शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने अपने हालिया दिल्ली दौरे को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका दिल्ली जाना व्यक्तिगत कार्यक्रम से जुड़ा था। इस दौरान वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात संयोगवश हुई। वहीं, शिमला जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को लेकर रोहित ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने माना कि चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी को गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है। शिक्षा मंत्री के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस संगठन और नेतृत्व को लेकर समीक्षा और सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और संगठन को अधिक सक्रिय बनाने पर भी ध्यान दिया जा सकता है। रोहित ठाकुर ने दिल्ली दौरे को लेकर लग रही अटकलों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसे किसी राजनीतिक बैठक या विशेष रणनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं, जिला परिषद चुनाव के नतीजों को लेकर उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन पर चिंता जाहिर की है।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया है। 30 जून से 10 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 1,63,882.59 लाख रुपये यानी करीब 1,638.83 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी संचयी रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब तक 116 लोगों की मौत हुई है। इनमें भूस्खलन से 18, डूबने से 15, बिजली गिरने से 12 और पेड़ या बड़ी चट्टान गिरने से 40 लोगों की मौत शामिल है। इसके अलावा 10 मौतें सड़क हादसों में दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में 172 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में भी दर्ज होने का उल्लेख है। कांगड़ा में सबसे ज्यादा नुकसान जिला स्तर पर सबसे अधिक नुकसान कांगड़ा में 447.17 लाख रुपये दर्ज किया गया है। इसके बाद मंडी में 297.57 लाख, चंबा में 294.10 लाख, शिमला में 376.65 लाख और सोलन में 164.88 लाख रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। 70 सड़कें बंद लगातार बारिश के कारण प्रदेश में 70 सड़कें बंद हैं। इनमें सबसे ज्यादा मंडी में 30 सड़कें, कुल्लू में 11, शिमला में 11, कांगड़ा में 10, सिरमौर में 4, ऊना में 3 और लाहौल-स्पीति में 1 सड़क बंद है। इनमें मंडी के सराज की 25, सुंदरनगर की 1, सरकाघाट की 3 और थलौट की 1 सड़क शामिल है। कुल्लू में कुल्लू उपमंडल की 4, बंजार की 2, आनी की 3 और निरमंड की 2 सड़कें प्रभावित हैं। बिजली-पानी की सप्लाई भी प्रभावित बारिश का असर बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। शिमला जिले में 2 बिजली ट्रांसफार्मर और 2 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रशासन की ओर से बंद मार्गों को खोलने और प्रभावित क्षेत्रों में सुविधाएं बहाल करने के प्रयास जारी हैं। बारिश से बचाव और बहाली की चुनौती लगातार बारिश के कारण कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन बंद मार्गों को खोलने के साथ बिजली और पेयजल व्यवस्था बहाल करने में जुटा है। लोगों को मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
मंडी हेड पोस्ट ऑफिस में पैसों से जुड़ी गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। मामले में एक महिला कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति की शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की। जांच में पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी सामने आने के बाद महिला कर्मचारी पर कार्रवाई की गई। मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए विभाग ने जांच कमेटी बनाई है। कमेटी यह पता लगाएगी कि कितने रुपये की गड़बड़ी हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल विभाग ने गबन की सही रकम का खुलासा नहीं किया है। सस्पेंड महिला कर्मचारी की नई तैनाती सुंदरनगर हेड पोस्ट ऑफिस में की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
मंडी: नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार चलाने के बजाय पूरा मंत्रिमंडल दिल्ली में डेरा डाले हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय सरकार के मंत्री दिल्ली की राजनीति में व्यस्त हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हिमाचल में आम लोग कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जनता अपनी समस्याओं को लेकर सरकार की ओर देख रही है, लेकिन मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल के सदस्य दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में सरकार की जरूरत है, तब मंत्री दिल्ली में क्यों बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को दिल्ली की राजनीति के बजाय हिमाचल के लोगों और प्रदेश के विकास पर ध्यान देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने उन्हें शासन चलाने की जिम्मेदारी दी है, न कि लगातार दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त रहने की। उन्होंने सरकार से जनता की समस्याओं का समाधान करने और प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने की मांग की।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हिमाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्यधिक बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड के कारण हिमाचल की नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर और रेत जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित होती है और आसपास की मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों, वनों तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचे पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आपदा के जोखिम को कम करने के लिए ऐसे संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध ड्रेजिंग जरूरी है।
हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाही. सरकार ने क्या कहा? सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है. हिमाचल में एक ही विभाग के कर्मचारियों को क्यों दिया जा रहा अलग-अलग डा? हिमाचल प्रदेश में एक ही विभाग के तहत आने वाले तीन सार्वजनिक उपक्रमों (कॉरपोरेशनों) के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की अलग-अलग दर को लेकर सवाल उठा है. ऊर्जा विभाग के अधीन आने वाले हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL), हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPTCL) और हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPPCL) में कर्मचारियों को एक समान दर से महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है. हाल ही में हुए विधानसभा के मानसून सत्र में यह मामला उठने के बाद सरकार ने इसकी वजह स्पष्ट की. दरअसल, पांवटा साहिब से भाजपा विधायक सुख राम चौधरी ने विधानसभा में सरकार से पूछा था कि HPSEBL और HPPTCL के कर्मचारियों को 60 फीसदी, जबकि HPPCL के कर्मचारियों को केवल 45 फीसदी DA क्यों मिल रहा है? विधायक ने सरकार से इस अंतर की वजह जाननी चाहीI सरकार ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं है कि अलग-अलग उपक्रमों के सभी कर्मचारियों को केवल कंपनी या उपक्रम के आधार पर 60 या 45 फीसदी DA दिया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, इन उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी अलग-अलग पेंशन और भविष्य निधि (Provident Fund) व्यवस्था के तहत आते हैं. सरकार ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को वर्तमान में 60 फीसदी की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. वहीं, एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को 45 फीसदी की दर से DA मिल रहा है.
धूमधाम एवं श्रद्धाभाव से मनाया गया विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह
चंडीगढ़, 7 सितंबर को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) चंडीगढ़ महानगर की ओर से विश्व हिंदू परिषद स्थापना दिवस एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह का भव्य आयोजन रविवार को सेक्टर-29 ए स्थित सेवा भारती के प्लॉट नंबर-1 में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में इंद्रप्रस्थ क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री एवं विश्व हिंदू परिषद के माननीय नीरज दौनेरिया मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, धर्म एवं सत्य की स्थापना के संदेश तथा राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्य पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया। समारोह के दौरान विश्व हिंदू परिषद की स्थापना के उद्देश्य, संगठन की सामाजिक एवं धार्मिक भूमिका तथा हिंदू समाज की एकजुटता पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज को संगठित करने की प्रेरणा देता है। विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ महानगर मंत्री अंकुश गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम में चंडीगढ़ एवं लुधियाना विभाग संगठन मंत्री विकास बिश्नोई, पंजाब प्रांत कार्यकारी सदस्य कर्नल धर्मवीर, चंडीगढ़ विभाग मंत्री प्रदीप शर्मा, सह मंत्री सुरेश राणा, विश्व हिंदू परिषद चंडीगढ़ महानगर के अध्यक्ष अरविंद मोदगिल, उपाध्यक्ष राकेश चौधरी, उपाध्यक्ष रेनू रोहिल्ला, सह मंत्री पंकज शर्मा, चंडीगढ़ गौ रक्षा प्रमुख जितेंद्र सनातनी, सह प्रमुख जितेंद्र रावत, बजरंग दल संयोजक राकेश उप्पल, सह संयोजक संयम सहित संगठन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समारोह के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से ओत-प्रोत वातावरण बना रहा। जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजन ने श्रद्धालुओं में धार्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय दायित्व की भावना को भी मजबूत किया। महंत मनोज शर्मा मनु जी महाराज ने कहा कि धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समारोह का संदेश स्पष्ट है कि सनातन संस्कृति की परंपराओं को आगे बढ़ाने तथा राष्ट्रहित में समाज को संगठित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दयोड़ से हणोगी के बीच बनी टनलों को लेकर बड़ी राहत की खबर है। NHAI अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने टनल का निरीक्षण किया और ट्रायल लिया। NHAI ने एक टनल को अगले कुछ दिनों में ट्रायल बेस पर यातायात के लिए खोलने की तैयारी की है। शुरुआत में इसी एक टनल से दोनों तरफ के वाहन चलाए जाएंगे। दूसरी टनल का काम बाद में पूरा किया जाएगा। हणोगी के पास पहाड़ी खिसकने से टनल के करीब 24 मीटर हिस्से को नुकसान पहुंचा था। इसकी मरम्मत पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। टनल खुलने से कुल्लू-मनाली जाने वाले लोगों को पुराने खतरनाक और भूस्खलन वाले हाईवे से काफी राहत मिलेगी। साथ ही सफर भी आसान और सुरक्षित होने की उम्मीद है। दशहरे से पहले टनल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
