कहा, महिलाओं को एकजुट कर संगठन को करेंगे मजबूत भाजपा नेतृत्व के मार्गदर्शन व नीतियों का घर-घर करेंगे प्रचार हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की राज्य अध्यक्ष वंदना योगी ने विधिवत रूप से शिमला पहुंचकर राज्य कार्यालय दीप कमल में अपना पदवार ग्रहण किया। इस मौके पर भाजपा महिला पदाधिकारी ,कार्यकर्ताओं, पार्षदों, पूर्व पार्षद, जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। वंदना योगी ने कहा कि पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में संगठन को मजबूत किया जाएगा। पार्टी की विचारधारा व नीतियों को महिलाओं में पहुंचने के लिए घर-घर प्रचार करेंगे।उन्होंने कहा कि महिला शक्ति ने सदैव भारतीय जनता पार्टी को अपना आशीर्वाद, सहयोग दिया है और भविष्य में भी महिला शक्ति भाजपा को केंद्र में सरकार बनाने के लिए अपना सहयोग दे इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला मोर्चा की ताकत को बढ़ाया जाएगा, सबको साथ लेकर आगे बढ़ेंगे, सबका सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियों को प्रमुखता से आगे रखकर हम काम करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन के माध्यम से सेवा करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने का काम किया जाएगा ।उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में महिला मोर्चा अहम भूमिका अदा करेगा ।वंदना योगी ने कहा कि भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व राज्य अध्यक्ष व वर्तमान में राष्ट्रीय महामंत्री हैं। इंदु गोस्वामी, भाजपा की राज्य उपाध्यक्ष व महिला मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष रश्मिधर सूद सहित सभी जो अब तक भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष रही है उन सब के काम को आगे बढ़ने का प्रयास में करुंगी, सबका मार्गदर्शन लेकर के आगे बढूंगी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए संगठन परिवार है और संगठन की मजबूती ही विचारधारा की मजबूती है। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल भी करेंगे ,जनता के हित की आवाज भी उठाएंगे,महिला सशक्तिकरण की बात भी करेंगे, नीति निर्धारण की बात भी करेंगे। उन्होंने कहा कि यह झूठी गारंटी दी गई है उन पर भी सवाल उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस समय बारिश में जिस प्रकार से तबाही हुई है त्रासदी आई है, उसमें महिला मोर्चा हर स्तर पर सेवा का काम कर रहा है और भविष्य में भी जब तक जनजीवन सामान्य ना हो अपने-अपने स्तर पर सेवा के कार्यों को आगे महिला मोर्चा की कार्यकर्ता बढ़ाएं इसके लिए प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर भाजपा की उपाध्यक्ष पायल वैध, भाजपा महिला नेत्री रूप शर्मा, भाजपा कार्यालय सचिव किरण बाबा ,पूर्व पार्षद किमी सूद, प्रतिभा बाली, पार्षद कमलेश मेहता, रचना शर्मा सहित महिला पदाधिकारी उपस्थित रहे।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश में आपदा प्रभावितों के लिए प्राकृतिक आपदा से उबारने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी और गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में भरपूर सहयोग कर रही है। केंद्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आपदा प्रभावित हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 6000 नए आवास बनाने की मंज़ूरी दी है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पंचायती राज ग्रामीण विकास मंत्री श्री गिरिराज किशोर सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और अनुराग ठाकुर का पूरे हिमाचल प्रदेश की ओर से आभार व्यक्त किया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपदा से बेघर हुए लोगों के लिये केंद्र सरकार का यह फ़ैसला किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। राज्य सरकार से अनुरोध है कि बेघर हुए लोगों के लिए ज़मीन आवंटन का काम तेज़ी से करे। जिससे आपदा में सब कुछ गवा चुके लोगों के लिए घर का इंतज़ाम हो सके। इसके पहले ही केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तरह प्रदेश को 2700 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 5000 घरों के निर्माण की मंज़ूरी दे चुके हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य प्रतिभा सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हंै कि भारी बारिश व बाढ़ से प्रभाभित लोगों की बगैर किसी भेदभाव से पूरी मदद की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभाभित सभी लोगों की एक समान मदद की जानी चाहिए। सुंदरनगर में देर सायं सुंदरनगर ब्लॉक अधिकाररियों के साथ बाढ़ से प्रभाभित लोगो को राहत व पुनर्वास कार्यो की समीक्षा बैठक की करते हुए प्रतिभा सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के राहत व पुनर्वास कार्यो का पूरा लाभ प्रभाभित लोगो को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का आंकलन ठीक ढंग से किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से स्वम् नुकसान के आकलन पर अपनी पूरी नज़र रखने को कहा।उन्होंने अधिकारियों से इस आपदा में हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट ली। सुंदरनगर के उप मंडल अधिकारी अमर नेगी व अन्य विभागों के अधिकाररियों ने ब्लॉक में हुए नुकसान की पूरी जानकारी देते हुए कहा कि प्रशासन पूरी मुस्तैदी से राहत व पुननिर्माण कार्यो को अंजाम करने में जुटा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक हफ्ते के अंदर सड़को व अन्य को पूरी तरह से बहाल करने में कोई कोर कसर बाकी नही रखी जायेगी। प्रतिभा सिंह ने मनरेगा के कार्य दिवस बढ़ाने के अधिकाररियों के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताते हुए कहा कि वह इस मामले को सरकार के समक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत होने वाले राहत कार्यो की सभी औपचारिकताये समय पर पूरी की जानी चाहिए। उन्होंने ग्रामीण संपर्क सड़को को जल्द बहाल करने व जिन लोगों के घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए है उन्हें हर प्रकार की सहायता देने का अधिकाररियों को निर्देश दिया।
-पीसीसी प्रवक्ता बोले- हर चुनौतियों का सामना कर रहे सीएम सुक्खू हिमाचल प्रदेश में भयंकर त्रासदी की बीच सुक्खू सरकार हर जरूरतमंदों के साथ खड़ी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सौरव चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में आज प्रदेश सरकार हर चुनौतियों का सामना कर जनहित के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक आपदा से सैंकड़ों लोगों की जान गई और कई परिवार बेघर हुए, तो सीएम सुक्खू ने अपनी टीम के साथ पहले दिन से ही राहत एवं पुनर्वास में जुट गई। आज यही वजह है कि देश का नीति आयोग और वर्ल्ड बैंक जैसे संस्था ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पीठ थपथपाई। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। गौरतलब है कि बीते दिनों नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी ने एक पत्र के माध्यम से राज्य सरकार के चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना की है। इसमें कहा है कि हिमाचल सरकार आपदा प्रबंधन टीमों सहित अन्य सभी हितधारक, जरूरतमंदों को राहत प्रदान करने के लिए सराहनीय कार्य कर रही है। यहां तक कि आयोग इस चुनौतीपूर्ण समय में राज्य को हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। सुमन के. बेरी ने कह दिया कि राज्य में भीषण त्रासदी की घटनाएं चौंकाने वाली हैं। इस कारण राज्य में कृषि, समग्र आजीविका और आधारभूत संरचना को भारी क्षति हुई है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सौरव चौहान ने वर्ल्ड बैंक और नीति आयोग द्वारा सीएम सुक्खू की सराहना पर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक भारी बरसात से अनुमानित 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार सभी प्रभावितों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम सुक्खू दिल खोल कर कर रहे काम सौरव चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश में राहत एवं बचाव के लिए दिल खोलकर काम कर रहे हैं। उन्होंनेे कहा कि बीते दिनों कुल्लू और मंडी जिलों में भारी वर्षा और भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध होने के कारण विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को प्रदेश सरकार हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। संबंधित जिला प्रशासन लोगों के लिए भोजन और अस्थायी शिविर की नि:शुल्क सुविधा प्रदान गया। गत बुधवार को प्रदेश सरकार ने इन राहत शिविरों में 800 से अधिक लोगों को भोजन के पैकेट वितरित किए गए। इसके अलावा 150 व्यक्तियों को कुल्लू जिले के बजौरा राहत शिविर में भोजन उपलब्ध करवाया गया।
छह को उपाध्यक्ष और दो को सौंपा महामंत्री का जिम्मा भारतीय जनता पार्टी जिला शिमला के अध्यक्ष प्रेम ठाकुर ने शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के उपरांत जिला शिमला के पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा की है। उन्होंने जिला उपाध्यक्ष के रूप में नरेंद्र शर्मा (शिमला ग्रामीण), बॉबी बंसल (शिमला ग्रामीण), राजीव सूद (शिमला शहरी), संजीव चौहान पिंकु (शिमला शहरी), उमेश वर्मा (कुसुम्पटी) और योगराज ठाकुर (शिमला ग्रामीण) को नियुक्त किया है। वहीं, महामंत्री का दायित्व प्रेम चौहान (कुसुम्पटी) और राजीव पंडित (शिमला शहरी)को सौंपा। सचिव का दायित्व शिव राम शर्मा (कुसुम्पटी), नागेश शर्मा ( शिमला ग्रामीण), कमलेश मेहता (कुसुम्पटी), सुनीता शर्मा (शिमला ग्रामीण), रजनी सिंह (शिमला शहरी) और मंजु वर्मा (कुसुम्पटी) को सौंपा। कोषाध्यक्ष अजय सरना ( शिमला शहरी), कार्यालय मंत्री शुभांकर सूद ( शिमला शहरी) होंगे।, मीडिया प्रभारी विद्या नंद शर्मा होंगे, सह मीडिया प्रभारी ललित ठाकुर (शिमला ग्रामीण) और प्रवक्ता विवेक शर्मा ( शिमला ग्रामीण) होंगे। कार्यकारिणी सदस्य शिमला शहरी से अनिता गोयल सूद, जयचंद, कपिल, नवीन सचदेवा, अनूप वैद्य, राजू ठाकुर, ब्रिज सूद, अरविंद लखनपाल, सिमी करोल, बिंदु सूद, कमलेश राणा, असीम अहलुवालिया, सतपाल (पिंटू), दीपक शर्मा, अजय शर्मा। शिमला ग्रामीण से मेहर चंद, आशा चौहान, कांता नेगी, निर्मला चौहान, सुनीता ठाकुर, पुष्पा ठाकुर, जगदीश शर्मा, राम प्यारी, अनूप शर्मा, देवीदत्त शर्मा, ज्योति प्रकाश, देविंदर ठाकुर, सुनीता ठाकुर। कुसुम्पटी से लक्ष्मी नंद शर्मा, ओम प्रकाश (काशु), नवीन शर्मा, दिवेश शर्मा, राजकुमार कश्यप, जीत सिंह कंवर, किरण शर्मा, मीरा राठौड़, सीताराम, कमाल दास,रमा कुमारी, रमेश शर्मा, जयराम (गोल्डी), विनरेंद्र बंसल, अजय कौंडल, लता वर्मा और दीपेश डोगरा होंगे। इस प्रकार विशेष आमंत्रित सदस्य पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, राज्य सभा सांसद डॉ सिकंदर कुमार, प्रत्याशी संजय सूद, गणेश दत्त, रूपा शर्मा, प्रत्याशी रवि कुमार मेहता, कार्यालय सचिव प्रमोद ठाकुर, विजया ज्योति सेन, पूर्व मंत्री रूप दास कश्यप, ईश्वर रोहाल, सह मीडिया प्रभारी प्यार सिंह कंवर, प्रदेश मीडिया प्रभारी करण नंदा, विजय परमार, रमेश चौज़र, राकेश शर्मा, मदन शर्मा, गगन शर्मा, अंजना शर्मा, प्रदीप कश्यप और दुर्गा सिंह ठाकुर होंगे।
