उपमण्डलाधिकारी सोलन अजय कुमार यादव ने कहा कि विश्वसनीयता पत्रकारिता का मूल आधार है और सभी पत्रकारों को अपनी विश्वसनीयता कायम रखते हुए जनहित में कार्य करना चाहिए। अजय कुमार यादव ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर उपस्थित पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए यह बात कही। इस वर्ष भारतीय प्रेस परिषद के सुझाव पर ‘मीडिया से किसको डर नहीं विषय पर पूरे देश के साथ-साथ सोलन जिला के पत्रकारों द्वारा भी सारगर्भित विचार-विमर्श किया गया। अजय कुमार यादव ने कहा कि मीडिया के विभिन्न आयामों के माध्यम से आमजन को न केवल जन कल्याणकारी नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी मिलती है अपितु नियमित संवाद भी स्थापित होता है। उन्होंने कहा कि मीडिया के द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले नकारात्मक समाचार सशक्त फीडबैक का कार्य करते हैं। इसके माध्यम से जहां नीतियों एवं कार्यक्रमों को अधिक जनमुखी बनाने में सहायता मिलती है वहीं आमजन की आशाओं का भी ज्ञान होता है। जिला लोक संपर्क अधिकारी हेमन्त वत्स ने सभी का स्वागत किया तथा विषय की जानकारी प्रस्तुत की। इस अवसर पर विभिन्न समाचार पत्रों, इलैक्ट्राॅनिक मीडिया के ब्यूरो प्रमुख तथा संवाद्दाताओं सहित जिला लोक संपर्क अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी उपस्थित थे।
पेंशनर्ज एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन इकाई पट्टाबरावरी- हरिपुर की मासिक बैठक इकाई अध्यक्ष डी डी कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में चर्चा कर डी डी कश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पेंशनरो तथा कर्मचारियों की अभी तक कोई भी मांगें नही मानी है। वर्ष 2003 के जितने भी कर्मचारी भर्ती हुए हैं, उन्हें पेंशन से वंचित रखा गया है और इस तरह पेंशनरों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। डी डी कश्यप ने कहा कि 27 नवम्बर को होने वाली सरकार से सँयुक्त सलाहकार समिति की बैठक में सरकार को विचार कर पुरानी पेंशन को बहाल कर कर्मचारियों को इसका लाभ देना चाहिए। बैठक में चर्चा की गई कि अभी हाल ही में पंजाब सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का छठा वेतन आयोग जुलाई 2021 से लागू कर दिया है। जनवरी 2016 से कर्मचारियों और पेंशनरो को इसका लाभ मिलेगा इसके साथ ही पंजाब सरकार ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर्मचारियों व पेंशनरों के मूल वेतन में करने की घोषणा की है। डी डी कश्यप सहित अन्य पेंशनरो ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि पंजाब की तर्ज पर इसे हिमाचल में भी लागू किया जाए। बैठक में पेंडिंग पड़े महंगाई भत्ते देने की भी सरकार से मांग की गई। इस बैठक में जगदेव गर्ग, रोशन लाल कौंडल, जगदीश शर्मा, दुनिचन्द ठाकुर, प्रेम चन्द कश्यप, नेकराम कौंडल, शीला देवी, हंसराज शर्मा, सन्तोष कुमार, राम नाथ शर्मा आदि उपस्थित रहे।
भले ही हिमाचल व केन्द्र सरकार देश की हर पंचायत को स्वच्छ भारत मिशन के साथ जोड़ने का दावा कर रही है। लेकिन ब्लॉक खण्ड परागपुर के अन्तर्गत ग्राम पंचायत डाडासीबा उक्त तमाम दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। यहाँ क्षेत्र भर से दौड़ लगाने वाले युवाओं व सुबह शाम सैर पर निकलने वाले बुजुर्गो के लिए पहली पंसद बना बड़ा ग्राउंड इन दिनो जगह जगह बिखरी गन्दगी से भरा पड़ा है। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। स्थानिय ग्रामीणों का आरोप है कि यहां उक्त ग्राउंड में विगत करीब डेढ़ महीना लगातार ट्रैड फेयर मेला चलता रहा। लिहाजा यहां से मेला चले जाने के बाद जगह जगह पसरी गंदगी अब लोगो को मुहं चिड़ा रही है। यहाँ सुबह शाम सैर पर निकलने वाले बजुर्गो के लिए यह गन्दगी आफत बनने लगी है। तो दौड़ लगाने वाले युवाओ के लिए भी यहां परेशानी पैदा होने लगी है। स्थानिय ग्रामीणों ने स्थानिय पंचायत प्रतिनिधियो से मांग की है कि इस गम्भीर समस्या से तुरन्त छुटकारा दिलवाया जाए। इस संबंध में पंचायत प्रधान सपना देवी डाडा सीबा से बात की गई तो उन्होंने बताया शीघ्र ही मैदान की साफ सफाई करवाई जाएगी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय देहरा परिषर इकाई ने हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा परिसर निदेशक डॉ हर्षवर्धन को विश्वविद्यालय में लंबित मांगों को लेकर मांग पत्र सौंपा। ईकाई अध्यक्ष चन्दन ठाकुर ने जानकारी देते हुए कहा कि, छात्रों की विश्वविद्यालय में अनेक समस्याएं है। चाहे वो छात्रों के छात्रावास की सुविधा का विषय हो या एमफिल में सबमिशन फीस बढ़ाने का विषय हो इस प्रकार की अनेक समस्याएं विश्वविद्यालय छात्रों को आ रही है। विद्यार्थी परिषद ने यह मांग रखी की जल्द से जल्द छात्रावास की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए तथा बढ़ाई हुई एमफिल की फीस को जल्द से जल्द वापिस लिया जाए। अगर विषय छात्रावासों की व्यवस्था का देखा जाए तो धर्मशाला व शाहपुर दोनों परिसरों में होस्टल की व्यवस्थाएं है। लेकिन देहरा परिसर में छात्रों के लिए इस प्रकार की कोई व्यवस्था लम्बे समय से नहीं है। छात्रों हितों को ध्यान में रखते हुए देहरा परिसर में भी एक छात्रावास की व्यवस्था की जाए। विद्यार्थी परिषद ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द इन सभी मांगों को पूरा नहीं किया गया। तो विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ निर्णायक आंदोलन लड़ेगी ।
नादौन के नग्घु में युवा मंडल नग्घु द्वारा कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस दौरान आम आदमी पार्टी ओबीसी के राज्य मंत्री शैंकी ठुकराल मुख्यअतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ठुकराल फाउंडेशन के अध्यक्ष व आम आदमी पार्टी ओबीसी के राज्य मंत्री शैंकी ठुकराल को युवा मंडल नग्घू द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शैंकी ठुकराल ने खिलाडियों को खेल भावना से खेलने की प्रेरणा दी। शैंकी ठुकराल ने कहा कि कबड्डी भारतियों के दिल में बस्ती है। युवा मंडल नग्घु के साहिल, कपिल व अमन ने बतयाया कि प्रतियोगिता में सभी मैच ठीक ढंग से आयोजित हुए।
अत्याधुनिक भारतीय ड्रॉप रो बॉल खेल की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का विधिवत समापन हुआ। इस समापन कार्यक्रम में मुख्यअतिथि उपमंडलाधिकारी चौपाल चेत सिंह, डीएसपी चौपाल राजकुमार, सेवानिवृत्त संघ चौपाल के अध्यक्ष सुरेश चौहान व उपप्रधान एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश घुंटा उपस्थित रहे। मुख्यातिथि ने अपने संबोधन में कहा कि इस खेल को जानने के बाद मुझे लगता है कि इस खेल के मुकाबले सस्ता और सरल खेल कोई हो ही नहीं सकता, ये बहुत मनोरंजन भरा खेल है। एक प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते यदि इस खेल के विकास के लिए मुझसे कोई मदद की आवश्यकता हो तो में सदैव आपके साथ खड़ा हूं। इस दौरान ड्रॉप रो बॉल के सचिव गोविंद सिह ने मुख्यातिथि को इस खेल के बारे में बारीकी से जानकारी दी। इस मौके ड्रॉप रों बॉल डेवलपमेंट के अध्यक्ष अमित चौहान और उपाध्यक्ष राजिंदर त्यागी ने अपने संबोधन में मुख्यातिथि और अन्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
100 साल पूरे होने पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का 7वां सम्मेलन होने जा रहा है। 16 से 19 नवंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने शिमला पहुँच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 नवंबर को वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। 100 वर्ष पहले 1921 में शिमला में प्रथम अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन शिमला से शुरू हुआ था। 36 राज्यों की विधानसभाओं, विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी, उपाध्यक्ष और प्रधान सचिव सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने बताया कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन 16 से 19 नवम्बर तक हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1921 में यह सम्मेलन हुआ था। उन्होंने बताया कि किस तरह लोकतंत्र सशक्त हो संवैधानिक संस्थाए मजबूत हो इस पर चर्चा की जाएगी। हिमाचल में विधायकों की अकादमी को लेकर कहा कि चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा। एयर इंडेक्स को लेकर पूछे गए सवाल पर ओम बिड़ला ने बताया कि शिमला देश ही नही दुनिया में भी अपनी सौंदर्य व शुद्ध आवोहवा के लिए विख्यात है। सम्मेलन में 36 राज्य विधान परिषदों तथा विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारी उप पीठासीन अधिकारी व प्रधान सचिव भाग ले रहे है। कुल मिलाकर एक राज्य से 4 प्रतिनिधि अपनी स्पाउस के साथ इस सम्मेलन में भाग लेंगे जिनकी संख्या 288 होगी। सम्मेलन में भाग ले रहे प्रतिनिधियों की कुल संख्या 378 होगी।
भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा संगठनात्मक जिला देहरा के जिलाध्यक्ष मुकेश सोनी ने प्रेस विज्ञापित जारी करते हुए कहा कि बिक्रम ठाकुर ही मंडल भाजपा के नेता हैं। उनके इस मंत्रिमंडल के कार्यकाल में जसवां प्रागपुर में टेरेस से लेकर प्रागपुर तक चारों तरफ चौमुखी विकास हो रहा है। इस क्षेत्र की जनता भी मंत्री बिक्रम ठाकुर से अपार स्नेह और प्यार करती है। उन्होंने कुछ लोग मीडिया के माध्यम से झूठी अफवाहें फैला रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनावों में मंत्री बिक्रम ठाकुर देहरा विधानसभा क्षेत्र से 2022 का चुनाव लड़ेंगे जोकि सरासर गलत है। मंत्री पिछले 25 वर्षों से अपनी राजनीति जसवां प्रागपुर क्षेत्र के लोगों के लिए कर रहे हैं। जसवां-परागपुर ही उनकी जन्मभूमि और कर्म भूमि है और मरते दम तक मंत्री जसवां परागपुर के लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
ज़िला कुल्लू में एक मकान में बीती रात आग लगने की घटना सामने आई है। इस आगजनी की घटना में करीब 5 लाख रुपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इस घटना में 1 करोड़ की संम्पति को बचा लिया गया है, परंतु 5 लाख के नुकसान को नहीं बचाया जा सका है। दमकल विभाग के अनुसार देर रात को पर्यटन नगरी में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के निकट रोशन लाल, योगराज, इकबाल के तीन मंजिला लकड़ी के मकान में आग लग गई। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चला है। जैसे ही अग्निशमन विभाग को आग लगने कि सूचना मिली, तो तुरंत अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर जाकर आग पर काबू पाया और एक करोड़ से अधिक की संपत्ति को बचाया लिया।'
स्वच्छता पखवाड़ा अभियान के तहत देहरा डाकमंडल के कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता शपथ ली गई। इसके साथ यह प्रण लिया गया कि महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था, उसमे सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश की कल्पना भी की थी। अब हमारा कर्तव्य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करे। देहरा डाकमंडल के सभी कर्मचारियों द्वारा यह शपथ ली गयी कि हर वर्ष 100 घंटे यानी हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के इस संकल्प को चरितार्थ करेंगे। स्वच्छता पखवाड़ा के तहत 16 नवम्बर से 30 नवम्बर तक अलग अलग गतिविधियां जैसा कि स्वच्छता अभियान तहत डाकघरों की सफाई, जनता में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना, कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लोगों को आपस में दूरी बनाए रखने व मास्क पहनने के लिए जागरूक करना, पोस्टल कॉलोनियों की सफाई इत्यादि करना प्रस्तावित है। इस अभियान के तहत स्वछता से संबन्धित अन्य कई गतिविधियां शामिल हैं। जो कि 30 नवम्बर तक चलेगी। इस मौके पर सभी कर्मचारियों को सहायक डाक अधीक्षक सनी भारद्वाज व डाकपाल देहरा सुनीता धीमान ने शपथ दिलवाई व सभी को स्वच्छता पखवाड़ा की आने वाली गतिविधियों मे बढ़ चढ़ कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
