कांगड़ा के नंदन शर्मा ने लिया मरणोपरांत नेत्रदान का निर्णय
मनोज कुमार। कांगड़ा
नेत्रदान महादान माना जाता है। इसी का उदहारण कांगड़ा के साथ लगती पंचायत अब्दुलापुर के रहने वाले समाजसेवी नंदन शर्मा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा के नेत्र बैंक में जाकर मरणोपरांत नेत्रदान का निर्णय कर मिशाल पेश की। क्योंकि इस दान से दो जिंदगियां रोशन होती हैं। जिंदगी भर जिस शख्स ने कभी दुनिया नहीं देखी और केवल अंधेरे में ही जिया उनकी आंखों में रोशनी आ जाए, तो इससे खुशी की बात और क्या हो सकती है। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन समाज नेत्रदान के प्रति जागरूक हो रहा है।
लोग चाहते हैं कि मृत्यु के पश्चात भी लोगों का भला किया जा सके। इसलिए मरणोपरांत नेत्रदान की प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसा ही उदाहरण नंदन शर्मा ने पेश किया है और लोगों को भी नेत्र दान करने के बारे जागरूक किया। उन्होंने कहा कि सभी को नेत्रदान के लिए नेत्रदान के लिए आगे आना चाहिए, जिससे कतार में खड़े हजारों लोग जिनका जीवन अंधेरे में खड़ा है, उनके जीवन में रोशनी भर दें। नंदन शर्मा कांगड़ा यूथ चेरिटेबल के अध्यक्ष हैं, जो कि टांडा में लंगर का आयोजन करती आ रही है।
