Weeks after the mega-explosion left the city in shatters, another massive fire erupted at the Beirut sea port. As per reports, the blaze occurred at a warehouse where oil and tyres were placed, though the source of fire is yet to be confirmed. The fire erupted in the duty free zone of the port, sending a huge column of smoke above the city. Several firefighting brigades are trying to contain the fire. Helicopters have also been sent to help bring the fire under control.
Where Russia reported positive results of the 2nd phase trials for vaccine Sputnik-V on healthy adults, the vaccine is ready for its 3rd phase trials. Sputnik-V is developed by Gamaleya Research Institute in Russia, approved by Ministry of Health of the Russian federation. India showed interest in conducting 3rd phase trials in the country. Reportedly, vaccine will be available in India from the month of september that gives hopes to the Covid-19 patients. 20 countries, including India are interested in conducting the trials. Results will be reported online in the month of October or November.
हिमाचल प्रदेश नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने बीते रोज केंद्र द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति को हिमाचल में तत्काल प्रभाव से लागू करने के सरकार को निर्देश दिए थे जिस पर शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। कैबिनेट ने पहले ही नई शिक्षा नीति को लागू करने की अनुमति दे दी है। शिक्षा मंत्री का बयान शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा है कि नई शिक्षा नीति को प्रदेश में लागू कर दिया है और इसके लिए एक टास्क फोर्स का भी गठन किया गया है जिसके साथ बैठक रखी गई है ताकि उसके सुझावों को शामिल कर शिक्षा नीति लागू किया जा सके। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा टास्क फोर्स और सब कमेटी के नई शिक्षा नीति के प्रारूप को लेकर जो सुझाव होंगे उन्हें नई शिक्षा नीति में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा 9-12वीं तक के छात्रों के स्कूल खोलने को लेकर गृह मंत्रालय ने एसओपी जारी कर दिए हैं। शिक्षा विभाग प्रदेश के कोरोना के हालातों को देख कर इस पर फैसला लेगा।
कंगना और महाराष्ट्र सरकार के बीच की ये लड़ाई अब एक अलग मोड़ ले चुकी है। BMC द्वारा ऑफिस तुड़वाए जाने के बाद बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत ने एक वीडियो ट्वीट करके महाराष्ट्र सरकार को जवाब दिया है। इस वीडियो में कंगना का रौद्र रूप देखा जा सकता है। कंगना रनौत ने अपने इस वीडियो में कहा, "उद्धव ठाकरे तुझे क्या लगता है? कि तूने फिल्म माफिया के साथ मिलकर, मेरा घर तोड़कर मुझसे बहुत बड़ा बदला लिया है? आज मेरा घर टूटा है, कल तेरा घमंड टूटेगा। ये वक्त का पहिया है, याद रखना, हमेशा एक जैसा नहीं रहता।" कंगना ने इस वीडियो में कहा, "और मुझे लगता है कि तुमने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है क्योंकि मुझे पता तो था कि कश्मीरी पंडितों पर क्या बीती होगी। आज मैंने महसूस किया है और आज मैं इस देश को वचन देती हूं कि मैं सिर्फ अयोध्या पर ही नहीं, कश्मीर पर भी एक फिल्म बनाऊंगी और अपने देशवासियों को जगाऊंगी।" कंगना ने कहा, "मुझे पता था कि ये मेरे साथ होगा तो होगा। लेकिन मेरे साथ हुआ है... इसका कोई मतलब है, इसके कोई मायने हैं। और उद्धव ठाकरे ये जो क्रूरता और ये जो आतंक है... अच्छा हुआ कि ये मेरे साथ हुआ क्योंकि इसके कुछ मायने हैं।" कंगना ने वीडियो को खत्म करते हुए अंत में हाथ जोड़कर जय हिंद-जय महाराष्ट्र कहा। बता दें कि शिवसेना और कंगना रनौत के बीच चल रही ये जुबानी जंग अब काफी आक्रामक रूप ले चुकी है। कंगना के मुंबई लौटते वक्त आज एयरपोर्ट पर शिवसेना के हजारों समर्थकों ने काले झंडे लहराए और कंगना रनौत वापस जाओ के नारे लगाए। BMC कंगना के ऑफिस में पहले ही काफी विध्वंस मचा चुकी है, हालाँकि अब महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने इसे अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है।
BMC और महाराष्ट्र सरकार के साथ चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री कंगना रनौत मुंबई पहुँच गई हैं। मुंबई पुलिस पर उनकी टिप्पणी को लेकर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने हवाई अड्डे पर विरोध प्रदर्शन किया। शिवसेना कार्यकर्ता हवाईअड्डे के बाहर काले झंडे के साथ कंगना खिलाफ नारे लगाते हुए देखे गए। आरपीआई (ए) और करणी सेना के कार्यकर्ता भी अभिनेता के समर्थन में एकत्र हुए। आरपीआई (ए) नेता और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता मुंबई में रहते हुए कंगना की रक्षा करेंगे। क्या बोले मुख्यमंत्री जयराम मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने महाराष्ट्र में कंगना के ऑफिस को शिव सेना द्वारा तोड़े जाने पर कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है। सीएम ने कहा की शिव सेना का गठन जिस चीज़ के लिए हुए था वह मूल को ख़त्म कर दिया गया है। जब से शिव सेना ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है शिव सेना का वजूद खत्म है। शिव सेना की हालात भी कांग्रेस जैसी होने वाली है।
हिमाचल विधानसभा सत्र के दूसरे दिन भी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का दौर जारी रहा। सदन में तीखी नोकझोक के बाद विपक्ष ने वाकआउट भी कर दिया। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी की ओर से सरकार के खिलाफ सदन में कहे एक शब्द पर सीएम ने एतराज़ जताते हुए तीखे कटाक्ष किए। उन्होंने कहा कहा कि अगर आज कांग्रेस की सरकार होती तो हिमाचल बरबाद हो जाता। इस पर विपक्ष के सदस्य आक्रामक हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके चलते प्रश्नकाल नहीं चल सका और सारा काम रोक कर कोरोना काल की अव्यवस्था और दिक्कतों पर चर्चा चलती रही। इस दौरान सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष के सदस्य सदन में कर रहे हैं, वह सही नहीं है। वह कांग्रेस का दौर था, जब हालात खराब थे। प्रदेश आज तबाह हो गया होता यदि कांग्रेस की सरकार होती। स्पीकर ने जब एक सदस्य को बोलने के लिए कहा तो विपक्ष के सदस्य हंगामा करने लगे। सीएम बोले- चर्चा लंबी खींचनी है तो कल का प्रश्नकाल भी जाएगा। ऐसे में जवाब आज नहीं आ पाएगा। शाम को स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल को अपनी बात रखने को उठाया गया तो विपक्ष ने इसका विरोध किया। मुकेश अग्निहोत्री ने मांग उठाई कि चर्चा के लिए अन्य विधायकों को भी बुलाया जाए।
अरुणाचल प्रदेश से अगवा किए गए 5 भारतीयों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। चीन ने स्वीकार कर लिया है के ये युवा चीन के पास है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगवा भारतीयों को वापस लाने की प्रक्रिया चल रही है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने ट्वीट कर बताया, 'भारतीय सेना की तरफ से भेजे गए हॉटलाइन संदेश पर चीन की पीएलए ने जवाब दिया है। उन्होंने पुष्टि की है अरुणाचल प्रदेश से लापता युवा उनकी तरफ पाए गए हैं। उन्हें अधिकारियों को सौंपे जाने की आगे की आपौचारिकताओं पर काम किया जा रहा है।' बता दें की अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले के पांचों युवक जंगल में शिकार करने गए थे जहां से वे लापता हो गए। बाद में परिजनों ने आरोप लगाया कि चीनी सेना पीपल्स लिबरेशन आर्मी (Peoples Liberation Army) ने उन्हें अगवा कर लिया है। पहले तो चीन ने इसकी जानकारी होने से इंकार कर दिया था, पर अब चीन की तरफ से मान लिया गया है की इस घटनाक्रम में उसका हाथ है।
तीन दिन तक ड्रग्स मामले में पूछ-ताछ के बाद NCB ने रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया। ड्रग्स लेने और अन्य गम्भीर आरोपों के चलते रिया को कस्टडी में लिया गया था। पूछ ताछ के बाद रिया का मेडिकल व कोरोना टेस्ट करवाया गया जिसके बाद रिया को गिरफ्तार कर लिया गया। SSR मामले में रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी का इंतजार फैन्स पिछले काफी वक्त से कर रहे थे। माना जा रहा था कि रिया की गिरफ्तारी सीबीआई द्वारा की जाएगी लेकिन इस केस में ड्रग एंगल आने के बाद से NCB की एंट्री हुई थी जिसमें पहले ड्रग खरीदने के मामले में रिया के भाई शोविक चक्रवर्ती की गिरफ्तारी हुई और अब ड्रग मामले में ही रिया चक्रवर्ती की भी गिरफ्तारी हुई है। इसके अलावा ड्रग्स केस में एनसीबी और भी कई बॉलीवुड सेलेब्स को समन कर सकती है।
हिमाचल प्रदेश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। वहीं, मौत का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह कोरोना से एक और मौत का मामला सामने आया है। बिलासपुर की 57 वर्षीय महिला ने आईजीएमसी में दम तोड़ दिया है। वहीं, एक सरकाघाट और तीसरा शिमला के व्यक्ति की मौत हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 60 पहुंच गया हैै। प्रदेश में संक्रमितों का कुल आंकड़ा 7660 पहुंच गया है। 2234 सक्रिय मामले हैं। 5359 मरीज ठीक हो गए हैं। बता दें सोमवार को 262 कोरोना पॉजिटिव मामले आए थे।
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कंगना रनौत को सुरक्षा देने के बाद आज कंगना के घर के बाहर कमांडोज़ ने भी पहरा देना शुरू कर दिया है। बता दें की पिछले कल ही प्रदेश सर्कार द्वारा बॉलीवुड एक्ट्रेस व हिमाचल की बेटी कंगना रनौत को सुरक्षा दे दी गई थी। इसके बाद आज ग्रह मंत्रालय की और से Y श्रेणी की सुरक्षा भी कंगना को मिल गई है। मंगलवार सुबह मनाली स्थित कंगना के घर पर Y श्रेणी की सुरक्षा का पहरा देखा गया। Y श्रेणी की सुरक्षा के तहत कंगना के घरत पर 11 सदस्यों की टीम ने मोर्चा संभल लिया है। ये टीम दिन-रात कंगना के आस पास पहरा देगी। इससे पहले, हिमाचल प्रदेश सरकार ने कंगना रनौत को प्रदेश पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रदान की थी। कंमाडो के आने से पहले घर के आसपास कुल्लू पुलिस के जवान तैनात थे।
Film star Arjun Kapoor has been tested positive for Coronavirus. Arjun Kapoor has shared this information with his fans through his Instagram account. The actor has announced that he is Corona positive. He wrote in his post, "It is my responsibility to inform all of you that my corona test has come positive. I am feeling fine right now and I am asymptomatic. I have isolated myself at home under the advice of doctors and authorities and will be under home quarantine. I thank you all in advance for your support and I will keep informing all of you about my health. The way coronavirus cases are coming up in the country has become a matter of concern for everyone. Every day more than 80 thousand cases of Coronavirus are being reported in India only. Bollywood industry is also not untouched by Corona and many stars of the industry have been found to be COVID 19 positive. A new name has been added to this list. This is the name of actor Arjun Kapoor.
The ongoing investigation in the Sushant Singh Rajput death case has reached a turning point today. Amidst the CBI investigation, the wires of this case have been linked to drugs, which the NCB is investigating. Rhea Chakraborty is under suspicion. Her brother Shovik and Sushant's two staff members, Samuel Miranda and Dipesh are arrested and questioned by the NCB. Today Rhea was also summoned and is being questioned thoroughly by officers of the NCB. NCB sources are quoting that Rhea’s arrest will depend on the cross-examination of the accused. Right now the inquiry is going on with Rhea in the NCB office. It is believed that the questioning will be continued the whole day. But if nothing is found in the cross-examination, Rhea cannot be arrested.