उपमण्डल ज्वालामुखी के तहत पड़ते मझीन निवासी विकास धीमान को आम आदमी पार्टी ने ज्वालामुखी का अध्यक्ष मनोनीत किया है। जिस पर क्षेत्रवासियों ने आम आदमी पार्टी का धन्यवाद किया है। इससे पहले विकास धीमान आम आदमी पार्टी यूथ विंग ज्वालामुखी के अध्यक्ष थे। वहीं उनके काम को देखते हुए उन्हें ज्वालामुखी आम आदमी पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया हैं। आपको बता दें हाल ही में विकास धीमान ने सफाई कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय सांकेतिक भूख हड़ताल की थी। आम आदमी पार्टी ज्वालामुखी अब विकास धीमान की अध्यक्षता में काम करेगी। विकास धीमान मझीन क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। उनकी नियुक्ति के साथ पार्टी ने मोनिंदर सिंह को उपाध्यक्ष ज्वालामुखी, प्रवीण कुमारी को सचिव और प्रीक्षा सूद को सचिव महिला विंग ज्वालामुखी निर्वाचन क्षेत्र के रूप में नियुक्त किया है।
उपमण्डल देहरा के अंतर्गत पड़ते समनोली में पुलिस ने गश्त एवम ट्रैफिक चेकिंग के दौरान एक व्यक्ति गांव वुकला डाकघर चिन्तपुरनी तहसील अम्ब के निवासी की स्कूटी में 18 हज़ार एमएल शराब देसी मार्का संतरा बरामद की है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी देहरा अंकित शर्मा ने बताया की पुलिस ने व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्यवाही शुरू कर दी है। पुलिस मामले की गहनता से तफ़्तीष कर रही है।
उपमण्डल देहरा के अंतर्गत पड़ते बाड़ी में देहरा पुलिस ने गश्त के दौरान स्थानीय व्यक्ति से 16 हज़ार 500 एमएल देसी शराब मार्का संतरा बरामद की है। बताया जा रहा है उक्त व्यक्ति पैदल जा रहा था। वहीं पुलिस ने आशंका के आधार पर उक्त व्यक्ति की तलाशी ली। तो उक्त व्यक्ति से मौके पर 16 हज़ार 500 एमएल शराब बरामद की गई है। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी देहरा अंकित शर्मा ने बताया पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस मामले की गहनता से तफ़्तीष कर रही है।
ब्लाक खंड परागपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत सेहरी के बरियाल बेहड़ में लंबे अरसे बाद जसवां परागपुर भाजपा मंडल अध्यक्ष विनोद शर्मा व प्रदेश उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर के प्रयासों से सड़क बनने का सपना साकार होगा। बरवाल बेहड़ के 18 परिवारों ने लोक निर्माण विभाग के एसडीओ अमित गुलेरिया की उपस्थिति में तहसीलदार रक्कड़ अमित शर्मा के माध्यम से अपनी लाखों करोड़ों रुपए की जमीन लोक निर्माण विभाग को दान स्वरूप देकर इलाके भर में मिसाल कायम की है। जबकि इस भूमि में गांव बरियाल बेहड़ के अकेले परमजीत व उनके परिवार ने सात कनाल जमीन विभाग को दी है। उक्त भूमि दानवीरों की सीख उन लोगों को भी लेनी होगी, जो अपनी एक इंच जमीन के लिए एक-दूसरे पर मारपीट व जान लेने के लिए उतारू हो जाते है। बताया जा रहा है कि आजादी के 76 वर्ष का लंबा वक्त के बाद भी यहां लोग सड़क सुविधा से वचिंत थे। लेकिन उक्त भूमि दानवीरों द्वारा अपनी मिलकीयती भूमि बिना लालच सड़क के लिए दान देकर बड़ी राहत प्रदान की है। भाजपा मंडल अध्यक्ष विनोद शर्मा व अन्य ग्रामीणों ने प्रदेश उद्योग मंत्री विक्रम सिंह ठाकुर से मांग की हैं कि जल्दी से जल्दी इस सड़क को बजट में डाल कर इन सभी दानी सज्जनों का सपना साकार करें।
कंगना रणौत के1947 में मिली आजादी को भीख बताने वाले बयान के विरोध में राजगढ़ में एनएसयू आई द्वारा प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान एनएसयू आई कार्यकर्ताओं ने बॉलीबुड अभिनेत्री का पुतला जलाया और नारेबाजी की। कैंपस अध्यक्ष संजय राणा ने कहा कि कंगना रनौत को पदमश्री अवार्ड मिलने से जहां पहले पूरा प्रदेश गौरवान्वित महसूस कर रहा था वहीं उनके 1947 में मिली आजादी को भीख बताने वाले बयान से हिमाचलवासी शर्मसार महसूस कर रहे है। कंगना ने प्रदेश का नाम खराब किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से शहीदों का अपमान करने वाली कंगना रणौत से पदमश्री अवार्ड वापसी लेने की मांग की है।
जिला किन्नौर के निचार खण्ड में एक दर्दनाक हादसा पेश आया है। दरअसल निचार खण्ड के पलिंगी के समीप मंगलवार सुबह एक आल्टो कार दुर्घटना ग्रस्त हो गई। जानकारी के मुताबिक वाहन में दो लोग सवार थे। वाहन में सवार दोनों लोग गम्भीर रूप से घायल है। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए भावानगर ले जाया गया है। सूचना मिलते ही भावानगर थाने से पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
देव सदन कुल्लू में फिट बुल तथा मस्क्युलर प्लेनेट द्वारा आयोजित मिस्टर हिमालया 2021 बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें डॉ वाईकिंग भानू को बतौर मुख्यअतिथि आमंत्रित किया गया। इस प्रतियोगिता में पुरे हिमाचल से प्रतिभागियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इसमें तीन श्रणियों में प्रतियोगिता हुई जिसमे मैन्स ओपन बॉडी बिल्डिंग, मैन्स फिटनेस फिजिक तथा फीमेल फिटनेस फिजिक में युवकों तथा युवतियों ने हिस्सा लिया। इनमे मैन्स ओपन बॉडी बिल्डिंग मे हमीरपुर के प्रीतम को प्रथम स्थान, मनाली के मनु नेगी द्वितीय स्थान, कांगड़ा के अमित कुमार त्रितय स्थान पर रहे। डिस्ट्रिक चैंपियन में मनु नेगी प्रथम स्थान, नीतीश मंघाट दूसरे स्थान, व करण तीसरे स्थान पर रहे, वहीं महिला फिजिक में शिमला से रुद्रांशी को पहला, सचना राजपूत को दूसरा व सोनम ठाकुर को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। मेनज़ फिजिक में शेरू को पहला, मनु नेगी को दूसरा स्थान एवं हिमांशु को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। इस उपलक्ष्य पर भानू अस्पताल की तरफ से मिस्टर हिमालया को 20,000/- कैश प्राइज़ , बाकी सारे विजेताओं तथा उनके परिवारों को भानू अस्पतालों में लाइफटाइम फ्री इलाज का सौगात दी गई। इसके अलावा बाकी समस्त प्रतिभागियों को भानू अस्पतालों में 10-50 प्रतिशत तक का लाइफटाइम डिस्काउंट का प्रोत्साहन गिफ्ट दिया गया।
प्रदेश में पहली व् दूसरी कक्षा के विद्यार्थी 2 साल बाद पहली बार स्कूल पहुंचे। विद्यार्थियों में अपने सहपाठियों व् अध्यापकों से मिलने का उत्साह देखने को मिला। वंही तीसरी से सातवीं कक्षा के विद्यार्थी 10 नवंबर से स्कूल आ रहे थे। स्कूलों विद्यार्थियों को बैठाने के लिए उचित व्यवस्था की गई है। विभाग द्वारा स्कूलों में कोविड-19 से बचाव के लिए गाइडलाइन जारी की गई है। वंही प्राथमिक पाठशाला डाडासीबा के हेड मास्टर यशवंत सिंह का कहना है कि सरकार के दिशा निर्देशानुसार 15 नवंबर से विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा इस दौरान कोविड-19 को लेकर सरकार द्वारा जारी सभी गाइडलाइन का ध्यान रखा जा रहा है, ताकि संक्रमण का खतरा पैदा न हो।
हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ के संगठनात्मक जिला देहरा की जिला कार्यकारिणी 2021-24 के चुनाव हेतु राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला परागपुर में आम सभा का आयोजन हुआ। उपस्थित सभा सदों ने सर्वसम्मति से राजीव भारद्वाज प्रवक्ता, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला स्वाणा को जिलाध्यक्ष चयनित किया। अपने सम्बोधन में सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ हिमाचल के सभी शिक्षक वर्गों की मांगों को सरकार के समक्ष उचित मंच पर उठाता रहा है और भविष्य में भी जिला देहरा का नेतृत्व करते हुए संगठन के प्रति निष्ठावान रहूंगा। आम सभा ने जिला देहरा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक कुमार, जिला मंत्री राजकुमार, जिला संगठन मंत्री नरेश कुमार, जिला सह संगठन मंत्री अनुराग सूद, सचिव शमशेर सिंह, कुलदीप ठाकुर, कोषाध्यक्ष अनुराग बद्धन, प्रशिक्षण प्रकोष्ठ सुनील धीमान को भी सर्वसम्मति से चयनित किया। आम सभा में मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में उपस्थित प्रान्त अतिरिक्त मंत्री सुधीर गौतम ने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ राष्ट्रीय स्तर पर कार्य कर रहे अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रेरणा से राष्ट्र हित, शिक्षा हित ,छात्रहित व शिक्षक हित में कार्य करते हुए प्री-प्राथमिक स्तर से लेकर विश्वविद्यालय स्तर के सभी शिक्षकों की आवाज़ को उचित मंच पर बुलंद करता है। इसके साथ साथ वर्ष में शिक्षक महासंघ तीन कार्यक्रम कर्तव्य बोध दिवस, नववर्ष सुवेच्छा कार्यक्रम व गुरुवंदन कार्यक्रमों का आयोजन कर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का कार्य भी करता है। इस मौके पर चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में जिला ऊना से संजीव चौधरी व सुमित भारद्वाज सहित जिला देहरा के सतपाल, चन्द्रशेखर,राकेश,अजय,दीपक, बलवीर,रजत ,मनोज, संजीव आदि उपस्थित रहे।
युवा प्रतिभाओं के सर्वांगीण विकास के लिए जिला युवा सेवाएँ एवं खेल कार्यालय के सहयोग से यूथ डेवलपमेंट सेंटर द्वारा शिवालिक इंटरनेशनल कान्वेंट स्कूल नंगल चौक में ब्लॉक यूथ फेस्टिवल का आयोजन किया गया। युवा उत्सव का शुभारम्भ करते हुए प्रबंध निर्देशक एमएस राणा ने कहा कि ऐसे आयोजन से युवाओं में आपसी सामंजस्य, सौहार्द्र और सहयोग की भावना में वृद्धि होती है। इस आयोजन का उद्देश्य कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देना है। इससे युवाओं में अध्ययन के अतिरिक्त सांस्कृति, विविध कलाओं और साहित्य की क्षमता का विकास होता है। इस अवसर पर आयोजित लोक नृत्य में शिवालिक इंटरनेशनल कान्वेंट स्कूल विजेता बना।स्थानीय मंडली द्वारा प्रसुत नाटी दूसरे स्थान पर रही। इस अवसर पर सहायक मेनेजिंग डायरेक्टर राजेश राणा, प्रिंसिपल पूजा रानी,कुशल प्रीत, मनोज कुमार, वंदना कुमारी, रीता रानी, रमा डोगरा, औंबाला, शमा राणा, प्रिय, निधि, ज्योति, अंजलि, परमजीत, मोनिया शर्मा, परवेश आदि गणमान्य उपस्थित थे।
एनपीएस ब्लॉक ज्वालामुखी की मीटिंग सोमवार को ज्वालामुखी में संपन्न हुई। मीटिंग में मुख्य अतिथि के रूप में चंबा जिला प्रधान सुनील जरयाल उपस्थित रहे। साथ ही राज्य उपाध्यक्ष सौरभ वैद्य, पूर्व जिला प्रधान अनिरुद्ध गुलेरिया, ज्वालामुखी ब्लॉक प्रधान विपिन कुमार, उपाध्यक्ष राहुल राणा, उपाध्यक्ष सुमन कुमार, महा सचिव आशीष शर्मा, वित्त सचिव रत्न लाल, आईटी सैल से साथी रजनीश व अनूप, महिला विंग,अन्य एनपीएस साथी व मीडिया प्रभारी संदीप सकलानी उपस्थित रहे। मीटिंग में सभी कर्मचारियों ने सरकार से मांग उठाई कि एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किया जाए।
उपमंडल देहरा के अंतर्गत पड़ते हरिपुर के तहत भटोली फकोरियाँ में स्थानीय वाशिंदों द्वारा मणिपुर में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गयी। अधिक जानकारी देते हुए एडवोकेट शिवेन्द्र सैनी ने बताया कि 13 नवम्बर को मणिपुर में हुए उग्रवादी हमले में शहीद हुए असाम राईफ़लस के 5 जवान शहीदों को भटोली के बाज़ार में पुष्पांजलि अर्पित की गई और शहीदों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। उन्होंने कहा कि जवानों की वजह से ही हम लोग सुरक्षित रहते हैं और इनकी वीरगति को हमेशा याद रखा जाएगा। इस मौक़े पर गाँव भटोली के वरिष्ठ नागरिक और युवा साथी उपस्तिथ रहे।
आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के तहत किन्नौर जिला के रिकांगपिओ स्थित पुलिस मैदान में 20 नवम्बर, 2021 से 24 नवम्बर, 2021 तक राज्य स्तरीय जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता व क्राफ्ट मेले का आयोजन किया जाएगा। उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य स्तरीय जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता व क्राफ्ट मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर 20 नवम्बर, 2021 को करेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता में प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों पांगी, भरमौर, केलांग, काजा, कांगड़ा के बड़ा-भगांल के गद्दी नृत्य दल के अलावा किन्नौर जिला के पूह, कल्पा व निचार उपमण्डल के नृत्य दल भाग लेगें। उन्होंने बताया कि इस दौरान आयोजित क्राफ्ट मेले में भी भरमौर, पांगी, काजा, केलांग सहित किन्नौर जिला के हस्तशिल्प, मूर्तिकला, हथकरघा, काष्ठ-कला से संबंधित प्रतिभागी भाग लेंगे। इसके अलावा जिले के स्वयं सहायता समूह भी शामिल होंगे। उपायुक्त ने बताया कि 20 नवम्बर, 2021 को मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर जिले के लिए विभिन्न विकासात्मक योजनाओं के लोकापर्ण व शिलान्यास भी पुलिस ग्राउंड रिकांगपिओ से करेंगे। मुख्यमंत्री इस अवसर पर क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में 250-250 लीटर पर मिनट क्षमता के दो ऑक्सीजन संयत्रों का भी लोकापर्ण करेंगे।