नगर पंचायत कोटखाई की अध्यक्ष अंजली चौहान ने आज यहां शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 1.31 लाख रुपये का चेक भेंट किया। शिक्षा मंत्री ने इस पुनीत कार्य के लिए नगर पंचायत कोटखाई का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह राशि जरूरतमंद लोगों की सहायता करने में सहायक सिद्ध होगी। इस अवसर पर नगर पंचायत कोटखाई के उपाध्यक्ष प्रमोद वर्मा, पार्षद जगदीश चौहान, नीरज ठाकुर तथा विक्की चौहान भी उपस्थित है।
गुजरात के टूर ऑपरेटरों तथा ट्रैवल एजेंटों का हिमाचल के होटलों की ऑक्युपेंसी बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान रहता है। गुजरात से अधिकतर पर्यटक हिमाचल में ग्रुप्स में आते हैं। शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेक होल्डर एसोसिएशन ने गुजरात ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन के साथ गांधीनगर में टूरिज्म ट्रेड फेयर के दौरान एक बैठक की। ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ पैन इंडिया के अध्यक्ष विनीश शाह गुजरात के अन्य ट्रेवल एजेंटों के साथ इस मीटिंग में उपस्थित रहे। शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेक होल्डर एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व ज्वाइंट सेक्रेटरी तरुण बख्शी ने किया तथा हमारी एसोसिएशन के मेंबर्स ने गुजरात ट्रेवल एजेंट असोसिएशन के मेंबरों के साथ इंटरेक्ट किया। विनीश शाह ने कहा कि गुजरात के टूर ऑपरेटर्स तथा ट्रेवल एजेंट हिमाचल को प्रोमोट करना चाहते हैं, परंतु उन्हें शिमला आने पर कई प्रकार की समस्यों का सामना करना पड़ता है। जिन समस्याओं के कारण गुजरात के टूर ऑपरेटर हिमाचल मे ग्रुप लाने से कतराते हंै। शाह ने बताया कि जम्मू कश्मीर तथा उत्तराखंड में बाहरी राज्यों के नंबर वाली टूरिस्ट बसों से कोई भी टैक्स नहीं लिया जाता, जबकि हिमाचल में बाहरी राज्यों के नंबर वाली बसों से बहुत अधिक टैक्स वसूला जाता है। हाल ही में हिमाचल सरकार ने 1 सितंबर से टैक्स में बढ़ोतरी कर 3000 रुपए से लेकर 6000 रुपए टैक्स प्रतिदिन वसूलने का फैसला लिया है। इस भारी भरकम टैक्स के कारण टूर ऑपरेटर्स को हिमाचल के लिए टूर लेकर आना वायेबल ही नहीं रहता। एक तरफ तो गुजरात के ट्रैवल एजेंट में ही कंपीटीशन होता है और दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों जो टूर बुक करते है उनका लिमिटेड बजट होता है। उन्होंने कहा कि शिमला शहर में टूरिस्ट बसों को प्रवेश नहीं करने दिया जाता, जिसके कारण टूर ऑपरेटर्स को शिमला से सात से आठ किलोमीटर पीछे ही तारादेवी के पास बसों को सड़क के किनारे पार्क करना पड़ता है। तारादेवी से शिमला के लिए तथा शिमला साईटसींग के लिए टैक्सी के माध्यम से पर्यटकों को भेजना पड़ता है, जिसके कारण टूर की कीमत और बढ़ जाती है। विनीश शाह ने कहा कि गुजरात के ट्रैवल एजेंट तथा टूर ऑपरेटर्स को हिमाचल में टूर लाने के लिए आकर्षित करने के लिए हिमाचल सरकार द्वारा बाहरी राज्यों की नंबर वाली टूरिस्ट बसों पर लगने वाले कर को हटाना चाहिए, ताकि टूर ऑपरेटर को हिमाचल में टूर लाना वायबले हो सके। वहीं शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेक होल्डर एसोसिएशन के सचिव तरुण बख्शी ने कहा कि एसोसिएशन जल्द ही इस मुद्दे को सरकार से उठाएगी। इन समस्याओं का हल होने से गुजरात के टूर ऑपरेटर्स को जेएंडके तथा उत्तराखंड न जाकर हिमाचल की और डायवर्ट किया जा सकता है। इससे न केवल हिमाचल की इंडस्ट्री को लाभ होगा, परंतु सरकार के खजाने में भी इजाफा होगा। वर्तमान में गुजरात टूर ऑपरेटर्स द्वारा हिमाचल में न के बराबर आने के कारण न तो हिमाचल के ट्रांसपोर्ट विभाग को कोई रेवेन्यू आ रहा और न ही सरकार को होटलों से मिलने वाला जीएसटी मल रहा है। ं
राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी प्रदेश में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से महत्वाकांक्षी राजीव गांधी स्वरोजगार योजना आगामी 2 अक्तूबर, 2023 से आरम्भ की जा रही है। इस योजना के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर ली गई है। ऐसे में अब विभिन्न सरकारी विभाग, स्थानीय प्रशासन, स्वायत्तशासी निकाय, बोर्ड, निगम सहित अन्य सरकारी एवं अर्द्ध-सरकारी निकाय न्यूनतम चार वर्षों के लिए ई-टैक्सी अनुबंधित कर सकेंगे और इस अवधि को दो अन्य वर्षों के लिए बढ़ाया भी जा सकेगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विद्युत चालित वाहनों के लिए एक आदर्श राज्य बनकर उभरने के लिए तैयार है और प्रदेश सरकार सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के समन्वय व सहयोग से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के दृष्टिगत विद्युत चालित वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। विद्युत चालित वाहनों के लिए मूलभूत ढांचा सुदृढ़ करने के दृष्टिगत पहले चरण में छ: हरित गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। सरकार की इस पहल से वाहनों के लिए जिवाश्म इंधन पर निर्भरता में भी कमी आएगी। इस योजना के अंतर्गत ई-टैक्सी खरीदने एवं इसे किसी सरकारी संगठन के साथ सम्बद्ध करने के इच्छुक व्यक्ति परिवहन विभाग से अनुमति के लिए प्रत्यक्ष ऑनलाईन पोर्टल पर आवेदन कर सकता है। इसके लिए उसे निर्धारित प्रपत्र पर आवश्यक सूचना उपलब्ध करवानी होगी। आवेदन प्राप्त होने के उपरान्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के कार्यालय में इनकी छंटनी की जाएगी और दस्तावेजों में किसी भी तरह की कमी पाए जाने पर इन्हें आवेदक को सुधार के लिए वापस भेजा जाएगा और उसे पांच दिनों में इसे दुरूस्त करना होगा। निर्धारित अवधि में वांछित दस्तावेज उपलब्ध न करवाने पर आवेदन रद्द समझा जाएगा। पात्र लाभार्थियों की अंतिम सूचि तैयार होने के उपरान्त राज्य परिवहन प्राधिकरण की ओर से ई-टैक्सी के विक्रय की अनुमति प्रदान की जाएगी। संबंधित एजेंसी परिवहन विभाग को ई-टैक्सी से संबंधित आवश्यकता के बारे में ऑनलाईन अनुरोध कर सकेगी। इस योजना के अंतर्गत पात्रता एवं आवश्यकता के अनुरूप ई-टैक्सी किराए पर लेने के लिए पांच श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। वाहन के लिए ऋण प्रक्रिया बैंकों के माध्यम से अथवा आवेदक द्वारा अपने स्तर पर भी पूरी की जा सकेगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि हिमाचल को 31 मार्च, 2026 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य सरकार का है और इसे प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार ई-वाहनों को प्रोत्साहित करने के साथ ही अन्य कई कदम उठा रही है। इसके तहत परिवहन विभाग में विद्युत चालित वाहन शामिल किए गए हैं और परिवहन निगम के डीजल चालित 1500 बसों के बेड़े को चरणबद्ध ढंग से ई-बसों से बदलने की योजना है। राज्य सरकार ने अपने प्रथम बजट में ई-टैक्सी, ई-बस और ई-ट्रक की खरीद के लिए 50 प्रतिशत उपदान का भी प्रावधान किया है। सरकार के इन नवोन्मेषी कदमों का उद्देश्य राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें विद्युत चालित वाहनों के संचालन में निवेश कर जीविकोपार्जन सहित राज्य के पर्यावरण को संरक्षित करने में सहायक बनाना है।
केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं युवा व खेल मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया है कि हिमाचल प्रदेश में आपदा पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार 6,000 घर बनाएगी। पीएम ग्रामीण आवास योजना के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इसकी मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को अनुराग ठाकुर ने नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास व पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर मंजूरी देने के लिए आभार जताया। अनुराग ने बताया कि हाल ही में 5,000 घरों को मंजूरी मिली थी। इस आपदा में केंद्र से अब तक कुल 11,000 घर मंजूर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशानुसार केंद्र हिमाचल की हरसंभव सहायता कर रहा है। बीते दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के साथ उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।
शिमला आने से कतरा रहे सैलानी, वीकेंड पर होटलों में नाममात्र बुकिंग भारी बारिश से राजधानी शिमला में पर्यटन कारोबार चौपट हो गया है। 20 दिन से वीकेंड पर नाममात्र बुकिंग होटलों में हो रही है। बारिश से हुए नुकसान के चलते सैलानी शिमला आने से कतरा रहे हैं। रिज मैदान सहित राजधानी के अन्य पर्यटक स्थल भी खाली पड़े हैं। इस हफ्ते होटलों में सात से दस फीसदी तक कमरे ही बुक हुए हैं। पिछले हफ्ते यह संख्या दो फीसदी तक ही सीमित थी। आमतौर पर जुलाई और अगस्त में सैलानी गर्मी से राहत पाने के लिए पहाड़ों में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। होटलों में जगह मिलना मुश्किल होता था। इस बार भारी बारिश से हुई तबाही के चलते न केवल यहां का होटल व्यवसाय ठप पड़ा है बल्कि छोटे और मध्य वर्ग के व्यापारी भी संकट में आ गए हैं। इन्हें घर का खर्चा तक चलाना मुश्किल हो गया है। कारोबारियों के अनुसार राजधानी में दोबारा कोरोना काल जैसी स्थिति बन गई है। गौरतलब है कि शिमला शहर का तमाम कारोबार सैलानियों की आवाजाही पर निर्भर है। सैलानियों की संख्या बढ़ने पर करियाना की खरीदारी भी बढ़ती है। इसके अलावा शहर के अन्य सामान की बिक्री भी सैलानियों पर ही निर्भर होती है। कोरोनाकाल वाली स्थिति बन गई होटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस कुकरेजा ने बताया कि इस तरह की स्थिति राजधानी में कोरोना काल के समय बनी थी। सैलानी पूछताछ के लिए फोन कर रहें हैं लेकिन बुकिंग नहीं करवा रहे। आने वाले दिनों में अगर मौसम साफ रहेगा तो कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बरसात के दौरान 6746.93 करोड़ रुपये के नुकसान होने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा है। 10 अगस्त तक हुए नुकसान के आधार पर आर्थिक सहायता देने की केंद्र सरकार से मांग की गई है। आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन करने में राज्य की सहायता का आग्रह किया है, ताकि पुनर्निर्माण और पुनर्वास गतिविधियों के लिए केंद्र से सहायता मांगी जा सके। