राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला ढलियारा में प्रधानाचार्य राजेश कुमार वैद्य की अध्यक्षता में रेड क्रॉस डे मनाया गया। इस दौरान 24 एनसीसी कैडेट्स को "ए" प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी किया गया। प्रधानाचार्य एनसीसी "ए" सर्टिफिकेट के बारे में बताते हुए कहा कि एनसीसी कैंप के दौरान फायरिंग तथा फिजिकल ट्रेनिंग तथा 2 साल के बाद इन विद्यार्थियों की परीक्षा ली जाती है, जिसमें उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को यह प्रमाण पत्र दिया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एनसीसी में शामिल होने का बहुत लाभ मिलता है। इन विद्यार्थियों को किसी भी प्रतियोगिता में अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं। इस मौके पर कॉमर्स प्रवक्ता अजय सपेहियाने भी बच्चों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इसके अलावा भाषण और प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान एनसीसी केयरटेकर अधिकारी मुकेश शर्मा ने भी बच्चों को एनसीसी में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर प्रवक्ता सुनील कुमार, प्रवक्ता अनूप शर्मा, प्रवक्ता सविता बदन, प्रवक्ता अनुपम, डीपी जाकिर हुसैन, कुलतार सिंह, लाल सुदेश, प्रियंका, आशा कुमारी व अन्य उपस्थित रहे।
मेरा गांव मेरा देश एक सहारा संस्था द्वारा संचालित खुशियों के बैंक में जमा हुए कपड़ों को लेबर कॉलोनी में जरूरतमंद लोगों को वितरित किया गया। इस मौके पर मेरा गांव मेरा देश एक सहारा संस्था के संचालक अनुराग गुप्ता, पुष्पा खंडूजा व नीरज बंसल मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि खुशियों के बैंक लगभग पिछले 1 वर्ष से चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों के द्वारा अपने घर में पड़े ग़ैर जरुरतन सामान जैसे कपड़े, खिलौने, बर्तन, कापी, किताबें इत्यादि जमा करवाए जाते हैं तथा संस्था के द्वारा इन सामान को सलम एरिया व लेबर कॉलोनी में जाकर जरूरतमंद लोगों को वितरित किया जाता है। वहीं संचालक पुष्पा खंडूजा व नीरज बंसल ने लोगों से भी अपील की अगर आपके घर में कोई भी गैर जरूरी सामान है तो वे खुशियों के बैंक माजरा में जमा करवा सकते हैं। जमा हुए सामान को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए मेरा गांव मेरा देश एक सहारा संस्था के सदस्य कार्य कर रहे हैं। अभी तक संस्था के द्वारा लगभग 3 लाख पुराने व नए कपड़े वितरित किए जा चुके हैं।
1923 में एक प्रसिद्ध रूसी कलाकार ने रूस से अपनी यात्रा की शुरुआत की और कई देशो में घूमने के बाद आखिरकार हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसने का फैसला कर लिया, वो शख्सियत थे निकोलस रोरिक। निकोलस का जन्म रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुआ था, लेकिन अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने भारत में ही गुजारा था। निकोलस अपनी पत्नी हेलेना और दो बेटों जॉर्ज और स्वेतोस्लाव रोरिक के साथ हिमाचल की कुल्लू घाटी के नग्गर में आ बसे थे। प्राचीन समय के प्रतिभाशाली चित्रकारों में निकोलस का नाम तो शामिल है ही लकिन उनके बेटे स्वेतोस्लाव को भी सबसे प्रतिभाशाली चित्रकार के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि आज अपनी विश्व स्तरीय चित्रकला के लिए रोरिक परिवार को भारत से लेकर रूस तक याद किया जाता है। 1874 में सेंट पीटर्सबर्ग में एक कुलीन परिवार में जन्मे निकोलस रोरिक ने 1917 की रूसी क्रांति के बाद रूस से बाहर रहने का फैसला किया। बताया जाता है कि निकोलस भारत की कला संस्कृति का गहन अध्ययन करना चाहते थे और इसकी शुरूआत उन्होंने मुंबई के एलीफेंटा की गुफाओं से की थी। फिर ये सफर कोलकाता तक पहुंचा और इसके बाद निकोलस दार्जिलिंग पहुंचे वहां पांचवें दलाई लामा जिस घर में रूके थे उसे निकोलस ने अपना निवास-स्थान बनाया। जहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला के सुन्दर और मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता था। दार्जीलिंग के कुछ महीने के प्रवास के दौरान उन्होंने 'हिज कंट्री 'शीर्षक से चित्र श्रृंखला बनाई जिसमें हिमालय पर्वत श्रृंखला को उच्च आध्यात्मिक सुंदरता के साथ चित्रित किया। हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी की वादियों से निकोलस इतने प्रभावित हुए कि दो दशकों से भी अधिक समय कुल्लू घाटी में बिताया। अपनी चित्रकारी कि कला से निकोलस ने नग्गर, कुल्लू और लाहौल को दुनिया के कलात्मक मानचित्र पर लाया। आज, इन उत्कृष्ट कृतियों को दुनिया भर में प्रदर्शित किया जाता है। मास्को में रोरिक के अंतर्राष्ट्रीय केंद्र से लेकर चित्रकला परिषद बैंगलोर, इलाहाबाद संग्रहालय, भारत में हॉल एस्टेट नग्गर और न्यूयॉर्क में रोएरिच संग्रहालय तक निकोलस कि चित्रकला देखने को मिलती है। न केवल कुल्लू घाटी बल्कि रोरिक परिवार लाहौल के प्रति भी बेहद जुनूनी थे। कहा जाता है कि लाहौल के ठाकुर प्रताप चंद ने उन्हें प्रसिद्ध शशूर गोम्पा के पास केलांग के ऊपर गुंगशुल गाँव में बसाने में मदद की थी। तब पूरा लाहौल निकोलस और स्वेतोस्लाव के लिए एक स्टूडियो था, जिन्होंने वहां 130 से ज्यादा उत्कृष्ट कृतियों को चित्रित किया था, उन्होंने विशेष रूप से गुंगशूल में ये कार्यशाला बनाई थी जिसे अंतिम रूप दिया गया था। - स्वेतोस्लाव रोरिक को मिल चूका है "पद्म भूषण" अवार्ड निकोलस रोरिक के बेटे स्वेतोस्लाव रोरिक भी एक प्रभावशाली चित्रकार थे। स्वेतोस्लाव ने कम उम्र में ही चित्र बनाना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने कला प्रोत्साहन सोसाइटी स्कूल की कक्षाओं में भाग लिया, होम थिएटर सेटिंग्स के लिए डिज़ाइन तैयार किए, और यहाँ तक कि थिएटर डिज़ाइन स्केच पर अपने काम में अपने पिता की मदद भी की। अपने पिता कि तरह ही स्वेतोस्लाव ने भी चित्रकला में एक अलग पहचान बनाई है। संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए, और शांति के लिए उनके योगदान के लिए, स्वेतोस्लाव रोएरिच को भारत के सर्वोच्च नागरिक आदेश "पद्म भूषण", सोवियत आदेश "लोगों की दोस्ती" सहित विभिन्न देशों के ओवरनैटल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। स्वेतोस्लाव रोरिक पंडित जवाहर लाल नेहरू के अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के विजेता भी थे। वह बल्गेरियाई ऑर्डर ऑफ किरिल और मेथोडी के साथ-साथ बुल्गारिया के वेलिकोटिरन विश्वविद्यालय के मानद डॉक्टर के खिताब के धारक रहे थे। रोरिक आर्ट म्यूजियम रोरिक आर्ट गैलरी में अलग-अलग तरह की कलात्मक चीजों को संजोया गया है। रोरिक आर्ट गैलरी, निकोलस रोरिक के घर यानि रोरिक हाउस में ही बनाई गई है, जहां निकोलस रोरिक की तरह तरह की पेंटिंग्स को रखा गया है। साथ ही यहाँ निकोलस रोरिक और उनके परिवार की चीजों को भी बंद कमरों में उसी तरह रखा गया है जैसे उनके समय में हुआ करती थी। साथ ही उनकी विंटेज कार को भी संजोकर रखा गया है। हालांकि अब निकोलस रोरिक और उनके परिबार के इस घर के अंदर जाने की अनुमति किसी को नहीं पर घर की खिडकियों से स्न्धेर देख रोरिक परिवार के रहन सहन को महसूस जरुर किया जा सकता है। इस घर के हर कोने हर जगह सिर्फ और सिर्फ कला ही झलकती है। रोरिक हाउस के बहार ही एक पेड़ के नीचे कई तरह के पत्थर की मुर्तियां राखी गई है। कहा जाता है ये सभी मूर्तियां निकोलस रोरिक अलग अलग जगह से लेकर आगे थे | - एक पेंटिंग की कीमत थी 12 मिलियन डॉलर रोरिक के चित्रों के मूल्य का अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि 2013 में लंदन में नीलाम हुई उनकी एक पेंटिंग की कीमत 12 मिलियन डॉलर थी। कहा जाता है कि रोएरिच ने हिमालय की अपनी यात्रा के दौरान परिदृश्य का गहन अध्ययन किया था। और पहाड़ उनके चित्रों में रंग सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बर्फीली चोटियों के जादू को फिर से जगाते हैं। ये भी माना जाता है कि रोएरिच की विभिन्न आध्यात्मिक प्रथाओं में रुचि थी और उनके चित्रों में एक सम्मोहक गुण। - रोरिक के प्रसिद्ध चित्र रोएरिच के कुछ सबसे प्रसिद्ध चित्रों में शामिल हैं बुद्ध द विनर (पूर्व सेवाओं का बैनर), 1925; सेंट सर्जियस द बिल्डर, 1925; नंगा पर्वत (बर्फीले पहाड़ों के नीचे की घाटी), 1935-36; हिमालय (माइट ऑफ द स्नो), 1945; मास्टर की कमान, 1947, पवित्र हिमालय, 1933, आदि।
" जगत सिंह नेगी खुद एक बागवान है और एक आम बागवान की समस्याओं से भलीभांति परिचित है। उम्दा बात ये है कि नेगी खुद व्यवस्था परिवर्तन की जरुरत को मानते है और अपने छोटे से कार्यकाल में ही उन्होंने 'बॉटम टू टॉप' आवश्यक बदलाव करने के संकेत भी दिए है। साफ़गोई से व्यवस्था और तंत्र की खामियों को स्वीकारना और समाधान पर तार्किक चर्चा करना उनसे उम्मीद का बड़ा कारण है। " बागवानी हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी की रीढ़ है। प्रदेश की अकेली सेब अर्थव्यवस्था ही छ हज़ार करोड़ से ज्यादा की है। वहीं अधीनस्थ गतिविधियों का भी बहुत बड़ा बाज़ार है। बागवानी ने निसंदेह प्रदेश को एक दिशा दी है जिससे आर्थिक दशा भी सुधरी है। हिमाचल प्रदेश की जलवायु प्रकृति का वरदान है और प्रदेश में बागवानी को लेकर अथाह संभावनाएं है। सेब के अलावा भी प्रदेश में कई फलों के लिए उपयुक्त वातावरण है। हालांकि कभी मौसम की मार, तो कभी पोस्ट हार्वेस्ट पेश आने वाली समस्याएं बागवानों के सामने बड़ी चुनौती है। पैकिंग, ग्रेडिंग, कोल्ड स्टोरेज, मार्केटिंग हो या फ़ूड प्रोसेसिंग; आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में टिकने के लिए हर स्तर पर पेशेवर दृष्टिकोण से कार्य करना अनिवार्यता बन चूका है। हर क्षेत्र में विशेषज्ञता की दरकार है। बड़े बागवानों के लिए तो ये काफी हद तक मुमकिन होता है, किन्तु छोटे बागवानों के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में सरकारी तंत्र पर ही ये बागवान निर्भर है। दरअसल, सरकार ही इनकी आस है। कुछ महीने पहले ही व्यवस्था परिवर्तन के वादे के साथ हिमाचल प्रदेश में नई सरकार आई है। पिछली सरकार से जो वर्ग खफा थे उनमें बागवान भी शामिल है और ये वर्ग परिवर्तन का सूत्रधार भी बना। अब प्रदेश में बागवानी विभाग क जिम्मा जगत सिंह नेगी को दिया गया है जो न शरीफ खुद एक बागवान है बल्कि विपक्ष में रहते बागवानों के मुद्दों पर तत्कालीन सरकार के खिलाफ मुखर भी रहे है। सरकार को अभी ज्यादा वक्त नहीं मिला है ऐसे में किसी निष्कर्ष पर निकलना जल्दबाजी जरूर होगा लेकिन बागवानों को लेकर जगत सिंह नेगी का रवैया सकरात्मक जरूर है। बागवानी से जुड़े कई मूल मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने जगत सिंह नेगी से चर्चा की और उनका पक्ष जाना। जगत निगह नेगी खुद एक बागवान है और एक आम बागवान की समस्याओं से भलीभांति परिचित है। उम्दा बात ये है कि नेगी खुद व्यवस्था परिवर्तन की जरुरत को मानते है और अपने छोटे से कार्यकाल में ही उन्होंने 'बॉटम टू टॉप' आवश्यक बदलाव करने के संकेत भी दिए है। साफ़गोई से व्यवस्था और तंत्र की खामियों को स्वीकारना और समाधान पर तार्किक चर्चा करना उनसे उम्मीदों का बड़ा कारण है। एचपीएमसी है सुधार की धुरी : हार्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कारपोरेशन ( एचपीएमसी ), ये वो सरकारी उपक्रम है जो करीब पांच दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ वाईएस परमार द्वारा प्रदेश में बागवानों के हितों को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था। 