शिमला: हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की सुन्नी तहसीन के तहत आने वाले डिमार्केटिड प्रोटेक्टिड फॉरेस्ट एरिया यानी सीमांकित संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ काटने व सड़कें बनाने के मामले में हाईकोर्ट ने हिमाचल एवं केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। इस मामले में हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से बनी सड़कों पर वाहनों की आवाजाही रोकने की गुहार लगाई गई है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। तहसील सुन्नी की ग्राम पंचायत हिमरी के तहत ये वन क्षेत्र आता है। याचिका कर्ताओं ने इस वन क्षेत्र को रिजर्व फॉरेस्ट एरिया घोषित करने के आदेश जारी करने की भी हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव व न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य की खंडपीठ कर रही है। मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने ग्राम पंचायत हिमरी निवासी विजयेंद्र पाल सिंह, देवी राम और देव राज की तरफ से दाखिल की गई जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सभी प्रतिवादियों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। प्रार्थियों ने वन, राजस्व और लोक निर्माण विभाग के सचिव सहित प्रधान मुख्य अरण्यपाल, डीएफओ शिमला, डीसी शिमला, उद्योग विभाग के निदेशक को प्रतिवादी बनाया है। प्रार्थियों का कहना है कि हिमरी ग्राम पंचायत में हिमरी, बागरी, बनुना, गड़ाहू, गढ़ेरी और रियोग गांव आते हैं। इस क्षेत्र में छप्परानी, दबका, फुलगलानी इत्यादि सीमांकित संरक्षित वन क्षेत्र के तहत हैं। वर्ष 2011 से इन वन क्षेत्रों में कई सड़कें अवैध रूप से बनाई गई। इन सड़कों में हिमरी-दोहरा ग्लां-भरैल, दोहरा ग्लां-छप्परानी, दोहरा ग्लां-ग्लाह और हिमरी-रियोग सडक़ें शामिल हैं। ये सभी अवैध रूप से बनाई गई हैं। इस डिमार्केटिड प्रोटेक्टिड फॉरेस्ट यानी डीपीएफ से बाहर भी कुछ सड़कें बिना अनुमति के बनाई गई हैं। उनमें हिमरी-झुटनू, खनेरी बागरी, हिमरी सड़क और कंधारटी सड़क बिना अनुमति बनाई गई है। इन सड़कों के निर्माण के बाद पूरे क्षेत्र में पेड़ों के कटान और तस्करी से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। वन माफिया के सक्रिय होने से पेड़ों का कटान तेज हो गया। अवैध खनन के मामले भी इस क्षेत्र में बढ़ गए हैं। प्रार्थियों ने इन सड़कों में गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग की है। प्रार्थियों ने मांग की है कि हिमरी-नल्लाह सड़क के निर्माण के लिए 657 पेड़ों को काटने की एफसीए (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) दी गई है। इसलिए 657 पेड़ों को कटने से बचाया जा सके। मामले पर सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है।
हिमाचल प्रदेश की देहरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीत गई हैं। देहरा सीट पर उन्होंने बीजेपी के होशियार सिंह को हराया है। देहरा में 10 राउंड की गिनती हुई, जिसमें कमलेश ठाकुर को 32737, होशियार सिंह को 23338 वोट मिले। इस तरह कमलेश ठाकुर 9399 वोटों से जीत गईं। उधर, हमीरपुर से भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा 1433 वोट से चुनाव जीत चुके है जबकि नालागढ़ सीट पर हरदीप बावा 8990 मतों से जीते। बता दें कि आज हिमाचल प्रदेश के तीन विधानसभा क्षेत्रों देहरा, नालागढ़, हमीरपुर में हो रहे उपचुनाव के लिए आज मतगणना हुई। 10 जुलाई को हुए मतदान के बाद सभी आज के दिन का इंतजार कर रहे थे। BIG BREAKING : नालागढ़ से हरदीप बावा 8990 मतों से जीते नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 34608 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 25618 हरप्रीत सैनी : 13025 BIG BREAKING : आशीष शर्मा जीते, सीएम के गृह जिला में कांग्रेस को झटका ** सभी 9 राउंड की गिनती के बाद 1433 वोट ज्यादा मिले आशीष शर्मा , बीजेपी: 26617 पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 25184 BIG BREAKING : सीएम की पत्नी कमलेश ठाकुर देहरा से जीती चुनाव ** 9 हजार से अधिक अंतर से होशियार सिंह को हराया ** दो बार के निर्दलीय विधायक होशियार सिंह को भारी पड़ा इस्तीफा देकर फिर चुनाव लड़ना LIVE UPDATE: 12.03 PM (8th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 31298 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 24428 हरप्रीत सैनी : 11614 ( जीत की ओर अग्रसर हरदीप बावा मात्र एक राउंड शेष ) LIVE UPDATE: 11.50 AM (7th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 26785 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 22207 हरप्रीत सैनी : 8663 LIVE UPDATE: 11.30 AM (6th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 23038 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 18901 हरप्रीत सैनी : 7393 UPDATE: 11.25 AM (9th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 28641 (+ 7860) होशियार सिंह, बीजेपी: 20781 LIVE UPDATE: 11.13 AM (6th Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... आशीष शर्मा , बीजेपी: 18319 (+ 743) पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 17576 LIVE UPDATE: 11.00 AM (8th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 24957 (+ 6115) होशियार सिंह, बीजेपी: 18842 LIVE UPDATE: 11.00 AM (5th Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... आशीष शर्मा , बीजेपी: 15120 (+ 67) पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 15053 LIVE UPDATE: 10.42 AM (4th Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 15253 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 12275 हरप्रीत सैनी : 5141 LIVE UPDATE: 10.42 AM (7th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 21723 होशियार सिंह, बीजेपी: 16694 LIVE UPDATE: 10.35 AM (3rd Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 10767 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 8573 हरप्रीत सैनी : 3536 नोटा : 157 LIVE UPDATE: 10.30 AM (4th Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 12021 आशीष शर्मा , बीजेपी: 11138 LIVE UPDATE: 10.17 AM (6th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 16984 होशियार सिंह, बीजेपी: 15169 LIVE UPDATE: 10.17 AM (2nd Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... डॉ पुष्पेंद्र वर्मा 6750 आशीष शर्मा 5046 नंद लाल शर्मा 13 LIVE UPDATE: 10.12 AM (2nd Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा, कांग्रेस: 7577 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 6006 हरप्रीत सैनी : 2342 डॉ केे एल शर्मा : 132 विजय सिंह : 65 नोटा : 103 LIVE UPDATE: 9.50 AM (5th Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 13300 होशियार सिंह, बीजेपी: 12664 LIVE UPDATE: 9.40 AM (1st Round) नालागढ़ विधानसभा उपचुनाव... हरदीप बावा , कांग्रेस: 3358 कृष्ण लाल ठाकुर, बीजेपी: 2712 LIVE UPDATE: 9.40 AM (4th Round) कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 2655 होशियार सिंह, बीजेपी: 2135 LIVE UPDATE: 9.00 AM (1st Round) हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव... पुष्पिंदर वर्मा, कांग्रेस: 3004 आशीष शर्मा , बीजेपी: 2804 LIVE UPDATE: 9.00 AM (2nd Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 2530 होशियार सिंह, बीजेपी: 2629 LIVE UPDATE: 8.50 AM (1st Round) देहरा विधानसभा उपचुनाव... कमलेश ठाकुर, कांग्रेस: 2530 होशियार सिंह, बीजेपी: 2629 ❝नालागढ़ सीट से पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। कांग्रेस से हरदीप सिंह बावा, भाजपा से केएल ठाकुर, स्वाभिमान पार्टी से किशोरी लाल शर्मा, निर्दलीय हरप्रीत सिंह और विजय सिंह मैदान में हैैं। उधर ,हमीरपुर में तीन प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच में है। हमीरपुर से भाजपा के आशीष शर्मा, कांग्रेस के डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा और निर्दलीय प्रत्याशी नंद लाल शर्मा मैदान में हैं। साल 2022 में भी कांग्रेस के डॉ. पुष्पेंद्र और आशीष शर्मा आमने-सामने थे। आशीष ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था और जीते थे। भाजपा के प्रत्याशी नरेंद्र ठाकुर थे। इस उपचुनाव में सबसे हॉट सीट देहरा सीट है जहाँ से पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें कांग्रेस से कमलेश ठाकुर चुनावी मैदान में है जो सीएम सुक्खू की धर्मपत्नी है जबकि भाजपा से होशियार सिंह चुनावी मैदान में है। इसके अलावा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सुलेखा देवी, अंकेश सायल और एडवोकेट संजय शर्मा किस्मत आजमा रहे हैं। ❞
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां हुई| राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार से प्रभावित होने वाले परिवारों के लिए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की घोषणा को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, ऊना जिले के हरोली विधानसभा क्षेत्र में बल्क ड्रग पार्क के निर्माण के लिए पूंजीगत लागत का राज्य हिस्सा प्रदान करने का भी निर्णय लिया गया और इसकी निविदा बुलाने को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल ने रिट्रीट, मशोबरा, बैंड टुकड़ा आंद्री, शिव मंडी आंद्री, ताल और गिरी के अतिरिक्त क्षेत्रों को डी.पी.एफ. खलिनी, बी.सी.एस. शिमला विकास योजना में मिस्ट चैंबर और परिमहल ग्रीन एरिया के दायरे में। इसने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट से संबंधित पोस्ट कोड 903 और 939 के लंबित परिणामों पर कैबिनेट उप-समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और दोनों पोस्ट कोड के लिए अंतिम परिणाम घोषित करने का कार्य एच.पी. को सौंपा। राज्य चयन आयोग हमीरपुर। बैठक में शिक्षा विभाग में लेक्चरर फिजिकल एजुकेशन के 486 पद और प्रिंसिपल स्कूल कैडर के 157 अतिरिक्त पद सृजित करने और भरने को मंजूरी दी गई। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षकों के 245 पद भरने का भी निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने राज्य में हेलीपोर्टों पर तैनाती के लिए गृह विभाग में अग्निशमन अधिकारियों और अधिकारियों की विभिन्न श्रेणियों के 53 पद और विभिन्न श्रेणियों के पुलिस कर्मियों के 60 पदों को बनाने और भरने की मंजूरी दी। हिमाचल प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के 30 पद भरने का निर्णय लिया गया। इसके सुचारू संचालन के लिए राज्य चयन आयोग हमीरपुर। मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग में जेओए (आईटी) के 30 पद भरने को मंजूरी दी। इसमें खंड विकास अधिकारी के 27 अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्णय लिया गया, जिससे कुल कैडर की संख्या 123 पदों तक बढ़ जाएगी। कैबिनेट ने शिक्षा विभाग में जूनियर बेसिक शिक्षकों के रूप में 18 ग्रामीण विद्या उपासकों की सेवाओं को नियमित करने का निर्णय लिया, जिन्होंने तीन साल की सेवा पूरी कर ली है और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के मानदंडों को पूरा करते हैं। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर में कार्डियोलॉजी विभाग बनाने का निर्णय लिया गया और तीन पद सृजित करने और भरने का निर्णय लिया गया। इसके सुचारू संचालन के लिए प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर। मंत्रिमण्डल ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में जिला नियंत्रक, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने की मंजूरी दी। मंत्रि-परिषद ने राजस्व विभाग में पटवारी, कानूनगो के जिला कैडर और नायब तहसीलदार के संभागीय कैडर को राज्य कैडर घोषित करने का निर्णय लिया। हिमाचल विज्ञान प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के तत्वावधान में आर्यभट्ट भू-सूचना विज्ञान और अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र में कार्यरत पदधारियों को तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ परिलब्धियां देने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने 40 प्रतिशत की न्यूनतम विकलांगता के साथ अपने बच्चों की देखभाल के लिए एक महिला सरकारी कर्मचारी को उसकी पूरी सेवा के दौरान अधिकतम 730 दिनों की बाल देखभाल छुट्टी देने का भी निर्णय लिया।
