हिमाचल पंचायत चुनाव: 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर अनिवार्य, SEC ने सरकार को दिए निर्देश
हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन में मंगलवार को स्टेट इलेक्शन कमीशन (SEC) ने पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में आयोग ने राज्य सरकार को 28 फरवरी से पहले आरक्षण रोस्टर लागू करने के निर्देश दिए, ताकि मार्च में चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सके। यह डेडलाइन हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित की गई है। बैठक में आयोग ने सरकार को वोटर लिस्ट शीघ्र अंतिम रूप देकर अधिसूचित (नोटिफाई) करने को भी कहा। राज्य की कुल 3577 पंचायतों में से 3548 पंचायतों की वोटर लिस्ट दो महीने पहले ही तैयार कर ली गई थी, लेकिन उस समय सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं उपायुक्तों द्वारा आयोग के आदेशों के बावजूद इन्हें अधिसूचित नहीं किया गया था।
वोटर लिस्ट नोटिफाई न होने के कारण इलेक्शन कमीशन मतदाता सूची की प्रिंटिंग शुरू नहीं कर सका। आयोग के अनुसार, वोटर लिस्ट के नोटिफिकेशन के बाद इसकी छपाई में 20 से 25 दिन का समय लगेगा। चुनाव की घोषणा से पहले प्रत्येक पंचायत की वोटर लिस्ट का तैयार होना अनिवार्य है। बैठक में हाईकोर्ट के आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। प्रदेश की 3577 पंचायतों और 71 शहरी निकायों में चुनाव होने हैं। इनमें से 3548 पंचायतों में कुल 55 लाख 19 हजार 709 मतदाता पंजीकृत हैं। कांगड़ा जिला में सबसे अधिक 13 लाख 17 हजार 390 मतदाता हैं, जबकि लाहौल-स्पीति जिला में सबसे कम 25 हजार 602 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इस बार मतदाताओं में 27 लाख 26 हजार 548 महिलाएं और 27 लाख 93 हजार 161 पुरुष शामिल हैं। वहीं 29 पंचायतों की वोटर लिस्ट अभी तैयार होना शेष है।
प्रदेश की पंचायतों के मौजूदा प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 30 जनवरी को समाप्त हो रहा है। समय पर चुनाव न होने की स्थिति में नई पंचायतों के गठन तक पंचायतें बिना निर्वाचित प्रतिनिधियों के रहेंगी, जिसके लिए सरकार प्रशासन (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त करेगी।
