देहरा : भागवत के श्लोकों की ध्वनि मात्र से वातावरण होता है पवित्र : आचार्य सुमित भारद्वाज
नेहरन पुखर में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन आचार्य सुमित भारद्वाज ने भागवत विस्तार की कथा वर्णन करते हुए कहा जिस समय वेदव्यास 17 पुराणों की रचना कर चुके थे। एक वेद के चार भाग कर चुके थे फिर भी उनके मन को संतुष्टि न हुई तब नारद का आगमन होता है। नारद वेदव्यास को चार श्लोक प्रदान करते हैं। जिसको चतुश्लोकी भागवत कहा जाता है। वेदव्यास ने चतुश्लोकी भागवत का विस्तार 18000 श्लोकों में जिसमें भगवान और भक्तों के चरित्र हैं। उसके बाद व्यास ने सृष्टि के विस्तार की कथा का वर्णन किया, जिसमें मनु महाराज की 5 संतानें तीन बेटियां तथा दो बेटा हुए। ब्यास ने उन बेटियों मंजली बेटी देवहूति का परम पावन चरित्र श्रवण करवाया, जिनके पुत्र कपिल भगवान हुए उनका का चरित्र श्रवण करवाया, जो कि ज्ञान के अवतार हैं। ब्यास ने बताया भागवत के श्लोकों की ध्वनि मात्र से वातावरण पवित्र हो जाता है , ये कथा कल्पवृक्ष के समान मनुष्यों के मनोरथों को पूर्ण करने वाली है। पापी हो या धर्मी हो सभी का उद्धार करती है, भागवत
इसका श्रवण जीवन में शांति प्रदान करता है और मन की शुद्धि का सत्संग से बढ़कर और कोई साधन नहीं।
