देहरा : प्रोबेशन पीरियड के चलते पे कमीशन से हो रहा नुकसान: जेबीटी अध्यापक
17 वर्षों तक अस्थाई तौर पर सेवाएं देने के उपरांत प्राथमिक सहायक अध्यापकों से नियमित हुए जेबीटी अध्यापकों का कहना है कि पे -रिवीजन नियम 2022 के चलते वित्त विभाग द्वारा सुझाए गए तीनों विकल्पों से इन अध्यापकों का वेतनमान बढ़ने की बजाय ₹3000 तक कम हो रहा है । इनका वेतनमान कम होने की वजह हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इन पर भी 2 साल के प्रोबेशन की शर्त लगाना है। यह वेतन विसंगति केवल हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों के लिए ही उभर कर सामने आ रही है क्योंकि पंजाब में कर्मचारियों के लिए प्रोबेशन जैसी व्यवस्था नहीं होती । जेबीटी अध्यापकों सुरेंद्र ठाकुर, अक्षय कुमार, प्रितपाल चौहान, जगदेव जसरोटिया, मुल्खराज शर्मा, प्रदीप कुमार, पंकज कुमार, योगेश, सुरजीत, विनोद, मनोहर लाल, रमेश कुमार, यशपाल, नरेश कुमार का कहना है कि पंजाब में 2012 के पे रिवीजन के बाद 1 जनवरी 2016 को जेबीटी अध्यापकों का मूल वेतन 37000 से ज्यादा है जबकि हिमाचल प्रदेश में इसी तिथि को जेबीटी अध्यापकों का मूल वेतन 29700 रुपए है, जिस कारण जेबीटी अध्यापकों का मूल वेतन ही हिमाचल प्रदेश में पंजाब से 7000 रुपए कम है। इस वजह से पंजाब और हिमाचल के प्राथमिक अध्यापकों में 12000 से 13000 तक वेतन में अंतर आ रहा है। जिसका खामियाजा प्रोबेशन पर सेवाएं दे रहे इन अध्यापकों को सबसे ज्यादा भुगतना पड़ रहा है। इन अध्यापकों का कहना है कि जब हिमाचल प्रदेश पंजाब पे कमीशन के अनुरूप अध्यापकों का वेतन निर्धारित करता है तो वेतन में इतना अंतर किसलिए आ रहा है क्योंकि जेबीटी अध्यापकों को प्रदेश में आज भी वर्ष 2009 के पे रिविजन नियमों पर वेतनमान मिल रहा है। विगत में इन अध्यापकों में लगभग 17 वर्षों तक अस्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक विद्यालयों में दी है परंतु जहां पे रविजिन से नवनियुक्त अध्यापकों को फायदा होता है लेकिन प्रोबेशन पर होने के कारण वित्त विभाग द्वारा सुझाये गए सभी विकल्पों से इन अध्यापकों को उल्टा नुकसान हो रहा है। इन अध्यापकों का कहना है कि पंजाब पे रविजिन 2021 में 20 जुलाई 2020 के बाद नियमित नियुक्त हुए अध्यापकों को केंद्र का वेतनमान देने का विकल्प भी दिया गया है जबकि हिमाचल प्रदेश में ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है और 15 प्रतिशत वाला विकल्प भी इन पर लागू नहीं होता। इन अध्यापकों ने प्रदेश सरकार और वित्त विभाग से इनके लिए भी पंजाब की तर्ज पर प्रोबेशन की शर्त को खत्म कर नियुक्ति के समय से 2.25 का विकल्प दिए जाने की बात कही है जिससे इन अध्यापकों को भी नए वेतनमान का फायदा मिल सके। अगर प्रदेश सरकार और वित्त विभाग इन अध्यापकों के लिए शीघ्र ऐसी अधिसूचना जारी नहीं करता तो एक प्रदेश व्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करके सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिये बाध्य होना पड़ेगा ।
