भवन निर्माण करने वाला कारीगर सही मायने में एक कुशल ईंजिनियर : विनय धीमान
जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा जोखिम प्रतिरोधी भवन निर्माण करने के लिए राजमिस्त्री, बढई और बारवाईंडरों को प्रशिक्षित करने के लिए जिला परिषद भवन में तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ एडीएम विनय धीमान ने किया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि जिला बिलासपुर भूकम्प की दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील क्षेत्र है तथा यह क्षेत्र जोन 4 व 5 में आता है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण कार्य इस प्रकार से होना चाहिए कि भूकम्प के आने पर किसी भी प्रकार की जानमाल को हानि न पंहुचे और भवन भी सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि भूकम्प या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा का कोई भी समय नहीं होता यह किसी भी समय आ सकती है। उन्होंने कहा कि इसे रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता के कारण इससे होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होने कहा कि भवन निर्माण करने वाला कारीगर सही मायने में एक कुशल इंजीनियर है। लेकिन समय के साथ-साथ भवन निर्माण में कुछ नई-नई तकनीकियों की जानकारियां होना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के लिए नई-नई तकनीकियों की जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है और इन कार्यशालाओं में विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा राजमिस्त्री, बढई और बारवाईंडरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे भवन निर्माण करवाने वाले मालिकों को भी भूकम्प रोधी भवन निर्माण करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि भूकम्प रोधी मकान बनाने के लिए केवल 5 प्रतिशत लागत बढती है। इसलिए जब भी भवन निर्माण करवाएं तो भवन निर्माण करवाने वाले को आवश्य भूकम्प रोधी निर्माण कार्य की जानकारी दें ताकि आने वाले समय में पूर्ण रूप से सुरक्षित भवन का निर्माण किया जा सके। इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू राजकीय इंजीनियरिंग काॅलेज सुन्दरनगर से प्रोफेसर डा. एसपी. गुलेरिया ने खतरों की गम्भीरता और इमारतों पर भूकम्प के होने वाले प्रभाव तथा क्षेत्र में आवास निर्माण कार्य में कारीगरों का योगदान और भूमिका के बारे, जवाहरलाल नेहरू राजकीय इंजीनियरिंग काॅलेज सुन्दरनगर से सहायक प्रो. कपिल देव ने भवन निर्माण में उपयुक्त होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच तथा जोखिम प्रतिरोधी निर्माण के सिद्धांतों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