10 जून 1974 को विश्व बैंक की सहायता से ये उपक्रम अस्तित्व में आया और इसका मुख्य उद्देश्य था बागवानों को पोस्ट हार्वेस्ट ( तुड़ान ) के बाद की गतिविधियों में सहायता प्रदान करना। विशेषकर 80 के दशक में एचपीएमसी ने आधारभूत संरचना विकसित करने की दिशा में शानदार काम किया। फिर 21 वीं शताब्दी की शुरुआत में एक दौर ऐसा भी आया जब फ़ूड प्रोसेसिंग में कदम रख एचपीएमसी के फ्रूट जूस ने तहलका मचा दिया। पर समय के साथ अव्यवस्था हावी होती गई और बेहतरीन क्वालिटी के बावजूद एचपीएमसी के उत्पादों का मार्किट शेयर कम होता रहा। मंत्री जगत सिंह नेगी बेझिझक स्वीकारते है कि एचपीएमसी के प्रोडक्शन प्लांट्स में आज व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। आज के गलाकाट प्रतिस्पर्धी दौर में आधुनिक मशीने चाहिए, नई तकनीक चाहिए और व्यावसायिक नजरिया चाहिए। वर्ल्ड बैंक से मिले प्रोजेक्ट पर चर्चा करने पर नेगी ने बेहद साफ़ शब्दों में बताया कि परवाणू प्लांट में जिस पैसे का इस्तेमाल तकनीक और मशीनों पर किये जाना चाहिए था, उस पर बिल्डिंग को प्राथमिकता दी गई। जाहिर है नेगी का निशाना पूर्व सरकार पर था लेकिन असल चुनौती तो अब उनके सामने है। जगत सिंह नेगी का कहना है कि प्रोसेसिंग में फ्यूचर अब छोटे प्लांट्स का है, इतने बड़े प्लांट्स की जरुरत नहीं है। एचपीएमसी की तकनीक पुरानी है और अब समय कोल्ड प्रेस्ड प्लांट्स का है। पहले कंसन्ट्रेट बनाये जाते थे और फिर जूस तैयार होता था, लेकिन अब सीधे जूस तैयार होते है। बदलाव समय की जरुरत है। बागवानी मंत्री का स्पष्ट कहना है कि ये सरकार की प्राथमिकता में है और सुनहरा दौर वापस लाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी कहते है कि मुंबई, चेन्नई, दिल्ली सहित देश के कई मेट्रो शहरों में एचपीएमसी के पास सम्पतियाँ है, जो आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। प्रदेश में भी एचपीएमसी के पास कई सम्पतियाँ है। जरुरत है तो इनका उचित रखरखाव और आवश्यक बदलाव कर इनके सही इस्तेमाल करने की। 10 जून 1974 को विश्व बैंक की सहायता से एचपीएमसी की स्थापना हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बागवानों के लिए पोस्ट हार्वेस्ट (तुड़ाई) सुविधाओं को उलब्ध करवाना था, ताकि बागवानों की आर्थिकी मजबूत हो सके। करीब अपने पांच दशक के सफर में एचपीएमसी ने बागवानों के हित में कई अहम कार्य किये है, विशेषकर शुरूआती सालों में। तुड़ान के बाद फलों की पैकिंग, ग्रेडिंग, कोल्ड स्टोरेज, मार्केटिंग और फ़ूड प्रोसेसिंग की दिशा में कई बड़े निर्णय हुए और आधारभूत ढांचा भी निरंतर मजबूत हुआ। पर बीते कुछ समय में एचपीएमसी की कार्यशैली को लेकर निरंतर सवाल उठे है। वर्तमान में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी भी स्वीकार करते है कि सुधार की दरकार है। आरोप : एक कंपनी को दिया दस साल का ठेका ! आज के दौर में किसी भी उत्पाद की पैकिंग और सही मार्केटिंग बेहद जरूरी है और ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की उपयोगिता पर कोई सवाल नहीं है। पर अगर एचपीएमसी के उत्पादों को देखे तो ब्रांड वैल्यू के बावजूद ये पिछड़े हुए दीखते है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी भी इस कमी को स्वीकरते है। नेगी कहते है कि पूरी व्यवस्था बिगड़ी हुई है और इसे ठीक करने में वक्त लगेगा। मसलन पैकिंग के मामले पर वो कहते है कि पिछली सरकार ने जूस के टेट्रा पैक बनने के ठेका एक निजी कंपनी को दस साल के लिए दे दिया। किसी को लाभ पहुँचाने के लिए एक दो पेज का एग्रीमेंट कर लिया गया। अब मामला कोर्ट में है। ऐसे कई निर्णयों के चलते व्यवस्था में जरूरी बदलाव करना जटिल है, फिर भी वे हरसंभव विकल्प पर कार्य कर रहे है। उद्देश्य को लेकर स्पष्टता : बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी एचपीएमसी की भूमिका को लेकर बिलकुल स्पष्ट है। जब उनसे पूछा गया कि वे राजस्व मंत्री भी है और क्या एचपीएमसी सरकार की आय बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा, तो नेगी दो टूक कहते है कि एचपीएमसी का उदेश्य व्यपार करना नहीं है। इसका उद्देश्य बागवानों को प्रोसेसिंग, स्टोरेज और अन्य वलूर एडेड सुविधाएँ मुहैया करवाना, उन्हें सस्ता मटेरियल देना। जगत सिंह नेगी मानते है कि यदि बागवानों कि आर्थिकी मजबूत होगी और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रदेश का राजस्व बढ़ना भी स्वाभविक होगा। अर्थव्यवस्था का पहिया इसी तरह चलता है। यूनिवर्सल कार्टन और प्रति किलो भाड़ा : हिमाचल सरकार ने हाल ही में बागवानों का एक बड़ा मसला हल किया है l हिमाचल का सेब अब कार्टन के हिसाब से नहीं बल्कि किलो के हिसाब से बिकने वाला है l कृषि सचिव ने इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी है जिसके मुताबिक, बागवान एक पेटी में अधिकतम 24 किलो सेब ही भर सकेंगे l इस कदम से अब सेब बागवान बिचौलियों के शोषण से बच सकेंगे l इससे पहले बिचौलियों के दबाव में सेब बागवानों को एक पेटी में कभी 28 तो कभी 30 किलो सेब डालने पड़ रहे थे l पेटी में सेब की मात्रा बढ़ाने के बावजूद बागवानों को पेटी के हिसाब से ही दाम मिल रहा था l ऐसे में अब प्रति किलोग्राम दाम मिलने से बागवानों को फायदा होगा l इस समस्या का समाधान सरकार ने किया है मगर बागवान इसके बाद अब फ्रेट को लेकर चिंतित थे l हालांकि अब सरकार ने बागवानों की ये समस्या भी दूर कर दी है l बागवानों को ट्रांसपोर्टरों के शोषण से बचाने के लिए सरकार ने वजन के आधार पर सेब की ढुलाई का निर्णय लिया है l इस पर जगत सिंह नेगी ने कहा की जल्द सरकार की ओर से उपायुक्तों को आदेश जारी किए जाएंगे। उपमंडल स्तर पर संबंधित एसडीएम यह व्यवस्था लागू करेंगे और मनमानी करने वालों पर कार्रवाई करेंगे। अब तक प्रदेश में सेब ढुलाई की दरें पेटी के आधार पर तय होती हैं। हिमाचल प्रदेश पैसेंजर एंड गुड्स टैक्सेशन एक्ट 1955 के तहत प्रति किलोमीटर प्रतिकिलो के आधार पर सेब ढुलाई का किराया तय किया जाएगा। बागवानी मंत्री ने कहा की ये सुनिश्चित किया जाएगा कि बागवानों को उपज का सही दाम मिले और ट्रांसपोटेशन के नाम पर बागवानों का शोषण न हो। इम्पोर्ट ड्यूटी और जीएसटी को लेकर केंद्र पर निशाना : बाहर से आने वाले सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी न होना भी बागवानों क लिए बड़ी समस्या बना हुआ है l ये यूँ तो केंद्र सरकार का मसला है मगर बागवानी मंत्री का कहना है कि वे इसे लेकर काफी गंभीर है व केंद्र से इसके बारे बात करेंगे l जगत सिंह नेगी का कहना है की केंद्र सरकार 2014 से लेकर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की बात कहती है मगर अब तक सरकार ने ऐसा नहीं किया है। वो कहते है की पहले सिर्फ 3 या 4 देशों से सेब इम्पोर्ट किया जाता था, मगर अब करीब दर्जन देश है जहाँ का सेब भारत आ रहा है। अफगानिस्तान के रास्ते भी कुछ देशों का सेब भारत आता हैl हम लगातार इस इम्पोर्ट को कम करने की मांग कर रहे है। उन्होंने कहा कि केंद्र से जुड़े और भी कई मसले है। वे मानते है कि बागवानी से जुड़ी कई वस्तुओं पर केंद्र सरकार ने जीएसटी 18 प्रतिशत कर बागवानों की कमर तोड़ने का काम किया है l मार्किट इंटरवेंशन स्कीम के तहत दाम घटा दिए गए, जो कि सही नहीं है l सेब राज्य नहीं फल राज्य बनाना है : हिमाचल में जितनी आर्थिकी सेब से आती है उतनी ही अन्य फलों से भी आ सकती है, हालाँकि बाकि फलों को उतनी तवज्जो मिलती नहीं दिखती l अन्य फलों की पैदावार बढ़ने से बागवानों की आर्थिकी दोगुनी हो सकती है जिसपर सरकार काम कर रही है l जगत नेगी बताते है कि सरकार शिवा प्रोजेक्ट के तहत ट्रॉपिकल क्षेत्रों जैसे बिलासपुर, मंडी, ऊना, हमीरपुर, काँगड़ा, में सिट्रस फ्रूट्स की पैदावार पर फोकस कर रही है l इन क्षेत्रों में सरकार अमरुद, अनार जैसे फलों पर बड़े प्रोजेक्ट्स ला रही है l इसके मैन प्रोजेक्ट का एमओयू एशियाई डेवलपमेंट बैंक के साथ होना है जिसमें 6000 हेक्टेयर का टारगेट रखा गया है। राज्य में सब-ट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, इरिगेशन एंड वैल्यू एडिशन (HP-SHIVA) प्रोजेक्ट का पायलट चरण चल रहा है। इसका मकसद हिमाचल को फल राज्य के तौर पर विकसित करना है। ये सब - ट्रॉपिकल फलों की खेती को बढ़ावा देगा। राज्य में बीते ढाई सालों से इस प्रोजेक्ट का पायलट चरण लागू है। इसके अंतर्गत 4 जिलों के तकरीबन 17 क्लस्टर में विभिन्न सब-ट्रॉपिकल फलों के बगीचे लगाए गए हैं। इनसे बागवानों को अच्छी आमदनी हो रही है। शिवा परियोजना में फसल तैयार करने से लेकर मंडी तक पहुंचाने के लिए संकल्पना की गई है। यानी बगीचा लगाने के लिए प्लांटिंग मटेरियल देने, सिंचाई टैंक बनाने, ड्रिप-इरिगेशन लगाने, अच्छी मंडियां बनाने, फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए फैंसिंग लगाने के लिए अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। बगीचों में सिंचाई की सुविधा के लिए टैंक बनाने का काम जल शक्ति महकमा कर रहा है। बागवानी मंत्री इस पहल की सफलता को लेकर आश्वस्त है और नतीजे उम्मीद मुताबिक आएं तो हिमाचल की पहचान सिर्फ सेब राज्य की नहीं बल्कि फल राज्य की होगी। व्यापक सुधार को सरकार प्रतिबद्ध बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी का कहना है कि सरकार बागवानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और एचपीएमसी में हर स्तर पर व्यापक सुधार पर काम कर रही है l सरकार द्वारा नए प्लांट्स, नए सीए स्टोर्स बनाए जाएंगे l पुराने प्लांट्स को ठीक किया जाएगा व पराला में 100 करोड़ का एक नया प्लांट इस सीजन में तैयार किया जाएगा जिसकी क्रशिंग कैपेसिटी 22 टन प्रतिदिन होगी l वहीं एप्पल वाइन प्रोडक्शन पर भी फोकस किया जाएगा l जगत सिंह नेगी नई सोच और नए विजन के साथ आगे बढ़ने पर जोर दे रहे है और उनका मानना है कि एचपीएमसी के प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए l ताजा फलों की मार्केटिंग के अलावा एचपीएमसी की कार्यसूची में फ़ूड प्रोसेसिंग भी शामिल था। सरप्लस उत्पादन का जूस या अन्य उत्पाद बनाकर उसे मार्किट में बेचे जाने की दिशा में एचपीएमसी ने क्रांतिकारी कदम उठाया था। एक दौर था जब एचपीएमसी के फ्रूट जूस न केवल देशभर में लोकप्रिय थे बल्कि विदेशों में भी सप्लाई हो रहे थे। आज भी एचपीएमसी फ़ूड प्रोसेसिंग कर रहा है, लेकिन निसंदेह बीते दो दशक से इसका ग्राफ लगातार गिरा है। समय के साथ एचपीएमसी ने न टेक्नोलॉजी में सुधार किया और न ही मार्केटिंग तंत्र में। हालांकि आज भी एचपीएमसी एक प्रतिष्ठत ब्रांड है लेकिन लचर व्यवस्था के चलते काफी पीछे जरूर रह गया है।
