राज्य महिला आयोग शिमला का एक दिवसीय कैम्प कोर्ट आज जिलाधीश कार्यालय सोलन के न्यायालय कक्ष में आयोजित किया गया। कैम्प कोर्ट की अध्यक्षता महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. डेजी ठाकुर ने की। कैम्प कोर्ट के लिए घरेलू हिंसा सहित अन्य प्रकार की प्रताड़ना के 27 मामलों में समन जारी किए गए थे, जिसमें से 17 मामलों की, पक्षों की उपस्थिति में सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान 9 मामलों का निपटारा कर दिया गया तथा शेष मामलों में दोबारा समन जारी किए गए।
रॉयल एस्टेट ग्रुप अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के फॉर्म स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) में मिलना शुरू हो गए है। ये स्कीम ग्रेटर मोहाली ( Greater Mohali ) में प्लाट खरीदने का एक सुनहरा अवसर है। ख़ास बात ये है कि ये योजना एसबीआई द्वारा एप्रूव्ड है ( Approved by SBI ). साथ ही ये योजना पंजाब सरकार द्वारा भी मान्यता प्राप्त है। GMADA (Greater Mohali Area Devlopment Authority ) द्वारा भी ये योजना Approved है और इसमें विभिन्न साइज के 187 प्लाट बिक्री के लिए उपलब्ध है। जाने इस स्कीम के बारे में: इन प्लॉट्स में SBI के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में SBI की सभी जिला मुख्यालय ब्रांचों में इसके फॉर्म उपलब्ध है। योजना में आवेदन करने के लिए फॉर्म के साथ 11 हज़ार रुपए आवेदन शुल्क जमा करवाना होगा, जो रिफंडेबल है। साथ ही फॉर्म का शुल्क 100 रुपये भी अदा करना होगा, जो नॉन रिफंडेबल है। ये योजना 26 अगस्त को शुरू होगी और 11 सितम्बर तक चलेगी। 22 सितम्बर को ड्रा निकाले जायेगे जिसके बाद प्लाट आवंटित होंगे। जो लोग पहली बार मकान खरीदेंगे वे निर्माण कार्य हेतु सब्सिडी का लाभ भी उठा सकते है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2 .67लाख तक की सब्सिडी का लाभ उठाया जा सकता है। योजना के तहत आवंटित किये जाने वाले सभी 187 प्लाटो पर एक्सटर्नल डेवलोपमेन्ट शुल्क ( External Devlopment Charges ) व रजिस्ट्रेशन शुल्क ( Registration Charges ) की रियायत दी जा रही है। खरीददार को सिर्फ 16450 रुपये प्रति स्क्वायर यार्ड की दर से भुगतान करना होगा। आवेदन हेतु आय मापदंड ( INCOME CRETERIA ) आर्थिक पिछड़ा वर्ग - 3 लाख से कम सालाना आय ओपन/ सामान्य वर्ग - 6 लाख से कम सालाना आय आरक्षित वर्ग - Govt / Semi Govt ./ Defence / Sports / Disabled / Persons Settled Abroad ( कोई आय सीमा नहीं ) ये है कीमत : 80 Sq Yard 21 प्लाट 1316000 90 Sq Yard 51 प्लाट 1480500 100 sq Yard 65 प्लाट 1645000 110 sq Yard 29 प्लाट 1809500 120 sq Yard 21 प्लाट 1974500
The Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry (UHF), Nauni, and Satluj Jal Vidyut Nigam Foundation have joined hands to improve the skill set of Himachal farmers. The two organisations have inked a Memorandum of Understanding (MoU) for one year for Rs 55 lakh under which UHF will organize 32 farmer trainings at its main campus and different stations located in the state. The MOU was signed between Dr Rakesh Gupta, Director Extension Education and Awadhesh Prasad, Senior AGM (HR), SJVN in the presence of Dr Parvinder Kaushal, Vice-Chancellor of the university. Dr JN Sharma, Director Research, Rajeev Kumar, Registrar, Dr Raj Kumar Thakur, Joint Director (Communication), Dr Mai Chand, Joint Director (Training) and Harsh Jain, Deputy Manager (HR) from SJVN were also present on the occasion. The MOU is part of SJVN’s Corporate Social Responsibility under which they have set themselves a target for training over 6000 farmers in the latest farm techniques by 2022. Over the next year, the university will conduct six-day residential skill development programmes in farm technology for 800 farmers from different districts of the state including SJVN’s project areas. The SJVN Foundation will bear the total cost of these trainings. It is worthwhile to mention that over 2100 farmers have already benefitted from 86 camps organized by the university under this agreement since 2016. The participants will be trained on the various aspects of agriculture and horticulture including the usage of modern technologies in these fields. The skill development would be under the areas of natural farming, fruit, vegetable and mushroom production, floriculture, post-harvest technology, beekeeping, medicinal and aromatic plants and nursery production of horticulture and forestry crops. Topics like Agripreneurship, plant protection, organic farming and environment impact assessment would also be covered. Besides, to promote Swachh Bharat activities, special reference to awareness on bio-diversity, conversion of bio-waste into compost and usage of wastewater for agriculture. Speaking on the occasion, Dr Parvinder Kaushal said that university would focus on enhancing the practical aspect so that farmers gain the most out of these trainings and look towards starting their enterprises in the agricultural sector. Every year, the university trains thousands of farmers from Himachal and other states in the country at the main campus, research stations and Krishi Vigyan Kendras located in the different agroclimatic zones. Here it is worthwhile to mention that SJVN undertakes its CSR and Sustainability projects in six verticals namely, Health and Hygiene, Education and Skill Development, Sustainable Development, Infrastructural and Community Development, Assistance during natural disasters, Promotion of Culture and Sports. SJVN is also active in the development of Panchayat Ghar, Mahila Mandal, playgrounds and in the past few years more than 200 community assets have been created.
करीब बीते एक माह में दिल्ली से जुड़े तीन राजनीति के दिग्गजों का निधन हुआ है। 20 जुलाई को 15 वर्ष तक दिल्ली की सीएम रही शीला दीक्षित का निधन हुआ। इसके बाद 6 अगस्त को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज दुनिया को अलविदा कह गई। अब शनिवार (24 अगस्त) को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के निधन का समाचार आया है, जिनका दिल्ली की राजनीति में काफी दखल रहा है। वे कई बार दिल्ली के सीएम दावेदार भी माने जाते रहे लेकिन शीला दीक्षित के राज में 15 साल तक दिल्ली में कमल नहीं खिला।वे लंबे समय से टीशू कैंसर से जूझ रहे थे और नौ अगस्त से दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती थे। 13 साल तक रहे DDCA अध्यक्ष अरुण जेटली 1999 से 2012 तक दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (Delhi and District Cricket Association) के अध्यक्ष भी रहे। 2014 की मोदी लहर में हारे अरुण जेटली ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में केवल एक बार 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा। मोदी लहर के बावजूद अरुण जेटली को अमृतसर लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह के हाथों एक लाख से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा था। बावजूद उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश के मेधावी विद्यार्थी और शोधार्थी हिमाचली टोपी या केसरियां पगड़ी पहनकर डिग्री लेंगे।यूनिवर्सिटी ने 20 सितंबर को प्रस्तावित पांचवें दीक्षांत समारोह के लिए ड्रेस कोड तय किया है।ये कोड डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों के लिए तय किया गया है। इसके अलावा सफेद रंग का पूरी बांहों वाला कुर्ता डिग्री लेने वाले मेधावियों को दीक्षांत समारोह में पहनना होगा। केंद्रीय विवि के पांचवे दीक्षांत समारोह वर्ष 2017 और 2018 के लगभग 650 से अधिक छात्रों को डिग्री दी जाएगी। मेधावी अंगवस्त्र और हिमाचली टोपी विवि की सहकारी समिति के कार्यालय से खरीद सकते हैं। इसके लिए कुछ राशि जमानत के रूप में जमा करनी होगी।
सरकार ने अनुबंध कर्मियों को करारा झटका दिया है। अनुबंध कर्मियों को अब वरिष्ठता में अनुबंध सेवाकाल का लाभ नहीं मिलेगा। जब वे नियमित होंगे, तभी से वरिष्ठता गिनी जाएगी। सरकार के इस निर्णय से अनुबंध कर्मियों में निराशा है। वर्तमान में करीब 40 हजार अनुबंध कर्मी हैं। सरकार की नीति के अनुसार ये तीन साल के सेवाकाल के बाद नियमित होते हैं। पीटीए शिक्षकों का तीन साल का कार्यकाल पिछले साल पूरा हो गया था, लेकिन वे अभी तक नियमित नहीं हो पा रहे हैं। सरकार का कहना है कि सरकारी सेवा में कार्यरत सभी कर्मचारियों को वरिष्ठता उनकी नियमितीकरण की तिथि से दिए जाने का प्रावधान है। नियमित के विपरीत अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों पर विभिन्न सेवा संबंधित नियम लागू नहीं होते हैं। कन्ट्रेक्चुअल अप्वाइंटमेंट की शर्तो के अनुसार यह एक अस्थायी व्यवस्था है, जिसे हर साल सशर्त बढ़ाया जाता है। अनुबंध पर दी गई सेवा अवधि को वरिष्ठता लाभ दिया जाना प्रशासनिक रूप से तर्कसंगत नहीं है। अनुबंध नियमित कर्मचारी संघ हिमाचल प्रदेश ने इसे निराशाजनक बताया है। संघ का कहना है कि सरकार ने विभिन्न कर्मचारियों को लाभ देने के लिए कई बार नियमों में संशोधन किया है, पर जब बात अनुबंध और अनुबंध से नियमित कर्मचारियों की आती है तो नियमों का हवाला देकर टाल दिया जाता है।
प्रदेश में पर्यटन को पंख लगाने के लिए हिमाचल के हर हलके में एक हेलीपैड बनाया जायेगा होगा और छह स्थानों पर हेलीपोर्ट बनाए जाएंगे। सीएम जयराम ठाकुर ने बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू के सवाल पर जानकारी दी कि अभी प्रदेश में 64 हेलीपैड हैं। जल्द सरकार द्वारा 11 विधानसभा हलकों में हेलिपैड का निर्माण किया जायेगा। इनमे नादौन, बड़सर, इंदौरा, जसवां परागपुर, सुलह, बल्ह, गगरेट, हरोली, कुटलैहड़, नाहन व पांवटा शामिल है। इसके अतिरक्त सरकार उड़ान दो योजना के अंतर्गत हिमाचल में छह हेलीपोर्ट बनाएगी। इनके निर्माण के लिए पवन हंस लिमिटेड कंपनी द्वारा विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है। इस पर लगभग 28.80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। - सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि रामपुर और झाकड़ी में 20 किलोमीटर के दायरे में दो हेलीपोर्ट का निर्माण करना सही नहीं है। एक हेलिपैड किसी अन्य जिले के मुख्यालय में बनाना चाहिए। - पांवटा के विधायक सुखराम चौधरी ने हेलीपैड के निर्माण में सिरमौर को प्राथमिकता देने की मांग उठाई। - विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने नाहन में हेलीपैड स्थापित करने की मांग उठाई। यहाँ बनेंगे हेलीपोर्ट( अनुमानित लागत) बनरेड़ू (संजौली-ढली बाईपास शिमला) 10 करोड़ रामपुर, (शिमला) 3,59,16,082 झाकड़ी (शिमला) 3,16,02,490 कांगनीधार (मंडी) 5,25,18,539 बद्दी (सोलन) 2,73,29,340 मनाली (सासे कुल्लू) 3,34.41.780
