कांगड़ा : टांडा में 11 महीने के बच्चे का न्युरल ट्यूब डिफेक्ट (तंत्रिकानली दोष) का सफल ऑपरेशन
मनोज कुमार। कांगड़ा
11 महीने का बच्चा जोकि ज्वाली (ज़िला, काँगड़ा ) का रहने वाला है कुछ महीने पहले नूरो सर्जरी विभाग में पीठ में एक बड़ी सी गांठ और बड़ा सिर लेकर काफ़ी गंभीर स्थिति में आया। जब बीमारी कि गंभीरता का पता चला तो मां–बाप ने बच्चे को पीजीआई चंडीगढ़ ले जाने कि इच्छा जताई, लेकिन वहां जब 15 दिन तक ऑपरेशन तो दूर की बात, दाखिला तक न हो पाई, तो बच्चे को वापस टांडा में एडमिट किया गया। इस जटिल ऑपरेशन को नूरो सर्जन, डॉ मुकेश कुमार और उनकी टीम ने 4 घंटे की मेहनत के बाद सफलता पूर्वक किया। 11 महीने के बच्चे का ऑपरेशन, अनेसथिस्ट, डॉ जयसिंह, डॉ. विपिन गर्ग और उनकी टीम के लिए भी बहुत मुश्किल रहा। इस तरह का ये पहला ऑपरेशन हिमाचल में किया गया और अब इन मरीजों को प्रदेश के बाहर जाने कि जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्या है न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (तंत्रिका नली दोष)?
न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट दिमाग, स्पाइनल कॉर्ड और रीढ़ की हड्डी की जन्मजात विकृति है। दरअसल, भ्रूण के विकास के शुरुआती दिनों में कुछ सेल्स मिलकर एक ट्यूब का निर्माण करते हैं, जिसे न्यूरल ट्यूब कहा जाता है और यह पूर्ण रूप से बंद होने में विफल हो जाए। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट गर्भावस्था के पहले 5 हफ्तों में ही हो जाता है। यह बहुत ही गंभीर जन्मजात रोग है। अगर बच्चे का सही समय पर इलाज़ न हुआ और तब भी जान बच गई, तो वह विभिन्न प्रकार की शारीरिक अथवा मानसिक विकलांगता का शिकार हो सकता है।
प्रेग्नेंसी में इन गलतियों की वजह से बच्चा हो सकता है डिफेक्ट का शिकार।
तंत्रिका नली दोष होने के कारण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं ।
शरीर में फोलेट विटामिन की कमी या माँ द्वारा फॉलिक ऐसिड का सेवन न करने से ।
मधुमेह की समस्या होना।
परिवार में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का इतिहास।
मिर्गी की दवाईयां व मनोरोग दवा आदि pregnancy के दौरान लेने कि वजह से ।
न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट के लिए जोखिम कारक ( risk factors ) क्या हैं?
एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) द्वारा प्रकाशित एक शोध के
अनुसार नीचे बताई गई बातों के कारण न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट होने का खतरा बढ़ सकता है,
जैसे
शराब का सेवन।
धूम्रपान करना।
शरीर में मल्टीविटामिन की कमी।
शिशु को न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट होने से क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं?
मानसिक रूप से विकलांग।
कमजोर मांसपेशियां।
लकवा।
मूत्राशय पर अनियंत्रण।
प्रेगनेंसी में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट से कैसे बचें?
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि गर्भवती होने के बाद एक से तीन महीने पहले से ही फोलिक एसिड की। गोलियां लेनी शुरू करें। गर्भावस्था के दौरान फॉलिक ऐसिड की पर्याप्त मात्रा (0.4 mg -4mg/दिन) शामिल। करने से न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा 70 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है । मोटापा व मधुमेह से बचकर और शराब व धूम्रपान का सेवन न करने से भी तंत्रिका नली दोष के खतरे को कम किया जा सकता है। अगर गर्भवती महिला मिर्गी-रोधी दवाओं या एंटी-साइकोटिक दवाओं का सेवन कर रही है, तो गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें। न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट ऐसी समस्या है, जिसके कारणों पर शुरुआत से ध्यान न देने के परिणाम बुरे हो सकते हैं। इसलिए, सिर्फ छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर इस समस्या से बचा जा सकता है। गर्भवती महिला की थोड़ी-सी सावधानी होने वाले शिशु को स्वस्थ और खुशहाल जीवन दे सकती है।
