•   Tuesday Sep 29
Four Archers from JNV Solan Selected for National Competition  All four won medals at the State Archery Open Trials and will showcase their skills in Shillong.
In Sports

जेएनवी सोलन के चार तीरंदाज राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित स्टेट आर्चरी ओपन ट्रायल में चारों ने जीते पदक, शिलांग में दिखाएंगे दमखम

जवाहर नवोदय विद्यालय कुनिहार के चार होनहार तीरंदाजों ने चौथे स्टेट आर्चरी ओपन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में जगह बनाई है। घुमारवीं बिलासपुर में आयोजित ट्रायल में विद्यालय के खिलाड़ियों ने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। जूनियर वर्ग में सेजल नेगी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी वर्ग में तेनजिन कुंजे और आयुष ने रजत पदक अपने नाम किए। वहीं सब जूनियर वर्ग में अक्षिता शर्मा ने स्वर्ण पदक जीतकर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। चारों खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिता के लिए किया गया है। यह प्रतियोगिता शिलांग में आयोजित होगी। राष्ट्रीय स्तर पर चयन होने से विद्यालय में खुशी का माहौल है। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि के पीछे उनके नियमित अभ्यास कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विद्यार्थियों को विद्यालय के आर्चरी कोच अंकित चौधरी के साथ शारीरिक शिक्षकों हरिंदर सिंह और नेहा राठौर का मार्गदर्शन मिला।विद्यालय की प्रात कालीन सभा में प्राचार्य केके यादव ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चारों विद्यार्थियों को पदक एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दीं। प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धि विद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ साथ आर्चरी कोच और शारीरिक शिक्षकों के प्रयासों की भी सराहना की। विद्यालय के शिक्षकगण और समस्त स्टाफ ने सेजल नेगी, तेनजिन कुंजे, आयुष और अक्षिता शर्मा को राष्ट्रीय स्तर पर चयन के लिए बधाई दी। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि शिलांग में होने वाली प्रतियोगिता में भी ये खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर विद्यालय और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

BL School Kunihar Shines at Children's Science Fair; 9 Students Win Awards  Students showcased their talent in the quiz, model exhibition, and science activity corner; winners were felicitated upon their return to the school.
In Education

बाल विज्ञान मेले में बीएल स्कूल कुनिहार का जलवा, 9 विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार प्रश्नोत्तरी, मॉडल प्रदर्शनी और साइंस एक्टिविटी कॉर्नर में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर; स्कूल पहुंचने पर विजेताओं का किया सम्मान

  कुनिहार। बीएल सेंट्रल पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार के विद्यार्थियों ने खंड स्तरीय बाल विज्ञान मेले में शानदार प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दारलाघाट में आयोजित दो दिवसीय खंड स्तरीय बाल विज्ञान मेले में विद्यालय के 14 विद्यार्थियों ने विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इनमें से 9 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्थान हासिल किए। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि उपनिदेशक, प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, सोलन के मार्गदर्शन में आयोजित इस विज्ञान मेले में विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच, ज्ञान और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कनिष्ठ वर्ग की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में पूर्णिमा और वैष्णवी ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं, वरिष्ठ वर्ग की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में रिधिमा और नव्या ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मॉडल प्रदर्शनी में गार्गी शर्मा और जसप्रीत ने द्वितीय स्थान हासिल किया। साइंस एक्टिविटी कॉर्नर के कनिष्ठ वर्ग में रीत शर्मा ने द्वितीय स्थान, जबकि वरिष्ठ वर्ग में काव्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ माध्यमिक वर्ग में समीक्षा जोशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। जिला साइंस सुपरवाइजर अमरीश शर्मा ने विद्यार्थियों और उनके अध्यापकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। स्कूल पहुंचते ही विजेता विद्यार्थियों का हुआ सम्मान प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद विद्यालय लौटे विजेता विद्यार्थियों का स्कूल परिसर में माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा और मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर खुशी जताई और उन्हें सम्मानित किया। संबंधित अध्यापकों को भी मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने सभी विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनकी मेहनत, लगन, वैज्ञानिक सोच और अध्यापकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि से विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल है। पीटीए अध्यक्ष, विद्यार्थियों, अध्यापकों और अभिभावकों ने भी विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Students showcased their skills in the quiz, model exhibition, and science activity corner; winners were felicitated upon their return to school.
In Education

प्रश्नोत्तरी, मॉडल प्रदर्शनी और साइंस एक्टिविटी कॉर्नर में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर; स्कूल पहुंचने पर विजेताओं का किया सम्मान

कुनिहार। बीएल सेंट्रल पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार के विद्यार्थियों ने खंड स्तरीय बाल विज्ञान मेले में शानदार प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दारलाघाट में आयोजित दो दिवसीय खंड स्तरीय बाल विज्ञान मेले में विद्यालय के 14 विद्यार्थियों ने विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इनमें से 9 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्थान हासिल किए। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि उपनिदेशक, प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, सोलन के मार्गदर्शन में आयोजित इस विज्ञान मेले में विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच, ज्ञान और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कनिष्ठ वर्ग की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में पूर्णिमा और वैष्णवी ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं, वरिष्ठ वर्ग की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में रिधिमा और नव्या ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मॉडल प्रदर्शनी में गार्गी शर्मा और जसप्रीत ने द्वितीय स्थान हासिल किया। साइंस एक्टिविटी कॉर्नर के कनिष्ठ वर्ग में रीत शर्मा ने द्वितीय स्थान, जबकि वरिष्ठ वर्ग में काव्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ माध्यमिक वर्ग में समीक्षा जोशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। जिला साइंस सुपरवाइजर अमरीश शर्मा ने विद्यार्थियों और उनके अध्यापकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। स्कूल पहुंचते ही विजेता विद्यार्थियों का हुआ सम्मान प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद विद्यालय लौटे विजेता विद्यार्थियों का स्कूल परिसर में माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा और मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर खुशी जताई और उन्हें सम्मानित किया। संबंधित अध्यापकों को भी मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने सभी विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनकी मेहनत, लगन, वैज्ञानिक सोच और अध्यापकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि से विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल है। पीटीए अध्य

