•   Wednesday Sep 02
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'Grow cannabis, play the lottery, and earn money, but don't ask the government for jobs' — Opposition corners the Sukhu government in the House.
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'भांग उगाओ, लॉटरी खेलो और पैसे कमाओ लेकिन सरकार से नौकरी मत मांगो', सदन में विपक्ष ने सुक्खू सरकार को घेरा

हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती और लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने दोनों मुद्दों को लेकर सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरकार पर घेरते हुए सवाल पूछा, "क्या सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी मांगने के बजाय भांग की खेती करे और लॉटरी खेले?" रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत रोजगार के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार भांग की खेती के जरिए रोजगार देने की बात कर रही है. उन्होंने कहा, "सरकार की योजना क्या है... वह चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी न मांगे, ये भांग की खेती करें, भांग उगाएं और रोजगार पाएं." उन्होंने भांग को नशे की ओर ले जाने वाला माध्यम बताते हुए सवाल उठाया कि भांग को वैध करने के बाद सरकार प्रदेश में चिट्टे पर कैसे रोक लगाएगी. रणधीर शर्मा ने लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जो युवा नशे से बच जाएंगे, उन्हें अब जुए की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिवाली के मौके पर युवाओं को लॉटरी शुरू करने का तोहफा देने जा रही है. उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद कई लोग अपनी कमाई गंवा सकते हैं और परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. रणधीर शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने भी प्रदेश में लॉटरी को बंद करने का फैसला लिया था. रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल खनन ही उद्योग नहीं है. उद्योग विभाग का काम राज्य में औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करना और उन्हें स्थापित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज को समझना मुश्किल है और उद्योग मंत्री खनन के पीछे पड़े हुए हैं, जबकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.     

Himachal gripped by fear of bears! Wild bears reaching homes and fields.
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भालुओं के आतंक से सहमा हिमाचल! घरों और खेतों तक पहुंच रहे जंगली भालू

 हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है? कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.

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'दुबई चले जाते हैं, लेकिन हमीरपुर जाने को तैयार नहीं डॉक्टर', मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी पर CM सुक्खू का जवाब

हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी सोमवार को सदन में उठा. सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर चंबा तो दूर हमीरपुर और नेरचौक जैसे शहरों में भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विज्ञापन जारी होने के बावजूद कई पद खाली रह जाते हैं. दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान चंबा सदर से विधायक नीरज नैय्यर ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नए भवन का हाल ही में उद्घाटन हुआ है. फिलहाल वहां तीन ओपीडी चल रही हैं, लेकिन अस्पताल को पूरी तरह सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न पदों पर कम से कम 150 से 200 नियुक्तियां करने की जरूरत है.  विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार को अलग तरीके से सोचने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा में 5 लाख रुपये के वेतन पर प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पद भरे नहीं जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा प्रदेश के एक कोने में स्थित है और यहां डॉक्टरों को लाना बड़ी चुनौती है. इसलिए चंबा के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को भी सुदृढ़ करने में सरकारों को लंबा समय लगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 40 वर्षों से ऐसी व्यवस्था चली आ रही है, जिसमें अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हो पाती. सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयास कर रही है.

Himachal Pradesh: Pensioners stage protest in Shimla over payment of pending financial dues; know their demands.
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हिमाचल प्रदेश: लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान को लेकर पेंशनरों का शिमला में धरना, जानें क्या है मांगें

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान मंगलवार को पेंशनरों के बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई आक्रोश रैली के दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान के आसपास यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। व्यवस्था संभालने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों के बीच इस दौरान बहस भी हुई। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का लाभ देने की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनर 166 माह के पे एरियर्स और पेंशन एरियर्स का भुगतान तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी करने का दिया था आश्वासन पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से संबंधित मांगों की अधिसूचना 31 जुलाई तक जारी करने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ गई। इसी के विरोध में मंगलवार को चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली आयोजित की गई। पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं किया जाता और मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों की लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पेंशनर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव का भी ऐलान किया जा सकता है।