हिमाचल विविधताओं का राज्य है। प्रदेश के बारह जिलो में पहन पोशाक से लेकर खानपान सब भिन्न है। हिमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहाँ हर कला को नजदीकी से देख सकते है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई चुनौतियाँ सामने होते हुए भी यहाँ के कला प्रेमियों का मनोबल डगमगाता नहीं है। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास में पर्यटन के साथ-साथ हस्तकरघा, और वस्त्र का भी बहुत बड़ा योगदान है। प्रदेश के कई दस्तकारों ने दशकों से हस्तशिल्प के समृद्ध रीति-रिवाजों को डिजाइन किया है, जो अद्वितीय हैं। यही वजह है कि उनके द्वारा बनाये गए उत्पादों की देश भर में डिमांड है। आइये जानते है हिमाचल के विभिन्न जिलों के मशहूर वस्त्र, कला और उनके इतिहास के बारे में... **पश्मीना शॉल पश्मीना शॉल की बुनाई में उपयोग किया जाने वाला ऊन लद्दाख में पाए जाने वाले पालतू चांगथांगी बकरियों से प्राप्त किया जाता है। बुनकरों द्वारा कच्चा पश्म को मध्यस्थों के माध्यम से खरीदा जाता है। इसके बाद कच्चे पश्म फाइबर को ठीक से साफ किया जाता है। तदोपरांत इस फाइबर को सुलझाते हैं और उसकी गुणवत्ता के आधार पर इसे अच्छी तरह से अलग करते हैं। फिर इसे हाथ से काता जाता है और ताने (कटाई की पिन )में स्थापित किया जाता है एवं हथकरघा पर रखा जाता है। इसके बाद तैयार धागे को हाथ से बुना जाता है और खूबसूरती से शानदार पश्मीना शॉल का निर्माण किया जाता है जो दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पश्मीना शॉल बुनाई की यह कला हिमाचल में एक परंपरा के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी से चली आ रही है। पश्मीना शॉल ने दुनिया भर के लोगों का ध्यान आकर्षित किया है और यह पूरी दुनिया में सबसे अधिक मांग वाले शॉल में से एक बन गई है। इसकी उच्च मांग ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दिया है। **लिंगचे: लिंगचे हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लाहुल स्पीति क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है। यह एक प्रकार का शॉल है लेकिन इसकी लम्बाई ज्यादा बड़ी नहीं होती है। लिंगचे हाथ से बुनी हुई शॉल है जिसे स्थानीय रूप से कंधे पर लपेटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी स्पीति की ग्रामीण महिलाओं द्वारा हाथ से करघे पर बुना जाता है। इसमें बुद्धिज्म से जुड़े हुए डिजाइंस देखने को मिलता है। **हिमाचली कालीन गलीचे और कालीन हिमाचल प्रदेश के हस्तशिल्प का एक महत्वपूर्ण तत्व हैं। हिमाचल में ऊन से बनी विभिन्न वस्तुएँ होम डेकोर में इस्तेमाल की जाती है। इनमें कालीन बेहद प्रसिद्ध है। ये कालीन सुंदर और असाधारण डिजाइनों के साथ सूक्ष्म रंगों, विभिन्न आकारों में बुनकरों द्वारा बनाया जाता हैं। डिजाइन से भरपूर ये कालीन बनावट में टिकाऊ होते हैं। कालीन को विभिन्न प्रकार के रूपांकनों से सजाया जाता है। इसमें ड्रैगन, हिंदू संस्कृति से प्रेरित स्वस्तिक, पुष्प, प्रकृति आधारित पैटर्न या तिब्बती पक्षी जिन्हें डाक, जीरा, ड्रेगन और बिजली के देवता आदि को धागों से डिजाइंस बना कर कालीन को खूबसूरती दी जाती है। सिरमौर जिले के पांवटा ब्लॉक के भूपपुर, पुरुवाला, सतौन और कंसन के विभिन्न गांवों में बड़ी संख्या में तिब्बती शिल्पकार ऊनी कालीन बुनते हैं। इसे बनाने के लिए बकरी के बाल और भेड़ की ऊन का उपयोग किया जाता है। **हिमाचली पट्टू हिमाचली टोपियों को हिमाचलियों का ताज कहा जाता है। हिमाचल टोपी स्थानीय लोगों की पोशाक,परिधान और वस्त्रों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन टोपी को तैयार करने के लिए जिस कपड़े का इस्तेमाल होता है उसे हिमाचल में पट्टू कहा जाता है। इसे हथकरघे पर बुना जाता है। पट्टी के कपड़े का उपयोग आमतौर पर बंद गले के कोट, पैंट, पायजामा, जैकेट बनाने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल स्थानीय लोग चोला यानी मेल गाउन बनाने में भी करते हैं। यह मेमने के पहले कतरन से प्राप्त ऊन से बनाया जाता है। **लोइया सिरमौर की समृद्ध संस्कृति एवं सभ्यता का परिचायक लोईया प्रदेश ही नहीं देश-विदेश में भी काफी प्रसिद्ध है। लोईया सिरमौर के ट्रांस गिरि क्षेत्र की पहचान और पारंपरिक वेशभूषा है, जिसे विशेषकर सर्दियों के दौरान इस क्षेत्र के लोग शौक से पहनते हैं। वही सिरमौर जिला में सामाजिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि को सम्मान के तौर पर लोईया भेंट करने की परंपरा आज भी जारी है। लोईया कश्मीर में पहने जाने वाली फेरन से मिलता जुलता है, लेकिन उसमें बाजू होते हैं। ग्रामीण लोईये का उपयोग कई प्रकार से करते हैं। उन्हें इससे सर्दियों में ठंड से राहत मिलती है और किसान बागवान जब कोई बोझ पीठ में उठाते हैं तो पीठ पर इसका दबाव भी कम पड़ता है। पारंपरिक तौर पर सर्दियों के मौसम में वस्त्रों के ऊपर पहना जाने वाला लोईया ऊन का बना होता है। आजकल यह अन्य ऊनी व सूती मिश्रित पट्टियों का भी बनाया जा रहा है। भेड़-बकरियों के पेशे से जुड़े अधिकांश लोग ऊन को स्वयं काता करते हैं और ग्रामीण स्तर पर ही स्थानीय बुनकरों से नौ ईंच चौड़ी पट्टी बुनवाई जाती है। उन पट्टियों को जोड़कर ही लोईया बनाया जाता है। **चम्बा की चप्पल चमड़े पर जरी और रेशम के धागे से महीन कारीगरी से तैयार चंबा चप्पल का डंका देश-विदेश में बजता है। चंबा चप्पल का इतिहास 500 साल पुराना बताया जाता है। जनश्रुति के अनुसार 16वीं शताब्दी में चंबा के राजा की पत्नी के दहेज में कारीगर चंबा लाए गए थे। ये कारीगर राज परिवार के लोगों के लिए चंबा चप्पल बनाते थे। समय के साथ-साथ कारीगर चंबा चप्पल लोगों के लिए भी बनाने और बेचने लगे। चंबा चप्पल के संरक्षण के लिए सरकार ने इसकी जीआई टैगिंग हासिल कर ली है। अब यह ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध है। लुप्त हो रही इस कला को बचाने के लिए आज भी लगभग सैंकड़ो कारीगर प्रयासरत हैं। **चम्बा का रुमाल : चंबा रुमाल अपनी अद्भुत कला और शानदार कशीदाकारी के लिए जाना जाता है। चंबा रुमाल की कारीगरी मलमल, सिल्क और कॉटन के कपड़ों पर की जाती है। श्री कृष्णलीला को बहुत ही सुंदर ढंग से रुमाल के ऊपर दोनों तरफ कढ़ाई करके उकेरा जाता है। महाभारत युद्ध, गीत गोविंद से लेकर कई मनमोहक दृश्यों को इसमें बड़ी संजीदगी के साथ बनाया जाता है। रुमाल बनाने में दो सप्ताह से दो महीने का समय लग जाता है। कीमत अधिक होने के कारण चंबा रुमाल को बेचना मुश्किल होता है। कहा जाता है कि 18वीं सदी में चंबा रुमाल तैयार करने का काम अधिक था। राजा उमेद सिंह (1748-64) ने कारीगरों को प्रोत्साहन दिया था। 1911 में दिल्ली दरबार में चंबा के राजा भूरी सिंह ने ब्रिटेन के राजा को चंबा रुमाल तोहफे में दिया था। 1965 में पहली बार चंबा रुमाल बनाने वाली महेश्वरी देवी को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। चंबा रुमाल का विकास राजा राज सिंह और रानी सारदा के समय सर्वाधिक हुआ। चंबा रुमाल को प्रोत्साहित करने के लिए चंबा के राजा उमेद सिंह ने रंगमहल की नींव रखी। चंबा रुमाल पर कुरुक्षेत्र युद्ध की लघु कृति जो विक्टोरिया अल्बर्ट संग्रहालय लंदन में सुरक्षित हैं। चंबा के शासक गोपाल सिंह ने 1873 ई. में ब्रिटिश सरकार को ये भेंट किया था। **कुल्लू के पूल कुल्लू का हस्तशिल्प दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहां की टोपी, शॉल, मफलर और जुराबों का हर कोई दीवाना है। कुछ समय से यहां की पारंपरिक पूलों की ओर भी लोग एकाएक आकर्षित हुए हैं। कुल्लू की स्थानीय बोली में इन चप्पलों को पूलें कहा जाता है। ये चप्पल आरामदेह होने के साथ-साथ पवित्र भी हैं। मंडी-कुल्लू में पूलों को भांग के रेशे के साथ-साथ जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है। भांग के पत्ते के तने के साथ ही ब्यूल के रेशों का भी इसे बनाने में इस्तेमाल होता है। इन्हें पवित्र माना जाता है। इन्हें पहनकर देव स्थल के भीतर जाने में कोई पाबंदी नहीं होती। इसी खासियत को जानकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल्लू की पूलों को काशी विश्वनाथ के पुजारियों, सेवादारों और सुरक्षाकर्मियों के लिए खड़ाऊ का बेहतरीन विकल्प माना। एक पूल का जोड़ा बनाने में तीन से चार दिन का समय लग जाता है। **नुमधा नुमधा गद्दे का स्थानीय नाम है, जो ऊन को बुनने के बजाय उसे फेल्ट कर बनाया जाता है। यह कम गुणवत्ता वाले ऊन को थोड़ी मात्रा में कपास के साथ मिलाकर तैयार किया जाता है। नमधा आमतौर पर सादे होते हैं या कशीदाकारी रंगीन डिजाइनों से सजाए जाते हैं। ये गद्दे 1.82 x 0.91 मीटर या 3.65 x 3.04 मीटर के विभिन्न आकारों में आते हैं। नुमधा की कीमत उसके आकार, ऊन की गुणवत्ता और पैटर्न पर निर्भर करती है। **गुदमा गुड़मा स्थानीय लोगों द्वारा बनाई जाने वाली भारी कंबल को कहा जाता है, जिसे विशेष रूप से कुल्लू, किन्नौर और लाहुल स्पीति और पांगी घाटी में बुना जाता है। यह ऊन से बना होता है जिसमें लंबे रेशे होते हैं। गुड़मा को प्राकृतिक ऊनी रंगों में बुना जाता है और लाल या काले रंग की सजावट के साथ तैयार किया जाता है।
सीएम सुक्खू के हनुमान कहे जाने वाले सीपीएस संजय अवस्थी की राजनैतिक कुशलता की झलक एक बार फिर देखने को मिली है। शिमला नगर निगम चुनाव में संजय अवस्थी को पार्टी ने पांच वार्डों का जिम्मा सौपा था और इनमें से चार में पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की है। इतना ही नहीं अवस्थी ने नगर निगम के कई अन्य वार्डों में भी पार्टी के लिए दिन रात काम किया, जिसका लाभ पार्टी को हुआ है। दरअसल शिमला में अर्की क्षेत्र के काफी लोग बसते है और संजय अवस्थी वर्त्तमान में लगातार दूसरी बार अर्की से विधायक है। अर्की में उनकी जमीनी पकड़ को लेकर कोई संशय नहीं है जिसका व्यापक लाभ पार्टी को शिमला नगर निगम चुनाव में भी हुआ है। दरअसल नगर निगम के 34 वार्डों में कांग्रेस के कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी सौंपी गयी थी जिनमे संजय अवस्थी को भी पांच वार्ड का प्रभार दिया गया था। समरहिल ,टूटू ,मझ्याट,बालूगंज और कच्चीघाटी वार्ड में संजय अवस्थी ने कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए धुआंधार प्रचार किया था। खुद मैदान में उतर कर अवस्थी ने कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए मोर्चा संभाला था नतीज़न टूटू ,मझ्याट,बालूगंज और कच्चीघाटी वार्ड में कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीत मिली। अर्की विधानसभा क्षेत्र में तो अवस्थी का प्रभाव दिखता ही है लेकिन शिमला नगर निगम चुनाव में भी अवस्थी का जादू खूब चला है। जाहिर है शिमला के इन चारों वार्डों में कोंग्रस की इस बेहतरीन परफॉरमेंस के लिए पूरा क्रेडिट सीपीएस संजय अवस्थी को जाता है जिन्होंने नगर निगम शिमला के चुनाव में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दशकों बाद नगर निगम शिमला में कांग्रेस काबिज़ हुई है।
26 अप्रैल 2022 को कांग्रेस हाईकमान ने प्रतिभा सिंह को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का 32वां अध्यक्ष बनाया था। तब से लेकर अब तक प्रतिभा सिंह और उनके नेतृत्व में कांग्रेस अपराजित रही है। नगर निगम शिमला चुनाव में मिली जीत के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के खाते में एक और जीत शामिल हो गई है। प्रतिभा सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से प्रदेश में कांग्रेस संगठन और अधिक संगठित हुआ है, जिसका असर चुनावों में भी देखने को मिला है। पहले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने शानदार जीत हासिल की और अब शिमला नगर निगम भी पार्टी की झोली में गया है। राजनैतिक विश्लेषक भी मानते है कि प्रतिभा सिंह को संगठन की कमान देना पार्टी का मास्टर स्ट्रोक था और इसके नतीजे अब सबके सामने है। छह बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह 1998 में सक्रिय राजनीति में आई थीं। पहला चुनाव मंडी संसदीय क्षेत्र से लड़ा था। 2004 के आम लोकसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी और वे पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुईं थी। फिर 2013 में मंडी संसदीय उपचुनाव हुआ तो प्रतिभा तीसरी बार मैदान में उतरी और दूसरी बार संसद सदस्य निर्वाचित हुई। इसके साल भर बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ था। मोदी लहर में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उन्हें 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। फिर वीरभद्र सिंह के निधन के बाद 2021 में करीब सात साल बाद प्रतिभा सिंह दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरी और मंडी उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को चारों खाने चित कर सांसद बनी। इसके बाद कांग्रेस से बतौर प्रदेश अध्यक्ष उनकी ताजपोशी हुई। बतौर प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और सत्ता में वापसी की। शिमला नगर निगम का चुनाव प्रतिभा सिंह की संगठनात्मक प्रतिभा का दूसरा इम्तिहान था और यहाँ भी वे सफल रही। होली लॉज का सियासी जलवा बरकरार : अरसे तक प्रदेश की सत्ता का केंद्र रहे होली लॉज का सियासी जलवा अब भी बरकरार है। प्रदेश कांग्रेस संगठन की कमान जहाँ प्रतिभा सिंह के हाथ में है, तो वहीँ उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री है। यानी होली लॉज की सियासी दमक कायम है।