Environmental conservation initiative in Naggar: Shield Trust plants 14 Deodar saplings.
In Education

नाग्गर में पर्यावरण संरक्षण की पहल, शील्ड ट्रस्ट ने रोपे देवदार के 14 पौधे

कुल्लू, 25 सितंबर 2026। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शील्ड ट्रस्ट (Safeguarding Himachal’s Integrity, Environment, Landmarks & Dignity) ने आउटस्टेप पब्लिक स्कूल, नाग्गर के सहयोग से पौधरोपण अभियान चलाया। “Green Today | Greener Tomorrow” थीम के तहत आयोजित इस अभियान में विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वयंसेवकों ने उत्साह के साथ भाग लिया। अभियान के दौरान स्कूल परिसर में देवदार के 14 पौधे लगाए गए। इसके अलावा विद्यार्थियों और शिक्षकों को घरों तथा आसपास पौधे लगाने के लिए अतिरिक्त पौधे भी वितरित किए गए, ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश स्कूल परिसर से निकलकर स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। इस अभियान में कुल्लू वन विभाग का भी सहयोग रहा। वन विभाग ने पौधे उपलब्ध करवाने के साथ उनके उचित रोपण और देखभाल को लेकर आवश्यक मार्गदर्शन दिया। शील्ड ट्रस्ट ने डीएफओ, रेंज ऑफिसर और वन विभाग के अन्य अधिकारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। आउटस्टेप पब्लिक स्कूल, नाग्गर के एमडी एवं प्रधानाचार्य खुभ राम नेगी ने इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए ऐसी गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने छात्रों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। शील्ड ट्रस्ट की अध्यक्ष रितांजलि हस्तीर ने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य युवाओं और स्थानीय समुदाय को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों में शामिल करना है, ताकि हिमाचल की हरियाली और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने में जनभागीदारी बढ़े। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने लगाए गए पौधों की देखभाल और सुरक्षा का संकल्प लिया। ट्रस्ट के सचिव डॉ. योगेश भारद्वाज ने विद्यालय प्रबंधन, वन विभाग, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों का सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि पौधरोपण की सफलता केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। उनकी जीवितता, स्वस्थ विकास और नियमित देखभाल ही इस पहल की वास्तविक सफलता है। शील्ड ट्रस्ट ने कहा कि भविष्य में भी विद्यालयों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर हिमाचल के पर्यावरण, हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा

Major accident during a kabaddi match in Kangra; concrete roof collapses suddenly; 25 people injured, 3 in critical condition.
In News

कांगड़ा में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा, अचानक गिरा लेंटर; 25 लोग घायल, 3 की हालत गंभीर

कांगड़ा में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा, लेंटर गिरने से 25 घायल; 3 गंभीर कांगड़ा जिले में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एक लेंटर पर चढ़े हुए थे। इसी दौरान लेंटर अचानक गिर गया, जिससे वहां मौजूद करीब 25 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घायलों में से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर उपचार के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा रेफर किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लेंटर पर क्षमता से अधिक लोगों के चढ़ने के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और हादसे के कारणों की जांच शुरू की। फिलहाल घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। प्रशासन की ओर से घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और यह भी जांच की जा रही है कि लेंटर की क्षमता कितनी थी और उस पर कितने लोग मौजूद थे।

Two accused from Mandi arrested for smashing a car window and stealing ₹15 lakh in Shimla; CCTV footage cracked the case!
In crime

शिमला में कार का शीशा तोड़कर 15 लाख उड़ाने वाले मंडी के 2 आरोपी गिरफ्तार, CCTV फुटेज से खुला चोरी का राज!

शिमला पुलिस ने कार का शीशा तोड़कर 15 लाख रुपये चोरी करने के मामले में मंडी जिले के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चोरी की वारदात के बाद पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के आधार पर पुलिस टीम आरोपियों तक पहुंची और उन्हें दबोच लिया। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने कार का शीशा तोड़कर उसमें रखी करीब 15 लाख रुपये की रकम पर हाथ साफ किया था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और CCTV फुटेज के साथ अन्य सुरागों को जोड़ा। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मंडी जिले से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है और चोरी की रकम समेत वारदात में इस्तेमाल किए गए अन्य सामान के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों आरोपी इससे पहले इस तरह की किसी अन्य वारदात में शामिल रहे हैं या नहीं। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।  

Weather to take a turn again in Himachal; snowfall alert for Kinnaur and Lahaul-Spiti; rain expected in Shilla, Sirmaur.
In News

हिमाचल में फिर करवट लेगा मौसम , किन्नौर लाहौल स्पीति में बर्फ़बारी का अलर्ट ; शिला सिरमौर में बरसेगे बादल

हिमाचल प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने फिर करवट ले ली है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। रविवार को रोहतांग दर्रा, किन्नौर और स्पीति की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी दर्ज की गई। स्पीति घाटी के कुछ इलाकों में भी ताजा हिमपात हुआ, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को सितंबर में ही सर्दी का अहसास होने लगा। मौसम विभाग के अनुसार 28 सितंबर को शिमला, सोलन और सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। बारिश और बर्फबारी के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों व पर्यटकों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करते समय सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 29 सितंबर तक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और प्रदेश के अन्य हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद मौसम में कुछ राहत मिलने की संभावना है, हालांकि 30 सितंबर से 2 अक्तूबर के बीच कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश फिर हो सकती है।

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HPTDC मुख्यालय शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट की मुहर, शिमला से धर्मशाला ट्रांसफर को हरी झंडी

In Politics
High Court approves HPTDC headquarters shift; green light for transfer from Shimla to Dharamshala.

