बिलासपुर एम्स में उपयोग किए जाने वाले डायलिसिस फ्लूइड का सैंपल गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा। यह सप्लाई थाईलैंड से प्राप्त हुई थी। सैंपल के असफल पाए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैच की आपूर्ति और उपयोग को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
डायलिसिस फ्लूइड मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित बैच की सप्लाई की समीक्षा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फ्लूइड निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर क्यों खरा नहीं उतरा।
सैंपल के असफल पाए जाने के बाद अस्पताल में डायलिसिस सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों और सप्लायर से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
थाईलैंड से प्राप्त इस सप्लाई के सैंपल की जांच में सामने आई खामी के बाद इसके उपयोग और उपलब्ध स्टॉक का भी सत्यापन किया जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के निर्णय के आधार पर की जाएगी।
तकनीकी विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर छात्र पिछले 23 दिनों से धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के बीच छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़कर विरोध जताया।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति (VC) की नियुक्ति समेत कई मुद्दे शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर उचित कदम नहीं उठाया गया है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मुख्य गेट पर ताला लगाने के बाद विश्वविद्यालय में माहौल गरमा गया है।
छात्रों का आरोप है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। अब छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है।
वहीं, छात्रों के लगातार प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में स्थायी VC समेत सभी लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए।
शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अपने हालिया दिल्ली दौरे को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका दिल्ली जाना व्यक्तिगत कार्यक्रम से जुड़ा था। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात संयोगवश हुई।
वहीं, शिमला जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को लेकर रोहित ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने माना कि चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी को गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है।
शिक्षा मंत्री के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस संगठन और नेतृत्व को लेकर समीक्षा और सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और संगठन को अधिक सक्रिय बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
रोहित ठाकुर ने दिल्ली दौरे को लेकर लग रही अटकलों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे किसी राजनीतिक बैठक या विशेष रणनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, जिला परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन पर चिंता जाहिर की है।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) शिमला में विद्यार्थियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छात्राओं के लिए नए हॉस्टल के निर्माण, कम वोल्टेज की समस्या दूर करने और पीने के पानी की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।
छात्राओं के लिए नया हॉस्टल बनने से उन्हें रहने की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं, विश्वविद्यालय परिसर में लो वोल्टेज की समस्या का समाधान होने से बिजली व्यवस्था में सुधार होगा। इसके साथ ही पीने के पानी की समस्या को भी दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और विद्यार्थियों को बेहतर माहौल उपलब्ध करवाने पर जोर दिया।
वहीं, NLU के कुलपति ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार जताया। उन्होंने विश्वविद्यालय की जरूरतों को गंभीरता से लेने और विद्यार्थियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार की ओर से दिए गए सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 30 जून से 10 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 1,63,882.59 लाख रुपये यानी करीब 1,638.83 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी संचयी रिपोर्ट में सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब तक 116 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन से 18, डूबने से 15, बिजली गिरने से 12 और पेड़ या बड़ी चट्टान गिरने से 40 लोगों की मौत शामिल है। इसके अलावा 10 मौतें सड़क हादसों में दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में 172 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में भी दर्ज होने का उल्लेख है।
कांगड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान
जिला स्तर पर सबसे अधिक नुकसान कांगड़ा में 447.17 लाख रुपये दर्ज किया गया है। इसके बाद मंडी में 297.57 लाख, चंबा में 294.10 लाख, शिमला में 376.65 लाख और सोलन में 164.88 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है।
70 सड़कें बंद
लगातार बारिश के कारण प्रदेश में 70 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे ज्यादा मंडी में 30 सड़कें, कुल्लू में 11, शिमला में 11, कांगड़ा में 10, सिरमौर में 4, ऊना में 3 और लाहौल-स्पीति में 1 सड़क बंद है।
इनमें मंडी के सराज की 25, सुंदरनगर की 1, सरकाघाट की 3 और थलौट की 1 सड़क शामिल है। कुल्लू में कुल्लू उपमंडल की 4, बंजार की 2, आनी की 3 और निरमंड की 2 सड़कें प्रभावित हैं।
बिजली-पानी की सप्लाई भी प्रभावित
बारिश का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। शिमला जिले में 2 बिजली ट्रांसफार्मर और 2 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से बंद मार्गों को खोलने और प्रभावित क्षेत्रों में सुविधाएं बहाल करने के प्रयास जारी हैं।
बारिश से बचाव और बहाली की चुनौती
लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन बंद मार्गों को खोलने के साथ बिजली और पेयजल व्यवस्था बहाल करने में जुटा है। लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
पालमपुर: हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकालकर जमकर प्रदर्शन किया। महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार को चुनाव के दौरान किए गए 1500 रुपये देने के वादे की याद दिलाई और सरकार से जवाब मांगा।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले महिलाओं से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन वादों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
महिला मोर्चा ने कहा कि 1500 रुपये देने का वादा महिलाओं के सम्मान और आर्थिक मदद से जुड़ा था, लेकिन लंबे समय बाद भी महिलाएं इस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया।
रैली के दौरान भाजपा नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी वादों को याद रखना चाहिए और जनता से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।
भाजपा महिला मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने महिलाओं से किए वादों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज शिक्षा विभाग की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड, विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म तथा स्कूल भवनों के लिए रंग योजना को अंतिम रूप देने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थियों की विशिष्ट यूनिफॉर्म हरे रंग की थीम पर आधारित होगी। इन स्कूलों की महिला शिक्षिकाएं हल्के लाइलैक (बैंगनी) रंग की पोशाक पहनेंगी, जबकि पुरुष शिक्षक हल्के नीले रंग की पैंट और शर्ट पहनेंगे। इन स्कूलों के भवनों को ऑलिव ग्रीन और सैंड बेज रंगों से रंगा जाएगा। शिक्षकों का ड्रेस कोड साफ-सुथरा, औपचारिक, शालीन और पेशेवर होगा तथा इसमें न्यूनतम सहायक वस्तुओं का प्रयोग किया जाएगा। डयूटी के दौरान शिक्षकों को अपना पहचान पत्र पहनना भी अनिवार्य होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों को उनके घरों के नजदीक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 80 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों के लिए अतिरिक्त 5 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए जाएंगे।