'न भूतो न भविष्यते', मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में जो कांग्रेस ने नगर निगम शिमला के चुनाव में कर दिखाया, वो इतिहास बन गया है। 11 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने 34 में से 24 वार्डों में अपना परचम लहराया। आज से पहले कभी भी किसी राजनीतिक दल को नगर निगम शिमला में 24 सीटें नहीं मिली थी। वीरभद्र सिंह जैसे 'मास लीडर' भी जो कभी नहीं कर पाए, वो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कर दिखाया। शिमला नगर निगम के चुनाव नतीजों के बाद इस जीत का श्रेय सभी मुख्यमंत्री को दे रहे है। इसी नगर निगम से सुक्खू ने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा था और निसंदेह शिमला वासी भी सीएम सुक्खू को अपना मानते है। ये सुक्खू की राजनैतिक सूझबुझ, उनका जमीनी अनुभव और अनूठी कार्यशैली का ही नतीजा है कि कांग्रेस को शिमला नगर निगम में ग्रैंड विक्ट्री मिली है। छात्र राजनीति से निकल कर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने वाले सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक लम्बी राजनीतिक दूरी तय की है। एक आम कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री बनने का उनका सफर और अनुभव निसंदेह कांग्रेस के लिए पूंजी है। सुक्खू प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे है और सियासत के सभी दाव पेंचो में निपुण माने जाते है। इसकी झलक शिमला नगर निगम चुनाव में भी दिखी जहाँ कांग्रेस हर रणनीतिक मोर्चे पर भाजपा से इक्कीस दिखी। चाहे क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से नेताओं को प्रभार देने का निर्णय हो या खुद प्रचार को रफ़्तार देने का जिम्मा उठाना, सुक्खू हर मोर्चे पर हिट रहे और भाजपा चारों खाने चित हो गई। शिमला नगर निगम के चुनाव को मिनी विधानसभा का चुनाव भी कहा जाता है। दरअसल शिमला में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से लोग बसते है। साल 2017 में हुए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने सिर्फ 13 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा ने 17 सीटों पर कब्जा जमाया था। सुखविंदर सिंह सुक्खू के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में यह पहला चुनाव था। सुक्खू भी प्रचार में उतरे थे और इस चुनाव को उनकी प्रतिष्ठा से जोड़ा जा रहा था। इस बार कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल करते हुए 24 सीटें जीती हैं। ज़ाहिर है ये कांग्रेस की रणनीति का कमाल है। प्रदेश में सुक्खू सरकार बनने के पांच महीने के भीतर हुए इस चुनाव के नतीजे बयां करते है कि जनता का सुक्खू सरकार पर भरोसा बरकरार है। खुद सीएम सुक्खू भी इसे सरकार की नीतियों की जीत मानते है। चाहे सुखाश्रय कोष की स्थापना जैसी मानवता से परिपूर्ण पहल हो या ओपीएस सहित कर्मचारियों को मिली सौगातें, अपने फैसलों से सुक्खू सरकार लगातार जनता के बीच लोकप्रिय भी हुई है और मजबूत भी। बहरहाल अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मिली ये जीत कांग्रेस में नया जोश भरने वाली है। जीत की पटरी पर लौटी कांग्रेस को उम्मीद है कि 2024 में भी पार्टी बेहतर करेगी।
शनिवार की रात बारिश के कारण विधानसभा क्षेत्र आपके कई इलाकों में काफी नुकसान देखने को मिला है। आंधी के कारण सड़क पर कई जगह पेड़ भी गिरे हैं, जिसके कारण लोगों का संपर्क टूट गया है। शाहपुर के चमड़ेरा में आसमानी बिजली गिरने से 9 बकरियों की मौत हो गई है, जिसके कारण मालिक को हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। जानकारी के अनुसार शनिवार की शाम शाहपुर की ग्राम पंचायत क्यारी के गांव चमडेरा में बिजली गिरने से मचला राम की 9 बकरियां मर गई हैं। मचला राम ने बताया कि उसने शाम को बकरियों को ओढ़े में रखा था। शाम 7 बजे बिजली गिरने से उसकी बकरियों की मौत हो गई। उसने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। वहीं विधानसभा क्षेत्र शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया प्रशासन को नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं।
मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी ने कहा कि अर्की विधानसभा क्षेत्र में विकास का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने अपने पहले वर्ष में ही 102 विभिन्न सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। संजय अवस्थी आज सोलन जिला की अर्की विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मटूली एवं साथ लगती ग्राम पंचायतों की जनता द्वारा आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। अवस्थी ने कहा कि स्वीकृत 102 सड़क परियोजनाओं के अंतर्गत अर्की विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न मार्गों का कायाकल्प किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वीकृत परियोजनाओं में आवश्यकता अनुसार नई सड़कों एवं सम्पर्क मार्गों का निर्माण भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत करते हुए अर्की विधानसभा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि रामशहर-छियाछी-मटूली-दिग्गल-कुनिहार-शिमला सड़क का सुधार कार्य शीघ्र आरंभ किया जाएगा। संजय अवस्थी ने मटूली में विभिन्न मांगों को पूरा करने के लिए 4 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की विभिन्न विकास परक योजनाओं को चरणबद्ध आधार पर पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को शीघ्र उसका निष्पादन करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर खण्ड कांग्रेस अर्की के अध्यक्ष सतीश कश्यप, कांग्रेस के ज़िला महासचिव एनडी शास्त्री, ग्राम पंचायत मटूली के प्रधान कमल किशोर, ग्राम पंचायत रामशहर की प्रधान कृष्णा देवी, ग्राम पंचायत चमदार के प्रधान कर्म चंद, ग्राम पंचायत दिग्गल के प्रधान पवन कुमार कौशल, ग्राम पंचायत बायला की प्रधान अर्चना कौशल, खंड अर्की के कोषाध्यक्ष रोशन वर्मा, युवा कांग्रेस के नेता हेमन्त वर्मा, बीडीसी सदस्य सुषमा देवी, व्यापार मण्डल मटूली के प्रधान संजीव कौशल, ग्राम पंचायत मटूली के पूर्व प्रधान श्याम लाल एवं देवी शरण, बूथ सचिव एवं वरिष्ठ नेता रामभज, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी, पूर्व बीडीसी सदस्य, उपमण्डलाधिकारी नालागढ़ दिव्यांशु सिंघल, वार्ड सदस्य कमला देवी, दीप राम शर्मा, रोशन लाल शर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
देश के समुद्री क्षेत्र से लेकर हिमालय से निकलने वाली नदियों में मत्स्य पालन की अपार संभावनाएं हैं। जैव विविधता के दृष्टिगत मत्स्य क्षेत्र में रोजगार व स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। यह क्षेत्र लोगों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हिमाचल प्रदेश को ग्लेशियरों से निकलने वाली नदियों का आशीर्वाद प्राप्त है। ये नदियां पहाड़ी और अर्ध-मैदानी क्षेत्रों को समृद्ध करती हैं। प्रदेश में बहने वाली बारहमासी नदियों ब्यास, सतलुज और रावी में कई धाराएं और कई सहायक नदियां समाहित होती हैं। ये नदियां शिजोथोरैक्स, गोल्डन महसीर और विदेशी ट्राउट जैसी ठंडे पानी की मछलियों की कई प्रजातियों की आश्रय स्थली हैं। प्रदेश में महत्वाकांक्षी इंडो-नॉरविजियन ट्राउट पालन परियोजना के सफल कार्यान्वयन ने विकसित तकनीकों के उपयोग से प्रदेश के लोगों की जल संसाधनों के उपयोग में रूचि पैदा की हैै। गोबिंद सागर और पौंग बांध, चमेरा और रणजीत सागर बांध में महत्वपूर्ण मछली प्रजातियां के पालन और उत्पादन से स्थानीय लोगों को अपनी आर्थिकी सुदृढ़ करने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में मछली पालन की अपार संभावनाओं के दृष्टिगत प्रदेश सरकार राज्य में मत्स्य पालन और इससे संबंधित व्यवसायों को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है और इस दिशा में कई योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। राज्य में मत्स्य पालन से जुड़े किसानों एवं अन्य व्यक्तियों के प्रशिक्षण की सुविधा हेतु जिला ऊना के गगरेट में 5 करोड़ रुपये की लागत से कार्प फार्म स्थापित किया जायेगा। इस केंद्र में हर साल 600 मछुआरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। राज्य के मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले नदी की मछलियों पर आश्रित मछुआरों को 1000 फैंकवा जाल उपदान पर प्रदान किए जाएंगे। राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार ने 11.26 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इस राशि का उपयोग प्रदेश में मत्स्य पालन से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा प्रदान करने के लिए किया जाएगा। प्रदेश सरकार राज्य में मत्स्य पालन के माध्यम से इससे जुड़े लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन प्रदान कर रही हैं।
एसडीएम अंब विवेक महाजन ने रविवार को शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए की गयी व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया। पैदल ही व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंचे एसडीएम ने मेन बाजार में जल शक्ति विभाग द्वारा पाइप डालने के लिए की जा रही सड़क की खुदाई के काम को बंद करवाने के आदेश दिए। बताते चलें कि रविवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ रहने के कारण कई बार व्यवस्थाएं बिगड़ जाती थीं, जिस कारण एसडीएम अंब ने खुद भीड़ में सारी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने गेट नंबर एक गेट नंबर दो के साथ श्रद्धालुओं की लाइन व्यवस्था को भी जांचा। उन्होंने चोर रास्तों का भी निरीक्षण किया तो पाया कि दुकानदार प्रशासन को व्यवस्था बनाने में पूरा सहयोग दे रहे हैं और कहीं से चोर रास्तों से श्रदालुओं की एंट्री नहीं हो रही है। एसडीएम मंदिर अधिकारी को साफ दिशा-निर्देश दिए कि रविवार को मंदिर स्टाफ का कोई अधिकारी छुट्टी नहीं करेगा, बल्कि भीड़ में व्यवस्थाएं बनाने में अपना सहयोग देगा। एसडीएम ने लाइनों में लगे श्रद्धालुओं से उनके सुझाव भी जाने और मंदिर अधिकारी को श्रद्धालुओं को लाइनों में पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए भी कहा। इन इस दौरान मंदिर अधिकारी बलबंत पटियाल, सिक्योरिटी अफसर कर्नल मुनीश कुमार और एसपीसी सुरेश कुमार के साथ हवलदार शिव दयाल शर्मा मौजूद रहे। एसडीएम ने बताया कि रविवार होने के कारण मंदिर में ज्यादा भीड़ रहती है, जिस कारण श्रद्धालुओं को कोई परेशानी तो नहीं आ रही है और होमगार्ड अपनी ड्यूटी सही तरीके से कर रहे हैं, इन सबका निरीक्षण किया गया है। जहां पर भी कोई कमी नजर आई तो उसे पूरा करने के आदेश दिए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर के राजौरी में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए जवान अरविंद कुमार का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बालकोट के शमशान घाट में किया गया। वे अपने पीछे माता, पिता, पत्नी और दो बेटियां छोड़ गए हैं। शहीद को कृषि मंत्री चंद्र कुमार, मुख्य संसदीय सचिव आशीष बुटेल, सुलाह के विधायक विपिन सिंह परमार, हिमाचल प्रदेश कृषि विकास बैंक के अध्यक्ष संजय चौहान, पूर्व विधायक जगजीवन पॉल, उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल, एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में प्रदेश सरकार शहीद अरविंद कुमार के परिवार के साथ है। उन्होंने सरकार की ओर से हर संभव सहयोग की बात कही। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा शहीद की पत्नी को सरकारी क्षेत्र में नौकरी देने का आश्वासन दिया और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मरुंह का नामांकरण शहीद अरविंद के नाम पर करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से राहत के रूप में 5 लाख परिवार को एसडीएम के माध्यम से उपलब्ध करवा दिया गया है।
