पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह को गरीबों का मसीहा कहा जाता था और जो भी जरूरतमंद होलीलोज फरियाद लेकर आते थे, वे कभी भी खाली हाथ नहीं जाते थे। अब उनकी राह पर उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी चल पड़े हैं। उनकी विधानसभा क्षेत्र से 11 साल की सोनाक्षी, जो कि चलने-फिरने में पूरी तरह से अक्षम है, के परिजन बच्ची को लेकर विक्रमादित्य सिंह के पास पहुंचे तो विक्रमादित्य ने बच्ची को इलेक्ट्रिक व्हील चेयर देने का वादा किया। उन्होंने सोमवार को इस 11 साल की बच्ची को इलेक्ट्रिक चेयर सौंप भी दी। यह इलेक्ट्रिक चेयर 75 हजार की है और विक्रमादित्य ने अपनी ओर से इसे भेंट किया है। वहीं, इलेक्ट्रिक व्हील चेयर पर बैठकर सोनाक्षी काफी खुश नजर आई। सोनाक्षी चनोग में छठी कक्षा में पढ़ती है। परिजनों को उसे स्कूल ले जाने और वहां से लाने में काफी मुश्किल आ रही थी। सोनाक्षी अब इस इलेक्ट्रिक चीयर पर बैठकर स्कूल जाएगी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि राजनीति के साथ-साथ समाजसेवा और दलगत राजनीति से उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने अन्य लोगों से भी जरूरतमंदों की मदद करने के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सुख आश्रय योजना शुरू की है, जिसमें दिव्यांग व अनाथ बच्चों की मदद के लिए बजट का प्रावधान किया गया है। उनसे ही सीख कर वे भी आगे बढ़ रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में मौसम के करवट बदलने से लोग परेशान हो रहे है। प्रदेश के कई क्षेत्रों में आज सुबह से ही हल्की बारिश हो रही है। कई ऊंचाई वाले इलाकों में शीतलहर चल रही है। मौसम विभाग ने आज और कल भी बारिश होने का येलो अलर्ट जारी कर रखा है। इस दौरान कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। इससे किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। शिमला समेत अधिक ऊंचे क्षेत्रों में ठंडी हवाएं चलने से प्रदेश में ठंड में भी महसूस हुई है। मौसम का रुख बदलते देख कई गर्मी वाले क्षेत्रों में भी लोगों ने दोवारा गर्म कपडे निकाल लिए है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बीते 3 दिन से हो रही बारिश-बर्फबारी के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। शिमला का न्यूनतम तापमान नॉर्मल से 2 डिग्री गिरकर 7.2 डिग्री पहुंच गया। नाहन का तापमान 4.5 डिग्री की गिरावट के बाद 12.5 डिग्री, धर्मशाला का 2.9 डिग्री की गिरावट के बाद 10.2 डिग्री, मनाली का 6 डिग्री, कल्पा का 2 डिग्री, मंडी का 11.1 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। प्रदेश में ठंड का प्रकोप बढ़ने से सेब और दूसरे फल उत्पादकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। फलों की फ्लावरिंग व सेटिंग को नुकसान होगा। बेमौसम बारिश गेहूं की फसल के लिए भी अच्छी नहीं है। वहीं मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश में 6 अप्रैल तक मौसम खराब बना रहेगा।
सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर पहुंचने वाले सातवें शख्स है। प्रथम मुख्यमंत्री डॉ वाईएस परमार से लेकर पिछले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तक तमाम मुख्यमंत्रियों की अपनी एक अलग शैली, एक अलग दृष्टिकोण रहा है। सभी ने अपने अपने अंदाज में हिमाचल को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। कोई सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहलाया, कोई पानी वाला, तो किसी ने शिक्षा को तवज्जो दी। अलबत्ता सुखविंदर सिंह सुक्खू को कार्यकाल संभाले अभी चार माह भी नहीं बीते है लेकिन सुक्खू के कई ऐसे निर्णय है जो अभी से उन्हें एक अलग कतार में खड़ा करते है। मसलन प्रदेश के यतीम अब 'चिल्ड्रन ऑफ़ स्टेट' है और हिमाचल देश का एक ऐसा राज्य है जो 'ग्रीन स्टेट' बनने के मिशन पर ईमानदार प्रयास करता दिख रहा है। बहरहाल सफर लम्बा है और चुनौतियां बेशुमार, निर्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी हो सकता है लेकिन इसमें कोई डॉ राय नहीं है कि बतौर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी कार्यशैली से छाप छोड़ रहे है।" 'पूत के पाँव पालने में दिख जाते है', बेशक प्रदेश की सुक्खू सरकार को सत्ता में आएं अभी चार महीने भी नहीं बीते हो लेकिन सरकार नीति और नियत को लेकर एक सकारात्मक माहौल जरूर है। चुनौतियां भरपूर है और आर्थिक स्थिति पतली, बावजूद इसके बेतहाशा कर्ज और सीमित संसाधनों के साथ भी सुख की सरकार प्रदेश को उन्नति के पथ पर बढ़ाने के लिए अग्रसर दिखती है। अपने अल्प कार्यकाल में सरकार कई अहम फैसले ले चुकी है और कई सरकार की नीतियों में एक दूर्गामी सोच साफ़ देखने को मिल रही है। चाहे ग्रीन हिमाचल की राह पर आगे बढ़ने का फैसला हो या पर्यटन के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में कदम, इसमें कोई संशय नहीं है कि सुक्खू सरकार सही राह पर आगे बढ़ती दिख रही है। सुक्खू कैबिनेट की बैठकों में लिए गए सरकार के फैसलों हो या बजट में किए गए प्रावधान, कहीं न कहीं ये उम्मीद जरूर जगी है कि ये सरकार सिर्फ बातें नहीं करती बल्कि उन पर अमल करने को भी प्रतिबद्ध है। निसंदेह सीमित वित्तीय संसाधन बड़ी बाधा है पर सरकार की नियत को लेकर कोई शक ओ शुबा नहीं दिखता। प्रभावित करती ही सीएम की साफगोई और सादगी : सीएम सुक्खू की एक बात बेहद प्रभावित करती है और वो है प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री का खुलकर जनता को बताना। सीएम सुक्खू प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति की बात स्वीकार भी कर रहे है और जनता का समर्थन भी मांग रहे है। नए मुख्यमंत्री की इस स्पष्टवादिता से लोग खासे प्रभावित भी दिख रहे है। बहरहाल आगाज अच्छा है पर निसंदेह सुक्खू सरकार को उन सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा जो जनता उनसे बांधे बैठी है। इसी तरह आल्टो कार से विधानसभा पहुंचना हो या फिर लाव लश्कर को छोड़कर शिमला माल रोड पर सुबह की सैर के लिए साधारण व्यक्ति की तरह निकल जाना, मुख्यमंत्री सुक्खू अपनी सादगी से जनता पर छाप छोड़ रहे है। मुख्यमंत्री से मिलने जो भी आता है, ये सुनिश्चित किया जाता है कि खाली हाथ वापस नहीं लौटे। सामान्य व्यक्ति की तरह रहते हुए सीएम सुक्खू ने विधायक रहते हुए कभी अपने साथ पीएसओ नहीं रखा था। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उनकी सादगी बरक़रार है। लिए कई बड़े अहम फैसले : अपने छोटे से कार्यकाल में सुक्खू सरकार ने ऐसे कई बड़े फैसले लिए है जो हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2032 तक भारत का सबसे समृद्ध राज्य बनाने के सरकार के सपने को सींचता दिखाई देते है। गुड गवर्नेंस को लेकर सरकार संजीदा है। सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का प्रयास किया गया, जहां पेपर में गड़बड़ी पाई गई, वहां पेपर को कैंसल किया गया। इसके चलते कर्मचारी चयन आयोग को भंग किया गया ओर आरोपियों की गिरफ्तारी भी जारी है। इसके अलावा सरकार प्रदेश हरित राज्य बनाने की ओर भी आगे बढ़ रही है। सुक्खू सरकार ने साल 2026 तक हिमाचल को ग्रीन स्टेट बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश में वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा। इसके लिए सीएम ने ई-बस, ई-ट्रक की खरीद पर 50 लाख तक और ई-टैक्सी की खरीद पर 50 फीसदी सब्सिडी देने का ऐलान किया है। वहीं जिन 10 गारंटियों के सहारे कांग्रेस सत्ता में आई थी उनमें से दो को पूरा करती हुई भी सरकार दिखाई दी है। प्रदेश के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दे दी गई और महिलाओं को 1500 चरणबद्ध तरीके से देने पर भी काम किया जा रहा है। दिल छू रहा सरकार का मानवीय चेहरा : यहाँ सुक्खू सरकार के उस मानवीय चेहरा का जिक्र भी जरूरी है जिसने हरआम और ख़ास व्यक्ति के मन को छुआ है। सीएम बनने पर सुखविंदर सिंह सुक्खू सबसे पहले अनाथ बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बड़ी योजना लेकर आए, जिसे सुखाश्रय कोष का नाम दिया गया है। सुखाश्रय योजना का लाभ प्रदेश के करीब 6 हजार अनाथ बच्चों को होगा। वहीं 27 साल तक सरकार इन बच्चों की पढ़ाई से लेकर दूसरी हर जरूरतों को पूरा करेगी। आय बढ़ाने को बढ़ाये कदम : प्रदेश की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार ने आय बढ़ाने पर भी काम किया है। नई एक्साइज पालिसी के तहत शराब के ठेकों की नीलामी की गई। वहीं सरकार ने बजट में शराब की हर बोतल पर दूध सेस लगाने का ऐलान किया है जिससे 120 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा सरकार ने जलविद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस वसूलने का निर्णय लिया है इससे सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा।
हिमाचल प्रदेश के बागवान सुक्खू सरकार से खफा खफा दिख रहे है। सरकार को चार माह भी नहीं हुए और यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए संयुक्त किसान मंच ने सात दिन के भीतर सरकार को विधानसभा सत्र में विधेयक लाने का अल्टीमेटम दे दिया है। ऐसा न होने की स्थिति में एक बार फिर आंदोलन पर उतरने की चेतावनी भी दी गई है। बागवानों ने सरकार से मांग की कि, इसी विधानसभा सत्र में यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए विशेष कानून बनाया जाए। बागवानों का मानना है, बीते कई दिनों से प्रदेश सरकार का बजट सत्र चल रहा है, लेकिन बागवानों के मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है। बागवानी मंत्री सत्र से पहले यूनिवर्सल कार्टन लागू करने को लेकर मुखर थे, लेकिन सत्र में अब तक यूनिवर्सल कार्टन पर कोई चर्चा नहीं हुई। अगर इस बाबत विधेयक लाकर कानून नहीं बनाया गया तो किसानों-बागवानों को लामबंद कर आंदोलन खड़ा किया जाएगा। हालांकि इस पर मुख्यमंत्री ने ब्यान जारी कर कहा है कि बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और प्रदेश सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सीए स्टोर स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं, ताकि बागवानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके। इसके अलावा सेब आधारित डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बागवान कम गुणवत्ता वाले सेबों को भी बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। यानी बागवान तल्ख़ जरुरी है, लेकिन सरकार उन्हें आश्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। बहरहाल, आगामी कुछ वक्त में ये तय होगा कि क्या बागवान सरकार को सेटल होने का वक्त देते है या नहीं। यहाँ ये भी जहन में रखना होगा कि लोकसभा चुनाव को करीब एक वर्ष का वक्त है और प्रदेश की दो संसदीय सीटों, शिमला और मंडी में बागवानों का वोट निर्णायक सिद्ध हो सकता है। जाहिर है ऐसे में सरकार भी बागवानों को साधे रखना चाहेगी। समझे : टेलीस्कोपिक से कैसे अलग यूनिवर्सल कार्टन यूनिवर्सल कार्टन में सिर्फ 20 किलो सेब ही भरा जा सकेगा, जबकि टेलीस्कोपिक में बागवान 25 से 40 किलो तक सेब भरते हैं। इतना सेब भरने के बावजूद भी बागवानों को दाम औसत 20 से 25 किलो के हिसाब से ही दिए जाते हैं। इस तरह प्रति पेटी बागवान 5 से 15 किलो अतिरिक्त सेब दे रहे हैं। इस लिहाज से बागवानों को प्रति पेटी कई बार 200 से 700 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ता है। इसका फायदा लदानी उठा जाते हैं, जो हिमाचल में खरीदे गए सेब को देश के बाजारों में किलो के हिसाब से बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। अगर यूनिवर्सल कार्टन लागू किया जाता है तो बागवान किलो के हिसाब से ही एक पेटी में सेब भरेंगे। यह है सेब पैकिंग का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड दुनियाभर में सेब 4 लेयर में भरा जाता है। यह सेब पैकिंग का अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड है। दुनिया के किसी भी मुल्क से भारत में सेब आयात किया जाता है तो भी किलो के हिसाब से खरीदा जाता है, लेकिन हिमाचल में बागवान टेलीस्कोपिक कार्टन में 6 से 8 तह में सेब भर रहे हैं। कुछ बागवान ऐसा कमीशन एजेंट के दबाव में आकर तो कुछ सबसे महंगा सेब बेचने की चाहत में कर रहे हैं। वीरभद्र सरकार 2 बार लाई थी विधेयक पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार ने भी यूनिवर्सल कार्टन को लेकर 2 बार विधेयक पेश किया, लेकिन बिना तैयारियों के लाया गया विधेयक बागवानों के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। उस दौरान यूनिवर्सल कार्टन तो अनिवार्य कर दिया गया, मगर बाजार में इसकी उपलब्धता नहीं कराई गई। कार्टन बनाने वाली कंपनियों से पहले संपर्क नहीं साधा गया। हालांकि यूनिवर्सल कार्टन इस्तेमाल न करने वाले बागवानों को पेनल्टी लगाने इत्यादि का प्रावधान अध्यादेश में कर लिया गया था। तब यूनिवर्सल कार्टन के साइज इत्यादि तैयार करने पर पूर्व सरकार ने तकरीबन 11 लाख रुपए खर्च किए थे।
