हिमाचल प्रदेश में हुई भारी बारिश से जल शक्ति विभाग को 1411 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जिनके पास जल शक्ति विभाग भी है मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह नुकसान काफी बड़ा है, जिससे उबरने में समय लगेगा। मुकेश ने कहा कि विभागीय अमला टीम में फील्ड में है। उन्होंने कहा कि अभी तक 4623 योजनाएं रिस्टोर कर दी गई हैं, जिनसे लोगों को पानी मिल रहा है। यह कर्मचारियों के जनूनी एवं फौलादी हौसलों की बदौलत हम बहाल कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि मैं इस समय विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा की जा रही कठिन परिस्थितियों में पेयजल व सीवरेज की योजनाओं की बहाली के कार्यों की सराहना करता हूं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से नदी नालों के बीच जाकर कठिन काम जान जोखिम में डाल कर्मचारी फील्ड में कर रहे हैं उससे भावुक हूं। उन्होंने कहा कि हिमाचल इन कर्मचारियों का ऋणी है, जो जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल प्रलय में योजनाओं को बहाल करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी दिन रात काम कर रहे हैं ,उनके परिवार हैं उनके बच्चे हैं, पत्नी हैं ,माता-पिता हैं। उन्होंने दिन-रात नहीं देखा, टॉर्च की लाइट में, मोबाइल की लाइट में लगातार काम कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि हमने विभाग के अधिकारियों को फील्ड में पूरी तरह शक्तियां दे रखी है कि पानी की बहाली के लिए चाहे सिंचाई की योजना का प्रयोग करें, चाहे खराब हुई योजनाओं को ठीक करें,कोई मशीनरी लेनी है, कोई उपकरण लेना है तो तुरंत लिया जाए। उन्होंने कहा कि हर शक्ति दी गई है, ताकि राहत जल्द हो। उन्होंने कहा कि जनता की तकलीफों को हम समझते है ऐसे में हम तत्परता से काम कर रहे हैं, जनता भी संयम व धैर्य रखें। विभाग के इन कर्मचारियों अधिकारियों का हौसला बढ़ाएं जो जान पर खेलकर 24 & 7 काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि पेयजल व सीवरेज की योजनाएं जल्द चालू हो ताकि लोगों को राहत मिले। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से नुकसान हुआ है यह अपने आप में बड़ी त्रासदी है , उन्होंने कहा कि पेयजल की अधिकतर योजनाओं को नुकसान हुआ है, ऐसे में पेयजल योजनाओं को जल्द रिस्टोर करना अपने आप में चुनौती है, यह काम विभाग के अधिकारी व कर्मचारी छुट्टियां रद्द कर कर रहे हैं, संडे को भी दफ्तर लगे हुए हैं ,काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योजनाएं जल शक्ति विभाग की अधिकतर नदी नालों के समीप हैं या बीच में है ऐसे में मलवा आ गया है,रेत आ गया है, योजनाएं चोक हो गई है, योजनाएं सब को ठीक करने के लिए समय तो लगेगा लेकिन अधिक से अधिक जल्दी इनको ठीक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग की 5203 योजनाएं पेयजल की प्रभावित हुई हैं। 1237 सिंचाई की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 55 सीवरेज की योजनाएं प्रभावित हुई है, 101 बाढ़ नियंत्रण के कार्यों को नुकसान हुआ है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जनता को राहत देना और जल्द योजनाओं को ठीक कर चालू करना हमारी प्राथमिकता है । उन्होंने कहा कि इस भयंकर विनाश में हर संभव काम फील्ड में किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित लोगों की सहायता के उद्देश्य से एक डिजिटल प्लेटफार्म का शुभारम्भ करते हुए आपदा राहत कोष-2023 वेबसाइट लॉन्च की। उन्होंने कहा कि दानी सज्जन डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, क्यूआर कोड और यूपीआई जैसी विभिन्न भुगतान विधियों का उपयोग करके कहीं से भी इस आपदा राहत कोष-2023 में अंशदान कर सकते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में भारी बारिश के कारण आई विपदा से प्रदेश को उबारने के लिए देश और विदेश से लोगों ने सहायता करने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोग सुविधाजनक तरीके से सहायता राशि उपलब्ध करवा सकें, इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग ने एक पारदर्शी वेब लिंक विकसित किया है। इस लिंक के माध्यम से कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन अंशदान कर सकता है और अपने मोबाइल डिवाइस पर रसीद प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि निर्बाध लेन-देन सुनिश्चित करने के लिए इस प्रणाली को कई भुगतान गेटवे के साथ एकीकृत किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले कुछ दिनों के भीतर विदेशी दानकर्ताओं के लिए ऑनलाइन दान की सुविधा उपलब्ध करवाने का कार्य प्रगति पर हैै। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष-2023 में योगदान करने के लिए विभिन्न कर्मचारी संगठनों और व्यक्तियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं, मंत्रिमण्डल के सहयोगियों व कांग्रेस के सभी विधायकों ने इस कोष के लिए अपना एक माह का वेतन दान करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने 50 वर्षों में आई भीषण आपदा की स्थिति की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को भारी वर्षा के कारण अत्याधिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। उन्होंने सभी से प्रदेश को इस तबाही से उबारने में मदद के लिए अधिक से अधिक अंशदान करने का आह्वान भी किया। इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन, निदेशक मुकेश रेपस्वाल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां कहा कि कोविड काल के दौरान प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्स पर भर्ती किए गए 1844 कर्मचारियों की सेवाएं 30 सितंबर, 2023 तक बढ़ा दी गई हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के समय विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्स पर स्टाफ नर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित अन्य श्रेणियों के 1844 कर्मचारी भर्ती किए गए थे, जिनकी सेवा अवधि 30 जून को समाप्त हो रही थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस अवधि को 1 जुलाई से 30 सितंबर, 2023 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे प्रदेश सरकार को लगभग 15 करोड़ रुपये अतिरिक्त वहन करने होंगे।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल के प्रदेश मंत्री आकाश नेगी ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश के कार्यकर्ता बाढ़ से प्रभावित लोगों की लगातार मदद कर रहे हैं व सेवा कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के मंडी व कुल्लू में आई बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए रास्ते जिसके कारण सभी ट्रकों की आवाजाही मंडी से आगे बंद है। मंडी मनाली नेशनल हाईवे की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी वजह से सभी बड़े वाहनों की आवाजाही मंडी से आगे बंद है। पिछले कल विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा नागचला के करीब फोरलेन पर फंसे लगभग 300 ट्रक चालकों व परिचालकों को खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। इस दौरान विद्यार्थी परिषद के उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीमान विजय प्रताप व प्रदेश संगठन मंत्री गौरव अत्री ने भी कार्यकर्ताओं का सहयोग किया। उन्होंने ट्रक चालकों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए उनका हाल चाल जाना व जरूरत होने पर हर सहायता करने का विश्वास दिलाया। आकाश नेगी ने बताया कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाढ़ प्रभावितों के लिए पूरे हिमाचल प्रदेश में आम जनमानस से धन संग्रह भी किया है। उन्होंने बताया कि इकत्रित किए हुए धन को विद्यार्थी परिषद आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री राहत कोष में सौंपेगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद ने जो हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं उन पर किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री वह किसी भी अन्य प्रकार की सहायता की जरूरत हो तो विद्यार्थी परिषद से संपर्क कर सकते है इस संकट की घड़ी में प्रदेश में रहने वाला हर एक व्यक्ति एक दूसरे का सहारा वह एक दूसरे के सहयोग में लगा है इसी कड़ी में विद्यार्थी परिषद भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा रहा है वह प्रदेश के किसी को कोने से किसी भी सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्य सरकार को आपदा राहत के तहत केंद्र सरकार की ओर से 400 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान किए जाने के केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आज यहां जारी एक प्रेस वक्तव्य में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश से आई आपदा के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की मदद प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) में प्रतिवर्ष 360 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाती है, जो केंद्रीय बजट से राज्य को मिलने वाला त्रैमासिक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ में 90:10 के अनुपात में प्रतिवर्ष हिमाचल प्रदेश को अपने हिस्से की 360 करोड़ रुपये की धनराशि जून और दिसंबर के महीने में दो किस्तों में मिलती है। केंद्र सरकार ने यह दोनों किस्तें इस बार जुलाई माह में ही राज्य सरकार को जारी की हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी किस्त राज्य को दिसंबर में बर्फबारी के दौरान होने वाले नुकसान की एवज में जारी की जाती है, जो इस बार केंद्र सरकार ने पहले ही जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के तहत हिमाचल प्रदेश की 315 करोड़ रुपये की बकाया धनराशि अभी भी केंद्र सरकार के पास पड़ी है, जिसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए। राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश को इस मानसून के मौसम में आपदा के कारण पैदा हुए हालात के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई राशि जारी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अनुराग सिंह ठाकुर केंद्र सरकार में मंत्री हैं और जय राम ठाकुर पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं और ऐसे में उन्हें तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए तथा प्रदेश की जनता के सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए। जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस त्रासदी के दौरान हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है। बिजली, सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं के साथ-साथ सड़कों को भी भारी क्षति पहुंची है और इन सभी को पुन: स्थापित करने के लिए एक साल से अधिक का समय लगने की संभावना है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार ने 2000 करोड़ की अंतरिम राहत राशि तुरन्त जारी करने के लिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है और केंद्र सरकार इस राशि को जल्द से जल्द जारी करे। राजस्व मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक भयंकर त्रासदी के दौर से गुजर रहा है और ऐसे में केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर को राजनीतिक हितों को परे रखते हुए केंद्र सरकार से इस राशि को दिलाने में प्रदेश सरकार की मदद करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सृदृढ़ीकरण के लिए मत्स्य पालन को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। हिमाचल की समृद्ध नदियां अपार जल संपदा से सम्पन्न हैं। हिमाचल प्रदेश में मत्स्य पालन क्षेत्र में अपार संभावनाओं के दृष्टिगत इससे लोगों की आर्थिकी को सुदृढ़ किया जा सकता है। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार, मत्स्य पालन में नवीनतम तकनीकों का समोवश कर राज्य में 'नीली क्रांतिÓ लाने के लिए प्रयासरत है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य पालन को व्यावसायिक स्तर पर बढ़ावा प्रदान करना है ताकि ग्रामीण आर्थिकी को संबल प्रदान किया जा सके। मुख्य रूप से प्रदेश के गोविंद सागर, पौंग, चमेरा, रणजीत सागर और कोलडैम क्षेत्र में व्यावसायिक स्तर पर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट मछली उत्पादन की अच्छी सम्भावनाएं हैं। प्रदेश में ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इस वित्त वर्ष 120 ट्राउट इकाइयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत 106 ट्राउट इकाइयों के निर्माण के लिए कुल 202.838 लाख रुपये की राशि विभिन्न मण्डलों को प्रदान की जा चुकी है। इस योजना को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए ज़िला और मण्डल स्तर पर लाभार्थियों के चयन तथा उपदान राशि प्रदान करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए प्रदेश में दो ट्राउट हैचरी निर्मित करने के लिए 60 लाख रुपये की राशि उपलब्ध करवाई जा चुकी है। मछली पालन की आधुनिकतम तकनीकों में से एक बायोफ्लॉक को भी प्रदेश में बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यावरणीय अनुकूल यह तकनीक प्रदेश में 'नीली क्रांति' का मार्ग प्रशस्त करेगी। मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रदेश में पांच लघु बायोफ्लॉक इकाइयां निर्मित की जाएंगी। इसके लिए विभिन्न मण्डलों को 19.50 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में तीन मत्स्य आहार संयंत्र स्थापित करने के लिए 42 लाख रुपये की राशि विभिन्न मण्डलों को प्रदान की जा चुकी है। मत्स्य पालकों और उद्यमियों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करवाया जाता है। इन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जिला ऊना के कार्प फार्म गगरेट में 5 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। इसमें प्रदेश के 600 मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रदेश में इस क्षेत्र की आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने के लिए सरकार प्रयासरत है। मछलियों को लम्बे समय तक संरक्षित रखने के लिए प्रदेश में 48 लाख रुपये की लागत से एक बर्फ के कारखाने का भी निर्माण किया जाएगा। प्रदेश सरकार मत्स्य पालन के माध्यम से रोज़गार व स्वरोज़गार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। युवाओं को मत्स्य पालन गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रदेश में अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। प्रदेश सरकार के प्रथम बजट में ही वर्ष 2023-24 में 500 युवाओं को मत्स्य पालन क्षेत्र में स्वरोज़गार के अवसर प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मई, 2023 तक विभाग द्वारा प्रदेश के 247 व्यक्तियों को स्वरोज़गार के अवसर प्रदान किए जा चुके हैं। प्रदेश में मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। वर्ष 2021-22 के दौरान कुल 16015.81 मीट्रिक टन और वर्ष 2022-23 में 17026.09 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया। गोविंद सागर जलाशय में वर्ष 2022-23 में 182.85 मीट्रिक टन तथा पौंग बांध में 313.65 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने अवैध शराब के कारोबार को पनपने न देने के लिए पूरे प्रदेश में अभियान को और तेज कर दिया है। इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों की गठित टीमें अलग-अलग जगह कारवाई कर रही हैं, वहीं विभाग की एक विशेष टीम ने भी पूरे प्रदेश में अवैध शराब के कारोबारियों पर शिकंजा कसा है। आबकारी आयुक्त यूनुस ने आज यहां जानकारी दी कि इस विशेष अभियान में टीम ने जिला बिलासपुर में गुप्त सूचना के आधार पर अलग-अलग जगह छापेमारी कर लगभग 408 पेटी अंग्रेजी व देशी अवैध शराब अपने कब्जे में ली। उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई में आबकारी अधिनियम 2011 की धारा 43 के अन्तर्गत 20 मामले तथा धारा 39 के अंतर्गत एक मामला दर्ज किया गया। विभाग ने धारा 39 के अंतर्गत दर्ज किए गए मामले में पुलिस थाना झंडूता जिला बिलासपुर में प्राथमिकी भी दर्ज कर दी है। इस मामले में टीम ने एक अवैध गोदाम में रखी 210 अंग्रेजी व देसी शराब की पेटियों को जब्त कर पुलिस के हवाले कर दिया। आबकारी आयुक्त ने बताया कि अवैध शराब की इस धरपकड़ में सभी जिलों की टीमों द्वारा अलग-अलग 196 मामलों में लगभग 750 पेटियां अवैध शराब पकड़ी गई है। इसके अतिरिक्त 47087.00 लीटर लाहन भी पकड़ी गई तथा आबकारी अधिनियम के अंतर्गत करवाई कर नष्ट की गई। उन्होंने कहा कि सभी जिलों को अवैध शराब की बिक्री तथा परिवहन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के और कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आमजन से भी अनुरोध किया कि किसी भी तरह के अवैध शराब से संबंधित मामले नजर में आते ही विभाग के ध्यानार्थ लाएं। उन्होंने यह भी बताया कि आबकारी विभाग के कार्यों को ऑनलाइन कर दिया गया है जिस के तहत सभी प्रकार के लाइसेंस, परमिट व पास ऑनलाइन जारी किए जा रहे हैं। इससे विभाग के कार्य में और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज जिला मंडी में भारी बारिश, भूस्खलन तथा बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र पंडोह तथा ओट का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बात की तथा प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों के बारे में जानकारी ली। राज्यपाल ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए लगभग 100 वर्ष पुराने पुल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने लोअर पंडोह में प्रभावित परिवारों के घरों का दौरा किया तथा उन्हें सांत्वना देते हुए राहत प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने लारजी जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस तथा ओट में दवाडा क्षेत्र का भी दौरा किया। उन्होंने ओट में क्षतिग्रस्त पुल का भी निरीक्षण किया। इसके उपरांत राज्यपाल ने पंडोह में तीसरी भारतीय रिजर्व कॉर्पस में आयोजित कार्यक्रम में जिला रेडक्रॉस मण्डी के माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। इस अवसर पर राज्यपाल ने केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश को फौरी राहत के तौर पर साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की राहत राशि प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रभावितों को अधिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि राहत तथा बचाव कार्यों के प्रति जिला प्रशासन के अधिकारियों की प्रतिबद्धता सराहनीय रही। उन्होंने बचाव कार्यों में भारतीय वायु सेना तथा अर्ध-सैनिक बलों के योगदान की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है तथा पूर्ण आकलन के पश्चात ही कुछ कहना उचित होगा। उन्होंने जिला प्रशासन को नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर वह केन्द्र सरकार से प्रदेश को अधिक राहत प्रदान करने के लिए बात करेंगे। राज्यपाल ने कहा कि हमें प्रकृति से सबक सिखना चाहिए तथा भविष्य में नुकसान से बचने के प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने आपदा राहत कोष में अपने एक माह के वेतन का अंशदान देने की घोषणा भी की। राज्यपाल ने मण्डी के प्राचीन पंचवक्त्र महादेव मंदिर के दर्शन किए तथा मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यों की समीक्षा की। ब्यास नदी में पानी की अधिक मात्रा के कारण लगभग आधा मंदिर जलमग्न हो गया था। इसके बावजूद मंदिर सुरक्षित रहा। राज्यपाल ने मंदिर में माथा टेका तथा भगवान शिव से सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर स्थानीय विधायक अनिल शर्मा भी उपस्थित थे। इससे पूर्व भारतीय राष्ट्रीय उच्चमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित और परियोजना कार्यान्वयन इकाई मण्डी के परियोजना निदेशक वरूण चारी ने सुन्दरनगर में राज्यपाल से भेंट की तथा उन्हें क्षेत्र में हुए नुकसान के बारे में जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि 26 किलोमीटर लम्बे पंडोह-नेरचौक राष्ट्रीय उच्चमार्ग 154 व 3 कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा भूस्खलन के मलबे को हटाने का कार्य प्रगति पर है। इस अवसर पर विधायक द्रंग पूरन चंद, राज्यपाल के सचिव संदीप कदम, उपायुक्त अरिंदम चौधरी, पुलिस अधीक्षक सौम्या सांबसिवन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज सोलन के समीप शामती क्षेत्र का दौरा किया और क्षेत्र में भूस्खलन से हुए नुकसान की समीक्षा की तथा प्रभावित परिवारों से बातचीत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों के साथ है और प्रभावितों को नुकसान की भरपाई के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने उपायुक्त सोलन को प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक-एक लाख रुपये की अंतरिम राशि जारी करने और शेष धनराशि अंतिम मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से बहाली कार्य में तेजी लाने और प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा। शामती क्षेत्र में भारी बारिश के कारण 30 घर पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि 50 अन्य घरों को आंशिक क्षति हुई, जिससे क्षेत्र के लगभग 108 परिवार प्रभावित हुए है। प्रभावित परिवारों के लिए जटोली में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं जिनमें वर्तमान में 50 परिवार परिवारों को आश्रय प्रदान किया गया है। इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सभी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से कई लोगों की जान बचाने में सफलता मिली और बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी आवश्यक सेवाएं 48 घंटों के भीतर अस्थायी रूप से बहाल की गई है। उन्होंने कहा कि 70,000 से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया। उन्होंने कहा कि एक चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान में शून्य से चार डिग्री नीचे तापमान में लाहौल-स्पीति जिला के चंद्रताल से 250 व्यक्तियों को बचाया सुरक्षित निकाल गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की एक टीम सोमवार को नुकसान का आकलन करेगी। लेकिन अभी तक कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य के सेब बाहुल्य क्षेत्रों में सड़कों की बहाली को प्राथमिकता दे रही है और जिसके लिए लोक निर्माण विभाग को 50 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने शिमला-चण्डीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर धर्मपुर का भी दौरा किया जहां राष्ट्रीय राजमार्ग का बड़ा हिस्सा भूस्खलन में ढह गया है। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग से मलबे को शीघ्र हटाने के निर्देश दिए और अधिकारियों को सड़क के पुनर्निर्माण के लिए कहा ताकि यात्रियों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने जटोली में राहत शिविरों का भी निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों को प्रदान की जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक विनोद सुल्तानपुरी, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, सोलन नगर निगम की महापौर पूनम ग्रोवर, उप महापौर राजीव कौड़ा, बघाट बैंक के अध्यक्ष अरुण शर्मा, जोगिन्द्रा सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, कांग्रेस नेता दयाल प्यारी, सुरेंद्र सेठी, शिव कुमार, राहुल ठाकुर, उपायुक्त मनमोहन शर्मा और अन्य गणमान्य व्यक्ति और अधिकारी भी मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे।
