कांगड़ा : घर में देवी स्वरूप कन्या का जन्म हो तो हमें भी निराश नहीं, अपितु प्रसन्न होना चाहिए-भारती
मनोज कुमार। कांगड़ा
नगर परिषद मैदान कांगड़ा में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्रीमद् देवी भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। इसके षष्ठम दिवस में कथा व्यास साध्वी त्रिपदा भारती ने मां पार्वती के जन्म की कथा को संगत के समुख बड़े रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा जब जब धरती पर पाप अधर्म अत्याचार बढ़ता है, तो तब तब वो शक्ति इस धरा धाम पर अवतरित होती है। और धर्म की पुनः स्थापना करती है। मां पार्वती जी के जन्म पर राजा हिमवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं और एक बहुत बड़े उत्सव का आयोजन करते हैं। ये कथा हमे प्रेरणा देती है कि जब किसी घर में देवी स्वरूप कन्या का जन्म हो तो हमें निराश नहीं, अपितु प्रसन्न होना चाहिए। वास्तव में पुत्र और पुत्री में कोई भेद नहीं है। इसके अतिरिक्त साध्वी ने पर्यावरण प्रदूषण की समस्या को उठाते हुए मानव को जागृत करते हुए कहा यह प्रकृति हमारे जीवन का आधार है।
इसका दोहन करके हम अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। ईश्वर ने हमे जीवन जीने के लिए ये हवा पानी फल अनाज इत्यादि दिए हैं। अगर हम लालच के वशीभूत हो कर इन प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे जीवन पर संकट के बादल छा जाएंगे। इसीलिए हमे अपने राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हुए पौधारोपण अवश्य करना चाहिए। इसके साथ साथ जितना हो सके पानी का सद्पयोग करना चाहिए, उसे यूं ही व्यर्थ नही बहाना चाहिए। इसके साथ साथ साध्वी ने बताया की आज सर्वश्री आशुतोष महाराज न केवल संरक्षण परिकल्प के अंतर्गत वातावरण को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जनमानस को जागृत कर रहे हैं। अपितु गौवंश के संरक्षण व संवर्ध के लिए भी संस्थान कटि वध है। साध्वी ने कहा कि अगर हम श्रेष्ठ भारत का निर्माण चाहते हैं, तो हमे अपनी संस्कृति के साथ जुड़ना होगा और हमारी संस्कृति अध्यात्म प्रदान संस्कृति है।
अध्यात्म से अभिप्राय उस ईश्वर का साक्षातकार करना है, जो एक पूर्ण गुरु के बिना असंभव है। दीप प्रज्वलन की रस्म अशोक (सह प्रांत कार्यवाह हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ), सरवीन चौधरी (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री हिमाचल प्रदेश), पवन काजल (विधायक कांगड़ा), विशाल नहरीया (विधायक धर्मशाला) ने किया। इसके अतरिक्त कथा में सुमधुर भजनों का गायन किया व कथा का समापन मा की मंगल आरती के साथ किया गया।
