हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन की गेहूं बिजाई की तैयारियों के बीच किसानों के लिए अहम खबर है। प्रदेश सरकार ने गेहूं के बीज पर सब्सिडी की दर तय कर दी है। इस बार किसानों को गेहूं का बीज पिछले साल के मुकाबले 3 रुपये महंगा मिलेगा। सरकार के नए निर्णय के अनुसार किसानों को सब्सिडी वाला गेहूं बीज 33 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जाएगा। पिछले साल यही बीज किसानों को 30 रुपये प्रति किलो मिला था। दरअसल, दो दिन पहले गेहूं के बीज की कीमत 41.50 रुपये प्रति किलो तय की गई थी, लेकिन सब्सिडी की दर तय न होने के कारण किसानों को बीज वितरण शुरू नहीं हो पाया था। अब सरकार ने सब्सिडी तय कर दी है और सभी जिलों में गेहूं के बीज की खेप भेजी जा रही है। कुल्लू जिले में 450 क्विंटल गेहूं का बीज पहुंच चुका है, जबकि आने वाले दो-तीन दिनों में करीब 600 क्विंटल और बीज पहुंचने की उम्मीद है। यहां किसानों को एचडी-3226 किस्म का बीज उपलब्ध करवाया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान रबी सीजन में गेहूं की खेती करते हैं। ऐसे में सब्सिडी की दर तय होने से किसानों को अब समय पर बीज मिलने और बिजाई शुरू करने में राहत मिलेगी।
मिलेट्स के नाम पर ‘अनहेल्दी’ फूड! IGMC शोध में चौंकाने वाला खुलासा शिमला के आईजीएमसी के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के शोध में मिलेट्स से तैयार किए जा रहे रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों को लेकर अहम खुलासा हुआ है। शोध के अनुसार बाजार में मिलेट्स के नाम पर बिक रहे कुरकुरे, चिप्स, बिस्कुट, नूडल्स और सूप को कई प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है, जिससे इनमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व कम हो सकते हैं। शोध के मुताबिक मिलेट्स को अल्ट्रा-प्रोसेस करने के दौरान पॉलिशिंग, अधिक तापमान और मशीनरी प्रक्रिया के साथ कई उत्पादों में पाम ऑयल और आर्टिफिशियल फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे प्राकृतिक फाइबर, मिनरल्स, विटामिन और अन्य माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की मात्रा घट सकती है। शोध में यह भी बताया गया है कि मोटे अनाज से आटा तैयार करते समय अगर उसकी बाहरी परत, चोकर और अंकुर हटा दिए जाएं तो प्राकृतिक फाइबर और सूक्ष्म पोषक तत्वों का नुकसान होता है। ऐसे में सिर्फ ‘मिलेट्स’ नाम देखकर पैकेटबंद या अत्यधिक प्रोसेस्ड उत्पादों को हेल्दी मानना सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार बाजरा, रागी, ज्वार, कंगनी और अन्य मोटे अनाज को प्राकृतिक रूप में या कम से कम प्रोसेसिंग के साथ खाना ज्यादा बेहतर विकल्प है। आईजीएमसी के डॉ. अमित सचदेवा ने भी बाजार में मिलेट्स के नाम पर बिक रहे महंगे और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पादों से सावधानी बरतने की सलाह दी है।
शिमला में खाद्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग ने त्योहारी सीजन के बीच मिठाई की दुकानों पर कार्रवाई तेज कर दी है। बालूगंज में मिठाइयों में कॉकरोच मिलने के बाद विभाग ने दो प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिए। दोनों दुकानदारों को ऑनलाइन नोटिस भी जारी किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान एक मिठाई प्रतिष्ठान में गुलाब जामुन और रसगुल्लों की चाशनी में कॉकरोच पाए गए। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से मिठाइयों को अनुपयुक्त मानते हुए करीब दो क्विंटल मिठाई मौके पर ही नष्ट करवाई गई विभाग की टीम ने अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण किया और अलग-अलग खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे। अधिकारियों ने दुकानदारों को साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
हिमाचल प्रदेश में महिला विकास निगम की शिक्षा ऋण योजना का लाभ लेने वाली युवतियों की संख्या बेहद कम सामने आई है। अब तक प्रदेश में सिर्फ दो युवतियों ने उच्च शिक्षा के लिए इस योजना के तहत ऋण लिया है। महिला विकास निगम की ओर से पात्र युवतियों को शिक्षा के लिए 75 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को उच्च शिक्षा हासिल करने में आर्थिक मदद देना है। हालांकि, योजना का प्रावधान होने के बावजूद इसका लाभ लेने वाली युवतियों की संख्या काफी कम है। ऐसे में योजना के प्रचार-प्रसार और पात्र लाभार्थियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभाग की ओर से युवतियों को योजना की जानकारी देने और अधिक से अधिक पात्र छात्राओं को इसका लाभ दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान आई आपदा से जुड़े मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारी के उपस्थित न होने पर NGT ने नाराजगी जताई और मुख्य सचिव को आवश्यक निर्देश दिए। ट्रिब्यूनल ने मामले से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही को गंभीरता से लेते हुए संबंधित रिकॉर्ड और जानकारी पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि आपदा से जुड़े मामलों में विभागों को गंभीरता से कार्रवाई करनी होगी और मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध करानी होगी। अधिकारी की गैरहाजिरी को लेकर NGT ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब अगली सुनवाई में संबंधित विभाग की ओर से रिकॉर्ड और जवाब पेश किया जाना है।
हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की तालाबंदी का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। स्कूल बंद होने के बाद कुछ लोग अब स्कूल के लिए दान की गई जमीन वापस मांग रहे हैं। मामले को लेकर विवाद बढ़ने पर शिक्षा विभाग ने संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों को बंद या मर्ज किए जाने के फैसले के बाद दानदाताओं की ओर से जमीन वापस लेने की मांग उठाई गई है। उनका तर्क है कि जमीन स्कूल के संचालन के उद्देश्य से दी गई थी और अब जब स्कूल ही बंद हो रहे हैं तो जमीन का क्या होगा, यह स्पष्ट किया जाए। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी मांगी है। शिक्षा विभाग अब स्कूलों की जमीन, दान से जुड़े दस्तावेज और स्कूल बंद करने से संबंधित रिकॉर्ड जुटा रहा है। अब पूरे मामले में यह तय होना है कि स्कूल बंद होने की स्थिति में दान की गई जमीन पर किसका अधिकार रहेगा और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा सकता है। विभागीय रिकॉर्ड और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं और 11वीं की रिक्त सीटों पर दाखिले के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों के लिए राहत की खबर है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए लेटरल एंट्री चयन परीक्षा (LEST-2027) के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 22 अक्तूबर 2026 कर दी गई है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर थी। पात्र विद्यार्थी नवोदय विद्यालय समिति की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया निशुल्क है। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर 23 से 25 अक्तूबर तक सुधार का मौका भी दिया जाएगा। हालांकि, इस दौरान केवल श्रेणी, लिंग, क्षेत्र और दिव्यांगता से जुड़ी जानकारी में सुधार किया जा सकेगा। कक्षा 9वीं के लिए विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में संबंधित जिले के सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूल में 8वीं कक्षा में अध्ययनरत होना जरूरी है। वहीं कक्षा 11वीं के लिए विद्यार्थी का 2026-27 सत्र में 10वीं कक्षा में अध्ययनरत होना आवश्यक है। दोनों कक्षाओं के लिए चयन परीक्षा 10 अप्रैल 2027 को आयोजित की जाएगी। इच्छुक विद्यार्थी अंतिम तारीख का इंतजार न करते हुए समय पर आवेदन पूरा कर लें। जिला: शिमला — हिमाचल की खबर के तौर पर यह सूचना जवाहर नवोदय विद्यालय ठियोग, शिमला की ओर से भी जारी की गई है।
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निशाना साधते हुए इसे चुनावी साल में जनता को गुमराह करने की कोशिश बताया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पिछले विधानसभा चुनाव में दी गई गारंटियां अभी पूरी नहीं की हैं और अब नए जिलों के गठन की बात कर रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार वास्तव में नए जिले बनाना चाहती थी तो इस प्रक्रिया की शुरुआत कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही की जानी चाहिए थी। उन्होंने नए जिलों के गठन के लिए आयोग बनाने के समय पर भी सवाल उठाए। जयराम ने कहा कि देशभर में जनगणना की प्रक्रिया चल रही है और ऐसे समय में प्रशासनिक व राजस्व सीमाओं से जुड़े फैसले लेना समझ से परे है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में झटके के बाद सरकार अब नए जिलों के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब सरकार की ऐसी घोषणाओं को समझ रही है। बता दें कि हिमाचल सरकार ने नए जिलों के गठन और प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में आयोग गठित किया है, जिसे छह महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है