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने राज्य कार्यकारी समिति (एसईसी) की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए आपदा संभावित क्षेत्रों की संवेदनशीलता की जांच करने और नुकसान कम करने के लिए किए जाने वाले उपायों संबंधी योजनाओं पर चर्चा की। आपदा की स्थिति में जानमाल का जोखिम कम करने के लिए त्वरित सामूहिक प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने पर भी मंथन किया। बाढ़ सुरक्षा, भूस्खलन, भूकंप और अन्य संवेदनशील स्थितियों के लिए एक स्थायी वैज्ञानिक योजना की तलाश की जानी चाहिए। किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल को आगे आकर कार्यवाही करनी होती है, ऐसे में इन बलों को त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए भी प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है। समिति ने प्रदेश के चयनित नाजुक भवनों, स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थानों की भूकंप रेट्रोफिटिंग तथा इसके लिए कुछ जिलों में पायलट आधार पर परियोजना शुरू करने पर भी चर्चा की। राज्य में प्रतिक्रिया बल और एनडीआरएफ तैनात करने पर चर्चा बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण, बड़ी परियोजनाओं के मूल्यांकन तथा सुरक्षित निर्माण उपायों को प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत सुरक्षा प्रकोष्ठ स्थापित करने तथा नदी-नालों और उच्च ढलानों के समीप निर्माण को विनियमित करने और राज्य आपदा प्रबंधन एवं क्षमता निर्माण संस्थान की स्थापना पर भी चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त राज्य में राष्ट्रीय आपदा मुख्यालय और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा गृह मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार राज्य में प्रतिक्रिया बल और एनडीआरएफ की तैनाती पर भी चर्चा की गई।
अस्पतालों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों के सेवा विस्तार के लिखित आदेश सरकार ने शुक्रवार को जारी कर दिए हैं। हालांकि आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि यह सेवा विस्तार सिर्फ 30 सितंबर तक होगा। आईजीएमसी, डीडीयू, केएनएच समेत पूरे प्रदेश भर में 1,893 कर्मचारियों को कोरोना काल में आउटसोर्स पर अस्पतालों में रखा गया था। सबसे अधिक 250 आईजीएमसी में कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें स्टाफ नर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। जून में सभी का कार्यकाल खत्म हो गया था। ऐसे में हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मिला था। इन्होंने इन कर्मचारियों की सेवा विस्तार की मांग की थी। वहीं मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी दो माह पहले इन कर्मचारियों का कार्यकाल तीन महीने को बढ़ाने को कहा था। लेकिन शुक्रवार को विशेष सचिव स्वास्थ्य की ओर से इस बारे में आर्डर जारी किए है। इस बारे में निदेशक चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य निदेशालय को भी इस बारे में सूचित कर दिया गया है। उधर दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य आउटसोर्स कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष कमलजीत डोगरा ने कर्मचारियों के सेवा विस्तार के आदेश जारी करने पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताया है।
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने आज यहां आयोजित हिमाचल प्रदेश राज्य कार्यकारी समिति (एसईसी) की 20वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में आपदा संभावित क्षेत्रों की संवेदनशीलता की जांच करने और नुकसान को कम करने के लिए किए जाने वाले उपायों संबंधी योजनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में आपदा की स्थिति में जान-माल के जोखिम को कम करने के लिए त्वरित सामूहिक प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने पर भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार से सहायता लेने के दृष्टिगत 10 अगस्त तक 6746.93 रुपये की क्षति के संबंध में एक ज्ञापन गृह मंत्रालय को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से आपदा के बाद की जरूरतों का आकलन करने में राज्य की सहायता का भी आग्रह किया है ताकि पुनर्निर्माण और पुनर्वास गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार से सहायता मांगी जा सके। उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से राज्य की संवेदनाशीलता का सघन आकलन किया जाना चाहिए और बाढ़ सुरक्षा, भूस्खलन, भूकंप और अन्य संवेदनशील स्थितियों के लिए एक स्थायी वैज्ञानिक योजना की तलाश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में पुलिस बल को आगे आकर कार्यवाही करनी होती है, ऐसे में इन बलों को त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए भी प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है। समिति ने प्रदेश के चयनित नाजुक भवनों, स्कूलों और सामुदायिक स्वास्थ्य संस्थानों की भूकंप रेट्रोफिटिंग तथा इसके लिए कुछेक जिलों में पायलट आधार पर परियोजना शुरू करने पर भी चर्चा की। बैठक में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अग्निशमन सेवाएं, गृह रक्षक और नागरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा सभी शहरी स्थानीय निकायों द्वारा आदर्श भवन नियम अपनाने तथा इनके सख्ती से कार्यान्वयन पर भी बल दिया गया। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण, बड़ी परियोजनाओं के मूल्यांकन तथा सुरक्षित निर्माण उपायों को प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत सुरक्षा प्रकोष्ठ स्थापित करने तथा नदी-नालों और उच्च ढलानों के समीप निर्माण को विनियमित करने पर भी चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त राज्य आपदा प्रबंधन एवं क्षमता निर्माण संस्थान की स्थापना पर भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल को सुदृढ़ करने और इसे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, औज़ारों एवं उपकरणों से सुसज्जित करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त राज्य में राष्ट्रीय आपदा मुख्यालय और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्रों की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा गृह मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार राज्य में प्रतिक्रिया बल और एनडीआरएफ की तैनाती पर भी चर्चा की गई। पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, वित्तीय आयुक्त राजस्व, ओंकार चंद शर्मा, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, सचिव कृषि राकेश कंवर, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग अजय गुप्ता, निदेशक सह विशेष सचिव राजस्व, डीसी राणा, विशेष सचिव वित्त रोहित जम्वाल, विशेष सचिव लोक निर्माण विभाग हरबंस सिंह ब्रस्कॉन, विशेष सचिव गृह मनोज चौहान, मुख्य अभियंता ऊर्जा डीपी गुप्ता, निदेशक भारत मौसम विज्ञान विभाग सुरेंद्र पॉल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य प्रतिभा सिंह ने बताया है कि केंद्र सरकार ने मंडी संसदीय क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना तृतीय बेच की 54 सड़कें स्वीकृत की हैं। इन पर 599.55 करोड़ खर्च होंगे। प्रतिभा सिंह ने इन 54 सड़कों के निर्माण को स्वीकृत करने पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह, प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू व लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि इन सड़कों के निर्माण से मंडी संसदीय क्षेत्र में ग्रमीण विकास की गति को बल मिलेगा। प्रतिभा सिंह ने आज यहां बताया कि गत दिनों नई दिल्ली में उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह से भेंट कर इन सड़कों के निर्माण का मामला उठाया था,जो उन्होंने स्वीकार कर दिया हैं। उन्होंने कहा कि इन सड़कों के निर्माण पर 599.55 करोड़ खर्च आएंगे। प्रतिभा सिंह ने कहा कि मंडी संसदीय क्षेत्र में सड़कों के विस्तार में यह सड़के मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने कहा कि इस बार प्रदेश में हो रही भारी बारिश व बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान मंडी संसदीय क्षेत्र में सड़कों को हुआ हैं। प्रतिभा सिंह ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय भूतल व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से चेलचौक से पंडोह बाया गोहर सड़क को सीआईआर एफ,केंद्रीय सड़क ढांचागत फंड के तहत लाने का आग्रह किया हैं,जिससे इस सड़क के रखरखाव पर धन की कमी आड़े न आये। उन्होंने कहा कि मंडी से पंडोह कुल्लू का सड़क सम्पर्क पूरी तरह टूट चुका है इसलिए चैलचौक से पंडोह बाया गोहर सड़क कुल्लू व सीमावर्ती लेह के लिए बैकल्पिक मार्ग के तौर पर प्रयोग लाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह सड़क आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई के साथ साथ सेना की रसद के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मिल कर इस प्रस्ताव पर अमल करने का फिर से आग्रह करेंगी।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने दो बच्चों की संख्या वाले 143 स्कूल डि नोटिफाई किए हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने 117 प्राथमिक विद्यायल और 26 माध्यमिक विद्यालय बंद किए जाने को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं। बिलासपुर जिले में 6, चंबा में 8, हमीरपुर में 4, कांगड़ा में 17, किन्नौर में 5, कुल्लू में 4, लाहौल-स्पीति में 19, मंडी में 18, शिमला में 25, सिरमौर में 3, सोलन में 7 और ऊना में 1 प्राथमिक विद्यालय डि नोटिफाई किया गया है। चंबा जिले में 2, कांगड़ा में 3, किन्नौर में 2, लाहौल-स्पीति में 7, मडी में 5, शिमला में 6 और सिरमौर में 1 माध्यमिक विद्यालय डि नोटिफाई किया गया है। वहीं विद्यार्थियों की संख्या बढऩे पर हिमाचल सरकार ने बंद किए 20 स्कूलों को दोबारा खोलने की अधिसूचना जारी की है। चंबा, कांगड़ा, शिमला, सिरमौर, सोलन और मंडी जिले में ये स्कूल दोबारा खोले गए हैं।
12 अगस्त की रात को मंडी के जवाली क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बाद जो आपदा की मार पड़ी वो असहनीय है। उस रात को बारिश के कारण भारी भूस्खलन हुआ और पल भर में पूरा गांव उस त्रासदी की आगोश में आ गया। इस आपदा से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए। यह हादसा कितना डराने वाला था, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है और बेहद कठिन है उन पीडि़तों के दर्द को समझ पाना, जिन्होंने अपने आंखों के सामने अपने सपनों के आशियाने को नष्ट होते हुए देखा। बेहद मुश्किल है पीडि़तों के दर्द पर मरहम लगा पाना। फस्र्ट वर्डिक्ट मीडिया ने पीडि़तों से संपर्क साधा और हाल जानने का प्रयास किया। इससे पहले हम उनसे कुछ सवाल कर पाते उनका दर्द छलक उठा। मझेड़ गांव के 70 वर्षीय भूप चंद ने जिस तरह पूरे घटनाक्रम को कांपती आवाज से बयां किया तो ये स्पष्ट हुआ कि वो मंजर बेहद डरावना रहा होगा। भूप चंद ने बताया की उस रात उन्होंने अपने आंखों के सामने छह कमरों के मकान को ढहते हुए देखा। भूप चंद ने कहा कि हाल ही में उन्होंने एक बीघा 15 बिस्वा जमीन खरीदी थी। सोचा था कि कृषि कर परिवार का पालन पोषण करेंगे, लेकिन प्रकृति ने गरीब भूप चंद की कमर तोड़ दी और इस घटना में खेत भी बह गए। अब भूप चंद के हाथ भी खाली है और बैंक खाते भी। वर्तमान में वे एक स्कूल में रह रहे है और वो दमा के मरीज है। भूप चंद ने दबी आवाज में कहा कि बस भगवान ने जान बचाई है लेकिन अब मुझमे हिम्मत नहीं बची है। भूप चंद को बस एक आस है कि वो जीते जी अपने परिवार को फिर छत दे सके और उनकी नजर अब सरकार पर टिकी है।