कांगड़ा: जसवां-परागपुर के चलाली में सोमवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। यहां HRTC बस और बाइक की आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में 20 वर्षीय कॉलेज छात्र दीपक भारद्वाज की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दीपक रोज की तरह बाइक पर ढलियारा स्थित शिक्षण संस्थान जा रहा था। चलाली के एक तीखे मोड़ पर उसकी बाइक सामने से आ रही HRTC बस से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक की मौके पर ही जान चली गई। सूचना मिलते ही मोइन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए देहरा अस्पताल भेजा। पुलिस ने हादसे में शामिल HRTC बस को भी कब्जे में ले लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस जगह पर पहले भी हादसे हो चुके हैं। उन्होंने प्रशासन से स्पीड ब्रेकर और चेतावनी वाले साइन बोर्ड लगाने की मांग की है, ताकि आगे ऐसे हादसे रोके जा सकें।
शिमला: हिमाचल में कृषि उपकरणों पर सब्सिडी लेने वाले किसानों के लिए व्यवस्था बदल दी गई है। अब सिर्फ आवेदन करने से सब्सिडी मिलना तय नहीं होगा। अगर तय लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं तो कृषि विभाग लॉटरी के जरिए किसानों का चयन करेगा। पहले सब्सिडी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलती थी। नई व्यवस्था से किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि अब सब्सिडी मिलना किस्मत पर निर्भर हो गया है। एक किसान एक साल में अधिकतम दो कृषि उपकरणों के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद पांच साल तक दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा। योजना के तहत ट्रैक्टर, पावर टिलर, पावर वीडर, क्रॉप रीपर और रोटावेटर जैसे उपकरणों पर सब्सिडी दी जाती है। पात्र किसानों को उपकरणों पर 40 से 50 फीसदी तक अनुदान मिलता है। किसान नेताओं ने लॉटरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि सब्सिडी का लाभ आवेदन और जरूरत के आधार पर मिलना चाहिए, लॉटरी के भरोसे नहीं।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय में कर्मचारियों को प्रमोशन की सौगात मिली है। सचिवालय में कार्यरत 18 सीनियर असिस्टेंट को सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के पद पर पदोन्नति दी गई है। इस प्रमोशन के बाद अब ये कर्मचारी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार की ओर से जारी आदेशों के तहत इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया गया है। लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे सीनियर असिस्टेंट अब सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-II के तौर पर विभागीय कामकाज को आगे बढ़ाएंगे। प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों में भी खुशी का माहौल है। नई जिम्मेदारी के तहत पदोन्नत कर्मचारियों को कार्यालयी कार्यों की निगरानी, फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े महत्वपूर्ण काम संभालने होंगे। इससे सचिवालय के कामकाज में भी जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा होने की उम्मीद है। प्रमोशन को कर्मचारियों के अनुभव और सेवाओं की मान्यता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों ने इसे अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।
धर्मपुर क्षेत्र के जाबली में गुरुवार सुबह तेज बारिश के दौरान अचानक भारी मात्रा में पानी दुकान की ओर आ गया। पानी का तेज बहाव देखकर दुकान में मौजूद दुकानदार ने बिना देर किए बाहर भागकर अपनी जान बचाई! घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दुकानदार जैसे ही दुकान से बाहर निकलता है, उसके कुछ ही सेकंड बाद दुकान के ऊपर से पानी का तेज सैलाब नीचे की ओर आता है। अचानक आए पानी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि सुबह हुई भारी बारिश के बाद जाबली और आसपास के इलाकों में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई। फोरलेन की ओर से बहकर आया बारिश का पानी दुकानों तक पहुंच गया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। बारिश के कारण धर्मपुर क्षेत्र में जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर पानी और मलबे के कारण आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। जाबली की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश के दौरान कुछ ही मिनटों में हालात किस तरह खतरनाक हो सकते हैं।
सोलन: हिमाचल प्रदेश के फार्मा हब बद्दी-नालागढ़ में नशे के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। NCB की चंडीगढ़ यूनिट ने कई ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 25 लाख नशीली/आदत लगाने वाली दवाओं की गोलियां और 2,000 किलोग्राम से अधिक टैपेंटाडोल बरामद किया है। यह कार्रवाई सोमवार देर रात शुरू हुई और मंगलवार शाम तक जारी रही। NCB टीम ने नालागढ़ के जगातखाना गांव में किराये पर ली गई तीन दुकानों और बद्दी स्थित एक अनधिकृत गोदाम समेत कई स्थानों की तलाशी ली। कार्रवाई में हिमाचल प्रदेश राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन के छह ड्रग इंस्पेक्टर और पंजाब पुलिस के एक विशेषज्ञ ने भी सहयोग किया। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। जांच में सामने आया कि जगातखाना स्थित शारिका बायोटेक में कथित तौर पर बिना जरूरी अनुमति के टैपेंटाडोल का निर्माण किया जा रहा था। कंपनी परिसर से करीब 40 किलो वजन वाले 30 ड्रम भी बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित यूनिट पहले भी निर्माण संबंधी अनियमितताओं को लेकर जांच के घेरे में रह चुकी है और फरवरी तक सील थी। छापेमारी के बाद NCB ने फार्मा कंपनी के मालिक गौरव अग्रवाल को बद्दी स्थित उसके आवास से हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक कार्रवाई के दौरान करीब 25 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए। एजेंसी अब दवाओं के निर्माण, भंडारण और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। NCB को शक है कि वैध चिकित्सा इस्तेमाल के लिए बनाई जाने वाली दवाओं को कथित तौर पर अवैध बाजार में पहुंचाने वाला बहुराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ड्रग डायवर्जन नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। जांच एजेंसी दवाओं की सप्लाई, खरीद-बिक्री, वित्तीय लेन-देन और मनी ट्रेल को भी खंगाल रही है। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में नशीली और नकली दवाओं को लेकर पहले भी कई बड़ी कार्रवाई हो चुकी हैं। हाल के दिनों में भी बड़ी मात्रा में नशीली गोलियां और दवाएं बरामद की गई हैं। इससे फार्मा हब में दवाओं के कथित अवैध डायवर्जन को लेकर सुरक्षा और नियामक एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल NCB की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां सप्लाई की जानी थीं और इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पांवटा साहिब (सिरमौर): सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है जानकारी के मुताबिक, गिरिपार क्षेत्र के बाईला-गुजोन गांव की मुंगा देवी अस्पताल के फीमेल वार्ड में उपचाराधीन हैं। परिजनों के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे उनका ऑक्सीजन सिलिंडर खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने ड्यूटी स्टाफ से नया सिलिंडर लगाने का आग्रह किया, लेकिन करीब 5 बजे तक ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं हो सकी। इस दौरान वृद्धा को सांस लेने में परेशानी होती रही। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने दोबारा ऑक्सीजन लगाने की मांग की तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। एक शिकायत में तीमारदारों को वार्ड के दरवाजे से बाहर धक्का देने और अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। परिजनों का दावा है कि कथित बदसलूकी की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उनके पास है। अस्पताल में तत्काल सुनवाई नहीं होने पर परिजनों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1100 पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और ऑक्सीजन सिलिंडर बदलकर वृद्धा को ऑक्सीजन उपलब्ध करवाई गई। मामले को लेकर परिजनों ने अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी नाहन डॉ. राकेश प्रताप ने कहा कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना हुई है तो इसकी जानकारी जुटाकर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में ऑक्सीजन उपलब्द करवाने में हुई देरी और नर्स पर लगाए गए बदसलूकी के आरोपों की जांच बाकी है I सम्बंधित स्टाफ पक्ष सामने आने के बाद ही स्तिथि पूरी तरह स्पष्ट होगी I
धर्मशाला: तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के 66 वर्ष पूरे होने पर धर्मशाला में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मैकलोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में हुए इस कार्यक्रम में तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास और परम पावन दलाई लामा के योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से मेधावी विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही तिब्बती कलाकारों और बच्चों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद लोगों का खूब ध्यान खींचा। कार्यक्रम के दौरान तिब्बती संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लोकतंत्र दलाई लामा की दूरदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक लोकतंत्र के इन मूल्यों को पहुंचाना सभी तिब्बतियों की जिम्मेदारी है। बताया गया कि 2 सितंबर 1960 को पहली तिब्बती जनप्रतिनिधि सभा के गठन के साथ तिब्बती लोकतांत्रिक सरकार की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1991 में निर्वासित तिब्बती प्रशासन को लिखित संविधान आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदला गया और वर्ष 2001 से राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के अंत में निर्वासित तिब्बती संसद ने भारत सरकार और भारतीय जनता के सहयोग के लिए आभार जताया और दलाई लामा की दीर्घायु तथा तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की कामना की।