Dispute erupts with Electricity Board team arriving to install smart meters; woman slaps Junior Engineer, causing a commotion at the scene.
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स्मार्ट मिटर लगाने पहुंची बिजली बोर्ड की टीम से विवाद, महिला ने JE को जड़ा थप्पड़ , मौके पर मचा हंगामा

हमीरपुर जिले के उझाण पटेरा गांव में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब बिजली बोर्ड की टीम उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलने पहुंची। स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते बिजली बोर्ड कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बहसबाजी शुरू हो गई। इसी दौरान एक महिला ने बिजली बोर्ड के कनिष्ठ अभियंता (जेई) को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर काफी देर तक तनाव और विवाद की स्थिति बनी रही। जानकारी के मुताबिक बिजली बोर्ड की टीम गांव में पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों के एक वर्ग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों ने मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत धीरे-धीरे तीखी बहसबाजी में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने के दौरान एक महिला और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के बीच तीखी कहासुनी हुई। इसी बीच महिला ने जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद बिजली बोर्ड कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। र्ड के जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर हंगामा हो गया और कर्मचारियों व ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ता मीटर बदलने की प्रक्रिया और बिजली बिल को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर बिजली बोर्ड की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जारी है। उझाण पटेरा गांव में हुई घटना ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजर है। एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।

Education board gets tough on dummy admissions; strict action to be taken against schools flouting rules.
In Education

डमी दाखिलों को लेकर सख्त हुआ शिक्षा बोर्ड, नियमो कीअनदेखी करने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई

धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।  

Female Patwari arrested for bribery in Himachal: Demanded ₹1 lakh to issue a land value certificate; Vigilance caught her in a trap.
In News update

हिमाचल में महिला पटवारी रिश्वत लेते गिरफ्तार:लैंड वैल्यू सर्टिफिकेट बनाने के लिए 1 लाख मांगे, विजिलेंस ने जाल बिछाकर पकड़ा

 हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी में विजिलेंस ने एक महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. बरोटीवाला पटवार सर्कल में तैनात महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते रंगे  हाथ पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि  महिला पटवारी लैंड वेल्यू प्रमाण पत्र बनाने की एवज में रिश्वत मांग रही है.इस पर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दे दी. बाद में विजिलेंस ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से महिला पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया, शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल की और शिकायत को सही पाए जाने पर जाल बिछाया. विजिलेंस थाना बद्दी की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला पटवारी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर पकड़ लिया. टीम ने कथित रिश्वत की राशि को भी कब्जे में ले लिया है. विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार,  आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है. जांच में रिश्वत मांगने के कारणों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है. विजिलेंस के आईजी बिमल गुप्ता ने बताया कि आरोपी महिला से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं. विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. वही  तहसीलदार सतेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.  

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'भांग उगाओ, लॉटरी खेलो और पैसे कमाओ लेकिन सरकार से नौकरी मत मांगो', सदन में विपक्ष ने सुक्खू सरकार को घेरा

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'Grow cannabis, play the lottery, and earn money, but don't ask the government for jobs' — Opposition corners the Sukhu government in the House.

हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती और लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने दोनों मुद्दों को लेकर सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरकार पर घेरते हुए सवाल पूछा, "क्या सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी मांगने के बजाय भांग की खेती करे और लॉटरी खेले?" रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत रोजगार के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार भांग की खेती के जरिए रोजगार देने की बात कर रही है. उन्होंने कहा, "सरकार की योजना क्या है... वह चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी न मांगे, ये भांग की खेती करें, भांग उगाएं और रोजगार पाएं." उन्होंने भांग को नशे की ओर ले जाने वाला माध्यम बताते हुए सवाल उठाया कि भांग को वैध करने के बाद सरकार प्रदेश में चिट्टे पर कैसे रोक लगाएगी. रणधीर शर्मा ने लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जो युवा नशे से बच जाएंगे, उन्हें अब जुए की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिवाली के मौके पर युवाओं को लॉटरी शुरू करने का तोहफा देने जा रही है. उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद कई लोग अपनी कमाई गंवा सकते हैं और परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. रणधीर शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने भी प्रदेश में लॉटरी को बंद करने का फैसला लिया था. रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल खनन ही उद्योग नहीं है. उद्योग विभाग का काम राज्य में औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करना और उन्हें स्थापित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज को समझना मुश्किल है और उद्योग मंत्री खनन के पीछे पड़े हुए हैं, जबकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.     