राजस्व, बागवानी व जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज जिला किन्नौर के भाबा घाटी में गत दिनों हुई मूसलाधार बारिश व बादल फटने के कारण हुई क्षति का निरीक्षण किया। इस दौरान भाबा घाटी में जिन तीन मकानों को पूर्ण क्षति हुई है उन्हें 10-10 हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई। इसके अलावा पांच परिवारों के सामान का नुकसान हुआ है, जिन्हें 5-5 हजार रुपए की फौरी राहत राशि प्रदान दी गई तथा 17 परिवारों को आंशिक क्षति हुई है जिन्हें 5-5 हजार रुपये की राहत राशि प्रदान की गई। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को भाबा घाटी में बारिश के कारण असुरक्षित हुए मकानों को तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकानों को नुकसान होने का खतरा है उन्हें विश्राम गृह में टहराने के प्रबंध किए जाएं। उन्होंने शांगो गांव के 7 बेघर हुए लोगों को स्थानांतरित करने को कहा। उन्होंने होमत्ते गांव में बाड़ से हुए नुकसान का जायजा भी लिया। उन्होंने राजस्व विभाग को भावा घाटी में नुकसान का आंकलन तैयार कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि भाबा घाटी की पंचायतों को भविष्य में इस प्रकार की आपदा से बचाने के लिए यांगपा, काफनू, कटगावं आदि पंचायतों में भूमि कटाव को रोकने के लिए आपदा शमन के तहत क्षेत्र के ततीकरण का कार्य किया जाएगा जिसके लिए संबंधित विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त किन्नौर तोरूल रवीश ने भी इस दौरान मंत्री महोदय के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया तथा प्रभावित परिवारों का कुशलक्षेम जानकर उनके प्रति सहानुभूति प्रकट की। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक विवेक चाहल, उपमंडलाधिकारी निचार बिमला वर्मा, अधिशाषी अभियन्ता विद्युत टाशी नेगी, अधिशाषी अभियन्ता लोक निर्माण प्रमोद ओपरेती व अधिशाषी अभियन्ता जल शक्ति अभिषेक शर्मा सहित अन्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज ओकओवर, शिमला से विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने इस अवसर पर 58.67 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों से संबंधित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नए बैच भी लॉंच किए। इसी वर्ष अप्रैल से जून माह के बीच यह समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए गए हैं जिनके तहत रोबोटिक्स, कृत्रिम मेधा (एआई), वीआर, एविएशन, आतिथ्य इत्यादि विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के 15 हजार युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम इन उच्च मूल्यों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिला उम्मीदवारों की समुचित भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रबड़ केमिकल एवं पैट्रो केमिकल कौशल विकास परिषद का एक अन्य कौशल रथ भी रवाना किया। इसका उद्देश्य टायर फीटर सेवाओं से जुड़े मकैनिक जिनका वृहद अनुभव तो रहता है मगर औपचारिक प्रमाणिकरण नहीं हो पाता, ऐसे उम्मीदवारों का मूल्यांकन एवं सहयोग करना है। उन्होंने कहा कि यह कौशल रथ ऐसे युवाओं को लघु अवधि के प्रशिक्षण के उपरान्त मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र भी उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने कहा कि यह कौशल रथ आगामी दो से तीन माह तक प्रदेश के विभिन्न स्थानों की यात्रा करेगा और लक्षित टायर फीटर सेवाओं से संबंधित मकैनिकों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करेगा। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि कौशल रथ चलाने का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के अंतर्गत संचालित किए जा रहे विभिन्न पूर्णतया प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में युवाओं को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि इस अभिनव पहल के तहत सभी जिलों के युवाओं तक पहुंच बनाते हुए उनके कौशल विकास से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना और उपलब्ध संसाधनों के बारे में जागरूक किया जाएगा। यह कौशल रथ कौशल विकास संबंधी अत्याधुनिकतम सुविधाओं और संसाधनों से सुसज्जित है। यात्रा के दौरान यह रथ विभिन्न जिलों, विधानसभा क्षेत्रों, पंचायत एवं खण्ड स्तर, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, पाठशालाओं, महाविद्यालयों, मुख्य बाजारों, निजी प्रशिक्षण संस्थानों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कौशल रथ व्यावसायिक पाठयक्रमों, प्रशिक्षणों, उद्यमिता संबंधी अवसरों और कौशल निर्माण संबंधी अन्य पहलों से भी अवगत करवाएगा। उन्होंने कहा कि कौशल रथ में प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित ब्रॉशर, पैम्फलेट, दृश्य-श्रव्य सामग्री रखी गई है जिससे युवाओं को अपने भविष्य के कार्यक्षेत्र को चुनने में सहायता मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि कौशल रथ के माध्यम से मौके पर ही नामांकन की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह प्रशिक्षण रथ जिला समन्वयकों के साथ मिलकर कार्यशालाएं, सेमिनार तथा परस्पर संवाद सत्र आयोजित कर युवाओं की सीधी भागीदारी भी सुनिश्चित करेंगे। विभिन्न क्षेत्रों एवं उद्योगों से संबंधित अनुभवी प्रशिक्षक एवं पेशेवर कौशल संबंधी प्रस्तुतिकरण भी देंगे ताकि युवाओं को इन विविध क्षेत्रों के बारे में उपयोगी जानकारी प्राप्त हो सके। इन सत्रों के आयोजन का उद्देश्य युवाओं को उनकी क्षमताओं के विस्तार के बारे में प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना है। साथ ही उन्हें उनकी रूचि के क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि यह कौशल रथ जागरूकता की कमी, पहुंच और सूचना की अनुपलब्धता जैसी कठिनाइयों से पार पाते हुए प्रत्येक युवा को अपने कौशल एवं क्षमता विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध होंगे। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरूद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी रितेश कपरेट, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्यमंत्री के सचिव अभिषेक जेन, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक जतिन लाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक विभाग का परफॉर्मेंस इंडेक्स तैयार किया जाएगा। सीएम ने आज यहां राज्य स्तरीय 'दिशाÓ बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में तेजी लाई जानी चाहिए, ताकि लोगों को इनके लाभ समय पर सुनिश्चित बनाए जा सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी ही भ्रष्टाचार की जड़ है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास योजनाओं पर अगले छह माह में पुरजोर कार्य करें और सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में जुट जाएं। उन्होंने कहा कि नई सोच और नए विचार राज्य सरकार के सामने रखें और सरकार अच्छे विचारों को धरातल पर उतारेगी। उन्होंने हर विभाग का 'परफॉर्मेंस इंडेक्सÓ तैयार करने के निर्देश भी दिए। सरकार की प्रमुख योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए एफआरए और एफसीए मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए शिमला-परवाणु राष्ट्रीय राजमार्ग की अलाइनमेंट में आवश्यक बदलाव एवं इसका नवीनीकरण करने और सेब सीजन के लिए इस सड़क को खुला रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए बन रहे राष्ट्रीय राजमार्गों में सुरंगों एवं पुलों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने भूस्खलन की घटनाओं को कम करने के लिए विभाग को ढलानों की सुरक्षा (स्लोप प्रोटेक्शन) की दिशा में काम करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि तारादेवी बाइपास की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। शिमला से मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरा फोरलेन बनेगा। उन्होंने कहा कि शालाघाट से नौणी के बीच दो सुरंगें बनाई जाएंगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि कीरतपुर-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग का एक लेन ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत वर्ष 2022-23 में राज्य में 1290 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और 81.15 लाख कार्य दिवस सृजित किए गए। उन्होंने मनरेगा में बायोमैट्रिक हाजिरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत 3727 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 26 मई, 2023 तक 3485 कार्य पूरे कर लिए गए हैं तथा 2512 बस्तियों को सड़क सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने योजना के अंतर्गत सड़कों की लैंथ ऑडिट करवाने के निर्देश भी दिए। वहीं ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच, पिछड़े वर्ग और महिलाओं के उत्थान पर केंद्रित है, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न होने के कारण प्रतिवर्ष आपदाएं आती हैं, जिनसे जान और माल की भारी हानि होती है। राज्य के संसाधन सीमित हैं, ऐसे में केंद्रीय योजनाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे पहले, सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग प्रियतु मंडल ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। विधायक मलेंद्र राजन, विभिन्न विभागों के सचिव और विभागाध्यक्षों ने भी बैठक में भाग लिया।
कुल्लू जिले की लगवैली में शनिवार को बादल फटने की सूचना से अफरा-तफरी मच गई। बादल फटने के बाद सरवरी खड्ड में बाढ़ आ गई। गांव के लोगों ने घटना की सूचना प्रशासन को दी और एहतियातन कुल्लू जा रही बस को तुरंत खाली करवाया गया। अन्य वाहनों को भी सड़क के एक तरफ किया गया। कुल्लू में सुबह से मौसम खराब चल रहा है। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि आज सुबह लगवैली के गोरु डुग, फाटी, पिछली पतवार में बादल फटने के कारण छोरक पुल के पास दो मकान के अलावा पांच गौशाला बहने की सूचना है। उन्होंने बताया कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जानमाल व पशुधन को नुकसान नहीं हुआ है। एसडीएम कुल्लू विकास शुक्ला ने कहा कि सुबह लगभग सात बजे लगवैली के समालंग में बादल फटने की सूचना मिली थी। जानकारी के मुताबिक सरवरी खड्ड का पानी जरूर बढ़ा है, लेकिन खतरे वाली बात नहीं है।
हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा के कारण आई आपदा में फंसे लोगों और पर्यटकों को निकालने का अभियान पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार ने लगभग 70 हजार पर्यटकों को सुरक्षित रवाना कर दिया है और अब लगभग 500 पर्यटक ही हिमाचल प्रदेश में स्वेच्छा से रुके हैं। उन्हें खाने पीने और अन्य जरूरी चीजों उपलब्ध करवाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बचाव कार्य आरंभ किए गए और सभी के सहयोग से इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से लगभग 15000 गाड़ियों को सुरक्षित वापस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी और मोबाइल सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बचे हुए क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों, एनडीआरएफ, भारतीय सेना आदि द्वारा इस आपदा में राहत एवं बचाव कार्यों को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए उनके प्रयासों की प्रशंसा भी की। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आपदा बहुत बड़ी है और बाढ़ से राज्य में लगभग 8000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। राज्य के लोग इसका मजबूती के साथ सामना कर रहे हैं और राज्य सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने पुन: आग्रह किया कि केंद्र सरकार को भी राज्य सरकार की उदारता के साथ मदद करनी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश से आई बाढ़ और भूस्खलन के चलते आई आपदा से निपटने के लिए राहत कार्य चलाने के लिए सुक्खू सरकार ने अपने बजट से 1,100 करोड़ रुपये जारी किए हैं। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि1,100 करोड़ में से 610 करोड़ रुपये लोक निर्माण विभाग, 218 करोड़ रुपये जल शक्ति विभाग और 180 करोड़ रुपये एसडीआरएफ को जारी किए गए हैं। इसके अलावा 263 करोड़ रुपये की राशि जिला उपायुक्तों को पहले ही जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि शुक्रवार सुबह ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से फोन पर बात कर अंतरिम राहत के लिए 2,000 करोड़ रुपये देने की मांग की गई है। शाह ने बताया कि सोमवार को जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम शिमला आएगी। सुक्खू ने बताया कि हिमाचल प्रदेश को भारी बारिश से करीब 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान संभावित है। सरकार ने आपदा कोष 2023 का गठन किया इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने आपदा कोष 2023 का गठन किया है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों और कांग्रेस विधायकों ने एक माह का वेतन इस कोष में देने का फैसला लिया है। भाजपा के विधायकों से भी वेतन देने का आग्रह किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारी बारिश से चार दिनों के दौरान प्रदेश में 37 लोगों की जान गई है। वहीं 24 जून से अब तक 103 लोगों की जान जा चुकी है। 60 घंटों में करीब 67 हजार लोग विभिन्न क्षेत्रों से रेस्क्यू किए गए हैं। प्रदेश में 40 पुल टूटे हैं। 80 फीसदी पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। केंद्र सरकार से प्रदेश में हुई आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से बात कर क्षतिग्रस्त हुए नेशनल हाईवे और फोरलेन को जल्द दुरुस्त करने का आग्रह किया गया है। सीएम ने कहा कि आधारभूत ढांचे को ठीक करने में वक्त लगेगा। अपने साधनों से राहत प्रदान कर रही है सरकार मुख्यमंत्री ने बताया कि आपदा राहत कार्यों के लिए प्रदेश सरकार अभी तक अपने साधनों का ही इस्तेमाल कर रही है। केंद्र से जिस 180 करोड़ रुपये की सहायता राशि की बात कही जा रही है, वह प्रदेश सरकार को नियमित तौर पर मानसून सीजन के दौरान मिलती है। अभी तक केंद्र से नई वित्तीय मदद नहीं मिली है। 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली 315 करोड़ की राशि भी जारी नहीं हुई है। केंद्र सरकार से इस लंबित राशि को भी जारी करने की मांग की गई है।
