कांगड़ा : हिमाचल के किसान प्राकृतिक खेती में कर सकते हैं देश का प्रतिनिधित्व -राज्यपाल
मनोज कुमार। कांगड़ा
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि हिमाचल के किसान प्राकृतिक खेती में देश का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती देश में व्यापक स्तर पर बढ़ रही है। लोगों में इसके प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है। राज्यपाल ने कहा कि यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि हिमाचल देश में प्राकृतिक खेती करने वाला अग्रणी राज्य बन कर उभरा है। अन्य राज्यों को भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के लगभग 1.68 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इस संख्या को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को कर्मयोगी की संज्ञा देते हुए कहा कि आज उन्हें प्राकृतिक खेती प्रणाली के बारे में युवा किसान उद्यमियों से बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 45 हजार एक भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती प्रणाली को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि इस दिशा में युवा किसान उद्यमी प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। भावी पीढ़ी की सुरक्षा के लिए इस प्रणाली को सभी किसानों द्वारा अपनाने की आवश्यकता है। प्राकृतिक खेती को लोगों के अनुभवों से ही आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे अन्य किसानों को भी इसे अपनाने की प्रेरणा मिले।
इससे पूर्व, प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक डा. राजेश्वर चंदेल ने राज्यपाल का स्वागत किया। इस वर्ष के मार्च तक राज्य में 12000 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया जाएगा। लगभग 20 हजार हेक्टेयर भूमि को इस पद्धति के तहत लाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अवगत करवाया कि इस पद्धति के तहत 3590 पंचायतों को लाया गया है और युवाओं को इस पद्धति से सीधे जोडऩे के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 62 युवाओं को छह माह से इस पद्धति को अपनाने वाले किसानों के साथ सीधे जोड़ा गया है। किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।
