करसोग : सरकार द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लेना किसानों के संघर्ष और बलिदान की जीत - निर्मला चौहान
तीनों कृषि कानून वापस लेने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश काँग्रेस कमेटी की सचिव निर्मला चौहान ने इसे किसानों के संघर्ष और बलिदान की जीत कहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा वापस लिए तीनों काले कृषि कानून से सिद्ध हो गया है कि अब सरकार बेक फुट पर आ खड़ी है और सरकार का अभिमान टूट गया है। उन्होंने कहा की आजादी से पहले भी अन्नदाता ने अंग्रेजों को भी काले कानून वापस लेने पर मजबूर कर दिया था। अब किसानों ने अहिंसक आंदोलन का सहारा लेकर मोदी सरकार का गुरुर भी तोड़ दिया है। निर्मला चौहान ने कहा कि पंजाब व अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत मोदी सरकार को अपनी नाक बचाने के लिए यह तीनों कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा हिमाचल में भी 3 विधानसभा व एक लोकसभा सीट के उपचुनाव में किसानों व बागवानों ने मोदी सरकार को अपनी ताकत दिखाई है और आज सही मायनों में लोकतंत्र की जीत हुई है और देश के अन्नदाता को उल्टपंथी, गद्दार, देशद्रोही व आतंकी कहने वाली ताकतों को मुंह की खानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि 1 साल पहले ही केंद्र सरकार अगर यह कानून वापस ले लेती तो बड़ी संख्या में किसानों को इस आंदोलन के दौरान अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। उन्होंने कहा किसानों का दर्द समझने के बजाय मोदी सरकार के मंत्री इस कानून के फायदे समझाने में लगे रहे और दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे आंदोलनकारी किसानों के मन की बात सुनने का मोदी सरकार ने समय नहीं निकाला। उन्होंने कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान को किसानों के संघर्ष की जीत करार दिया है।