कहा- बागवानों की सुविधा के लिए 312 खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करते हुए प्रदेश सरकार ने सेब उत्पादकों को लाभ प्रदान करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय में मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के तहत सेब के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 10.50 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। प्रदेश सरकार ने सेब उत्पादकों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से पहली बार 1.50 रुपये की वृद्धि की है। सेब के अलावा, राज्य सरकार ने एमआईएस के तहत आम, किन्नू, माल्टा और संतरे की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 10.50 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। पहली बार नींबू की खरीद भी एमआईएस के तहत गलगल के बराबर यानी 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि एमआईएस के तहत 1,43,778 मीट्रिक टन सेब की खरीद की जाएगी और बागवानों की सुविधा के लिए 312 खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें से एचपीएमसी द्वारा 210 खरीद केंद्र और शेष 102 केंद्र हिमफेड द्वारा संचालित किए जाएंगे। राज्य सरकार के इस निर्णय से सेब उत्पादकों को लगभग 24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा के दृष्टिगत खरीद उद्देश्यों के लिए सीडलिंग, ग्राफ्टेड और कच्चा अचारी आम के खरीद अंतर को समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले आम की विभिन्न किस्मों को अलग-अलग दरों पर खरीदने का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार ने आम की तीनों किस्मों के लिए खरीद दर एक समान करने का निर्णय लिया है और 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से आम की खरीद की जाएगी। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किन्नू, माल्टा और संतरे की खरीद दर भी सेब और आम के समान दर पर लाने का निर्णय लिया है। नींबू प्रजाति के ये फल भी अब सेब और आम के बराबर 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर खरीदे जाएंगे। इसके अलावा, किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार ने किन्नू, माल्टा और संतरे की खरीद के लिए ग्रेड प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 के दौरान 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गलगल और नींबू की भी खरीद की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि फल उत्पादकों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए मंडी मध्यस्थता योजना कारगर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत किसान और बागवान हितैषी योजनाएं क्रियान्वित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में किसानों को और अधिक सहयोग प्रदान करने के लिए कीटनाशकों व फफंूदनाशकों को उपदान पर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में विभिन्न प्रजाति के फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई नवोन्मेषी प्रयास कर रही है। सरकार किसानों के लिए उचित मुआवज़ा सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां कहा कि प्रदेश सरकार बागवानों के कल्याण के लिए हाल ही में लिए गए निर्णयों को सख्ती से लागू करने के हरसंभव प्रयास कर रही है। किसी को भी नियमों की अवेहलना की अनुमति नहीं दी जाएगी और उल्लंघनकर्ताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कृषि और बागवानी उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम- 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर कृषि उपज विपणन समिति ने कड़ा संज्ञान लेते हुए बकाएदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। बागवानी मंत्री ने कहा कि इन उल्लंघनकर्ताओं द्वारा सेब और नाशपाती को बिना वजन के क्रय और विक्रय किया गया। इनमें से एक डिफॉल्टर कृषि विभाग द्वारा जारी लाइसेंस के बिना मार्केट यार्ड पराला में कारोबार कर रहा था। दूसरा उल्लंघनकर्ता मार्केट यार्ड रोहड़ू में वजन के आधार पर फलों की बिक्री और खरीद के सरकारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन नहीं कर रहा था। जगत सिंह नेगी ने कहा कि दोषी पाए जाने पर अधिनियम के प्रावधानों के तहत उल्लंघनकर्ताओं के पंजीकरण प्रमाणपत्र निलंबित कर दिए जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 6,000 से अधिक पद भरने के लिए अक्तूबर से भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य सचिवालय में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि नया भर्ती आयोग गठित होते ही शिक्षा विभाग भर्तियां शुरू करेगा। प्रारंभिक शिक्षा विभाग में 5,300 और उच्च शिक्षा विभाग में 1,000 पद भरे जाएंगे। प्रदेश कैबिनेट ने इन पदों को भरने के लिए पहले ही मंजूरी दे दी है। शिक्षा मंत्री ने कहा है विभाग अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहा है कि रिक्त पद जल्द भरे जाएं। पदोन्नति और बैचवाइज आधार पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पांच वर्ष बाद नियमित प्रिंसिपल कॉलेजों में पदोन्नत कर दिए गए हैं। अन्य श्रेणियों के शिक्षकों के पद पदोन्नति से भरे जा रहे हैं। बैचवाइज आधार पर भी जिला शिक्षा अधिकारी भर्तियां कर रहे हैं। बीते दिनों ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में भर्तियां करने के लिए नया आयोग गठित करने की बात कही है। इसके लिए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दीपक सानन की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी अक्तूबर में अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के मिलते ही नया भर्ती आयोग गठित किया जाएगा। पेपर लीक मामले में भंग किए गए हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग की जगह नया भर्ती आयोग बनाया जाना है।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को केंद्र से हिमाचल प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की अपील की ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत मिल सके। इस महीने राज्य में बारिश से संबंधित घटनाओं में लगभग 120 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 24 जून को हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के बाद से कुल 242 लोगों की मौत हो गई है और 40 लोग अभी भी लापता हैं। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस कठिन समय में उनकी प्रार्थनाएं हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने हिमाचल प्रदेश की मदद के लिए सराहनीय और संवेदनशील कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार से अपील है कि त्रासदी से हुए भारी नुकसान को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में आई आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए ताकि इससे पीड़ित बहनों और भाइयों को उचित और तत्काल राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि इस भीषण आपदा के समय देश के सभी लोगों को हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए और उनका हौसला बढ़ाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में प्रभावी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करने और राज्य में प्लास्टिक सामग्री के सभी ब्रांड मालिकों और उत्पादकों का पंजीकरण शुरू करने के लिए सभी जिलों में प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधकों (प्रोसेसरों) को पंजीकृत करने की आवश्यकता है। यह बात पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक, डी.सी. राणा ने अपशिष्ट पेय पदार्थों से निपटने वाले एक्शन एलायंस फॉर रीसाइक्लिंग बेवरेज कार्टन (एएआरसी), पेट पैकेजिंग एसोसिएशन फॉर क्लीन एनवायरनमेंट (पीएसीई) और अपशिष्ट के कुशल संग्रह और पुनर्चक्रण प्रयासों (डब्ल्यूईकेयर) के प्रतिनिधियों के साथ आज यहां आयोजित एक बैठक में कही। डीसी. राणा ने बताया कि अब तक राज्य में 30 ब्रांड मालिकों और उत्पादकों को पंजीकृत किया गया है और बहुत से अन्य उत्पादकों का पंजीकरण होना अभी भी शेष है। बैठक में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) तंत्र पर चर्चा की गई और हिमाचल में सक्रिय प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधकों को सभी जिलों में पंजीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विकसित केंद्रीकृत पोर्टल के तहत पंजीकरण करने के लिए निर्माता, आयातक और ब्रांड मालिक के बीच जागरूकता लाने पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। प्रदेश में निर्माता, आयातक और ब्रांड मालिक द्वारा उत्पन्न प्लास्टिक अपशिष्ट क्रेडिट की जानकारी को सत्यापित करने के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों को अधिकृत किया गया है।