आज सुबह तेज आंधी के चलते एनएच चंडीगढ़-देहरादून पर माजरा के पास सड़क किनारे खड़ा पेड़ हाईवे पर गिर पड़ा। गनीमत यह रही कि कोई वाहन या व्यक्ति सड़क पर नहीं था, अन्यथा कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। हालांकि बिजली की तारों और खंभों पर पेड़ गिरने से बिजली विभाग को काफी नुकसान हुआ है। मौके पर बिजली विभाग के कर्मचारी तारों और खंभों की मरम्मत करने में जुट गए हैं।
मंडी जिला के करसोग कस्बे के साथ लगती ग्राम पंचायत ममेल ने पंचायत क्षेत्र में युवाओं व पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट बना कर पंचायत को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का प्रयास किया है। पंचायत द्वारा आई लव ममेल के नाम से भ्याल गांव में यह सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है। करसोग ब्लाॅक में पंचायत क्षेत्र में सेल्फी प्वाइंट बनाने वाली ममेल पहली पंचायत है। पंचायत द्वारा जिस स्थान पर यह सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है, वह स्थल करसोग क्षेत्र के अराध्य देव ममलेश्वर महादेव की बैठक स्थली भी है। पंचायत प्रधान नारायण सिंह ठाकुर का कहना है कि पंचायत ने देवता के इस पवित्र स्थल को पंचवटी पार्क के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया, जिसके तहत सबसे पहले यहां स्थित प्राचीन वाबड़ी का जीर्णोद्धार कर इसे पुनः विकसित किया गया। यहां पर एक भव्य पार्क भी बनाया जा रहा है, जिसे पंचवटी पार्क का नाम दिया गया है। ममेल नगर पंचायत करसोग के साथ लगती पंचायत है। पंचायत क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। पंचायत में लोगों की सुविधा के लिए रास्तों को पक्का बनाया जा रहा है और अन्य विभिन्न प्रकार की मूलभूूत सुविधाएं भी लोगों की जरूरतों के अनुसार उपलब्ध करवाई जा रही हैं। पंचायत प्रधान का कहना है कि पंचायत को एक आदर्श पंचायत के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं सहायक आयुक्त विकास एवं बीडीओ करसोग अमित कल्थाईक का कहना है कि ग्राम पंचायतें युवा वर्ग की उम्मीदों, बच्चों व बुजुर्गों की आवश्यकताओं के अनुसार कार्य कर, उन्हें विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवा रही हैं। गांव में अब पार्कों का निर्माण करने के साथ-साथ गांव को पर्यटन गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है। शहरों की तर्ज पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाए जा रहे हैं। ममेल पंचायत द्वारा पंचवटी पार्क में सेल्फी प्वाइंट बनाना पंचायत की एक अच्छी पहल है। ग्राम ममेल पंचायत गांव में सेल्फी प्वाइंट बनाने वाली करसोग ब्लाॅक की पहली पंचायत है।
शनिवार रात कांगड़ा जिला में आए तूफान ने भारी तांडव मचाया। तेज तूफान से जगह-जगह पेड़ गिर गए हैं, जिसके चलते जिला के अधिकांश इलाकों में बिजली की आपूर्ती भी बाधित हुई। वहीं, धर्मशाला पुलिस मैदान में हो रहे विरासत कार्यक्रम के मंच को भी तूफान उड़ा ले गया। तूफान के चलते पुलिस मैदान में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला, लोग जान बचाने के लिए यहां-वहां भागने लगे। गनीमत रही की किसी भी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है।
उद्योग, संसदीय मामले एवं आयुष मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज अपने सिरमौर प्रवास के दौरान पौंटा साहिब, कफोटा व शिलाई में जनसमस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकांश मामलों का मौके पर ही निपटारा किया और अन्य मामलों को निपटाने के लिए सम्बंधित विभागो के अधिकारियों को निर्देश दिए। उद्योग मंत्री ने अधिकारियों को समय पर जनता के कार्यों को निपटाने के निर्देश दिए ताकि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ जनता को मिल सके। इस दौरान कमरऊ के देवला गांव में कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता 85 वर्षीय जालम सिंह फौजी का कुशलक्षेम जाना। इस मौके पर सीता राम शर्मा कांग्रेस अध्यक्ष शिलाई, भारत भूषण मोहिल निदेशक राज्य को-ऑपरेटिव बैंक, जगत सिंह पुंडीर पूर्व जिला परिषद सदस्य, मस्तराम पराशर पूर्व पंचायत समिति अध्यक्ष, प्रताप जेलदार जिला परिषद सदस्य, रणजीत सिंह नेगी जिला परिषद सदस्य, रमेश नेगी बीडीसी सदस्य, अत्तर राणा महासचिव कांग्रेस मंडल, कांग्रेस मीडिया प्रभारी टिंकू जिंटा, एसडीएम शिलाई सुरेश सिंघा, एसडीएम कफोटा राजेश वर्मा, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जसवां-परागपुर के अंतर्गत पड़ते ग्राम पंचायत कडोआ के चुटाल गांव में गैस सिलेंडर में आग लगने से भारी नुकसान होने का मामला प्रकाश में आया है। गांव के अशोक कुमार पुत्र प्रीतम चंद के घर में आग लगने से लाखों का नुकसान हुआ है। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड देहरा और चिंतपूर्णी को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। घर में लड़की की शादी की धाम चल रही थी कि इसी बीच अचानक सिलेंडर फटने से घर में रखा सारा राशन आग की चपेट में आने से धूं-धूंकर जल गया। पीड़ित परिवार के घर कल बारात आनी थी। जानकारी के मुताबिक शनिवार दोपहर को यह घटना हुई। पंचायत प्रधान रीना कुमारी ने बताया कि इस घटना में परिवार का लगभग 2 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। प्रधान ने प्रशासन से मांग की है कि इस परिवार की हर संभव मदद की जाए। वहीं, जानकारी मिलते ही प्रशासन के अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए। नुकसान का जायजा भी लिया जा रहा है।
शिमला नगर निगम चुनाव में मिली जीत पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने शिमला शहर और प्रदेश की जनता आभार जताया और चुनावों में मिली जीत का श्रेय शिमला के लोगों को दिया। विक्रमादित्य सिंह ने सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि शिमला शहर की जनता ने बहुत बड़ा जनमत कांग्रेस पार्टी को दिया है। यह चुनाव कांग्रेस पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह की अध्यक्षता में लड़े गए और प्रदेश में 4 महीने की कांग्रेस सरकार में जो कार्य हुए हैं, उस पर शिमला शहर की जनता ने मुहर लगाई है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस बार निगम के सदन में 34 में से 21 महिलाएं पार्षद के रूप में पहुंची हैं, जिसमें 14 महिला पार्षद कांग्रेस की जीत कर आई हैं। इसके अलावा भाजपा की भी महिला पार्षद जीती हैं। महिलाओं की नगर निगम में काफी संख्या है। ऐसे में महिलाओं को नगर निगम में बड़ा पद मिले, इसके लिए वे पैरवी करेंगे। प्रियंका वाड्रा हमेशा ही महिलाओं की भागीदारी मिले, इसकी पैरवी करती आई हैं। ऐसे में नगर निगम में महापौर उप महापौर में महिला को भी प्राथमिकता मिले, इसको लेकर भी पार्टी के समक्ष रखा जाएगा। जल्द ही मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की नगर निगम के महापौर उप महापौर को लेकर बैठक होगी। उन्होंने कहा कि चुनावों के बाद अब दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निगम के तहत चल रहे सभी कार्यों को गति देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिमला में पानी की सुचारू आपूर्ति, पार्किंग जैसी समस्यों का निदान करना प्राथमिकता रहेगी। शिमला शहर के लिए जो भी पेयजल परियोजनाओं का कार्य शुरू हुआ हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाएगा, ताकि शहर में पानी की समस्या खत्म हो सके। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के तहत जो भी कार्य चल रहे है उन्हें गति देने का प्रयास करेंगे। सेब सीजन की तैयारियों को लेकर पूछे गए सवाल पर विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बागवानी और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तैयारियां करने के निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि बागवानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
शिमला नगर निगम के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के 9 चेहरे ही पार्टी की लाज को बचा पाए हैं। ऐसे में पार्टी लगातार 3 चुनाव हारी है और जिस प्रकार से स नगर निगम के चुनाव को पार्टी हारी इसमें दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के नेता चुनाव में मतदाता को सरकार द्वारा प्रभावित करने, ईवीएम बदलने, मतदाता अधिक संख्या में बनाने को लेकर के आरोप भी लगा रहे हैं और यह साफ कह रहै हैं कि यह सही माइंडेड नहीं है। कसुम्पटी वार्ड 27 से भारतीय जनता पार्टी के लिए चमत्कार करते हुए बड़े मार्जन से सीट को जीतने वाली प्रत्याशी रचना झीना शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने वास्तव में जितने काम करवाएं, उतने काम कभी नहीं हो सकते। 65 करोड रुपए शिमला के विकास पर खर्च किए हैं, अनेक ऐतिहासिक काम हो रहे हैं। इस बात को जनता भी मानती है । उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से सरकार का प्रभाव नतीजों पर पड़ा है और पार्टी हाईकमान इस पर अपनी बात रख रहा है। उन्होंने कि पार्टी हाईकमान ने मुझ पर भरोसा जताया व कार्यकर्ताओं के सहयोग से हमने सीट जीती है। अब हमारा एजेंडा विकास है,सामाजिक विषयों पर जागरूकता करना है, नशे पर प्रहार करेंगे, मेडिकल कैंप लगाएंगे, विकास की बात करेंगे, विकास को आगे बढ़ाएंगे और जनता की दुख तकलीफ को कम करेंगे, कसुम्पटी को आदर्श वार्ड बनाएंगे, वार्ड का हक़ नगर निगम से लेकर रहेंगे। जनता की जरूरत व राय से विकास के कार्य करेंगे। रचना शर्मा ने कहा कि अभी भी अनेक ऐसे कार्य हैं जो किए जाने हैं, इसके लिए समय तय कर दिया जायेगा। नगर निगम में बजट इन कार्यों को मिले और जनता को राहत मिले इसका प्रयास किया जाएगा।
सोलन में 8 मई को विश्व रेडक्रॉस दिवस का शुभारंभ फल वितरण एवं जागरूकता रैली के साथ होगा। यह जानकारी आज यहां उपायुक्त सोलन एवं जिला रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने दी। मनमोहन शर्मा ने कहा कि इस वर्ष विश्व रेडक्रॉस दिवस का आयोजन राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय विषयों के साथ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दिवस पर जहां 'ड्रग फ्री हिमाचल' विषय के साथ विशेष रूप से युवा पीढ़ी को विभिन्न मादक द्रव्यों से दूर रहने की दिशा में जागरूक किया जा रहा है, वहीं 'एवरीथिंग वी डू क्मज फ्रॉम द हार्ट' विषय के माध्यम से जन-जन को मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने का संदेश दिया जा रहा है। ज़िला रेडक्रॉस समिति के अध्यक्ष ने कहा कि विश्व रेडक्रॉस दिवस का शुभारंभ क्षेत्रीय अस्पताल सोलन एवं कुष्ठ रोग निवारण अस्पताल लोहांजी में फल वितरण के साथ किया जाएगा। इसके बाद पुराना उपायुक्त कार्यालय सोलन से प्रात: 11.00 बजे से एक जागरूकता रैली आयोजित की जाएगी। यह जागरूकता रैली लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह तक आयोजित होगी। रैली का उद्देश्य लोगों को रेडक्रॉस समिति के कार्यों से अवगत करवाना है। उन्होंने कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा में रेडक्रॉस समिति सराहनीय कार्य कर रही है। समिति का उद्देश्य जन-जन को रेडक्रॉस की गतिविधियों में सम्मिलित करना है, ताकि आपदा अथवा दुर्घटना के समय पीड़ित तक त्वरित सहायता पहुंच सके।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि शिमला नगर निगम चुनावों में लोकतंत्र की हत्या की गई है। जब चुनाव शुरू हुए थे तब लगभग 73000 मतदाता शिमला नगर निगम की सूची में सूचीबद्ध थे। उसके बाद ये बढ़कर लगभग 93000 हो गए। इसके मुताबिक कांग्रेस पार्टी में नगर निगम चुनाव लड़ने के लिए लगभग 20000 वोट बढ़ाए। इन वोटों की तादाद बढ़ने से नगर निगम चुनाव के परिणामों पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू हाल ही में विधानसभा का चुनाव लड़े और उसके उपरांत उन्होंने नगर निगम शिमला में अपना वोट शिफ्ट कर लिया। यह लोकतंत्र की प्रक्रिया के खिलाफ है। 6 महीने के अंतराल में कोई भी व्यक्ति अपना वोट विधानसभा क्षेत्र से बदल नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक नेता द्वारा आज प्रेस वार्ता की गई, जिसमें उन्होंने निरंतर यह कहा कि नगर निगम शिमला का विकास तभी होगा जब केंद्र सरकार अपना निरंतर योगदान शिमला शहर के लिए देती रहेगी। जब नगर निगम शिमला केंद्र सरकार की ग्रांट पर ही चलनी है तो नरेंद्र मोदी के चित्र से कांग्रेस पार्टी को क्या आपत्ति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी हिमाचल प्रदेश के लिए कमी नहीं रखी है। चाहे वह पीजीआई सैटलाइट सेंटर हो, बल्क ड्रग पार्क हो, एम्स हो या अन्य करोड़ों के प्रोजेक्ट हो। यहां तक की सुन्नी क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट के लिए भी केंद्र सरकार ने कांग्रेस कार्यकाल के समय ही पैसा उपलब्ध करवाया है।