बाबा भलखू रेल स्मृति साहित्य संवाद-2 के सफल आयोजन के बाद अब लेखक उनके गाँव झाझा(चायल) की साहित्यक यात्रा करेंगे। ये यात्रा आगामी 25 अगस्त को प्रस्तावित है। हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच के अध्यक्ष और लेखक एस आर हरनोट ने जानकारी दी कि ये यात्रा शिमला के पुराने बस स्टेशन से सवेरे 9 बजे शुरू होगी जिसमें शिमला व सोलन के 25 से अधिक लेखक-साहित्यकार शामिल होंगे। यात्रा का पहला पड़ाव शिमला से 45 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक चायल पैलेस और बाबा भलकू संग्रहालय का भ्रमण होगा जहाँ साहित्यकार चायल साहित्य परिषद् और ग्रामीणों से मुलाकात करेंगे। इसके उपरांत साहित्यिक गोष्ठी होगी। एसआर हरनोट ने बताया की इस यात्रा का दूसरा और महत्वर्ण चरण बाबा भलखू के गाँव झाझा का भ्रमण होगा जो चायल से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस यात्रा के सहयोगी ग्राम पंचायत प्रधान मान सिंह, स्थानीय निवासी वरिष्ठ लेखक, रंगकर्मी और शिमला आकाशवाणी के पूर्व एनाऊंसर बी आर मेहता, एकांत होटल के मालिक देवेंद्र वर्मा और बाबा भलकू परिवार के युवा गगन दीप रहेंगे। यात्रा के दौरान झाझा गाँव में लेखक बाबा भलखू का पुस्तैनी मकान भी देखेंगे और उनके परिवार तथा ग्रामीणों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद स्थानीय लोगों के साथ साहित्य गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा। कालका शिमला रेल लाइन को झाझा गाँव तक बढ़ाया जाये इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हिमाचल तथा केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय का इस और ध्यान आकर्षित करना है कि कालका शिमला रेल लाइन को चायल के झाझा गाँव तक बढाया जाये। साथ ही बाबा भलकू के पुश्तैनी माकन को धरोहर भवन के रूप में संरक्षित करके उनके परिवार को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाए।
हिमाचल प्रदेश में दो दिन हुई बारिश के कारण 23 लोगों की मौत हो गई है।इस साल बारिश से अब तक 43 लोगों की मौत हाे चुकी है व 574 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रदेश में 800 से ज्यादा सड़कें व 13 राष्ट्रीय राजमार्ग बंद है।कुल्लू में दो पुल टूट गए हैं। मौसम विभाग ने जिला मंडी, कांगड़ा, शिमला, सोलन, सिरमौर व बिलासपुर में रेड अलर्ट ज़ारी किया है। फिलहाल राहत कार्यों के लिए सरकार ने 15 करोड़ रुपये जारी किए हैं। जिला मंडी में ब्यास अपना रौद्र रूप दिखा रही है। जिला सोलन में भारी बारिश के कारण अब तक पांच लोगों की मौत हो गई है। बिलासपुर जिला के कठलग गांव में जमीन धंसने से सात घर जमींदोज हो गए। शिमला में आठ लोगों की मौत हो गई है। 12 से लोग घायल हो गए हैं। जिला चंबा के मैहला विकास खंड की बंदला पंचायत में मकान की दीवार गिरने से मलबे में दबकर दादा-पोती की मौत हो गई। जिला चंबा में मौसम के बिगड़े तेवरों के चलते उत्तर भारत की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। बर्फवारी के बाद लाहुल-स्पीति की चंद्रताल झील के आसपास करीब 127 लोग यहां फंस गए थे, जिन्हें रेस्क्यू कर लिया गया है। कोकसर के पास पगलनाला में आई बाढ़ से कोकसर में 50 से अधिक सेना के वाहन भी फंसे हुए हैं।
सूबे में ऐसी कई पंचायतें हैं जिनके आधे लोग एक विधानसभा क्षेत्र तो आधे दूसरे हलके में आते हैं। इसके चलते काफी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने नई पंचायतों के गठन का निर्णय लिया है। इससे कई विधानसभा क्षेत्रों में ब्लॉकों, जिला परिषदों, पंचायत समिति वार्डों और पंचायतों की सीमाओं में फेरबदल होगा। ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर ने मंगलवार को विधांनसभा में नई पंचायतों के गठन की जानकारी दी। लाहुल स्पीति में फंसे कृषि मंत्री विधानसभा सत्र के पहले दिन कृषि मंत्री डॉक्टर रामलाल मार्कंडेय हिस्सा नहीं ले पाए है। दरअसल कृषि मंत्री लाहुल स्पीति में फंसे हुए हैं।सरकार द्वारा कृषि मंत्री डॉक्टर रामलाल मार्कंडेय को सत्र के लिए लाने की व्यवस्था की जा रही है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली रहीं 1,954 सीटें प्रदेश के सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस साल 1954 सीटें खाली रही हैं। तकनिकी शिक्षा मंत्री बिक्रम सिंह ने वधानसभा सत्र के दौरान यह जानकारी दी।विदित रहे कि बीते तीन वर्षों में जेईई मेन्स और एचपीसीईटी की मेरिट समाप्त होने पर रिक्त सीटें जमा दो कक्षा के आधार पर भरने के बाद भी सीटें खाली रह रही हैं। ऊना में पकड़े ड्रग्स के 106 मामले जिला ऊना में 1 अप्रैल 2018 से 31 जुलाई 2019 तक सिंथेटिक ड्रग्स चिट्टा, चरस, अफीम के 106 मामले पकड़े गए। चिट्टा के 60, चरस के 41, अफीम के 5 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि अवैध शराब बेचने के 201 मामले दर्ज हुए हैं। सीएम द्वारा ये जानकारी सदन में दी गई है।
ज़िला शिमला के नेरवा से 4 किलोमीटर दूर केडी गांव में सोमवार को सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को 2 शव बरामद हुए हैं। मृतकों में दो नेपाली मूल के बच्चे हैं, जिनकी उम्र 9 वर्ष और 6 वर्ष बताई जा रही है। ज्ञात हो कि नेरवा स्थित फावला गांव में रविवार को बादल फटने के कारण काफी नुक्सान हुआ था। इस दौरान एक मकान के अंदर मलबा घुसने से मकान में रह रही एक महिला और उसका बेटा मलबे में दब गया। सोमवार को इन्हें भी काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। गनीमत ये रही कि दोनों माँ -बेटे की साँसे चल रही थी। फिलहाल दोनों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। इस क्षेत्र में बादल फटने के कारण 10 से 12 मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं रविवार को केडी गांव में आसमानी बिजली गिरने के कारण घायल हुए लोगों को भी स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करवाया गया है।
World Photography Day on 19th august of every year. This day is not only for the people who work in photography but for all the people of different professions to show their emotions from the art of photography and understand its true meaning. It is celebrated to promote photography as a hobby. Many contests are also held during the time of this day to encourage people. Any photo related to architecture, travel, wildlife, home, etc. can be used by people to show their interests by photography. The winners get the awards after the completion of the contests. This day has a history that will surely amaze you. The first day of a photograph was made on the 19 August 1939 in France. The first online global gallery was hosted on the 19th of August 2010. Around 270 photographers shared their ideas on that day. The day is celebrated so that people from various countries and cultures come forward under the same roof and organise competitions, workshops, seminars, etc. This is also to inspire the next generation to get complete guidance from the professionals and scholars in the field.
हिमाचल विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार दोपहर 2 बजे से शुरू हो गया। सदन की कार्यवाही पण्डित शिव लाल, चौधरी विद्या सागर व शिव कुमार उपमन्यु के निधन पर शोकोदगार से शुरू हुई। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी के चच्योट से विधायक रहे पंडित शिव लाल को याद किया। 80 वर्षीय शिव लाल 1985 से 90 तक हिमाचल विधानसभा में सदस्य रहे। चौधरी विधा सागर कांगड़ा 1982 , 85 , 90 व 1998 में विधायक रहे। इसमें एक बार राज्य स्वास्थ्य मंत्री रहे,साथ में 1998 में कृषि मंत्री रहे। उनका ओबीसी समाज के लिए बहुत सम्मान था।उन्होंने इस बिरादरी के लिए बहुत काम किया। मुख्यमंत्री ने हिमाचल के पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित शिव कुमार उपमन्यु के निधन पर शोक व्यक्त किया। 92 वर्षीय उपमन्यु सरकारी नौकरी में रहने के बाद 1977 में चम्बा के भटियात से पहली बार हिमाचल विधानसभा पहुंचे।1982 में दूसरी बार जीते व उद्योग मंत्री बने। 1990 में तीसरी बार विधानसभा सदस्य बने। केंद्रीय मंत्री रही बीजेपी की तेज तर्रार नेता सुषमा स्वराज व दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित के निधन पर भी मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया। भारी बारिश की वजह से हिमाचल में हुई मौतों पर भी दुःख व्यक्त किया व उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की। विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी सभी नेताओं के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया व उनके परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की। साथ ही प्रदेश में विभिन्न दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के प्रति भी दुःख ज़ाहिर किया। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार, सीपीआईएम ठियोग के विधायक राकेश सिंघा, कांग्रेस के विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी शोकोदगार में अपने आप को शामिल किया। विक्रम जरियाल ने दो वर्ष पूर्व मृत्यु को प्राप्त हुई चम्बा की रानी पदमा देवी के निधन पर शोक व्यक्त किया। चम्बा की पहली महिला विधायक रही। सदन दो साल पहले किसी कारणवश उनको याद नही कर पाया था। 2013 में हिमाचल विधानसभा में उनको जीवन पर्यंत बेहतर सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया गया था।
एक बच्ची अब भी लापता, मां के साथ निकली थी , मां का शव बरामद भारी बारिश और भूस्खलन के चलते अब तक 8 अधिक लोगो की मौत हो चुकी है और अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने का समाचार है। शिमला के आरटीओ आफिस के पास रविवार सुबह भूस्खलन में एक मकान के चपेट में आने से एक परिवार की दो बेटीयों की मौत हो गयी। साथ ही एक आदमी के इस हादसे में घायल होने की सूचना है। इसी तरह जिला शिमला के हाटकोटी में शनिवार देर रात एक ट्रक पर पत्थर गिरने से उसमें मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। बताया जा रहा है कि ट्रक जालंधर से सेब भरने को सावड़ा आया था। एक अन्य मामले में जुब्बड़हट्टी के शाल-चनोग रोड पर सुगना गांव में एक गोशाला भूस्खलन के चपेट में आ गई, जिसमें एक 40 वर्षीय महिला की मौत हो गई। इसी तरह ठियोग की थथल खड़ में भारी पानी आने से वहां से गुजर रही एक महिला अपनी बेटी के साथ बह गई। हादसे में पूर्णा नामक महिला की मौत हो गई जिसकी आयु 53 वर्ष थी, जबकि उसकी बेटी की तलाश जारी है। शिमला के कुमारसैन में भी एक पेड़ के गिरने से नेपाली मूल के दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई।