त्योहारी सीजन को देखते हुए हिमाचल में खाद्य सुरक्षा विभाग ने दूध और दूध से बने उत्पादों की जांच तेज कर दी है। विभाग की टीमें बाजारों में खुले के साथ पैकेट बंद दूध के भी सैंपल लेंगी। दूध, पनीर, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए दूध और मिठाइयों के सैंपल लिए हैं। सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। मानकों पर खरा न उतरने वाले खाद्य पदार्थों के मामले में संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। घर बैठे ऐसे कर सकते हैं प्राथमिक दूध में पानी की मिलावट का अंदाजा लगाने के लिए कांच की साफ ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालकर देखें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे नीचे की ओर बहते हुए सफेद निशान छोड़ सकता है, जबकि ज्यादा पानी मिला दूध तेजी से बह सकता है। हालांकि, यह सिर्फ प्राथमिक घरेलू जांच है और इससे मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं होती। रासायनिक मिलावट की सही पहचान के लिए लैब टेस्ट जरूरी है। त्योहारों के दौरान दूध और दूध से बने उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानकों के अनुरूप खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाना है।
हिमाचल प्रदेश में दो अलग-अलग मामलों में SSB जवान और एक युवक के लापता होने से परिजनों की चिंता बढ़ गई है। दोनों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। जानकारी के अनुसार, SSB का एक जवान ट्रेनिंग के लिए रवाना हुआ था, लेकिन इसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया। परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पुलिस को सूचित किया गया। वहीं, दूसरा युवक रामलीला देखने के लिए घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने आसपास और संभावित स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस में गुमशुदगी की सूचना दी गई। पुलिस दोनों मामलों में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है और लापता लोगों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों के साथ-साथ अन्य माध्यमों से भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल दोनों के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने खनन गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन, निगरानी और नियंत्रण के लिए उद्योग विभाग के तहत अलग खनन निदेशालय स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। नए निदेशालय की कमान IAS कैडर के अधिकारी को दी जाएगी। इसके लिए ग्रुप-ए स्तर पर निदेशक (खनन) का पद सृजित किया गया है। निदेशक ही निदेशालय के विभागाध्यक्ष होंगे, जबकि इसका समग्र प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग विभाग के पास रहेगा। निदेशालय के संचालन के लिए उद्योग विभाग से 8 पद स्थानांतरित किए गए हैं। इनमें संयुक्त निदेशक, सहायक नियंत्रक (वित्त एवं लेखा), अधीक्षक ग्रेड-1, वरिष्ठ सहायक, तीन जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और एक चपरासी शामिल हैं। इसके अलावा 4 मल्टी टास्क वर्कर आउटसोर्स आधार पर रखने की मंजूरी दी गई है। सरकार जल्द ही संबंधित वैधानिक नियमों में संशोधन करेगी, ताकि निदेशक को खनन गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक अधिकार और जिम्मेदारियां दी जा सकें। अलग निदेशालय बनने से अवैध खनन पर निगरानी, खनिज संसाधनों के प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने के प्रयासों को बेहतर तरीके से संचालित करने की उम्मीद है।
शिमला: राजधानी शिमला में नशे के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस थाना ईस्ट की टीम ने पंथाघाटी में 505 ग्राम चरस के साथ 22 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, 14 अक्तूबर को टीम पंथाघाटी स्थित हेतविक सुपर मार्ट के पास जांच कर रही थी। इसी दौरान एक व्यक्ति की तलाशी ली गई, जिसमें उसके कब्जे से 505 ग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विजय बाथा मगर (22) निवासी जिला सल्यान, नेपाल के रूप में हुई है। वर्तमान में वह शिमला जिले की चिड़गांव तहसील में रह रहा था। पुलिस थाना ईस्ट शिमला में 15 अक्तूबर को एफआईआर संख्या 96/2026 दर्ज की गई है। मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 के तहत दर्ज हुआ है। आरोपी को आगामी कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पास चरस कहां से पहुंची और क्या इसके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या नशा तस्करी का नेटवर्क भी जुड़ा हुआ है। मामले की जांच जारी है।
शिमला: राजधानी शिमला के IGMC और अटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाणा में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को फॉलोअप के दौरान फीस चुकानी पड़ रही है। बार-बार जांच और डॉक्टर से परामर्श के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि इन शुल्कों से उनके इलाज का खर्च बढ़ रहा है। आईजीएमसी में ओपीडी पंजीकरण के लिए 10 रुपये शुल्क लागू किया गया है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यह पर्ची 14 दिनों तक वैध रहती है। वहीं, चमियाणा अस्पताल में भी ओपीडी पर्ची के लिए पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों से लिए जा रहे यूजर चार्ज को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी पर्ची के लिए 10 रुपये का शुल्क निर्धारित है, जिसमें शिमला का IGMC और चमियाणा भी शामिल हैं। इसके अलावा IGMC में रोगी कल्याण समिति की बैठकों के बाद कुछ जांच और अन्य सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया गया है। स्पेशल वार्ड और विभिन्न जांचों की दरों में बढ़ोतरी की जानकारी भी सामने आई है। मरीजों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में एक ही मरीज को कई बार अस्पताल आना पड़ता है। ऐसे में पर्ची, जांच और अन्य शुल्क मिलाकर इलाज का कुल खर्च बढ़ जाता है। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन और सरकार से फॉलोअप मरीजों के लिए शुल्क में राहत देने की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का तर्क है कि ओपीडी पंजीकरण शुल्क व्यवस्था को व्यवस्थित करने और अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए चार सदस्यीय आयोग का गठन किया है। हिमाचल हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी आयोग के अध्यक्ष होंगे। आयोग में अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य बनाया गया है, जबकि निदेशक भू-अभिलेख विभाग आयोग के सदस्य सचिव होंगे। आयोग का मुख्यालय शिमला में रहेगा। जिलों से लेकर विकास खंडों तक की होगी समीक्षा आयोग प्रदेश के मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की व्यवस्था की समीक्षा करेगा। जरूरत के अनुसार नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, मौजूदा इकाइयों के विलय, विभाजन या पुनर्गठन को लेकर सरकार को सिफारिशें दी जाएंगी। इस दौरान जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियां, आवागमन की सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और आम लोगों की सुविधा को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। आयोग जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और अन्य हितधारकों से भी सुझाव लेगा। छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट सरकार ने आयोग को छह महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने का समय दिया है। आयोग नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने के लिए जरूरी भवन, कर्मचारियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर होने वाले खर्च का भी आकलन करेगा। हिमाचल में फिलहाल 12 जिले हैं। लंबे समय से नूरपुर, देहरा, पालमपुर, सुंदरनगर, रामपुर और बद्दी जैसे क्षेत्रों को जिला बनाने की मांग और चर्चा होती रही है। हालांकि, अभी किसी नए जिले के गठन का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट और उसके बाद सरकार के निर्णय से साफ होगी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल भर्ती की तैयारी कर रहे होमगार्ड जवानों के लिए राहत की खबर है। राज्य मंत्रिमंडल ने होमगार्ड जवानों को भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक परीक्षा और ग्राउंड टेस्ट से छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस संबंध में गृह विभाग की ओर से डीजीपी को पत्र जारी किया गया है। अब तक होमगार्ड जवानों को भी पुलिस भर्ती के दौरान शारीरिक मानक और दक्षता परीक्षा से गुजरना पड़ता था। इसमें कद-छाती की माप, दौड़, ऊंची कूद और लंबी कूद जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं। नए फैसले के बाद इन परीक्षाओं से उन्हें राहत मिलेगी। हालांकि, छूट लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया और शर्तें आधिकारिक आदेश में स्पष्ट की जाएंगी। पुलिस कांस्टेबल भर्ती में होमगार्ड स्वयंसेवकों के लिए 15 प्रतिशत पद आरक्षित रखने का प्रावधान है। इसके अलावा सरकार ने हाल ही में होमगार्ड जवानों को ऊपरी आयु सीमा में एकमुश्त पांच वर्ष की छूट भी दी थी। ड्यूटी के दौरान मौत पर भी आर्थिक सहायता होमगार्ड जवानों के कल्याण के लिए सरकार ने एक और फैसला लिया है। ड्यूटी के दौरान जवान की मौत होने पर उसके परिवार को एक लाख रुपये, जबकि ड्यूटी के दौरान घायल होने पर 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता होमगार्ड वेलफेयर फंड से दी जाएगी। सरकार के इस फैसले से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे होमगार्ड जवानों को शारीरिक परीक्षा को लेकर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, भर्ती के अन्य नियम और चयन प्रक्रिया आधिकारिक निर्देशों के अनुसार ही लागू होंगे।
दिल्ली में सोमवार को कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए। कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में हिमाचल से बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 2,000 कार्यकर्ताओं ने इसमें भाग लिया। मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और कई मंत्री-विधायक भी प्रदर्शन में शामिल रहे। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के SIR और कथित वोट चोरी से जुड़े मामलों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताते हैं। दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च भी किया। प्रदर्शन के चलते मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई और कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा गया। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। हिमाचल कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर पहले जिला स्तर पर प्रदर्शन कर चुकी है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 15वें वित्त आयोग के तहत करवाए गए करीब 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक जमा नहीं हो पाए हैं। केंद्र सरकार ने इन कार्यों का रिकॉर्ड और खर्च का पूरा ब्योरा मांगा है। दरअसल, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान पंचायतों में किए गए विकास कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाणपत्र के जरिए यह प्रमाणित किया जाता है कि योजना के तहत मिली राशि निर्धारित उद्देश्य पर खर्च की गई है। इसके साथ संबंधित कार्यों का विवरण, बिल और खर्च का रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होता है। बताया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों के चुनाव में लगे समय और विकास कार्यों में हुई देरी के कारण बड़ी राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं हो सके। अब पंचायतों को बिलों सहित रिकॉर्ड जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। 15वें वित्त आयोग की राशि का बड़ा हिस्सा पेयजल, स्वच्छता, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च किया जाना था। वहीं, शेष राशि पंचायतों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल की जा सकती थी। पुराने फंड का हिसाब लंबित रहने से अगली वित्त आयोग की किस्तों की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर मामले में राशि अपने आप रुकना तय नहीं है; इसका असर संबंधित अनुदान की शर्तों और केंद्र सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पाल रासु ने बताया कि पुराने वित्तीय वर्ष के करीब 300 करोड़ रुपये के कार्यों के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करवाए जाने हैं और इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) में अधिकारियों और कर्मचारियों के युक्तीकरण (Rationalization) को मंजूरी दे दी है। इसके तहत स्वीकृत पदों से अधिक तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को जरूरत वाले क्षेत्रों में भेजा जाएगा। सरकार के फैसले के बाद उन मंडलों, उपमंडलों और विंग में तैनात अतिरिक्त स्टाफ का समायोजन किया जाएगा, जहां स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारी अधिक हैं। वहीं, जिन क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहां इन कर्मचारियों की सेवाएं ली जाएंगी। रिपोर्ट के अनुसार, कई जिला मुख्यालयों और सुविधाजनक मंडलों में एक ही स्वीकृत पद के मुकाबले दो से तीन अधिकारी या कर्मचारी संबद्ध हैं। इसके विपरीत चंबा, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और शिमला के दूरदराज क्षेत्रों में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता के पद खाली हैं। NH विंग में भी होगा स्टाफ का समायोजन नेशनल हाईवे विंग में भी सड़कों की जिम्मेदारी कम होने के कारण स्टाफ का पुनर्समायोजन किया जाएगा। तीन और राष्ट्रीय राजमार्ग NHAI को सौंपे जाने के बाद PWD के NH विंग के पास अब 779 किलोमीटर सड़कों की जिम्मेदारी रह गई है। वहीं NHAI के पास 1,244 किलोमीटर और BRO के पास 569 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। सरकार का उद्देश्य उपलब्ध मानव संसाधन का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना और दूरदराज क्षेत्रों में तकनीकी स्टाफ की कमी को दूर करना है, ताकि सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश में बंदरों की बढ़ती समस्या पर नियंत्रण के लिए चलाया जा रहा नसबंदी अभियान अब फंडिंग की चुनौती से जूझ रहा है। वन विभाग के अनुसार, पहले बंदरों की नसबंदी के लिए CAMPA से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब विभाग को इस अभियान को जारी रखने के लिए वैकल्पिक फंडिंग की तलाश करनी पड़ रही है। नसबंदी अभियान बंद होने या इसकी रफ्तार कम होने से भविष्य में बंदरों की आबादी को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बंदरों की संख्या तुरंत बढ़ जाएगी। इसका असर नसबंदी की गति, प्रजनन दर और अन्य आबादी नियंत्रण उपायों पर निर्भर करेगा। हिमाचल में वर्ष 2007 से बंदर नसबंदी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 1.86 लाख बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके चलते प्रदेश में रीसस मकाक की आबादी में लंबे समय में गिरावट दर्ज की गई है। 2004 में अनुमानित आबादी करीब 3.17 लाख थी, जो 2020 में घटकर 1.36 लाख रह गई। हाल के वर्षों में अभियान की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। 2024-25 में 8,800 बंदरों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन केवल 2,284 बंदरों की नसबंदी हो सकी। इसके पीछे फंडिंग के साथ-साथ बंदरों को पकड़ने और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आई हैं। फिलहाल वन एवं वन्यजीव विभाग ने प्रदेश के सभी सात नसबंदी केंद्रों को चालू रखने का फैसला किया है। इन केंद्रों के जरिए बंदरों की आबादी को नियंत्रित करने और मानव-बंदर संघर्ष को कम करने की कोशिश जारी रखने की बात कही गई है। विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन केंद्रों और नसबंदी अभियान के लिए लगातार फंडिंग, स्टाफ और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराना है। 2024 में बंदरों की आबादी का नया सर्वे भी कराया गया था, जिसके आंकड़ों का इस्तेमाल आगे की रणनीति तय करने में किया जाएगा।
हिमाचल प्रदेश: प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने करवट लेते हुए बर्फबारी शुरू कर दी है। लगातार बर्फबारी से कई सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं, जबकि खराब मौसम के चलते उड़ानें भी रद्द करनी पड़ीं। इससे लोगों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। चूड़धार और शिंकुला दर्रे में बर्फबारी के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया गया। प्रशासन और राहत-बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। कई मार्गों पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से मौसम को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है। मौसम विभाग ने भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं, बर्फबारी के बाद हिमाचल की चोटियों ने सफेद चादर ओढ़ ली है, जिससे पर्यटन स्थलों पर खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है।