प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में अरोमा मिशन पर कार्य करेगी। अरोमा मिशन लैवेंडर की खेती की एक पहल है और यह जम्मू-कश्मीर में किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। हिमाचल प्रदेश में जिला चम्बा सहित कई क्षेत्रों की जलवायु परिस्थितियां जम्मू-कश्मीर के समान होने के कारण प्रदेश सरकार राज्य के कई क्षेत्रों में लैवेंडर की खेती को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने की योजना तैयार कर रही है। सरकार की इस पहल से राज्य के किसानों को आय का एक नया लाभदायक स्रोत प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ अरोमा मिशन के बारे में दूरभाष पर विस्तार से बातचीत की। जनवरी माह में नई दिल्ली में भी मुख्यमंत्री ने डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ इस विषय पर चर्चा की थी। केंद्रीय मंत्री ने इस परियोजना के लिए प्रदेश के किसानों को तकनीकी सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से लैवेंडर की खेती से किसानों के जीवन में सार्थक बदलाव आएगा। अरोमा मिशन कृषि क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को इस मामले को सम्बंधित मंत्रालय के समक्ष उठाने और परियोजना को जमीनी स्तर पर लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देश दिये हैं। प्रदेश सरकार खेती के लिए आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की योजना भी बना रही है। इसे पूरा करने के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार से तकनीकी मदद प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। केंद्र सरकार राज्य के किसानों और बागवानों के लिए प्रशिक्षण शिविर और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी। इससे किसानों को कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों की जानकारी उपलब्ध होगी तथा वह अपनी उपज की गुणवत्ता में सुधार लाकर अधिक आय अर्जित करने में सक्षम होंगे।लैवेंडर की खेती जिसे बैंगनी क्रांति (पर्पल रिवॉल्यूशन) के रूप में भी जाना जाता है, राज्य के किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प साबित हो सकती है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में अधोसंरचना विकास आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनकर उभरा है। प्रदेश में विभिन्न राजमार्गों के विकास व विस्तार से राज्य की आर्थिकी को बढ़ावा मिल रहा है। विगत एक माह के दौरान प्रदेश में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अंतर्गत राजमार्गों के निर्माण एवं विस्तारीकरण के लिए भू-अधिग्रहण मुआवज़ा के रूप में लोगों को रिकॉर्ड धनराशि वितरित की गई है। इस अवधि के दौरान प्रदेश में 1226 करोड़ रुपये की धनराशि भूमि मुआवजा के रूप में प्रदान की गई है। उपायुक्त कांगड़ा के माध्यम से इस अवधि के दौरान 593 करोड़ रुपये, उपायुक्त हमीरपुर द्वारा 182 करोड़ रुपये, उपायुक्त सोलन द्वारा 32 करोड़ रुपये, उपायुक्त मंडी द्वारा 242 करोड़ रुपये, उपायुक्त शिमला द्वारा 170 करोड़ रुपये और उपायुक्त चंबा द्वारा 7 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि लोगों को वितरित की गई है। भू-अधिग्रहण मुआवज़ा राशि प्रदान करने के मामले लम्बे अरसे से लंबित थे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इन मामलों को निपटाने में तत्परता से कार्य करते हुए लोगों को राहत प्रदान की है। इससे प्रशासन में संवेदनशीलता के साथ समयबद्धता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। प्रदेश की आर्थिकी में एक माह के दौरान 1226 करोड़ रुपये की धनराशि आने से विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को भी संबल मिलेगा। इससे हितधारकों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होने के साथ-साथ राज्य में रोज़गार व स्वरोज़गार के जुड़े कार्यों को भी बल मिलेगा। प्रदेश सरकार द्वारा प्रशासनिक कार्यों को समयबद्ध पूर्ण करने के ध्येय के साथ किए जा रहे प्रयासों से विकास को गति मिली है। व्यवस्था परिवर्तन के साथ-साथ यह वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने में भी मददगार साबित हो रहा है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीटीसीएल) की ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है। शनिवार देर सायं यहां आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉरपोरेशन अपनी टेंडर प्रक्रिया की अवधि को कम कर निर्माण कार्य में तेजी लाये ताकि राज्य को अधिक से अधिक राजस्व प्राप्त हो सके और लोगों को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि राजस्व में बढ़ौतरी के लिए एक तकनीकी कमेटी का गठन किया जाएगा, जो एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है तथा वर्तमान राज्य सरकार संसाधन बढ़ाने की दिशा में अनेक प्रयास कर रही है, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एचपीपीटीसीएल की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि कॉरपोरेशन के पास 15 सब स्टेशन तथा 964 सर्किट किमी लाइने हैं तथा अनेक परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में कॉरपोरेशन को 166.99 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई है। वर्ष 2025 तक कॉरपोरेशन की आय बढ़कर 455 करोड़ रुपए होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने 6 किलोमीटर शोंगटोंग-बास्पा ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण कार्य को अगले डेढ़ साल तक पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया क्योंकि यह 450 मेगावाट विद्युत निकासी के लिए महत्वपूर्ण है। शोंगटोंग-कड़छम विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य जुलाई, 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस लाईन के निर्माण कार्य में देरी से राज्य के राजस्व को नुकसान होगा, इसलिए कॉरपोरेशन को इस लाईन के निर्माण कार्य को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि एसपीपीटीसीएल भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्य करे। उन्होंने कहा कि जिला ऊना में बनने वाले बल्क ड्रग पार्क तथा लमलैहड़ी और पेखुबेला में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उचित ट्रांसमिशन की व्यवस्था की जाए। इसके लिए नैहरियां से ऊना के लिए 220/132 केवी सब-स्टेशन और 41 किमी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेशन जिला सोलन के नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क तथा जिला सिरमौर के काला अंब में औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए भी ट्रांसमिशन की उचित व्यवस्था करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार जिला कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए दृढ़ प्रयास कर रही है। इसके साथ-साथ देहरा में केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है और फतेहपुर क्षेत्र में सौर परियोजनाओं के निर्माण की काफी सम्भावनाएं हैं, इसलिए एचपीपीटीसीएल यहां भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ट्रांसमिशन लाइनें बिछानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विद्युत आवश्यकताओं को पूरा करने में कॉरपोरेशन की भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी अधिकारी सकारात्मक सोच के साथ इसके लिए दृढ़ प्रयास करें। बैठक में मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव वित्त अक्षय सूद, प्रबंध निदेशक एचपीपीटीसीएल ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
भाजपा के पूर्व मंत्री, विधायक और नगर निगम शिमला के चुनाव प्रभारी सुखराम चौधरी ने शिमला नगर निगम चुनावों की दृष्टि से प्रवासी सह प्रभारियों की नियुक्ति की है। इनमें भराड़ी संजीव देष्टा किसान मोर्चा, रुल्दूभट्टा अमर ठाकुर आनी, कैथू रविंद्र चौहान कोटखाई, अन्नाडेल शशि भूषण, समरहिल सुनील ठाकुर संयोजक एनजीओ प्रकोष्ठ, टूटू रतन पाल भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष, मज्याठ गोविंद शर्मा प्रत्याशी अर्की, बालूगंज अशोक ठाकुर, कच्चीघाटी ईश्वर रोहल प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, टूटीकंडी सीमा ठाकुर प्रदेश सचिव, नाभा गगन शर्मा जिला महामंत्री शिमला, फगली कृष्ण वर्मा, कृष्णानगर नंदराम कश्यप सोलन, राम बाजार सुमित शर्मा सह प्रभारी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र, लोअर बाजार राकेश चौधरी प्रत्याशी धर्मशाला, जाखू रवि धीमान प्रत्याशी जयसिंहपुर, बेनमोर पायल वैद्या प्रदेश उपाध्यक्ष, इंजनघर अंकुश चौहान जिला महासू, संजौली चौक रजत ठाकुर प्रत्याशी धरमपुर, अप्पर ढली अजय श्याम प्रत्याशी ठियोग, लोअर ढली कौल नेगी प्रत्याशी रामपुर, शांति विहार छविंदर पाल, भट्टाकुफर उमेश शर्मा मंडल अध्यक्ष जुब्बल कोटखाई, संगटी अमर ठाकुर पूर्व मंडल अध्यक्ष कसुंपटी, मल्याणा बलदेव तोमर प्रदेश प्रवक्ता, पंथाघाटी राजेश कश्यप प्रत्याशी सोलन, कसुंपटी अरुण फाल्टा जिलाध्यक्ष महासू, छोटा शिमला नरोत्तम ठाकुर प्रत्याशी कुल्लू, विकास नगर तिलक राज प्रदेश सचिव, कंगनाधार महिंदर काल्टा, पत्योग शशि दत्त प्रदेश प्रवक्ता, न्यू शिमला बलदेव रांटा मंडल अध्यक्ष रोहडू, खालिणी सुशांत देष्टा और कंलोग शशि बाला प्रत्याशी रोहडू शामिल हैं।
भाजपा मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा वर्तमान सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी की है और यह एक जनविरोधी फैसला है। उन्होंने कहा कि भाजपा बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध करती है। शर्मा ने कहा कि जब विधानसभा चुनाव चल रहे थे तो कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने जनता को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की गारंटी हिमाचल की जनता के समक्ष रखी थी, पर इस गारंटी की तो हवा निकल गई है और बदले में बिजली की दरों को बढ़ा दिया गया है। पहले सरकार ने डीजल की दरों में 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी और अब बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर जनता पर बोझ डालने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मंत्री जगत नेगी कह रहे हैं कि इसमें सरकार कुछ नहीं कर सकती, यह रेगुलेटरी कमीशन का फैसला है। लेकिन हम बता दें कि सरकार अपनी ग्रांट देकर जनता को इस बोझ से बचा सकती थी। भाजपा की सरकार के दौरान भी कई बार इस प्रकार की बढ़ोतरी का मामला सामने आया था, पर भाजपा की सरकार ने हमेशा रेगुलेटरी कमिशन को ग्रांट दी है। इससे जनता को राहत मिलती रही है। इस मुद्दे को हम विधानसभा में भी उठाएंगे और इस जनविरोधी फैसले का कड़ा विरोध करेंगे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश प्रभारी सतपाल जैन ने कहा कि राहुल गांधी को ट्रायल कोर्ट के जज ने सजा सुनाई है, इसमें भाजपा या अडानी का कोई भी लेना-देना नहीं है। कहा कि ट्रायल जज ने राहुल गांधी को कोर्ट में तीन बार माफी मांगने का मौका दिया, पर उन्होंने कोर्ट में माफी नहीं मांगी। अगर वह माफी मांग लेते तो आज उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं के खिलाफ भी कोर्ट में केस हुई है और हमारे नेताओं की सदस्यता को भी रद्द किया गया है, पर कोर्ट जाने पर सदस्यता को बहाल भी किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी तक राहुल गांधी या कांग्रेस के नेता कोर्ट क्यों नहीं गए उन्हें कोर्ट जाना चाहिए था न कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप-प्रत्यारोप लगाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या सोनिया गांधी ने अयोग्य घोषित नहीं किया पर भारत के संविधान ने किया। अगर संविधान के मुताबिक किसी भी कोर्ट में एक व्यक्ति को सजा सुनाई जाती है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान पर सवाल उठाना गलत है, इससे पहले भी कई बार कोर्ट द्वारा नेताओं के खिलाफ निर्णय सुनाए गए हैं। इलहाबाद के एक सिंगल जज की कोर्ट ने सेटिंग प्राइम मिनिस्टर का इलेक्शन सेट एसाइड किया था। सतपाल जैन ने इंदिरा गांधी द्वारा वीर सावरकर के बारे में जो चिट्ठी लिखी थी, उसको भी सार्वजनिक किया और उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस चिट्ठी को पढ़ना चाहिए कि इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर के लिए अपनी चिट्ठी में क्या लिखा है।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त यूनुस ने आज यहां बताया कि विभाग ने वित्त वर्ष 2022-23 में 5130 करोड़ रुपये के राजस्व एकत्रित करने के लक्ष्य को पार कर इस अवधि के दौरान 19 प्रतिशत वृद्धि के साथ 5343 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जो 2021-22 की तुलना में 846 करोड़ अधिक है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष जीएसटी संग्रह में यह शानदार वृद्धि विभाग द्वारा कड़ी सर्तकता और कर अधिकारियों की कार्यकुशलता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रिर्टन फाईलिंग में सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा जांच एवं निगरानी में दक्षता से 13 लाख ई-वे बिल सत्यापित किए हैं। ई-वे बिल के सत्यापन से 8 करोड़ रुपये जुर्माने के तौर पर प्राप्त किए गए हैं। विभाग ने वर्ष के दौरान विभिन्न आयामों को पार करते हुए 400 अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि विभाग ने नियमों के अनुपालन में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की है। इन उपायों से रिटर्न फाइलिंग और रिटर्न जांच में सुधार हुआ है। राज्य मुख्यालय ने जीएसटी से जुड़े 257 करोड़ रुपये के 89 मामलों का पता लगाया है। उन्होंने बताया कि विभाग अपने प्रदर्शन में और सुधार करने की दृष्टि से रिटर्न फाइलिंग, रिटर्न की त्वरित जांच, जीएसटी ऑडिट को समय पर पूरा करने और कर अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए निरन्तर प्रयास करता रहेगा।