ग्राम पंचायत सुरजपुर में लोगों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित काल के लिए धरना प्रदर्शन शुरू किया। लोगों का आरोप है कि प्रशासन पंचायत में लोगों की समस्याओं की अनदेखी कर रहा है। बार बार समस्याओं से निजात दिलाने की मांग करने के बावजूद भी कोई सुनवाई नही हो रही है। जिसके चलते लोगों को सड़कों पर उतर कर आंदोलन करना पड़ रहा है। पंचायत प्रधान ओम प्रकाश शर्मा का कहना है कि पिपलुघाट चौक पर लोगों को सार्वजनिक शौचालय, रेन शेल्टर, पार्किंग आदि की सुविधा के अभाव में परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई गांवों में गैस की गाड़ी नहीं पहुंच पा रही है। पंचायत के अंतर्गत कई सड़कों की रिपेयरिंग समय पर नहीं हो रही है। पंचायत के कई गांवों में लोग पीने के पानी जैसी मूलभत सुविधा से वंचित है। जल शक्ति विभाग कई गांवों में खराब हो चुकी पाइपलाइन को नहीं बदल पा रहा है।उन्होंने बताया की प्रशासन को बार बार समस्याओं से अवगत करवाने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिसके चलते जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गई है। उन्होंने बताया कि जब तक समस्याओं के समाधन के लिए प्रशासन सकारात्मक कदम नहीं उठता है, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
एसएफआई सोलन इकाई द्वारा विश्वविद्यालय में पीएचडी के अंदर हो रही धांधलियो के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। एसएफआई ने कहा क़ि हमारे कुलपति द्वारा अपने बेटे को पीएचडी में एडमिशन दिलाने के लिए यूजीसी की गाइडलाइन को दरकिनार करते हुए अपने बेटे की डायरेक्ट एडमिशन करवाई है। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार पीएचडी में एडमिशन के लिए नेट जेआरएफ पास करने के बाद प्रवेश परीक्षा देनी होती थी। उसे क्लियर करने के बाद पीएचडी में प्रवेश मिलता था। परंतु अपने उच्च पद का दुरुपयोग कर कुलपति ने अपने बेटे को बिना किसी टेस्ट के ही सीधा प्रवेश दे दिया। एसएफआई कड़े शब्दों में इसकी निंदा करती है और मांग करती है कि जल्द से जल्द इस प्रवेश को वापिस लिया जाए। वहीं दूसरी ओर न्यू एजुकेशन पॉलिसी को हिमाचल में लागू करने के लिए सरकार काफी समय लंबे समय से कोशिश कर रही है इस पॉलिसी के अंदर हमारी शिक्षा को निजीकरण और सांप्रदायिकरण किया जा रहा है 2014 में रूसा सिस्टम को भी सबसे पहले हिमाचल प्रदेश में लागू किया गया। एसएफआई मांग करती है कि नई शिक्षा नीति को वापस लिया जाए। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से सरकार आंगनवाड़ी को प्राइमरी स्कूलों के साथ मर्ज करने की बात कर रही है और वहीं पर स्कूलों को भी निजी हाथों में सौंप रही है और जिन स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों की संख्या कम है उनको प्राइवेट के साथ मर्ज करने की बात नई शिक्षा नीति मे की गई है। इसी के साथ साथ PTA के नाम पर जो छात्रों से करोड़ों रुपए लूटे जा रहे हैं उसे छात्रों से लेना बंद किया जाए। हर साल विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से पीटीए के नाम पर करोड़ों रुपए लूटता है पर वह कहां खर्च होते हैं इसका कोई ब्यौरा नहीं है। साथ ही महाविद्यालय के अंदर खाली पड़े अध्यापकों के पदों को भी जल्द से जल्द भरा जाए। एसएफआई मांग करती है कि कुलपति के ऊपर से सख्त कार्रवाई हो। न्यू एजुकेशन पॉलिसी को हिमाचल में इंप्लीमेंट न किया जाए तथा पीटीए के नाम पर छात्रों को लूटना बंद करें। अगर जल्द से जल्द इन मागों को पूरा नहीं किया गया तो एसएफआई छात्रों को लामबंद करते हुए एक उग्र आंदोलन करेगी। जिसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन तथा हमारी सरकार होगी इस मौके पर शिवानी, संतोष, वंशिका, संजय, श्रेया, शलेजा अंकिता, आर्यन, सौरव सहित 20 लोग सम्मिलित थे।
विकास खंड करसोग के तहत पढ़ने वाली खड़कन पंचायत के भागचंद पुत्र चैत्री देवी गांव द्रष्टि डा० भंथल ने एसडीम करसोग सनी शर्मा को एक शिकायत पत्र सौंपा। जिसमें उन्होंने लिखा है कि दिनांक 3 -9 - 2021 को उन्होंने अपनी भूमि का विकास कार्य मनरेगा के तहत करवाया था तथा इस भूमि सुधार कार्य में उनके सहित और भी लोगों ने कार्य किया था जिसका कि इतना समय बीत जाने के बाद भी अभी तक पैसों की अदायगी नहीं की गई है उनका कहना है कि दिवाली के समय में है उनके द्वारा या पैसे मांगे गए थे लेकिन पैसे ना मिलने के कारण इनकी दिवाली भी फीकी ही रही तथा इसके बारे में है उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1100 नंबर पर भी कॉल की थी जहां से भी कोई उचित जवाब नहीं मिल पाया इसी के चलते इन्होंने सोमवार को एसडीम करसोग सनी शर्मा को शिकायत पत्र सौंपा जिसमें लिखा है कि जल्द से जल्द इनके मनरेगा की दिहाड़ी के पैसों की अदायगी की जाए ताकि मजदूर लोगों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े साथ ही उन्होंने लिखा है कि खड़कन पंचायत मैं अलग-अलग कामों की पहले भी लगभग 190 लोगों की पेमेंट नहीं दी गई है जिसके चलते वह भी परेशान हैं। उन्होंने आशा की है कि जल्द से जल्द इनकी पेमेंट की जाएगी ताकि ग्रामीणों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े।
निपुणता युवाओं की योग्यता बढ़ाने का काम करती है। निपुण व्यक्ति जटिल से जटिल काम बड़ी आसानी से कर सकता है। किसी काम को करने में निपुण होने के लिए दक्ष होने के लिए या हुनरमंद होने के लिए व्यक्ति को प्रशिक्षण लेना पड़ता है। सीखने की प्रक्रिया पूरी उम्र जारी रहती है, किसी भी दक्ष से दक्ष व्यक्ति में भी सीखने की गुंजाइश हमेशा रहती है। सोमवार को वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने समीरपुर में मशीन ऑपरेटर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के बाद, दक्ष हुए 45 प्रशिक्षुओं को सर्टिफिकेट बांटते हुए यह बात कही है। उन्होंने कहा कि प्रयास संस्था एवं एटी स्किल्स हब क्षेत्र के युवा वर्ग को हुनरमंद बनाने के लिए जगह जगह पर कई तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं। बेकहो लोडर मशीन ऑपरेटर, ब्यूटीशियन, सिक्युरिटी गार्ड, पलम्बरिंग, बांस की हस्तकला इत्यादि जैसे अन्य कई कार्यों की ट्रेनिंग युवाओं को दी जा रही है। यह सभी कोर्स युवाओं को रोजगार स्वरोजगार प्राप्त करने के लिए दक्ष बनाकर उनकी योग्यता बढ़ाएंगे। आज के अत्याधुनिक डिजिटल और तकनीकी युग में दक्ष एवं योग्य वर्ग की बहुत अधिक डिमांड होने के कारण उन्हें रोजगार प्राप्त करते हुए आसानी रहती है।
जुब्बल-नावर-कोटखाई में बाग़वानी, पर्यटन और विकास के कार्य को गति दी जाएगी। यह बात नव निर्वाचित कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर ने कोटखाई में आयोजित जन आभार कार्यक्रम के दौरान कोटखाई की जनता को सम्बोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि जुब्बल-नावर-कोटखाई के उप-चुनाव में कांग्रेस पार्टी का सीधा मुकाबला प्रदेश की भाजपा सरकार से था। प्रदेश की भाजपा सरकार ने पूरा कैबिनेट जुब्बल-नावर-कोटखाई में उतार दिया था और बड़े-2 विजन और घोषणाओं से जनता को गुमराह करने की कोशिश की। लेकिन क्षेत्र की प्रबुद्ध जनता ने अपनी बुद्धिमता और विवेकता का परिचय देते हुए, अपार स्नेह और समर्थन के साथ कांग्रेस पार्टी को जीत दिलवाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही एक समान दृष्टिकोण के साथ संतुलित और समग्र विकास करने का प्रयास किया है और रुकें पड़े विकास कार्य को गति दी जाएगी। रोहित ठाकुर ने कहा कि क्षेत्र में सीए स्टोर स्थापित करने और पर्यटन में अपार संभावनाओं को देखते हुए क्षेत्र में स्थानों को चिन्हित कर विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उप-चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार ने दो उपमंडल, विकास खंड और उप तहसील खोलने की घोषणा की है। उसे भी अमलीजामा पहनाया जाएगा। रोहित ठाकुर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उप चुनाव में निरंतर संघर्ष और मेहनत कर कांग्रेस पार्टी को विजयी बनाने पर आभार जताया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके अग्रिहोत्री ने बताया कि जिला में कोरोना रोधी वैक्सीनेशन के लिए साप्ताहिक शेड्यूल जारी कर दिया गया है। 16 नवंबर को इन स्थानों पर लगाए जाएंगे कोरोना रोधी टीके : मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर, सीएचसी गलोड़, स्वास्थ्य उपकेंद्र जंगलरोपा, सनाही, पीएचसी सलौणी, मोबाइल टीम धनेड, स्वास्थ्य उपकेंद्र नारा, कोटलू, नागरिक अस्पताल नादौन, पीएचसी चौड़ू, सेरा, धनेटा, स्वास्थ्य उपकेंद्र पुतडिय़ाल, झलाण, कलूर, मोबाइल टीम, नागरिक अस्पताल टौणी देवी, स्वास्थ्य उपकेंद्र उटपुर, पीएचसी कोट, कुठेड़ा, स्वास्थ्य उपकेंद्र झनियारी, अमरोह, स्वाहल, मटटनसिद्ध, नागरिक अस्पताल सुजानपुर, पीएचसी चबूतरा, स्वास्थ्य उपकेंद्र रंगड़, करोट, स्वास्थ्य उपकेंद्र दैण-रोपड़ी, पीएचसी भोटा, सीएचसी बिझड़ी, स्वास्थ्य उपकेंद्र सोहारी, पीएचसी ननावां, चकमोह, गारली, बड़ाग्रां, नागरिक अस्पताल बड़सर, नागरिक अस्पताल भोरंज, पीएचसी जाहू, भरेड़ी, मैड़, बलोखर, डेरा परोल, स्वास्थ्य उपकेंद्र खरवाड़, जमली, चंदरूही, पंजोत, अमनेड, टोहू, टिप्पर, मोबाइल टीम पथलियार और मोबाइल टीम बगवाड़ा। 17 नवंबर को इन स्थानों पर लगेंगे कोरोना रोधी टीके : मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर, सीएचसी गलोड़, पीएचसी नालटी, कांगू, कश्मीर, स्वास्थ्य उपकेंद्र करेर, पपलाह, मोबाइल टीम धनेड, नागरिक अस्पताल नादौन, पीएचसी चौड़ू, सेरा, रैल, स्वास्थ्य उपकेंद्र बलडूहक, ग्वालपत्थर, जलाड़ी, बेला, नागरिक अस्पताल टौणी देवी, स्वास्थ्य उपकेंद्र ठाणा लोहारां, बलोह, चलोखर, बजूरी, पीएचसी कुठेड़ा, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र लंबलू, स्वास्थ्य उपकेंद्र ब्ल्यूट, पौहंज, नागरिक अस्पताल सुजानपुर, पीएचसी गुब्बर, पटलांदर, जंगलबैरी, चौरी, स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाल, समताणा, पीएचसी भोटा, सीएचसी बिझड़ी, स्वास्थ्य उपकेंद्र कठियाणा, पीएचसी ननावां, चकमोह, स्वास्थ्य उपकेंद्र बडडू, मोबाइल टीम गारली, स्वास्थ्य उपकेंद्र जमली-महारल, नागरिक अस्पताल भोरंज, पीएचसी जाहू, बगवाड़ा, महल, कड़ोहता, स्वास्थ्य उपकेंद्र धमरोल, बधाणी, टिक्कर सनेहड, धीरवीं, बालू, जोल, पंजोत-अवाहदेवी, नागरिक अस्पताल बड़सर, मोबाइल टीम भरेड़ी और मोबाइल टीम नादौन। 18 नवंबर को इन स्थानों पर लगेंगे कोरोना रोधी टीके : मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर, सीएचसी गलोड़, स्वास्थ्य उपकेंद्र जंगलरोपा, तेलकर, पीएचसी सलौणी, स्वास्थ्य उपकेंद्र हड़ेटा, मोबाइल टीम धनेड, नागरिक अस्पताल नादौन, पीएचसी चौड़ू, सेरा, धनेटा, स्वास्थ्य उपकेंद्र भूंपल, मोबाइल टीम, नागरिक अस्पताल टौणी देवी, स्वास्थ्य उपकेंद्र दड़ूही, नेरी, पीएचसी कुठेड़ा, स्वास्थ्य उपकेंद्र चमनेड, धरोग, पीएचसी कोट, स्वास्थ्य उपकेंद्र कलंझड़ी, नागरिक अस्पताल सुजानपुर, पीएचसी पटलांदर, चबूतरा, स्वास्थ्य उपकेंद्र डूहक, बीड़ बगेहड़ा, पीएचसी भोटा, स्वास्थ्य उपकेंद्र धंगोटा, पीएचसी ननावां, स्वास्थ्य उपकेंद्र कनोह, मोबाइल टीम कलवाल, पीएचसी गारली, स्वास्थ्य उपकेंद्र जजरी, नागरिक अस्पताल बड़सर, सीएचसी बिझड़ी, नागरिक अस्पताल भोरंज, पीएचसी भरेड़ी, बलोखर, जाहू, स्वास्थ्य उपकेंद्र चौकी कनकरी, हनोह, नगरोटा, कंजयाण, खुथड़ीं, बुमाणा, बडैहर और मोबाइल टीम महल। 19 नवंबर को इन स्थानों पर लगेंगे कोरोना रोधी टीके : मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर, नागरिक अस्पताल टौणी देवी, पीएचसी कुठेड़ा, स्वास्थ्य उपकेंद्र दड़ूही, ख्याह, झनियारी, नागरिक अस्पताल सुजानपुर, पीएचसी जाहू, बगवाड़ा, महल, कड़ोहता, स्वास्थ्य उपकेंद्र उखली, दिम्मी, भलवाणी, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र मुंडखर, स्वास्थ्य उपकेंद्र अम्मण, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र समीरपुर और मोबाइल टीम जाहू। 20 नवंबर को इन स्थानों पर लगेंगे कोरोना रोधी टीके : मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर, सीएचसी गलोड़, स्वास्थ्य उपकेंद्र ब्राहलड़ी, पनसाई, पीएचसी कश्मीर, धनेड, मोबाइल टीम सलौणी, नागरिक अस्पताल नादौन, पीएचसी चौड़ू, सेरा, धनेटा, स्वास्थ्य उपकेंद्र बसारल, कलूर, मोबाइल टीम, नागरिक अस्पताल टौणी देवी, स्वास्थ्य उपकेंद्र अणु, झनियारा, पीएचसी कुठेड़ा, स्वास्थ्य उपकेंद्र भीड़ा, बोहनी, पीएचसी उहल, बचत भवन हमीरपुर, पीएचसी कोट, नागरिक अस्पताल सुजानपुर, पीएचसी चौरी, गुब्बर, चबूतरा, स्वास्थ्य उपकेंद्र धमडिय़ाणा, झरनोट, पीएचसी भोटा, सीएचसी बिझड़ी, स्वास्थ्य उपकेंद्र पैहरवीं, पीएचसी ननावां, चकमोह, मोबाइल टीम चकमोह, स्वास्थ्य उपकेंद्र हरसौर, पीएचसी बड़ाग्रां, नागरिक अस्पताल बड़सर, नागरिक अस्पताल भोरंज, पीएचसी भरेड़ी, जाहू, बलोखर, चंबोह, मैड़, स्वास्थ्य उपकेंद्र लुददर महादेव, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र लदरौर, स्वास्थ्य उपकेंद्र धमरोल, चौकी कनकरी-डिडवीं, कंजयाण-आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र हिम्मर और मोबाइल टीम कड़ोहता-मैड़। 21 नवंबर को इन स्थानों पर लगेंगे कोरोना रोधी टीके : मेडिकल कालेज अस्पताल हमीरपुर, पीएचसी सलौणी, नालटी, नागरिक अस्पताल सुजानपुर, नागरिक अस्पताल टौणी देवी, पीएचसी उहल और स्वास्थ्य उपकेंद्र नेरी।
