•   Monday Oct 12
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Sukhu says the court cannot frame new rules; raises questions regarding sports grounds as well.
In Politics

सुक्खू बोले- कोर्ट नए नियम नहीं बना सकता, खेल मैदानों पर भी उठाया सवाल

हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU) शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने न्यायपालिका और सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक फैसलों से कई बार सरकार के सामने व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।  सीएम सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कोर्ट को भर्ती एवं सेवा नियमों के दायरे में रहना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2003 की उस नीति का जिक्र किया, जिसमें अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब दो दशक बाद अदालत के आदेश से ऐसे वित्तीय लाभ देने की स्थिति बनी, जबकि उस समय के भर्ती नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके जायज वित्तीय लाभों से वंचित नहीं करना चाहती, लेकिन सरकार को राजकोष और प्रदेश की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनहित, नियमों और वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन जरूरी है।  स्कूलों के खेल मैदानों पर भी बोले सीएम सुक्खू ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी राज्य में पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्कूलों और सामुदायिक खेल मैदानों का बेहतर और साझा उपयोग किया जाना चाहिए।  उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए एक सरकारी स्कूल के खेल मैदान के इस्तेमाल की अनुमति लेने के लिए सरकार को 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान करना पड़ा। हाईकोर्ट ने हमीरपुर के बरसर स्थित सरकारी स्कूल के मैदान में राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस  समारोह की अनुमति देते हुए छात्रों के वेलफेयर फंड में 5 लाख रुपये जमा कराने की शर्त रखी थी। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया समेत कई न्यायिक हस्तियां मौजूद रहीं। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कानून के विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का वाहक बनने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

Weather turns in Himachal; snowfall on high peaks; alert issued for rain and squalls.
In News update

हिमाचल में बदला मौसम का मिजाज, ऊंची चोटियों पर बर्फबारी; बारिश और अंधड़ का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में अक्टूबर के महीने में ही मौसम ने करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। रोहतांग, कुंजम, बारालाचा और शिंकुला दर्रे की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है।  मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को हिमाचल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं अगले कुछ दिनों तक भी मौसम खराब रह सकता है। 13 और 14 अक्टूबर को कुछ क्षेत्रों में अंधड़ को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान बारिश और ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना है।  बारिश और बर्फबारी के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। जनजातीय और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रातें काफी ठंडी होने लगी हैं। कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि केलांग में 4.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।  उधर, खराब मौसम का असर पहाड़ी मार्गों पर भी पड़ा है। शिंकुला और बारालाचा दर्रे में बर्फबारी के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और पुलिस ने फंसे पर्यटकों व वाहनों को रेस्क्यू किया। लोगों को खराब मौसम के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

Doctor suspended in Una maternal and infant death case; action taken for having a switched-off mobile and unauthorized absence from duty.
In News

ऊना में जच्चा-बच्चा मौत मामले में डॉक्टर निलंबित, मोबाइल बंद मिलने और ड्यूटी से गैरहाजिरी पर कार्रवाई

ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के दौरान 33 वर्षीय रीना देवी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में हिमाचल सरकार ने महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रीना देवी को 7 अक्तूबर को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जबकि 9 अक्तूबर को उनकी और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।  मामले के बाद परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास चौहान की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान डॉ. प्रियंका शर्मा उपलब्ध नहीं थीं और उनके दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। ड्यूटी से गैरहाजिरी और जांच में उपलब्ध न होने को देखते हुए सरकार ने निलंबन की कार्रवाई की है।  निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, शिमला रहेगा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले मौत के लिए चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

Syllabus for Classes 9 and 10 to Change in Himachal; New Books from 2027-28
In Education

हिमाचल में बदलेगा 9वीं-10वीं का सिलेबस, 2027-28 से नई किताबें

हिमाचल प्रदेश में कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नई किताबें लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में इन कक्षाओं की पढ़ाई को एनसीईआरटी पैटर्न के अनुरूप किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आधुनिक और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप पढ़ाई करवाने पर जोर रहेगा। नई किताबों और सिलेबस को तैयार करने की प्रक्रिया के बाद इन्हें स्कूलों में लागू किया जाएगा। इससे हिमाचल के विद्यार्थियों की पढ़ाई को एनसीईआरटी के पैटर्न के साथ जोड़ा जा सकेगा।