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को उनके जन्मदिवस की बधाई दी। उन्होंने राज्यपाल के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। इस अवसर पर, लेडी गर्वनर जानकी शुक्ल भी उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री के साथ लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और स्थानीय विधायक हरीश जनारथा भी उपस्थित रहे। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों, केंद्रीय मंत्रियों और अन्य गणमान्य लोगों ने दूरभाष से राज्यपाल को शुभकामनाएं दीं। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी राज्यपाल से भेंट कर उन्हें जन्मदिवस की बधाई दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि शिव प्रताप शुक्ल दक्षता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वह इसी समर्पण भाव से समाज, प्रदेश और देश की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने ईश्वर से उनकी दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की है। इससे पहले, राज्यपाल ने प्रातः राजभवन में अपने परिवार के सदस्यों के साथ यज्ञ किया और राजभवन परिसर में पारिजात एवं अन्य प्रजाति के पौधे रोपे। उन्होंने राजभवन के कर्मचारियों सहित दीप जलाकर अपना जन्मदिवस मनाया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। राज्य के बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने आज यहां हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम के नेतृत्व में ठियोग विधानसभा क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सीए स्टोर स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए हैं, ताकि बागवानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके। इसके अलावा सेब आधारित डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि बागवान कम गुणवत्ता वाले सेबों को भी बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत इस बार प्रदेश सरकार ने ग्रीन बजट प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि बजट में ई-बस, ई-ट्रक और ई-टैक्सी की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है तथा 250 किलोवाट से 2 मैगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने पर 40 प्रतिशत अनुदान देने का भी प्रावधान किया गया है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कृषि, मत्स्य पालन और बागवानी क्षेत्रों के लिए बैंक किसानों को उदारतापूर्वक ऋण उपलब्ध करवाए, ताकि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में 7000 एकल नारियों को आवास निर्माण के लिए 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है। इसके अलावा मेधावी गरीब विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर ऋण भी उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रदेश सरकार ने राजस्व में बढ़ौतरी के लिए शराब की दुकानों की नीलामी की और राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं पर जल उपकर लगाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार में पार्टी कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान दिया जा रहा है और ठियोग क्षेत्र को विशेष अधिमान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह राठौर ठियोग विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। ठियोग के देवेंद्र श्याम को हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि इसी विधानसभा क्षेत्र के केहर सिंह खाची को वन विकास निगम का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम ने उन्हें बैंक का अध्यक्ष नियुक्त करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करेंगे।
हिमाचल प्रदेश में रात भर झमाझम बारिश का दौर जारी रहा। मौसम विभाग ने शनिवार को भी बारिश-बर्फबारी का येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में 27 से 31 मार्च तक सामान्य से 37 फीसदी अधिक बारिश रिकॉर्ड दर्ज की गई है। वहीं पूरे मार्च माह में 42 फीसदी कम बारिश हुई है। प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में पांच अप्रैल तक मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। अटल टनल रोहतांग के पास सुबह 4 इंच ताजा बर्फबारी हुई है। सोलंग बैरियर से सिस्सू की ओर सिर्फ फोर बाई फोर वाहनों को ही भेजा जा रहा है। बर्फबारी के बाद मनाली-लेह मार्ग दारचा तक सभी तरह के वाहनों के लिए खुल गया है। आम लोगों के साथ सैलानी भी लाहौल जा सकेंगे। लेकिन उदयपुर-पांगी मार्ग के साथ औट-बंजार-सैंज हाईवे-305 बंद है। दोनों मार्ग पर बस सेवाएं भी अवरूद्ध हैं। वहीं बारिश के कारण ज्यूरी सराहन सड़क भूस्खलन होने से धंस गई। चट्टानें गिरने से ज्यूरी सराहन सड़क सुबह साढ़े चार बजे से अवरुद्ध है। एक गाड़ी भी भूस्खलन की चपेट में आ गई। बिजली लाइन टूटने से विद्युत सप्लाई भी ठप हो गई है जिससे क्षेत्र में ब्लैकआउट छा गया है। वहीं गाड़ियां और साथ लगते घर भूस्खलन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।
हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक गैस सिलिंडर के दाम 88 रुपये कम हुए हैं। अप्रैल में व्यावसायिक गैस सिलिंडर लेने के लिए 2212 रुपये चुकाने पड़ेंगे। घरेलू सिलिंडर के दाम में इस माह कोई बदलाव नहीं हुआ है। घरेलू उपभोक्ताओं को मार्च की तरह ही 1205 रुपये में 14 किलो का घरेलू सिलिंडर मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश पुलिस के ट्रैफिक टूरिस्ट एवं रेलवे विभाग द्वारा सड़क वाहन हादसों में तुरंत एवं प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए 5 हाइड्रॉलिक कटर एवं स्प्रेडर की खरीदी गई है। यह अत्याधुनिक उपकरण सभी पुलिस रेंज को दिए जाएंगे ताकि उसका उपयोग उन पुलिस रेंज के अंतर्गत जिलों में हो रहे सड़क वाहन दुर्घटनाओं में तुरंत मौके पर वाहन के अंदर और वाहन के नीचे फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला जा सके। इसके माध्यम से 2 मिनट से भी कम समय में किसी भी वाहन के अंदर प्रवेश किया जा सकता है एवं वाहन के नीचे फंसे हुए व्यक्ति को बाहर निकालकर उसकी जान बचाई जा सकती है। इसी कारण इस उपकरण को जाँच ऑफ लाइफ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका उपयोग पीड़ित एवं घायल व्यक्तियों की जान बचाने के लिए सकारात्मक रूप में किया जा सकता है। बचाव दल अक्सर वाहन से घायल एवं पीड़ित व्यक्ति को निकालने के लिए गोलाकार आरी का इस्तेमाल करते थे , लेकिन इनमें कई कमियाँ थीं अगर बचाव दल आरी का इस्तेमाल करते है तो उससे चिंगारी पैदा हो सकती है , जिससे आग लग सकती है, तेज आवाज हो सकती है, पीड़ितों को तनाव हो सकता है। वैकल्पिक रूप से, बचावकर्मी क्राउबार या हॉलिगन बार के साथ वाहन के दरवाजों को खोलने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन पीड़ितों को और अधिक घायल कर सकता है। इसकी तुलना में, हाइड्रोलिक स्प्रेडर-कटर शांत, तेज, मजबूत और अधिक बहुमुखी हैं , यह वाहन को काट सकते हैं, खोल सकते हैं और उठा भी सकते हैं। यह बचाव उपकरणों के कार्यों पुश, पुल, कट और स्प्रेड का कार्य को तुरंत कर सकता है।
भाजपा द्वारा नगर निगम चुनावों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता शिमला नगर निगम चुनाव प्रभारी सुखराम चौधरी द्वारा की गई। बैठक में प्रदेश महामंत्री एवं बिलासपुर से विधायक त्रिलोक जमवाल, विधायक बलबीर वर्मा, प्रत्याशी संजय सूद, प्रत्याशी रवि मेहता, शिमला संसदीय क्षेत्र सह प्रभारी शिशु भाई धर्मा, जिला प्रभारी डेजी ठाकुर, जिला अध्यक्ष विजय परमार, रूप शर्मा, मंडल अध्यक्ष राजेश शारदा, जितेंद्र भोटका, दिनेश शर्मा उपस्थित। नगर निगम शिमला चुनाव प्रभारी सुखराम चौधरी ने कहा कि आज की बैठक में बहुत से महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई और सभी 34 वार्डों में प्रभारियों की नियुक्ति की गई। इस बैठक में सभी वार्डों के बारे में फीडबैक भी ली गई। आगामी 2 दिन के अंतर्गत सभी 34 वार्डों में प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक का आयोजन भी किया जाएगा, नगर निगम के चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं में बड़ा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने कहा कि हमें देखने को मिला है कि केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं से शिमला शहर को बहुत लाभ हुआ है और वर्तमान की कांग्रेस सरकार के 3 महीने के कार्यकाल से जनता में नकारात्मक माहौल उत्पन हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा नगर निगम चुनावों को गंभीरता से लड़ेगी और एक बार फिर नगर निगम में भाजपा जीत हासिल करेगी, शिमला शहर के संपूर्ण विकास और केंद्र द्वारा विभिन्न योजनाओं से शिमला का समग्र विकास हो इस संकल्प के साथ भाजपा आगे बढ़ेगी। इस प्रकार हुई भाजपा के वार्ड प्रभारियों की नियुक्तियां भराड़ी रोहित सचदेवा, रुल्दू भट्टा श्रवण शर्मा, कैथू सुनील धर, अन्नाडेल योगिंदर योगी, समरहिल भागेश शर्मा, टूटू विवेक शर्मा, मज्याठ रंजन भारद्वाज, बालूगंज राजेश घई, कच्चीघाटी रणदीप कंवर, टूटीकंडी जय चंद, नाभा अनिल, फगली राजीव पंडित, कृष्णानगर राज पाल, राम बाजार मुकेश शारदा, लोअर बाजार अजय सरना, जाखू गोपाल सूद, बेनमोर योगिंदर पुंडीर, इंजन घर संजय अग्रवाल, संजौली चौक गौरव सूद, अप्पर ढली मंजुला सरैक, लोअर ढली शालिंदर चौहान , शांति विहार राजिंद्र चौहान, भट्टाकुफर अनूप रोहाल, सांगटी केशव चौहान , मल्याणा यश पाल चौहान, पंथाघाटी राकेश शर्मा, कासुंपटी राजेश सैनी, छोटा शिमला अरविंद लखनपाल, विकास नगर सुशील कड़शोली, कंगनाधार हरी दत्त वर्मा, पटयोग सोहन लाल शर्मा, न्यू शिमला मनु भारद्वाज, खालिनी परवीन ठाकुर और कनलोग दिग्विजय सिंह चौहान।
हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर से करवट बदली है। विज्ञान केंद्र का पूर्वानुमान सच साबित हो रहा है। बीते कुछ दिनों में मौसम खराब रहने से प्रदेश में फिर से ठण्ड हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार 6 दिन मौसम काफी खराब रहने वाला है। इस बीच आज प्रदेश में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। इसके मुताबिक कई शहरों में भारी बारिश और कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि हो सकती है। बारिश की वजह से तापमान में फिर गिरावट दर्ज की गई है। एक बार फिर लोगों ने गर्म कपड़े पहनने शुरू कर दिए हैं। बीते दिनों जहां प्रदेश में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ रही थी, वहीं अब बारिश की वजह से ठंड बढ़ गई है, लेकिन इस मौसम का पर्यटक खूब लुत्फ उठा रहे हैं। प्रदेश में 2 अप्रैल तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। आज ऑरेंज अलर्ट, कल येलो अलर्ट और परसों हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार 3 अप्रैल के बाद फिर से मौसम बिगड़ेगा साथ ही बारिश ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। मौसम खराब रहने की वजह से प्रदेश के किसान और बागवान परेशान हो चुके हैं। क्योंकि इस वक्त प्रदेश के कुछ जिलों में सेब, नाशपाती, लीची समेत कई फलों की फ्लावरिंग हो रही है। तापमान में गिरावट और ओले गिरना दोनों चीजें नुकसानदेह हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने बागवानों को बगीचों में एंटी हेल नेट लगाने की सलाह दी है। -ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान वहीं प्रदेश के बागवान और किसान मौसम के बदलते मिजाज से खुश नहीं हैं। जरूरत के समय प्रदेश में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए थे, जिस वजह से खेतों में लगाई फसल सही से तैयार नहीं हो पाई। अब फसल तैयार हुई तो ओलावृष्टि, भारी बारिश और आंधी तूफान ने फसल को नुकसान पहुंचाया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में 45.68 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले पहले पीईटी ब्लॉक की आधारशिला रखी। इसमें 21 करोड़ रुपये की पोजीट्रान एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) सीटी मशीन, 9 करोड़ रुपये स्पैक्ट सीटी मशीन के लिए तथा 15.68 करोड़ रुपये की राशि निर्माण कार्यों के लिए शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मरीजों को पीईटी स्कैन के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश में मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। पीईटी की सुविधा प्रदेश में प्राप्त होने से लोगों के पैसे और समय की बचत होगी। उन्होंने कहा कि एक बार पीईटी ब्लॉक का कार्य पूरा हो जाने के बाद यह कार्डियोलॉजी, मनोचिकित्सा, यूरोलॉजी और अन्य विभागों के अलावा कैंसर का पता लगाने, प्रतिक्रिया और फॉलो-अप की सुविधा प्रदान में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि पीईटी ब्लॉक तीन मंजिला इमारत होगी, जिसमें मरीजों, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए आधुनिक सुविधाओं के अलावा लगभग 50 वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य एक वर्ष के भीतर सभी मेडिकल कॉलेजों में पीईटी स्कैन सुविधाएं स्थापित करना है। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कैंसर केयर के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है और कैंसर के कारणों के अध्ययन के लिए बजट में पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और सरकारी अस्पतालों में रेफरल सिस्टम को समाप्त कर विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान किए हैं, जिसमें सभी मेडिकल कॉलेजों में आपातकालीन चिकित्सा विभाग की स्थापना भी शामिल है, ताकि लोगों को शीघ्र इलाज कराने में किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस विभाग के आईसीयू में प्रति बेड एक स्टाफ नर्स तैनात की जाएगी। कैजुअल्टी वार्ड में तीन बेड पर एक स्टाफ नर्स तैनात की जाएगी और प्रत्येक 10 बेड पर एक डॉक्टर तैनात किया जाएगा। उनकी ड्यूटी आठ घंटे तक सीमित होगी। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला में ट्रॉमा सेंटर के साथ 175 बिस्तर क्षमता की आपातकालीन चिकित्सा सुविधा स्थापित करने के लिए 11 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों के साथ सामंजस्य बिठाने और डॉक्टरों को सेवा की भावना से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए निवेश कर रही है, ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में आईजीएमसी शिमला और इसके पूर्व छात्रों की उत्कृष्ट उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार व्यवस्था में सुधार के लिए काम कर रही है और राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए संसाधन जुटाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य चिकित्सा सेवाएं निगम खोलने की स्वीकृति प्रदान की है, जिसके माध्यम से अब सभी प्रकार की चिकित्सा मशीनरी, दवाएं और उपकरण खरीदे जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल्य ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है और कैंसर रोगियों के उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला में पीईटी ब्लॉक के निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में उन्नत तकनीक की सहायता से लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और राज्य सरकार चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की समस्याओं का समाधान कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में दिन प्रतिदिन कोरोना की लहर बढ़ती जा रही है। कोरोना के बढ़ते मामलें लोगों की चिंता का विषय बन गए है। प्रदेश में बीते 24 घंटे में कोरोना से एक व्यक्ति की मौत हुई है वहीं रिकॉर्ड में 255 नए मामले सामने आए है। प्रदेश में लगभग 7 महीने के अंतराल के बाद एक दिन में इतने कोरोना के नए मामले सामने आए है। इसके साथ ही स्टेट में कोरोना के एक्टिव केस का आंकड़ा बढ़ कर 755 पहुंच गया है। कांगड़ा के 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद बीते 20 दिन में कोरोना से 4 लोगों की जान चली गई है। गत 23 मार्च को राज्य में एक्टिव केस 285 थे। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। प्रदेश में कोरोना की संक्रमण दर 6 फीसदी से ज्यादा हो गई है, यानी 100 व्यक्तियों की जांच करने पर 6 लोग कोरोना से संक्रमित मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अलर्ट और सभी DC को हेल्थ मिनिस्टर के निर्देशों के बाद बीते 24 घंटे में प्रदेश में रिकॉर्ड 4267 लोगों की कोरोना जांच की गई। इनमें से 255 लोग कोरोना से संक्रमित मिले, यानी संक्रमण दर 5.98 फीसदी है। बीच-बीच में यह 8% से भी अधिक हो रही है।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल की ओर सेे आज राजभवन में दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर फलाहार ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, मंत्रीगण और विधायकगण, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। राज्यपाल और लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल ने सभी अतिथियों को विभिन्न प्रजातियों के पौधे भी भेंट किए।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के निवास स्थान पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना। उप मुख्यमंत्री मंगलवार सायं अपने आवास परिसर में टहलते समय गिर जाने से घायल हो गए। आईजीएमसी शिमला में उपचाराधीन रहने के उपरान्त उन्हें आज अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मुख्यमंत्री ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री के साथ उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव किशोरी लाल व मोहन लाल ब्राकटा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा और विधायकगण उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) को उपभोक्ता अनुकूल वेब पोर्टल विकसित करने के लिए कंप्यूटर सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा विशेष अभिरुचि समूह (एसआईजी) ई-गवर्नेंस पुरस्कार से नवाज़ा गया है। रेरा के अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने नई दिल्ली में यह पुरस्कार प्राप्त किया। बाल्दी ने बताया कि इस उपभोक्ता अनुकूल वेब पोर्टल का डिजाइन और विकास राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) हि. प्र. द्वारा ओमिडयार नेटवर्क और प्रैक्सिल ग्लोबल एलायंस के सक्रिय मार्गदर्शन एवं सहयोग से किया गया है। उन्होंने कहा कि रेरा का प्राथमिक उद्देश्य पारदर्शिता लाते हुए रियल एस्टेट परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करना और रियल एस्टेट खरीदारों में विश्वास बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि यह एक सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता केंद्रित वेब पोर्टल है जो सभी हितधारकों, आम लोगों यानि घर खरीदारों अथवा आवंटियों, प्रमोटर्ज़, एजेंटों की मदद करने के लिए विकसित किया गया है। इस वेब पोर्टल में चार मॉड्यूल शामिल हैं। इनमें रियल एस्टेट परियोजनाओं एवं रियल एस्टेट एजेंट का ऑनलाइन पंजीकरण, त्रैमासिक एवं वार्षिक प्रगति रिपोर्ट को ऑनलाइन भरना, पीड़ित व्यक्तियों द्वारा शिकायत दर्ज करना और पंजीकरण से पहले एवं पश्चात की सुविधा शामिल है। श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि रेरा की वेबसाइट ीजजचेरूध्ध्ीचतमतंण्दपबण्पद के माध्यम से रियल एस्टेट परियोजनाओं के स्थल एवं इसके निर्माण की स्थिति, प्लॉट, अपार्टमेंट एवं वाणिज्यिक इकाइयों की उपलब्धता इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर आज राजभवन में फलाहार/ प्रसाद ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से राजभवन में भेंट की।
प्रदेश विधानसभा में चल रहे बजट सत्र को देखने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिमला के छात्र-छात्राओं ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से विधानसभा परिसर में भेंट कर विधानसभा की कार्यप्रणाली की जानकारी हासिल की। इस अवसर पर पठानिया ने आज होने वाली कार्यवाही के बारे में उन्हें अवगत करवाया। पठानिया ने छात्र-छात्राओं से लोकतांत्रिक प्रणाली को गहनता से अध्ययन करने का आग्रह किया। पठानिया ने छात्र-छात्राओं को अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनायें दीं तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ की राज्य स्तरीय बैठक प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कपटा की अध्यक्षता में आज संघ कार्यालय कालीबाड़ी में हुई। इसमें सर्वप्रथम सुन्नी शिमला में हुए तकनीकी कर्मचारी की दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया गया। उसके उपरांत संगठन ने तकनीकी कर्मचारियों की समस्यायों और मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई और संगठन के 2023 के आगामी कार्यक्रमों पर रणनीति बनाई गई। उसके उपरांत बोर्ड के प्रबंध निदेशक पंकज धडवाल, निदेशक वित्त गोपाल चंद, कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार से मुलाकात की और तकनीकी कर्मचारियों की मांगों को उनके समक्ष रखा। संघ की प्रमुख मांगें ये हैं : 1. विद्युत तकनीकी कर्मचारियों के साथ फील्ड में लगातार हो दुर्घटनाओं पर गंभीरता से विचार करके कारणों की जांच करके उचित कदम उठाए जाएं। 2. तकनीकी कर्मचारी संघ के साथ हुई बोर्ड प्रबंधन की मीटिंग में जो मांगे मानी गई थी उनको जल्द अमलीजामा पहनाया जाए, जिसमें सबस्टेशन स्टाफ को मोबाइल भत्ता देना, फील्ड में काम कर रहे तकनीकी कर्मचारियों को शिफ्ट एलाउंस दिया जाए। 3. सर्विस कमिटी की मीटिंग जल्द की जाए, जिसमें तकनीकी कर्मचारियों से संबंधित एजेंडे लगे हैं, ताकि उनको जल्द इसका लाभ मिल सके। इसमें मुख्यत टी मेट से ALM और हेल्पर से सबस्टेशन प्रमोट किए जाने के लिए आर एंड पी रूल बनाए जाने हैं। 4. फील्ड कर्मचारियों के लिए सही गुणव त्ता के सुरक्षा उपकरणों की ही खरीद की जाए जिसमे सीढ़ी, अर्थ रोड, सेफ्टी बेल्ट, हेलमेंट, ग्लव्स उपलब्ध करवाए जाएं साथ ही खरीद के समय तकनीकी कर्मचारी संघ के सदस्यों को भी शामिल किए जाए ताकि जरूरत के अनुसार और सही गुणवत्ता के समान की खरीद हो सके। 5. वर्तमान मेंविद्युत बोर्ड कनिष्ठ अभियंता की भारी कमी से जूझ रहा है। संघ मांग कर रहा है की जल्द लाइनमैन और इलेक्ट्रिशियन 27% कोटे में फीडिंग केडर से भरा जाए, ताकि फील्ड में कनिष्ठ अभियंता की कमी को पूरा करके उपभोक्ताओं की विधुत से संबंधित समस्यायों का समय पर निवारण हो सके। 6. सिविल A.E की खाली चल रही पोस्टों को जल्द सिविल J.E से प्रमोट करके भरा जाए। 7. बोर्ड में तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी चल रही है इसलिए जल्द से जल्द तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती की जाए। प्रबंध निदेशक पंकज डढवाल ने संघ को आश्वासन दिया गया है की तकनीकी कर्मचारियों की मांगों को जल्द सर्विस कमिटी की मीटिंग में पूरा किया जाएगा। सर्विस कमिटी की मीटिंग के लिए सरकार से समय मांगा गया है। 12 अप्रैल तक सर्विस कमिटी की बैठक कर दी जाएगी । इस बैठक में संघ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण कपटा, महामंत्री नेक राम ठाकुर, कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र संधू, संयोजक सुनील शर्मा , उपमहासचिव रणवीर ठाकुर, अतिरिक्त महासचिव पवन परमार, उपाध्यक्ष बलजीत सिंह, वित सचिव अनिल सकलानी, सह सचिव विपिन सांख्यान्न, सह संगठन मंत्री चमन शर्मा, लेखाकार राम चंद्र भारद्वाज, इकाई शिमला प्रधान चुनी लाल आदि पदाधिकारी मौजूद रहे ।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रामनवमी पर्व पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। अपने शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के अवसर पर चैत्र नवरात्रों का समापन भी होता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार रामनवमी के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ और इस शुभ तिथि पर हम सभी को श्रीराम के आदर्शों एवं उनके दिखाए हुए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मामलों पर सारगर्भित चर्चा की। बैठक के उपरांत पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल और पंजाब के मध्य सदैव मधुर संबंध रहे हैं और इन दोनों ही राज्यों की साझा सांस्कृतिक विरासत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में जलविद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस सहित भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और शानन जलविद्युत परियोजना तथा पर्यटन की विभिन्न परियोजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि जल उपकर के विषय में आज की बैठक में पुनः कुछ भ्रांतियों का निवारण किया गया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश द्वारा लगाया जाने वाला जल उपकर, जल पर नहीं अपितु प्रदेश में कार्यरत जलविद्युत परियोजनाओं पर लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस जल उपकर से पंजाब तथा हरियाणा को कोई नुकसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल उपकर सहित विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं के विषय में समुचित विचार-विमर्श के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव तथा ऊर्जा सचिव एवं पंजाब के समकक्ष अधिकारियों की एक समिति गठित की जाएगी। यह समिति विभिन्न विषयों पर बातचीत कर मामलों को समयबद्ध निपटाएगी। समिति भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं पर भी चर्चा करेगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि बैठक में शानन परियोजना के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई। 