आईएसएस एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि आईएएस अधिकारियों ने प्रदेश में भारी बारिश के कारण आई प्राकृतिक आपदा के दृष्टिगत राहत कार्यों के लिए आपदा कोष-2023 में अपना एक दिन का वेतन प्रदान करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इस विपदा की घड़ी में सभी के एकजुट प्रयासों से प्रभावितों के पुनर्वास में मदद मिलेगी।
अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने बीआरओ और उनके निजी ऑपरेटर का चंद्रताल और बातल में फंसे लोगों के रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग करने के लिए आभार जताया। अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने बताया कि बीआरओ के निजी ऑपरेटर में गर्ग एंड गर्ग सनस एस्टेट प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और न्यू इंडिया कांट्रेक्टर एंड डेवलपर के दो जेसीबी ऑपरेटर सहित बीआरओ की लेबर का योगदान रेस्क्यू ऑपरेशन में काबिल तारीफ है। अतिरिक्त उपायुक्त राहुल जैन ने बताया कि इतनी विषम परिस्थितियों के बाद भी बीआरओ की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन को थमने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जेसीबी ऑपरेटर सुखदेव ने 47 घंटे जेसीबी चलाकर सड़क बहाल करने का कार्य किया है । इसके साथ ही बीआरओ की लेबर में नौरबू सैंफल उर्फ बुद्धा ने भी अहम भूमिका निभाई है। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि आगामी कुछ दिनों में रेस्क्यू ऑपरेशन में हिस्सा रहे हर सदस्य को सम्मानित किया जाएगा और इन सबके लिए सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। बीआरओ की लेबर में रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेष तौर पर फूंचोक नेगी, जावेद खान, तेनजिन ज्ञालसन जेई ऋषिकेश मीणा, तेनजिन अंगदुई , छेरिंग तोपगे, सोनम लामा शामिल रहे । इस अवसर पर तसीलदार भूमिका जैन भी शामिल रहीं।
कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने भाजपा नेताओं की आलोचना करते हुए कहा है कि वह इस आपदा की घड़ी में राजनीतिक रोटियां सेंकने मे लगे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सारी मशीनरी राहत व बचाव कार्यो में जुटी है। प्रतिभा सिंह ने एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री के उस बयान को जिसमें उन्होंने सरकार पर राहत व बचाव कार्यों में असफल रहने का आरोप लगाया है को पूरी तरह निराधार व लोगों को गुमराह करने वाला बताया हैं। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार राहत व बचाव कार्यों में जुटी हैं। मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री कांग्रेस विधायक,नेता व सभी पदाधिकारी अपने अपने क्षेत्रों में राहत कार्यो में दिन रात जुटे हैं। प्रतिभा सिंह ने कहा है कि वह स्वम् बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं, लोगों से मिल रही है और लोग राहत व बचाव कार्यो से संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार सभी प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और उनकी हरसंभव मदद कर रही हैं। अब तक कुल्लू मनाली व लाहौल घाटी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 60 हजार से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला हैं। राहत शिविरों में सभी लोगों को रहने खाने की समुचित व्यवस्था की गई हैं। प्रतिभा सिंह ने भाजपा नेताओं से आग्रह किया है कि उन्हें इस आपदा की घड़ी में सरकार के साथ सहयोग करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार से राहत व पुनर्वास कार्यो के लिये विशेष आर्थिक पैकेज की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को भी इस आपदा के लिये प्रदेश को विशेष आर्थिक मदद जारी करने की पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि वह स्वम् भी दिल्ली जाकर केंद्र सरकार से इस आपदा से निपटने के लिए विशेष आर्थिक मदद का आग्रह करेंगी।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ ने प्रेस में जारी बयान के माध्यम से हिमाचल प्रदेश में भारी बरसात की वजह से हुए नुकसान पर गहरी संवेदना प्रकट की है और प्रदेश में इस आपदा से हुए नुकसान और प्रभावित परिवारों के सेवार्थ निर्णय लिया है की विद्युत बोर्ड के सभी कर्मचारी अपने मासिक वेतन से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में डोनेट करेंगे। एक ओर जहां विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी बरसात से हुए नुकसान से विद्युत आपूर्ति को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है उसी के साथ अब संघ ने एक दिन के वेतन को मुख्यमंत्री राहत कोष में डोनेट करने जा रही है। इस बारे में संघ ने प्रबंध निदेशक को पत्र लिख कर सूचित किया है। बिजली बोर्ड में तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी चल रही है, उसके बावजूद भी 24 लाख उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से बिजली को बहाल करने में जुटे है। हिमाचल में हुई भारी बारिश के चलते बिजली बोर्ड के टावर, पोल, लाइन, सब स्टेशन, पावर हाउस बुरी तरह से प्रभावित हुए है, बिजली बोर्ड के तकनीकी कर्मचारी बिजली को बहाल करने में रात दिन सेवाए दे रहे है, इसके साथ तकनीकी कर्मचारी संघ इस विषम परिस्थिति में सरकार के साथ खड़ा है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने आज मंडी जिला के बाढ़ प्रभावित स्थानों का दौरा किया। उनके साथ इस दौरे में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, केंद्र मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल उपस्थित रहे। जगत प्रकाश नड्डा ने इस दौरान पंचवक्तत्र मंदिर का दौरा कर मौके पर नुकसान का जायजा लिया, इसके उपरांत बाढ़ प्रभावित मंडी क्षेत्र के पंडोह का भी दौरा किया और लोगों का कुशलक्षेम जाना। जगत प्रकाश नड्डा ने लोगों को इस विपदा की घड़ी में केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा प्रदेश में आई इस आपदा की घड़ी में पहले दिन से ही केंद्र सरकार हिमाचल सरकार और प्रशासन के संपर्क में है। केंद्र सरकार हिमाचल की हर संभव मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्रभावितों की हर संभव मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं अपनी ओर से और अपनी पार्टी की ओर से हिमाचल की जनता को और प्रदेश के मुख्यमंत्री को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि केंद्र सरकार आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में इस आपदा में जो नुकसान हुआ है, जान माल का भी नुकसान हुआ और इस दुख भरी घड़ी में हम सब प्रदेश वासियों के साथ खड़े हैं, प्रदेशवासियों के लिए खड़े हैं। उन्होंने कहा जहां तक राहत कार्य के सवाल है, राहत कार्य के लिए जो एनडीआरएफ की 13 टीमें प्रदेश में भेजी गई है वह राहत कार्य का काम तेजी से कर रही है।
मंडी जिले के सुंदरनगर के बीएसएल पुलिस थाना के तहत कटेरू क्षेत्र में भलाना खूड़ी नाला के पास वीरवार देर रात एक बोलेरो (एचपी31/8349) हादसे का शिकार हो कर गहरी खाई में जा गिरी। इस हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर सभी वाहन सवारों को कड़ी मशक्कत के बाद सड़क तक पहुंचाया जहां से उन्हें वाहनों में डालकर सुंदरनगर तथा नेरचौक मेडिकल कॉलेज के लिए ले जाया गया। हादसे बारे पता चलने पर डीएसपी दिनेश कुमार तथा तहसीलदार सुंदरनगर वेद प्रकाश भी मौका के लिए रवाना हो गए तथा उन्होंने वहां पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया। हालांकि रात को अंधेरा अधिक होने के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बताया जा रहा है कि सभी वाहन सवार देव कमरूनाग के दर्शन के लिए गए हुए थे वहां से वापस लौटते समय यह हादसा पेश आया है। हादसे में घायल हुए लोगों की शिनाख्त संजीव कुमार (38)पुत्र केशव दत निवासी पंजराह तहसील सुंदरनगर, किरपा राम (38) पुत्र मजरू राम निवासी पौडा कोठी तहसील सुंदरनगर, कमल कुमार(22) पुत्र तुला राम गांव डोलधार तथा चालक अनिल दत्त(52) पुत्र रुप चन्द निवासी गांव कोलथी के रूप में हुई है। जबकि मृतकों की शिनाख्त लाला राम (50) पुत्र गंगू राम निवासी डोलधार तहसील सुंदरनगर, रूप लाल(55) पुत्र परस राम निवासी गांव डोलधार तहसील सुंदरनगर, सुनील कुमार(35) पुत्र बेशर राम गांव पंजराह गलू तहसील सुंदरनगर,गोविन्द राम (60) रघुराम निवासी डोलधार तहसील सुंदरनगर और मोहन (55) पुत्र किरपा राम निवासी कुशला डाकघर घीड़ी तहसील सुंदरनगर के रूप में हुई है। डीएसपी दिनेश कुमार ने बताया पुलिस थाना बीएसएल कॉलोनी में हादसे को लेकर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिए गए है। नाचन के विधायक विनोद कुमार ने हादसे पर गहरा शोक जताया हैं। इधर, नाचन पूर्व में कांग्रेस प्रत्याशी रहे एवं हिमाचल सरकारी बैंक के निदेशक लाल सिंह कौशल ने हादसे पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट किए तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। लाल सिंह कौशल ने बताया प्रदेश सरकार की तरफ से मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार तथा घायलों को पांच-पांच हजार रुपए की फौरी सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि आगे भी परिवारों की हर संभव मदद की जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयासों के फलस्वरूप वीरवार सायं आवासीय आयुक्त द्वारा अन्तरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) नई दिल्ली में फंसे 22 खिलाड़ियों व अन्य स्टाफ को सुरक्षित बचाया गया। ये खिलाड़ी कर्नाटक के शिमोगा में 7 से 9 जुलाई तक आयोजित 40वीं राष्ट्रीय जूनियर ताइक्वांडो चैंपियनशिप में भाग लेने के उपरांत वीरवार दोपहर रेलगाड़ी के माध्यम से नई दिल्ली लौटे थे। इस टीम में 9 लड़के, 10 लड़कियां, 2 कोच और एक मैनेजर शामिल हैं। क्षेत्र में जलभराव के कारण पूरी टीम आईएसबीटी नई दिल्ली में फंस गई। टीम के कोच अश्विनी कुमार ने मुख्यमंत्री से दूरभाष पर संपर्क किया। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने आवासीय आयुक्त मीरा मोहंती को उन्हें सुरक्षित बचाने के निर्देश दिए। आवासीय आयुक्त एवं नई दिल्ली में मुख्यमंत्री के ओएसडी के.एस. बांश्टू ने हिमाचल भवन लाए गए खिलाड़ियों से भेंट की। राज्य सरकार द्वारा उन्हें सुरक्षित घर भेजने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
ग्रीनबेरी आरकेजी ग्रुप व ग्रीनबेरी वेलफेयर फाउंडेशन के संस्थापक राजेश कुमार गुप्ता ने परिवार सहित बागेश्वर पीठ आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से उनके निवास स्थान एमपी के बागेश्वर धाम में शिष्टाचार भेंट की। यहां पर उनके साथ विशेष तौर से सनातन, धर्म और संस्कृति पर चर्चा हुई। इस अवसर पर राजेश कुमार ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को हिमाचली टोपी, शॉल और डांगरू भेंट स्वरूप देकर हिमाचल प्रदेश आने का निमंत्रण भी दिया।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को प्रदेश में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान और राज्य में चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दी। केंद्रीय गृह मंत्री ने दूरभाष पर बातचीत में राज्यपाल से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़कों और फंसे हुए पर्यटकों की सुरक्षित निकासी प्रक्रिया के बारे में बात की। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार हिमाचल को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है और स्थिति सामान्य होने तक यह सहायता जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस विपदा में देश की जनता और केंद्र सरकार राज्य के लोगों के साथ है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों की देखभाल हम सभी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल बचाव अभियान में प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन का सक्रिय सहयोग कर रहे हैं। राज्यपाल ने केन्द्र सरकार द्वारा की जा रही सहायता एवं सहयोग के लिए केन्द्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया।