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के कॉरपोरेट कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही मुख्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के सरकार के फैसले का रास्ता साफ हो गया है।  मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने 16 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। याचिकाएं सेवानिवृत्त HPTDC कर्मचारियों दाबे राम और मुकेश भारद्वाज ने दायर की थीं। दोनों ने शिमला स्थित कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला के होटल कश्मीर हाउस में स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी थी।  सरकार और HPTDC की ओर से अदालत को बताया गया कि अप्रैल 2025 में धर्मशाला-कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी घोषित किया गया था। इसके बाद HPTDC के निदेशक मंडल ने निगम के अपने भवन में कॉरपोरेट कार्यालय को धर्मशाला शिफ्ट करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने का फैसला किया।  इससे पहले शिमला में होटल हॉलिडे होम के पास नया कॉरपोरेट कार्यालय बनाने की योजना थी, लेकिन भवन निर्माण की योजना को नगर निगम से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके बाद धर्मशाला में कार्यालय स्थानांतरित करने का प्रस्ताव आगे बढ़ा।  हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कार्यालय का स्थान तय करना मुख्य रूप से सरकार का नीतिगत निर्णय है। अदालत सरकार के ऐसे नीतिगत फैसले के गुण-दोष की तुलना कर उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।  अदालत ने यह भी कहा कि दोनों याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और उनका HPTDC के साथ सेवा संबंध समाप्त हो चुका है। इसलिए वे सेवारत कर्मचारियों से जुड़े इस मुद्दे पर याचिका दायर करने के लिए उचित आधार नहीं रखते। दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता द्वारा जमा 50-50 हजार रुपये की राशि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट स्टाफ वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन के बीच बराबर बांटने के निर्देश दिए।  हालांकि HPTDC की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल हेड ऑफिस का पता रिट्ज एनेक्सी, शिमला ही दर्ज है, इसलिए वास्तविक प्रशासनिक शिफ्टिंग की स्थिति को सरकार/निगम के आगामी आदेशों के संदर्भ में देखना होगा।

बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल, 8 महीने में 237 सैंपल फेल

In Health
Serious questions raised over medicine quality in Badi; 237 samples failed in 8 months.

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ महीनों में बद्दी और आसपास के फार्मा उद्योगों से जुड़े 237 दवा सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। इनमें बुखार, हार्ट समेत अलग-अलग बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी ड्रग अलर्ट में लगातार हिमाचल में निर्मित दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे न उतरने के मामले सामने आते रहे हैं। हालिया ड्रग अलर्ट में भी हिमाचल की कई दवाएं फेल हुई हैं।  बद्दी की फार्मा कंपनियों से जुड़े मामलों में पहले भी हार्ट संबंधी दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल फेल होने के मामले सामने आ चुके हैं। अक्टूबर 2024 के एक ड्रग अलर्ट में बद्दी की एक कंपनी की Calcium Gluconate दवा, जिसका इस्तेमाल कैल्शियम की कमी और कुछ आपात स्थितियों में किया जाता है, गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी था I वहीं, 2025 में बद्दी की एक फार्मा यूनिट को बार-बार सैंपल फेल होने और Good Manufacturing Practices (GMP) में कमियों के चलते कुछ दवाओं का उत्पादन रोकने के निर्देश दिए गए थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन कंपनियों के सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं, उनके खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने या उत्पादन रोकने की कार्रवाई के बावजूद क्या वास्तव में प्रोडक्शन पूरी तरह बंद हो रहा है? इसी को लेकर विभागीय कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, हर फेल सैंपल का मतलब यह नहीं होता कि पूरी कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। किसी विशेष बैच या दवा के निर्धारित गुणवत्ता पैरामीटर में कमी मिलने पर संबंधित बैच पर कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में कंपनियों को नोटिस, बाजार से बैच वापस लेने और नियमानुसार आगे की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।  बद्दी  देश  के प्रमुख फार्मा हब में शामिल है, इसलिए यहां दवाओं के गुणवत्ता मानकों को लेकर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं मरीजों की सुरक्षा और ड्रग रेगुलेशन की प्रभावशीलता से सीधे जुड़ जाती हैं। हाल के वर्षों में अधिकारियों ने कुछ इकाइयों के खिलाफ उत्पादन रोकने और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की है। 

बाल विज्ञान मेले में बीएल स्कूल कुनिहार का जलवा, 9 विद्यार्थियों ने जीते पुरस्कार प्रश्नोत्तरी, मॉडल प्रदर्शनी और साइंस एक्टिविटी कॉर्नर में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर; स्कूल पहुंचने पर विजेताओं का किया सम्मान

In Education
BL School Kunihar Shines at Children's Science Fair; 9 Students Win Awards  Students showcased their talent in the quiz, model exhibition, and science activity corner; winners were felicitated upon their return to the school.

  कुनिहार। बीएल सेंट्रल पब्लिक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुनिहार के विद्यार्थियों ने खंड स्तरीय बाल विज्ञान मेले में शानदार प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दारलाघाट में आयोजित दो दिवसीय खंड स्तरीय बाल विज्ञान मेले में विद्यालय के 14 विद्यार्थियों ने विभिन्न वैज्ञानिक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इनमें से 9 विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्थान हासिल किए। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने बताया कि उपनिदेशक, प्रारंभिक एवं उच्च शिक्षा विभाग, सोलन के मार्गदर्शन में आयोजित इस विज्ञान मेले में विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच, ज्ञान और प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कनिष्ठ वर्ग की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में पूर्णिमा और वैष्णवी ने प्रथम स्थान हासिल किया। वहीं, वरिष्ठ वर्ग की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में रिधिमा और नव्या ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मॉडल प्रदर्शनी में गार्गी शर्मा और जसप्रीत ने द्वितीय स्थान हासिल किया। साइंस एक्टिविटी कॉर्नर के कनिष्ठ वर्ग में रीत शर्मा ने द्वितीय स्थान, जबकि वरिष्ठ वर्ग में काव्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ माध्यमिक वर्ग में समीक्षा जोशी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। जिला साइंस सुपरवाइजर अमरीश शर्मा ने विद्यार्थियों और उनके अध्यापकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। स्कूल पहुंचते ही विजेता विद्यार्थियों का हुआ सम्मान प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के बाद विद्यालय लौटे विजेता विद्यार्थियों का स्कूल परिसर में माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा और मुख्याध्यापिका सुषमा शर्मा ने विद्यार्थियों की उपलब्धि पर खुशी जताई और उन्हें सम्मानित किया। संबंधित अध्यापकों को भी मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया। विद्यालय अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने सभी विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता उनकी मेहनत, लगन, वैज्ञानिक सोच और अध्यापकों के मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित विद्यार्थियों को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि से विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल है। पीटीए अध्यक्ष, विद्यार्थियों, अध्यापकों और अभिभावकों ने भी विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

