राज्य स्तरीय अंडर-19 एथलेटिक्स में जिला मंडी के मनजीत राठौर ने 13.17 मीटर ट्रिपल जंप और 6.07 मीटर लॉन्ग जंप के साथ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा है और हिमाचल प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ एथलीट बने हैं। राठौर जिला मंडी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टिकरू से संबंध रखते हैं। उनका कहना है की पढ़ाई और खेल यदि साथ-साथ चलते हैं तो विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होता है और राष्ट्र के लिए एक आदर्श नागरिक तैयार होता है। इनके पिता कुलदीप कुमार और माता लता देवी ने कहा कि उन्हें अपने पुत्र पर गर्व है, जिसने अपने स्कूल और क्षेत्र का नाम रोशन किया। वहीं, स्कूल के प्रधानाचार्य और समस्त स्टाफ ने 26 दिसंबर से 30 दिसंबर तक महाराष्ट्र में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए राठौर को शुभकामनाएं दी हैं।
-विधानसभा सत्र में इन झूठी गारंटियों का जवाब नहीं दे पाई सरकार -कहा, सदन के अंदर और बाहर कांग्रेस को याद दिलाती रहेगी भाजपा नेता प्रतिपक्ष एवम पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि चुनावी गारंटियां प्रदेश की कांग्रेस सरकार के गले पड़ गई हैं। झूठी गारंटियां देने वाले इनके छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नेता तो घर बैठ गए हैं, लेकिन हिमाचल की जनता को वोट बैंक की खातिर धोखा देकर इन्होंने हजारों करोड़ के बोझ तले दबने को विवश कर दिया है। एक साल में जो सरकार 14 हजार करोड़ रुपए का ऋण ले चुकी है वो आगे पांच वर्ष कितना बोझ हिमाचल पर डालने जा रही है उसका अभी से अनुमान लगाया जा सकता है। भाजपा अब तक तक चुप नहीं बैठेगी जब तक ये सरकार अपनी दी इन गारंटियो को पूरा नहीं करती। भाजपा आगे भी सदन के अंदर और बाहर कांग्रेस को इसकी याद दिलाती रहेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार से इन झूठी गारंटियों का जवाब देते नहीं बन पा रहा था। पूरी सरकार सत्र में असहज दिखी। भाजपा विधायक दल और पार्टी ने तय किया था कि सरकार को इनकी चुनावों में दी गारंटियां विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह याद दिलाई जाए जो इन्होंने एक वर्ष पूर्व सत्ता में आने से पहले जनता को दी थी। एक वर्ष बीत गया लेकिन अभी भी कोई गारंटी धरातल पर नहीं उतरी है। सबसे बड़ा छल इन्होंने महिलाओं, बेरोजगारों और किसानों से किया है। सरकार की कमियों को इंगित करना विपक्ष का काम जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार की कमियों को इंगित करने का है, चाहे वह सरकार को पसंद आये या न आये लेकिन यह विपक्ष की लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बाकी राज्यों के मुकाबले हिमाचल प्रदेश में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था है वह बहुत स्वस्थ और बेहतर है। उन्होंने पक्ष तथा विपक्ष के सदस्यों का भी अपने क्षेत्र से संबंधित मुद्दों को इस सदन में संजीदगी से उठाने के लिए धन्यवाद किया और कहा कि सदन में विभिन्न विषयों पर बहुत ही सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच में नोकझोंक चलती रहती है लेकिन प्रदेशहित के सुझावों पर सरकार द्वारा अमल भी किया जाता है। उप राष्ट्रपति का उपहास संवैधानिक पदों का अपमान पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लोकसभा के बाहर संसद से निलंबित सांसदों द्वारा नुक्कड़ सभा में उप राष्ट्रपति के उपहास को संवैधानिक पदों का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि बेशर्मी की हद देखिए कांग्रेस पार्टी के सांसद राहुल गांधी इस घटना का स्वयं वीडियो बना रहे थे और हंसते हुए विपक्षी सांसदों को ऐसा करने के लिए उकसा रहे थे जो बेहद हैरानी की बात है।
-खाद्य आपूर्ति निगम ने प्रति पैकेट 4 रुपये बढ़ाए दाम हिमाचल प्रदेश के सरकारी राशन डिपुओं में चीनी के बाद अब सरसों का तेल भी महंगा हो गया है। सरकार ने प्रति पैकेट चार रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। खाद्य आपूर्ति निगम की ओर से बढ़ी हुई कीमतें इसी माह से लागू कर दी गई हैं। इससे प्रदेश के करीब 19 लाख उपभोक्ताओं को महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी। उपभोक्ताओं को बीते माह 110 रुपये सरसों का तेल दिया गया था। लेकिन, अब 114 रुपये प्रति पैकेट दिया जाएगा। सभी कार्ड धारकों के लिए एक ही दाम गौर रहे कि कांग्रेस सरकार ने कुछ माह पहले एपीएल, बीपीएल और एनएफएसए समेत सभी कार्ड धारकों को तेल के एक ही दाम तय कर दिए थे। जिसके बाद अब सभी को एक ही दरों पर तेल उपलब्ध होता है। अधिकारियों के अनुसार तेल के दाम टेंडर पर निर्धारित होते हैं। जो हर माह बढ़ते-घटते हैं। लेकिन बीते कई माह से इसके दाम 110 रुपये पर टिके हुए थे। जो अब सरकार की ओर से फिर बढ़ा दिए गए हैं। वहीं इससे पहले इसी माह सरकार ने चीनी के दाम भी 30 रुपये से बढ़ाकर 33 रुपये प्रतिकिलो कर दिए थे, जो अगले माह से मिलेगी। वहीं मलका की दाल में भी नौ रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। यह दाल पहले एपीएल परिवारों को पहले 64 रुपये प्रति पैकेट दिया जा रहा था, अब 73 रुपये मिल रहा है। साथ ही एनएफएसए व अन्य कार्ड धारकों को 54 रुपये बढाकर 63 रुपये कर दिया है। उधर, खाद्य आपूर्ति नियंत्रक नरेंद्र धीमान ने बताया कि राशन डिपुओं में आने वाले राशन और तेल के दाम ऑनलाइन अपडेट होते हैं। जिसका पता पीओएस मशीनों में ही लग पाता है।
मंडी जिले के सुदंरनगर के चरखड़ी में बुधवार देर रात एक कार अनियंत्रित होकर 300 फुट गहरी खाई में जा गिरी। खाई में गिरते ही कार में आग लग गई और कार पूरी तरह जल गई। कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान 33 वर्षीय खूबराम पुत्र टेकचंद गांव चरखड़ी उपमंडल सुदंरनगर के रूप में हुई है। वह प्रेसी से अपने घर चरखड़ी आ रहा था। चरखड़ी पहुंचने से लगभग एक किमी पहले ही उसकी कार हादसे का शिकार हो गई। मृतक घर का इकलौता चिराग था और अपने पीछे एक बेटा व बेटी छोड़ गया है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी सुदंरनगर भरत भूषण ने बताया कि शव को खाई से निकाल लिया गया है। पुलिस द्वारा घटना की जांच की जा रही है।
-राजभवन में राज्यपाल ने दिलाई मंत्री पद की शपथ हिमाचल प्रदेश को दो नए मंत्री मिल गए हैं। आज शाम राजभवन शिमला में बिलासपुर जिले के घुमारवीं से विधायक राजेश धर्माणी और कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर से यादविंदर गोमा सुक्खू कैबिनेट में शामिल हो गए। शाम करीब 4:45 बजे राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने दोनों मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। देर रात ही यह फैसला हुआ और आज शपथ हुई। शपथ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री सहित मंत्री व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। बता दें कि राजेश धर्माणी बिलासपुर जिले से कांग्रेस पार्टी के एकमात्र विधायक हैं। वे घुमारवीं विधानसभा से विधायक हैं। बिलासपुर को बीते एक साल से मंत्री पद का इंतजार था। वहीं, कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर से विधायक यादविंदर गोमा को भी मंत्री बनाया गया है। काफी समय से उनको मंत्री बनाए जाने की अटकलें लग रही थीं।
-मुख्य परियोजना निदेशक नागेश गुलेरिया ने किया शुभारंभ -बोले, पूरे प्रदेश में खोले जाएंगे ऐसे आउटलैट -जापान के श्रीलंका प्रतिनिधि नाकाजीमा व जाइका इंडिया प्रतिनिधि इनागाकी ने की सराहना - जापान व श्रीलंका में भी प्रोजेक्ट के हिमट्रेडिशन ब्रांड की गूंज जाइका वानिकी परियोजना ने जोगिंद्रनगर में आउटलैट खोल दिया है। मुख्य परियोजना निदेशक नागेश कुमार गुलेरिया ने यह आउटलैट जनता को समर्पित किया। उन्होंने यहां पूजा-अर्चना कर इस आउटलैट का शुभारंभ किया। शहर के बीचो-बीच यानी वन मंडल जोगिंद्रनगर परिसर में अब जाइका वानिकी से जुड़े स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित सभी तरह के उत्पादों की बिक्री होगी। टौर के पत्तल, पाइन नीडल से बने उत्पाद, बैग, आचार, कोदे का आटा, काला मटर, लाल चावल, किन्नौरी राजमाह, हिमाचली टोपी और शॉल समेत कई तरह के उत्पाद इस आउटलैट में उपलब्ध होंगे। जाइका वानिकी परियोजना के मुख्य परियोजना निदेशक नागेश कुमार गुलेरिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जाइका से जुड़े स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित सभी प्रकार के उत्पाद बाजार से बेहतरीन और अच्छी कीमत पर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी वन मंडल स्तर पर आउटलैट खोले जाएंगे। इस अवसर पर हिमाचल दौरे पर आई जाइका श्रीलंका में सेवाएं दे रही जेंडर एक्सपर्ट नाकाजीमा और जाइका इंडिया की प्रतिनिधि इनागाकी ने जाइका के ऐसे प्रयासों की सराहना की। नाकाजीमा और इनागाकी ने जाइका के हिमट्रेडिशन ब्रांड की भी तारीफ की। इस अवसर पर जाइका की प्रतिनिधि भी उपस्थित रही। दूरदराज क्षेत्रों में पहुंची नाकाजीमा व इनागाकी जाइका श्रीलंका में सेवाएं दे रही जापान की प्रतिनिधि एवं जेंडर एक्पर्ट नाकाजीमा और जाइका इंडिया की प्रतिनिधि इनागाकी जिला मंडी के दूरदराज क्षेत्रों में पहुंची। उन्होंने जाइका से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से सीधा संवाद किया। ग्राम वन विकास समिति जालपा के अंतर्गत दारट बगला में महिलाओं द्वारा हल्दी उत्पादन के प्रयासों की खूब सराहना की। उन्होंने ग्राम वन विकास समिति पंचजन द्वारा की जा रही मशरूम की खेती का मुआयना किया। नाकाजीमा और इनागाकी ने मंडी जिला के गुम्मा के समीप दूरदराज गांव जनवान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महिलाओं से सीधा संवाद किया। इस अवसर पर मुख्य परियोजना निदेशक नागेश कुमार गुलेरिया ने यहां के सभी स्वयं सहायता समूहों का हौंसला बढ़ाया और हर तरह के उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। जाइका की नर्सरी व पौधरोण पर फिदा हुई जापानी मंडी जिला के चौंतड़ा स्थित जाइका वानिकी परियोजना की नर्सरी और जालपा के जंगलों में हुए पौधरोपण को देख जापान की प्रतिनिधि काफी उत्साहित हुई। मुख्य परियोजना निदेशक नागेश कुमार गुलेरिया के नेतृत्व वाली टीम ने नर्सरी और पौधरोपण क्षेत्र का निरीक्षण किया। नागेश गुलेरिया ने जाइका की नर्सरियों में तैयार किए जा रहे सभी प्रजातियों के पौधों की जानकारी दी।
आपदा प्रबंधन को सलाम, महिलाओं को 1500 का इंतजार **पुरानी पेंशन बहाल कर सरकार ने निभाया बड़ा वादा ** सुखाश्रय योजना से सुक्खू सरकार ने जीता दिल ** सियासी संतुलन बनाने में असफल रही सरकार "...सत्ता परिवर्तन का जो सियासी रिवाज हिमाचल प्रदेश में 1990 से चला आ रहा था उसे जनता ने 2022 में भी बरकरार रखा। 8 दिसंबर 2022 को विधानसभा चुनाव के नतीजे आएं और कयासों के मुताबिक ही कांग्रेस सत्तासीन हुई। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के दो मुख्य कारण अगर देखे जाएँ, तो सम्भवतः पहला कारण रहा भाजपा का कमजोर चुनाव लड़ना। एक तिहाई सीटों पर भाजपा के बागी मैदान में थे और ये उसकी हार का बड़ा कारण बना। दोनों पार्टियों के वोट शेयर में अंतर एक प्रतिशत से भी कम रहा, जबकि निर्दलीयों के खाते में करीब दस प्रतिशत वोट गए। इनमें अधिकांश भाजपा के बागी थे। दूसरा कारण था, कांग्रेस की गारंटियां। कांग्रेस ने भाजपा से बेहतर चुनाव लड़ा और उसका गारंटी कार्ड चल गया। ये ही कारण है कि सिमटते कैडर के बावजूद कांग्रेस ने दमदार वापसी की। कांग्रेस के खाते में 40 सीटें आई, लेकिन भाजपा भी तमाम गलतियों के बावजूद 25 का आंकड़ा छू गई। यानी सरकार बेशक कांग्रेस ने बना ली हो लेकिन पहले दिन से उस पर परफॉरमेंस प्रेशर है। फिर तारीख आई 11 दिसंबर 2022, जगह थी हिमाचल की राजधानी शिमला का रिज मैदान, सर्दी का मौसम मगर तेज़ धूप और उस धूप में उबाल खाता हज़ारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह। अर्से बाद वीरभद्र सिंह की जगह कोई और कांग्रेसी चेहरा सीएम पद की शपथ ले रहा था। जो सुखविंदर सिंह सुक्खू सालों वीरभद्र सिंह के सामने एक किस्म से अपने सियासी रसूख को बचाये रखने की लड़ाई लड़ते रहे थे, वे अब उनके बाद मुख्यमंत्री बन चुके थे। पार्टी के 40 विधायक जीत कर आए थे और इन 40 विधायकों में से सबसे ज्यादा सुक्खू के पक्ष में थे। होली लॉज खेमे के विधायक प्रतिभा सिंह और मुकेश अग्निहोत्री के बीच बंटे हुए थे। ये ही सुक्खू के पक्ष में गया था। राजधानी कांग्रेसमय दिख रही थी, मैदान खचाखच भरा था और नारे लग रहे थे 'प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो, सुक्खू भाई जैसा हो। कांग्रेस में ये नए दौर की शुरुआत थी। शपथ ग्रहण मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व राजा वीरभद्र सिंह की तस्वीर भी रखी गई थी, उन्हें शपथ से पहले श्रद्धांजलि दी गई और फिर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने शपथ ली। धुआंधार लॉबिंग और मैराथन बैठकों के बाद सुक्खू मुख्यमंत्री तो बन गए थे लेकिन ये ताज काँटों भरा ताज है। सुक्खू सरकार के सामने पहले दिन से न सिर्फ परफॉर्म करने की चुनौती है बल्कि पार्टी के भीतर भी सामंजस्य बैठाना है। एक साल बीत गया है और कई मोर्चों पर सरकार हिट साबित हुई है, तो कई पैमानों पर अब सरकार का असल इम्तिहान होना है। " सुक्खू सरकार एक साल की हो गई है ...