'दुबई चले जाते हैं, लेकिन हमीरपुर जाने को तैयार नहीं डॉक्टर', मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी पर CM सुक्खू का जवाब

In Health

हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी सोमवार को सदन में उठा. सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर चंबा तो दूर हमीरपुर और नेरचौक जैसे शहरों में भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विज्ञापन जारी होने के बावजूद कई पद खाली रह जाते हैं. दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान चंबा सदर से विधायक नीरज नैय्यर ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नए भवन का हाल ही में उद्घाटन हुआ है. फिलहाल वहां तीन ओपीडी चल रही हैं, लेकिन अस्पताल को पूरी तरह सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न पदों पर कम से कम 150 से 200 नियुक्तियां करने की जरूरत है.  विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार को अलग तरीके से सोचने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा में 5 लाख रुपये के वेतन पर प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पद भरे नहीं जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा प्रदेश के एक कोने में स्थित है और यहां डॉक्टरों को लाना बड़ी चुनौती है. इसलिए चंबा के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को भी सुदृढ़ करने में सरकारों को लंबा समय लगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 40 वर्षों से ऐसी व्यवस्था चली आ रही है, जिसमें अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हो पाती. सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयास कर रही है.

डमी दाखिलों को लेकर सख्त हुआ शिक्षा बोर्ड, नियमो कीअनदेखी करने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई

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Education board gets tough on dummy admissions; strict action to be taken against schools flouting rules.

धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।  

आयरलैंड की हार भुलाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड के खिलाफ जीत से करना होगा आगाज़

In Sports
India will look to put the loss against Ireland behind them and kick off with a win against England.

आयरलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज में नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला बुधवार को इंग्लैंड के चेस्टर-ली-स्ट्रीट में खेला जाएगा। टीम इंडिया इस सीरीज में जीत दर्ज कर पिछली हार को भुलाना चाहेगी। कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज काफी अहम होगी। आयरलैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था, ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ वह कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों से अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे। इस बीच भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पहले ही टी-20 मुकाबले में 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जाना चाहिए। आयरलैंड दौरे पर वैभव को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी, लेकिन अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू का मौका मिलता है। दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम भी हाल के दिनों में शानदार फॉर्म में नहीं रही है। हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि वह रेड बॉल क्रिकेट था, लेकिन अपने घर में मिली हार के बाद इंग्लैंड भी वापसी के इरादे से मैदान पर उतरेगा। ऐसे में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टी-20 मैचों के बाद तीन वनडे मुकाबले भी खेले जाएंगे। दोनों टीमों में कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार मिश्रण मौजूद है, जिससे इस दौरे के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें पहले मुकाबले पर हैं कि क्या टीम इंडिया जीत के साथ सीरीज का आगाज़ करती है और क्या युवा वैभव सूर्यवंशी को आखिरकार अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिलता है।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट:कांगड़ा में सड़कें जलमग्न, 4 सितंबर तक बरसेंगे बादल; मानसून सीजन में सामान्य से 10% कम बरसात

In News
Heavy rain alert for Himachal: Roads submerged in Kangra, rain to continue until September 4; monsoon season rainfall 10% below normal.

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा सहित कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कांगड़ा में कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कें प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों और प्रशासन को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। कांगड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।  

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
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बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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