हिमाचल प्रदेश अपनी विभिन्न कलाओं तथा अभिभूत कर देने वाले हस्तशिल्प उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है। राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के हस्तशिल्प तथा हथकरघा उत्पादों को एक नए ब्रांड के रूप में वैश्विक बाजार में पहचान दिलाने तथा 'हिम-क्राफ्ट' को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए विपणन रणनीति विकसित करने पर विचार कर रही है। इससे राज्य तथा यहां के कारीगरों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। वर्तमान प्रदेश सरकार हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम, सीमित को एक नई पहचान प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठा रही है जिसके तहत राज्य के हथकरघा तथा हस्तशिल्प उत्पादों को अब 'हिम-क्राफ्ट' के ब्रांड नाम से जाना जाएगा। इस पहल से जहां कारीगरों को उनके हुनर के अनुसार उचित दाम मिलेंगे, वहीं प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आधुनिक बाजार में ब्रांडिंग तथा विपणन बेहद आवश्यक हैं। इसी के दृष्टिगत प्रदेश के कारीगरों तथा बुनकरों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प व हथकरघा उत्पादों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए 'हिम-क्राफ्ट' ब्रांड सहायक सिद्ध होगा। इन उत्पादों को एक ब्रांड के बतौर सृजित करने से जहां लोगों का इन पर विश्वास और बढ़ेगा, वहीं उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की मांग भी बढ़ेगी। यह ब्रांड नाम हथकरघा तथा हस्तशिल्प उत्पादों को एकीकृत रूप से बाजार में प्रस्तुत एवं स्थापित करने में भी मदद करेगा। इसके प्रचार के लिए भी व्यापक रणनीति बनाई गई है और व्यावसायिक कार्ड, लैटरहेड ई-मेल हस्ताक्षर तथा आधिकारिक वेबसाइट सहित सभी आधिकारिक दस्तावेजों में यह ब्रांड प्रदर्शित किया जाएगा। घरेलू तथा वैश्विक बाजार में प्रदेश के कारीगरों द्वारा तैयार हस्तशिल्प तथा हथकरघा उत्पादों की बहुत मांग है। 'हिम-क्राफ्ट' द्वारा जी-20 सम्मेलन के प्रतिनिधियों को उपहारस्वरूप प्रदान करने के लिए तैयार किए गए उत्पादों की खूब सराहना की गई। हाल ही में जनता के लिए खोले गए मशोबरा स्थित ''हिम-क्राफ्ट' में भी प्रदेश के ऐसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। हस्तशिल्प और हथकरघा हिमाचली संस्कृति का एक अभिन्न अंग हैं और इसमें प्रदेश के समृद्ध इतिहास की झलक दिखाई देती है। राज्य में बुनाई, कढ़ाई, लकड़ी पर नक्काशी, धातु के कार्य, मिट्टी के बर्तन आदि की समृद्ध परंपरा रही है और यह पारंपरिक हस्तशिल्प पीढ़ियों से चले आ रहे हैं। इनमें आधुनिक तकनीकों और डिजाइनों को शामिल कर हस्तशिल्पों का समय के साथ सतत विकास हुआ है। राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर इनके प्रचार व बाजार सहभागिता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बेहतर विपणन रणनीति और ब्रांड नाम उपयोगी हो सकता है।
राज्य सरकार वर्ष 2025 तक हिमाचल प्रदेश से क्षयरोग उन्मूलन के लिए कृत संकल्पित है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क्षेत्रीय अस्पताल किन्नौर जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मुक्त भारत अभियान को हासिल करने के लिए किन्नौर जिले के तीनों खंडों में एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान चलाया है। किन्नौर जिले के सभी तीन खंडों में 89,271 व्यक्ति हैं और 85,294 व्यक्तियों की एसीएफ में क्षय रोग की जांच की गई है, जिनमें से 546 संभावित मामलों की फील्ड एक्टिव केस फाइंडिंग में पहचान की गई है और लगभग 7 मामलों का फील्ड एसीएफ में पहचान की गई है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लदरौर में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध, सूखा कचरा प्रबंधन, गीला कचरा प्रबंधन व इलेक्ट्रॉनिक कचरा प्रबंधन पर एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में स्कूल के बच्चों, अध्यापकों, अभिभावकों व समिति सदस्यों ने भाग लिया। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में नेरी शोध संस्थान से डॉ शिवानी चौहान व डॉ. वंदना ने सभी उपस्थित सदस्यों को कचरे से होने वाली बीमारियों व कचरा प्रबंधन पर जानकारी दी। कार्यशाला में मुख्य रूप से ठोस व तरल कचरे को कैसे अलग करें, इलेक्ट्रॉनिक कचरे का निपटान कैसे करें व जैविक खाद बनाने की तकनीक आदि विषयों पर जानकारी उपलब्ध करवाई गई। कार्यशाला में जिला विज्ञान पर्यवेक्षक राजेश गौतम ने भी उपस्थित रह कर कार्यशाला का निरीक्षण किया। स्कूल प्रधानाचार्य राज कुमारी ने इको क्लब प्रभारी मुनीष कुमार व स्टाफ सदस्यों में राकेश कुमार व अरुण शर्मा का कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद किया। इस कार्यशाला में गणमान्य व्यक्तियों में लाल सिंह, रविंद्र कुमार, पवन कुमार व समिति प्रधान बाबू खान भी उपस्थित रहे।
सिरमौर जिला के हरिपुरधार में आयोजित 3 दिवसीय मां भंगायनी मेला हरिपुरधार का समापन शुक्रवार को हो गया। मेले का समापन डीसी सुमित खिमटा ने बतौर मुख्य अतिथि किया। पूर्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी सचिव बृजराज ठाकुर ने मेले के समापन समारोह में CM के यहां न आने का कारण उनका कर्नाटक चुनाव प्रचार में जाना बताया और जल्द उनका क्षेत्र का दौरा करवाने का भरोसा दिया। 3 दिवसीय इस मेले का शुभारंभ SDM संगड़ाह का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे उपमंडलाधिकारी सराहं संजीव धीमान द्वारा 3 मई को किया गया था। इससे पूर्व मेला कमेटी हरिपुरधार के अध्यक्ष आरएस राणा के नेतृत्व में जिलाधीश का ढोल-नगाड़ों व फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया गया। मेला कमेटी ने मुख्य अतिथि को टोपी-शॉल व डांगरे से किया सम्मानित मेला कमेटी ने मुख्य अतिथि को टोपी-शॉल व डांगरे से सम्मानित किया। इस अवसर पर स्थानीय वरिष्ठ मेला कमेटी सदस्य सहीराम चौहान, बृजराज ठाकुर, मेला राम शर्मा, दिलीप सिंह चौहान,ओपी ठाकुर सचिव युवा कांग्रेस हिमाचल प्रदेश व उपमंडल स्तर के प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदेश सरकार द्वारा तंबाकू पदार्थों पर टैक्स को 3 रुपये से बढ़ाकर 4.50 रुपये करना एक सराहनीय कदम है। नाडा इंडिया फाउंडेशन ने सरकार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश कैबिनेट में लिया गया यह निर्णय हिमाचल सरकार की युवाओं के प्रति चिंता और स्वास्थ्य की प्रमुखता को दर्शाता है। नाडा इंडिया फाउंडेशन के हिमाचल प्रदेश के स्टेट को-ऑर्डिनेटर मंगल सिंह ने कहा कि फाउंडेशन सरकार के इस फैसले का स्वागत करती है और सरकार से यह भी आशा रखती है कि सरकार आने वाले समय में तंबाकू नियमों में राज्य स्तर पर संशोधन और कर की मात्रा बढ़ाने के लिए अग्रसर रहेगी। नाडा इंडिया फाउंडेशन के चंबा से सदस्य तपिश चंद्र ने कहा कि तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाना एक सराहनीय कदम है। युवाओं को जो तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, उन पर रोक लगाने के लिए सरकार का यह एक बेहतरीन प्रयास है। यह फैसला प्रदेश के युवाओं के स्वास्थ्य के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। वहीं, नाडा इंडिया फाउंडेशन से जुड़ी एचपीयू की छात्रा रीत वर्मा ने बताया कि जब उन्होंने नाडा यंग इंडिया कैंपेन के माध्यम से युवाओं को जागरूक व धरातल स्तर पर आवाज उठाना शुरू किया था, उस समय यह लग रहा था कि शायद जीएसटी काउंसिल में ही इन उत्पादों को बढ़ाया जाएगा। परंतु विभाग के साथ मिलकर और समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आज सरकार का हम धन्यवाद करते हैं कि वह युवाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रख रही है। कर में बढ़ोतरी करने से सरकार के रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी होगी। वहीं, नाडा इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन सुनील बत्स्यान ने बताया स्वास्थ्य ही मनुष्य का सर्वोपरि सहारा है। इस तरह के फैसले लेकर सरकार युवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाती नजर आ रही है। तंबाकू पदार्थों पर कर बढ़ने से राज्य के राजस्व को बढ़ाने की भी यह एक अच्छी पहल है और कर के साथ-साथ युवाओं की सेहत को बचाने के लिए भी सरकार द्वारा यह निर्णय सराहनीय है। नाडा यंग इंडिया ने समय-समय पर सरकार को युवाओं के माध्यम से कर बढ़ाने के लिए प्रयास किया है, जो आगामी समय में 1 मील का पत्थर साबित होगा।
चंबा वेलफेयर एसोसिएशन की मासिक बैठक में शहर की समस्याओं पर मंथन किया गया। बैठक प्रधान ओम प्रकाश की अध्यक्षता में की गई। प्रधान ओम प्रकाश ने पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा की लचर व्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्रीय अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा दिया गया था तो लोगों को उम्मीद थी कि यहां पर उचित स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को मिलेंगी, लेकिन अब तक इन उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। स्टाफ के विभिन्न पद रिक्त होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज से चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों के के तबादलों का सिलसिला जारी है। यदि यही हालात रहे तो मेडिकल कॉलेज चंबा बंद हो जाएगा। इसके अतिरिक्त पठानकोट- भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति पर भी रोष जताया गया। उन्होंने कहा कि मार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन हो रहे हैं और इस मार्ग पर सफर करना खतरे से खाली नहीं है। किसी भी समय व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो सकता है। बैठक में नगर परिषद से चौगान नंबर- 5 के सौंदर्यीकरण को लेकर उचित कदम उठाने और अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने की मांग भी की गई। बैठक में वरिष्ठ उपप्रधान ईश्वरी प्रसाद, महासचिव सुरेश कश्मीरी, उपप्रधान विजय नैय्यर, प्रवक्ता एस पी वैद, प्रेस सचिव चैन लाल शर्मा सहित कई अन्य मौजूद रहे।
स्वास्थ्य खंड नूरपुर के तहत बरूही, रिट, अटारा, भलाख, पंदरेहड़, सदवां, सुखार, चरूडी, झिकली खन्नी, उपरली खन्नी, पुंदर, पक्का टियाला, लोहारपुरा, सिंबली, बासा (राजा का बाग), जसूर, ग्योरा और बागनी में आशा वर्कर के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। बीएमओ डाॅ. दिलबर सिंह ने बताया कि उम्मीदवार अपने आवेदन पत्र 15 मई दोपहर 12 बजे तक बीएओ कार्यालय कमनाला में जमा करवा सकते हैं। चयन प्रक्रिया 24 मई को खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय नूरपुर स्थित कमनाला में होगी।