हिमाचल के चंबा में दो स्वास्थ्य कर्मियों समेत तीन कोरोना पाॅजिटिव मरीज पाए गए है। इनमें एक सीआईडी यूनिट चंबा का कर्मचारी भी शामिल है। 4 सितम्बर को जाँच के लिए कुल 239 सैंपल लिए गए थे जिसमे से तीन पोसिटिव पाए गए है, वहीं 176 सैम्पल की रिपोर्ट आना अभी बाकि है। पॉजिटिव पाए गए तीन व्यक्तियों में से एक 26 वर्षीय महिला है जो की JLNMC चम्बा की स्वस्थ्य कर्मी है। DIET सरु का एक 26 वर्षीय स्वास्थ्य कर्मी जो की इंस्टीटूशनल क्वारंटाइन में था, और एक 41 वर्षीय CID यूनिट चम्बा का कर्मचारी भी कोरोना पोसिटिव पाया गया है। चम्बा जिले में संक्रमितों का आंकड़ा 478 पहुंच गया है। 112 सक्रिय मामले हैं और 361 मरीज ठीक हो चुके हैं। इसके अलावा मंडी से 12 नए मामले, काँगड़ा से 9 नए मामले और कुल्लू से 1 नया पॉजिटिव मामला सामने आया है जिनकी पूरी जानकारी आना अभी बाकी है। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा 6855 पहुंच गया है। 1823 सक्रिय मामले हैं। 4932 मरीज ठीक हो गए हैं। 45 मरीज राज्य के बाहर चले गए हैं और 51 की मृत्यु हो चुकी है।
प्रदेश में कोरोना से एक और मौत हो गई है। डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन में एक 70 वर्षीय महिला ने वीरवार देर रात दम तोड़ दिया। सिरमौर में कोरोना से यह तीसरी मौत हुई है। मृतक महिला पांवटा साहिब की रहने वाली थी जिसे 1 सितंबर को पांवटा साहिब सिविल अस्पताल से डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। डायबटीज व हाईपरटेंशन रोग से ग्रसित इस महिला का नाहन मेडिकल कॉलेज में कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया था। 3 सितंबर को देर रात आइसोलेशन वार्ड में भर्ती इस महिला ने दम तोड़ दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिरमौर डॉ केके पराशर ने बताया कि पांवटा साहिब में कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत मृतक का अंतिम संस्कार किया गया है। इसी के साथ प्रदेश में अब कोरोना संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा 48 हो गया है।
प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उनकी तबीयत ख़राब चल रही थी जिसके बाद उनका कोरोना टेस्ट हुआ और वीरवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उनके संक्रमित आने के बाद उनके परिवार के सदस्यों को क्वारंटाइन कर दिया गया है और उनकी कॉन्टैक्ट हिस्ट्री ली जा रही है। इससे पूर्व सरकार के ऊर्जा मंत्री भी संक्रमित पाए गए थे जो अब स्वस्थ हो चुके हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन पर किया दुख व्यक्त भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रणव मुखर्जी का आज 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय बीमार थे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रणव मुखर्जी ने हमारे राष्ट्र के विकास पथ पर एक अमिट छाप छोड़ी है। पूर्व राष्ट्रपति और राजनेता प्रणब मुखर्जी के निधन से पूरे राष्ट्र में शोक की लहर है। प्रणब मुखर्जी ने परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ कई भूमिकाओं में देश की सेवा की। वह अपनी बुद्धि और दृढ़ता के लिए सभी पक्षों में व्यापक रूप से प्रशंसित थे। उनके जाने से राजनीति के एक युग का अंत हो गया। उन्होनें कहा कि भारत रत्न मुखर्जी ने परंपरा और आधुनिकता के साथ काम किया। प्रणव मुखर्जी अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सात बार संसद सदस्य के रूप में कार्य किया। केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, विदेश मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर उन्होनें देश के विकास में अहम योगदान दिया। 2012 में, मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति चुने गए। भाजपा अध्यक्ष ने प्रणव मुखर्जी के पारिवारिक सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
निदेशक सेना भर्ती कर्नल तनवीर सिंह मान ने बताया कि पड्डल मैदान जिला मण्डी में 6 अक्तूबर से 14 अक्तूबर, 2020 तक सेना भर्ती कार्यालय मण्डी द्वारा जिला शिमला, सोलन, सिरमौर और किन्नौर के युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह भर्ती सैनिक तकनीकी (पुरुष), सैनिक तकनीकी (गोला बारुद परीक्षक) (एटी)(पुरुष), सैनिक तकनीकी (उड्डयन) (एक्स गु्रप)(पुरुष) तथा सैनिक तकनीकी (उपचार सहायक) (एन ए) (पुरुष) पदों के लिए होगी। उन्होंने बताया कि मापदण्ड और योग्यता के लिए सेना भर्ती कार्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश द्वारा जारी 06 अगस्त, 2020 की अधिसूचना भारतीय सेना की वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर देखें। उल्लेखनीय है कि जो उम्मीदवार सेना भर्ती रामपुर बुशैहर शिमला में सैनिक तकनीकी वर्ग के लिए सेना भर्ती कार्यालय, शिमला द्वारा 16 फरवरी, 2020 को जारी अधिसूचना के तहत पहले पंजीकृत हो चुके है, उनको भी दोबारा पंजीकरण करना है।
आज अमृता प्रीतम के 101 वें जन्म दिवस पर महान कवियित्री अमृता प्रीतम के साहित्य में योगदान की एवं उनकी जीवनी की बात करते हैं। अमृता का साहित्यिक सफर जितनी बुलंदियों में रहा उनकी नीजि ज़िन्दगी भी उतनी ही दिलचस्प रही। अमृता बन पाना भी कहाँ आसान है , किसी को पा लेने की चाहत भी नहीं और फिर भी मोहब्बत की बे-इन्तेहाई, यक़ीनन अमृता साधारन तो नहीं थी। कुछ तो था जो उसे सब से अलग बनाता था। मोहब्बत लिखती तो सातों आसमान छू लेती और दर्द लिखती तो समुन्दर की गहराई नाप लेती। अमृता जो थी वो तो बस अमृता ही थी। -जहाँ भी आज़ाद रूह की झलक पड़े, समझ लेना वही मेरा घर है। -अमृता प्रीतम यदि स्वतंत्र सोच का कोई चेहरा होता तो वह अमृता का ही होता। ख्यालों की ऐसी उड़ान आपने शायद ही कहीं देखी होगी। अमृता का जन्म 31 अगस्त 1919 में पंजाब के गुजरांवाला ( पकिस्तान ) में हुआ। अमृता पंजाबी और हिंदी दोनों ही भाषाओँ में लिखा करती थी , व उनका पहला संकलन महज़ 16 साल की उम्र में 'अज्ज आखां वारिस शाह नू' ,प्रकाशित हुआ। - उन्होंने भारत-पकिस्तान के विभाजन पर लिखा - उठ धर्मांदा दे दरदिया ,उठ तक्क अपना पंजाब आज बेले लाशां विछियां ,ते लहू दी भरी चेनाब किसे ने पंजां पानियाँ विच दित्ती ज़हर रला ते उना पानियाँ धरत नू दित्ता पानी ला 1947 में अमृता ने विभाजन को बहुत ही क़रीब से देखा जिसके चलते अमृता ने अपनी कई रचनाओं में वही दर्द उकेरा। जल्द ही प्रोग्रेसिव राइटर्स मोमेंट का हिस्सा बनी अमृता को साहित्य जगत में पहचाना जाने लगा। साथ ही पंजाब रत्न अवार्ड पाने वाली वे पहली शख्सियत थी और साहित्य अकादमी अवार्ड से नवाज़ी जाने वाली पहली महिला भी थी। उनके द्वारा रचित उपन्यास पिंजर एवं रसीदी टिकट की भी एक अलग पहचान है। उनके बारे में अद्भुत बात तो यह है किउन्हें जितना प्रेम हिन्दुस्तान में मिला उतनी ही चाहत से उन्हें पकिस्तान में भी पढ़ा जाता है। इसका कारण यह भी है कि वे दोनों देशों के मुद्दे को ले कर हमेशा निष्पक्ष रहीं। कुल जीवन-काल में उन्होंने तक़रीबन 100 किताबें लिखी जिनका बाद में कई भाषाओं में अनुवाद हुआ, व अमृता को देश भर में ही नहीं , दुनिया भर में पढ़ा गया। अमृता विभाजन से पहले गुजरांवाला में लाहौर रेडियो स्टेशन में काम किया करती थी , विभाजन के समय हिन्दुस्तान आने के बाद अमृता ने आल इंडिया रेडियो में काम किया। अमृता की शादी 16 साल की उम्र में ही प्रीतम से हुई जो कुछ समय बाद ही टूट गई। प्रीतम उनकी ज़िन्दगी का बड़ा सच था जिसे अमृता सिंह ने अमृता प्रीतम बन कर स्वीकार किया और उम्र भर अपने साथ ही रखा। प्रीतम के बाद अमृता का नाम साहिर के साथ जोड़ा जाने लगा। साहिर लुधयानवी और अमृता की मुलाक़ात एक कवि सम्मेलन के दौरान हुई व कहा जाता है दोनों का प्रेम किसी फ़िल्मी कहानी की तरह परवान भी चढ़ा। इस रिश्ते को कोई नाम न देने के बाद दोनों ने एक दूसरे से मुँह फेर लिया परन्तु अमृता सदैव साहिर का नाम दोहराती रहीं। कहा जाता है, साहिर लाहौर में उनके घर आया करते थे। कुछ नहीं कहते. बस एक के बाद एक सिगरेट पिया करते थे। उनके जाने के बाद अमृता उनकी सिगरेट की बटों को उनके होंठों के निशान के हिसाब से दोबारा पिया करती थीं। इस तरह उन्हें भी सिगरेट पीने की लत लग गई। अमृता साहिर से बेहद प्यार करती थीं, मगर वो साथ न हो सके। अमृता कहती थी- "मुझे नहीं मालूम कि साहिर के लफ्जों की जादूगरी थी या कि उनकी खामोश नज़र का कमाल था लेकिन कुछ तो था जिसने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया। आज जब उस रात को मुड़कर देखती हूं तो ऐसा समझ आता है कि तक़दीर ने मेरे दिल में इश्क़ का बीज डाला जिसे बारिश की फुहारों ने बढ़ा दिया।" अमृता की मोहब्बत के क़िस्सों में एक नाम और शुमार है , "इमरोज़" जो निष्छल प्रेम की मिसाल थे। इमरोज़ से अमृता की पहली मुलाक़ात में ही इमरोज़ ने उन्हें अपना दिल दिया , इमरोज़ बिलकुल ख्वाबों के किसी राजकुमार जैसे थे जैसा अमृता या कोई भी लड़की चाहती हो मगर अमृता साहिर को मन में बसा चुकी थी। अमृता इमरोज़ के साथ एक छत के नीचे रहने लगी , कहा जाता है अमृता ने ही लिव इन रिलेशनशिप की शुरुआत की जिसके चलते वे हँसी का पात्र भी बनी मगर अमृता को लोगों की परवाह न थी। इमरोज़ और साहिर से अपने रिश्ते पर अमृता ने कहा - साहिर मेरा आसमान हैं और, इमरोज़ मेरे घर की छत। साहिर और अमृता के रिश्ते पर पूछे जाने वाले एक सवाल पर इमरोज़ ने कहा "मेरा और अमृता का रिश्ता स्वतंत्र है , न वो मुझे कभी बांधती हैं न ही मैं उन्हें ,‘एक बार अमृता ने मुझसे कहा था कि अगर वह साहिर को पा लेतीं, तो मैं उसको नहीं मिलता। तो मैंने उसको जवाब दिया था कि तुम तो मुझे जरूर मिलती चाहे मुझे तुम्हें साहिर के घर से निकाल के लाना पड़ता. जब हम किसी को प्यार करते हैं तो रास्ते की मुश्किल को नहीं गिनते. मुझे मालूम था कि अमृता साहिर को कितना चाहती थीं।