स्कूल ऑफ ओरिंटल एंव अफ्रिका अध्ययन युनिवर्सिटी ऑफ लंदन के शोध दार्शनिक डॉ. रिचर्ड ऐक्सलबी ने आज दिनांक 13 जुलाइ को पूर्वाहन 11.30 बजे हिमाचल प्रदेश विधान सभा के माननीय अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात की। गौरतलब है कि डॉ. रिचर्ड ऐक्सलबी विभिन्न देशों की संसदीय एवमं लोकतात्रिक प्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे है। डॉ. रिचर्ड ब्रिटेन, ब्राजील, संयुक्त राज्य अमेरिका, युथोपिया, फिजी तथा भारत की संसदीय तथा लोकतांत्रिक प्रणाली का एक शोध के जरिये तुलनात्मक अध्ययन कर रहे है। इसी विषय को लेकर उन्होंने आज एचपी विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से मुलाकात कर भारत की संसदीय तथा लोकतांत्रिक प्रणाली पर जानकारी हासिल की। इस अवसर पर डॉ. रिचर्ड ऐक्सलबी ने पठानिया से हिप्र विधान सभा की कार्यप्रणाली, आन्तरिक क्रिया कलापों तथा सत्र संचालन संबन्धि जानकारी हासिल की। इस अवसर पर पठानिया ने कहा की हिप्र देश की सर्व प्रथम ई विधानसभा है, जिसका शुभारंभ 4 अगस्त 2014 को हुआ था। उन्होने कहा कि आज देश के सभी राज्य हिप्र विधान सभा मॉडल का अनुसरण कर रहे है । पठानिया ने कहा कि जिस तरह आज के युवा विधानसभा की कार्यवाही देखने विधानसभा पहुंच रहे है, उससे हमारे लोकतंत्र का भविष्य मजबूत नजर आ रहा है। डॉ. रिचर्ड ऐक्सलबी ने चर्चा करते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र इंग्लैड के लोकतंत्र की तुलना में ज्यादा मजबूत है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के युवा और लोग राजनिति की ओर कम आकर्षित हो रहे है तथा मतदान में भी ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखते हैं जबकि भारत के युवा राजनिति की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे है तथा मतदान भी यहां ब्रिटेन के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है जो कि लोकतन्त्र की मजबूती का आधार है। बैठक उपरांत डॉ. रिचर्ड ऐक्सलबी ने विधान सभा में सदन का अवलोकन किया तथा ई विधान प्रणाली व इसके रख रखाव व अन्य प्रबंधन के लिए विधानसभा अध्यक्ष को बधाई दी।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज शिमला शहर में भारी बारिश व भूस्खलन के कारण उत्पन्न जल संकट की स्थिति का ब्यौरा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जलापूर्ति की स्थिति एवं व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। इस संबंध में उन्होंने उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी से बात कर जिला में जलापूर्ति बहाल करने तथा आपदा से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए उचित दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने राहत कार्य में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) के प्रबंध निदेशक पंकज ललित ने राज्यपाल को इस संबंध में वास्तविक स्थिति से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि गुम्मा पंपिंग स्टेशन से शहर को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है जबकि भारी गाद के कारण गिरि जल स्रोत से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि शहर में टैंकरों और वाहनों के माध्यम से भी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और इसके लिए लगभग 90 टैंकर तैनात किए गए हैं। राज्यपाल ने कहा कि राज्य में उत्पन्न आपात स्थिति में जिला एवं पुलिस प्रशासन पूरी तत्परता से काम कर रहा है। उन्होंने कुल्लू और मनाली में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि सड़कों की बहाली के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। उन्होंने चंद्रताल में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के लिए किए गए प्रबंधों के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान राज्यपाल ने कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक सतवंत अटवाल से राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली तथा इस संबंध में उन्हें एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। शुक्ल ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जाए ताकि यातायात जारी रह सके। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में गैस और अन्य खाद्य आपूर्ति सुचारू बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए और बिजली, पानी और मोबाइल फोन कनेक्टिविटी को अस्थायी रूप से बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तत्काल राहत के तौर पर हिमाचल सरकार को आपदा प्रबंधन के लिए 180 करोड़ रुपये की पहली किश्त भी जारी कर दी है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा हिमाचल प्रदेश में बीते दिनों बाढ़ से हुई आपदा से प्रभावित लोगों के लिए पूरे प्रदेश भर में आज दूसरे दिन भी लगातार लघु धन संग्रह किया गया। अभाविप विभाग कांगड़ा के विभाग संयोजक अभिनव चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल में भारी बारिश बाढ़ के कारण जिस प्रकार की आपदा की स्थिति इस पूरे प्रदेश के अंदर बनी हुई है उसके लिए विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा सेवा कार्य व धन संग्रह अभियान चलाया गया है विद्यार्थी परिषद पूरे प्रदेश में धन संग्रह कर आपदा से प्रभावित हुए लोगों की सहायता के लिए धन इक_ा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से लगातार विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता मंडी व जिला कुल्लू में सेवा कार्य कर रहे हैं वह उसके साथ साथ लघु धन संग्रह भी पूरे प्रदेश के अंदर कर रहे हैं। अभिनव चौधरी ने कहा कि इस संकट की घड़ी में सभी प्रदेशवासियों से एक दूसरे की सहायता करने का आग्रह किया वह साथ में यह भी बताया कि समाज के किसी भी क्षेत्र में किसी भी बाढ़ प्रभावित व्यक्ति की सहायता करने के लिए विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता दिन रात तैयार है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल ने आज लगातार दूसरे दिन सोलन विधानसभा क्षेत्र में भारी वर्षा से हुए नुकसान का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क, पेयजल, विद्युत जैसी आधारभूत सुविधाओं को नियमित रूप से बहाल रखा जाए। डॉ. शांडिल ने आज सोलन से सलोगड़ा तक विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय उच्च राजमार्ग पर भारी वर्षा के कारण हुए भूस्खलन एवं नुकसान का जायज़ा लिया। उन्होंने इस अवसर पर स्थानीय निवासियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को जाना। स्थानीय निवासियों से इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करवाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा उच्च मार्ग के फोर-लेन कार्य को पहाड़ों में किए जाने वाले कार्य के मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है। लोगों ने अवगत करवाया कि इस कारण जहां राष्ट्रीय राजमार्ग पर बार-बार भूस्खलन एवं पत्थर गिरने की घटनाएं हो रही हैं वहीं अनेक प्राकृतिक जलस्त्रोत भी बंद हो गए हैं। लोगों ने मांग की कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस लापरवाही को ठीक करने के निर्देश दिए जाएं ताकि जनजीवन सामान्य हो सके। डॉ. शांडिल ने लोगों को विश्वास दिलाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की लापरवाही का मामला उच्च स्तर पर उठाया जाएगा। उन्होंने इस अवसर पर प्राधिकरण के उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थानीय निवासियों की समस्याओं का त्वरित हल सुनिश्चित बनाया जाए। उन्होंने ग्राम पंचायत पड़ग के डडोग गांव में भूस्खलन के कारण अवरुद्ध हुए राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को इसे ठीक करने के निर्देश दिए। डॉ. शांडिल ने सलोगड़ा में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को स्थानीय निवासी दीवान चंद और सुरेश शर्मा के घरों को सुरक्षित करने के लिए डंगा लगाने के उचित दिशा-निर्देश भी जारी किए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार वह गत दो दिनों से सोलन विधानसभा क्षेत्र में हुए नुकसान का जायज़ा ले रहे है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं दिन-रात जहां एक और सामान्य जन की पीड़ा को दूर कर रहे हैं वहीं देश-विदेश के पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए देव दूत के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से सामान्य जन के बचाव के लिए सभी स्तरों पर अथक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा जताई कि शीघ्र ही सब कुछ सामान्य होगा। डॉ. शांडिल ने गत सांय सोलन विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सन्होल के गांव क्यार में भारी वर्षा के कारण हुए नुकसान का जायज़ा लिया। डॉ. शांडिल ग्राम पंचायत सन्होल के गांव क्यार के निवासी देवदत्त, हेतराम, सुनील, दवेंद्र तथा शतानंद के घर पहुंचे और इनके आवासों को हुए नुकसान का जायज़ा लिया। उन्होंने सभी को आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार लोगों की हर संभव सहायता करेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने तदोपरांत सोलन शहर के वार्ड नंबर 2 के आनंद रेज़िडेंस वेलफेयर सोसायटी के अवरुद्ध संपर्क मार्ग को संबंधित अधिकारियों को खोलने के निर्देश जारी किए। इस अवसर पर नगर निगम सोलन की पार्षद संगीता ठाकुर, सरदार सिंह ठाकुर, जोगिंद्रा सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, नगर निगम सोलन के मनोनीत पार्षद रजत थापा, पुनीत नारंग, विजय ठाकुर तथा गुरप्रीत, ज़िला कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष शिव कुमार, खंड कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, शहरी कांग्रेस सोलन के अध्यक्ष अंकुश सूद, उपमण्डलाधिकारी सोलन कविता ठाकुर, उपमंडलाधिकारी कंडाघाट सिद्धार्थ आचार्य, सहायक पुलिस अधीक्षक सोलन अनिल धौलटा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन डॉ. राजन उप्पल, तहसीलदार सोलन मुल्तान सिंह बनियाल, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के टीम लीडर देवश्री सरकार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी सहित ग्रामीण उपस्थित थे।
अतिरिक्त डीजीटी एचपी एलएसए ने बताया कि इंट्रा सर्कल रोमिंग (आईसीआर) हिमाचल प्रदेश के चार जिलों में लागू किया गया है जो 10 जुलाई से मूसलाधार बारिश से प्रभावित हैं। यह चार जिले चंबा, कुल्लू, लाहौल-स्पीति और मंडी हैं। एक दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) के मोबाइल उपयोगकर्ता प्रभावित जिलों में किसी भी अन्य दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) के नेटवर्क से कॉल कर सकते हैं। मोबाइल उपयोगकर्ता मोबाइल सेटिंग्स से मैन्युअल/ऑटो नेटवर्क का चयन कर सकते हैं और उपलब्ध नेटवर्क से किसी भी टेलीकॉम कंपनी के मोबाइल नेटवर्क का चयन कर सकते हैं (सेटिंग्स> सिम कार्ड> मोबाइल नेटवर्क> मैनुअल/ऑटो सेलेक्ट) 7 वे अन्य टेलीकॉम कंपनी के नेटवर्क पर जुड़ सकते है जिसका कवरेज उपलब्ध है और मोबाइल कनेक्टिविटी प्राप्त कर सकते है। दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों से जल्द से जल्द टेलीकॉम नेटवर्क की बहाली के लिए जरूरी इंतजाम करने को भी कहा है। दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और टीएसपी पदाधिकारी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय में स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में भारी बारिश से बाढ़ एवं भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई गई है। सबसे अधिक प्रभावित कुल्लू जिला तथा लाहौल-स्पिति में फंसे पर्यटकों एवं अन्य लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए पिछले लगभग 60 घंटे से निरंतर बचाव अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री ने कुल्लू एवं मंडी में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि वह गत तीन दिनों से कुल्लू, लाहौल-स्पिति तथा मंडी में प्रभावित क्षेत्रों का दौरे पर हैं। उन्होंने कहा कि कुल्लू एवं लाहौल-स्पिति जिला के विभिन्न स्थानों पर लगभग 70 हजार पर्यटक एवं अन्य लोग फंसे हुए थे, इनमें से 60 हजार लोगों की सुरक्षित वापसी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बचाव अभियान में एक हजार कर्मचारी एवं अधिकारियों ने चौबीसों घंटे युद्धस्तर पर कार्य करते हुए इसे संभव बनाया। उन्होंने कहा कि इस विपदा में सबसे चुनौतिपूर्ण बचाव अभियान के तहत लाहौल-स्पिति के चंद्रताल में फंसे पर्यटकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई है। लैंडिंग स्थल उपलब्ध न होने के कारण यहां वायुसेना के लिए हैलीकाप्टर उतारना संभव नहीं था। प्रदेश सरकार की ओर से राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी तथा मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी बचाव अभियान की निगरानी के लिए भारी बर्फबारी के बीच शून्य से नीचे तापमान में तीन जेसीबी