धर्मशाला : केसीसी बैंक रिटायर्ड एम्प्लॉईज़ संगठन ने खोला बैंक के खिलाफ मोर्चा, लगाए कई गंभीर आरोप
-- 3 साल से लंबित मांगों को पूरा करने के बारे दिया नोटिस
-- 22 जून को जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को देंगे ज्ञापन
जैसे जैसे प्रदेश में चुनाव नजदीक आ रहे है वैसे वैसे कई संगठन अपनी मांगों को लेकर आगे आ रहे है। इसी कड़ी में शनिवार को केसीसी बैंक रिटायर्ड एम्प्लॉईज़ संगठन द्वारा अपनी 3 वर्षों से लंबित मांगों के बारे में उपायुक्त कांगड़ा, एसपी कांगड़ा, बैंक के अध्यक्ष, बैंक के प्रबंध निदेशक को 15 दिनों का नोटिस दिया। यह नोटिस संगठन के अध्यक्ष सुमेर चंद राणा, महासचिव संतोष गोयल व् अतिरिक्त महासचिव अश्वनी दीक्षित की अध्यक्षता में दिया गया। केसीसी बैंक रिटायर्ड एम्प्लॉईज़ संगठन के तीनों नेताओं ने प्रेस को एक सयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि बैंक मैनेजमेंट ने क़ानूनी रूप से बनाए गए पेंशन ट्रस्ट की अपने कुप्रबंधन के कारण समय पर समीक्षा नहीं की व् 1 अप्रैल 2010 को बिना कारण बताए गैर क़ानूनी ढंग से कर्मचारियों को मासिक अंशदान बंद कर दिया। 1 अप्रैल 2010 के बाद सेवानिवृत हुए कर्मचारियों को 31 मार्च 2015 तक कोई पेंशन नहीं दी गई। इसके बाद बैंक में एक प्राइवेट पार्टीसिपेटी पेंशन पॉलिसी को लागु कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने 22 वर्षों तक ओल्ड पेंशन में कंट्रीब्यूशन दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत कर्मचारियों को बैंक के सेवारत कर्मचारियों के समान मेडिकल सुविधा नहीं दी जा रही है। हिमाचल प्रदेश की सहकारी सभाओं के पंजीयक ने बैंक के एक पूर्व प्रबंध निर्देशक को गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया है, परन्तु इनके खिलाफ आगे कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
संगठन के तीनो नेताओं ने कहा कि बैंक के एक और पूर्व प्रबंद निदेशक ने उस समय के नॉमिनेटेड बार्ड ऑफ़ डायरेक्टर के साथ मिल कर षड्यंत्रपूर्वक अपनी शक्तियों का दुरुपयुयग करते हुए बैंक के करोड़ों रूपए का ऋण दे दिया जिसके लिए बैंक के अधिकारियों ने असहमति जताई थी। यही नहीं नाबार्ड के दिशा निर्देशों का भी सरे आम उलंघन किया गया। उन्होंने कहा कि विधित रहे, बैंक प्रबंधक अपनी वार्षिक लेखा बंदी के समय बैंक के रिसेर्वे फण्ड से होने वाली आय को अपने लाभ हानि में सम्मिलित करते है, इसके उपर आयकर देते है व् रिज़र्व फण्ड की वृद्धि को रोकते है तथा सेवा निवृत कर्मचारियों के हक देने में आनाकानी करते है।
अब संगठन ने फैसला किया है कि 22 जून 2022 को 12:15 मिनट पर दोपहर अपने परिवार के सदस्यों सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए एक जुलुस की शकल में जन जन को बताते हुए जिलाधीश कार्यालय जायेंगे।