जेएनवी सोलन के चार तीरंदाज राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित स्टेट आर्चरी ओपन ट्रायल में चारों ने जीते पदक, शिलांग में दिखाएंगे दमखम

In Sports
Four Archers from JNV Solan Selected for National Competition  All four won medals at the State Archery Open Trials and will showcase their skills in Shillong.

जवाहर नवोदय विद्यालय कुनिहार के चार होनहार तीरंदाजों ने चौथे स्टेट आर्चरी ओपन ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में जगह बनाई है। घुमारवीं बिलासपुर में आयोजित ट्रायल में विद्यालय के खिलाड़ियों ने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। जूनियर वर्ग में सेजल नेगी ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इसी वर्ग में तेनजिन कुंजे और आयुष ने रजत पदक अपने नाम किए। वहीं सब जूनियर वर्ग में अक्षिता शर्मा ने स्वर्ण पदक जीतकर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। चारों खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिता के लिए किया गया है। यह प्रतियोगिता शिलांग में आयोजित होगी। राष्ट्रीय स्तर पर चयन होने से विद्यालय में खुशी का माहौल है। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि के पीछे उनके नियमित अभ्यास कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विद्यार्थियों को विद्यालय के आर्चरी कोच अंकित चौधरी के साथ शारीरिक शिक्षकों हरिंदर सिंह और नेहा राठौर का मार्गदर्शन मिला।विद्यालय की प्रात कालीन सभा में प्राचार्य केके यादव ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चारों विद्यार्थियों को पदक एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दीं। प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धि विद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ साथ आर्चरी कोच और शारीरिक शिक्षकों के प्रयासों की भी सराहना की। विद्यालय के शिक्षकगण और समस्त स्टाफ ने सेजल नेगी, तेनजिन कुंजे, आयुष और अक्षिता शर्मा को राष्ट्रीय स्तर पर चयन के लिए बधाई दी। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि शिलांग में होने वाली प्रतियोगिता में भी ये खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर विद्यालय और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

कल से शुरू होंगे चैत्र नवरात्रि, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की विधि

In First Blessing
Chaitra_Navratri_will begin_tomorrow_know_the_auspicious_time_for_worship_and_the_method_of_Kalash_installation

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि की पूजा का खास महत्व होता है। यह मां दुर्गा की पूजा का बड़ा पर्व माना जाता है। शक्ति की आराधना का पर्व चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। इस साल नवरात्रि कई ज्योतिषीय संयोगों के कारण विशेष मानी जा रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 72 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब नवरात्रि की शुरुआत अमावस्या तिथि के प्रभाव में होगी और उसी दिन कलश स्थापना की जाएगी। चूंकि 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या में होगा, इसलिए उसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत मानी जाएगी और कलश स्थापना भी उसी दिन की जाएगी। इस दौरान लोग घर में घटस्थापना के अलावा व्रत रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा करते हैं। कई लोग इन नौ दिनों को साधना और आत्मशुद्धि का समय भी मानते हैं। चैत्र नवरात्रि 2026 प्रतिपदा तिथि  हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरुवार को कलश स्थापना के साथ नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में 19 मार्च को कलश की स्थापना कर दुर्गा माता की पूजा आरंभ की जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस बार प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह 4:52 बजे तक रहेगी। इसी वजह से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी जाएगी। घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे के बीच घटस्थापना करना शुभ रहेगा। यदि इस समय में स्थापना संभव न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी यह कार्य किया जा सकता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। लेकिन मंदिरों और पंडालों में कलश स्थापना का सबसे उत्तम मुहूर्त अभिजीत होगा। इन्हीं शुभ मुहूर्त में विधि पूर्वक कलश स्थापना करने के पश्चात विधि-विधान से पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा। घटस्थापना की सामग्री  हल्दी, कुंकू, गुलाल, रांगोली, सिंदूर, कपूर, जनेऊ, धूपबत्ती, निरांजन, आम के पत्ते, पूजा के पान, हार-फूल, पंचामृत, गुड़ खोपरा, खारीक, बदाम, सुपारी, सिक्के, नारियल, पांच प्रकार के फल, चौकी पाट, कुश का आसन, नैवेद्य आदि।  कलश स्थापना की विधि पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। मिट्टी के पात्र (मिट्टी की बेदी) में पवित्र मिट्टी भरें और उसमें जौ बोएं। तांबे या मिट्टी के कलश पर कलावा बांधें और स्वास्तिक बनाएं। कलश को जल और गंगाजल से भरें। कलश में सुपारी, सिक्का, अक्षत (चावल), हल्दी की गांठ डालें। कलश के मुंह पर आम के 5-7 पत्ते लगाएं। नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलावे से बांधें और कलश के ऊपर (अंकुरित भाग ऊपर रखते हुए) रखें। अब कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें। दीपक जलाएं, माता दुर्गा का ध्यान करें और 9 दिनों के व्रत का संकल्प लें।  पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व होता है। माता शैलपुत्री का स्वरूप शांत, सरल, करुणामयी और सौम्य माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसलिए चैत्र नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।  