सत्ता पक्ष इसे 'सुख की सरकार' कह रहा है तो विरोधी 'दुख की सरकार', कांग्रेस उपलब्धियों की बुकलेट बाँट रही है तो भाजपा नाकामी के पर्चे। ये तो सियासत के रस्म-ओ-रिवाज है जो सत्ता पक्ष को भी निभाने है और विपक्ष को भी। बहरहाल एक साल की सुक्खू सरकार को लेकर भी सबका अपना-अपना विश्लेषण है। सरकार का कामकाज उसकी गारंटियों की कसौटी पर भी आँका जा रहा है, आपदा प्रबंधन पर भी और सरकार की जमीनी पकड़ भी इसका मापदंड है। कहीं शांता कुमार जैसे दिग्गज सरकार की तारीफ कर रहे है, तो कहीं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष ही सीएम को पत्र लिखकर वादे याद दिला रहे है। इस बीच सुक्खू सरकार जनता के बीच सुछवि गढ़ने के प्रयास में लगी है, तो भाजपा छवि बिगाड़ने का कोई मौका नहीं चूक रही। खेर, बनती बिगड़ती सियासी इक्वेशन अपनी जगह, लेकिन कामकाज की कसौटी पर आंके तो सुक्खू सरकार ने कई ऐसे काम किये है जो अपनी छाप छोड़ गए। पुरानी पेंशन बहाली का वादा भी सरकार ने पूरा किया और सुख आश्रय योजना से सरकार का मानवीय चेहरा भी दिखा। वहीँ आपदा में सुक्खू सरकार के कामकाज पर तो वर्ल्ड बैंक और नीति आयोग ने भी ताली बजाई। हालांकि, सरकार के लिए सब हरा हरा नहीं है, महिलाओं को 1500 रुपये देने की गारंटी भी अभी अधूरी है और सियासी संतुलन बनाने में भी सरकार असफल दिखती है। पुरानी पेंशन के अलावा भी कर्मचारियों के मसले है जो अनसुलझे है। युवा एक साल में ही सड़कों पर उतर आए थे, कोई रिजल्ट मांग रहा है तो कोई नौकरी। प्रयास तो जारी है मगर फिलहाल खाली खजाना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार के बड़े काम ... अनाथ बच्चे अब 'चिल्ड्रन ऑफ़ स्टेट' हिमाचल प्रदेश के सभी अनाथ बच्चे अब 'चिल्ड्रन ऑफ स्टेट' है। ये सुक्खू सरकार का वो फैसला है जिसने सबका दिल छुआ। अनाथ बच्चों का पालन पोषण, शिक्षा, आवास, विवाह आदि का खर्चा सरकार ने उठाने का निर्णय लिया है। सुक्खू सरकार की इस मानवीय पहल को चौतरफा तारीफ मिली है। सुख आश्रय योजना निसंदेह सुक्खू सरकार का वो काम है जो सदा याद रखा जायेगा। राज्य में अब तक 4000 अनाथ बच्चों को पात्रता प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं, जिससे अब वह मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना का लाभ उठा सकेंगे। इस योजना के तहत 27 वर्ष की आयु तक अनाथ बच्चे की देखभाल का ज़िम्मा राज्य सरकार का है। इसके साथ ही अनाथ बच्चों को क्लोथ अलाउंस व त्यौहार मनाने के लिए भत्ता प्रदान किया जा रहा है। उनकी उच्च शिक्षा, रहने का खर्च, 4000 रुपए पॉकेट मनी राज्य सरकार की ओर से प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार अनाथ बच्चों को नामी स्कूलों में दाख़िला दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने तथा घर बनाने के लिए 3 बिस्वा भूमि तथा 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। पुरानी पेंशन बहाल करके दिखाई वादे के मुताबिक सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाली का तोहफा दिया है। प्रदेश की ख़राब आर्थिक स्थिति के बावजूद सरकार ने कर्मचारियों से वादा निभाया है। प्रदेश सरकार द्वारा चौथी कैबिनेट की बैठक में ही पुरानी पेंशन बहाली की एसओपी को मंज़ूरी दे दी गई थी और 1 अप्रैल, 2023 से पुरानी पेंशन लागू कर दिया गया । चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा जनता को दी गई गारंटियों में से पुरानी पेंशन बहाली पहली गारंटी थी। प्रदेश की नई सरकार ने कर्मचारियों की पेंशन की सबसे बड़ी टेंशन को खत्म कर दिया। हिमाचल में करीब सवा लाख कर्मचारी इस समय एनपीएस के दायरे में आते थे जिन्हे इसका लाभ मिला । इस फैसले से प्रदेश सरकार पर सालाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया मगर सरकार अपने वादे से पीछे नहीं हटी। अब इसका सियासी लाभ कांग्रेस को होगा या नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन ये सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला है। ग्रीन हिमाचल मुहीम हरित राज्य प्रदेश सरकार ने राज्य को 31 मार्च, 2026 तक हरित ऊर्जा राज्य के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य के प्रत्येक जिले में दो-दो ग्राम पंचायतों को पायलट आधार पर हरित पंचायत के रूप में विकसित करने की रूपरेखा तैयार की है। इन पंचायतों में 500 किलोवाट से एक मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। हिमाचल प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत इन परियोजनाओं की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। सुक्खू सरकार ने 100 किलोवाट से लेकर एक मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना पर युवाओं को 40 प्रतिशत सब्सिडी देने की भी घोषणा की है। इन परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली की खरीद राज्य विद्युत बोर्ड करेगा। सरकार सार्वजनिक परिवहन को विद्युत परिवहन के रूप में विकसित करने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को सरकारी महकमों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है और इलेक्ट्रिक टैक्सी की खरीद पर सरकार सब्सिडी भी दे रही है। हिमाचल को ग्रीन राज्य बनाने में सुक्खू सरकार जुटी है, और ये सरकार की बेहतरीन पहल है। दशकों से लंबित इंतकाल के मामलों का निबटारा इंतकाल और तकसीम के दशकों पुराने मामलों को लेकर सुक्खू सरकार एक्शन मोड में है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को 24 जनवरी तक इंतकाल और तकसीम के मामलों को सुलझाने के निर्देश दिए हैं। इससे सालों से लंबित मामलों का निपटारा हो सकेगा। राजस्व लोक अदालतों का आयोजन कर सरकार हाज़ों मामले निबटा चुकी है। अब तक इंतकाल के लम्बित कुल 45 हजार 055 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। किलो के हिसाब से सेब, अगले सीजन से यूनिवर्सल कार्टन किलो के हिसाब से सेब बेचने का फैसला हो या अगले सीजन से यूनिवर्सल कार्टन लागू करने का निर्णय, सुक्खू सरकार ने सेब बागवानों के हितों को महफूस रखने की दिशा में इच्छाशक्ति भी दिखाई है और फैसले भी लिए है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी हर मसले पर एक्टिव दिखे है और उनकी कार्यशैली की असर साफ दिख रहा है। एचपीएमसी को लेकर भी सरकार ने बड़े बदलाव लाने की दिशा में काम शुरू किया है और उम्मीद है इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे। अब 40 साल तक ही लीज पर जमीन सुक्खू सरकार ने लीज पर जमीन लेने की अवधि को 99 वर्ष से घटाकर अब अधिकतम 40 साल कर दिया है। हालांकि पुरानी लीज की अवधि नहीं बदलेगी। उद्योग लगाने और अन्य विकास परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए अब 40 साल के लिए ही लीज पर जमीन का प्रावधान है। सरकार का कहना है कि अब धौलासिद्ध, लुहरी फेज-1 तथा सुन्नी जल विद्युत परियोजनाओं को 40 वर्ष के बाद हिमाचल प्रदेश को वापिस सौंपना होगा। वाईल्ड फ्लावर हॉल होटल को वापिस पाने के लिए राज्य सरकार कानूनी लड़ाई लड़ रही है। शानन प्रोजेक्ट को वापस लेने के लिए भी हिमाचल सरकार एक्शन मोड में दिखी है। आपदा प्रबंधन पर सुक्खू सरकार हिट... एक साल के कार्यकाल में सुक्खू सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी आपदा। आपदा में खुद सीएम सुक्खू दिन रात मैदान में डेट दिखे और हिमाचल सरकार ने बेहतरीन काम किया। वर्ल्ड बैंक और नीति आयोग ने भी सरकार के काम की तरफ की। सुक्खू सरकार 4500 करोड़ का बड़ा आपदा राहत पैकेज लेकर आई और मुआवजे की राशि में भारी वृद्धि कर पीड़ितों को राहत पहुँचाने का काम किया। राजनीति से इतर कई दूसरी विचारधारा के लोगों ने भी सरकार के कामकाज को सराहा। वहीँ केंद्र से मिलने वाली मदद को लेकर भी खूब सियासत हुई। भाजपा कहती है कि केंद्र से भरपूर मदद मिली और सीएम सुक्खू खुलकर कहते है कि अगर मदद मिली है तो भाजपा बताएं। इसमें कोई संशय नहीं है कि केंद्र ने हिमाचल को कोई विशेष आपदा राहत पैकेज नहीं दिया है। वहीँ प्रदेश की आर्थिक स्थीति भी खराब है। बावजूद इसके सुक्खू सरकार ने साहस भी दिखाया और बड़ा दिल भी। बहरहाल, सीमित संसाधनों के बीच सरकार के सामने अब चुनौती बड़ी है और सुक्खू सरकार का असल इम्तिहान अभी बाकी है। बढ़ता कर्ज सबसे बड़ी चुनौती .... हिमाचल प्रदेश पर 78,430 करोड़ रुपए कर्ज है। राज्य सरकार पर डीए और एरियर के रूप में करीब 12 हजार करोड़ रुपए के करीब देनदारियां हैं। यदि इसी रफ्तार से कर्ज लिया जाता रहा तो अगले साल हिमाचल पर कर्ज का बोझ एक लाख करोड़ रुपए को पार कर जाएगा। कर्ज को लेकर सियासत भी खूब हुई है। सुक्खू सरकार विधानसभा में श्वेत पत्र लेकर इसका ठीकरा पूर्व की जयराम सरकार पर फोड़ चुकी है तो भाजपा का कहना है कि सुक्खू सरकार प्रतिमाह एक हज़ार करोड़ रुपये का कर्ज ले रही है। बहरहाल, प्रदेश की आर्थिक हालत पतली है, केंद्र ऋण लेने की सीमा कम कर चुका है, ओपीएस का बोझ भी सरकार पर अभी पड़ना है और आपदा ने भी कमर तोड़ दी है। ऐसे में सुक्खू सरकार के लिए आने वाला समय बेहद कठिन होने वाला है। राजस्व बढ़ाने के हुए प्रयास, पर इतना काफी नहीं .... इस वर्ष हिमाचल प्रदेश सरकार के राजस्व में 1100 करोड़ रुपये की वृद्धि का अनुमान है। वर्तमान राज्य सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। शराब के ठेकों की नीलामी से राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। इसके अलावा कई छोटे छोटे फैसलों से सरकार को राजस्व बढ़ोतरी हो रही है, हालंकि ये नाकाफी है। फिर भी सरकार के प्रयास जरूर दिखे है। हिमाचल सरकार ने प्रदेश की आर्थिकी को पटरी पर लाने के लिए ऊर्जा उत्पादकों पर वॉटर सेस लगाने का निर्णय लिया था। वॉटर सेस की दर 0.06 से लेकर 0.30 रुपये प्रति घन मीटर तय की गई थी। राज्य जल उपकर आयोग ने सितंबर में कई ऊर्जा उत्पादकों को वाटर सेस के बिल जारी कर दिए थे। बीबीएमबी,एनटीपीसी,एनएचपीसी समेत कई अन्य ऊर्जा उत्पादकों ने प्रदेश सरकार के इस निर्णय को हाई कोर्ट में चुनौती दे रखी है। वहीँ केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 25 अक्टूबर को सभी राज्यों को एक पत्र लिख वॉटर सेस को अवैध व असंवैधानिक बताते हुए इसे शीघ्र बंद करने के निर्देश दिए हैं। सुक्खू सरकार की तरफ से पर्यटन को बढ़ावा देने के कुछ प्रयास भी दिखते है और इच्छाशक्ति भी। हालांकि आपदा ने सरकार को बड़ा झटका जरूर दिया है। अलबत्ता पर्यटन आधारभूत या पॉलिसी सुधार की दिशा में अब तक कोई बड़ी कामयाबी सरकार को नहीं मिली है, लेकिन उम्मीद जरूर जगी है कि जल्द सरकार एक्शन मोड में दिखेगी। एडवेंचर टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन की दिशा में सरकार के थोड़े प्रयास दिखे है, लेकिन सरकार से अपेक्षा किसी बड़ी योजना है। माहिर भी मानते है कि पर्यटन की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाकर ही सरकार आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य की तरफ बढ़ सकती है। धर्म संकट...खाली खजाना और 1500 देने का अधूरा वादा हिमाचल में कांग्रेस पर गारंटियां पूरी करने का दबाव है। जिन दस गारंटियों के बुते कांग्रेस सत्ता में आई उनमे से एक मुख्य गारंटी थी महिलाओं को हर माह पंद्रह सौ रुपये देना। बढ़ते कर्ज के बीच सुक्खू सरकार कैसे इसे पूरा करती है , इस पर निगाह टिकी है। जाहिर है हिंदी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस की हार के बाद हिमाचल सरकार पर आधी आबादी से किया गया वादा पूरा करने का दबाव है, लेकिन खराब आर्थिक स्थीति इसमें रोड़ा है। भाजपा इसे जमकर भुना रही है और अब ये 1500 रुपये का वादा बड़ा मुद्दा बन चूका है। लोकसभा चुनाव दस्तक दे रहे है और ये गारंटी कांग्रेस के गले की फांस बन चुकी है। खाली खजाने के बीच सरकार धर्म संकट में है। कई अन्य गारंटियां भी अभी अधूरी है जिनमें 300 यूनिट मुफ्त बिजली और पांच लाख रोजगार प्रमुख है। कैबिनेट में असंतुलन..10 विधायक देने वाले कांगड़ा को एक मंत्री पद ! एक साल में विपक्ष द्वारा सुक्खू सरकार को घेरना इतना चर्चा में नहीं रहा जितनी चर्चा अपनों की नाराजगी की हुई। किसी ने नाराजगी खुलकर जाहिर की तो किसी ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी। बात पार्टी के भीतरी संतुलन की ही नहीं, बात कैबिनेट असन्तुलन की भी हुई। सीएम सहित 9 लोगों की कैबिनेट कई पैमानों पर असंतुलित है। कांगड़ा और मंडी संसदीय क्षेत्र से सिर्फ एक-एक मंत्री है। ज़िलों के हिसाब से बात करें तो सबसे बड़े जिला कांगड़ा से कांग्रेस के दस विधायक है, पर मंत्री सिर्फ एक। जबकि सात विधायक वाले शिमला से तीन मंत्री है। ये असंतुलन सिर्फ सियासी मसला नहीं है, जिस जनता ने कांग्रेस को वोट दिया वो भी अपेक्षा रखती है कि क्षेत्र में कोई मंत्री होगा तो विकास को रफ़्तार मिलेगी। इसी तरह हिमाचल कैबिनेट में अभी 9 में से 6 क्षत्रिय है, जबकि ब्राह्मण, एससी और ओबीसी सिर्फ एक-एक है। पांच साल के लिए सरकार चुनी गई है और एक साल बीत चुका है लेकिन अब तक कैबिनेट पूरी नहीं हुई है। ये ही हाल बोर्ड निगमों का है। अब सरकार का रुख जल्द विस्तार का दिख जरूर रहा है लेकिन इच्छा से ज्यादा शायद मजबूरी है। तीन राज्यों की हार ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है और संभवतः अब आलाकमान भी पार्टी के भीतरी संतुलन को सुनिश्चित करे। बहरहाल मुख्यमंत्री का ताजा बयान ये है कि नए मंत्री इसी साल में मिलेंगे। कोर्ट में गया सीपीएस नियुक्ति का मामला सुक्खू सरकार ने ने छह सीपीएस नियुक्त किए थे – अर्की विधानसभा क्षेत्र से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह, दून से राम कुमार, रोहड़ू से मोहन लाल बराकटा, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल। इनके अलावा मुकेश अग्निहोत्री को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। भाजपा नेताओं ने इनकी नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दे दी है।मामले की सुनवाई जारी है और कोर्ट के फैसले का इंतजार है। इस मामले में अब 20 दिसंबर को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई है। बीजेपी नेता सतपाल सिंह सत्ती और 11 अन्य बीजेपी विधायकों ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सीपीएस और डिप्टी सीएम का ऐसा कोई पद संविधान के तहत या संसद द्वारा पारित किसी कानून या अधिनियम के तहत मौजूद नहीं है। उन्होंने याचिका में दलील दी कि सीपीएस के पदों पर नियुक्ति राज्य के खजाने पर बोझ है। याचिका के अनुसार, 91वें संशोधन में मंत्री पदों की संख्या सदन की कुल संख्या का 15 प्रतिशत कर दी गई और इस मानदंड के अनुसार राज्य में 12 मंत्री हो सकते हैं क्योंकि विधानसभा की सदस्य संख्या 68 है।आगे आरोप लगाया गया कि 6 सीपीएस की नियुक्तियां संविधान के विपरीत हैं। उन्हें सीपीएस के रूप में नियुक्त किया गया है, जो बिना बुलाए ही वास्तविक मंत्री हैं और मंत्रियों की सभी शक्तियों और सुविधाओं का आनंद लेते हैं। बहरहाल इस मामले में, विशेषकर सीपीएस की नियुक्ति को लेकर कोर्ट का क्या फैसला आता है, इस पर सबकी निगाह टिकी है। शिमला नगर निगम चुनाव जीते ...अब सोलन ने दिया झटका सुक्खू सरकार के एक साल के कार्यकाल में शिमला नगर निगम का चुनाव हुआ जहाँ कांग्रेस को शानदार जीत मिली। इसके बाद हालहीं में चार नगर निगमों में नए मेयर और डिप्टी मेयर चुनने की बारी थी। किस्मत की बदौलत कांग्रेस धर्मशाला नगर निगम में कब्ज़ा करने में कामयाब रही लेकिन सोलन में बहुमत होते हुए भी पार्टी की फजीहत हुई। कांग्रेस के दोनों अधिकृत उम्मीदवार हार गए। यहाँ मेयर पद कांग्रेस की बागी ने कब्जाया तो भाजपा को डिप्टी मेयर का पद मिल गया। वो फैसला जिसपर हुई विपक्ष ने जमकर घेरा सुक्खू सरकार ने आते ही सैकड़ों संस्थानों को डी नोटिफाई कर दिया। संस्थानों की डेनोटिफिकेशन पर भाजपा सरकार को जमकर घेरती रही है। भाजपा का आरोप है कि इस सरकार ने 10 महीने के कार्यकाल में ही हिमाचल के 1000 से अधिक चले हुए संस्थान बंद किए बंद कर दिए थे। कई शिक्षण स्थान भी बंद हुए और निसंदेह इससे कई छात्रों को कई दिक्क्तों कि खबरें भी सामने आई।
मंडी जिले के उपमंडल धर्मपुर में एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। युवक को बचाने की कोशिश कर रहा एक व्यक्ति घायल भी हुआ है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मंडी जिले के धर्मपुर के चौकी कलोगा में शादी समारोह के बाद शनिवार देर रात चार व्यक्ति घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक कार में दो लोग आए। उन्होंने रवि नाम पूछा और उस पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में रवि की मौत हो गई, जबकि बचाव में आया एक व्यक्ति घायल हो गया। युवक की हत्या क्यों की गई, इसका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को अरेस्ट कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
-सभी जिला मुख्यालयों में पायलट आधार पर ट्रैफिक वालंटियर योजना शुरू प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में अब ट्रैफिक पुलिस के साथ ट्रैफिक वालंटियर भी ट्रैफिक कंट्रोल करते दिखाई देंगे। इसी कड़ी में प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने वीरवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में पायलट आधार पर ट्रैफिक वालंटियर योजना का शुभारंभ किया। राज्य में यातायात के बेहतर प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और जन जागरूकता के लिए इस योजना को शुरू किया गया है। यदि जिला मुख्यालयों में ट्रैफिक वलंटियर योजना सफलतापूर्वक संचालित होती है तो इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। स्कीम के तहत राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के स्वैच्छिक लोगों का एक समूह होगा, जो सेवा की भावना से यातायात प्रबंधन और जागरूकता में भाग लेगा और विभिन्न यातायात कार्यों को नि:शुल्क करने में योगदान देगा। स्वयंसेवकों का अनुरोध प्राप्त होने के बाद जिला एएसपी, डीएसपी मुख्यालय व एसडीपीओ उन्हें बातचीत के लिए बुलाएंगे और सत्यापन करेंगे। इसके बाद जिला एसपी की मंजूरी के बाद ट्रैफिक वालंटियर की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। ट्रैफिक जन जागरूकता के लिए योजना में लड़कियों व महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। जिला एसएसपी द्वारा रिफ्लैक्टिव सुरक्षा जैकेट, टोपी और आईडी कार्ड उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस पर प्रमुखता से ट्रैफिक वालंटियर लिखा होगा, ताकि आम जनता को उनकी पहचान ट्रैफिक पुलिस से अलग दिखे।
