•   Thursday Apr 09
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In Himachal

हिमाचल में 24 सरकारी स्कूल बंद, शिमला के 16 संस्थान बंद

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए 24 सरकारी स्कूलों को तत्काल प्रभाव से डी-नोटिफाई (बंद) करने के आदेश जारी किए हैं। इनमें 19 सरकारी प्राइमरी स्कूल (GPS) और 5 सरकारी मिडिल स्कूल (GMS) शामिल हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, इन सभी स्कूलों में एक भी छात्र पंजीकृत नहीं था, जिसके चलते इन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया। सरकार का कहना है कि जिन स्कूलों में छात्र ही नहीं हैं, उन्हें संचालित करना संसाधनों की बर्बादी है। ऐसे में शिक्षकों और अन्य संसाधनों का बेहतर उपयोग उन स्कूलों में किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है। यह फैसला प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बंद किए गए स्कूल शिमला, सिरमौर, सोलन और लाहौल और स्पीति जिलों में स्थित हैं। शिमला जिले में सबसे अधिक 15 प्राइमरी और 1 मिडिल स्कूल डी-नोटिफाई किए गए हैं। इनमें टिक्कर, कुमारसैन, ठियोग, रामपुर, जुब्बल, चौहारा, नेरवा, कुपवी और सुन्नी जैसे शिक्षा खंड शामिल हैं। सिरमौर जिले में राजगढ़, नारग और सुरला ब्लॉक के स्कूल बंद किए गए हैं, जबकि सोलन के कंडाघाट क्षेत्र का एक प्राइमरी स्कूल भी सूची में शामिल है। वहीं लाहौल-स्पीति जिले के उदयपुर और केलांग क्षेत्रों के 4 मिडिल स्कूल भी बंद किए गए हैं। आदेश के अनुसार, इन स्कूलों में तैनात शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों, भवनों, रिकॉर्ड और अन्य संसाधनों का समायोजन पहले से जारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को सभी औपचारिकताएं पूरी कर शीघ्र अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा निदेशालय ने जिला स्तर के अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन करने और प्रशासनिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी सरकार 1200 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद कर चुकी है। पिछले एक दशक में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

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हिमाचल: HRTC बस पर पहाड़ी से गिरा मलबा, ड्राइवर की सूझबूझ से बची यात्रियों की जान

भरमौर–हड़सर–कुगती मार्ग पर चलने वाली एचआरटीसी की बस (HP-73-8780) पर अचानक पहाड़ी से पत्थर गिर गए, जिससे बस का अगला टायर सड़क से बाहर निकल गया। हालांकि चालक की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। बताया जा रहा है कि घटना के समय बस में करीब 20 यात्री सवार थे। बुधवार सुबह हुए इस हादसे के दौरान जैसे ही पत्थर गिरने शुरू हुए, चालक ने तुरंत स्थिति को भांपते हुए आपातकालीन ब्रेक लगाकर बस को रोक दिया। उसकी सतर्कता से सभी यात्रियों की जान बच गई। बस रुकने के बाद जब यात्रियों ने नीचे उतरकर स्थिति देखी, तो उन्होंने चालक का आभार जताया। यात्रियों में शामिल अमित कुमार, किशन चंद, अशोक कुमार और प्रमोद कुमार ने बताया कि वे रोजाना इसी बस से यात्रा करते हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को भी वे सामान्य रूप से यात्रा कर रहे थे, तभी अचानक पहाड़ी से पत्थर गिरने लगे और बस का टायर सड़क से बाहर निकल गया। चालक ने तुरंत बस रोककर सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतार दिया, जिससे सभी लोग बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।  

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हिमाचल: बिना HPV वैक्सीनेशन विदेश नहीं जा पाएगी बेटियां, सर्टिफिकेट दिखाना हुआ अनिवार्य

