हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, उनकी कैबिनेट के कुछ मंत्री और बड़े अफसर इस समय दिल्ली में हैं. सीएम सुक्खू के अलावा तीन कैबिनेट मंत्री दिल्ली दौरे पर हैं. सीएम के साथ राज्य के टॉप ब्यूरोक्रेट्स भी राजधानी में डेरा डाले हुए हैं. मुख्य सचिव केके पंत के अलावा अन्य बड़े अफसर सीएम के साथ हैं. दिल्ली में हिमाचल को लेकर कुछ बड़े घटनाक्रम देखने को मिलेंगे. सीएम सुक्खू केंद्रीय नेताओं से मिलेंगे और साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है. सीएम दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे. इसके अलावा शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान एवं कृषि और पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार भी दिल्ली में हैं. शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर दिल्ली में साक्षरता दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. वहीं, सोमवार देर शाम दिल्ली पहुंचे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू आज यानी मंगलवार (8 सितंबर) सुबह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात करेंगे. मीटिंग का एजेंडा कुल्लू-मनाली एवं मंडी में ब्यास नदी की ड्रेजिंग को लेकर तय है. हिमाचल प्रदेश का एक कंसर्न मानसून सीजन में आपदा से प्रभावित लोगों को वन भूमि का आवंटन सुनिश्चित करना भी है. सीएम सुक्खू ने इस मामले में ऐलान किया है कि आपदा प्रभावितों को जरूरत के अनुसार वन भूमि दी जाएगी. इसके लिए केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है. मंगलवार शाम को ही सीएम सुक्खू की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात तय है. निर्मला सीतारमण के साथ मीटिंग में सीएम एवं मुख्य सचिव सहित अन्य अफसर भी रहेंगे. इस दौरान हिमाचल प्रदेश के वित्तीय मसलों पर चर्चा होगी. साथ ही हिमाचल प्रदेश प्राईड ऑफ हिल्स नाम से शुरू किए गए फंड में केंद्र से और अधिक रकम प्रदान किए जाने की मांग करेगा. इस दौरान हिमाचल प्रदेश पिछले सीजन में पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से घोषित किए गए पैकेज को लेकर भी अपना पक्ष रखेगा. सीएम सुक्खू का दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मिलने का संभावित कार्यक्रम है. विभिन्न केंद्रीय नेताओं के साथ मुलाकात के दौरान राज्य के मुख्य सचिव केके पंत, दिल्ली में सीएम के ऊर्जा सलाहकार रामसुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम, शिक्षा सचिव और सीएम के सचिव का कार्यभार देख रहे आईएएस राकेश कंवर आदि मौजूद रहेंगे.
शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू का एक और मामला सामने आया है। आईजीएमसी शिमला में छह माह की बच्ची की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बच्ची कुल्लू जिले की रहने वाली है। तेज बुखार के बाद परिजन उसे उपचार के लिए आईजीएमसी लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने बच्ची के लक्षणों को देखते हुए स्वाइन फ्लू की जांच कराने की सलाह दी। सैंपल जांच के लिए भेजा गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बच्ची को आईजीएमसी में ही उपचार और निगरानी में रखा गया I मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। अस्पतालों में वायरल संक्रमण जैसे लक्षणों वाले मरीजों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर रैंडम सैंपलिंग करने को भी कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को अलर्ट रहने और संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने छह माह की बच्ची के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने की पुष्टि की है। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर समय पर डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है। स्वाइन फ्लू में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। बच्चों में सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या दूध-पानी कम पीना गंभीर संकेत हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने, हाथ साफ रखने और फ्लू जैसे लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। गौरतलब है कि प्रदेश में हाल के दिनों में स्वाइन फ्लू के कई मामले सामने आए हैं, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग पहले से ही निगरानी बढ़ा चुका है।
शिमला। कभी देश के सबसे कम साक्षर राज्यों में शामिल हिमाचल प्रदेश ने अब साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर सिर्फ 7.98 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 99.5 फीसदी हो गई है। इस उपलब्धि के साथ हिमाचल देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। 99.7 फीसदी साक्षरता के साथ गोवा पहले नंबर पर है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर 8 सितंबर को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि शामिल होंगे। प्रदेश की ओर से साक्षरता अभियान की उपलब्धियों और काम करने के तरीके की प्रस्तुति भी दी जाएगी। आजादी के बाद हिमाचल के सामने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी चुनौती थी। 1951 में प्रदेश की कुल साक्षरता दर केवल 7.98 फीसदी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1961 में यह 21.03 फीसदी, 1971 में 31.71 फीसदी, 1981 में 42.33 फीसदी, 1991 में 63.75 फीसदी, 2001 में 76.48 फीसदी और 2011 में 82.80 फीसदी पहुंची। इसके बाद लगातार चलाए गए शिक्षा और साक्षरता अभियानों से प्रदेश ने तेजी से प्रगति की। कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों तक स्कूल और शिक्षा की सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया गया। साक्षरता अभियान के तहत वर्ष 2023-24 में 94,930 निरक्षरों की पहचान की गई थी। इनमें से दो वर्षों में 66 हजार से ज्यादा लोगों को साक्षर बनाया गया। अब प्रदेश में करीब 28,480 निरक्षर लोग शेष हैं। अभियान में केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को बुनियादी गणना, डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि साक्षरता की बड़ी चुनौती पार करने के बाद अब सरकार का फोकस शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों-कॉलेजों को मजबूत करने पर है। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, तबादलों में पारदर्शिता और स्कूलों में बेहतर व्यवस्था पर जोर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले कई शिक्षण संस्थानों को लेकर सरकार को नए सिरे से विचार करना होगा। सरकारी स्कूलों में पिछले 15 वर्षों में करीब चार लाख छात्रों की कमी को उन्होंने बड़ी चुनौती बताया। यानी 1951 में 7.98 फीसदी से शुरू हुआ हिमाचल का साक्षरता सफर आज 99.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। अब प्रदेश की अगली चुनौती हर व्यक्ति तक शिक्षा की पहुंच के साथ-साथ सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है।
कंगना ने मंडी में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में अधिकारियों से विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर कड़े सवाल किए थे। उन्होंने पूछा था कि मंजूरी और पैसा मिलने के बावजूद कई काम जमीन पर क्यों नहीं उतर रहे। कंगना के इसी तेवर पर पलटवार करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सिर्फ आवाज ऊंची करने से आदेश सख्त नहीं बन जाते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक कामकाज में कलम की एक स्याही ही काफी होती है। उनके बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई है। विक्रमादित्य सिंह ने कंगना की अधिकारियों के साथ बातचीत के तरीके पर भी सवाल उठाए। वहीं कंगना का फोकस मंडी संसदीय क्षेत्र में केंद्र की योजनाओं और सांसद निधि से जुड़े विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर है। बैठक के बाद संबंधित अधिकारियों ने इन परियोजनाओं की समीक्षा भी शुरू कर दी है। यानी मुद्दा विकास कार्यों की रफ्तार से शुरू हुआ, लेकिन अब मामला कंगना और विक्रमादित्य के बीच सियासी तकरार तक पहुंच गया है।
धर्मशाला: घनियारा में करीब 84 कनाल सरकारी जमीन को कथित तौर पर इंतकाल के जरिए निजी लोगों के नाम कर दिया गया। बाद में जमीन के टुकड़े कर इन्हें दूसरे लोगों को बेच दिया गया। मामले में अब 42 खरीदार और लाभार्थी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। जांच के मुताबिक, करीब 3.24 हेक्टेयर जमीन मई 2019 में अलग-अलग इंतकाल के जरिए निजी नामों पर दर्ज की गई थी। इनमें 29 शुरुआती लाभार्थी और 13 बाद के खरीदार शामिल हैं। विजिलेंस को मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के संकेत मिले हैं। जमीन के रिकॉर्ड, इंतकाल और खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। मामले की शिकायत फरवरी 2025 में विजिलेंस को मिली थी। इसके बाद जनवरी 2026 में FIR दर्ज की गई। अब जांच आगे बढ़ाते हुए 42 लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है