हालही में संपन्न हुए मंडी संसदीय सीट पर लोकसभा के उपचुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी की छवि को खराब करने की जो कोशिश की गई है, उसकी जांच होनी चाहिए। यह बात प्रेस को जारी बयान में कांग्रेस प्रदेश महासचिव आश्रय शर्मा ने कही। उन्होंने कहा क़ि शिमला ग्रामीण से कांग्रेस के विधायक विक्रमादित्य सिंह की जांच की मांग का वे भी समर्थन करते है। उन्होंने कहा क़ि मतदान से ठीक पहले तथाकथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल करके, कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह और कांग्रेस पार्टी सहित पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की छवि को खराब करने का जो षडयंत्र रचा गया है। उसकी जांच होनी चाहिए। यह ऑडियो किसने वायरल किया और उसे वायरल करने के पीछे क्या मंशा थी इस बात का पर्दाफाश होना चाहिए। आश्रय शर्मा ने राज्य सरकार इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच एजैंसियों से जाँच करवाने की मांग की ।
आज जब देश के प्रधानमंत्री श्रीयुत नरेंद्र मोदी देश में भगवान् बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की परंपरा का शुभारंभ कर रहे हैं। तब स्वाभाविक ही विदेशी परंपरा व विघ्नसंतोषियों के “मूलनिवासी दिवस” का विचार हृदय में आता है। भारत में मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस पीपल डे एक भारत मे एक नया षड्यंत्र है। सबसे बड़ी बात यह कि इस षड्यंत्र को जिस जनजातीय समाज के विरुद्ध किया जा रहा है, उसी समाज के काँधों पर रखकर इसकी शोभायमान पालकी भी चतुराई पूर्वक निकाल ली जा रही है। वैश्विक दृष्टि से यदि देखा जाये तो जिस 9 अगस्त दिवस को जनजातीय समाज के नरसंहार दिवस के रूप मे स्मरण किया जाना चाहिए उसी दिवस को पश्चिमी शक्तियों द्वारा एक उत्सव के रूप मे स्थापित कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के एक संगठन विश्व मजदूर संगठन ILO द्वारा “राइटस आफ इंडिजिनस पीपल” नाम से एक कन्वेन्शन जारी किया गया जिसे सम्पूर्ण विश्व के मात्र 22 उन देशों ने हस्ताक्षर किया जिनकी कहीं कहीं अत्याचार पूर्ण औपनिवेशिक कालोनियां थी। इन्हीं 22 देशों ने एक “वर्किंग ग्रूप फार इंडिजिनस पीपल” नामक संगठन बनाया जिसकी प्रथम बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई और इसी दिन को बाद मे विश्व मूल निवासी दिवस या विश्व आदिवासी दिवस के रूप मे मनाया जाने लगा। भारत के तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों व वामपंथियों के सहयोग से विदेशियों की यह चाल इतनी सफल हुई कि बड़ी संख्या मे जनजातीय समाज इस वर्ल्ड इंडिजेनस डे यानि विश्व मूलनिवासी दिवस को आदिवासी दिवस के नाम से मनाने लगा। तथ्य यह है कि भारत मे जनजातीय समाज व अन्य जाति जिसे इन विघटनकारियों ने आर्य – अनार्य का वितंडा बना दिया, वैसी परिस्थितियाँ भारत मे है ही नहीं। कथित तौर पर आर्य कहे जाने वाले लोग भी भारत मे उतने ही प्राचीन हैं जितने कि जनजातीय समाज के लोग। यह तो अब सर्वविदित है कि इस्लाम व ईसाइयत दोनों ही विस्तारवादी धर्म हैं व अपने विस्तार हेतु इन्होने अपने धर्म के परिष्कार, परिशोधन के स्थान पर षड्यन्त्र, कुतर्क, कुचक्र व हिंसा का ही उपयोग किया है। अपने इसी लक्ष्य की पूर्ति हेतु पश्चिमी विद्वानों ने भारतीय जातियो मे विभेद उत्पन्न करना उत्पन्न किया व द्रविड़ों को भारत का मूलनिवासी व आर्यों को बाहरी आक्रमणकारी कहना प्रारंभ किया। ईसाइयों ने अपने धर्म की श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु इस प्रकार के षड्यन्त्र रचना सतत चालू रखे। विदेशियों ने ही भारत के इतिहास लेखन मे इस बात को दुराशय पूर्वक बोया कि आर्य विदेश से आई हुई एक जाति थी जिसने भारत के मूलनिवासी द्रविड़ समाज की सभ्यता को आक्रमण करके पहले नष्ट भ्रष्ट किया व उन्हे अपना गुलाम बनाया। जबकि यथार्थ है कि आर्य किसी जाति का नहीं बल्कि एक उपाधि का नाम था जो कि किसी विशिष्ट व्यक्ति को उसकी विशिष्ट योग्यताओं, अध्ययन या सिद्धि हेतु प्रदान की जाती थी। आर्य शब्द का सामान्य अर्थ होता है विशेष। पहले अंग्रेजों ने व स्वातंत्र्योत्तर काल मे अंग्रेजों द्वारा लादी गई शिक्षा पद्धति ने भारत मे लगभग छः दशकों तक इसी दूषित, अशुद्ध व दुराशयपूर्ण इतिहास का पठन पाठन चालू रखा। भारत मे इसी दूषित शिक्षा पद्धति ने आर्यन इंवेजन थ्योरी की स्थापना की व सामाजिक विभेद के बीज लगातार बोये। जर्मनी मे जन्में किंतु संस्कृत के ज्ञान के कारण अंग्रेजों द्वारा भारत बुलाये गए मेक्समूलर ने आर्यन इन्वेजन थ्योरी का अविष्कार किया। मेक्समूलर ने लिखा कि आर्य एक सुसंस्कृत, शिक्षित, बड़े विस्तृत धर्म ग्रन्थों वाली, स्वयं की लिपि व भाषा वाली घुमंतू किंतु समृद्ध जाति थी। इस प्रकार मैक्समूलर ने आर्य इंवेजन थ्योरी के सफ़ेद झूठ का पौधा भारत मे बोया जिसे बाद मे अंग्रेजी शिक्षा पद्धति ने एक बड़ा वृक्ष बना दिया। यद्द्पि बाद मे 1921 मे हड़प्पा व मोहनजोदाड़ो सभ्यता मिलने के बाद आर्यन थ्योरी को बड़ा धक्का लगा किंतु अंग्रेजों ने अपनी शिक्षा पद्धति, झूठे इतिहास लेखन व षड्यन्त्र के बल पर इस थ्योरी को जीवित रखा। सिंधु घाटी सभ्यता की श्रेष्ठता को छुपाने व आर्य द्रविड़ के मध्य विभाजन रेखा खींचने की यह कथा बहुत विस्तृत चली किंतु अभी हम मूलनिवासी दिवस तक ही सीमित रहते हैं। यदि हम भारत के जनजातीय समाज व अन्य समाजों मे परस्पर एकरूपता की बात करें तो कई कई अकाट्य तथ्य सामने आते हैं। कथित तौर पर जिन्हे आर्य व द्रविड़ अलग अलग बताया गया उन दोनों का डीएनए परस्पर समान पाया गया है। दोनों ही शिव के उपासक हैं। प्रसिद्ध एन्थ्रोपोलाजिस्ट वारियर एलविन, जो कि अंग्रेजों के एडवाइजर थे, ने जनजातीय समाज पर किए अध्ययन मे बताया था कि ये कथित आर्य और द्रविड़ शैविज़्म के ही एक भाग है और गोंडवाना के आराध्य शंभूशेक भगवान शंकर का ही रूप हैं। माता शबरी, निषादराज, सुग्रीव, अंगद, सुमेधा, जांबवंत, जटायु आदि आदि सभी जनजातीय बंधु भारत के शेष समाज के संग वैसे ही समरस थे जैसे दूध मे शक्कर समरस होती है। प्रमुख जनजाति गोंड व कोरकू भाषा का शब्द जोहारी रामचरितमानस के दोहा संख्या 320 में भी प्रयोग हुआ है। मेवाड़ में किया जाने वाला लोक नृत्य गवरी व वोरी भगवान शिव की देन है जो कि समूचे मेवाड़ी हिंदू समाज व जनजातीय समाज दोनों के द्वारा किया जाता है। बिरसा मुंडा, टंटया भील, रानी दुर्गावती, ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव, अमर शहीद बुधू भगत, जतरा भगत, लाखो बोदरा, तेलंगा खड़िया, सरदार विष्णु गोंड आदि आदि कितने ही ऐसे वीर जनजातीय बंधुओं के नाम हैं जिनने अपना सर्वस्व भारत देश की संस्कृति व हिंदुत्व की रक्षा के लिये अर्पण कर दिया। जब गजनी से विदेशी आक्रांता हिंदू आराध्य सोमनाथ पर आक्रमण कर रहा था तब अजमेर, नाडोल, सिद्ध पुर पाटन, और सोमनाथ के समूचे प्रभास क्षेत्र में हिंदू धर्म रक्षार्थ जनजातीय समाज ने एक व्यापक संघर्ष खड़ा कर दिया था। गौपालन व गौ सरंक्षण का संदेश बिरसा मुंडा जी ने भी समान रूप से दिया है। और तो आर क्रांतिसूर्य बिरसा मुंडा का “उलगुलान” संपूर्णतः हिंदुत्व आधारित ही है। ईश्वर यानी सिंगबोंगा एक है, गौ की सेवा करो एवं समस्त प्राणियों के प्रति दया भाव रखो, अपने घर में तुलसी का पौधा लगाओ, ईसाइयों के मोह जाल में मत फंसो, परधर्म से अच्छा स्वधर्म है, अपनी संस्कृति, धर्म और पूर्वजों के प्रति अटूट श्रध्दा रखो, गुरुवार को भगवान सिंगबोंगा की आराधना करो व इस दिन हल मत चलाओ यह सब संदेश भगवान बिरसा मुंडा ने दिये हैं। वे जिन्हे आर्य कहा गया और वे जिन्हे आर्य कहा गया दोनों ही वन, नदी, पेड़, पहाड़, भूमि, गाय, बैल, सर्प, नाग, सूर्य, अग्नि आदि की पूजा हजारों वर्षों से पूजा करते चले आ रहें हैं। भारत के सभी जनजातीय समुदाय जैसे गोंड, मुंडा, खड़िया, हो, किरात, बोडो, भील, कोरकू, डामोर, ख़ासी, सहरिया, संथाल, बैगा, हलबा, कोलाम, मीणा, उरांव, लोहरा, परधान, बिरहोर, पारधी, आंध, टाकणकार, रेड्डी, टोडा, बडागा, कोंडा, कुरुम्बा, काडर, कन्निकर, कोया, किरात आदि आदि के जीवन यापन, संस्कृति, दैनंदिन जीवन, खानपान, पहनावे, परम्पराओं, प्रथाओं का मूलाधार हिंदुत्व ही है। अब ऐसी स्थिति मे भारत मे मूलनिवासी दिवस की अवधारणा का स्थान कहां रह जाता है? तो आइए इस नए भारत में जनजातीय गौरव दिवस का स्वागत करे। यह डॉ मामराज पुंडीर, राजनीतिक शास्त्र प्रवक्ता के लेख है।
सिर्फ वार्षिक परीक्षाओं के लिए दस दिन के लिए स्कूल खोलने के खिलाफ व वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करने के लिए सेंट एडवर्ड स्कूल शिमला के अभिभावक, छात्र अभिभावक मंच के बैनर तले स्कूल परिसर में इकट्ठा हुए व स्कूल प्रिंसिपल से मिले। उन्होंने स्कूल में वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करवाने की मांग की जिस पर स्कूल प्रिंसिपल ने हामी भर दी। छात्र अभिभावक मंच संयोजक विजेंद्र मेहरा, मंच के सदस्य विवेक कश्यप व सत्यवान पुंडीर ने सेंट एडवर्ड स्कूल में आठवीं कक्षा तक ऑनलाइन कक्षाएं व वार्षिक परीक्षाएं करवाने के स्कूल प्रबंधन के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने शीतकालीन सत्र के तहत चलने वाले स्कूलों को सिर्फ दस से पन्द्रह दिन के लिए खोलने के प्रदेश सरकार के निर्णय पर कड़ा विरोध ज़ाहिर किया है तथा सब स्कूलों में ऑकलैंड व एडवर्ड स्कूल की तर्ज़ पर ऑनलाइन कक्षाएं व परीक्षाएं करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब पूरा वर्ष ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से ही बच्चों ने पढ़ाई की है। तो फिर वार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन करने में क्या दिक्कत है। इन दस दिनों के बाद स्कूल तीन महीने के लिए बन्द रहेंगे तो फिर स्कूल सिर्फ वार्षिक परीक्षाओं के लिए खोलने का क्या तुक बनता है। उन्होंने कहा कि दस-पन्द्रह दिन की वार्षिक परीक्षाओं के बाद शिमला शहर के स्कूल शीतकालीन अवकाश के कारण फिर से तीन महीने के लिए फरवरी अंत तक बन्द हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र व ग्रीष्मकालीन सत्र में समरूपता नहीं है इसलिए सर्दियों में केवल वार्षिक परीक्षाओं के लिए दस से पन्द्रह दिन के लिए स्कूल खोलना तार्किक नहीं है। उन्होंने कहा है कि कोरोना का संक्रमण शिमला शहर जैसे भीड़-भड़ाके वाले इलाकों में बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। स्कूलों में दर्जनों छात्र कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इस तरह स्कूलों में परीक्षाओं को लेकर अभिभावक व छात्र काफी घबराए हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब छात्र व अभिभावक ही स्कूल में परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं हैं, तो फिर स्कूल प्रबंधन इन परीक्षाओं के संदर्भ में क्यों जबरदस्ती कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में विवेक कश्यप, सत्यवान पुंडीर, विरोचन शर्मा, आशा शर्मा, अदिति चड्डा, ज्योतिका राणा, रुचि जिन्ना, विकास, पदमिनी शर्मा, रेणु, सोफ़िया, सीमा, ऋचा, दीपशिखा डोगर, गुरमीत कौर सेठी, हरप्रीत कौर, सीमा, रमा, रुचि, ईशान, वरदा गौतम, गिन्नी, रमा कुमारी सहित दर्जनों अभिभावक मौजूद रहे।