लेकिन मुझे यह भी बखूबी मालूम था कि मैं अमृता को कितना चाहता था।" इमरोज़ के साथ स्कूटर पर जाते-जाते इमरोज़ की पीठ पर उँगलियों से अमृता अक्सर साहिर का नाम लिख दिया करती थी। लगभग 40 सालों तक अमृता की देर रात बैठने की आदत को देख कर इमरोज़ हर रात उनके लिए आधी रात में उठ कर चाय बनाया करते थे। इमरोज़ और अमृता ने एक दूसरे से कभी ये नहीं कहा की वो एक दूसरे से पेम करते हैं मगर कभी न किये गए वादों को निभाते हुए वे ता-उम्र साथ रहे। अमृता ने एक बार इमरोज़ से कहा "सारी दुनिया घूम आओ , फिर भी अगर तुम मुझे चुनोगे तो मान लुंगी तुम्हे " इस पर इमरोज़ ने कमरे का एक चक्कर लगाया और कहा "तुम्हारे आस पास ही मेरी दुनिया है , लो घूम आया दुनिया , मुझे अब भी तुमसे प्रेम है " अमृता ने अपनी आखिरी कविता इमरोज़ के नाम लिखी और कहा - " मैं तुझे फिर मिलूंगी कहाँ, कैसे, पता नहीं शायद तेरी कल्पनाओं की प्रेरणा बन तेरे कैनवास पर उतरूंगी या तेरे कैनवास पर एक रहस्यमई लकीर बन खामोश तुझे देखती रहूंगी मैं तुझे फिर मिलूंगी। इमरोज़ के नाम। " इमरोज़ ने अमृता के निधन के बाद कहा - "उसने जिस्म छोड़ा है, साथ नही। वो अब भी मिलती है, कभी तारों की छांव में, कभी बादलों की छांव में, कभी किरणों की रोशनी में कभी ख़्यालों के उजाले में हम उसी तरह मिलकर चलते हैं चुपचाप, हमें चलते हुए देखकर फूल हमें बुला लेते हैं, हम फूलों के घेरे में बैठकर एक-दूसरे को अपना अपना कलाम सुनाते हैं उसने जिस्म छोड़ा है साथ नहीं…"
भारतीय क्रिकेट में हमेशा से ही बल्लेबाज़ों का दबदबा रहा है, पर कुछ ऐसे भी गेंदबाज़ हैं जिन्होंने क्रिकेट के इतिहास में अपनी छाप छोड़ दी। एक ऐसा ही नाम है जवागल श्रीनाथ (Javagal Srinath)। श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के चहेते हैं। उनके नाम, एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो किसी भी खिलाड़ी के लिए मुश्किल है। वह भारत के ऐसे पहले तेज गेंदबाज रहे हैं जो लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकने की क्षमता रखते थे। उन्होंने किसी भी अन्य गेंदबाज़ से ज़्यादा 4 वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया। क्रिकेट की दुनिया के रजनीकांत के नाम से जाने जाने वाले श्रीनाथ चाहने वालों के बीच 'मैसूर एक्सप्रेस' के नाम से भी मशहूर थे। श्रीनाथ का जन्म श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त 1969 का कर्णाटक के मैसूर जिला में हुआ था। उनकी शुरुआती पढ़ाई मैसूर के मारीमल्लप्पा हाई स्कूल से हुई। क्रिकेट में रूची रखने वाले श्रीनाथ ने छोटी उम्र से ही खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने मैसूर के श्री जयचामाराजेंद्र कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की। श्रीनाथ ने दो बार प्रेम विवाह किया। उनकी पहली शादी 1999 में ज्योत्सना नाम की लड़की के साथ हुई। बाद में दोनों ने सहमति से तलाक ले लिया। फिर उन्होंने ने 2008 में माधवी पत्रावली नाम के एक पत्रकार से शादी की। श्रीनाथ का करियर श्रीनाथ ने भारत की ओर से खेलते हुए 67 मैचों में 236 विकेट लिए। इसके अलावा उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 1,009 रन भी बनाए। श्रीनाथ ने 229 वनडे मैचों में 315 विकेट लिए। भारत की ओर से वनडे में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों में श्रीनाथ की नाम पूर्व लेग स्पिनर अनिल कुंबले (337) के बाद दूसरे नंबर पर आता है। इसके अलावा वनडे क्रिकेट में उन्होंने 883 रन भी बनाए। जवागल श्रीनाथ ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 533 जबकि लिस्ट ए क्रिकेट में 407 विकेट लिए। श्रीनाथ ने साल 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ ईडन गार्डन्स के मैदान पर मैच में 132 रन देते हुए कुल 13 विकेट हासिल किए थे पर दुर्भाग्यपूर्ण भारतीय टीम वो मैच हार गई। टेस्ट मैचों में श्रीनाथ ने 8 बार चार, 10 बार 5 और एक बार 10 विकेट अपने नाम किए हैं।
जय राम ठाकुर ने कहा कि लेह-लद्दाख तक सभी मौसमों में सम्पर्क के लिए मनाली-लेह मार्ग पर अतिरिक्त सुरंग बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि ऊँचे दर्रों पर भारी बर्फबारी के कारण यातायात व्यवस्था बाधित न हो। उन्होंने कहा कि 16 हजार 40 फुट ऊंचे बारालाचा दर्रे को पार करने के लिए 13.2 किलोमीटर लम्बी सुरंग और 16 हजार 800 फुट पर लाचुंग दर्रे पर 14.78 किलामीटर सुरंग तथा 17 हजार 480 फुट पर स्थित तंगलंग दर्रे पर 7.32 किलोमीटर सुरंग बनाए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनाली की तरफ से सुरंग जाने वाली सड़क पर एक बर्फ का गलियारा निर्मित किया गया है जिससे सभी मौसमों में सम्पर्क सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण की तरफ से सुरंग तक जाने के लिए बनाए गए पुलों का कार्य पूरा हो चुका है। जय राम ठाकुर ने कहा कि अटल टन्नल, रोहतांग में कई विशेषताएं हैं जिसमें आपातकालीन निकासी सुरंग भी शामिल है जिसे मुख्य सुरंग के नीचे बनाया गया है। किसी भी अप्रिय घटना के कारण मुख्य सुरंग उपयोग करने के योग्य नहीं रहती है इसलिए आपातकालीन स्थिति में इस सुरंग का उपयोग निकासी के रूप में किया जा सकता है। मूल रूप से इसे 8.8 किमी लंबी सुरंग के रूप में तैयार किया गया था और इस पर काम पूरा होने के बाद बीआरओ द्वारा की गई ताजा जीपीएस अध्ययन से यह पता चला है कि यह सुरंग नौ किलोमीटर लंबी है। तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दुनिया की सबसे लंबी सुरंग होगी तथा मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम करेगी। बीआरओ के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर के.पी पुरूषोथमन, वीएसएम ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि परियोजना को समयबद्ध पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरंग में हर 150 मीटर पर दूरभाष सुविधा, 60 मीटर में फायर हाइड्रेंट, 500 मीटर में आपातकालीन गेट, 2.2 किलोमीटर पर कैवर्न मोड़,एक किलोमीटर में वायु गुणवत्ता निगरानी, ब्राॅडकास्टिंग प्रणाली और 250 मीटर में सीसीटी टीवी कैमरे के साथ स्वचालित घटना का पता लगाने की प्रणाली स्थापित की गई है। जनजातीय विकास मंत्री डाॅ. रामलाल मारकंडा, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, सांसद रामस्वरूप शर्मा, विधायक सुरेंद्र शौरी, मुख्य सचिव अनिल खाची, सामान्य प्रशासनिक विभाग के सचिव देवेश कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वेणुगोपाल, उपायुक्त कुल्लू डाॅ. ऋचा वर्मा और बीआरओ के अधिकारी इस बैठक में उपस्थित थे।
यूँ ही मेजर ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर नहीं कहते 15 अगस्त 1936. बर्लिन आलंपिक का फाइनल मुकाबला भारत और जर्मनी के बीच खेला जा रहा था. बर्लिन का हॉकी स्टेडियम खचाखच भरा था. करीब 50 हज़ार दर्शक और उन दर्शकों में से एक था जर्मनी का तानाशाह हिटलर. इससे पूर्व, ओलंपिक के एक अभ्यास मैच में जर्मनी से भारत की टीम 4-1 से हार चुकी थी. टीम उस हार से आहत थी और फाइनल को बदले का दिन मुकरर्र किया गया था . खेर, मुकाबला शुरू हुआ और पहले हाफ में दोनों ही टीमों ने शानदार खेल दिखाया. जैसे - तैसे हाफ टाइम तक भारत एक गोल से आगे था. पर टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के मन में कुछ और ही चल रहा था. हॉकी के जादूगर ध्यानचंद के इरादे कुछ और ही थे. हाफ टाइम के बाद ध्यानचंद ने अपने स्पाइक वाले जूते निकाले और शुरू हुई हॉकी की जादूगरी. भारत ने एक के बाद एक कई गोल दागे और जर्मनी पस्त हो गया. छह गोल खाने के बाद जर्मन बोखला गए. उनके गोलकीपर की हॉकी स्टिक से ध्यानचंद का दांत टूट गया, पर हौंसला बरकरार रहा. इसके बाद ध्यानचंद ने जर्मन टीम के साथ वो किया, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. ध्यानचंद ने टीम को निर्देश दिए कि अब कोई गोल न किया जाए बल्कि जर्मन खिलाड़ियों को ये बताया जाए कि हॉकी खेली कैसे जाती है. इसके बाद भारतीय टीम बार-बार गेंद को जर्मनी की डी में ले जाती और फिर गेंद को बैक पास कर देती. जर्मन टीम को समझ में ही नहीं आया कि उनके साथ हुआ क्या. जर्मन टीम के साथ इस तरह का खिलवाड़, वो भी ओलम्पिक फाइनल में सिर्फ मेजर ध्यानचंद ही कर सकते थे. इस मुकाबले में भारत ने जर्मनी को 8-1 से मात दी, जिनमे से तीन गोल ध्यानचंद ने किए थे. इस मुकाबले से जुड़ा एक और वाक्या है. कहा जाता है कि हिटलर ध्यानचंद से इतना प्रभावित हुए कि उनसे जर्मनी की ओर से खेलने को कहा. इसके बदले उन्हें जर्मन सेना में ऊँचे पद का प्रलोभन भी दिया गया. तब ध्यानचंद ने हिटलर से कहा, 'हिंदुस्तान ही मेरा वतन है.' तोड़ कर देखी गई हॉकी स्टिक मेजर ध्यानचंद के लिए कहा जाता है कि जब वो खेलते थे, तो मानो गेंद स्टिक पर चिपक जाती थी. हॉलैंड में एक मैच के दौरान उनकी स्टिक तोड़कर देखी गई. दरअसल , लोगों को लगता था कि उनकी हॉकी स्टिक में चुंबक है . इसी तरह जापान में एक मैच के दौरान उनकी स्टिक में गोंद लगे होने की बात भी कही गई. पर ध्यानचंद तो जादूगर थे , हॉकी के ऐसे जादूगर जैसा न कभी कोई हुआ और न कोई होगा. राष्ट्रीय खेल दिवस के तौर पर मनाया जाता है 29 अगस्त वर्ष 1905 में 29 अगस्त के दिन हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था. इसीलिए 29 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है. इस अवसर पर हर वर्ष खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न, अर्जुन अवार्ड और द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाते हैं.