जिस न्यूज एंकर को देखकर हम बड़े हुए, वो न्यूज एंकर अब हमारी बीच नहीं रहीं। हम बात कर रहे हैं दूरदर्शन की मशहूर एंकर नीलम शर्मा की। दूरदर्शन की पत्रकार और मशहूर एंकर नीलम शर्मा का निधन हो गया है। इस बात की जानकारी दूरदर्शन ने ट्वीट कर दी। नीलम शर्मा दूरदर्शन का एक जानामाना चेहरा थीं, बताया जा रहा है कि वो कैंसर से पीड़ित थीं। इस साल मार्च माह में नीलम शर्मा को 'नारी शक्ति सम्मान' से सम्मानित किया गया था। नीलम दूरदर्शन का एक जाना माना चेहरा रहीं।बताया जा रहा है कि नीलम शर्मा कैंसर से पीड़ित थीं। 'नारी शक्ति' सम्मान के अलावा नीलम को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। दूरदर्शन पर चलने वाला उनका तेजस्विनी प्रोग्राम करोड़ों लोगों की पसंद रहा हैं। नीलम शर्मा हमीरपुर जिला के भोरंज तहसील के भलवानी गांव से सम्बंध रखतीं थीं। उनकी शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में ही हुईं थी लेकिन उनका अपने पैतृक गांव से ख़ासा जुड़ाव था और वे नियमित अपने गांव आया-जाया करतीं थीं। उनके निधन से उनके गांव में शौक का माहौल है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चार बड़े एलान किये है। कर्मचारियों को तोहफा : मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते का ऐलान किया है। इससे सरकार के खजाने पर 260 करोड़ का सालाना बोझ पड़ेगा। छात्रों को निशुल्क किताबें: मुख्यमंत्री ने नौंवीं और दसवीं के बच्चों को मुफ्त किताबें देने का ऐलान भी किया है। प्रदेश के 65 हजार छात्रों को 1500 रुपये तक की किताबें निशुल्क दी जाएंगी। महिलाओं के लिए परीक्षा शुल्क माफ: लोक सेवा आयोग और दूसरे बोर्डों की ओर से की जाने वाली भर्तियों में महिलाओं के लिए परीक्षा शुल्क माफ किया गया है। सैनिकों की विधवाओं को मदद: भूतपूर्व सैनिकों की विधवाओं और आश्रितों की सालाना वित्तीय मदद भी दस हजार से बढ़ा कर 20 हजार कर दी गई है।
Prime Minister Narendra Modi has announced the creation of a chief of defence staff (CDS) as head of the tri-services. PM Modi promotes 'lets make India plastic free’ PM says, our aim is to reach among first 50 nations in ease of doing business. Tackling water crisis is a huge priority for Government: PM Modi India can become a global hub of tourism. "Can we think of visiting at least 15 tourist destinations in India before 2022”, PM says. 'One nation, one constitution': PM Modi says on scrapping of Article 370 The fundamentals of our economy are strong. Reaching $5-trillion-economy mark by 2024 is achievable: PM Modi India Will invest Rs 100 lakh crore in infrastructure building: PM Population growth is a huge challenge. Small family also contribute to the development of the nation. It's a form of patriotism: PM
प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में प्रतियोगियों ने अपनी प्रतिभा के दम पर खूब बटोरी तालियां ग्रैंड फिनाले में भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश की सचिव डॉo पूर्णिमा चौहान ने की बतौर मुख्यातिथि शिरकत हुनरबाज़ हिमाचल का ग्रैंड फिनाले शिमला के क्योंथल हॉल में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेशभर से हुनरबाज़ों ने अपना दम खम दिखाया।कार्यक्रम में भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश की सचिव डॉ पूर्णिमा चौहान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में डांस में जूनियर वर्ग यावनिका, अक्षिता, चहक, पलक, कृतिका, मन्नत शर्मा, वंशिका, मेघा, श्रेया, यशोर्धन, तमन्ना, दिविता, गीतांजलि, अदवे, अवनिशा, अंकिता, अक्षरा, जिनिया, शिवंशी, शियोना, सुप्रिया वही सीनियर वर्ग में अनिता, सुजल, इशिता, बिपाशा, जाखन, कविता ने अपनी प्रस्तुति दी। ग्रुप डांस में बीट बस्टर ग्रुप, सन बीन इंटरनेशनल स्कूल जुब्बल, लूज़र क्रू पौंटा साहिब व निरितयांगन ग्रुप सोलन ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी।वही संगीत मुकाबले में सीनियर वर्ग में दिनेश कुमार बेदी, अंजलि भाटिया, श्वेता सूद, अंजलि शांडिल, सुमित सूद, विक्की, चरण सिंह, प्रज्ञा ठाकुर, तेजस्वनी, पूजा, नेहा शर्मा, युगल रावत ने अपने जलवे बिखेरे वही जूनियर वर्ग में विवान गुप्ता, दिव्यांशी, ईशा ठाकुर, ओजश्वी शर्मा, आर्यन शर्मा, क्षितिज ने अपनी प्रस्तुतियां दी। वही योग में निधि डोगरा व भूपेंदर ने अपनी प्रस्तुति दी और सभी को योग के माध्यम से स्वस्थ रहने का संदेश दिया। ग्रैंड फिनाले के फाइनल संगीत मुकाबले में निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध लोक गायक अच्छर सिंह परमार, राष्ट्रपति अवार्ड जिया लाल ठाकुर, एकमात्र बेंजो वादक व प्रसिद्ध गायक अश्वनी शर्मा, मशहूर रंगकर्मी भूपेंदर शर्मा, मशहूर गायक कुमार साहिल व राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की सँगीत विषय की प्राध्यापक डॉ कल्पना मौजूद रही। नृत्य मुकाबले के निर्णायक मंडल में मशहूर नृत्य शिक्षक रिंकू खान, बॉम्बे डांस कम्पनी से जानवी हाडी व सेक्रेट हार्ट स्कूल शिमला की नृत्य शिक्षिका हिमांशी मारवाड़ी मौजूद रही। हुनरबाज हिमाचल के ग्रैंड फिनाले में मंच ने हिमाचल की विभूतियों को भाषा एवं संस्कृति विभाग की सचिव डॉ पूर्णिमा चौहान के हाथों से देवभूमि शिखर सम्मान से भी नवाजा। इसमें प्रसिद्ध लोकगायक व हिमाचली संस्कृति को कई लोकगीत प्रदान करने वाले सोम दत्त बट्टू, प्रसिद्ध लोकगायक व वरिष्ठ रंगकर्मी अच्छर सिंह परमार, कला सम्मान से सम्मानित इल्ला पांडे, मशूहर लोक गायक व रचयता ज्वाला प्रसाद, प्रदेश में सूफी कलाम को जिंदा रखे हुए व हिमाचल के सुप्रसिद्ध गायक अश्वनी शर्मा, आई टी बी पी में बतौर डिप्टी कमांडेंट तैनात व बाकमाल चित्रकार कमल कुमार व वरिष्ठ रंगकर्मी व फ़िल्म जगत से जुड़े भूपेंद्र शर्मा को देवभूमि शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। वही कार्यक्रम में कांगडा से सोनू भोलू सूद, प्रसिद्ध कलाकार टिंकू विहान, हिमाचल के सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी किंग प्रिंस गर्ग, निर्देशक व थिएटर आर्टिस्ट एकलव्य सेन, मशहूर मॉडल भारती अत्री, मशहूर लोक गायक ऐ सी भारद्वाज, हिम स्टार ग्रुप के संस्थापक चेतन प्रकाश, समाजसेवी रोबॉट रॉय, हिलीवुड स्टूडियो से विनोद भारद्वाज, समाजसेवी सुरेश ओबरॉय, हिमाचल एकता मंच के संस्थापक दीपलाल भारद्वाज, प्रिसिद्ध लोक गायक दोत राम पहाड़िया, संगीतकार अनिशा भारद्वाज, सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की प्रधानाचार्या अमिता भारद्वाज, हिमाचल फ़िल्म सिनेमा के संस्थापक ठाकुर के सी परिहार, मंच संचालक मुनीष नंदन, हिमाचल की शान पूनम नेगी बतौर विशेष अतिथि मौजूद रहे। ग्रैंड फिनाले में कड़ी टक्कर होने के बाद परिणाम घोषित किये गए जिसमें सीनियर ग्रुप में पहले स्थान पर तेजस्वनी रही ।वही दूसरे स्थान पर अनिता, तीसरे स्थान पर सुजल, चौथे स्थान पर प्रज्ञा ठाकुर और पांचवे स्थान पर इशिता रही।जबकि जूनियर वर्ग में पहले स्थान पर अवनिशा, दूसरे स्थान पर दिव्यांशी, तीसरे स्थान पर आर्यन, चौथे स्थान पर गीतांजलि और पांचवे स्थान पर जेनिया रही। ग्रुप डांस में सीनियर में पौण्टा साहिब से लूज़र क्रू ने प्रथम स्थान हासिल किया जबकि जूनियर वर्ग में सोलन के नृत्यआंगन ग्रुप ने प्रथम स्थान हासिल किया।
Sonia returns for making ground for her daughter Priyanka ! The Congress Working Committee failed in picking a chief outside the Nehru-Gandhi family that has led it for most of its 130 year old history. As per the sources, many names were discussed for the name of new party chief, but end result was as expected. Now the party said it will pick a new president when its plenary session is held later this year. The return of Sonia Gandhi as interim congress president indicates that next congress president will from Gandhi family only, probably Priyanka Gandhi. Right now Priyanka is the general secretary of congress and she has not resigned from her post when her brother Rahul took responsibility of Lok Sabha election defeat and resigned as Congress chief. Captain Amarinder Singh called it the best decision in current circumstances. CWC requested Rahul Gandhi to continue as party chief, but he refused. Sonia Gandhi was requested to take over as interim president. Five committees representing the east, north-east, south, west and north zones were constitutes to elect new president. The return of Sonia as interim chief comes ahead of a string of state elections later this year.
सुप्रसिद्ध संगीतकार परमजीत पम्मी ने भैरवी स्टूडियो में बनाई धुन,युवा निर्देशक अभिषेक डोगरा ने किया वीडियो का निर्देशन हिमाचल प्रदेश का दिल कहे जाने वाले बिलासपुर ने एक और नई उपलब्धि हासिल की है स्थानीय युवा भजन गायक अभिषेक सोनी का कृष्ण भक्ति में लीन एक वीडियो गीत आज रिलीज किया जा रहा है। बिलासपुर में इस गीत की वीडियो शूटिंग युवा रंगकर्मी अभिषेक डोगरा ने गोविंद सागर झील तथा आसपास के मनोहारी क्षेत्रों में की है वहीं सुप्रसिद्ध संगीतकार परमजीत पम्मी ने इस का म्यूजिक दिया है। भैरवी स्टूडियो से शनिवार को यह गीत शाम पांच बजे रिलीज होगा । बिलासपुर में पत्रकारों से बात करते हुए इस वीडियो गीत के गायक अभिषेक सोनी ने बताया कि श्री कृष्ण जी को समर्पित इस गीत में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण भाव है। पहले नवरात्रे को रिलीज किए गीत के टीजर और पोस्टर को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। साथ ही पंजाबी और हिमाचली गायकों ने भी "साँवरा" का टीजर पसंद किया है। प्रसिद्ध पंजाबी गायक लखविंदर बड़ाली, आवाज पंजाब दी फेम कुमार साहिल, नाटी किंग कुलदीप शर्मा व हिमाचली गायक काकू राम ठाकुर सहित कई संगीत जगत से जुड़ी हस्तियों ने गीत के टीजर की जमकर तारीफ की है। गीत में बिलासपुर की बाल कलाकार सृष्टि शर्मा बाल कृष्ण रूप में नजर आएंगी। उन्होंने बताया कि इस गीत को बिलासपुर की अलग-अलग जगहों पर शूट किया गया है। हालांकि इस गीत को पहले वृंदावन में शूट किए जाने की योजना थी। लेकिन बिलासपुर को प्रमोट करने के उद्देश्य से सांवरा की टीम ने इसे बिलासपुर में ही शूट करने का निर्णय लिया। इस गीत के माध्यम से बिलासपुर की हसीन वादियां और खूबसूरत नज़ारा भी देश दुनिया के लोगों को देखने के लिए मिलेगा। इस अवसर पर निशांत कपूर, अभिषेक डोगरा,जावेद इकबाल, नवीन सोनी, पंकज कुमार व रामहरि मौजूद रहे।
1195 पटवारियों समेत विभिन्न विभागों में 1500 से ज्यादा पद भरने को मंजूरी कैबिनेट में 1195 पटवारियों समेत विभिन्न विभागों में 1500 से ज्यादा पद भरने को भी मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने 1195 उम्मीदवारों का पटवारी प्रशिक्षण के लिए चयन का निर्णय लिया है। इनमें 933 उम्मीदवारों को मोहाल, जबकि 262 को बंदोबस्त का प्रशिक्षण मिलेगा। शिमला और कांगड़ा में बंदोबस्त विभाग में 17 चेनमैन का चयन कर प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद इन्हें पांच साल के भीतर चरणबद्ध तरीके से नियुक्ति दी जाएगी। जेएंडके में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने कश्मीर से लगते चंबा और लाहौल-स्पीति ज़िले में तैनात साढ़े पांच सौ विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) के मानदेय को 6000 रुपये से बढ़ाकर 7000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। कैबिनेट ने मदर टेरेसा असहाय मातृ संबल योजना के तहत परित्यक्त महिलाओं और विधवाओं को 18 वर्ष से कम आयु के दो बच्चों के पालन-पोषण के लिए प्रति बच्चा प्रति वर्ष सहायता राशि छह हजार रुपये कर दी है। प्रदेश में 25 हजार से ज्यादा महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो रही है। लाभ पाने के लिए इन महिलाओं की वार्षिक आय 35,000 से कम होनी चाहिए।