शिमला: हिमाचल में कृषि उपकरणों पर सब्सिडी लेने वाले किसानों के लिए व्यवस्था बदल दी गई है। अब सिर्फ आवेदन करने से सब्सिडी मिलना तय नहीं होगा। अगर तय लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं तो कृषि विभाग लॉटरी के जरिए किसानों का चयन करेगा। पहले सब्सिडी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलती थी। नई व्यवस्था से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि अब सब्सिडी मिलना किस्मत पर निर्भर हो गया है। एक किसान एक साल में अधिकतम दो कृषि उपकरणों के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद पांच साल तक दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा। योजना के तहत ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर वीडर, क्रॉप रीपर और रोटावेटर जैसे उपकरणों पर सब्सिडी दी जाती है। पात्र किसानों को उपकरणों पर 40 से 50 फीसदी तक अनुदान मिलता है। किसान नेताओं ने लॉटरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि सब्सिडी का लाभ आवेदन और जरूरत के आधार पर मिलना चाहिए, लॉटरी के भरोसे नहीं।
हिमाचल के कुछ जिलों में आज हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ रहेगा या आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। राहत की बात यह है कि आज किसी भी जिले में भारी बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने बताया कि अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियां कम होने के आसार हैं। राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश होती रह सकती है। ऐसे में लोगों को पिछले दिनों के मुकाबले मौसम से राहत मिलने की उम्मीद है। शनिवार को राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य के करीब रहा। भुंतर में राज्य का सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। वहीं, सुंदरनगर में 30.5, मंडी में 30.8, बिलासपुर में 32 डिग्री और ऊना में 30.8 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान रहा। राजधानी शिमला में अधिकतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, आज निचले और मध्यम पहाड़ी इलाकों में कुछ जगहों पर बारिश और गरज-चमक हो सकती है। हालांकि, भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं दी गई है। आने वाले दिनों में भी ज्यादातर इलाकों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। राज्य में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के कारण कई जगहों पर सड़कें, बिजली और दूसरी सेवाओं पर असर पड़ा था। ऐसे में मौसम में सुधार से लोगों को राहत मिली है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों में अचानक मौसम बदलने के आसार को देखते हुए लोगों को बारिश के दौरान सावधान रहने की सलाह दी गई है।
हिमाचल में सेब सीजन के बीच कैन खाद की कमी से बागवान परेशान हैं। कैन खाद से सेब के पौधों को जरूरी पोषण मिलता है। इसका उत्पादन बंद होने के बाद बागवानों को यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और एनपीके जैसी दूसरी खाद इस्तेमाल करनी पड़ रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यह मामला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के सामने उठाया है। उन्होंने कैन खाद का उत्पादन और सप्लाई जल्द शुरू करने की मांग की है। रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब का कारोबार हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है और इससे हर साल करीब 6 हजार करोड़ रुपये का योगदान होता है। ऐसे में बागवानों को समय पर सस्ती खाद मिलना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक यूरिया इस्तेमाल करने से जमीन की गुणवत्ता और सेब के पेड़ों पर असर पड़ सकता है। जेपी नड्डा ने भरोसा दिया है कि मामले को देखा जा रहा है और बागवानों के हित में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हिमाचल विधानसभा में शिक्षा व्यवस्था की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। प्रदेश के 177 सरकारी स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है। कई जगह बच्चे पंचायत भवन, रेस्ट हाउस, सामुदायिक केंद्र और दूसरे स्कूलों के कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि 12 स्कूलों के भवन प्राकृतिक आपदा के कारण असुरक्षित हो चुके हैं। 28 स्कूलों के नए भवन बन रहे हैं, जबकि 14 के लिए पैसा जारी किया जा चुका है। बाकी स्कूलों के लिए जमीन की समस्या बड़ी अड़चन बनी हुई है। वहीं, पिछले तीन साल में बंद हुए 1,526 स्कूलों में से 1,473 भवन आज भी शिक्षा विभाग के पास हैं। इनमें से 577 भवन दूसरे विभागों और संस्थाओं को इस्तेमाल के लिए दे दिए गए हैं। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर चंबा के कुनरा स्कूल की है, जहां 99 बच्चे फिलहाल रेस्ट हाउस के महज चार कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में आबकारी विभाग की बकाया वसूली को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। विभाग के 558.50 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में महज 62.11 करोड़ रुपये की वसूली हो पाई है। विधायक संजय अवस्थी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने लिखित जवाब में यह आंकड़ा सदन के पटल पर रखा। सरकार अब बकायादारों पर सिर्फ नोटिस नहीं, सीधा शिकंजा कसने की तैयारी में है। बकाया नहीं चुकाने वालों की संपत्ति कुर्क करने से लेकर जरूरत पड़ने पर नीलामी तक की कार्रवाई होगी। संबंधित तहसीलदारों को कुर्की वारंट भेजे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, आबकारी विभाग की NOC के बिना बकायादारों को सरकारी काम न देने और उनका भुगतान रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखने लगा है। कांगड़ा के शाहपुर में एक बकायादार लाइसेंसी की जमीन नीलाम कर 2.51 लाख रुपये वसूले गए, जबकि दो अन्य मामलों में 27 लाख रुपये की वसूली हुई। डीए पर भी सरकार ने खोला पत्ता इसी बीच विधानसभा में सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी। सुखराम चौधरी के सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि डीए की दर कंपनी के हिसाब से नहीं, बल्कि कर्मचारी की पेंशन योजना के आधार पर तय होती है। NPS कर्मचारियों को 60% जबकि OPS और EPF कर्मचारियों को 45% डीए मिल रहा है। यानी विधानसभा में एक तरफ 558 करोड़ की वसूली का बड़ा सवाल गूंजा, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों के डीए को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ कर दी।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात मिली है। सचिवालय में कार्यरत 18 सीनियर असिस्टेंट को सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के पद पर पदोन्नति दी गई है। इस प्रमोशन के बाद अब ये कर्मचारी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सीनियर असिस्टेंट अब सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के तौर पर विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों में भी खुशी का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों की निगरानी, फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालने होंगे। इससे सचिवालय के कामकाज में भी जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा होने की उम्मीद है। प्रमोशन को कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार को संपन्न हो गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। यह सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर 2026 तक चला। आधिकारिक विधानसभा पोर्टल पर भी सत्र की यही अवधि दर्ज है। करीब दो सप्ताह चले इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। सत्र के दौरान विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में उठाए गए और सरकार की ओर से कई मामलों पर जवाब दिए गए। सत्र की कुल कार्यवाही 45 घंटे 30 मिनट चली। इस दौरान विधायी कामकाज के साथ प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मौकों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के फैसलों और नीतियों का बचाव किया। विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पर घमासान सत्र के अंतिम दिन हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन ने पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधेयक को पेश किया। भाजपा विधायकों ने इसका विरोध करते हुए विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए। सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासन और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जबकि शैक्षणिक स्वायत्तता से समझौता नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। मानसून सत्र की शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई थी। पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नारेबाजी हुई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। सत्र के दौरान प्रश्नकाल, विधेयकों पर चर्चा और अन्य संसदीय कार्यवाही के जरिए विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठाए। विधानसभा के आधिकारिक पोर्टल पर सत्र की कार्यवाही और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। 45 घंटे 30 मिनट की बहस, हंगामे और विधायी कामकाज के बाद अब विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है।
हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर जारी वित्तीय खींचतान के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को लेकर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि RDG नहीं मिलने के बावजूद सरकार पेंशन एरियर का भुगतान धीरे-धीरे कर रही है और कर्मचारियों को ध्यान में रखकर भुगतान या कोई फैसला नहीं रोका जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की मौजूदा वित्तीय स्थिति को कर्मचारियों और पेंशनरों को भी समझना होगा। उनका कहना है कि राज्य की राजस्व स्थिति पर दबाव है, लेकिन सरकार उपलब्ध संसाधनों से कर्मचारियों के बकाया हकों का भुगतान कर रही है। सुक्खू ने पिछली भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले करीब 50 हजार सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को केवल 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। मौजूदा सरकार RDG नहीं मिलने के बावजूद चरणबद्ध तरीके से एरियर चुका रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, 67 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों का पूरा एरियर दिया जा चुका है। वहीं सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी लंबित पेंशन एरियर का भुगतान किया गया है। ग्रुप-III कर्मचारियों को जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 तक के बकाया का करीब 55 से 57 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है, जबकि ग्रुप-IV कर्मचारियों को 20 हजार रुपये दिए गए हैं। ग्रुप-I और ग्रुप-II कर्मचारियों व अधिकारियों के जनवरी 2016 से देय एरियर का करीब 15 प्रतिशत भुगतान किया गया है। सुक्खू सरकार लगातार RDG बंद होने को प्रदेश की वित्तीय मुश्किलों की बड़ी वजह बता रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार RDG बंद होने से हिमाचल को हर साल करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों को जुटाकर कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को आगे भी जारी रखा जाएगा। सुक्खू ने स्पष्ट किया कि वित्तीय स्थिति सुधरने के साथ कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों को उनका बकाया हक दिया जाएगा।
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। सरकार ने विधेयक को विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय अनुशासन मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया है। विधेयक के तहत प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित है। शिक्षकों की भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC के माध्यम से और गैर-शिक्षक पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग या सरकार की ओर से अधिसूचित एजेंसी के जरिए किए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों की वित्त समिति की कमान वित्त सचिव को देने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इससे सरकारी धन के इस्तेमाल में जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा। वहीं BJP ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के लिए खतरा बताया। विपक्ष का तर्क है कि विश्वविद्यालयों की अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वतंत्रता होती है और सरकार का हस्तक्षेप बढ़ने से उनकी स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि इस संशोधन का मकसद विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती में पारदर्शिता, योग्यता आधारित चयन और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस विधेयक के दायरे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, वानिकी विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर और अटल मेडिकल रिसर्च विश्वविद्यालय नेरचौक शामिल हैं l अब सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच यह मुद्दा खासा गरमाने के आसार हैं कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के नाम पर सरकारी निगरानी कितनी होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कैसे बरकरार रखी जाए।
धर्मशाला: जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC की अलग से गणना करवाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा ने बुधवार को धर्मशाला में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डीसी कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन से पहले मोर्चा की ओर से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें केंद्र सरकार से OBC की वैज्ञानिक, प्रमाणिक और अलग गणना करवाने की मांग रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में OBC की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि सही आंकड़े मिलने के बाद शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहतर नीतियां तैयार की जा सकेंगी। मोर्चा ने मांग रखी कि जिस तरह SC और ST की जनगणना की जाती है, उसी तर्ज पर OBC की भी अलग से गणना हो। इसके साथ ही प्रत्येक जाति के लिए अलग और विशिष्ट कोड निर्धारित करने तथा ओपन कॉलम की जगह मानकीकृत व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। OBC विशेष वर्ग से महेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि जनगणना में OBC की वास्तविक संख्या दर्ज होना सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने जातिवार आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाने की भी मांग उठाई।
धर्मशाला: तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के 66 वर्ष पूरे होने पर धर्मशाला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में हुए इस कार्यक्रम में तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास और परम पावन दलाई लामा के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से मेधावी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही तिब्बती कलाकारों और बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों का खूब ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लोकतंत्र दलाई लामा की दूरदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक लोकतंत्र के इन मूल्यों को पहुंचाना सभी तिब्बतियों की जिम्मेदारी है। बताया गया कि 2 सितंबर 1960 को पहली तिब्बती जनप्रतिनिधि सभा के गठन के साथ तिब्बती लोकतांत्रिक सरकार की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1991 में निर्वासित तिब्बती प्रशासन को लिखित संविधान आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदला गया और वर्ष 2001 से राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अंत में निर्वासित तिब्बती संसद ने भारत सरकार और भारतीय जनता के सहयोग के लिए आभार जताया और दलाई लामा की दीर्घायु तथा तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की कामना की।
NSP पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पात्र विद्यार्थी एक मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के साथ-साथ पात्रता पूरी करने पर एक से अधिक कल्याणकारी छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार ने मौजूदा ‘वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप’ व्यवस्था को बदलकर ‘वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप’ करने का फैसला लिया है। यानी अगर कोई विद्यार्थी पहले से कल्याणकारी छात्रवृत्ति ले रहा है और बाद में मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह मेरिट छात्रवृत्ति लेने वाला विद्यार्थी पात्रता पूरी करने पर कल्याणकारी छात्रवृत्ति भी ले सकेगा। वहीं विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान की गई है। पहली बार आवेदन करते समय भरी गई सामान्य जानकारी को आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। बाद के आवेदनों में विद्यार्थी को केवल संबंधित योजना की जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो विद्यार्थी को योजना से जुड़ी जानकारी में सुधार का मौका दिया जाएगा। वहीं सामान्य शैक्षणिक या संस्थान संबंधी जानकारी में बदलाव करने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे। नए प्रावधान के तहत संस्थानों के नोडल अधिकारियों को भी विद्यार्थी के सभी छात्रवृत्ति आवेदनों और उनकी स्थिति दिखाई देगी। इससे आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों को इन नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, प्रार्थना सभा और जागरूकता अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करवाए जाएं। यानी 2026-27 से विद्यार्थियों को ज्यादा छात्रवृत्ति के अवसर मिलने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान होने वाली है।
हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में ताल कृषि सहकारी सभा में करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच के बाद विजिलेंस ने मामले में छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। बताया जा रहा है कि सहकारी सभा में करीब 2 करोड़ 46 लाख रुपये की अनियमितता सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस ने जांच आगे बढ़ाई और अब छह लोगों को FIR में नामजद किया है। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद सहकारी क्षेत्र में भी हड़कंप मच गया है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी रकम में गड़बड़ी कैसे हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया गया। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में गड़बड़ी से जुड़े और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में मंगलवार को मूसलाधार बारिश के बीच बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. नाहन विकासखंड की बर्मा पापड़ी पंचायत में रूण नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव में फंसे बुजुर्ग बनारसी दास को सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया. वहीं, बुजुर्ग को बचाने के लिए नदी में उतरा युवक अंशुल भी कई घंटे तक नदी के बीच फंसा रहा, जिसे बाद में रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. सीस मामले में नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से संपर्क किया गया. इसके बाद सेना से सहायता मांगी गई और सहारनपुर से एमआई-17 हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए पहुंचा. विधायक के मुताबिक रेस्क्यू के समय अंधेरा हो चुका था, लेकिन हेलीकॉप्टर रात में भी रेस्क्यू उड़ान भरने में सक्षम था. बुजुर्ग को सुरक्षित निकाल लिया गया है और युवक अंशुल को भी रेस्क्यू टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली और आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन की मांग को लेकर हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने बुधवार को शिमला के चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में बिजली बोर्ड कर्मचारी चौड़ा मैदान में जुटे और रैली निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगें जल्द पूरी करने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पेंशन योजना उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सरकार से ठोस फैसला लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और OPS बहाली समेत अन्य लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाए। चौड़ा मैदान में हुए इस प्रदर्शन के चलते काफी देर तक माहौल गरमाया रहा और कर्मचारियों ने एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के माहूंनाग के समीप बुधवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ I जिसमे कार पलटने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताएं जा रहे है । हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार कार माहूंनाग के समीप अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसा होते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। हादसे में मोहन सिंह मेहरन की मौत हो गई। वहीं विनीत और चुड़ामणी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। डीएसपी करसोग चांद किशोर ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
खेतों में खड़ी फसल और जंगलों के बीच बढ़ती हाथियों की आवाजाही नई चुनौती बनती जा रही है। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथियों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। सिरमौर में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने के दौरान उत्तराखंड की तरफ से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले हाथियों की आवाजाही मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला तक सीमित रहती थी, जहां वे गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद लौट जाते थे। अब हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से लेकर नाहन सीमा तक देखी जा रही है। हाथियों की बदलती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। उनके आने-जाने के पारंपरिक रास्तों, ठहरने वाले स्थानों और पसंदीदा क्षेत्रों का डाटा जीपीएस और आधुनिक मैपिंग टूल्स की मदद से जुटाया जा रहा है। इस डाटा को डिजिटल रूप में तैयार कर हाथियों के वास्तविक मूवमेंट रूट को चिह्नित किया जाएगा। इसी आधार पर प्रस्तावित कॉरिडोर की भौगोलिक सीमाएं तय होंगी। हाथियों के संरक्षण की दिशा में हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2024 में प्रोजेक्ट एलिफेंट में नामित किया जा चुका है। इसके बाद मानव और हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क से सटे सिरमौर के जंगलों में पानी की उपलब्धता, घना वन क्षेत्र और अनुकूल वातावरण हाथियों को आकर्षित कर रहा है। पांवटा साहिब के वन मंडलाधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि एलिफेंट कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है। वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। कोलर के समीप रात के समय हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2024 में पानीवाला खाला-सैनवाला के समीप जंगली हाथी ने शिलाई क्षेत्र के एक भेड़पालक पर हमला किया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। हाथियों की बढ़ती दस्तक का सीधा असर किसानों की खेती पर भी पड़ा है। इस वर्ष बहराल, सतीवाला, बातामंडी और माजरा-सतीवाला में हाथियों द्वारा आम के बगीचों और धान की फसल को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। बातामंडी, बहराल और पातलियां क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक से हाथियों के डर के कारण कई किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी है या इसका रकबा काफी कम कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती और लॉटरी शुरू करने को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा के मानसून सत्र में सोमवार को भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने दोनों मुद्दों को लेकर सुक्खू सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने सरकार पर घेरते हुए सवाल पूछा, "क्या सरकार चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी मांगने के बजाय भांग की खेती करे और लॉटरी खेले?" रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत रोजगार के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि सरकार की योजना समझ से परे है. उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार भांग की खेती के जरिए रोजगार देने की बात कर रही है. उन्होंने कहा, "सरकार की योजना क्या है... वह चाहती है कि प्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी न मांगे, ये भांग की खेती करें, भांग उगाएं और रोजगार पाएं." उन्होंने भांग को नशे की ओर ले जाने वाला माध्यम बताते हुए सवाल उठाया कि भांग को वैध करने के बाद सरकार प्रदेश में चिट्टे पर कैसे रोक लगाएगी. रणधीर शर्मा ने लॉटरी शुरू करने के प्रस्ताव को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जो युवा नशे से बच जाएंगे, उन्हें अब जुए की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिवाली के मौके पर युवाओं को लॉटरी शुरू करने का तोहफा देने जा रही है. उन्होंने कहा कि लॉटरी की आदत पड़ने के बाद कई लोग अपनी कमाई गंवा सकते हैं और परिवारों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. रणधीर शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने भी प्रदेश में लॉटरी को बंद करने का फैसला लिया था. रोजगार के मुद्दे पर चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने उद्योग मंत्री हर्षवर्धन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में केवल खनन ही उद्योग नहीं है. उद्योग विभाग का काम राज्य में औद्योगिक इकाइयों को आकर्षित करना और उन्हें स्थापित करना है, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके. उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज को समझना मुश्किल है और उद्योग मंत्री खनन के पीछे पड़े हुए हैं, जबकि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.
हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है? कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिला चंबा के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन यानी सोमवार को सदन में उठा. सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का वेतन देने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर चंबा तो दूर हमीरपुर और नेरचौक जैसे शहरों में भी जाने के लिए तैयार नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विज्ञापन जारी होने के बावजूद कई पद खाली रह जाते हैं. दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान चंबा सदर से विधायक नीरज नैय्यर ने चंबा मेडिकल कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती की स्थिति को लेकर सवाल पूछा था. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के नए भवन का हाल ही में उद्घाटन हुआ है. फिलहाल वहां तीन ओपीडी चल रही हैं, लेकिन अस्पताल को पूरी तरह सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न पदों पर कम से कम 150 से 200 नियुक्तियां करने की जरूरत है. विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार को अलग तरीके से सोचने की जरूरत है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चंबा में 5 लाख रुपये के वेतन पर प्रोफेसर नियुक्त करने के लिए तैयार है, लेकिन डॉक्टर वहां जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन भी जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद पद भरे नहीं जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि चंबा प्रदेश के एक कोने में स्थित है और यहां डॉक्टरों को लाना बड़ी चुनौती है. इसलिए चंबा के लिए अलग रणनीति बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल कॉलेजों को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बनी हुई है. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज को भी सुदृढ़ करने में सरकारों को लंबा समय लगा. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले 40 वर्षों से ऐसी व्यवस्था चली आ रही है, जिसमें अस्पतालों में चिकित्सकों की संख्या पूरी नहीं हो पाती. सरकार इस स्थिति को बदलने के लिए प्रयास कर रही है.
