हिमाचल: आज किसान-बागवान करेंगे सचिवालय घेराव, उठाएंगे अपनी मांगे
हिमाचल प्रदेश में कृषि और बागवानी पर बढ़ते संकट के विरोध में किसान-बागवान आज सचिवालय का घेराव करने जा रहे हैं। आंदोलन के दौरान वे न्यूजीलैंड से आयात होने वाले सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के फैसले का विरोध करेंगे और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसानों को भूमि उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग उठाएंगे। केंद्र ने दिसंबर 2025 में न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है। इससे हिमाचल के ढाई लाख से ज्यादा सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ गई है। न्यूजीलैंड की आड़ में दूसरे देश भी इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने को दबाव बनाएंगे।
अमेरिका समेत दूसरे देशों के साथ भी FTA को लेकर केंद्र सरकार का विचार चल रहा है। बागवानों का मानना है कि आयातित सेब के देश के बाजारों में आने से हिमाचल का 5500 करोड़ रुपए का सेब उद्योग तबाह हो जाएगा। जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड का सेब उद्योग भी तबाह हो जाएगा। सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने बताया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार FTA के जरिए देश की खेती को विदेशी बाजारों के हवाले कर रही है। न्यूजीलैंड, अमेरिका और अन्य देशों से सस्ते सेब के आयात ने हिमाचल के बागवानों की कमर तोड़ दी है। आयात शुल्क घटाकर घरेलू सेब उत्पादकों को बर्बादी की कगार पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही है। इसलिए, बागवानों सड़कों पर आने को मजबूर है।
वहीं किसान नेता संजय चौहान ने सुप्रीम कोर्ट (SC) के निर्देशों की खुली अवहेलना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- कोर्ट के आदेशों के बावजूद किसानों को भूमि देने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई गई। इसके उलट प्रदेश में जमीन की बेतरतीब बिक्री, सेब के पेड़ों की कटाई और बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर किसानों को बेदखल किया जा रहा है। पावर प्रोजेक्ट, फोरलेन और नेशनल हाईवे से प्रभावित किसान आज भी मुआवजे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। यदि सरकार आज जल्द नीति बनाने का भरोसा नहीं देती तो आंदोलन उग्र किया जाएगा।
संजय चौहान ने साफ किया कि अगर सरकार ने 19 जनवरी के बाद भी आंखें मूंदे रखीं, तो आंदोलन सिर्फ सचिवालय तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल के गांव-गांव से उठने वाली यह आवाज सत्ता के गलियारों तक गूंजेगी। उन्होंने दुग्ध उत्पादकों को हर महीने पेमेंट का भुगतान पहली तारीख को सुनिश्चित करने की भी मांग की। उन्होंने बताया कि किसान विरोधी मोदी सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) का बजट 2023 में जीरो कर दिया है। वहीं राज्य सरकार भी बागवानों से खरीदे सेब का भुगतान नहीं कर रही। इस मुद्दे को भी आज रैली के माध्यम से उठाया जाएगा।