पालमपुर: हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकालकर जमकर प्रदर्शन किया। महिला मोर्चा ने कांग्रेस सरकार को चुनाव के दौरान किए गए 1500 रुपये देने के वादे की याद दिलाई और सरकार से जवाब मांगा।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले महिलाओं से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद उन वादों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
महिला मोर्चा ने कहा कि 1500 रुपये देने का वादा महिलाओं के सम्मान और आर्थिक मदद से जुड़ा था, लेकिन लंबे समय बाद भी महिलाएं इस वादे के पूरा होने का इंतजार कर रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया।
रैली के दौरान भाजपा नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनावी वादों को याद रखना चाहिए और जनता से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए।
भाजपा महिला मोर्चा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने महिलाओं से किए वादों को जल्द पूरा नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बिलासपुर एम्स में उपयोग किए जाने वाले डायलिसिस फ्लूइड का सैंपल गुणवत्ता जांच में मानकों पर खरा नहीं उतरा। यह सप्लाई थाईलैंड से प्राप्त हुई थी। सैंपल के असफल पाए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैच की आपूर्ति और उपयोग को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।
डायलिसिस फ्लूइड मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित बैच की सप्लाई की समीक्षा की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फ्लूइड निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर क्यों खरा नहीं उतरा।
सैंपल के असफल पाए जाने के बाद अस्पताल में डायलिसिस सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों और सप्लायर से आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
थाईलैंड से प्राप्त इस सप्लाई के सैंपल की जांच में सामने आई खामी के बाद इसके उपयोग और उपलब्ध स्टॉक का भी सत्यापन किया जा रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के निर्णय के आधार पर की जाएगी।
तकनीकी विश्वविद्यालय में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर छात्र पिछले 23 दिनों से धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के बीच छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़कर विरोध जताया।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति (VC) की नियुक्ति समेत कई मुद्दे शामिल हैं। छात्रों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर उचित कदम नहीं उठाया गया है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मुख्य गेट पर ताला लगाने के बाद विश्वविद्यालय में माहौल गरमा गया है।
छात्रों का आरोप है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। अब छात्रों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है।
वहीं, छात्रों के लगातार प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय में स्थायी VC समेत सभी लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के रहने वाले तलवारबाज विश्वजीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और हिमाचल का नाम रोशन किया है। थाईलैंड में आयोजित तलवारबाजी प्रतियोगिता में विश्वजीत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए मेडल जीता।
विश्वजीत की इस उपलब्धि से उनके परिवार, कोच और पूरे सिरमौर में खुशी की लहर है। उन्होंने कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
विश्वजीत का सफर यहीं खत्म नहीं हुआ है। उनका अगला बड़ा सपना ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार अपनी फिटनेस, तकनीक और खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने में जुटे हैं।
विश्वजीत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व का पल है। अब वह ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा करना चाहते हैं।
सिरमौर के इस युवा खिलाड़ी की सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हिमाचल की प्रतिभाएं मेहनत और लगन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती हैं।
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी।
घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है।
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।
घटस्थापना की सामग्री
हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।
कलश स्थापना की विधि
पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है।
यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की।
कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर?
यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।
गोपी जैक्स ने आरोप लगाया कि प्रदेश में होने वाले कई बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाहरी राज्यों से कलाकारों को बुलाकर उन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि स्थानीय कलाकारों को नाममात्र का मानदेय दिया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिमाचल की लोक संस्कृति को स्थानीय कलाकार ही अपनी कला के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं तो उन्हें उचित आर्थिक सम्मान क्यों नहीं दिया जाता.
तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं।
नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है।
ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी।
हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है।
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई, मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।
यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा।
16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी
अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।
साहिर-अमृता की पहली मुलाकात
ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"
साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…'
आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से
साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"
अमृता लिखती है-
"यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगायी थी
चिंगारी तूने दी थी
ये दिल सदा जलता रहा
वक्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा
ज़िन्दगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ
अब और सिगरेट जला ले "
वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।"
लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया।
अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना
अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।
इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था-
"मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी
जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते
इक रह्स्म्यी लकीर बण के
खामोश तैनू तक्दी रवांगी
जा खोरे सूरज दी लौ बण के
तेरे रंगा विच घुलांगी
जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के
तेरे केनवास नु वलांगी
पता नही किस तरह कित्थे
पर तेनु जरुर मिलांगी"
इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।
जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है।
उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है।
मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है।
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं।
ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है।
ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई।
मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है।
मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है।
करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।
बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के बाद आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं। इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।
हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।
ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।