पुलिस थाना धर्मशाला के तहत शिव नगर स्थित शिव मंदिर के पास पुलिस ने एक कार से 260 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। आरोपियों इंद्रजीत सिंह निवासी गांव चक मोहम्मद यार डाकघर गौंडाला तहसील आरएसपुरा जिला जम्मू और सुलखन सिंह निवासी गांव कोटली अर्जुन डाकघर कोटली शाहदौला तहसील आरएसपुरा जिला जम्मू को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि नूरपुर की ओर से वाया चड़ी मार्ग होते हुए एक कार में चिट्टे की सप्लाई आ रही है। पुलिस ने शिव नगर में एक कार (जेके02-बीए-6565) को रोककर जब तलाशी की तो 260 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। मामले की पुष्टि करते एसपी कांगड़ा शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि अभी तक की जांच में पता चला है कि ये लोग चिट्टे को मैक्लोडगंज की ओर लेकर जा रहे थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जोगिंद्र नगर उपमंडल की ग्राम पंचायत द्रुब्बल में पंचायत स्तरीय तीन दिवसीय मां गायत्री मेले संपन्न हो गया। मां गायत्री मेले के समापन समारोह में शुक्रवार को स्थानीय विधायक प्रकाश राणा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। लोगों ने उनका द्रुब्बल में भव्य स्वागत किया। मेला कमेटी की अध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत द्रुब्बल की प्रधान रेनू राणा ने विधायक प्रकाश राणा का स्वागत व अभिनदंन किया। तीन दिवसीय मेले में महिला मंडलों व युवक मंडलों के कार्यक्रम, स्कूली बच्चों की खेलकूद प्रतियोगिताएं, विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, वालीबाल व क्रिकेट प्रतियोगिताएं, मटका फोड़, कुर्सी दौड़, रस्साकशी व विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विधायक प्रकाश राणा ने पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड पंचों, मेला कमेटी के सदस्यों व स्थानीय जनता का उन्हें मान-सम्मान देने के लिए धन्यवाद व आभार व्यक्त किया।
बीते दिनों इंदौरा थाने के मानद मुख्य आरक्षी अशोक की एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। शुक्रवार को इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक मलेंद्र राजन, एसपी नूरपुर अशोक रत्न, एसडीएम इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर, वाइस चेयरमैन उद्योग विभाग विशाल चंबयाल, प्रदेश महासचिव कांग्रेस कमल किशोर, प्रधान भोपाल कटोच, बीडीसी जसवीर कटोच, कांग्रेस जिलाध्यक्ष कर्ण सिंह पठानिया सहित दिवंगत के घर पहुंचे और मृतक के परिवार को सांत्वना दी। इस दौरान 4 लाख रुपये सांत्वना राशि का चैक भी विधायक मलेंद्र राजन द्वारा उन्हें प्रदान किया गया। इससे पहले विधायक मलेंद्र राजन ने मंड मियाणी में विधायक जनता के द्वार कार्यक्रम के तहत पहुंचे, यहां स्थानीय लोगों ने विधायक का स्वागत किया। इस दौरान विधायक ने जन समस्याओं को सुना व अधिकांश का मौका पर ही निपटान किया तथा अन्य के समाधान हेतु विभागाधिकारियों को निर्देश दिए। यहां प्रदेश वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन व पूर्व जिला परिषद मुरीद हुसैन, पूर्व उप प्रधान लाल हुसैन अम्बी,प्रधान रानी देवी, उप प्रधान जोगिन्द्र सिंह, पूर्व उप प्रधान शेर अली सहित अन्य गणमान्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विकास खंड सुलह के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मरूंह के गांव चटीयाला का 33 बर्षीय अरविंद कुमार जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में शुक्रवार सुबह सुरक्षाबलों की आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गया। अरविंद कुमार भारतीय सेना की 9 पैरा रेजीमेंट मे पिछले 12 वर्षों से तैनात थे और श्रीनगर के कुपवाड़ा में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अरविंद अपने पीछे दो छोटी बेटियां , पत्नी और बुजुर्ग माता पिता छोड़ गए हैं। अरविंद की शहादत की खबर उसके परिजनों को शुक्रवार दोपहर बाद पता चली । खबर सुनते ही अरविंद के घर चीखो पुकार से माहौल गमगीन हो गया। अरविंद की शहादत की खबर क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। वहीं रिस्तेदार व गांव के सेंकड़ों लोग अरविंद के घर उसके परिवारजनों को के ढांढस बंधाने को पहुंचे गए । अरविंद के भाई भूपेन्द्र कुमार ने बताया कि शहीद अरविंद अभी दो महीने पहले ही छूटी काट कर बापिस अपनी पोस्टिंग पर गये थे। भाई ने बताया कि उन्हें सेना की ओर से फोन पर बताया गया कि उनके भाई को गोली लगी है ओर वह घायल हैं। जब वह घर पर आए तो दोवारा फोन आया कि अरविंद की आतंकी मुठभेड़ में मौत हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार अरबिंद की पूरी रेजिमेंट को कुपवाड़ा से पूंछ बुलाया गया था। सेना को भनक लगी थी कि उस इलाके में एक गुफा में आतंकियों का समूह छुपा हुआ है। अरविंद व उनके साथियों ने उन पर हमला किया जिस दौरान आतंकियों की गोलियों का जवाब देते हुए अरबिंद और उनके चार अन्य साथी जवान भी शहीद हो गए।अरबिंद का पार्थिव शरीर शनिबार दोपहर बाद उनके पैतृक गांव सूरी चट्टियाला पहुंचने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के मनाली में पुलिस ने UP के युवक को 266 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। मनाली पुलिस ने उसके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 21 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी की पहचान 21 वर्षीय विश्वजीत उर्फ आला निवासी कानपुर उत्तर प्रदेश के रूप में कि गई है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार वह पिछले कुछ समय से मनाली में ही रह रहा था और स्कूली बच्चों को भी चिट्टा उपलब्ध करवा रहा था। पुलिस ने आरोपी के तहत मामला दर्ज कर कार्यवाई शुरू कर दी है।
बाहरा यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके मुख्य अतिथि के रूप में बाहरा यूनिवर्सिटी के चांसलर गुरविंद्र सिंह बाहरा ने शिरकत की। उनके साथ विशेष अतिथि के रूप में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार विनीत कुमार मौजूद रहे। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया किया। इस मौके पर बाहरा विश्वविद्यालय के छात्र व छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। पहली स्टार नाइट में हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी गायक नाटी किंग विकी चौहान के नाम रही। उन्होंने अपने गानों पर बच्चों को बहुत नचाया। उन्होंने किंदे चली बाठणे, नीरू चली घूमदी, लगी नाटी और भी अन्य कहीं नाटिया गाकर दर्शकों का मन मोह लिया। मुख्य अतिथि चांसलर गुरविंदर सिंह बाहरा, रजिस्ट्रार विनीत कुमार भी विकी चौहान के साथ नाचते हुए नजर आए। दर्शक उठकर नाचने को मजबूर हो गए।
नगर निगम शिमला में 24 वार्डों में जीत के बाद आज उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर व शिमला के विधायक हरीश जनारथा ने एक संयुक्त कॉन्फ्रेंस कर शिमला की जनता का आभार जताने के साथ ही विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि कांग्रेस की यह तीसरी जीत है। सरकार बनने के बाद यह पहला चुनाव था, जिसमें लोगों ने जो जनादेश दिया है और ये सरकार के कामों पर जनता की मुहर है। वहीं विपक्ष के सरकार द्वारा चुनाव को प्रभावित करने के आरोप पर उन्होंने कहा कि डीए की किस्त बीजेपी की देनदारी थी। शिमला में ही नहीं पूरे प्रदेश में कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि मोदी vs सुखविंदर सुक्खू यह चुनाव भाजपा ने बनाया, जिसका परिणाम सभी ने देख लिया है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी जसवां-परागपुर के अध्यक्ष पद पर कुशल सपेहिया की नियुक्ति की गई है। इस नियुक्ति की अधिसूचना प्रदेश महासचिव रजनीश किमटा द्वारा जारी की गई है। अध्यक्ष पद पर नियुक्त होने पर जसवां-परागपुर के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने कुशल सपेहिया को बधाई दी है। वहीं कुशल सपेहिया ने अध्यक्ष बनाए जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, प्रभारी हिमाचल प्रदेश राजीव शुक्ला, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व पूर्व कामगार कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष ठाकुर सुरेंद्र सिंह मनकोटिया का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि वे सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर ब्लॉक कांग्रेस को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
शिमला नगर निगम के चुनावों में मिली जीत पर कांग्रेसी नेता नरदेव कंवर ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि शिमला नगर निगम के चुनावों में यह साबित हो गया है कि प्रदेश की जनता सुख की सरकार से पूरी तरह संतुष्ट है और आने वाले लोकसभा चुनावों में भी भाजपा का प्रदेश की चारों सीटों से सूपड़ा साफ कर देगी। नरदेव कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और जनता के हित में लिए जा रहे फैसलों से जनता का समर्थन सरकार को भरपूर तरीके से मिल रहा है। नरदेव ने कहा कि शिमला नगर निगम के चुनावों ने साबित कर दिया कि प्रदेश की जनता ने सुख सरकार को और उसके व्यवस्था परिवर्तन को पूर्ण आशीर्वाद दिया है। कांग्रेस पार्टी शिमला नगर निगम में मिली इस जीत का श्रेय प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच और उनके द्वारा लिए गए सख्त निर्णय के प्रति प्रदेश की जनता का समर्थन है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा से आम जनता के हित को सोचकर ही नीतियां बनाई हैं और यह जीत उन नीतियों पर जनता की मुहर है।
ज्वालामुखी से विधायक संजय रत्न ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व सदैव नकारात्मक राजनीति करने में व्यस्त रहा है। जब सत्ता थी, तब काम नहीं कर पाए, अब कांग्रेस की सत्ता है तो काम में अड़ंगा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कभी हाईकोर्ट में जा रहे हैं, कभी किसी निर्णय को चुनौती दे रहे हैं, कभी किसी पोस्ट को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले उप चुनाव में हारे, फिर विधानसभा चुनाव में और अब शिमला नगर निगम में हारकर भारतीय जनता पार्टी ने हार का हैट्रिक लगा ली है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व बेशर्म है। हार मानने के स्थान पर कभी ईवीएम को दोष दे रहे हैं, कभी वोटर को दोष दे रहे हैं तो कभी सरकार को दोष दे रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व अभी भी गलतफहमी में है। उन्होंने कहा कि हम आने वाले समय में लोकसभा चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयारी करेंगे। उन्होंने शिमला के कांग्रेस नेतृत्व को जीत हार्दिक बधाई है। शिमला की जनता ने कांग्रेस को 24 सीटें जीत कर दी हैं, इसके लिए जनता का आभार है। उन्होंने कहा कि भाजपा जो काम नहीं कर पाई, हम करके बताएंगे और कांग्रेस ने जो वादे किए हैं, उन वादों को पूरा करेंगे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को कहा कि वे ख्याली पुलाव बनाते रहे और इसी प्रकार हार पर हार का सिलसिला जारी रखें।
हिम स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसिएशन शिमला के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष के नेतृत्व में आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात की। उन्होंने इस वर्ष 10 जून से शिमला में एसोसिएशन द्वारा आयोजित किए जा रहे क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल को आमंत्रित किया। राज्यपाल ने खेल आयोजन के लिए एसोसिएशन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास निश्चित रूप से युवाओं को समाज से जोड़ने और नशाखोरी जैसी बुराइयों के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित किया जाए और इस तरह के आयोजन इस दिशा में सकारात्मक कदम हैं। उन्होंने कहा कि आज खेलों को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने राज्यपाल को अवगत कराया कि हिम स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसिएशन हर साल क्रिकेट और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन का मकसद युवाओं में खेलों को बढ़ावा देना और उन्हें रचनात्मक व सकारात्मक गतिविधियों में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं के आयोजन से उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता मजबूत होती है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में चार टीमें भाग लेंगी, जिसमें राज्यपाल-एकादश, मुख्यमंत्री-एकादश, मुख्य न्यायाधीश-एकादश और पत्रकार-एकादश शामिल हैं। इस मौके पर एसोसिएशन के महासचिव हरदयाल भारद्वाज भी मौजूद रहे।