जिला दण्डाधिकारी सोलन के.सी.चमन ने जिला के नालागढ़ उपमण्डल में कोविड-19 के दृष्टिगत सूक्ष्म कन्टेनमेंट जोन घोषित करने के सम्बन्ध में आदेश जारी किए हैं। यह आदेश केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्रालय द्वारा जारी निर्देशों तथा उपमण्डलाधिकारी नालागढ़ की रिपोर्ट के अनुरूप लिए गए हैं। इन आदेशों के अनुसार नालागढ़ उपमण्डल की बद्दी तहसील के लेही गांव में कोविड-19 पाॅजिटिव रोगी के आवास तथा इस आवास तक जाने वाले सम्पर्क मार्ग को सूक्ष्म कन्टेनमेंट जोन घोषित किया गया है। सूक्ष्म कन्टेनमेंट जोन की सीमाओं को पूर्ण रूप से सील करने के आदेश दिए गए हैं। जिला दण्डाधिकारी ने आपराधिक दण्ड संहिता की धारा 144 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त सूक्ष्म कन्टेनमेंट जोन में लोगों तथा वाहनों (आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर) की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया है। आदेशों के अनुसार आवश्यक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रयुक्त अधिकारी एवं कर्मचारी उक्त क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित बनाएंगे। उक्त क्षेत्र में पेयजल तथा बिजली की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित बनाई जाएगी। खण्ड चिकित्सा अधिकारी नालागढ़ क्षेत्र में फ्लू जैसी बीमारी के लक्षणों वाले व्यक्तियों की घर-घर स्क्रीनिंग के लिए समुचित संख्या में टीमें तैनात करना सुनिश्चित करेंगे। इस दिशा में पूरी निगरानी रखी जाएगी। क्षेत्र में संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आए सभी व्यक्तियों की खोज कर उनकी जांच की जाएगी और उन्हें आईसोेलेट किया जाएगा। आदेशों के अनुसार पुलिस अधीक्षक बद्दी उक्त सूक्ष्म कन्टेनमेंट जोन में प्रवेश तथा निकासी प्रतिबन्धित करने के लिए समुचित संख्या में पुलिस बल की तैनाती करेंगे। उक्त क्षेत्र में वाहनों का आवागमन नियन्त्रित करने के लिए पुलिस नाके भी लगाएगी। कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को कन्टेनमेंट जोन में आने-जाने की अनुमति नहीं होगी।आदेशों के अनुसार उपमण्डलाधिकारी नालागढ़ उक्त कन्टेनमेंट जोन के लिए समग्र प्रभारी होंगे। तहसीलदार बद्दी उनके सहायक होंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं तथा उक्त क्षेत्र की सैम्पलिंग एवं सभी सैम्पल की परीक्षण रिपोर्ट नेगेटिव आने तक लागू रहेंगे।
जल शक्ति विभाग के मंडल बिलासपुर के तहत आने वाली पेयजल योजना सोलग- जुरासी योजना में आउट सोर्स पर रखे कर्मियों को सबन्धित ठेकेदार ने पिछले छह महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया है। इस कारण इन कर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल में अपनी ड्यूटी निभाने वाले इन कर्मियों को अपने परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो रहा है। इन कर्मियों ने अपनी व्यथा इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष भगत सिंह वर्मा से बताई। उन्होंने कार्यरत कर्मियों के साथ बैठक कर वेतन का भुगतान, ईपीएफ का पैसा और उसकी डिटेल को सार्वजनिक करने के मामले को विभाग के अधिशासी अभियंता व अधीक्षण अभियंता से उठाने की बात कही। उन्होंने ने कहा कि अगर जलशक्ति विभाग ने पीएफ के मामले में कोई कदम नहीं उठाया तो इस मामले को ईपीएफ प्रदेश कमिश्नर के समक्ष उठाया जायेगा। इस बारे में जलशक्ति विभाग मण्डल बिलासपुर के अधिशाषी अभियंता अरविद वर्मा ने कहा कि कर्मियों की वेतन व ईपीएफ सबन्धित अगर कोई समस्या है तो उसे लिखित रूप में मण्डल में देना होगा इस पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी।
भारतीय नमो संघ ने हिमाचल में तिरंगे मास्क को बैन करने की मांग की है। इस बारे में भारतीय नमो संघ की प्रदेश संगठन मंत्री रीना राणा ने तिरंगे मास्क को बैन करने की मांग करते हुए कहा कि कोरोना काल में कुछ लोग तिरंगे मास्क पहन कर घूम रहे है। इससे सभी भारतीयों के सम्मान को ठेस पहुँच रही है। रीना राणा ने बताया कि माननीय न्यायालय झारखंड ने इस संदर्भ में आदेश जारी करते हुए तिरंगे से बने मास्क को बैन किया है व यदि कोई झारखंड राज्य में तिरंगे मास्क को पहनता है या बेचता है तो इसे तिरंगे का अपमान माना जाएगा और उस व्यक्ति के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। रीना राणा ने कहा कि झारखंड राज्य की तर्ज पर पुरे देश में यह कानून जारी होना चाहिए ताकि तिरंगे का अपमान न हो। उन्होंने भारतीय नमो संघ की तरफ से प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह झारखंड राज्य की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी इस तरह के आदेश जारी करे। उन्होंने बताया कि भारतीय नमो संघ भी इस पर नजर रखेगा अगर ऐसा कोई व्यक्ति उन्हें मिलता है तो वह अपनी तरफ से इसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाएंगे।
विवेक चन्देल का कार्य के प्रति समर्पण सभी अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक- के.सी. चमन उपायुक्त सोलन तथा अन्य अधिकारियों ने आज यहां अतिरिक्त उपायुक्त विवेक चन्देल के स्थानांतरण पर उन्हें विदाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। वर्ष 2004 बैच के प्रदेश प्रशासनिक सेवा के अधिकारी विवेक चन्देल को निदेशक तकनीकी शिक्षा के पद पर तैनाती दी गई है। विवेक चन्देल ने अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी सोलन के रूप में 03 जनवरी, 2018 को कार्यभार सम्भाला था। वे इससे पूर्व प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सेवारत रहे हैं। उपायुक्त के.सी. चमन ने इस अवसर पर कहा कि सोलन में विशेष रूप से कोविड-19 के समय में समाज के गरीब एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए विवेक चन्देल द्वारा कर्मठता के साथ किए गए कार्य को सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि विवेक चन्देल का कार्य के प्रति समपर्ण सभी अधिकारियों के लिए प्रेेरणादायक रहेगा। भारतीय प्रशासनिक सेवा की परिवीक्षाधीन अधिकारी रितिका, पुलिस अधीक्षक सोलन अभिषेक यादव, उपमण्डलाधिकारी कण्डाघाट डाॅ. संजीव धीमान, सहायक आयुक्त सोलन भानु गुप्ता, सहायक आयुक्त परवाणु डाॅ. विक्रम नेगी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सुरेश सिंघा, जिला राजस्व अधिकारी केशव राम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
सनातन धर्म सभा रबौण के संरक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता और ज्योतिष शास्त्र विशेषज्ञ स्वाधीन चन्द्र गौड के अभिनँदन ग्रँथ का विमोचन मंगलवार को डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति डा. परविंदर कौशल द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। इस कार्यक्रम में स्वाधीन चंद्र गौड़, सनातन धर्म सभा रबौण के अध्यक्ष डा. शँकर वशिष्ठ और उपाध्यक्ष डा. प्रेमलाल गौतम, केसी बारिया, पूजा ढिल्लों, मंजुला गौड़, जीएस नेगी, सुरेश शर्मा, प्रवीण ठाकुर एवं आकर्षित उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ कौशल ने स्वाधीन चंद्र गौड़ को उनके सहयोगियों को बधाई दी। सनातन धर्म सभा द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी उन्होनें प्रशंसा की। उन्होनें कहा कि साहित्य समाज में नई प्रेरणा लाता है और इस तरह की साहित्यक रचनाएँ सभी के ज्ञान में वृद्धि करती हैं। स्वाधीन चन्द्र गौड ने पुस्तक के विमोचन पर विश्वविद्यालय एवं कुलपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने डा. शँकर वशिष्ठ और डा. प्रेमलाल गौतम का सम्पादन सहयोग के लिए भी हार्दिक आभार जताया। उन्होंने कहा कि अभिनँदन ग्रँथ छपना एक सपना जिसे उनके सहयोगियों ने साकार कर दिया।
हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड लिमिटिड सोलन द्वारा उन उपभोक्ताओं के विद्युत कुनैक्शन काट दिए जाएंगे, जिन्होंने जुलाई, 2020 में अपने बिजली के बिल जमा नहीं करवाए हैं। यह जानकारी आज यहां प्रदेश विद्युत बोर्ड निगम लिमिटिड के सहायक अभियंता विदुर ने दी। उन्होंने कहा कि काटे जाने वाले कुनैक्शन की कुल संख्या 183 है। उपभोक्ताओं द्वारा जमा न करवाई गई कुल राशि 22,21,888 रुपये है। इनमें 86 घरेलू उपभोक्ता हैं। इनकी कुल राशि 09,19,032 रुपये है। कुल उपभोक्ताओं में से 90 व्यवसायिक उपभोक्ता हैं। इनकी कुल राशि 11,99,920 रुपये है। अन्य 07 उपभोक्ताओं की राशि 1,02,936 रुपये है। उन्होंने कहा कि विद्युत बिल के संशय के सम्बन्ध में उपभोक्ता दूरभाष नम्बर 01792-223611 पर सम्पर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अपने बिल पेटीएम, गुगल पे, अमेजाॅन, भीम ऐप फोन पे अथवा वैबसाईट www.hpsebl.in के माध्यम से भी जमा करवा सकते हैं।
इस समय देश और प्रदेश में तानाशाही और हिटलरशाही चल रही है जिसका उदाहरण पिछले दिन उस समय मिला जब 15 अगस्त को आजादी के 74वें स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर प्रजातन्त्र का चौथा स्तम्भ माने जाने वाले पत्रकारों को आमंत्रित करके समारोह स्थल पर बैठने तक का प्रबंध न करके सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित किया गया । यह शब्द आज यहाँ पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व विधायक बंबर ठाकुर ने कहे। उन्होंने कहा कि मुख्यातिथि के रूप में पधारे मंत्री के सामने पत्रकारों को समारोह स्थल पर बैठने का प्रबंध न किए जाने के कारण उन्हें सभी उपस्थित लोगों के सामने भूमि पर बैठना पड़ा जो शर्मनाक और निंदनीय है । बंबर ठाकुर ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि मंत्री के सामने पत्रकारों को अपमानित किया गया और उन्होने इस गंभीर लापरवाही और तानाशाही पूर्ण कृत्य के लिए जिला प्रशासन को पूछा तक नहीं। उन्होंने कहा कि पत्रकार ही हैं जो सरकार और सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यकलापों को जन-जन तक पहुंचाते हैं और निर्धनों और अतिनिर्धनों सहित समाज के हर वर्ग से होने वाले अन्यायों के विरुद्ध जोरदार आवाज उठा कर उन्हें न्याय दिलाने में विशेष भूमिका निभाते हैं। बंबर ठाकुर ने कहा कि पत्रकारों ने निर्भीकता व निष्पक्षता से कोरोना काल में प्रदेश में हुए सेनेटाईजर और पी पी ई किट घोटाले सहित कितने ही घोटालों को उजागर किया है। अब यदि पत्रकारों द्वारा सरकार और प्रशासन की पोल जनता के सामने खुलने से वे आहत होकर उनसे इस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, तो उसे किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जा सकता है। बंबर ठाकुर ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन पत्रकारों से अपनी खुन्नस निकालने के लिए उनसे ऐसा व्यवहार कर रहा है, अन्यथा कोई कारण नहीं है कि हर बार की तरह इस समारोह में भी उनके बैठने का प्रबंध न किया होता। उन्होंने कहा कि वास्तव में पत्रकारों को डराने-धमकाने के उदेश्य से जानबूझ कर ऐसा किया गया लगता है ,ताकि भविष्य में वे सरकार और जिला प्रशासन के गलत कृत्यों के विरुद्ध अपनी कलम को न चला पाएँ। उन्होंने कहा कि इस समारोह में विरोध पक्ष के नेताओं तक को आमंत्रित नहीं किया गया था। जबकि पूर्व विधायक होने के नाते उन्हें भी इस समारोह से दूर रखने के प्रयासों में आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्होंने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है और कहा है कि यदि उसने अपना रवैया न बदला और जिला में भ्रष्टाचारियों पर नुकेल नहीं कसी तो उसके गंभीर परिणाम होंगे, जिसका सारा उत्तरदाईत्व भी उन्हीं पर होगा।
कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश में सेब के जनक कांग्रेस नेता स्व.सत्यानंद स्टॉक्स की जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा है कि प्रदेश उनके योगदान को कभी नही भुला सकता। उन्होंने कहा कि हिमाचल, जो आज पूरे देश ही नही विश्व मे सेब राज्य के रूप में जाना जाता है, यह सब सत्यानंद स्टॉक्स की ही देन है। उन्होंने कहा कि अगर सत्यानांद स्टॉक्स हिमाचल न आते तो शायद ही प्रदेश सेब राज्य बन पाता। राठौर ने सत्यानांद स्टॉक्स को याद करते हुए कहा की एक सुविधा सम्पन्न घर से ताल्लुक़ रखने वाला व्यक्ति जो अमेरिका से भारत घूमने के लिए आता है उसे हिमाचल प्रदेश ने इतना आकर्षित किया कि वह हिमाचल का बेटा बन गया। प्रदेश में गरीबों व बीमार लोगों का मसीहा बन गया। राठौर ने कहा कि सत्यानांद स्टॉक्स जो अमेरिका से भारत आते है उन्हें देश ने इतना आकर्षित किया कि वह देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करवाने के लिए महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता संग्राम में बढ़चढ़ कर भाग लेने लगे। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों को अपनाते हुए देश की आजादी की लड़ाई लड़ी व हिमाचल को अपना घर बनाया। राठौर ने सत्यानांद स्टॉक्स की जयंती पर आज श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि प्रदेश उनका सदैव ऋणी रहेगा और उन्हें उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