पाताल भुवनेश्वर मंदिर: रहस्य, आस्था और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम

In Entertainment
Patal Bhuvaneshwar Temple: A wonderful confluence of mystery, faith and spirituality

  क्या आपने कभी कल्पना की है कि कहीं ऐसा स्थान भी हो सकता है, जहां सृष्टि के अंत का रहस्य छिपा हो? कोई ऐसा मंदिर, जहां चारों धामों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हों? उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर ऐसा ही एक रहस्यमयी और दिव्य स्थल है, जो हर भक्त को आस्था, रहस्य और आध्यात्मिकता की गहराइयों से जोड़ता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जिसे प्राचीन काल से चमत्कारी और गूढ़ माना गया है। गुफा में प्रवेश करते ही ऐसा लगता है मानो आप किसी अद्भुत आध्यात्मिक संसार में प्रवेश कर चुके हों। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के साथ-साथ 33 कोटि देवी-देवताओं का वास है। यहां स्थित भगवान गणेश का कटा हुआ मस्तक स्वयं में एक रहस्य है, जो इस स्थान की अलौकिकता को और भी गहरा बनाता है। यहां स्थित शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि वह निरंतर बढ़ रहा है, और जिस दिन वह गुफा की छत से टकराएगा, उस दिन प्रलय होगा। यह धारणा श्रद्धालुओं को एक अकल्पनीय आध्यात्मिक अनुभव और चेतना की गहराई से जोड़ती है।गुफा के भीतर चार रहस्यमयी द्वार मानव जीवन के चार प्रमुख पड़ावों का प्रतीक माने जाते हैं। कहा जाता है कि रावण की मृत्यु के बाद पाप द्वार और महाभारत युद्ध के बाद रण द्वार बंद हो गए। अब केवल धर्म द्वार और मोक्ष द्वार खुले हैं, जो जीवन के सत्य और मोक्ष के मार्ग की ओर संकेत करते हैं। पौराणिक इतिहास की दृष्टि से इस मंदिर का उल्लेख त्रेता युग में मिलता है। सूर्य वंश के राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा की खोज की थी। कहा जाता है कि पांडवों ने भी यहां भगवान शिव के साथ चौपड़ खेला था। बाद में 819 ईस्वी में जगत गुरु शंकराचार्य ने इस स्थल की पुनः खोज की और यहां पूजा आरंभ की। कैसे पहुंचे पाताल भुवनेश्वर? यह दिव्य स्थल पिथौरागढ़ से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन टनकपुर है। सड़क मार्ग से यह स्थान सुगम रूप से जुड़ा हुआ है और उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय रास्तों से होकर गुज़रता है, जो यात्रा को और भी आनंददायक बना देता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि रहस्य और आध्यात्मिकता के अनूठे संगम के कारण भी यह स्थल भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पाताल भुवनेश्वर की इस अद्भुत गुफा में जाकर आप स्वयं उस दिव्यता और रहस्यमय ऊर्जा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदियों से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती आ रही है।

कांगड़ा में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा, अचानक गिरा लेंटर; 25 लोग घायल, 3 की हालत गंभीर

In News
Major accident during a kabaddi match in Kangra; concrete roof collapses suddenly; 25 people injured, 3 in critical condition.

कांगड़ा में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा, लेंटर गिरने से 25 घायल; 3 गंभीर कांगड़ा जिले में कबड्डी मैच के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एक लेंटर पर चढ़े हुए थे। इसी दौरान लेंटर अचानक गिर गया, जिससे वहां मौजूद करीब 25 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने घायलों को बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घायलों में से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर उपचार के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा रेफर किया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लेंटर पर क्षमता से अधिक लोगों के चढ़ने के कारण यह हादसा हुआ। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और हादसे के कारणों की जांच शुरू की। फिलहाल घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। प्रशासन की ओर से घटना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और यह भी जांच की जा रही है कि लेंटर की क्षमता कितनी थी और उस पर कितने लोग मौजूद थे।

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ ₹183.50 सस्ता, विमान ईंधन के दाम भी घटे

In National News
Commercial LPG cylinder becomes cheaper by ₹183.50; aviation fuel prices also reduced.

तेल विपणन कंपनियों ने होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम कम किए गए हैं। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में 19 किलोग्राम का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,930 में उपलब्ध होगा। इससे पहले पिछले महीने इसकी कीमत बढ़कर ₹3,113 तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने यह राहत दी है, जिससे होटल और खाद्य व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में भी ₹5 प्रति लीटर की कमी की गई है। ईंधन की कीमतों में इस कटौती से विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति, 19 जून को हो सकते हैं ऐतिहासिक हस्ताक्षर

In International News
Agreement on a peace deal between the US and Iran, historic signing could happen on June 19

कई महीनों तक चली तनावपूर्ण और जटिल वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान युद्ध विराम (सीजफायर) और शांति समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता तय हो गया है। वहीं, ईरान ने भी आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि दोनों देशों ने सीजफायर से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दे दिया है। ट्रम्प ने अपने बयान में कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के सामान्य होने का संकेत देते हुए कहा, “दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू कर लें, तेल को बहने दें।” यदि यह समझौता औपचारिक रूप से संपन्न होता है, तो तेहरान और वॉशिंगटन के बीच पिछले 47 वर्षों में यह पहली उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठक होगी। हालांकि समझौते का पूरा दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने, ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत जारी रखने का ढांचा शामिल है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि अंतिम समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिवसीय वार्ता अमेरिका द्वारा किए जाने वाले तीन प्रमुख कदमों पर निर्भर करेगी। ईरान ने शर्त रखी है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करे, सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोके और ईरान के फ्रीज किए गए वित्तीय संसाधनों को जारी करे। इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही आगे की वार्ताओं और समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अधजली सिगरेट, चाय के झूठे प्याले और अधूरा इश्क़..