किन्नौर जिले के सांगला-छितकुल संपर्क मार्ग पर राजाल पानंग के नजदीक एक कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में 4 लोगों की मौके पर मौत हो गई। एक अन्य घायल हो गया। उसे उपचार के लिए सांगला अस्पताल लाया गया। कार में सवार 5 लोग बरात में रोघी से बटसेरी की ओर जा रहे थे। रोघी से बटसेरी बरात में जा रही कार (एचपी 25ए-4725) सांगला-छितकुल संपर्क सड़क पर राजाल पानंग के पास अनियंत्रित होकर 300 मीटर नीचे बटसेरी संपर्क मार्ग पर जा गिरी। सूचना मिलते ही पुलिस थाना सांगला से एएसआई विजय शर्मा की अगुवाई में आरक्षी मोहित, सुरजीत, मनमीत और अभय की टीम घटनास्थल पर पहुंची। बटसेरी गांव के ग्रामीणों के सहयोग से चारों शव निकाले गए। घायल को सांगला अस्पताल लाया गया। चारों शव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के शवगृह में रखे गए हैं। हादसे में वाहन चालक रमेश कुमार (42), गांव रोघी, तहसील कल्पा, किन्नौर घायल हुआ है। जबकि अजय कुमार (40), किशोरी लाल (48) निवासी रूनंग, मदन लाल (48), गांव किल्बा और जिया लाल निवासी रोघी की मौके पर ही मौत हो गई।
राजधानी में आने वाले समय में हर घर से लेकर सरकारी दफ्तरों की छत पर सौर ऊर्जा का प्लांट लगा हुआ दिख सकता है। राज्य सरकार ने इसे प्रोत्साहित करने के लिए शिमला शहर के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ये प्रावधान किया है। इसमें राजधानी में 1428 किलोवाट सौर ऊर्जा घरों की छतों पर ही पैदा हो, इसके लिए स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को लक्ष्य दिया है। इसमें से 888 किलोवाट बिजली सौर ऊर्जा लोगों के घरों के छत पर ही बनेगी। शहर में सौर ऊर्जा का उत्पादन और इस्तेमाल होने से राजधानी के पर्यावरण को फायदा होगा, साथ ही बिजली उत्पादन के स्रोतों का कम दोहन कर आने वाली पीढ़ियों के लिए बिजली को बचाया जा सकता है। शहर को ज्यादा सुंदर व आकर्षक बनाने के लिए इस दिशा में काम किया जा सकता है। शहर की स्ट्रीट लाइटें लगाने का काम भी सौर ऊर्जा के माध्यम से किया जाएगा। राजधानी में सर्दियों के दौरान लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए हर वार्ड में जहां भी स्ट्रीट लाइटें लगी है, चल नहीं रही उन्हें बदलने और नई लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा। स्मार्ट सिटी के तहत सोलर लाइटों लगाने का काम भी जल्द ही पूरा करने का निर्देश दिए गए है ।
कहीं बहुत देर तो नहीं हो गई मेहरबां आते आते......चार साल के लम्बे इंतज़ार के बाद कर्मचारियों को संयुक्त सलाहकार समिति का तोहफा मिलने वाला है। दो महीने में दूसरी बार तारीख मिल गई है और 27 नवंबर की दिनांक और सुबह 11 बजे का वक्त तय हुआ है। उपचुनाव में भाजपा को लगे झटके के बाद ही सही मगर सरकार अब सही मायनों में कर्मचारी हितैषी नजर आने लगी है। कोर्ट में लटके हुए मामले हो या कर्मचारियों की लंबित मांगें, मानो अब मुख्यमंत्री सब तेजी से निपटाने में लगे है। इस जेसीसी की बैठक में कर्मचारियों से जुड़े 62 एजेंडों पर चर्चा होनी है। ये 62 एजेंडे सरकार के सामने रखने की जिम्मेदारी अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ को सौंपी गई है। जयराम सरकार के कार्यकाल में चार साल बाद अब ये पहली बैठक होने जा रही है। इस बैठक के बाद सरकार नए पे-कमीशन पर भी ऐलान कर सकती है। जेसीसी बैठक से कर्मचारी वर्ग को खासी उम्मीद है। उपचुनाव के नतीजे सरकार देख चुकी है और 2022 के विधानसभा चुनाव भी अब दूर नहीं है, ऐसे में अपेक्षित है कि सरकार कई लंबित मसलों पर सकारात्मक फैसले ले। सत्ता प्राप्त करने में प्रदेश का कर्मचारी वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और ऐसे में जाहिर सी बात है कि सरकार पर कर्मचारी वर्ग की अपेक्षाओं का बोझ है। वहीं सरकार द्वारा अधिकृत हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से भी कर्मचारी वर्ग को उम्मीदें रहेगी। यानी दबाव दोतरफा होगा। उधर, सरकार के नज़रिए से देखा जाए तो सरकार की भी अपनी मजबूरी है। कर्मचारी उम्मीदों पर खरा न उतरे तो सत्ता खोने का डर बढ़ जाता है, और यदि कर्मचारियों को नई राहतें - सौगातें दे तो आर्थिक स्थिति खराब होती है। पहले से कर्ज़े में डूबी हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए ये बेहद मुश्किल समय है। 2022 विधानसभा चुनाव का काउंट डाउन शुरू हो चुका है और माना जा रहा है कि जेसीसी बैठक के साथ कर्मचारियों पर मेहरबानी का जो दौर शुरू होगा वो आचार सहिंता लगने तक जारी रहेगा। पर क्या हर पांच साल में निष्ठा बदलने वाला हिमाचल का कर्मचारी चुनावी वर्ष में मिलने वाली राहतों के बाद अपनी वोट रुपी कृपा सत्ता रूढ़ दल पर बनाये रखेगा, ये यक्ष प्रश्न है। सरकार ने जो इन्तजार करवाया है क्या उस लम्बे इन्तजार की टीस बरकरार रहेगी या राहतें मिलने की स्थिति में कर्मचारी बड़ा दिल दिखायेगा, ये देखना दिलचस्प होने वाला है। इन कर्मचारी मांगो पर रहेगी रहेगी नज़रें : - कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देने की मांग - अनुबंध कार्यकाल दो साल करने की मांग - अनुबंध कार्यकाल को वरिष्ठता में शामिल करने की मांग - कर्मचारियों को 4-9-14 साल की सेवा अवधि में टाइम स्केल देना - कनिष्ठ ऑफिस सहायकों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन - महंगाई भत्ते की पांच फीसदी किश्त जारी करने की मांग - नई पेंशन स्कीम के तहत केंद्र सरकार की 2009 की अधिसूचना के अनुसार निधन या स्थायी अपंगता पर पूरी पेंशन देने की मांग - केंद्र सरकार की तर्ज पर महिला कर्मियों को बच्चे की देखभाल के लिए दो साल का अवकाश देने का मसला - कर्मचारियों के अन्य मसले जैसे की प्रतिपूरक भत्ता, पूंजी भत्ता और मकान किराया भत्ता बढ़ाने की मांग - एनजीओ फेडरेशन के एक प्रतिनिधि को हाउस अलॉटमेंट कमेटी में शामिल करने की मांग - तीसरी और चतुर्थ श्रेणी के सभी खाली पदों को जल्द भरने की मांग - आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुबंध पर लाने की मांग - पुलिस कॉन्स्टेबल्स का अनुबंध काल घटाकर 3 वर्ष करने की मांग - दैनिक वेतन भोगियों को 5 की बजाए 4 साल में नियमित करने की मांग - आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्करों का वेतन बढ़ाने की मांग - करुणामूलक नौकरियां बहाल करने की मांग - नव नियुक्त कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18000 करने की मांग - छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करवाना नए पे कमीशन पर भी रहेगी नजर जेसीसी की बैठक में नए पे कमीशन पर भी चर्चा हो सकती है। बता दें कि राज्य में पे-कमीशन करीब 4.15 लाख कर्मचारी और पेंशनरों को दिया जाना है। नए पे-कमीशन को लागू करने से पहले इसके बारे में वित्त विभाग मुख्यमंत्री को प्रेजेंटेशन देगा। इस बारे में बीते दिनों भी प्रेजेंटेशन रखी गई थी, जो किसी कारणवश टल गई। अब यह 27 नवंबर को तय हुई जेसीसी से पहले होगी। इससे पहले वित्त विभाग ने पे स्केल वाइज स्टडी कर लिया है, लेकिन फिर भी कुछ पेचीदा मसलों पर फैंसला होना बाकी है। यही वजह है कि जेसीसी बैठक से पहले मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक होगी। कर्मचारियों के लिए 'जिन्न' बने चन्नी, अब जयराम पर दबाव ! वेतनमान को लेकर हिमाचल प्रदेश पंजाब का अनुसरण करता है। पंजाब संशोधित वेतनमान जारी कर चुका है लेकिन प्रदेश में महंगाई भत्ते (डीए) के मामले भी नहीं सुलझ पाए हैं। पंजाब में मुख्यमंत्री बनते ही चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब के कर्मचारियों के लिए 'जिन्न' बन गए है। एक नहीं चन्नी ने कर्मचारियों की कई मांगों को पूरा कर दिया है। पंजाब सरकार ने हाल ही में 36,000 कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। ये सभी कर्मचारी विभिन्न सरकारी विभागों में अनुबंध, तदर्थ, दैनिक वेतन एवं अस्थायी तौर पर काम कर रहे थे। इसी के साथ 2020 से न्यूनतम वेतन में वृद्धि को भी मंजूरी दी गई है। इसमें 415.89 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे यह अब 8776.83 रुपये से बढ़कर 9192.72 रुपये हो गया है। कुछ ही समय पहले पंजाब में 2009 की अधिसूचना को भी लागू किया गया था। यही नहीं बीते दिनों पंजाब सरकार ने दिवाली से पहले कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। अब क्योंकि कर्मचारियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल पंजाब का अनुसरण करता है, तो जाहिर है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर पर अपेक्षाओं का दबाव बढ़ गया है।
मंडी संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव बेशक कांग्रेस जीत गई हो लेकिन जिला मंडी में पार्टी के दिन फिरते नहीं दिख रहे। संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली जिला की नौ सीटों में से आठ पर कांग्रेस पिछड़ी है। जिला में सिर्फ नाचन में कांग्रेस को बढ़त मिली, बाकी सब जगह भाजपा आगे रही। उपचुनाव में पार्टी के बड़े नेताओं का बड़ा अहम और सुनहरे अतीत पर टिका उनका वहम दोनों जनता ने दूर कर दिए। 2022 से पहले ये स्थिति कांग्रेस के लिए अच्छी नहीं है। तब प्रदेश की सल्तनत और कांग्रेस के बीच एक बड़ी चुनौती जिला मंडी की रणभूमि होगी और संसदीय उपचुनाव में यहाँ फिर कांग्रेस ने मुँह की खाई है। इससे पहले जिला परिषद् और नगर निगम चुनाव में भी कांग्रेस की खूब किरकिरी हुई है। बहरहाल प्रतिभा सिंह की जीत से मंडी कांग्रेस में ऊर्जा का संचार जरूर हुआ है। परन्तु क्या सिर्फ उम्मीद से कांग्रेस सत्तासीन हो पाएगी ? क्या प्रतिभा की जीत सच में कांग्रेस की जीत है ? सवाल ये भी है कि जितने वोट प्रतिभा सिंह को मिले क्या वहां कांग्रेस के किसी अन्य प्रत्याशी को मिल पाते ? इन सवालों का जवाब मंडी कांग्रेस के बड़े नेताओं को खोजना होगा और जिला में पार्टी की धरातल स्थिति पर आत्ममंथन भी करना होगा। मंडी लोकसभा का उपचुनाव भले ही कांग्रेस जीत गई हो पर कहीं न कहीं इस जीत को कांग्रेस की जीत से ज्यादा पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए सहानुभूति की जीत बताया जा रहा है, इसे वीरभद्र सिंह परिवार की जीत बताया जा रहा है। गौर करने लायक बात ये है कि जिला मंडी में कांग्रेस को पराजय मिली है और इस बात को कांग्रेस को जहन में रखकर आगे बढ़ने की जरुरत है। हवाई दावे जो भी हो किन्तु तथ्य ये ही है कि मंडी संसदीय क्षेत्र में जिला मंडी की नौ सीटें आती है जिनमें से आठ पर कांग्रेस पिछड़ी है। यानी मंडी जिला में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है। आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेस के कई दिग्गजों के गढ़ में भी प्रतिभा सिंह को लीड नहीं मिल पाई है। इन दिग्गजों में सबसे पहले नाम आता है पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर का। ये उन नेताओं में से है जिन्हें कांग्रेस की सत्ता वापसी की स्थिति में मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जाता है। उपचुनाव के दौरान ठाकुर कौल सिंह पूरी निष्ठा के साथ प्रतिभा के प्रचार प्रसार में जुटे दिखे परन्तु फिर भी उनके अपने ही निर्वाचन क्षेत्र द्रंग में प्रतिभा सिंह पिछड़ गई। द्रंग में भाजपा प्रत्याशी को 2612 अधिक मत प्राप्त हुए है। ऐसा ही कुछ हाल पूर्व मंत्री एवं मंडी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष प्रकाश चौधरी के गृह क्षेत्र में भी रहा। उनके क्षेत्र बल्ह में भी भाजपा को 956 अधिक मत प्राप्त हुए। यहां सवाल आश्रय शर्मा पर भी खड़े होते है। आश्रय लगातार कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे परन्तु टिकट न मिलने पर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह के लिए प्रचार प्रसार भी किया। इसके बावजूद भी मंडी सदर से भाजपा को बढ़त मिली जबकि उनके पिता अनिल शर्मा ने न तो भाजपा के लिए प्रचार किया न ही भाजपा के साथ अधिक दिखे। मंडी सदर से पिछले चुनाव कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर ने लड़ा था, सो सवाल चंपा पर भी उठेंगे। करसोग, जोगिंद्रनगर और सरकाघाट में भी कांग्रेस लीड की उम्मीद में थी, लेकिन स्थानीय नेता विफल रहे। स्पष्ट है कि जिला मंडी में कई दिग्गजों की पॉलटिकल मैनेजमेंट फेल हो गई है। अगर स्थिति ये ही रहे तो कांग्रेस के लिए 2022 का चुनाव कठिन होने वाला है। बड़े नेताओं को ये स्वीकार करना होगा कि अकेले जयराम ठाकुर के आगे जिला मंडी में वे पस्त हुए है। जिसने मंडी जीता, सरकार उसी की बनी ! इतिहास गवाह है कि 10 विधानसभा सीटों वाला जिला मंडी जिस भी राजनैतिक दल ने जीता वही सत्ता पर काबिज हुआ और जिसे मण्डी ने ठुकराया उसे सत्ता से भी हाथ धोना पड़ा। 1982 से 2017 तक हुए 9 विधानसभा चुनाव भी इस बात की तस्दीक करते है। इन 9 में से 7 बार उसी पार्टी की सरकार बनी जिसने मंडी में सर्वाधिक सीटें जीती। जबकि 1998 में भाजपा की सरकार इसलिए बनी क्योंकि मंडी में 4 सीट कब्जाने वाली हिमाचल विकास कांग्रेस से उसका गठबंधन हुआ। वहीं 2012 में कांग्रेस और भाजपा दोनों को 5 - 5 सीटें मिली थी, हालांकि सरकार बनाने में कांग्रेस कामयाब रही थी। 2017 में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया। अब कांग्रेस यदि उपचुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल मान रही है तो 2022 में भी कांग्रेस की डगर आसान नहीं होने वाली। विस चुनाव कांग्रेस भाजपा अन्य 1982 5 2 3 कांग्रेस की सरकार बनी 1985 7 2 1 कांग्रेस की सरकार बनी 1990 1 8 ( गठबंधन ) 1 भाजपा की सरकार बनी 1993 9 0 1 कांग्रेस की सरकार बनी 1998 4 3 4 सुखराम के समर्थन से भाजपा सरकार बनी 2003 6 2 2 कांग्रेस की सरकार बनी 2007 3 6 1 भाजपा की सरकार बनी 2012 5 5 0 कांग्रेस की सरकार बनी 2017 0 9 1 भाजपा की सरकार बनी
