पंचायत भवन में हुआ भाजपा शिमला मंडल की कार्यसमिति बैठक का आयोजन पंकज सिंगटा। शिमला मंडल अध्यक्ष राजेश शारदा ने बताया कि कार्यसमिति बैठक में पहला सत्र को भाजपा सह मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा द्वारा संबोधित किया गया। उन्होंने केंद्र बजट 2023 पर अपना व्याख्यान कार्यसमिति के समक्ष रखा नंदा ने बताया कि आने वाले समय में भाजपा बुद्धिजीवी सम्मेलन का आयोजन भी करेगी, जिसमें बजट को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस बार का बजट सप्त ऋषि बजट के नाम से जाना जाएगा और आने वाले 2024 के आम चुनावों में भाजपा का प्रचार पत्र यह आम बजट ही होगा। नंदा ने बताया कि इस बार के रेल बजट में हिमाचल प्रदेश को 1902 करोड़ की बड़ी सौगात मिली है, जिसके अंतर्गत हिमाचल प्रदेश की 3 बड़ी रेल परियोजनाओं का ध्यान रखा गया है। इससे भानूपाली बिलासपुर, चंडीघाट बद्दी और नंगल तलवाड़ा रेल परियोजनाओं को पंख लगेंगे। राजेश शारदा ने बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता गणेश जाते द्वारा आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और किस प्रकार से अगले तीन महीने का भाजपा का रोड मैप रहने वाला है, उसको लेकर गणेश दत्त द्वारा कार्यसमिति को अवगत करवाया गया। भाजपा प्रदेश सचिव कुसुम सदरेट ने बूथ सशक्तिकरण के बारे में कार्यसमिति को अवगत करवाया और बूथ सशक्तिकरण अभियान के बारे में विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा भाजपा बूथ स्तर की पार्टी है और आने वाले 2024 के चुनावों में यह अभियान महत्वपूर्ण रहने वाला है। भाजपा प्रत्याशी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष संजय सूद ने शिमला शहर में होने वाले नगर निगम चुनावों के बारे में कार्यसमिति से विस्तृत चर्चा की और भाजपा की इस पर क्या रणनीति रहने वाली है। इसके बारे में भी कार्यसमिति से विस्तृत चर्चा की गई। संजय ने बताया कि भाजपा आने वाले नगर निगम के चुनाव के लिए तैयार है और शिमला शहर में नगर निगम के 18 बोर्ड आते हैं, जिसमें भाजपा अच्छा प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से 41 वार्डों को वापस 34 वार्डों कांग्रेस सरकार द्वारा तबदील कर दिया गया है वह गलत है, इससे जनता को असुविधा होगी। जबसे कांग्रेस की सरकार प्रदेश में स्थापित हुई है, तबसे शिमला शहर का विकास ठप हो गया है। भाजपा मंडल महामंत्री गगन लखनपाल द्वारा मन की बात और डाटा मैनेजमेंट पर एक प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया गया। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश भारद्वाज ने प्रदेश में चल रही राजनीतिक हालातों पर कार्यसमिति से चर्चा की। उन्होंने कहा की कांग्रेस की सरकार बदला बदली की भावना से काम कर रही है, जिस प्रकार से प्रदेश भर में सरकारी संस्थानों को कांग्रेस द्वारा बंद कर दिया गया वो गलत है और भाजपा इसकी कड़ी निंदा करती है। बैठक में विजय शर्मा, सुशील चौहान, राजीव पंडित, प्रताप राणा, भारती सूद, सत्या कैंडल, अनिल कश्यप, मंजू सूद, जसविंदर सिंह, पोकी सुनील धर, सुदीप महाजन, राजू ठाकुर, अनूप वैद, रजनी सिंह, भानु, जगजीत बग्गा, संजीव देष्टा, शैली शर्मा, किमी सूद, राजेश्वरी व तरुण राणा उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट बदलने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार आगामी दिनों में चार दिन मौसम खराब रहने की संभावना है। वहीं ताजा पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से 25 से 28 फरवरी तक प्रदेश के मध्य व उच्च पर्वतीय कई भागों में बारिश-बर्फबारी की संभावना है। मध्य व मैदानी इलाकों के कुछ भागों में 28 फरवरी को आंधी चलने का अलर्ट जारी हुआ है। वहीं, आज राजधानी शिमला व अन्य भागों में मौसम साफ बना हुआ है। धूप खिलने से तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 1 और 2 मार्च को भी मौसम खराब रह सकता है। न्यूनतम तापमान शिमला में न्यूनतम तापमान 7.4, सुंदरनगर 4.5, भुंतर 3.9, कल्पा 2.0, धर्मशाला 9.2, ऊना 6.8, नाहन 12.9, केलांग माइनस 8.0, पालमपुर 8.0, सोलन 4.5, मनाली 3.6, कांगड़ा 9.0, मंडी 4.6, बिलासपुर 8.0, हमीरपुर 6.7, चंबा 7.2, डलहौजी 8.3, जुब्बड़हट्टी 9.8, कुफरी 6.1, कुकुमसेरी माइनस 5.5, नारकंडा 3.9, रिकांगपिओ 5.1, सेऊबाग 2.5, धौलाकुआं 7.8, बरठीं 4.9, पांवटा साहिब 12.0 और सराहन में 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने को विशेष प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रदेश सरकार विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय सहायता के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जाइका) का सहयोग लेने पर विचार कर रही है। इस पहल के लिए प्रस्तावित वित्तीय परिव्यय 2835 करोड़ रुपए है। राज्य सरकार ने प्रदेश में त्रि-स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल के बुनियादी ढांचे के लिए 1620 करोड़ रुपए आवंटित करने की योजना बनाई है, जिसमें 1010 करोड़ रुपए अपेक्षित वित्तीय परिव्यय से हमीरपुर, चंबा और नाहन में नए चिकित्सा महाविद्यालयों को सुदृढ़ करना शामिल है। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय हमीरपुर में कैंसर से संबंधित सुपर-स्पेशियलिटी सेवाएं प्रदान करने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा विकसित करने पर 400 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। सरकार नर्सिंग शैक्षणिक ढांचा और नए चिकित्सा महाविद्यालयों में हाई-एंड डायग्नोस्टिक क्षमता के लिए 60 करोड़ रुपए की अतिरिक्त धनराशि के लिए जाइका से विचार-विमर्श कर रही है। प्रदेश में द्वि-स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार जाइका के वित्तपोषण से 1215 करोड़ रुपए आवंटित करने का प्रस्ताव कर रही है। इसमें प्रत्येक चिकित्सा खंड में नागरिक अस्पतालों में द्वि-स्तरीय देखभाल सुविधा जैसे सीटी स्कैन व आधारभूत ढांचे के लिए 988 करोड़ रुपए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सेकंडरी केयर सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए 135 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं तथा 92 करोड़ रुपए अन्य नागरिक अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रखरखाव और डायग्नोस्टिक्स, पावर बैकअप और अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) को सुदृढ़ करने के लिए प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेशवासियों को उनके घर-द्वार के निकट विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना है और इस क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए धन का अभाव आड़े नहीं आएगा। स्वास्थ्य विभाग इन योजनाओं के आधार पर एक प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगा, जिस पर जाइका के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कांग्रेस द्वारा समरहिल में प्राइमरी हेल्थ सेंटर को डेनोटिफाई करने पर भाजपा ने चलाया हस्ताक्षर अभियान
भाजपा शिमला मंडल द्वारा वीरवार को समरहिल चौक पर हस्ताक्षर अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, प्रत्याशी संजय सूद और प्रदेश सह मीडिया प्रभारी कर नंदा विशेष रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल महामंत्री गगन लखनपाल ने की। संजय सूद ने कहा कि भाजपा पूरे प्रदेश भर में कांग्रेस के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान का कार्यक्रम चला रही है और इसी कड़ी में आज समरहिल में जो प्राइमरी हेल्थ सेंटर भाजपा सरकार द्वारा खोला गया था जिसमें डॉक्टर भी बैठ गए थे और मरीजों का इलाज भी चल रहा था उसको इस नकारात्मक कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया है, भाजपा इसका कड़ा विरोध करती है और जनता से इसको पुनः खोलने का समर्थन मांगती है। इस कार्यक्रम में जनता का बड़ा योगदान पार्टी को प्राप्त हो रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त शिवम प्रताप सिंह ने उपायुक्त कार्यालय परिसर में बालाराम वर्मा ग्राम पंचायत बग्गी के निवासी द्वारा जिला रेड क्रॉस सोसाइटी शिमला को दान की गई एंबुलेंस को हरी झंडी देकर रवाना किया। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त ने बालाराम वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों की सामाजिक सरोकार के मुद्दों से जुड़ने की सराहना की और रेड क्रॉस जैसे पुनीत कार्य में योगदान देने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। शिवम प्रताप सिंह ने स्थानीय लोगों से रेड क्रॉस की गतिविधियों में अहम भूमिका निभाने पर बल दिया, जिससे निर्धन एवं उपेक्षित वर्गो का उत्थान हो एवं मानवता की सेवा संभव हो सके। इस अवसर पर उपप्रधान ग्राम पंचायत बग्गी देशराज एवं सचिव जिला रेड क्रॉस सोसाइटी शिमला बलबीर सिंह जीलता उपस्थित थे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला हिमाचल प्रदेश के ट्रैफिक टूरिस्ट एवं रेलवे विभाग विभाग द्वारा तीन दिवसीय ट्रेनिंग का आयोजन पुलिस विभाग के अन्वेषण अधिकारियों के लिए करवाया गया। इस प्रशिक्षण में हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों से 35 अन्वेषण अधिकारियों ने भाग लिया। इस ट्रेनिंग का आयोजन 20 से 22 फरवरी तक किया गया। आज इस कोर्स का समापन डीआईजी टीटीआर गुरुदेव शर्मा द्वारा किया गया। इस कोर्स के दौरान भिन्न विषय पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे इस अवसर पर एआईजी संदीप धवल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरवीर सिंह राठौर ने भी प्रतिभागियों को विभिन्न विषयाें पर ट्रेनिंग दी। मुख्यतः इन निम्नलिखित विषयों में दिया प्रशिक्षण डिजिटल एविडेंस कैसे एकत्र करना है तथा अदालत में कैसे पेश करना है। आधुनिक उपकरण एल्को सेंसर लेजर स्पीड मीटर लेजर स्पीड गन का उपयोग कैसे करना है। iRAD एवं e-DAR का उपयोग कैसे करना है। एमवी एक्ट एवं ट्रैफिक रूल्स एवं रेगुलेशन की भी जानकारी दी गई। पुलिस अन्वेषण अधिकारी के दायित्व एवं मौका पर एकत्र भीड़ से किस तरह क्या का व्यवहार किया जाए एवं तुरंत रोड को अन्य वाहन के लिए कैसे खोला जाए पर विस्तृत जानकारी दी गई। सड़क देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह विकास में तभी सहयोग दे सकती है यदि सड़क मार्ग सभी के लिए सुरक्षित हो। विश्व भर में हर वर्ष 1.35 मिलियन से अधिक मौतें होती हैं, जिसमें भारत का 12 प्रतिशत हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश में भी सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा काफी चिंतनीय है। हालांकि भारतवर्ष मैं ट्रैफिक हादसों को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नए मोटर वाहन नियम में जुर्माना जुर्माने की राशि बढ़ाई गई तथा वाहन सुरक्षा के उद्देश्य से नए इंजीनियरिंग मानक लागू किया गया। हिमाचल प्रदेश का पिछले 5 वर्ष का दुर्घटनाओं का आंकड़ा विश्लेषण करने पर पाया गया कि हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों से ज्यादा 12720 दुर्घटनाएं, खुले क्षेत्र में 8570 दुर्घटनाएं हुई। 65 प्रतिशत दुर्घटनाएं 40 वर्ष से कम उम्र के चालकों द्वारा की गई। 26 प्रतिशत दुर्घटनाएं शाम 6.00 से 9.00 बजे के बीच हुई है। पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं ऊना, बद्दी एवं पांवटा साहिब में अधिक पाई गई हैं। हिमाचल प्रदेश पुलिस सड़क सुरक्षा को लागू करने के लिए कृतसंकल्प है। सभी जनसाधारण को नियमों की पालना का अनुसरण स्वयं से शुरू करना चाहिए, ताकि अन्य लोगों को निशा मिसाल पेश करें एक जिम्मेदार सड़क सुरक्षा योद्धा बने।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर और आयोग के सदस्यों डॉ. रचना गुप्ता, राकेश शर्मा और डॉ. नैन सिंह ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से आज राजभवन में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर अध्यक्ष ने राज्यपाल को आयोग की कार्यप्रणाली से भी अवगत करवाया।
मात्र इस बोर्ड के चेयरमैन और सदस्यों को हटाने के लिए आयोग को किया बंद सरकार कई टेंडर्स के टर्म एंड कंडीशन को बदलने का कर रही प्रयास कांग्रेस के झंडों से भर दिया मंडी महाशिवरात्रि का स्थान, आज तक कभी नहीं हुआ पंकज सिंगटा। शिमला भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग में जो भी दोषी पाया जाए, उसके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और जो इन्वेस्टिगेशन प्रोसेस चल रहा है, उसमें विलंब नहीं होना चाहिए। हमारी सरकार से यही मांग है कि चयन आयोग में 39 कोड के अंतर्गत लगभग 4000 नौजवानों की भर्ती प्रक्रिया में विलंब हो रहा है, उनके भविष्य को ध्यान में रखना चाहिए और जल्द से जल्द एक अल्टरनेट मैकेनिज्म सरकार को धरातल पर लेकर आना चाहिए। जैसे-जैसे भर्ती प्रक्रिया में विलंब हो रहा है वैसे वैसे युवाओं की उम्र भी बढ़ रही है और कहीं लोग एग्जाम देने में एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया से बाहर हो रहे हैं। यह चिंता का विषय है- जयराम ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा कि कर्मचारी चयन आयोग को बंद करने से क्या समस्या का समाधान हो जाता है? किसी भी संस्था में अगर अनियमितता पाए जाए तो उसको बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार यह भी बताएं कि अगर कोई वैकल्पिक प्रक्रिया को खड़ा किया जाता है, तो क्या गारंटी है कि वह निष्परक्ष रूप से पारदर्शिता के साथ कार्य करेगी। आज अगर ट्रांसपोर्ट विभाग में एक स्कूटर के नंबर को लेकर अनियामिता पाई गई है, तो क्या ट्रांसपोर्ट विभाग ही बंद कर देंगे। उन्होंने कहा की अक्टूबर 1998 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल द्वारा हिमाचल प्रदेश में अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड का गठन किया गया था और उसके बाद 2016 में इसका नाम बदलकर कर्मचारी चयन आयोग रखा गया था। इसका गठन इसलिए किया गया था। क्योंकि एक कमेटी की रिपोर्ट आई थी, जिसके अंतर्गत यह पाया गया था कि हिमाचल प्रदेश में क्लास 3 और क्लास 4 की भर्तियों में काफी अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा था और इसमें कई प्रकार की धांधली भी हो रही थी। तब से यह चयन आयोग एक बड़ी भूमिका निभा रहा है, आज आयोग के बंद होने से युवाओं को अब शिमला के चक्कर काटने पड़ेंगे। हमीरपुर एक ऐसा स्थान था, जो हिमाचल का सेंटर पॉइंट भी माना जाता है, यहां आवागमन आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ऊपर से नीचे तक के लोग सम्मिलित है की बात कर रहे हैं यह एक स्पष्ट वाक्य नहीं है। इस आयोग में सचिव के माध्यम से ही सारी भर्तियां होती है और अगर सचिव के ऊपर आरोप साबित होते तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, पर कहीं न कहीं लगता है कि केवल मात्र इस बोर्ड के चेयरमैन और सदस्यों को हटाने के लिए यह आयोग को बंद किया गया है। बता दें कि चयन प्रक्रिया में बोर्ड के चेयरमैन और सदस्य की कोई भूमिका नहीं होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में यह सरकार कई टेंडर्स के टर्म एंड कंडीशन को बदलने का प्रयास कर रही है और यह गलत है, इसका हम विरोध करते हैं। कई टेंडर्स तो ऐसे है जिसमें केंद्र सरकार का भी हिस्सा है उसके साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंडी में महाशिवरात्रि के उत्सव में यह पहली बार है कि किसी मुख्यमंत्री ने एक राजनीतिक भाषण दिया है, यह पहल सराहनीय नहीं है। उन्होंने कहा यहां तक की मंडी महाशिवरात्रि के स्थान को कांग्रेस के झंडों से भर दिया गया ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ। हमारी सरकार के समय में सरकार का प्रचार तो हुआ पर पार्टी का प्रचार कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि का पर्व देव संस्कृति से जुड़ा हुआ पर्व है और इसमें अगर देव संस्कृति से जुड़े लोगों को अपनी प्रस्तुति पेश करने का अवसर मिलता तो वह ज्यादा बेहतर था और हमें हिमाचल के कलाकारों को हमेशा बढ़ावा देना चाहिए।