ज्वालामुखी: आषाढ़ मास की अष्ठमी को अवतरित हुई थी मां ज्वाला, माता को लगे 56 भोग
विनायक ठाकुर । ज्वालामुखी
प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि मनाई जा रही है। पुजारी व न्यास सदस्य सौरभ शर्मा ने बताया कि इन्ही गुप्त नवरात्रों की आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मां ज्वाला ‘प्रकटोत्सव’ आज वीरवार को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि मां ज्वाला इसी दिन इस स्थान पर ज्योति के रूप में प्रकट हुई थीं। ‘प्रकटोत्सव’ के दौरान मंदिर के पुजारियों द्वारा नवमी को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही माता ज्वाला की भव्य चौकी का 3 दिन तक भव्य आयोजन किया गया और धूमधाम से व विधिवत पूजा-अर्चना के साथ माता ज्वाला को 56 भोग लगाए गए। नौ दिन तक चलने वाले गुप्त नवरात्र का समापन भी 8 जुलाई शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा।
माता ज्वाला के प्रकटोत्सव पर पुजारी वर्ग द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना व 56 भोग लगाकर माता का जन्मदिन मनाया गया। मंदिर ज्वालामुखी एसीएफ राजेंद्र कुमार ने बताया कि हर वर्ष की भांति परंपरा के अनुसार मां ज्वाला का 'प्रकटोत्सव' मनाया जा रहा है और प्रसाशन द्वारा सभी इंतजाम किए गए हैं। विधिवत परंपरागत पूजा-अर्चना कर ज्वाला माता का जन्मदिन मनाया गया। श्रद्धालु ने बताया कि माता ज्वाला के जन्मदिवस पर दर्शन किए बहुत आनंद आया। कांगड़ा घाटी स्थित ज्वालामुखी शक्तिपीठ की मान्यता 51 शक्तिपीठों में सर्वोपरि मानी गई है। इन पीठों में यही एक ऐसा शक्तिपीठ है, जहां मां के दर्शन साक्षात ज्योतियों के रूप में होते हैं।