छात्रों ने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्य को आसान बनाने के लिए एक खास ‘प्रहरी रोबोट’ तैयार किया है। यह रोबोट मलबे में दबे लोगों की सांसों और हलचल का पता लगाने में मदद करेगा। साथ ही 3D मैपिंग तकनीक के जरिए मलबे के बीच सुरक्षित रास्ता तलाशकर बचाव दल तक जानकारी पहुंचाएगा। रोबोट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह उन जगहों पर भी पहुंच सके, जहां इंसानों का जाना जोखिम भरा हो सकता है। मलबे के भीतर फंसे लोगों की मौजूदगी का पता लगाकर यह राहत टीम को संभावित स्थान की जानकारी देगा। 3D मैपिंग की मदद से रोबोट आसपास के क्षेत्र का नक्शा तैयार करेगा, जिससे बचावकर्मियों को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। छात्रों का यह नवाचार भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के दौरान जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार मौसम की मार का सीधा असर सेब कारोबार पर पड़ा है। प्रतिकूल मौसम के चलते सेब उत्पादन और कारोबार प्रभावित हुआ, जिससे बागवानों की कमाई में भी बड़ी गिरावट आई है। सेब कारोबार के आधा रह जाने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। मौसम की खराब परिस्थितियों का असर सेब की पैदावार, गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच पर पड़ा। कई क्षेत्रों में बागवानों को उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाया, वहीं अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की मात्रा घटने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सेब हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इससे केवल बागवान ही नहीं, बल्कि पैकिंग, परिवहन, मजदूरी, आढ़ती और अन्य कारोबार से जुड़े हजारों लोगों की आय भी प्रभावित होती है। ऐसे में सेब कारोबार में आई गिरावट का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिला है। बागवानों का कहना है कि बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच कम उत्पादन ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सरकार से बागवानों को राहत और मौसम से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की जा रही है।
हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU) शिमला के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने न्यायपालिका और सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक फैसलों से कई बार सरकार के सामने व्यावहारिक और वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। सीएम सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि कोर्ट को भर्ती एवं सेवा नियमों के दायरे में रहना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2003 की उस नीति का जिक्र किया, जिसमें अनुबंध कर्मचारियों को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि का लाभ नहीं दिया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब दो दशक बाद अदालत के आदेश से ऐसे वित्तीय लाभ देने की स्थिति बनी, जबकि उस समय के भर्ती नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चुनी हुई सरकार अपने कर्मचारियों को उनके जायज वित्तीय लाभों से वंचित नहीं करना चाहती, लेकिन सरकार को राजकोष और प्रदेश की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जनहित, नियमों और वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन जरूरी है। स्कूलों के खेल मैदानों पर भी बोले सीएम सुक्खू ने हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पहाड़ी राज्य में पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्कूलों और सामुदायिक खेल मैदानों का बेहतर और साझा उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए एक सरकारी स्कूल के खेल मैदान के इस्तेमाल की अनुमति लेने के लिए सरकार को 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान करना पड़ा। हाईकोर्ट ने हमीरपुर के बरसर स्थित सरकारी स्कूल के मैदान में राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह की अनुमति देते हुए छात्रों के वेलफेयर फंड में 5 लाख रुपये जमा कराने की शर्त रखी थी। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया समेत कई न्यायिक हस्तियां मौजूद रहीं। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कानून के विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का वाहक बनने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
हिमाचल प्रदेश में अक्टूबर के महीने में ही मौसम ने करवट ले ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। रोहतांग, कुंजम, बारालाचा और शिंकुला दर्रे की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार 11 अक्टूबर को हिमाचल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं अगले कुछ दिनों तक भी मौसम खराब रह सकता है। 13 और 14 अक्टूबर को कुछ क्षेत्रों में अंधड़ को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान बारिश और ऊंचे क्षेत्रों में बर्फबारी की भी संभावना है। बारिश और बर्फबारी के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। जनजातीय और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रातें काफी ठंडी होने लगी हैं। कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि केलांग में 4.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। उधर, खराब मौसम का असर पहाड़ी मार्गों पर भी पड़ा है। शिंकुला और बारालाचा दर्रे में बर्फबारी के बाद वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और पुलिस ने फंसे पर्यटकों व वाहनों को रेस्क्यू किया। लोगों को खराब मौसम के दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
हिमाचल प्रदेश में कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नई किताबें लागू करने की तैयारी है। प्रदेश में इन कक्षाओं की पढ़ाई को एनसीईआरटी पैटर्न के अनुरूप किया जाएगा। नए पाठ्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आधुनिक और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक ढांचे के अनुरूप पढ़ाई करवाने पर जोर रहेगा। नई किताबों और सिलेबस को तैयार करने की प्रक्रिया के बाद इन्हें स्कूलों में लागू किया जाएगा। इससे हिमाचल के विद्यार्थियों की पढ़ाई को एनसीईआरटी के पैटर्न के साथ जोड़ा जा सकेगा।
वर्ष 2026 में शिमला पुलिस ने नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को अधिक संगठित, लक्ष्य-आधारित और नेटवर्क-केंद्रित स्वरूप दिया है। कार्रवाई का फोकस केवल मादक पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रखते हुए नशे की सप्लाई चेन के स्रोत तक पहुंचने, मुख्य सप्लायरों एवं सरगनाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने, तस्करों के आर्थिक आधार पर प्रहार करने तथा आदतन तस्करों के विरुद्ध निवारक कानूनों के प्रभावी उपयोग पर रहा है। 1. *NDPS मामले एवं गिरफ्तारियाँ* दिनांक 09 अक्टूबर 2026 तक शिमला पुलिस द्वारा NDPS Act के अंतर्गत कुल 271 मामले दर्ज किए गए हैं तथा 549 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।दर्ज मामलों में 22 वाणिज्यिक मात्रा तथा 177 मध्यवर्ती मात्रा के मामले शामिल हैं। 2. *Backward Linkage एवं मुख्य सप्लायरों के विरुद्ध कार्रवाई* वर्ष 2026 में अब तक शिमला पुलिस ने Backward Linkages के माध्यम से 80 मुख्य सप्लायर्स को गिरफ्तार किया गया तुलनात्मक रूप से वर्ष 2025 में 8 तथा वर्ष 2024 में 14 Backward Linkages दर्ज किए गए थे। इस प्रकार वर्ष 2026 में पिछले दोनों वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।जो पिछले तीन सालों की कुल गिरफ्तारियों से भी ज्यादा है। वर्ष 2026 में अब तक शिमला पुलिस द्वारा 61 ड्रग सप्लाई नेटवर्क ध्वस्त किए गए हैं। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 4 तथा वर्ष 2024 में 3 नेटवर्क ध्वस्त किए गए थे। इस प्रकार वर्ष 2026 में नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई में उल्लेखनीय तेजी आई है। Backward Linkage आधारित जांच के माध्यम से शिमला में सक्रिय तस्करों के पीछे मौजूद सप्लायरों और संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इससे नशा तस्करी के मामलों में जांच को स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर सप्लाई के स्रोत तक ले जाना संभव हुआ है। 