भालुओं के आतंक से सहमा हिमाचल! घरों और खेतों तक पहुंच रहे जंगली भालू
हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है?
कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं.
सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.