11वें दिन सर्च ऑपरेशन पूरा; दादा और पोती समेत 3 की डेड बॉडी मिली शिमला के शिव बावड़ी मंदिर हादसे में लापता सभी लोगों के शव बरामद कर लिए गए। नीरज ठाकुर के बाद गुरुवार को पवन शर्मा और उनकी चार साल की पोती का भी शव भी मलबे से निकाला गया। इसी के साथ 11वें दिन सर्च ऑपरेशन पूरा हुआ। तीनों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए आईजीएमसी लाया गया है। शिव मंदिर हादसे में मृतकों की संख्या 20 पहुंच गई। इसमें पवन शर्मा का सात लोगों का पूरा परिवार खत्म हो गया है। पवन शर्मा 14 अगस्त की सुबह सावन के आखिरी सोमवार को अपनी पत्नी, बेटे-बहू और तीन पोते-पोती के साथ मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। इनका पूरा परिवार भी लैंडस्लाइड का शिकार हो गया। पांच के शव 18 अगस्त तक मिल चुके थे। मगर, पवन शर्मा और उनकी पोती का शव गुरुवार को सबसे आखिर में बरामद हुआ। पवन शर्मा अपने पीछे एक बेटी छोड़ गए हैं, जो हरियाणा में बिहाई हुई है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां राज्य एकल खिड़की स्वीकृति एवं अनुश्रवण प्राधिकरण की 27वीं बैठक सम्पन्न हुई। इसमें नए औद्योगिक उद्यमों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों के विस्तार के लिए लगभग 1483 करोड़ रुपये के कुल 29 प्रस्तावित निवेशों को मंजूरी प्रदान की गई। इससे प्रदेश के लगभग 3961 व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण के संरक्षण के लिए प्रदेश में हरित उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य पर इस बरसात के दौरान आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का उपयुक्त यह समय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित नए प्रस्तावों में कास्टिंग प्लेट और फिलिंग, इन्वर्टर-बैटरी इत्यादि के निर्माण के लिए मैसर्ज ईस्टमैन ऑटो एंड पावर लिमिटेड यूनिट-3, गांव नंदपुर, तहसील बद्दी, जिला सोलन, रोटावेटर ब्लेड और फोर्ज्ड पार्ट्स के निर्माण के लिए मैसर्ज एम्मफोर्स मोबिलिटी साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ईपीआईपी चरण-1, झाड़माजरी, तहसील बद्दी, जिला सोलन, कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज के निर्माण के लिए मैसर्स आरएसएच वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड बद्दी, जिला सोलन, सोडा, पैक्ड पानी के निर्माण के लिए मैसर्स क्लीन वॉटर एंड अलाइड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड गांव अदुवाल जंदोरी, तहसील नालागढ़, जिला सोलन, टैबलेट, कैप्सूल, तरल बोतलें, मलहम, ड्राई सिरप के निर्माण के लिए मैसर्स हिंदुस्तान फार्मास्यूटिकल्स, आई.ए., प्लास्डा, तहसील नालागढ़, जिला सोलन, तहसील नालागढ़, जिला सोलन, टेबलेट, कैप्सूल, तरल पदार्थ, मलहम, ड्राई सिरप के निर्माण के लिए मैसर्ज नेरी मास्टर एंटीबायोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड आईए प्लास्डा, तहसील नालागढ़, जिला सोलन, टेबलेट, कैप्सूल, तरल बोतलें, मलहम, ड्राई सिरप के निर्माण के लिए मैसर्ज मास्टर फार्मास्यूटिकल्स इंडस्ट्रीज, आईए, प्लासडा, तहसील नालागढ़, जिला सोलन, नमूना परीक्षण, एपीआई आदि के लिए फॉर्मूलेशन विकास इत्यादि के लिए मेसर्ज वेल्जो रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड, एचपीएसआईडीसी, आईए, बद्दी, जिला सोलन, इंजेक्शन के लिए स्टेराइल वॉटर और शीशियों के निर्माण के लिए मैसर्ज कोलश फार्मा, ईपीआईपी चरण-2, थाना बद्दी, जिला सोलन, टैबलेट, कैप्सूल, ओरल ऑयल, क्रीम आदि के निर्माण के लिए मैसर्ज आदिरा लैब्स प्रा. लिमिटेड, ईपीआईपी, चरण-2, थाना, तहसील बद्दी, जिला सोलन, ट्यूबलर इनवर्टर बैटरी, प्लास्टिक बफर, वेट स्क्रबर आदि के निर्माण के लिए मैसर्ज केसीसीएस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड आईए, अंब, तहसील अंब, जिला ऊना, हाइड्रोजन और इथेनॉल के निर्माण के लिए मैसर्ज ओआरकेए, औद्योगिक क्षेत्र, गगरेट, जिला ऊना, इंटीग्रेटेड कोल्ड एटमॉस्फेयर और पल्प प्रोसेसिंग यूनिट के निर्माण के लिए मैसर्ज पीआरसी एग्रोफ्रेश, मोहाल गजेडी, तहसील ठियोग, जिला शिमला, इन्फ्यूजन बीएफएस, कांच की बोतल, कोटिड और अनकोटेड टैबलेट तथा हार्ड जिलेटिन कैप्सूल के निर्माण के लिए मैसर्स हेटविक हेल्थकेयर एलएलपी, आईए, भांगला, तहसील नालागढ़, जिला सोलन और कार्बोनेटेड शीतल पेय, पैकेज्ड पेयजल, पेय पदार्थ आधारित सिरप (बीआईबी), सौर ऊर्जा के निर्माण के लिए मैसर्स वरुण बेवरेजेज लिमिटेड, औद्योगिक क्षेत्र कंदरोड़ी, चरण-2 जिला कांगड़ा शामिल हैं। प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित विस्तार प्रस्तावों में लेखन और मुद्रण पेपर के निर्माण के लिए जिला कांगड़ा, तहसील इंदौरा डाकघर काठगढ़ गांव टिब्बी के मैसर्ज एचआरए पेपर मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, नॉन डेयरी व्हिप, सजावटी व टॉपिंग इत्यादि के उत्पादन के लिए जिला सिरमौर, काला अंब, गांव ओगली के मैसर्स रिच प्रोडक्ट्स एंड सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, डाइंग, फैब्रिक प्रोसेसिंग तथा स्पिनिंग के निर्माण के लिए जिला सोलन औद्योगिक क्षेत्र बद्दी प्लॉट नंबर-1 के विनसम टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, थोक दवाओं, फॉर्मूलेशन, चिकित्सा उपकरणों, प्लास्टिक मोल्डिंग व अनुसंधान विकास के लिए जिला सोलन, तहसील बद्दी के मल्कुमाजरा में मैसर्ज मोरपेन लेबोरेटरीज लिमिटेड, लिक्विड इंजेक्शन एम्पौल्स शीशियों, आंख व कान की दवा के उत्पादन के लिए जिला सिरमौर काला अंब में मैसर्ज एमएमजी हेल्थकेयर, एम्पौल्स, लियोफिलाइज्ड शीशियों, तरल शीशियों आदि के निर्माण के लिए जिला सोलन, नालागढ़, के गांव थान्थेवाल में मैसर्ज इमैक्यूल लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, प्लास्टिक पैकेजिंग के उत्पादन के लिए जिला सोलन, झाड़माजरी, चरण-1 ईपीआईपी, प्लॉट नंबर 145, के मैसर्ज राधे पॉलीमर, रिंग फ्रेम स्पिंडल पॉलिएस्टर यार्न के उत्पादन के लिए जिला सिरमौर, काला अंब स्थित मैसर्ज पशुपति स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स लिमिटेड, खाद्य एवं न्यूट्रास्यूटिकल, टैबलेट के निर्माण के लिए जिला सोलन, तहसील बद्दी, डाकघर भूड, गांव मल्लपुर स्थित मैसर्ज पैनेसिया बायोटेक फार्मा लिमिटेड, आइसक्रीम आदि के निर्माण के लिए जिला सोलन तहसील नालागढ़, गांव किरपालपुर में मैसर्ज हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, एयर कंडीशनर, एयर कंडीशनर (काइल्स) के निर्माण के लिए जिला सिरमौर, काला अंब, गांव ओगली स्थित मैसर्ज ब्लू स्टार लिमिटेड, मीटर्ड डोज इनहेलर्स (एमडीआई), ड्राई पाउडर इनहेलर्स, नेज़ल स्प्रे व टोटल इनहेलर्स के उत्पादन के लिए जिला सोलन, तहसील बद्दी, गांव किशनपुरा यूनिट-3 में मैसर्ज ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड, टेबलेट, कैप्सूल, ड्राई पाउडर, लिक्विड ओरल के उत्पादन के लिए जिला सिरमौर, पावंटा साहिब, औद्योगिक क्षेत्र गोंदपुर, प्लॉट नंबर 53-55 स्थित मैसर्स फार्मा फोर्स लैब और इंजेक्टिबल, आंख व कान की ड्रॉप्स, ड्राई पाउडर इंजेक्शन इत्यादि के उत्पादन के लिए जिला सोलन तहसील बद्दी, गांव संडोली स्थित मैसर्ज हेल्थ बायोटेक लिमिटेड के प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा, प्रधान सचिव आर.डी. नजीम, प्रधान सचिव पर्यटन देवेश कुमार, सचिव वित्त अक्षय सूद, सचिव एमपीपी एवं ऊर्जा राजीव शर्मा, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा, निदेशक उद्योग राकेश प्रजापति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
कृषकों एवं बागवानों की सुविधा के लिए उपयुक्त ऐप और सूचना प्रणाली विकसित करने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एप्लीकेशंस के प्रभावी उपयोग पर चर्चा के लिए आज यहां पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के निदेशक डीसी राणा की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। उन्होंने जलवायु परिवर्तन एवं मौसम पूर्वानुमान पर आधारित सामान्य समूह आधारित किसान सूचना प्रणाली विकसित करने पर बल दिया ताकि क्राउड सोर्सिंग के उपयोग से मौसम पूर्वानुमान संबंधी जानकारी एसएमएस और व्हट्स ऐप जैसे माध्यमों से पंचायत स्तर तक पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मेघदूत जैसी एप्लीकेशन उपयोग में है, जिसके माध्यम से किसानों को उनकी फसलों और सब्जियों इत्यादि के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भी किसानों के लिए एक अधिक उन्नत जलवायु परिवर्तन परामर्श एप्लीकेशन विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य में एक विषयक कार्य समूह गठित करने का निर्णय लिया गया है। इस समूह में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग शिमला के निदेशक, कृषि, बागवानी व डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभागों के निदेशक, पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के चीफ सांईटिफिक ऑफिसर (जलवायु परिवर्तन) तथा प्रदेश कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर एवं वैज्ञानिक शामिल हैं। यह भी निर्णय लिया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग पंचायत स्तर पर कृषि मौसम संबंधी डाटा संकलन व परामर्श प्रणाली की स्थापना के लिए एक तंत्र विकसित करने की प्रक्रिया आरम्भ करेगा। इससे प्रदेश के कृषि एवं बागवानी समुदायों को लाभ मिल सकेगा। बैठक में सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
चार साल की समायरा का वो मुस्कुराता चेहरा अब कभी नहीं दिखेगा। घर के उस आंगन में हंसती खेलती समायरा अब कभी नजर नहीं आएगी। कुदरत के इस कहर ने न जाने कितने परिवारों को उजाड़ दिया है। तबाही की ये तस्वीरें जब भी जहन में आती है रूह कांप उठती है। ये त्रासदी इतने गहरे जख्म देगी इस बात का अंदेशा भी नहीं था। शिव बावड़ी का वो हादसा भुलाए नई भूलता। पल भर में मंदिर मलबे में तब्दील हो चुका था। सोमवार का वो दिन उन लोगो के लिए काल का दिन बनकर आया था जो उस दिन शिव बावड़ी मंदिर में मौजूद थे। समायरा का पूरा परिवार इस हादसे में खत्म हो चुका है। 7 लोगों का एक साथ चले जाना बेहद दुखद है और उससे भी ज़्यादा दुखद अपनों की आखिरी झलक को तरस जाना। 11 दिन बीत चुके जाने के बाद समायरा का शव आज बरामद किया गया है। 11 दिन तक वो परिवार उस नन्ही सी बेटी की आखरी झलक देखने के लिए तरस गया था। वो परिवार पूरी तरह से बिखर चुका है। इस हादसे ने वो नासूर दर्द दिया है जो शायद ही किसी के जहन से कभी जाए।
मां की नजरे अपने दुलारे बेटे का इंतजार करती रही, एक पत्नी अपने सुहाग की सलामती के लिए दिन-रात प्रार्थना करती रही और वो नन्ही बच्ची रोज पूछती थी पापा कब आएंगे। नीरज के परिवार की नजरें घटनास्थल पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर थी और आस थी कि कुछ ऐसा चमत्कार हो जाए की नीरज सकुशल लौटे। दिन बीतता गया और परिवार की हिम्मत और आस्था अब जवाब दे रही थी। नीरज के सकुशल लौटने की उम्मीद दिन-व-दिन कम होते जा रही थी। 24 अगस्त को शिमला के शिव बावड़ी हादसे के घटनास्थल से नीरज का शव 11 दिन बाद मिला। हादसे वाले दिन नीरज शिव मंदिर में जलाभिषेक के लिए गया था, लेकिन चंद लम्हों में शिव बावड़ी मंदिर का नामोनिशान तक नहीं रहा। तबाही के उस मलबे में 20 लोगों ने अपनी जान गवां दी। जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों पर दुखो का पहाड़ टूट चूका है, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। नीरज के परिवार वालो का दु:ख शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। 11 दिन तक वो परिवार इस आस में बैठा रहा की शायद नीरज वापस लौट आएंगे। हर रोज इसी उम्मीद में वो नम आंखें इंतजार में रहीं, लेकिन आज लापता नीरज ठाकुर का शव बरामद कर लिया गया है। नीरज समरहिल के रहने वाले थे। नीरज का कुल्लू में होटल का कारोबार था। इस दुखद हादसे में नीरज ठाकुर अपनी मां शांति देवी, पत्नी समा ठाकुर और बेटी सान्या को पीछे छोड़ गए हैं। पल भर में नीरज के परिवार की खुशियां खत्म हो गई है। इस आपदा ने लोगो को जो जख्म दिए हैं, वो कभी नहीं भूल सकते।