राजकीय महाविद्यालय करसोग की रोवर्स और रेंजर इकाई द्वारा भारत स्काउट एंड गाइड हिमाचल प्रदेश के 'प्रोजेक्ट निश्चय' के अंतर्गत चौथी गतिविधि को संपूर्ण किया गया। इस गतिविधि के अनुसार विद्यार्थियों को अपने महाविद्यालय के 1 किलोमीटर के रेडियस में नशे से संबंधित होने वाली गतिविधियों के स्थान का अवलोकन करना था, जिसके माध्यम से वह जान सके की युवा किस-किस प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन कर रहे हैं। यह स्थान समाज के सामने आ सकें, ताकि ऐसे स्थान पर पुलिस व्यवस्था की भी पैनी नजर रहे। इस गतिविधि को संपूर्ण करने के लिए सर्वप्रथम महाविद्यालय परिसर में 12:30 पर बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें रोवर लीडर पंकज गुप्ता, प्रोफेसर हितेश कुमार, प्रोफेसर गौरव, प्रोफेसर अनुपमा शर्मा और प्रोफेसर पुष्पा उपस्थित रहे। सर्वप्रथम रोवर लीडर पंकज गुप्ता द्वारा विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट निश्चय की चौथी गतिविधि से अवगत करवाया गया। तत्पश्चात यूनिट के अध्यक्ष नीतीश द्वारा विद्यार्थियों को दो समूह में बांटकर प्रस्तावित, चिन्हित नशे से संबंधित स्थान के लिए रवाना किया गया। विद्यार्थियों ने पाया कि महाविद्यालय परिसर के बाहर 1 किलोमीटर के घेरे में बहुत से छिपाने वाले स्थान पर युवाओं या विद्यार्थियों या अन्य जनों द्वारा नशे से संबंधित खाली बोतले, रैपर्स, दवाइयां आदि विद्यार्थियों के समूह द्वारा देखी गई। इस गतिविधि के बाद विद्यार्थियों के दोनों समूहों ने आपसी वार्तालाप महाविद्यालय के अंदर की और अपने द्वारा हासिल की गई जानकारी अन्य विद्यार्थियों को भी साझा की। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने समाज में खासकर युवाओं में फैल रहे नशे के जहर को समझा, और विद्यार्थियों ने प्रण लिया कि वह इस प्रकार की गतिविधियों को प्रशासन के सामने लाकर समाज को एक दिशा प्रदान करेंगे। इस कार्यक्रम में रोवर रेंजर इकाई के 56 विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों की इस गतिविधि को यूनिट रीडर के द्वारा सराहा गया और उन्हें समाज में फैल रहे नशे की चपेट से अपने साथियों, महाविद्यालय के अन्य विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कहा गया।
-सरकार ने सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता जताई प्रदेश सरकार सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे नित नए प्रयोग, तकनीक और अनुसंधानों का उपयोग कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। राज्य में इस क्षेत्र में आवश्यक अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए, सरकार प्रदेशभर में 40 शहरी स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर स्थापित करने पर विचार कर रही है। यह केंद्र राज्य के लोगों को घर-द्वार के समीप आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में नई आशा की किरण साबित होंगे। प्रत्येक शहरी स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर में एक समर्पित स्वास्थ्य टीम होगी, जिसमें एक चिकित्सा अधिकारी, फार्मासिस्ट, सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम) और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का विस्तार और सुदृढ़ीकरण आवश्यक है। सार्वभौमिक व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर बल देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, मरीजों की संख्या और मृत्यु दर कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे दूसरे और तीसरे स्तर के ईलाज की आवश्यकता कम होती है, जिससे उपचार पर होने वाला खर्च भी कम होता है। वर्तमान में, एक शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 50,000 व्यक्तियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। इस दूरदर्शी और महत्त्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य प्रत्येक शहरी स्वास्थ्य वेलनेस केन्द्र द्वारा लगभग 20,000 लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है ताकि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रणनीतिक पहल अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।इन शहरी स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों की स्थापना एक मजबूत और समावेशी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह नवीन प्रयास शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और आजीविका के लिए अन्य राज्यों से आए लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। यह पहल हालिया कोविड-19 महामारी के दौरान देखी गई फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यबल की कमी का भी समाधान प्रदान करेगी। सुक्खू ने कहा कि यह महत्वाकांक्षी योजना सर्वजन तक बेहतर स्वास्थ्य देखभाल उपलब्ध करवाने में मील पत्थर साबित होगी, जिसके माध्यम से शहरों में स्वास्थ्य क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का समाधान सुनिश्चित हो सकेगा।
-1226 पदों को भरने के लिए कैबिनेट ने दी संशोधित मंजूरी -मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना में जोड़े जाएंगे कुछ और प्रावधान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पद पर 30 प्रतिशत महिला आरक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया और कांस्टेबल के 1226 पदों को भरने के लिए संशोधित मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने अनाथों और समाज के वंचित वर्गों को लाभान्वित करने के लिए मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना में कुछ और प्रावधान जोड़ने को भी मंजूरी दी। नए प्रावधानों के तहत राज्य का प्रत्येक अनाथ 27 वर्ष की आयु तक 4,000 रुपये प्रतिमाह जेब खर्च प्राप्त करने का पात्र होगा। इसके अलावा योजना शुरू होने के बाद बाल देखभाल संस्थान छोड़ने वाले ऐसे अनाथ बच्चों को 2 लाख रुपये विवाह अनुदान देने का भी निर्णय लिया, जिन्होंने योजना के शुरू होने बाद विवाह किया। यह राशि एक बार ही देय होगी। सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों में विद्युत अधोसंरचना होगी सुदृढ़ बैठक में पूह से काजा तक के सीमावर्ती क्षेत्रों में भरोसेमंद एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपलब्ध करवाने के दृष्टिगत 486.47 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य के लाहौल-स्पीति जिला के स्पीति ब्लॉक और किन्नौर जिला के सीमावर्ती क्षेत्रों के 32 गांवों में विद्युत अधोसंरचना विकसित व सुदृढ़ करने के लिए 6.49 करोड़ रुपये की विस्तृत योजना रिपोर्ट को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इन पदों को भरने के लिए मिली मंजूरी बैठक में कृषि विभाग में कृषि विकास अधिकारियों के 40 पद, गृह रक्षक और नागरिक सुरक्षा विभाग में हवलदार प्रशिक्षकों के 10 पद भरने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा शिमला के चमियाना में अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशलिटीज के नेफ्रोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर के दो पद, आईजीएमसी शिमला में ओर्थोपेडिक्स विभाग में सहायक प्रोफेसर का एक पद और जिला मंडी के नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल के ईएनटी विभाग में सहायक प्रोफेसर का एक पद भरने का भी निर्णय लिया गया। 40 नए शहरी स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर खुलेंगे मंत्रिमंडल ने प्रदेश के लोगों की सुविधा के लिए शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश में 40 नए शहरी स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर खोलने को स्वीकृति प्रदान की। कांगड़ा जिले के देहरा के बनखंडी में वन्य प्राणी उद्यान की चाहरदीवारी, जल संचयन निर्माण और सेवा पथों के निर्माण और हिमाचल प्रदेश चिड़ियाघर संरक्षण प्रजनन सोसायटी के माध्यम से परियोजना लागू करने को स्वीकृति प्रदान की। औद्योगिक निवेश नीति में भी होगा संशोधन मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश औद्योगिक निवेश नीति-2019 में संशोधन करने और इसके संबंधित नियमों में संशोधन करने की स्वीकृति प्रदान की। इससे उदार प्रोत्साहन को बढ़ावा मिलेगा। अब बिजली परियोजनाएं 40 साल की लीज पर ही दी जाएगी( लोगों को सुविधा प्रदान करने के दृष्टिगत हमीरपुर में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड निगम लिमिटेड का जोन सृजित करने तथा हमीरपुर में मुख्य अभियंता (ऑपरेशन) का कार्यालय स्थापित करने को भी स्वीकृति प्रदान की। कैबिनेट ने ग्रांट इन एड के उपयोगिता प्रमाणपत्र सरकार को भेजने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने को भी स्वीकृति प्रदान की।
-कहा, जागरूकता से एड्स के प्रति समाज के दृष्टिकोण में आया बदलाव मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां 'लेट कम्यूनिटीज लीड' विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय विश्व एड्स दिवस समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आने वाले बजट में एड्स पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए एक योजना लेकर आएगी, जिसमें ऐसे बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करने और उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने के प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि पहले समाज में एड्स ग्रसित व्यक्ति को घृणा की दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन लगातार जागरूकता कार्यक्रमों के कारण आज एड्स के प्रति समाज के दृष्टिकोण में बदलाव आया है। उन्होंने आह्वान किया कि बीमार अपनी बीमारी न छुपाएं, बल्कि समाज के सामने स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि एड्स पीड़ित व्यक्तियों की सहायता के लिए वर्तमान राज्य सरकार हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि आगामी बजट में सरकार विधवाओं और मूक बधिर बच्चों के लिए भी एक योजना लाने जा रही है। दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई के लिए एक अच्छा स्कूल और कॉलेज खोलने पर भी सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उस वर्ग की आवाज बन रही है, जो सहज अपनी आवाज सरकार तक पहुंचा नहीं सकते। मुख्यमंत्री ने कहा कि निराश्रित बच्चों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना चलाई गई है, जिसके तहत बच्चों के रहने और उनके भरण-पोषण का दायित्व राज्य सरकार का होगा। उन्होंने कहा कि अब 27 वर्ष की आयु तक अनाथ बच्चों को रहने और उनके पालन पोषण के लिए सरकार की ओर से व्यवस्था की गई है तथा इसके लिए राज्य सरकार ने कानून भी बना दिया है। उन्होंने युवाओं से जीवन में सफलता के लिए चुनौतियों का दृढ़ता के साथ सामना करने का आह्वान भी किया। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा ''मैं आपके सामने सबसे बड़ा उदाहरण हूं। सब कहते थे कि सरकारी नौकरी करो, लेकिन कड़ी मेहनत से मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचा।ÓÓ मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधार लाने जा रही है। अगले शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी की कक्षाएं शुरु करेंगे। स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध करवाए जाएंगे व खेल की सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। इसके साथ-साथ राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल भी खोले जा रहे हैं। सरकारी शिक्षण संस्थानों में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार वचनबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य सरकार गेस्ट फेकल्टी लेक्चरर लगाने पर विचार कर रही है। इसके साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नए समय से कोर्स शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव करने जा रही है, ताकि प्रदेश के लोगों को राज्य में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हो सकें। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सीमित संसाधनों और कर्ज का भारी बोझ होने के बावजूद राज्य सरकार चार साल में हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएगी और दस वर्षों में हिमाचल प्रदेश देश का सबसे समृद्ध राज्य होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसके लिए कड़े फैसले कर रही है, जिनके सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में दिखेंगे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस बीमारी को फैलने से रोकने में, बहुमूल्य योगदान देने पर विभिन्न संगठनों को पुरस्कार प्रदान किए। स्टैंड अलोन इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर ऊना, डॉ. राधा कृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर (एसटीआई क्लीनिक), एआरटी आईजीएमसी शिमला (एआरटी सेंटर) और एनजीओ सनराइज-टार्गेटेड इंटरवेंशन प्रोजेक्ट (टीआईपी) ऊना को सर्वश्रेष्ठ सेवा केंद्र के रूप में सम्मानित किया गया। सुखविंदर सिंह ने जिला बिलासपुर के राजकीय आईटीआई बरठीं, जिला चंबा के राजकीय महाविद्यालय चौरी, जिला हमीरपुर के सिद्धार्थ राजकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय नादौन, जिला कांगड़ा के शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा राजकीय महाविद्यालय पालमपुर, जिला किन्नौर के टीएस नेगी राजकीय महाविद्यालय रिकांगपिओ, जिला कुल्लू के रामेश्वरी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान शाढ़ाबाई, जिला लाहौल-स्पीति के राजकीय महाविद्यालय कुकुमसैरी उदयपुर, जिला मंडी के वल्लभ राजकीय महाविद्यालय, जिला शिमला के राजकीय महाविद्यालय धामी, जिला सिरमौर के इंस्टीट्यूूट ऑफ डेंटल साईसिंस पांवटा साहिब, जिला सोलन के राजकीय महाविद्यालय अर्की और जिला ऊना के राजकीय महाविद्यालय अंब को सर्वश्रेष्ठ रेड रिबन क्लब के रूप में पुरस्कृत किया। उन्होंने राज्य स्तरीय समारोह को सफल बनाने के लिए आरकेएमवी कॉलेज शिमला, आरजीजीडीसी कोटशेरा शिमला, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजकीय महाविद्यालय संजौली, जेएलएन फाइन आर्ट्स कॉलेज, चौड़ा मैदान, सेंट बीड्स कॉलेज शिमला, राजकीय संस्कृत महाविद्यालय शिमला, राजकीय नर्सिंग महाविद्यालय शिमला, एचपी कॉलेज ऑफ एजुकेशन टुटू शिमला, शिवालिक नर्सिंग महाविद्यालय भट्टाकुफर शिमला, आईटीआई शिमला, मॉडर्न नर्सिंग महाविद्यालय, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय टुटू, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय संजौली और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अनाडेल के प्राचार्यों के प्रयासों की भी सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने विश्व एड्स दिवस के अवसर पर लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर एड्स पीड़ित एक महिला ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने इस महिला को एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की।