नालागढ़ कॉलेज में बीए, बीएससी, बीकॉम 6 सेमेस्टर की होने वाली परीक्षाओं के लिए कॉलेज प्रशासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है इस दौरान एग्जामिनेशन सेंटर के साथ-साथ कमरों में सनितिज़ेशन किया जा रहा है जहां पर बच्चे बैठ कर अपना पेपर देंगे । कॉलेज की प्रधानाचार्य सुनीता सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते सभी कमरों और एग्जामिनेशन हाल को सन्नीटाईज़ किया जा रहा है नालागढ़ कॉलेज के दोनों हॉस्टल प्रशासन की ओर से आइसोलेशन सेंटर बनाए गए थे जिन्हें 10 अगस्त को प्रशासन ने खाली कर दिया उसके बाद से कॉलेज प्रबंधन उसमें सैनिटाइज कर रहा है जो बच्चे हॉस्टल में रहते हैं वह बिना डर से एग्जाम दे सकते हैं उनके लिए सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही है। प्रधानाचार्य ने कहा कि एग्जाम को लेकर सभी तरह की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं,गेट पर एंटर होते ही बच्चों की थर्मल स्कैनिंग की जाएगी उसके बाद एग्जामिनेशन सेंटर में जाने के लिए सभी तरह की गाइडलाइन गेट पर ही बच्चों को उपलब्ध करवाई जायेगी। इसके लिए कॉलेज प्रबंधन ने कमेटी का गठन कर दिया है। जो बच्चे अन्य राज्यों से आ रहे हैं वह अपना एडमिट कार्ड दिखाकर बैरियर से क्रॉस कर सकते है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेन्द्र गर्ग ने आज घुमारवीं विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत सलाओं में लगभग 92.41 लाख से निर्मित की जाने वाली उठाऊ पेयजल योजना सलाओं, माकड़ी व भदरेट का शिलान्यास लगभग 4 लाख 65 हजार रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक शैड का उद्घाटन, भपराल में लगभग 3 लाख रुपये की लागत से बनने वाले महिला मण्डल भवन का शिलान्यास तथा दधोल खुर्द में लगभग 3 लाख रुपये की लागत से बनने वाले सामुदायिक भवन का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने सम्बोधित करते हुए कहा कि घुमारवीं में शीघ्र ही मिनी सचिवालय का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि घुमारवीं अस्पताल में 50 बिस्तरों की संख्या को बढ़ाकर 100 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। उन्होंने कहा कि घुमारवीं में एचआरटीसी के सब स्टेशन के कार्य भी आरम्भ हो चुका है। उन्होंने कहा कि घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत 85 करोड़ रुपये स्वीकृति किए गए है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत घुमारवीं विधानसभा में जून, 2021 हर घर में नल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में सुचारू पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए प्राथमिकता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 92.41 लाख से निर्मित की जाने वाली उठाऊ पेयजल योजना सलाओं, माकड़ी व भदरेट के निर्मित होने से क्षेत्र के लगभग 1 हजार लोगों को समुचित मात्रा में शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस योजना से पूरी पंचायत कवर होगी। उन्होंने बताया कि यह योजना को दिसम्बर माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र में 11 योजनाओं का संवर्धन किया जा रहा है। जिनके लिए लगभग 85 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि लगभग 53 करोड़ रुपये कि पेयजल योजना कोल डैंम से घुमारवीं विधानसभा के लिए स्वीकृत हुई है। उन्होंने कहा कि लोगों को सुचारू रुप से पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए जहां-जहां पानी की कमी होगी उन्हें इस योजना के साथ जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा क्षेत्र में बिजली की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए जाहू में 33 के.बी. सब-स्टेशन स्वीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बम में एक सब-स्टेशन बनाया जाएगा और उसके उपरांत उसको भराड़ी के साथ जोड़ा जाएगा ताकि कम बोल्टेज की समस्या से निजात मिल सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए 8 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो चुके है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में 5 नए ट्रांसफार्मर भी लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को यातायात की सुविधा प्रदान करने हेतु ढल्याणी सड़क के लिए 1.5 लाख रुपये स्वीकृत किया है और उसका कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि लिंक रोड सलाओं से गांव कामली तक के लिए 2 लाख रुपये स्वीकृति किए गए थे और उस सड़क का कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि बाड़ा दा घाट से सलाओं 4 किलोमीटर की सड़क का कार्य शुरू हो चुका है जिसमें 3 किलोमीटर सड़क का कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य बरसात के उपरांत पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि द्रुग खडड के पुल के लिए 55 लाख रुपये स्वीकृत हो चुका और जिसके लिए टैंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कार्यों पर 17 लाख 65 हजार रुपये स्वीकृत किए गए है। इनमें से अधिकांश कार्य पूर्ण कर लिए गए है तथा शेष कार्य प्रगति पर है। उन्होंने सलाओं पंचायत के लिए सोलर लाईट देने की घोषणा की है। शमशानघाट के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत किए। इस अवसर पर उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और उनका समाधान किया। इस मौके पर पूर्व मण्डलाध्यक्ष नरेन्द्र ठाकुर, मण्डल महामंत्री राजेश ठाकुर, प्रधान ग्राम पंचायत भपराल अंजू राणा, एसडीएम शशिपाल शर्मा के अतिरिक्त अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
पुलिस थाना अर्की में कुते द्वारा एक व्यक्ति को काटने को लेकर मामला दर्ज हुआ है । मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता देवेंद्र कुमार सुपुत्र चिन्ताराम,गांव कोठी जमोगी डाकघर बथालंग ने अपनी शिकायत में कहा है कि पिछले कल उसके गांव के ही रहने वाले ताराचंद के पालतू कुते ने उसके बेटे को बुरी तरह काट दिया है । उन्होंने कहा कि यह कुता कई मर्तबा अन्य लोगों व बच्चों को काट चुका है, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है । शिकायतकर्ता ने पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की है। वहीं, डीएसपी दाड़लाघाट प्रताप सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि अंडर सेक्शन 289 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है व आगामी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है ।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को अपना ध्येय मानकर समाज में आत्मनिर्भरता की मशाल जलाकर जागरूक करने निकली बिलासपुर की बीस वर्षीय बेटी आंकाक्षा गौतम ने अपनी दूरदर्शी सोच से सबको प्रभावित किया है। अपने हुनर से कायल करने वाली आंकाक्षा ने ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, पशु पालन व मत्स्य मंत्री वीरेन्द्र कंवर को भी न सिर्फ प्रभावित किया बल्कि उन्हें इस बच्ची के द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर अमल करने के लिए बाध्य किया। बता दें कि उत्थान के लिए नई किरण लेकर उभरी गुरू अंगद देव वैटनरी एंड एनिमल साईंस यूनिवर्सिटी में बैचुलर आफ फिशरीज साइंसिज संकाय की द्वितीय वर्ष की छा़त्रा आकांक्षा गौतम मीडिया की सुर्खियों में रही तथा यह भी एक पिता के लिए गौरव का विषय है कि स्वतंत्रता दिवस पर बिलासपुर में ध्वजारोहण करने आए मंत्री विरेंद्र कंवर ने स्वयं फोन कर इस बेटी से मिलने की इच्छा जताई। आकांक्षा ने मंत्री को चैलेंजिज एंड अपाॅच्र्यूनिटिज इन फिशरीज फाॅर आत्मनिर्भर हिमाचल नाम की प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी सौंपी। आकांक्षा गौतम ने बताया कि वर्तमान में फिशरीज कल्चर को बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि खड्डों, नदी, नालों में हो रहे अवैध खनन और धड़ल्ले से विकास के नाम पर लग रहे हाइड्रो पावर प्रोजेक्टस से मत्स्य पर्यावरण को बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है, यदि इन पर अंकुश नहीं लगता है कि आने वाले समय में मछली से पेट पालने वाले परिवार सड़कों पर आ जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस जलाशय में सबसे बड़ी एक और समस्या सीडिंग की है, वेस्ट बंगाल से आने वाला बीज अधिकांश तौर पर रास्ते में दम तोड़ देता है, उपर से इस पर ट्रांस्पोटेशन का भारी भरकम खर्च होता है। जबकि जलाशय में बीज डालने के बाद इसकी सुध लेना और ग्रोथ देखना लाजिमी होता है। बिलासपुर के गोविंद सागर जलाशय में मछली की दस प्रजातियां पाई जाती है जिसमें केवल काॅमन व सिल्पर कार्प ही सरवाईव करती है। बीज उत्पादन के लिए हिमाचल में प्राइवेट हैचरीज नहीं है, जो सरकारी है उनकी देखभाल बहुत कम हैं। हर जिला में फिशरीज हैचरीज का बनना जरूरी है तथा विभिन्न किस्म की मछलियों का यहां पर बीज तैयार हो सके और लोगों को अतिरिक्त रोजगार प्राप्त हो सके। उन्होंने बताया कि पंजाब और हरियाणा में यह कल्चर शुरू हो चुका है। आकांक्षा ने बताया कि जागरूकता के अभाव में यह व्यवसाय दम तोड़ रहा है, यदि इस पर वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए तो हिमाचल में यह उत्पाद अन्य व्यवसायिक उत्पादों से छह गुणा लाभ देगा, जिसमें कृषि संबंधी सभी फसलें शामिल है। यह एक ऐसा व्ववसाय है जिसमें खर्चा बहुत कम है और इसके निम्न स्तर से शुरू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देष और प्रदेश की उन्नति के लिए कल्चर बेस्ड कैप्चर अभियान की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने मत्स्य मंत्री विरेंद्र कंवर से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश में फिशरीज कालेज यदि खुलता है तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वरोजगार के साथ मत्स्य शिक्षा से ही मिलेंगे। वहीं ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि, पशु पालन व मत्स्य मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने आकांक्षा गौतम की बातों को गौर से सुना तथा आश्वस्त किया कि वे कल्चर बेस्ड कैप्चर तथा मछुआरों के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों को विज्ञानिक तौर तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक के बारे में जागरूक करने के लिए सेमीनार का आयोजन किया जाएगा।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुर्वेद मन्त्री नेे कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार राज्य में चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में अग्रसर है और अब तक के कार्यकाल में 1400 चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। डाॅ. सैजल आज कसौली विधानसभा क्षेत्र के कसौली में पौधरोपण करने तथा जोहड़जी में वन विश्राम गृह का शिलान्यास करने के उपरान्त स्थानीय लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने ग्राम पंचायत काबा कलां के जोहड़जी में 75 लाख रुपए की लागत से निर्मित होने वाले वन विश्राम गृह की अधारशिला रखी तथा महत्वाकांक्षी ‘एक बूटा बेटी के नाम’ योजना के तहत कन्या शिशुओं एवं उनके अभिभावकों को पौधा एवं किट वितरित की। डाॅ. सैजल ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों को उनके घर-द्वार तक बेहतर स्वासथ्य सेवाएं प्रदान करना प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि केन्द्र तथा प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाएं इस दिशा में अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर ‘हिमकेयर’ योजना कार्यन्वित की जा रही है। इस योजना के तहत पंजीकृत परिवार के पांच सदस्य 05 लाख रुपये तक प्रतिवर्ष निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। योजना में अब तक 5.50 लाख परिवार पंजीकृत हो चुके हैं तथा एक लाख से भी अधिक रोगी योजना के तहत अपना उपचार करवा चुके हैं। योजना के अन्तर्गत 92 करोड़ रुपये से भी अधिक व्यय कर लक्षित वर्गों को लाभान्वित किया गया है। आयुर्वेद मन्त्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में हिमाचल के विकास को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है और प्रदेश को इस अवधि में सुशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि-बागवानी सहित सतत् विकास लक्ष्यों में बेहतर प्रदर्शन के लिए अनेक राष्ट्र-स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। डाॅ. सैजल ने कहा कि जोहड़जी धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जोहड़जी