पालमपुर : भवारना व पंचरुखी विकास खंडों में प्राकृतिक खेती पर लगाया जागरूकता शिविर
अब पूरे प्रदेश में सफलता पूर्वक अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना
प्रतिमा राणा। पालमपुर
पूरे प्रदेश के किसान अब प्राकृतिक खेती की और अग्रसर हो रहे हैं। 2018 से प्राकृतिक खेती को प्रदेश में बढ़ावा देने के लिए कई सफल प्रयास किए गए हैं, जिसमें छोटे किसान से लेकर बड़े दर्जे के किसानों को जागरूक किया गया। इसी संदर्भ में सभी ग्राम प्रधानों को प्राकृतिक खेती में जागरुक करने के लिए ग्राम प्रधान जागरुकता शिविर विकास खंड भवारना बीडीओ सभागार व पंचरूखी में ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें भवारना विकास खंड के 39 प्रधानों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया और प्राकृतिक खेती के गुर समझे और साथ में ही पंचरुखी विकास खंड के 29 प्रधानों ने ऑनलाइन माध्यम से इस प्रशिक्षण शिविर से भाग लिया। जागरूकता शिविर की शुरुआत परियोजन निदेशक आत्मा कांगड़ा डॉ. शशि पल अत्री ने की उन्होंने बताया की किस तरह केमिकल खेती से हमारी धरती, वायु, पर्यावरण दूषित हो रही है और किस तरह हमारी धरती इस प्रकृति में कार्य करती है और हम किस तरह इसको दूषित करने में लगे है। उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता के साथ साथ प्राकृतिक खेती के स्तंभ जैसे सह फसल, अच्छाधन, केंचूए की विशेषताएं बताई और ग्राम प्रधान को इस खेती से जुड़ने की प्रेरणा दी और शुरवाती समय के लिए थोड़े से ही भूमि को प्राकृतिक खेती में लाने का आग्रह किया।
इसके बाद आत्मा कृषि विभाग अधिकारियों ने इस शिविर को आगे बढ़ाया और ग्राम प्रधानों को प्राकृतिक खेती के अन्य गुर बताए, जिसमें देसी गाय की पहचान, केंचुए की मिट्टी में गतिविधि और प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले घटकों के बारे में बताया। इसमें विकास खंड से भवारना प्राकृतिक खेती ट्रेनर फार्मर अश्वनी कुमार ने घटक बना कर ग्राम प्रधानों को प्रैक्टिकल डेमो दिखाया। अंत में परियोजना निदेशक आत्मा डॉ. अत्री ने सभी ग्राम प्रधानों से आग्रह किया गया की वह अपनी अपनी पंचायत में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना का प्रचार करे और अपनी पंचायत के किसानों को जागरूक करें और कम से कम अपनी पंचायत से एक गांव को प्राकृतिक खेती में परिवर्तित करें व मॉडल फार्म स्थापित करने मे सहायता करें। प्राकृतिक खेती पर ग्राम प्रधानों का जागरूकता शिविर प्रत्येक विकास खंडों में 20 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा और डॉ. अत्री ने जिला के सभी ग्राम प्रधानों से आग्रह किया कि इन शिविरों में ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेने कृपा करें।