4. *मादक पदार्थों की प्रमुख बरामदगियां* दिनांक 09 अक्टूबर 2026 तक शिमला पुलिस द्वारा विभिन्न NDPS मामलों में निम्नलिखित मादक पदार्थ एवं अन्य सामग्री बरामद की गई है: हेरोइन/चिट्टा: 5.04 किलोग्राम, Meth Crystal: लगभग 58.5 ग्राम; वाणिज्यिक मात्रा में LSD चरस: लगभग 15.5 किलोग्राम; अफीम: लगभग 14 किलोग्राम; पॉपी स्ट्रॉ: लगभग 5 किलोग्राम; कैनाबिस (भांग) के पौधे: 10,00,000; अफीम/पोस्ता के पौधे: लगभग 6,000; इत्यादी। हेरोइन/चिट्टा की एग्रेसिव बरामदगी के लिए किए गए प्रयासों के चलते वर्ष 2026 में सबसे ज्यादा 5.04 किलोग्राम चिट्ठा बरामद किया गया, जबकि वर्ष 2025 में यह लगभग 1.5 किलोग्राम तथा वर्ष 2024 में लगभग 2 किलोग्राम थी। इस प्रकार हेरोइन/चिट्टा की बरामदगी में पिछले दोनों वर्षों की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। 5. *नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध कार्रवाई* नशा तस्करी के आर्थिक आधार पर प्रहार करने के लिए शिमला पुलिस द्वारा Financial Investigation को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2026 में अब तक 12 NDPS मामलों में वित्तीय जांच की गई है तथा नशा तस्करी से अर्जित ₹12.61 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियां जब्त/फ्रीज की गई हैं। *तुलनात्मक रूप से वर्ष 2024 एवं 2025 में इस प्रकार की वित्तीय जांच और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई ही नहीं की गई थी।* इस प्रकार वर्ष 2026 में नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान तथा उनके आर्थिक आधार को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। 6. *आदतन नशा तस्करों के विरुद्ध PITNDPS Act के तहत कार्रवाई* आदतन नशा तस्करों के विरुद्ध निवारक कार्रवाई करते हुए वर्ष 2026 में अब तक 40 तस्करों को PITNDPS Act के तहत निरुद्ध किया गया है। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में 3 तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, जबकि वर्ष 2024 में इस अधिनियम के तहत कोई निरुद्धीकरण नहीं हुआ था। वर्ष 2026 में इस अधिनियम का प्रभावी उपयोग आदतन नशा तस्करों को निवारक रूप से रोकने तथा उनके द्वारा बार-बार किए जाने वाले अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 7. *अवैध कब्जों एवं अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई* नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के अवैध ठिकानों को पहली बार चिन्हित कर संबंधित विभागों के समन्वय से उनको डिस्मेंटल करवाया जा रहा है। इसी क्रम में FIR No. 166, धारा 18 NDPS Act, पुलिस थाना रोहड़ू के तहत 108 ग्राम अफीम के साथ गिरफ्तार आरोपी अर्जुन पाल से संबंधित जांच में पाया गया कि उसने पटसारी क्षेत्र में PWD की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर अस्थायी ढाबा/रेस्टोरेंट बनाया था। संबंधित विभाग द्वारा पुलिस बल की सहायता से उक्त अवैध निर्माण को ध्वस्त कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया। यह कार्रवाई शिमला जिला में पहलीबार अमल में लाई गई है जो नशा तस्करी से जुड़े आरोपियों के विरुद्ध एक एग्रेसिव और मजबूत कार्यवाही करने की रणनीति का हिस्सा है। वर्ष 2023, 2024 एवं 2025 में ऐसी कार्यवाहियां की ही नहीं हैं। शिमला पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य केवल नशा तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशे की सप्लाई के स्रोत को समाप्त करना, इस अवैध कारोबार के आर्थिक आधार को तोड़ना और इसके पूरे नेटवर्क को निष्क्रिय करना है। नशे के विरुद्ध यह कार्रवाई कठोरता, निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे भी जारी रहेगी।
शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि 12 अक्तूबर को दिल्ली में कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रदर्शन होगा। इसमें हिमाचल प्रदेश से मुख्यमंत्री सुक्खू के अलावा कैबिनेट मंत्री, कांग्रेस विधायक और पार्टी कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री शनिवार को दिल्ली से शिमला लौटे। इस दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने दिल्ली में होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रदर्शन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमाचल से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता इसमें हिस्सा लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रेस हाल के दिनों में चुनाव प्रक्रिया और विपक्षी नेताओं की हिरासत के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। हिमाचल में भी मुख्यमंत्री सुक्खू की अगुवाई में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया था। सुक्खू ने इससे पहले दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने निष्पक्ष चुनाव और मताधिकार की सुरक्षा को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया। शिमला लौटने के बाद मुख्यमंत्री से हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी सचिवालय में मुलाकात की और अपनी मांगें उनके सामने रखीं।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने CJP प्रदर्शन के दौरान युवाओं को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाकर लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता। सीएम सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा। CJP प्रदर्शन के दौरान युवाओं को हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। वहीं, मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया है।
हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में आज कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने जा रही है। बैठक के एजेंडे में करीब 150 प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें सरकारी नौकरियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी हैं, ऐसे में युवाओं की नजर कैबिनेट के संभावित फैसलों पर टिकी हुई है। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों के अलावा भर्तियों, नियुक्तियों और सरकारी सेवाओं से संबंधित मामलों पर भी निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही प्रदेश के विकास और प्रशासन से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी। वहीं, कैबिनेट बैठक में दो मंत्रियों के मौजूद नहीं रहने की जानकारी सामने आई है। उनकी गैरमौजूदगी के कारण भी बैठक चर्चा में है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि करीब 150 एजेंडा आइटम में से किन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है और सरकारी नौकरियों को लेकर सरकार क्या फैसला लेती है।
हिमाचल प्रदेश के CBSE स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने शिक्षकों को पसंद के स्टेशन पर तैनात करने संबंधी अपना निर्णय वापस ले लिया है। इस फैसले के बाद अब शिक्षकों की पोस्टिंग मनपसंद स्टेशन के आधार पर नहीं होगी। सरकार के निर्णय वापस लेने से उन शिक्षकों को झटका लगा है, जो अपनी सुविधा के अनुसार स्टेशन चुनने की उम्मीद लगाए बैठे थे। बताया जा रहा है कि शिक्षकों की तैनाती को लेकर पहले जारी व्यवस्था पर सरकार ने पुनर्विचार किया है। अब संबंधित नियमों और विभागीय प्रक्रिया के तहत ही शिक्षकों की नियुक्ति और तैनाती की जाएगी। फैसले के बाद CBSE स्कूलों में कार्यरत और नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े शिक्षकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
शिमला-मटौर फोरलेन पर टोल शुल्क बढ़ाए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। टोल की दर 25 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये किए जाने के फैसले का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि टोल में इतनी बढ़ोतरी से रोजाना इस मार्ग पर आने-जाने वाले स्थानीय लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। टोल बढ़ोतरी के विरोध में उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी आंदोलन का ऐलान करते हुए धरना देने की तैयारी की है। लोगों का कहना है कि वे टोल वृद्धि को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे और जरूरत पड़ने पर विरोध को और तेज किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से टोल शुल्क की बढ़ी हुई दरों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि फोरलेन का इस्तेमाल करने वाले स्थानीय लोगों के लिए उचित राहत या अलग व्यवस्था की जानी चाहिए। विवाद बढ़ने के बाद अब इस मामले में प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के रुख पर नजर है।
