शिमला: बहुचर्चित गुड़िया प्रकरण में IG जहूर जैदी की सजा सस्पेंड, जानें पूरा मामला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के चर्चित गुड़िया रेप-मर्डर मामले में आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत के केस में दोषी ठहराए गए तत्कालीन आईजी सैयद जहूर हैदर जैदी की उम्रकैद की सजा को सस्पेंड कर दिया है। हालांकि, इस संबंध में हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है। इससे पहले चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 18 जनवरी 2024 को आईजी जैदी सहित आठ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद 21 जनवरी को आईजी जैदी, तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, एसआई राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद शर्मा, ऑनरेरी हेड कांस्टेबल मोहन लाल व सूरत सिंह, हेड कांस्टेबल रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रानित को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जैदी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
यह मामला वर्ष 2017 में शिमला जिले के कोटखाई क्षेत्र में 16 वर्षीय छात्रा के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या से जुड़ा है। छात्रा 4 जुलाई 2017 को स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी, जबकि 6 जुलाई को उसका शव तांदी जंगल से बरामद हुआ था। इस मामले की जांच के लिए तत्कालीन आईजी जैदी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था।
SIT ने राजू और सूरज को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था, लेकिन सूरज की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और जनता के विरोध को देखते हुए सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई जांच में यह सामने आया कि सूरज की मौत पूछताछ के दौरान पुलिस प्रताड़ना से हुई थी।
सीबीआई ने आईजी जैदी समेत कुल नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ हत्या, सबूत मिटाने सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। एम्स के डॉक्टरों के बोर्ड की रिपोर्ट में हिरासत में यातना की पुष्टि हुई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में यह केस शिमला की जिला अदालत से चंडीगढ़ सीबीआई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। आईजी जैदी करीब 582 दिन तक जेल में रहे। अप्रैल 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बावजूद ट्रायल जारी रहा। जनवरी 2020 में उन्हें दोबारा सस्पेंड किया गया, जबकि जनवरी 2023 में कांग्रेस सरकार ने उनकी सेवाएं बहाल कीं। सितंबर 2023 में उन्हें मुख्यालय में तैनाती दी गई थी।
वहीं, गुड़िया हत्याकांड के मुख्य आरोपी अनिल कुमार उर्फ नीलू को शिमला की विशेष अदालत ने 18 जून 2021 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सीबीआई ने नीलू को अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया था और अप्रैल 2021 में उसे दोषी ठहराया गया था।