Shimla Police's crackdown on drug smugglers this year
In News

शिमला पुलिस की इस वर्ष की नशा तस्करों के खिलाफ कार्यवाही

वर्ष 2026 में शिमला पुलिस ने नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक संगठित, लक्ष्य-आधारित और नेटवर्क-केंद्रित स्वरूप दिया है। कार्रवाई का फोकस केवल मादक पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रखते हुए नशे की सप्लाई चेन के स्रोत तक पहुंचने, मुख्य सप्लायरों एवं सरगनाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने, तस्करों के आर्थिक आधार पर प्रहार करने तथा आदतन तस्करों के विरुद्ध निवारक कानूनों के प्रभावी उपयोग पर रहा है। 1. *NDPS मामले एवं गिरफ्तारियाँ* दिनांक 09 अक्टूबर 2026 तक शिमला पुलिस द्वारा NDPS Act के अंतर्गत कुल 271 मामले दर्ज किए गए हैं तथा 549 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।दर्ज मामलों में 22 वाणिज्यिक मात्रा तथा 177 मध्यवर्ती मात्रा के मामले शामिल हैं।  2. *Backward Linkage एवं मुख्य सप्लायरों के विरुद्ध कार्रवाई* वर्ष 2026 में अब तक शिमला पुलिस ने  Backward Linkages के माध्यम से 80 मुख्य सप्लायर्स को गिरफ्तार किया गया तुलनात्मक रूप से वर्ष 2025 में 8 तथा वर्ष 2024 में 14 Backward Linkages दर्ज किए गए थे। इस प्रकार वर्ष 2026 में पिछले दोनों वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।जो पिछले तीन सालों की कुल गिरफ्तारियों से भी ज्यादा है। वर्ष 2026 में अब तक शिमला पुलिस द्वारा 61 ड्रग सप्लाई नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 4 तथा वर्ष 2024 में 3 नेटवर्क ध्वस्त किए गए थे। इस प्रकार वर्ष 2026 में नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई में उल्लेखनीय तेजी आई है। Backward Linkage आधारित जांच के माध्यम से शिमला में सक्रिय तस्करों के पीछे मौजूद सप्लायरों और संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इससे नशा तस्करी के मामलों में जांच को स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर सप्लाई के स्रोत तक ले जाना संभव हुआ है। 4. *मादक पदार्थों की प्रमुख बरामदगियां* दिनांक 09 अक्टूबर 2026 तक शिमला पुलिस द्वारा विभिन्न NDPS मामलों में निम्नलिखित मादक पदार्थ एवं अन्य सामग्री बरामद की गई है: हेरोइन/चिट्टा: 5.04 किलोग्राम,  Meth Crystal: लगभग 58.5 ग्राम;  वाणिज्यिक मात्रा में LSD चरस: लगभग 15.5 किलोग्राम;  अफीम: लगभग 14 किलोग्राम;  पॉपी स्ट्रॉ: लगभग 5 किलोग्राम;  कैनाबिस (भांग) के पौधे: 10,00,000;  अफीम/पोस्ता के पौधे: लगभग 6,000;   इत्यादी। हेरोइन/चिट्टा की एग्रेसिव बरामदगी के लिए किए गए प्रयासों के चलते वर्ष 2026 में सबसे ज्यादा 5.04 किलोग्राम चिट्ठा बरामद किया गया, जबकि वर्ष 2025 में यह लगभग 1.5 किलोग्राम तथा वर्ष 2024 में लगभग 2 किलोग्राम थी। इस प्रकार हेरोइन/चिट्टा की बरामदगी में पिछले दोनों वर्षों की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। 5. *नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई* नशा तस्करी के आर्थिक आधार पर प्रहार करने के लिए शिमला पुलिस द्वारा Financial Investigation को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2026 में अब तक 12 NDPS मामलों में वित्तीय जांच की गई है तथा नशा तस्करी से अर्जित ₹12.61 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। *तुलनात्मक रूप से वर्ष 2024 एवं 2025 में इस प्रकार की वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई ही नहीं की गई थी।* इस प्रकार वर्ष 2026 में नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान तथा उनके आर्थिक आधार को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। 6. *आदतन नशा तस्करों के विरुद्ध PITNDPS Act के तहत कार्रवाई* आदतन नशा तस्करों के विरुद्ध निवारक कार्रवाई करते हुए वर्ष 2026 में अब तक 40 तस्करों को PITNDPS Act के तहत निरुद्ध किया गया है। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 3 तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, जबकि वर्ष 2024 में इस अधिनियम के तहत कोई निरुद्धीकरण नहीं हुआ था। वर्ष 2026 में इस अधिनियम का प्रभावी उपयोग आदतन नशा तस्करों को निवारक रूप से रोकने तथा उनके द्वारा बार-बार किए जाने वाले अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 7. *अवैध कब्जों एवं अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई* नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के अवैध ठिकानों को पहली बार चिन्हित कर संबंधित विभागों के समन्वय से उनको डिस्मेंटल करवाया जा रहा है। इसी क्रम में FIR No. 166, धारा 18 NDPS Act, पुलिस थाना रोहड़ू के तहत 108 ग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार आरोपी अर्जुन पाल से संबंधित जांच में पाया गया कि उसने पटसारी क्षेत्र में PWD की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर अस्थायी ढाबा/रेस्टोरेंट बनाया था। संबंधित विभाग द्वारा पुलिस बल की सहायता से उक्त अवैध निर्माण को ध्वस्त कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया। यह कार्रवाई शिमला जिला में पहलीबार अमल में लाई गई है जो नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के विरुद्ध एक एग्रेसिव और मजबूत कार्यवाही करने की रणनीति का हिस्सा है। वर्ष 2023,  2024 एवं 2025 में ऐसी कार्यवाहियां की ही नहीं हैं। शिमला पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य केवल नशा तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई के स्रोत को समाप्त करना, इस अवैध कारोबार के आर्थिक आधार को तोड़ना और इसके पूरे नेटवर्क को निष्क्रिय करना है। नशे के विरुद्ध यह कार्रवाई कठोरता, निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे भी जारी रहेगी।