क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी कांगड़ा आकाश राणा ने बताया कि सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड, आरटीए झबोला, जिला बिलासपुर ने सिक्योरिटी सुपरवाइजर और सिक्योरिटी गार्ड के 150 पद (केवल पुरुष) अधिसूचित किए हैं। इन्हें भरने के लिए कांगड़ा जिले में 8 मई को उप रोजगार कार्यालय नगरोटा सूरियां, 9 को उप रोज़गार कार्यालय बैजनाथ और 10 मई को उप रोज़गार कार्यालय लंबागांव में पात्र युवाओं के साक्षात्कार लिए जाएंगे। साक्षात्कार प्रातः साढ़े 10 बजे से आरंभ होंगे। उन्होंने बताया कि इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता दसवीं पास, कद 168 सेंटीमीटर से अधिक, वजन 55 से 95 किलोग्राम के बीच तथा आयु 21 वर्ष से 37 वर्ष रखी गई है। क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी ने बताया कि चयनित अभ्यर्थियों को कंपनी द्वारा प्रतिमाह 16000 से 18000 वेतनमान दिया जाएगा व उनका कार्यस्थल बद्दी, परमाणु तथा चंडीगढ़ रहेगा। उन्होंने कहा कि इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तिथियों को अपने मूल प्रमाण पत्रों एवं अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ रोजगार कार्यालय पधार कर साक्षात्कार में भाग ले सकते हैं। उम्मीदवारों को किसी भी प्रकार का यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। इसे लेकर अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 8558062252 पर संपर्क किया जा सकता है।
जिला हमीरपुर के उद्यान विभाग के पीसीडीओ बढ़ियाना में बागवानों के लिए अच्छे किस्म के फलदार पौधे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। लगभग 40 वर्षों से बढ़ियाना में स्थापित की गई उद्यान विभाग की नर्सरी में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधे तैयार किए जाते हैं। नर्सरी का मुख्य उद्देश्य किसानों, बागवानों तक फलदार पौधों की अच्छी बहुत पहुंचाना है, जिसमें आम, लीची, नींबू प्रजाति के सभी फल और अब विभाग द्वारा आडू, पलम की पौध तैयार की जा रही है। पौधों की डिमांड को देखते हुए विभाग ने अगले वर्ष के लिए 30 हजार पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिला उद्यान विभाग हमीरपुर के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि पीसीडीओ बढ़ियाना में किसानों के लिए अच्छी किसम के फलदार पौधों की पौध तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसमें आम, लीची, सेव आडू पलम और नींबू प्रजाति के सभी फल शामिल हैं।उन्होंने बताया कि जल्दी किसानों को ये फलदार पौधे वितरित किए जाएंगे।
शिमला नगर निगम के चुनाव में कसुम्पटी वार्ड 27 से भाजपा की प्रत्याशी रचना जीना शर्मा ने 279 मतों से विजय प्राप्त की है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के चलते जिस प्रकार से शिमला नगर निगम में कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज की है,ऐसे में रचना शर्मा ने कसुम्पटी से भाजपा की लाज को बचाने का काम किया है। रचना शर्मा ने जीत के बाद जहां मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। वहीं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से अपने समर्थकों के साथ मुलाकात कर आभार व्यक्त किया। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जीत पर बधाई दी व वार्ड के विकास के लिए तेज गति के साथ काम करने का मार्गदर्शन भी दिया। रचना शर्मा ने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री का बहुमूल्य सहयोग चुनाव के दौरान मिला है ।उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व की आभारी हैं ज़िन्होंने विश्वास जताकर उम्मीदवार बनाया और हम भाजपा की पूरी टीम कसुम्पटी को जीत पाए हैं। उन्होने कहा कि कसुम्पटी का विकास करेंगे और कसुम्पटी का हक नगर निगम से लेकर आएंगे, सामाजिक जागरूकता व नशे के विरुद्ध अभियान चलाएंगे।
मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी 7 तथा 8 मई को सोलन ज़िला के प्रवास पर रहेंगे। संजय अवस्थी 7 मई को दिन में 12.30 बजे अर्की विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मटूली एवं साथ लगती ग्राम पंचायतों की जनता द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में भाग लेंगे और एक जनसभा को सम्बोधित करेंगे। 8 मई को प्रातः 11.00 बजे उपायुक्त कार्यालय सोलन में ज़िला खनिज फाउंडेशन न्यास (डीएमएफटी) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल बाथू टिप्परी में छठी हिमाचल प्रदेश स्वतंत्र एनसीसी वाहिनी की तरफ से कक्षा आठवीं और नौवीं के विद्यार्थियों में से एनसीसी कैडेट का चयन किया गया। कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल राजेंद्र सैनी निर्देशानुसार यह चयन 2023-24 के लिए किया गया। इसमें 13 छात्राएं व 7 छात्र चयनित किए गए। चयन प्रक्रिया के लिए शैक्षणिक व शारीरिक योग्यता के साथ लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया। इसमें निहारिका, मनत, मेहक, श्रुति, अमान, विनायक गर्ग सहित कुल 20 विद्यार्थियों का चयन आगामी 2 वर्ष के लिए किया गया। इस मौके पर सेकंड ऑफिसर सुनील कुमार, हवलदार राजेश कुमार, अजय कुमार, डीपीई सचिन देव सिंह, रविंद्र सिंह (TGT), रीटा कुमारी प्रवक्ता ये सब आयोजन में में उपस्थित रहे।
भारतीय डाक विभाग की ओर से महिला सम्मान बचत पत्र योजना शुरू की गई है, जिसमें निवेश पर 7.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। बलवीर चंद अधीक्षक डाक देहरा मंडल की अध्यक्षता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला ज्वालामुखी में विशेष कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें महिला सम्मान बचत पत्र योजना के तहत विधायक संजय रतन की पत्नी व पाठशाला की महिला अध्यापकों के खाते खोले गए व अन्य योजनाओं के बारे में भी बताया गया।
शिक्षा खंड कंडाघाट की राजकीय प्राथमिक पाठशाला शलाह में स्कूल प्रबंधन समिति, अध्यापकों, अभिभावकों और अंत्योदय फाउंडेशन मुंबई के सहयोग से स्मार्ट क्लासरूम का शुभारंभ हो गया है। क्लासरूम का शुभारंभ ग्राम पंचायत सतड़ोल के प्रधान हरबिंदर शरेरा के द्वारा बतौर मुख्य अतिथि किया गया। इस स्मार्ट क्लासरूम में कंप्यूटर, खिलौना बैंक और 43" का स्मार्ट TV स्थापित किया गया है। स्मार्ट क्लासरूम बनाने का मुख्य श्रेय विद्यालय प्रभारी प्रदीप कुमार की सोच को जाता है। इससे पूर्व अध्यापक प्रदीप कुमार जिन भी पाठशालाओं में रहे हैं, वहां भी उन्होंने समुदाय उन्मुखीकरण करके SMC और समुदाय के सहयोग से इसी प्रकार से स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए हैं, जो विद्यार्थियों के समुचित शिक्षण अधिगम में बहुपयोगी सिद्ध हुए हैं। इस पाठशाला में अध्यापक प्रदीप कुमार ने पहल करते हुए स्वयं के वेतन से विद्यालय में कंप्यूटर स्थापित किया है। इस पहल के लिए प्रधान ग्राम पंचायत सतड़ोल, हरबिंदर शरेरा ने प्रदीप कुमार की भूरि-भूरि प्रशंसा की। मुख्य अतिथि ने स्कूल प्रबंधन समिति, अध्यापकों और अभिभावकों को विद्यालय में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करने के लिए बहुत-बहुत बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के स्मार्ट साधनों की सहायता से बच्चों को कोई भी विषय सिखाना व सीखना सरल हो जाता है। बच्चे पढ़ाई का आनंद लेकर नई नई चीजें सीखते हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरबिंदर शरेरा सहित पाठशाला प्रभारी प्रदीप कुमार, सहयोगी शिक्षक ज्ञान सिंह, SMC अध्यक्ष संजय कुमार सहित खेमराज, संतोष, रेखा शर्मा, श्यामा ठाकुर, सीमा हरनोट, कमलेश एवं राजेश कुमार उपस्थित रहे।
सरकारी कार्यालय में जाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को रिवॉल्वर की नोक पर डरा-धमका और गाली-गलौज कर सरकारी दस्तावेजों को जबरन उठाकर अपने साथ ले जाना पंचायत प्रधान को महंगा पड़ गया। विद्युत विभाग की शिकायत के बाद डमटाल पुलिस ने प्रधान के खिलाफ विभिन्न धाराओं के खिलाफ मामला दर्ज कर प्रधान को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार खंड इंदौरा की ग्राम पंचायत शेखुपुर का प्रधान सुधीर सिंह पठानिया निवासी गांव बाईं अटारिया, जो डमटाल विद्युत उपमंडल विभाग के कार्यालय में पिछले एक माह से लगातार जाकर क्षेत्र में लगे किसी व्यक्ति के नाम पर बिजली के मीटर को कटवाकर जबरन अपने नाम पर करवाने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव डाल रहा था। रोजाना कार्यालय में जाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को गाली-गलौज कर उन्हें अपने रिवॉल्वर दिखा डराता-धमकाता आ रहा था। डमटाल विद्युत विभाग के सहायक अभियंता ने अपने विभाग के उच्च अधिकारियों को इस विषय पर जानकारी दी थी। प्रधान का आतंक इस तरह फैला कि कई कर्मचारियों ने कार्यालय आना ही बंद कर दिया था। बुधवार को प्रधान ने कार्यालय में जाकर सहायक अभियंता के ऊपर रिवॉल्वर तान दी और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देते हुए उसके टेबल पर पड़े कई सरकारी दस्तावेजों को जबरन उठा अपने साथ ले गया। विद्युत विभाग उपमंडल कार्यालय डमटाल के सहायक अभियंता तनुज मेहरा ने प्रधान के खिलाफ थाना डमटाल में प्राथमिकी दर्ज करवाई। पुलिस कार्यालय में पहुंच अपनी कार्रवाई अमल में ला रही थी कि प्रधान फिर से कार्यालय में पहुंच गया और गाली-गालौज करते हुए अधिकारियों को रिवॉल्वर दिखा डराने-धमकाने लगा। पुलिस ने प्रधान को मौके पर ही धर-दबोचा और उसे गिरफ्तार कर थाना डमटाल लाया गया।
जिला कांगड़ा की उप तहसील गंगथ में स्थित ऐतिहासिक सिद्ध पीठ बाबा क्यालु महाराज महादंगल की तैयारियां जोरों से चल रही हैं। 3 जून से 6 जून तक चलने वाले महादंगल के लिए कमेटी ने 16 अप्रैल से दान पर्ची का शुभारंभ किया था। इस बार महादंगल में करीब 1 करोड़ के नाम पहलवानों पर बरसेंगे। बाबा क्यालु महाराज को समर्पित चार दिवसीय महा दंगल में क्षेत्रीय लोगों की बेहद गहरी आस्था है। लोगों का कहना है कि मनोकामनाएं पूरी होने पर श्रद्धालु पीतल के बर्तन,गागरें, पंखे, कूलर, साइकिल, मोटरसाइकिल व नकद राशि दान में देते हैं। इसी दान के माध्यम से चार दिवसीय महादंगल में पहलवानों को पुरस्कृत किया जाता है। जानकारी देते हुए प्रबंधन सचिव महा दंगल कमेटी गंगथ सुनील गुप्ता ने बताया कि मेला 3 से 6 जून तक आयोजित किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। भक्तों द्वारा अब तक कई चीजें दान में दी गई हैं। इससे महादंगल को करवाने में सहयोग मिलेगा।
डमटाल पुलिस ने नशे की बड़ी खेप के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। मामले की जानकारी देते हुए थाना डमटाल के प्रभारी कल्याण सिंह ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि छन्नी बेली में व्यक्ति द्वारा भारी मात्रा में नशे का कारोबार किया जा रहा है, जिस पर पुलिस टीम ने छापेमारी की छापेमारी के दौरान 5 किलो 286 ग्राम चूरा पोस्त बरामद किया। व्यक्ति की पहचान राज कुमार पुत्र रमेश कुमार निवासी छन्नी तहसील इंदौरा जिला कांगड़ा के रूप में हुई है। उक्त व्यक्ति को गिरफ्तार कर मादक द्रव्य व प्रभावी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।


















