-एक हेक्टेयर पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी दे रही प्रदेश सरकार -उप मंडल पधर में दो बागबान कर रहे इस जंगली फूल की खेती जिन पहाड़ी इलाकों में बंदरों और जंगली सूअरों का आतंक है, वहां प्रदेश सरकार द्वारा फूलों की खेती को बढ़ावा देने की योजनाएं बनाई गई है, ताकि किसान अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकें। सरकार इन योजनाओं के तहत बागवानों को 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। सरकार की ओर से जंगली गेंदे के फूल की खेती के लिए एक हेक्टेयर पर 30 हजार रुपये सब्सिडी दी जा रही है। उप मंडल पधर के चरण सिंह कहते हैं कि उन्होंने घोघर धार में 12 बीघा में जंगली गेंदे के फूल की खेती की है। उन्हें प्रदेश सरकार की तरफ से सब्सिडी भी मिली है। चरण सिंह कहते हैं कि वे पहले भी जंगली गेंदे के फूल की खेती करते थे, लेकिन कटाई के बाद फूलों से तेल निकालने के लिए इन्हें नेरचौक ले जाना पड़ता था, जिसमें बहुत अधिक खर्चा हो जाता था। अब हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के द्वारा तेल निकालने की यूनिट घोघर धार में ही लगा दी गई, जिससे उनका ढुलाई पर होने वाला खर्च बच गया। वे कहते हैं कि जंगली गेंदे के फूल के तेल की कीमत बाजार में 12 से 15 हजार रुपये प्रति लीटर है और इस जंगली फूल की खेती से वह सालाना लगभग 2 लाख तक की आय कमा लेते हैं। यह खेती करना बहुत आसान है। इसमें पारंपरिक खेती की तरह अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती है। जंगली गेंदे की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जंगली जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। वहीं, उद्यान विकास अधिकारी द्रंग कविता शर्मा कहती हैं कि उप मंडल पधर में दो बागबान जंगली गेंदे के फूल की खेती कर रहे हैं और उन्हें विभाग की तरफ से एक हेक्टेयर पर 30 हजार रुपये का अनुदान मिला है। यहां जंगली गेंदे की खेती की काफी संभावनाएं हंै, यहां की जलवायु इसके लिए उपयुक्त है।
पहाड़ जैसा हौसला रख उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में 17 दिन बाद जिंदगी की जंग जीतकर मंडी का विशाल घर वापिस आ गया है। विशाल मंडी जिला के बल्ह विधानसभा के डहणू का रहने वाला है। उत्तराखंड सरकार ने विशाल व उसके पिता धर्म सिंह को सही सलामत घर पहुंचाया है। वहीं घर पहुंचने पर विशाल के घर और गॉंव वालो ने उसका भव्य स्वागत किया। वही विशाल की मां विशाल को सही सलामत देख कर भावुक हो गई। वहीं स्वास्थ्य जांच के बाद वीरवार दोपहर बाद विशाल को एम्स ऋषिकेश से छुट्टी मिली। विशाल व उसके पिता धर्मसिंह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पहुंचे। धर्म सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रशासन गहन स्वास्थ्य जांच के बाद विशाल को छुट्टी दी है। उत्तराखंड सरकार ने विशाल के लिए गाड़ी करके हिमाचल के प्रवेश द्वार पांवटा साहिब तक पहुंचाने के आदेश जारी कर सिरमौर जिला प्रशासन को सौंपने को कहा था। जहा से घर तक लाने के लिए मंडी जिला प्रशासन ने टैक्सी की व्यवस्था की।
सीबीएसई बोर्ड ने दसवीं और बारहवीं परीक्षा की डेटशीट रिलीज करने से पहले एक अहम नोटिस जारी किया है। बोर्ड ने आगामी 10वीं और 12वीं परीक्षाओं 2024 के संबंध में जारी एक अहम सूचना में कहा है कि बोर्ड दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में कोई ओवरऑल डिवीजन या डिस्टिंक्शन नहीं देगा। जारी नोटिस में कहा है कि बोर्ड परीक्षाओं में स्टूडेंट्स के मार्क्स कैलकुलेट करने के लिए क्या क्राइटेरिया रहेगा, इस संबंध में सीबीएसई को कई अनुरोध प्राप्त हो रहे थे। परीक्षा उपनियमों के अध्याय-7 के सब सेक्शन 40.1 (3) के अनुसार, कोई समग्र डिवीजन/डिस्टिंक्शन या एग्रीगेट नहीं दिया जाएगा। विदित रहे कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई जल्द ही कक्षा 10वीं, 12वीं बोर्ड परीक्षा 2024 की डेट शीटजारी करेगा। संभावना है कि बोर्ड इसी महीने के आखिर में या फिर दिसंबर माह के सेकंड वीक तक टाइमटेबल जारी कर दे। सीबीएसई बोर्ड की इस बार भी फरवरी में आयोजित होनी है। बोर्ड की ओर से पहले जारी सूचना के अनुसार 15 फरवरी 2024 से परीक्षाएं शुरू होंगी। वहीं यह एग्जाम अप्रैल तक आयोजित किए जाएंगे। डेटशीट आधिकारिक वेबसाइट पर रिलीज की जाएगी। स्टूडेंट्स पोर्टल पर जाकर इसे पीडीएफ मोड में डाउनलोड कर पाएंगे।
-नाचन वन मंडल के तहत महिला समूहों ने उतारी पहली खेप -सीपीडी जाइका नागेश गुलेरिया ने थपथपाई पीठ -विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के कार्यों की हुई सराहना प्रदेश में विलुप्त होते औषधीय पौधे कड़ू और चिरायता की खेती कर जाइका वानिकी परियोजना ने पहली कामयाबी हासिल की। जिला मंडी के नाचन वन मंडल के तहत छैन मैगल, बुखरास और रोहाल गांव से संबंध रखने वाली महिलाओं के एक समूह ने उक्त दो औषधीय प्रजातियों की पहली खेप उतार दी। वीरवार को नाचन वन मंडल के धंगयारा में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के अवसर पर जाइका वानिकी परियोजना के मुख्य परियोजना निदेशक नागेश कुमार गुलेरिया के समक्ष कड़ू और चिरायता की खेप को दर्शाया गया। इस अवसर पर नागेश कुमार गुलेरिया ने जाइका से जुड़े महिला समूह को इस खेती के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विलुप्त हो रहे ऐसी प्रजातियों की खेती कर मिसाल कायम की है। नागेश कुमार गलेरिया ने कहा कि कड़ू और चिरायता की खेती करने के बाद अब महिला समूह को पैसे मिलना भी शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि मार्केट में इन औषधीय गुणों वाले कड़ू और चिरायता की मांग दिन-प्रति दिन बढ़ रही है। आने वाले समय में जाइका वानिकी परियोजना इस पर और अधिक काम करेगी। नागेश कुमार गुलेरिया ने यहां मौजूद सभी स्वयं सहाता समूहों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जाइका वानिकी परियोजना हिमाचल में सामुदायिक विकास एवं आजीविका सुधार के लिए कार्य कर रही है। कार्यशाला में जैव विविधता विशेषज्ञ डा. सुशील काप्टा, डीएफओ नाचन एसएस कश्यप, वीपी पठानिया, जड़ी-बूटी सैल से जड़ी-बूटी सैल से नेहा चक्रवर्ती, हिमालयन रिसर्च ग्रुप के निदेशक डॉ. लाल सिंह समेत 150 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। गुलेरिया ने नाचन में सिखाए आजीविका कमाने के गुर जाइका वानिकी परियोजना के मुख्य परियोजना निदेशक नागेश कुमार गुलेरिया ने नाचन वन मंडल में हो रहे कार्यों की समीक्षा की। गत बुधवार को एक दिवसीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए नागेश गुलेरिया ने परियोजना के अंतर्गत इस वन मंडल में अब तक हुए विभिन्न कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने यहां उपस्थित स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को आजीविका कमाने के गुर सिखाए। नागेश कुमार गुलेरिया ने सभी फील्ड तकनीकी यूनिट्स को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में नर्सरियों को और सुदृढ़ करने की सख्त जरूरत है। नागेश कुमार गुलेरिया ने अधिकारियों से अब तक किए गए कार्यों की पूरी रिपोर्ट भी मांगी। इस दौरान विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के आय में सृजन करने बारे भी विस्तृत चर्चा की गई।
-इच्छुक अभ्यर्थी 30 दिसंबर तक कर सकते हैं आवेदन हिमाचल प्रदेश में वन मित्र भर्ती प्रक्रिया आज से शुरू हो गई। इच्छुक अभ्यर्थियों को 30 दिसंबर तक आवेदन करना होगा। सरकार वन विभाग में 2,061 वन मित्र भर्ती कर रही है। भर्ती के लिए वन विभाग की वेबसाइट या संबंधित वन परिक्षेत्राधिकारी (रेंज ऑफिसर) कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त कर सकते हैं। वन मित्र के लिए आयु सीमा 18 से 25 वर्ष है। वन मित्रों के लिए 100 अंकों का टेस्ट होगा। जो टॉप पर होगा, उसे वन मित्र लगाया जाएगा। अभ्यर्थियों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास रखी है। वन मित्रों को 10 हजार रुपये प्रति माह मानदेय और सरकारी छुट्टियों के अलावा साल में 12 अतिरिक्त छुट्टियां मिलेंगी। ग्राउंड टेस्ट पास करने के बाद ही वन मित्र बन सकेंगे। वन मित्रों को वनों की आग से सुरक्षा, पौधरोपण समेत अन्य काम करने होंगे। जिस बीट में वन मित्र रखे जाएंगे, वहां से उनका तबादला नहीं होगा।
-कहा, समाज में अपराधों को बढ़ावा देता है नशा, दूर रहें युवा -करसोग कॉलेज में नशा मुक्ति पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन राजकीय महाविद्यालय करसोग में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सौजन्य से नशा मुक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सिविल जज कम सब-ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राहुल वर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि आज का युवा कल का भविष्य है, परंतु नशा युवाओं को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। उन्होंने कहा कि नशा समाज में अपराधों को बढ़ावा देता है, इसलिए युवाओं को नशे जैसी बुरी प्रवृतियों से बचना चाहिए। सोशल साइट्स का गलत इस्तेमाल भी युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल सकता है, इसलिए सोशल साइट्स का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। छात्रों को दृढ़ निश्चय के साथ यह संकल्प लेना चाहिए कि न तो मैं खुद नशा करूंगा और न ही दूसरों को करने दूंगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करवाना अति आवश्यक है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने घर, समाज, स्कूल और कॉलेज में अन्य लोगों को भी नशे के दुष्परिणामों से अवगत करवाएं और नशे के खात्मे के लिए आवाज उठाए। मुख्य अतिथि ने कहा कि कॉलेज के छात्र वाहनों को चलाते समय यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वैध लाइसेंस होने पर ही वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए व दोपहिया वाहनों को चलाते समय हेलमेंट का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि सभी छात्र व नागरिक यातायात नियमों का पालन करे ताकि करसोग में यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से बनी रहे। इस दौरान नागरिक चिकित्सालय करसोग से मेडिकल ऑफिसर आबरू गुप्ता ने ड्रग एब्यूज के विषय में छात्रों को विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, मानसिक तनाव, व परीक्षा में असफलता कुछ ऐसे कारण है जिससे छात्र तनाव का शिकार होकर नशा करना शुरू कर देते है। उन्होंने कहा कि छात्रों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए और नशे जैसी बुराई से स्वयं के साथ साथ दूसरों को भी बचाना चाहिए। कार्यक्रम में तहसील कल्याण अधिकारी करसोग, भोपाल शर्मा ने छात्रों को नशे से बचाव के साथ, सामाजिक न्याय एवम अधिकारिता विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय करसोग के छात्रों द्वारा स्लोगन राइटिंग व पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। विजेता प्रतिभागियों को मुख्यतिथि ने स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान राजकीय महाविद्यालय करसोग के प्रोफेसर पंकज गुप्ता सहित अन्य प्राध्यापक गंण भी उपस्थित थे।
-विद्यार्थियों-शिक्षकों को समय पर सामग्री और जानकारी उपलब्ध करवाएगा केंद्र राज्य सरकार की अभिनव पहल विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में निर्णायक कदम है। यह केंद्र एआई तकनीक को एकीकृत करके डेटा विश्लेषण के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रशासकों को समय पर सामग्री और जानकारी उपलब्ध करवाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि स्विफ्टचैट एआई हिमाचल प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रौद्योगिकी और डाटा संचालित संस्थागत प्रणाली में सक्षम करेगा। यह केंद्र इन टूलकिट के डाटा को राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के लिए डैशबोर्ड और रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। इससे छात्र की प्रगति, शिक्षक प्रशिक्षण और स्कूल के समग्र प्रदर्शन संबंधी डाटा उपलब्ध होगा। वास्तविक समय में प्रतिक्रिया और सुधार के आधार पर शिक्षक, शिक्षण संबंधी रणनीतियों में सकारात्मक बदलाव किया जाएगा ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को सीखने के अवसर प्रदान किए जा सके। वीएसके विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण की ज्ञानता प्रदान करता है, जिससे उनकी वैश्विक सामग्री और जानकारी तक सार्वभौमिक पहुुंच सुनिश्चित होती है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल होम लर्निंग तथा अनुभव प्रदान कर शैक्षिक असमानताओं को समाप्त करना है। चैटबॉट पर साप्ताहिक अभ्यास विद्यार्थियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर उत्तर तथा जानकारीपूर्ण वीडियो के साथ पाठयक्रम के अनुरूप उन्हें विषयों को सुदृढ़ करने में मदद करता है। विद्यार्थी विभिन्न भाषाओं में गणित का अभ्यास कर सकते हैं और वीडियो देख कर अपने संदेह दूर कर सकते हैं। चैटबॉट विद्यार्थियों की आवाज का उपयोग कर विभिन्न भाषाओं का उपयोग कर, क्विज के माध्यम से सामान्य ज्ञान और ज्ञानवर्द्धन कर उनकी शिक्षा में गुणात्मक सुधार में सहयोग करता है। चैटबॉट विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को ऑन डिमॉंड (आवश्यकतानुसार) कार्य योजना, पाठ तैयार करना, वर्कशीट और वीडियो बनाने में भी सहायता प्रदान करता हैै। इससे शिक्षक समयबद्ध शिक्षण सामग्री तैयार कर सकते हैं और विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड का त्वरित अध्ययन करने के साथ-साथ उनकी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। चैटबॉट शिक्षण विधियों को विद्यार्थी अनुकूल बनाने में सहायता करता है। इसके माध्यम से अभिवावक शिक्षा संबंधी प्रश्नों का समाधान कर सकते हैं। इसके माध्यम से प्रशासक राज्य स्तर पर शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सीखने के परिणामों के आधार पर रणनीति, योजना और प्रशिक्षण पहल का मूल्यांकन कर सकते हैं, जिसके माध्यम से राज्य स्तर पर प्रशासक विद्यार्थी, अध्यापक और विद्यालय संबंधी जानकारी अपडेट कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र एआई चैटबॉट के माध्यम से विद्यार्थियों के एक डिजिटल साथी के रूप में, शिक्षक को शिक्षण में सहायक और प्रशासक को महत्वपूर्ण डाटा उपलब्ध करवाएगा। चैटबॉट का डेटा शिक्षकों को विद्यार्थी आधारित रणनीतियों को समायोजित करने में सशक्त बनाता है, जिससे विद्यार्थियों के प्रदर्शन में और सुधार होगा।