हिमाचल किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज ने दो पंचायतों नौहली व वाता-री-बिहूं को जोगिंदर नगर पुलिस थाने के अधीन दोबारा करने के संधर्व में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। जिसमे लिखा गया कि द्रंग में नया पुलिस थाना बनने के बाद इन गांवों को जोगिंदर नगर थाना क्षेत्र से हटाकर द्रंग थाना के अधीन कर दिया गया। तभी से जनता की मांग रही है कि इन सभी गांवों को जोगिंदर नगर थाना के अधीन ही रहने दिया जाये। ये सभी गाँव जोगिंदर नगर विधान सभा क्षेत्र में आते हैं तथा इनका तहसील मुख्यालय व उपमंडल मुख्यालय भी जोगिंदर नगर ही है। तहसील मुख्यालय व एसडीएम कार्यालय से द्रंग थाना की दूरी 42 किलोमीटर है। ये गाँव वैसे भी जोगिंदर नगर से 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर हैं तथा यहाँ के निवासियों को तहसील व उपमंडल से संबन्धित काम करवाने के लिए जोगिंदर नगर आना पड़ता है। यदि कोई थाने से संबन्धित काम है तो फिर 42 किलोमीटर का और सफर करना पड़ता है। जब किसी व्यक्ति को एक ही काम के लिए पुलिस स्टेशन भी जाना पड़ता है और उसके बाद 42 किलोमीटर दूर तहसील या एसडीएम कार्यालय में भी जाना पड़ता है तथा वहाँ से घर लौटने के लिए 15 से 25 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता है। इस कारण नौहली व बिहूं पंचायतों के सभी राजस्व गांवों की जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन गांवों को द्रंग थाना से जोड़ने का निर्णय बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं था। अतः यहाँ की समस्त जनता उन्होंने सरकार से मांग की कि इस समस्या व मांग को ध्यान में रखते हुए नौहली व वाता-री-बिहूं पंचायतों के सभी राजस्व गांवों को द्रंग थाना क्षेत्र से निकाल कर पुनः जोगिंदर नगर थाना के अधीन किया जाये।
पुरानी पेंशन बहाल करने का अब वक्त आ गया है : चौहान - विडम्बना : विधायक व सांसद शपथ लेने के बाद ताउम्र - मोटी पेंशन के हकदार और कर्मचारी लाचार हिमाचल प्रदेश जलशक्ति विभाग अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष व पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा हिमाचल प्रदेश के राज्य महामंत्री एल डी चौहान ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि कर्मचारियों की 2003 से छीनी गई उनके बुढ़ापे की लाठी यानी पुरानी पेंशन योजना को केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को पुरानी पेंशन को बहाल करना ही पड़ेगा। ये विडम्बना है कि एक विधायक व सांसद शपथ लेने के बाद ताउम्र -मोटी पेंशन के हकदार हो जाते है और कर्मचारियों को 33 साल सेवा देने के बाद भी नियमित पेंशन से वंचित कर दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर किया जा रहा है। एल डी चौहान ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर जयराम एक ईमानदार नेता है लेकिन अफसरों द्वारा जानबूझकर कर्मचारियों के मुद्दों को लटकाया जा रहा है व मुख्यमंत्री को गुमराह किया जा रहा है, जिसके चलते आज प्रदेश का कर्मचारी सरकार से नाराज है। पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री से दृष्टि पत्र की मांगों पर गौर करने का भी आग्रह किया है जिसमें 4-9-14 वेतनवृद्धि पर फैंसला, पेंशन पर कमेटी का गठन करने की बात, पिछले वेतन आयोग में विसंगतियों को दूर करने जैसी बातें कही गयी थी। पर चार वर्ष बीत जाने के बाद भी उस ओर कार्यवाही न होना दुख का विषय है और अब कर्मचारियों में रोष है। चौहान ने कहा कि एनपीएस पर केंद्र द्वारा जारी 5 मई 2009 की अधिसूचना को प्रदेश में जल्द लागू करने के बारे में स्वयं मुख्यमंत्री ने कहा था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री समय रहते केंद्र की 2009 की अधिसूचना को प्रदेश में लागू करवाकर शीघ्र पुरानी पेंशन की बहाली हेतु कमेटी के माध्यम से कार्य प्रारंभ करें तथा प्रदेश के लगभग 80 हजार एनपीएस कर्मियों हेतु पुरानी पेंशन को बहाल करवाकर इतिहास रचे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा महंगाई भत्ता व छठे वेतन आयोग की सिफारिशें कर्मियों का कानूनी हक है, वो हर हाल में शीघ्र मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की किताब 'सनराइज ओवर अयोध्या : नेशनहुड इन ऑवर टाइम्स' में हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हराम जैसे कुख्यात आतंकी संगठनों से की गई है। इस किताब में हिंदुत्व को लेकर जो कुछ कहा गया है, उस पर विवाद हो गया है और खुर्शीद एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस किताब में हिन्दुत्व की तुलना आतंकी संगठन बोको हराम और आईएसआईएस से करने पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा को भी ठेस पहुंचाती है। इस मामले में खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस से शिकायत भी की गई है। यूपी समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले आई खुर्शीद की इस किताब पर उठा विवाद और ज्यादा तूल पकड़ सकता है। उधर, खुर्शीद के खिलाफ पार्टी के अंदर से भी विरोध की आवाज बुलंद होने लगी है। कांग्रेस के G-23 नेताओं की खिलाफत करने वाले सलमान खुर्शीद पर पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सीधा हमला बोला है। आजाद ने खुर्शीद की पुस्तक का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया, ‘हम भले ही हिंदुत्व को हिंदू धर्म की मिली जुली संस्कृति से अलग एक राजनीतिक विचारधारा मानकर इससे असहमति जताएं, लेकिन हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और जेहादी इस्लाम से करना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है। सलमान खुर्शीद की किताब के जिस अंश पर सबसे ज्यादा विवाद हुआ है, वह है कट्टर जिहादी और कुख्यात आतंकी संगठनों से हिंदुत्व की तुलना। 'द सैफ्रन स्काई' नाम के खुर्शीद लिखते हैं, 'साधु-संत जिस सनातन धर्म और क्लासिकल हिंदुइज्म को जानते हैं, उसे किनारे करके हिंदुत्व के ऐसे वर्जन को आगे बढ़ाया जा रहा है। जो हर पैमाने पर आईएसआईएस और बोको हराम जैसे जिहादी इस्लामी संगठनों के राजनीतिक रूप जैसा है।' उनका कहना है कि हिंदुत्व का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जाता है। चुनावी रैलियों में इसका जिक्र होता है। पर जो भी हो सलमान खुर्शीद द्वारा हिंदुत्व की तुलना आतंकी संगठनों से करना देश के करोड़ों हिन्दुओं को स्वीकार्य नहीं हो सकता। ये शर्मनाक है, ये अस्वीकार्य है और कोई भी तर्क देकर इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता। हिंदुत्व सिर्फ धर्म नहीं है, ये जीने की पद्धति है।
मिसाल : सेवा ही सर्वोपरि के सिद्धांत को जैन परिवार ने किया आत्मसात - डॉ अजित पाल जैन ने करीब चार दशक पहले की थी लार्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज एंड हॉस्पिटल की शुरुआत - पुत्र डॉ गगन जैन और उनकी पत्नी डॉ आशिमा जैन भी जुटे है मानव सेवा में सोलन जिला में एक परिवार प्रदेश के लोगों को वर्षों से बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं देने में दिन रात जुटा है। हम बात कर रहें है डॉ अजित पॉल जैन व डॉ गगन जैन की, जो काफी वर्षो से लार्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज एंड हॉस्पिटल व गगन हॉस्पिटल को चला रहे है। बता दें कि लार्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज व अस्पताल (नालागढ़) प्रदेश का पहला नर्सिंग कॉलेज है, जिसकी नींव डॉ अजित पॉल जैन ने करीब चार दशक पूर्व रखी थी। आज लार्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज व अस्पताल प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। डॉ अजित के बेटे गगन को भी बचपन से ही सामाजिक कार्यों के प्रति रूचि थी और अपने पिता से बेहद प्रेरित थे। गगन जैन को उन्हीं से चिकित्सक बनने की प्रेरणा मिली। पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए डॉ गगन जैन ने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मुंबई से एमबीबीएस किया। डॉ गगन ने करीब पांच साल तक सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं दी। इसके बाद लार्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज व अस्पताल में भी कुछ वर्षों तक काम किया। तदोपरांत डॉ गगन जैन ने बद्दी में गगन हॉस्पिटल की स्थापना की। आज दोनों अस्पताल न केवल बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सोलन जिला में प्रसिद्ध है बल्कि पूरे प्रदेश से मरीज यहाँ उपचार करवाने आते है। आज लॉर्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज और गगन हॉस्पिटल में नवीनतम तकनीक से परिपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर है और सुपर-स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही है। हर वर्ष करीबन 15 हजार से अधिक मरीज यहाँ उपचार करवाने आते है। खास तौर पर सोलन, शिमला, सिरमौर जिला के लोगो के लिए यह अस्पताल वरदान साबित हुआ है। यहां 16 स्पेशलिटी डिपार्टमेंट्स है जहां छात्रों को बेहतरीन शिक्षा दी जा रही है, साथ ही मरीजों का क्वालिटी ट्रीटमेंट कर समाज के प्रति अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अस्पताल में कार्डियोलॉजी, डेंटल, ईएनटी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (चिकित्सा और शल्य चिकित्सा), सामान्य सर्जरी, स्त्री रोग सर्जरी, न्यूरोलॉजी, प्रसूति और स्त्री रोग, नेत्र विज्ञान, बाल चिकित्सा सर्जरी, पल्मोनोलॉजी और मूत्रविज्ञान सहित अन्य सुविधाएँ शामिल है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर और पूरी तरह से आधुनिक उपकरणों से लेस आईसीयू, दो ओटी, लेबर रूम, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे मशीन 500 एमए, 100 एमए (पोर्टेबल), सी-आर्म मशीन, लिथोट्रिप्सी मशीन, क्लिनिकल लैब, ऑडियोमेट्री, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट, ईईजी, ईसीजी, टीएमटी, फिजियोथेरेपी के लिए कई उपकरण इन्सटाल्ड किए गए है। जरुरतमंदो की सेवा में भी आगे : लार्ड महावीर नर्सिंग कॉलेज और अस्पताल व गगन अस्पताल में गरीब तबके के लोगों को फ्री मेडिकल सुविधाएं भी दी जाती है। समय समय पर चिकित्सा जांच शिविर, दवा वितरण, जागरूकता वार्ता और सब्सिडी के तहत गरीबों का इलाज किया जाता है। इसके अतिरिक्त लोगों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से अब तक सैंकड़ों शिविर आयोजित किये जा चुके है। परिवार की जड़ मजबूत हो तो हर कार्य सम्भव- डॉ गगन रिश्तों का तानाबाना स्नेह बांटना भी सिखाता है और हर कार्य में साथ देना भी। डॉ गगन जैन ने बताया कि उनके हर पग पग पर उनके परिवार का अहम योगदान रहा है। आज वो जो कुछ भी अपना लक्ष्य पूर्ण कर चुके है, जो भी समाज के लिए कर पा रहे है इन सब के पीछे परिवार की एकता भी है। उनके माता- पिता ने उनको सही मार्गदर्शन दिखाया तो उनकी पत्नी डॉ आशिमा जैन उनकी ताकत बनीं। डॉ जैन कहते है की साथ रहते हुए इंसानियत से जुड़ी जो समझ और सीख घर के सदस्यों को मिलती है वो हमेशा उन्हें जमीन से जोड़े रखने का काम करती है। अपनों से मिले अनुभव और संस्कार किसी भी इंसान के जीवन को सही और सार्थक दिशा दे सकते हैं।