कहा, मैंने पहले आगाह किया था, ओपीएस में भी सरकार करने वाली है खेल चुनावी गारंटियों के नाम पर प्रदेश के लोगों को ठग रही सुक्खू सरकार शिमला : नेता प्रतिपक्ष ने शिमला से वक्तव्य जारी कर हिमाचल सरकार द्वारा मुफ़्त बिजली योजना की सब्सिडी बंद करने की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसी तरह की तानाशाही के लिए जानी जाती है। प्रदेश के लोगों को मुफ़्त मिल रही बिजली को सुक्खू सरकार ने छीन लिया। प्रदेशवासियों के साथ की गई यह तानाशाही दुर्भाग्यपूर्ण हैं। चुनाव में जो पार्टी सरकार बनने पर 300 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा करके सत्ता में आई हो वह सरकार में आने पर पहले से मिल रही 125 यूनिट की सब्सिडी को भी छीन ले। यह प्रदेश के लोगों के सिर्फ़ एक ठगी है। चुनाव के ठीक एक दिन बाद द्वारा यह फ़ैसला लेना सरकार की शातिराना नीयत को दिखाता है। प्रदेश सरकार इसी तरह से फिर काम करेगी। उन्होंने कहा कि मैंने कांग्रेस द्वारा जारी की गई गारंटी पर कहा था कि कांग्रेस सरकार दस जन्म में भी यह पूरी नहीं कर पाएगी। वही पहले दिन से ही हो रहा है। झूठ बोलकर सत्ता में आना और झूठ बोलकर सत्ता चलाना ही कांग्रेस की फ़ितरत है और वह वही कर रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मैंने प्रदेश के लोगों को दो हफ़्ते पहले ही आगाह कर दिया था कि सरकार फ्री बिजली की सब्सिडी बंद करने जा रही है। बस उप-चुनाव ख़त्म होने का इंतज़ार है। आगे चलकर यह सरकार ओपीएस पर भी ऐसा ही करने वाली है। सुक्खू सरकार ओपीएस के मूल ढाँचे में बदलाव करके पेंशन के रूप में अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत करने वाली है। इसके बारे में भी मैंने पहले ही आगाह किया है। सरकार की इस तानाशाह की क़ीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी। भाजपा इस तानाशाही के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरेगी और कांग्रेस के मनवाने और झूठ बोलने के रवैये के ख़िलाफ़ जनान्दोलन करेगी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पहले दिन से ही सरकार की योजना विकास करने की नहीं थी। सिर्फ़ झूठ बोलकर प्रदेश के लोगों से ठगी करके उन्हें सत्ता हथियानी थी। जिस तरह से चुनाव में उन्होंने बढ़ चढ़कर प्रदेश के लोगों को 10 गारंटिया दी थी उसी दिन हमने कहा कांग्रेस इसे 10 जन्मों में भी पूरा करने वाली नहीं है। अब एक-एक कर सब कुछ सामने आ रहा है। एक लाख युवाओं को हर साल रोजगार देने की गारंटी थी और सत्ता में आते ही 10 हज़ार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मी को बाहर कर दिया। स्टार्टअप योजना के तहत युवाओं को रोजगार देने की गारंटी दी थी लेकिन पहले से चल रही स्वावलंबन योजना को बंद कर दिया। प्रदेश के विकास का वादा था लेकिन डेढ़ साल में धेले भर का काम सुक्खू सरकार ने नहीं किया। नई संस्थान खोलने के बजाय पहले से चल रहे लगभग डेढ़ हज़ार संस्थानों को बंद कर दिया। हिमाचल में सुक्खू सरकार का मतलब झूठ की सरकार, फ़रेब की सरकार, ठगी की सरकार। प्रदेश में अब ऐसी सरकार की ज़रूरत नहीं रह गई है।
प्रदेश में सेब सीजन शुरू हो चुका है ऐसे में शिमला जिला की कृषि बाग़वानी व उद्योग समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आज शिमला में आयोजित की गई। बैठक में सेब सीजन के दौरान उचित व्यवस्था बनाने और बागवानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में केंद्र और प्रदेश सरकार के विभिन्न बागवानी योजनाओं को जमीनी स्तर पर अधिक सफल बनाने , सेब सीजन के दौरान मंडियों और सड़कों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और बाग़वानों को यूनिवर्सल कार्टन से संबंधित आ रही दिक्कतों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई जिसमें संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखा। कृषि बागवानी व उद्योग समिति के अध्यक्ष कौशल मुंगटा ने बताया कि बागवानों को विभिन्न योजनाओं से लाभ पहुंचाने के लिए जमीनी स्तर पर समीक्षा की गई और पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई है। उन्होंने बताया कि सेब सीजन के दौरान सेब ढुलाई के लिए यातायात सुचारू बनाए रखना , मंडियों में उचित व्यवस्था और आढ़तियों की रजिस्ट्रेशन व सिक्योरिटी फीस सुनिश्चित करने के साथ ही यूनिवर्सल कार्टन संबंधी परेशानियां को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए हैं। जिन्हें बागवानी मंत्री और सरकार के समक्ष गंभीरता से रखा जाएगा ताकि बागवानों की हर एक समस्या का समाधान जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज बताया कि हिमाचल प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नवोन्मेषी पहल व उल्लेखनीय कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य पुरस्कार-2024 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार ‘एग्रीकल्चर टुडे ग्रुप’ द्वारा आयोजित ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव’ में केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदान किया। हिमाचल प्रदेश की ओर से यह पुरस्कार आवासीय आयुक्त मीरा मोहंती ने प्राप्त किया। उद्योग मंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों व नीतियों के सफल कार्यान्वयन से प्रदेश के लाखों किसानों और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं और उनकी आर्थिकी सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य ने अपने खाद्य प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया है, जिसमें 23 नामित खाद्य पार्क, एक समर्पित मेगा फूड पार्क, जिला कांगड़ा और सोलन में 2 कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर, 18 कोल्ड चेन परियोजनाएं, जिनमें राज्य खाद्य प्रसंस्करण योजना और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल है। गत वर्ष भी प्रदेश को भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा आयोजित विश्व खाद्य भारत कार्यक्रम में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के औपचारिकीकरण (पीएमएफएमई) योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में पुरस्कृत किया था। इस योजना के तहत 1320 व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को 30 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्वीकृत और वितरित तथा 13427 स्वयं सहायता समूहों सदस्यों को 50.31 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ाने के लिए राज्य में 3 इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। उद्योग मंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण राज्य के लिए प्रमुख क्षेत्र है, क्योंकि यह मूल्य संवर्द्धन की दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल प्रदान करता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने स्वास्थ्य विभाग को प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों के लिए आधुनिक मशीनरी और उपकरण खरीदने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के लोगों को घरद्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके दृष्टिगत आधुनिक तकनीक और उपकरणों के उपयोग पर विशेष अधिमान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मशीनरी और उपकरणों की खरीद में तेजी लाने के लिए खरीद संबंधी तकनीकी वशिष्टताओं को एम्स और पीजीआई की तर्ज पर रखा जाए। इससे खरीद में गुणवत्ता सुनिश्चित होने के अलावा खरीद प्रक्रिया, समय और धन की बचत होगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने यह बात आज यहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की विशेष उच्च स्तरीय क्रय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के लोगों को समय पर उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण प्रदान किये जा रहे हैं, ताकि राज्य के लोगों को उपचार के लिए अन्य राज्यों में न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं के लिए बेबी केयर किट खरीदने के दृष्टिगत निविदा जारी करने की मंजूरी दे दी गई है। प्रत्येक किट की लागत लगभग 1500 रुपये होगी। राज्य मेें एक वर्ष में लगभग एक लाख संस्थागत प्रसव होने का अनुमान है और प्रदेश सरकार ने बेबी किट के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि इस किट में 20 वस्तुएं शामिल होंगी, जिनमें डिजिटल थर्मामीटर, नेल कटर, टोपी, सॉफ्ट ब्रिस्टल हेयर ब्रश, बिब, बच्चे के लिए वॉश क्लॉथ और मां के लिए सेनिटरी नैपकिन जैसी आठ नई वस्तुएं शामिल हैं। इसके अलावा इसमें बच्चे के लिए वन पीस स्लिप-ऑन आउट फिट, बेबी वेस्ट (दो), बेबी मिटनस, और बुटिस, बच्चों की मालिश का तेल, तौलिया, कपड़े के नेपी, हेंड सेनेटाईजर, मछरदानी, मिंक कम्बल, रेटल टॉय, मलमल/फूलालैन (दो) तथा मां के लिए टूथ ब्रश, पेस्ट, नहाने का साबुन और वैसलीन इत्यादि भी शामिल होंगे। इसके उपरांत स्वास्थ्य मंत्री ने हिमाचल प्रदेश चिकित्सा सेवाएं निगम लिमेटिड (एचपीएमएससीएल) के बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता भी की। बैठक में विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न संस्थानों के लिए मशीनरी, वाहन, अस्पताल के फर्नीचर आदि की खरीद प्रक्रिया शुरू करने को भी मंजूरी दी गई। स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी, विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान डॉ. राकेश शर्मा, मिशन निदेशक एनएचएम प्रियंका वर्मा और हिमाचल प्रदेश चिकित्सा सेवाएं निगम के महाप्रबंधक राजीव कुमार भी बैठक में उपस्थित थे।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की। यह प्रारंभिक बैठक 16 जुलाई, 2024 को केन्द्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास हिमाचल प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई। लोक निर्माण मंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रगति कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो राष्ट्रीय राजमार्ग क्षतिग्रस्त हैं, उन्हें तुरंत ठीक करवाया जाए। उन्होंने भुभू जोत टनल के निर्माण कार्यों को भी शीघ्र पूर्ण करवाने के निर्देश दिए, ताकि इसे जन कल्याण के लिए शीघ्र समर्पित किया जा सके। भारत सरकार के सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ होने वाली बैठक में प्रदेश के विभिन्न राजमार्गों और परियोजनाओं पर की जाने वाली कार्यवाही एवं उनसे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। इस अवसर पर प्रधान सचिव देवेश कुमार, विशेष सचिव हरबंस सिंह ब्रसकोन एवं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित एवं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी संजय वाघचुरे एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए आज समय के अनुसार बदलाव की आवश्यकता है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि करीब 2200 शिक्षकों की बैचवाइज भर्ती की जा रही है और जल्द इनकी तैनाती होगी। कहा कि शिक्षकों की तैनाती के लिए भी पैरामीटर तय किए गए हैं। राज्य में बिना शिक्षक 350 स्कूल चल रहे हैं। 