हिमाचल में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर अब प्रदेश से बाहर के लोगों को आसानी से नौकरी नहीं मिल सकेगी। गुरुवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में इन श्रेणी के भर्ती नियमों को कड़ा करने का फैसला लिया गया है। प्रदेश में अब तृतीय श्रेणी के पदों के लिए 10वीं-12वीं और चतुर्थ श्रेणी के लिए आठवीं और 10वीं की परीक्षा हिमाचल के स्कूलों से पास करना जरूरी होगा। ये शर्तें हिमाचल के मूल निवासियों पर लागू नहीं होंगी। वहीं जिन भर्तियों की प्रक्रिया शुरू या पूरी हो चुकी है, उन्हें छोड़कर अब नई भर्तियों को संशोधित भर्ती नियमों के तहत ही किया जाएगा। बता दें कि जयराम सरकार में प्रदेश सचिवालय में विभिन्न पदों पर भर्तियां हुईं, इनमें बिहार और झारखंड तक के अभ्यर्थी चयनित हो गए।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पांचवीं व आठवीं के छात्र अब फेल होंगे। सरकार ने पांचवीं-आठवीं दोनों कक्षाओं के लिए डिटेंशन पॉलिसी लागू कर दी है। खास बात यह है कि प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड पांचवीं व आठवीं कक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करेगा। सरकार ने आरटीआई के नियमों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है कि बोर्ड दोनों कक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाएं ही उपलब्ध करवाएगा। इसके अलावा परीक्षाओं को करवाने की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन व उपनिदेशकों की होगी। अब पांचवीं व आठवीं के छात्रों को पास होने के लिए 33 प्रतिशत अंक लेना भी अनिवार्य किया गया है, अगर इससे कम नंबर लिए, तो ऐसे में छात्रों को फेल किया जाएगा। गुरुवार को प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया। हालांकि सरकार ने डिटेंशन पॉलिसी भले ही लागू की है, पर बोर्ड इन छात्रों की परीक्षाओं को चैक नहीं कर पाएंगे। सरकार ने यह जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के ऊपर ही डाली है। सरकार ने फैसला लिया है कि पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए छात्रों को दूसरे स्कूल में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। छात्र उसी स्कूल में परीक्षा देंगे, जहां पर वह पड़ते हैं। इसके अलावा इन दोनों कक्षाओं के छात्रों के पेपर दूसरे स्कूल के शिक्षक चैक करेंगे। बता दें कि प्रदेश सरकार शैक्षणिक सत्र 2019-20 से नो डिटेंशन पॉलिसी को समाप्त करने की तैयारी काफी समय से कर रही थी। प्रदेश सरकार इस संदर्भ में केंद्र सरकार से आदेश जारी होने का इंतजार कर रही थी। केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को सरकार ने कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूर कर दिया। गौर हो कि राज्यसभा ने आठवीं तक फेल नहीं करने की नीति में संशोधन वाले विधेयक को काफी समय पहले मंजूरी दे दी थी। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए काफी समय से यह मांग की जा रही थी, कि पांचवीं व आठवीं के छात्रों को फेल किया जाएगा।
पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की हालत में सुधार पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की तबीयत में अब सुधार है। गुरुवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आईजीएमसी पहुंचकर वीरभद्र सिंह का कुशलक्षेम जाना। हालांकि अभी उन्हें आईजीएमसी से डिस्चार्ज नहीं किया गया है, लेकिन डॉक्टर्स टीम का कहना है कि कुछ जरूरी टेस्ट किए गए हैं। रिपोर्ट ठीक आने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। डॉक्टरों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री के खून संबंधित कुछ टेस्ट गुरुवार को लिए गए थे, जिसमें कई ठीक पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि सांस की तकलीफ के कारण उन्हें बुधवार को अस्पताल लाया गया था, जिसके बाद उन्हें भर्ती कर दिया गया।
डिपुओं की मशीने खराब ,उपभोक्ता हुए परेशान प्रदेश में राशन डिपुओं की मशीनें फिर हांफ गई हैं। पिछले माह भी ये शिकायतें खाद्य आपूर्ति विभाग से की गई थीं, लेकिन अब फिर मशीनों में दिक्कत आ गई है। इससे कई जिलों के उपभोक्ताओं को समय पर राशन नहीं मिल रहा है। इसके चलते खाद्य आपूर्ति विभाग अब प्रदेश के सभी राशन डिपुओं की जांच करने वाला है। प्रदेश खाद्य आपूर्ति विभाग ने इन मशीनों को जांचने के आदेश जारी किए हैं। गौर हो कि इसको लेकर सबसे पहले उपभोक्ता जियानंद शर्मा ने शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि डिपुओं में लगी पॉश मशीनें कार्डधारकों के साथ डिपो होल्डर्ज के लिए भी जी का जंजाल बन रही हैं। वहीं मशीनें फिंगर प्रिंट नहीं उठा रही है, इससे उपभोक्ताओं को खासी परेशानी का सामना करना पद रहा है।
साहित्यिक गोष्ठी बाबा भलखू की स्मृति और सम्मान को समर्पित विश्व धरोहर के रूप में विख्यात शिमला-कालका रेल में 11, अगस्त रविवार को बाबा भलकु की स्मृति में गत वर्ष की तरह दूसरी अनूठी साहित्यिक गोष्ठीआयोजित की जाएगी। यह आयोजन हिमालय साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा किया जा रहा है। इसमें हिमाचल के तैंतीस रचनाकार व संस्कृतकर्मी भाग ले रहे हैं। इस साहित्यिक गोष्ठी को बाबा भलखू की स्मृति और सम्मान को समर्पित किया गया है। भलखू के सहयोग से शिमला कालका रेलवे लाइन के निर्माण में हो पाए सफल भलखू चायल के समीप झाझा गाँव का एक अनपढ़ लेकिन विलक्षण प्रतिभा संपन्न ग्रामीण था। इसकी सलाह और सहयोग से अंग्रेज इंजीनियर शिमला कालका रेलवे लाइन के निर्माण में सफल हो पाए थे। हरनोट ने शिमला में जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी बताया कि हिंदुस्तान तिब्बत रोड के निर्माण के वक्त भी बाबा भलकू के मार्गनिर्देशन में न केवल सर्वे हुआ बल्कि सतलुज नदी पर कई पुलों का निर्माण भी हुआ था। इसके लिए उन्हें ब्रिटिश सरकार के लोक निर्माण विभाग द्वारा ओवरशीयर की उपाधि से नवाजा गया था। गिनीज बुक में इस रेल लाइन को उत्कृष्ट नैरो गेज इंजीनीयरिंग का दर्जा हासिल है। इस रेलवे लाइन का निर्माण ब्रिटिश इंजिनीयर हर्बर्ट हेरिंगटन की देखरेख में 20 अप्रैल,1855 के दिन शुरू होकर 11 नवम्बर, 1903 को पूर्ण हुआ और पहली रेल शिमला के लिए चलायी गयी। इस लाइन पर 20 स्टेशन, 103 सुरंगें, 912 मोड़ और 969 छोटे-बड़े पुल हैं। यूनेस्को ने इस लाइन को 8 जुलाई, 2008 विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया था। भलखु की स्मृति में शिमला पुराने बस स्टेशन के साथ भारत सरकार के रेलवे विभाग ने एक म्यूजियम भी स्थापित किया है। हरनोट ने शिमला में जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी जानकारी हरनोट के अनुसार यह यात्रा सुबह 10 :40 बजे शिमला से शुरू होगी और बड़ोग तक चलेगी। वहां दोपहर के भोजन और ठहराव के बाद तीन बजे पुन: शिमला की और रवाना होगी। रेल यात्रा के दौरान जाते हुए और लौटते हुए भी स्टेशनस के नाम पर कविता, ग़ज़ल, कहानी और संस्मरण के सत्र रखे गए हैं जो शिमला से बड़ोग तक समरहिल, तारादेवी, कैथलीघाट, कंडाघाट, कनोह और बड़ोग के नाम पर होंगे। लेखकों का मार्गदर्शन समरहिल स्टेशन के अधीक्षक संजय गेरा करेंगे। 33 वरिष्ठ और युवा लेखक तथा संस्कृतिकर्मी होंगें शामिल इस सृजन संवाद में जो 33 वरिष्ठ और युवा लेखक तथा संस्कृतिकर्मी शामिल होंगे उनमें सुदर्शन वशिष्ट, एस आर हरनोट, हेम राज कौशिक, मिनाक्षी पाल, सतीश रतन, बद्री सिंह भाटिया, कुल राजीव पन्त, आत्मा रंजन, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, विद्या निधि, राकेश कुमार सिंह, विनोद बिट्ठल, भारती कुठिआला, सुमन धनन्जय, दिनेश शर्मा,देव कन्या ठाकुर, सीताराम शर्मा, मोनिका छट्टू, मधु जी शर्मा, नरेश देयोग, कुलदीप गर्ग तरुण, दीप्ति सारस्वत, प्रियम्बदा शर्मा, देविना अक्ष्यवर, कौशल मुंगटा, उमा ठाकुर, कल्पना गांगटा, शांति स्वरुप शर्मा, अश्वनी कुमार, आनंद शर्मा, वंदना राणा और किरण गुलेरिया शामिल हैं।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भारत सरकार की ओर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। इससे जम्मू और कश्मीर के लोगों के सामाजिक एवं आर्थिक जन-जीवन और विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और इससे राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता भी सुदृढ़ होगी। राष्ट्र के सर्वोच्च हित में लिए गए इस निर्णय की सराहना करते हुए जयराम ने कहा कि इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से केंद्र में भाजपा सरकार की सुदृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का पता चलता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उठाए गए इस कदम से जम्मू और कश्मीर में शांति, प्रगति तथा समृद्धि के नए अध्याय का सूत्रपात होगा। विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल और मुख्य सचेतक नरेंद्र बरागटा ने भी इस फैसले का स्वागत कर इसे ऐतिहासिक बताया है। वहीं, प्रदेश भाजपा ने सोमवार को पूरे हिमाचल में जश्न मनाया। जम्मू-कश्मीर के लिए अनुच्छेद 370 को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बनाने पर पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का धन्यवाद किया। जगह-जगह पर नाच-गाना भी हुआ। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच मिठाई बांटी गई। शिमला में मंडल भाजपा की ओर से नाज के पास जश्न मनाया गया। राज्य भर में भाजपा के अलग-अलग मंडलों में भी इसी तरह खुशी मनाई गई। ज़िला मुख्यालयों पर भी मोदी और शाह की जय-जयकार होती रही। प्रदेश भाजपा कार्यालय में भी जश्न का माहौल रहा।
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद तनाव के मद्देनजर हिमाचल में सुरक्षा व्यवस्था चौकस कर दी गई है। प्रदेश में रह रहे कश्मीरियों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर है। खासकर जम्मू से सटे चंबा, कांगड़ा और लाहौल में निगरानी बढ़ाई गई है। शक्तिपीठों-मंदिरों और बिजली प्रोजेक्टों में भी सतर्कता बरती जा रही है। नाकों पर चेकिंग हो रही है। इसी बीच, हिमाचल पथ परिवहन निगम ने सोमवार को जम्मू, कटड़ा और उधमपुर जाने वाली तेरह बसें पठानकोट में ही रोक दीं। हालात सामान्य होने तक जम्मू के लिए बस सेवा बंद कर दी है। एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक पंकज चड्ढा ने कहा कि निदेशालय से आगामी निर्देशों के बाद ही बसें पठानकोट से आगे जम्मू के लिए भेजी जाएंगी। निगम के मंडलीय प्रबंधक (ट्रैफिक) पंकज सिंघल ने भी इसकी पुष्टि की है। बटालियनों को स्टैंडबाय रहने के निर्देश उधर, केंद्र के निर्देश पर प्रदेश में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों और कश्मीरी बस्तियों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सूबे के सभी विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के प्रबंधनों को भी एहतियात बरतने के लिए कहा गया है। निर्देश दिए हैं कि अगर किसी भी तरह की हरकत महसूस हो तो तत्काल स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। पुलिस मुख्यालय ने सभी बटालियनों को स्टैंडबाय रहने के निर्देश दिए हैं। उन्हें किसी भी जरूरत पर तत्काल ड्यूटी पर भी प्रदेश के किसी भी हिस्से में भेजा जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में मौसम फिर से रौद्र रूप दिखाएगा। राज्य के मैदानी इलाकों सहित शिमला, कुल्लू, सोलन, सिरमौर, मंडी व चंबा के कुछ स्थानों पर तीन व चार अगस्त को भारी बारिश होगी। विभाग ने राज्य के इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग की मानें तो राज्य मे सात अगस्त तक मौसम खराब बना रहेगा। इस दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर बारिश होगी। जो राज्य में जनता की दिक्कतों को बढ़ा सकता है। बारिश से अधिकतम तापमान में एक से चार डिग्री तक की गिरावट रिकार्ड की गई है। सोलन के अधिकतम तापमान में सबसे अधिक चार डिग्री की गिरावट आंकी गई है। नाहन, भुंतर के तापमान में तीन, चंबा, डलहौजी, सुदंरनगर, ऊना व केलांगं के तापमान में एक डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के निदेशक डा. मनमोहन सिंह ने बताया कि राज्य के मैदानी व मध्यम ऊचांई वाले क्षेत्रों में तीन व चार अगस्त को भारी बारिश होगी। सात अगस्त तक मौसम खराब बना रहेगा।