NSP पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 से छात्रवृत्ति के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पात्र विद्यार्थी एक मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के साथ-साथ पात्रता पूरी करने पर एक से अधिक कल्याणकारी छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकेंगे। केंद्र सरकार ने मौजूदा ‘वन स्टूडेंट-वन स्कॉलरशिप’ व्यवस्था को बदलकर ‘वन स्टूडेंट-मल्टीपल स्कॉलरशिप’ करने का फैसला लिया है। यानी अगर कोई विद्यार्थी पहले से कल्याणकारी छात्रवृत्ति ले रहा है और बाद में मेरिट आधारित छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो जाता है, तो उसे मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। इसी तरह मेरिट छात्रवृत्ति लेने वाला विद्यार्थी पात्रता पूरी करने पर कल्याणकारी छात्रवृत्ति भी ले सकेगा। वहीं विद्यार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी आसान की गई है। पहली बार आवेदन करते समय भरी गई सामान्य जानकारी को आगे के आवेदनों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा। बाद के आवेदनों में विद्यार्थी को केवल संबंधित योजना की जानकारी भरनी होगी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अगर आवेदन में कोई कमी पाई जाती है, तो विद्यार्थी को योजना से जुड़ी जानकारी में सुधार का मौका दिया जाएगा। वहीं सामान्य शैक्षणिक या संस्थान संबंधी जानकारी में बदलाव करने के लिए पहले जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे। नए प्रावधान के तहत संस्थानों के नोडल अधिकारियों को भी विद्यार्थी के सभी छात्रवृत्ति आवेदनों और उनकी स्थिति दिखाई देगी। इससे आवेदन के सत्यापन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता आने की उम्मीद है। जिला उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों को इन नए नियमों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। संस्थानों से कहा गया है कि नोटिस बोर्ड, प्रार्थना सभा और जागरूकता अभियानों के जरिए विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और निर्धारित समय सीमा में आवेदन करवाए जाएं। यानी 2026-27 से विद्यार्थियों को ज्यादा छात्रवृत्ति के अवसर मिलने के साथ-साथ आवेदन प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले आसान होने वाली है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में मंगलवार को मूसलाधार बारिश के बीच बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. नाहन विकासखंड की बर्मा पापड़ी पंचायत में रूण नदी का जलस्तर बढ़ने से तेज बहाव में फंसे बुजुर्ग बनारसी दास को सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया. वहीं, बुजुर्ग को बचाने के लिए नदी में उतरा युवक अंशुल भी कई घंटे तक नदी के बीच फंसा रहा, जिसे बाद में रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. सीस मामले में नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से संपर्क किया गया. इसके बाद सेना से सहायता मांगी गई और सहारनपुर से एमआई-17 हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए पहुंचा. विधायक के मुताबिक रेस्क्यू के समय अंधेरा हो चुका था, लेकिन हेलीकॉप्टर रात में भी रेस्क्यू उड़ान भरने में सक्षम था. बुजुर्ग को सुरक्षित निकाल लिया गया है और युवक अंशुल को भी रेस्क्यू टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के माहूंनाग के समीप बुधवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ I जिसमे कार पलटने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गयी जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल बताएं जा रहे है । हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। जानकारी के अनुसार कार माहूंनाग के समीप अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसा होते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार घायलों को बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। हादसे में मोहन सिंह मेहरन की मौत हो गई। वहीं विनीत और चुड़ामणी गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। डीएसपी करसोग चांद किशोर ने हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
माैसम विभाग के अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। भूस्खलन से कई सड़कें बाधित है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है I सबसे दर्दनाक घटना बिलासपुर से सामने आई है। यहां पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आने से एक गौशाला क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें बंधी गाय की मौत हो गई। भारी बारिश के कारण नेशनल हाईवे-305 को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं नाहन-ददाहू सड़क पर नेहली के पास भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हुआ है। बारिश का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 24 घंटों में नैना देवी में सबसे ज्यादा 186.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा मलरांव में 140, कसौली में 102 और घाघस में 99 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। लगातार बारिश और भूस्खलन को देखते हुए लोगों से सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।
खेतों में खड़ी फसल और जंगलों के बीच बढ़ती हाथियों की आवाजाही नई चुनौती बनती जा रही है। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथियों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। सिरमौर में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने के दौरान उत्तराखंड की तरफ से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले हाथियों की आवाजाही मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला तक सीमित रहती थी, जहां वे गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद लौट जाते थे। अब हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से लेकर नाहन सीमा तक देखी जा रही है। हाथियों की बदलती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। उनके आने-जाने के पारंपरिक रास्तों, ठहरने वाले स्थानों और पसंदीदा क्षेत्रों का डाटा जीपीएस और आधुनिक मैपिंग टूल्स की मदद से जुटाया जा रहा है। इस डाटा को डिजिटल रूप में तैयार कर हाथियों के वास्तविक मूवमेंट रूट को चिह्नित किया जाएगा। इसी आधार पर प्रस्तावित कॉरिडोर की भौगोलिक सीमाएं तय होंगी। हाथियों के संरक्षण की दिशा में हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2024 में प्रोजेक्ट एलिफेंट में नामित किया जा चुका है। इसके बाद मानव और हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क से सटे सिरमौर के जंगलों में पानी की उपलब्धता, घना वन क्षेत्र और अनुकूल वातावरण हाथियों को आकर्षित कर रहा है। पांवटा साहिब के वन मंडलाधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि एलिफेंट कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है। वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। कोलर के समीप रात के समय हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2024 में पानीवाला खाला-सैनवाला के समीप जंगली हाथी ने शिलाई क्षेत्र के एक भेड़पालक पर हमला किया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। हाथियों की बढ़ती दस्तक का सीधा असर किसानों की खेती पर भी पड़ा है। इस वर्ष बहराल, सतीवाला, बातामंडी और माजरा-सतीवाला में हाथियों द्वारा आम के बगीचों और धान की फसल को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। बातामंडी, बहराल और पातलियां क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक से हाथियों के डर के कारण कई किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी है या इसका रकबा काफी कम कर दिया है।
हिमाचल प्रदेश में जंगली भालुओं के हमलों में तीन साल की अवधि में छह लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इस दौरान प्रदेश भर में 93 लोग घायल हुए हैं. सबसे अधिक प्रभावित जिलों में चंबा व शिमला हैं. ये जानकारी हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में सामने आई है. ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने राज्य में भालुओं के हमलों में घायल व जान गंवाने वाले लोगों को लेकर जानकारी मांगी थी. साथ ही वे जानना चाहते थे कि सरकार भालुओं के हमलों को रोकने के लिए क्या उपाय कर रही है? क्या सरकार भालुओं के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने व रोकथाम के उपायों पर विचार कर रही है? कांग्रेस विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि तीन साल की अवधि में राज्य में विभिन्न जिलों में 93 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं और छह ने अपनी जान गंवाई है. जिला चंबा में तीन साल की अवधि में 35 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए और दो लोगों की जान चली गई. सिरमौर जिला में केवल दो लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए. कांगड़ा में दो लोगों की भालुओं के हमले में मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं. सिरमौर में इन हमलों में दो व जिला सोलन में एक व्यक्ति घायल हुआ है. जिला शिमला में रामपुर क्षेत्र में भालुओं का काफी आतंक है. शिमला में तीन साल में 34 लोग घायल हुए व दो की इन हमलों में मृत्यु हो गई. बिलासपुर, हमीरपुर व लाहौल-स्पीति जिला में भालुओं का आतंक नहीं है. किन्नौर में भी तीन साल में सिर्फ एक व्यक्ति के घायल होने का मामला दर्ज है. इसके अलावा जिला कुल्लू में 11 लोग भालुओं के हमलों में घायल हुए हैं. सरकार की तरफ से बताया गया कि भालु प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी बढ़ाई गई है. वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास व उनके भोजन के स्रोतों को सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि वे भोजन की तलाश में बस्तियों में न आएं. संवेदनशील इलाकों में बचाव व क्विक रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है. जरूरत के अनुसार इलाकों में कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं. प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की तरफ से स्मार्ट स्टिक व बजर उपलब्ध करवाए गए हैं. इसके अलावा ग्रामीणों को भालुओं के हमलों के प्रति जागरुक भी किया जाता है. साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जाते हैं.