-विभाग की नर्सरियों में लगभग 20 हजार पौध तैयार -जनवरी के प्रथम सप्ताह से सस्ती दरों पर दिए जाएंगे बागवानों को उद्यान विभाग करसोग क्षेत्र के बागवानों को उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधे उपलब्ध करवाएगा। विभाग की नर्सरियों में बागवानों को उपलब्ध करवाने के लिए लगभग 20 हजार फलदार पौधे पूरी तरह तैयार हैं। करसोग के बागवानी विशेषज्ञ जगदीश वर्मा ने बताया कि इन पौधों में सेब, नाशपाती, प्लम और जापानी फल सहित अन्य विभिन्न प्रजातियों के पौधे शामिल हैं। इन्हें जनवरी माह के प्रथम सप्ताह से सस्ती दरों पर किसानों व बागवानों को उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सेब प्रजाति में जेरोमाईन, किंग रौट, रेड कैप वोलटोड, सकारलेस स्पर-2, सैलेट स्परए सुपर चीफ, फ्यूजीस्ट्रेन, व गाला प्रजाति में डार्क बैरेन गाला, बक आई गाला, गेन गाला, रेडल्म गाला, बाईगैंट गाला, अल्टिमा गाला, गाला वन गाला, गाला सिंगा सीनैको, ग्रैनी स्मिथ, अर्ली रैड वन शामिल है, जबकि नाशपाती में कारमैन, ब्रोन्स ब्यूटी, कोर्न कार्ड, अबेटे फैटल, डी अंजुओ, गोल्डन रोजेट, पेखम, स्टार किम्सन व रैड वाल्टलैट किस्में, पल्म में बैक एंबर, फ्रयर, रेड ब्यूट, अंजूलीना, फ्रंटियर व जापानी फल की फ्यू-यू प्रजाति के पौधे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सेब प्रजाति के रूट स्टॉक व सीडलिंग पौधों के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारित किए गए है। रूट स्टॉक किस्म की विभिन्न वैरायटी के पौधों 120 से 180 रुपये की दर निर्धारित है जबकि सीडलिंग किस्म के पौधों के लिए न्यूनतम 110 से अधिकतम 140 रुपये प्रति पौधा दाम निर्धारित किया गया है। नाशपाती और प्लम के पौधों का न्यूनतम 80 और अधिकतम 100 रुपये जबकि जापानी फल के पौधों की दर 100 रुपये प्रति पौधा निर्धारित की गई है। विषय विशेषज्ञ उद्यान जगदीश वर्मा ने बताया कि विभिन्न प्रजातियों के लगभग 15 से 20 हजार फलदार पौधें प्लांट प्रोटेक्शन सेंटर चुराग में बागवानों को उपलब्ध करवाए जाएगें। उन्होंने कहा कि करसोग क्षेत्र के बागवान इन पौधों को प्राप्त करने के लिए उद्यान विकास अधिकारी करसोग, विषय विशेषज्ञ उद्यान, अथवा प्रोजेक्ट फेसिलिटेटर के माध्यम से अपनी डिमांड दे सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग के अनुसार आगामी 72 घंटे में मौसम खराब होने का पूर्वानुमान जताया गया है। इस दौरान ऊपरी इलाकों में बर्फबारी हो सकती है जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश होने की संभावना है। बर्फबारी का असर तापमान पर भी पड़ेगा। 26 नवंबर की शाम से प्रदेश में तेजी से तापमान में गिरावट आने की संभावना जताई गई है। बर्फबारी का यह असर किन्नौर, चंबा और कुल्लू जिलों में देखने को मिलेगा। जबकि मैदानी इलाकों में बादल छाये रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने इस दौरान कम विजिविल्टी होने की भी बात कही है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार से मौसम करवट बदलेगा और सोमवार को यैलो अलर्ट रहेगा। प्रदेश में 30 नवम्बर तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 26 नवम्बर से एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा जो उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा और इसका असर हिमाचल में भी देखने को मिलेगा।
-कई आरोपी विदेश भाग चुके, कई भागने की फिराक में हिमाचल में करोड़ों रुपये के क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड में एसआईटी ने 19 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की है। हालांकि 2500 करोड़ की ठगी के इस मामले में 19 करोड़ की संपत्ति बहुत कम है। वहीं, एसआईटी आरोपियों की संपत्ति का पता लगा रही है, लेकिन धीमी कार्रवाई के चलते कई आरोपी विदेश भागने की फिराक में हैं। क्रिप्टो करेंसी ठगी मामले से जुड़े कई आरोपी विदेश भाग चुके हैं। ठगी मामले में पंजाब और हिमाचल प्रदेश पुलिस की टीमें कार्रवाई कर रही है। करोड़ों के इस क्रिप्टो करंसी ठगी मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसा लगाया है। बताया जा रहा है कि इस रैकेट के सरगनाओं ने सबसे पहले नेताओं और बड़े अधिकारियों को ही जाल में फंसाया। उसके बाद धीरे-धीरे ठगों की चेन बढ़ती गई। करोड़ों के इस ठगी मामले में कई पुलिस कर्मी भी शामिल बताए जा रहे है। शातिरों ने प्रदेश में करीब एक लाख से अधिक लोगों को ठगा है। एसआईटी की कार्रवाई के बाद प्रदेश में क्रिप्टो करंसी ठगी की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही है। ठगी मामले की राशि का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। क्रिप्टो रैकेट में शातिरों ने करीब अढ़ाई लाख आईडी बनाकर क्रिप्टो करेंसी के नाम पर प्रदेश की जनता को करोड़ों का चूना लगाया है। क्रिप्टो करेंसी ठगी मामले में एसआईटी ने अभी तक चार पुलिस कर्मियों सहित 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। ठगों ने हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों में भी बनाई संपत्ति क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी के इस स्कैम में करीब एक लाख लोग शामिल बताए जा रहे हंै। बताया जा रहा है कि अब तक की जांच में करीब 2500 करोड़ की ट्रांजेक्शन मिली है। बताया जा रहा है कि लोगों से करोड़ों रुपए ठगने वाले शातिरों ने हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों में भी संपत्ति बनाई है। ठगी मामले में कई अहम साक्षय एसआईटी के हाथ लगे है। फर्जी वेबसाइट से बनाया शिकार शातिरों ने वेबसाइट बनाकर लोगों को फर्जी कॉईन के नाम पर करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया है। शातिरों ने कोर्वियो कॉइन, डीजीटी कॉइन, फिश टोकन हाइपनेक्सट, बिटपेड एक, बिटवेड दो और एडड फाइनांस कॉइन के झांसे में फंसाकर लोगों को ठगा है। क्रिप्टो करंसी ठगी मामले में पंजाब और हिमाचल प्रदेश पुलिस की टीमें कार्रवाई कर रही हैं। करोड़ों के इस क्रिप्टो करंसी ठगी मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने पैसा लगाया है। एसआईटी क्रिप्टो करेंसी के सभी मास्टरमाइंड की प्रॉपर्टी की मैपिंग कर रही है।
हिमाचल एकता मंच द्वारा आयोजित 'शान-ए-भारत' कार्यक्रम वन्य प्राणी सूचना केंद्र सभागार मनाली में आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि बेटियां फाउंडेशन की चेयरमैन डॉक्टर ज्योत्सना जैन रहीं। कार्यक्रम में विशेष अतिथि प्रांजल जैन व हिमाचल एकता मंच के अध्यक्ष दीपलाल भारद्वाज सचिव सुरेश ओबरॉय आदि के साथ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि डॉ. ज्योत्सना जैन ने विभूतियों को सम्मानित करते हुए कहा कि इस तरह के सामाजिक कार्य करने से समाज को एक नई दिशा व प्रेरणा मिलती है तथा आने वाले समय में बेटियों का और भी उज्ज्वल भविष्य बनेगा। इस कार्यक्रम में हरगुन ने शिव भजन हे शुम्भू बाबा फिल्मी गीत मेरे ढोलना सुन प्यार की धुन व लोक गीत में ताता ताता खीचड़ो चाणे गै मेरीऐ ईजीऐ गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। हरगुन राजकीय केंद्रीय प्राथमिक पाठशाला लालग कक्षा चौथी की छात्रा है। इस कार्यक्रम में भिन्न-भिन्न राज्य के 100 से ऊपर उत्कृष्ट कार्य करने वाली सामाजिक संस्थाओं, महिला मंडल की महिलाओं व अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया। हिमाचल एकता मंच के चेयरमैन दीप लाल भारद्वाज ने कहा कि हमारा प्रयास समाज के हर वर्ग की महिला वर्ग व बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारना उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों का सम्मान करना तथा अपनी संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करने का प्रयास करते रहना है।
शिमला। एसआईटी ने करोड़ों रुपये के क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी ने आरोपियों की सात गाड़ियां जब्त की हैं। गौर रहे कि मामले में एसआईटी ने अब तक चार पुलिस कर्मियों समेत 18 आरोपी गिरफ्तार किए हैं। इसके आलावा एसआईटी ने अब तक 12 करोड़ की प्रॉपटी भी फ्रीज की है, जिसमें क्रिप्टो करंसी ठगी मामले के मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा की तीन करोड़ प्रॉपटी मंडी और जीरकपुर में फ्रीज की गई है। जानकारी देते हुए डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि करोड़ों की इस ठगी में कई सरकारी कर्मचारी और पुलिस कर्मी शामिल हैं। एसआईटी की जांच में पता चला है कि पुलिस कर्मी पहले इन्वेस्टर बने और फिर एजेंट बन गए। क्रिप्टो करंसी ठगी मामले में सेवानिवृत्त पुलिस कर्मी सुनील स्याल भी इस ठगी का किंग पिन है। एसआईटी ने क्रिप्टो करंसी ठगी मामले में वेबसाइट डीकोट कर ली है, जिसमें कई ट्रांजेक्शन मिले हैं।
-वापिस लौटने पर शिमला में कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आज दिल्ली से वापिस शिमला लौटने पर भव्य स्वागत किया गया। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने होटल मरीना से लेकर ओक ओवर तक मुख्यमंत्री पर पुष्प वर्षा की और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि हिमाचल प्रदेश के देवी-देवताओं और जनता की दुआओं से वह स्वस्थ होकर वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने कुछ दिनों तक उन्हें आराम करने और समय पर खाना खाने की सलाह दी है, लेकिन वह सरकार की जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि चार वर्षों में हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और अगले 10 वर्षों में देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है और वर्तमान राज्य सरकार इसी दिशा में प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि 18 नवंबर को मंत्रिमंडल की बैठक भी रखी गई है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि उनकी कुछ दिन की अनुपस्थिति के दौरान मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और अधिकारियों ने अपने दायित्व को बखूबी निभाया है, जिसके लिए वह उनके धन्यवादी हैं। एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पांच राज्यों के चुनाव प्रचार में नहीं जाएंगे, लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस की जीत निश्चित है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को दीपावाली की शुभकामनाएं दी और प्रदेश में सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि अब सभी मिलकर दोबारा से विकास कार्यों में जुटेंगे और हिमाचल प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे लेकर जाएंगे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव चौधरी राम कुमार, संजय अवस्थी, आशीष बुटेल, विधायक, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना सहित वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न बोर्डों एवं निगमों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, कांग्रेस के पदाधिकारियों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि मेधा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत सत्र 2023-24 के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठाने के लिए 25 नवम्बर, 2023 तक आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दृष्टिगत बारहवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राएं अपना आवेदन संबंधित जिला के उच्चतर शिक्षा उप-निदेशक के पास डाक द्वारा अथवा ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। स्नातक स्तर के छात्र-छात्राएं अपना आवेदन पत्र अतिरिक्त/संयुक्त निदेशक (कॉलेज), शिक्षा निदेशालय के पास डाक अथवा ई-मेल medha.protsahan@gov.in के माध्यम से भेज सकते हैं। आवेदन जमा करवाने की अन्तिम तिथि 25 नवंबर निर्धारित की गई है और इसके उपरांत कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक ई-मेल से केवल एक ही आवेदन पत्र स्वीकार किया जाएगा। योजना से संबधित पूर्ण जानकारी उच्चत्तर शिक्षा निदेशक की वैबसाईट www.education.hp.gov.in पर उपलब्ध है। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि योजना के तहत कोचिंग संस्थानों को उच्चतर शिक्षा विभाग को एक लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा करवानी अनिवार्य है। यदि अभी तक किसी संस्थान द्वारा यह राशि जमा नहीं की होगी तो उन्हें यह तुरन्त प्रभाव से यह जमा करवानी होगी और तभी वह कोचिंग संस्थान इस उद्देश्य के लिए पात्र होगा।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में दिवाली की रात 8 से 10 बजे के बीच ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकेंगे। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर आदेशों को सख्ती से लागू करवाने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड के सदस्य सचिव अनिल जोशी ने बताया कि एनजीटी की ओर से वायु प्रदूषण के लिहाज से अति संवेदनशील शहरों में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया है। जबकि मॉडरेट और सामान्य श्रेणी में आने वाले शहरों में सिर्फ ग्रीन पटाखे दो घंटे चलाने की छूट दी गई है।
कृषि सचिव सी पालरासू ने बताया कि प्रदेश में गेहूं के बीज का उत्पादन बढ़ाने के दृष्टिगत विभाग द्वारा इस वर्ष 800 क्विंटल प्रजनक बीज राज्य के विभिन्न जिलों में आबंटित किया जा रहा है। इस वर्ष गेहूं के प्रजनक बीज का मूल्य 7050 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जिसे विभाग के अपने फार्मों व पंजीकृत किसानों को वितरित किया जा रहा है। इसके अलावा गेहूं के प्रमाणित बीज पर राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष 1500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अनुदान दिया जा रहा हैै। राज्य में किसानों की आर्थिकी को देखते हुए इस वर्ष लगभग 600 क्विंटल प्रजनक बीज किसानों में वितरित किया जा रहा है, प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं के प्रजनक बीजों पर 3000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अनुदान देने का फैसला लिया है, जिसे सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इसके अलावा 200 क्विंटल प्रजनक बीज जिलों में स्थित विभागीय फार्मों में उपलब्ध करवाया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से किसानों में बीज उत्पादन के प्रति और ज्यादा जागरूकता आएगी व इससे प्रदेश में बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। कृषि निदेशक कुमद सिंह ने बताया कि प्रदेश में अधिकतर किसान लघु एवं सीमांत है। कृषि व्यवसाय की सफलता व पैदावार बहुत कुछ उच्च गुणवता बीजों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। प्रदेश में उत्तम बीजों की मांग बढ़ती जा रही है क्योंकि कोरोना महामारी के बाद अधिकतर नौजवान कृषि से जुड़े है। विभाग खाद्यान्नों आदि के बीजों को प्रदेश में ही उत्पादित कर किसानों को वितरित करने की ओर आत्मनिर्भर हो रहा है।