हिमाचल प्रदेश में किशोरियों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। अब निर्धारित आयु वर्ग की बेटियों को विदेश जाने के लिए एचपीवी वैक्सीन का सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य होगा। प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के उद्देश्य से एचपीवी टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह टीका न केवल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि अब विदेश यात्रा के लिए भी जरूरी शर्त बन गया है। निर्धारित आयु की किशोरियों को विदेश जाने से पहले टीकाकरण का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यह सर्टिफिकेट टीका लगने के समय ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किया जा रहा है और विदेश यात्रा से संबंधित फॉर्म भरते समय इसे दिखाना अनिवार्य किया गया है। प्रदेशभर में 14-15 वर्ष आयु वर्ग की करीब 65 हजार किशोरियों को 90 दिनों के भीतर एचपीवी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 21 जून तक चलेगा, हालांकि इसकी शुरुआत फिलहाल धीमी बताई जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार इस टीके का प्रभाव लगभग 26 वर्षों तक रहता है। किशोरियों को गार्डासिल-4 नामक एचपीवी वैक्सीन लगाई जा रही है, जिसका निर्माण मर्क एंड कंपनी द्वारा किया गया है। यह वैक्सीन वर्ष 2006 में बाजार में आई थी और भारत में एमएसडी फार्मास्यूटिकल्स द्वारा वितरित की जाती है। निजी क्लीनिकों में इस टीके की कीमत लगभग 12 से 15 हजार रुपये तक है, लेकिन हिमाचल प्रदेश में इसे निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गार्डासिल-4 वैक्सीन की अब तक 160 देशों में 500 मिलियन से अधिक डोज दी जा चुकी हैं। एचपीवी वायरस कम से कम छह प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है, जिससे बचाव के लिए यह टीका महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉ. परविंद्र सिंह, बीएमओ धर्मपुर ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यह टीका न केवल विदेश यात्रा के लिए आवश्यक है, बल्कि गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए भी बेहद जरूरी है।

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हिमाचल में बड़ा फेरबदल: 61 जिला और सिविल जजों के तबादले, देखें सूची

हिमाचल हाईकोर्ट ने बड़ा फेरबदल करते हुए जिला न्यायाधीशों, अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों, वरिष्ठ सिविल जजों और सिविल जजों के तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण और तैनाती के आदेश जारी किए हैं। यह अधिसूचना उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी की गई है। हिमाचल हाईकोर्ट ने मंगलवार देर शाम 61 जजों के तबादला आदेश जारी किए। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी अधिकारियों को 16 अप्रैल तक नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि अनुजा सूद को जिला एवं सत्र न्यायाधीश चंबा, प्रीति ठाकुर को पीठासीन अधिकारी, श्रम न्यायालय सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण शिमला, विक्रांत कौंडल को अतिरिक्त सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण शिमला, मनीषा गोयल को वरिष्ठ सिविल जज सह-मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुल्लू के रूप में तैनात किया गया है। निरंजन सिंह वरिष्ठ सिविल जज सह-एसीजेएम-एक शिमला को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में पदोन्नत कर पर वरिष्ठ सिविल जज-सह-सीजेएम लाहौल, प्रशांत सिंह नेगी को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन, विशाल कौंडल को वरिष्ठ सिविल जज-सह-एसीजेएम बड़सर, शिखा लखनपाल को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊना, प्रतिभा नेगी को वरिष्ठ सिविल जज-सह-एसीजेएम-एक शिमला, अनिता शर्मा को वरिष्ठ सिविल जज-सह-एसीजेएम-एक कांगड़ा, जितेंद्र कुमार को वरिष्ठ सिविल जज-सह-एसीजेएम-एक अंब, आभा चौहान को वरिष्ठ सिविल जज-सह-एसीजेएम एक नालागढ़ और अजय कुमार को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण किन्नौर स्थित रिकांगपिओ, आकांक्षा डोगरा को वरिष्ठ सिविल जज-सह-एसीजेएम-दो शिमला, सोनल शर्मा को स्थानांतरित कर वरिष्ठ सिविल जज सह-एसीजेएम-एक, धर्मशाला, आर मिहुल शर्मा को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांगड़ा (स्थित धर्मशाला) लगाया गया है। एकांश कपिल को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंबा, विशाल तिवारी को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुल्लू, दीपिका नेगी को सिविल जोगिंद्रनगर, अशोक कुमार को सिविल जज-सह-जेएमएफसी जयसिंहपुर जज-सह-जेएमएफसी, और विभूति बहुगुणा को सिविल जज (अवकाश/प्रशिक्षण रिजर्व) शिमला, डॉ. पार्थ जैन मोबाइल ट्रैफिक मजिस्ट्रेट चंबा, निकिता ताहिम को सिविल जज-सह-जेएमएफसी-एक सोलन, डॉ. पुष्प लता को सिविल जज-सह जेएमएफसी-दो नूरपुर, स्वाति बरवाल को सिविल जज (अवकाश/प्रशिक्षण रिजर्व) प्रदेश उच्च न्यायालय शिमला, ईशा अग्रवाल को सिविल जज-सह-जेएमएफसी एक ऊना, राघव गुप्ता को सिविल जज-सह-जेएमएफसी बिलासपुर, अंशुल मलिक को सिविल जज-सह-जेएमएफसी नाहन, युद्धवीर सिंह को सिविल जज-सह-जेएमएफसी कंडाघाट, मनु प्रिंजा को शिमला, विकास कपूर को सिविल जज-सह-जेएमएफसी शिलाई, चुनौती सांगरोली को सिविल जज-सह-जेएमएफसी कुल्लू, दिव्या शर्मा को सिविल जज-सह-जेएमएफसी-दो सुंदरनगर नियुक्त किया गया है।  मेघा शर्मा, श्रुति बंसल को सिविल जज (अवकाश/प्रशिक्षण रिजर्व) प्रदेश उच्च न्यायालय, शुभांगी जोशी को स्थानांतरित कर सिविल जज-सह-जेएमएफसी, डलहौजी, वरुण को मोबाइल ट्रैफिक मजिस्ट्रेट कांगड़ा और ऊना (स्थित धर्मशाला), करम प्रताप सिंह को सिविल जज-सह-जेएमएफसी-तीन मंडी, सोनिया गुप्ता को मोबाइल ट्रैफिक मजिस्ट्रेट बिलासपुर, हमीरपुर (स्थित बिलासपुर), विकास ठाकुर को सिविल जज-सह-जेएमएफसी, बंजार, राघव शर्मा को सिविल जज-सह-जेएमएफसी-दो पांवटा साहिब, रिधि पत्रवाल को सिविल जज-सह-जेएमएफसी-एक सरकाघाट, रूप में नियुक्त किया गया है।    