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का ऐतिहासिक चौड़ा मैदान मंगलवार को पेंशनरों के बड़े प्रदर्शन का गवाह बना। हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई आक्रोश रैली के दौरान पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण चौड़ा मैदान के आसपास यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। व्यवस्था संभालने पहुंचे पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे पेंशनरों के बीच इस दौरान बहस भी हुई। पेंशनरों की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को 40 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का लाभ देने की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पेंशनर 166 माह के पे एरियर्स और पेंशन एरियर्स का भुगतान तथा 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते (डीए) का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। 31 जुलाई तक अधिसूचना जारी करने का दिया था आश्वासन पेंशनर नेताओं के अनुसार सरकार के साथ 13 मई को हुई बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा हुई थी। नेताओं का कहना है कि बैठक में सरकार की ओर से संबंधित मांगों की अधिसूचना 31 जुलाई तक जारी करने का आश्वासन दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पेंशनरों में नाराजगी बढ़ गई। इसी के विरोध में मंगलवार को चौड़ा मैदान में आक्रोश रैली आयोजित की गई। पेंशनर नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी लंबित देनदारियों का भुगतान नहीं किया जाता और मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव भूप राम वर्मा ने कहा कि पेंशनरों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेंशनरों की लंबित देनदारियों और अन्य मांगों पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। पेंशनर नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले समय में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के घेराव का भी ऐलान किया जा सकता है।
स्मार्ट मिटर लगाने पहुंची बिजली बोर्ड की टीम से विवाद, महिला ने JE को जड़ा थप्पड़ , मौके पर मचा हंगामा
हमीरपुर जिले के उझाण पटेरा गांव में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया, जब बिजली बोर्ड की टीम उपभोक्ताओं के पुराने मीटर बदलने पहुंची। स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते बिजली बोर्ड कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच बहसबाजी शुरू हो गई। इसी दौरान एक महिला ने बिजली बोर्ड के कनिष्ठ अभियंता (जेई) को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर काफी देर तक तनाव और विवाद की स्थिति बनी रही। जानकारी के मुताबिक बिजली बोर्ड की टीम गांव में पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए पहुंची थी। इसी दौरान ग्रामीणों के एक वर्ग ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। कर्मचारियों ने मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत धीरे-धीरे तीखी बहसबाजी में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने के दौरान एक महिला और बिजली बोर्ड कर्मचारियों के बीच तीखी कहासुनी हुई। इसी बीच महिला ने जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद बिजली बोर्ड कर्मचारियों में भी रोष फैल गया। मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। र्ड के जेई को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद मौके पर हंगामा हो गया और कर्मचारियों व ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति बनी रही। स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की ओर से पहले भी आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ता मीटर बदलने की प्रक्रिया और बिजली बिल को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर बिजली बोर्ड की ओर से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जारी है। उझाण पटेरा गांव में हुई घटना ने स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। अब मामले में पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई पर लोगों की नजर है। एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस को शिकायत मिली है। मामले की जांच की जा रही है।
धर्मशाला। बोर्ड परीक्षाओं में शामिल करने के लिए विद्यार्थियों का ‘डमी एडमिशन’ करवाने वाले स्कूल अब हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के रडार पर आ गए हैं। बोर्ड ऐसे निजी व सरकारी संबद्ध स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि छात्रों को नियमित कक्षाओं में पढ़ाए बिना सीधे बोर्ड परीक्षा में बिठाने की व्यवस्था कतई बर्दाश्त नहीं होगी। बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि डमी एडमिशन की शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। आरोप सही साबित होने पर संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति का सही और अद्यतन रिकॉर्ड बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाजिरी रजिस्टर में किसी भी तरह की हेराफेरी या गलत जानकारी देने को गंभीर अनियमितता माना जाएगा। प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि पंजीकृत छात्र वास्तव में कक्षाओं में आकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की आड़ में डमी दाखिले की बढ़ती प्रवृत्ति पर बोर्ड ने चिंता जताई है। शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र विकास के लिए नियमित कक्षा-अध्ययन, प्रायोगिक कार्य और शिक्षक मार्गदर्शन बेहद जरूरी हैं। केवल कागजी दाखिला शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने छात्रों व अभिभावकों से ऐसे संस्थानों के झांसे में न आने की अपील की।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के बद्दी में विजिलेंस ने एक महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया. बरोटीवाला पटवार सर्कल में तैनात महिला पटवारी ललिता को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दी थी कि महिला पटवारी लैंड वेल्यू प्रमाण पत्र बनाने की एवज में रिश्वत मांग रही है.इस पर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस को शिकायत दे दी. बाद में विजिलेंस ब्यूरो ने योजनाबद्ध तरीके से महिला पटवारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया, शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल की और शिकायत को सही पाए जाने पर जाल बिछाया. विजिलेंस थाना बद्दी की टीम ने कार्रवाई करते हुए महिला पटवारी को रिश्वत की रकम लेते हुए मौके पर पकड़ लिया. टीम ने कथित रिश्वत की राशि को भी कब्जे में ले लिया है. विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी जांच शुरू कर दी गई है. जांच में रिश्वत मांगने के कारणों और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है. विजिलेंस के आईजी बिमल गुप्ता ने बताया कि आरोपी महिला से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं. विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा. वही तहसीलदार सतेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी महिला पटवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है। कांगड़ा सहित कई जिलों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने लगा है। कांगड़ा में कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 4 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। भारी बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और सड़कें प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की भी आशंका है। ऐसे में लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 10 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहने के बावजूद पिछले कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों और प्रशासन को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। कांगड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें बंद होने की स्थिति भी पैदा हो सकती है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
शिमला: तीन दिन के अवकाश के बाद हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में आज (सोमवार, 31 अगस्त को) एक बार फिर सदन की कार्यवाही शुरू होगी. सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे बाद प्रश्नकाल से शुरू होगी. इस दौरान सता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक देखने को मिल सकती है. शून्यकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सप्ताह की शासकीय कार्यसूची की जानकारी सदन में रखेंगे. साथ ही कुछ कागजात भी पटल पर रखेंगे. किसानों को यूरिया की खरीद के साथ नैनो यूरिया प्लस लेने के लिए कथित तौर पर मजबूर किए जाने के मामले पर सदन मे विपक्ष हंगामा कर सकता है. वहीं, नियम-130 के तहत युवाओं के लिए रोजगार से संबंधित गारंटी के कार्यान्वयन पर भी सदन में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है. भाजपा विधायक रणधीर शर्मा, सुधीर शर्मा, राकेश जम्वाल, डॉ. हंसराज और जीत राम कटवाल प्रस्ताव करेंगे कि 'युवाओं के लिए रोजगार संदर्भित गारंटी के कार्यान्वयन बारे' सदन विचार करे. सदन में प्रदेश के जल संसाधनों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े राजस्व का मुद्दा भी उठेगा. विधायक केवल सिंह पठानिया नियम 130 के तहत रॉयल्टी, फ्री पावर और जल उपकर के बकाया भुगतान की वसूली और प्रदेश के राजस्व हितों के संरक्षण पर चर्चा का प्रस्ताव रखेंगे. तीन दिन के अवकाश के बाद लौट रहे सदन में एक ओर प्रश्नकाल के दौरान विधायकों के सवाल सरकार के सामने होंगे. वहीं, नियम 62 और 130 के तहत प्रस्तावित मुद्दे कार्यवाही को खासा महत्वपूर्ण बना सकते हैं.
