कांगड़ा : सरकार की अनदेखी के चलते कांगड़ा में 22 वर्षाें में भी नहीं बन पाया स्कूल भवन-भंडारी
बीजेपी राज में सरकारी स्कूलों के बच्चे फीस चुकाकर ले रहे कम्प्यूटर शिक्षण
जयराम सरकार के राज में कहीं स्कूलों में छात्र नहीं हैं, तो कहीं जर्जर हालत में स्कूल
मनाेज कुमार। कांगड़ा
हिमाचल प्रदेश उत्तर शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार जयराम सरकार आम आदमी पार्टी के निशाने पर है। कांगड़ा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पार्टी हिमाचल आप प्रदेश प्रवक्ता कल्याण भंडारी ने जयराम सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा जयराम सरकार ने हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का बंटाधार किया है। हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था इस तरह खराब हो चुकी है कि आज प्रारंभिक शिक्षा में 3300 के करीब जेबीटी टीचर के पद खाली हैं, जबकि 259 हेड टीचर और 53 सेंट्रल हेड टीचर के पद खाली पड़े हैं, जब प्राइमरी स्कूलों में सरकारी शिक्षकों के पद ऐसे खाली रहेंगे, तो बच्चों का भविष्य कैसे? बीजेपी के राज में शिक्षा व्यवस्था इतनी खराब है कि कही तो स्कूलों में शिक्षक नहीं, तो कहीं स्कूल भवन की इमारत जर्जर स्थिति में है।
कल्याण भंडारी ने कांगड़ा के दौलतपुर स्कूल का जिक्र करते हुए बताया कि 1999 में तत्कालीन कृषि मंत्री चौधरी विद्यासागर ने स्कूल भवन की नींव रखी थी, जो 5-6 वर्षाें बाद शुरू हुआ और 2010 में ही निर्माण कार्य को पूरा किया गया, लेकिन पैसे के अभाव और सरकार की अनदेखी के चलते आज वर्ष 2022 तक भी स्कूल भवन नहीं बन पाया है। इसी तरह कांगड़ा के दूसरे स्कूल रानीताल में भी स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि 2015 में शुरू हुए भवन का निर्माण कार्य अब तब भी पूरा नहीं हुआ।
छात्र फीस चुकाकर ले रहे कम्प्यूटर शिक्षण
उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और मॉडल शिक्षा देने के दावे करने वाले सरकार की पोल तब खुलती है, जब सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा ग्रहण करने के लिए बच्चों से ही फीस ली जा रही है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने 1350 कंप्यूटर शिक्षक चंडीगढ़ की कंपनी नॉयलेट से हायर किए हैं, जिनकी पगार बच्चों से 110 रुपए प्रति माह ली जा रही है। इसके अलावा 250 लेक्चरर इंफॉर्मेशन प्रैक्टिस पर लगा रखे हैं। कल्याण भंडारी ने जयराम सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि साल 2018- 19 में वर्दी वितरण योजना के तहत 8 से 9 लाख बच्चों को अभी तक वर्दी नहीं मिल पाई है, जिस पर करीब 90 से 100 करोड़ रुपए खर्च किया जाता है, लेकिन सरकार बताएं कि यह पैसा कहां खर्च किया गया है। इसके अलावा साढ़े 4 वर्षाें से प्रदेश में जयराम सरकार ने बच्चों को मिलने वाले लैपटॉप भी नहीं दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश के स्कूलों का हाल इतना बुरा है कि ना स्कूलों में अब बच्चे पढ़ने आ रहे हैं, न ही अब अभिभावक सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने को तैयार हैं। हिमाचल में बदतर हो चुकी शिक्षा व्यवस्था का सुधार करने के लिए दिल्ली के डिप्टी सीएम व शिक्षा क्रांति के जनक मनीष सिसोदिया कल हिमाचल दौरे पर आ रहे हैं। जहां वो शिक्षा व्यवस्था को लेकर जनता से संवाद करेंगे। जिसमें बच्चे और अभिभावक सीधे उनसे मन की बात कर सकेंगे और यही संवाद हिमाचल में आने वाले समय में आम आदमी पार्टी का रोडमैप तैयार करेगा कि किस तरह से हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था मैं सुधार होगा।