मशीनों के साथ तड़के सुबह दो बजे ग्राउंड जीरो (चंद्रताल) पर पहुंचे। इसके उपरान्त 57 वाहनों के माध्यम से लगभग 250 पर्यटकों को वहां से सुरक्षित काजा लाने के साथ ही यह अभियान पूरा हुआ। उन्होंने अभियान से जुड़े सभी लोगों का उनके सक्रिय सहयोग एवं अथक प्रयासों के लिए आभार भी व्यक्त किया। अपनी गाड़ियां छोड़कर जाने को तैयार नहीं कई पर्यटक मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी भी तीर्थन तथा कसोल क्षेत्र में काफी संख्या में पर्यटक हैं और उनमें से अधिकांश ने अपनी गाड़ियों सहित ही घर वापसी की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि चूंकि भारी बारिश से सड़कों को व्यापक नुकसान पहुंचना है और ऐसे में इन पर यातायात सामान्य करने में समय लग सकता है। प्रदेश सरकार ने उन्हें गाड़ियां वहीं छोड़कर सार्वजनिक परिवहन सेवा के माध्यम से घर वापसी का विकल्प दिया है। पर्यटकों को उनकी गाड़ियों से संबंधित एक पावती भी जिला व पुलिस प्रशासन के माध्यम से दी जाएगी तथा इसी के आधार पर सड़क मार्ग बहाल होने पर उन्हें यह गाड़ियां वापस उपलब्ध करवाई जाएंगी। इन पर्यटकों से संवाद के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी को भी कसोल भेजने के निर्देश दिए गए हैं। घाटी में सभी विदेशी पर्यटक सुरक्षित एक सवाल के जवाब में सुक्खू ने कहा कि तीर्थन तथा कसोल क्षेत्र में कुछेक इजरायली पर्यटक भी हैं और इजरायली दूतावास की ओर से उन्हें अपने स्तर पर हेलिकाप्टर के माध्यम से सुरक्षित निकालने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पर प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि घाटी में सभी विदेशी पर्यटक सुरक्षित हैं और उन्हें भोजन सहित सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करवाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू में इतनी बड़ी विपदा के बावजूद प्रदेश सरकार ने जनजीवन सामान्य बनाने के लिए पूरी तत्परता से कार्य किया है। क्षेत्र में 48 घण्टों में बिजली तथा पानी की आपूर्ति आंशिक तौर पर बहाल करने के साथ ही मोबाइल सेवा पुन: सुचारू करने में भी सफलता हासिल की है। इसके लिए उन्होंने जिला व पुलिस प्रशासन सहित सभी संबंधित विभागों के प्रयासों की सराहना भी की। बाढ़ प्रभावित परिवारों को 50 लाख की राहत राशि जारी मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अभी तक बाढ़ प्रभावित परिवारों को 50 लाख रुपये की राहत राशि जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राहत राशि में बढ़ौत्तरी करते हुए सभी प्रभावितों को एक-एक लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। किन्नौर के कड़छम, कुप्पा और सांगला में लिया नुकसान का जायजा मुख्यमंत्री ने किन्नौर जिला के कड़छम, कुप्पा और सांगला घाटी का दौरा भी किया और वहां हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने टापरी उप-तहसील के चोलिंग में स्थित सेना के राहत शिविर में सांगला से सुरक्षित निकाले गए लोगों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि किन्नौर जिला में बादल फटने की घटना के बाद वहां फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दल ने बेहतरीन कार्य करते हुए 118 लोगों को हेलिकाप्टर की छह उड़ानों में सांगला से चोलिंग (कड़छम) सुरक्षित पहुंचाया गया है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए उन्होंने जिला प्रशासन और भारतीय सेना की सराहना भी की। इस अवसर पर मंडी में मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया तथा किन्नौर में उपायुक्त तोरुल रवीश सहित सेना एवं विभिन्न प्रशासनिक व विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत तीन दिवसीय लेह- लद्दाख यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने लेह से 211 किलोमीटर दूर, भारत- चीन सीमा से लगे गांव करजोक में रात बिताई। मंत्री ने 14000 फुट की ऊंचाई पर पुगा आवासीय विद्यालय के अपने दौरे के दौरान युवाओं संग वॉलीबॉल भी खेला और युवाओं के आमंत्रण रात्रि में मोबाइल फ़ोन की रोशनी में टेबल टेनिस में भी हाथ आजमाया। ठाकुर ने कहा कि लेह लद्दाख के युवा प्रतिभा से भरे हैं। 2014 से पहले इनकी प्रतिभा को देखने वाला कोई नहीं था। आज मोदी जी के नेतृत्व में इनकी प्रतिभा को तराशा जा रहा है। ठाकुर ने कारजोक व पुगा में खेल उपकरण भी वितरित किए। भारत चीन सीमा से सटे गावों के विकास के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भारत-चीन सीमा पर स्थित इलाकों में प्रसारण तथा नेटवर्क कनेक्टिविटी बढाने के लिये कृत संकल्पित हो कर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, हम जल्द भारत-चीन सीमा पर सुदूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वालों को दूरदर्शन फ्री डिश का कनेक्शन उपलब्ध कराएंगे। इसके अलावा बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने हेतु भी तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि डीडी फ्री डिश प्लेटफार्म के जरिए सीमावर्ती और सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिये सरकार ने सीमावर्ती इलाकों के गांवों में 1.5 लाख मुफ्त फ्री डिश वितरित करने का प्रस्ताव किया था। ठाकुर ने आगे कहा, 'हम लेह लद्दाख को विकास के मामले में बाकी भारत के समकक्ष लाने हेतु लगातार काम कर रहे हैं. फिजिकल कनेक्टिविटी जैसे सड़क, पुल, टनल इत्यादि के साथ साथ हम यहाँ डिजिटल कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित कर रहे हैं। पर्यटन हो या खेल, मोदी सरकार लेह लद्दाख की सभी बुनियादी जरूरतों को जल्द से जल्द पूरा करेगी।
बीते दिनों भारी वर्षा के कारण आई बाढ़ व भूस्खलन जैसी त्रासदियों से प्रदेशभर के सभी वर्गों के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रदेश के प्रभावित क्षेत्रों सहित अन्य कई इलाकों के छात्र-छात्राओं को भी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस विषम स्थिति को मद्देनजर रखते हुए एनएसयूआई ने पीजी परीक्षाओं को स्थगित कर दस दिन बाद आयोजित करवाने की मांग प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन से की है। इस संदर्भ में एनएसयूआई इकाई द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक जेएस नेगी को ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई इकाई अध्यक्ष योगेश यादव ने कहा कि आज पूरा प्रदेश बाढ़ व भूस्खलन जैसी आपदा से जूझ रहा रहा है, जिससे प्रदेशभर में जान व माल का भारी नुकसान हुआ है। प्रदेश के कई जिलों में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है, जिससे प्रदेश के विभिन्न जिलों से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अपने घरों में फंसे हुए है। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पीजी की परीक्षा तिथि घोषित कर दी है जो कि 17 जुलाई से है। ऐसे में कई छात्र छात्राओं परीक्षा से वंचित रहना पड़ेगा। गौरतलब है कि मौसम विभाग द्वारा 14 से 17 जुलाई तक फिर से प्रदेश के कई जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। ऐसे में एनएसयूआई ने छात्रों के हितों व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विवि प्रशासन से परीक्षा को स्थगित करने की मांग रखी है। इस मौके पर एनएसयूआई राज्य उपाध्यक्ष वीनू मेहता, राज्य महासचिव प्रवीण मिन्हास, यासीन भट, अरविंद ठाकुर, पवन नेगी, अक्षिता भरोटा, रमेश कुमार, रणदीप ठाकुर, चंदन महाजन, ईशान शर्मा, सचिन, राकेश सिंगटा, यशवंत ठाकुर, गिरीश, गौरव नेगी आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
उपायुक्त किन्नौर तोरूल रवीश ने आज यहां जानकारी दी कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा सांगला घाटी से 118 पर्यटकों को हेलीकॉप्टर के माध्यम से जिला के चोलिंग में भारतीय सेना के शिविर में स्थापित किए गए बाड़ राहत कैम्प में सुरक्षित पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने भारतीय सेना, आईटीबीपी, जिला पुलिस व गृह रक्षा के सहयोग से इस बचाव अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। उन्होंने बताया की हेलीकॉप्टर की 6 सोर्टिस के माध्यम से 118 व्यक्तियों को सांगला से निकाला गया, जिसमें 6 विदेशी पर्यटक और 112 भारतीय पर्यटक शामिल हैं। सुरक्षित निकाले गए पर्यटकों में से पश्चिम बंगाल की शोनाली चेटरजी ने कहा की वह 34 लोगों का समूह है जो हिमाचल प्रदेश के भ्रमण पर आए थे जिसमें किन्नौर जिला का सांगला भी शामिल था, परंतु भारी बारिश के कारण वह गत पांच दिनों से सांगला में हीं फंसे हुए थे। शोनाली चेटर्जी कहती हैं कि प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन को संपर्क करने के उपरांत उन्हे सांगला से सफलतापूर्वक हेलीकॉप्टर के माध्यम से निकाला गया और चोलिंग पहुंचाया गया। इसके उपरांत, उन्हें बस के मध्यम से चंडीगढ़ तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें चिकित्सीय सेवा के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक सहयोग भी प्रदान किया गया। जिला किन्नौर के बारंग गांव की दारा नेगी बताती हैं कि वह सांगला अपने रिश्तेदारों से अपने तीन रिश्तेदारों और दो अन्य व्यक्तियों के साथ मिलने गए थे, परंतु भारी बारिश के कारण रविवार से ही सांगला में फंसे हुए थे। उन्हें सूचना प्राप्त हुई की जिला प्रशासन द्वारा भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से लोगों को निकाला जा रहा है तथा जैसे ही उन्होंने प्रशासन से सम्पर्क साधा उन्हें त्वरित सहायता प्रदान की गई। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की और उनका आभार व्यक्त किया। इजरायल की ताली बोलीं- थैंैक्यू हिमाचल सरकार इजरायल की ताली ने इस आपदा की स्थिति में तत्परता एवं सत्यनिष्ठा से बचाव एवं राहत कार्य करने के लिए प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। वहीं, जिला किन्नौर के रकच्छम गांव के निवासी पंकज नेगी गुजरात में काम करते हंै और अवकाश पर घर आए थे। उनका कहना है कि उनकी छुट्टियां खत्म हो रही थीं तथा उनका कार्य स्थल पर पहुंचना आवश्यक था, जिसके चलते उन्होंने जिला प्रशासन को संपर्क किया और जिला प्रशासन व भारतीय सेना की मदद से वह अब अपने कार्य स्थल समय पर पहुंच पाएंगे।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां जिला शिमला में भारी वर्षा के कारण हुए जान व माल के नुकसान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार इस संकट की घड़ी में प्रदेशवासियों के साथ है तथा प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने तथा स्थिति को सामान्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला शिमला की स्थिति के बारे में बताते हुए रोहित ने कहा कि जिले में पिछले पांच दिनों से भारी वर्षा के कारण विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन, पेड़ गिरने, मकान ढहने तथा वाहन क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। उन्होंने प्रशासन को मूलभूत सुविधाओं को शीघ्र बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस अवसर पर उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी को जिले में हुए नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दिए ताकि राहत व बचाव कार्यों को शीघ्र पूरा किया जा सके। उन्होंने पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी को लोगों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि आगामी सेब सीज़न को सफल बनाने के लिए सभी व्यवस्थाओं को और पुख्ता किया जाए। शिक्षा मंत्री ने जिले में सभी सड़कों विशेषकर राष्ट्रीय उच्च मार्गों तथा मुख्य जिला सड़कों को शीघ्र बहाल करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने बाधित जलापूर्ति योजनाओं तथा बिजली की लाइनों की शीघ्र मरम्मत करने को कहा। उन्होंने लोगों को नदी, नालों तथा अन्य जल स्त्रोतों के पास न जाने को कहा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस संकट के समय में जिला प्रशासन को सहयोग प्रदान करें तथा प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों और मौसम व अन्य संबंधित चेतावनियों की अनुपालना करें। उन्होंने लोगों से अति-आवश्यक स्थिति के अलावा यात्रा न करने की भी अपील की है। इस अवसर पर राज्य भूविज्ञानी पुनीत गुलेरिया, मुख्य अभियंता (शिमला जोन) जल शक्ति विभाग अंजू शर्मा, हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड के मुख्य अभियन्ता राकेश ठाकुर, अधीक्षण अभियड्डता लोक निर्माण विभाग अजय सोनी सहित व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