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक आरएस अमर और उप-महाप्रबंधक पीतांबर अग्रवाल ने आज राजभवन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भेंट की। क्षेत्रीय निदेशक ने राज्यपाल को भारतीय रिजर्व बैंक और इसके विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने वर्तमान में शिमला क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत विभिन्न प्रकोष्ठों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अवगत करवाया कि शिमला क्षेत्रीय कार्यालय में शीघ्र ही भारतीय रिजर्व बैंक अंबेसडरमैन (ओआरबीआईओ) कार्य करना आरंभ कर देगा। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की सभी शिकायतों का निपटारा ओआरबीआईओ, चंडीगढ़ द्वारा किया जा रहा है और शिमला में ओआरबीआईओ के शुरू होने के बाद अब प्रदेश में संचालित अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, अनुसूचित सहकारी बैंकों, एनबीएफसी इत्यादि आरबीआई विनियमित संस्थाओं से संबंधित सभी शिकायतें का समाधान शिमला क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा। राज्यपाल ने प्रदेश में वित्तीय साक्षरता की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक के प्रयासों की सराहना की और आशा व्यक्त की कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं से राज्य के लोग लाभान्वित होंगे।
पंकज सिंगटा। शिमला हिमाचल प्रदेश राज्य को सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार और जीएसपी गोल्ड पार्टनर का पुरस्कार मिला है। ललित जैन, निदेशक, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग हिमाचल प्रदेश एवं सदस्य सचिव, हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद, (HIMCOSTE) ने 21 फरवरी, 2023 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में हिमाचल प्रदेश राज्य की ओर से पुरस्कार ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्राप्त किया। यह पुरस्कार सुनीता नारायण महा निदेशक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट द्वारा दिया गया । 61 प्रविष्टियों के साथ सोलन को सर्वश्रेष्ठ जिला पुरस्कार और नौ स्कूलों को 'ग्रीन' रेटिंग पुरस्कार से सम्मानित किया गया। माध्यमिक विद्यालय, हिमगिरि व चंबा ने जीएसपी भूमि प्रबंधक पुरस्कार जीता। हिमाचल प्रदेश के दो शिक्षकों ने जीएसपी एंबेसडर पुरस्कार जीता। सीएसई द्वारा हर साल दिए जाने वाले पुरस्कार, स्कूल परिसरों के भीतर संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं के विस्तृत और कठोर वार्षिक ऑडिट पर आधारित होते हैं। यह ऑडिट स्कूलों द्वारा स्वयं सीएसई की मदद से किया जाता है। ग्रीन स्कूल प्रोग्राम (जीएसपी) एक सार्थक पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम है, जिसमें शिक्षक और छात्र अपने स्कूल के परिसर के भीतर हवा, ऊर्जा, भोजन, भूमि, पानी और कचरे का कठोर पर्यावरणीय ऑडिट करते हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य 'करके सीखो' के सिद्धांतों का पालन करके स्कूल समुदाय में पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना है और स्कूलों को पर्यावरण शिक्षा को ज्ञान निर्माण और उपयुक्त शिक्षण संसाधनों के उपयोग के माध्यम से मुख्यधारा की शिक्षा के साथ एकीकृत करने में सक्षम बनाना है। यह कार्यक्रम छात्रों को नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व के बारे में जागरूक होने का एक अनूठा शैक्षिक अवसर प्रदान करेगा, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में रूफटॉप फोटोवोल्टाइक्स प्रौद्योगिकियों और छात्रों को उन तकनीकों के बारे में जानने में सक्षम करेगा, जिनके वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों के माध्यम से पारिस्थितिक लाभ हैं। CSE के ग्रीन स्कूल प्रोग्राम ने भारत के 106 सबसे ग्रीन स्कूलों को किया सम्मानित • हिमाचल प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ हरित राज्य का पुरस्कार मिला, उसके बाद आंध्र प्रदेश और पंजाब का स्थान रहा। • जीएसपी ऑडिट में भाग लेने वाले 707 में से 106 स्कूलों को 'ग्रीन' टैग मिला है। 19 सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त करते हैं। • वार्षिक ग्रीन स्कूल पुरस्कार तीन साल बाद ऑनसाइट भौतिक कार्यक्रम के रूप में वापस आ रहे हैं।
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू 17 मार्च को बजट पेश करेंगे। हिमाचल के गवर्नर शिव प्रताप शुक्ल द्वारा सुक्खू सरकार को बजट सत्र बुलाने की मंजूरी देकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री सुक्खू का यह पहला बजट होगा। बता दें कि हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र 14 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा। इसमें कुल 18 सीटिंग होगी। बजट सत्र की शुरुआत 14 मार्च को सुबह 11 बजे विधानसभा के 2 पूर्व सदस्यों के शोकोद्गार से होगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 के सप्लीमेंटरी बजट पास होगा। 14 मार्च को 11:00 बजे इस सत्र की शुरुआत प्रदेश विधानसभा के किन्हीं पूर्व सदस्यों के देहांत की स्थिति में शोकोद्गार से होगी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2022-23 के अनुपूरक बजट की प्रथम और अंतिम किस्त पारित होगी। 15 मार्च को शासकीय और विधायी कार्यों के अलावा सामान्य चर्चा व विनियोग विधेयक का पारण होगा। 16 मार्च को गैर सरकारी सदस्य दिवस होगा। 17 मार्च को वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट अनुमानों को प्रस्तुत किया जाएगा। दो दिन के अवकाश के बाद फिर 20 मार्च को शासकीय और विधायी कार्यों के तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट अनुमानों पर चर्चा शुरू होगी। यह चर्चा 23 मार्च तक चलेगी। 27 और 28 मार्च को 2023-24 की मांगों पर चर्चा और मतदान होगा। 29 मार्च को बजट अनुमानों को पारित किया जाएगा। 30 मार्च को अवकाश रहेगा। 31 मार्च और 1 अप्रैल को शासकीय और विधायी कार्य होंगे। 2 अप्रैल को अवकाश होगा। इसके बाद 6 अप्रैल तक विधायी और शासकीय कार्य चलेंगे।
शिमला में महिला केंद्रित योजनाओं पर मीडिया इंटरेक्शन में एडीजी राजिंदर चौधरी पंकज सिंगटा। शिमला सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, केंद्रीय संचार ब्यूरो और प्रेस सूचना ब्यूरो ने बचत भवन, शिमला में सरकार द्वारा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई विभिन्न महिला-केंद्रित योजनाओं के बारे में विवरण साझा करने के लिए एक मीडिया इंटरेक्शन का आयोजन किया। प्रेस सूचना ब्यूरो (उत्तर पश्चिम क्षेत्र) के अतिरिक्त महानिदेशक राजिंदर चौधरी और मुख्यातिथि इल्मा अफरोज, एसपी एसडीआरएफ ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की पहल पर अपने विचार साझा किए। एडीजी राजिंदर चौधरी ने महिलाओं के जीवन में सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा, "महिला सशक्तिकरण एक विकल्प नहीं है, यह एक प्रगतिशील समाज के लिए एक आवश्यकता है।" इल्मा अफरोज, एसपी एसडीआरएफ ने आज के समाज में महिला सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डाला और महिलाओं के कल्याण के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की। "महिलाओं को सशक्त बनाना केवल लैंगिक समानता के बारे में नहीं है, बल्कि यह समग्र रूप से एक बेहतर समाज बनाने के बारे में है।” उन्होंने महिलाओं से अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए योजनाओं का लाभ उठाने का भी आग्रह किया। "ये योजनाएँ महिलाओं को न केवल खुद को बल्कि अपने परिवारों और समुदायों को भी बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करती हैं।" हर्षित नारंग, सहायक निदेशक, पीआईबी चंडीगढ़ ने स्वागत भाषण दिया और मीडिया में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने मीडिया में महिलाओं को समान अवसर और प्रतिनिधित्व दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की उप निदेशक संगीता जोशी ने विभिन्न महिला केंद्रित सरकारी योजनाओं पर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे ये योजनाएँ महिलाओं को सशक्त बना रही हैं और पूरे भारत में उनके सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे रही हैं। संगीता जोशी ने कहा कि ये योजनाएं केवल महिला सशक्तिकरण के बारे में नहीं हैं, बल्कि ये एक अधिक समावेशी समाज बनाने के बारे में भी हैं। नंदिनी मित्तल, रेशमा कश्यप, वंदना ठाकुर, अर्चना फुल, पूजा शर्मा, भारती शर्मा, शिवानी कपूर और पूनम भारद्वाज को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। शिमला मीडिया में लंबे समय से नंदिनी मित्तल का नाम है। वह वर्तमान में दूरदर्शन समाचार के साथ काम करती हैं और वर्षों से इस क्षेत्र के विभिन्न प्रासंगिक महिला केंद्रित मुद्दों को उठाती रही हैं। रेशमा कश्यप, जो वर्तमान में हिमाचल ब्यूरो के रूप में डेली पोस्ट न्यूज में काम करती हैं, ने कोविड काल के दौरान कई विशेष कहानियों को कवर किया है। पंजाब केसरी समूह के साथ काम करने वाली वंदना ठाकुर लंबे समय से महिला और बाल विकास के मुद्दों को उठाती रही हैं। 11 वर्षों से शिमला में हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक विशेष संवाददाता और राष्ट्रीय संवाददाता, अर्चना फूल ने महिलाओं के मुद्दों, सामाजिक विकास, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर कहानियों में विशेषज्ञता हासिल की है। अमर उजाला शिमला कार्यालय की संवाददाता भारती शर्मा महिला एवं बाल विकास, साहित्य और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं। दैनिक सवेरा में महिलाओं और संबंधित मुद्दों पर शिवानी कपूर के काम पर भी प्रकाश डाला गया। पूनम भारद्वाज दैनिक भास्कर के साथ काम करती हैं और इससे पहले दैनिक जागरण और दिव्य हिमाचल के साथ काम कर चुकी हैं। आयोजन के दौरान, विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की कुछ महिलाओं को उनके असाधारण कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मुख्य भूमिका निभाने के लिए विकास खण्ड मशोबरा की ग्राम पंचायत जनेढ़ घाट की सुनीता वर्मा, विकास खंड मशोबरा के गांव जाबल ग्राम पंचायत गुम्मा में जाबल स्वयं सहायता समूह की प्रधान सीमा, विकास खंड मशोबरा के गांव चरैन ग्राम पंचायत मांजु की जननी शक्ति स्वयं सहायता समूह की हैप्पी तथा उदय स्वयं सहायता समूह ग्राम पंचायत ढली की प्रधान भूमावती व मंगल करनी स्वयं सहायता समूह ग्राम पंचायत मैहली की सचिव मोनिका शामिल है। पीआईबी शिमला के सहायक निदेशक सुखचैन सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मीडिया से बातचीत में विभिन्न मीडियाकर्मियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में सरकार के प्रयासों को मीडिया ने खूब सराहा और सराहा। इन योजनाओं के बारे में जानकारी के प्रसार से, अधिक महिलाएं इनसे लाभान्वित हो सकेंगी, जिससे देश के समग्र विकास में योगदान मिलेगा।
सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में इनकम टैक्स का छापा पड़ा है। बद्दी में यूफ़्लेक्स कंपनी के ठिकानों पर इनकम टैक्स की टीम ने मंगलवार सुबह दबिश दी। इनकम टैक्स की टीम कंपनी के आय व व्यय से जुड़े दस्तावेज़ों को खंगाल रही है। टीम ने अंदर व बाहर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया। यह कार्रवाई कंपनी की ओर से टैक्स चोरी के मामले में की गई है। बता दें कि देशभर में कंपनी के ठिकानों पर छापा मारा गया है। आयकर विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, जम्मू कश्मीर,हरियाणा, तमिलनाडु, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 64 जगहों पर यूफ्लेक्स लिमिटेड कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। एसपी बद्दी मोहित चावला ने बताया कि आयकर विभाग की टीम पुलिस प्रशासन की ओर से सेवाएं दी जा रही हैं। कंपनी पैकेजिंग और कंटेनर्स का काम करती है। यह कंपनी पान मसाला के पैकेट बनाती है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला भाजपा के पूर्व मंत्री विक्रम ठाकुर एवं सुखराम चौधरी ने कांगरे सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर किसी सरकार ने हिमाचल प्रदेश में कुप्रबंधन की दृष्टि से काम किया है, तो केवल मात्र कांग्रेस की सरकार ने ही किया है। भाजपा के पूर्व मंत्रियों ने कांग्रेस के मंत्री अनिरुद्ध सिंह और रोहित ठाकुर को जवाब देते हुए कहा कि जब पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल की सरकार थी, तो हिमाचल प्रदेश में केवल 27000 करोड का कर्ज था और जब उसके उपरांत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार का कार्यकाल खत्म हुआ, तो हिमाचल प्रदेश पर 55000 का कर था, जब पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार ने वर्तमान कांग्रेस पार्टी को सत्ता सौंपी, तो हिमाचल प्रदेश पर 69000 करोड़ का कर्ज था और जो कर्ज जयराम ठाकुर सरकार ने लिया, उसमें से 14000 करोड़ तो पिछली सरकार के ऋणों की भरपाई में ही चले गए। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के नेता केवल झूठे आंकड़े देकर जनता को घुमाकर ने का प्रयास कर रहे हैं। जब से हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने सत्ता संभाली है, तब से अब तक इस सरकार ने 4500 करोड़ का ऋण ले लिया है, दिसंबर माह में इस सरकार ने 1000 करोड़, जनवरी माह में 1500 करोड़ और अब फरवरी माह में 2000 करोड़ का ऋण ले लिया है, अगर देखा जाए, तो यह सरकार प्रतिदिन 30 करोड़ का लोन ले रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि जब से यह सरकार सकता में आई है, तब से हिमाचल प्रदेश में विकास ठप हो गया है। राज्य सरकार स्कूलों में एनटीटी की भर्तियों पर भी संकट के बदल मंडरा रहे हैं। इस कार्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा 47.5 करोड़ का बजट हिमाचल प्रदेश को दिया गया था और इसके ऊपर अभी इस सरकार ने कोई भी ठोस निर्णय नहीं किया है। अगर इसी प्रकार से सरकार काम करती रही, तो यह बजट जल्द ही लेप्स हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश में जल शक्ति विभाग के आउट सोर्स कर्मचारियों को पगार मिलनी भी बंद हो गई है। हिमाचल प्रदेश में यह सरकार पनबिजली उत्पादन पर वोटर सेस लगाने की तैयारी में है। हिमाचल में 175 पनबिजली परियोजनाएं चल रही है। जैसे ही इस सरकार ने सत्ता संभाली, तो हिमाचल प्रदेश में डीजल को 3 रुपए महंगा कर दिया गया है। इससे हिमाचल की भोली-भाली जनता पर बोझ बढ़ा है। यहां तक की कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में होने वाली भर्तियों को भी रद्द कर दिया। 24 अगस्त 2022 को पूर्व सरकार ने इन भर्तियों के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी थी।, पर इस सरकार ने इन भर्तियों को भी रद्द कर दिया। भाजपा नेताओं ने कहा कि भाजपा में किसी भी प्रकार की गुटबाजी नहीं है, अगर गुटबाजी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, तो वह केवल कांग्रेस पार्टी में दिखाई दे रही हैं। कांग्रेसी पार्टी अभी भी कई गुटों में विभाजित दिलाई दे रही है।