110 मेगावाट की शानन परियोजना कि 99 वर्ष की लीज वर्ष 2024 में समाप्त हो रही है। बैठक में इस परियोजना के भविष्य के कार्यान्वयन के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ श्री आनंदपुर साहिब और माता नैना देवी के मध्य रोप-वे के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पंजाब के मुख्यमंत्री को हिमाचल आने का न्योता दिया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि बैठक में जल उपकर एवं विभिन्न जल परियोजनाओं सहित हिमाचल प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के विषय पर विस्तृत बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि हिमाचल एवं पंजाब भविष्य में धार्मिक पर्यटन की विभिन्न साझा परियोजनाओं पर एक साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि जल उपकर के विषय में हिमाचल के मुख्यमंत्री ने उन्हें विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी डॉक्टर गुरप्रीत कौर, भोरंज के विधायक सुरेश कुमार, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के सूचना प्रौद्योगिकी सलाहकार गोकुल बुटेल, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विवेक भाटिया तथा पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के चंडीगढ़ दौरे के दौरान मंगलवार सायं हिमाचल छात्र संघ चंडीगढ़ (हिमसू) की अध्यक्षा मन्नत नैंटा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री को हिमाचल प्रदेश से स्वास्थ्य लाभ के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में आने वाले मरीजों की विभिन्न मांगों से अवगत करवाया। प्रतिनिधिमंडल ने मरीजों को हिमाचल सराय भवन सेक्टर 24 और हिमाचल सेवा सदन सेक्टर 25 में आ रहीं परेशानियों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने यहां सोलर ग्रिड सिस्टम लगाने, लम्बे समय के लिए रह रहे मरीजों को फीस में छूट देने, कैन्टीन और कमरों के रखरखाव और एयर कंडीशन की सुविधा के साथ मरीजों को भवनों से अस्पताल जाने के लिए नयी सोलर शटल बस एम्बुलेंस सेवा इत्यादि प्रदान करने का मुख्यमंत्री से आग्रह किया। उन्होंने मरीजों को इन भवनों से अस्पताल ले जाने के लिए नई सोलर शटल बस एम्बुलेंस सेवा देने जैसे विभिन्न मुद्दे भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री ने हिमसू की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि उनकी उचित मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी इन भवनों का निरीक्षण करेंगे। इस अवसर पर संघ के सदस्य सन्नी, राघव, क्षितिज, लविश, आर्यन सहित संघ के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।
प्रदेश के नवनिर्वाचित विधायकों की एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें नवनिर्वाचित विधायकों की विभिन्न समस्याओं से अवगत करवाया। एसोसिएशन के अध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने बताया कि मुख्यमंत्री ने एसोसिएशन की ओर से आए सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि वर्तमान प्रदेश सरकार राज्य के सभी निर्वाचन क्षेत्रों का एक समान विकास करने के लिए दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने नवनिर्वाचित विधायकों को क्षेत्र के विकास तथा अन्य कार्यों के लिए हरसंभव सहायता एवं सहयोग के प्रति आश्वस्त किया है। केवल सिंह पठानिया ने बताया कि नवनिर्वाचित विधायकों ने मुख्यमंत्री को उनके जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं और उन्हें सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में लिए गए विभिन्न निर्णयों के लिए उनकी तथा प्रदेश सरकार की सराहना भी की। केवल सिंह पठानिया ने कहा कि ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छात्र जीवन से ही राजनीति में प्रवेश करते हुए आज एक लंबे संघर्ष के उपरांत प्रदेश की बागडोर संभाली है। उन्होंने कहा कि एक गरीब परिवार से संबंध रखने वाले श्री सुक्खू आम लोगों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं से भलीभांति परिचित हैं और सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नवनिर्वाचित विधायकों की समस्याओं को हल करने के लिए मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें हरसंभव सहयोग प्राप्त होगा। इस अवसर पर एसोसिएशन के महामंत्री त्रिलोक जम्वाल, हरीश जनारथा, चंद्रशेखर, आशीष शर्मा, डॉ. जनक राज, चैतन्य शर्मा, पूर्ण चंद ठाकुर, डीएस ठाकुर, देवेंद्र कुमार भुट्टो, सुरेश कुमार, दलीप ठाकुर, दीप राज, लोकेंद्र कुमार, रणवीर सिंह निक्का, नीरज नैय्यर, अजय सोलंकी, मलिंदर राजन, भुवनेश्वर गौड़, विनोद सुल्तानपुरी, सुदर्शन बबलू सहित अन्य नवनिर्वाचित विधायक उपस्थित थे।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया है कि आरआईडीएफ के तहत राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने प्रदेश की 25 ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के लिए 10273.82 लाख रुपये स्वीकृत किए है। उन्होंने कहा है कि आगामी 30 दिनों के भीतर इन सड़क परियोजनाओं को अंतिम रूप देकर इन पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। विक्रमादित्य सिंह ने आज यहां एक बयान में कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण और इनके रखरखाव के प्रति गम्भीर हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास और इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना उनका प्रमुख लक्ष्य भी हैं। इसके लिए प्रदेश में सड़क निर्माण व उनके रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि सड़क व अन्य विकास कार्य तय सीमा निश्चित समय पर पूरे हो इसके हर संभव प्रयास किये जाएंगे। उन्होंने इन सड़क निर्माण के लिये नवार्ड के अधिकारियों विशेष तौर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है जिनके प्रयासों से 25 ग्रामीण सड़कों के निर्माण को यह राशि स्वीकृत की गई हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुगा घाट, सोलन के छात्र-छात्राओं ने आज सदन की कार्यवाही देखने से पूर्व विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से मुलाकात की। इस दौरान छात्रों ने विधानसभा अध्यक्ष से आज होने वाली कार्यवाही के बारे पूछा तथा संसदीय प्रणाली की जानकारी ली। इस अवसर पर पठानिया ने छात्र-छात्रओं को अपनी शुभकामनायें देते हुए कहा कि लोकसभा तथा विधानसभा एक ऐसे मंच हैं, जहां देश व प्रदेश का कानुन बनाया जाता है। यहां विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती है। उन्होंने कहा कि सार्थक चर्चा के माध्यम से हर प्रश्न का हल निकलता है तथा विधायक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं। पठानिया ने छात्र-छात्राओं से लोकतांत्रिक प्रणाली को गहनता से अध्ययन करने का आग्रह किया।
केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल व युवा कार्यक्रम मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के नेतृत्व में हिमाचल के सांसदों किशन कपूर, सुरेश कश्यप, इंदू गोस्वामी व सिकंदर कुमार व पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर नये प्रोजेक्टों के जल्द मंज़ूरी की मांग की, जिसमें 900 करोड़ की लागत से लठियाणी-मंदली ब्रिज की मांग प्रमुखता से उठाई गई व सड़कों के रूप में पुरानी सभी सौग़ातों के लिए उनका आभार प्रकट किया। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि सीमित रेल और हवाई कनेक्टिविटी वाले हमारे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए सड़कें जीवन रेखा का काम करती हैं। औद्योगिक व विकास की अन्य परियोजनाओं को गति देने, पर्यटन व राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए सड़क सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसी के दृष्टिगत आज उन्होंने शिमला से सांसद सुरेश कश्यप, काँगड़ा-चंबा से सांसद किशन कपूर, राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी व डॉ सिकंदर कुमार व पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात कर नये प्रोजेक्टों की जल्द मंज़ूरी की मांग उनके सामने रखी। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मांगों को गंभीरता से सुना व हिमाचल के हित में इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने का हमें आश्वासन दिया है।
प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र देखने आईं ऑकलैंड हाउस स्कूल की छात्राओं ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से विधानसभा परिसर में भेंट की। पठानिया ने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रणाली समझने में रूची लेनी चाहिए तथा देश के संघीय ढ़ाचे तथा शासन व्यवस्था का ज्ञान होना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। पठानिया ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से विधान सभा व संसदीय सत्रों के देखने के लिए प्रेरित हो रही हैं उससे यह प्रणाली सुदृढ़ होगी तथा इसका भविष्य भी उज्जवल होगा। लोकतंत्र में संसदीय गतिविधियों का सर्वाधिक महत्व है, जीवन और समाज हर क्षेत्र को प्रभावित करने वाले काम संसद में होते हैं। संसद ही वह स्थान है, जहां नए-नए विधि विधान बनाए जाते हैं। पठानिया ने आज होने वाली कार्यवाही के बारे अवगत करवाया तथा विधानसभा कॉउंसिल चैंबर के बारे भी अवगत करवाया।
सुरिंदर शर्मा के नेतृत्व में चौपाल विधानसभा क्षेत्र का एक प्रतिनिधिमंडल आज यहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें अपनी विभिन्न मांगों से अवगत कराया।
हिमाचल प्रदेश को हरित हाइड्रोजन आधारित प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने हरित हाइड्रोजन एवं अमोनिया परियोजना के लिए मैसर्ज एचएलसी ग्रीन एनर्जी एलएलसी के साथ एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की उपस्थिति में आज यहां मैसर्ज एचएलसी ग्रीन एनर्जी एलएलसी की ओर से प्रबंध निदेशक संजय शर्मा और प्रदेश सरकार की ओर से उद्योग विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति ने यह समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया। इससे पहले, मैसर्ज एचएलसी ग्रीन एनर्जी एलएलसी के प्रबंध निदेशक संजय शर्मा ने मुख्यमंत्री के समक्ष हरित हाइड्रोजन एवं हरित अमोनिया के उत्पादन पर एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरित जलविद्युत उत्पादन के लिए विख्यात हिमाचल प्रदेश को अब इथेनॉल, हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, सौर ऊर्जा इत्यादि नवीनतम स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहित कर, देश में स्वच्छ ऊर्जा हब की दिशा में आदर्श राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल को वर्ष 2026 तक देश का प्रथम हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए हरित ऊर्जा उत्पादन पर विशेष बल दिया जा रहा है। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल को हरित हाइड्रोजन आधारित प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हरित हाइड्रोजन नीति बनाने की भी घोषणा की है। समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित होने के उपरांत, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह कम्पनी प्रदेश में प्रतिवर्ष 0.3 मिलियन मीट्रिक टन हाइड्रोजन और 1.5 मिलियन मीट्रिक टन अमोनिया उत्पादित करेगी। इसके लिए लगभग 25 एकड़ भूमि, 300 मैगावाट ऊर्जा तथा करीब 50 हजार किलोलीटर जल सुविधा की आवश्यकता होगी। जल और अन्य संसाधनों की उपलब्धता के दृष्टिगत ऊना और कांगड़ा ज़िलों में यह परियोजना स्थापित की जाएगी। परियोजना से प्रदेश में 4 हजार करोड़ से अधिक का निवेश तथा 3500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे क्षेत्र के कुशल कामगारों को उनके घर-द्वार के निकट रोजगार मिलेगा और यह परियोजना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगी। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस परियोजना की स्थापना में कम्पनी को पूर्ण सहयोग और हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने प्रमोटर्ज़ को इस दिशा में शीघ्र विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा। इस अवसर पर प्रधान सचिव, उद्योग आरडी नज़ीम, आयुर्वेद विभाग के निदेशक विनय सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रबंध निदेशक के सी चमन और उद्योग विभाग के अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा उपस्थित थे।
राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार और इंदु गोस्वामी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्याग्रह सामाजिक न्याय के लिए शुरू किया था, भेदभाव मिटाने के लिए किया था, देश की आजादी के लिए किया था, जबकि कांग्रेस सत्याग्रह निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए कर रही है। कांग्रेस के नेता यह सत्याग्रह उनके नेता के सजायाफ्ता होने के बाद न्यायालय के खिलाफ करते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल को सूरत की एक अदालत ने देश के ओबीसी वर्ग के खिलाफ उनकी अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उचित कानूनी प्रक्रिया के बाद दोषी ठहराया और लोकसभा सांसद के रूप में उन्हें अयोग्य ठहराया जाना संबंधित कानून के तहत स्वत: परिणाम है, तो फिर ये सत्याग्रह किस लिए? कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि उनका यह सत्याग्रह किसके खिलाफ है। क्या कांग्रेस का सत्याग्रह राहुल द्वारा देश के पूरे पिछड़े समुदाय के लिए कहे गए अपमानजनक बातों को सही ठहराने के लिए है या अदालत के खिलाफ जिसने आपको सजा सुनाई है, या देश के संविधान के खिलाफ है या फिर उस प्रावधान के खिलाफ जिसके तहत आपको अयोग्य ठहराया गया है? संपूर्ण लोकतंत्र के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने वाले लोग, सत्याग्रह के नाम पर महात्मा गांधी जी की समाधि पर जो कर रहे हैं, उसमें सत्य के प्रति कोई आग्रह नहीं, बल्कि अहंकार का दुराग्रह निर्लज्जता के साथ दिख रहा है। जो भी हुआ वह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा था। संसद का पुराना नियम था जिसके तहत सदस्यता गई। ये लोग न्यायालय के प्रति दुराग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा की महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के लिए सत्याग्रह किया लेकिन बापू की समाधि पर कांग्रेस ने सत्य और अहिंसा, दोनों को तिलांजलि दे दी। इस सत्याग्रह में सबसे पहुँचने वाले लोगों में थे जगदीश टाइटलर जो सिख भाइयों के नरसंहार के आरोपी हैं। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या राजघाट में महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर आयोजित उनका सत्याग्रह भी 'अहिंसा' के खिलाफ था। यह सत्याग्रह बापू का अपमान है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने आज ओक ओवर में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से भेंट की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने आनंद शर्मा को हिमाचली टोपी और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि देश में लोकतंत्र बचाने के लिए राहुल गांधी की निर्भीक मुहिम से केंद्र सरकार डर गई है और राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के निर्णय से उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की जन विरोधी नीतियों से लोगों को अवगत करवाने के लिए भारत जोड़ो यात्रा निकाली। उन्होंने कहा कि देश में आने वाले चुनावों में जनता भाजपा को करारा जवाब देगी। उन्होंने लोकतंत्र बचाने के लिए सभी विपक्षी दलों से एकजुट होने का आग्रह भी किया। आनंद शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी को संसद में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत निशाना बनाया। आनंद शर्मा ने न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि निचली अदालत का निर्णय उच्च न्यायालय में नहीं टिक पाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस निर्णय के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज काली माता मंदिर पधाई, भराड़ी शिमला के द्वार जाकर माथा टेका और पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी प्रो सिम्मी अग्निहोत्री एवं बेटी आस्था अग्निहोत्री भी उनके साथ थी। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर उन्हें माता के दरबार आने का अवसर मिला है। उन्होंने माता रानी से प्रदेश के लोगों की सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की है।
आज दिनांक 27 मार्च 2023 को हिमाचल प्रदेश काडर के परिवीक्षाधीन आईपीएस अधिकारियों ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा सचिवालय में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात की। यह एक शिष्टाचार भेंट थी। इन अधिकारियों में अदिति, साई दत्तात्रेय वर्मा, सचिन, तथा ब्युम बिन्दल शामिल थे। इस अवसर पर रमेश छाजटा, पुलिस अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय शिमला भी मौजूद थे । मुलाकात के दौरान इन अधिकारियों ने विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से विधानसभा की कार्यप्रणाली तथा क्रिया-क्लापों की जानकारी हासिल की तथा बजट सत्र के बारे भी जाना। पठानिया ने उन्हें विस्तार से हिमाचल प्रदेश विधान सभा में स्थापित देश की सर्वप्रथम ई- विधान प्रणाली की जानकारी भी दी। पठानिया ने कहा कि युवा ही आज देश का भविष्य हैं तथा उन्हीं के कंधों पर देश के विकास तथा इसकी अखण्डता बनाये रखने का दायित्व है। पठानिया ने कहा कि आज के माहौल में आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं जहां कानून व्यवस्था को बनाये रखना होता है वहीं प्रदेश तथा देश के भीतर शान्ति एवं सदभाव बनाये रखने में पुलिस की भूमिका अहम् हो जाती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक शान्तिप्रिय प्रदेश है तथा उन्नति की ओर अग्रसर है। सभी अधिकारियों को शुभकामनायें देते हुए पठानिया ने कहा कि उन्हें प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाये रखने तथा सच्ची लग्न से इसकी सेवा करने की आवश्यकता है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की ससंद से सदस्यता रद्द करने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। इस मसले पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंडित अशोक हिमाचली ने कहा कि बीजेपी की केंद्र सरकार हिटलर की तरह जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के लोकतंत्र का गला घोटने का प्रयास किया जा रहा है और देश की जनता की आवाज को दबाने का काम बीजेपी सरेआम कर रही है। जहां-जहां प्रदेश में कांग्रेस या अन्य दलों की सरकारें हैं उन्हें सीबीआई, ईडी, का डर दिखाकर सरकारों को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा देश लोकतंत्र व कानून के दायरे में रहकर काम करता है मगर अफसोस है कि केंद्र कि मोदी सरकार लोकतंत्र को मजबूत करने की बजाए कानून की धज्जियां उड़ा रही है। कांग्रेस नेता अशोक हिमाचली ने दो टूक शब्दों में कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार को राहुल गांधी का फोबिया हो चुका है, क्योंकि यह राहुल नहीं वो आंधी है। उन्होंने कहा कि भाजपा को चिंता हो रही है कि 2024 में लोकसभा के चुनाव आ रहे हैं और राहुल गांधी को देश की जनता भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है। राहुल गांधी ने भारत जोड़ों के तहत कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक लगभग 3400 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके जोड़ने का और हिंदुस्तानी के हर दिल में जगह बनाने का काम किया है। भारत जोड़ो अभियान के तहत लोकतंत्र को मजबूत करने का और कानून के तहत रहने का देश में सुरक्षा और रक्षा को जिंदा रखने का प्रयास किया है।उन्होंने कहा सच को सच और झूठ को झूठ बोलने की ताकत राहुल गांधी रखते हैं इसलिए संसद के अंदर राहुल गांधी की आवाज को दबाया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के अधिकतर जिलों में हाल ही में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। इस भूकंप के बाद से हिमाचल के लोग घबराए हुए है। इस भूकंप से किसी तरह का जानी नुकसान तो नहीं हुआ मगर प्रदेश की जनता दहशत में ज़रूर है। जानकारी के अनुसार इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में जमीन के अंदर 156 किलोमीटर की गहराई पर था और इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.6 रही। भूकंप के झटके पूरे उत्तर भारत में महसूस किए गए मगर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए इस तीव्रता का भूकंप कहीं न कहीं चिंता का विषय है। इस भूकंप से हिमाचल के लोगों की आँखों के आगे 1905 की तबाही का मंजर आ गया। 4 अप्रैल 1905 में जब कांगड़ा की धरती पर यह भयावह दृश्य हुआ था, तो हिमाचल दहल उठा था। 1905 में 4 अप्रैल की सुबह भूकंप ने ऐसी तबाही बरपाई थी कि चारों ओर सिर्फ तबाही के निशान दिख रहे थे। कांगड़ा से लेकर लाहौर तक आई इस त्रासदी में 28 हजार लोगों की जान चली गई थी। सुबह छह बजकर 19 मिनट पर दो मिनट के लिए ऐसी हलचल हुई की लाखों परिवार बेघर हो गए और हजारों लोग इमारतों के नीचे दफन। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई थी। भूकंप के बाद कांगड़ा का ये भयावह दृश्य आज भी जिला कांगड़ा के लोगों के मन में भय बनाए हुए है। 1905 में आए भूकंप से कांगड़ा के ज्यादातर ऐतिहासिक भवन नष्ट हो गए थे। सभी बाजार पूरी तरह से तबाह हो चुके थे। कांगड़ा किला, कांगड़ा मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गए थे। बैजनाथ मंदिर को आंशिक नुकसान पहुंचा था। अब फिर लगातार आ रहे भूकंप ने हिमाचल प्रदेश की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल हिमाचल प्रदेश भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील पांचवें जोन में आता है। हिमाचल में 2022 में 50 से अधिक छोटे बड़े भूकंप आ चुके हैं। पहाड़ी राज्य होने के कारण बड़ा भूकंप हिमाचल के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। भारतीय मानक ब्यूरो ने देश को पांच अलग-अलग भूकंप जोन में बांटा हुआ है। पांचवें जोन में आने वाले इलाकों को सबसे ज्यादा खतरनाक और सक्रिय माना जाता है। इस जोन में आने वाले राज्यों में ज्यादा तबाही की आशंका रहती है। इसी तरह पांचवे से पहले जोन की ओर चलने पर जोखिम कम होता चला जाता है। सबसे खतरनाक यानी पांचवे जोन में जम्मू और कश्मीर का हिस्सा (कश्मीर घाटी), हिमाचल का पश्चिमी हिस्सा, गुजरात का कच्छ, उत्तराखंड का पूर्वी इलाका, उत्तरी बिहार का इलाका, भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। यानी अगर हिमाचल में भूकंप आता है तो नुक्सान ज़्यादा होगा। हिमाचल में चंबा-कांगड़ा और किन्नौर सहित शिमला जिला में अपेक्षाकृत अधिक भूकंप आते हैं। यह देखने में आया है कि एक दशक में बड़ी तीव्रता का कोई भूचाल नहीं आया है। परंतु हिमाचल को हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषज्ञ पहले ही चेतावनी से चुके है कि शिमला और अन्य पर्यटक स्थल जैसे मैक्लॉडगंज, कसौली, मनाली, पालमपुर, मंडी, सोलन और हिमाचल प्रदेश में कहीं भी इमारतें तीव्रता वाले भूकंप का सामना नहीं कर सकते हैं और ताश के पत्तों की तरह ढह सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता से भूकंप के दौरान नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है। अधिक खतरे वाले इलाकों में भूकंप रोधी मकान बनाने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही नियमित अंतराल पर सरकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं को स्कूलों व पंचायतों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जाने चाहिए। राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार सभी जिलों को समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश हैं। कई स्वयं सेवी संस्थाएं निजी तौर पर जागरूकता शिविर आयोजित करती हैं, जिन्हें सरकार हर संभव सहायता प्रदान करती है। 'भूकंपरोधी बनाए जायेंगे नए भवन' हिमाचल प्रदेश सरकार भी प्रदेश में भूकंप को लेकर अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा है कि वे इस बारे में पहले भी विभाग के साथ बैठक कर चुके हैं। इस बारे में विभाग को सख्त निर्देश दिए गए हैं। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदेश भर में जो नए भवन बनाए जा रहे हैं, उन्हें भूकंपरोधी बनाया जाए। साथ ही भवन बनाने में एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, ताकि भूकंप के वक्त नुकसान को कम से कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि विभाग के अधिकारियों को इस बारे में स्टडी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आपातकालीन स्थिति में सरकार-प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे। झटकों के बाद नगर निगम शिमला सतर्क : हिमाचल प्रदेश में आए भूकंप के झटकों के बाद नगर निगम शिमला भी सतर्क हो गया है। निगम ने शहर की कई भवनों को खाली करने के नोटिस जारी किए हैं, जो डेंजर जोन में हैं। दरअसल भूंकप के लिहाज से शिमला शहर बहुत संवेदनशील है। अधिकतर इमारतें भूकंप रोधी नहीं हैं। अगर कोई बड़ा भूकंप आता है तो जान-माल की भारी क्षति होगी। शिमला के 2 सिंकिंग जोन में रिज, ग्रैंड होटल, लक्कड़ बाजार, सेंट्रल स्कूल, ऑकलैंड नर्सरी स्कूल, धोबीघाट, कृष्णानगर और होटल क्लार्क्स के आसपास के इलाके शामिल हैं, जहां पर कोई नई बिल्डिंग बनाना खुद विनाश को न्योता देना है। शिमला ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान में स्पष्ट रूप से पर्यावरण और प्राकृतिक खतरे पर अध्याय 12 के तहत पेज 156 पर उल्लेख किया गया है कि शिमला में भीषण भूकंप की स्थिति में 39 प्रतिशत इमारतें गिर सकती हैं। इसमें लोगों को नुकसान होने की संख्या भी 20,446 आंकी गई है। 