BL School Kunihar organised the 32nd annual sports competition; students excelled in academics and sports.
In Sports

बीएल स्कूल कुनिहार में 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता, खेलों के साथ पढ़ाई में भी विद्यार्थी आगे

बी.एल. वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार में आयोजित 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आज भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया । इस आयोजन  में विद्यालय के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया।कार्यक्रम का मंच संचालन शिवानी शर्मा ने किया। विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।विद्यालय के शारीरिक शिक्षक अमर देव एवं शारीरिक शिक्षिका अरुणा शर्मा ने बताया कि वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया था। विद्यार्थियों ने मास पी.टी. की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। शरीक शिक्षिका अरुणा ने बताया की दिनांक 9 अक्तूबर को  नर्सरी से युकेजी कक्षा तक बच्चों  तक के विद्यार्थियों के लिए,  किड्स रेस, रिंग रेस सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दिनांक 10  अक्तूबर को पहली से पांचवीं कक्षा  के विद्यार्थियों के लिए 100 मीटर दौड़, व् अन्य रेस करवाई गई , सभी बच्चों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बी.एल. स्कूल कुनिहार के विद्यार्थी खेलकूद के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी तथा विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को गोल्ड, सिल्वर एवं ब्रॉन्ज मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। मेडल प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था । पी टी ए अध्यक्ष वी समस्त सदस्यों ने वार्षिक खेल कूद प्रतियोगिता के लिए बधाई दी । कार्यक्रम में विद्यालय के उपप्रधानाचार्य पुरशोत्तम लाल, मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा, समस्त अध्यापक वर्ग तथा विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का समापन विद्यार्थियों में खेल भावना, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करते हुए हुआ।

Dog unleashed on police investigating drug trafficking; Head Constable bitten.
In News update