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान मंगलवार को पेंशनरों के बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई आक्रोश रैली के दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान के आसपास यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। व्यवस्था संभालने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों के बीच इस दौरान बहस भी हुई। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का लाभ देने की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनर 166 माह के पे एरियर्स और पेंशन एरियर्स का भुगतान तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी करने का दिया था आश्वासन पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से संबंधित मांगों की अधिसूचना 31 जुलाई तक जारी करने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ गई। इसी के विरोध में मंगलवार को चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली आयोजित की गई। पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं किया जाता और मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों की लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पेंशनर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव का भी ऐलान किया जा सकता है।
धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।
TGT शिक्षकों की वरिष्टता पर चला हथोड़ा! हाईकोर्ट के फैसले के बाद विशेष लाभ वापस, निदेशालय का बड़ा आदेश
हिमाचल के हजारों TGT शिक्षकों को बड़ा झटका, विशेष वरिष्ठता लाभ वापस; हाईकोर्ट के फैसले के बाद निदेशालय ने बदली अंतिम सूची शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लिया गया है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने वर्ष 2006 और 2007 में नियुक्त टीजीटी शिक्षकों को दिया गया विशेष वरिष्ठता लाभ वापस ले लिया है। ये लाभ पहले वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों के आधार पर दिए गए थे। अब हाईकोर्ट के फैसलों के अनुपालन में निदेशालय ने अंतिम वरिष्ठता सूची में आंशिक संशोधन करते हुए संबंधित शिक्षकों को दिए गए विशेष लाभ को हटा दिया है। निदेशालय की ओर से इस संबंध में बाकायदा कार्यालय आदेश जारी किया गया है। इसके बाद 2006-07 में नियुक्त उन टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता पर असर पड़ेगा, जिन्हें पूर्व में वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों के आधार पर वरिष्ठता का लाभ मिला था। मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2006-07 में नियुक्त टीजीटी शिक्षक अलग भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित हुए थे। इन शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2005 में जारी किए गए अलग विज्ञापन के आधार पर हुई थी। ऐसे में उन्हें वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में दिए गए वरिष्ठता लाभ का हकदार नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने वर्ष 2002 की भर्ती प्रक्रिया को लेकर निर्धारित समय में कोई कानूनी चुनौती नहीं दी, वे बाद में उस प्रक्रिया से जुड़े मामलों में दिए गए लाभ का दावा नहीं कर सकते। निदेशालय की यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों के अनुपालन में की गई है। विशेष रूप से एलपीए संख्या 836/2025 (कौशल चंद्र बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) में 25 फरवरी 2026 को दिए गए फैसले के बाद स्थिति स्पष्ट हुई। अदालत के निर्देशों के आधार पर निदेशालय ने अब अंतिम वरिष्ठता सूची में संशोधन किया है। वर्ष 2002 और 2012 की चयन प्रक्रियाओं से जुड़े कर्मचारियों को पूर्व में अदालत के निर्देशों के अनुसार वरिष्ठता संबंधी लाभ दिए गए थे। वहीं, वर्ष 2006-07 में नियुक्त टीजीटी शिक्षक वर्ष 2005 के अलग विज्ञापन के तहत चयनित हुए थे। इसलिए उन्हें 2002 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विशेष वरिष्ठता लाभ से अलग रखा गया है। निदेशालय के इस फैसले से संबंधित टीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और उससे जुड़े सेवा लाभों पर असर पड़ सकता है। विशेष वरिष्ठता लाभ वापस लिए जाने के बाद अब उनकी स्थिति संशोधित अंतिम वरिष्ठता सूची के अनुसार तय होगी। शिक्षकों के लिए यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि वरिष्ठता का सीधा संबंध भविष्य की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों से होता है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन में निदेशालय की ओर से उठाए गए इस कदम को 2006-07 बैच के टीजीटी शिक्षकों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा सहित कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कांगड़ा में कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कें प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों और प्रशासन को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। कांगड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत मंगलवार को संस्थानों को बंद करने, विलय और डिनोटिफाई करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के साथ हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू कई बार आमने-सामने नजर आए। करीब आधे घंटे तक सदन में इस मुद्दे को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच नोकझोंक होती रही। भाजपा विधायकों ने सरकार से पिछले तीन वर्षों के दौरान बंद किए गए और नए खोले गए संस्थानों का विस्तृत ब्यौरा मांगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, नयना देवी के विधायक रणधीर शर्मा और बिलासपुर के विधायक ने संयुक्त सवाल के माध्यम से सरकार से पूछा कि 31 जुलाई 2025 तक प्रदेश में कितने संस्थान बंद, विलय या डिनोटिफाई किए गए हैं। विधायकों ने संस्थानों का विभागवार और विधानसभा क्षेत्रवार विवरण भी मांगा। इसके साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि बंद किए गए संस्थानों में से कितने संस्थान दोबारा शुरू किए गए और उन्हें दोबारा खोलने के पीछे क्या कारण रहे। भाजपा विधायकों ने उन संस्थानों को लेकर भी सरकार से जानकारी मांगी, जिनके भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही जिन संस्थानों के भवन अभी तैयार नहीं हुए हैं, उनके निर्माण को लेकर सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर भी जवाब मांगा गया। इसी मुद्दे पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विधायकों की भावनाओं का सम्मान करेगी। जहां संस्थानों की वास्तविक जरूरत होगी, वहां उन्हें खोला जाएगा और आवश्यक स्टाफ भी उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत आधारित संस्थान खोलने के पक्ष में है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार पर चुनाव से कुछ महीने पहले राजनीतिक लाभ के लिए संस्थान खोलने की घोषणाएं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई संस्थान खोल दिए गए, लेकिन वहां पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई। मुद्दे पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। संस्थानों को बंद करने का मामला एक बार फिर मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है।
शिमला: तीन दिन के अवकाश के बाद हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में आज (सोमवार, 31 अगस्त को) एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरू होगी. सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे बाद प्रश्नकाल से शुरू होगी. इस दौरान सता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक देखने को मिल सकती है. शून्यकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सप्ताह की शासकीय कार्यसूची की जानकारी सदन में रखेंगे. साथ ही कुछ कागजात भी पटल पर रखेंगे. किसानों को यूरिया की खरीद के साथ नैनो यूरिया प्लस लेने के लिए कथित तौर पर मजबूर किए जाने के मामले पर सदन मे विपक्ष हंगामा कर सकता है. वहीं, नियम-130 के तहत युवाओं के लिए रोजगार से संबंधित गारंटी के कार्यान्वयन पर भी सदन में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है. भाजपा विधायक रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल, डॉ. हंसराज और जीत राम कटवाल प्रस्ताव करेंगे कि 'युवाओं के लिए रोजगार संदर्भित गारंटी के कार्यान्वयन बारे' सदन विचार करे. सदन में प्रदेश के जल संसाधनों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े राजस्व का मुद्दा भी उठेगा. विधायक केवल सिंह पठानिया नियम 130 के तहत रॉयल्टी, फ्री पावर और जल उपकर के बकाया भुगतान की वसूली और प्रदेश के राजस्व हितों के संरक्षण पर चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे. तीन दिन के अवकाश के बाद लौट रहे सदन में एक ओर प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के सवाल सरकार के सामने होंगे. वहीं, नियम 62 और 130 के तहत प्रस्तावित मुद्दे कार्यवाही को खासा महत्वपूर्ण बना सकते हैं.