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंदिरों में आने वाले चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों पर खर्च करने के मामले को लेकर सरकार हाईकोर्ट का रुख करेगी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान उठे मामले का जवाब देते हुए कहा कि हिमाचल में जगह-जगह मंदिर हैं, जिनमें से करीब तीन दर्जन मंदिर सरकार के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि चिंतपूर्णी और चामुंडा माता जैसे बड़े मंदिरों में काफी मात्रा में चढ़ावा आता है। इन मंदिरों की आय से पहले सामाजिक कार्यों और जनकल्याण से जुड़े कार्यों में आर्थिक मदद दी जाती रही है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से इस तरह चढ़ावे की राशि खर्च करने पर बंदिशें लगाई गई हैं। सरकार फिलहाल पूरे मामले का कानूनी अध्ययन कर रही है। इसके बाद सरकार इस संबंध में हाईकोर्ट में पिटीशन दायर करेगी, ताकि मंदिरों के चढ़ावे की राशि को सामाजिक कार्यों में इस्तेमाल करने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद 23 वर्षीय महिला रजनी शर्मा उर्फ मंजू शर्मा की मौत का मामला जोरदार तरीके से उठा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने मामले की जांच और अस्पताल प्रशासन की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा। जयराम ठाकुर ने पूछा कि क्या जांच में चिकित्सीय अथवा प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है? यदि लापरवाही पाई गई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है? नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में अलग-अलग जांचों के निष्कर्ष आपस में मेल नहीं खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एमएस की जांच और एसडीएम की जांच रिपोर्ट में अंतर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि आखिर सही रिपोर्ट कौन सी है और जो जांच अभी विचाराधीन है, वह कब पूरी होगी। जयराम ठाकुर ने कहा कि मामला गंभीर है और डॉक्टर के व्यवहार को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। उन्होंने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार अस्पताल प्रशासन ने भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर लोगों में रोष है और मामले में न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। स्वास्थ्य मंत्री बोले- जांच जारी, जिम्मेदार डॉक्टर निलंबित स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने सदन में घटना को दुखद बताते हुए मृतका के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सीय प्रणाली से जुड़ा मामला है और इसकी विवेचना जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मामले में दो स्तर पर जांच कराई गई है। एक जांच अस्पताल स्तर पर और दूसरी स्वतंत्र जांच के उद्देश्य से कराई गई, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से पड़ताल हो सके। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार डॉक्टर को निलंबित किया गया है और जांच अभी जारी है। ये भी पढ़ें
निरमंड उपमंडल प्रशासन ने खराब मौसम और यात्रा मार्ग की जोखिमपूर्ण स्थिति को देखते हुए श्रीखंड महादेव कैलाश यात्रा पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। उपमंडलाधिकारी (नागरिक) निरमंड जगदीप सिंह राठौर द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163(1) के तहत श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग पर निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। आदेश के तहत अब यात्रा मार्ग पर किसी भी प्रकार की ट्रैकिंग, धार्मिक यात्रा अथवा श्रद्धालुओं को ले जाने की गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यह आदेश सभी ट्रैकर्स, श्रद्धालुओं, टूर ऑपरेटरों और ट्रैकिंग एजेंसियों पर समान रूप से लागू होगा। प्रशासन ने लोगों से अपनी और अन्य यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रतिबंधित मार्ग पर प्रवेश न करने की अपील की है। एसडीएम जगदीप सिंह राठौर ने चेतावनी दी है कि आदेशों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश में प्री-मानसून सीजन ने भारी तबाही मचाई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की रिपोर्ट के अनुसार 1 मार्च से 30 जून 2026 तक प्रदेश को प्राकृतिक और अन्य आपदाओं के कारण लगभग 29.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस अवधि में विभिन्न हादसों में 128 लोगों की मौत हुई है, जबकि 354 लोग घायल हुए हैं और एक व्यक्ति अब भी लापता है। इसके अलावा 1,592 पशुओं की भी मौत दर्ज की गई है। प्रभावित परिवारों को राहत के रूप में अब तक 21.41 लाख रुपये की अनुग्रह राशि वितरित की जा चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 75 लोगों की मौत पेड़ों के गिरने और अन्य दुर्घटनाओं में हुई। वहीं 30 लोगों की जान नदी-नालों में डूबने, 5 की करंट लगने, 4 की आगजनी, 2 की सांप के काटने तथा 1 व्यक्ति की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हुई। इसके अतिरिक्त इसी अवधि में सड़क हादसों में 270 लोगों की जान गई, जिससे कुल मृतकों की संख्या चार महीनों में 398 तक पहुंच गई। हालांकि प्री-मानसून अवधि में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड या बादल फटने जैसी घटनाओं से किसी की मृत्यु दर्ज नहीं हुई, लेकिन अन्य कारणों से भारी जन-धन का नुकसान हुआ। इधर, राज्य पुलिस ने मानसून को देखते हुए लोगों और पर्यटकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने नदी-नालों और खड्डों के किनारे जाने, बहते पानी के पास खड़े होने या सेल्फी लेने से बचने की अपील की है। मौसम साफ दिखाई देने के बावजूद ऊपरी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश कुछ ही मिनटों में जलस्तर को खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकती है। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 112 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।
हिमाचल प्रदेश में आज, 1 जुलाई से केंद्र सरकार की नई VB-G RAM-G (विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) योजना लागू हो गई है। यह योजना मौजूदा मनरेगा व्यवस्था की जगह लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ पूरी प्रणाली को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाना है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का गारंटीड रोजगार मिलेगा। योजना में कार्यों की स्वीकृति, श्रमिकों की उपस्थिति (Attendance), मॉनिटरिंग और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाएंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का दावा किया गया है। हालांकि, योजना को लेकर हिमाचल सरकार ने केंद्र के समक्ष कई आपत्तियां भी दर्ज करवाई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की चुनौतियां इस व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन सकती हैं। इसके अलावा, नई योजना के तहत मजदूरी दर और मानव-दिवस (Man-days) के आवंटन को लेकर भी सरकार ने चिंता जताई है। विशेष श्रेणी राज्य होने के कारण हिमाचल में इस योजना का 90:10 (केंद्र:राज्य) फंडिंग पैटर्न लागू रहेगा, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के खजाने पर हर साल लगभग ₹160 से ₹164 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि योजना लागू न करने की स्थिति में केंद्र से मिलने वाले ग्रामीण विकास फंड पर भी असर पड़ सकता था। योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण रोजगार को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी, जबकि विपक्ष और कई विशेषज्ञ अतिरिक्त वित्तीय बोझ, तकनीकी चुनौतियों और इसके जमीनी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस वर्ष मानसून अपनी सामान्य तिथि 25 जून के मुकाबले करीब 5 दिन की देरी से प्रदेश पहुंचा है। फिलहाल मानसून की उत्तरी सीमा मंडी तक पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में इसके पूरे प्रदेश में सक्रिय होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून पूरी तरह से किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, शिमला और मंडी के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है, जबकि कांगड़ा और सिरमौर के कुछ क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले एक सप्ताह तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। स्थिति को देखते हुए 2 से 4 जुलाई तक प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान तेज बारिश के साथ भूस्खलन, अचानक बाढ़, सड़क अवरोध और निचले इलाकों में जलभराव जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। वहीं 5 और 6 जुलाई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान गोहर में सबसे अधिक 55 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा मंडी में 45.6 मिमी, बरठीं में 42.6 मिमी, रायपुर मैदान में 41 मिमी, सुंदरनगर में 31.4 मिमी और कांगड़ा में 30.8 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं मैदानी जिला ऊना राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने लोगों और पर्यटकों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा टालने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश में HRTC कर्मचारियों द्वारा 25 जून से प्रस्तावित हड़ताल को लेकर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए निगम की सेवाओं को आवश्यक सेवा घोषित कर दिया है। सरकार ने तत्काल प्रभाव से 'एस्मा' (Essential Services Maintenance Act) लागू कर दिया है, जिसके तहत HRTC कर्मियों की हड़ताल पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। आदेशों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सरकार का कहना है कि प्रदेशभर में लाखों यात्रियों की सुविधा को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से HRTC प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अस्थायी ड्राइवरों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। निगम ने रिकॉर्ड समय में भर्ती नीति तैयार करते हुए राज्य के सभी क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) कार्यालयों में 24 जून को दोपहर 12 बजे से वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस भर्ती अभियान के तहत प्रदेश के 31 डिपो के लिए लगभग 656 अस्थायी ड्राइवरों की नियुक्ति की जाएगी। भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के पास मैट्रिक उत्तीर्ण प्रमाणपत्र, वैध HTV/HMV ड्राइविंग लाइसेंस तथा भारी वाहन चलाने का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य रखा गया है। सरकार और HRTC कर्मचारी यूनियनों के बीच लंबित वित्तीय देयों को लेकर जारी विवाद के बीच यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि इन व्यवस्थाओं के माध्यम से बस सेवाओं को सुचारू बनाए रखा जाएगा और आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। वहीं, कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कर्मचारियों और सरकार के बीच बढ़ते टकराव के बीच सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर संकट गहरा गया है। कर्मचारियों और सरकार के बीच मंगलवार को हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने 24 जून की मध्यरात्रि से ‘काम छोड़ो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस आंदोलन के चलते प्रदेशभर में एचआरटीसी बस सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अगले छह माह तक एचआरटीसी कर्मचारियों के हड़ताल करने पर प्रतिबंध रहेगा। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन एक आवश्यक सेवा है और इसके बाधित होने से लाखों यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे पारंपरिक हड़ताल नहीं कर रहे हैं, बल्कि ‘काम छोड़ो आंदोलन’ के तहत ड्यूटी पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन बसों का संचालन नहीं करेंगे। यूनियन नेताओं का आरोप है कि लंबे समय से लंबित मांगों और वित्तीय समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, जिसके कारण कर्मचारियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। एचआरटीसी की करीब 2800 बसें प्रतिदिन प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं देती हैं। ऐसे में यदि आंदोलन जारी रहता है तो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जारी गतिरोध के बीच अब सभी की नजरें आगामी घटनाक्रम और संभावित समाधान पर टिकी हैं।
हिमाचल प्रदेश के लिए बहुप्रतीक्षित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए लंबे समय से लंबित वित्तीय मुद्दों को उठाया। बैठक के दौरान लगभग आठ वर्षों से लागत वहन को लेकर अटकी हुई 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ करने की दिशा में महत्वपूर्ण सहमति बनी। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15,000 करोड़ रुपये आंकी गई है और इसे उत्तर भारत की महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माना जाता है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमति व्यक्त की है कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले राज्य दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक से संबंधित लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वहन करेंगे। इससे हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी हद तक कम होगा और राज्य को परियोजना से मिलने वाले लाभों को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने प्रदेश के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए लगातार केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप यह सकारात्मक पहल सामने आई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने परियोजना में राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये वहन करने पर सहमति व्यक्त की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया और प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए वित्तीय बोझ कम करने के लिए लगातार प्रयास किए। राज्य सरकार का मानना है कि बड़े विकासात्मक प्रोजेक्ट्स में हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा करना और राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव को कम करना आवश्यक है। किशाऊ बांध परियोजना के पूर्ण होने के बाद हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली की हिस्सेदारी प्राप्त होगी। मौजूदा बिजली दरों के आधार पर इसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होगी, जिससे राज्य की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा यह परियोजना क्षेत्र में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा दीर्घकालिक विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल सहित परियोजना से लाभान्वित होने वाले राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। बैठक में विभिन्न तकनीकी, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमों पर सहमति बनाई गई। राज्य सरकार ने इसे हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए उम्मीद जताई है कि परियोजना के क्रियान्वयन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र और राजस्व में दीर्घकालिक लाभ देखने को मिलेंगे।
हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 का प्रथम चरण मंगलवार, 16 जून से शुरू हो गया है। इस चरण के तहत राज्यभर में हाउस लिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना का कार्य 15 जुलाई 2026 तक चलाया जाएगा। जनगणना कर्मी घर-घर जाकर मकानों, परिवारों और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। पहली बार इस प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों का संग्रहण और सत्यापन अधिक तेज और पारदर्शी होगा। अधिकारियों के अनुसार इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवार की संरचना, पेयजल, बिजली, शौचालय, रसोई गैस सहित विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पहलुओं से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए प्रदेशभर में गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। जनगणना विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे सर्वेक्षण दलों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित हो सके। जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। पहला चरण 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित किया जाएगा। जनगणना के आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के आवंटन और विभिन्न कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण आधार साबित होते हैं। इसलिए इसे देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण प्रशासनिक कवायदों में से एक माना जाता है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में तय किया गया कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में प्रस्तावित बदलावों पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार, जो पंचायतें बेस ईयर 2010 से लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रही हैं, उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में फिर से आरक्षित नहीं किया जाएगा। कैबिनेट ने सोशल सिक्योरिटी पेंशन नियम, 2010 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत ‘बेसहारा’ शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और लाभ लेने के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। नए नियमों के अनुसार जिन महिलाओं को उनके पति ने छोड़ दिया है, जो उनके साथ नहीं रह रही हैं और जिनके पास आय का कोई अलग स्रोत नहीं है, उन्हें बेसहारा महिला माना जाएगा। सरकार ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति के तहत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का भी फैसला किया है, जिससे राज्य के बच्चों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। मंत्रिमंडल ने वन-टाइम एमनेस्टी स्कीम का लाभ लेने के बावजूद शुरू न हो सके 15 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को रद्द करने की मंजूरी दी। साथ ही मंडी जिले के पंडोह में 10 मेगावाट का छोटा जलविद्युत परियोजना भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है, बशर्ते बोर्ड राज्य सरकार को अनुपयोगी जमीन वापस करेगा। इसके बदले राज्य को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली और 5 प्रतिशत बिजली अपने हिस्से के रूप में मिलेगी। कैबिनेट ने सिंगल विलेज और मल्टी विलेज जल योजनाओं के इन-विलेज इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्राम पंचायतों को सौंपने के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस पॉलिसी को मंजूरी दी। दूध उत्पादकों को संगठित करने के लिए कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के डेयरी किसानों को मिलाकर धगवार में रीजनल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड बनाने की स्वीकृति दी गई। धगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन और प्रबंधन के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। कैबिनेट ने चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर हेली-टैक्सी सेवा की उड़ानों को सप्ताह में तीन से बढ़ाकर 12 करने का फैसला किया। अब सप्ताह में छह दिन रोज़ दो उड़ानें संचालित होंगी और राज्य सरकार ऑपरेशन के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग देगी। जल शक्ति विभाग में जल जीवन मिशन के तहत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन केंद्र से फंड न मिलने के कारण राज्य के संसाधनों से जारी करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने तकनीकी शिक्षा विभाग के सरकारी इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में 60 जूनियर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भरने को मंजूरी दी। वहीं सहकारिता विभाग में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के दो और इंस्पेक्टर कोऑपरेटिव सोसाइटीज के 30 पद भरने की अनुमति दी गई। शिक्षा विभाग के स्पोर्ट्स हॉस्टलों में 16 कोचों की भर्ती को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही हमीरपुर जिले के खरड़ी स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल की क्षमता बढ़ाकर 100 बेड करने और इसका नाम स्टेट लेवल स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रखने का फैसला किया गया। कैबिनेट ने ऊना जिले के गगरेट में सब-डिविजनल पुलिस ऑफिस स्थापित करने, नूरपुर में पुलिस पोस्ट कोटला को पुलिस स्टेशन में अपग्रेड करने और टाहलीवाल में फायर पोस्ट को सब फायर स्टेशन में बदलने को भी मंजूरी दी। शिमला जिले की कोटखाई तहसील के मौजा कुफ्टू और सिरमौर जिले के पांवटा साहिब तहसील के मौजा हरिपुर टोहाना में जमीन केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए शिक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित करने का निर्णय भी लिया गया।मंत्रिमंडल ने लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों के लिए वर्ष 2016 में चयनित बचे सात उम्मीदवारों को पटवारी के रिक्त पदों पर नियुक्त करने की स्वीकृति दी। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश लीज नियम, 2013 में संशोधन कर हिमुडा को 80 वर्ष तक की भूमि लीज देने की अनुमति भी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत उन पार्ट-टाइम वाटर कैरियर्स की सेवाएं नियमित करने का निर्णय लिया गया है, जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक 11 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को CIC (केंद्रीय सूचना आयुक्त) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक की डिग्री की जानकारी पब्लिक करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका स्वीकार कर CIC के निर्देश को पलटते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रेजुएशन डिग्री का विवरण पब्लिक करने की जरुरत नहीं है। अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रेजुएशन की डिग्री का विवरण सार्वजनिक करने के लिए बाध्य नहीं है। वर्ष 2016 में, CIC ने 1978 में BA का एग्जाम पास करने वाले सभी छात्रों के रिकॉर्ड की जांच के आदेश दिए थे। ऐसा कहा जाता है कि उस दौरान PM नरेंद्र मोदी ने भी यह एग्जाम पास किया था। उस वक्त दिल्ली विश्वविद्यालय ने CIC के इस निर्देश को चुनौती दी थी, जिस पर रोक लगा दी गई थी। सुनवाई के दौरान, DU की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपने तर्क में कहा कि CIC के आदेश को खारिज कर दिया जाना चाहिए क्योंकि व्यक्ति के 'निजता का अधिकार' 'जानने के अधिकार' से ज़्यादा जरुरी है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने तर्क दिया यूनिवर्सिटी ने अपने तर्क में कहा कि वह छात्रों की जानकारी को वह नैतिक दायित्व के अनुसार सुरक्षित रखता है और अगर जो जनहित में नहीं है, 'केवल जिज्ञासा' के आधार पर, RTI कानून के तहत निजी जानकारी मांगने का औचित्य नहीं बनता। यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया, "धारा 6 में यह अनिवार्य प्रावधान है कि जानकारी देनी होगी, यही मकसद है, लेकिन आरटीआई अधिनियम किसी की जिज्ञासा को शांत करने के लिए नहीं है." DU कोर्ट के सामने PM मोदी की डिग्री प्रस्तुत करने को तैयार है हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय ने कोर्ट को बताया कि वह PM मोदी के डिग्री रिकॉर्ड कोर्ट के सामने प्रस्तुत करने के लिए तैयार है, पर RTI अधिनियम के तहत 'अजनबियों द्वारा जांच' के लिए उन्हें सार्वजानिक नहीं किया जा सकता है। जस्टिस सचिन दत्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार कर CIC के आदेश को रद्द कर दिया। विपक्षी दल प्रधानमंत्री मोदी की शैक्षिक डिग्रियों की प्रामाणिकता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि विश्वविद्यालयों ने सार्वजनिक रूप से उनकी वैधता की पुष्टि की है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए 146 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। अध्यक्ष ओम बिरला ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय पैनल पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, "प्रक्रिया अपना काम करेगी। एक निश्चित प्रक्रिया होती है, और मुझे नहीं लगता कि अभी कोई टिप्पणी करने की ज़रूरत है। महाभियोग समिति गठित करने का फैसला लिया गया है। उन्हें सभी सबूतों की जाँच करनी होगी और किसी नतीजे पर पहुँचना होगा।
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 101.18 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी है। यह राशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और शहरी स्वास्थ्य मिशन के लिए लचीले फंड के तौर पर दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना है। यह केंद्रीय सहायता विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने पर केंद्रित होगी। इस फंड का उपयोग मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और राज्य की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अवर सचिव, मलाय कुमार हलधर ने इस संबंध में वित्त और स्वास्थ्य सचिव को पत्र भेजा है। 22 मई को वित्त विभाग द्वारा जारी स्वीकृति आदेश में कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी रखी गई हैं जिसमें फंड का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा। NHM के वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों का कड़ाई से पालन करना होगा। हिमाचल प्रदेश को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारत सरकार द्वारा जारी धनराशि के आधार पर उसकी 40% (या 10% केंद्र शासित प्रदेशों के लिए) हिस्सेदारी संबंधित खातों में जमा की जाए। राज्य या केंद्र शासित प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्पष्ट मंजूरी के बिना विभिन्न घटकों या गतिविधियों के बीच आवंटन या पुनर्विनियोजन में कोई बदलाव नहीं कर सकते।
शिमला से दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस उच्चस्तरीय बैठक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्यगण और सीईओ मौजूद रहेंगे।बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सहमति बनाना है कि किस प्रकार राज्य 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में आधारशिला बन सकते हैं। इस दौरान उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास और टिकाऊ रोजगार सृजन जैसे विषयों पर भी व्यापक चर्चा होगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस बैठक में हिमाचल प्रदेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबित मुद्दों को उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से हिमाचल प्रदेश के 4000 करोड़ रुपये के बकाया एरियर के भुगतान का मुद्दा उठाएंगे। यह राशि राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके भुगतान से प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (राजस्व घाटा अनुदान) में वृद्धि की मांग कर सकते हैं। वही तुर्की से सेब आयात पर प्रतिबंध मुद्दा भी उठाएंगे। उन्होंने दिल्ली जाने से पहले ही इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिख दिया था। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि तुर्की से हर साल एक लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब का आयात हो रहा है, जिससे हिमाचल का 5500 करोड़ रुपये का सेब उद्योग संकट में आ गया है। यह आयात हिमाचल के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब बागवानों के लिए भी बड़ी समस्या बन गया है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री सुक्खू पिछले तीन दिनों से दिल्ली में हैं और इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से हिमाचल के लिए आर्थिक मदद लाने का प्रयास किया है। उन्होंने बीते कल और परसों पांच केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर हिमाचल के लिए लंबित कई महत्वपूर्ण मामलों को उठाया है। उसके बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रविवार या सोमवार को शिमला लौटने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश में अगले छह दिनों तक मौसम मौसम ख़राब रहने वाला है। मौसम विभाग ने 24 से 27 मई तक भारी बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की आशंका है। मौसम विज्ञान केंद्र ने इस बदलाव को देखते हुए 8 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि अन्य चार जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जिससे पेड़ों और कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही, कई भागों में ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। आज का मौसम और आगे की संभावना हालांकि, आज प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ रहने की उम्मीद है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। शिमला के रिज पर पर्यटक सुहावने मौसम का आनंद लेते देखे गए। वहीं, कांगड़ा, चंबा, शिमला, किन्नौर, कुल्लू और मंडी के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। कल से पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) ज्यादा सक्रिय होगा, जिससे ज्यादातर हिस्सों में हल्की बारिश होने के आसार हैं। परसों से पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने का पूर्वानुमान है, जो तापमान में गिरावट लाएगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में जनजीवन को भी प्रभावित कर सकता है।
नवोदय विद्यालय समिति (NVS) की गैर-शिक्षण पदों की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर नकल का खुलासा हुआ है, जिसकी जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं। पता चला है कि कई अभ्यर्थियों ने चेकिंग से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को अपने अंडरगारमेंट्स में छिपा रखा था। इतना ही नहीं, कुछ केंद्रों पर तो अभ्यर्थियों से बाजू के नीचे से भी ये डिवाइस बरामद किए गए हैं।मंगलवार को पुलिस ने NVS गैर-शिक्षण जूनियर सचिवालय सेवा परीक्षा के दौरान गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों (सात पुरुष और एक महिला) को अदालत में पेश किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने उनकी पुलिस रिमांड तीन दिनों के लिए और बढ़ा दी है। शुरुआती जांच से साफ है कि यह मामला सरकारी भर्ती परीक्षा में संगठित और जानबूझकर की गई अनुचित गतिविधियों से जुड़ा है। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े सभी रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं। इनमें अभ्यर्थियों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, एडमिट कार्ड और नकल के लिए इस्तेमाल किए गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी शामिल हैं। इसके अलावा, पुलिस के पास अभ्यर्थियों के बयानों की प्रतियां भी हैं, जिनमें उन्होंने नकल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस साथ ले जाने और गिरोह के संपर्क में आने व लेनदेन की बात कबूल की है। यह मामला भर्ती परीक्षाओं की शुचिता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने में लग हुई हैं।