25,000 की आबादी के लिए बने शिमला शहर में अब 2.3 लाख लोगों के रहने का अनुमान है। इमारतों को बनाने के लिए 70 डिग्री तक की ढलानों पर अनुमति दी गई है। शिमला भूकंपीय क्षेत्र-4 में आता है। भूकंप के सबसे खतरनाक जोन में होने के बाद भी यहां लापरवाही जारी है। स्थिति को ध्यान में रखते हुए, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 2017 में शिमला के मुख्य और हरित क्षेत्रों में बिल्डिंग बनाने समेत सभी निर्माण पर प्रतिबंध लगाया था। मैक्लॉडगंज भी खतरे की जद में धर्मशाला के उपनगरों में स्थित मैक्लॉडगंज में तेजी से बढ़ते अवैध निर्माण से तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के आवास पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि एक उच्च तीव्रता वाला भूकंप मैक्लोडगंज को मलबे के ढेर में बदल सकता है। कांगड़ा जिले के मैक्लॉडगंज में लगभग 16 हजार निर्वासित तिब्बती रहते हैं और इतनी ही संख्या भारतीयों की भी है। कैसे आता है भूकंप? भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकरना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है और सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल क्या होता है अमेरिकी भूवैज्ञानिक चार्ल्स एफ रिक्टर ने सन 1935 में एक ऐसे उपकरण का इजाद किया, जो पृथ्वी की सतह पर उठने वाली भूकंपीय तरंगों के वेग को माप सकता था। इस उपकरण के जरिए भूकंपीय तरंगों को आंकड़ों में परिवर्तित किया जा सकता है। रिक्टर स्केल आमतौर पर लॉगरिथम के अनुसार कार्य करता है। इसके अनुसार एक संपूर्ण अंक अपने मूल अर्थ के 10 गुना अर्थ में व्यक्त होता है। रिक्टर स्केल में 10 अधिकतम वेग को दर्शाता है। भूकंप की तीव्रता और अवधि का पता लगाने के लिए सिस्मोग्राफ का इस्तेमाल किया जाता है। इस यंत्र के जरिए धरती में होने वाली हलचल का ग्राफ बनाया जाता है, जिसे सिस्मोग्राम कहते हैं। इसके आधार पर गणितीय पैमाना (रिक्टर पैमाना) के जरिए भूकंप की तरंगों की तीव्रता, भूकंप का केंद्र और इससे निकलने वाली ऊर्जा का पता लगाया जाता है। -रिक्टर स्केल पर 2.0 से कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं। -इसी तरह 2.0 से 2.9 तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं इसे भी सामान्य तौर पर हम महसूस नहीं करते। -वेरी लाइट कैटेगरी के भूकंप 3.0 से 3.9 तीव्रता वाले होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इन्हें महसूस तो किया जाता है लेकिन शायद ही इनसे कोई नुकसान पहुंचता है। -लाइट कैटेगरी के भूकंप 4.0 से 4.9 तीव्रता वाले होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। हालांकि इनसे न के बराबर ही नुकसान होता है। छह फरवरी को भूकंप ने मचाई थी तबाही बीती छह फरवरी को तुर्किये और पड़ोसी सीरिया में भूकंप के शक्तिशाली झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.8 मापी गई थी। इसके एक-दो दिन बाद भी कई बार भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या 40 हज़ार से ज्यादा है।
स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी ने कहा था कि कांग्रेस सरकार को यदि किसी एक व्यक्ति के लिए भी डिवीज़न खोलना पड़ा तो हम खोलेंगे। साथ उन्होंने एक बात और भी कही थी कि प्राइमरी स्कूल तो बहुत जरूरी है, यदि एक बच्चे के लिए भी प्राइमरी स्कूल खोलना पड़ा तो खोलेंगे। वीरभद्र सिंह का मॉडल तो ऐसा था आज़ादी के बाद जब से कांग्रेस सत्ता में आई चम्बा पिछड़ता गया। जो भी खामियाज़ा चम्बा के लोगों ने भुगता है, उसका कारण कांग्रेस है चुराह विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज उन नेताओं में से है जो हमेशा चर्चा में रहते है। अपनी आक्रामक कार्यशैली और बेबाक बयानों से हंसराज सुर्ख़ियों में भी रहते है और विरोधियों को घेरने में आगे भी। बेशक प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ हो लेकिन चुराह में हंसराज का राज जारी है। प्रदेश की सुक्खू सरकार को तीन माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और नई सरकार का पहला बजट भी आ चुका है। नई सरकार के अब तक के कामकाज और विपक्ष की भूमिका सहित कई मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने हंसराज से विशेष बातचीत की। हंसराज ने डी नोटिफाई के मुद्दे पर वीरभद्र सिंह मॉडल का हवाल देकर सरकार को आईना दिखाया और जनमंच के पक्ष में भी मजबूती से अपनी बात रखी। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश सवाल : हंस राज जी कांग्रेस सरकार ने अपना बजट पेश किया है। इस बजट को लेकर क्या संक्षिप्त में क्या कहना चाहेंगे ? जवाब : कांग्रेस अपने बजट को कह रही है कि यह व्यवस्था है, लेकिन यह सम्पूर्ण रूप से अव्यवस्था है। सवाल : डिनोटिफिकेशन किए गए संस्थानों की बात आपने सदन में रखी थी। आपके क्षेत्र में कई विद्युत सब डिवीज़न और कई संस्थानों को बंद किया गया है। आप लगातार यह कह रहे है कि यदि सरकार ने इन संस्थानों को सुचारु रूप से नहीं चलाया तो आप आमरण अनशन करेंगे। क्या कहना चाहेंगे आप ? सवाल : देखिए हमने अपने सारे विषय रख दिए है और एक विषय में हमारी जीत भी हुई है। विधायक निधि को लेकर जो बिलकुल ही मुकरे हुए थे, उन्होंने बजट में कह दिया कि हम इसको दस लाख बढ़ा भी देंगे। अब रही संस्थानों की बात तो हमने अभिभाषण में चर्चा में भाग लेते हुई कहा था कि चाहे विद्युत सब डिवीज़न की बात हो, कॉलेज या अन्य संस्थान, जनहित में बंद नहीं होने चाहिए और हम इन्हे खुलवाकर मानेंगे। सदन में मैंने स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार को यदि किसी एक व्यक्ति के लिए भी डिवीज़न खोलना पड़ा तो हम खोलेंगे। साथ उन्होंने एक बात और भी कही थी कि प्राइमरी स्कूल तो बहुत जरूरी है, यदि एक बच्चे के लिए भी प्राइमरी स्कूल खोलना पड़ा तो खोलेंगे। वीरभद्र सिंह का मॉडल तो ऐसा था। उन्होंने डलहौजी में एक ही नोफिकशन में दो कॉलेज खोले थे और अब उस विधानसभा क्षेत्र में चार कॉलेज है और हमारे विधानसभा क्षेत्र में एक ही कॉलेज है। क्षेत्रफल के लिहाज से देखा जाए तो लाहौल स्पीति, भरमौर, पांगी के बाद चुराह सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है और एक तरफ जम्मू और लाहौल स्पीति की साथ लगता है और दूसरी साइड पंजाब पठानकोट से लगता है। हमने कहा कि जो बेसिक चीज़े चाहिए वो चुराह को मिले। आजादी के 76 सालो में लगभग 55 से 60 से तक कांग्रेस ने हिमाचल में राज़ किया है और यदि आज चुराह विधानसभा पिछड़ा रह गया है तो उसका कारण कांग्रेस सरकार है। अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस क्षेत्र को उठाने की कोशिश की है तो कांग्रेस के पेट में क्यों दर्द हो रही है। सवाल : जनजातीय क्षेत्रों जैसे चम्बा या लाहौल स्पीति के लिए विशेष पैकेज की बात भी आपने की। पांच साल हिमाचल में भी और केंद्र में भी भाजपा की सरकार रही है, उस समय इन इलाकों के लिए यह पैकेज क्यों नहीं लाए गए। जवाब : हिंदुस्तान आज़ाद होने से पहले कोलकाता में लाइट होती और चम्बा में लाइट होती थी। हमारे राजा लोग इतने प्रबुद्ध और एडवांस सोच के थे। हिंदुस्तान जब आज़ाद हुआ तो अन्य राज्यों की मांग होने लगी। डॉ वाईएस परमार और उनके साथियो की मेहनत से आज हम हिमाचल में है, वरना हमे तो पंजाब में डाला जा रहा था। हमने हिमाचल में रहने की वकालत की और जिन जिलों ने हिमाचल का निर्माण किया है उन जिलों में सबसे पहला जिला चम्बा था। आज पाकिस्तान में जो लाहौर है, हमसे हमसे नज़दीक था। उस दौर में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे लोग चम्बा में थे। फिर आज़ादी के बाद जब से कांग्रेस सत्ता में आई चम्बा पिछड़ता गया। जो भी खामियाज़ा चम्बा के लोगों ने भुगता है, उसका कारण कांग्रेस है। सवाल : आप सवाल को घुमा गए हंसराज जी। चलिए अगले सवाल पर आते है। भाजपा बार-बार यह कह रही है की जो कांग्रेस ग्रीन एनर्जी की पहल अपने बजट में लाई है वो पूरा केंद्र सरकार से कॉपी पेस्ट किया गया है। पर कांग्रेस का यह कहना है कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी तब इस प्रोजेक्ट को क्यों नहीं लाया गया, उस समय भाजपा कहाँ सोई हुई थी। जवाब : आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी में पूरे देश को ग्रीन कहा है, तो उसमें हिमाचल भी आता है। इसमें कहाँ एक्स्ट्रा करने की जरूरत है। उसमे फंडिंग की भी व्यवस्था की गई है। ये लोग भूल गए है कि प्रोफ़ेसर प्रेम कुमार धूमल जी जब सीएम थे तब प्लाटिक उन्होंने ही बैन किया था। ग्रीन सैस की अगर बात की जाए तो वह प्रेम कुमार धूमल जी के टाइम से ही शुरू कर दिया गया था, इनको कुछ नया नहीं करना है। हम लोग तो पहले से ही ग्रीन थे। बल्कि जैसा रणधीर जी ने सदन में अपने वक्तव्य में कहा कि यहाँ लकड़ी चोर भी हुई है, इसके चलते भी तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री बदले गए। ये है कांग्रेस का असली चेहरा। सवाल : बजट सत्र में जनमंच को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस कह रही है कि यह लंच मंच है और एक मंत्री ने यह भी कहा कि झंड मंच भी है।इसको लेकर आपका क्या कहना है। जवाब : जनमंच एक बेहतरीन व्यवस्था थी। प्रदेश में जब भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तो लोगों के प्रति उत्तरदायी सरकार रही है। हम वह पहले लोग हैं जो सरकार बनने के बाद सीधा जनता के पास जाकर उनकी समस्याओं को सुनते हैं कि कैसे समस्या का हल किया जाए। इनको जनमंच का परिभाषा नहीं पता है। मैं शुरू से देखता आया हूं कि यह लोग टाइम पास करते हैं। पांचवे साल इनको याद आता है कि कुछ करना है। चुनावी महीनों में ज्यादा चलते है ये लोग। मैंने खुद 17 जनमंच होस्ट किए है, सिरमौर से लेकर किन्नौर तक गया हूँ। जनमंच से लाखों मुद्दे हल हुए है और तो क्या बुरा होता था। इस पर खर्च हुआ पांच सालों में सिर्फ पांच करोड़। लाखों जनसमस्याएं हल हुई है सरकार जनता के दर पर गई है, बताइये इसमें क्या हर्ज था।
प्रदेश की सुक्खू सरकार पर जन अपेक्षाओं का बोझ भी है और संसाधनों का अभाव भी। ऐसे में सिमित आय और बढ़ते व्यय के बीच प्रदेश सरकार के सामने कर्ज ही एकमात्र विकल्प है। चालु वित्त वर्ष 2022 -23 समाप्त होने से पहले राज्य सरकार अब 1700 करोड़ का ऋण लेगी। ये ऋण दो मदो में क्रमश 1000 करोड़ और 700 करोड़ रुपये ली जाएगी। 1000 करोड़ 15 वर्ष के लिए और 700 करोड़ 9 वर्ष के लिए लिए जायेंगे। विदित रहे कि वर्त्तमान सुक्खू सरकार इससे पहले भी 1500 करोड़ का ऋण ले चुकी है। मौजूदा सरकार का ऋण अब बढ़कर 3200 करोड़ हो जायेगा। वहीँ वर्तमान सरकार के अनुसार पूर्व की जयराम सरकार से उसे विरासत में करीब 75000 का करोड़ का ऋण और करीब 11000 करोड़ की देनदारियां मिली है। यानी प्रदेश की आर्थिक स्थिति दुरुस्त नहीं है। हिमाचल में प्रति व्यक्ति कर्ज करीब 93 हज़ार रुपये जा पहुंचा है, जो सुखद स्थिति नहीं है। आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस : उधर सुक्खू सरकार राज्य की आय बढ़ाने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। सरकार पन विद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाने जा रही है जिससे करीब चार हज़ार करोड़ की आय बढ़ेगी। इसके अलावा नई आबकारी नीति से भी सरकार को करीब 2800 करोड़ ज्यादा राजस्व की उम्मीद है। खनन और सरप्लस बिजली बेचकर भी सरकार आय बढ़ाने पर कार्य कर रही है। वहीँ सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रमों का घाटा भी करीब पांच हज़ार करोड़ है और जानकार मान रहे है कि इस दिशा में सुक्खू सरकार जल्द अहम फैसले ले सकती है।
प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा 6 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। पीपल फॉर रेस्पोंसिबल गवर्नेंस द्वारा दायर याचिका पर 21 अप्रैल को सुनवाई होगी। इसमें सभी 6 संसदीय सचिवों को प्रतिवादी बनाने की मांग भी की गई है। आपरोप लगाया गया है कि सभी संसदीय सचिव लाभ के पद पर तैनात है और इन्हें प्रतिमाह दो लाख से अधिक वेतन और भत्ते के तौर पर अदा किया जाता है। याचिका में हिमाचल संसदीय सचिव ( नियुक्ति, वेतन, भत्ते, शक्तियां, विशेषाधिकार और सुविधाएं) अधिनियम, 2006 को निरस्त करने कि गुहार भी लगाई गई है। विदित रहे कि प्रदेश कि सुक्खू सरकार ने 6 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की है। इनमे अर्की विधायक संजय अवस्थी, दून विधायक राम कुमार चौधरी, रोहड़ू विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, कुल्लू विधायक सुन्दर ठाकुर, बैजनाथ विधायक किशोरी लाल और पालमपुर विधायक आशीष बुटेल शामिल है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी इस मुड़े पर सरकार को घेरा है।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। उनके महंगाई भत्ते में 4 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इससे केंद्र के करीब 47. 58 लाख कर्मचारी और 69.76 लाख पेंशनर लाभान्वित होंगे। हालांकि इससे सरकारी खजाने पर प्रति वर्ष करीब 13 हज़ार करोड़ का बोझ बढ़ेगा। केंद्रीय कर्मचारियों को अब नई दर से महंगाई भत्ता उनकी सैलरी के साथ मिलेगा। हालांकि, इसे अभी कैबिनेट से मंजूरी मिलेगी उसके बाद ही इसे क्रेडिट किया जाएगा, लेकिन, ये लागू 1 जनवरी 2023 से होगा।