शिमला: हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में करीब 300 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल की गई हैं। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इन बसों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों और रूटों पर चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। इन इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का मुख्य उद्देश्य डीजल बसों पर निर्भरता कम करना और हिमाचल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना है। जिन रूटों पर चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हो चुके हैं, वहां इन बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में पुराने डीजल वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों से बदला जाए। उपमुख्यमंत्री के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक बसें स्थानीय रूटों के साथ-साथ जरूरत के अनुसार लंबी दूरी के रूटों पर भी चलाई जाएंगी। पालमपुर में हाल ही में 10 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। वहीं बिलासपुर, कांगड़ा और शिमला ग्रामीण सहित कई क्षेत्रों को भी नई ई-बसें उपलब्ध करवाई गई हैं। सरकार ने भविष्य में एचआरटीसी के बेड़े में 1,000 और इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों, पीजीआई, एम्स बिलासपुर और प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू करने की योजना है। इससे लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों पर खर्च करने के मामले को लेकर सरकार हाईकोर्ट का रुख करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मामले का जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल में जगह-जगह मंदिर हैं, जिनमें से करीब तीन दर्जन मंदिर सरकार के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी और चामुंडा माता जैसे बड़े मंदिरों में काफी मात्रा में चढ़ावा आता है। इन मंदिरों की आय से पहले सामाजिक कार्यों और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में आर्थिक मदद दी जाती रही है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से इस तरह चढ़ावे की राशि खर्च करने पर बंदिशें लगाई गई हैं। सरकार फिलहाल पूरे मामले का कानूनी अध्ययन कर रही है। इसके बाद सरकार इस संबंध में हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करेगी, ताकि मंदिरों के चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों में इस्तेमाल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
शिलाई की बेटी पुष्पा राणा संभालेंगी टीम इंडिया की कमान, एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनीं हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र की रहने वाली कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा राणा को भारतीय महिला कबड्डी टीम की नई कप्तान बनाया गया है। वह जापान में होने वाले 2026 एशियन गेम्स में टीम इंडिया की अगुवाई करेंगी। पुष्पा राणा ने लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तान रहीं हिमाचल की ही खिलाड़ी ऋतु नेगी की जगह ली है। पुष्पा राणा के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। वह 2022 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा रही थीं। 2022 के फाइनल में भारत ने चीनी ताइपे को 26-25 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। पुष्पा की कप्तानी में अब भारतीय टीम एशियन गेम्स में अपने स्वर्ण पदक का बचाव करने उतरेगी। 2026 एशियन गेम्स में भारत की महिला कबड्डी टीम में हिमाचल प्रदेश की चार खिलाड़ी—पुष्पा राणा, ऋतु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर—शामिल हैं। पुष्पा राणा का भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान बनना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है। खासतौर पर शिलाई क्षेत्र के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि लगातार दो भारतीय महिला कबड्डी कप्तान इसी क्षेत्र से सामने आई हैं।
हिमाचल प्रदेश में मानसून के बीच बारिश का असर एक बार फिर सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ा है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की 31 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में प्रदेशभर में 98 सड़कें बंद हुई हैं। इसके अलावा 107 बिजली ट्रांसफार्मर (DTR) ठप हुए हैं, जबकि 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। जिलेवार आंकड़ों में मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां कुल 43 सड़कें बंद दर्ज की गईं। इसके बाद कुल्लू में 16 और चंबा में 15 सड़कें बंद रहीं। हमीरपुर में 37 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए, जबकि मंडी में 89 डीटीआर बंद रहे। वही सोलन जिले में चार सड़कें बंद हैं। इनमें कसौली और नालागढ़ उपमंडल की दो-दो सड़कें शामिल हैं। नालागढ़ में पांच बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हुए हैं। सिरमौर के नाहन उपमंडल में पांच सड़कें बंद हैं। शिमला जिले में रामपुर और सुन्नी उपमंडल में कुल दो सड़कें बंद दर्ज की गई हैं।
हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। मौसम विभाग के 27 अगस्त को जारी बुलेटिन के अनुसार, प्रदेश में 28 और 29 अगस्त को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं 30 अगस्त से 2 सितंबर तक कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। मौसम विभाग ने 31 अगस्त, 1 सितंबर और 2 सितंबर को एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में इन दिनों प्रदेश के संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 27 अगस्त को प्रदेश में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। 30 अगस्त से बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।
प्रदेश में आज और कल कुछेक हिस्सों में बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान दो जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम को देखते हुए लोकल लोगों समेत टूरिस्ट को भी सतर्क रहने और नदी-नालों व लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्रों में नहीं जाने की एडवाइजरी दी गई है। IMD के अनुसार 10 अगस्त को कांगड़ा और सिरमौर तथा 11 अगस्त को कांगड़ा व मंडी में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इससे सड़कें बाधित होने, भूस्खलन और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए सावधानी बरतने को कहा गया है। IMD की चेतावनी के मुताबिक शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में रात से ही बारिश शुरू हो गई है। राज्य में 15 अगस्त तक बारिश जारी रहने के आसार हैं। हालांकि 12 अगस्त से वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर पड़ेगा। इससे कुछेक भागों में ही हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। हिमाचल में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से 8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। सात जिलों में सामान्य से काफी कम, जबकि पांच जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में सरकार और संगठन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने हिमाचल कांग्रेस सरकार के कामकाज को लेकर पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट भेजी है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में रजनी पाटिल ने कहा कि उनके नाम से प्रसारित की जा रही ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने कांग्रेस हाईकमान को हिमाचल प्रदेश की सरकार या संगठन के संबंध में किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं सौंपी है।उन्होंने मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि राजनीतिक विषयों पर समाचार प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। बिना पुष्टि के प्रसारित खबरें न केवल भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं, बल्कि राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित कर सकती हैं। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से प्रदेश कांग्रेस के भीतर सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर चर्चाएं तेज थीं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पार्टी नेतृत्व ने रजनी पाटिल से प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर फीडबैक मांगा था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व को सौंप दी है। इन रिपोर्टों में मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन का भी जिक्र होने की बात कही गई थी। इन खबरों के बाद प्रदेश की राजनीति में कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगी थीं और विपक्ष ने भी इन्हें लेकर कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, रजनी पाटिल के ताजा बयान ने इन सभी दावों को खारिज कर दिया है।