मकान नहीं, जीवन भर की पूंजी थी। वो सपनों का आशियाना था जो पल भर में तबाह हो गया। कितना दर्दनाक रहा होगा वो मंजर जब लोगों ने अपने घरों को अपनी आँखों के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखरते हुए देखा होगा। ये सोचना भी बेहद मुश्किल है। हिमाचल में आसमान से बरस रही आफत से सैकड़ों लोग बेघर हो चुके हैं। दरकते पहाड़, धंसती जमीन और टूटते मकान इस ओर इशारा कर रहे है कि हिमाचल पर ये संकट बड़ा है और ये संकट अभी टला नहीं है। आफत की बरसात ने ऐसा कोहराम मचाया है कि लोग रात को अपने घरों में चैन की नींद भी नहीं सो पा रहे हैं। 24 जून वो तारीख थी जब हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री हुई थी। तबसे अब तक भारी बारिश का दौर जारी है। हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन की तरफ से जारी रिपोर्ट में अब तक 2220 घर पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं। जबकि 11 हजार के करीब घरों में दरारें आई हैं। इसी तरह 9819 घर ऐसे है जिन्हे थोड़ा बहुत नुक्सान पहुंचा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में बारिश और फ्लैश फ्लड में 4695 से अधिक गौशालाएं बह गई हैं। 300 से अधिक दुकानें बारिश में ढह गई हैं। भारी बारिश के कारण हिमाचल में अब तक 8 हजार 99 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। कुदरत के इस कहर के कारण अब तक 350 से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस आपदा से जो हिमाचल को नुक्सान पहुंचा है शायद वो कुछ वक्त के बाद सामान्य भी हो जाए, कुछ समय बाद सब वापिस पटरी पर लौट आए, लेकिन जिन लोगों ने इस त्रासदी में अपनों को खोया है वो अब कभी लौट कर नहीं आएंगे। जब भी तबाही की ये तस्वीरें जहन में आएंगी उन लोगो की आंखें फिर नम हो जाएंगी। आपदा के दिए ये जख्म सदा हरे रहेंगे।
14 अगस्त को नितिका का जन्मदिन था। हमेशा की तरह वो अपने पापा के विश करने का इंतज़ार कर रही थी। नितिका अपने पापा की फोन कॉल का इंतज़ार करते-करते थक गयी। जब उसके पापा का कॉल नहीं आया तो उसने खुद कॉल की लेकिन नंबर नहीं लगा। इसके बाद जो खबर शिमला के समरहिल से आई वो दिल दहला देने वाली थी ।यहाँ सावन की शिवरात्रि की पूजा के लिए जिस शिव बावड़ी मंदिर में सात लोगों का पूरा परिवार पूजा करने गया था, वहां लैंडस्लाइड हुआ और सभी मलबे में दब गए हैं। वो लुधियाना से तुरंत शिमला के लिए निकली। शाम को यहां पहुंचीं तो देखा कि सात में से चार परिजन उनकी मां संतोष शर्मा, भाई अमन और भाई की बेटियों नायरा और साशा के शव मलबे से निकाले जा चुके थे। सावन का छठा सोमवार और 14 अगस्त का वो दिन, नितिका अब शायद कभी नहीं भूल पाएगी। इन चार शवों को मुखाग्नि भी नितिका ने ही दी। तीसरे दिन उनके भाई अमन की पत्नी अर्चना का शव मिला, जिसका संस्कार अर्चना के भाई ने किया। परिवार में इकलौती बची नितिका का कहना है कि उसे 14 अगस्त का दिन कभी नहीं भूल सकता। पापा पवन शर्मा और भतीजी समायरा अभी भी लापता हैं। नितिका का रो रो कर बुरा हाल है। नितिका कहती है, 'वक्त बीत जायेगा, लेकिन यह जख़्म कभी नहीं भर पायेगा।Ó
हिमाचल प्रदेश में आई त्रासदी ने जो दर्द दिया है वो नासूर है। त्रासदी ने जो गहरे जख्म दिए हैं, इन जख्मों का न मरहम है और न कोई दवा और न ही आने वाला वक्त ये जख्म भर सकता है। मंडी के पड़ोह के रहने वाले नितीश भी इसी दर्द से गुजर रहे हैं। 14 अगस्त की वो सुबह नितीश के परिवार के लिए नया सवेरा नहीं, बल्कि काल का ग्रास ले आया। 14 अगस्त की सुबह लगभग 5 बजे नितीश के घर के पीछे अचानक ढेर सारा मलबा आ गया। अफरातफरी में सभी घर से बाहर निकल आए, लेकिन 6 महीने की सानिया घर के अंदर ही रह गई थी। नितेश की 18 वर्षीय पत्नी मोनिका और 17 वर्षीय बहन रविता उस दुधमुंही को बचाने के लिए घर के अंदर गई। ये दोनों यही सोचकर घर में गई कि बच्ची को उठाकर तुरंत बाहर आ जाएंगी, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है। अचानक मलबा घर पर आ गया और तीनों घर सहित उस मलबे में दब गईं। 45 वर्षीय माता रचना देवी और 11 वर्षीय एक अन्य बहन गोपी मलबे की चपेट में आ गई और उसके साथ बहती चली गई। इतने में गांव वालों को पता चल गया और उन्होंने दोनों मां-बेटी को बाहर निकाल दिया। नितीश और उसकी एक अन्य 15 वर्षीय बहन जाह्नवी भागकर खुद को बचाने में कामयाब हो सके। मां के पांव में गंभीर चोट लग चुकी थी। पांव का इन्फेक्शन इतना बढ़ गया कि डॉक्टरों को घुटने से नीचे पांव ही काटना पड़ गया। माता हॉस्पिटल में उपचारधीन है, लेकिन अभी पत्नी, बेटी और बहन का कोई सुराग नहीं लग पाया है। परिवार के इकलौते सहारे नितीश के सिर पर दुखों का पहाड़ टूटने के साथ-साथ जिम्मेदारियों का बोझ भी है। अब नितीश को समझ नहीं आ रहा कि वो अस्पताल में उपचाराधीन मां को संभाले या फिर सांबल में आकर दिन भर अपनी पत्नी, बेटी और बहन के लिए चल रहे तलाशी कार्य को देखे। नितीश पर जो दुखो का पहाड़ टूटा है उस दर्द को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है और नामुमकिन है इस हानि की भरपाई कर पाना।
भारी बारिश के कारण प्रदेश में जारी आपदा की स्थिति से प्रभावशाली तरीके से निपटने में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा आगे बढ़कर सक्रिय नेतृत्व प्रदान करने की नीति आयोग ने सराहना की है। विश्व बैंक के बाद अब नीति आयोग ने आपदा की इस घड़ी में मुख्यमंत्री के कुशल प्रबन्धन की प्रशंसा की है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन के. बेरी ने एक पत्र के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों की सराहना की। पत्र में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार, आपदा प्रबंधन टीमों सहित अन्य सभी हितधारक, जरूरतमंदों को राहत प्रदान करने के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। नीति आयोग इस चुनौतीपूर्ण समय में राज्य को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। सुमन के. बेरी ने कहा है कि राज्य में भीषण त्रासदी की घटनाएं चौंकाने वाली हैं। इस कारण राज्य में कृषि, समग्र आजीविका और आधारभूत अधोसंरचना को भारी क्षति हुई है। आपदा की गंभीरता को देखते हुए नीति आयोग संकट के इस समय में हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ दृढ़ता के साथ खड़ा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नीति आयोग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग के प्रोत्साहन से राज्य सरकार को और अधिक तत्परता के साथ राहत एवं बचाव कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य को इस वर्ष बरसात के दौरान अभी तक 12000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार सभी प्रभावितों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश एक बार पुन: इस चुनौतिपूर्ण स्थिति से पार पाते हुए एकजुट होकर उभरेगा।
हिमाचल प्रदेश में अडाणी ग्रुप ने सेब के रेट ओपन कर दिए हैं। मगर यह ओपन मार्केट की तुलना में 30 से 50 रुपये तक प्रति किलो कम हैं। इससे बागवान भड़क गए हैं और अडाणी समूह पर सेब मार्केट क्रैश करने के आरोप लगा रहे हैं। दरअसल, अडाणी ने इस बार 20 रुपये से लेकर 95 रुपये तक प्रति किलो के रेट ओपन किए हैं, जबकि ओपन मार्केट में प्रीमियम क्वालिटी का सेब अधिकतम 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। ऐसे में अदाणी द्वारा कम रेट ओपन करने से सेब के बाजार भाव गिरेंगे। बीते सालों के दौरान भी इसे लेकर बागवान सड़कों पर लंबी लड़ाई लड़ चुके हैं और अदानी के रेट ओपन करते ही चार-पांच सालों से सेब के गिरे धड़ाम हुए हैं। यह मार्केट रेट गिराने की साजिश : सोहन सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर ने इसे मार्केट रेट गिराने की साजिश बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से सेब के रेट रिव्यू करने की मांग की। उन्होंने प्रदेश के बागवानों से भी अपील की कि बागवानों को इस तरह लूटने का काम करने वाले औद्योगिक घरानों को आइना दिखाना जरूरी है। इसलिए इन्हें सेब न दें।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य प्रतिभा सिंह 25 अगस्त से अपने संसदीय क्षेत्र मंडी के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह इस क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगी व प्रभावित लोगों से भी मिलेंगी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने हिमाचल प्रदेश में जारी आपदा के लिये कांग्रेस पार्टी की ओर से राहत सामग्री बांटने के लिये प्रदेश कांग्रेस महासचिव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अमित पाल सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी है। उनके साथ कांग्रेस महासचिव देवेंद्र बुशेहरी व कैप्टन एस के सहगल को भी दायित्व सौंपा गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी एक पत्र में प्रदेश कांग्रेस नेताओं से प्रदेश में आपदा से लोगों को राहत देने के लिये दान देने की अपील की गई है। कांग्रेस महासचिव संगठन के सी बेनुगोपल ने कहा है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के कोष में पार्टी के सभी नेता व आम नागरिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बैंक खाता संख्या 307804010028128 आईएफएससी यूबीआईएन 0530786 में सीधे तौर पर जमा करवा सकते हैं। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश में भारी बारिश व बाढ़ से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए व लोगों को इस आपदा में किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हर संभव सहयोग देगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य प्रतिभा सिंह ने मंडी संसदीय क्षेत्र के आनी में आज सुबह हुए भारी भूस्खलन से हुई भवनों की क्षति पर दुख प्रकट किया हैं। प्रतिभा सिंह ने कुल्लू जिला प्रशासन से प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद करने को कहा हैं। उन्होंने कुल्लू जिला प्रशासन से आपदा से प्रभावित सभी लोगों की हर संभव मदद करने को कहा हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी लोगों से इस आपदा के समय अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत रहने का आग्रह किया हैं।
राजधानी शिमला के समरहिल क्षेत्र में शिव बावड़ी मंदिर में हुई त्रासदी के 11वें दिन वीरवार को एक और शव मलबे में मिला है। इस हादसे में मृतकों की संख्या 18 पहुंच गई है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड, पुलिस, अग्निशमन, स्थानीय लोग शव निकालने में जुटे हुए हैं। एसपी संजीव गांधी ने बताया कि अभी बॉडी की लोकेशन पता चली है। मलबे को हटाने के लिए पानी की बौछार की जा रही है। जेसीबी मशीन से खुदाई की जा रही है। बता दें कि इससे पहले 17 शव बरामद हो चुके हैं। दो लोग अभी लापता हैं।
