कांगड़ा : समाज को बदलने के लिए युवाओं को श्रेठ भूमिकाएं निभाने की आवश्यकता-साध्वी त्रिपदा भारती
मनाेज कुमार। कांगड़ा
नगर परिषद मैदान कांगड़ा में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से श्रीमद् देवी भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। जिसके पंचम दिवस में कथा व्यास साध्वी सुश्री त्रिपदा भारती जी ने पंच प्रकृति संग्यक देवियों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पांचों देवियां सृष्टि को व्यवस्थित करती हैं और इन्हीं में एक हैं श्री राधा जी। राधा जो भक्ति व प्रेम की प्रतिमूर्ति है और उनका चरित्र हमें प्रभु की शास्वत भक्ति का संदेश देता हैं, जो हमारे जीवन का एक मात्र लक्ष्य है, किंतु आज हम अपना लक्ष्य भूल कर इस नश्वर संसार में व्यर्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसी कारण हम अपने जीवन में आनंद नहीं प्राप्त कर पाते। इसीलिए महापुरुषों ने कहा जीवन की पूर्णता प्रभु भक्ति में ही है। इसके अतिरिक्त साध्वी जी ने मा दुर्गा की कथा में निहित आध्यात्मिक रहस्य संगत के समक्ष रखे।
उन्होंने कहा मा दुर्गा ने दुर्गम का वध किया, तभी वे दुर्गा कहलाई। दुर्गम हमारे अंदर के दुर्गुणों का प्रतीक है। जिन्हें मां समाप्त कर सकती है। गुरु कृपा से जब हमे ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होगी, तब मां का प्राकट्य हमारे अन्तःकरण में होगा और हमारे अवगुणों का अंत भी तभी संभव होगा। इसके अलावा साध्वी ने आज के युवा वर्ग को जागृत करते हुआ कहा समाज को बदलने के लिए युवाओं को अपनी श्रेठ भूमिकाएं निभाने की आवश्यकता है, किंतु आज का युवा वर्ग पथभ्रष्ट हो चुका है। आज के युवा की पहचान चरित्र हीनता नशा इत्यादि हो गई है। आज स्वामी विवेकानंद के विचारों की लड़ाई वीडियो गेम खेलने वाली पीढ़ी से है। हम सभी जानते हैं कि संपूर्ण विश्व में से भारत एक युवा शक्ति से संपन्न देश है।
अगर हमारी युवा वर्ग जागृति हो जाए, तो हम अपने राष्ट्र को सफलता की बुलंदियों तक पहुंचा सकते हैं और यह जागृति अध्यात्म के बिना संभव नहीं है। दीप प्रज्वलन की रस्म आरएस बाली (राष्ट्रीय महामंत्री एआईसीसी), डीएस ठाकुर (डलहौजी विधानसभा, भाजपा जिला चंबा अध्यक्ष व मार्केट कमेटी चेंयरमेन), वेद शर्मा ( अध्यक्ष ब्राह्मण कल्याण बोर्ड), राकेश कथूरिया (जिला समवाददाता दिव्य हिमाचल) दिव्या ज्योति जाग्रति संस्थान से स्वामी हरिशानंद, स्वामी गुरुदेवानंद, वीपी शर्मा ने सभी का अभिनंदन किया। इसके अतिरिक्त कथा में सुमधुर भजनों का गायन किया व कथा का समापन मां की मंगल आरती से साथ किया गया।