3200 स्कूल एक शिक्षक के सहारे हैं और करीब 800 स्कूल ऑफ एक्सीलेंस हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती प्राथमिकता रहेगी। कहा कि सरकार चाहती है कि प्री प्राइमरी स्कूल जल्द शुरू किए जाए। इसके लिए करीब 6100 एनटीटी शिक्षक भर्ती किए जाएंगे। कम संख्या वाले स्कूलों को मर्ज करने के सवाल पर रोहित ने कहा कि वित्त आयोग के हिमाचल दौरे के दौरान पर भी इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। आयोग से भी सुझाव आया है कि जहां बच्चों की संख्या कम है, ऐसे स्कूलों को मर्ज किया जाना चाहिए। सरकार के ध्यान में यह मामला पहले से ही है। स्कूलों में एनरोलमेंट में भी कमी आई है। बीते वर्ष भी दो या दो से कम विद्यार्थी संख्या वाले स्कूलों को मर्ज किया गया था। जहां बच्चों की संख्या दो या दो से कम है, ऐसे करीब 700-800 स्कूलों को मर्ज किया जाएगा। प्रथम चरण में उन्हीं स्कूलों को चिन्हित करेंगे, जिनकी अधिक बच्चों की संख्या वाले स्कूल से दूरी डेढ़ से दो किलोमीटर है। शिक्षा निदेशालय इस संबंध में प्रारूप तैयार कर रहा है, जल्द निर्णय लेंगे।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय बीएससी द्वितीय वर्ष का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षा परिणाम विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड़ कर दिया गया है। विद्यार्थी अपना लॉगइन आईडी के जरिये परिणाम देख सकते हैं। बीएससी द्वितीय वर्ष का परीक्षा का परिणाम 47.06 फीसदी रहा है। कुल 2533 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 936 ने परीक्षा पास की है। एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल ने कहा कि बीएससी द्वितीय वर्ष का परिणाम घोषित कर दिया है। बीते दिनों ही एचपीयू ने बीकॉम, बीए व बीसीए अंतिम वर्ष का परीक्षा घोषित किया था।
हिमाचल: HRTC कर्मचारियों के वेतन से क्वालिटी ड्रेस बनाने के लिए काटे 748 रुपए, कर्मचारी कर रहे विरोध
राज्य सरकार के उपक्रम हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अपने कर्मचारियों से 67 लाख रुपये वसूले हैं। निगम के सभी चालकों, परिचालकों और मैकेनिकल स्टाफ के वेतन से 748 रुपये काटे गए हैं। कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। दरअसल, एचआरटीसी अपने कर्मचारियों को हर साल दो वर्दी देता है। इसके एवज में उन्हें 2000 रुपये भत्ता दिया जाता है। लेकिन इस साल वर्दी खरीदने से पहले एचआरटीसी कर्मचारियों ने तर्क दिया कि कपड़ा महंगा हो गया है, इसलिए वर्दी भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए। कर्मचारिओं ने पिछले साल खरीदी गई वर्दी की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए थे। इसलिए इस साल वर्दी खरीदने से पहले यूनियन पदाधिकारियो की ड्रेस खरीद समिति के साथ बैठक हुई। इस बैठक की कार्यवाही विधिवत तैयार की गई, जिस पर कर्मचारी नेताओं के हस्ताक्षर हैं। बैठक में लिए गए निर्णय के बाद इस बार एचआरटीसी ने 2000 रुपये की जगह 2748 रुपये की ड्रेस खरीदकर अपने कर्मचारियों को दी। इस बार जब जून महीने का वेतन आया तो सभी कर्मचारियों के वेतन में 748 रुपये कम थे। इसके बाद सभी कर्मचारी परेशान हो गए। जब एचआरटीसी प्रबंधन से इस बारे में पूछा गया तो पता चला कि वर्दी के पैसे काट लिए गए हैं। इससे कर्मचारी भड़क गए हैं। मगर खुलकर बोल भी नहीं पा रहे, क्योंकि इनके कर्मचारी नेताओं ने क्वालिटी ड्रेस खरीदने की बात मीटिंग में कही थी। बोर्ड प्रबंधन ने क्वालिटी ड्रेस तो दे दी, लेकिन इनका वर्दी भत्ता नहीं बढ़ाया गया। HRTC में यह ड्रेस फील्ड स्टाफ को दी जाती है। इनकी संख्या 8500 से ज्यादा है। सभी कर्मचारियों से रिकवरी की गई है। HRTC के प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर ने बताया, निगम ने कर्मचारियों के लिए अच्छी क्वालिटी की ड्रेस खरीदी है। यह कर्मचारियों के साथ हुई मीटिंग में तय हुआ था। इसमें सभी यूनियन के पदाधिकारी मौजूद थे। सभी की सहमति के बाद ही वर्दी खरीदी है।
हिमाचल प्रदेश में पांच विद्यार्थियों की संख्या वाले करीब 700 स्कूल मर्ज करने की तैयारी शुरू हो गई है। मर्ज होने वाले स्कूलों के साथ लगते स्कूलों से दूरी की मैपिंग करने में शिक्षा विभाग जुट गया है। इसी माह इस बाबत प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। बीते दिनों शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विभागीय समीक्षा बैठक में स्कूल मर्ज करने के निर्देश दिए थे। ऐसे स्कूलों को पहले चरण में मर्ज किया जाएगा, जहां आसपास में भी स्कूल स्थित होंगे। इन स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को साथ लगते स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ऐसे स्कूलों को पहले चरण में मर्ज किया जाएगा, जहां विद्यार्थियों की संख्या पांच से कम है। ऐसे स्कूल करीब 700 हैं। इनमें करीब 80 स्कूल ऐसे भी हैं, जहां एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है। दूसरे चरण में दस विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को चिह्नित किया जाएगा। वर्ष 2023 में 2022 के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या करीब 50 हजार कम भी हुई है। यू डाइस की वर्ष 2023 की रिपोर्ट में इसका उल्लेख हुआ है। कोरोना संकट के बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में यह बहुत बड़ी गिरावट देखी गई है। इसके चलते ही प्रदेश सरकार ने अब ऐसे स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया है जहां विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ऐसे स्कूलों में नियुक्त शिक्षकों को ऐसे अन्य स्कूलों में भेजा जाएगा, जहां बच्चों की संख्या अधिक है और शिक्षक कम हैं। मर्ज किए जाने वाले स्कूलों के बच्चों को भी साथ लगते स्कूलों में दाखिले दिलाए जाएंगे। शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया गया है। विभागीय अधिकारियों से इसी माह में इस संदर्भ में रिपोर्ट देने को कहा गया है। मर्ज होने वाले स्कूलों से विद्यार्थियों को नजदीक के स्कूलों में दाखिले दिए जाएंगे
**तीन दिन प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी **लाहौल स्पीति और किन्नौर में बारिश का अलर्ट नहीं हुआ जारी हिमाचल प्रदेश में मानसून के आज से फिर सक्रिय होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से 11 से 13 जुलाई तक प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कई भागों में 17 जुलाई तक मानसून की बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान है। आज राजधानी शिमला व आसपास भागों में भी मौसम खराब बना हुआ है। उधर, गुरुवार सुबह तक राज्य में 12 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। मानसून सीजन के दौरान अब 17,199 लाख रुपये की संपत्ति नुकसान हो चुका है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 10,177 लाख और जल शक्ति विभाग को 6,733 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, शिमला, सोलन व सिरमौर जिले के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। किन्नौर व लाहौल-स्पीति जिले के लिए किसी तरह का अलर्ट नहीं है।
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने नीट यूजी पेपर लीक मामले पर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी है। अब सुप्रीम कोर्ट आज नीट मामले पर सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट यूजी के कथित लीक मामले पर अहम फैसला सुना सकती है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें नीट यूजी परीक्षा फिर से कराने की मांग की गई है। बीती 8 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना था कि नीट यूजी परीक्षा की सत्यनिष्ठा से समझौता हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नीट परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए और केंद्र सरकार से हलफनामा दायर करने को कहा। साथ ही सीबीआई से भी स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसे सीबीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट को बंद लिफाफे में सौंप दिया गया है। केंद्र सरकार ने 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में बताया कि उन्होंने आईआईटी मद्रास से नीट यूजी परीक्षा में हुई कथित अनियमितता की जांच करने की अपील की है। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा कि नीट यूजी का बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने के सबूत नहीं मिले हैं।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग के समक्ष एक टारगेट रखा गया है। ये टारगेट सरकारी स्कूलों में बारहवीं तक शत-प्रतिशत एनरोलमेंट का है। इस संदर्भ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ हिमाचल सरकार के शिक्षा सचिव की बैठक में टारगेट पर चर्चा हुई। हालांकि हिमाचल में सरकारी स्कूलों में बारहवीं तक छात्रों की एनरोलमेंट का रिकॉर्ड करीब 95 प्रतिशत है, लेकिन इसे शत-प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी व हिमाचल सरकार के शिक्षा सचिव आईएएस राकेश कंवर व अन्य अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें हिमाचल को ये लक्ष्य दिया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सभी मंत्रियों को तीसरी टर्म में 100 दिन का रोडमैप पेश करने के लिए कहा है. कैबिनेट मंत्रियों का अपने विभागों में 100 दिन का क्या एजेंडा व रोडमैप है, इस पर पीएम नरेंद्र मोदी सभी से रिपोर्ट लेंगे। इसी के तहत अन्य मंत्रियों के साथ ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी राज्य के शिक्षा विभागों के अधिकारियों व प्रतिनिधियों से बैठकें कर रहे हैं। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि सभी राज्यों में बारहवीं तक शत-प्रतिशत एनरोलमेंट का लक्ष्य पूरा करना चाहिए। शत-प्रतिशत एनरोलमेंट से तात्पर्य ये है कि जो बच्चा प्राइमरी स्कूल में पहली कक्षा में एडमिशन ले, वो बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी करके ही स्कूल से निकले। इससे ड्रॉप आउट की समस्या दूर होगी। शत-प्रतिशत एनरोलमेंट के रास्ते में जो बाधाएं हों, उन्हें राज्य सरकार के अधिकारी मिलकर दूर करें। हिमाचल प्रदेश में पहाड़ी जिले भी हैं और मैदानी जिले भी हैं। यहां हर जिला की अपनी-अपनी दिक्कतें हैं। ग्रामीण इलाकों में स्कूल दूर होने से कई बार बेटियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। कहीं, अभाव व गरीबी के कारण अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं करवा पाते। कई जगह शिक्षकों की कमी कारण होता है। ऐसे में सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रयास की जरूरत है। कई जगह कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्कूलों की संख्या पर्याप्त से अधिक है। ऐसे में स्कूलों को मर्ज किया जा सकता है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आर्बिट्रेशन अवार्ड की अनुपालना न करने पर लोक निर्माण विभाग के भावानगर, जिला किन्नौर स्थित कड़छम डिवीजन के कार्यकारी अभियंता कार्यालय का फर्नीचर कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं। हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने मैसर्स गर्ग संस एस्टेट प्रमोटर प्राइवेट लिमिटेड की अनुपालना याचिका की सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किए। कोर्ट ने अपने आदेशों में कहा समय पर अवार्ड पर अमल ना करने के पीडब्ल्यूडी के इस रवैये को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। इसका कारण यह भी है कि अवार्ड की अनुपालना का जिम्मा सरकारी विभाग हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग का है। अवार्ड का पालन न करने पर ब्याज का भुगतान करना पड़ता है। यह ब्याज स्पष्ट रूप से सामान्य करदाताओं की जेब से भरना होता है क्योंकि संबंधित विभाग के अधिकारी अवार्ड के कार्यान्वयन में देरी के लिए व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह नहीं हैं इसलिए कोर्ट ने अवार्ड की अनुपालना के लिए बार-बार दिए समय के बावजूद फिर से समय की मांग को खारिज करते हुए उपरोक्त आदेश जारी किए। उपरोक्त कार्यालय की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि मामला वित्त विभाग और योजना विभाग के पास धनराशि की मंजूरी के लिए लंबित है। लोक निर्माण विभाग के सम्बन्धित कार्यालय ने अदालत में कहा इसमें कुछ समय लगने की संभावना है और इस कारण से धनराशि जमा नहीं की जा सकी है। कार्यालय की ओर से अधिक समय की प्रार्थना की गई थी। हाई कोर्ट ने इसे नकार दिया और ऑफिस का फर्नीचर कुर्क करने के आदेश जारी किए।
** लंबे समय से सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री मौन क्यों है? **तानाशाही की सीमा लांघ चुके हैं मुख्यमंत्री, प्रतिशोध की भावना के साथ कर रहे हैं काम **विपक्ष के नाते हमारा काम है सरकार की तानाशाही के ख़िलाफ़ आवाज उठाना शिमला: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में खनन से जुड़े कारोबारियों के यहां हुई छपेमारी में घपले की पुष्टि हुई है। लेकिन इन कारोबारियों की मुख्यमंत्री से नज़दीकी की बातें समाने आ रही हैं। मुख्यमंत्री को इस मामले में प्रदेश की जनता को जवाब देना चाहिए कि जांच एजेंसियां जिनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की तैयारी कर रही हैं। उनका मुख्यमंत्री से क्या संबंध है? कांग्रेस सरकार ने विकास के बजाय घोटालों को तरजीह दी है। जनता के मुद्दे से सरकार को कोई सरोकार नहीं है। सरकार तानाशाही से विपक्ष की आवाज़ को दबाने का काम कर रही है। उपचुनाव जीतने के लिए सरकार ने सत्ता का जितना दुरुपयोग कर सकती थी, वह कर चुकी है। सरकार की तानाशाही के ख़िलाफ़ जनता में रोष है। जयराम ठाकुर ने कहा कि इस समय प्रदेश में भ्रष्टाचार पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। घोटालों से प्रदेश की छवि ख़राब हो रही है, माफिया सक्रिय हैं। क़ानून व्यस्था ध्वस्त है लेकिन मुख्यमंत्री अपनी सरकार बचाने में व्यस्त हैं। हाल ही में आयकर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के द्वारा हिमाचल प्रदेश के कुछ कारोबारियों पर अनियमितता की जाँच के लिए कार्रवाई की गई। समाचारों की मानें तो वहां पर भारी धांधली का मामला सामने आया है। ये जांच खनन कारोबारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर, शिकायतों और फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई है। शुरुआती जांच में ही ईडी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिससे पता चलता है कि ये दोनों सैकड़ों करोड़ के स्कैम में शामिल हैं। इतने गंभीर मामलों के आरोपी की हिमाचल के मुख्यमंत्री के साथ नज़दीकी की बात भी मीडिया के माध्यम से सामने आ रही है। इसके पहले भी अपने चहेतों के लिए नियमों में फेर बदल के आरोप भी उन पर लगते रहे हैं। किसी भी आरोप पर मुख्यमंत्री ने अपनी सफ़ाई नहीं दी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के लिए मित्रों की टोली ही सब कुछ है, वह उन्हीं के हित के लिए काम कर रहे हैं। प्रदेश के लोगों के जनहित के मुद्दे प्राथमिकता में है ही नहीं। जो सरकार जनहित के मुद्दों से हट जाए उसे सत्ता में रहने का हक़ नहीं है। यह सरकार बदलनी चाहिए। हम विपक्ष में हैं, हमारा काम है तानाशाह होती सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना। जनता के हितों के लिए काम न करने वाली सरकार से सवाल पूछना। जनहित के काम करने के लिए सरकार को बाध्य करना। वह हम करते रहेंगे। इस बार प्रदेश के लोग भी घोटाले, भ्रष्टाचार और उसमें मुख्यमंत्री कार्यालय की संबद्धता के बारे में जवाब मांग रहे हैं। मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश राज्य मिल्क फेडरेशन ने देसी घी, मक्खन समेत अन्य उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी कर दी है। अब उपभोक्ताओं को हिम घी प्रति लीटर 50 रुपये और हिम मक्खन प्रति किलो 30 रुपये महंगा मिलेगा। इस तरह अब घी 700 और मक्खन 580 रुपये प्रतिकिलो मिलेगा। दूध के दामों में बढ़ोतरी के बाद प्रबंधन ने अन्य उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। बढ़ी हुई दरें प्रदेशभर में लागू कर दी गई हैं। मिल्क फेडरेशन की ओर से कुल पांच उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। हिम पनीर अब 370 के बजाय 390 रुपये में मिलेगा। खुला पनीर प्रति किलो 340 के बजाय 360 रुपये में मिलेगा। पनीर में 20 रुपये प्रतिकिलो बढ़ोतरी हुई है। खुला दूध प्रति लीटर में दो रुपये बढ़ोतरी के साथ अब दाम 49 रुपये तय किए गए हैं। प्रबंधन की ओर से हिम खोया, बटर मिल्क, हिम दही, खुला दही, दूध पैकेट, फ्लेवर वाला दूध उत्पाद के दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई है। हिम खोया 340 रुपये प्रति किलो, बटर मिल्क 20 रुपये, हिम दही 70 रुपये, खुला दही 65 रुपये, दूध 60 रुपये, फ्लेवर वाला दूध 30 रुपये प्रतिलीटर मिलेगा। बता दें कि प्रदेशभर में मिल्क फेडरेशन के 150 से अधिक बिक्री केंद्र हैं।
हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर से संबंध रखने वाले वर्ष 2014 बैच के आईएएस अधिकारी और पूर्व जिलाधीश कुल्लू आशुतोष गर्ग को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का निजी सचिव नियुक्त किया गया है। आईएएस अधिकारी आशुतोष गर्ग के पास वर्तमान में विशेष सचिव कार्मिक का अतिरिक्त जिम्मा है। कुल्लू के उपायुक्त पद से स्थानांतरण के बाद आशुतोष गर्ग को विशेष सचिव वित्त नियुक्त किया गया था। बाद में कार्मिक विभाग भी दिया गया। इसके अलावा प्रबंध निदेशक सामान्य उद्योग निगम भी नियुक्त किए गए।
यूनिवर्सल कार्टन में वजन के हिसाब से किलो के रेट पर सेब बिकेगा। आढ़तियों को फड़ (ऑक्शन यार्ड) पर अनिवार्य तौर पर इलेक्ट्राॅनिक कांटे लगाकर पेटियों का वजन कर एवरेज के हिसाब से किलो की बोली लगा कर सेब बेचना होगा। बागवान भी बढि़या किस्म के यूनिवर्सल कार्टन में सेब की पैकिंग करें ताकि आढ़तियों और खरीदारों को नुकसान न हो। नियमों का उल्लंघन बागवान करे या आढ़ती सबके लिए कानून एक समान लागू होगा। यूनिवर्सल कार्टन को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति पर मंगलवार को बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने सचिवालय में सभी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट की। नेगी ने कहा कि जिन बागवानों के पास पिछले साल का कार्टन बचा है वह नाशपाती टेलिस्कोपिक कार्टन में पैक कर बेच सकते हैं। नाशपाती पर कोई रोक नही है। सेब के लिए यूनिवर्सल कार्टन की कोई कमी पेश नहीं आने दी जाएगी। एचपीएमसी के बिक्री केंद्रों पर यूनिवर्सल कार्टन उपलब्ध करवाना शुरू कर दिया गया है। निजी कंपनियों का कार्टन भी बाजार में उपलब्ध है। 99 फीसदी बागवान यूनिवर्सल कार्टन से संतुष्ट हैं सिर्फ एक फीसदी परेशान हैं। पिछले सीजन में जब किलो के हिसाब से सेब बिक्री शुरू की थी तब भी कुछ लोगों को समस्या थी, सरकार ने सख्ती की तो व्यवस्था लागू हो गई। बागवानों से ठगी के मामलों में एसआईटी कार्रवाई करती थी लेकिन इस सीजन से एसआईटी के साथ एपीएमसी को सक्रिय किया जाएगा। बागवानों की शिकायत आते ही एपीएमसी पुलिस में मुकद्दमा दर्ज करवाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बागवान भी अगर चैक से फसल का पैसा ले रहे हैं और चैक बाउंस हो जाता है तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करें। सेब सीजन में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम और तहसीलदारों को भी कार्रवाई की शक्तियां दी जाएंगी। सेब सीजन के दौरान ग्रामीण और मुख्य सड़कें बंद न होे इसका जिम्मा संबंधित डीसी और एसपी को सौंपा गया है। पराला मंडी की सड़क बन कर तैयार हो गई है। पीडब्ल्यूडी के साथ बैठक कर हर जगह मशीनें रखने के निर्देश दिए गए हैं।
हरित भारत संकल्प के तहत हिमाचल प्रदेश राजमार्ग प्राधिकरण प्रदेश में 50,000 पौधे रोप रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को हिमाचल प्रदेश के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित के नेतृत्व में शिमला-चंडीगढ़ हाईवे किनारे एक बूटा मां के नाम पौधारोपण अभियान शुरू किया। इस दौरान फोरलेन के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पौधे रौपे गए। उल्लेखनीय है कि एनएचएआई ने संपूर्ण पौधरोपण परियोजना के अंतर्गत अपनी फील्ड इकाई के प्रत्येक पौधे के स्थान, उसकी वृद्धि, प्रजातियों के विवरण, रखरखाव गतिविधियां, लक्ष्य और उपलब्धियों की निगरानी के लिए 'हरित पथ' नाम का एक मोबाइल एप विकसित किया है। क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता को बढ़ाने के लिए पौधारोपण अभियान शुरू किया गया है। लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए एक पेड़ मां के नाम महिम शुरू की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी राजमार्गों पर पौधे लगाए जा रहे हैं।
**कल- परसों प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी **लाहौल स्पीति और किन्नौर में बारिश न होने की संभावना **प्रदेश के 10 जिलों में येलो अलर्ट जारी हिमाचल प्रदेश के कई भागों में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार राज्य के कई हिस्सों में 16 जुलाई तक मानसून की बारिश का दौर जारी रहेगा। 11 व 12 जुलाई को कई भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। आज राजधानी शिमला व आसपास भागों में मौसम खराब बना हुआ है। उधर, बुधवार सुबह 10:00 बजे तक राज्य में 28 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। इसके अलावा 19 बिजली ट्रांसफार्मर व 16 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने 11 व 12 जुलाई को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, शिमला, सोलन व सिरमौर जिले के कई भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लाहौल-स्पीति व किन्नौर जिले के लिए किसी तरह का अलर्ट नहीं हैं।