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हिमाचल: अप्रैल में कड़ाके की ठंड, शिमला-स्पीति में बर्फबारी, 5 जिलों में ओलावृष्टि-तूफान का अलर्ट

अप्रैल के महीने में भी हिमाचल प्रदेश में मौसम ने करवट बदल ली है। निचले इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है, जबकि ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर जारी है। रातभर तेज बारिश और कई जगह तूफान चलने से ठंड एक बार फिर दिसंबर-जनवरी जैसी महसूस होने लगी है। वहीं शिमला के पर्यटन स्थल नारकंडा और कुफरी समेत लाहौल स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर सुबह 6 बजे के बाद बर्फबारी हुई। मौसम विभाग ने आज भी पांच जिलों में ओलावृष्टि और तूफान का ऑरेंज अलर्ट दे रखा है। भारी बारिश और बर्फबारी के कारण प्रदेश के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। कई शहरों का न्यूनतम तापमान जमाव बिंदु के करीब पहुंच गया है, जबकि अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे चला गया है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों में ओलावृष्टि और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। आने वाले 48 घंटों तक मौसम में सुधार के आसार नहीं हैं। इसके बाद भी कुछ दिनों तक ऊंचे और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बूंदाबांदी जारी रह सकती है। ऊना के अधिकतम तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 9.2 डिग्री की गिरावट आने के बाद पारा 23.6 डिग्री सेल्सियस रह गया है। सोलन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से 9.1 डिग्री कम होने के बाद 23.6 डिग्री, कांगड़ा का 6.1 डिग्री लुढ़कने के बाद 26 डिग्री, सुंदरनगर का 5.6 डिग्री कम होने के बाद 23.3 डिग्री सेल्सियस रह गया है। बीते 24 घंटे में कल्पा का न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री, कुकुमसैरी का 0.4, ताबो का पारा 1.1 डिग्री, मनाली का 5.5 डिग्री, सियोबाग 5.8 डिग्री, सोलन 8.5, भुंतर व शिमला का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रह गया है। मौसम विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन में कई शहरों का पारा माइनस में जाने की संभावना है। IMD के अनुसार- अगले 48 घंटे भी ठंड से राहत के आसार नहीं है। आज कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जिला में भारी ओलावृष्टि व तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी कर रखा है। अन्य जिलों में येलो अलर्ट की चेतावनी दी गई है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान चलने का पूर्वानुमान है। अगले कल भी मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। नौ अप्रैल के लिए मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिला में येलो अलर्ट दिया गया है। 10 अप्रैल को वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर पड़ेगा, इस दिन अधिक ऊंचे पहाड़ों पर ही हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, जबकि 11 व 12 अप्रैल को अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कुछेक क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार हैं। इस बदले मौसम का सबसे ज्यादा असर सेब बागवानों पर पड़ा है। बर्फबारी और ठंड के कारण सेब की फ्लावरिंग प्रभावित हो रही है, जिससे फसल को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। एंटी हेल नेट और बांस भी बर्फ के भार से टूट रहे हैं, जिससे बागवानों की चिंता और बढ़ गई है।