भारत के चंद्रयान-3 उपग्रह के विक्रम लैंडर की चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही इतिहास के पन्नों में प्रदेश के कांगड़ा जिले का भी नाम जुड़ गया है। कांगड़ा जिले के रजत अवस्थी पुत्र धनी राम अवस्थी और डॉ. अनुज चौधरी पुत्र अमर सिंह चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने वाले रॉकेट की कंट्रोलिंग कर इस मिशन का हिस्सा बने हैं। रजत अवस्थी इसरो में 2012 से सेवाएं दे रहे हैं। अवस्थी का जन्म 1989 को सेवानिवृत्त बीडीओ धनी राम अवस्थी के घर में हुआ है। पढ़ने में होशियार रजत की दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई सिद्धपुर के सेक्रेट हार्ट स्कूल में हुई है। 12वीं करने के बाद रजत ने स्पेस साइंस में बीटेक की पढ़ाई की और 2012 में इसरो में सेवाएं देने के लिए चुने गए। वहीं, दो साल की सेवाओं के दौरान 2014 में उन्हें इसरो में टीम एक्सीलेंसी अवार्ड से सम्मानित किया गया है। चंद्रयान-3 मिशन से पहले रजत मंगलयान और चंद्रयान-2 का भी हिस्सा रह चुके हैं। उनके पिता धनीराम अवस्थी ने कहा कि गौरव की बात है कि उनके बेटे ने चंद्रयान मिशन का हिस्सा बनकर प्रदेश के साथ अपने जिले का नाम रोशन किया है। वहीं, 27 साल के डॉ. अनुज चौधरी की पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई है। पहली से लेकर आठवीं तक अनुज गांव के ही मिडिल स्कूल जंदराह में पढ़े हैं, जबकि नवमी तथा मैट्रिक बाबा बड़ोह में करने के बाद बारहवीं की परीक्षा ग्रीन फील्ड स्कूल नगरोटा बगवां से पास की। बचपन से ही अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का सपना लिए अनुज ने मास्टर आफ साइंस की डिग्री स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से की, जबकि पेनसिलवेनिया विश्वविद्यालय से एमबीए किया। अनुज चौधरी ने अमेरिका में एमआईटी से पीएचडी की है, जहां से अंतरिक्ष शोध की चाहत के चलते उन्होंने यूरोपियन स्पेस एजेंसी में सिलेक्शन के लिए एग्जाम दिया था। अनुज ने इस एजेंसी में 12वें रैंक के साथ अपनी जगह पक्की की थी। अनुज के पिता दिल्ली में अकाउंटेंट हैं, जबकि उनकी माता सरिता देवी गृहिणी हैं। अपने बेटे की इस उपलब्धि पर उनकी माता ने गर्व महसूस करते हुए बताया है कि देश को गौरव दिलाने वाले इस बड़े अभियान में उनका बेटा भी शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि उनके बेटे को बचपन से ही साइंटिस्ट बनने का शौक था। इसे उन्होंने पूरा कर अपने माता-पिता के साथ देश और क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है।
प्रदेश में भारी बारिश के बीच सोलन, शिमला, मंडी और हमीरपुर जिले में बिजली संकट गहरा गया है। ऑरेंज अलर्ट के बीच जारी भारी बारिश के चलते प्रदेश में 2897 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं। आधे से अधिक ट्रांसफार्मर इन चार जिलों में हैं। मंडी में 1142, शिमला में 598, हमीरपुर में 376 और सोलन में 410 ट्रांसफार्मर बंद हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने नौ एचपीएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए हैं। एएसपी आईआरबी बस्सी नरेंद्र कुमार को एएसपी सिरमौर, एएसपी सिरमौर सोम दत्त को एएसपी आईआरबी बस्सी, डीएसपी पीटीसी डरोह अमित ठाकुर को डीएसपी लीव रिजर्व शिमला, डीएसपी सिटी शिमला तजिंदर कुमार को डीएसपी सेकंड आईआरबी सकोह, एसडीपीओ कांगड़ा मदन लाल धीमान को डीएसपी फर्स्ट आईआरबी बनगढ़, डीएसपी फर्स्ट आईआरबी बनगढ़ अंकित शर्मा को एसडीपीओ कांगड़ा, डीएसपी विजिलेंस एसआईयू शिमला, वरुण पटियाल को डीएसपी सिटी शिमला, एसडीपीओ आनी चंद्र शेखर को डीएसपी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स शिमला और एसडीपीओ सुंदरनगर दिनेश कुमार को डीएसपी सेकंड आईआरबी सकोह लगाया गया है। इसके साथ ही नियुक्ति का इंतजार कर रहे भरत भूषण को एसडीपीओ सुंदरनगर और निशा सिंह को डीएसपी लीव रिजर्व धर्मशाला लगाया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक डॉ. सुरेंद्र पाल ने बताया कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में आज भी भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। इसे देखते हुए आज ऑरेंज अलर्ट और कल के लिए यलो अलर्ट दिया गया है। परसों से मानसून के कमजोर पड़ने के आसार हैं।रहा है। वहीं किसानों को मार्केट तक अपने उत्पाद पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
44 मरीजों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि, 59 मरीजों में टाइफाइड के लक्षण हिमाचल प्रदेश में जलजनित रोग पांव पसारते जा रहे हैं। दिन प्रतिदिन बढ़ रहे जलजनित रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। विभाग ने इसको लेकर एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों को आसपास साफ-सफाई और उबालकर पानी पीने की सलाह दी है। जानकारी के अनुसार स्क्रब टाइफस बीमारी की आशंका के चलते प्रदेश के अस्पतालों में 129 मरीजों के सैंपल लिए गए। इसमें 44 लोगों में स्क्रब टाइफस की पुष्टि हुई। इसके अलावा 217 लोगों की टाइफाइड को लेकर जांच की गई। इनमें 59 मरीजों में बीमारी के लक्षण पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने बीमारियों को लेकर मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अलर्ट किया है। ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के टेस्ट कराने को कहा गया है। अस्पताल प्रशासन को पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में मूसलाधार बारिश के चलते लोगों के घरों में मटमैला पानी की सप्लाई हो रही है। इससे जलजनित के आंकड़ों में इजाफा हो रहा है। एनएचएम के निदेशक सुदेश मोक्टा ने कहा कि प्रदेश में जलजनित रोग के मामले बढ़ने से स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट किया गया है। प्रतिदिन जिलों से बीमारी से ग्रसित मरीजों की रिपोर्ट ली जा रही है। बीमारी के लक्षण तेज बुखार 104 से 105 डिग्री तक आ सकता है जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना शरीर में अकड़न या शरीर टूटा लगना अधिक संक्रमण में गर्दन, बाजू के नीचे कूल्हों के ऊपर गिल्टियां आना
सेब ढुलाई में लगे ट्रक जगह-जगह फंसे पीडब्ल्यूडी का नुकसान करीब 2800 करोड़ तक पहुंचा भारी बारिश होने के कारण जगह-जगह भूस्खलन होने से प्रदेश भर में करीब 700 सड़कें बंद पड़ी हैं। शिमला और मंडी जोन में 433 सडक़ें बाधित हुई हैं। इनमें शिमला में सबसे ज्यादा 220 सडक़ें ठप हैं। अकेले शिमला सर्कल में 134 सडक़ें बाधित हैं, जबकि मंडी में 213 सडक़ें बाधित हैं। इनमें मंडी जोन में 151 सडक़ें पूरी तरह से ठप हैं। ताजा बारिश के बाद मुश्किलें उन इलाकों में भी महसूस हो रही हैं, जिनमें बीते करीब एक सप्ताह से सडक़ें बंद हैं। यहां आवश्यक वस्तुओं के दाम दोगुने हो गए हैं। हमीरपुर जोन में 180 और कांगड़ा में 93 सडकें बंद हैं। नेशनल हाईवे पर भी बारिश का असर देखने को लगातार मिल रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग सडक़ें बहाल करने में 800 जेसीबी की मदद ले रहा है। पीडब्ल्यूडी को अभी तक 116 पुलों का नुकसान हो चुका है। इनमें 19 पुल पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं, जबकि 97 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, सेब ढुलाई में लगे ट्रक जगह-जगह फंसे हुए हैं। पीडब्ल्यूडी का नुकसान करीब 2800 करोड़ तक पहुंच चुका है।
प्रदेश में विभिन्न जगहों पर फंसी 266 गाड़ियां हिमाचल प्रदेश में एचआरटीसी कुल 3804 रूटों पर बसों का संचालन करता है। इनमें से करीब 1300 रूटों पर एचआरटीसी की बस सेवा फिर से बंद हो गई है। इसके कारण एचआरटीसी को हर दिन लाखों रुपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। वहीं किसानों को मार्केट तक अपने उत्पाद पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इंडियन ऑयल कारपोरेशन में छूट न देने का फैसला वापस लिया हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के बीच एचआरटीसी को बड़ी राहत मिली है। एचआरटीसी को डीजल पर मिलने वाली प्रति लीटर डेढ़ रुपए की छूट अब जारी रहेगी। इंडियन ऑयल कारपोरेशन में छूट न देने का अपना फैसला वापस ले लिया है। इंडियन ऑयल कारपोरेशन के फैसले से निगम को प्रति माह करीब एक करोड़ रुपए की बचत होगी। वहीं, सालाना 10 से 15 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। गौरतलब है को इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने पहले एचआरटीसी को डीजल पर मिलने वाली छूट को बंद करने का फैसला लिया था। इसके बाद एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर की ओर से केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के समक्ष यह मामला उठाया गया था। इनके आग्रह पर इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने फैसला वापस ले लिया है। इस बारे में एक पत्र के माध्यम से एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर को इंडियन ऑयल कारपोरेशन की ओर से जानकारी प्रदान की गई है।
2-3 और बिल्डिंग को खतरा, मौके पर पहुंचे स्थानीय प्रशासन के अफसर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के आनी में 5 से ज्यादा बिल्डिंगें ताश के पत्तों की तरह ढह गई हैं। अब तक किसी तरह के जानी नुकसान की सूचना नहीं है, क्योंकि प्रशासन ने इन्हें पहले ही खाली करवा दिया था। आनी बस स्टैंड के पास 2 से 3 और बिल्डिंग के गिरने का खतरा बना हुआ है। स्ष्ठरू आनी नरेश वर्मा की अगुवाई में स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया है और नुकसान का आकनल किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ढहने वाले मकानों की संख्या सात से आठ भी हो सकती है। पहले ही खाली करा ली गई थीं इमारतें हादसा आज सुबह 9 बजकर 30 मिनट का बताया जा रहा है। पूर्व में एक बिल्डिंग में कांगड़ा को-ऑपरेटिव बैंक और दूसरे भवन में स्क्चढ्ढ बैंक भी चल रहा था। कुछ कमरे में किराएदार और दुकानें भी चल रही थी। इनमें सात से 11 जुलाई के बीच की भारी बारिश से ही दरारें पड़नी शुरू हो गई थी। इस खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने इन्हें पहले ही खाली करवा दिया था और भवन मालिकों को मकान खाली करने के नोटिस दे रखे थे। मगर, उस दौरान पहाड़ी में सबसे ऊपर बने मकान के गिरने का किसी को अंदेशा नहीं था। इनमें भी दरारें पड़नी शुरू हो गई थी। लिहाजा लोगों ने इन्हें भी खुद ही खाली कर दिया था। बिल्डिंगों के साथ बने मकानों को खतरा बिल्डिंगें ढहने के बाद आनी के लोग दहशत में आ गए हैं। खासकर जिनके मकान इस बिल्डिंग के साथ बने हैं, वह नुकसान को लेकर ज्यादा चिंतिंत हैं। बता दें कि पहाड़ों पर इस बार बारिश में भारी तबाही मची है। इसी तरह की तस्वीरें प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी सामने आ रही हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि भारत के लिए यह ऐतिहासिक और यादगार क्षण हैं क्योंकि आज हमारा देश चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। उन्होंने कहा कि देश के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है और पूरे विश्व में देश का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए वे लम्बे समय से दिन-रात मेहनत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह भारत के वैज्ञानिकों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 1962 में अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी की स्थापना की थी, जिससे भारत के अंतरिक्ष अभियानों के लिए मजबूत नींव रखने का मार्ग प्रशस्त किया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि राज्य में मूसलाधार बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई अधोसंरचना की बहाली के लिए राज्य के सभी उपायुक्तों और संबंधित विभागों को 165.22 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त जल आपूर्ति योजनाओं के रखरखाव के लिए जल शक्ति विभाग को 74 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग को 14.