लोग घायल हो गए। धमाके से लगी भीषण आग में वहां खड़े एक दर्जन से अधिक वाहन जल गए। सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल मामले में हाल ही में जब्त किए गए विस्फोटकों के एक बड़े जखीरे की सैंपलिंग करते समय ये धमाका हुआ है। जब्त किया विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट और एनपीएस था।
विस्फोट होने के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया। वहीं, घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्ते भी बंद कर दिए। सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल से जुड़े डॉ. मुजम्मिल गनई के दो ठिकानों से 360 किलो और 2,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट व एनपीएस जब्त किया था। बताया जा रहा है कि विस्फोटक सामग्री को पुलिस नौगाम पुलिस स्टेशन में लाई गई थी। इस मॉड्यूल के मुजम्मिल समेत 9 संदिग्धों को पुलिस अब तक गिरफ्तार कर चुकी है।
विस्फोट के कारणों की जांच अभी जारी है। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने कहा कि पुलिस थाना नौगाम की एफआईआर संख्या 162/2025 की जांच के दौरान, 9 और 10 नवंबर 2025 को फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ, रसायन और रीजेंट बरामद किए गए थे। यह बरामदगी, बाकी बरामदगी की तरह, पुलिस स्टेशन नौगाम के खुले क्षेत्र में सुरक्षित रूप से ले जाकर रखी गई थी। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जम्मू-कश्मीर पुलिस इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है।
नेपाल में हुए हिंसक आंदोलन के बाद आज गुरुवार को हालात कंट्रोल में है। लेकिन फिर भी सेना ने एहतियातन राजधानी समेत कई इलाकों में कर्फ्यू लगा रखा है। इस बीच, नेपाल में अंतरिम PM बनाने के लिए सेना-प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार,आर्मी हेडक्वार्टर में सुबह 10:30 बजे बातचीत शुरू हो गई थी। आपको बता दें कि सेना ने सभी पार्टी और नेताओं को भी इसके लिए अपनी अपनी राय देने को कहा है।
मीडिया के कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पद के लिए नेपाल के लाइट मैन कहे जाने वाले कुलमान घिसिंग और सुशीला कार्की का नाम आगे आ रहा है। हालांकि PM की रेस में कुलमान घिसिंग का नाम सुशीला कार्की से भी आगे चल रहा है। अंतिम फैसला देखना काफी दिलचस्प होगा कि किसे PM के नेतृत्व के लिए आगे किया जाता है।
सुशीला कार्की
सुशीला कार्की भ्रष्टाचार विरोधी शख्सियत के तौर पर जानी जाती हैं। इन्होनें भ्रष्टाचार के विरुद्ध कई बार सख्त बयान दिया है। आपको बता दें कि इन्होनें पॉलिटिकल साइंस में BHU से MA किया है। 2016 में वह नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी।
कुलमान घिसिंग
कुलमान घिसिंग को नेपाल के 'लाइट मैन' भी कहा जाता है। उन्होंने जमशेदपुर, झारखण्ड से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की है। 1994 में नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) से जुड़े और इसके बाद घाटे में चल रहे NEA को मुनाफे में बदल दिया। नेपाल की बिजली व्यवस्था, जो कि बहुत खराब थी, उसे भी सुधारने का श्रेय इन्हें ही जाता है।
नेपाल में इस तरह हुई हिंसक आंदोलन की शुरुआत
सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफार्म को बैन किया था। ये कहकर कि इन प्लेटफॉर्म्स ने रजिस्ट्रशन नहीं करवाए हैं। इसके बाद 8 सितंबर को सरकार के भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ नेपाल के युवाओं ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन शुरू कर दिए। यह प्रदर्शन धीरे धीरे हिंसा में प्रवर्तित हो गए और कई लोग इसमें मारे गए व कई ज़ख़्मी हुए। इसी बीच PM समेत कई मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। साथ ही इस दौरान प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सेना के सामने सामाजिक और राजनितिक सुधार को लेकर कई मांगे भी रखीं।
आगे क्या होगा
बहुमत वाली पार्टी को सरकार बनाने के लिए कहा जायेगा। विशेषज्ञ का मानना है कि 6 महीने में चुनाव कराने के लिए अंतरिम सरकार बन सकती है।
साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई, मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।
यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा।
16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी
अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।
साहिर-अमृता की पहली मुलाकात
ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"
साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'
आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से
साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"
अमृता लिखती है-
"यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगायी थी
चिंगारी तूने दी थी
ये दिल सदा जलता रहा
वक्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा
ज़िन्दगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले "
वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।"
लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया।
अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना
अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।
इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था-
"मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी"
इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।
जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है।
उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण दुनिया से कटा रहता है।
कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं।
बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है।
प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम
यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच में एक मूर्ति बन जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था।
दांत और बाल आज भी संरक्षित
इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है।
गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान
मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया।
सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में
गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।
बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के बाद आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं। इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।
हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।
ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।