शिमला। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। प्रदेश में हर दिन करीब 1000 से 1200 मरीज मनोरोग संबंधी उपचार के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की संख्या लगातार सामने आ रही है। बड़ी संख्या में लोग इलाज और परामर्श के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक तनाव, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और बदलती जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं। मानसिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य भी लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और मानसिक बीमारियों को लेकर समाज में मौजूद झिझक व भेदभाव को कम करना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि मानसिक परेशानी होने पर इसे छिपाने के बजाय परिवार के सदस्यों से बात करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय मदद लें।
हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम करवट लेता नजर आएगा। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है। मौसम विभाग ने आंधी-तूफान और बिजली चमकने को लेकर भी चेतावनी जारी की है। 13 अक्टूबर को कांगड़ा, मंडी और सिरमौर के कुछ हिस्सों में आंधी और बिजली चमकने की संभावना जताई गई है। प्रदेश में मौसम बदलने का कारण सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ बताया जा रहा है। इसके प्रभाव से पहाड़ी इलाकों में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर देखने को मिल सकता है। वहीं, अगले 3-4 दिनों में कई हिस्सों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक बढ़ोतरी भी हो सकती है। मौसम विभाग ने खराब मौसम के दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने और पहाड़ी क्षेत्रों में सफर से पहले मौसम की स्थिति जांचने की अपील की गई है।
शिमला जिला के रोहड़ू स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के नए भवन के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। योजना विभाग ने इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को धनराशि स्वीकृत करने का पत्र भेज दिया है। मुख्यमंत्री ने एक अक्तूबर को अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान रोहड़ू सीबीएसई स्कूल में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान एक छात्रा के आग्रह पर यह राशि उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब धनराशि जारी कर दी गई है। संवाद के दौरान छात्रा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि क्या वह उनके स्कूल के लिए नया भवन बनवा सकते हैं। अपनी समस्या बताते हुए छात्रा ने कहा कि स्कूल के सीबीएसई से संबद्ध होने के बाद विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है और अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूल को दो शिफ्टों में संचालित करने की योजना है। छात्रा ने बताया कि बसों की उपलब्धता से जुड़ी समस्या के कारण लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ कुछ विद्यार्थियों को स्कूल बदलने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है। छात्रा की समस्या को गंभीरता से सुनने के बाद रोहड़ू में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं भी गांव से जुड़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि दो करोड़ रुपये से पूरे भवन का निर्माण संभव नहीं है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू करने के लिए यह राशि उपलब्ध करवाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि नए भवन के निर्माण के लिए भविष्य में भी अतिरिक्त धनराशि जारी की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त और उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि रोहड़ू में विद्यार्थियों के लिए एक बेहतर कैंपस तैयार किया जाएगा। रोहड़ू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का क्षेत्र के विकास कार्यों और घोषणाओं के लिए धनराशि जारी करने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि धनराशि जारी होने से रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने रोहड़ू के विकास में कोई कमी नहीं रखी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं और यही उनकी कार्यशैली की विशेषता है। -०
किसानों के लिए राहत की खबर है। बाजार में करीब 200 से 300 रुपये किलो तक बिकने वाला मटर का बीज अब सिर्फ 70 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों को कम लागत में मटर की खेती करने का मौका मिलेगा और खेती का खर्च भी घटेगा। इसके साथ ही गेहूं की बिजाई का सीजन भी शुरू होने वाला है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे खेत की तैयारी समय पर पूरी करें और अच्छी गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज का इस्तेमाल करें, ताकि फसल का उत्पादन बेहतर मिल सके। वहीं, किसान ऑफ सीजन सब्जियों की खेती करके भी अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं। बाजार की मांग के अनुसार सब्जियों का चयन, सही समय पर बिजाई और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करने से किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को बीज खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, किस्म और प्रमाणिकता जरूर जांचनी चाहिए। साथ ही मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही फसल की बिजाई करनी चाहिए।
शिमला: नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के तहत शिमला पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़े आरोपी के अवैध कब्जे पर कार्रवाई करवाई है। पुलिस के मुताबिक, अवैध कब्जे और अनधिकृत निर्माण कई बार नशा तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं। पुलिस के अनुसार, FIR नंबर 166, धारा 18 ND&PS Act के तहत आरोपी अर्जुन पाल पुत्र विजय सिंह, निवासी कुरुक्षेत्र, हरियाणा, हाल निवासी रोहड़ू, को 108 ग्राम अफीम रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की जांच की। इसमें सामने आया कि पटसारी क्षेत्र में PWD की सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा कर अस्थायी ढाबा/रेस्टोरेंट बनाया गया था। पुलिस ने इस संबंध में उपमंडलाधिकारी, जुब्बल के माध्यम से संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्राचार किया। इसके बाद PWD विभाग ने पुलिस बल की मौजूदगी में उक्त अवैध ढाबे को ध्वस्त कर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करवाया। शिमला पुलिस का कहना है कि नशा तस्करी के मामलों में कार्रवाई केवल गिरफ्तारी और मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं रहेगी। तस्करी से जुड़े आरोपियों के अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माणों को भी चिन्हित कर संबंधित विभागों के साथ मिलकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में TGT पदों के भर्ती परिणाम घोषित करने में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि TGT पदों के परिणाम घोषित करने में देरी क्यों हो रही है और भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में कितना समय लगेगा। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभ्यर्थियों से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। TGT भर्ती के परिणाम का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अब सरकार के जवाब का इंतजार है। कोर्ट के रुख के बाद भर्ती प्रक्रिया और रिजल्ट को लेकर जल्द स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