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड को 3.70 करोड़ रुपये तत्काल राहत प्रदान करने के लिए तथा बागवानी और कृषि विभागों को क्रमशः दो-दो करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसके अलावा, प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने और विभिन्न मरम्मत कार्यों के लिए सभी उपायुक्तों को ६३.०७ करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और निर्माण के लिए उपायुक्त कांगड़ा, सोलन और शिमला को 4.95 करोड़ रुपये भी जारी किए गए हैं। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उपायुक्तों और संबंधित विभागों को क्षतिग्रस्त योजनाओं एवं अन्य अधोसंरचना की मरम्मत में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों तथा प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए धन की कोई कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अगले 48 घंटों में भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए सतर्क रहने की भी अपील की। उन्होंने पिछले 12 घंटों के दौरान बारिश जनित घटनाओं के कारण मंडी और शिमला जिलों में छह लोगों की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
सरकार ने नदियों में पारिस्थितिकी के खतरनाक परिवर्तन को देखते हुए लिया निर्णय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को यहां कहा कि राज्य सरकार ने ब्यास नदी बेसिन और उसकी सहायक नदियों में स्टोन क्रशर के प्रयोग को तुरंत प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान मौजूदा परिस्थितियों और कांगड़ा जिले में चक्की नदी सहित कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिलों में ब्यास और इसकी सहायक नदियों में पारिस्थितिकी के खतरनाक परिवर्तन को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के अनुसार अगले आदेश तक बारहमासी और गैर-बारहमासी दोनों नालों के सभी स्टोन क्रशर के संचालन को बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत राज्य की नाजुक पारिस्थितिकी और पर्यावरण को संरक्षित करने, बस्तियों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, वैध खनन के लिए जारी को रद्द नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा कैप्टिव और अस्थायी स्टोन क्रशर इस आदेश के दायरे में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग को इस प्रकार की विनाशकारी स्थिति उत्पन्न करने वाले कारकों की पहचान करने के लिए आईआईटी, एनआइटी, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों से तुरंत उच्च स्तरीय विशेषज्ञ परामर्श लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग अवैज्ञानिक और अवैध खनन गतिविधियों के संचयी प्रभाव के मूल्यांकन के लिए एक बहु क्षेत्रीय विशेषज्ञ समिति का गठन करके एक व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन भी करेगा। इस अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर दूरी से संबंधित परिसीमाएं फिर से परिभाषित की जाएंगी ताकि नदियों के समीप पर्यावरण को संरक्षित करने और राज्य में अन्य ऐसी किसी भी मानवजनित आपदा से बचने के लिए ऐसे कार्यों का विनियमन और प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
ऐसा करने वाला भारत पहला देश, यान ने मैसेज भेजा 'मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया' 23 अगस्त की शाम को चांद पर जैसे ही सूरज उगा, इसरो के चंद्रयान-3 ने उसके साउथ पोल पर लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। इसी के साथ भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कामयाब लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। चंद्रयान-3 ने बुधवार शाम 5 बजकर 44 मिनट पर लैंडिंग प्रोसेस शुरू की। इसके बाद अगले 20 मिनट में चंद्रमा की अंतिम कक्षा से 25 किमी का सफर पूरा किया। शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद पर पहला कदम रखा। ढ्ढस्क्रह्र के डायरेक्टर एस. सोमनाथ ने कहा- अगले 14 दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रज्ञान रोवर को बाहर आने में एक दिन का समय भी लग सकता है। चांद पर पहुंचकर चंद्रयान-3 ने मैसेज भेजा- मैं अपनी मंजिल पर पहुंच गया हूं। चांद पर लैंडिग करने वाला भारत चौथा देश इस कामयाबी के साथ भारत चांद के किसी भी हिस्से में मिशन लैंड कराने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले अमेरिका, सोवियत संघ और चीन ही ऐसा कर सके हैं।पीएम बोले- यह क्षण जीत के चंद्रपथ पर चलने का मेरे प्यारे परिवारजनों! जब हम अपनी आंखों के सामने ऐसा इतिहास बनते हुए देखते हैं तो गर्व होता है। ऐसी ऐतिहासिक घटनाएं राष्ट्र जीवन की चेतना बन जाती हैं। यह पल अविस्मरणीय है। यह क्षण अभूतपूर्व है। यह क्षण विकसित भारत के शंखनाद का है। यह क्षण नए भारत के जयघोष का है। यह क्षण मुश्किलों के महासागर को पार करने का है। यह क्षण जीत के चंद्रपथ पर चलने का है। वैज्ञानिकों को बधाई मोदी ने कहा, आज हम अंतरिक्ष में नए भारत की नई उड़ान के साक्षी बने हैं। हर घर में उत्सव शुरू हो गया है। हृदय से मैं भी अपने देशवासियों के साथ अपने परिवारजनों के साथ इस उमंग और उल्लास से जुड़ा हुआ हूं। मैं टीम चंद्रयान को, इसरो को और देश के सभी वैज्ञानिकों को जी-जान से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। हमारे वैज्ञानिकों के परिश्रम से भारत उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा है, जहां आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच सका है।
कहा- प्रभावितों के लिए राहत शिविरों में हो समुचित व्यवस्था नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में पिछले 36 घंटे से प्रदेश भर में भारी बारिश हो रही है। जिससे प्रदेश में जान-माल को भारी नुक़सान हुआ है। इस मानसून में यह तीसरी बार है, जब बारिश के कारण प्रदेश में इतनी भारी तबाही हुई है। उन्होंने कहा कि इस बारिश में कई लोगों की दुखद मृत्यु हुई है। जयराम ठाकुर ने सभी मृतकों श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति और परिजनों को इस दु:ख की घड़ी में संबल देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि इस आपदा में लोगों की मृत्यु हुई है, लोगों के जीवन के नुक़सान की कभी भरपाई नहीं की जा सकती हैं। कहा कि अभी ख़तरा टला नहीं हैं। मौसम विभाग ने अभी दो दिन और बरसात की संभावना जताई है। इसलिए लोग इस आपदा में बहुत एहतियात बरतें। अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें। अनावश्यक यात्रा ना करें।उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि किसी प्रकार से ख़तरे की जद में आन वाले घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं, जिससे किसी अनहोनी की आशंका से बचा जा सके। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि दस दिन के भीतर प्रदेश दूसरी बार आपदा की चपेट में हैं। सरकार से निवेदन हैं कि किसी भी प्रकार के संभावित ख़तरे के दायरे में आने वाले घरों को तुरंत ख़ाली करवा कर उनमें रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजा जाए। ख़तरा बने पेड़ों को जल्दी से जल्दी काटा जाए। जिससे पेड़ों के गिरने होने वाले नुक़सान से बचा जा सके। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि आपदा राहत शिविरों में सभी प्रकार की व्यवस्था की जाए, जिससे वहां रहने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सराज विस क्षेत्र में हुई मृत्यु पर जताया शोक सराज़ विधानसभा क्षेत्र में बारिश के कारण हुई अलग-अलग दुर्घटनाओं में छह लोगों की दुखद मृत्यु हुई है। मैं सभी मृतकों के आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं। ईश्वर शोक संतृप्त परिवारों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति और संबल प्रदान करें।
हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करे और प्रदेश सरकार को तुरंत 10 हजार करोड़ की राहत राशि प्रदान की जाए। राजीव शुक्ला ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से आग्रह किया कि वे संसद के दोनों सदनों में सभी सांसदों को पहाड़ी राज्य को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से बाहर राहत प्रदान करने की अनुमति दें। राजीव शुक्ला ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल में हुई तबाही की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। प्रदेश ने अपने इतिहास में आज तक ऐसी आपदा कभी नहीं झेली है। राज्य में अब तक 330 लोगों की मौत हो चुकी है, 35 लापता हैं, जबकि 12 हजार घर तबाह हो गए हैं। शुक्ला ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य को 13 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। नेशनल हाईवे बह गए हैं। भारी बारिश के कारण पूरे हिमाचल के ऊपरी और निचले इलाकों को नुकसान हुआ है। पहाड़ी राज्य में 7 से 15 जुलाई के बीच, फिर 10 से 14 अगस्त के बीच और अब फिर से बारिश से तबाही हो रही है। 7 से 15 जुलाई के बीच प्रदेश सरकार ने 48 घंटों में 75 हजार पर्यटकों और 17 हजार गाड़ियों को सुरक्षित बाहर निकाला। केंद्र सरकार उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश को विशेष पैकेज प्रदान करे। अभी तक केंद्र सरकार ने हिमाचल को सिर्फ 200 करोड़ रुपये जारी किए हैं। राजीव शुक्ला ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति से भी आग्रह करूंगा कि वे सांसदों को अपने सांसद विकास निधि से हिमाचल प्रदेश सरकार को राहत कोष में दान देने की अनुमति दें। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दिल्ली का दौरा कर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को प्रदेश में हुए नुकसान से अवगत भी करवा चुके हैं। इसलिए केंद्र सरकार जल्द से जल्द हिमाचल को 10 हजार करोड़ की राहत राशि जारी करे।


















