आज एसएफआई की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने छात्रों की समस्याओं को लेकर डीन ऑफ स्टडीज को ज्ञापन पत्र सौंपा। एसएफआई ने मुख्य रूप से मांग रखी कि पीजी प्रवेश परीक्षाओं का रिजल्ट जल्द से जल्द निकाला जाए और काउंसलिंग के शेड्यूल को बनाया जाए। बीते दिनों हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के द्वारा पीजी में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षाएं करवाई गई थीं, लेकिन प्रशासन अभी तक प्रवेश परीक्षाओं का रिजल्ट निकालने में असमर्थ रहा है। इसका मुख्य कारण यह भी है जो यूजी की परीक्षाएं अप्रैल महीने में करवाई गई थी, उनका अभी तक रिजल्ट नहीं आया है, जो कि प्रवेश परीक्षा के काउंसलिंग का शेड्यूल जारी न होने का मुख्य कारण है। कोरोना काल से ही एचपीयू का सत्र काफी पीछे चला है, जिसे प्रशासन अभी तक ठीक नहीं कर पाया है। इस सत्र को सही से चलाने के लिए समय पर सभी रिजल्ट्स निकलने पड़ेंगे लेकिन प्रशासन इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है जिस वजह से आने वाला सत्र और भी लेट हो जायेगा जिससे सिर्फ छात्रों को मानसिक परेशानी होंगी। इसीलिए एसएफआई मांग कर रही है की जल्द से जल्द यूजी के रिजल्ट्स निकाले जाए, ताकि प्रशासन जल्द से जल्द प्रवेश परीक्षा की काउंसलिंग शेड्यूल जारी कर सके और समय पर कक्षाएं भी लग सकें और आने वाले अगले सत्र की परीक्षाओं में छात्रों को मानसिक परेशानी न हो। इसमें डीन ऑफ स्टडीज ने आश्वासन दिया है कि जैसे ही यूजी के रिजल्ट्स घोषित होंगे उसके बाद जल्द से जल्द काउंसलिंग का शेड्यूल जारी किया जाएगा। एसएफआई ने चेतावनी देते हुए कहा कि इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। अगर जल्द छात्र मांगों को सकारात्मक रूप से सुलझाया नहीं गया तो आने वाले समय के अंदर एसएफआई विश्वविद्यालय में आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और प्रशासन का उग्र घेराव किया जाएगा।
उद्योग विभाग के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज निदेशक राकेश प्रजापति के नेतृत्व में अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा और एसडब्ल्यूसीए, परवाणू के अधिकारियों और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ भारी बारिश के कारण हुए नुकसान का जायज़ा लेने के लिए औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर ५ और कमली-खादीम का दौरा किया, ताकि औद्योगिक गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए उचित कदम उठाए जा सकें। निदेशक उद्योग ने औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों और फैक्ट्री मालिकों के साथ विस्तृत चर्चा की और कहा कि उद्योग मंत्री ने विभाग को औद्योगिक क्षेत्र में नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने औद्योगिक गतिविधियों की बहाली के लिए समयबद्ध उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। औद्योगिक क्षेत्र के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मूसलाधार बारिश के कारण नाले में बाढ़ आने से औद्योगिक क्षेत्र की आंतरिक सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। बाढ़ के पानी के साथ मलबा फैक्ट्रियों के परिसर में आ गया है। निदेशक उद्योग ने तत्काल राहत का आश्वासन दिया और एसडब्ल्यूसीए अधिकारियों को सड़क साफ करने के लिए पर्याप्त मशीनें तैनात करने को कहा। उन्होंने नुकसान के आकलन व मरम्मत की लागत का आकलन तैयार करने के निर्देश भी दिए। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के हिमाचल चैप्टर के अध्यक्ष गगन कपूर ने जमीनी स्तर पर मूल्यांकन के लिए एक टीम भेजकर त्वरित कार्रवाई के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र कामली तक सड़क संपर्क बहाल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप का आग्रह किया। परवाणू इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (पीआईए) के अध्यक्ष सुनील तनेजा ने कहा कि परवाणू के सेक्टर ४ और ५ के बीच नाले के चैनलाइजेशन के साथ-साथ नाले में जल प्रवाह को सुचारू बनाने के लिए जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने लगातार भारी बारिश से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए आज लाहौल-स्पीति जिला के सिस्सू, चंद्रताल और लोसर तथा कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री ने सिस्सू और मनाली में विभिन्न क्षेत्रों में फंसे लोगों की सकुशल वापसी के बाद उनसे बातचीत की और कुशलक्षेम जाना। इस दौरान उन्होंने नेहरू कुंड के पास बाहंग स्थित हिमपात एवं हिमस्खलन अध्ययन प्रतिष्ठान (सासे) का भी दौरा कर वहां बारिश से हुए नुकसान की जानकारी ली। उन्होंने आश्वस्त किया कि घाटी में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाहौल घाटी के सिस्सू में फंसे मनाली के एक स्कूल के 52 बच्चों को सुरक्षित मनाली पहुंचाया गया है। इसके अतिरिक्त, कुल्लू तथा मनाली सहित विभिन्न स्थानों पर पिछले तीन दिनों से फंसे लगभग 25000 लोगों को आज सुरक्षित निकाल लिया गया है। उन्होंने बताया कि मनाली-चंडीगढ़ मार्ग पर यातायात धीमा है, लेकिन प्रारम्भिक सूचना के अनुसार बुधवार शाम 4 बजे तक लगभग 6552 वाहन कुल्लू को पार कर चंडीगढ़ की ओर जा चुके हैं और कसोल तथा आस-पास के क्षेत्रों से भी आज जिला प्रशासन द्वारा लगभग 3000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि ढुंखड़ा के पास भारी भूस्खलन के कारण कसोल भुंतर सड़क अभी भी अवरुद्ध है और जिला प्रशासन मलबे को हटाने के लिए लगातार काम कर रहा है। इन क्षेत्रों में फंसे हुए लोगों को विभिन्न वाहनों में ढुंखड़ा लाया जा रहा है और वहां से उन्हें भुंतर तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बचाव कार्यों की निगरानी के लिए जिला प्रशासन की एक टीम कसोल पहुंच गई है। जिभी-बंजार-औट से चंडीगढ़ की ओर जाने के लिए सड़क वाहनों के लिए खोल दी गई है। जिला प्रशासन को पर्यटकों और स्थानीय लोगों की शीघ्र निकासी के लिए कसोल, तीर्थन और सैंज सड़कों को साफ करने का निर्देश दिया गया है। यह सड़कें एक-दो दिनों के भीतर बहाल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि राज्य में 100 से अधिक ट्रैकर्स को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि अटल टनल वाहनों के आवागमन के लिए खुली है और आज शाम 4 बजे तक 300 से अधिक वाहन इस सुरंग से निकलकर गैमन ब्रिज से मंडी की ओर भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटक चंडीगढ़ जाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से रामशीला चौक के पास लोगों के लिए खाद्य सामग्री वितरण की व्यवस्था भी की गयी है। उन्होंने कहा कि मनाली में लोगों को 6000 से अधिक भोजन के पैकेट वितरित किए गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी को चंद्रताल झील में फंसे लोगों तक पहुंचने और बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रताल में स्थिति चुनौतीपूर्ण है लेकिन राज्य सरकार वहां विभिन्न कैम्पों में मौजूद सभी 293 लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों को फिर से बहाल करने के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठा रही है और सीमा सड़क संगठन के सहयोग से इसका कार्य पूरे जोरों पर है। उन्होंने कहा कि स्पिति घाटी में फंसे ज्यादातर पर्यटकों और आम लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और शेष लोगों को भी वहां से शीघ्र ही सुरक्षित निकाल लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है और वह स्वयं स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए लोगों से प्रशासन का सहयोग करने की भी अपील की। इस अवसर पर विधायक भुवेनश्वर गौड़, उपायुक्त आशुतोष गर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज सोलन जिला के शामती में भारी वर्षा के कारण हुए नुकसान का जायजा लिया और जिला प्रशासन को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यपाल ने शामती में भारी वर्षा के कारण हुए भूस्खलन से अवरूद्ध सोलन-राजगढ़ मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से भेंट भी की। भारी वर्षा के कारण शामती में हुए भूस्खलन एवं चट्टानों के गिरने से सोलन-राजगढ़ मार्ग अवरूद्ध हो गया है तथा इस कारण कुछ आवासों को भी नुकसान पहुंचा है। राज्यपाल ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि अवरूद्ध मार्ग को शीघ्र बहाल किया जाए तथा प्रभावित परिवारों को राहत एवं बचाव के लिए सभी प्रबंध सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने उपायुक्त तथा पुलिस अधीक्षक सोलन को सभी एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, पुलिस अधीक्षक सोलन गौरव सिंह और जिला के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लाहौल-स्पिति तथा कुल्लू जिला के हवाई सर्वेक्षण के बाद आज मण्डी पहुंचे तथा भ्यूली स्थित ब्यास सदन एवं मण्डी गुरूद्धारा साहिब में स्थापित राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनका कुशलक्षेम जाना। इस अवसर पर उन्होंने शिविरों में रह रहे बाढ़ पीड़ितों को २५-२५ हजार रुपये प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि मण्डी केे पंडोह में बाढ़ और बारिश से बड़े स्तर पर दुकानों और मकानों को काफी नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने इसके दृष्टिगत पंडोह में प्रभावित परिवारों को एक-एक लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहा कि जिला प्रशासन को राहत कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन सामान्य बनाने के लिए थोड़ा समय आवश्य लगेगा। इस भीषण आपदा से प्रदेश में प्रथम दृष्टया लगभग ४ हजार करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। उन्होंने कहा कि इसके दृष्टिगत प्रदेश सरकार ने केन्द्र से भी वित्तीय सहायता के लिए आग्रह किया है। इसके उपरान्त, मुख्यमंत्री आज भारी धुंध व मौसम खराब होने के कारण थुनाग क्षेत्र का दौरा नहीं कर पाए। उन्होंने थुनाग में बाढ़ पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। इस अवसर पर स्थानीय विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा, एपीएमसी मण्डी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, जीवन ठाकुर, नरेश चौहान, लाल सिंह कौशल सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी, मण्डलायुक्त मण्डी राखिल काहलों, पुलिस अधीक्षक सौम्य साम्बसिबन, अतिरिक्त उपायुक्त निवेदिता नेगी, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी अश्वनी कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
ठियोग विधानसभा क्षेत्र के तहत भारी बारिश के चलते हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए विधायक कुुलदीप राठौर फील्ड में डट गए हैं। बुधवार को उन्होंने नारकंडा में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एसडीएम कुमारसैन, बीडीओ, लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड के एक्सियन व वन विभाग के डीएफओ सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे। बैठक में बारिश से विधानसभा क्षेत्र में हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट तलब कर उस पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस आपदा की घड़ी में आम जनमानस के साथ खड़ी है। इस आपदा के समय में लोगों को सुरक्षा प्रदान करना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेब सीजन शुरू हो गया है बारिश व भू सख्लन से सड़के बंद हो गए हैं उन्हें जल्द खोले। प्राथमिक्ता के आधार पर सड़कों को खोलने का काम शुरू करें ताकि लोगों को सेब सीजन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने बिजली बोर्ड के अधिकारियों को गांवों में बिजली व्यवस्था जल्द ठीक करने को कहा। साथ ही जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस बारिश में सबसे अधिक पंचायत की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। सड़कों को सुरक्षित रखने के लिए आने वाले समय में जल निकासी की उचित व्यवस्था प्रदान की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर सड़कों को बहाल किया जा चुका है। सड़कों को खोलने का काम युद्ध स्तर पर चला हुआ है। नारकंडा को जाने वाली एलपीजी गैस का सिलेंडर ओवर लोडिंग के चलते वैली ब्रिज पर फंस गया है। विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि नारकंडा के लिए पिकअप के माध्यम से गैस भेजी जाएगी ताकि लोगों को किसी तरह की दिक्कतें पेश न आए। उन्होंने फील्ड स्टाफ की पीठ भी थपथपाई कि वे पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं।