हिमाचल को पर्यटन राज्य बनाने के लिए साहसिक गतिविधियों पर दिया जा रहा ध्यान आधुनिक जरूरतों के अनुरूप पर्यटन गतिविधियों के विकास को दिया जा रहा बढ़ावा 'पर्यटक ग्राम' जहां हिमाचली संस्कृति से रू-ब-रू होंगे सैलानी हिमाचल प्रदेश की वर्तमान सरकार हिमाचल को पर्यटन राज्य के रूप में विकसित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है, ताकि युवाओं के लिए रोजगार तथा स्थानीय लोगों की आय में बढ़ोतरी सुनिश्चित की जा सके। इसके दृष्टिगत ट्रैकिंग, कंैपिंग, पैराग्लाइडिंग तथा रिवर राफ्टिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को विशेष तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रयास अब हकीकत में भी नज़र आने लगे हैं। हाल ही में हमीरपुर जिला के नादौन में ब्यास नदी में तीन दिवसीय एशियन राफ्टिंग चैंपियनशिप का सफल आयोजन किया गया। इसमें नेपाल, भूटान और कजाकिस्तान जैसे देशों से प्रतिभागियों ने भाग लिया। कुल्लू-मनाली के उपरान्त नादौन ब्यास नदी पर राफ्टिंग का नया केंद्र बनकर उभरा है। नादौन क्षेत्र में पर्यटन विकास के दृष्टिगत एशियन विकास बैंक की मदद से 2500 करोड़ रुपये की परियोजना भी प्रस्तावित है। इससे पूर्व बिलासपुर जिला में स्थित गोविन्द सागर झील में भी जल क्रीड़ा से संबंधित गतिविधियां आयोजित की गईं। मण्डी जिला के ततापानी में कोल बांध झील में भी जल क्रीड़ा पर आधारित साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। कांगड़ा जिला के पौंग डैम में वाटर स्पोर्ट्स, शिकारा, क्रूज़ तथा यॉट इत्यादि की भी व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश सरकार पारम्परिक पर्यटन के साथ-साथ आधुनिक जरूरतों के अनुरूप पर्यटन गतिविधियों के विकास को बढ़ावा दे रही है। पर्यटन राजधानी कांगड़ा में अंतरराष्ट्रीय स्तर के गोल्फ कोर्स का निर्माण प्रस्तावित है। बनखण्डी में 300 करोड़ रुपये की लागत से चिड़िया घर का निर्माण किया जा रहा है। सरकार ने अपने प्रथम बजट में ही 60 करोड़ रुपये का प्रावधान इसके पहले चरण के निर्माण के लिए किया है। स्थानीय कला एवं संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए 'पर्यटक ग्रामÓ की स्थापना भी की जा रही है। इसमें स्थानीय कला, संस्कृति, हस्तकला, संगीत इत्यादि को प्रसारित करते हुए स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। पर्यटन क्षेत्र को नए आयाम देते हुए वरिष्ठ नागरिकों के लिए 'ओल्ड एज होमÓ विकसित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त एशियन विकास बैंक की सहायता से 1311 करोड़ रुपये की एक व्यापक पर्यटन विकास योजना की घोषणा सरकार ने इस वर्ष के बजट में की है। इसके अंतर्गत कांगड़ा जिला में 390 करोड़ रुपये, हमीरपुर जिला में 257 करोड़ रुपये, कुल्लू जिला में 229 करोड़ रुपये, शिमला जिला में 123 करोड़ रुपये तथा मण्डी जिला में 138 करोड़ रुपये व अन्य स्थानों पर 174 करोड़ रुपये पर्यटन विकास पर व्यय किए जाएंगे। इसके तहत पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं, इलैक्ट्रिक बसें, जल क्रीड़ा, थीम पार्क, सड़क किनारे प्रसाधन सहित अन्य सुविधाएं, उच्च स्तरीय फूड कोर्ट, विरासत स्थलों के सौन्दर्यकरण और ईको टूरिज्म के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है। ग्रीष्म एवं शीतकालीन खेलों का सुचारू आयोजन सुनिश्चित करने के दृष्टिगत शिमला आईस स्केटिंग रिंक का उन्नयन करने के साथ ही मनाली में आईस स्केटिंग तथा रोलर स्केटिंग का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का मानना है कि स्थानीय युवाओं को पर्यटन के साथ जोड़कर रोजगार के स्थायी अवसर सृजित किए जा सकते हैं। इससे पर्यटन विकास सुनिश्चित होगा और प्रदेश के राजस्व में भी बढ़ौत्तरी हो सकेगी। पर्यटन तथा आतिथ्य क्षेत्रों में क्षमता निर्माण से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान कर युवाओं को पर्यटन क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने पर भी विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है।
- राज्य सरकार ने करसोग के लोगों को दिया दिवाली तोहफा राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिमाह करोड़ों रुपये व्यय किए जा रहे है, ताकि पात्र व्यक्तियों तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचा कर, उन्हें लाभान्वित किया जा सके। इसके दृष्टिगत राज्य सरकार ने दीपावली से ठीक पहले करसोग क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नये मामले स्वीकृत कर दीपावली का बड़ा तोहफा प्रदान किया है। मंडी जिला के करसोग क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने की उम्मीद में बैठे सैकड़ों लोगों को राज्य सरकार ने दीपावली से पहले सामाजिक सुरक्षा पेंशन का तोहफा दे कर उनकी उम्मीदों को चार चांद लगा दिए है। राज्य सरकार ने क्षेत्र के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 390 नए मामलें स्वीकृत किए है। जिनमें दिव्यांग पेंशन के 34 मामले, विधवा पेंशन के 66 व वृद्धा पेंशन के 290 मामलों को स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत सभी मामलों के लाभार्थियों को इसी माह से सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी। प्रतिमाह यह मिलेगी पेंशन योजना के स्वीकृत नये मामलों में लाभ पाने वालों में शामिल लाभार्थियों को राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत एक हजार रुपये से लेकर 1700 रुपये तक प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जाएगी। इनमें दिव्यांग पेंशन योजना में 40 से 69 प्रतिशत दिव्यांगों को प्रतिमाह 1150 रुपये, जबकि 70 प्रतिशत या इससे अधिक प्रतिशत्ता वाले दिव्यांगों को प्रतिमाह 1700 रुपये सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलेगी। इसी प्रकार विधवा, एकल नारी या तलाकशुदा महिला पेंशन आदि मामलों में भी 70 वर्ष से कम आयु वर्ग की महिलाओं को 1150, जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की महिलाओं को 1700 रुपये और वृद्धा पेंशन के मामले में भी 70 वर्ष से कम आयु वर्ग के लाभार्थियों को 1000 रुपये, जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लाभार्थियों को 1700 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलेगी। पहले से हो रहे हैं साढ़े 14 हजार लोग लाभान्वित एक लाख से अधिक आवादी वाले करसोग उपमंडल में पहले से ही हजारों लोग प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ ले रहे है। उपमंडल में राज्य सरकार द्वारा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से लगभग साढ़े 14 हजार (14487) पात्र लोगों को पहले ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। जिस पर करोड़ों रुपये व्यय किए जा रहे है। क्षेत्र के लिए 390 नये मामले स्वीकृत कर राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है। राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र के पात्र लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान करने पर पहले ही सालाना 25 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है। डाकघर या बैंक खातों में होगा भुगतान तहसील कल्याण अधिकारी भोपाल शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र के लोगों के लिए 390 नये पेंशन के मामले स्वीकृत किए गए है। जबकि लगभग साढ़े 14 हजार लाभार्थी पहले से ही लाभान्वित हो रहे है। नए स्वीकृत मामलों के सभी लाभार्थियों को इसी माह से पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी। जिसका भुगतान लाभार्थियों के पोस्टल या फिर बैक खाते में किया जाएगा।
अखंडता फाउंडेशन के सौजन्य से विहंगम योग संत समाज के अनुयायियों ने आदर्श स्वास्थ्य केंद्र जंगल बैरी में रक्तदान शिविर का आयोजन किया। शिविर के दौरान 40 लोगों ने रक्तदान किया गया। इस कैंप में डॉ. सुरेंद्र सिंह डोंगरा डा. पल्लवी व संपूर्ण पी.एच सी. स्टाफ ने सहयोग किया। स्वास्थ्य केंद्र जंगल बैरी के इंचार्ज डॉ. सुरेंद्र डोगरा ने बताया कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं, कोई धर्म नहीं, कोई पुण्य नहीं। रक्तदान करने से नई नई रक्त कोशिकाएं बनती हैं और कई तरह की बीमारियों से भी बचा जा सकता है। इस अवसर पर अखंडता फाउंडेशन के चेयरमैन विवेक चौहान ने बताया की प्रतिवर्ष स्वर वेद कथामृत के प्रवर्तक सुपुज्य प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के पावन जन्मोत्सव पर रक्तदान का आयोजन किया जाता है। चेयरमैन सहित बीसीए अंतिम वर्ष के छात्र अमन शर्मा ने समस्त दानी सज्जनों को फल व जूस वितरित किए। फाउंडेशन के निदेशक पुरिंदर राणा ने डॉ. सुरिंदर सिंह डोगरा सहित उनके समस्त स्टाफ का आभार प्रकट करते हुए समस्त जन मानस से अपील की कि अगर मौका मिले तो जीवन में कम से कम एक बार रक्तदान जैसा महादान अवश्य करें। अखंडता फाउंडेशन के निदेशक पुरिंदर राणा ने सभी दानी सज्जनों विजय कुमार, जमीर बीबी, अमन भारती, सेवानिवृत्त कैप्टन विरेंद्र चंदेल व आर्यन लैब जंगल बैरी का उनके अमूल्य सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
-अलसिंडी के समीप हुई दुर्घटना में 6 लोग घायल -जसल से गाड़ी में सवार होकर किसी कार्यक्रम में अलसिंडी जा रहे थे लोग शिमला-करसोग सड़क पर शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया है। इस हादसे में चार महिलाओं सहित पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है। वहीं, अन्य 6 गंभीर रूप से घायल हुए है। हादसा करसोग उप मंडल के अलसिंडी के समीप हुआ है। जहां एक टाटा सूमो गाड़ी सड़क हादसे की शिकार हो गई। हादसे के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मृतकों के शवों को अपने कब्जे में ले लिया, वहीं हादसे में घायल हुए लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। मिली जानकारी के अनुसार जसल के ये लोग टाटा सूमो में सवार होकर अलसिंडी में किसी कार्यक्रम में जा रहे थे। अलसिंडी के पास चालक अचानक गाड़ी से नियंत्रण खो बैठा और टाटा सूमो सड़क से लुढ़ककर गहरी खाई में जा गिरी। वहीं, मामले की सूचना मिलने के तुरंत बाद करसोग पुलिस स्टेशन के एसएचओ मोहन जोशी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर जांच में जुट गए। थाना प्रभारी करसोग ने बताया कि पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है।
-प्रतिमाह कमा रहे 25 हजार, पशुपालन विभाग की हिम कुक्कुट योजना बनी मददगार जोगिंदर नगर उपमंडल की ग्राम पंचायत चौंतड़ा के गांव लोअर चौंतड़ा निवासी 37 वर्षीय राजेश कुमार के लिए मुर्गी पालन स्वरोजगार का मजबूत आधार बना है। मुर्गी पालन से वे न केवल अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं, बल्कि प्रतिमाह औसतन 25-30 हजार रुपये की आय भी अर्जित कर पा रहे हैं। वर्तमान में राजेश कुमार के लिए पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन विभाग की हिम कुक्कुट योजना की 3 हजार ब्रायलर चूजा योजना न केवल मददगार साबित हो रही है बल्कि मुर्गी पालन आज उनकी आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। 10 वर्ष तक दिल्ली में की है ड्राइविंग आत्मविश्वास से लबरेज 12वीं कक्षा तक शिक्षित राजेश कुमार का कहना है कि लगभग 10 वर्षों तक दिल्ली में रोजी रोटी जुटाने को ड्राइविंग का काम किया। फिर वर्ष 2014 में वापस घर आए तथा स्वरोजगार को रोजगार का माध्यम बनाने की दिशा में प्रयास करते हुए 50 मुर्गियों से मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। इस बीच वर्ष 2015 में कुक्कुट पालन केंद्र चौंतड़ा से 15 दिन, वर्ष 2017 व 2018 में केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन (सीपीडीओ) चंडीगढ़ से एक सप्ताह का मुर्गी पालन में प्रशिक्षण हासिल किया। दिसम्बर 2022 में केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन (सीपीडीओ) चंडीगढ़ से ही एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में भी भाग लिया। मार्च 2023 में पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन विभाग ने 3 हजार ब्रायलर चूजा योजना स्वीकृत की। इस योजना के अंतर्गत पहले बैच में एक हजार ब्रायलर चूजा तैयार कर वे बाजार में बेच चुके हैं तथा इससे उन्हें औसतन 40 से 50 हजार रुपये की आमदन प्राप्त हुई है। साथ ही अब दूसरे बैच के एक हजार चूजों को वे पाल रहे हैं। इस तरह 50 मुर्गियों के पालन से शुरू हुआ उनका यह कार्य अब एक हजार चूजों के पालन पोषण तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने विभाग के माध्यम से जहां उपदान दरों पर मुर्गियों के लिए शेड बनाकर दिया है तो वहीं मुर्गियों की फीड तथा दवाईयां भी उपलब्ध करवाई हैं। राजेश कुमार कहते हैं कि कोविड-19 के कठिन दौर में जब लाखों लोग बेरोजगार होकर घर बैठ गए थे तो उन्होने मुर्गी पालन से ही न केवल अच्छी खासी आमदनी प्राप्त की बल्कि मुर्गी पालन परिवार की आजीविका को चलाने में मददगार साबित हुआ। लेकिन अब विभाग की मदद से वे इस व्यवसाय को बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं तथा उनके आत्मबल को भी मजबूती मिली है। दूध गंगा योजना के तहत डेयरी पालन में भी कर चुके हैं राजेश राजेश कुमार कहते हैं कि परिवार की आजीविका को चलाए रखने के लिए वर्ष 2018 में मुर्गी पालन के साथ-साथ डेयरी पालन का कार्य भी शुरू किया। दूध गंगा योजना के तहत बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर 11 गायों को पालकर दूध उत्पादन शुरू किया। जिससे भी उन्हे अच्छी आमदनी हासिल हुई, लेकिन वर्ष 2021 में लंपी वायरस रोग के चलते उनकी कुछ गायें मौत का शिकार हो गई। वर्तमान में उनके पास दो गाय हैं तथा दूध बेचकर भी वे अतिरिक्त आमदनी जुटा रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे अपनी पुश्तैनी जमीन में विभिन्न तरह की पारंपरिक व नकदी फसलें भी तैयार कर रहे हैं। स्वरोजगार कर युवा घर बैठे कर सकते हैं अच्छी कमाई उन्होंने प्रदेश के युवाओं से आह्वान किया है कि वे यदि स्वरोजगार को अपनाते हैं तो इसके माध्यम से भी जीवन में आगे बढ़ने की अनेकों संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि स्वरोजगार अपनाने से पहले युवा अपनी कार्य क्षमता व प्राथमिकताओं को तय करते हुए ऐसा स्वरोजगार अपनाएं जिसमें वे बेहतर कर सकते हैं। उनका कहना है कि युवाओं का यह छोटा सा कदम न केवल उन्हे रोजगार के द्वार खोलेगा बल्कि घर बैठे ही वे अच्छी आमदनी भी अर्जित कर सकते हैं। क्या कहते हैं अधिकारी पशु चिकित्सा अधिकारी एवं प्रभारी पशु चिकित्सालय चौंतड़ा डॉ. मुनीश चंद्र का कहना है कि लोअर चौंतड़ा निवासी राजेश कुमार मुर्गी पालन से अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ बना रहे हैं। विभाग ने हिम कुक्कुट योजना के अंतर्गत तीन हजार ब्रायलर चूजा इकाई स्वीकृत की है। जिसके तहत तीन हजार चूजे लाभार्थी को तीन किस्तों में प्रदान किये जा रहे हैं। हिम कुक्कुट योजना के अंतर्गत 60 प्रतिशत सरकारी अनुदान लाभार्थी को कुक्कुट बाड़ा, आहार, बर्तन व चूजों की कीमत पर दिया जाता है जबकि 40 प्रतिशत लाभार्थी को स्वयं वहन करना होता है। इसके अलावा फीड व दवाईयां भी उपलब्ध करवाई जाती है तथा बिजली का बिल भी विभाग द्वारा वहन किया जाता है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा बेरोजगार युवाओं से सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया है।
-एसआईटी के पास पहुंचा ढाई लाख निवेशकों का रिकॉर्ड -घोटाले में संलिप्त आरोपियों का जल्द होगा पर्दाफाश क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का लालच देकर बनाई गई ढाई लाख निवेशकों की आईडी का पूरा रिकॉर्ड एसआईटी ने जुटा लिया है। ढाई लाख आईडी में नेता, डॉक्टर, अधिकारी, पुलिस, ठेकेदार और किसान शामिल हैं। अब यह देखा जा रहा है कि किस व्यक्ति ने डबल रिटर्न के लालच में कितने का निवेश किया है। किसके खाते में कितनी राशि आई है। इस रिकॉर्ड से एसआईटी जल्द ही घोटाले में संलिप्त आरोपियों का पर्दाफाश करेगी। इस मामले में और गिरफ्तारियां होनी हैं। 2000 करोड़ रुपये का घोटाला जांच में सामने आया है कि क्रिप्टोकरेंसी घोटाला में ढाई लाख के करीब लोगों की आईडी बनी और करीब 2,300 करोड़ रुपये की ट्रांजेक्शन सामने आई है। इसमें 2000 करोड़ का घोटाला है। आरोपियों ने साल दर साल धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए नए-नए नाम से कंपनियां बनाईं। अब तक की जांच में पूरे फ्रॉड का मास्टरमाइंड सुभाष और अभिषेक को माना जा रहा है। इसके साथ ही घोटाले में संलिप्त कुछ अन्य आरोपियों को भी विभिन्न कपंनियों के एमएलएम से जुड़े बिजनेस में काम करने का अनुभव था। ऐसे में घोटाले से जुड़ी गैंग के सदस्यों को मालूम था किस तरह से लोगों को लालच देकर में जल्द से जल्द चेन को आगे बढ़ाना है। यही कारण रहा कि चंद सालों में करोड़ रुपये के घोटाले को अंजाम देने में आरोपी सफल रहे। इसी बीच जब आरोपियों को पूरे खेल का भंडाफोड़ होने का अंदेशा हुआ तो मास्टर माइंड सुभाष पुलिस का शिकंजा कसने से पहले ही विदेश फरार हो गया। कई आरोपी भूमिगत हो गए। पुलिस एसआईटी घोटाले में अब तक साढ़े 9 करोड़ की संपत्तियों को सीज किया जा चुका है। एसआईटी की ओर से इन दिनों आरोपियों की संपत्तियों को सीज करने का सिलसिला जारी है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के राशन कार्ड की ई-केवाईसी करवाने की तिथि 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। पहले यह 31 अक्तूबर तक निर्धारित की गई थी। उन्होंने कहा कि कुछ उपभोक्ता अपना व अपने परिवार के सदस्यों का ई-केवाईसी करवाने से वंचित रह गए थे। विभाग द्वारा ऐसे लोगों की सुविधा के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया पूर्ण करने की तिथि बढ़ाई गई है। विभाग द्वारा राशन वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ई-केवाईसी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशन कार्ड में दर्ज व्यक्ति का नाम, जन्मतिथि तथा लिंग, आधार में दर्ज डाटा के अनुरूप हो, इसके दृष्टिगत प्रदेश भर में ई-केवाईसी की प्रक्रिया आरम्भ की गई है। उन्होंने सभी उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वे ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सयमबद्ध पूर्ण करने में सहयोग प्रदान करें। सरकार की