सहित ग्राम पंचायत प्राथा, भोजनगर, नारायणी इत्यादि क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से उभारने के लिए योजनाबद्ध कार्य किया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मन्त्री ने कहा कि कसौली छावनी क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के शीघ्र निपटारे के लिए प्रदेश के मुख्यमन्त्री के माध्यम से केन्द्र सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया गया है। उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही इस दिशा में केन्द्रीय रक्षा मन्त्री राजनाथ सिंह से मिलकर इन समस्याओं के शीघ्र निपटारे की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए सार्वजनिक स्थानों पर सोशल डिस्टेन्सिग, मास्क का प्रयोग तथा बार-बार अपने हाथ साबुन से धोना अथवा एल्कोहल युक्त सैनिटाईजर से साफ करना आवश्यक है। उन्होंने सभी से इन नियमों का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को शीघ्र सुलझाया जाएगा। इस अवसर पर जोहड़जी में ‘एक बूटा बेटी के नाम’ योजना के तहत पारूल, दिव्यांशी तथा अम्बिका के अभिभावकों ने क्रमशः दाड़ु, बेहड़ा तथा हरड़ के पौधे रोपे। डाॅ. सैजल ने कसौली में तुन्नी का पौधा रोपा। इस अवसर पर जगरेण्डा, रीठा, तुन्नी इत्यादि के 150 से अधिक पौधे रोपे गए। लोगों ने इस अवसर पर कसौली छावनी बोर्ड की समस्याओं को सुलझाने तथा कसौली-कालका सड़क को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने की मांग की। वन मण्डल अधिकारी सोलन डाॅ. नीरज चड्डा ने कहा कि ‘एक बूटा बेटी के नाम’ योजना के तहत जिला में 339 बेटियों को घर-द्वार पर बूटे उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस अवसर पर एपीएमसी सोलन के अध्यक्ष संजीव कश्यप, भाजपा मण्डल कसौली के अध्यक्ष कपूर सिंह वर्मा, जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड के सदस्य राजकुमार सिंगला, जोगेन्द्र्रा बैंक के पूर्व अध्यक्ष लाज किशाोर, कसौली छावनी बोर्ड के सदस्य देवेन्द्र गुप्ता, पूर्व सदस्य सुदेश बंसल, ग्राम पंचायत नारी के उप प्रधान हिमांशु गुप्ता, भाजपा मण्डल कसौली अनुसूचित जाति मोर्चा के सचिव अमित सहोटा, सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के अजमेर सिंह, भाजपा तथा भाजयुमो के अन्य पदाधिकारी अरण्यपाल अशोक चैहान, वन मण्डल अधिकारी डाॅ. नीरज चड्डा, सहायक अरण्यपाल पवन अचल, वन खण्ड अधिकारी संदीपना गुप्ता एवं प्रदीप कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
विकासखंड प्रागपुर की कौलापुर पंचायत के गांव जटोली चाकरां में पिछले 8 सालों से चल रहे पशु औषधालय को सरकार द्वारा बंद कर देने पर लोगों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने बंद किए कार्यालय पर अपना ताला जड़कर सरकार को चेतावनी दी है कि वह पशु औषधालय का सामान न निकाले अन्यथा वह किसी भी हद तक जाने को मजबूर होंगे। इस दौरान लोगों ने सरकार एवं स्थानीय विधायक एवं मंत्री विक्रम ठाकुर पर जमकर भड़ास निकाली उनके विरोध में नारे भी लगाए जबकि कुछ पंचायत प्रतिनिधियों ने भी बढ़ चढ़कर ग्रामीणों का सहयोग किया ।
जिला सोलन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का एक प्रतिनिधि मंडल जिला अध्यक्ष जेके ठाकुर की अगुवाई में प्रदेश के नव नियुक्त स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व आयुर्वेद मंत्री डॉ राजीव सहज़ल से मिला। जिला अध्यक्ष जे के ठाकुर ने मंत्री को कर्मचारियो की मांगों व समस्या बारे अवगत करवाया। मंत्री ने संघ के प्रतिनिधि मंडल कि मांगो को गंभीरता से सुना व जल्द समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला स्तरीय प्रतिनिधि मंडल के सभी सदस्य इस दौरान मौजूद रहे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर लायंस क्लब परवाणू ने कई स्थलों पर अटल त्रिवेणी लगाई । इन पौधों की पूरी देखभाल की जाएगी। व समय-समय पर इन्हें खाद पानी दिया जाएगा। जिस प्रकार अटल जी ने सारा जीवन देश हित के लिए कार्य किया उसी प्रकार यह त्रिवेणी धर्म ही नहीं बल्क़ि स्वस्थ जीवन की भी प्रतीक हैं । यह सदैव ऑक्सीजन देकर मानव जीवन की सुरक्षा करेंगे।
डॉ वाईएस परमार औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय में 74वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति डा॰ परविंदर कौशल द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में तिरंगा फहराया गया । इस वर्ष सरकारी दिशा निर्देशों का पालन करते हुए इस कार्यक्रम में सीमित संख्या में ही लोग शामिल हुए। विश्वविद्यालय के वैधानिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष, एनसीसी ऑफिसर और नौणी पंचायत के प्रधान ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में सामाजिक दूरी का पूरा पालन किया गया और यह सुनिश्चित किया गया की सभी ने मास्क पहना हो। इस अवसर पर एक विडियो संदेश के माध्यम से कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने छात्रों और संकाय को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दी। उन्होनें देश के स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जिनके संघर्ष और निस्वार्थ बलिदान से देश को आज़ादी मिली। डॉ कौशल ने अपने संदेश में विद्यार्थियों और कर्मचारियों से राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कर्तव्यदायी और जिम्मेदार नागरिक बनने का आग्रह किया और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के आदर्शों को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ और महत्व को समझना चाहिए जो हमारे पूर्वजों के वर्षों के बलिदान के कारण हमें हासिल हुई है। इस अवसर पर उन्होनें कोरोना महामारी में दिन रात काम कर इस वैश्विक महामारी से लड़ रहे कोरोना वॉरियर्स को सलाम किया और सभी से इनका सहयोग करने और इस कठिन दौर में सरकार और स्वास्थ्य संगठनों द्वारा समय समय पर जारी किए जा रहे दिशा निर्देशों का सख़्ती से पालन करने की अपील की ताकि मिलकर हम इस बीमारी पर जीत हासिल कर सके।
वो दौर था 1857 का, पूरे देश में क्रांति की ज्वाला भड़क रही थी। ऐसे में पहाड़ों की शांत वादियों में लगी चिंगारी भी कम नहीं थी। धीमें से सुलग रही इस क्रांति की चिंगारी ने जब विकराल रूप लिया तब लगभग पूरा हिमाचल इसकी जद में आ गया। 20 अप्रैल 1857, वो दिन जब पहली बार हिमाचल प्रदेश में अंग्रेज़ों के खिलाफ धधक रही ज्वाला ने विकराल रूप धारण किया। क्रांति का आगाज़ हुआ कसौली से। अंबाला राइफल डिपो के छह भारतीय सैनिकों ने कसौली थाने को आग के हवाले कर दिया। अंग्रेजों के सुरक्षित गढ़ कही जाने वाली कसौली छावनी पर हुए इस हमले से गोरे बौखला उठे और उन्होंने अन्य छावनी क्षेत्रों व कंपनी सरकार के कार्यालयों की सुरक्षा कड़ी कर दी। गोरों ने कई क्रांतिकारियों को जेलों में डाल दिया और कईयों को सूली पर चढ़ा दिया, पर सैनिकों का बलिदान ज़ाया नहीं गया। कसौली से भड़की इस ज्वाला ने पूरे हिमाचल में आज़ादी की अलख जगा दी। इसके बाद डगशाई छावनी, सुबाथू, कालका व जतोग में क्रांति की लहर दौड़ी। उधर कांगड़ा, नूरपुर, धर्मशाला, कुल्लू-लाहुल, सिरमौर व अन्य रियासतों में भी विद्रोह प्रखर हो गया। बुशहर के राजा शमशेर सिंह, कुल्लू-सिराज के युवराज प्रताप सिंह, सुजानपुर के राजा प्रताप चंद गुप्त रूप से क्रांतिकारियों की गतिविधियों में संलिप्त हो गए। 11 मई को अंग्रेजों को मेरठ, दिल्ली और अम्बाला में विद्रोह की सुचना मिली। गोरों ने कसौली, सुबाथू, डगशाई व जतोग की छावनियों को अंबाला कूच का आदेश दिया। भारतीय सैनिकों ने इस आदेश का खुले तौर पर विद्रोह किया और बगावत का ऐलान कर दिया। 13 मई को जतोग में गोरखा रेजिमेंट ने सूबेदार भीम सिंह के नेतृत्व में देशी सैनिकों ने अंग्रेजों पर धावा बोल दिया। सिर्फ 45 क्रांतिकारियों ने 200 अंग्रेजों को धूल चटा दी। सैनिकों ने कसौली ट्रेजरी को लूटा और जतोग की तरफ बढ़ने लगे। इस बारे में अंग्रेज़ों के तत्कालीन कमिश्नर पी. मैक्सवैल ने अपनी डायरी में जिक्र किया है और हैरानी जताई है कि कैसे मुट्ठीभर क्रांतिकारियों ने अपने से चार गुना अधिक अंग्रेजी सेना को हरा दिया था। इसके बाद विद्रोह की डोर स्थानीय पुलिस ने अपने हाथों में ली। स्थानीय पुलिस गार्ड के दरोगा बुद्धि सिंह जतोग पर कब्जे के लिए रवाना हो गए। जतोग पहुँचते पहुँचते रास्ते में अंग्रेजी सेना ने कुछ क्रांतिवीरों को पकड़ लिया तो कुछ मारे गए। जबकि बुद्धि सिंह ने गोरों के हाथों मरने से भला स्वयं को गोली मरना समझा और वो शहीद हो गए। पहाड़ी रियासतों में क्रांति योजनाबद्ध तरीके से हो रही थी, जिसके लिए एक गुप्त संगठन बना हुआ था, जिसके सदस्य सूचनाओं को यहां-वहां पहुंचाया करते थे। पहाड़ों में इस क्रांति के नेता पंडित राम प्रसाद वैरागी थे। वैरागी सुबाथू मंदिर में पुजारी थे। वे संगठन पत्रों के माध्यम से संदेश भेजा करते थे। 12 जून 1857 को इस संगठन का कुछ पत्र अंबाला के कमिश्नर जीसी बार्नस के हाथ लगे, जिसमें दो पत्र राम प्रसाद वैरागी के भी थे। इसके साथ ही संगठन का भेद खुल गया। वैरागी को पकड़ कर अंबाला जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया। क्रांतिकारियों को सहयोग न मिला व अंग्रेज़ों ने 1857 के विद्रोह को दो महीनो में ही दबा दिया और प्रदेश में लगी विद्रोह की ज्वाला कुचल दी गई।
बजरंग दल चंडीगढ़ की तरफ से शुक्रवार को बिहिप कार्यालय शिव मानस मंदिर इंडस्ट्रियल एरिया फेस 2 में अखंड भारत दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें विश्व हिंदू परिषद के चंडीगढ़ अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि अखण्ड भारत महज सपना नहीं, श्रद्धा है, निष्ठा है। जिन आंखों ने भारत को भूमि से अधिक माता के रूप में देखा हो, जो स्वयं को इसका पुत्र मानता हो, जो प्रात: उठकर “समुद्रवसने देवी पर्वतस्तन मंडले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यम् पादस्पर्शं क्षमस्वमे" कहकर उसकी रज को माथे से लगाता हो, वन्देमातरम् जिनका राष्ट्रघोष और राष्ट्रगीत हो, ऐसे असंख्य अंत करण मातृभूमि के विभाजन की वेदना को कैसे भूल सकते हैं, अखण्ड भारत के संकल्प को कैसे त्याग सकते हैं? किन्तु लक्ष्य के शिखर पर पहुंचने के लिए यथार्थ की कंकरीली-पथरीली, कहीं कांटे तो कहीं दलदल, कहीं गहरी खाई तो कहीं रपटीली चढ़ाई से होकर गुजरना ही होगा। उन्होंने कहा कि आज के दिन हम संकल्प लेते हैं कि हम भारत को पुनः अखंड बनाएंगे व भारत माता का खोया हुआ वैभव पुनः लौटाएंगे। इस मौके पर विशेष रूप से चंडीगढ़ बजरंग दल संयोजक नरेंद्र बंसल, विजय, अरविंद मौर्य, जीत कालरा, प्रेम डोगरा, विकाश, रोशन, प्रदीप बनिपाल, बबलू, पंकज और मातृशक्ति-दुर्गा वाहिनी से रेनू रोहिला, हरसिमरन, सिमरन एवं बिहिप से सुरेश राणा, दविंदर सिधु, राकेश चौधरी, अनुज सहगल, मनोज शर्मा, अंकुश गुप्ता, जतिंदर रावत, मनीष बक्शी, सतिंदर, तजिंदर सिंह, सुरेश, एवं अनेकों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जब जब स्वतंत्रता संग्राम की बात की जाती है तो पहाड़ के जांबाज़ों का ज़िक्र न हो ऐसा हो नहीं सकता। स्वतंत्रता संग्राम में हिमाचल प्रदेश के सपूतों ने महात्मा गांधी के साथ कदम से कदम मिलाकर जो योगदान दिए वो किसी से कम नहीं। देवभूमि के वीर सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जो आंदोलन का बिगुल बजाया तो उसकी गूंज पूरे भारत वर्ष को सुनाई दी। चाहे 1857 की महाक्रांति हो या 15 अगस्त 1947 तक का आंदोलन हो, छोटे से पहाड़ी प्रदेश हिमाचल ने भी इनमें अहम भूमिका निभाई। आजादी की लड़ाई के लिए हिमाचल में गुरिल्ला बम बने। सशस्त्र क्रांतियां हुईं। हजारों क्रांतिकारियों ने पूरे दमखम से स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी। तो आज स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर हम उन्हीं कुछ स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे। पंडित राम प्रसाद वैरागी उस समय पूरे देश में क्रांति के संचालन के लिए एक गुप्त संगठन बनाया गया था। पहाड़ों में इस क्रांति के नेता पंडित राम प्रसाद वैरागी थे। वैरागी सुबाथू मंदिर में पुजारी थे। वे संगठन को पत्रों के माध्यम से संदेश भेजा करते थे। 12 जून 1857 को इस संगठन के कुछ पत्र अंबाला के कमिश्नर जीसी बार्नस के हाथ लगे, जिसमें दो पत्र राम प्रसाद वैरागी के भी थे। इसके साथ ही संगठन का भेद खुल गया। वैरागी को पकड़ कर अंबाला जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया। क्रांतिकारियों को सहयोग नहीं मिला और अंग्रेज़ों ने 1857 के विद्रोह को दो महीनो में ही दबा दिया और प्रदेश में सुलगी विद्रोह की ज्वाला कुछ समय के लिए शांत हो गई। 