Shimla News : दृष्टिबाधित बेटियों के सपनों में 'उमंग' के रंग भर रहा उमंग फाउंडेशन
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों की दृष्टिबाधित बेटियों के सपनों में उमंग फाउंडेशन रंग भर रहा है। वे अंधेरों से अपनी लड़ाई में उमंग की मेरिट छात्रवृत्ति, शिक्षा और कम्प्यूटर को हथियार बना कर उजाले की ओर कदम बढ़ाने लगी हैं। उमंग फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.अजय श्रीवास्तव में कहा कि दृष्टिबाधित बेटियों के सशक्तिकरण की हल्की सी आहट से समाज की इस नकारात्मक सोच में बदलाव आ रहा है कि है कि ये बेचारी अन्धी लड़कियां कुछ नहीं कर सकतीं। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सुगम्य पुस्तकालय में टॉकिंग सॉफ्टवेयर वाले कंप्यूटरों से पढ़ाई करती दृष्टिबाधित पीएचडी स्कॉलर-प्रतिभा चौहान, मुस्कान नेगी, इतिका चौहान यूजीसी नेट और सेट पास कर चुकी हैं। एमए कर रही प्रतिभाशाली छात्राएं-शगुन चौहान, चन्द्रमणी, अंजना कुमारी कम्प्यूटर से आँखों का काम लेती हैं।
गौरतलब है कि शिमला के पोर्टमोर स्कूल में दृष्टिबाधित बेटियों की पढ़ाई के अधिकार के लिए लिए प्रो.अजय श्रीवास्तव ने वर्ष 2011 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उस पर फैसले से हिमाचल दिव्यांग बच्चों को पहली कक्षा से लेकर विश्वविद्यालय में पीएचडी तक की पढ़ाई निशुल्क उपलब्ध कराने और सबसे ज्यादा छात्रवृत्ति देने वाला देश का पहला राज्य बन गया। उनके प्रयासों से दृष्टिबाधित बेटियों को सुंदरनगर स्थित आईटीआई के कंप्यूटर डिप्लोमा कोर्स में 2016 से प्रवेश मिलना शुरू हुआ था। उमंग फाउंडेशन ने अनेक दृष्टिबाधित बेटियों को पढ़ाई के लिए लैपटॉप, डेज़ी प्लेयर और एंजेल प्लेयर जैसे उपकरण भी दिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को परीक्षा लिखने के लिए उमंग से जुड़े विद्यार्थी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर तक राइटर की भूमिका निभाते हैं।