शिमला: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के जलविद्युत संसाधनों पर राज्य का अधिकार मजबूत करने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए अधिकारियों को एसजेवीएन लिमिटेड को पूर्व में आवंटित तीन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इनमें 382 मेगावाट सुन्नी परियोजना, 210 मेगावाट लुहरी चरण-1 परियोजना और 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना शामिल हैं। ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम लाभ हिमाचल की जनता को मिलना चाहिए और राज्य सरकार इसी उद्देश्य के साथ ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जलविद्युत प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार अपने प्राकृतिक संसाधनों से हिमाचल का उचित हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एसजेवीएन द्वारा विकसित की जा रही 500 मेगावाट दुगार जलविद्युत परियोजना की शर्तों पर भी दोबारा बातचीत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है, ऐसे में संशोधित परियोजना के अनुरूप प्रदेश को अधिकतम लाभ दिलाना सरकार की प्राथमिकता होगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने 422 मेगावाट किशाऊ बांध परियोजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले आठ वर्षों से लंबित गतिरोध समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना में कोई पूंजी निवेश नहीं करना होगा, जबकि राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली प्राप्त होगी। इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार, सचिव (ऊर्जा) राकेश कंवर, ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति, एचपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक सहित ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रदेश के जलविद्युत क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई और राज्य हित में आवश्यक निर्णय लेने पर सहमति बनी।
हाँ, आपने सही पकड़ा। अखबार की खबर के अनुसार कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने की थी, जबकि कैबिनेट बैठक, जिसमें नीति को मंजूरी दी गई, उसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने की। यदि आप उसी खबर के अनुरूप लिखना चाहते हैं, तो विवरण इस प्रकार होना चाहिए: Title: मल्टी टास्क वर्कर नीति को मिली मंजूरी, जल्द शुरू होगी नियुक्ति प्रक्रिया Description: हिमाचल प्रदेश सरकार ने मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) नीति को मंजूरी दे दी है। नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और मल्टी टास्क वर्कर भर्ती से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के साथ-साथ कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा की गई। नई नीति लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों में सफाई, रखरखाव और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए मानव संसाधन की कमी दूर होने की उम्मीद है। इससे शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत मिलेगी और वे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह नीति विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में आधारभूत व्यवस्थाओं को मजबूत करेगी। गौरतलब है कि पहले आयोजित भर्ती प्रक्रिया में करीब 9 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा के लिए इसे रोक दिया गया था। अब नीति को मंजूरी मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
हिमाचल प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और कृषि महत्व वाले आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication-GI) पंजीकरण प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पाद अब GI टैग से सम्मानित हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (HIMCOSTE) के माध्यम से यह पंजीकरण प्राप्त किया गया है, जिससे प्रदेश की समृद्ध विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। GI टैग प्राप्त करने वाले नए उत्पादों में स्पीति का सी-बकथॉर्न (छरमा), सलूणी सफेद मक्का, चंबा मेटल आर्ट, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की सेपूबड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं। ये सभी उत्पाद अपनी विशिष्ट गुणवत्ता, पारंपरिक निर्माण शैली और भौगोलिक विशेषताओं के कारण लंबे समय से प्रदेश की पहचान रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता पिछले साढ़े तीन वर्षों में राज्य सरकार द्वारा हिमाचल की पारंपरिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों की मौलिकता और विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी, बाजार में उनकी मांग और मूल्य में वृद्धि होगी तथा स्थानीय कारीगरों, किसानों और उत्पादकों को आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि GI पंजीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी पहचान भी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार पांगी का भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर का प्लेक्ट्रेंथस शहद और सिरमौर के अदरक को भी GI टैग दिलाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य हिमाचल की पारंपरिक धरोहर और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित कर प्रदेश के किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाना है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) के डिपार्टमेंट ऑफ टीचर्स एजुकेशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बी.एड. (ITEP) कोर्स में प्रवेश हेतु ऑफलाइन काउंसलिंग का शेड्यूल जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के अनुसार काउंसलिंग 3 और 4 जुलाई को आयोजित की जाएगी। 3 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बी.एससी.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50 सीटों तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बी.एससी.-बी.एड. (मिडिल) की 50 सीटों के लिए काउंसलिंग होगी। वहीं, 4 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक बी.ए.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50 सीटों के लिए तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बी.ए.-बी.एड. (मिडिल) और बी.कॉम.-बी.एड. (सेकेंडरी) की 50-50 सीटों के लिए काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। प्रवेश राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (NCET)-2026 की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों को निर्धारित तिथि और समय पर सभी मूल प्रमाण पत्रों के साथ उनकी स्वप्रमाणित प्रतियां लेकर काउंसलिंग में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीट आवंटन की पुष्टि होने के बाद प्रथम सेमेस्टर की फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से जमा करनी होगी। बी.ए.-बी.एड. और बी.कॉम.-बी.एड. के लिए पहली किस्त 25,700 रुपये तथा बी.एससी.-बी.एड. के लिए 28,700 रुपये निर्धारित किए गए हैं। फीस जमा करने के लिए अभ्यर्थियों को अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करना होगा।
हिमाचल प्रदेश में आज, 1 जुलाई से केंद्र सरकार की नई VB-G RAM-G (विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) योजना लागू हो गई है। यह योजना मौजूदा मनरेगा व्यवस्था की जगह लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ पूरी प्रणाली को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का गारंटीड रोजगार मिलेगा। योजना में कार्यों की स्वीकृति, श्रमिकों की उपस्थिति (Attendance), मॉनिटरिंग और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाएंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दावा किया गया है। हालांकि, योजना को लेकर हिमाचल सरकार ने केंद्र के समक्ष कई आपत्तियां भी दर्ज करवाई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की चुनौतियां इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन सकती हैं। इसके अलावा, नई योजना के तहत मजदूरी दर और मानव-दिवस (Man-days) के आवंटन को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है। विशेष श्रेणी राज्य होने के कारण हिमाचल में इस योजना का 90:10 (केंद्र:राज्य) फंडिंग पैटर्न लागू रहेगा, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के खजाने पर हर साल लगभग ₹160 से ₹164 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि योजना लागू न करने की स्थिति में केंद्र से मिलने वाले ग्रामीण विकास फंड पर भी असर पड़ सकता था। योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण रोजगार को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, जबकि विपक्ष और कई विशेषज्ञ अतिरिक्त वित्तीय बोझ, तकनीकी चुनौतियों और इसके जमीनी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी शिमला में पहली बड़ी भू-स्खलन की घटना सामने आई है। मंगलवार दोपहर बाद हुई तेज बारिश के कुछ ही समय बाद शिमला-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरियर क्षेत्र में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया। देखते ही देखते भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े पत्थर सड़क पर आ गिरे, जिससे शिमला-चक्कर मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यातायात ठप हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई वाहन मलबे की चपेट में नहीं आया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों, कार्यालय आने-जाने वालों और यात्रियों को घंटों तक भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का अभियान शुरू किया, जो देर शाम तक जारी रहा। सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही धीमी कर दी गई, जिससे दोनों ओर लंबा जाम लग गया और सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक को वैकल्पिक बालूगंज मार्ग से डायवर्ट किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य होने लगा। मानसून की शुरुआत के साथ ही शिमला समेत प्रदेश के अधिकांश पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस वर्ष मानसून अपनी सामान्य तिथि 25 जून के मुकाबले करीब 5 दिन की देरी से प्रदेश पहुंचा है। फिलहाल मानसून की उत्तरी सीमा मंडी तक पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में इसके पूरे प्रदेश में सक्रिय होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून पूरी तरह से किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, शिमला और मंडी के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है, जबकि कांगड़ा और सिरमौर के कुछ क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। स्थिति को देखते हुए 2 से 4 जुलाई तक प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान तेज बारिश के साथ भूस्खलन, अचानक बाढ़, सड़क अवरोध और निचले इलाकों में जलभराव जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। वहीं 5 और 6 जुलाई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान गोहर में सबसे अधिक 55 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा मंडी में 45.6 मिमी, बरठीं में 42.6 मिमी, रायपुर मैदान में 41 मिमी, सुंदरनगर में 31.4 मिमी और कांगड़ा में 30.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं मैदानी जिला ऊना राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने लोगों और पर्यटकों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा टालने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