In Kavya Rath
Half-burnt cigarettes, empty cups of tea and incomplete love

साहिर लुधियानवी के अल्फाज़ न जाने कितनी अधूरी प्रेम कहानियों का दर्द बयाँ करते है। वह दर्द जो ख़ामोशी के नीचे दबे उस मशहूर मगर अनकहे एहसास की दास्तान है, जिसे हर आशिक़ ने हिज्र के बाद कहीं न कहीं महसूस किया है। अधूरे इश्क़ का अंजाम दिखाती उनके जीवन से जुड़ी एक कहानी जो शुरू तो हुई,  मगर मंज़िल तक कभी पहुँच न सकी। एक ऐसी मोहब्बत जो ज़माने की बनाई लकीरों से अलग थी, और जो आखिर में आधी जली सिगरेटों, चाय के झूठे प्यालों और ढेरों ख़तों में सिमटकर रह गई।  यह कहानी है उर्दू के मशहूर शायर साहिर लुधियानवी और पंजाब की पहली बाग़ी कवयित्री अमृता प्रीतम की। अधूरी मोहब्बत का यह एक ऐसा मुकम्मल फ़साना है, जिसके जैसा दूसरा ढूँढ पाना मुश्किल है; एक फ़साना जो मंज़िल तक पहुँचने से पहले लड़खड़ाया ज़रूर, मगर उसका असर कभी फीका नहीं पड़ा। 16 साल में अमृता की करवा दी गयी शादी   अमृता एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती थी जहां धर्म के धागे इंसान की किस्मत तय किया करते थे। जहां उनकी नानी मां अन्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों के बर्तन भी अलग रखती थी, जहां शादी का मतलब जिंदगी भर का साथ होता था। ऐसे परिवार में जन्मी थी वो बेख़ौफ़ कवियत्री जिसने अपनी जिंदगी में दो लोगों से प्यार किया जिनमें से एक मुस्लमान था। ज़ाहिर है की अमृता प्रीतम वो महिला थी जो अपने दौर से बहुत आगे थी। अमृता जब 16 साल की थीं, तो उनकी शादी प्रीतम सिंह से करवा दी गई। शादी के बाद वे अमृता कौर से अमृता प्रीतम बन गई। अमृता ने अपने पति का नाम तो अपनाया लेकिन वो उनकी अभिन्न अंग नहीं बन पाई।  साहिर-अमृता की पहली मुलाकात  ये बात 1944 की है जब साहिर अमृता पहली बार एक दूसरे से मिले थे। जगह थी लाहौर और दिल्ली के बीच स्थित प्रीत नगर जहां एक बड़े मुशायरे का आयोजन किया गया था अमृता यहां पहुंची थी। इसी मुशायरे में आम सा दिखने वाला, लेकिन अच्छी कदकाठी का एक युवक भी आया था जिसका नाम था साहिर लुधियाना। साहिर जुनुनी और आदर्शवादी थे, अमृता बेहद दिलकश अपनी खूबसूरती में भी और अपनी लेखनी में भी। बेहद क्रांतिकारी मिजाज के साहिर अमृता को पहली ही मुलाक़ात में भा गए थे। वहीं अमृता भी पहली ही मुलाकात में साहिर को अपना दिल दे बैठी थी। इस मुलाकात में कोई बात नहीं हुई। दोनों घंटो खामोश बैठे रहें। शायद उस समय की मोहब्बत ख़ामोशी से शुरू हुआ करती होगी, वैसे भी जहां इश्क़ ब्यां करने के लिए लफ़्ज़ों की ज़रूरत पड़े वो मोहब्बत कैसी। अमृता ने लिखा, "मुझे नहीं मालूम की वो साहिर के लफ्जो की जादूगरी थी, या उनकी खामोश नज़र का कमाल था, लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, आज जब उस रात को आँखें मूंद कर देखती हूँ तो ऐसा समझ आता है कि तकदीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया, उस दिन बारिश हुई थी।"   साहिर से मिलने के बाद अमृता ने उनके लिए एक कविता भी लिखी थी 'अब रात गिरने लगी तो तू मिला है, तू भी उदास, चुप, शांत और अडोल। मैं भी उदास, चुप, शांत और अडोल। सिर्फ- दूर बहते समुद्र में तूफान है…' आत्मकथाओं में लिखे मोहब्बत के किस्से  साहिर और अमृता की प्रेम कहानी के किस्से इन दोनों की आत्मकथाओं में मिलते है, अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट में अमृता प्रीतम ने साहिर के साथ हुई मुलाकातों का जिक्र किया है। वो लिखती है कि, "वो खामोशी से सिगरेट जलाता और फिर आधी सिगरेट ही बुझा देता, फिर एक नई सिगरेट जला लेता। जब तक वो विदा लेता, कमरा सिगरेट की महक से भर जाता। मैं इन सिगरेटों को हिफाजत से उठाकर अलमारी में रख देती और जब कमरे में अकेली होती तो उन सिगरेटों को एक-एक करके पीती। मेरी उंगलियों में फंसी सिगरेट, ऐसा लगता कि मैं उसकी उंगलियों को छू रही हूं। मुझे धुएं में उसकी शक्ल दिखाई पड़ती। ऐसे मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई।"  