Assorted minds, big and small, continue to rack their brains to interpret the results of the 2019 Lok Sabha elections. There is virtually a spate of opinions which widely diverge. Undoubtedly the BJP, led by the Narendra Modi-Amit Shah duo, had a cake-walk in these elections. Its landslide victory in large parts of the country is unprecedented in ways more than one. So far no non-Congress government was ever repeated; it has taken a quantum jump this time. Jubilation in its ranks is fully justified. Let there be no mistake about it. Let us not miss the wood for the trees: the Hindu Rashtravadi forces, spearheaded by the RSS of which the BJP is the political wing, are in absolute control of the state power at the level of the Union of India, that is, Bharat. As is well-known, the RSS, since its inception in 1925, has been striving first to “Militarise Hindus, Hinduise India” and later establish a Hindu Rashtra in the country. It was exactly at that period in the history of our country when Mahatma Gandhi had emerged as the undisputed leader of the Indian National Congress founded four decades earlier. Under his leadership the party was able to bring together all sections of the people, irrespective of religion, creed, colour, caste, region etc. It became the mainstream organisation to lead the masses to achieve independence from the British colonial rule. Nationalism was its pantheon which commanded unqualified loyalty and dedication of all and sundry in the party. Right from the beginning, the RSS was, of course, successful in dividing the Hindus in particular along Sanghi Hindus and non-Sanghi Hindus. But non-Sanghi Hindus were not necessarily anti-Sanghi ones. That was true of some of the prominent leaders in the Indian National Congress also. The glaring examples are Madan Mohan Malaviya and Lala Lajpat Rai. Both of them happened to be the Presidents of the Indian National Congress at one point of time. Such leaders continued to be present even under the stewardship of Jawaharlal Nehru and Indira Gandhi. What was actually needed was the projection of such stalwarts as the Nationalist Hindus against Hindu Nationalists. Nationalism in post-independence India required an altogether different orientation for the reconstruction of the country and the rejuvenation of her people. Jawaharlal Nehru did his best to accomplish that during his lifetime. His successors, however, forgot his warning that the RSS was the biggest threat to the unity and integrity of the nation. What we witnessed in the 2014 and 2019 elections did not happen all of a sudden. Its formal beginning had been made in 1967 when Samyukt Vidhayak Dal governments were formed in more than half of the then existing States of the Union of India. The SVDs were constituted of mainly the Bharatiya Jan Sangh, the earlier version of the BJP, the Socialists and the Communists. This experiment was done at the call of Dr Rammanohar Lohia, a strong Socialist leader. As a matter of fact it was he who propounded the theory of anti-Congressism. Later it became the most popular political line of all the major parties. It suited most the Jan Sanghis but the Communists were not left behind because a trend among them had been visible since 1942 during the period of the ‘Quit India’ movement and later followed by B.T. Ranadive, one-time CPI General Secretary, in 1948. In the meantime there was hardly any political party which did not join hands with the BJP to defeat the INC. Just like the BJP the Communists of all hues regarded the Congress as the main enemy. To cite a couple of examples: The CPM-led Left Front and BJP joined hands to install the Janata Dal-led V.P. Singh Government in 1989 while in 2012, not far from 2014, the CPIs, CPM and BJP’s top leaders were seen embracing one another at Jantar Mantar, New Delhi during a protest rally against the INC-led UPA Government of Dr Manmohan Singh. This cooperation continued until the BJP Government was placed safely at Delhi. The Indian National Congress can be held guilty for inadequate appreciation of the RSS threat and inept leadership to combat it. That was why it continued to yield space to Right reactionary nationalism and miserably failed to prevent the BJP from coming to power at the Centre. It did make efforts to wean away some of the parties from the anti-Congress line and did succeed also.The example of the UPA Government between 2004-2014 is an example in point. The Communists, nonetheless. were the real facilitators of the process throughout their history. There was, however, one exception. The United Communist Party of India, rather the Unknown Communist Party of India, formed in 1989 under the leadership S.A. Dange and Mohit Sen, had consistently maintained that the RSS was the real enemy of our country and her people. With the decimation of the Congress and the elimination of the Communists, the BJP might feel safe and secure but the country is on the brink of disintegration. The nation is facing that future both horizontally and vertically. The concept of a Hindu Rashtra is self-destructive. A part claiming to be the total whole is deceptive and illusory while the part poised against the whole is suicidal. Besides nobody can stop the claim of Sikh Rashtra, Christian Rashtra and another Muslim Rashtra et al. There is definitely space for preventing the BJP from reaching its goal of establishing a Hindu Rashtra if, and this is a big IF, the nationalists transcending all political boundaries join heads and constitute a Front from the Panchayat and Municipal to the National level to expose the implications of the Hindu Rashtra in general and the way Rashtravad is being pushed by the Hindu Samrat, Narendra Modi. Nationalists everywhere have ample material knowledge and material to do so. No political party, the least, the Indian National Congress, alone can save the country from the menace posed by the Mohan Bhagwat-Narendra Modi-Amit Shah trio. Hargopal Singh is a Member, Political Committee, United Communist Party of India. This article is written by him and it is his personal opinion.
प्रदेश सरकार ने समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गम्भीर रोग की स्थिति में त्वरित सहायता पंहुचाने के उद्देश्य से ‘सहारा’ योजना आरम्भ हो गई है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के रोगियों को शीघ्र सहायता प्रदान की जाएगी। सहारा योजना पूरे प्रदेश में 15 जुलाई, 2019 से आरम्भ कर दी गई है। योजना के तहत कैंसर, पार्किंसनस रोग, लकवा, मस्कुलर डिस्ट्राफी, थैलेसिमिया, हैमोफिलिया, रीनल फेलियर इत्यादि ये ग्रस्त रोगियों को वित्तीय सहायता के रूप में 2000 रुपए प्रतिमाह प्रदान किए जाएंगे। योजना के तहत किसी भी आयुवर्ग का इन रोगों से ग्रस्त रोगी आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकता है। इस योजना के तहत बीपीएल परिवार से सम्बन्धित रोगियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। रोगी को अपना चिकित्सा सम्बन्धी रिकाॅर्ड, स्थाई निवासी प्रमाण पत्र, फोटोयुक्त पहचान पत्र, बीपीएल प्र्रमाण पत्र अथवा पारिवारिक आय प्रमाण पत्र तथा बैंक शाखा का नाम, अपनी खाता संख्या, आईएफएससी कोड से सम्बन्धित दस्तावेज प्रदान करने होंगे। चलने-फिरने में असमर्थ रोगी के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी जीवित होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। सहारा योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र रोगी को अपना आवेदन सभी दस्तावेजों सहित मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करवाना होगा। आशा कार्यकर्ता व बहुदेशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी रोगी के सभी दस्तावेज खण्ड चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा करवा सकते हैं। खण्ड चिकित्सा अधिकारी इन दस्तावेजों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय को प्रेषित करेंगे। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेेदन पत्र जिला स्तर के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा हेल्थ वेलनेस केन्द्रों में 03 अगस्त, 2019 से उपलब्ध होंगे। जिला चिकित्सा अधिकारी सोलन डाॅ. आर.के. दरोच ने सहारा योजना के विषय में अधिक जानकारी देते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना से जिला के सभी लोगों को अवगत करवाने के लिए विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर जागरूक बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहारा योजना के तहत पात्र रोगियों को 2000 रुपए प्रतिमाह की वित्तीय सहायता आरटीजीएस के माध्यम से ही उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि सहारा योजना के विषय में पूरी जानकारी प्राप्त करें ताकि आवश्यकता के समय विभिन्न गम्भीर रोगों से पीड़ित रोगियों के परिजनोें को जानकारी देकर लाभान्वित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन के कार्यालय के कक्ष संख्या 132 में योजना के सम्बन्ध में सम्पर्क किया जा सकता है। डाॅ. आर.के. दरोच ने कहा कि सहारा योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने एवं उनकी देखभाल की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