शिमला: फल मंडी में सेब की दस्तक के साथ अब आवक बढ़ने लगी है। भट्टाकुफर फल मंडी में सोमवार को टाइडमैन सेब किलो के हिसाब से बिका। यूनिवर्सल कार्टन में करीब हजार पेटियां बिकने के लिए पहुंचीं। वहीं, आने वाले समय में सेब सीजन रफ्तार पकड़ेगा। शुरुआती दौर में कम संख्या में सेब की पेटियां फल मंडी पहुंच रही थीं। वहीं, अब सेब की आवक में बढ़ोतरी हुई है। सभी पेटियां मंडी में यूनिवर्सल कार्टन में ही पहुंच रही हैं। शुरुआती दौर में सेब का साइज छोटा है इसलिए कम दाम पर मंडियों में सेब बिक रहा है। फिलहाल 700 से 1500 रुपये प्रति पेटी मंडी में बिक रही है। वहीं, इस बार गर्मियों में बारिश ना होने के कारण सेब का आकर छोटा और रंग फीका भी है। इस वजह से बागवानों को सेब के दाम कम मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में अगर सेब का साइज व रंग बेहतर हुआ तो बागवानों को सेब के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा स्टोन फ्रूट व नाशपाती भी फल मंडी में पहुंच रही है। भट्टाकुफ़्फ़र फल मंडी के आढ़ती जयकुमार ने कहा "फल मंडी में अब सेब की आवक में बढ़ोतरी हो रही है। स्टोन फ्रूट के साथ नाशपाती भी मंडी में पहुंच रही है। उन्होंने कहा इस बार सूखे की मार सेब पर पड़ी है जिस वजह से सेब का साइज छोटा है। वहीं, अभी मार्केट में स्टोरेज किया हुआ सेब बिक रहा हैं। इस कारण भी बागवानों को दाम कम मिल रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में सेब के दाम में बढ़ोतरी होने की संभावना कम है। भट्टाकुफर फल मंडी में पहुंचा करसोग का सेब 50 से 70 रुपये प्रतिकिलो बिका। वहीं, नाशपाती भी 70 से 80 रुपये प्रतिकिलो बिकी। देहा बल्सन से नाशपाती बेचने पहुंचे बागवान शशिकांत ने कहा इस बार फसल कम है और नाशपाती के दाम सामान्य ही मिल रहे हैं। उन्होंने सरकार द्वारा यूनिवर्सल कार्टन के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा अभी शुरुआती दौर है। इन कार्टनों में फ्रूट की पैकिंग किस तरह की जानी चाहिए ये अभी बागवानों को समझना पड़ेगा। बागवान ने कहा पहले एक पेटी में 35 किलो तक सेब भर दिया जाता था। अब यूनिवर्सल कार्टन लागू होने से यह नहीं होगा जो एक बेहतर पहल है। इससे सभी बागवानों को फायदा होगा। बागवान ने एक पेटी पर ढुलाई व स्पलाई के खर्च को लेकर बोला "पहले एक पेट्टी पर करीब 300 रुपये का खर्च आता था लेकिन अब यह देखना होगा कि गाड़ी में ढुलाई पेट्टी के हिसाब से होती है या वजन के हिसाब से अगर पेटी के हिसाब से ढुलाई होती है तो बागवानों को इसका नुकसान होगा और अगर वजन के हिसाब से ढुलाई की जाती है तो बागवानों को इसका लाभ मिलेगा।
सतलुज नदी पर निर्माणाधीन 210 मेगावाट के लुहरी प्रोजेक्ट की नदी डायवर्जन टनल के आउटलेट के ऊपर जमीन धंसने से बड़ा गड्ढा हो गया है। घटना रविवार सुबह करीब सात बजे की है। राहत की बात यह है कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय वहां कोई कामगार नहीं था। बता दें कि करीब 20 दिन पहले डायवर्जन टनल के आउटलेट पर जमीन धंसने से भारी मलबा आ गया था और टनल बंद हो गई। अब टनल के ऊपर बड़ा गड्ढा होने से जहां प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं, टनल के ऊपर बसे देहरा पंचायत के आनस, जानस और बेईबील गांव के लोग दहशत में हैं। लोगों ने एसजेवीएन प्रबंधन से सुरक्षा की दृष्टि से ठोस शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग की है। नदी डायवर्जन टनल सतलुज के बहाव को मोड़ने के लिए बनाई गई ताकि प्रोजेक्ट के डैम का निर्माण किया जा सके। उधर, देहरा पंचायत के उपप्रधान यशपाल कटोच ने कहा कि इस संबंध में परियोजना प्रमुख से बात हुई है और विशेषज्ञों से निरीक्षण करवाने की मांग की गई है। घबराने की बात नहीं है। टनल के पोर्टल के पास बरसात का पानी घुस गया था, जिससे वहां पर छेद हो गया और कुछ हिस्सा धंस गया है, जो जल्द ठीक हो जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के कई भागों में मानसून की बारिश का दौर जारी है। राजधानी शिमला में भी सोमवार सुबह झमाझम बारिश हुई। राज्य में सुबह 10:00 बजे तक 70 सड़कों पर आवाजाही ठप रही। इसके अलावा 84 बिजली ट्रांसफार्मर व 51 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित चल रही हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से राज्य के कई भागों में 14 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। 11 व 12 जुलाई को कई भागों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
हिमाचल में बारिश जमकर हो रही है। हरियाणा में भी मानसून का आगमन हो चुका है। 1 जून से 7 जुलाई तक सामान्य से करीब 8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान 70.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 78.5 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है। हरियाणा के केवल 10 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं अंबाला, चरखी दादरी, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, सोनीपत व यमुनानगर में अभी भी लोगों को मानसून का इंतजार है। मौसम विशेषज्ञ का कहना है कि हरियाणा, एनसीआर व दिल्ली में मानसून की वैसी सक्रियता देखने को नहीं मिल रही है। अभी भी खंड बारिश की स्थिति बनी हुई है। वहीं 8 जुलाई यानी आज के मौसम की बात करें तो पश्चिमी विक्षोभ का असर प्रदेश के पश्चिमी, दक्षिणी व उत्तरी हिस्सों पर देखने को मिल सकता है। लोगों को उमसभरी गर्मी का भी सामना करना पड़ सकता है। वहीं हिमाचल में मानसूनी बारिश के चलते पूरा मौसम बदल गया है। लोगों पर एक साथ दो-दो आफत टूट पड़ी हैं। एक तरफ तेज बारिश के कारण भूस्खलन देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ कई इलाकों में पानी की सप्लाई बंद हो गई है। बीते 24 घंटे के मौसम की बात करें तो कई जिलों में जमकर बारिश हुई तो कहीं केवल बूंदाबांदी ही देखने को मिली।
सेब सीजन के रफ्तार पकड़ने से पहले ही सेब के मालभाड़े की दरें प्रति क्विंटल, प्रति किलोमीटर तय करने से बागवानों को झटका लगा है। पिकअप से सेब की ढुलाई का मालभाड़ा बीते साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी तक बढ़ा दिया है। प्रदेश सरकार ने इस सीजन में पहली बार सेब की ढुलाई की दरें प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर के आधार पर तय की हैं। हिमाचल में सेब ढुलाई की दरें अब तक पेटी के आधार पर तय होती थीं। उपमंडल से प्रदेश और बाहरी राज्यों की बड़ी मंडियों तक प्रति पेटी के आधार पर प्रशासन ढुलाई की दरें अधिसूचित करता था। इस साल सरकार ने उपायुक्तों को ढुलाई की दरें प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर के आधार पर तय करने के निर्देश दिए हैं। बागवानों का कहना है कि पिकअप के किरायों में अनुचित बढ़ोतरी की गई है। सेब उत्पादक क्षेत्रों से सड़कें संकरी होने के कारण 80 फीसदी सेब पिकअप गाड़ियों से ही लोकल मंडियों तक पहुंचाया जाता है। पिकअप के किराये बढ़ने से बागवानों की लागत और फसल को मंडियों तक पहुंचाने का खर्चा बढ़ जाएगा। संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि सेब सीजन के लिए पिकअप का प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर किराये का निर्धारण पुन: किया जाना चाहिए। बीते साल के मुकाबले दरों में करीब 20 फीसदी बढ़ोतरी से बागवानों पर अनावश्यक बोझ पड़ेगा। सोलन और परवाणू सेब मंडी में कारोबार की तैयारियां पूर्ण हो गई हैं। मंगलवार को पूजा-अर्चना के साथ यहां पर कारोबार भी शुरू हो जाएगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों से अर्ली किस्म का सेब पहुंचना भी शुरू हो गया है। जोकि अभी स्थानीय क्षेत्र में ही बिक रहा है। मंगलवार से बाहरी राज्यों के कारोबारी भी मंडी में पहुंचना शुरू हो जाएंगे। इसके लिए मंडी समिति की ओर से सभी तैयारी पूरी कर ली हैं। परवाणू सेब मंडी में मंगलवार को चौपाल, करसोग, कुमारसैन और ठियोग से सेब किस्म टाइडमैन और नाशपाती की पहली खेप पहुंचेगी। परवाणू मार्किट कमेटी के सचिव राजेश कुमार ने बताया कि सेब सीजन को लेकर सभी तैयारी पूरी कर ली हैं।
कालका-शिमला नेशनल हाईवे पांच पर बरसात में फिर खतरा मंडराना शुरू हो गया है। परवाणू से कैथलीघाट तक फोरलेन में पहाड़ियों पर बड़े-बड़े पत्थर अटके हैं। बारिश से ये पत्थर कभी भी सड़क पर आ सकते हैं। इसके अलावा मलबा गिरने का खतरा भी हर समय रहता है। मलबा और पत्थरों के सड़क पर आने से हाईवे फिर बाधित होने की आशंका है। आने वाले दिनों में बारिश में हाईवे पर चलना खतरे से खाली नहीं है। हालांकि परवाणू से सोलन और सोलन से चंबाघाट तक फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी की टीम की ओर से कर्मचारियों की तैनाती की है। यह कर्मचारी जैसे ही भूस्खलन होता है सड़क को सुचारु करेंगे, लेकिन इस बरसात में भी वाहन चालकों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। हैरत की बात तो यह है कि कई जगह सड़क किनारे बनी ड्रेनेज भी बंद हुई। वहीं, डक्ट में भी मिट्टी घुसी है जिसे अभी तक ठीक नहीं किया है। इस कारण पानी लोगों के घरों में जाने की भी आशंका है। परवाणू से कैथलीघाट तक फोरलेन को लेकर पहाड़ियों की कटिंग की गई है। चक्कीमोड़ में भी पहाड़ी खिसक सकती है। यहां पर केवल पांच मीटर का डंगा लगाया गया है। यह डंगा बड़ी पहाड़ी के लिए नाकाफी है। इसके अलावा जाबली, सनवारा, पट्टामोड़, सोलन-बड़ोग बाइपास, दोहरी दीवार, चंबाघाट, सलोगड़ा, कंडाघाट समेत दर्जन भर ऐसे क्षेत्र है जहां पर पहाड़ियों पर बड़े-बड़े पत्थर अटके हैं। गौरतलब है कि हाईवे पर पिछली बरसात के दौरान भी काफी नुकसान हुआ था। चक्कीमोड़ में पूरी सड़क ढह गई थी। इसके अलावा सनवारा और तंबूमोड़ में एक तरफ सड़क ढह गई थी। इसके अलावा कई जगहों पर पहाड़ी से भूस्खलन के मामले भी सामने आए थे। दोहरी दीवार पर भूस्खलन के बाद डंगा भी टूटा था। बीते दिनों हुई बारिश के दौरान भी सड़क पर मलबा और पत्थर गिरे थे। हालांकि अभी बरसात की शुरुआत है। लेकिन पहाड़ियां दरकनी शुरू हो गई हैं। दोहरी दीवार में सुबाथू की ओर जाने वाले रास्ते में भूस्खलन हुआ था। यहां पर पहाड़ी से बड़ा पत्थर सड़क पर आ गया था। इसके अलावा पट्टामोड़ में भी भूस्खलन हाल ही में हुआ है। कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर बीती बरसात में ढही सड़क एक वर्ष बाद भी वैसे ही पड़ी है। तंबूमोड़, चक्कीमोड़, सनवारा और पट्टामोड़ में एक लेन से दोनों ओर आवाजाही होती है। आगामी दिनों में यदि बारिश से भूस्खलन होता है तो यहां पर यह लेन भी बंद हो जाएगी। परवाणू-सोलन फोरलेन पर बरसात के मौसम से निपटने के लिए 120 कर्मचारी, छह जेसीबी की तैनात कर दी गई हैं। बरसात में यदि पहाड़ी से भूस्खलन होता है तो तुरंत वहां से मिट्टी हटा दी जाएगी। हाईवे बंद नहीं होने दिया जाएगा।
हिमाचल के स्कूलों में नशे के खिलाफ एंटी ड्रग स्क्वायड बनेंगे। बच्चों को नशे से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नशा विरोधी दस्तों के गठन की घोषणा की है। यह पहल हिमाचल प्रदेश एकीकृत नशा निवारण नीति को लागू करने के प्रयास के हिस्से के रूप में की गई है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने सभी उप निदेशकों को स्कूलों में एंटी ड्रग स्क्वायड का गठन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। नशा विरोधी दस्ते का नेतृत्व स्कूल के प्रिंसिपल करेंगे। इसमें 2-3 स्टाफ सदस्य और 2 से 3 छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे। छात्र प्रतिनिधियों को स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी), अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) या पंचायतों (ग्राम परिषदों) जैसे निकायों से चुना जा सकता है। स्कूलों को ऐसी प्रणाली स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां छात्र-कर्मचारी गुमनाम रूप से किसी भी ड्रग से संबंधित रिपोर्ट कर सकते हैं। मासिक आधार पर जानकारी की एंटी-ड्रग स्क्वायड समीक्षा करेंगे। जरूरी हुआ तो स्क्वायड आगे की जांच और कार्रवाई के लिए पुलिस को जानकारी देंगे। छात्रों को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में शिक्षित करने के लिए वाद-विवाद और निबंध लेखन प्रतियोगिता करवाई जाएगी। नशा विरोधी दस्तों को स्कूलों के भीतर, स्कूल आने-जाने के रास्तों और आसपास की दुकानों में संदिग्ध गतिविधि की निगरानी का काम सौंपा जाएगा। वहीं, दस्ते स्कूल समुदाय के भीतर संभावित ड्रग उपयोगकर्ताओं, विक्रेताओं या प्रभावित करने वालों के बारे में भी जानकारी एकत्र करेंगे। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे नशे के मामलों पर राज्यपाल भी चिंता जता चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि युवाओं को नशे की दलदल में डूबने से बचाने के लिए मिलकर सभी को प्रयास करने होंगे। युवा पीढ़ी के भविष्य को बचाने के लिए शिक्षण संस्थानों को भी आगे आना होगा और सख्त नियम बनाने होंगे। उन्होंने पुलिस को नशा तस्करों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश भी दिए हैं और स्कूल, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बाहर नशा बेचने वालों पर पैनी नजर रखने के लिए कहा गया है।
