हिमाचल: पंचायत चुनाव को लेकर इलेक्शन कमीशन की अहम बैठक आज
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर स्टेट इलेक्शन कमीशन आज एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहा है। यह बैठक हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में बुलाई गई है। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) केके पंत, प्रधान सचिव शहरी विकास देवेश कुमार और सचिव पंचायती राज सी. पालरासू को आमंत्रित किया गया है। बैठक में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करने और वोटर लिस्ट तैयार करने को लेकर विस्तार से चर्चा होगी। इस संबंध में स्टेट इलेक्शन कमीशन को हाईकोर्ट में कम्प्लाइंस रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी है।
दरअसल, हिमाचल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पंचायत चुनाव 30 अप्रैल से पहले करवाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इलेक्शन कमीशन और राज्य सरकार को आपसी समन्वय के साथ चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं। राज्य की कुल 3577 पंचायतों में से 3548 पंचायतों की वोटर लिस्ट पहले ही तैयार की जा चुकी है। यदि इनमें किसी प्रकार का संशोधन आवश्यक हुआ, तो उसे लेकर भी आज की बैठक में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इसी तरह, जिलों के उपायुक्तों द्वारा लगभग सभी पंचायतों का आरक्षण रोस्टर तैयार कर लिया गया है, जिसे अब अंतिम रूप दिया जाना है।
3548 पंचायतों में कुल 55 लाख 19 हजार 709 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें कांगड़ा जिला में सबसे अधिक 13 लाख 17 हजार 390 मतदाता हैं, जबकि लाहौल-स्पीति जिला में सबसे कम 25 हजार 602 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस बार मतदाताओं में 27 लाख 26 हजार 548 महिलाएं और 27 लाख 93 हजार 161 पुरुष शामिल हैं। वहीं 29 पंचायतों की वोटर लिस्ट अभी तैयार होना शेष है। बैठक में वोटर लिस्ट की प्रिंटिंग को लेकर भी निर्देश दिए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट के आदेशों के तहत राज्य सरकार को 28 फरवरी तक पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करना होगा, जबकि इलेक्शन कमीशन को वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देना है। बैठक में आयोग द्वारा सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, क्योंकि पूर्व में कुछ जिलों में उपायुक्तों द्वारा आयोग के आदेशों की अवहेलना की गई थी। हालांकि, अब हाईकोर्ट के आदेशों के चलते सभी अधिकारियों को आयोग के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
प्रदेश की 3577 पंचायतों और 72 नगर निकायों में चुनाव होने हैं। संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में पंचायत चुनाव का बिगुल बज सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश में मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 30 जनवरी को समाप्त हो रहा है। समय पर चुनाव न होने की स्थिति में नई पंचायतों के गठन तक पंचायतें प्रशासनिक व्यवस्था (एडमिनिस्ट्रेटर) के अधीन रहेंगी।