अमृता लिखती है-   "यह आग की बात है  तूने यह बात सुनाई है  यही ज़िन्दगी की वहीं सिगरेट है  जो तूने कभी सुलगायी थी  चिंगारी तूने दी थी  ये दिल सदा जलता रहा  वक्त कलम पकड़ कर  कोई हिसाब लिखता रहा  ज़िन्दगी का अब गम नहीं  इस आग को संभाल ले  तेरे हाथ की खेर मांगती हूँ  अब और सिगरेट जला ले "  वैसे साहिर भी कुछ कम नहीं थे। उनकी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है। जब साहिर और संगीतकार जयदेव किसी गीत पर काम कर रहे थे, तभी जयदेव की नज़र साहिर के घर में रखे एक झूठे कप पर पड़ी। उन्होंने उसे साफ़ करने की बात कही, तो साहिर ने तुरंत रोकते हुए कहा "इसे मत छूना, अमृता ने आख़िरी बार यहीं बैठकर इसी कप में चाय पी थी।" अमृता और साहिर के बीच मोहब्बत तो थी, मगर उनकी राहों में कई रुकावटें थीं। अमृता जब साहिर से मिलीं, तब वे विवाहित थीं हालाँकि वह रिश्ता कभी भी उनके मन को रास नहीं आया। दूसरी ओर साहिर लुधियानवी नए रिश्ते की ज़िम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं थे। फिर भी, अमृता ही थीं जिन्होंने उनके दिल में एक ऐसी जगह बनाई जो कोई और कभी नहीं ले सका। साहिर की जीवनी “साहिर: ए पीपुल्स पोइट” के लेखक अक्षय मानवानी लिखते हैं कि अमृता शायद वह अकेली स्त्री थीं जो साहिर को शादी के लिए मना सकती थीं। एक बार अमृता जब दिल्ली में साहिर की माँ से मिलने आई थीं, तो उनके जाने के बाद साहिर ने अपनी माँ से कहा था "वो अमृता प्रीतम थी… जो आपकी बहू बन सकती थी।" लेकिन साहिर ने यह बात कभी अमृता से नहीं कही। शायद वही चुप्पी, वही अनकहा इज़हार, अमृता के दिल में इमरोज़ के लिए जगह बनाता चला गया। अमृता के जीवन में इमरोज़ का आना  अमृता इमरोज़ से 1958 में मिले, मिलते ही इमरोज़ को अमृता से इश्क़ हो गया। इमरोज़ एक चित्रकार थे साहिर और अमृता की मुलाकात तो यूं ही संयोग से हो गई थी, लेकिन इमरोज़ से तो अमृता की मुलाकात करवाई गई थी। एक दोस्त ने दोनों को मिलवाया था। इमरोज़ ने तब अमृता का साथ दिया जब साहिर को कोई और मिल गया था।  इमरोज़ के साथ अमृता ने अपनी जिंदगी के आखिरी 40 साल गुजारे, इमरोज़, अमृता की पेंटिंग भी बनाते और उनकी किताबों के कवर भी डिजाइन करते। इमरोज़ और अमृता एक छत के नीचे ज़रूर रहे मगर एक दूसरे के साथ नहीं। उनकी जिंदगी के ऊपर एक किताब भी है 'अमृता इमरोज़: एक प्रेम कहानी'। एक ही छत के नीचे दो अलग कमरे इन दोनों का बसेरा बनें। अपने एक लेख "मुझे फिर मिलेगी अमृता" में इमरोज़ लिखते है की कोई रिश्ता बांधने से नहीं बंधता न तो मैंने कभी अमृता से कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ न कभी अमृता ने मुझसे। मैं तुम्हे फिर मिलूंगी कविता में शायद अमृता ने इमरोज़ के लिए ही लिखा था- "मैं तैनू फ़िर मिलांगी कित्थे ? किस तरह पता नई शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के तेरे केनवास ते उतरांगी जा खोरे तेरे केनवास दे उत्ते इक रह्स्म्यी लकीर बण के  खामोश तैनू तक्दी रवांगी जा खोरे सूरज दी लौ बण के तेरे रंगा विच घुलांगी जा रंगा दिया बाहवां विच बैठ के तेरे केनवास नु वलांगी पता नही किस तरह कित्थे        पर तेनु जरुर मिलांगी" इमरोज़ अमृता से बेइन्तिहाँ मोहब्बत करते थे मगर अमृता के दिलों दिमाग पर साहिर का राज था। किस्‍सा तो यह भी है कि इमरोज के पीछे स्‍कूटर पर बैठी अमृता सफर के दौरान ख्यालों में गुम होतीं तो इमरोज की पीठ पर अंगुलियां फेरकर 'साहिर' लिख दिया करती थीं। ये मोहब्बत अधूरी रही और इस मोहब्बत के गवाह बने आधी जली सिगरेट के टुकड़े, चाय का झूठा प्याला और ढेर सारे खुतूत।   