'हिमाचल निर्माता' डॉ॰ यशवंत सिंह परमार डॉ॰ यशवंत सिंह परमार, हिमाचल निर्माता के नाम से भी जाने जाते हैं। हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डाॅ. परमार ने हिमाचल में विकास की नींव रखी थी। सिरमौर में जन्मे परमार सिरमौर की रियासत में 11 साल तक सब जज और मजिस्ट्रेट रहे। उसके बाद न्यायाधीश के रूप में 1937-41 तक अपनी सेवाएं दीं। इसी दौरान वह सुकेत सत्याग्रह प्रजामंडल से जुड़े। नौकरी की परवाह न करते हुए उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में अपना पूरा योगदान दिया। उनके ही प्रयासों से यह सत्याग्रह सफल हुआ। 'पहाड़ी गांधी' बाबा कांशी राम पहाड़ी गांधी कहे जाने वाले बाबा कांशीराम ने आज़ादी की लड़ाई में बेहद अहम भूमिका निभाई। उन्होंने जब तक भारत को आजादी नहीं मिल जाती तब तक काले कपड़े पहनने की शपथ ली थी। बाबा कांशी राम ने अपने पहाड़ी गीतों और कविताओं से पहाड़ी राज्य हिमाचल और देश को आजादी के लिए जगाने में सराहनीय प्रयास किए। उन्होंने गांव-गांव घूमकर अपने लिखे लोकगीतों, कविताओं और कहानियों से अलख जगाई। कांशी ने पहली बार पहाड़ी बोली को लिखा और गा-गाकर लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। सरोजनी नायडू ने उन्हें बुलबुल-ए-पहाड़ के खिताब से नवाजा। 1930 और 1942 के बीच वो 11 बार जेल गए और अपने जीवन के 9 साल सलाखों के पीछे काटे। जेल के दिनों में लिखी हर रचना उस वक्त लोगों में जोश भरने वाली थी। ‘समाज नी रोया’, ‘निक्के निक्के माहणुआं जो दुख बड़ा भारा’, ‘उजड़ी कांगड़े देश जाना’ और ‘कांशी रा सनेहा’ जैसी कई कविताएं मानवीय संवेदनाओं और संदेशों से भरी थीं। दौलतराम सांख्यान आजादी की लड़ाई में बिलासपुर के महान स्वतंत्रता सेनानी दौलतराम सांख्यान के संघर्ष को आखिर कौन भुला सकता है। बिलासपुर में प्रजामंडल का गठन कर दौलतराम सांख्यान ने ब्रिटिश सरकार को सीधी चुनौती देकर कई मुश्किलें खड़ी कर दीं थी। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें इस मुहिम के लिए कई यातनाएं दीं। अंग्रेजी सरकार ने उनकी चल-अचल संपत्ति तक जब्त कर ली थी। इतना ही नहीं 11 जून 1946 से 12 अक्तूबर 1948 तक रियासत से निष्कासित कर दिया गया। इसके बावजूद स्वतंत्रता संग्राम के इस सेनानी ने हार नहीं मानी और डट कर अंग्रेजों का सामना किया। कैप्टन राम सिंह ठकुरी वहीं आजाद हिंद फौज के सिपाही और संगीतकार कैप्टन राम सिंह ठकुरी ने भारत के राष्ट्र गान जन गन मन की धुन तैयार की है। उन्होंने अपनी वीरता के लिए किंग जार्ज-पंचम मेडल प्राप्त किया। जब सुभाष चंद्र बोस ने उनसे मुलाकात की तो उन्हें वोइलिन भेंट की, जिसे वह हमेशा अपने पास रखते थे। उन्होंने 'कदम-कदम बढ़ाए जा-खुशी के गीत गाए जा' जैसे सैकड़ों ओजस्वी गीतों की धुनों की रचना की। 15 अगस्त 1947 को राम सिंह के नेतृत्व में आईएनए के आर्केस्ट्रा ने लाल किले पर शुभ-सुख चैन की बरखा बरसे गीत की धुन बजाई। कौमी तराना नाम से यह गीत आजाद हिंद फौज का राष्ट्रीय गीत बना, इस गीत की ही धुन को बाद में जन-गण-मन की धुन के रूप में प्रयोग किया गया। पदम् देव पदमदेव जिला शिमला के गांव भनोल से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने 1930 में असहयोग आंदोलन और सिविल अवज्ञा में(सिविल डिसओबेडिएंस) में भाग लिया। वह हिमालय रियासती प्रजा मंडल के संस्थापक सदस्य थे और गरीबी व अस्पृश्यता(अनटचेबिलिटी) के खिलाफ लड़े थे। 1952 में वह विधानसभा के लिए चुने गए और राज्य के पहले गृह मंत्री बने। 1957 में वह लोकसभा, 1962 में क्षेत्रीय परिषद और फिर 1967 में विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। वह कविराज के नाम से मशहूर थे। यश पाल उस समय यश पाल कॉलेज में ही थे जब उनकी मुलाकात भगत सिंह और सुखदेव से हुई। उन्होंने चरमपंथी समूह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी (एचएसआरए) को ज्वाइन किया। एचएसआरए ने 1929 में लॉर्ड इरविन को ले जाने वाली ट्रेन को उड़ाने की योजना बनाई थी। यशपाल ने उस में बम से विस्फोट किया था। कई नेताओं की गिरफ्तारी के बाद यशपाल ने चंद्रशेखर आजाद को एचएसआरए को फिर से संगठित करने में मदद की। 1932 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और वह 6 साल तक जेल में रहे। वह एक प्रतिभाशाली लेखक थे और प्रसिद्ध किताब ‘सिम्बालोकन’ सहित कई पुस्तकें लिखी थीं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। शिवानंद रामौल, पूर्णानंद, सत्य देव, सदा राम चंदेल, सत्यानंद स्टोक्स, ठाकुर हजक सिंह इत्यादि ऐसे अन्य प्रमुख स्वतंत्रता सैनानी रहे हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान दिया था। आज भले ही यह हस्तियां हमारे बीच नहीं हैं पर उनके दिए गए बलिदान को कृतज्ञ राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता।
31 अक्टूबर 1984 । ये वो दिन है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री और हिंदुस्तान की राजनीति की आयरन लेडी इंदिरा गाँधी की उन्ही के अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई। इंदिरा की हत्या से पुरे देश में मातम का माहौल था। दुःख और अवसाद के बीच कांग्रेस थिंक टैंक के सामने देश को अगला प्रधानमंत्री देने की चुनौती भी थी। चुनौती इसलिए भी विकट थी क्यों कि कुछ समय पहले ही संजय गाँधी भी दुनिया से रुक्सत कर चुके थे। कई नाम रेस में थे और कई नेता इस उम्मीद में थे कि वरिष्ठता और परफॉरमेंस के आधार पर उन्हें पार्टी देश का नेतृत्व करने का ज़िम्मा देगी। पर जैसा कांग्रेस में रिवाज़ है, पीएम की कुर्सी पर ताजपोशी हुई राजीव गाँधी की। कई नेताओं ने इसका आंतरिक विरोध किया और कई बगावत पर उतर आए। इन्ही बगावत करने वालों में से एक थे प्रणब मुखर्जी। वही प्रणब मुखर्जी जो इंदिरा गाँधी की सरकार में वित्त मंत्री थे। वही प्रणब मुखर्जी गांधी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट कहा जाता था। वही प्रणब मुखर्जी जिनके लिए इंदिरा गाँधी कहती थी 'प्रणब मुखर्जी के मुँह से सिर्फ पाइप का धुआं निकल सकता है, मेरा या कांग्रेस का राज़ नहीं।' मुखर्जी को राजनीति में टिकट तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था, पर उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे राजीव गाँधी ने प्रणब के पॉलिटिकल ग्राफ पर ब्रेक लगा दी। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव के बाद राजीव गांधी की समर्थक मण्डली ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने दिया। कुछ समय के लिए उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया। प्रणब को उस समय समझ नहीं आया क्या प्रतिक्रिया दें। उस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक दल राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का गठन किया। शुरुआत में लगा की शायद कांग्रेस का ये धड़ा मजबूत होगा पर मार्च 1987 में हुए बंगाल के चुनाव में प्रणव को मुँह की खानी पड़ी। राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस का इन चुनावों में खाता ही नहीं खुला। यहाँ से ही प्रणव का सबसे बुरा वक्त शुरू हो गया। जो अच्छे वक्त में परछाई हुआ करते थे, वो भी अब दूर दूर रहने लगे। कहते है की उस दौरान प्रणब दा अपने कार्यालय में अकेले बैठे फाइलों के पन्ने पलटते रहते व पाइप पीते रहते। प्रणब भी शायद समझ चुके थे कि पार्टी से राह अलग करना उनका गलत फैसला था। उस वक्त उन्हें याद आए अपने पुराने मित्र संतोष मोहन देव। कई महीनो की जद्दोजहद के बाद संतोष मोहन देव व शीला दीक्षित, राजीव गाँधी को समझाने में सफल हुए की प्रणब को विरोधी खेमे में रख कर कोई फायदा नहीं है। कुछ इस तरह प्रणव की कांग्रेस में वापसी प्रशस्त हुई। हालाँकि राजीव के रहते उनकी किसी बड़े पद पर नियुक्ति नहीं हुई। 1989 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस चुनाव हार गई। दो साल बाद 1991 में राजीव गांधी की हत्या हो गई। राजनीति करवट ले चुकी थी, समय बदला, कांग्रेस का वनवास खत्म हुआ और सत्ता में वापसी हुई। प्रधानमंत्री बने पीवी नरसिम्हा राव। वही नरसिम्हा राव जो कभी प्रणब के जोड़ीदार हुआ करते थे। प्रणब को लगा शायद उन्हें कैबिनेट में जगह मिल जाए, पर किस्मत को कुछ और ही मज़ूर था। प्रणब को खली हाथ, हताश ही लौटना पड़। पर कुछ ही दिनों के बाद उन्हें नरसिम्हा राव का फ़ोन आया और उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। अपने पूरे कार्यकाल में प्रणब ने ध्यान रखा कि वह राव के विश्वासपात्र तो बने रहे पर इतने करीबी न दिखें कि गाँधी परिवार उन्हें फिर शक की निगाहों से देखने लगे। राव का दौरा सम्पत हुआ और करीब 8 साल कांग्रेस फिर सत्ता से दूर रही। इस दरमियान कांग्रेस की भागदौड़ एक बार फिर गाँधी परिवार के हाथ में जा चुकी थी। अब कांग्रेस के सारे दरवाजे सोनिया गाँधी के बंगले 10 जनपथ पर जाकर खुलते थे। 2004 में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सत्ता में आया, तो लगा इंदिरा की बहु सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री होगी। किन्तु सोनिया ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया। ये वो पहला मौका था जब शायद प्रणव मुखर्जी प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए। सोनिया गाँधी ने मनमोहन सिंह पर भरोसा जताया। वही मनमोहन सिंह जिन्हे भारत के आर्थिक सुधारों का जनक कहा जाता है। खैर प्रणब दा प्रधानमंत्री नहीं बन सके लेकिन यूपीए शासन में वे एक ताकतवर मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं देते रहे। फिर साल आया 2012 का। कांग्रेस को राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करना था। 2012 आते-आते वैसे भी जनता का कांग्रेस शासित सरकार से मोह भंग हो चूका था। पार्टी को भी इस बात का एहसास था। मनमोहन सिंह के नाम पर एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर का ठप्पा लग चूका था। बताया जाता है की उस दौरान कांग्रेस का एक गट चाहता था की मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति भवन भेज दिया जाए और बचे और वक्त में सत्ता भी बागदौड प्रणव दा को सौप दी जाए। पर हुआ वही जो 10 जनपथ का फरमान था। प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बने। इसके साथ ही न सिर्फ उनका प्रधानमंत्री बनने का स्वप्न अधूरा रह गया बल्कि उनकी सक्रीय राजनीति से सदा के लिए विदाई भी हो गई। प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक अनुभव उनका राजनितिक करियर 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुआ था। 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए। 1982 -1984 तक कई कैबिनेट पदों के लिए चुने जाते रहे। 1984 में भारत के वित्त मंत्री बने। 1991 योजना आयोग का उपाध्यक्ष बने। 1995 -1996 तक विदेश मन्त्री के रूप में कार्य किया। 1997 में उन्हें उत्कृष्ट सांसद चुना गया। 2004 में लोकसभा में सदन का नेता बनाया गया। 2009 में देश का वित्त मंत्री चुने गए। 2012 में देश के राष्ट्रपति बने।
करोड़ों लोगों के हरदिल अजीज़ राहत इंदौरी साहब आज हमारे बीच नहीं रहे, पर उन के लिखे अल्फ़ाज़ हमेशा हर हिंदुस्तानी के दिल में ज़िंदा रहेंगे। जहाँ उन्होंने मोहब्बत की शायरी से युवाओं के दिल में घर किया वहीँ उनकी बगावत की शायरी लोगों के लिए बुलंद आवाज बनी। 'किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है', राहत साहब की इस लाइन ने नागरिकता संशोधन कानून और भारतीय नागरिक रजिस्टर के विरोध में प्रदर्शकारियों को अल्फ़ाज़ दिए। उस दौरान महरूम शायर की इन पंक्तियों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। उनकी लिखी पंक्तियाँ आंदोलन की आवाज़ बनी। राहत इंदौरी ने सीएए-एनआरसी के मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा था 'सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।' 'लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है, जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे किराएदार हैं, ज़ाती मकान थोड़ी है, सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है!' बहुत चुनिंदा कवि / शायर या साहित्यकार ऐसे हुए है जिनके अल्फ़ाज़ किसी आंदोलन की आवाज़ बने हो। 1. "इंकलाब जिंदाबाद" यानी, क्रांति अमर रहे। आज़ादी के समय में एक नारा मशहूर हुआ था और आज भी है 'इंकलाब जिंदाबाद।' कई लोगों का ये मानना है कि ये नारा शहीद भगत सिंह ने ही पहली बार दिया था। लेकिन हक़ीक़त में यह नारा उर्दू शायर मौलाना हसरत मोहानी ने 1921 में दिया था। तब से लेकर आज तक कोई धरना या प्रदर्शन हो या फिर देश की सम्प्रभुता और एकता व अखंडता का कोई जलसा हो, हर जगह यह नारा बुलंद होता है। इंक़लाब जिन्दबाद का नारा अमर था और सदा अमर रहेगा। 2. "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है" 1977 में लगी इमरजेंसी के दौरान लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इसी नारे के साथ इंदिरा गाँधी को चुनौती दी थी। रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता से ली इन पंक्तियों ने इंदिरा सरकार की नींव हिला दी थी। दिनकर ने आजादी की लड़ाई से लेकर, उसके बाद तक अपनी लेखनी से जनता को उसके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने हिंदी साहित्य में न केवल वीर रस के काव्य को एक नई ऊंचाई दी, बल्कि अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का भी सृजन किया। उनकी प्रेरक देशभक्ति रचनाओं के कारण उन्हें राष्ट्रकवि के रूप में प्रतिष्ठित किया गया। 'फावड़े और हल राजदण्ड बनने को हैं, धूसरता सोने से शृँगार सजाती है; दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।' 3. "मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।" दुष्यंत कुमार की कविता इस कविता का अर्थ है "सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।" दुष्यंत की नज़र उनके युग की नई पीढ़ी के ग़ुस्से और नाराज़गी से सजी बनी है। यह ग़ुस्सा और नाराज़गी उस अन्याय और राजनीति के कुकर्मो के ख़िलाफ़ नए तेवरों की आवाज़ थी, जो समाज में मध्यवर्गीय झूठेपन की जगह पिछड़े वर्ग की मेहनत और दया की नुमानंदगी करती है।