HRTC के बेड़े में शामिल हुईं 150 नई इलेक्ट्रिक बसें, अब ग्रामीण रूटों पर भी मिलेगा प्रदूषण मुक्त सफर
हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए अच्छी खबर है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बेड़े में 150 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं, जिन्हें प्रदेश के 9 अलग-अलग डिपो में आवंटित कर दिया गया है। इन बसों के संचालन से अब ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को भी आधुनिक, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त यात्रा की सुविधा मिलेगी। निगम प्रबंधन के अनुसार सबसे अधिक 35-35 इलेक्ट्रिक बसें ऊना और हमीरपुर डिपो को दी गई हैं। इसके अलावा बिलासपुर को 20, नालागढ़ और नाहन को 15-15, देहरा और पालमपुर को 10-10 तथा धर्मशाला और तारादेवी (शिमला) को 5-5 बसें आवंटित की गई हैं। कुछ अन्य डिपो को भी आवश्यकता के अनुसार 1-2 बसें दी गई हैं। डिपो में पहुंचने के बाद इन बसों की प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (PDI) की जाएगी। तकनीकी जांच पूरी होते ही इन्हें विभिन्न रूटों पर चलाया जाएगा। नई बसों के शामिल होने से निगम में बसों की कमी दूर होगी और कई नए रूटों पर भी बस सेवा शुरू की जा सकेगी। गौरतलब है कि HRTC ने कुल 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का ऑर्डर दिया है, जिनमें से 150 बसें प्रदेश पहुंच चुकी हैं। शेष 147 इलेक्ट्रिक बसें भी जल्द ही हिमाचल पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही निगम डीजल बसों की खरीद प्रक्रिया भी जारी रखे हुए है।
हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच बढ़ते टकराव के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर संकट गहरा गया है। कर्मचारियों और सरकार के बीच मंगलवार को हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 24 जून की मध्यरात्रि से ‘काम छोड़ो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस आंदोलन के चलते प्रदेशभर में एचआरटीसी बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अगले छह माह तक एचआरटीसी कर्मचारियों के हड़ताल करने पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन एक आवश्यक सेवा है और इसके बाधित होने से लाखों यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे पारंपरिक हड़ताल नहीं कर रहे हैं, बल्कि ‘काम छोड़ो आंदोलन’ के तहत ड्यूटी पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन बसों का संचालन नहीं करेंगे। यूनियन नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से लंबित मांगों और वित्तीय समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एचआरटीसी की करीब 2800 बसें प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं देती हैं। ऐसे में यदि आंदोलन जारी रहता है तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजरें आगामी घटनाक्रम और संभावित समाधान पर टिकी हैं।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने Re-NEET 2026 परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण राहत की घोषणा की है। सरकार के निर्णय के तहत 21 जून को आयोजित होने वाली Re-NEET परीक्षा के अभ्यर्थियों को हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की साधारण बसों में परीक्षा केंद्र तक आने-जाने के लिए नि:शुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की यात्रा को सुगम, सुरक्षित और तनावमुक्त बनाना है, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के परीक्षा में शामिल हो सकें। HRTC द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह सुविधा केवल निगम की साधारण बसों में ही लागू होगी। लग्जरी, डीलक्स और अन्य विशेष श्रेणी की बसों में यह छूट मान्य नहीं होगी। मुफ्त यात्रा का लाभ उठाने के लिए अभ्यर्थियों को यात्रा के दौरान अपना Re-NEET 2026 एडमिट कार्ड दिखाना होगा। यही दस्तावेज पहचान पत्र, निवास स्थान और परीक्षा केंद्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा अभ्यर्थी के निवास स्थान से परीक्षा केंद्र तक एक बार जाने और परीक्षा के बाद एक बार वापस लौटने के लिए ही मान्य होगी। विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था 20 जून से 22 जून तक प्रभावी रहेगी। किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोकने के लिए बस परिचालकों को एडमिट कार्ड पर यात्रा संबंधी आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, मुफ्त यात्रा करने वाले छात्रों का रिकॉर्ड तैयार कर HRTC मुख्यालय को भेजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री Mukesh Agnihotri के निर्देशों के बाद HRTC प्रबंधन ने सभी क्षेत्रीय और यूनिट अधिकारियों को इस सुविधा के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से परीक्षा देने आने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को आर्थिक एवं मानसिक राहत मिलेगी। उपमुख्यमंत्री ने Re-NEET 2026 में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छात्र पूरे आत्मविश्वास और शांत मन से परीक्षा दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी सुविधा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करती रहेगी।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रही राज्य सरकार अब 700 करोड़ रुपये का नया ऋण लेने जा रही है। वित्त विभाग ने इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले मई 2026 में सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में अप्रैल माह में 900 करोड़ रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया गया था। यदि यह नया ऋण स्वीकृत हो जाता है तो अप्रैल, मई और जून के दौरान राज्य सरकार की कुल उधारी 2,100 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती हर महीने की प्रतिबद्ध देनदारियों का भुगतान है। राज्य को कर्मचारियों के वेतन के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये, पेंशन भुगतान के लिए 800 करोड़ रुपये, पहले से लिए गए ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपये तथा ऋण के मूलधन की अदायगी के लिए 300 करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ती है। यानी हर महीने लगभग 3,600 करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ रही है। वित्तीय संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 18 अप्रैल 2026 को सरकार ने कुछ श्रेणियों के अधिकारियों और माननीयों के वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला लिया था। हालांकि अब राज्यपाल की स्वीकृति के बाद यह स्थगित वेतन जून 2026 के वेतन के साथ जारी किया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। लगातार बढ़ती उधारी के बीच हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब 1,11,200 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां इसे सरकार की वित्तीय विफलता बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि आरडीजी बंद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों, पेंशनरों और विकास कार्यों की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए यह कदम आवश्यक है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लगातार बढ़ती उधारी हिमाचल की वित्तीय स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाएगी, या सरकार राजस्व बढ़ाने के अपने प्रयासों से इस संकट से बाहर निकल पाएगी।
दिनांक 17.06.2026 को पुलिस थाना चिरगांव की टीम को गश्त के दौरान चमराड़ा क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती किए जाने संबंधी गोपनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने स्थानीय स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान सेब के पौधों के बीच अवैध रूप से उगाए गए 1,570 अफीम के पौधे (पॉड सहित) बरामद किए गए। बरामद पौधों में से कुछ पौधों को नमूने के रूप में कब्जे में लेकर सील किया गया, जबकि शेष पौधों को नियमानुसार मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इस संबंध में अभियोग संख्या 56/2026, दिनांक 17.06.2026, अधीन धारा 18 एनडीपीएस अधिनियम, पुलिस थाना चिरगांव, जिला शिमला में मामला दर्ज किया गया है। उक्त मामले की जांच के दौरान पुलिस टीम को चमराड़ा क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती किए जाने संबंधी एक अन्य गोपनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने पुनः स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान सेब के बगीचे में खसरा नंबर 702 की भूमि पर अवैध रूप से उगाए गए 2,021 अफीम के पौधे (पॉड सहित) बरामद किए गए। बरामद पौधों में से कुछ पौधों को नमूने के रूप में कब्जे में लेकर सील किया गया, जबकि शेष पौधों को नियमानुसार मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इस संबंध में अभियोग संख्या 57/2026, दिनांक 17.06.2026, अधीन धारा 18 एनडीपीएस अधिनियम, पुलिस थाना चिरगांव, जिला शिमला में मामला दर्ज किया गया है। दोनों मामलों में कुल 3,591 अफीम के पौधे बरामद किए गए हैं। आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है तथा मामलों की आगामी जांच पुलिस थाना चिरगांव द्वारा की जा रही है।


















































