कांगड़ा: केंद्र सरकार पर भड़के कल्याण भंडारी, बोले केंद्र को चुकाना होगा जल-जंगल-जमीन का मोल
आम आदमी पार्टी, हिमाचल प्रदेश इकाई केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की आर्थिक घेराबंदी किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा करती है। केंद्र सरकार ने 16वें वित्त आयोग में अनुमानित 49,000 करोड़ रुपए की राज्य को उसके जायज़ हक की मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान राशि को पूरी तरह समाप्त कर हिमाचल की पीठ में छुरा घोंपा है। यह न केवल संघीय ढांचे का अपमान है, बल्कि पहाड़ की जनता के अस्तित्व पर सीधा प्रहार है।
प्रेस के नाम जारी एक विज्ञप्ति में आम आदमी पार्टी के राज्य समन्वय समिति के सदस्य व कांगड़ा जिला के मीडिया प्रभारी कल्याण भंडारी ने भाजपा की केंद्र सरकार से सवाल किया है कि मैदानी राज्यों के लिए केंद्र की तिजोरी हमेशा खुली रहती है, लेकिन हिमाचल की बिजली, पानी और संसाधनों के बदले हमें आज भी ‘ठेंगा’ क्यों दिखाया जा रहा है? शानन विद्युत परियोजना और पंजाब पुनर्गठन के समय से चले आ रहे हमारे अधिकारों को भाजपा ने दिल्ली की सत्ता के अहंकार में रौंद दिया है। केंद्र सरकार ने हिमाचल की आर्थिक हजामत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वर्ष 2023 की आपदा में प्रदेश में भयंकर तबाही की नाममात्र आर्थिक राहत को दो साल बाद जारी किया। 2025 की पहले से ज्यादा प्रलयकारी आपदा से मिले जख्मों को भरने के लिए अब तक केंद्र सरकार रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है, जो कि आम जनमानस की समझ से परे है।
आम आदमी पार्टी सूबे की कांग्रेस सरकार को प्रशासनिक अक्षमता और लाचारी के चलते इस आर्थिक बदहाली का बराबर जिम्मेदार मानती है, जो कि कांग्रेस सरकार की दिशाहीनता भी है। भंडारी ने कहा कि आँचल फैलाने से राज्य नहीं चलते। सरकार एक तरफ खजाना खाली होने का रोना रोती है, और दूसरी तरफ फिजूलखर्ची के कूड़ेदान भरने में लगी है। आम आदमी पार्टी मांग करती है कि सरकार अपनी प्राथमिकताएं बदले और चादर देखकर पैर पसारना शुरू करे। जब तक प्रदेश के घाटे में चल रहे सफेद हाथी रूपी उपक्रम ताली बजाते रहेंगे, तब तक आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ता रहेगा। ऐसे में प्रदेश सरकार फिजूलखर्ची बंद कर आम जनमानस को राहत देने वाले आर्थिक मॉडल पर काम करे।
कल्याण भंडारी ने जहाँ राज्य सरकार के केंद्र सरकार के आर्थिक प्रहार के संबंध में कैबिनेट बैठक और एक दिवसीय विधानसभा सत्र आयोजित करने के कदम का स्वागत किया है, वहीं इस बाबत सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी हिमाचल की जनता को विश्वास दिलाती है कि हम पहाड़ के हक की लड़ाई लड़ेंगे। जल-जंगल-जमीन का मोल केंद्र को चुकाना ही होगा। पार्टी केंद्र सरकार से तत्काल रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट की कटौती वापस लेने तथा शानन प्रोजेक्ट और वाटर सेस जैसे मुद्दों पर हिमाचल को उसका वाजिब अदा करने की पुरज़ोर मांग करती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की अस्मिता से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