ऑफ सीजन में दिल्ली से शिमला का हवाई जहाज से सफर अब टैक्सी से भी सस्ता हो गया है। गगल से दिल्ली तक करीब 470 किमी सफर हवाई जहाज में सवा से डेढ़ घंटे में पूरा हो रहा है और किराया 2909 से शुरू होकर 4500 रुपये तक है। वहीं, टैक्सी से धर्मशाला से दिल्ली तक का सफर 13 से 17 हजार में पड़ रहा है। ऑफ सीजन में हवाई किराया कम होने से पैसे और समय दोनों की बचत हो रही है। दूसरी तरफ टैक्सी में सफर भी महंगा और समय भी करीब 7-8 घंटे लगता है। निचले क्षेत्रों में स्कूलों में छुट्टियां खत्म होने व बारिश का मौसम शुरू होने के कारण पर्यटन कारोबार में मंदी छा गई है। यहां होटलों में 40 से 50% की छूट होने के बाद भी ऑक्यूपेंसी 30 से 35 % तक ही दर्ज की जा रही है। वहीं, इसी मंदी और ऑफ सीजन का असर हवाई उड़ानों पर भी पड़ा है। पर्यटन सीजन में 15 से 20 हजार रुपये तक रहने वाले दिल्ली-धर्मशाला हवाई रूट का किराया 2909 रुपये से शुरू हो रहा है। हालांकि, टैक्सी में 13 से 17 हजार रुपये में चार लोग दिल्ली पहुंच सकते हैं, लेकिन उसमें समय अधिक लगेगा, जबकि हवाई जहाज मात्र सवा से डेढ़ घंटे में ही दिल्ली पहुंचाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग ने बताया कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने देहरा, हमीरपुर व नालागढ़ विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उप-चुनावों के दृष्टिगत 10 जुलाई, 2024 को प्रातः 7 से सायं 6.30 बजे तक किसी भी प्रकार के एक्जिट पोल के आयोजन, प्रकाशन तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा इसके प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने बताया कि मतदान समाप्ति के 48 घण्टे पूर्व की अवधि के दौरान किसी भी चुनाव संबंधी सामग्री, ओपिनियन पोल के परिणाम अथवा अन्य किसी भी प्रकार के सर्वेक्षण के प्रसारण पर भी प्रतिबन्ध रहेगा।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने द टाईम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सहायक सम्पादक आनन्द बोध के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनका आज इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला में हृदय गति रुकने के कारण निधन हुआ। राज्यपाल ने कहा कि आनन्द बोध ने पत्रकारिता के क्षेत्र में समर्पण से कार्य किया तथा समाज से जुड़े अहम् मुद्दों को समाचार पत्र के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि बोध राज्य के विभिन्न समाजहित से जुड़े मुद्दों एवं राजनीतिक घटनाक्रमों के बारे में गहन समझ रखते थे। पत्रकारिता जगत में उन्हें तथ्य आधारित पत्रकारिता के लिए सदैव याद रखा जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि आनन्द बोध का निधन समाज के लिए विशेष तौर पर मीडिया जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत पत्रकार की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने आनन्द बोध के आकस्मिक निधन को मीडिया जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि बोध हिमाचल से संबंध रखते थे तथा उन्होंने राज्य में पत्रकारिता के क्षेत्र में लम्बी सेवाएं दी हैं, इस कारण उन्हें हिमाचल से जुड़े मुद्दों की गहन समझ थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोध ने हिमाचल के हितों से जुड़े अनेकों मुद्दों को समाचार पत्र के माध्यम से लोगों के बीच रखा, जिससे उनका हिमाचल के विकास के प्रति समर्पण दिखता है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
2008 बैच के एचएएस अधिकारी श्रवण मांटा, जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक के रूप में सेवारत हैं, को हिमाचल प्रशासनिक अधिकारी संघ (एचएएस) का अध्यक्ष चुना गया तथा प्रशांत सिरकेक, जो कि हिपा के अतिरिक्त निदेशक के रूप में सेवारत हैं, को शनिवार को हाइब्रिड मोड के माध्यम से आयोजित संघ की वार्षिक आम सभा की बैठक में महासचिव चुना गया। एचएएस संघ एचएएस अधिकारियों का एक पंजीकृत निकाय है, जो सेवा के मानक और सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए सुझावात्मक भूमिकाओं के साथ-साथ सेवा अधिकारियों की सेवा शर्तों, कैरियर की प्रगति और कल्याण की देखभाल करता है। एचएएस अधिकारी राज्य के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आपदाओं के दौरान अधिकारियों की भूमिका अनुकरणीय थी। पिछले साल हुई आपदा के दौरान सेवा अधिकारियों द्वारा 20 लाख से अधिक का योगदान दिया गया था।
उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने द टाईम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सहायक सम्पादक आनन्द बोध के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि श्री बोध ने अपना जीवन पत्रकारिता के उच्च सिद्धान्तों को बनाए रखने के लिए समर्पित किया है। आज श्री बोध का इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला में हृदय गति रुकने के कारण निधन हुआ। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि एक पत्रकार के नाते उन्हें भी आनन्द बोध सहित वरिष्ठ एवं समर्पित पत्रकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जिससे उन्हें पत्रकारों द्वारा जनता को जागरूक करने के प्रयासों के पीछे के संघर्ष को जानने का अवसर भी प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि बोध ने बतौर पत्रकार हिमाचल के महत्त्वपूर्ण मुद्दों को बखूबी जनता के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आनन्द बोध सदैव तथ्य पर आधारिता पत्रकारिता के पक्षधर रहें, जिसके कारण उन्होंने पत्रकारिता क्षेत्र में सम्मान पाया। उनका जाना पत्रकारिता क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर तथा निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क राजीव कुमार ने द टाईम्स ऑफ इंडिया के वरिष्ठ सहायक सम्पादक आनन्द बोध के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बोध को हिमाचल के पत्रकारिता जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सदैव स्मरण किया जाएगा। आज उनका इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल शिमला में हृदय गति रुकने के कारण निधन हुआ। उन्होंने कहा कि आनन्द बोध को तथ्य आधारित पत्रकारिता एवं हिमाचल के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सदैव याद किया जाएगा। उनका जाना पत्रकारिता क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने परमपिता परमात्मा से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।
हिमाचल प्रदेश सरकार की इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना को लेकर युवतियां और महिलाएं उत्साहित हैं। योजना के तहत 1500 रुपये के फार्म जमा करवाने के लिए इन दिनों जिला कल्याण कार्यालय (डीडब्लयूओ) में महिलाओं की लाइनें लग रही हैं। जिला कल्याण कार्यालय में शिमला ग्रामीण और शिमला शहरी के तहसील कल्याण कार्यालय हैं। यहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में महिलाएं आवेदन जमा करवाने पहुंच रही हैं। कई बार महिलाओं की संख्या अधिक होने से लाइनें कार्यालय के बाहर तक पहुंच रही हैं। जिला कल्याण विभाग के मुताबिक 17 मार्च से 30 जून तक जिलाभर से करीब 70,532 आवेदन मंजूरी के लिए पहुंचे हैं। इसमें चौपाल से सबसे ज्यादा 11,891, ठियोग से 9,377 और रोहड़ू से 7,167 आवेदन आए हैं। इसके अलावा रामपुर से 7,093, चिड़गांव से 5,724, कुमारसैन से 5,707, शिमला ग्रामीण से 5,652, कोटखाई से 4,500, जुब्बल से 4,189, सुन्नी से 3,779, ननखरी से 3,625, शिमला शहरी से 1,281 और डोडरा-क्वार से 547 आवेदन आए हैं। अब आवेदनों की छंटनी की जा रही है। प्रक्रिया पूरी होते ही इन्हें भी लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। जिला कल्याण अधिकारी केआर चौहान के मुताबिक योजना के तहत महिलाओं के आवेदनों की छंटनी प्रक्रिया जारी है। सुख सम्मान निधि योजना के तहत जिले में करीब 2,569 महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। महिलाओं को अप्रैल से जून तक के प्रतिमाह 1500-1500 रुपये जारी किए हैं। प्रदेश सरकार ने 14 जून को जिले में करीब 2,569 महिलाओं को योजना के तहत तीन माह की राशि एकमुश्त जारी कर एक करोड़ 15 लाख 60 हजार 500 रुपये की धनराशि वितरित की थी। विभाग के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले (16 मार्च तक) फॉर्म जमा करवाने वाली महिलाओं को यह राशि जारी की है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला शहर में शौचालय का प्रयोग करने पर महिलाओं से अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने शौचालय का रखरखाव करने वालों को निर्देश दिए हैं कि शौचालय के भीतर शिकायत पत्र में मोबाइल नंबर लिखा जाए। अगर किसी महिला से यूरिन के लिए 5 या कोई पैसे मांगे जाएं तो उसकी शिकायत दर्ज कराई जाए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि अदालत के आदेशों के बावजूद भी अगर वसूली की जाएगी तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में शौचालय की खस्ता हालत पर हाईकोर्ट ने विभाग के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पार्टी बनाया है। इस मामले में अदालत की ओर से नियुक्त किए गए न्याय मित्र देवेन खन्ना ने अदालत को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि वे आईजीएमसी के यूरोलॉजी विभाग में दाखिल हैं। महिलाओं और पुरुषों के लिए यहां पर कोई अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को इन्फेक्शन की संभावना बनी रहती है। टॉयलेट की हालत भी बहुत बदत्तर है। मरीजों को इससे काफी परेशानी हो रही है। अदालत ने आईजीएमसी विभाग के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और प्रदेश स्वास्थ्य सचिव को इस मामले में अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण योजना में पौधारोपण के लिए 150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस राशि का उद्देश्य राज्य में हरित क्षेत्र का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। इस परियोजना के अंतर्गत 50 करोड़ रुपये राज्य वन विभाग को आवंटित किए गए हैं। यह राशि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पौधरोपण और वन संरक्षण के कार्यों के लिए प्रयोग की जाएगी। वन विभाग ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए 1.8 करोड़ पौधों के रोपण की योजना बनाई है, जो 76 वन बीटों में फैले होंगे। करीब 1,500 हेक्टेयर में पौधारोपण किया जाएगा। इस वनीकरण अभियान के माध्यम से, सरकार का लक्ष्य है कि वन आवरण को बढ़ाकर पर्यावरणीय संतुलन को बहाल किया जा सके और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम किया जा सके। प्रदेश में पिछले साल आपदा के कारण पौधरोपण नहीं हो पाया था। विभाग का इस साल उस टारगेट को भी पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये की राशि प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैंपा) को आवंटित की गई है। कैंपा का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में पौधरोपण करना है, जहां वन क्षेत्र को नुकसान हुआ है। यह राशि विभिन्न परियोजनाओं और योजनाओं के माध्यम से वनों के पुनर्वास के लिए प्रयोग की जाएगी। कैंपा के माध्यम से राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई की जा सके और जैव विविधता की रक्षा की जा सके। प्रधान मुख्य अरण्यपाल राजीव कुमार ने बताया कि प्रदेश में पौधरोपण के जिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। अभियान राज्य के पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान न केवल वन आवरण को बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा। जंगलों में आग के खतरे को देखते हुए वन विभाग ने चीड़ के पौधे नहीं लगाने का निर्णय लिया है। विभाग ने देवदार, अखरोट, कवार, चमेली, बान, शहतूत और ब्रास के पौधे तैयार किए हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान में विभिन्न प्रकार के स्थानीय और दुर्लभ प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल कैंपा गिरिश होसुर ने बताया कि निर्माण कार्यों के लिए काटे गए सभी पौधों की भी भरपाई की जाएगी। कैंपा में 3,000 हेक्टेयर में नेट प्रेसेंट के लिए, 900 हेेक्टेयर में साइट के हिसाब से और 1,000 हेक्टेयर में निर्माण कार्यों के कारण नष्ट हुए जंगलों की भरपाई के लिए पौधे लगाए जाएंगे। कैंपा को अप्रैल में पेड़ लगाने की अनुमति मिल गई थी और पेड़ लगाने के लिए योजना बना ली गई है।