हिमाचल प्रदेश में मौसम ने फिर करवट बदली है। मंगलवार को अटल टनल रोहतांग सहित ऊंचाई वाले भागों में बर्फबारी दर्ज की गई है। शिमला में भी बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि से कुछ ही मिनटों में राजधानी की सड़कें ओलों से सफेद हो गईं। उधर, लाहौल घाटी के ऊंचाई वाले भागों ने फिर से बर्फ की चादर ओढ़ ली है। बर्फबारी को प्रशासन ने स्थानीय लोगों व पर्यटकों को हिदायत दी है कि खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें। वहीं, मनाली के अटल टनल के साउथ और नॉर्थ पोर्टल के पास कल शाम से ही रुक-रुककर हिमपात हो रहा है। पिछले दिनों हुई बर्फबारी के बाद मनाली में पर्यटक काफी तादाद में आए, लेकिन पिछले तीन दिनों से पर्यटकों की संख्या में काफी कमी दर्ज की गई है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। ठियाेग आंगनबाड़ी वर्करज एवं हेल्परज यूनियन संबंधित सीटू की ठियोग प्रोजेक्ट इकाई ने बलग सर्किल के कोट आंगनबाड़ी केंद्र की कर्मी रीना देवी की 9 फरवरी को की गई हत्या के मुद्दे पर ठियोग के सराए हॉल में एक शोक सभा का आयोजन किया। इसके बाद रीना देवी को न्याय दिलाने के लिए जोरदार रैली व प्रदर्शन किया। लोक निर्माण विभाग रेस्ट हाउस से शुरू हुई रैली ठियोग बाजार से होते हुए आईसीडीएस के परियोजना अधिकारी कार्यालय पहुंची व जोरदार नारेबाजी के बीच धरना दिया। प्रदर्शन में रीना, कला, सत्या, सुनीता, गंगेश्वरी, लता, निर्मला व ममता सहित लगभग दो सौ आंगनबाड़ी कर्मी मौजूद रहे। प्रदर्शन को सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला महासचिव अजय दुलटा, जिला सचिव सुनील मेहता व आंगनबाड़ी यूनियन जिला महासचिव खीमी भंडारी ने सम्बोधित किया। इस दौरान यूनियन का प्रतिनिधिमंडल आइसीडीएस के ठियोग परियोजना अधिकारी से मिला व उनके माध्यम से विभाग के निदेशक को ज्ञापन सौंपा। वक्ताओं ने प्रदेश सरकार से सरकारी डयूटी के दौरान की गई हत्या की एवज़ में पीड़िता के परिवार को 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने पीड़िता के परिवार से किसी एक सदस्य को महिला एवं बाल विकास विभाग हिमाचल प्रदेश में नियमित सरकारी नौकरी देने की मांग की। उन्होंने चेताया कि अगर पीड़िता के परिवार को आर्थिक मदद व सरकारी नौकरी न मिली तो यूनियन आंदोलन तेज करेगी। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मी व सहायिकाएं पहले ही भारी आर्थिक व सामाजिक शोषण की शिकार हैं। उन्हें केवल 9 हज़ार व 4700 रुपए मानदेय मिलता है। पूरे देश की तुलना में यह बेहद कम है। पड़ोसी राज्यों हरियाणा व पंजाब में आंगनबाड़ी कर्मियों को वेतन व सामाजिक सुरक्षा हिमाचल प्रदेश से कई गुणा बेहतर है। उन्हें पेंशन, माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ग्रेच्युटी, ईपीएफ आदि सुविधाएं नहीं मिलती हैं। 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों को वेदांता कंपनी के हवाले करके निजीकरण की शुरुआत हो चुकी है। आइसीडीएस के बजट में लगातार कटौती की जा रही है। पोषण ट्रैकर ऐप के नाम पर कर्मियों का मानसिक शोषण किया जा रहा है। मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कर्मी दोहरे शोषण के शिकार हैं। सहायिका की नियुक्ति न होने से उनसे दो कर्मियों के बराबर काम लेने के बावजूद आम आंगनबाड़ी कर्मी के मुकाबले उन्हें तीन हज़ार रुपये कम मानदेय दिया जाता है। आंगनबाड़ी कर्मियों को प्री प्राइमरी भर्तियों से भी बाहर किया जा रहा है। उन्हें पूरा मानदेय एकमुश्त नहीं मिलता है। आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया भी कम मिलता है। राशन के पैसे का समयबद्ध भुगतान नहीं होता है। ऐसी परिस्थितियों में कार्य करने के बावजूद भी कर्मियों की कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। रीना देवी की हत्या इसका प्रत्यक्ष सबूत है जहां पर एक व्यक्ति ने आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर ही दिन-दहाड़े उनकी हत्या कर दी। सेवा के दौरान हुई हत्या के बावजूद भी रीना देवी को विभाग से एक नियमित कर्मचारी की तर्ज़ पर कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली।
मुख्यमंत्री ने कैम्पा के शासी निकाय की प्रथम बैठक की अध्यक्षता की प्रत्येक वन मंडल में विकसित की जाएगी मॉडल नर्सरी फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार देर सायं हिप्पा में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) की शासी निकाय की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्ष 2023-24 में हिमाचल प्रदेश (कैम्पा) के अंतर्गत प्रदेश के बंजर वन क्षेत्रों के वनीकरण के लिए नई पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि छोटे क्षेत्रों के पौधरोपण के बजाय बंजर पहाड़ियों के वनीकरण के लिए बड़े क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से पौधरोपण किया जाएगा। जलवायु परिस्थितियों के अनुसार पौधे रोपित किए जाएंगे और इस कार्य के लिए समर्पित कर्मचारियों को नियुक्त किया जाएगा जो जिम्मेदार और जवाबदेह तरीके से इनके संरक्षण का कार्य करेंगे। प्रदेश सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि हरित राज्य के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बंजर वन भूमि के वनीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 12 जिलों में 256 हैक्टेयर से अधिक बंजर वन भूमि क्षेत्र को चिन्हित किया गया है तथा 5 वर्षों के दौरान यहां रोपित पौधों का उचित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाएगा। इस कार्य के लिए 8.83 करोड़ रुपए की राशि प्रस्तावित की गई है। इस अभियान में क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि इसे जन अभियान बनाया जा सके। उन्होंने पौधरोपण के उपरांत इसकी समुचित निगरानी करने तथा संबंधित उपमंडलाधिकारियों को निगरानी प्रक्रिया में सम्मिलित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 में प्रदेश के प्रत्येक वन मंडल में एक मॉडल नर्सरी विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन सभी 45 नर्सरियों में केंचुआ खाद इकाई, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, स्प्रिंकलर, रूट ट्रेनर्स और टिशू कल्चर लैब इत्यादि की सुविधा होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे नर्सरी की अधोसंरचना को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। नर्सरी तैयार करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा और यह देशभर में किए जा रहे नवीन कार्यों को साझा करने के लिए उत्कृष्ट केंद्र साबित होंगे। यह मॉडल नर्सरी प्रदेश की वन्य संपदा के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए विस्तार केंद्राें के रूप में भी कार्य करेंगी। मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर ने भी इस अवसर पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। प्रधान सचिव, वन एवं शासी निकाय के सदस्य सचिव ओंकार चंद शर्मा ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया और प्रधान मुख्य अरण्यपाल (हॉफ) विनोद कुमार तिवारी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य जीव) राजीव कुमार, सहायक प्रधान मुख्य अरण्यपाल एवं कैम्पा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नागेश गुलेरिया, कैम्पा की उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रीति भंडारी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।
पंकज सिंगटा। शिमला भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने केंद्रीय कपड़ा वाणिज्य और उद्योग, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखा। पत्र में अविनाश राय खन्ना ने पीयूष गोयल को अवगत करवाया कि भोरंज विधानसभा क्षेत्र जिला हमीरपुर के जंगल में फेंके सरकारी चावल से भरे 24 बोरी जिनपर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी की फोटो लगी थी उसका मामला सामने आया है। पत्र में अविनाश राय खन्ना ने मंत्री पीयूष गोयल से अनुरोध किया है कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार कर कार्रवाई की जाए। अविनाश राय खन्ना ने कहा कि खबर के माध्यम से मेरे सामने यह विषय सामने आया है, जिसमें विधानसभा भोरंज जिला हमीरपुर के पपलाह जंगल में सरकारी चावल से भरे 24 बोरे मिले, सस्ते राशन के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के फोटो वाले थैले भी मिले हैं। इस मामले में गड़बड़ झाले की आशंका के बीच इस तरह जंगल में सरकारी राशन को खुले में फेंकने से खाद्य आपूर्ति विभाग और राज्य निगरानी आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में आती है। किस राशन डिपो में कितना स्टॉक जारी हुआ और कितनी खपत हुई इसकी हर माह जांच का जिम्मा निगम और विभाग दोनों पर है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर भोरंज के जंगल में यह राशन कौन फेंक कर चला गया।
प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट बदलने वाला है आगामी दो दिन मौसम खराब रहने की संभावना है। सोमवार सुबह लाहौल, किन्नौर जिले की ऊंची चोटियों में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 20-21 फरवरी को किन्नौर, लाहौल-स्पीति, शिमला, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू और चंबा के कई क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया है। वहीं आज प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में अंधी और बिजली गरजने का येलो अलर्ट जारी हुआ है। मैदानी जिलों ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा में 21 फरवरी तक मौसम साफ रहने की संभावना है। 22 फरवरी से सभी भागों में मौसम साफ रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान शिमला में न्यूनतम तापमान 11.6, सुंदरनगर 9.6, भुंतर 10.2, कल्पा 4.4, धर्मशाला 8.2, ऊना 12.2, नाहन 13.5, केलांग 0.4, पालमपुर 11.5, सोलन 7.6, मनाली 8.8, कांगड़ा 13.1, मंडी 10.2, बिलासपुर 12.5, हमीरपुर 11.7, चंबा 11.7, डलहौजी 10.6, जुब्बड़हट्टी 12.5, कुफरी 9.0, कुकुमसेरी 3.0, नारकंडा 7.4, रिकांगपिओ 7.1, सेऊबाग 9.5, धौलाकुआं 11.2, बरठीं 10.2, पांवटा साहिब 12.0 और सराहन में 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है।
लगभग दो माह बाद ढुलाई दरों पर ट्रक ऑपरेटरों एवं सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन में सहमति बनी मुख्यमंत्री ने सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त किया कहा, प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा के लिए हमेशा रहूंगा तत्पर फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला प्रदेश सरकार की मध्यस्थता के बाद सीमेंट फैक्ट्री और ट्रक ऑपरेटर्ज के बीच जारी विवाद समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित बैठक में दोनों पक्षों ने ढुलाई की दरों पर सहमति जताई है। बैठक के उपरांत मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विवाद शुरू होने के बाद से ही वह व्यक्तिगत तौर पर भी इसके समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहे। उन्होंने कंपनी प्रबंधन और उच्च अधिकारियों से लगातार संवाद बनाए रखा। उन्होंने कहा कि सरकार की मध्यस्थता और लगातार बातचीत से कंपनी प्रबंधन ढुलाई की नई दरों पर सहमत हो गया है। उन्होंने कहा कि आज की बैठक में बिलासपुर तथा सोलन जिला के ट्रक ऑपरेटर्ज तथा अडानी समूह के उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में यह नई दरें निर्धारित की गई है, जिसमें सिंगल एक्सेल के लिए 10 रुपये 30 पैसे प्रति किलोमीटर प्रति क्विंटल तथा मल्टी-एक्सेल के लिए 09 रुपए 30 पैसे प्रति किलोमीटर प्रति क्विंटल की ढुलाई दरें निर्धारित की गई हैं। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन ने कल से ही सीमेंट उत्पादन पुनः शुरू करने पर अपनी सहमति जताई है तथा ट्रक ऑपरेटर्ज भी इन दरों पर ढुलाई के लिए तैयार हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ढुलाई दरों में वार्षिक वृद्धि से संबंधित मामलों के लिए प्रधान सचिव उद्योग तथा अन्य अधिकारी एक फार्मूला तय करेंगे। इसके अलावा ट्रक ऑपरेटर्ज की अन्य समस्याओं के निदान के लिए सोलन तथा बिलासपुर जिला के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं और वे कंपनी प्रबंधन के साथ मिलकर इसका समाधान सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वित प्रयासों से इस मामले का सर्वमान्य हल संभव हो सका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के सत्ता संभालने के 5 दिन के बाद ही यह विवाद सामने आया और सीमेंट फैक्टरी प्रबंधन ने उत्पादन रोकने की घोषणा कर दी। गत वर्ष 16 दिसंबर को ट्रक ऑपरेटर्ज हड़ताल पर चले गए थे। इसके उपरांत प्रदेश सरकार ने इस मामले की पूरी जानकारी प्राप्त की। प्रदेश सरकार लगातार ट्रक ऑपरेटर्ज और फैक्ट्री प्रबंधन के साथ बातचीत करती रही। दाड़लाघाट और बरमाणा स्थित सीमेंट फैक्ट्री का स्वामित्व बदलने के बाद प्रबंधन पुरानी दरों पर ढुलाई भाड़ा प्रदान करने को सहमत नहीं था और यहीं से विवाद बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि इस विवाद का सभी पक्षों को नुकसान हो रहा था। प्रदेश में सीमेंट उत्पादन रुकने से जहां आर्थिक तौर पर नुकसान हो रहा था। वहीं, इस से जुड़े ट्रक ऑपरेटर्ज, ट्रक चालक एवं परिचालक, गाड़ियों की मरम्मत तथा अन्य कार्यों में जुटे स्थानीय लोग, ढाबा संचालक इत्यादि हजारों परिवार भी आर्थिक तंगी की हालत में जा रहे थे। ऐसे में प्रदेश सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण से भी इस मामले को हल करने के लिए लगातार प्रयास किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि ट्रक ऑपरेटर्ज के साथ-साथ वहां कार्य कर रहे कर्मचारियों तथा अप्रत्यक्ष तौर पर फैक्ट्री के आसपास रोजगार में लगे लोगों के परिवारों के हितों की रक्षा की जाए। साथ ही प्रदेश सरकार फैक्ट्री प्रबंधन को भी नुकसान के पक्ष में नहीं थी। प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए और उन्हें हर संभव सुविधा प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी के हितों की रक्षा प्रदेश सरकार का ध्येय है। यही कारण रहा कि प्रदेश सरकार ने सर्वमान्य हल को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने इस विवाद को हल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे सरकार के प्रतिनिधियों और अधिकारियों की टीम की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान धैर्य और सौहार्द बनाए रखने के लिए ट्रक ऑपरेटर्ज और कंपनी प्रबंधन का भी आभार व्यक्त किया। बैठक में मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, बिलासपुर ट्रक ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष राकेश ठाकुर तथा अन्य प्रतिनिधि और सोलन जिला से ट्रक ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष जयदेव कौंडल तथा अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए। अडानी समूह की ओर से मनोज जिंदल और संजय वशिष्ट ने बैठक में भाग लिया। प्रधान सचिव परिवहन आरडी नज़ीम, निदेशक परिवहन अनुपम कश्यप, निदेशक खाद्य एवं आपूर्ति केसी चमन, उपायुक्त बिलासपुर पंकज राय और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज राजभवन में कर्मचारियों को ‘परिचय सत्र’ के दौरान संबोधित किया। उन्होंने सभी कर्मचारियों को कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करने और निर्धारित समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने लिए जवाबदेह है और उसे अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभी को परस्पर समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन एक प्रतिष्ठित स्थान है और इसकी मर्यादा का ध्यान रखना हम सबका सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यहां कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति प्रतिबद्धता से कार्य कर राजभवन की प्रतिष्ठा बनाए रखें। इससे पहले, राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया और राजभवन कर्मियों से पहली बार सीधा संवाद करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की सादगी के कायल हुए लोग फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पुरानी प्रथाओं को तोड़कर शाही जलेब में देवताओं के साथ पैदल यात्रा की, जिसका देव समाज ने खुलकर स्वागत किया। मुख्यंमत्री ने राज माधो राय मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात खुली जीप छोड़कर उपायुक्त कार्यालय से लेकर पड्डल मैदान तक लगभग डेढ़ किमी पद यात्रा की। मंडी की स्थानीय जनता, विशेष रूप से देव समाज ने शाही कल्चर को त्याग कर एक आम श्रद्धालु की तरह जलेब में शामिल होने पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू को विशेष धन्यवाद दिया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आम और खास के फर्क को मिटा कर देर शाम सेरी मंच के चनणी में बैठकर सांस्कृतिक संध्या का लुत्फ उठाया। लगभग एक दशक बाद प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री ने इस स्थान पर बैठकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लिया। सांस्कृतिक संध्या के दौरान मुख्यमंत्री मंच छोड़कर सीधे जनता के बीच गए और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। स्थानीय लोगों में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ सेल्फी लेने को लेकर भी भारी क्रेज दिखा और लोगों ने जमकर सेल्फी खिंचवाई। पूरा मंडी शहर मुख्यमंत्री की सादगी का कायल हुआ। वहां उपस्थित सभी लोगों उनके इस व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू इतने बड़े पद पर आसीन होने के बावजूद भी जमीन से जुड़े हैं और सत्ता में होने के बावजूद वह बिल्कुल भी बदले नहीं है।
मुख्यमंत्री ने तीन करोड़ से निर्मित क्राइम रिस्पांस सेंटर का किया लोकार्पण फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज मंडी स्थित ओल्ड पुलिस लाइन में तीन करोड़ रुपये की लागत से निर्मित व्योमनेत्र (इंटीग्रेटिड सर्विलैंस एंड क्राइम रिस्पांस सेंटर) का लोकार्पण किया। यह सेंटर किसी भी आपातकालीन स्थिति में बेहतर संचार और निगरानी के साथ आपदा की प्रतिक्रिया की क्षमता में बढ़ोतरी करेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर कानून व्यवस्था प्रदान करने के लिए शहर में अत्याधुनिक तकनीक युक्त 250 कैमरे स्थापित किए गए हैं, जिससे शहर के आने-वाले वाले स्थलों पर निगरानी की जा सकेगी। व्योमनेत्र चोरी, अपराध नियंत्रण जैसे संदिग्ध मामलों में निगरानी करने में भी सहायक सिद्ध होगा। यह प्रणाली सुंदरनगर में स्थापित इंटैलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट के साथ क्लाउड बेसड तकनीक के साथ एकीकृत की गई है, जिससे मंडी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी की जाएगी। भविष्य में व्योमनेत्र को ड्रोन के माध्यम से निगरानी और अन्य तकनीक से भी जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कंट्रोल पोस्ट ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में तथा किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया में मददगार साबित होगी। व्योमनेत्र आपातकालीन स्थिति में राहत प्रदान करने में आने वाली समस्याओं का भी समाधान करेगा और त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करने में प्रभावशाली तंत्र प्रदान करेगा। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक चंद्रशेखर, कांग्रेस के नेता सोहन लाल ठाकुर, चंपा ठाकुर, पवन ठाकुर, उपायुक्त अरिंदम चौधरी, डीआईजी मधुसूदन शर्मा, पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
आज के समय में लोगों के बीच किसी ना किसी वजह से भेदभाव पैदा हो रहा है। चाहे वो धर्म के आधार पर हो, जाति के आधार पर हो या फिर आर्थिकी के आधार पर। हर तरफ किसी न किसी वजह से लोगों के बीच मतभेद है और एक दूसरे से उचित दूरी भी बना रहे हैं। ये परिवर्तन समाज के हित में न है न कभी हो सकता है। परस्पर प्रेम भाव को जीवंत रखने और समाज के हर वर्ग को मजबूत करने के लिए हर साल 20 फ़रवरी के दिन विश्व सामाजिक न्याय दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को कई तरह के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भी बनाया गया है। इस दिन नस्ल, लिंग, धर्म, जाति इत्यादि के आधार पर अप्रत्यक्ष रूप से बांटे लोगों को एकजुट किया जाता है। इसके अलावा, लोगों के बीच बढ़ रही सामाजिक दूरी को कम करने के लिए उनसे विभिन्न मुद्दों पर बातचीत भी की जाती है। साल 2007 में संयुक्त राष्ट्र के द्वारा इस दिन को मनाने की सार्वजनिक रूप से घोषणा की गई थी। साल 2009 में इस दिन को पहली बार पूरे विश्व में मनाया गया था। विश्व सामाजिक न्याय दिवस के लक्ष्य को पूरा करने के लिए दुनिया के कई देश संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अंतर्गत, गरीबी, बेरोजगारी, जाति, लिंग या धर्म के आधार पर बंटे लोगों के बीच एकजुटता लाने का काम किया जा रहा है। हर साल दुनिया के कई देशों में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य इस दिन को अवसर के रूप में मनाया जाता है। वहीं, भारत ने भी इस ओर कई प्रभावी कदम उठाया है। भारतीय संविधान बनाने के दौरान देश में सामाजिक न्याय का प्रमुखता से ध्यान रखा गया था। वहीं, हमारे संविधान में सामाजिक दूरी को खत्म करने के लिए भी कई प्रावधान मौजूद हैं। भारत सरकार के साथ साथ हिमाचल सरकार भी कई योजनाएं चला रही हैं। इसके अंतर्गत लोगों को समान अधिकार देने की कोशिश की जा रही है। साथ ही समाज में व्याप्त असमानता को जड़ से समाप्त करना है। इससे समस्त समाज का एकसाथ विकास होगा। स्वर्ण जयंती आश्रय योजना से बना सकते है अपना आशियाना स्वर्ण जयंती आश्रय योजना का उद्देश्य जरूरतमदं व्यक्तियों के लिए मकान निर्माण, मुरम्मत के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाना। स्वर्ण जयंती आश्रय योजना के तहत अनुसूचित जाति के नागरिकों को अपना आवास मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार मदद करती है। सभी अनुसूचित जाति के परिवार जिनके पास अपना कोई घर नहीं है उन्हें सरकार द्वारा मकान आवंटित किए जाते है। सरकार द्वारा लक्ष्य रखा गया है कि इस वर्ष तक राज्य में सभी अनुसूचित जाति के नाम पर लोगों के पास अपना आवास हो। सरकार द्वारा सभी अनुसूचित जाति के नागरिकों तथा उनके परिवारों के लिए नए मकान दिए जाएंगे। इन मकानों में सभी दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली वस्तुओं तथा सेवाओं की पूरी सुविधा दी जाएगी। हिमाचल प्रदेश राज्य में इस एचपी स्वर्ण जयंती आश्रय योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्ते रखी गयी है। आवेदन करने वाला नागरिक हिमाचल प्रदेश का ही मूल निवासी होना चाहिए। समवर्गीय क्रियाकलापो में प्रशिक्षण एवं दक्षता योजना सरकार का इस योजना से उद्देश्य है कि अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्प संख्यक,विशेष रूप से सक्षम,विधवा,एकल नारी से सम्बन्धित अभ्यार्थियों को मान्यता प्राप्त संस्थानों से एक वर्ष की अवधि के कम्पयूटर उपयोग व समवर्गीय क्रियाकलापो में प्रशिक्षण दिलाना है। ताकि वे सरकारी/निजी क्षेत्रा में नौकरी हेतु सक्षम बन सकें। इस योजना का लाभ उठाने के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग व अल्प संख्यको से सम्बन्धित हिमाचल प्रदेश के स्थाई निवासी होना चाहिए जिसकी आयु सीमा 18 वर्ष से 35 वर्ष के मध्य हो तथा बीपीएल परिवार से सम्बन्धित हों। कम्प्यूटर प्रशिक्षण हेतु निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखते हो। इसके अलावा बीपीएल के उम्मीदवार न मिलने की स्थिति में वे उम्मीदवार जिनके परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रूपये से कम हो वे पात्र होंगे। इसके लिए प्रशिक्षण फीस 1350 रूपये प्रति माह तक (1500 रुपए (विशेष रूप से सक्षम के लिये) प्रशिक्षण के दौरान 1,000/- रू0 प्रतिमाह छात्रावृति (विशेष रूप से सक्षम के लिए 1,200/- रू0 प्रति माह) प्रशिक्षण उपरान्त 6 माह तक दक्षता अवधि के दौरान 1500/- रू0 प्रति माह छात्रावृति (विशेष रूप से सक्षम के लिये 1800/- प्रति माह) की सहयता दी जाती है। प्यार के बीच जाति का रोड़ा हुआ खत्म समाज से जाति-पाति का भेदभाव मिटाने और आपसी सौहार्द को बनाए रखने के उद्देश्य से सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह योजना शुरू की गई थी। अस्पृश्यता निवारण रोकने के लिए अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन देना भी इस योजना का उद्देश्य है, ताकि समाज से जातिवाद का सफाया हो सके। सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिए जो भी लड़का या लड़की विवाह करेगा, उनमें से एक का अनुसूचित जाति से संबंध होना जरूरी है यानि कि विवाह करने वाले दंपत्ति में एक अनुसूचित जाति और दूसरा गैर-अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाला होना चाहिए। इस पर सरकार द्वारा प्रोत्साहन के रूप में ढाई लाख रुपये की राशि दी जा रही है। अंतरजातीय विवाह पुरस्कार प्राप्त करने के लिए अन्य जातियों के वो व्यक्ति पात्र होंगे जो हिमाचल प्रदेश के स्थाई निवासी होगा। दम्पति की आयु 50 वर्ष से अधिक न हो। विवाह उचित अधिनियम/नियम के अन्तर्गत पंजीकृत हुआ हो। प्रार्थी द्वारा इससे पहले अंतरजातीय विवाह पुरस्कार प्राप्त न किया हो। अन्य जातियों के युवक-युवती को अनुसूचित जाति के युवक-युवती के साथ विवाह करने पर पचास हजार रुपए अथवा समय - समय पर सरकार द्वारा निर्धारित पुरस्कार राशि स्वीकृृत की जाएगी। इस योजना का लाभ उठाने की प्रक्रिया भी बेहद सरल कर दी गई है। इस योजना के अन्तर्गत पुरस्कार राशि प्राप्त करने के लिए पात्र दम्पति को निर्धारित प्रार्थना पत्र पर निम्नलिखित दस्तावेजों सहित सम्बन्धित पंचायत/नगर निकायों के माध्यम से सम्बन्धित तहसील कल्याण अधिकारी/ जिला कल्याण अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा। कार्यकारी दण्डाधिकारी से जारी हुआ दम्पति का आयु प्रमाण-पत्र दम्पति का जाति प्रमाण पत्र, हिमाचली प्रमाण पत्र और विवाह पंजीकरण अधिकारी से विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। अत्याचार से पीड़ित अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को राहत अनुसूचित जाति, जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधित अधिनियम, 2018) की धारा 3 के अन्तर्गत जाति भेदभाव के कारण पुलिस मे दर्ज मामलों में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति से सम्बन्धित पीड़ित व्यक्तियों को राहत राशि प्रदान की जा रही है। इस मामले में 85,000 रुपए से लेकर 8,25,000 रुपए तक की सहायता दी जाती है। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति/जन जाति विकास निगम की योजनाएं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने हेतु उनके कारोबार को बढ़ाने तथा अन्य स्वयं रोजगार धन्घे स्थापित करने हेतु प्रशिक्षण तथा ऋण उपलब्ध करवा जा रहा है । इसमें से एक स्वयं रोजगार योजना भी है। इस योजना के अंतरगत 18 से 55 वर्ष की आयु वर्ष के अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों के गरीबी रेखा से नीचे रह रहे चयनित परिवारों से सम्बन्धित ग्रामीण क्षेत्रो में रहने वाले ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 35,000 रुपए तथा शहरी क्षेत्रो में रहने वाले ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय 35,000 रुपए से कम हो, उन्हें स्वयं रोजगार स्थापित करने के लिए निम्नलिखित दरों पर ऋृण बैकों के माध्यम से उपलब्ध करवाये जाते है। पच्चास हजार तक की परियोजनाओं जैसे डेरी फार्मिग, कृषि उपकरण , लघु सिंचाई, रेडिमेड गार्मेन्टस, शू मेकिंग इत्यादि, को बैकों के माध्यम से 4 प्रतिशत व्याज दर से ऋण उपलब्ध करवाये जाते है। इस के अतिरिक्त परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपए प्रति परिवार पूंजी अनुदान भी उपलब्ध करवाया जाता है। हिम स्वावलम्बन योजना इस योजना के अन्तर्गत शहरी क्षेत्र से सम्बन्धित परिवारों जिनकी वार्षिक आय 1,20,000 से कम तथा ग्रामीण क्षेत्रों से सम्बन्धित परिवारों जिनकी वार्षिक आय 98,000 से अधिक न हो को निम्नलिखित दरों पर ऋृण उपलब्ध करवाए जाते हैं। 5.00 लाख रू तक की परियोजनाऐं स्थापित कर बड़े रोजगार चलाने हेतु राष्ट्रीय अनुसूचित जाति,जनजाति विकास निगम के माध्यम से 6 प्रतिशत ब्याज दर पर सहयता दी जाती है। 5.00 लाख से 30.00 लाख रुपए की परियोजनाओं हेतु 8 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जाता है। ब्याज मुक्त ऋण अनुसूचित जाति/ जनजाति के छात्रा एवं छात्राओं जिनकी परिवार की वार्षिक आय 1,00,000 रुपए से अधिक न हो, मैट्रिक के बाद व्यवसायिक एवं तकनीकी डिप्लोमा तथा डिग्री कोर्स जैसे जेबीटी, नर्सिग , होटल मैनेजमैंट , एमबीए, एमबीबीएस, इंजिनियरिंग , एलएलबी तथा बीएड हेतु अधिकतम 75,000/- रूपये ब्याज मुक्त ऋण दिये जाते है । दलित वर्ग व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम अनुसूचित जाति/ जनजाति के युवाओं जिनकी वार्षिक आय 22,000 रुपए से कम हो उन्हें शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिलवाया जाता है। प्रशिक्षणार्थी को 500 रूपये प्रति माह अपने जिले में तथा 750 रुपए प्रति माह जिले से बाहर प्रशिक्षण लेने के दौरान वजीफा दिया जाता है। हस्तशिल्प विकास योजना परम्परागत व्यवसायों जैसे शाल बुनाई, शू मैकिंग, छाज बनाना इत्यादि में लगे कारीगर को व्यक्तिगत तौर पर अथवा अपने संगठन/सस्थाएं बना कर 15000 रुपए प्रति कारीगर ब्याज मुक्त ऋण दिये जाते है। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम की योजना सफाई कर्मचारियों को परिवहन क्षेत्र जैसे मारूति वैन, महिन्द्रा जीप इत्यादि खरीदने हेतु 5 लाख तक 6 प्रतिशत तथा 5 लाख से अधिक 8 प्रतिशत ब्याज दर से ऋण उपरोक्त निगम के माध्यम से उपलब्ध करवाये जाते है। इसका लाभ लेने के लिए पात्र व्यक्ति को अपना आवेदन निर्धारित प्रपत्र पर जाति प्रमाण पत्र, हिमाचली प्रमाण पत्र जो कार्यकारी दण्डाधिकारी सेे जारी किया हो, सहित प्रस्तुत करना अनिवार्य है। पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन कर सकता है, जिसके साथ वार्षिक आय प्रमाण-पत्र, जाति प्रमाण पत्र, हिमाचली प्रमाण पत्र कार्यकारी दण्डाधिकारी से जारी किया गया हो तथा जिस भूमि पर मकान बनाना प्रस्तावित है उस भूमि की जमाबन्दी नकल व ततीमा प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज बार्नस कोर्ट स्थित रेडक्रॉस भवन का दौरा किया। राज्यपाल राज्य रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष भी हैं। इस अवसर पर लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने रेडक्रॉस की गतिविधियों को और बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित मानवता की सेवा में रेडक्रॉस का सदैव ही बहुमूल्य योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस की गतिविधियों से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाना चाहिए, ताकि ज़रूरतमंद और पात्र लोगों को सहायता प्रदान की जा सके। इससे पहले, राज्यपाल के सचिव एवं राज्य रेडक्रास के महासचिव राजेश शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। राज्य रेडक्रॉस अस्पताल कल्याण शाखा के अधिकारी और कर्मचारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने देव समाज को एक करोड़ रुपए प्रदान करने की घोषणा की फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज सर्व देवता सेवा समिति द्वारा संस्कृति सदन मंडी में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर शिवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि और वीरभूमि है। राज्य की देव संस्कृति की अपनी अलग पहचान है और लोगों की देवी-देवताओं में अटूट आस्था है। उन्होंने मंडी शिवरात्रि में आने वाले देव समाज को एक करोड़ रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने समिति की मांग को मानते हुए अलॉटेबल पूल से मंदिरों के इर्द-गिर्द आधा बीघा भूमि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि संस्कृति सदन के रखरखाव के लिए भी पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी, ताकि यहां देव समाज से जुड़े अन्य कार्यक्रम बेहतर ढंग से आयोजित किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार कांग्रेस पार्टी द्वारा घोषणा पत्र में दी गई सभी 10 गारंटियों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करेगी। प्रदेश सरकार ने पुरानी पेंशन बहाल कर दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राजनीतिक उद्देश्य से 900 से अधिक सरकारी कार्यालय खोल दिए और अनावश्यक खर्च से राज्य पर आर्थिक बोझ डाला। पूर्व भाजपा सरकार ने बिना बजट के घोषणाएं की, लेकिन इसके बावजूद भाजपा को लोगों से सत्ता से बाहर कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन इसमें अभी कुछ समय लगेगा और इसमें सभी से सहयोग की आवश्यकता है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष और मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला प्राचीन है। हिमाचल प्रदेश के लोगों की देव संस्कृति के प्रति गहरी आस्था है। प्रतिभा सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ही देव समाज की सुविधा के लिए मंडी और कुल्लू में देव सदनों का निर्माण किया। मंडी सदर के विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि मंडी शिवरात्रि पर्व में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। उन्होंने मंडी जेल को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए 10 करोड़ रूपए का प्रावधान करने पर आभार व्यक्त किया। धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि वर्तमान सरकार समाज के हर वर्ग का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रसासरत है। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के आशीर्वाद से प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रही है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने मंडी आने पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का स्वागत करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि मेला प्रदेश की पुरातन संस्कृति का हिस्सा है। इससे पूर्व, सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा ने मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता से संबंधित प्रदेश सरकार के विभिन्न प्रयासों की सराहना की। संस्कृति सदन में आयोजित कार्यक्रम में मंत्रमुग्ध कर देने वाली देव ध्वनि की प्रस्तुति भी दी गई। इस अवसर पर कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह, मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक चंद्रशेखर, अनिल शर्मा, भुवनेश्वर गौड़ और सुरेश कुमार, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, कांग्रेस पार्टी के नेता सोहन लाल ठाकुर, चंपा ठाकुर, पवन ठाकुर, चेत राम ठाकुर, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, उपायुक्त अरिंदम चौधरी व पुलिस अधीक्षक शालिनी अग्निहोत्री और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लगभग 6000 अनाथ बच्चों को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जाएगा। यह बात उन्होंने शनिवार देर सायं मंडी परिधि गृह में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इन बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ स्टेट’ के रूप में अपनाने का निर्णय लिया है। योजना के अंतर्गत उनकी उच्च शिक्षा, जेब खर्च, स्वरोजगार तथा घर निर्माण के लिए तीन बिस्वा भूमि सहित तीन लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने लगभग दो माह के कार्यकाल में व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं। प्रदेश सरकार सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर पात्र लाभार्थी तक पहुंचाना सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि आगामी बजट में प्रदेश सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा। वर्तमान सरकार योजनाओं की घोषणा करने से पहले आवश्यक बजट का प्रावधान कर रही है। सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल कर दिया है और सभी 10 गारंटियों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने शिवधाम और मंडी हवाई अड्डे के लिए बजट का कोई प्रावधान नहीं किया था। लेकिन वर्तमान सरकार पूर्व सरकार की सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी पूरा करेगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि जिला मंडी के साथ-साथ प्रदेश भर के लोगों से उन्हें भरपूर स्नेह और सम्मान मिल रहा है और इसके लिए वह सभी के आभारी हैं। सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने भी इस अवसर पर संबाेधित किया और मुख्यमंत्री का स्वागत किया। विभिन्न संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी मुख्यमंत्री को सम्मानित किया। इससे पूर्व सुंदरनगर से मंडी तक विभिन्न स्थानों पर लोगों ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, विधायक चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंपा ठाकुर, चेत राम ठाकुर, पवन ठाकुर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
बैठक में राज्य हित से जुड़े अनेक मामलों पर हुई सकारात्मक चर्चा फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज नई दिल्ली में जीएसटी परिषद की 49वीं बैठक में भाग लिया। उन्होंने बैठक में राज्य हित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि कि सेब के कार्टन बॉक्स पर जीएसटी दर को वर्तमान 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए। उन्होंने कहा कि सेब के कार्टन बॉक्स पर जीएसटी का बोझ सेब उत्पादकों को वहन करना पड़ रहा है और इन पर जीएसटी कम करने से उनकी इनपुट लागत में काफी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादन का राज्य की आर्थिकी में अहम योगदान है और उनके हितों संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने वाहन खरीद पर जीएसटी के नुकसान का मुद्दा भी उठाया और बताया कि जब राज्य के निवासी आसपास के राज्यों में वाहन खरीदते हैं, तो इससे राज्य को जीएसटी का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी खरीद पर जीएसटी राज्य को मिलना चाहिए। क्योंकि राज्य से बाहर खरीद के उपरांत राज्य के लोगों द्वारा इन वाहनों को हिमाचल में ही पंजीकृत करवाया जाता है। उन्होंने परिषद को अवगत करवाया कि ऐसी खरीद से संबंधित कर, जीएसटी के मूल सिद्धांत के अनुसार उपभोग करने वाले राज्य में प्रवाहित होना चाहिए। जीएसटी परिषद ने उद्योग मंत्री की सक्रिय भागीदारी और तथ्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किए गए राज्य के पक्ष से कई विवादास्पद मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लिया। जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना से संबंधित मामले पर भी परिषद द्वारा विचार-विमर्श किया गया। जीएसटी न्यायाधिकरणों की स्थापना न होने से करदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि उन्हें जीएसटी न्यायाधिकरण की अनुपस्थिति में अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय के विरुद्ध न्यायालय की शरण में जाना पड़ता है। बैठक में उद्योग मंत्री द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा से निकट भविष्य में शिमला में जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त यूनुस और अतिरिक्त आयुक्त (जीएसटी) राकेश शर्मा ने भी भाग लिया।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और लेडी गर्वनर जानकी शुक्ल ने आज यहां जाखू स्थित हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। राज्यपाल रोप-वे से जाखू मंदिर गए। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में राजभवन के बाहर यह उनकी पहली यात्रा थी। उन्होंने भगवान हनुमान से हिमाचल प्रदेश के नागरिकों पर अपनी अपार कृपा बरसाने और सभी को अच्छा स्वास्थ्य देने की कामना की।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला शिव प्रताप शुक्ल ने आज यहां राजभवन में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में हिमाचल प्रदेश के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सबीना ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शिव प्रताप शुक्ल ने संस्कृत में शपथ ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू और लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर राज्यपाल को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने नियुक्ति पत्र पढ़कर सुनाया। राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा ने प्रभार प्रमाण पत्र पर राज्यपाल के हस्ताक्षर प्राप्त किए। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, मुख्य संसदीय सचिव, सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला, सह-प्रभारी प्रदेश कांग्रेस तजिंदर सिंह बिट्टू, सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, विधायकगण, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पी.एस. राणा, राज्य सूचना आयुक्त आर. डी. धीमान, हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, जीओसी-इन-सी (आरट्रेक) लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. महल, विभिन्न आयोगों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष और सदस्य, विश्वविद्यालयों के कुलपति, पुलिस और सिविल सेवा के वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे। इसके उपरांत, मीडिया के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यपाल संविधान का एक उच्च पद है और वह राज्य सरकार के साथ समन्वय से कार्य करेंगे। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के लिए भारत के राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह संविधान के अनुरूप कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि वह पूर्व राज्यपालों द्वारा आरंभ किए गए कार्यों को पूरा करेंगे और मुख्यमंत्री से उन कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने में सहयोग करने का आग्रह भी करेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है और अब वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश में अधिकांश समय सड़क मार्ग से ही यात्रा करेंगे ताकि वह लोगों की समस्याओं को जान सकें और हिमाचल को और करीब से समझ सकें। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और उन्होंने देवभूमि में ‘देवभाषा’ में शपथ लेकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश में कौशल विकास के लिए भी कार्य करेंगे ताकि युवा पीढ़ी को लाभ मिल सके। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बुराई तेजी से हमारी युवा पीढ़ी, देश के भविष्य को अपने शिकंजे में ले रही है। उन्होंने कहा कि सबसे दुखद स्थिति यह है कि आज दूर-दराज के क्षेत्रों में भी नशा अपने पांव पसार रहा है, जिसे रोकने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कानून और पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर काम करता है लेकिन इसके लिए समाज को जागरूक करने की भी आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से नशामुक्ति के अभियान को और व्यापक बनाकर प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। हिमाचल देवभूमि है और यहां नशे के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस नशा निवारण जागरूकता के लिए मीडिया से भी सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने प्रदेश की जनता के आतिथ्य की सराहना भी की। राज्यपाल ने शपथ लेने से पहले अपने परिवार के सदस्यों के साथ यज्ञ भी किया। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का जीवन-परिचय शिव प्रताप शुक्ल का जन्म गोरखपुर जनपद के ग्राम रूद्रपुर पोस्ट-खजनी में 1 अप्रैल 1952 को हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ग्राम-रूद्रपुर खजनी एवं कक्षा 9 से विधि स्नातक की शिक्षा गोरखपुर में प्राप्त की। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री के रूप में भी कार्य किया। वह 1983 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुये। वर्ष 1989 में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में गोरखपुर नगर विधानसभा क्षेत्र से प्रथम बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुये। इसके उपरान्त, वर्ष 1991 में पुनः निर्वाचित हुये एवं उत्तर प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में प्रारंभिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा एवं भाषा विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का कार्यभार संभाला। उन्होंने बागवानी विभाग, खेलकूद, युवा कल्याण एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के दायित्व का निवर्हन भी किया। वह वर्ष 1993 में पुनः विधानसभा के लिए निर्वाचित हुये। वर्ष 1996 में चौथी बार विधानसभा के लिए निर्वाचित होने के पश्चात् कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्त और राजनाथ सिंह की सरकार में कारागार विधि एवं न्याय एवं ग्रामीण विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निवर्हन किया। इसके उपरान्त, 10 जून, 2016 को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुये। उन्होंने 3 सितम्बर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में वित्त राज्यमंत्री, भारत सरकार का दायित्व संभाला। उन्होंने 4 जुलाई, 2022 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन सुनिश्चित किया।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पूर्व मंत्री स्वर्गीय जीएस बाली की धर्मपत्नी एवं हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आरएस बाली की माता किरण बाली के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने आज नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री ने परमपिता परमात्मा से दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए उन्हें इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। उप-मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला कांग्रेस के 85वां राष्ट्रीय महाअधिवेशन रायपुर में 24 से 26 फरवरी तक चलेगा। इस बैठक में सिर्फ आगमी लोकसभा चुनाव ही नहीं, बल्कि मल्लिकार्जुन खड़गे की नई टीम का गठन का भी खाका खींचा जाएगा। कांग्रेस में सबसे पावरफुल मानी जाने जाने वाली कार्यसमिति यानी सीडब्ल्यूसी के लिए क्या 26 साल के बाद चुनाव होंगे की भी तैयारी की जा रही है। तीन दिन तक चलने वाले महाअधिवेशन के लिए हिमाचल से संबंध रखने वाले कांग्रेस के युवा नेता गोकुल बुटेल को एआईसीसी द्वारा बड़ी जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें 8 लोगों की समन्वय समिति का सदस्य बनाया गया है। गोकुल बुटेल को हाल ही में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार (नवीनीकरण एवं सूचना प्रौद्योगिकी) कैबिनेट रैंक के साथ लगाया गया है। अब राष्ट्र स्तर पर एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से गोकुल बुटेल का राजनेतिक कद और बढ़ा है। गोकुल बुटेल ने कहा है की जो भी पार्टी ने जिम्मेदारी दी है, उसका पूरी श्रद्धा और ताकत से निर्वहन करेंगे। साथ ही में उन्होंने इस ज़िमेदारी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, सगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल, पार्टी महासचिव राजीव शुक्ला, प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का धन्यवाद किया।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेशवासियों को महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व राज्य में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस पर्व का प्रदेश के लोगों के लिए विशेष महत्व है। लोग इस अवसर पर भगवान शिव की पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना करते हैं। इस पर्व के माध्यम से परस्पर सौहार्द को भी बढ़ावा मिलता है।
रेट कांट्रैक्ट की सरकार है कांग्रेस सरकार पंकज सिंगटा। शिमला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा की कई आला कमान अफसर कांग्रेस पार्टी की चार्जशीट बनाने में मदद कर रहे थे, उसमें से एक अधिकारी को सरकार में विशेष नियुक्ति देकर कांग्रेस सरकार ने पुरस्कार दिया है। अब इस सुख की सरकार में कई दुखिए के दुख दूर किए जा रहे हैं, कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कबाड़ बिक्री की नई दरें तय हो चुकी है और अब तो क्रशर यूनियन भी बन चुकी है जिनके हर माह के दाम तय हो चुके हैं, इसका खुलासा हम जल्द करेंगे। उन्होंने कहा उद्योगपतियों के साथ लगातार सरकार के लोग बातचीत कर रहे हैं और उनके भी रेट कांट्रैक्ट तकरीबन तय हो चुके है। कांग्रेस इस मामले में टारगेट ओरिएंटाइड सरकार है। सुख की सरकार ने आते ही डीजल के ऊपर वेट को 3 बढ़ाकर जनता के ऊपर दुख का बोझ बढ़ा दिया। यह सरकार पानी की दरों पर सेस लगने जा रही है इससे भी जनता के दुख बढ़ने वाले हैं। डिपो में खाद्य तेल तो यह सरकार पहले ही महंगा कर चुकी है। 3 महीने होने को आए हैं और सरकार की कोई बड़ी उपलब्धि सामने नहीं आई, 25 जनवरी पर भी लोग और कर्मचारी घोषणाओं का इंतजार करते रहे पर सरकार ने कोई घोषणा नहीं की। हिमाचल सरकार की दूसरी कैबिनेट से जनता को बहुत आस थी क्योंकि इन्होंने बड़े-बड़े वायदे जनता से किए हैं, कैबिनेट में कोई बड़ा कार्य नहीं हो पाया कैबिनेट तो पूर्ण रूप से खाली निकली। कैबिनेट में केवल एक मामला पास हुआ कि सरकार दो हजार करोड़ का निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार के मुखिया केवल ऋण का रोना रो रहे हैं, पर इस सरकार के 3 महीने पूरे होने जा रहे हैं और अभी तक इस सरकार ने 4500 करोड़ का लोन ले लिया है। दिसंबर में 1000 करोड़, जनवरी में 1500 करोड़ और अब फरवरी में 2000 करोड़ का कर्ज सरकार लेने जा रही है। निश्चित रूप से हिमाचल श्रीलंका बनने जा रहा है, इस सरकार ने कोई भी ऐसी कमी नहीं छोड़ी जिससे हिमाचल में राजस्व घाटा बड़े ना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार केवल भाजपा के किए हुए कामों की वाहवाही लूटने में लगी है। जितने भी प्रोजेक्ट कि बात कांग्रेस सरकार कर रही हैं वह सब भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय स्थापित किए गए थे। हाल ही में एफसीए और एफआरए का निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है, इसमें हम स्पष्ट करना चाहेंगे कि भारतीय जनता पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को अच्छे से लड़ा, प्रधानमंत्री मोदी से तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर स्वयं मिले एफसीए और एफआरए को हटाने की मांग उनके समक्ष रखी, आज जब फैसला सामने आया तो केवल समय का अभाव है कि कांग्रेसी सरकार सत्ता में थी, पर परिश्रम तो भाजपा की सरकार ने ही किया थे। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने विधायक निधि रोक दी है और उसकी आखिरी किस्त भी नहीं दी है, अब तो उपायुक्त कार्यालय में जो जनता के कार्यों के लिए विकास निधि भेजी जाती थी, उसको भी रोक दिया गया है। यह सरकार चाहती ही नहीं कि धरातल पर विकास कार्य हो इस सरकार को तो केवल अपने ही सुखों की पड़ी है। कश्यप ने कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा केवल जनता की आवाज उठा रही है और उससे कांग्रेस को तकलीफ हो रही है। भाजपा एक मजबूत विपक्ष का कार्य कर रही है और इससे कांग्रेस पार्टी परेशान है। जिन 10 गरंटियों की समीक्षा करने के लिए राजीव शुक्ला हिमाचल आए है उन गारंटियों के बारे में जनता जानना चाहती है। कांग्रेस इस गारंटियों को कब तक पूरी करने जा रही है। उन्होंने कहा इस बार का केंद्रीय बजट सप्त ऋषि बजट है उसमें समग्र एवं समावेशी विकास पर जोर, समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच, बुनियादी ढांचा विकास एवं निवेश क्षमता को उजागर कर प्रोत्साहन, देश के हरित विकास पर पूरा ध्यान, युवा शक्ति के जोश का इस्तेमाल, वित्तीय क्षेत्र को बढ़ावा पर ध्यान देने पर उत्तम काम किया गया है। इस बार देश का सबसे बड़ा रेलवे बजट केंद्र सरकार ने प्रस्तुत किया है जो कि 2.40 लाख करोड रुपए है और इससे हिमाचल प्रदेश को भी बड़ा लाभ हुआ है। हिमाचल प्रदेश में तीन बड़ी रेल परियोजनाओं के लिए 1902 करोड रुपए का प्रावधान किया गया है। नंगल तलवाड़ा के लिए 204 करोड़, भानूपल्ली बिलापुर रेल के लिए 1260 करोड़ और चंडीगढ़ बड़ी रेल लाइन किए किए 450 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शिमला कालका रेलवे ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन के लिए भी केंद्र सरकार ने 870 करोड रुपए की राशि का प्रावधान किया है। इसके साथ साथ केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को 3 नर्सिंग कॉलेज भी दिए हैं और तमाम जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी बजट में कई प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सीमेंट उद्योग 2 महीने से बंद पड़े हैं और हिमाचल सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रही है, इसमें भी सरकार की व्यवस्था पूरी तरह से फेल होती दिखाई दे रही है। सरकार को इस मामले को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। इस सरकार ने बदला बदली की भावना से कार्य किए है हिमाचल प्रदेश में 620 से अधिक सरकारी संस्थानों को बंद कर दिया गया है, जिसका भारतीय जनता पार्टी मंडल स्तर पर विरोध कर रही है आने वाले समय में इस विरोध को और उग्र किया जाएगा। प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा और प्रदेश कोषाध्यक्ष संजय सूद उपस्थित रहे।
नगर निगम शिमला के चुनाव जल्द करवाए जा सकते है। इसके लिए राज्य चुनाव आयोग ने तैयारी तेज कर दी है। चुनाव के लिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चार मार्च को जारी कर दी जाएगी और बीते दिनों राज्य चुनाव आयोग की ओर से शेड्यूल जारी कर दिया गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में बीते सोमवार को इस मामले पर सुनवाई होनी थी। पर सुनवाई से पहले राज्य चुनाव आयोग की ओर से केस वापस लेने की अर्जी कोर्ट में दायर कर दी गई थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। शिमला नगर निगम का कार्यकाल 18 जून, 2022 को समाप्त हो चुका है। वार्डों के पुनर्सीमांकन के विरोध में एक पूर्व पार्षद व निवर्तमान पार्षद ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें जिला प्रशासन को दोबारा इस मामले में सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। दूसरी बार भी जब प्रशासन के निर्देश याचिकाकर्ताओं ने नहीं माने तो राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब राज्य चुनाव आयोग की ओर से केस वापस लेने के बाद नगर निगम चुनाव का रास्ता प्रशस्त हो चुका है। बता दें कि पूर्व सरकार ने शिमला नगर निगम में वार्डों की संख्या बढाकर 41 कर दी थी। पर वर्तमान सरकार ने अध्यादेश लाकर ने फिर से वार्डों की संख्या को 34 कर दिया है। 28 फरवरी तक होगा मतदाताओं का सत्यापन : पोलिंग स्टेशन मैपिंग का पूरा काम 22 फरवरी तक कर लिया जाएगा। 28 फरवरी तक मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। जो वोटर कहीं शिफ्ट हुए हैं या किसी अन्य कारण से शामिल नहीं हो सके हैं, इसके मिलान के लिए ही ईआरएमएस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। नगर निगम चुनाव के लिए वे लोग ही वोटर बन सकेंगे, जो मतदाता शिमला शहरी, कसुम्पटी या शिमला ग्रामीण के वोटर होंगे। इनके अलावा अन्य सभी के नाम वोटर के सॉफ्टवेयर में ही कट जाएंगे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से ड्राफ्ट वोटर को चार मार्च को जारी किया जाएगा। इसके बाद लोग अपना वोट बनाने के दावे और वोटर लिस्ट में शामिल गलत वोटों को कटवाने का दावा कर सकेंगे। जारी सिस्टम में ईआरओ की अनुमति के बगैर किसी का नाम नहीं काटा जा सकेगा।