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेसनीत सुक्खू सरकार को बने हुए एक साल होने को है लेकिन मुख्यमंत्री अभी तक बदले की भावना से काम करते हुए सिफ़र् बीजेपी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को बंद करने का ही काम कर रही है। अब कांग्रेस सरकार प्रदेश के लाखों किसानों और बाग़वानों को परेशान करने के लिए प्राकृतिक खेली जैसी जनहितकारी योजनाएं बंद कर रही है। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसी सरकार आई है जो नई योजनाएं शुरू करने के बजाय पुरानी योजनाओं को बंद करने का काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकारों का काम किसी योजना को और मज़बूत करना हारता है, यदि योजनाओं में कोई कमी रह गई हो तो उसे दूर करना होता है। जयराम ने कहा कि इस समय पूरी दुनिया प्राकृतिक खेती को अपना रही है लेकिन हिमाचल सरकार प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन के लिए चलाई जा रही योजना को बंद कर रही है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती योजना की हिमाचल में सफलता के लिए केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की कई बार सराहना की गई। इस खेती के ज़रिए किसान रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग न करके जैविक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं। जिससे किसानों की कृषि लागत एकदम कम हो जाती है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित खाद्य पदार्थ एक तरफ़ किसानों के स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद है तो दूसरी तरफ़ बाज़ार में ऐसे उत्पादों की भारी मांग की वजह से अच्छी क़ीमत भी मिल जाती है। लेकिन वर्तमान सरकार प्राकृतिक खेती योजना को बंद करके प्रदेश के किसानों और बागवानों को परेशान कर रही। सुख की सरकार का नारा लगाने वाले प्रदेश के लोगों को दु:ख देने का काम कर रहे हैं। ग़ौरतलब है कि अभी तक प्रदेश में लगभग 2 लाख से ज़्यादा किसान-बागवान परिवारों ने इस खेती विधि को पूर्ण या आंशिक भूमि पर अपना लिया है। प्रदेश की 99 प्रतिशत पंचायतों में यह विधि पहुंच बना चुकी है और 1,17,762 बीघा ( 9,421 हैक्टेयर) से अधिक भूमि पर इस विधि से खेती-बागवानी की जा रही है। इस योजना के तहत 2023 के अंत तक 20 हजार हैक्टेयर से ज़्यादा भूमि को प्राकृतिक खेती के अधीन लाने का लक्ष्य था लेकिन कांग्रेस सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया।
-'मेरी माटी, मेरा देश' कार्यक्रम में हिमाचल की रही शानदार भागीदारी 'मेरी माटी, मेरा देश' कार्यक्रम के अंतर्गत वीरभूमि हिमाचल के गांवों की मिट्टी लेकर दिल्ली पहुंचे 143 युवाओं ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के साथ कर्तव्य पथ पर विशाल कलश में अर्पित की। इसी विशाल कलश की मिट्टी से कर्तव्य पथ पर अमृत उद्यान का निर्माण होगा। इस दौरान मीडिया कर्मियों से वार्तालाप करते हुए ठाकुर ने बताया कि हमारी वीरभूमि हिमाचाल वीरों की जननी है, वीरों की भूमि है। वीरभूमि हिमाचल प्रदेश बलिदानियों की भूमि है। यहां गांव के गांव हमारे वीरों के किस्सों से पटे पड़े हैं। मेरी माटी मेरा देश हमारे शहीदों, स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को याद करने का उन्हें श्रद्धांजलि देने का प्रयास है। मेरी माटी, मेरा देश आजादी के अमृत महोत्सव का अंतिम कार्यक्रम है। पूरे देश ने पिछले दो वर्षों में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। लाखों कार्यक्रम हुए, करोड़ों लोग इससे जुड़े। माननीय प्रधानमंत्री जी ने मेरी माटी, मेरा देश कार्यक्रम की शुरुआत करने को कहा तो पूरे देश के 6 लाख से ज्यादा गांवो और 7500 ब्लॉक्स में अमृत कलश यात्राएं निकलीं और मिट्टी इक_ा की गई और हिमाचल प्रदेश ने भी इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया। पूरे देश से इक_ी की गई इस मिट्टी से कर्तव्य पथ पर अमृत उद्यान बनेगा। आज विजय चौक से लेकर इंडिया गेट तक युवाओं का हुजूम देश की मिट्टी को नमन और वीरों का वंदन करने हेतु जमा है। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम का विधिवत समापन कर देशवासियों को संबोधित करेंगे। आज कर्तव्य पथ पर आपकी विशाल कलश देख सकते हैं जिसमें पूरे देश के 6 लाख गांव से आई मिट्टी रखी गई है।तमिलनाडु से लेकर जम्मू कश्मीर तक और नागालैंड से लेकर गुजरात तक संपूर्ण देश के युवाओं में देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है। आज तपती धूप में पूरे देश से युवा नई दिल्ली में एकत्रित हैं। हाथों में तिरंगा लिए युवाओं का जोश देखते ही बनता है।
-कहा, चारों नगर निगम आपदा से प्रभावित, नहीं हो रहे विकास कार्य नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि ढाई साल बीत जाने के बाद नियमानुसार मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव होने है लेकिन राज्य सरकार चुनाव नहीं करवा रही है। जिसकी वजह से चार नगर निगमों के सारे विकास कार्य रुके हुए हैं। सभी नगर निगम आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हैं और चुनाव न होने की वजह से एक भी काम उन क्षेत्रों में नहीं हो पा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि यह सिफ़र् सरकार की नाकामी है। जिसके कारण लाखों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में मंडी, सोलन, धर्मशाला और पालनपुर नगर निगमों में सरकार की नाकामी के कारण मेयर और डिप्टी मेयर के बिना चल रही हैं। विकास के जो भी काम प्रस्तावित हैं, वो पूरी तरह से ठप्प पड़े हैं। मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव न करवा पाना प्रदेश सरकार की नाकामी है। नियमों के तहत इस पद को खाली नहीं रखा जा सकता। अब तो विधायकों के वोट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, फिर भी सरकार यह चुनाव नहीं करवा रही है। इस प्रक्रिया में कोई बड़ा मतदान नहीं होना हैं। जिसमें बहुत वक़्त और संसाधनों की आवश्यकता होती हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपदा की वजह से प्रदेश भर में भारी नुक़सान हुआ है। इस नुक़सान से उबरने और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ज़िम्मेदार संस्थाओं का सुचारू रूप से कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में जब मेयर और डिप्टी मेयर जैसे अहम पदों पर कोई नहीं होगा तो राहत और पुनर्वास के काम प्रभावी तौर पर कैसे हो सकते हैं। मेयर किसी शहर का पहला नागरिक होता हैं।, उसके कार्यक्षेत्र में सभी प्रमुख कार्यों में उनकी अहम भूमिका होती है। जनता द्वारा चुने जाने के कारण जनता के पार्टी उनकी भी जवाबदेही होती हैं। ऐसे में उन्हें कार्य न करने देना लोकतांत्रिक व्यस्था का अपमान हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार हर तरफ़ से तानाशाही की तरफ़ बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण पदों पर चुनाव न करवाकर सरकार लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के 5 नगर निगम सहित 60 शहरी निकायों को जारी ग्रांट इन एड से 76 करोड़ रुपए सरकार द्वारा वापस मांग लिया है। इससे त्रासदी के बाद पुनर्वास की योजनाएं बनाने में लगे शहरी निकायों की परेशानी बढ़ गई है। उन्होंने ने कहा कि सरकार द्वारा जारी किए गए धन की आधी राशि वापस मांगना ग़लत है। सरकार द्वारा विकास के लिए जो पैसे भेजे गये थे, उस धनराशि से निर्धारित योजनाओं पर काम शुरू हो गए हैं। ऐसे में उस धनराशि को वापस मांगना हास्यास्पद है।
करोड़ों रुपये के क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड केस में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई की है। एसआईटी ने हमीरपुर जिले में विभिन्न 21 ठिकानों पर दबिश दी है। एसआईटी ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, बैंक डिटेल समेत अन्य संपत्तियों की जांच की है। अधिकारी रिकॉर्ड को खंगाल रहे हैं। पुलिस विभाग और वन विभाग में सेवारत कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों से भी पूछताछ की है। भोलेभाले लोगों को पैसा दोगुना करने का झांसा देकर क्रिप्टो करेंसी में आरोपियों ने निवेश करवाया था। आरोपियों के पास आलीशान घर, लग्जरी गाड़ियां देखकर एसआईटी भी हैरान है।
-प्रदेश सचिवालय में भी गैर फॉर्मल कपड़े पहनने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई -प्रधान सचिव सामान्य प्रशासन भरत खेड़ा ने जारी किया सर्कुलर प्रधान सचिव सामान्य प्रशासन भरत खेड़ा ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसके अनुसार हिमाचल प्रदेश सचिवालय समेत सरकारी दफ्तरों में अधिकारी और कर्मचारी अगर जीन, टी-शर्ट या अन्य गैर फॉर्मल कपड़े पहनकर आए तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। प्रदेश हाईकोर्ट और अन्य अदालतों में भी अधिकारियों और कर्मचारियों को फॉर्मल ड्रेस पहनकर ही जाना होगा। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वर्दी पहन कर ही कार्यालय में आना होगा। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश उच्च न्यायालय ने वर्ष 2017 में इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। उसके बाद कार्मिक विभाग ने सभी विभागों को दिशा-निर्देश तैयार कर जारी किए थे, जिसमें ड्रेस कोड के बारे में जानकारी दी थी। इसमें स्पष्ट किया था कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी उपयुक्त, औपचारिक, साफ और अच्छे दिखने वाले और सही रंग के कपड़े पहनकर ही सरकारी दफ्तर में आएंगे। वे उच्च न्यायालय या अन्य अदालतों में उपस्थित होते हुए भी फॉर्मल और सही तरीके के कपड़े पहनेंगे। इस सर्कुलर के अनुसार हालांकि यह ध्यान में आया है कि इन निर्देशों की ठीक से अनुपालना नहीं की जा रही है। यही नहीं, प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी सही कपड़ों में नहीं पहुंच रहे हैं। उनके लिए पहले से ही वर्दी तय है। अधिकारियों और कर्मचारियों के कपड़े पहनने का अंदाज कार्यालय की व्यावसायिकता, गंभीरता और अनुशासन की शैली को भी प्रदर्शित करता है। ऐसे में राज्य सचिवालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी इन निर्देशों की अनुपालना करें। अगर इस संबंध में किसी भी तरह की कोताही बरती जाती है तो ऐसे में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कंडक्ट रूल्स में प्रावधान होने की भी बात की गई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में केवल वही वर्दी नहीं पहनेंगे, जिन्हें इससे पहले अनिवार्य नहीं किया गया है।
-पंचायत समिति सदस्य प्रशिक्षण वर्ग में बोले पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष -कहा, केंद्र सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाए कार्यकर्ता, कोई भी न रह जाए अछूता शिमला : नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि देश के लोकतंत्र में पंचायत की इकाई सबसे महत्वपूर्ण है। पंचायत स्तर पर कार्यकर्ता एक-एक व्यक्ति से जुड़े और लोगों को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही जनहित की योजनाओं के बारे में बताए। हर लाभार्थी तक केंद्र की योजनाएं पहुंचे, यह भी सुनिश्चित करना कार्यकर्ता की ज़िम्मेदारी है। जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समाज के हर वर्ग के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिससे देश के हर वर्ग का समुचित विकास हो सके। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार हर मोर्चे पर फेल हो गई है। सरकार बने एक साल होने को है और अब तक एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है। प्रदेश में विकास के सारे कार्य ठप पड़े हैं। वह शिमला के ठियोग में पंचायत समिति सदस्य के प्रशिक्षण वर्ग में बोल रहे थे। जयराम ठाकुर ने कहा कि कार्यकर्ता ही पार्टी का आधार होते हैं। बीजेपी आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी है। बीजेपी में सबसे ज़्यादा कार्यकर्ता हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखने वाली भारतीय जनता पार्टी में हर कार्यकर्ता को शीर्ष पर पहुंचने का अवसर मिलता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूर्ण समर्पण और अनुशासन के साथ जन-जन से जुड़कर पार्टी को मज़बूत करने के लिए काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर बूथ और हर पंचायत से बीजेपी को मज़बूत बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों को मज़बूत करना है। जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में हर क्षेत्र में ऐतिहासिक विकास किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान के आदर्शों के साथ भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। किसानों को कृषि कार्यों के लिए उर्वरकों की कमी न हो इसलिए प्रधानमंत्री ने उर्वरकों पर 22 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा की सब्सिडी दी है। इसके अलावा किसानों को 'किसान सम्मान निधिÓ, ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास, आयुष्मान, स्वच्छ भारत मिशन, जैसी दर्जनों जनहित की योजनाओं से करोड़ों लोगों को लाभ मिल रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान की कांग्रेस सरकार हर मोर्चे पर नाकाम है। चुनाव जीतने के लिए प्रदेश के लोगों से झूठ बोला। सरकार बन जाने के बाद एक भी वादे को पूरा नहीं किया। चुनाव के समय हर नेता कांग्रेस की दस गारंटियों की बात करते थे लेकिन सरकार बन जाने के बाद सभी नेता गारंटियों का नाम ही नहीं ले रहे हैं। वह भूल गए हैं कि इस तरह से काम नहीं चलेगा। प्रदेश के लोग लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के इस झूठ का जवाब देने के लिए तैयार है।
जोगिंदर नगर उप मंडल के सनातन धर्म सभा मंदिर में शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी सचिव जीवन ठाकुर व अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ को लेकर हवन का आयोजन किया गया। पंडित मुकेश जगुड़ी द्वारा मंत्रोच्चारण कर हवन करवाया गया। इस अवसर पर वार्ड 5 के पार्षद प्यार चंद ठाकुर, जिला महासचिव रंजन शर्मा, महिला कांग्रेस की ब्लॉक अध्यक्ष ममता कपूर, अनीता ठाकुर, मनोनीत पार्षद प्रशांत, नौहली पंचायत प्रधान रामलाल, संजय कुमार, राजेश कुमार, पीतांबर व अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