1947 में मिली आजादी भीख थी, असली आजादी तो 2014 के बाद मिली'...इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है। इससे भी अधिक खेदजनक बात ये है कि ये विचार पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित कंगना रनौत के है। दरअसल बीते दिनों एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कंगना रनौत ने कहा था कि 1947 में मिली आजादी भीख थी, असली आजादी तो 2014 के बाद मिली, जब देश की बागडोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में आई। कंगना रनौत के इस बयान की देशभर में निंदा हो रही है। इसमें कोई संशय नहीं है कि कंगना एक बेहतरीन अदाकारा है। लेकिन कंगना का ये बयान स्वीकार्य नहीं हो सकता। निसंदेह ये उन महान साहसी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है जिनका नेतृत्व महात्मा गांधी, नेहरू और सरदार पटेल ने किया था। हैरत की बात ये है कि तमाम विरोध के बीच भी कंगना ने अपने बयान पर अब तक खेद नहीं जताया है। ये समझना बेहद जरूरी है कि सिर्फ फिल्म में झाँसी की रानी का किरदार निभाना देश भक्ति नहीं हो सकता। जो कंगना के इस बयान पर चुप है, उन पर सवाल उठना भी लाजमी है। कंगना रनौत के बयान के बाद सोशल मीडिया के बाद अब कई नेताओं ने एकसुर में कंगना रनौत का विरोध करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति और सरकार से कंगना का पद्मश्री अवॉर्ड वापस लेने की मांग उठ रही है। सिंर्फ अन्य राज्यों के नेता ही नहीं बल्कि कंगना को हिमाचल की बेटी कहने वाले हिमाचल के कई नेताओं ने भी उनके शब्दों का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने इस बयान को चौंकाने वाला और अपमानजनक करार दिया। उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से उनका पद्मश्री वापस लेने की मांग की है। शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट कर लिखा " हिमाचल की बेटी को पद्मश्री दिए जाने पर उन्हें बधाई दी थी, परंतु इस तरीके की बयानबाज़ी बहुत ही निंदनीय है। कंगना के इस बयान की प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने भी कड़ी निंदा की है। हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने शिमला में प्रैस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कंगना का बयान राष्ट्र के खिलाफ है और यह स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। राठौर ने कहा कि शायद ये बयान देने के लिए ही कंगना को पद्मश्री दिया गया। उन्होंने कंगना के बयान पर सीएम से स्पष्टीकरण मांगा और साथ ही कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी इस मसले पर जवाब देना चाहिए। हिमाचल ही नहीं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी कंगना की बयान को बेहूदा बताया। कंगना रनौत के बयान पर भाजपा से भी प्रतिक्रिया आई है। लोकसभा सांसद वरुण गांधी ने सोशल मीडिया पर कंगना रनौत का वीडियो शेयर करते हुए पूछा, "क्या मुझे इसे पागलपन या देशद्रोह कहना चाहिए"। वरुण गांधी ने ट्वीट किया था, "कभी महात्मा गांधी के बलिदान और तपस्या का अपमान, कभी उनके (महात्मा गांधी के) हत्यारे का सम्मान, और अब लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान - शहीद मंगल पांडे से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस तक। क्या मुझे इसे पागलपन या देशद्रोह कहना चाहिए ?
उपचुनाव नतीजों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर के खिलाफ उठती रही आवाजों पर फिलवक्त विराम लगा दिया है। क्यूकी जिसे सब कम आंकते थे वो अव्वल भी आ सकता है, यह किसी ने सोचा भी नहीं होगा। इसके अलावा कुछ भाजपाई तो उन्हें लेकर उल जुलूल बयान भी देते थे कि कांग्रेस के भीतर भी उन्हें बदलने को लेकर लगातार अटकलें लग रही थी। कभी सत्ता के गुरूर में चूर होकर कोई उन्हें मंद बुद्धि का मालिक कहता रहा है, तो कभी संगठन की सर्जरी के नाम पर अपने भी निशाना साधते रहे। पर अब उपचुनाव नतीजों के बाद बदली राजनैतिक फिजा में राठौर का सियासी वजन इतना बढ़ गया है कि उन्हें हिलाना मुश्किल होगा। दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस का चेहरा कौन होगा, इसे लेकर कयासों का सिलसिला जारी रहा। कई बड़े नेता अपने बड़े सियासी अरमानों के साथ संगठन की सरदारी पर नजर गड़ाए दिख रहे थे। सत्ता वापसी की स्थिति में संगठन की सरदारी से सीएम की कुर्सी का फासला कम हो सकता है, ये थ्योरी कई चाहवानों को प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए प्रेरित करती रही। जाहिर है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर रहते हुए नेता अपने निष्ठावानों को टिकट देने में भी अपनी चला सकते है। ऐसे में माना जाता रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर कई नेता नजरें जमाएं बैठे है, पर इस स्थिति में भी कुलदीप राठौर जैसे -तैसे अपनी जगह बचा कर आगे बढ़ते रहे और अब जब उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आये है तो राठौर को भी जीत का क्रेडिट मिलना जायज है। अगर कुलदीप सिंह राठौर की सबसे बड़ी ताकत उनका किसी गुट में ना होना माना जाये तो गलत नहीं होगा। उनकी अब तक की कार्यशैली से तो ऐसा ही दिखता है। जब उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान मिली तो उन्हें एक बड़े नेता का करीबी माना जाता था। पर इसके बावजूद राठौर हिमाचल कांग्रेस के सबसे दमदार नेता रहे वीरभद्र सिंह की गुड बुक्स में थे। ये उनकी बड़ी सफलता है कि उनके अब तक के कार्यकाल में कांग्रेस के भीतर खुलकर उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठी है, जबकि प्रदेश कांग्रेस कई गुटों में विभाजित रही है। बल्कि राठौर के होने से बंटी हुई कांग्रेस एकसाथ दिखने लगी है। ऐसे में शायद ही पार्टी आलाकमान उन्हें हटाकर गुटबाजी बढ़ाने का जोखिम ले।
पक्ष : शिक्षकों के साथ बेईमानी है जेसीसी बैठक का प्रारूप ! - हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा हिमाचल प्रदेश में जेसीसी बैठक की तारीख तय होने से कर्मचारियों में फिर उम्मीद की लहर जाग उठी है। कर्मचारी आस लगाए बैठे है कि चार साल बाद शायद अब उनके मसलों का निवारण होगा। परन्तु प्रदेश का एक कर्मचारी तबका अब भी नाखुश है। प्रदेश के स्कूलों कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षक अब भी सरकार से खफा नजर आ रहे है। दरससल जेसीसी की बैठक में शिक्षक संगठनों की तरफ से किसी प्रतिनिधि को शामिल न करने को लेकर कुछ शिक्षक संगठन नाराज चल रहे है। जेसीसी में शामिल न करने पर हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संघ का कहना है कि प्रदेश सरकार अपने आप को कर्मचारी हितैषी होने का दावा तो करती है लेकिन हकीकत तो यह है कि सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने को जा रहा है और अब तक सरकार ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के किसी भी मुद्दे को हल नहीं किया है, या यूं कहें कि सरकार ने अपने 4 साल के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को किसी भी प्रकार का कोई भी लाभ नहीं दिया है। संघ ने सरकार पर शिक्षकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि हिमाचल में 90 हजार के आसपास शिक्षक कार्यरत है लेकिन सरकार ने उनकी मांगों को सुनने के लिए जेसीसी जैसा कोई भी उचित प्लेटफार्म नहीं बनाया है जिससे शिक्षकों एवं शिक्षार्थी हित में मांगों पर चर्चा उपरांत उसका निराकरण किया जा सके l हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ का कहना है कि जेसीसी की बैठक का प्रारूप अपने आप में एक बेईमानी है क्योंकि इसमें शिक्षकों का इतना बड़ा वर्ग समायोजित नहीं किया गया है l एनजीओ को मान्यता के स्थान पर लोकतांत्रिक तरीके से सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को चुनाव के माध्यम से जेसीसी के गठन करने की संघ लंबे समय से मांग कर रहा है, जिससे सभी कर्मचारियों के हितों का एक उचित व तार्किक प्लेटफॉर्म के माध्यम से निराकरण संभव है l इस संदर्भ में संघ ने कई मर्तबा मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को ज्ञापन देकर शिक्षकों के लिए जेसीसी बैठक की मांग उठाई जिसको सरकार नजरअंदाज कर रही हैl संघ ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के कर्मचारियों एवं शिक्षकों के भत्ते का भुगतान केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर किया जाए l प्रदेश के कर्मचारियों के लंबित 5 प्रतिशत डीए का भुगतान तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए क्योंकि केंद्र सरकार बहुत पहले इसे जारी कर चुकी है और पंजाब ने भी एकमुश्त 11 प्रतिशत डीए की किस्त जारी कर दी है इसलिए हिमाचल के कर्मचारियों को डीए की किश्त देने के लिए किसी औपचारिक बैठक का इंतजार करना प्रदेश के कर्मचारियों के साथ बेईमानी है l शिक्षक संघो की अभिव्यक्ति की आज़ादी छीनने का प्रयास : चौहान हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि शिक्षा सचिव व शिक्षा निदेशक ने अभी तक संघ के साथ एक भी एजेंडा बैठक नहीं की है, जिससे शिक्षकों के मुद्दे हल हो सके l चौहान का कहना है कि सरकार कुछ कर्मचारी नेताओं को खुश करने में लगी है और कर्मचारियों एवं शिक्षकों के मुद्दों पर मौन है l कर्मचारी वर्ग लंबे समय से आस लगाए बैठा हैं, इसी वजह से कर्मचारियों में रोष है l सरकार के प्रति कर्मचारियों की नाराजगी का अंदाजा उपचुनाव के नतीजों से लगाया जा सकता है l चौहान ने कहा कि शिक्षा निदेशक उच्च की तानाशाही का अंदाज़ा 17 .04 .2021 जारी अधिसूचना से लगाया जा सकता है जिसमें शिक्षक संघो की अभिव्यक्ति की आज़ादी को छीनने का प्रयास किया गया है l इसमें कहा गया है कि कोई भी शिक्षक नेता सरकार व विभाग के निर्णय के खिलाफ मीडिया या किसी भी माध्यम से विरोध स्वरूप अपनी आवाज उठाएगा तो उसके खिलाफ सीसीएस रूल 1964 के दायरे में अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लायी जाएगी। इसकी आड़ में संघ के तीन पदाधिकारियों पर कार्यवाही की गयी। संघ द्वारा मामला मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के ध्यान में लाने पर भी आज तक इस तुगलकी फरमान को निरस्त नही किया गया है, जो सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है। चौहान का आरोप है कि उनकी आवाज़ रोकने के लिए उन पर दो - दो झूठी चार्जशीट बनाई गई है और कम से कम 10 शो कॉज नोटिस अभी तक दिए जा चुके है। आखिर कब लागू होगा छठा वेतन आयोग : हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ का कहना है कि प्रदेश का छठा वेतन आयोग 1.1. 2016 से देय है, पांच वर्ष की अवधि बीत जाने पर भी सरकार द्वारा अभी तक इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाया गया है l संघ ने सरकार से बार-बार आग्रह किया है कि जब हम सेवा नियमों पर केंद्र का अनुसरण करते हैं तो वित्त नियमों पर भी हिमाचल को केंद्रीय वित्त आयोग का अनुसरण करना चाहिए l संघ का कहना है कि अब तो पंजाब सरकार ने भी छठा वेतन आयोग लागू कर दिया है इसलिए हिमाचल में इसे लागू करने के लिए सरकार को किसी जेसीसी जैसी बैठक का इंतजार करने का कोई औचित्य नहीं है, इससे तुरंत प्रभाव से हिमाचल में लागू करने की आवश्यकता है l