** बढ़ते कर्ज की बाधा को खुलकर स्वीकार कर रही सुक्खू सरकार ** कर्ज का कारण, आमदनी कम और खर्च ज्यादा हिमाचल प्रदेश की सत्ता पर कांग्रेस के काबिज होने के बाद से ही प्रदेश पर बढ़ते कर्ज का मसला चर्चा में बना हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू खुलकर बढ़ते कर्ज पर बोल भी रहे है, इसे प्रदेश के विकास में रोड़ा भी मान रहे है और कड़े फैसले लेने की बात भी दोहरा रहे है। कर्ज के मसले पर सियासत भी खूब हो रही है। सीएम सुक्खू पूर्व की जयराम सरकार द्वारा विरासत में छोड़ा गया 75 हज़ार करोड़ का कर्ज भी बार-बार गिना रहे है और करीब 11 हज़ार करोड़ की देनदारियां भी। उधर, भाजपा भी कर्ज के बावजूद 6 सीपीएस की तैनाती सहित कई खर्चों पर सुक्खू सरकार को घेर रही है। बहरहाल राजनीति अपनी जगह है पर बढ़ता कर्ज हिमाचल प्रदेश के लिए बड़ी चिंता है, इसमें कोई दो राय नहीं है। अच्छी बात ये है कि सरकार खुलकर इसे स्वीकार भी कर रही है और आम आदमी को इससे लगातार अवगत भी करवा रही है। सीएम सुक्खू के बयानों पर निगाह डाले तो सरकार की मंशा साफ है, सरकार कर्ज की बैसाखियों पर आगे नहीं बढ़ाना चाहती। पर ये होगा कैसे, ये फिलवक्त स्पष्ट नहीं है। कड़े फैसलों से सीएम का क्या तात्पर्य है, ये भी स्पष्ट नहीं है। बहरहाल, निगाहें आगामी बजट पर टिकी है और संभवतः सुक्खू सरकार का पहला बजट सरकार की नीति और नियत, दोनों को पूरी तरह स्पष्ट कर देगा। 14 मार्च से हिमाचल विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने वाला है और इस बजट में कर्ज घटाने को लेकर सरकार की दूरदर्शी सोच क्या है, इस पर सबकी निगाह रहेगी। साधारण अर्थशास्त्र के लिहाज से बात करें तो कर्ज लेने की नौबत तब आती है जब आय से अधिक खर्च होता है। हिमाचल प्रदेश की स्थिति भी ऐसी ही है, आमदनी कम है और खर्चा ज्यादा। लिहाजा सरकार के पास एक ही चारा बचता है और वो है कर्ज लेना। बीते करीब दो दशक में हिमाचल प्रदेश पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ा है। 2007 तक प्रदेश पर करीब 20 हज़ार करोड़ का कर्जा था जो 2012 तक करीब 27500 करोड़ जा पंहुचा। 2017 के अंत तक प्रदेश पर करीब 46000 करोड़ का कर्ज था। वहीँ सीएम सुक्खू का कहना है कि जयराम सरकार ने प्रदेश पर करीब 75 हज़ार करोड़ का कर्ज छोड़ा है। निसंदेह ये बढ़ता कर्ज प्रदेश के लिए बड़ी चिंता है। अब सुक्खू सरकार के पास दो उपाय दिखाई देते है, एक गैर जरूरी खर्च कम करें और दूसरा आय बढ़ाई जाएं। आगामी बजट में इन दोनों पर सरकार कितना गौर करती है, ये देखना रोचक होगा। माना जा रहा है कि सरकार आम आदमी पर बोझ बढ़ाने के साथ -साथ कई सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में आगे बढ़ सकती है। संभवतः नेताओं को मिलने वाली सुविधाओं पर भी कुछ कैंची चलाई जा सकती है ताकि आम आदमी पर यदि बोझ बढ़े तो मुखालफत की स्थिति न आएं। वहीँ माना जा रहा है कि पन बिजली योजनाओं से आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन पर सरकार का मुख्य फोकस होगा। फिर कर्ज ले रही है सरकार : सुक्खू सरकार प्रदेश में आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की बातें तो कह रही है मगर कर्ज लेने का सिलसिला भी बदस्तूर बरकरार है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व की नई कांग्रेस सरकार 2,000 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए दो अधिसूचनाएं भी जारी की गई है। 700 करोड़ रुपये का कर्ज 9 साल की अवधि के लिए लिया जाएगा और 1,300 करोड़ रुपये का दूसरा कर्ज 15 साल की अवधि के लिए लिया जाएगा। बता दें कि प्रदेश सरकार इससे पहले 1,500 करोड़ रुपये का ऋण ले चुकी है। कर्ज लेने का कारण हिमाचल प्रदेश में विकास कार्यों के लिए इसका इस्तेमाल करना बताया गया है। शांता ने बताया, कैसे कर्ज मुक्त हुआ था हिमाचल हिमाचल प्रदेश में जब भी कर्ज की बात होती है तो शांता सरकार का जिक्र जरूर होता है। बेशक बतौर मुख्यमंत्री शांता कुमार अपनी दोनों पारियां पूरी न कर सके हो लेकिन उनके कई निर्णय काबिल -ए -तारीफ़ रहे है। ख़ास बात ये है कि शांता कुमार ने दोनों दफे जब सीएम पद छोड़ा तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति बेहतर थी। क्या था शांता कुमार का इकोनॉमी विज़न और सुक्खू सरकार को उनकी क्या नसीहत है, इसे लेकर फर्स्ट वर्डिक्ट ने शांता कुमार से बात की। शांता कुमार बताते है कि आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहने के बाद जब 1977 में वे पहली बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो प्रदेश पर लभग 50 करोड़ का ओवर ड्राफ्ट था, मगर जब तक शांता ने कुर्सी छोड़ी तो प्रदेश कर्ज मुक्त हो चुका था। शांता कहते है कि प्रदेश को कर्ज मुक्त करने की शुरुआत उन्होंने खुद से की। फिजूल खर्च कम किये, अपने दफ्तर में टेबल पर रखे चार फोन में से दो फोन कटवा दिए। प्रदेश भर के दफ्तरों में अधिकारियों के अनावश्यक टेलीफोन कटवाए। मुख्यमंत्री के साथ चलने वाला गाड़ियों का काफिला बंद कर करवा दिया। अफसरों को आदेश दिए गए कि मुख्यमंत्री की अगवानी करने के लिए दूसरे जिलों में डीसी और एसपी नहीं आएंगे। शनिवार और रविवार को अफसरों की ओर से सरकारी गाड़ियों का प्रयोग बंद करवाया गया। ये छोटे -छोटे खर्च कम करके बतौर मुख्यमंत्री पहले ही साल उन्होंने 40 करोड़ बचाए। ये समय ये बड़ी राशी थी। ये पैसा बचा कर पीने के पानी पर लगाया गया। हर घर नल पहुंचाए गए। शांता कुमार कहते है कि 1992 में जब वे सीएम पद से हटे तब हिमाचल सरकार पर एक रुपये भी कर्ज नहीं था। हिमाचल में साधन बढ़ाने के लिए पन बिजली योजना को निजी भागीदारी में लाया गया। सभी योजनाओं में सरकार को 12 प्रतिशत रॉयल्टी दिलाई गई। कभी विरोधी उनकी इस सोच पर हंसते थे लेकिन अब हर साल इससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये की आय होती है। सुक्खू सरकार को नसीहत : शांता कुमार कहते है कि हवा में उड़ने से ज्यादा अगर सड़कों पर चला जाए तो प्रदेश पर कर्ज कम हो सकता है। शांता का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री सरकार को अपना घर समझ कर चलाएंगे तो बचत होगी ही।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां परिवहन विभाग की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसमें उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल को वर्ष 2025 तक हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा हरित ऊर्जा के अधिकतम दोहन को प्राथमिकता प्रदान करते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्युत चालित वाहनों के संचालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग को विद्युत चालित वाहनों से लैस कर दिया गया है और अब हिमाचल पथ परिवहन निगम में भी विद्युत चालित वाहनों का समावेश किया जाएगा। उन्होंने परिवहन निगम के बेड़े में चरणबद्ध ढंग से विद्युत चालित बसें शामिल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने परिवहन निगम को विद्युत चालित वाहन निर्मात्ताओं के साथ बैठक कर विभिन्न औपचारिकताएं पूर्ण करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि विद्युत चालित वाहनों की खरीद तथा चार्जिंग सुविधा के लिए आधारभूत ढांचा विकसित करने तथा इसमें अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीकों का अध्ययन भी किया जाए। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय लोगों तथा बाहर से आने वाले यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़ संकल्प है। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में रोजगार के अवसर सृजित करते हुए प्रदेश के युवाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा। युवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ई-टैक्सी जैसी सुविधा प्रदान करने पर भी विचार किया जाएगा। उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी दिए अपने बहुमूल्य सुझाव बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, प्रधान सचिव परिवहन आरडी नजीम, परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार तथा निदेशक परिवहन अनुपम कश्यप भी उपस्थित थे।
पंकज सिंगटा। शिमला भाजपा नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने हिमाचल के नवनियुक्त राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला का राजभवन पहुंचने पर हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया। इस अवसर पर भाजपा संगठन मंत्री पवन राणा, उपाध्यक्ष संजीव कटवाल, सचिव प्यार सिंह कंवर, मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा, गणेश दत्त, रूपा शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अगर यही गति रही तो हर साल 18000 करोड़ का लोन लेना पड़ेगा पंकज सिंगटा। शिमला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर से उनके निवास स्थान शिमला पर मुलाकात की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल की सरकार 2000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त ऋण इस माह लेने जा रही है। अभी हिमाचल में कांग्रेस को सरकार को बने तीन महीने ही हुए है और इन्होंने दिसंबर में 1000 करोड़, जनवरी में 1500 करोड़ और अब फरवरी में 2000 करोड़ का लोन ले लिया है। कुल मिलाकर इस सरकार ने 4500 करोड़ का लोन ले भी लिया है, अगर हर महीने यह सरकार 1500 करोड़ का ऋण ले रही है, तो निश्चित रूप से 12 महीने में 18000 करोड़ का ऋण तो यह सरकार ले ही लेगी। उन्होंने कहा की कांग्रेस 10 गारंटी देकर सत्ता में आई थी, पर उसमे से एक भी गारंटी पूरी होती नहीं दिखाई दे रही है। कल कांग्रेस सरकार की दूसरी कैबिनेट की बैठक थी और जनता को इस कैबिनेट बैठक से बड़ी उम्मीदें थी। अगर देखा जाए, तो कैबिनेट की बैठक में एक भी गारंटी पर चर्चा नहीं हो पाई, न तो ओपीएस की बात हुई और न ही महिलाओं को 1500 प्रति माह देने की बात को गई। हो हल्ला तो काफी था, पर कैबिनेट तो खोखली निकली। हिमाचल के लोग तो सरकार द्वारा गोबर खरीदने का इंतजार भी कर रहे हैं, जिसका वादा कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो में किया था। कश्यप ने कहा की युवाओं से इस कांग्रेस सरकार ने 5 लाख नौकरियों का वादा भी किया था, पर अभी इनकी सब समिति ने वर्ष की 20 हजार नौकरियों की बात की है। यह भी युवाओं के साथ दोखा है। रही बात 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने की, तो यह वादा भी पूरा होता नहीं दिखा दे रहा है। क्योंकि बिजली बोर्ड भी बड़े घाटे में चल रहा है और जो 125 यूनिट भाजपा सरकार ने जनता को मुफ्त दिए थे, उसमें भी प्रदेश सरकार ने कटौती की है। अगर देखा जाए, तो बिजली बोर्ड को अपनी पेंशन सैलरी देने के लिए 180 करोड़ प्रति माह की राशि चाहिए होती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यह बताएं कि हिमाचल प्रदेश श्रीलंका कब बन रहा है, जैसे कि इस सरकार के मुखिया ने कहा था कि हिमाचल में श्रीलंका जैसी परिस्थितियां होने वाली है, पर आज तक भाजपा के कार्यकाल में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं हुई। अगर आप देखें तो प्रदेश में अधिकतम समय कांग्रेस की सरकार रही है और अगर अधिकतम ऋण किसी सरकार ने लिया है, तो वह कांग्रेस की सरकार ने लिया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से जन-सुविधाओं को त्वरित और सुगम बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। यह बात मुख्यमंत्री ने वीरवार देर शाम यहां ड्रोन प्रौद्योगिकी से संबंधित आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी के इस युग में सरकारी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम और समय की बचत के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ड्रोन टेक्नोलॉजी का सरकारी क्षेत्र में व्यापक उपयोग करने की तैयारी कर रही है। आधुनिकतम प्रौद्योगिकी का समुचित उपयोग करते हुए प्रदेश की जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कृषि व बागवानी तथा स्वास्थ्य क्षेत्र, यातायात प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, ट्रैकर्स रूट पर बचाव, अवैध खनन पर नजर रखने तथा विभिन्न योजनाओं को धरातल पर लागू करने की निगरानी में ड्रोन उपयोगी एवं सार्थक भूमिका निभा सकते हैं। प्रारंभिक चरण में ड्रोन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल निगरानी तंत्र को विकसित करने तथा माल ढुलाई इत्यादि के लिए करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के माध्यम से विभिन्न विभागों की सेवाओं में तेजी लाने पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। बैठक में मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी व आशीष बुटेल, विधायक केवल सिंह पठानिया, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, सचिव आईटी विभाग डॉ. अभिषेक जैन, निदेशक सूचना एवं जन संपर्क विभाग किरण भड़ाना, ओएसडी गोपाल शर्मा, इल्मा अफरोज़ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के सह संयोजक एवं समता आंदोलन के हिमाचल व पंजाब के अध्यक्ष, वरिष्ठ कांग्रेस के नेता डॉक्टर केआर आर्य ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा प्रदेश के 6000 बच्चों के लिए गठित सूख आश्रय कोष की सराहना की है। डॉक्टर केआर आर्य ने इस कोष के लिए समता आंदोलन व आर्य ईएनटी हस्पताल मेहतपुर की तरफ से ₹51000 का योगदान दिया है ।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करते हुए डॉक्टर के आर आर्य सुखाश्रय कोष के लिए चेक मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू को सौंपा ।उन्होंने कहा कि यह एक बेहतरीन पहल है जिसमें समाज के हर वर्ग को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पुण्य का कार्य है और सरकार ने इसके लिए जिस प्रकार से नीति व नियम बनाया है यह अपने आप में सराहनीय है, प्रदेश की कैबिनेट बैठक में इन बच्चों के लिए हर सुख सुविधा का ध्यान रखते हुए पूरी नीति बनाई गई है जिसके लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रशंसा की पात्र हैं। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह सरकार समाज के हर वर्ग के लिए बेहतरीन कार्य करते हुए आगे बढ़ेगी। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने समता आंदोलन व डॉ के आर आर्य द्वारा सुख आश्रय कोष में सहयोग करने पर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से समाज के हर वर्ग को इस कोष में अंशदान करना चाहिए ताकि हम उन बच्चों की मदद कर पाए ,जिन बच्चों के मां-बाप नहीं है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों के लिए सरकार मां-बाप की भूमिका अदा करेगी। उन्होंने कहा कि हम पूरी सुख सुविधाओं का ध्यान रखेंगे।
प्लास्टिक उत्पादकों, आयातकों, ब्रांड मालिकों और अपशिष्ट संसाधकों को ईपीआर पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य