25 विधानसभा हलकों से सिर्फ एक मंत्री राजयोग उसका जिसे मिले कांगड़ा और मंडी का साथ सत्ताधारी कांग्रेस के हिस्से में है 11 सीटें क्या कांगड़ा में कांग्रेस की खींचतान डाल रही अड़ंगा ! भाजपा में मंडी को भरपूर मान, कांगड़ा दिखे हल्का मंडी में कांग्रेस को चाहिए व्यवस्था परिवर्तन 12 जिलों में 68 विधानसभा सीटें और 25 सीटें सिर्फ दो जिलों से। यानी करीब 37 प्रतिशत सीटें इन्हीं दो जिलों से है। इसीलिए कहते है हिमाचल प्रदेश में उसका राजयोग पक्का समझो जिसे कांगड़ा और मंडी का साथ मिल जाएँ। इन दो जिलों की चाल, सत्ता की ताल बदल देती है। 15 सीटों वाला जिला कांगड़ा और 10 सीटों वाला जिला मंडी सियासी दलों को मजबूर भी कर सकते है और मजबूत भी। ये ही कारण है की इन्हें सत्ता में भागीदारी भी उसी लिहाज से मिलती रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में जिला कांगड़ा कांग्रेस के साथ गया और पार्टी 10 सीटें ले आई। वहीँ मंडी ने भाजपा और जयराम ठाकुर का मान रखा और दस में से नौ सीटों पर भाजपा को शानदार जीत मिली। दोनों जिलों की 25 में से 11 पर कांग्रेस को जीत मिली। खेर सत्ता परिवर्तन हुआ और कांग्रेस की सरकार बन गई। मंडी ने कांग्रेस का साथ नहीं दिया लेकिन कांगड़ा का भरपूर प्यार मिला। सिलसिलेवार दोनों ज़िलों की बात करते है और शुरुआत करते है ज्यादा सियासी वजन वाले जिला कांगड़ा से। कांगड़ा को जिस सियासी अधिमान की अपेक्षा थी वो अब तक नहीं मिला, कैबिनेट में इसका वजन अब तक हल्का है। कांगड़ा के हिस्से में अब तक सिर्फ एक मंत्री पद आया है। कैबिनेट में तीन स्थान खाली है और जाहिर है इसमें कांगड़ा का भी हिस्सा होगा, लेकिन जो मंत्रिपद पांच साल के लिए मिल सकते थे अब चार साल के लिए मिलेंगे, या उससे थोड़ा कम ज्यादा। जाहिर सी बात है कैबिनेट के चेहरे तय करने में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अड़ंगा डाल रही है, जिसका खमियाजा कांगड़ा को भुगतना पड़ रहा है। दूसरा सवाल ये भी है कि क्या कांगड़ा में वजनदार नेता नहीं रहे जो जिला के हक की बात रखे। जीएस बाली के रहते कांगड़ा का दावा सीएम पद के लिए था लेकिन अब हालात ये है कि मंत्रिपद के लिए भी कांगड़ा तरस गया है। दूसरा बड़ा नाम सुधीर शर्मा भी पार्टी के भीतरी संतुलन में अब तक कतार में ही है। वीरभद्र सरकार के समय सुधीर और स्व बाली, दोनों ही नेता सियासी मोर्चे पर वॉयलेंट रहते थे, अब बाली रहे नहीं और सुधीर साइलेंट है। दिग्गज ओबीसी नेता चौधरी चंद्र कुमार कांगड़ा से एकलौते मंत्री है, पर उनके जूते में भी उनके पुत्र और पूर्व विधायक नीरज भारती का पांव नहीं पड़ रहा। यानी मंत्री के घर में भी असंतोष है। जिला से दो सीपीएस बनाये गए है मगर ये सीपीएस रहेंगे या नहीं ये भी कोर्ट को तय करना है। आरएस बाली को जरूर कैबिनेट रैंक दिया गया है। इनके अलावा यादविंद्र गोमा, संजय रतन, भवानी पठानिया, मलेंद्र राजन और केवल पठानिया भी अपने अपने हलकों की सियासत में सिमित है। दिलचस्प बात ये है कि जला कांगड़ा के ये दस विधायक चार अलग-अलग गुटों से है। इनमें से तीन गुट कभी साथ थे, अब इनके बिखराव ने इन्हें कमजोर कर दिया है। बहरहाल कांगड़ा को आश्वासन तो मिल रहे है और शायद जल्द मंत्री पद भी मिले, लेकिन इस विलम्ब से कांग्रेस को हासिल क्या होगा, ये बड़ा सवाल है। वहीँ पद देकर किसका कद बढ़ाया जाता है, पुरानी निष्ठाएं बरकारार रहती है या बदलती है, इस पर भी निगाह रहेगी। बात भाजपा की करें तो भाजपा संगठन में भी कांगड़ा हल्का ही दीखता है। उम्मीद थी कि भाजपा का अगला प्रदेश अध्यक्ष जिला कांगड़ा से हो सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कांगड़ा से प्रदेश संगठन में एक महामंत्री है, वहीँ अन्य पदों में भी कांगड़ा को वैसी तवज्जो नहीं दिखती जैसी अपेक्षा थी। कांग्रेस की तरह ही यहाँ भाजपा में भी गुट है और गुटों में भी गुट है। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहाँ भाजपा को सिर्फ चार सीट मिली थी, दो कैबिनेट मंत्री और संगठन के महामंत्री भी चुनाव हार गए थे। कांगड़ा में कमजोरी पार्टी के सत्ता से वनवास का बड़ा कारण बनी। अब बात जिला मंडी की करते है। 2017 के विधानसभा चुनाव से ही मंडी भाजपा के साथ है। तब भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था। वहीँ 2022 में भी कांग्रेस को सिर्फ एक सीट मिली। भाजपा ने पांच साल मंडी को सीएम पद दिया और विपक्ष में आकर नेता प्रतिपक्ष का पद। यहाँ संकट कांग्रेस के समक्ष है। कांग्रेस के बड़े बड़े दिग्गज चुनाव हार गए जिनमें सीएम पद के दावेदार कौल सिंह ठाकुर भी है। जिला में एकमात्र विधायक है धर्मपुर से चंद्रशेखर। ऐसे में यहाँ मंत्री पद की संभावना न के बराबर है। किन्तु चंद्रशेखर को किसी अहम पद पर एडजस्ट जरूर किया जा सकता है। बहरहाल यहाँ भाजपा के लिए सब दुरुस्त है लेकिन 2017 और 2022 की पुर्नावृति न हो, इसके लिए कांग्रेस को मजबूत एक्शन प्लान की दरकार जरूर है। जिला मंडी में कांग्रेस के लिए आँतरिक व्यवस्था परिवर्तन समय की जरुरत है। मंत्रिपद न सही लेकिन मंडी को भागीदारी भरपूर देनी होगी।
कहा, सत्ता हथियाने के लिए लिया झूठ का सहारा, अब मुझे ही करते हैं रोज याद सत्ता हथियाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने हमेशा झूठ का सहारा लिया है। हिमाचल में भी इस बार कांग्रेस ने झूठी गारंटियां दी और सरकार बनते ही विकास करने के बजाय बदले की भावना से काम किया और 10 महीनों में ही हजारों कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया। इस निक्कमी सरकार ने मात्र 10 महीने में ही 10 हजार करोड़ रुपये का ऋण ले लिया, लेकिन एक भी विकास कार्य नहीं किया। ये आरोप सरकाघाट के बलद्वाड़ा में लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष एवम पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर पलटवार किया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सुक्खू को सोते जागते मेरी ही याद आ रही है। सार्वजनिक मंच से बात कहते हुए उन्हें शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और शालीनता से अपनी बात रखनी चाहिए। मेरे से सवाल पूछने के बजाय पहले मुख्यमंत्री सुक्खू यह बताएं कि मंडी की जनता के लिए उन्होंने इन 11 महीनों में किया ही क्या है। सुक्खू को शायद पहले मालूम नहीं है कि सोमवार को जिस पड्डल मैदान में उन्होंने राहत वितरण कार्यक्रम किया उन्होंने कहा कि जहां से मुख्यमंत्री खड़े होकर कह रहे थे उसके बगल में प्रदेश का दूसरा विश्वविद्यालय भाजपा ने स्थापित किया था। यहीं पर 45 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले वल्लभ महाविद्यालय के भवन का निर्माण कार्य शुरु किया था। मुख्यमंत्री का हेलीकाप्टर जिस हेलीपोर्ट पर उतरा था, वह अब भाजपा ने बनाया था। हेलीपोर्ट से कुछ दूरी पर डेढ़ सौ करोड़ की लागत से शिवधाम का काम भाजपा सरकार के समय शुरु हुआ था। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय को बंद करने की साजिश रची जा रही है। वल्लभ महाविद्यालय व शिवधाम का काम बंद करवाना सुक्खू सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है। सुक्खू यह कह कर रहे हैं कि जयराम ने मंडी के लिए कुछ नहीं किया,अगर कुछ नहीं किया होता तो मंडी की जनता विधानसभा चुनाव में 10 से नौ सीटें नहीं देती। जयराम ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि यह सुक्खू की किस्मत है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी थोड़े से वोटों के अंतर से जीत गई और वह मुख्यमंत्री बन गए। मगर यह दौर ज्यादा लंबा चलने वाला नहीं हैं। आने वाला समय कठिन होगा। बेहतर होगा कि सुक्खू व्यक्तिगत छींटाकशी कर आरोप लगाने के बजाय प्रदेश के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करें। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री धर्मपुर पहुंचे और यहां पूर्व मंत्री एवम भाजपा नेता महेंद्र सिंह ठाकुर के नव गृह प्रवेश कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान पूर्व मंत्री राजिंदर गर्ग, भाजपा के विधायक राकेश जंबाल, दलीप ठाकुर, दीप राज़, इंद्र सिंह गांधी, पूर्ण चंद ठाकुर सहित अन्य भाजपा नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
हिमाचल युवा कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष यदोपति ठाकुर को मध्य प्रदेश चुनाव में अहम जिम्मेदारी मिली है। यदोपति को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव व मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी संजय दत ने राष्ट्रीय महासचिव व मध्य प्रदेश के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की स्वीकृति से जिला झावूआ का प्रभारी नियुक्त किया है। गौरतलब है कि यदोपति ठाकुर इससे पहले हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब सहित कई राज्यों में चुनाव प्रचार का काम कर चुके हैं। यदोपती ठाकुर हिमाचल से एक मात्र युवा हैं जिन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने यह जिम्मेवारी सौंपी है। यदोपति ठाकुर पिछले 18 वर्षों से विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रह कर कांग्रेस पार्टी के लिए कार्य कर रहें है। वहीं, यदोपति ठाकुर ने अपनी नियुक्ति के लिये राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला व राष्ट्रीय सचिव संजय दत सहित शीर्ष नेतृत्व का आभार प्रकट किया है।
जयराम ठाकुर ने सभी प्रदेश वासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाएं शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश के लोगों को विजय दशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विजय दशमी यह त्यौहार हर प्रकार की बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह हमें बताती है बुराई हमेशा पराजित होती है और अच्छाई हमेशा जीतती है। उन्होंने विजय दशमी के शुभ अवसर पर प्रदेश वासियों के सुख, समृद्धि और प्रसन्नता की प्रार्थना की।
-चुनाव न करवाकर कांग्रेस नगर निगम में रहने वाले लोगों को कर रही है परेशान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार हर तरफ़ से तानाशाही की तरफ बढ़ती जा रही है। प्रदेश में नगर निगमों के मेयर और डिप्टी मेयर का ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो गया है लेकिन सरकार चुनाव नहीं करवा रही है।जिसके कारण बहुत से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आपदा राहत और पुनर्निर्माण और पुनर्वास के कार्यक्रमों में बहुत देरी हो रही है। इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने सरकार द्वार नगर निगमों, नगर पंचायतों को जारी किए गए धन की आधि राशि वापस मांगने पर सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह बचकानी हरकत है। जो पैसे भेजे गये थे, उन पैसों से निर्धारित योजनाओं पर काम शुरू हो गए हैं। कुछ काम पूर्ण होने की कगार पर हैं ऐसे में वह धनराशि वापस कहां से आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आए दिन कोई न कोई ऐसा काम करती है जो सिफ़र् अपरिपक्वता से भरा हुआ और हास्यास्पद लगता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपदा की वजह से प्रदेश भर में भारी नुक़सान हुआ है। इस नुक़सान से उबरने और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ज़िम्मेदार संस्थाओं का सुचारू रूप से कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में जब मेयर और डिप्टी मेयर जैसे अहम पदों पर कोई नहीं होगा तो राहत और पुनर्वास के काम प्रभावी तौर पर कैसे हो सकते हैं। मेयर किसी शहर का पहला नागरिक होता हैं।, उसके कार्यक्षेत्र में सभी प्रमुख कार्यों में उनकी अहम भूमिका होती है। जनता द्वारा चुने जाने के कारण जनता के पार्टी उनकी भी जवाब देही होती हैं। ऐसे में उन्हें कार्य न करने देना लोकतांत्रिक व्यस्था का अपमान हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार अपनी मनमानी बंद कर दे और तानाशाही वाली मानसिकता से बाहर आए। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की 4 नगर निगम में मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव को सरकार जानबूझकर लटका रही है। प्रदेश सरकार ने सोलन, धर्मशाला, पालमपुर व मंडी नगर निगम में मेयर व डिप्टी मेयर के अढ़ाई वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने की अधिसूचना 12 अक्तूबर को ही जारी की थी। जिससे सोलन, धर्मशाला, पालमपुर व मंडी नगर निगम में मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई बड़ा मतदान नहीं होना हैं। जिसमें बहुत वक़्त और संसाधनों की आवश्यकता होती हैं। बस सरकार जानबूझकर इस चुनाव को टाल रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार जल्दी से जल्दी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को संपन्न करवाए। उन्होंने कहा कि भले ही कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यस्था में वह झूठ बोलकर, झूठे वादे करके आई है लेकिन लोकतंत्र में तानाशाही चलाने की कोशिशें बहुत भारी पड़ेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश के 5 नगर निगम सहित 60 शहरी निकायों को 50 फीसदी ग्रांट इन एड सरकार द्वारा वापस मांग ली है। इससे त्रासदी के बाद पुनर्वास की योजनाएं बनाने में लगे शहरी निकायों की परेशानी बढ़ गई है। सरकार के निर्देश पर निदेशक शहरी विकास विभाग ने नगर निगम के आयुक्त, नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी व नगर पंचायतों के सचिवों को पत्र लिखकर ग्रांट वापस करने के निर्देश दिए हैं। छठे राज्य वित्त आयोग द्वारा जुलाई माह में सभी शहरी निकायों को करीब 153.64 करोड़ रुपए की ग्रांट इन एड जारी की थी। अब इसमें से 76.82 करोड रुपए सरकार वापस मांग रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि हैरानी की बात है कि इस पैसों से निर्धारित परियोजनाओं पर काम शुरू हो गया है ऐसे में नगर निगम और स्थानीय निकाय यह पैसे कहां से वापस करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को इस तरह के बचकाने कामों से बचना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश के लोगों की सुविधा को देखते हुए राज्य सरकार ने सफेदा, पॉपलर, बांस की लकड़ी के साथ-साथ कुठ (औषधीय पौधे) को प्रदेश से बाहर ले जाने पर लगी रोक को हटा दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए आज यहां कहा कि अब राज्य के लोग इन चार प्रजाति की लकड़ी को बिना परमिट के प्रदेश से बाहर ले जा सकते हैं। साथ ही इन प्रजाति की लकड़ी की ढुलाई राज्य के भीतर भी बिना अनुमति के हो पाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में बहुत से किसान इन प्रजाति के पेड़ों को व्यवसायिक स्तर पर उगाते हैं, ऐसे में उनके हितों को देखते हुए राज्य सरकार ने इन चार प्रजातियों पर लगे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने खैर की लकड़ी, कत्था, देवदार के तेल सहित प्रदेश में उगने वाली अन्य जड़ी-बूटियों को प्रदेश से बाहर ले जाने पर लगे प्रतिबंध को भी हटा दिया है। हालांकि इन वन उत्पादों को प्रदेश से बाहर ले जाने के लिए वन विभाग से परमिट लेना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन विभाग से विभिन्न प्रकार के ई-परमिट प्राप्त करने के लिए हिमाचल प्रदेश में नेशनल ट्रान्ज़िट पास सिस्टम शुरू करने जा रही है। यह सिस्टम शुरू करने वाला हिमाचल प्रदेश देश का छठा राज्य होगा, जिसके शुरू होने से जहां लोगों को ई-परमिट प्राप्त करने में सुविधा होगी, वहीं विभाग के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
मंडी शहर के साथ लगदी सौली खड्ड पुल से आज एक पंजाब नंबर की इनोवा कार अनियंत्रित होकर नीचे जा गिरी। हादसे के समय कार में एक युवक और दो युवतियां घायल हुई हैं। हादसे का पता लगते ही स्थानीय लोगों ने घायलों को कार से बाहर निकालकर इलाज के लिए मंडी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। एक युवती की रीढ़ की हड्डी में चोट आई है, जबकि अन्यों को भी फ्रेक्चर हुआ है। हादसे के सवार तीनों लोग पंजाब के रहने वाले हैं जो कुल्लू मनाली से पंजाब की तरफ लौट रहे थे। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने भी मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर दी है।


















