SIB raids Ghaluwal in Haroli, seizes 940 grams of marijuana
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हरोली के घालूवाल में SIB की रेड, 940 ग्राम गांजा बरामद

ऊना जिले के हरोली क्षेत्र के घालूवाल में विशेष अन्वेषण शाखा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 940 ग्राम गांजा बरामद किया है। यह रेड गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें एक प्रवासी महिला को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया है। पुलिस के अनुसार, महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है। जिला पुलिस कप्तान सचिन ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नशा तस्करी से जुड़ी किसी भी जानकारी को तुरंत साझा करें, ताकि समाज को इस बुराई से मुक्त किया जा सके।

Following the High Court order, the new reservation roster for the Panchayati Raj elections will be released today.
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद आज ही जारी होगा पंचायती राज चुनाव के लिए नया आरक्षण रोस्टर

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों से जुड़े 30 मार्च 2026 के संशोधन नियमों पर रोक लगाने के बाद सरकार हरकत में आ गई है। आदेश CWPIL 32/2026 मामले में आया है। कोर्ट ने आरक्षण रोस्टर पुराने नियमों (पंचायती राज अधिनियम 1994) के अनुसार ही तैयार करने के आदेश दिए हैं। अब  पंचायती राज विभाग ने सभी डिप्टी कमिश्नरों को आज ही नया रोस्टर जारी करने के निर्देश दिए। डीसी को 5 प्रतिशत रोस्टर बदलाव का अधिकार देने वाली नोटिफिकेशन को वापस ले लिया है।

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हरियाणा कांग्रेस विधायकों से मिले सीएम सुक्खू के पॉलिटिकल एडवाइजर, पुलिस तैनात, बाहरी लोगों की एंट्री बंद

In Politics
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हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए। होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं। कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।

मोदी की स्वास्थ्य गारंटी : आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े 56.67 करोड़ लोग

In Health
guarantee: 56.67 crore people connected to Ayushman Bharat Digital Mission

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की थी। मोदी के नेतृत्व में ही 2021-2022 से 2025-2026 तक 5 वर्षों के लिए 1,600 करोड़ रुपये की डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन शुरू किया गया था। इसकी वजह से पीएम मोदी के गारंटी का भी असर देखने को साफ मिला और इस योजना के तहत 29 फरवरी, 2024 तक 56.67 करोड़ लोगों के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने लैंगिक समानता हासिल करने की दिशा में भी प्रगति की है। 29 फरवरी, 2024 तक, 27.73 करोड़ महिलाएं और 29.11 करोड़ पुरुषों को आभा कार्ड से लाभ हुआ है। वहीं 34.89 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य दस्तावेजों को इससे जोड़ा गया है। क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन  आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में यूनिफाइड डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की मदद करने के लिए जरूरी आधार तैयार करना है। इससे सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता खोलने के लिए ऑफलाइन मोड को मदद पहुंचती है। इसके अलावा भारत सरकार ने स्वास्थ्य सुविधा के लिए आभा ऐप और आरोग्य सेतु जैसे विभिन्न एप्लिकेशन भी लॉन्च किए गए हैं, जो आम लोगों को मदद पहुंचाती है। आभा ऐप एक प्रकार का डिजिटल स्टोरेज है, जो किसी भी व्यक्ति के मेडिकल दस्तावेजों का रखने का काम आता है। इस ऐप के जरिए मरीज रजिस्टर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों से संपर्क भी कर सकते हैं।    भारत में बीजेपी की मोदी सरकार ने बीते 10 सालों के अपनी सरकार में कई सारे मील के पत्थर हासिल किया है। इन 10 सालों में पीएम मोदी के विजन ने भारत को अगले 23 साल बाद यानी साल 2047 तक विकसित भारत बनाने के ओर मजबूती से कदम भी बढ़ा लिया है। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने देश के हित में जो भी फैसले लिए है, उनमें से हेल्थ सेक्टर को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया गया है।        

देश के 45 शिक्षकों को मिला 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार', राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

In Education
45 teachers of the country received 'National Teacher Award', honored by President Draupadi Murmu

  आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।  आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्‍मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।  पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।    आज शिक्षक दिवस है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में विज्ञान भवन में देश के 45 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।  आज के दिन ये वार्षिक अवार्ड उन शिक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और समाज के लिए कुछ खास योगदान दिया हो। ये पुरस्कार केवल एक मेडल ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ओर से इन शिक्षकों को दिया गया सम्‍मान है। ये शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का प्रतिक है जो बच्चों का भविष्य बनाने के लिए अभूतपूर्व कार्य करते हैं।  पुरस्कारों दिए जाने से पहले, PM नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों से बातचीत की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों का अहम भूमिका होती है। PM ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक परम्परा नहीं है, बल्कि उनके आजीवन समर्पण का सम्मान है।PM ने कहा कि शिक्षक सामान्यतः छात्रों को होमवर्क देते हैं। लेकिन मोदी उन्हें एक टास्क देना चाहते थे- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाले अभियानों का नेतृत्व करने और "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" आंदोलनों को मजबूत करने के लिए।   

Asia Cup 2025: आज दुबई में भारत-पाक के बीच होने वाले मैच को लेकर देशभर में विरोध

In Sports
 Asia Cup 2025: Protest across the country regarding the match between India and Pakistan in Dubai today

  एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच दुबई में आज मैच होने वाला है। भारत-पाकिस्तान के बीच मैच का मुकाबला हमेशा से रोमांचक रहा है। इसे देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह देखा जाता था। लेकिन इस बार इस मैच को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोग भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर गुस्से में है। सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस मैच का जोरो से बहिष्कार किया जा रहा है। साथ ही पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों ने भी इस मैच पर कड़ा विरोध जताया है। अब तो भाजपा के कई सहयोगी भी इस मैच के विरोध में हैं। हालांकि क्रिकेट फैंस इसे लेकर अलग बंटे हुए हैं। इस मैच का कहीं विरोध किया जा रहा है, तो कहीं टीम इंडिया की जीत के लिए पूजा भी हो रही है।   नई खेल नीति के मुताबिक सरकार की नई खेल नीति के मुताबिक भारत ने फैसला किया है भारत पाकिस्तान के साथ कोई भी द्विपक्षीय मैच नहीं खेलेगा पर बहुपक्षीय टूर्नामेंट जैसे कि एशिया कप या ICC प्रतियोगिता में पाकिस्तान के खिलाफ खेलेगा।   विरोध की वजह  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच यह पहला इंटरनेशनल मैच है। आपको बता दें कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमला हुआ था जिसमें कई भारतीय मरे थे और कहा जा रहा था कि इस हमले के पीछे पकिस्तान का हाथ है। इसके जवाब में भारत ने  7 मई को ऑपरेशन सिंदूर किया। इसी वजह से भारत के लोगों में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर नाराजगी और गुस्सा है।    ओवैसी की पार्टी AIMIM ने किया प्रदर्शन हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या मैच से कमाया जाने वाला मुनाफ़ा पहलगाम हमले में मारे गए 26 लोगों की जान से ज्यादा कीमती है। अहमदाबाद में AIMIM ने भारत-पाकिस्तान मैच के खिलाफ प्रदर्शन किया।    AAP कार्यकर्ताओं ने किया बहिष्कार  चंडीगढ़ में AAP कार्यकर्ताओं ने भी 'BCCI शर्म करो' के नारे लगाए   शिंदे शिवसेना नेता ने किया विरोध शिंदे शिवसेना के नेता संजय निरूपम ने इस मैच के विरोध में कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा भारत को क्षति पहुंचाने वाली नीति अपनाई है, पाकिस्तान ने आतंकियों को पाला पोषा है और इन आतंकियों ने भारत के निर्दोष लोगों पर हमले किए हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह का रिश्ता नहीं रखना चाहिए।    शिवसेना उद्धव गुट ने मैच के विरोध में तोड़ डाले टीवी   पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने किया बहिष्कार पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा कि वे भारत-पाकिस्तान मैच के साथ पूरे एशिया कप का बहिष्कार कर रहे हैं हूं। उन्होंने कहा कि पुलवामा, पहलगाम, पठानकोट जैसे आतंकी हमलों को भुलाया नहीं जा सकता।     पीड़ित परिवारों ने जाहिर किया गुस्सा पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए पुणे के संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले ने कहा कि यह मैच नहीं होना चाहिए था। यह बहुत ही शर्मनाक है। अभी हाल में पहलगाम हमला हुआ और फिर ऑपरेशन सिंदूर हुआ। तो इसके बाद यह मैच नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा यह भी कहा कि इन्हें परवाह नहीं कि कोई मर गया।    