नशा तस्करी की जांच करने पहुंची पुलिस पर छोड़ा कुत्ता, हेड कॉन्स्टेबल को काटा

हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी की सूचना पर जांच करने पहुंची पुलिस टीम पर कुत्ता छोड़ने का मामला सामने आया है। कार्रवाई के दौरान एक हेड कॉन्स्टेबल को कुत्ते ने पेट में काट लिया, जिससे वह घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम नशा तस्करी से जुड़ी सूचना की जांच के लिए मौके पर पहुंची थी। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों ने पुलिस टीम को रोकने के लिए कुत्ता छोड़ दिया। कुत्ते ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और हेड कॉन्स्टेबल के पेट में काट लिया। घटना के बाद घायल पुलिसकर्मी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और नशा तस्करी से जुड़े पहलुओं के साथ पुलिस टीम पर हमले की भी कार्रवाई की जा रही है

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सुक्खू बोले- कोर्ट नए नियम नहीं बना सकता, खेल मैदानों पर भी उठाया सवाल

In Politics
Sukhu says the court cannot frame new rules; raises questions regarding sports grounds as well.

हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU) शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने न्यायपालिका और सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक फैसलों से कई बार सरकार के सामने व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।  सीएम सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कोर्ट को भर्ती एवं सेवा नियमों के दायरे में रहना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2003 की उस नीति का जिक्र किया, जिसमें अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब दो दशक बाद अदालत के आदेश से ऐसे वित्तीय लाभ देने की स्थिति बनी, जबकि उस समय के भर्ती नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके जायज वित्तीय लाभों से वंचित नहीं करना चाहती, लेकिन सरकार को राजकोष और प्रदेश की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनहित, नियमों और वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन जरूरी है।  स्कूलों के खेल मैदानों पर भी बोले सीएम सुक्खू ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी राज्य में पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्कूलों और सामुदायिक खेल मैदानों का बेहतर और साझा उपयोग किया जाना चाहिए।  उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए एक सरकारी स्कूल के खेल मैदान के इस्तेमाल की अनुमति लेने के लिए सरकार को 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान करना पड़ा। हाईकोर्ट ने हमीरपुर के बरसर स्थित सरकारी स्कूल के मैदान में राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस  समारोह की अनुमति देते हुए छात्रों के वेलफेयर फंड में 5 लाख रुपये जमा कराने की शर्त रखी थी। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया समेत कई न्यायिक हस्तियां मौजूद रहीं। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कानून के विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का वाहक बनने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।

बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 8 महीने में 237 सैंपल फेल

In Health
Serious questions raised over medicine quality in Badi; 237 samples failed in 8 months.

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ महीनों में बद्दी और आसपास के फार्मा उद्योगों से जुड़े 237 दवा सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। इनमें बुखार, हार्ट समेत अलग-अलग बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में लगातार हिमाचल में निर्मित दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे न उतरने के मामले सामने आते रहे हैं। हालिया ड्रग अलर्ट में भी हिमाचल की कई दवाएं फेल हुई हैं।  बद्दी की फार्मा कंपनियों से जुड़े मामलों में पहले भी हार्ट संबंधी दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। अक्टूबर 2024 के एक ड्रग अलर्ट में बद्दी की एक कंपनी की Calcium Gluconate दवा, जिसका इस्तेमाल कैल्शियम की कमी और कुछ आपात स्थितियों में किया जाता है, गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी था I वहीं, 2025 में बद्दी की एक फार्मा यूनिट को बार-बार सैंपल फेल होने और Good Manufacturing Practices (GMP) में कमियों के चलते कुछ दवाओं का उत्पादन रोकने के निर्देश दिए गए थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कंपनियों के सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं, उनके खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने या उत्पादन रोकने की कार्रवाई के बावजूद क्या वास्तव में प्रोडक्शन पूरी तरह बंद हो रहा है? इसी को लेकर विभागीय कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, हर फेल सैंपल का मतलब यह नहीं होता कि पूरी कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। किसी विशेष बैच या दवा के निर्धारित गुणवत्ता पैरामीटर में कमी मिलने पर संबंधित बैच पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में कंपनियों को नोटिस, बाजार से बैच वापस लेने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।  बद्दी  देश  के प्रमुख फार्मा हब में शामिल है, इसलिए यहां दवाओं के गुणवत्ता मानकों को लेकर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं मरीजों की सुरक्षा और ड्रग रेगुलेशन की प्रभावशीलता से सीधे जुड़ जाती हैं। हाल के वर्षों में अधिकारियों ने कुछ इकाइयों के खिलाफ उत्पादन रोकने और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की है। 