जयसिंहपुर: लोअर लंबागांव की बेटी अलीशा बनी ऑडिट इंस्पेक्टर

In Job
Jaisinghpur: Lower Lambagaon's daughter Alisha becomes audit inspector

जयसिंहपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले लोअर लंबागांव की अलीशा ने हिमाचल प्रदेश एलाइड सर्विसेज की परीक्षा पास कर प्रदेश का नाम रोशन किया है । अलीशा का चयन ऑडिट इंस्पेक्टर के पद हुआ है। अलीशा ने बाहरवीं ऐम अकादमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल जयसिंहपुर से की है। उसके बाद अलीशा ने गवर्नमेंट डिग्री कालेज धर्मशाला से ग्रेजुएशन की । अलीशा के पिता सुमन कुमार हिमाचल पुलिस में कार्यरत हैं और माता स्नेहलता गृहिणी हैं। अलीशा के पिता सुमन कुमार ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिवार के लिए गौरव का क्षण है। वही अलीशा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।

ममलेश्वर महादेव मंदिर: करसोग की धरती पर इतिहास, आस्था और महाभारत की अमर विरासत

In Banka Himachal
Mamleshwar Mahadev Temple: History, Faith, and the Immortal Legacy of the Mahabharata on the Soil of Karsog

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की करसोग घाटी को देवभूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर न केवल करसोग की पहचान है, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक माना जाता है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, पौराणिक मान्यताओं और अनूठी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं तथा शोधकर्ताओं के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करसोग नगर के मध्य स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान कुछ समय के लिए करसोग घाटी में रुके थे। इसी अवधि में उन्होंने यहां भगवान शिव की आराधना की और मंदिर की स्थापना की। यद्यपि इस संबंध में ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन स्थानीय समाज में यह विश्वास पीढ़ियों से चला आ रहा है। मंदिर का नाम "ममलेश्वर" भी अपने आप में विशेष महत्व रखता है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार भगवान शिव यहां "ममलेश्वर महादेव" के रूप में विराजमान हैं और क्षेत्र के लोगों की रक्षा करते हैं। सदियों से यह मंदिर करसोग क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र रहा है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है यहां स्थित अखंड ज्योति और अखंड धूना। मान्यता है कि यह पवित्र अग्नि सदियों से निरंतर जल रही है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर में आने वाले भक्त इस धूने के दर्शन को अत्यंत शुभ मानते हैं। ममलेश्वर मंदिर की एक और अनूठी पहचान यहां सुरक्षित रखा गया विशाल गेहूं का दाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह दाना महाभारत काल का है और सामान्य गेहूं के दाने से कई गुना बड़ा है। इसे प्राचीन काल की समृद्धि और उस युग की विशिष्टता का प्रतीक माना जाता है। यह धरोहर वर्षों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मंदिर परिसर में रखा गया विशाल ढोल भी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है। लोकमान्यताओं के अनुसार इसका संबंध भीमसेन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पांडवों के करसोग प्रवास के दौरान इसका उपयोग किया जाता था। यद्यपि इसकी ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय संस्कृति में इसका विशेष स्थान है। ममलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा राक्षस वध की है। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन काल में करसोग क्षेत्र में एक भयानक राक्षस का आतंक था, जो प्रतिदिन गांव से एक व्यक्ति की बलि मांगता था। जब एक निर्धन परिवार के इकलौते पुत्र की बारी आई, तब भीमसेन ने स्वयं उसकी रक्षा का निर्णय लिया। कहा जाता है कि भीम ने राक्षस का वध कर क्षेत्र को उसके आतंक से मुक्त कराया। इस घटना के बाद लोगों की भगवान शिव और पांडवों के प्रति श्रद्धा और अधिक बढ़ गई। मंदिर की स्थापत्य कला भी इसकी विशेष पहचान है। पारंपरिक पहाड़ी शैली में निर्मित यह मंदिर पत्थर और लकड़ी की उत्कृष्ट कारीगरी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर की नक्काशी, प्राचीन शिखर और पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। समय-समय पर मंदिर का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया गया, लेकिन इसकी मूल संरचना आज भी प्राचीन परंपराओं की झलक देती है। मंदिर परिसर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग और अन्य प्राचीन मूर्तियां भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है और वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन मास और अन्य शिव पर्वों पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ममलेश्वर महादेव मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह करसोग की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का भी केंद्र है। स्थानीय लोग किसी भी शुभ कार्य, विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यवसाय की शुरुआत से पहले भगवान ममलेश्वर का आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं। मंदिर आज भी क्षेत्र के लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बना हुआ है। करसोग की शांत वादियों के बीच स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर इतिहास, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाभारत काल से जुड़ी लोकमान्यताएं, अखंड धूना, विशाल गेहूं का दाना, भीम का ढोल और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा इस मंदिर को हिमाचल प्रदेश के सबसे विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं। यही कारण है कि सदियों बाद भी ममलेश्वर महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रहा है।

11 साल बाद हरियाणा कांग्रेस को मिले जिला अध्यक्ष, हिमाचल में भी 9 महीने से इन्तजार

In Siyasatnama
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बगैर संगठन के ही हरियाणा में कई चुनाव लड़ने और हारने के  बाद  आखिरकार 11 साल बाद मंगलवार देर रात कांग्रेस ने हरियाणा में 32 जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा की है। पानीपत शहरी के अलावा सभी अन्य 32 संगठनत्मक ज़िलों में अध्यक्षों की नियुक्ति हो गई है। माना जा रहा है की संगठन की शेष नियुक्तियां भी जल्द होगी। इन नियुक्तियों में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दबदबा रहा है। 32 में से 22 जिला अध्यक्ष हुड्डा गुट के बताए जा रहे हैं, जबकि सात सांसद कुमारी सैलजा, एक रणदीप सुरजेवाला और दो कैप्टन अजय यादव के समर्थक हैं।  इस सूचि में सिर्फ दो महिलाएं है। संतोष बेनीवाल को सिरसा और मेवात के शाहिदा खान, जो कि एकमात्र मुस्लिम नेता को कमान दी गई है। जबकि विधानसभा चुनाव लड़ चुके चार नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया है।  हरियाणा में हुई इन नियुक्तियों के बाद अब निगाहें हिमाचल पर टिकी है, जहँ नौ महीने से भी ज्यादा वक्त से राज्य, जिला और ब्लॉक इकाइयां भंग है। इस बीच  मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभग सिंह  का कार्यकाल भी पूरा हो चूका है और नए अध्यक्ष के एलान का इन्तजार भी जारी है।   ये 32 नेता बने, जिला अध्यक्ष  कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से सूची के अनुसार, अंबाला कैंट से परविंदर परी,  अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण से दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण से अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी से प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी से सुशील धनक, फरीदाबाद से बलजीत कौशिक, फतेहाबाद से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण से वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी से पंकज दावर को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह, हिसार ग्रामीण से बृज लाल खोवाल, हिसार शहरी से बजरंग दास गर्ग, झज्जर से संजय यादव, जींद से ऋषि पाल, कैथल से रामचंदर गुज्जर, करनाल ग्रामीण से राजेश वैद, करनाल शहरी से पराग गाबा, कुरुक्षेत्र से मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ से सत्यवीर यादव, मेवात (नूंह) से शाहिदा खान, पलवल से नेत्रपाल अधाना, पंचकूला से संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण से रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण से सुभाष चंद चौवरी, रेवाड़ी शहरी से प्रवीण चौधरी, रोहतक ग्रामीण से बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी से कुलदीप सिंह, सिरसा से संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण से संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी से कमल देवान, यमुनानगर ग्रामीण से नरपाल सिंह और यमुनानगर शहरी से देवेंद्र सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

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