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
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हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

हरियाणा कांग्रेस विधायकों से मिले सीएम सुक्खू के पॉलिटिकल एडवाइजर, पुलिस तैनात, बाहरी लोगों की एंट्री बंद

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हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। पार्टी ने हरियाणा के 31 विधायकों को शिमला के पास कुफरी क्षेत्र में गलू स्थित ट्विन टावर होटल में ठहराया है। होटल परिसर और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां दिन-रात पुलिस का पहरा लगा हुआ है। शनिवार सुबह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के राजनीतिक सलाहकार सुनील बिट्टू ट्विन टावर होटल पहुंचे और हरियाणा कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद वे शिमला लौट गए। होटल की सुरक्षा को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-5 (NH-5) पर भी पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति होटल परिसर तक न पहुंच सके। मीडिया को भी होटल से लगभग 200 मीटर पहले ही रोक दिया गया है। होटल के अंदर जाने की अनुमति केवल कर्मचारियों को ही दी गई है। सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह कुछ कांग्रेस विधायकों ने होटल से बाहर मॉर्निंग वॉक पर जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद कुछ विधायक होटल परिसर के अंदर ही टहलते नजर आए, जबकि कई विधायक अपने कमरों की खिड़कियों से बाहर देखते दिखाई दिए। शुक्रवार शाम हरियाणा कांग्रेस के 31 विधायकों के अलावा पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता और सांसद भी शिमला पहुंचे थे। इनके ठहरने की व्यवस्था अलग-अलग दो होटलों में की गई है। हरियाणा से आए कुछ नेता कुफरी स्थित रेडिसन होटल में भी ठहरे हुए हैं। कांग्रेस को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने अपने विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि छह विधायक अभी शिमला नहीं पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 16 मार्च की सुबह सभी विधायकों को शिमला से हरियाणा ले जाया जाएगा और उन्हें सीधे मतदान स्थल तक पहुंचाया जाएगा, ताकि मतदान प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की राजनीतिक उठापटक से बचा जा सके।

बच्चा गोद लेने पर भी 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

In National News
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के हक में एक एतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब बच्चा गोद लेने पर भी मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि गोद लिए गए बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, मां को पूरे 12 हफ्ते की छुट्टी दी जाएगी। कोर्ट ने उस कानूनी प्रावधान को निरस्त कर दिया है, जिसमें सिर्फ तीन महीने तक की उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही मैटरनिटी लीव की अनुमति थी, लेकिन अब ऐसी कोई शर्त नहीं है। मौजूदा समय में यह नियम है कि बच्चा गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव तभी मिलेगी जब गोद लिया गया बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एक बायोलॉजिकल मां की तरह ही गोद लिए गए बच्चे की मां को भी मैटरनिटी लीव मिलने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि मैटरनिटी का अधिकार और बच्चे की देखभाल की जरूरत उम्र पर निर्भर नहीं करती। कोर्ट ने तीन महीने की उम्र सीमा को हटाते हुए कहा कि ये भेदभाव करता है। कोर्ट ने माना कि बच्चे को गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ इमोशनल तालमेल बिठाने और उसकी देखभाल के लिए समय की जरूरत होती है। इसके अलावा कोर्ट ने इस प्रक्रिया में पिताओं की भूमिका पर भी बात की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो पितृत्व अवकाश पर भी एक ठोस नीति बनाने पर विचार करे। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के पालन पोषण में पिता की भागीदारी भी उतनी अहम है। इसलिए इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ के दायरे में लाना चाहिए

Iran Israel War: 'पर्शियन गल्फ' में फंसे 2000 भारतीय नाविक, कुल्लू के कैप्टन रमन कपूर ने दी जानकारी