हिमाचल में सेब कारोबार से जुड़े लाखों लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए एचपीएमसी आज से कार्टन की सप्लाई शुरू कर देगा। इसके लिए पहले चरण में करसोग सहित कम ऊंचाई वाले ऐसे क्षेत्रों में सप्लाई भेजी जाएगी, जहां सेब की फसल तैयार है। इसके बाद बागवानों की मांग के मुताबिक प्रदेश के मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों में एचपीएमसी विक्रय केंद्रों में कार्टन उपलब्ध कराया जाएगा। प्रदेश में शिमला, रोहड़ू, जुब्बल, गुम्मा, रिकांगपिओ, रामपुर, चैल चौक व चिंडी आदि सेब उत्पादन करने वाले क्षेत्रों में एचपीएमसी के कुल 12 फंक्शनल विक्रय केंद्र हैं। जहां पर सेब सीजन में कार्टन की अधिक मांग रहती है। ऐसे में बागवानों को इन सभी विक्रय केंद्रों में डिमांड के मुताबिक कार्टन उपलब्ध होगा। इसके लिए सरकारी उपक्रम एचपीएमसी ने शॉर्ट लिस्ट की गई तीन कंपनी शिवालिक कंटेनर्ज, जेज पैकर्स और जसमेर मेकर्स को पहले ही सप्लाई आर्डर जारी किया है। वहीं, बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के मुताबिक बागवानों को यूनिवर्सल कार्टन की कोई कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। बागवानी पर हर साल लागत बढ़ने से परेशान बागवानों के लिए राहत की बात है कि इस बार कार्टन पिछले साल की तुलना में 7 रुपए तक सस्ता मिलेगा। जीएसटी काउंसिल ने कार्टन पर जीएसटी 18 से घटाकर 12 फीसदी तय किया है। ऐसे में इस साल कार्टन पर जीएसटी पिछले साल के मुकाबले में 6 फीसदी कम लागू होगा, जिसका फायदा हिमाचल में लाखों बागवानों को होगा। एचपीएमसी ने यूनिवर्सल कार्टन के दाम फाइनल कर दिए हैं। इसके मुताबिक बागवानों को अलग-अलग कीमत में ब्राउन और सफेद कार्टन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसका न्यूनतम मूल्य 47.75 रुपए और अधिकतम मूल्य 56 रुपए तय किया गया है। जिस पर जीएसटी अलग से वसूला जाएगा। ऐसे में इस बार बागवानों को दोहरी राहत मिलने वाली है। एक तो इस बार मंडियों में यूनिवर्सल कार्टन में 20 किलो पैकिंग में सेब बिकेगा। जिससे बागवानों को अब पहले की तरह अधिक पैकिंग में सेब बेच कर नुकसान नहीं उठाना होगा। वहीं, इस बार बागवानों को यूनिवर्सल कार्टन पिछले सालों के मुकाबले में 3.50 से 7.50 रुपए सस्ता मिलेगा। यूनिवर्सल कार्टन में अब 20 किलो सेब ही भरा जाएगा। इससे पहले टेलीस्कोपिक कार्टन में प्रति पेटी 7 से 8 ट्रे सेब भरा जाता था, जिसका प्रति पेटी वजन भी 30 किलो के करीब रहता था, लेकिन मंडियों में बागवानों को 24 किलो पेटी के हिसाब से ही सेब की कीमत दी जाती थी। इस कारण अधिक पैकिंग होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। बागवानों को नुकसान न हो इसके लिए यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य किया गया है। ये कार्टन सिंगल बॉक्स का होगा। इसका साइज लंबाई में 500 एमएम, चौड़ाई में 300 एमएम और ऊंचाई में 310 एमएम होगा, जिसे घटाया और बढ़ाया नहीं जा सकता है। जिस कारण इसमें 20 किलो ही सेब भरा जाएगा। इससे मंडियों में वजन को लेकर इस बार विवाद होने से बचा जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश में बरसात के चलते राजधानी शिमला की मंडियों में सब्जियों की आवक घट गई है। इसके कारण सब्जियों के दामों में उछाल आ गया है। एक दिन में ही सब्जियां 10 से 20 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई हैं। शुक्रवार को लोअर बाजार सब्जी मंडी में जो टमाटर 40 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, शनिवार को उसकी कीमत 60 से 80 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। इसके अलावा 80 रुपये में बिकने वाली फूलगोभी 100, 30 से 40 में बिकने वाली भिंडी 40 से 50 और 30 से 40 में रुपये में बिकने वाली लौकी के दाम 40 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। हालांकि मटर, प्याज और आलू के दाम स्थिर है। लोअर बाजार सब्जी मंडी में मटर 120 से 160, प्याज 50 और आलू 35 से 50 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। सब्जियों के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। सब्जी विक्रेता बोले कि सब्जी मंडी में मांग के अनुसार कम सब्जियां आ रही हैं। बरसात की वजह से फसल खराब हो रही है, जिसके चलते सब्जियों के दाम बढ़ना शुरू हो गए हैं।
**कई जगह जलभराव की स्थिति उत्पन हिमाचल प्रदेश के कई भागों में भारी बारिश दर्ज की गई है। इससे जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में शनिवार सुबह 10:00 बजे तक एक नेशनल हाईवे व 150 सड़कों पर आवाजाही ठप रही। सबसे ज्यादा सड़कें मंडी व सिरमौर जिले में ठप हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में 334 बिजली ट्रांसफार्मर भी ठप पड़े हैं। वहीं 55 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। जिला सिरमौर में शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा टल गया है। जिले के रेणुका विधानसभा क्षेत्र में रेणुका-संगड़ाह सड़क पर कालथ के समीप बस पर एक चट्टान गिर गई। हादसे में बस चालक और एक महिला को चोटें आई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के संगड़ाह उपमंडल के कालथ के समीप शनिवार को एक निजी बस पर चट्टान गिरने के बाद बड़ा हादसा होने से टला है। जिला कुल्लू व लाहौल में तीसरे दिन भी बारिश का दौर जारी रहा। वहीं, जिला कुल्लू के साथ लाहौल घाटी में रातभर जमकर बारिश हुई। 13050 फुट ऊंचे रोहतांग दर्रा में फाहे गिरने से मौसम कूल-कूल हो गया है। ब्यास के साथ चंद्रा, पार्वती नदी सहित नाले भी उफान पर हैं। बारिश से कुल्लू जिले में आठ सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि बारिश के बाद बंजार बस स्टैंड तालाब बन गया है। बस स्टैंड में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने से यहां पर यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर किसान व बागवान बारिश के बाद गदगद हैं। बारिश ने किसानों व बागवानों के चेहरों पर चिंता की लकीरों को मिटा दिया हैं। अब जहां बिजाई का कार्य शुरू होगा। वहीं सेब, नाशपाती, जापानी फल, मेरीपोजा, प्लम आदि के लिए बारिश लाभकारी साबित होगी। मंडी जिले में भारी बारिश से तबाही हुई है। भूस्खलन से जगह-जगह 112 सड़कें बंद हैं। मंडी-पठानकोट-हाइवे पर गलू के समीप पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ है। चंडीगढ़-मनाली एनच पर मंडी-पंडोह, छह मील के पास पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं। सुबह सात मील के पास एनएच ठप रहा। भूस्खलन के बीच मंडी-पंडोह का सफर जोखिम भरा हो गया है। फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। कांगड़ा जिले के शाहपुर में नेशनल हाईवे को भारी बारिश के काफी नुकसान हुआ है। हाईवे जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं कई जगह जलभराव हुआ है।
**परिणाम के आधार पर मिलेंगे शिक्षक पुरस्कार हिमाचल प्रदेश में विद्यार्थियों की कम संख्या वाले स्कूल मर्ज किए जाएंगे। ऐसे स्कूलों को पहले चरण में मर्ज किया जाएगा, जहां आसपास में भी स्कूल स्थित होंगे। इन स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को साथ लगते स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य सचिवालय में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया। शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करने के लिए यह फैसला लेना जरूरी हो गया है। शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि अब राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए शिक्षकों के चयन का मुख्य आधार परीक्षा परिणाम रहेगा। अन्य गतिविधियों को भी देखा जाएगा, लेकिन प्राथमिकता सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाले शिक्षकों को ही दी जाएगी। बैचवाइज आधार पर चयनित करीब 2000 जेबीटी और टीजीटी को इसी माह नियुक्तियां देने के शिक्षा मंत्री ने बैठक में निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर ही नवनियुक्त शिक्षकों को स्टेशन अलॉट कर दिए जाएंगे, जिन स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक हैं और विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां नए शिक्षकों को पहली नियुक्ति दी जाएगी। बैठक के दौरान एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने के लिए पुराने नियमों में संशोधन करने के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिए गए। राज्य सरकार ने एसएमसी शिक्षकों को नियमित करने को फैसला लिया है। एसएमसी शिक्षक पहले सीधी सीमित भर्ती (एलडीआर) से अनुबंध पर आएंगे और फिर दो साल बाद नियमित होंगे। बैठक के दौरान प्रिंसिपलों की पदोन्नति सूची जल्द जारी करने पर भी सहमति बनी। रोहित ने कहा कि वर्ष 2022 के अंत तक शिक्षा विभाग में करीब 15 हजार पद रिक्त थे। मुख्यमंत्री सुक्खू ने 6 हजार पद भरने को मंजूरी दी है। 2000 पद एक सप्ताह में भर दिए जाएंगे। बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
**गर्जन और बिजली को लेकर भी अलर्ट हुआ जारी हिमाचल प्रदेश में मौसम लगातार करवट ले रहा है। बीते दिनों जहां बारिश के कम होने की संभावना जताई गई थी, तो अब वहीं बारिश को लेकर मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में 3 जुलाई की रात से मौसम ने करवट ली है और बारिशों का दौर एक बार फिर शुरू हुआ। बारिश के कारण प्रदेश के कई स्थानों में तबाही का मंजर भी देखने को मिला है। जानकारी के अनुसार, 115 से ज्यादा सड़कें यातायात के लिए बंद कर दी गई हैं। कई जगह सड़कें धंस गई हैं। कई स्थानों पर बारिश से भूस्खलन हुआ है। राज्य में 212 ट्रांसफार्मर काम नहीं कर रहे। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आज और कल भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही गर्जन और बिजली को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, इसके बाद मौसम के सामान्य रहने के आसार है। इस दौरान बारिशों का दौर थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन अधिकतर स्थानों ने बादल छाए रहेंगे।
नालागढ़ : नालागढ़ में भाजपा के प्रत्याशी केएल ठाकुर के प्रचार अभियान में पहुंचे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार के घोटाले सामने आने शुरू हो गए हैं। हर दिन नए नए मामले उजागर हो रहे हैं। ये तो अभी शुरुआत है। कांग्रेस सरकार प्रदेश में घोटालों का रिकॉर्ड बनाने वाली है। हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में 60 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले का मामला सामने आया है। सरकार ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए 175 करोड़ के टेंडर को 240 करोड़ रुपए में आवंटित किया है। 60 करोड़ रुपए का यह घोटाला किसे लाभ पहुंचाने के लिए, किसके इशारे पर किया गया। सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। ये कांग्रेस सरकार का कोई पहला घोटाला नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी कई घोटाले सामने आ चुके हैं। जहाँ अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने नियमों की अनदेखी की और अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना की। मुख्यमंत्री को इन सवालों के जवाब देना चाहिए। सरकार प्रदेश के विकास की बजाय प्रदेश को पीछे ले जाने का काम कर रही है। प्रदेश सरकार की रूचि सिर्फ घोटालों में है सरकार का प्रदेश के लोगों से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