हिमाचल में बदलेगा 9वीं-10वीं का सिलेबस, 2027-28 से नई किताबें

In Education
Syllabus for Classes 9 and 10 to Change in Himachal; New Books from 2027-28

हिमाचल प्रदेश में कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नई किताबें लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में इन कक्षाओं की पढ़ाई को एनसीईआरटी पैटर्न के अनुरूप किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आधुनिक और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप पढ़ाई करवाने पर जोर रहेगा। नई किताबों और सिलेबस को तैयार करने की प्रक्रिया के बाद इन्हें स्कूलों में लागू किया जाएगा। इससे हिमाचल के विद्यार्थियों की पढ़ाई को एनसीईआरटी के पैटर्न के साथ जोड़ा जा सकेगा।

बीएल स्कूल कुनिहार में 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता, खेलों के साथ पढ़ाई में भी विद्यार्थी आगे

In Sports
BL School Kunihar organised the 32nd annual sports competition; students excelled in academics and sports.

बी.एल. वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कुनिहार में आयोजित 32वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आज भव्य एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया । इस आयोजन  में विद्यालय के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। विद्यालय परिवार ने मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया।कार्यक्रम का मंच संचालन शिवानी शर्मा ने किया। विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।विद्यालय के शारीरिक शिक्षक अमर देव एवं शारीरिक शिक्षिका अरुणा शर्मा ने बताया कि वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया था। विद्यार्थियों ने मास पी.टी. की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। शरीक शिक्षिका अरुणा ने बताया की दिनांक 9 अक्तूबर को  नर्सरी से युकेजी कक्षा तक बच्चों  तक के विद्यार्थियों के लिए,  किड्स रेस, रिंग रेस सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दिनांक 10  अक्तूबर को पहली से पांचवीं कक्षा  के विद्यार्थियों के लिए 100 मीटर दौड़, व् अन्य रेस करवाई गई , सभी बच्चों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना, आत्मविश्वास तथा दृढ़ संकल्प की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बी.एल. स्कूल कुनिहार के विद्यार्थी खेलकूद के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी तथा विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को गोल्ड, सिल्वर एवं ब्रॉन्ज मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। मेडल प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बन रहा था । पी टी ए अध्यक्ष वी समस्त सदस्यों ने वार्षिक खेल कूद प्रतियोगिता के लिए बधाई दी । कार्यक्रम में विद्यालय के उपप्रधानाचार्य पुरशोत्तम लाल, मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा, समस्त अध्यापक वर्ग तथा विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे। वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का समापन विद्यार्थियों में खेल भावना, उत्साह और नई ऊर्जा का संचार करते हुए हुआ।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

ऊना में जच्चा-बच्चा मौत मामले में डॉक्टर निलंबित, मोबाइल बंद मिलने और ड्यूटी से गैरहाजिरी पर कार्रवाई

In News
Doctor suspended in Una maternal and infant death case; action taken for having a switched-off mobile and unauthorized absence from duty.

ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसव के दौरान 33 वर्षीय रीना देवी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में हिमाचल सरकार ने महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। रीना देवी को 7 अक्तूबर को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जबकि 9 अक्तूबर को उनकी और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।  मामले के बाद परिजनों ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अस्पताल प्रशासन ने घटना की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास चौहान की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान डॉ. प्रियंका शर्मा उपलब्ध नहीं थीं और उनके दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले। ड्यूटी से गैरहाजिरी और जांच में उपलब्ध न होने को देखते हुए सरकार ने निलंबन की कार्रवाई की है।  निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, शिमला रहेगा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वह मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले मौत के लिए चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
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बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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