In International News
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खाड़ी देश के 'पर्शियन गल्फ' में फंसे हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कैप्टन रमन कपूर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि अमेरिका-इजरायल और इरान युद्ध के कारण 20 हजार नाविकों में दहशत का माहौल है। इनमें करीब 2000 भारतीय नाविक हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में युद्ध के कारण 500 से 700 समुद्री जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं। कैप्टन रमन ने कहा कि किसी भी शिप पर कभी भी अटैक हो रहा है। स्पेशियली उन शिप पर, जिनका कोई भी लिंक अमेरिका और इजरायल के साथ है, अगर वो मूवमेंट शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि इरान चाहता है कि पर्शियन गल्फ से (भारत और चीन को छोड़कर) अन्य देशों को कोई भी ऑयल टैंकर बाहर न जाए। कैप्टन रमन ने कहा कि उनका शिप पर्शियन गल्फ में फंसा हुआ है। वह कुछ दिन पहले ही ईराक से कार्गो लोड करके आए हैं। उनकी स्थिति ऐसी है कि वह न तो बाहर जा सकते हैं और न ही रह सकते हैं। उनके पास शिप में अलर्ट रहने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है। एयरपोर्ट और समुद्री रास्ते बंद हैं। कैप्टन कपूर ने बताया कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण इन जहाजों को फिलहाल आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे सभी जहाज समुद्र में एक ही जगह पर रुके हुए हैं और नाविक लगातार तनाव में हैं, जो लगातार अपने परिवारों से संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। अनिश्चित हालात के बीच नाविकों को अपनी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।  

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

हिमाचल के इस गाँव में है 550 साल पुरानी ममी, आज भी बढ़ते है बाल और नाखून

In Banka Himachal
This_village_in_Himachal_Pradesh_has_a_550-year-old_mummy_whose_hair_and_nails_still_grow.