शिमला ज़िला के जुब्बल तहसील के अंतर्गत सोलंग पंचायत में देवता कैलाथ का नया मंदिर बनने के बाद भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलश लगने और शिखा पूजन के साथ ही कैलाथ देवता अपने नए मंदिर में विराजमान हुए। कैलाथ देवता पबासी महासू के साथ सालंगित पूजित वीर है। कैलाथ महाराज को तीव्र वेग का देवता भी कहा जाता है तथा पांशबील व जौनसार बावर के देवघार क्षेत्र में हजारों लोग महाराज को मानते है। कैलाथ के नए मंदिर में विराजमान होने के बाद देवता के गुर एम०आर मूंगटा ने बताया की महाराज अत्यंत शक्तिशाली व भक्त वत्सल है। उन्होंने कहा की इस क्षेत्र में ये महाराज का पहला मंदिर है, कैलाथ चार महासू के एक भाई पबासी के पालकी से आगे चलते हैं। कैलाथ की पौंड सभी वीर,नौड़ तथा भौड़ से तीव्र है और कैलाथ पहले देऊबन के प्राचीन राजा भी रहे हैं।गौरतलब है की हिमाचल के जुब्बल व कई अन्य क्षेत्रों के अलावा जौनसार बावर व कश्मीर से लेकर दूर-दूर तक महासू महाराज की ख्याति है। महासू महाराज के मंदिर के लिये भारत के राष्ट्रपति भवन से भी नमक का चढ़ावा आता है ।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के बिजनेस स्कूल में शैक्षणिक सत्र 2024-26 के लिए एमबीए कोर्स में प्रवेश के लिए ली एचपीयू मेट-2024 के प्राप्तांक के आधार पर सब्सिडाइज्ड और नॉन सब्सिडाइज्ड श्रेणी की सीटों के लिए ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू का शेड्यूल तय कर जारी कर दिया गया है। बिजनेस स्कूल के निदेशक प्रो. दिनेश कुमार ने इस शेड्यूल को जारी किया है। सब्सिडाइज्ड श्रेणी की तय की गई सीटों के लिए आठ से 11 जुलाई संस्थान में जीडी और इंटरव्यू होगा। इसके लिए 203 पात्र विद्यार्थियों की सूची जीडी इंटरव्यू की तिथि और अलग-अलग बनाए गए समूहों के साथ विवि की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इस प्रक्रिया में भाग लेने आने वाले विद्यार्थियों को आवेदन फार्म की प्रति, सभी शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण और उसकी प्रति, मूल हिमाचली प्रमाण पत्र क अलावा अलावा एससी, एसटी, ईडब्लू एस, दिव्यांग श्रेणी, सिंगल गर्ल्स चाइल्ड और अन्य आवेदन फार्म में भरी गई श्रेणी के दस्तावेज भी साथ लाने होंगे। एमबीए की नॉन सब्सिडाइज्ड श्रेणी की सीटों के लिए 15 से 20 जुलाई तक संस्थान में ग्रुप डिस्कशन और साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। इसके लिए कुल 600 विद्यार्थियों को जीडी इंटरव्यू के लिए नाम और रोलनंबर के साथ लिस्ट किया गया है। छात्र इसे विवि की वेबसाइट पर देख सकते हैं।
हमीरपुर जिले के नादौन में आयकर विभाग की तीन कारोबारियों के घरों और अन्य ठिकानों पर छापामारी दूसरे दिन भी जारी है। टीम ने आभूषणों को जांचने के लिए जौहरी बुलाए गए हैं। नादौन में पिछले 30 घंटों से अधिक समय से आयकर विभाग की छापामारी जारी है। अन्य दस्तावेज और जमीन तथा ठेकों का ब्यौरा कब्जे में लिया गया है। बता दें कि कल यानी गुरुवार को विभाग के अधिकारी जेसीबी में सवार होकर धनोट में ब्यास नदी के साथ लगती खड्ड पार कर एक कारोबारी के क्रशर पर भी पहुंची। इस दौरान क्रशर से जुड़ी संपत्तियों की सख्ती से जांच की। इस दौरान कारोबारियों और उनके परिवार के सदस्यों के फोन, लैपटॉप कब्जे में ले लिए गए। देर शाम तक रेड जारी रही। वहीं टीम के सदस्य आज सुबह फिर से जाँच पड़ताल में जुटे। हालाँकि अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौके से क्या बरामद किया है। सूत्रों के मुताबिक ईडी की रडार पर और भी कई लोग है।
हिमाचल प्रदेश के कई भागों में बीती रात से बादल झमाझम बरस रहे है । मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार दौरान मानसून की गतिविधि की तीव्रता और वितरण में वृद्धि होने की संभावना है। इस दौरान ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, चंबा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में एक या दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। 8 जुलाई से वर्षा की गतिविधि में कमी आने की संभावना है। इस अवधि के दौरान औसत न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे रहने की संभावना है। आज भी प्रदेश के कई भागों में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। शिमला में भी मौसम खराब बना हुआ है। राज्य में 11 जुलाई तक मौसम खराब रहने के आसार हैं।भारी बारिश के चलते जगह-जगह भूस्खलन से शुक्रवार सुबह 10:00 बजे तक राज्य में 77 सड़कों पर आवाजाही ठप रही। सबसे अधिक सड़कें मंडी जिले में बंद हैं। वहीं राज्य में 236 बिजली ट्रांसफार्मर भी प्रभावित हैं। इसके अतिरिक्त 19 जल आपूर्ति योजनाएं भी ठप चल रही हैं।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआती बारिश के साथ ही तबाही की दस्तक होने लगी है। पिछले हफ्ते हल्की फुहारों के साथ आए मानसून के बाद प्रदेशभर में नदी नाले उफान पर हैं। उधर मौसम विभाग की ओर से चार दिन भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। प्रदेश में पहली बरसात के बाद ही आम जनजीवन पर असर पड़ा है। कई सड़कें बंद हैं तो कई जगह बिजली-पानी की किल्लत शुरू हो गई है। शुरूआती बारिश के बाद हिमाचल प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के आंकड़े सामने आए हैं। मानसून की पहली बारिश का सबसे ज्यादा असर मंडी जिले में दिख रहा है। प्रदेशभर में कुल 115 सड़कें बंद हैं। इनमें से मंडी जिले में 107 सड़कें बंद हैं। मंडी जिले के सराज में सबसे ज्यादा 39 सड़कें बंद हैं। वहीं करसोग में 28, थलौट में 22, सुंदरनगर में 9, नेरचौक में 5 और मंडी, गोहर सब डिविजन में 2-2 सड़कें बंद हैं। मंडी में ही चंडीगढ़-मनाली हाइवे का एक हिस्सा धंस रहा है। पंडोह डैम के पास हाइवे पर बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे हाइवे पर खतरा मंडरा रहा है। मंडी के अलावा चंबा जिले में 4, सोलन जिले में 3 और कांगड़ा के इंदौरा में एक सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद है। बारिश के बाद प्रदेशभर के कई इलाकों में बिजली की समस्या हो गई है। हिमाचल प्रदेश स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक प्रदेशभर में गुरुवार सुबह तक 212 ट्रांसफार्मर बाधित हुए इनमें से सबसे ज्यादा 147 मंडी जिले में हैं। इसके अलावा कुल्लू में 42, चंबा में 16, सोलन में 7 ट्रांसफार्मर्स पर असर पड़ा है और इन इलाकों में बिजली बाधित हुई हैं। पहली बारिश से पेयजल सप्लाई योजनाओं पर भी असर पड़ा है। प्रदेशभर में 17 योजनाएं बाधित हुई हैं और ये सभी शिमला जिले में है। ठियोग सब डिविजन में 10 और कुमारसैन सबडिविजन में 7 पेयजल योजनाएं बाधित हुई हैं। गौरतलब है कि पिछले साल आई आपदा का दंश सबसे ज्यादा मंडी जिले ने ही झेला था। इस बार भी अब तक मानसून की शुरूआती बारिश में मंडी जिले में भूस्खलन से लेकर बाढ़ जैसे हालात देखने को मिले हैं। मंडी जिले के सराज में मंगलवार रात आई तेज बारिश के बाद बुधवार सुबह जो नजारा दिखा उसने लोगों को पिछले साल की यादें ताजा करवा दी थी।यहां अनाह ग्राम पंचायत में तेज बारिश के बाद नाले में बाढ़ आ गई जिसके कारण गाड़ियां मलबे में दब गई और कई घरों को भी नुकसान हुआ। पहली बारिश के बाद नाले में आई बाढ़ के कारण कई घरों पर खतरा मंडरा रहा है। उधर करसोग में बीती रात मूसलाधार बारिश के बाद फ्लैश फ्लड जैसे हालात हो गए। बाढ़ के साथ आए मलबे ने एचआरटीसी की बसों से लेकर, पार्किंग में खड़ी कार और जीप को भी जद में ले लिया। कई वाहन मलबे में फंस गए, जिससे वाहनों और सड़क को भी नुकसान हुआ है। बीती रात को हुई जमकर बारिश के बाद राजधानी शिमला में भी चक्कर क्रॉसिंग पर भारी मलबा सड़क पर आ गया, जिसके कारण दोनों तरह से वाहनों की आवाजाही घंटों तक बंद रही। PWD विभाग के मुताबिक जेसीबी की मदद से जल्द ही मलबे को हटा लिया जाएगा। इसके अलावा हिमलैंड-खलीणी लिंक रोड़ पर भी पेड़ टूटकर आ गिरा, जिससे सड़क पर आवाजाही बाधित हो गई। मौसम विभाग की ओर से बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। आज प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले एक हफ्ते तक बारिश की चेतावनी जारी की है। खासकर 7 जुलाई तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट है और पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को नदी नालों के किनारे ना जाने की अपील की गई है। शुरुआती बारिश से ही इस बार लोग डरे हुए हैं क्योंकि बीते साल हिमाचल ने बीते 5 दशक से सबसे भयानक आपदा देखी थी, जिसमें 500 से ज्यादा लोगों की मौ*त हुई थी, जबकि हजारों लोगों ने अपने आशियाने गंवाए थे। हिमाचल सरकार के मुताबिक पिछले साल हुई तबाही से प्रदेश को 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ था।
**मंडियों में पहली बार कंपटीशन में बिकेगा सेब हिमाचल की फल मंडियों में बाहरी राज्यों के लदानी (खरीदार) भी सीधे बागवानों से सेब की खरीद कर सकेंगे। सरकार मंडियाें में आढ़तियों का एकाधिकार खत्म करने जा रही है। लदानियों को मंडियों में दुकानें उपलब्ध करवाने की तैयारी की जा रही है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी के निर्देशों पर कृषि उपज विपणन बोर्ड ने यह व्यवस्था बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी हफ्ते बागवानी सचिव के साथ इसे लेकर बैठक आयोजित होनी है। लदानियों को दुकानें मिलने पर आढ़तियों और लदानियों में प्रतिस्पर्धा से बागवानों को सेब के ऊंचे दाम मिलेंगे। मौजूदा समय में कृषि विपणन बोर्ड के अंतर्गत प्रदेश में चल रही 10 एपीएमसी की मंडियों में सेब कारोबार के लिए आढ़तियों को दुकानें उपलब्ध करवाई गई हैं। आढ़तियों को एपीएमसी एक्ट के तहत लाइसेंस जारी किए जाते हैं, जिसका सालाना नवीकरण करना अनिवार्य होता है। मंडियों के बाहर कारोबार के लिए निदेशक कृषि विभाग की ओर से लाइसेंस जारी होते हैं। आढ़ती बागवानों का सेब लदानियों को बेचते हैं और इसके एवज में कमीशन वसूलते हैं। कुछ सेब खरीदार मंडियों के बाहर सड़क किनारे कारोबार कर रहे हैं। इन्हें भी मंडियाें में दुकानें दी जाएंगी। इतना ही नहीं, बाहरी राज्यों से सेब खरीदने के लिए आने वाले लदानी भी अगर मंडियों में सेब खरीद के लिए दुकानें लेने को आवेदन करेंगे तो उन्हें भी दुकानें उपलब्ध करवाई जाएंगी।


















