चार राज्यों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने के बाद हिमाचल भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप को बदले जाने को लेकर भी अटकलें तेज है। सुरेश कश्यप का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उन्हें एक्सटेंशन मिलता है या उनकी विदाई होती है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच बीते दिनों भाजपा ने चार राज्यों बिहार, दिल्ली, राजस्थान और ओडिशा में प्रदेश अध्यक्ष बदले है। राजस्थान में सांसद सीपी जोशी, बिहार में एमएलसी सम्राट चौधरी, दिल्ली में वीरेंद्र सचदेवा और ओडिशा में पूर्व मंत्री मनमोहन सामल को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि संगठन के बीच खींचतान को खत्म करने के लिहाज़ से भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ये फैसला लिया है। ऐसे में माहिर मान रहे है कि अन्य राज्यों की तरह ही हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा संगठन का मुखिया बदल सकती है। बहरहाल कयासों का सिलसिला जारी है कि क्या सुरेश कश्यप के कार्यकाल को विस्तार मिलेगा या फिर प्रदेश भाजपा की बागडोर किसी नए चेहरे को सौंप दी जाएगी। यूँ तो बतौर प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप का कार्यकाल हमेशा ही सवालों के घेरे में रहा है। बीते विधानसभा चुनावों में भी खराब प्रदर्शन के कारण भाजपा के हाथों सत्ता चली गई। तब भाजपा की हार का एक बड़ा कारण लचर संगठन माना गया। इससे पहले 2021 के अंत में हुए एक लोकसभा और तीन विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। ऐसे में बतौर अध्यक्ष सुरेश कश्यप के एक्सटेंशन की राह मुश्किल दिख रही है। जून 2020 में डॉ राजीव बिंदल के स्थान पर सुरेश कश्यप को नया अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ साथ सुरेश कश्यप शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद भी है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का करीबी माना जाता है और उनकी नियुक्ति के पीछे भी ये ही बड़ा कारण माना जाता है। पर क्या अब सत्ता परिवर्तन के बाद भी कश्यप को एक्सटेंशन मिलेगा, ये देखना रोचक होगा। दरअसल बीते विधानसभा चुनाव में न सिर्फ बतौर अध्यक्ष कश्यप की परफॉरमेंस पर सवाल उठे है बल्कि उनके अपने संसदीय क्ष्रेत्र शिमला में भी भाजपा सबसे ज्यादा पिछड़ी है। शिमला संसदीय क्षेत्र की 17 में से सिर्फ तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। ये ही कारण है कि कश्यप की डगर फिलवक्त मुश्किल है। टॉप टू बॉटम संगठन मेकओवर जरूरी ! 2024 लोकसभा चुनाव में 2014 और 2019 जैसा प्रदर्शन दोहराने के लिए भाजपा को निसंदेह एड़ी चोटी का ज़ोर लगाना होगा। लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में शिमला नगर निगम चुनाव भी होने है। ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाती भी है तो संगठन को मजबूत करना सुरेश कश्यप के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। माहिर मानते है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा को टॉप टू बॉटम संगठन मेकओवर की जरुरत है।
विपक्ष में आते ही हिमाचल भाजपा ने तेवर के जेवर पहन लिए है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगुवाई में भाजपा आक्रामक है और हर छोटे बड़े मुद्दे पर लगातार प्रदेश की सुक्खू सरकार को घेर रही है। डी नोटिफाई का मुद्दा हो या विधायक निधि का मसला, भाजपा आक्रमक है और निसंदेह पार्टी सुक्खू सरकार को सेटल होने का कोई मौका नहीं देना चाहती। यानी सुक्खू सरकार के पास चूक की कोई गुंजाईश नहीं है। मौजूद बजट सत्र में भी भाजपा बेहद आक्रमक है। कभी विपक्षी विधायक नई सरकार को प्रदेश के विकास पर लगा ग्रहण बताते है, तो कभी इसे जुमलों की सरकार बताते है। एक दिन तो भाजपा विधायक चेन-ताले लेकर विधानसभा कैंपस के भीतर तक पहुंच गए थे। सुक्खू सरकार को लॉक गवर्नमेंट की उपाधि दे दी गई है और आए दिन सदन में गहमागहमी और वाकआउट का दौर भी जारी है। सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से चली हो, ऐसे कम ही दिन है। सदन के भीतर भी भाजपा लगातार सरकार को घेर रही है और सदन के बाहर भी। भाजपा हर उस मुद्दे को उठा रही है जो प्रदेश में तीन महीने पहले आई सरकार के खिलाफ भुनाए जा सकते हो। उधर भाजपा के फ्रंट फेस नेता प्रतिपक्ष और पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ही है। अलबत्ता जयराम ठाकुर खुद बेहद आक्रमक तरीके से आगे बढ़ रहे है लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में पार्टी संगठन अब भी लचर दिख रहा है। माहिर मानते है कि ऐसे में प्रदेश भाजपा को इस पर मंथन जरूर करना होगा।
देश की सबसे बुज़ुर्ग पार्टी कांग्रेस का बुरा दौर और बुरा होता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता या सीधे तौर पर कहें तो पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा, राहुल गांधी पूरी तरह घिर गए है। चार साल पुराने एक आपराधिक मानहानि में दो साल की सज़ा मिलने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई। यही नहीं वर्तमान कानून के मुताबिक, राहुल गाँधी फिलहाल 2024 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे, हालांकि अगर ऊपरी अदालत से पूर्व कांग्रेस सांसद को राहत मिलती है तो यह स्थितियां बदल सकती हैं। मानहानि के जिस मामले में राहुल को सजा सुनाई गई, भाजपा उसे समग्र ओबीसी जाति का अपमान बता रही है। ये बात और है कि जिन नीरव मोदी का राहुल ने नाम लिया था, वे जैन हैं और ललित मोदी मारवाड़ी। वहीँ कांग्रेस इस पूरे मामले को साज़िश बता रही है, जबकि फ़ैसला कोर्ट का है दरअसल कोर्ट के द्वारा दो या दो साल से ज़्यादा की सजा मिलने के बाद जनप्रतिनिधित्व क़ानून के तहत सदस्यता समाप्त होना लाजमी है। हाँ, एक बात ज़रूर है कि राहुल गांधी की सदस्यता रद्द होने से पूरी कांग्रेस में भूचाल आ गया है। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि देश के लड़खड़ाते विपक्ष के लिए भी ये एक बड़ा झटका है। अब कांग्रेस की राजनीतिक विरासत को सँभालते गाँधी परिवार पर सुलगी आग के इस ताप से कांग्रेस पिघलती है या तप कर और निखरती है, फिलवक्त ये सबसे बड़ा सवाल है। सवाल ये भी है कि 2024 से पहले विपक्षी दलों के होने की संभावना पर अब क्या असर होगा ? इस वक्त भारतीय राजनीति के प्लेटफ़ॉर्म पर विपक्ष के लिए काली रात खड़ी दिखाई दे रही है। लगातार मज़बूत होती भारतीय जनता पार्टी के आगे मानो विपक्ष हांफने लगा हो। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की लोकसभा सीट वायनाड में उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अगर राहुल के पक्ष में फैसला आने से पहले उपचुनाव हो गया तो फिर उनका संसद में आना मुश्किल हो जाएगा। दो साल की सजा का समय और उसके बाद छह साल की अयोग्यता तक वे कोई चुनाव नहीं लड़ पाएँगे। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस की स्थिति और बदतर होगी। हालांकि कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना ये भी है कि ये राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा अवसर है, जिसमें वे दुगनी- चौगुनी ताकत के साथ फिर सामने आ सकते हैं। एक वर्ग विशेह में कहीं न कहीं ये राय बन रही है यह फैसला लोकतंत्र के खिलाफ है और विरोधी दलों के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस मुद्दे को आंदोलन में बदला जा सकता है, जमीन से आवाज उठाकर आंदोलन को ईवीएम तक ले जाया जा सकता है। वैसे कांग्रेस के साथ कई बुनियादी समस्याएं है। कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, अडानी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठा रही है और उन्हें लोगों से प्रतिक्रिया मिल रही है, लेकिन कांग्रेस उस गति को बरकरार नहीं रख पाती। कांग्रेस उस आंदोलन को जिंदा नही रख पाती जो उसके सत्ता के रास्ते की दूरी कम कर सकता है। अब फिर कांग्रेस के पास एक मौका है। अतीत में झांके तो कांग्रेस ऐसी पार्टी भी रही है जो जन आंदोलन या जन भावनाओं के सैलाब पर सवार होकर सत्ता में आ जाए। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद ऐसा ही माहौल बना था और राजीव गांधी 400 से ज़्यादा सीटें लेकर जीते थे। मगर फिलवक्त कांग्रेस ऐसा जनसैलाब पैदा कर पाए, ये मुश्किल जरूर लगता है। वहीँ कुछ का मानना ये भी है यह कांग्रेस के लिए चेहरा बदलने का एक बढ़िया अवसर भी है। भाजपा के 'यश' में हमेशा राहुल गांधी का 'अपयश' एक हिस्सा रहा है। इसलिए अगर कांग्रेस सोच-समझकर आगे जाती है और नया चेहरा सामने लाती है, तो भाजपा के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है। गौरतलब है कि राहुल गांधी के साथ हुई यह कार्रवाई गांधी परिवार के साथ ऐसा पहला मामला नहीं है। इससे पहले साल 1978 में राहुल की दादी इंदिरा गांधी ने सदस्यता गंवाई थी और साल 2006 में उनकी मां सोनिया गांधी ने भी अपनी सदस्यता से इस्तीफा दिया था। हालांकि इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी ने उपचुनाव में जीत हासिल करके सदन में एंट्री ले ली थी। ये है पूरा मामला : साल 2019 का ये मामला 'मोदी सरनेम' को लेकर राहुल गांधी की एक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने नीरव मोदी, ललित मोदी और अन्य का नाम लेते हुए कहा था, "कैसे सभी चोरों का सरनेम मोदी है?" राहुल गांधी को जिस बयान के लिए दो साल की सज़ा हुई है वो उन्होंने साल 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान कर्नाटक के कोलार में दिया था। उन्होंने कथित तौर पर ये कहा था, "इन सभी चोरों का उपनाम (सरनेम) मोदी क्यों है?" राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। पूर्णेश मोदी सूरत पश्चिमी से बीजेपी विधायक हैं और पेशे से वकील हैं। वह भूपेंद्र पटेल की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। पूर्णेश मोदी का आरोप था कि राहुल गांधी की इस टिप्पणी से पूरे मोदी समुदाय की मानहानि की है। इस मामले की सुनवाई सूरत की अदालत में हुई। राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज किया गया था। भारतीय दंड विधान की धारा 499 में आपराधिक मानहानि के मामलों में अधिकतम दो साल की सज़ा का प्रावधान है। क्यों गई राहुल गांधी की सदस्यता अनुच्छेद 102(1) और 191(1) के अनुसार अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य, लाभ के किसी पद को लेता है, दिमाग़ी रूप से अस्वस्थ है, दिवालिया है या फिर वैध भारतीय नागरिक नहीं है तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। अयोग्यता का दूसरा नियम संविधान की दसवीं अनुसूची में है। इसमें दल-बदल के आधार पर सदस्यों को अयोग्य ठहराए जाने के प्रावधान हैं। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी सांसद या विधायक की सदस्यता जा सकती है। इस कानून के जरिए आपराधिक मामलों में सजा पाने वाले सांसद या विधायक की सदस्यता को रद्द करने का प्रावधान है।
जल्द ही नगर निगम शिमला के चुनाव होने है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ये चुनाव अपने आप में बेहद खास हैं। भाजपा के सामने जहां शिमला नगर निगम पर कब्ज़ा बरकरार रखने की चुनौती है, तो वहीँ नई नवेली कांग्रेस सरकार के लिए ये साख का सवाल है। इसी तरह ये चुनाव सीपीआईएम के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने का अवसर है, तो आम आदमी पार्टी के भविष्य के लिए भी अहम है। ऐसे में स्वाभाविक है कि शिमला नगर निगम चुनाव में जबरदस्त घमासान देखने को मिलेगा। यूँ तो शिमला नगर निगम के चुनाव जून 2022 से ड्यू थे, लेकिन पहले कोर्ट में डिलिमिटेशन का मामला विचाराधीन होने से समय पर चुनाव नहीं हो सके। अब कोर्ट से मामला क्लीयर हो गया है और इसे देखते हुए स्टेट इलेक्शन कमीशन ने निगम चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। अब कभी भी निगम चुनाव का औपचारिक ऐलान हो सकता है। मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य की बात करें तो शिमला नगर निगम में 34 वार्ड है जो तीन निर्वाचन क्षेत्रों के अधीन आते है, शिमला शहरी, कसुम्पटी और शिमला ग्रामीण। विधानसभा चुनाव में इन तीनों ही निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस को शानदार जीत मिली है, तो भाजपा का सूपड़ा साफ हुआ है। यही नहीं विधानसभा चुनाव के दौरान शिमला नगर निगम के अधिकतम वार्डों से कांग्रेस को ही लीड प्राप्त हुई है। ज़ाहिर है भाजपा विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद शिमला नगर निगम में मिशन रिपीट का सपना पूरा करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाएगी। यहाँ ये भी जहन में रखना होगा कि बीते विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद कांग्रेस शिमला में पहले से ही मजबूत स्थिति में है। खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की राजनीतिक करियर की शुरुआत शिमला नगर निगम से हुई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू नगर निगम शिमला में पार्षद रह चुके है और वे यहाँ की राजनीति को अच्छे से समझते है। प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी शिमला में ही रहती है और यहाँ की राजनीति से बेहतरीन तरीके से वाकिफ है। उधर, सरकार बनने के बाद से ही कांग्रेस ने जिला शिमला को पूर्ण अधिमान दिया है। जिला शिमला से अनिरुद्ध सिंह, विक्रमादित्य सिंह और रोहित ठाकुर को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान को भी कैबिनेट रैंक से नवाजा गया है और रोहड़ू से विधायक मोहन लाल ब्राक्टा को मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया है। ऐसे में भाजपा और अन्य दलों के लिए शिमला नगर निगम की राह आसान नहीं होने वाली है। संभवतः पार्टी सिंबल पर होंगे चुनाव : शिमला नगर निगम चुनाव पार्टी सिंबल पर होंगे या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि माहिर मान रहे है कि सुक्खू सरकार नगर निगम चुनाव पार्टी सिंबल पर करवा सकती है लेकिन बहरहाल औपचारिक ऐलान तक इन्तजार करना होगा।


















































