पालमपुर : आई एच बी टी द्वारा केसर एवं हींग की पौध सामग्री का वितरण आत्मनिर्भरता की ओर प्रयास
सीएसआईआर हिमालय जैवसम्पदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आई एच बी टी), पालमपुर में शनिवार को कृषि विभाग, किन्नौर, हिमाचल प्रदेश सरकार को केसर एवं हींग के बीज व पौध का वितरण किया गया। डॉ संजय कुमार निदेशक, हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा शनिवार को केसर के बीज की पहली खेप (840 किलोग्राम केसर कोर्म) व 3250 हींग के पौधे कृषि विभाग के अधिकारियों को वितरण के लिए सौंपे गए। यह बीज एवं पौध सामग्री हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर के गैर-पारंपरिक क्षेत्रों के लिए सौंपी गई है। हिमाचल प्रदेश सरकार की महत्वकांशी 'कृषि से संपन्नता योजना के अंतर्गत आई एच बी टी संस्थान व कृषि विभाग इस वर्ष 1 हेक्टेयर क्षेत्र को केसर व 3 हेक्टयर क्षेत्र हींग की खेती के अंतर्गत लाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इस वर्ष किन्नौर जिले में केसर की खेती 0.24 हैक्टर क्षेत्रफल और हींग की खेती 0.5 हैक्टर क्षेत्रफल में की जाएगी। डॉ. संजय कुमार ने बताया कि वर्तमान में केसर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के पंपोर और किश्तवाड़ जिलों में उगाया जाता है जिसका वार्षिक उत्पादन 6-7 टन तक पहुंच जाता है जो कि भारत में 100 टन की वार्षिक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसी प्रकार देश में प्रति वर्ष 1542 टन से अधिक शुद्ध हींग की खपत होती है तथा देश में प्रतिवर्ष 942 करोड़ रूपये से अधिक हींग के आयात पर खर्च किए जाते हैं। भारत में हींग की आपूर्ति के लिए अफगानिस्तान, उज्वेकिस्तान तथा ईरान प्रमुख देश हैं। देश में हींग का आयात मुख्यतः (कुल आयात का 90 प्रतिशत) अफ़गानिस्तान से किया जाता है। अतः प्रदेश सरकार का कृषि विभाग, सीएसआईआर हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान, पालमपुर के साथ मिलकर केसर व हींग की खेती के पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के कुछ चिन्हित क्षेत्रों में जिनकी जलवायु केसर व हींग के लिये उपयुक्त हो सकती है वहाँ पर पायलट योजना के अंतर्गत कुछ किसानों द्वारा संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग अधिकारियों की देख रेख में ही खेती कारवाई जा रही है जो की भारत को कैंसर व हींग के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की और एक कदम है। निदेशक ने आगे कहा कि गत माह ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री, हिमाचल सरकार, वीरेंद्र कंवर द्वारा संस्थान का दौरा किया गया व हींग और केसर परियोजनाओं के अंतर्गत आई एच बी टी पालमपुर द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी ली व विज्ञानियों द्वारा कोविड-19 महामारी के बावजूद इन परियोजनाओं के लिए किये गए कार्यों की सराहना की गई।
डॉ राकेश कुमार, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं केसर परियोजना समन्वयक (पीआई) ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के गैर पारंपरिक क्षेत्रों संस्थान द्वारा केसर की खेती का प्रयास किया जा रहे हैं। किसानों एवं कृषि अधिकारियों को इसकी खेती के तरीके एवं उन्नत कृषि तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है एवं बीज उपलब्ध किया जा रहा है। जिला किन्नौर के अलावा जिला चंबा, मंडी, कुल्लू, शिमला एवं लाहौल स्पीति के कुछ चयनित इलाक़ों में भी इस वर्ष केसर की एक हेकटेयर क्षेत्र में खेती की जाएगी। केसर प्राचीन काल से भारतीय व्यंजनों में उपयोग की जाने वाली एक महत्वपूर्ण मसाला फसल है जो औषधीय गुणों से भी भरपूर है। केसर की गुणवत्ता एवं इसकी कीमत तीन मार्कर कंपाउंड्स जैसे क्रोसिन (रंग के लिए जिम्मेदार), पिकोक्रोसीन (स्वाद के लिए जिम्मेदार) एवं सैफ्रानाल (सुगंध के लिए जिम्मेदार) की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
ड़ा अशोक कुमार प्रधान विज्ञानी एवं हींग परियोजना समन्वयक ने बताया की हींग (फेरुला एसाफोईटिडा) एपिएसी (गाजर) कुल का एक बहुवर्षीय पौधा है जो मूलतः ईरान व अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में जंगली रूप में पाया जाता है। भारत में हींग का उपयोग मसाले के तौर पर किया जाता है, वहीं इसके औषधीय गुण भी हैं तथा आयुर्वेद के अनेक ग्रन्थों में भी इसके औषधीय उपयोग वर्णित है। हींग एक कोमलतने वाला पौधा है जोकि 2 मीटर तक ऊँचा होता है तथा इसके पत्ते विछेदित होते हैं। इसकी जड़ों से रिसने वाले वानस्पतिक दूध (ओलियोगमराल / रस / शुद्ध हींग) को शुष्क कर के हींग के रूप में प्रयोग किया जाता है। सीएसआईआर हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (जाईएचबीटी), पालमपुर द्वारा वर्ष 2018 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, नई दिल्ली के माध्यम से हींग के बीजों का आयात ईरान से किया गया। बीज के माध्यम से तैयार किए गए हींग के पौधों का उच्च तुंगता केंद्र, रिबलिंग जिला लाहौल-स्पीति में रोपण किया गया तथा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों को चिन्हित कर परीक्षण के तौर पर पौधे लगाए गए डॉ आर के पुरथी निदेशक कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा गत सप्ताह सीएसआईआर आई एच बी टी पालमपुर का दौरा किया गया व इन परियोजनाओं के अंतर्गत किये कार्यों की समीक्षा व सराहना की। उनके अनुसार कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार व सीएसआईआर-आई एच बी टी पालमपुर मिलकर किसानों की आजीविका में सुधार करने में मदद करेंगे और केसर व हींग के आयात को कम करके भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा।