इस दिन माता रेणुका से मिलने श्री रेणुका जी पहुँचते है भगवान परशुराम ! फर्स्ट वर्डिक्ट। सिरमौर देवभूमि हिमाचल के जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र का पहला पड़ाव है श्री रेणुकाजी, जिसे भगवान परशुराम की जन्मभूमि माना जाता है। यहाँ स्थित पवित्र रेणुका झील करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और मान्यता है कि इस झील में भगवान परशुराम की माता रेणुका निवास करती है। माता रेणुका के नाम पर ही इस झील और स्थान का नाम पड़ा है। मान्यता है कि दशमी से एक दिन पहले मां रेणुका अपने पुत्र परशुराम से मिलने यहाँ आती है। इस दौरान यहाँ उत्सव मनाया जाता है और विशाल शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। पवित्र झील के जल में लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। आस्था से सराबोर रेणुका मेले का आयोजन पांच दिन तक किया जाता है। रेणुका झील दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी झील होने के साथ- साथ इसे काफी पवित्र भी माना जाता है। कहा जाता है कि झील भगवान परशुराम की माता रेणुका का स्थाई निवास है जो सदियों से इसी झील में वास कर रही हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक रेणुका वही जगह है जहां भगवान विष्णु के छठे स्वरूप परशुराम का जन्म हुआ था। कहते हैं महर्षि जमदाग्नि और उनकी पत्नी भगवती रेणुका जी ने झील के साथ लगती चोटी तापे का टिब्बा में सदियों तक तपस्या की थी। उस समय इस झील का नाम राम सरोवर होता था। भगवान विष्णु ने इनकी तपस्या से खुश होकर वर दिया कि वह स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे जिसके बाद भगवान परशुराम का जन्म हुआ। पर इसके कई वर्षों बाद सहस्त्रबाहु नाम के एक शक्तिशाली शासक ने इस इलाके पर हमला कर दिया। दरअसल महर्षि जमदाग्नि के पास कामधेनु गाय थी जिसे हासिल करने के लिए उसने महर्षि जमदाग्नि को भी बंधक बना लिया। किन्तु महर्षि जमदाग्नि ने यह कहकर गाय देने से इंकार कर दिया कि यह गाय उन्हें भगवान विष्णु ने दी है। ऐसे में वह इस गाय को किसी और को देकर भगवान का भरोसा नहीं तोड़ सकते। ऐसे में क्रोधित होकर सहस्त्रबाहु ने महर्षि की हत्या कर दी। उनकी हत्या के बाद उनकी पत्नी रेणुका जी साथ लगते राम सरोवर में कूद गई और हमेशा के लिए जल समाधि ले ली। उक्त घटना के वक्त भगवान परशुराम वहां नहीं थे, पर बाद में जब परशुराम को इसका पता चला तो उन्होंने सहस्त्रबाहु का वध कर दिया। साथ ही तपस्या से पिता को भी नया जीवन दे दिया। परशुराम ने अपनी माता रेणुका से विनती की कि वह झील से बाहर आये, मगर मां रेणुका ने कहा कि वह अब हमेशा के लिए इस झील में वास करेंगी। पर वह परशुराम से मिलने साल में एक बार आएंगी। इसके बाद ही झील का नाम रेणुका झील पड़ा और उसी समय से इसकी आकृति भी महिला के आकार में ढल गई। मान्यता है कि दशमी से एक दिन पहले मां परशुराम से मिलने आती है। कोई नहीं माप पाया झील की गहराई : भगवान परशुराम की जन्मभूमि श्रीरेणुकाजी उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में से एक है। श्रीरेणुकाजी झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है और लगभग तीन किमी में फैली है। खास बात ये है कि इस झील का आकार स्त्री जैसा है और इसे माता रेणुका की प्रतिछाया माना जाता है। कहते है कि कई बार वैज्ञानिकों ने इस झील की गहराई को मापने की कोशिश की, मगर वे इस काम में सफल नहीं हो सके। ये भी कहा जाता है कि जब भी कोई व्यक्ति झील को तैरकर पार करने की कोशिश करता है, तो वह बीच में ही डूब जाता है। झील के किनारे माता श्रीरेणुका व भगवान परशुराम के भव्य मंदिर हैं। न सिर्फ हिमाचल प्रदेश बल्कि अन्य राज्यों से भी लोग यहाँ दर्शन लाभ हेतु पहुँचते है। असकलियां, पटांडे, लुश्के का जवाब नहीं: श्रीरेणुकाजी जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र में आता है और इस क्षेत्र में हाटी समुदाय के लोग रहते हैं। गेहूं व चावल के आटे से बनने वाली असकलियां, पटांडे, पत्थर के तवे पर बनने वाले लुशके, सिड्डू, मालपुड़े व खीर यहाँ के पारम्परिक पकवान हैं। सभी शुभ अवसरों पर और त्यौहारों ल पर इन्ही पकवानों को बनाया जाता है। श्री रेणुकाजी मेला हो या संक्राति, अमावस्या, पूर्णिमा और दूसरे उत्सव, स्थानीय लोग ये पारंपरिक पकवान बनाते हैं। खान पान के शौकीनों के लिए ये पकवान आकर्षण का केंद्र है। श्रीरेणुकाजी विकास बोर्ड संभालता है प्रबंधन : श्रीरेणुकाजी आने वाले पर्यटकों के लिए श्रीरेणुकाजी विकास बोर्ड ने झील में बोटिंग की व्यवस्था की है। झील की परिक्रमा के लिए बैटरी से संचालित गाड़ी भी पर्यटकों के लिए उपलब्ध है। श्रीरेणुकाजी झील में स्नान के बाद पर्यटक झील की परिक्रमा करते हैं। झील की परिक्रमा करते हुए एक छोर पर हिमाचल वन्य प्राणी विभाग का मिनी जू है जिसमें तेंदुआ, हिरण, कक्कड़, घोरल, सांभर सहित कई पशु-पक्षी मौजूद हैं। प्रदेश सरकार ने साल 1984 में श्रीरेणुकाजी विकास बोर्ड की स्थापना की थी जो श्रीरेणुकाजी झील, मां श्रीरेणुकाजी मंदिर, भगवान परशुराम मंदिर,परशुराम तालाब व श्रीरेणुकाजी विकास बोर्ड के तहत आने वाले अन्य दर्शनीय स्थलों की देखभाल व उनके जीर्णोद्धार का कार्य करता है। भगवान परशुराम के मंदिर को पुरानी देवठी के नाम से पुकारा जाता है। कुछ साल पहले इसका जीर्णोद्धार किया गया है पर इसके मूल स्वरूप को नहीं छेड़ा गया है। अंतरराष्ट्रीय मेले का दर्जा प्राप्त : मेला श्री रेणुका मां के वात्सल्य एवं पुत्र की श्रद्धा का एक अनूठा आयोजन है। पांच दिन तक चलने वाले इस मेले में आसपास के सभी ग्राम देवता अपनी-अपनी पालकी में सुसज्जित होकर मां-पुत्र के इस दिव्य मिलन में शामिल होते हैं। राज्य सरकार द्वारा इस मेले को अंतरराष्ट्रीय मेला घोषित किया गया है। इस वर्ष नहीं हो रही सांस्कृतिक संध्याएं : कोरोना संक्रमण के चलते 2 साल बाद इस बार 13 से 19 नवंबर तक अंतरराष्ट्रीय मेला श्री रेणुका जी का आयोजन हो रहा है लेकिन मेले का स्वरूप काफी हद तक बदला हुआ है। इस वर्ष सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित नहीं हो रही है बल्कि मेले में इस बार खेलों को बढ़ावा दिया गया है। इसमें उन्हीं खिलाड़ियों को हिस्सा लेने की इजाजत दी गई है, जिन्हें कोविड वैक्सीनेशन की दोनों डोज लग चुकी है। इसी तरह से व्यवसायिक गतिविधियों के लिए भी कोविड वैक्सीनेशन की दोनों डोज की शर्त है। मेले में मुख्य तौर पर केवल 4 देव पालकियों को ही न्यौता दिया गया है। परंपरा के मुताबिक प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा ही मेले का शुभारम्भ किया गया है, वहीं समापन समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल करेंगे।
किन्नौर जिला में सांगला तहसील के बटसेरी के समीप रविवार शाम 4 बजे के करीब एक ओल्टो कार के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना प्राप्त हुई है। जानकारी के मुताबिक वाहन में सवार 4 व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई है। जबकि वाहन में सवार एक अन्य घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के किए सीएचसी सांगला लाया गया है। दरअसल सभी व्यक्ति रोघी गांव से शादी समारोह से बारात में सम्मिलित होकर सांगला स्थित बटसेरी गांव जा रहे थे तभी यह दर्दनाक हादसा पेश है। जानकारी के अनुसार मृतकों में जियालाल 51 वर्षीय रोघी निवासी, किशोरीलाल 49 वर्षीय रुंनग निवासी ,संजय 42 वर्षीय रुंनग निवासी, मदनलाल 49 वर्षीय किल्बा निवासी शामिल हैं। वही घायल व्यक्ति की पहचान रमेश 45 वर्षीय रोघी निवासी के रूप में हुई है।
रक्कड़ बाजार के बीच स्थित नरसिंह मंदिर परिसर में प्रदेश कांग्रेस सेवादल के सौजन्य से शुक्रवार को शुरू हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का रविवार को समापन हुआ। शिविर के समापन अवसर पर पहुंचे जिला कांगड़ा कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अजय महाजन द्वारा ध्वजारोहण किया गया तदोपरांत कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम गीत से हुई। मुख्यातिथि अजय महाजन को जसवां-परागपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरिंद्र मनकोटिया ने टोपी एवं शाल भेंटकर सम्मानित किया। इस ध्वजारोहण समारोह में प्रदेश कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष अनुराग शर्मा, विशेष अतिथि आरके अग्रवाल, जसवां-परागपुर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, दीपक गुलेरिया, कैंप कमाडेंट एमएल कौंडल, जगवीर सिंह(गग्गी) सहित अन्य पदाधिकारियों व प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
देश के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती के उपलक्ष्य पर मुख्यअतिथि अजय महाजन व अन्य सभी अतिथियों सहित कैंप पदाधिकारियों व कैंप प्रशिक्षुओं ने पुष्पार्पण किया। प्रदेश कांग्रेस सेवादल अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने इस दौरान पंडित नेहरू के जीवन पर प्रकाश डाला तथा मौजूद प्रशिक्षुओं को पंडित नेहरू के स्वतंत्रता संग्राम के योगदान बारे जानकारी दी। कैंप कमांडैंट एमएल कौंडल द्वारा कैंप की विस्तृत रिपोर्ट पेश की गई तथा कैंप के सफल आयोजन के बारे में सभी कैंप पदाधिकारियों व कैंप प्रशिक्षुओं का आभार जताया गया। इस मौके पर मुख्यातिथि अजय महाजन ने कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारियों को सम्मानित कर उन्हें प्रमाणपत्र दिए। कार्यक्रम के अंत में जिला कांगड़ा कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अजय महाजन तथा जसवां-परागपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरिंद्र मनकोटिया की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खनन माफिया के विरोधस्वरूप रक्कड़ से परागपुर तक पदयात्रा निकाली गई। जहां इन ज्वलंत मुद्दों हेतु प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान की शुरूआत की गई। इस दौरान नूरपुर के पूर्व विधायक एवं कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय महाजन ने बताया कि इस जनजागरण अभियान के माध्यम से कांग्रेस कमेटी प्रत्येक घरद्वार पहुंचकर लोगों को मौजूदा सरकार की कुनीतियों बारे में अवगत करवाएगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण किन्नौर द्वारा आज रिकांगपिओ में पेन इंडिया अवेयरनेस कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रभात फेरी निकाली गई। यह प्रभात फेरी राजकीय टीएस नेगी कॉलेज की छात्राओं द्वारा रामलीला ग्राउंड से लेकर आइटीबीपी मार्केट रेकोंगपियो तक निकाली गई। गौतरतलब है कि पैन इंडियाअवेयरनेस कार्यक्रम पूरे भारतवर्ष में 2 अक्टूबर से लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए चलाया जा रहा था। जिसका आज बाल दिवस के अवसर पर प्रभातफेरी निकाल का विधिवत रूप से समापन किया गया। इस दौरान किन्नौर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरा लीगल वॉलनटियर, लॉयर्स, कॉलेज के छात्र,आंगनबाड़ी वर्कर,आशा वर्कर, खंड विकास अधिकारी, हिमाचल परिवहन निगम के कर्मचारियों मौजूद रहे। व कर्मचारी
जिला किन्नौर में 11 नवंबर से 13 नवंबर तक आयोजित उपमंडल स्तर का बाल विज्ञान सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। इस बाल विज्ञान सम्मेलन का शुभारंभ 11 नवंबर को शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक किन्नौर अशोक नेगी द्वारा ऑनलाइन माध्यम से किया गया था जबकि समापन परियोजना अधिकारी डाइट किन्नौर कुलदीप नेगी द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में जिला के तीनों खंडों के लगभग 449 बाल वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन भाग लिया। इस कार्यक्रम में मैथमेटिकल ओलंपियाड, प्रश्नोत्तरी, साइंस एक्टिविटी व साईंस मॉडल आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसके लिए तीन नियंत्रण कक्ष बनाए गए थे। विज्ञान पर्यवेक्षक गणेश नेगी ने बताया कि इन प्रतियोगिताओं में प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान पर रहे बाल विज्ञानक 7,8 व 9 दिसंबर को अपने खंड का प्रतिनिधित्व करेंगे तथा साईटिफिक परियोजना रिपोर्ट के अनुसार जिला स्तर पर भाग लेंगे।
द साइलेंस ऑन इनफर्टिलिटी विषय पर शिमला के होटल मरीना में इंदिराआईवीएफ फर्टिलिटी एंड आईवीएफ सेंटर द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं आयुर्वेद मंत्री डॉ राजीव सैजल ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी के विकास के साथ उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए सीएमई गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा भी इन गतिविधियों का चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ाने का प्रयास किया जाए ताकि विशेषज्ञों के नवीन विचारों को अपनाकर चिकित्सा विज्ञान में विकास हो सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश में निजी संस्थानों द्वारा भी विभिन्न क्षेत्रों में विकास की प्रक्रिया में सहभागिता सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक क्षेत्र में नित्य नवीनतम सूचनाओं के कारण सामयिक होने की चुनौतियों के अंतर्गत इस प्रकार के कार्यक्रम से नवीन जानकारी प्राप्त होती हैं।


















