राज्यसभा में बुधवार को मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित हो गया। यह न केवल एक मोटर वाहन अधिनियम है, बल्कि एक सड़क सुरक्षा बिल भी है। इस बिल का मकसद सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है, इसके लिए नियमों को और कड़ा किया गया है। वहीं जुर्माने में भी वृद्धि की गई है। जानिए क्या है मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2019 में यातायात नियमों और विनियमों के उल्लंघन के लिए न्यूनतम जुर्माना 100 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए कर दिया गया है। कई अपराधों के लिए अधिकतम जुर्माना 10,000 रुपए तय किया गया है। बिना लाइसेंस के वाहन चलाने के मामले में जुर्माना 500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए कर दिया गया है। सीट बेल्ट नहीं पहनने पर 1,000 रुपए का जुर्माना लगेगा। यह अब तक केवल 100 रुपए था। शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में जुर्माना 2,000 रुपए से 10,000 रुपए तक का है। खतरनाक ड्राइविंग के लिए जुर्माना 5,000 रुपए है। इमरजेंसी वाहनों को पास नहीं देने पर 10 हजार रुपए जुर्माना के रूप में लगेगा। पिछले कानून के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं था। ओवर-स्पीडिंग के मामलों में चालक को हल्के मोटर वाहनों जैसे कारों के लिए 1,000 रुपए और भारी वाहनों के लिए 2,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। रेसिंग में लिप्त पाए जाने पर चालक को 5,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। यदि आपके वाहन का बीमा कवरेज समाप्त हो गया है और आप अभी भी इसे चला रहे हैं, तो आपको 2,000 रुपए का जुर्माना देना होगा। जुर्माने में हर साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। मौजूदा कानून के तहत हिट-एंड-रन मामलों में क्षतिपूर्ति 25,000 रुपए है। इसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया है। चोटों के मामलों में, मुआवजा 12,500 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया है। सभी सड़क उपयोगकर्ताओं को अनिवार्य बीमा कवरेज और सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक मोटर वाहन दुर्घटना निधि बनाई जाएगी।
प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को अब साइबर सुरक्षा का पाठ भी पढ़ाया जाएगा। केंद्र सरकार के आदेश पर शिक्षा विभाग ने अगले सत्र से साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। नौवीं से बारहवीं और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल शिक्षा बोर्ड, एससीईआरटी सोलन और कॉलेज प्रिंसिपलों को इस बाबत आदेश जारी किए हैं। साइबर विशेषज्ञ की मदद से स्कूलों-कॉलेजों में नियमित तौर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों को इंटरनेट पर आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर बचाव के उपाय बताए जाएंगे। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि वर्तमान में साइबर क्राइम के कई मामले सामने आ रहे हैं। विद्यार्थी एटीएम कार्ड, मोबाइल इंटरनेट और अन्य डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें ठगी से बचने के लिए उपायों की जानकारी होनी चाहिए। इसी वजह से केंद्र ने सभी राज्यों को साइबर सुरक्षा का पाठ पढ़ाने के दिशा निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा के कुछ पाठ तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में विशेषज्ञों को बुलाकर विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।
हिमाचल में स्क्रब टायफस बीमारी से निपटने की तैयारी व नियंत्रण को लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आरडी धीमान की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। आरडी धीमान ने कहा कि स्क्रब टायफस बीमारी की जांच व इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध है और सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इसके इलाज के लिए दवाइयों भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में जनवरी, 2019 से अब तक स्क्रब टायफस के 220 मामले दर्ज किए गए हैं। बिलासपुर में सर्वाधिक मामले दर्ज हुई हैं। आरडी धीमान ने कहा कि पिछले चार सालों में स्क्रब टायफस के मामलों में वृद्धि हुई हैं। स्क्रब टायफस फैलाने वाला पिस्सू शरीर के खूले भागों को ही काटता है। इसके लिए उन्होंने लोगों को सलाह दी घरों के आसपास खरपतवार आदि न उगने दें व शरीर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि 104 से 105 डिग्री का तेज बुखार, सिर व जोड़ों में दर्द व कंपकंपी, शरीर में ऐंठन, अकड़न या शरीर टूटा हुआ लगना आदि स्क्रब टायफस के लक्षण हैं। यदि ये लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नज़दीकी अस्प्ताल में संपर्क करें।
मन में कुछ कर गुज़रने का हौंसला हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है। मजबूत इरादों से बड़े से बड़े पहाड़ भी कदमों तले लाये जा सकते हैं। ऐसा ही कुछ शिमला के तीन युवकों ने कर के दिखाया है। सिरमौर ज़िला के दुर्गम क्षेत्र चूड़धार पर जाने के नाम से कई लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस स्थान को महज 11 घंटों में साइकिल से फतह कर इन लड़कों ने इतिहास रचा है। इससे पहले किसी ने इस चोटी पर साइकिल से चढ़ाई नहीं की है। हिमालयन एडवेंचर स्पोट्र्स टूरिज्म प्रोमोशन एसोसिएशन से जुड़े 19 वर्षीय अक्षित, 18 वर्षीय आशीष शेरपा व 33 वर्षीय आशीष सूद ने यह यात्रा साइकिल से पूरा करने की ठानी। उन्होंने बताया कि साइकिल के साथ शिमला से चूड़धार की दूरी तय करने का पहला प्रयास था। वे 28 जुलाई को शिमला से चूड़धार के लिए निकले। कड़कड़ाती ठंड, तीखे पहाड़, चट्टानें गिरने और सैकड़ों नालों की परवाह न करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहे। चोटी के करीब पहुंचने पर ऑक्सीजन की कमी से परेशानी हुई। मगर चूड़धार तक पहुंच कर उनका सपना पूरा हुआ। वे इस यात्रा से युवाओं को संदेश देना चाहते हैं कि अगर युवा पीढ़ी किसी काम को करने की ठान ले तो हर मुकाम को हासिल कर सकती है।
राजधानी शिमला के उप नगर संजौली इंजन घर के समीप लोअर सांगटी में बुधवार को सुबह एलपीजी के गैस रिसाव होने से घर में धमाका हो गया। सुबह के समय हुए इस धमाके की आवाज़ सुनते ही पूरी लोअर सांगटी इस धमाके से हिल उठी और लोग अपने घरों से बाहर निकले। जानकारी के अनुसार यह धमाका लोअर सांगटी के रमेश कुमार शर्मा के घर पर सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर हुआ। घर में हुए इस धमाके से रमेश कुमार शर्मा झुलस गए और धमाका होने के कारण बेहोश हो गए। वहीं धमाके की सूचना अग्निशमन विभाग को दी गयी। सुचना मिलते ही अग्निशमन विभाग अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। अग्निशमन विभाग के अनुसार धमाका होने से घटना स्थल में लगभग 15 लाख रुपए का नुकसान आंका गया हैं। वहीं पीड़ित का आईजीएमसी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
The dead body of Cafe Coffee Day (CCD) Owner VG Siddhartha, was found on the banks of the Netravati river near Mangaluru at 4.30 am on Wednesday. He was first reported missing on Monday by his driver. Siddhartha’s family has confirmed his identity and the cremation is likely to be held on Wednesday after postmortem. Siddhartha is the son-in-law of former Karnataka Chief Minister SM Krishna. Congress accuses govt of tax terrorism, after VG Siddhartha's so called suicide.
राजधानी शिमला के सदर थाना में नाबालिग़ लड़की से रेप का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज़ कर लिया है। वहीं मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ़्तार भी कर लिया है और आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी अर्की का बताया जा रहा है। वहीं मामला नाबालिक से जुड़ा है इसलिए पुलिस कुछ भी कहने से बच रही है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अंग्रेजी सीखाने के लिए हिमाचल सरकार नई पहल करने जा रही है। इस योजना के तहत पहली से तीसरी कक्षा वाले सूबे के साढ़े 10 हजार स्कूलों में एक विशेष किट बांटी जाएंगी। संपर्क फाउंडेशन संस्था ये विशेष इंग्लिश किट बांटेगी। शिक्षक इस किट के अनुसार छात्रों को इंग्लिश प्रशिक्षण के गुर सिखाएंगे। 30 जुलाई को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शिमला से इस योजना का शुभारंभ करेंगे। इस इंग्लिश किट को विशेषकर छोटे बच्चों के लिए तैयार किया गया है। इसमें एक साउंड बॉक्स होगा, इससे शब्दों का उच्चारण होगा। इस बॉक्स को संपर्क दीदी नाम दिया गया है। एसएमएस से अभिभावकों तक पहुंचेगी बच्चों की रिपोर्ट 30 जुलाई को सीएम जयराम ठाकुर ई-संवाद ऐप का भी शुभारम्भ करेंगे। बच्चों की हर गतिविधि उनके अभिभावकों तक एसएमएस से पहुंचाने के लिए ई-संवाद मोबाइल ऐप तैयार किया गया है। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत मंडी जिले में इसे शुरू किया जाएगा। फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट भेजने वालों अधिकारीयों पर कसेगा शिकंजा मौके पर गए बिना फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट भेजने वालों अधिकारीयों पर शिक्षा विभाग एप से शिकंजा कसेगा। सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए शिक्षा विभाग ने शिक्षा साथी ऐप तैयार किया है, जिसका इस्तेमाल बीआरसीसी, डीपीओ और बीओ करेंगे। इसकी मदद से स्कूलों के निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों को मौके से ही निरीक्षण की रिपोर्ट ऐप पर अपलोड कर सकेंगे।
मृतकों में दो श्रद्धालु दिल्ली के व एक शिमला का श्रीखंड महादेव यात्रा कर रहे तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर मृत्यु के कारणों का पता नहीं चला है , पर बताया जा रहा है कि इन तीन श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत हुई जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई। यात्रा के दौरान भीमवही, नैनसरोवर और कुशां में इनकी मृत्यु हुई है।प्रारंभिक तौर पर हाइपोथर्मिया (शरीर के तापमान में कमी होना) इनकी मौत की वजह माना जा रहा है , किन्तु इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टेम के बाद ही हो पायेगी। मृतकों में से दो श्रद्धालु दिल्ली के और एक शिमला का रहने वाला है।एसडीएम आनी चेत राम ने बताया कि श्रीखंड महादेव की यात्रा के अंतिम पड़ाव में शनिवार देर रात डेढ़ बजे के करीब तीन लोगों की मौत हुई है। इनकी हुई मौत- 40 वर्षीय उपेंद्र सैनी पुत्र जीवन सैनी निवासी खलीणी, शिमला केवल नंद भगत पुत्र गोपाल भगत निवासी ए 577 चोखरी, वेस्ट दिल्ली आत्मा राम पुत्र खाशा राम, निवासी गली चेतराम मोजपुर, दिल्ली जब यात्रा बंद थी तो कैसे पहुंचे श्रद्धालु श्रीखंड महादेव की ऐतिहासिक यात्रा 15 जुलाई से शुरू हुई थी। 25 जुलाई को यात्रियों के अंतिम जत्थे का पंजीकरण किया गया था। उसके बाद यात्रा बंद कर दी गई थी। बावजूद इसके लोग यात्रा करने कैसे पहुंचे ये बड़ा सवाल है।बता दें कि निरमंड के बेस कैंप सिंहगाड़ से यह यात्रा शुरू होती है। 18,570 फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड चोटी पर बाबा भोले नाथ के दर्शन के लिए 35 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यात्रा में आठ ग्लेशियर भी पार करने होते हैं। यात्रा करने वालों का सिंहगाड़ में पंजीकरण और मेडिकल चेकअप किया जाता है जिसके बाद ही श्रद्धालुओं को अनुमति मिलती हैं। तीनों मृतक किस तरह यात्रा करने पहुंचे, ये तफ्तीश का विषय है।
कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 जवानों ने अपने जीवन का बलिदान दिया राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टेन विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया कारगिल युद्ध में हिमाचल के 52 जवानों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था। इसमें कांगड़ा जिले के सबसे अधिक 15 जवान शहीद हुए थे। मंडी जिले से 11, हमीरपुर के सात, बिलासपुर के सात, शिमला से चार, ऊना से दो, सोलन और सिरमौर से दो-दो जबकि चंबा और कुल्लू जिले से एक-एक जवान शहीद हुआ था। कारगिल युद्ध में पहले शहीद कैप्टेन सौरभ कालिया भी हिमाचल के पालमपुर से ही ताल्लुख रखते थे। हिमाचल प्रदेश के राइफलमैन संजय कुमार और कैप्टेन विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से भी सम्मानित किया गया। दुश्मन की मशीनगन से ही दुश्मन को भून डाला संजय कुमार ने हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के रहने वाले संजय कुमार को इसी अदम्य साहस के लिए परमवीर चक्र का सम्मान मिला।प्वाइंट 4875 पर राइफलमैन संजय कुमार की बहादुरी ने भारतीय सेना को आगे बढ़ने का आधार दिया था। एक दिन पूर्व ही इस प्वाइंट पर संजय कुमार की चीते सी फुर्ती से दुश्मन पर कहर बनकर टूटी थी। संजय कुमार प्वाइंट 4875 पर पहुंचे ही थे कि उनका सामना दुश्मन के आटोमैटिक फायर से हो गया। संजय कुमार तीन दुश्मनों के साथ गुत्थमगुत्था हो गए। हैंड टू हैंड फाइट में संजय कुमार ने तीनों को मौत के घाट उतार दिया। दुश्मन टुकड़ी के शेष जवान घबराहट में अपनी यूनिवर्सल मशीन गन छोड़कर भागने लगे। बुरी तरह से घायल संजय कुमार ने उसी यूएमजी से भागते दुश्मनों को भी ढेर कर दिया। कैप्टेन विक्रम बत्रा की शाहदत की कसमें खाते है सैनिक पहली जून 1999 को कैप्टेन विक्रम बत्रा की टुकड़ी को कारगिल युद्ध में भेजा गया। हम्प और राकी नाब स्थानों को जीतने के बाद उसी समय विक्रम को कैप्टन बना दिया गया। इसके बाद श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे 5140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने का जिम्मा भी कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया।विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को अपने कब्जे में ले लिया।विक्रम बत्रा ने जब इस चोटी से रेडियो के जरिए अपना विजय ‘यह दिल मांगे मोर’ कहा तो पुरे हिन्दुस्तान में उनका नाम छा गया। इसके बाद सेना ने चोटी 4875 को भी कब्जे में लेने का अभियान शुरू कर दिया, जिसकी बागडोर भी विक्रम को सौंपी गई। उन्होंने जान की परवाह न करते हुए लेफ्टिनेंट अनुज नैयर के साथ कई पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारा। कारगिल के युद्ध के दौरान उनका कोड नाम 'शेर शाह' था। पॉइट 5140 चोटी पर हिम्मत की वजह से ये नाम मिला।कारगिल युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा 7 जुलाई को शहीद हो गए।शहीद होने के बाद उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया।
हिमाचल प्रदेश की हरियाली बढ़ाने के लिए यूं तो वन विभाग हर साल हर संभव प्रयास करता है। पर अब नई योजना से यह जन अभियान बन सकेगा। अब नवजात कन्या के नाम पर बूटा लगाकर हिमाचल प्रदेश में हरियाली बढ़ाई जाएगी । हिमाचल इस तरह की अनूठी पहल करने जा रहा है। प्रदेश में जहां भी बेटी पैदा होगी, उस परिवार को वन विभाग पौधा भेंट करेगा। इसे संबंधित क्षेत्र में रोपा जाएगा। कन्या कहां पैदा हुई, इसका पता लगाने की जिम्मेदारी वन रक्षक की रहेगी। वह पंचायतों से लेकर तमाम विभागों से संपर्क में रहेगा। किस प्रकार की भूमि में कौन से पौधे रोपे जाएंगे, यह जल्द ही तय होगा। इस सिलसिले में सरकार ने प्रारंभिक खाका खींच लिया है। इस योजना का नाम ‘एक बूटा बेटी के नाम’ होगा। इसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा जाएगा। रोपे पौधे की देखभाल बेटी के मां-बाप करेंगे। बजट सत्र में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नई योजना शुरू करने का ऐलान किया था। इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है। जैसे ही सरकार स्वीकृति देगी, यह धरातल पर उतरेगी।
यह किस्सा उसके बाद का है जब अवैध धंधों और अवैध संबंधों के अनगिनत तमगों के विजेता इंस्पेक्टर मातादीन चांद प्रशासन के आग्रह पर उनके पुलिस विभाग में क्रांतिकारी सुधार लाने के इरादे से पुलिस सेवा आदान प्रदान कार्यक्रम के तहत अपनी सरकार द्वारा डेपुटेशन पर चांद भेजे गए थे और चंद दिनों में ही उन्होंने वहां के पुलिस विभाग में ऐसे ऐसे क्रांतिकारी सुधार कर डाले थे कि वहां की सरकार को पूरे चंद्रलोक के हाथ जोड़ उन्हें वहां से समय से पहले ही उनका डेपुटेशन खत्म कर सादर वापस भेजना पड़ा था। चांद पर भी तब पुश्तों तक न मिटने वाली अपनी अमिट कार्यकुशलता की छाप छोड़ वे वहां की कानून व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार कर अपने देस लौट तो आए थे, पर उसके बाद की कहानी का कम ही पाठकों को पता होगा कि उन्होंने चांद पर सुधारों के साथ और क्या गुल खिलाए थे? जब वे चांद पर उस दिन वहां की पुलिस की क्लास लगाने के बाद थके मांदे घूमने निकले थे तो अचानक उनकी नजर चांद की एक सुंदरी पर पड़ी गई थी। उस सुंदरी पर नजर पड़ते ही वे ये भूल गए थे कि वे अपने देस में नहीं, चांद पर हैं। एकाएक तब उन्हें फील हुआ था कि ज्यों वे चांद पर नहीं , अपने देस में ही हों। ये फील होते ही उन्होंने सुंदरी को बिना किसीकी परवाह किए तोला तो उन्हें लगा, काम बन सकता है। और वे कानून के तमगे कंधों से निकाल अपनी जेब में डाल उसके पीछे हो लिए, मूंछों को ताव देते , उसे सुरक्षा देने के बहाने। उसका पीछा करते करते वे ये भी भूल गए कि वे उनके पद का रौब दिखाकर हर दुकान से साधिकार सामान उठाने वाली बीवी के साथ ही साथ चार बच्चों के बाप भी हैं। असल में पर उन पर काम का लोड इतना है कि वे जब भी काम से चूर होकर वे किसी सुंदरी को देखते हैं तो और कुछ भूलें या न, पर यह जरूर भूल जाते हैं कि वे अपने से भी चार कदम आगे की खाऊ बीवी सहित चार नालायक बच्चों के बाप हैं। तो अपने एमडी साब! चांद पर होने के बाद भी पहली ही नजर में उसे देखते फिर भूल गए कि वे अपने देस में अपनी बीवी बच्चों को छोडकऱ आए यहां के राज अतिथि हैं। वे ये भी भूल गये कि अपने देस में कुछ भी उट पटांग करो तो अपनी ही बदनामी होती है, परंतु यहां कुछ ऐसा वैसा करेंगे तो उनकी नहीं, पूरे देस की बदनामी होगी। फिर वे सोचे? राज अतिथि के दिल नहीं होता क्या? शादीशुदा होने के बाद भी क्या उसका मौलिक हक नहीं कि वह अवसर सुअवसर मिलते आंखें चार करे? एमडी साब को यह भी पता था कि चांद पर उनके परिवार के बारे में जानने वाला कोई नहीं। और जो कोई उनसे उनके परिवार के बारे में पूछे भी तो वे बताने वाले बिल्कुल नहीं। हर कोई अपने पांव पर कुल्हाड़ी मार सकता है, पर कम से कम एक पुलिसवाला तो बिल्कुल नहीं मार सकता। एमडी साब का मानना है कि हर सुंदरता वाली चीज पर पहला हक कानून वालों का ही होता है। कानून उसके साथ सुरक्षा के बहाने वह सब कुछ मजे से कर सकता है जो.... तो पाठको! बहुत कम पाठकों को इस बात का इल्म होगा कि वहां पर उनके एक विवाहित सुंदरी से संबंध हो गए थे। दोनों शादीशुदा थे, सो दोनों ने एक दूसरे से एक दूसरे के पति, पत्नी के बारे में कतई नहीं पूछा। और जिस तरह वे अपने को रिष्वत लेने से लाख हाथ पीछे खींचने के बावजूद भी रोक नहीं पाते थे, उसी तरह उस चंद्र सुंदरी को प्रेम सुरक्षा प्रदान करते करते वे अपने को उसके आंचल में जाने से बचा नहीं पाए। और नतीजा! वहां की पुलिस व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार लाते लाते वे अपने देस का एक जीव उस सुंदरी की कोख में रोपित कर आए। इधर वे वापस अपने देस तो आ गए पर चंद्रलोक की उस सुंदरी से उनकी एक और संतान ने जन्म ले लिया। मातादीन उर्फ एमडी साब वहां से आते आते सुंदरी को वचन दे आए थे कि ज्यों ही धरती से अपने देश का कोई चंद्रयान अपनी सरकार द्वारा यहां भेजा जाएगा, तो उसमें वे दोनों की सीट एडवांस में बुक करवा देंगे। पर हुआ यों कि इस बीच अपने देश को कोई चंद्रयान चांद पर न भेजा जा सका। उधर भारत से चांद पर भेजे जाने वाले चंद्रयान की बाट जोहती जोहती वह सुंदरी सुंदर होने के बाद भी उम्र दराज होने लगी तो एमडी साब का चांद पर जन्मा बेटा पल छिन बड़ा। जब मातादीन का चांद पर जन्मा बेटा सोचने समझने लायक हुआ तो एक दिन वह अपनी मां से पूछा बैठा,‘ मां! मेरे डैड कहां रहते हैं? मुझे मेरे डैड दिखाओ न!’ तो उस सुंदरी ने धरती की ओर उंगली लगाकर उससे कहा,‘ बेटा !तेरे डैड वहां रहते हैं।’ ‘ इत्ती दूर? इत्ती दूर वे क्या करते हैं? एमडी साब के पता नहीं कितनवे बेटे ने अपनी मां से पूछा तो वह उदास हो बोली,‘ वहां वे पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं।’ ‘ तो वे यहां क्यों नहीं नौकरी करते?’ ‘ यहां ऊपर की कमाई के सकोप नहीं है न बेटे!’ तब बेटे ने ज्यों ही अगला प्रश्न अपनी मां से पूछा तो मां ने उसे चुप करा दिया। ऐसे ही एमडी साब के बेटे को जब भी मौका मिलता, वह अपने डैड के बारे कुछ न कुछ जरूर पूछता। अपने डैड की शक्ल के बारे में पूछता। पर सुंदरी हर बार उसे उसके डैड का नाम एमडी साब बता कर जैसे कैसे उसे चुप करा देती। एक दिन फिर एमडी साब के बेटे ने अपनी मां से कहा कि वह जो उसे उसके डैड नहीं दिखा सकती तो न सही। कम से कम उसकी फोटो ही बता दे, तो यह सुन वह विवाहिता सुंदरी एक बार पुनः चुप हो गई। असल में पहले पति के डर से उसने एमडी साब की फोटो केवल अपने दिल में ही रखी थी। यों ही दिन...महीने... साल बीतते गए। और बेचारी सुंदरी! अपने देस से आने वाले चंद्रयान का इंतजार करती बूढ़ी होने लगी। चंद्रलोक में जब भी कोई यान उतरता तो वह सारे काम छोड़ दौड़ कर उस यान के पास आ जाती। उसे लगता कि यह यान भारत से आया होगा। पर जब वह उस पर अमेरिका , चीन, रूस या किसी अन्य देश का लगा झंडा देखती तो उदास हो जाती। ...और एक दिन! अपने देस का चंद्रयान चंद्रमा की ओर कूच कर गया। एमडी साब ने ज्यों ही जिमखाना जाते जाते इस बात की खबर चंद्रलोक की अपनी आठवीं इलीगल बीवी को दी तो वह पागल हो गई। उसका मन किया कि वह चांद पर से उसी वक्त पृथ्वी पर छालांग लगा दे। एमडी साब ने फोन पर दिल फेंकते उसे बताया कि उसने उन दोनों के लिए अपने चंद्रयान में वापसी का टिकट बुक करवा दिया है तो फोन पर ही चंद्रसुंदरी ने एमडी साब से पूछा,‘ हे मेरे दूसरे प्राणनाथ! पर हम धरती पर आकर रहेंगे कहां? आपके पुराने घर में हमारे आने पर दंगा फसाद हो गया तो? एक ही घर में बीवी और सौत अपने अपने बच्चों के साथ रह पाएंगी क्या?’ तो उन्होंने काली की मूंछों पर ताव देते, पैंट से फुट भर बाहर निकल आए पेट बैल्ट कस उसे भीतर करते कहा,‘ डरो मत डार्लिंग! तुम्हारा एमडी साब इंस्पेक्टर से एसपी हो गया है। अब बड़े बड़े शरीफों से उसके पारिवारिक संबंध हो गए हैं। दिल्ली में ही उसके पॉश एरिया में दस बेनामी फ्लैट हैं। मन करे तो रोज फ्लैट बदलते रहना। क्या मजाल जो दूसरी बीवियों को इसकी भनक भी लग जाए कि तुम चांद पर से आ गई हो। और हां! आते आते आईजी साहब की बेगम को चांद पर से एड़ी चमकाने वाला बिल्कुल वैसा ही पत्थर जरूर लाना। कह रहे थे कि यार! उस पत्थर से बेगम ने जब एड़िया रगड़ीं तो वह ऊपर तक चमक गई थी। उनका वह एड़ियां चमकाने वाला पत्थर अब घिसने को आ गया है। ’ मित्रो! जबसे अपने देस का चंद्रयान चांद पर रवाना हुआ है, अपना देस ही नहीं, चंद्रलोक की एमडी साब की सुंदरी भी हमारे मिशन चांद की सफलता की दिन रात कामना कर रही है। वह दिनरात जागे जागे सारे काम छोड़ दूरबीन से चंद्रयान को एकटक निहारती बस इस इंतजार में है कि कब जैसे उसका चंद्रयान रूपी एमडी साब पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर चांद पर प्रवेश करे और वह उसके गले में सारी लोकलाज त्याग वरमाला डाल उनके स्वागत के मंगलगीत गाने के बाद, अपने बेटे के साथ एड़ियां चमकाने वाला पत्थर ले निर्दयी एमडी साब से आ मिले, अपने बेटे को यह कहने कि-देख बेटा! ये रहे तेरे एमडी डैड!
हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की है कुलदेवी भीमाकली मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र हैं। देवी भीमाकली को समर्पित ये मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से 180 किलोमीटर दूर सराहन में व्यास नदी के तट पर स्थित है। भीमाकाली मन्दिर, 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह देवी तत्कालीन बुशहर राजवंश की कुलदेवी है जिसका पुराणों में उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 800 साल पहले बनाया गया है। यह अपनी अनूठी वास्तुकला, जो हिंदू और बौद्ध स्थापत्य शैली का एक मिश्रण है, के लिए जाना जाता है। मंदिर परिसर के भीतर एक नया मंदिर 1943 में बनाया गया था। मंदिर में देवी भीमाकली की एक मूर्ति को एक कुंवारी और एक औरत के रूप में चित्रित किया गया है। मंदिर परिसर में रघुनाथ और भैरों के नरसिंह तीर्थ को समर्पित दो मंदिर और हैं। हर साल यहां बड़े स्तर पर काली की पूजा की जाती है जिसमें लाखों लोग भाग लेते है। पौराणिक कथा महल में स्थापित भीमाकाली मन्दिर के साथ अनेक पौराणिक कथाएं जुडी हैं जिनके अनुसार आदिकाल मन्दिर के स्वरूप का वर्णन करना कठिन है। भीमाकाली शिवजी की अनेक मानस पुत्रियों में से एक है। मत्स्य पुराण में भीमा नाम की एक मूर्ति का उल्लेख आता है। एक अन्य प्रसंग है कि मां पार्वती जब अपने पिता दक्ष के यज्ञ में सती हो गई थीं तो भगवान शिव ने उन्हें अपने कंधे पर उठा लिया था। हिमालय में जाते हुए कई स्थानों पर देवी के अलग-अलग अंग गिरे। एक अंग कान शोणितपुर में गिरा और भीमाकाली प्रकट हुई। मन्दिर के ब्राह्मणों के अनुसार पुराणों में वर्णन है कि कालांतर में देवी ने भीम रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया और भीमाकाली कहलाई। भीमाकली मंदिर भारत में सबसे महत्वपूर्ण पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर बेहद सुंदर है जहां कई भगवानों की मूर्ति को प्रर्दशित किया गया है। यह पवित्र मन्दिर लगभग सभी ओर से सेबों के बागों से घिरा हुआ है भीमाकाली मन्दिर हिंदु और बौद्ध शैली में बना है जिसे लड़की और पत्थर की सहायता से तैयार किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू देवता शिव की पत्नी सती, वैवाहिक जीवन के परम सुख और दीर्घायु की देवी, का बायाँ कान इस जगह गिर गया था। यहाँ हर साल लोकप्रिय हिंदू त्योहार दशहरा के समारोह को धूमधाम से मनाया जाता है। मकर संक्रांति, रामनवमी, जन्माष्टमी, शिवरात्रि आदि त्यौहार भी बडे हर्षोल्लास व श्रद्धा से मनाये जाते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए स्थानीय बस सेवा और टैक्सियां उपलब्ध है मन्दिर परिसर में बने साफ-सुथरे कमरों में ठहरने की व्यवस्था है। इस भीमाकाली मंदिर के कपाट केवल सुबह और शाम ही दर्शनों के लिए खुलते हैं। मंदिर कई मंजिला है और सबसे उपर माता का विग्रह स्थापित है । मंदिर में प्रवेश से पहले सिर पर टोपी अवश्य पहननी होती है। मंदिर में अपने साथ कुछ भी सामान नहीं ले जा सकते हैं ।
स्पीड पोस्ट से फिरौती का धमकी भरा पत्र मिला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक कारोबारी से दस करोड़ फिरौती की मांग की गई है।कारोबारी की लोअर बाजार में एक दूकान है। जानकारी के अनुसार कारोबारी को बुधवार को स्पीड पोस्ट से फिरौती का धमकी भरा पत्र मिला है। इसमें कारोबारी को धमकाते हए लिखा गया है कि अगर उसने 10 करोड़ रुपये की फिरौती नहीं दी तो उसके परिवार के सदस्यों और बच्चों को जान से मार दिया जायेगा। इसके बाद कारोबारी ने इसकी सुचना पुलिस को दी। पुलिस मामला दर्ज कर तहकीकात में जुटी है। अभी तक हुई जांच में पता चला है कि पत्र शिमला के मालरोड स्थित मुख्य डाकघर से जारी हुआ है। यह लैटर 22 तारीख को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट पर पोस्ट किया गया है। पुलिस ने मालरोड के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
49 celebrities have written letter to PM 49 celebrities have written a letter to Prime Minister Narendra Modi claiming intolerance in the nation is increasing. In the letter dated to 23rd July 2019, the group of celebrities from various professions stated that they are 'deeply concerned' about a number of tragic events that have been happening in the country in recent times. Anurag Kashyap, Shyam Benegal, Ramchandra Guha, Maniratnam, Ketan Mehta are concerned about intolerance The letter claims that 'Jai Sri Ram' has become a provocative 'war-cry', leading to law and order problems. Letter states that the name of Ram is sacred to many majority communities in India.
Women are involved at every stage of Solan - Kaithlighat four lane construction Women Empowerment is always top priority for Arief Engineers : Mallick Women Engineers are contributing a significant role in four-lane construction work of the 22.91 kilometre stretch of the National Highway from Solan to Kaithlighat. This work was awarded to Arief Engineers in 598 crores, and it was initiated on November 9, 2018 by the company. In last nine months company has delivered quite satisfactory inspite so many hurdles. The General Manager of Arief Engineers, Amit Mallick is taking care of this project, but the contribution of women is no less. "Our women engineers are involved at every level of construction work in this jumbo project," says Mallick. He further added, “ not only civil engineers but in other departments also, women are playing a vast role.” Five women are deployed in key positions at Kandaghat Site The project office of Arief Engineers is located at Kandaghat. Presently, Arief Engineers has deployed five women in key positions at site office, including three core civil engineers. All these women are from different parts of the country, and they are exception to the myth that women are rare in civil engineering field. It is not at all easy for any civil engineer to work in mountains, but these women are delivering surfeit expectations. Rajendra, Kalpana Gupta and Jyoti Bhatia are the civil engineers who are breaking the barriers and making their contribution at every step of construction, right from planning to the on site execution. Whereas, Disha Sharma is taking care of human resource management and Ekta Sharma is responsible for accounts. Women has significant role to play at every site of Arief Engineers Despite the increased interest in civil engineering among women, there are still a number of challenges that are contributing to the continued gender inequality. One barrier that is often pointed to is the lack of female role models in the field. Because the number of women in the field is low, there are also few female leaders in civil engineering, which can make it difficult for new generations of female engineers to find mentors whom they feel they can relate to. But Arief Engineers is providing the right atmoshphere to young women engineers, so they may learn, grow and contribute the optimum in nation building. General Manager Amit Mallick said “ Kandaghat site is not the exception, at every site of Arief Engineers the role of women is no less."
शिमला से लगभग 110 कि.मी. दूर, शिमला-रोहड़ू मार्ग पर पब्बर नदी के दाहिने किनारे धान के खेतों के बीच स्थित माता हाटकोटी का मंदिर लाखों भक्तों केलिए आस्था का केंद्र हैं। मां हाटकोटी के मंदिर में एक गर्भगृह है जिसमें मां की विशाल मूर्ति विद्यमान है यह मूर्ति महिषासुर मर्दिनी की है। इतनी विशाल प्रतिमा हिमाचल में ही नहीं बल्कि भारत के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में भी देखने को नहीं मिलती। मात की ये प्रतिमा किस धातु की है इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। लोकगाथा के अनुसार एक लोकगाथा के अनुसार इस देवी के संबंध में मान्यता है कि बहुत वर्षो पहले एक ब्राह्माण परिवार में दो सगी बहनें थीं। उन्होंने अल्प आयु में ही सन्यास ले लिया और घर से भ्रमण के लिए निकल पड़ी। उन्होंने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों के दुख दर्द सुनेंगी और उसके निवारण के लिए उपाय बताएंगी। एक बहन हाटकोटी गांव पहुंची जहां मंदिर स्थित है,उसने यहां एक खेत में आसन लगाकर ईश्वरीय ध्यान किया और ध्यान करते हुए वह लुप्त हो गई। जिस स्थान पर वह बैठी थी वहां एक पत्थर की प्रतिमा निकल पड़ी। इस आलौकिक चमत्कार से लोगों की उस कन्या के प्रति श्रद्धा बढ़ी और उन्होंने इस घटना की पूरी जानकारी तत्कालीन जुब्बबल रियासत के राजा को दी। जब राजा ने इस घटना को सुना तो वह तत्काल पैदल चलकर यहां पहुंचा। राजा ने यहां पर मंदिर बनाने का निश्चय ले लिया। लोगों ने उस कन्या को देवी रूप माना और गांव के नाम से इसे 'हाटेश्वरी देवी' कहा जाने लगा। इसलिए विशेष हैं मंदिर यह मंदिर समुद्रतल से 1370 मीटर की ऊंचाई पर पब्बर नदी के किनारे समतल स्थान पर स्थित है। कहा जाता है मंदिर के साथ लगते सुनपुर के टीले पर कभी विराट नगरी थी, जहां पर पांडवों ने अपने गुप्त वास के कई वर्ष व्यतीत किए। यह स्थान हाटकोटी के नाम से भी प्रसिद्ध है। माता हाटेश्वरी का मूल स्थान ऊपर पहाड़ों में घने जंगल के मध्य खरशाली नामक जगह पर है। मन्दिर के बिल्कुल बांयी ओर बड़े-छोटे पत्थरों को तराश कर, छोटे-छोटे पांच कलात्मक मन्दिर बनाए गये है। इन मंदिरों का निर्माण पाण्डवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया है । यहां के स्थायी पुजारी ही गर्भगृह में जाकर मां की पूजा कर सकते हैं। मंदिर के बाहर प्रवेश द्वार के बाई ओर एक ताम्र कलश लोहे की जंजीर से बंधा है जिसे स्थानीय भाषा में चरू कहा जाता है। इनमें यज्ञ के दौरान ब्रह्मा भोज के लिए बनाया गया हलवा रखा जाता है। यह मंदिर शिखराकार नागर शैली में बना हुआ था बाद में एक श्रद्धालु ने इसकी मरम्मत कर इसे पहाड़ी शैली के रूप में परिवर्तित कर दिया। मंदिर में महिषासुर र्मदिनी की दो मीटर ऊंची कांस्य की प्रतिमा है। इसके साथ ही शिव मंदिर है। मंदिर द्वार को कलात्मक पत्थरों से सुसज्जित किया गया है। छत लकड़ी से र्निमित है, जिस पर देवी देवताओं की अनुकृतियों बनाई गई हैं। मंदिर लकड़ी और पत्थर से निर्मित कलात्मक शिल्पकारी का अद्भुत नमूना है l मंदिर के गर्भगृह में लक्ष्मी, विष्णु, दुर्गा, गणेश आदि की प्रतिमाएं हैं। इसके अतिरिक्त यहां मंदिर के प्रांगण में देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां हैं।बताया जाता है कि इनका निर्माण पांडवों ने करवाया था। मंदिर की ओर जाती सड़क के दोनों ओर सेब के बगीचे है, और खूब घने देवदार के जंगल हैंl मंदिर को नवरात्रों के दौरान खूब सजाया जाता है।नवरात्रों में यहाँ विशेष पूजा का आयोजन होता हैं ।
आरोपी ने शादी का झांसा देकर बनाए शारीरिक सम्बन्ध राजधानी शिमला की एक 20 वर्षीय युवती के साथ ऑस्ट्रेलिया में दुष्कर्म का मामला सामने आया है। शादी का झांसा देकर आरोपी ने युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी करने से मुकर गया। ऑस्ट्रेलिया से शिमला लौटने पर युवती ने शिमला के सदर थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया है। क्या है पूरा मामला पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि कुछ दिन पहले वह ऑस्ट्रेलिया गई थी और वहां विक्रम सिंह नामक शख्स से उसकी मुलाकात हुई। वहीं दोनों में दोस्ती हो गई। पीड़िता के मुताबिक विक्रम सिंह ने दोस्ती का फायदा उठाकर उससे शादी का प्रस्ताव रखा। विक्रम सिंह ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब दोनों शिमला वापस आए तो यहां भी उसके साथ वह दुष्कर्म करता रहा लेकिन अब शादी से इंकार कर रहा है। पीड़िता का यह भी कहना है कि विक्रम सिंह ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी है। डीएसपी प्रमोद शुक्ला ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज कर आगामी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।


















































