देहरा: देहरा:बनूड़ी गौशाला में भागवत् कथा के पांचवे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
बनूड़ी गौशाला में चल रहे सामूहिक श्रीमद्भागवत् ज्ञानकथा के पांचवे दिन कथावाचक डॉ.अभिषेक शर्मा ने कहा कि मनुष्य को बुरे कर्म करने से बचना चाहिए क्योंकि बुरे कर्मों के फलस्वरूप नरक प्राप्ति होती है जिसमें जीव को अनेक प्रकार की यातनाएं मिलती है, उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सभी गौशाला में गायों के बीच बैठकर श्रीमद्भागवत् पुराण की कथा का श्रवण कर रहे हैं जो की हजार गुणा सौभाग्य को देने वाला है। इस अवसर पर उन्होंने प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रत्येक प्राणी में भगवान का वास होता है, अतः सभी प्राणियों से प्रेम करना चाहिए। इसी के साथ भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत् पुराण का दशमस्कन्ध भगवान के चरित्रों से भरा पड़ा है, जिसका श्रवण सभी श्रोताओं को आनन्द प्रदान करता है। दूर दराज से पधारे सभी श्रद्धालुओं ने दस किलो माखन का भगवान को भोग लगाया व भगवान के जन्मोत्सव को हर्ष एवं आनन्द से मनाया। ध्यातव्य है कि कथा के छठे दिन गौशाला में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को स्थापित किया जाऐगा तथा भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी के मांगलिक विवाह के उत्सव का आयोजन किया जाऐगा।
बनूड़ी गौशाला में चल रहे सामूहिक श्रीमद्भागवत् ज्ञानकथा के पांचवे दिन कथावाचक डॉ.अभिषेक शर्मा ने कहा कि मनुष्य को बुरे कर्म करने से बचना चाहिए क्योंकि बुरे कर्मों के फलस्वरूप नरक प्राप्ति होती है जिसमें जीव को अनेक प्रकार की यातनाएं मिलती है, उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि हम सभी गौशाला में गायों के बीच बैठकर श्रीमद्भागवत् पुराण की कथा का श्रवण कर रहे हैं जो की हजार गुणा सौभाग्य को देने वाला है। इस अवसर पर उन्होंने प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि प्रत्येक प्राणी में भगवान का वास होता है, अतः सभी प्राणियों से प्रेम करना चाहिए। इसी के साथ भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत् पुराण का दशमस्कन्ध भगवान के चरित्रों से भरा पड़ा है, जिसका श्रवण सभी श्रोताओं को आनन्द प्रदान करता है। दूर दराज से पधारे सभी श्रद्धालुओं ने दस किलो माखन का भगवान को भोग लगाया व भगवान के जन्मोत्सव को हर्ष एवं आनन्द से मनाया। ध्यातव्य है कि कथा के छठे दिन गौशाला में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को स्थापित किया जाऐगा तथा भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मणी के मांगलिक विवाह के उत्सव का आयोजन किया जाऐगा।
