ज्वालामुखी : पुलिस पेपर लीक मामले की हो उच्चस्तरीय जांच-संजय रत्न
विनायक ठाकुर। ज्वालामुखी
पुलिस लिखित परीक्षा रद्द होने के बाद जहां एक ओर सरकार की नाकामी फिर उजागर हुई है। वहीं, दूसरी ओर प्रदेश के युवा बेरोजगारों से क्रूर मजाक हुआ है। यह बात प्रदेश कांग्रेस वरिष्ठ प्रवक्ता एवं ज्वालामुखी के पूर्व विधायक संजय रत्न ने यहां जारी प्रेस बयान में कही है। उन्होंने कहा कि सरकार और सरकारी सिस्टम की इस नाकामी के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि सरकार बेरोजगारों को लेकर गंभीर ही नहीं है। 2019 की पुलिस भर्ती में भी इसी तरह की नाकामी देखने में आई थी, जिसको लेकर हजारों परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। इस बार पुलिस की भर्ती में प्रश्न पत्र लीक होने की चर्चाओं के बीच भर्ती का प्रिंसिपल नेचुरल जस्टिस ही अपने मतलब व मकसद से भटक गया है।
सरकार की नाकामी में पुलिस तंत्र का नॉन प्रोफेशनल रवैया भी सामने आया है, जो कि सिस्टम की खामियों व नाकामियों को उजागर कर रहा है। संजय रत्न ने कहा कि पुलिस भर्ती से संबंधित अर्की में सोशल मीडिया पर चैट लीक होने की चर्चाओं ने सरकार और सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया है, जिसको देखकर लग रहा है कि या तो पुलिस तंत्र जानकर इस तरह के कारनामों को अंजाम दे रहा है या तो सरकार की ढीली पकड़ के बीच पुलिस तंत्र भर्ती प्रक्रिया को होने ही नहीं देना चाहता है। संजय रत्न ने कहा कि लाखों लोग कोविड-19 के संकट के बाद बेरोजगार हुए हैं, जबकि दूसरी ओर शिक्षित बेरोजगारों की फौज का आंकड़ा 11 लाख से ज्यादा हो चुका है। ऐसे में बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए बीजेपी सरकार पूरी तरह फेल और फ्लॉप रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार और सिस्टम अगर 1300 पुलिस जवानों की इस भर्ती में खुद को नाकाम पा रही है, तो पुलिस भर्ती का टेस्ट किसी प्रोफेशनल एजेंसी से करवाया जाए, ताकि बार-बार बेरोजगारों को परेशानी का सामना न करना पड़े। रत्न ने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक कांगड़ा व पंचकुला हरियाणा में इस पुलिस भर्ती के प्रश्न पत्र लीक होने की चर्चाएं हैं, जिस पर भी जांच होनी जरुरी है। संजय रत्न ने कहा कि परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से करवाना सरकार की जिम्मेदारी बनती है। वहीं उन्हाेंने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस पेपर लीक में जो भी आरोपी हैं, उन्हें सख्त से सख्त से सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसा फिर कभी न हो।