अब न मैं हूँ न बाकि हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे... -राहत इंदौरी मंगलवार को मशहूर शायर राहत इंदौरी इस दुनिया को अलविदा कह गए। मोहब्बत और बगावत की शायरी से युवाओं के दिल को जीतने वाले राहत साहब का दिल का दौरा पड़ने से इन्तकाल हो गया। मंगलवार को सुबह उन्हें कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया, दोपहर होते होते उन्हें दिल का दौरा पड़ा और निधन हो गया। मंगलवार को ही उन्हें सपुर्दे-खाक कर दिया गया। 70 वर्षीय शायर ने खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी दी थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “कोविड-19 के शुरूआती लक्षण दिखाई देने पर सोमवार मेरी कोरोना वायरस की जांच की गई जिसमें संक्रमण की पुष्टि हुई।” उन्होंने ट्वीट में आगे कहा, “दुआ कीजिये (मैं) जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं।” राहत इंदौरी जब अपने खास और बेहद कमाल के लहजे में स्टेज पर शेर पढ़ा करते थे तालियों की गड़गड़ाहट रुकती नहीं थी। उनका एक शेर ‘आसमान लाए हो ले आओ ज़मीन पर रख दो..’ लोगों को बेहद पसंद है। आज जब राहत इंदौरी इस दुनिया में नहीं हैं, तो उन्हें याद करते हुए उनके कुछ वो शेर पढ़िए जो हमेशा चर्चा में रहे... 1. बुलाती है मगर जाने का नहीं ये दुनिया है इधर जाने का नहीं... 2. सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है... 3. मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पर हिंदुस्तान लिख देना... 4. किसने दस्तक दी, कौन है आप तो अंदर है बाहर कौन है... 5. जनाज़े पर मेरे लिख देना यारो मोहब्बत करने वाला जा रहा है... 6. लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूं हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूं हैं... 7. हों लाख ज़ुल्म मगर बद-दुआ' नहीं देंगे ज़मीन माँ है ज़मीं को दग़ा नहीं देंगे... 8. मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमां लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो... 9. तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो... 10. फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो... 11. आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो... 12. अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए... 13. न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा... 14. मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे मेरे भाई, मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले... 15. ख़ामोशी ओढ़ के सोई हैं मस्जिदें सारी, किसी की मौत का ऐलान भी नहीं होता...
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में मनचलों की छेड़खानी के कारण एक होनहार छात्रा सड़क हादसे की शिकार बन गई। स्कॉलरशिप पर अमेरिका में पढ़ाई करने वाली ये छात्रा सोमवार सुबह अपने चाचा के साथ बाइक पर मामा के घर जा रही थी, तभी उनकी बाइक बुलेट से टकरा गई और मौके पर ही छात्रा की मौत हो गई। चाचा का कहना है कि वह बाइक पर जा रहे थे, तभी बुलेट सवार कुछ मनचले पीछा करने लगे। इसी दौरान उनकी बाइक बुलेट से टकरा गई और मौके पर ही छात्रा की मौत हो गई। गौतमबुद्ध नगर के दादरी की रहने वाली सुदीक्षा भाटी एक होनहार छात्रा थीं। सुदीक्षा ने 2018 में इंटरमीडिएट में बुलंदशहर जनपद में टॉप किया था। HCL की तरफ से 3 करोड़ 80 लाख रुपये की स्कॉलरशिप मिलने पर सुदीक्षा उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गई थी। सुदीक्षा अमेरिका के बॉब्सन कॉलेज में भारत सरकार के खर्च पर पढ़ रही थी। हल ही में वो छुट्टियों में घर आई हुई थीं। सुदीक्षा भाटी के परिजनों का आरोप है कि जब बाइक से वह औरंगाबाद जा रहे थे, तब उनकी बाइक का बुलेट सवार दो युवकों ने पीछा किया। कभी युवक अपनी बुलेट को आगे निकालते तो कभी छात्रा पर कमेंट पास करते। इतना ही नहीं, ये सिरफिर चलते-चलते स्टंट भी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक बुलेट सवार युवकों ने अपनी बाइक का ब्रेक लगा दिया और बुलेट की टक्कर सुदीक्षा की बाइक से हो गई। बाइक गिर गई और सुदीक्षा के सर पर चोट लग गई। सुदीक्षा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रविवार हुई भरी बारिश से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सड़कों पर खड़ी गाड़ियां और छोटे वाहन पानी अपने साथ बहा ले गया तो कहीं दीवारें ढह गई। कई जगह मलबा आने से रास्ते बंद पड़े हैं। और तो और कई लोगों के घरो के अंदर पानी घुस गया। वहीं मौसम विभाग ने सोमवार को अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली में हल्की बारिश की संभावना जताई है। देहरादून, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल, चंपावत, पौड़ी, हरिद्वार और टिहरी के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सोमवार को भी रुक रुक कर जारी बारिश से शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया। देहरादून और ऊपरी पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश से देहरादून में रिस्पना नदी में भी जलस्तर बढ़ गया है जिस कारण आवाजाही में भरी दिक्कत आ रही है। वहीं मसूरी के पास पर्यटन स्थल कैंपटी फॉल व यमुना नदी के बढ़े जलस्तर ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कैंपटी फॉल में जलस्तर बढ़ने से आसपास की दुकानों में पानी भर गया जिस से दुकानदारों का सामान क्षतिग्रस्त हो गया।
भारत चीन बॉर्डर पर बढ़ रही तनातनी को कम करने के लिए शनिवार को दोनों देशों के बीच मेजर जनरल स्तर की बातचीत शुरू हो गई है। इस से पहले LAC पर सबकुछ यथास्तिथ करने के लिए कमांडर स्तर की पांच बैठके हुई हैं पर कोई पुख्ता हल नहीं निकल पाया था। अब इस तनाव को कम करने के लिए मेजर जनरल स्तर की वार्ता हो रही है। यह बातचीत दौलत बेग ओल्डी इलाके में हो रही है। यह वार्ता गलवान क्षेत्र के उत्तर में देपसांग के मैदानी इलाकों से सैनिकों को हटाने के संबंध में की जा रही है। 3 माउंटेन डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अभिजीत बापट भारतीय पक्ष से वार्ता की अगुवाई कर रहे हैं।। इस बातचीत का अजेंडा देपसैंग इलाके में तनाव कम करना और विवादित सीमा से दूर हटने पर सहमति बनाना है। बता दें कि चीन ने देपसैंग में अपने 1500 से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं। इधर भारत ने भी बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती की है। बैठक में 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित 900 वर्ग किलोमीटर के मैदानों में हो रही है। पहले भी भारत द्वारा चीन पर अपने सैनिकों को पीछे हटाने का दबाव डाला गया है ताकि तनाव की स्थिति कम हो जाए, हालांकि चीन अभी फिंगर एरिया से ज्यादा पीछे नहीं हटा है।
Kerala Health Minister K.K. Shylaja has urged those who had engaged in the relief and rescue works at the air crash site in Karipur to go into quarantine. This comes after a deceased tested positive for coronavirus. Tests of all passengers are progressing. It is learned that around 500 persons, who participated in the rescue operations will have to go on quarantine. Health Minister KK Shailaja thanked the rescue workers and asked them to follow the COVID protocol. Friday, the day rains ravaged many parts of Kerala, another tragedy happened when the Air India Express flight skidded off the runway while landing in bad weather at Kozhikode International Airport. The flight from Dubai skidded off the runway at its destination Karipur Airport, Kozhikode, Kerala and broke into two. As many as 20 people including two pilots were killed and many injured after the flight overshot the runway. The aircraft carrying over 190 people on board, while landing in heavy rains overshot the tabletop runway, fell into a valley 35 feet below and broke into two. It failed to hold on the runway due to poor weather conditions and skidded for more than 75 m. The Air India flight was part of Vande Bharat mission to bring back Indians stuck in the Middle Eastern countries during the pandemic.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आशा वर्कर्स के हड़ताल का मुदा उठा कर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक ट्वीट किया और कहा 'आशा कार्यकर्ता सही मायने में हेल्थ वॉरियर्स हैं, लेकिन वे आज अपने हक के लिए हड़ताल करने पर मजबूर हैं।' राहुल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि "सरकार गूंगी तो थी ही, अब शायद अंधी-बहरी भी है।" देश की करीब 6 लाख आशा वर्कर्स विभिन्न मांगों को लेकर 7 अगस्त से दो दिवसीय हड़ताल पर हैं। 7 अगस्त से दो दिवसीय हड़ताल पर आशा वर्कर्स देशभर की करीब 6 लाख आशा वर्करों 7 अगस्त से दो दिवसीय हड़ताल पर हैं। उन्होंने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगे रखी हैं। उनकी सबसे पहली मांग है कि उनकी सैलरी उन्हें टाइम से मुहैया करवाई जाए, तथा उन्होंने सैलरी बढ़ाने की डिमांड भी रखी है ताकि वे कोरोना महामारी के समय जिस तरह से मदद कर रही हैं, वो जारी रख सकें। साथ ही उन्होंने सरकार से बीमा और जोखिम भत्ते जैसी सुविधाएं मुहैया करवाने कि भी मांग कि हैं। आशा वर्कर्स को इस में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन्स भी सप्पोर्ट कर रही हैं।
केरल के इडुक्की जिला के राजमला इलाके में भूस्खलन की बड़ी घटना सामने आई है। इस घटना में लोगो को जान और माल दोनों का ही भारी नुकसान उठाना पड़ा। भारी बारिश और बाढ़ के चलते नौ लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लोगों को बचाया गया है, वहीं 57 अभी भी लापता हैं। इसके चलते केरल के तीन जिलों में 11 अगस्त तक के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। केरल के राजमला इलाके में भूस्खलन हो गया। केरल पुलिस के अनुसार हादसे में अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है और 10 लोगों को बचाया गया है वहीं 57 अभी भी लापता हैं। बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की टीम को तैनात किया है। वन अधिकारी और अन्य आपातकालीन सेवा के कर्मचारी मौके पर मौजूद हैं। हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब भूस्खलन हुआ तो उन्होंने बहुत जोर की आवाज सुनी। एक व्यक्ति ने कहा कि लोग बचने के लिए भाग रहे थे और पानी चला आ रहा था। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रदान करने के लिए भारतीय वायु सेना से संपर्क किया है। यह सेवा जल्द ही उपलब्ध होने की उम्मीद है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि एक मोबाइल मेडिकल टीम और 15 एंबुलेंस को इडुक्की भेजा गया है। जरूरत पड़ने पर और मेडिकल टीमें भेजी जाएंगी। अस्पतालों को अलर्ट रहने के लिए निर्देशित किया गया है। केरल के राजस्व मंत्री ई चंद्रशेखरन ने कहा है कि चार श्रमिक शिविरों में लगभग 82 लोग रह रहे थे। हमें मालूम नहीं है कि भूस्खलन के समय वहां कितने लोग मौजूद थे। एनडीआरएफ की टीम अभी तक मौके पर नहीं पहुंची है। खराब मौसम के कारण फिलहाल लोगों एयरलिफ्ट कर बचाना संभव नहीं है। इडुक्की में भूस्खलन के बाद केरल के तीन जिलों में 11 अगस्त तक के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि बचावकर्मियों ने कम से कम पांच शवों को निकाला है।












