शिमला के बालूगंज क्षेत्र में सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन सूट खरीदना एक महिला को महंगा पड़ गया। महिला ने सूट के लिए साइबर ठगों को 15 से 20 बार अलग-अलग ट्रांजेक्शन में करीब 46 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद महिला को सूट नहीं मिला। ठगी का एहसास होने पर महिला और उसके पति ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद बालूगंज पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर में शुक्रवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ। सनेई से रामपुर जा रही HRTC की बस HP 06 A 5159 करीब पौने 8 बजे खाई में जा गिरी। बस में चालक-परिचालक समेत करीब 20 लोग सवार थे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को रामपुर अस्पताल पहुंचाया। हादसे में वंश पुत्र सुरंजन, निवासी कराली, की अस्पताल पहुंचने पर मौत हो गई। करीब 15 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें दो को सिर पर गंभीर चोटें लगी हैं। पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दुर्घटना कैसे हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी CBSE स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती का मामला अब भी लटका हुआ है। करीब 5,623 इन-सर्विस शिक्षक स्क्रीनिंग परीक्षा और मेरिट प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। मई में शिक्षा विभाग ने परीक्षा में सफल शिक्षकों की मेरिट सूची जारी कर काउंसलिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन तैनाती का रास्ता साफ नहीं हो सका। सरकार ने पहले मेरिट और शिक्षकों की पसंद के आधार पर स्कूलों में तैनाती की योजना बनाई थी। इसके तहत शिक्षकों से स्कूलों के विकल्प भी लिए जाने थे। हालांकि, पहले से CBSE स्कूलों में तैनात शिक्षकों को कहां समायोजित किया जाए, इसे लेकर स्थिति उलझ गई। इस देरी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक, CBSE स्कूलों में शिक्षक तैनाती को लेकर असमंजस के बीच 2,217 विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की बात सामने आई थी। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अगस्त में विधानसभा में 30 सितंबर तक 147 CBSE संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद अक्टूबर की शुरुआत तक हजारों शिक्षक अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षकों की मांग है कि सरकार जल्द तैनाती प्रक्रिया पूरी करे, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर हो और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
हिमाचल प्रदेश में निर्विरोध चुनी गई 136 ग्राम पंचायतों के लिए सरकार ने बड़ी सौगात दी है। पंचायती राज विभाग ने इन पंचायतों के लिए कुल 34 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की है। प्रत्येक पंचायत को 25 लाख रुपये मिलेंगे। सरकार का यह फैसला पंचायत चुनावों में सहमति और निर्विरोध निर्वाचन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि पंचायतें इस राशि को अपनी मर्जी से किसी भी काम पर खर्च नहीं कर सकेंगी। विभाग की ओर से जारी 28 सितंबर के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही धनराशि का इस्तेमाल करना होगा। जिलेवार देखें तो शिमला की 42 पंचायतों को सबसे अधिक 10.50 करोड़ रुपये मिलेंगे। सिरमौर की 27 पंचायतों को 6.75 करोड़, किन्नौर की 18 पंचायतों को 4.50 करोड़, लाहौल-स्पीति की 17 पंचायतों को 4.25 करोड़ और सोलन की 13 पंचायतों को 3.25 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसके अलावा मंडी, कुल्लू और ऊना की पांच-पांच पंचायतों को 1.25-1.25 करोड़ रुपये, कांगड़ा की दो पंचायतों को 50 लाख तथा चंबा और बिलासपुर की एक-एक पंचायत को 25-25 लाख रुपये मिलेंगे। इस राशि का उद्देश्य पंचायतों में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। सरकार ने साफ किया है कि अनुदान का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत ही किया जाएगा, ताकि पैसा गांवों की जरूरतों और विकास कार्यों पर सही तरीके से खर्च हो।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम के तेवर तल्ख बने हुए हैं। मौसम विभाग ने 8 और 9 अक्तूबर को कई जिलों में बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है। 8 अक्तूबर को कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में आंधी-तूफान, बिजली चमकने और बारिश का येलो अलर्ट है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है। 9 अक्तूबर को सोलन, शिमला और सिरमौर में मौसम खराब रहने का अनुमान है। वहीं, ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ हल्की बर्फबारी भी हो सकती है। मौसम खराब होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें फिसलने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। बिजली चमकने और तेज हवाओं के दौरान लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अक्तूबर के बाद व्यापक चेतावनी नहीं है, जिससे प्रदेश में मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने के आसार हैं।
शिमला में एनएचएआई के फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत बन रही ट्विन टनल को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। संजौली, शांतिविहार, भट्टाकुफर, ढली और चलौंठी क्षेत्र के लोगों ने टनल निर्माण से अपने घरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। प्रभावितों का कहना है कि निर्माण के बाद कई मकानों में दरारें आई हैं और आगे काम बढ़ने पर सैकड़ों घरों पर खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उनके घरों और जान-माल की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि टनल निर्माण से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई और कई परिवारों को नुकसान के बावजूद अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। कुछ प्रभावितों के अनुसार, कई लोग करीब डेढ़ साल से अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने ट्विन टनल संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति प्रभावित परिवारों की समस्याओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठा रही है। लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से पहले घरों की सुरक्षा को लेकर ठोस तकनीकी जांच कराई जाए और नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। हाल ही में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने शांति विहार क्षेत्र में पहुंचकर प्रभावित मकानों का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों ने कमेटी को बताया कि अब तक दस से अधिक मकानों में दरारें आ चुकी हैं और टनल का निर्माण आगे बढ़ने पर 300 से ज्यादा मकानों को खतरा हो सकता है। इससे पहले शिकायतों के बाद प्रशासन ने टनल निर्माण का काम रुकवाया था। दरारों के कारण की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीमों ने भी क्षेत्र का जायजा लिया है। वहीं, एनएचएआई ने प्रभावित स्थल पर ब्लास्टिंग किए जाने के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि संबंधित हिस्से में ब्लास्टिंग नवंबर 2025 से बंद है। दरारों का वास्तविक कारण अभी जांच का विषय है। प्रभावितों का साफ कहना है कि उन्हें सड़क और टनल जैसी विकास परियोजनाओं से आपत्ति नहीं है, लेकिन पहले घरों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, फिर निर्माण आगे बढ़ाया जाए।
हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तस्वीर को लेकर कांग्रेस के भीतर फिर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हालिया रोहड़ू और रामपुर दौरे के दौरान कार्यक्रमों के पोस्टर और बैनर में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नजर नहीं आई। मंच से भी उनके नाम का उल्लेख नहीं होने पर पूर्व सांसद और वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी करीब साढ़े चार साल ही हुए हैं और उन्हें इतनी जल्दी भुला देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने हिमाचल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके योगदान को याद किया जाना चाहिए। वहीं, मामला तूल पकड़ने के बाद रोहड़ू के कांग्रेस विधायक एलएम ब्राक्टा ने भी माना कि कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह की तस्वीर होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भाषण में रोहड़ू के विकास में वीरभद्र सिंह के योगदान का जिक्र किया था। साथ ही उन्होंने कहा कि तस्वीर न लग पाना जानबूझकर नहीं हुआ। रामपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लाल चंद ने भी माना कि कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह की तस्वीर नहीं लग पाई। उन्होंने इसे जानबूझकर की गई अनदेखी नहीं बताया और कहा कि कांग्रेस आज भी वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके कार्यों को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू के रोहड़ू-रामपुर दौरे के दौरान करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के साथ एंटी-चिट्टा रैलियां भी आयोजित की गई थीं। लेकिन दौरे के बाद वीरभद्र सिंह की तस्वीर और नाम को लेकर उठा विवाद अब कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।
दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी नेताओं को रोके जाने के विरोध में हिमाचल कांग्रेस ने बुधवार को शिमला स्थित लोकभवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, मंत्री, विधायक और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। दरअसल, छह अक्तूबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन के नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता धरने पर बैठ गए। करीब आठ घंटे बाद पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसी कार्रवाई के विरोध में शिमला में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने से रोकना लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि आवाज दबाने से सवाल खत्म नहीं होंगे और विपक्ष जनता की आवाज उठाता रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार है। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और असहमति की आवाज को बनाए रखने की मांग उठाई
*शिमला, 5 अक्टूबर* नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शिमला पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। दो अलग-अलग NDPS मामलों में बैकवर्ड लिंकेज विकसित कर पुलिस ने दो अंतरराज्यीय नशा सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए दो मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया है। *पहला मामला - थाना बालूगंज* 27 सितंबर को शोघी क्षेत्र में नाकाबंदी के दौरान पुलिस ने क्षितिज वर्मा (26), निवासी निथर, कुल्लू को 6 ग्राम चिट्टा के साथ पकड़ा था। आरोपी के मोबाइल की जांच में मनीमाजरा, चंडीगढ़ निवासी रोहित उर्फ राहुल के साथ WhatsApp चैट मिली। CDR और IPDR विश्लेषण से दोनों के बीच संपर्क और मुलाकात की पुष्टि हुई। इस आधार पर विशेष टीम ने 4 अक्टूबर को चंडीगढ़ में दबिश देकर रोहित उर्फ राहुल को गिरफ्तार कर लिया। *दूसरा मामला - थाना चिड़गांव* इसी दिन 27 सितंबर को बडियारा में गश्त के दौरान अमित चौहान (30), निवासी चिड़गांव से 7 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था। जांच में सामने आया कि चिट्टा बलौंगी, मोहाली में वीरेंद्र नामक व्यक्ति से लाया गया था। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदीप (41), गांव थाना, चिड़गांव की भूमिका सामने आई। पुलिस ने 30 सितंबर को मोहाली के बलौंगी से उसे गिरफ्तार किया। *शिमला पुलिस की नई रणनीति* पुलिस अब केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन के मुख्य सप्लायर तक पहुंच रही है। इस वर्ष 2026 में अब तक 80 मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार कर 61 नेटवर्क तोड़े गए हैं, जबकि 2024 में 8 और 2025 में 14 सप्लायर ही पकड़े गए थे।
हिमाचल प्रदेश के चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में कुलपति नियुक्ति का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के 27 अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की पुष्टि कृषि सचिव सी. पालरासू ने की है। दरअसल, हाईकोर्ट ने अगस्त में दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति से जुड़े राज्य सरकार के संशोधित प्रावधानों को निरस्त कर दिया था। अदालत ने यूजीसी के 2018 नियमों के अनुसार नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। साथ ही सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी में यूजीसी के नामित सदस्य को शामिल करने को भी जरूरी माना था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोकभवन ने पुरानी चयन समितियों को भंग कर नई प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अब सरकार के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से इस नई चयन प्रक्रिया पर भी असमंजस की स्थिति बन गई है। दोनों विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों की नियुक्ति अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर कर सकती है। इस पूरे विवाद की शुरुआत कुलपति नियुक्ति में राज्य सरकार की भूमिका बढ़ाने वाले संशोधित प्रावधानों को लेकर हुई थी। हाईकोर्ट ने इन प्रावधानों को यूजीसी नियमों से टकराव वाला मानते हुए रद्द कर दिया था।
सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए आज बाजार से मिली-जुली खबर सामने आई है। 5 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में तेजी देखने को मिली। घरेलू बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। ऑल इंडिया बुलियन बेंचमार्क में 24 कैरेट सोना ₹1,49,743 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1,37,165 प्रति 10 ग्राम रहा। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में तेजी देखी गई। 999 शुद्धता वाली चांदी का बेंचमार्क भाव करीब ₹2,26,543 प्रति किलोग्राम रहा। यानी सोने में नरमी के बावजूद चांदी की चमक बढ़ी है। बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर डॉलर की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, अंतरराष्ट्रीय बाजार और मांग-आपूर्ति जैसे कारकों का असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोमवार को सोने और चांदी दोनों में मजबूती देखने को मिली। खरीदारी करने वालों के लिए जरूरी बात: ज्वेलरी का अंतिम बिल केवल सोने के बेस रेट से तय नहीं होता। इसमें मेकिंग चार्ज, वेस्टेज और 3% GST भी जुड़ सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से उस समय का अंतिम रेट जरूर जांच लें।
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की बस में धर्मपुर से शोघी के बीच सफर करने वाले यात्रियों से टोल टैक्स वसूले जाने का मामला सामने आया है। यात्रियों का आरोप है कि बस ने टोल प्लाजा से होकर सफर नहीं किया, इसके बावजूद उनसे किराये में टोल टैक्स के नाम पर अतिरिक्त राशि ली गई। यात्रियों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बस टोल प्लाजा से होकर गुजरी ही नहीं, तो यात्रियों से टोल टैक्स किस आधार पर वसूला गया। इसको लेकर यात्रियों में नाराजगी है और उन्होंने HRTC से मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। यात्रियों का कहना है कि बस किराये में शामिल अतिरिक्त शुल्क की जानकारी भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि उन्हें पता चल सके कि उनसे किस मद में कितनी राशि ली जा रही है। अब यात्रियों की नजर निगम के जवाब पर है कि धर्मपुर-शोघी रूट पर यह शुल्क किस नियम के तहत वसूला जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में भांग और अफीम की अवैध खेती पर अब तकनीक के जरिए शिकंजा कसने की तैयारी है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने नशे की अवैध खेती वाले क्षेत्रों की जियो टैगिंग शुरू कर दी है। इसके तहत खेती वाले स्थान की सटीक GPS लोकेशन, अक्षांश-देशांतर के साथ मौके की फोटो और वीडियो भी डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित किए जाएंगे। पुराने ठिकानों पर भी रहेगी नजर जियो टैगिंग से उन जगहों पर दोबारा निगरानी करना आसान होगा, जहां पहले अवैध भांग या अफीम की खेती पकड़ी जा चुकी है। यदि फसल नष्ट करने के बाद उसी स्थान पर दोबारा खेती मिलती है तो पुराने डिजिटल रिकॉर्ड, फोटो और वीडियो के आधार पर कार्रवाई को मजबूत किया जा सकेगा। रिकॉर्ड में खेती की मात्रा, कार्रवाई की तारीख और नष्ट किए गए क्षेत्र की जानकारी भी दर्ज होगी। कुल्लू समेत दुर्गम इलाकों पर फोकस NCB की निगरानी में कुल्लू सहित प्रदेश के ऊंचाई वाले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं। इन इलाकों में अवैध नशे की खेती की शिकायतें सामने आती रही हैं। जियो टैगिंग से जांच एजेंसियों को जमीन और खेती से जुड़ी जानकारी जुटाने में भी मदद मिलेगी। पुलिस-वन विभाग और NCB में बढ़ेगा तालमेल अभियान में पुलिस, वन विभाग और NCB के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान पर भी जोर दिया जा रहा है। मौके से जुटाए गए डिजिटल साक्ष्य NDPS एक्ट के तहत होने वाली कार्रवाई को मजबूत करने में मदद करेंगे। इस व्यवस्था को प्रदेश के अन्य संवेदनशील जिलों तक भी बढ़ाने की तैयारी है। फसल नष्ट करने का प्रमाणपत्र भी मिलेगा अवैध खेती नष्ट करने की कार्रवाई को पारदर्शी बनाने के लिए वन विभाग की ओर से प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था की जा रही है। मौके पर नष्ट की गई फसल का डिजिटल रिकॉर्ड, फोटो और वीडियो से मिलान करने के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इससे कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और अवैध खेती पर दोबारा नजर रखना आसान होगा।


















