हिमाचल प्रदेश एक रहस्यों से भरा राज्य है। यहां ऐसी कई चीज़ें है जिसे समझ पाना वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद मुश्किल है। ऐसे ही कई रहस्यों में से एक है हिमाचल की स्पीति घाटी में मौजूद करीब 550 साल पुरानी 'ममी'। करीब 550 साल पुरानी इस 'ममी' को स्थानीय लोग भगवान समझकर पूजते हैं। भारत तिब्बत सीमा पर हिमाचल के लाहौल स्पीति के गयू गांव में मिली इस ममी का रहस्य आज भी बरकरार है। हर साल हजारों लोग इसे देखने के लिए देश विदेश से यहां पहुंचते हैं। यह स्थान हिमाचल प्रदेश में स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। लाहौल स्पीति की ऐतिहासिक ताबो मोनेस्ट्री से करीब 50 किमी दूर गयू नाम का यह गांव साल में 6-8 महीने बर्फ से ढके रहने के कारण  दुनिया से कटा रहता है। कहते हैं कि यहां मिली यह ममी तिब्बत से गयू गाँव में आकर तपस्या करने वाले लामा संघा तेंजिन की है। कहा जाता है कि लामा ने साधना में लीन होते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। तेनजिंग बैठी हुई अवस्था में थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 45 साल थी। इस ममी की वैज्ञानिक जाँच में इसकी उम्र 550 वर्ष से अधिक पाई गई है। आम तौर पर जब भी ममी की बात होती है तो जहन में मिस्र में पाए जाने वाली पट्टियों में लिपटी ममी याद आती है। किसी मृत शरीर को संरक्षित करने के लिए एक खास किस्म का लेप मृत शरीर पर लगाया जाता है, जिससे वह ममी लम्बे समय तक सरंक्षित रहती है। लेकिन इस ममी पर किसी तरह का कोई लेप नहीं लगाया गया है, फिर भी इतने वर्षों से यह ममी सुरक्षित है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ममी के बाल और नाखून आज भी बढ़ते रहते हैं। हालांकि इस तथ्य की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है। इस स्थान पर एक शरीर मौजूद है, जिसके सर बाल है, त्वचा है और नाखून भी पर न तो ये शरीर गलता है और न समय के साथ बदलता है। इसीलिए यहां के स्थानीय लोग इसे जिंदा भगवान मानते हैं और इसकी पूजा करते हैं। बताया जाता है कि ITBP के जवानों को खुदाई के दौरान इस ममी का पता चला था। सन 1975 में भूकंप के बाद एक पुराने मकबरे में ये भिक्षु का ममीकृत शरीर दब गया था। इसकी खुदाई बहुत बाद में 2004 में की गई थी, और तब से यह पुरातत्वविदों और जिज्ञासु यात्रियों के लिए रुचि का विषय रहा है। खुदाई करते वक्त ममी के सर पर कुदाल लग गया था। ममी के सर पर इस ताजा निशान को आज भी देखा जा सकता है। 2009 तक यह ममी ITBP के कैम्पस में रखी हुई थी। देखने वालों की भीड़ देखकर बाद में इस ममी को गाँव में स्थापित किया गया। खास बात यह है कि ममी प्रकृति का प्रकोप झेलने के बावजूद भी सही सलामत है। प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम यह ममी मिस्र के ममीकरण से बिल्कुल अलग है। इसे सोकुशिनबुत्सु नामक एक प्राकृतिक स्व-ममीकरण प्रक्रिया का परिणाम कहा जाता है, जो शरीर को उसके वसा और तरल पदार्थ से दूर कर देता है। इसका श्रेय जापान के यामागाटा में बौद्ध भिक्षुओं को दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी की इस प्रक्रिया में दस साल तक लग सकते हैं। इसकी शुरुआत साधु के जौ, चावल और फलियों  (शरीर में वसा जोड़ने वाले भोजन) को खाने से रोकने के साथ होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मृत्यु के बाद वसा यानी फैट सड़ जाती है और इसलिए शरीर से वसा को हटाने से इसे बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलती है। यह अंगों के आकार को इस हद तक कम करने में भी मदद करता है कि सूखा हुआ शरीर अपघटन का विरोध करता है। शरीर के पास एक निरोधक के साथ-मोमबत्तियां जलाई जाती है ताकि इसे धीरे-धीरे सूखने में मदद मिल सके। शरीर में नमी को खत्म करने और मांस को हड्डी पर संरक्षित करने के लिए एक विशेष आहार भी दिया जाता है। मृत्यु के बाद, भिक्षु को सावधानी से एक भूमिगत कमरे में रखा जाता है। समय के साथ भौतिक रूप सचमुच  में एक मूर्ति बन जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से तीस से भी कम स्व-ममीकृत भिक्षु दुनिया भर में पाए गए हैं। उनमें से अधिकांश जापान के एक द्वीप उत्तरी होंशू में पाए गए हैं। यहां पर भी भिक्षु प्राकृतिक ममीकरण की इस प्रथा का पालन करते हैं। संघा तेनज़िन के शरीर में अवशिष्ट नाइट्रोजन (लंबे समय तक भुखमरी का संकेत) के उच्च स्तर से पता चलता है कि उन्होंने खुद को ममी बनाने के लिए इस प्रक्रिया का पालन किया था। दांत और बाल आज भी संरक्षित  इस ममी के दांत और बाल अभी भी अच्छी तरह से संरक्षित हैं। इस मम्मी को एक छोटे से कमरे में एक कांच के बाड़े में रखा गया है, जो एक लोकप्रिय गोम्पा के करीब स्थित है। इसकी सुरक्षा के लिए इस ममी को एक कमरे में रखा गया है। पर्टयक खिड़की के माध्यम से उसकी एक झलक देख सकते है। इस कमरे को केवल महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान खोला जाता है। गयू आधुनिकीकरण से अछूता एक शांत स्थान है। संघा तेंजिन की ममी आज एक मंदिर में विराजमान है, उसका मुँह खुला है, उसके दाँत दिखाई दे रहे हैं और आँखें खोखली हैं। वसा और नमी से रहित, यह जीवित बुद्ध का प्रतीक माना जाता है। गाँव के अस्तित्व के लिए दिया था बलिदान मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि संघा तेंजिन ने गाँव के अस्तित्व के लिए खुद को बलिदान कर दिया था। कहानी यह है कि उन्होंने अपने अनुयायियों से विनाशकारी बिच्छू के संक्रमण के बाद खुद को ममीकृत करने के लिए कहा। जब उनकी आत्मा ने उनके शरीर को छोड़ दिया, तो ऐसा माना जाता है कि क्षितिज पर एक इंद्रधनुष दिखाई दिया जिसके बाद बिच्छू गायब हो गए और प्लेग समाप्त हो गया। सिर्फ 100 लोग बस्ते है इस गांव में  गयू गांव एक बेहद शांतिपूर्ण और सुंदर गांव है। इस गांव में लगभग 100 लोग हैं। यहां के निवासी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूर-दूर के स्थानों तक पैदल यात्रा करते हैं। इस गांव की दूरी काज़ा से लगभग 80 किमी है। जबकि शिमला से लगभग 430 किमी और मनाली से कुंजुम दर्रे के माध्यम से इसकी दूरी लगभग 250 किमी है। यहां आने का सबसे सही समय गर्मियों के दौरान है।  

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
CONGRESS-APPOINTED-32-DISTRICT-HEADS-IN-HARYANA

बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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