प्रदेश में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की समीक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष संजय गुप्ता की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 के प्रावधानों पर व्यापक चर्चा की गई। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक पैकेजिंग अपशिष्ट का समुचित प्रबंधन करना है जो कि हाल ही के वर्षों से पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। बैठक में अवगत करवाया गया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्लास्टिक उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों तथा अपशिष्ट संसाधकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) पोर्टल विकसित किया गया है। इन सभी को इस पोर्टल पर पंजीकरण करवाना आवश्यक है। पंजीकरण के दौरान प्लास्टिक उत्पादों की मात्रा, आयात अथवा बेचे गए उत्पादों का ब्यौरा तथा इसके प्रबंधन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधारभूत ढांचा उपलब्ध करवाने के अतिरिक्त इन अपशिष्टों के एकत्रीकरण, पृथक्करण, पुनश्चक्रण, पुनः उपयोग और निस्तारण का लक्ष्य भी इन्हें प्राप्त करना होगा। प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधकों को प्रत्येक वित्त वर्ष में 30 अप्रैल तक श्रेणीवार इस बारे में अपना वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना होगा। उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को प्लास्टिक पैकेजिंग अपशिष्ट एकत्रीकरण और इसके संसाधन के बारे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अथवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति के समक्ष प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 जून तक निर्धारित प्रपत्र पर वार्षिक विवरण देना होगा। ईपीआर लक्ष्यों का प्रयोजन प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों की और सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में प्लास्टिक उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों व पुनश्चक्रकों को मिलाकर लगभग 800 प्लास्टिक अपशिष्ट पैकेजिंग इकाइयां क्रियाशील हैं और इनमें से अभी केवल 84 इकाइयों ने ही ईपीआर पोर्टल पर पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष इकाइयों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार ईपीआर पोर्टल पर पंजीकृत करना सुनिश्चित करवाएं। इसके लिए सभी इकाइयों को गत चार फरवरी को ही आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को प्लास्टिक पैकेजिंग अपशिष्टों के एकत्रीकरण, पृथक्करण और संसाधकों तक इन अपशिष्टों के परिवहन तथा प्लास्टिक अपशिष्टों के निस्तारण और क्रय के लिए अनुबंध इत्यादि की भी जानकारी देनी होगी। यदि यह अपशिष्ट राज्य से बाहर संसाधकों को भेजे जाते हैं, तो एकत्रीकरण ढांचे और परिवहन का ब्यौरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देना होगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यों, नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, विधायकगण, मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, जीओसी-इन-सी आरट्रेक लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. महल, कुलपतियों, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने राजभवन में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को विदाई दी। इससे पहले, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, युवा कार्य और खेल मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और विभिन्न गणमान्य लोगों ने राज्यपाल से भेंट की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह हिमाचल प्रदेश से लोगों का स्नेह साथ ले जा रहे हैं। राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि उन्हें पूर्ण सहयोग और सम्मान मिला, जिसके लिए वह हमेशा हिमाचल की जनता के ऋणी रहेंगे।
हिमाचल प्रदेश कैबिनेट की बैठक वीरवार को राज्य सचिवालय के शिखर सम्मेलन हॉल शिमला में हुई। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व की प्रदेश की नई सरकार की यह दूसरी कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में विधानसभा के बजट सत्र की तिथियों पर निर्णय लिया गया। विधानसभा का बजट सत्र 14 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा। मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष स्थापित करने को भी कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। 101 करोड़ रुपये से कोष स्थापित होगा। सभी कांग्रेस विधायकों ने अपना पहला वेतन कोष में दान किया। कोष के माध्यम से अनाथ और बेसहारा बच्चों की मदद की जाएगी। इस योजना के तहत 3 करोड़ रुपए की राशि जमा हो गई है। इस योजना के तहत सभी विधायकों ने एक-एक लाख रुपए जमा किए है। प्रदेशवासी भी इस कोष में दान कर रहे हैं। इससे बेसहारा बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं की मदद की जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखाश्रय योजना के अंतर्गत अनाथ, विशेष रूप से सक्षम, निराश्रित महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को लाया गया है, जिसमें उन्हें हर संभव सहायता का प्रावधान किया गया है। योजना में प्रदेश सरकार ने अनाथ बच्चों को अपने बच्चों (चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट) के रूप में अपनाया है। सीएम ने कहा कि आज की कैबिनेट में बेसहारा बच्चों व बुजुर्गों के रहने के लिए सुंदरनगर और ज्वालाजी में आवास बनाने को 80-80 करोड़ रुपए की मंजूरी प्रदान की गई। इससे दोनों जगह आधुनिक सुविधाओं से लेस कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आवासीय भवन में अटैच शौचालय वाले कमरे, मनोरंजन व गतिविधि कक्ष, कॉमन रूम, म्यूजिक रूम, स्मार्ट क्लास रूम, कोचिंग रूम, इनडोर व आउटडोर खेल सुविधाओं सहित अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन संस्थानों के आवासियों को विवाह के लिए दो लाख रुपए प्रदान किया जाएंगे। इसके अतिरिक्त इन संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक बच्चे, निराश्रित महिलाओं का आवर्ती जमा खाता खोला जाएगा, जिसमें सरकार द्वारा 0-14 वर्ष की आयु के बच्चों को एक हजार रुपए प्रति बच्चा प्रति माह, 15-18 वर्ष आयु के बच्चों व एकल महिलाओं को 2500 रुपए प्रति माह की सहायता राशि दी जाएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने डीडी हिमाचल 24*7 सेवा आरंभ कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम पीटरहोफ शिमला में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विशेष रुप से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर उपस्थित रहे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने डीडी हिमाचल और उनकी की पूरी टीम को इस अवसर पर शुभकामनाएं दी और उन्होंने कहा कि यह हिमाचल के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। दूरदर्शन हिमाचल के गांव-गांव तक पहुंचने वाला चैनल है और इससे लोगों को बहुत बड़ा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि डीडी हिमाचल 24*7 चलाया जाए ऐसी लोगों की लंबी मांग थी और इसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र में और प्रदेश में, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और अन्य गणमान्य नेताओं के साथ परिश्रम किया था। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन गांव गांव तक खबरों ,संस्कृति और हिमाचल से जुड़े छोटे-छोटे पलों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करता है और जिस प्रकार से अब दूरदर्शन 24 घंटे चलेगा उससे लोगों को दूरदर्शन देखने का बड़ा लाभ होगा।
About 65 students of Govt Sr. Sec School Chanawag, Shimla visited JUIT on 14th Feb 2023. They visited various departments including Computer Science Engineering, Information Technology, Biotechnology and Bioinformatics, Civil Engineering, Electronics and Communication Engineering, Department of Mathematics, Department of Physics and Materials Science, Department of Humanities and Social Sciences, etc. They interacted with the faculties and Lab staff and learned about various tests done in these labs. The Head of the Civil Engineering Department, Dr. Ashish Kumar encouraged having similar frequent visits in the near future so that students must develop an interest in science, engineering, and technology. This visit was coordinated by Dr. Saurav from the Civil Engineering department while other faculty members from various other departments helped in the overall organization of this important visit to the students.
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने शिमला में हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की। इस अवसर पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को टोपी शॉल पहनाकर सम्मानित किया और उनका हिमाचल आगमन पर स्वागत किया। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप भी उनके साथ उपस्थित रहे। सभी नेताओं की हिमाचल को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई और हिमाचल की प्रगति को लेकर किस प्रकार से आगे बढ़ना है उसको लेकर भी कई विषयों पर चर्चा की गई।
आईस हॉकी एसोसिएशन ऑफ लाहौल-स्पीति के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज शिमला में राजस्व, बागवानी व जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व मंत्री को एसोसिएशन की गतिविधियों से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की आईस हॉकी टीम ने आईस हॉकी एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा लेह-लद्दाख में आयोजित नेशनल आईस हॉकी चैंपियनशिप-2023 में अंडर-18 व्बॉयज व वरिष्ठ महिला वर्ग में कांस्य पदक जीते हैं। राजस्व मंत्री ने एसोसिएशन को बधाई देते हुए दोनों टीमों को अपनी ऐच्छिक निधि से एक-एक लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा इससे जुड़े आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार द्वारा नवोदित खिलाड़ियों को बेहतरीन सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाएंगी ताकि वे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ कर देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू नेक निर्माण विभाग तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में जारी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए भू-अधिग्रहण के मुआवज़े से संबंधित मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के लिए संबंधित जिला प्रशासनों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुआवज़ा राशि प्रदान करने में अनावश्यक देरी से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन सड़कों का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए करें और सुरंगों तथा पुलों के निर्माण पर विशेष ध्यान केन्द्रित करें। सीएम ने सुचारू यातायात संचालन के लिए इन मार्गों में तंग गलियारों व मोड़ों में सुधार के भी निर्देश दिए। उन्होंने प्राधिकरण को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने तथा निविदा प्रक्रिया की समय सीमा घटाने के भी निर्देश दिए ताकि परियोजना का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने कहा कि सड़कें हिमाचल प्रदेश के लोगों की जीवन रेखाएं हैं क्योंकि यहां रेल तथा हवाई संपर्क सीमित स्तर पर ही उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार यात्रियों को विश्व स्तरीय सड़क ढांचा उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्य कर रही है और इससे राज्य में आने वाले पर्यटकों को भी सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने शिमला-मटौर, कीरतपुर-नेरचौक और मण्डी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्गों को फोरलेन मार्गों में स्तरोन्नत करने के कार्य को गति प्रदान करने के भी निर्देश दिए। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ऊना जिला में बिढ़ू से लठियाणी को जोड़ने के लिए गोविंद सागर झील पर 900 करोड़ रुपये अनुमानित लागत से एक पुल का निर्माण किया जाएगा जिसके लिए उन्होंने 25 फरवरी, 2023 तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नालागढ़ से स्वारघाट फोरलेन के विस्तारीकरण पर 600 करोड़ रुपये, कालाअम्ब-पावंटा साहिब-देहरादून फोरलेन के विस्तारीकरण पर 1200 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय राजमार्ग-503 अम्ब से ऊना और पंजाब सीमा से नादौन तक राष्ट्रीय राजमार्ग-03 के फोरलेन विस्तारीकरण पर 1500 करोड़ रुपये तथा ऊना बाईपास के निर्माण पर अनुमानित 500 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 4700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से प्रदेश में शीघ्र ही 178 किलोमीटर लंबी फोरलेनिंग परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर केलिए राजभवन में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर लेडी गवर्नर अनघा आर्लेकर भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर, राज्यपाल ने प्रदेशवासियों के अपार स्नेह के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश में अपने कार्यकाल की मधुर स्मृतियां संजोकर ले जा रहे हैं और यहां उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों में अपनेपन की भावना है और वे प्यार बांटने में विश्वास रखते हैं। प्रदेशवासियों के आतिथ्य सत्कार को वह कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के साथ-साथ प्रेम व अपनत्व की भूमि भी है और वे यहां की समृद्ध परंपराओं, लोक संस्कृति, रीति रिवाजों की अमूल्य निधि अपने साथ ले जा रहे हैं। प्रदेश हित में किए गए प्रयासों में उन्हें सभी वर्गों का सहयोग प्राप्त हुआ और टीम वर्क की भावना ने उन्हें सदैव प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव बिहार के राज्यपाल के तौर पर उनकी नई जिम्मेदारी के निर्वहन में सहायक होगा। आर्लेकर ने कहा कि वह एक साधारण परिवार से संबंध रखते हैं और यहां आकर जो कुछ नया सीखने को मिला, सीखा और जो सम्मान उन्हें प्राप्त हुआ, वह अतुलनीय है। इस अवसर पर, राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा ने राज्यपाल एवं लेडी गवर्नर को सम्मानित किया और राज्य में उनके द्वारा शुरू की गई विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं की स्मृतियों को साझा करते हुए उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।


















