शिमला: HPPCL के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता जा रहा है। आज उनके परिजनों ने प्रदेश सरकार पर मामले की जांच में संदेहपूर्ण और पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। विमल नेगी जनजातीय न्याय मंच के कार्यकारी अध्यक्ष भगत सिंह नेगी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर मौजूद भ्रष्टाचारियों और माफियाओं के गठजोड़ के कारण मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो पा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार और पूरे जनजातीय समाज की मांग है कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस प्रकरण को देखते हुए एक राज्य स्तरीय 'विमल नेगी जनजातीय न्याय मंच' का गठन किया गया है। भगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि यह मंच पूरी तरह से गैर-राजनीतिक होगा और जनजातीय समुदाय के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएगा। मंच ने न्यायालय से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद जताई है और सवाल किया है कि सरकार मामले की जांच CBI को सौंपने से क्यों कतरा रही है। वहीं, विमल नेगी के मामा राजिंदर नेगी ने सरकार के '15 दिनों में निष्पक्ष जांच' के आश्वासन पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 58 दिन बीत जाने के बाद भी अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के अधीन हुई जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। परिवार द्वारा RTI के माध्यम से रिपोर्ट की प्रति मांगने पर भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई है। राजिंदर नेगी ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस ने विमल नेगी का मोबाइल बरामद कर लिया था, लेकिन इस महत्वपूर्ण जानकारी को परिवार से छुपाया गया। उन्हें इस बारे में न्यायालय के माध्यम से पता चला। उन्होंने पेनड्राइव जैसे अन्य महत्वपूर्ण सबूतों का भी कोई उल्लेख न होने पर चिंता जताई और सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें मिटाने की आशंका व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस पर सरकार का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। अब, विमल नेगी के परिवार ने न्यायालय से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है और मामले को CBI को सौंपने की अपील की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और उन्हें न्याय मिल सके।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मौसम में आगामी पांच दिनों में बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जारी किया है कि प्रदेश में अगले पांच दिनों तक मौसम साफ रहेगा, जिससे धूप खिलेगी और तापमान में वृद्धि होगी। हालांकि, कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना भी जताई गई है। मई के मध्य में, प्रदेश ने लगभग डेढ़ सप्ताह तक लगातार बारिश और ओलावृष्टि का सामना किया था। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तो हल्की बर्फबारी भी हुई थी जिसके चलते वर्तमान में तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया जा रहा है। इस असामान्य मौसम के कारण, मध्यम और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खुशनुमा बना हुआ है और गर्मी का प्रभाव कम है। विशेष रूप से ऊना जिले को छोड़कर, प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से कम है। लेकिन, मौसम विभाग का कहना है कि इस सप्ताह तापमान में चार से पांच डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभावित है। इस तापमान वृद्धि से पहाड़ी क्षेत्रों में भी गर्मी महसूस होने लगेगी, जो अब तक अपेक्षाकृत शांत था।
भारतीय क्रिकेट टीम को एक हफ्ते में दो बड़े नुकसान हुए हैं। पहले कप्तान रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया, और अब विराट कोहली ने भी यही फैसला किया है। कोहली ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर यह जानकारी दी। खबरें थीं कि उन्होंने बीसीसीआई को पहले ही बता दिया था, लेकिन बोर्ड चाहता था कि वे इंग्लैंड सीरीज तक रुकें। हालांकि, कोहली ने टेस्ट क्रिकेट छोड़ने का ही फैसला किया। बुधवार को रोहित के संन्यास के बाद, कोहली का यह कदम भारत के लिए एक और बड़ा झटका है। फैंस इन दो बड़े खिलाड़ियों के संन्यास से दुखी हैं। अगले महीने भारत को इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज खेलनी है। कोहली ने अपने पोस्ट में क्या लिखा? विराट ने अपने पोस्ट में लिखा, 'टेस्ट क्रिकेट में पहली बार मैंने बैगी ब्लू जर्सी 14 साल पहले पहनी थी। ईमानदारी से कहूं तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह प्रारूप मुझे इस तरह के सफर पर ले जाएगा। इसने मेरी परीक्षा ली, मुझे पहचान दिया और मुझे ऐसे सबक सिखाए जिन्हें मैं जीवन भर साथ रखूंगा। सफेद जर्सी में खेलना मेरे लिए बहुत ही खास और निजी अनुभव है। परिश्रम, लंबे दिन, छोटे-छोटे पल जिन्हें कोई नहीं देखता, लेकिन यह हमेशा आपके साथ रहते हैं। जब मैं इस प्रारूप से दूर जा रहा हूं, तो यह आसान नहीं है, लेकिन यह फिलहाल सही लगता है। मैंने इसमें अपना सबकुछ दिया है और इसने मुझे मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा दिया है। मैं खेल के लिए, मैदान पर खेलने वाले लोगों के लिए और हर उस व्यक्ति के लिए आभारी हूं, जिसने मुझे इस सफर में आगे बढ़ाया। मैं हमेशा अपने टेस्ट करियर को मुस्कुराते हुए देखूंगा।' उन्होंने आगे अपनी टेस्ट कैप नंबर '269' लिखा और लिखा 'साइनिंग ऑफ'। विराट अब सिर्फ वनडे में खेलेंगे विराट अब सिर्फ वनडे में खेलते दिखाई पड़ेंगे। वह पिछले साल टीम इंडिया के टी20 विश्व कप जीतने के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय से संन्यास ले चुके हैं। कोहली ने कुल मिलाकर 123 टेस्ट खेले और इसकी 210 पारियों में 46.85 की औसत से 9230 रन बनाए। इसमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं। टेस्ट करियर में कोहली ने कुल 1027 चौके और 30 छक्के लगाए। इसके अलावा टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 125 मैचों में 48.7 की औसत और 137.05 के स्ट्राइक रेट से 4188 रन बनाए। इसमें एक शतक और 38 अर्धशतक भी शामिल हैं। वनडे में कोहली 302 मैचों में 57.88 की औसत और 93.35 के स्ट्राइक रेट से 14181 रन बना चुके हैं। इसमें 51 शतक और 74 अर्धशतक शामिल हैं। कोहली तीनों प्रारूप में रह चुके हैं कप्तान कोहली तीनों प्रारूप में टीम इंडिया की कमान भी संभाल चुके हैं। वह 2014 में धोनी के संन्यास के बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहली बार कप्तान बने थे। तब से लेकर 2022 में दक्षिण अफ्रीका दौरे तक टेस्ट में कप्तान रहे। वहीं, 2021 में उनसे टी20 और वनडे की कप्तानी छीन ली गई थी। कोहली ने अपना टेस्ट डेब्यू में 20 जून 2011 को सबिना पार्क में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था। वहीं, आखिरी टेस्ट उन्होंने इसी साल सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था।
नई दिल्ली: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और संबद्ध विमानन प्राधिकरणों ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए उत्तरी और पश्चिमी भारत के 32 हवाई अड्डों पर सभी प्रकार की नागरिक उड़ान संचालन शुरू कर दिया गया है। अस्थाई रूप से बंद था इन 32 हवाई अड्डों का संचालन आदमपुर,अम्बाला,अमृतसर,अवंतीपुर,बठिंडा,भुज,बीकानेर,चंडीगढ़,हलवारा,हिंडन,जैसलमेर,जम्मू,जामनगर,जोधपुर,कांडला,कांगड़ा (गग्गल),केशोद,किशनगढ़,कुल्लूमनाली(भुंतर),लेह,लुधियाना,मुंद्रा,नलिया,पठानकोट,पटियाला,पोरबंदर,राजकोट(हीरासर), सरसावा,शिमला,श्रीनगर,थोइस, उत्तरलाई की हवाई सेवा अब शुरू हो गई है।कॉर्पोरेट संचार निदेशालय, एएआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी उड़ान की स्थिति और शेड्यूल की नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित एयरलाइंस से सीधे संपर्क करें। इसके अलावा, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे नियमित अपडेट्स के लिए एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा केंद्रों पर नजर रखें, ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया है कि देश के 32 हवाई अड्डों पर नागरिक विमान परिचालन तत्काल प्रभाव से फिर से शुरू कर दिया गया है।
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सीजफायर के बाद भारतीय वायुसेना (IAF) ने रविवार को एक अहम बयान जारी करते हुए बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी भी क्रियान्वयन में है। वायुसेना के अनुसार, इस अभियान के तहत निर्धारित सभी लक्ष्यों को बेहद सटीकता और पूर्ण जिम्मेदारी के साथ पूरा कर लिया गया है। वायुसेना ने यह भी स्पष्ट किया कि यह ऑपरेशन पूरी रणनीतिक सोच और देशहित को ध्यान में रखते हुए संचालित किया गया। भारतीय वायुसेना ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचने की अपील की है। साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।
नई दिल्ली: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और संबद्ध विमानन प्राधिकरणों ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए उत्तरी और पश्चिमी भारत के 32 हवाई अड्डों पर सभी प्रकार की नागरिक उड़ान संचालन को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। यह बंदी 9 मई 2025 से लेकर 14 मई 2025 तक प्रभावी रहेगी, जिसकी समयावधि 15 मई 2025 को 0529 बजे (भारतीय मानक समय - आईएसटी) समाप्त होगी। यह निर्णय परिचालन संबंधी कारणों से लिया गया है। इस अस्थायी बंदी से निम्नलिखित 32 हवाई अड्डे प्रभावित होंगे: आदमपुर,अम्बाला,अमृतसर,अवंतीपुर, बठिंडा, भुज, बीकानेर,चंडीगढ़, हलवारा, हिंडन,जैसलमेर,जम्मू,जामनगर,जोधपुर,कांडला,कांगड़ा (गग्गल),केशोद,किशनगढ़, कुल्लूमनाली(भुंतर),लेह,लुधियाना,मुंद्रा,नलिया,पठानकोट,पटियाला,पोरबंदर,राजकोट(हीरासर), सरसावा,शिमला,श्रीनगर,थोइस, उत्तरलाई की हवाई सेवा बंद रहेगी। इस अवधि के दौरान, इन सभी सूचीबद्ध हवाई अड्डों पर किसी भी प्रकार की नागरिक उड़ान गतिविधि (यात्री उड़ानें, कार्गो उड़ानें आदि) संचालित नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने दिल्ली और मुंबई उड़ान सूचना क्षेत्रों (एफआईआर) के भीतर 25 हवाई यातायात सेवा (एटीएस) मार्गों के अस्थायी रूप से बंद रहने की अवधि को भी बढ़ा दिया है। यह बंदी 14 मई 2025 को 2359 यूटीसी (Coordinated Universal Time) तक लागू रहेगी, जो 15 मई 2025 को 0529 आईएसटी के समतुल्य है। इसका अर्थ है कि इस अवधि तक ये 25 विशिष्ट हवाई मार्ग जमीनी स्तर से लेकर असीमित ऊंचाई तक सभी विमानों के लिए अनुपलब्ध रहेंगे। यह विस्तार नोटम जी0555/25 के तहत किया गया है, जो पहले जारी किए गए नोटम जी0525/25 की जगह लेता है। एएआई ने सभी एयरलाइंस और फ्लाइट ऑपरेटरों को सलाह दी है कि वे वर्तमान हवाई यातायात परामर्श को ध्यान में रखते हुए अपनी उड़ानों के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाएं। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो और हवाई यात्रा सुरक्षित बनी रहे। इस अस्थायी बंदी का प्रबंधन संबंधित हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) इकाइयों के समन्वय में किया जा रहा है।


















