उपायुक्त किन्नौर तोरूल रवीश ने जानकारी दी कि जिला किन्नौर के भावा वैली के कारा क्षेत्र में लगभग 28 व्यक्तियों के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई थी, जिसके उपरांत पुलिस, एनडीआरएफ, आईटीबीपी व होमगार्ड के बचाव दलों को शीघ्र भेजा गया। उन्होंने कहा कि कारा में 28 व्यक्ति मवेशियों सहित फंसे हुए थे, जिनमें से 8 व्यक्ति ज्यूरी प्रजनन केंद्र, 4 ककस्थल फॉर्म, 3 नाथपा के निवासी और 10 भावा घाटी के निवासी थे, जिन्हें सुरक्षित मूलिंग गांव पहुंचाया गया है तथा 3 व्यक्ति कारा में मवेशियों की देख-रेख के लिए रुके हैं, जिन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री उपलब्ध करवा दी गई है। इसके अतिरक्ति इंडिया हाईक्स की ट्रैकर टीम के 18 व्यक्तियों को भी काफनू बेस में सुरक्षित पहुंचाया जा चुका है।
एचआरटीसी ने प्रदेश के 224 रूटों पर बस सेवा को बहाल कर दिया है। बुधवार से शिमला से चंडीगढ़-दिल्ली के लिए बस सेवा फिर से शुरू कर दी गई है। मंगलवार शाम को शिमला-कालका हाईवे पर परवाणू के समीप चक्की मोड़ पर सड़क धंसने के कारण एचआरटीसी ने शिमला से चंडीगढ़ दिल्ली के लिए रात्रि सेवाएं बंद कर दी थीं। अब इन सेवाओं को दोबारा से बहाल कर दिया है। प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों में फंसी एचआरटीसी की 363 बसें अपने-अपने डिपो को लौट चुकी हैं। हालांकि एचआरटीसी 316 बसें अभी भी प्रदेश के कई क्षेत्रों में फंसी हुई है। प्रदेशभर में 1193 रूटों पर बस सेवा अभी तक बहाल नहीं हो पाई है। एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक रोहन चंद ठाकुर ने बताया कि प्रदेश की जैसे जैसे सडक़ें बहाल होंगी, एचआरटीसी दोबारा से सभी रूटों पर बस सेवा फिर से शुरू कर देगा।
हिमाचल प्रदेश शिमला जिला के तहत रामपुर बुशहर में एक दिल दहलाने वाला हादसा हुआ है। यहां पर नोगली के समीप एक कार सतलुज में समा गई। इस कार में चार लोग सवार थे। इन चारों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। हादसा गत रात्रि सवा नौ बजे के आसपास पेश आया है। जानकारी के अनुसार ननखड़ी तहसील की खड़ाहन पंचायत के लाडू गांव के रहने वाले मेहर सिंह (37) शीतल (29), मेहर सिंह का चचेरा भाई राजीव(33) व एक अन्य महिला सुन्दला देवी(60) कार में सवार होकर रामपुर में खनेरी अस्पताल के लिए आ रहे थे। इसी बीच जब वे नोगली के समीप पहुंचे तो वहां पर क्षतिग्रस्त एनएच पर से इनकी कार सतलुज में गिर गई। उफ़नती सतलुज की लहरों में अभी तक चारों का कोई सुराग नहीं चल पाया है। इसी बीच पुलिस को सूचित कर दिया है। सतलुज के उफान के बीच लापता लोगों का सुराग लगा पाना कठिन है।
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से राष्ट्रीय राजमार्गों सहित अन्य सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है। प्रदेश सरकार एवं विभाग का प्रयास है कि सभी बंद पड़े राजमार्गों एवं मुख्य सड़कों को शीघ्रातिशीघ्र बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों की बहाली के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी बात की गई है। प्रदेश सरकार के आग्रह पर केंद्र की ओर से एनएचएआई सचिव को स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा गया है। इसी क्रम में विक्रमादित्य सिंह की अध्यक्षता में आज यहां भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों की एक बैठक आयोजित की गई। इसमें सचिव एनएचएआई मनोज कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक के दौरान कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग को हुए नुकसान पर विस्तृत चर्चा की गई। प्राधिकरण के अधिकारियों ने अवगत करवाया कि इस राजमार्ग को रायसन से मनाली के बीच सबसे अधिक नुकसान हुआ है। इस मार्ग को सभी प्रकार के वाहनों के लिए खोलने का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि ब्यास नदी में आई बाढ़ ने पिछले अधिकतम बिंदू को पार कर लिया है और ऐसे में एनएचएआई को इस क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की ऊंचाई बढ़ाने की दिशा में विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। इस पर एनएचएआई ने आईआईटी रूड़की के साथ मिलकर विस्तृत अध्ययन करने का आश्वासन दिया। आईआईटी रूड़की चक्की पुल के मरम्मत कार्य में भी शामिल है और उसी दल को कुल्लू-मनाली अनुभाग की बहाली के लिए उपाय सुझाने के दृष्टिगत स्थल का दौरा करने को कहा गया है। उन्होंने शिमला-कालका फोरलेन मार्ग पर भी यातायात सुचारू करने के निर्देश दिए। प्राधिकरण ने अवगत करवाया कि फिलहाल इस मार्ग पर सिंगल लेन यातायात संचालित किया जा रहा है और शीघ्र ही यहां से डबललेन यातायात बहाल कर दिया जाएगा। उन्होंने पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ सड़क मार्ग पर मदनवाला पुल क्षतिग्रस्त होने से वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने और इस मार्ग को जल्द बहाल करने के भी निर्देश दिए। बैठक में पठानकोट-मण्डी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चक्कीपुल की स्थिति पर भी चर्चा की गई। लोक निर्माण मंत्री ने इसकी मुरम्मत के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त प्राधिकरण ने शिमला-मटौर सड़क पर घंडल के समीप अस्थाई पुल की मुरम्मत तथा इसके सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध करवाने का भी आश्वासन दिया। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि भारी बारिश व भूस्खलन के कारण उत्पन्न इस विपदा में सड़कों एवं पुलों के क्षतिग्रस्त होने से करोड़ों रूपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने केन्द्र सरकार से राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत इत्यादि के लिए प्रदेश को उदार वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया। एनएचएआई के सचिव ने आश्वस्त किया कि आगामी 48 घण्टों में कीरतपुर-मनाली फोरलेन सड़क मार्ग पर कुल्लू तथा मनाली के मध्य यातायात बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए आवश्यक मशीनरी एवं कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों को खोलने के भी हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियन्ता अजय गुप्ता, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
हिमाचल प्रदेश में अत्याधिक बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने राज्य पर विनाशकारी प्रभाव डाला है और कृषि विभाग के प्रारंभिक अनुमान में फसलों को 83 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि राज्य भर में हुई तबाही अभूतपूर्व है, इसलिए केंद्र को हिमाचल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर बचाव एवं राहत कार्यों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जारी करना चाहिए। आज आयोजित एक बैठक में चंद्र कुमार ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में प्रभावित कुल 28,495 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में से 6,978 हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन को लगभग 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मक्का, धान, रागी, बाजरा और खरीफ दलहन को लगभग 21,517 हेक्टेयर पर करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि इसके अलावा, खेती की जमीन बह जाने और खेतों में आई गाद के कारण फसलों को लगभग 26 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान मंडी जिले में हुआ जोकि 23.38 करोड़ रुपये आंका गया है। इसके बाद शिमला में 17.63 करोड़ रुपये, सिरमौर में 13.29 करोड़ रुपये, सोलन में 8.16 करोड़ रुपये, लाहौल स्पिति में 5.74 करोड़ रुपये, कुल्लू में 4.38 करोड़ रुपये, कांगड़ा में 3.99 करोड़ रुपये, ऊना में 2.99 करोड़ रुपये, चंबा में 1.53 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 1.01 करोड़ रुपये, किन्नौर में 59 लाख रुपये और हमीरपुर में 29 लाख रुपये का नुकसान हुआ। भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए मृदा संरक्षण पर बल देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि पूरे राज्य में मृदा संरक्षण की तकनीकों और तरीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि कांगड़ा जिले के शाहपुर निर्वाचन क्षेत्र में गज खड्ड के उचित तटीकरण और राजोल, अवाड़ी, अनसुई और डेग गांवों के निवासियों द्वारा मिट्टी संरक्षण को अपनाने के कारण हाल ही में हुई भारी बारिश से न्यूनतम नुकसान दर्ज किया गया हैै। चंद्र कुमार ने कहा कि कृषि और पशुधन के नुकसान के संबंध में उप निदेशकों को अंतिम रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है और शीघ्र ही इससे संबंधित बैठक की जाएगी। बैठक में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया, निदेशक कृषि डॉ. राजेश कौशिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज कुल्लू, मण्डी तथा लाहौल स्पिति जिला में पिछले तीन दिनों में हुई भारी बारिश से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कुल्लू जिला के भुंतर, सैंज, कसोल तथा खीर गंगा सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी किया। सैंज में बाढ़ प्रभावित लोगों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने जान-माल के नुकसान पर संवेदनाएं व्यक्त करते हुए आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार प्रभावितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने क्षेत्र के लिए एक करोड़ रुपये की त्वरित राहत राशि जारी करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में फंसे पर्यटकों एवं स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित निकलाने के लिए बचाव अभियान निरंतर जारी है और इसके लिए छह हैलीकाप्टर उपलब्ध करवाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैंज क्षेत्र में बेहतर संपर्क सुविधा के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन को मौके पर ही दो सैटेलाईट फोन भी उपलब्ध करवाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ से सम्पर्क व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हुई है और प्रदेश सरकार इसे बहाल करने के लिए त्वरित एवं ठोस कदम उठा रही है। भुंतर हवाई अड्डे पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू जिला में शीघ्रातिशीघ्र विद्युत आपूर्ति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि विद्युत आपूर्ति बहाल होते ही पेजयल आपूर्ति योजनाओं को भी क्रियाशील कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी मण्डी जिला में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और प्रदेश सरकार प्रभावितों को हरसंभव मद्द प्रदान करने की दिशा में सक्रियता के साथ कार्य कर रही है। विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को निकालने के लिए हवाई सेवाएं आरम्भ कर दी गई हैं और फंसे हुए शेष लोगों तक सभी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रदेश में हुए नुकसान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित अन्य केन्द्रीय नेताओं से चर्चा की है और सभी ने उन्हें आपदा की इस घड़ी में आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने इसके लिए सभी का आभार भी व्यक्त किया। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा में प्रदेश में अभी तक 27 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि वृहद स्तर पर हुई इस तरह की आपदा से निपटने तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए समय की आवश्यकता रहती है। उन्होंने कहा कि चन्द्रताल में फंसे लोगों के बचाव के लिए पहली हैलीकाप्टर सेवा आज प्रात: शुरू की गई लेकिन खराब मौसम के कारण इसमें देरी हुई है। अभी तक सात लोगों को वहां से सुरक्षित भुंतर पहुंचाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को वृद्ध एवं रोगियों को चन्द्रताल से बाहर निकालने में प्राथमिकता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त भूस्खलन के कारण बाधित हुई सड़कों को बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और यातायात बहाल करने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी चिन्हित किए जा रहे हैं। उन्होंने भुंतर में आपदा प्रभावितों से भी बातचीत की और आश्वस्त किया कि उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव सुन्दर सिंह ठाकुर तथा कांग्रेस नेता खिमी राम और विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित थे।
नगर निगम शिमला के कृषि वार्ड में बारिश से नुकसान हुआ है मलबा रास्तों पर आया है अनेक रास्ते क्षतिग्रस्त होने से लोगों को दिक्कत आ रही है, कई पेड़ गिरने वाले हैं, पानी की पाइपों को क्षति हुई है, पानी की योजनाओं में मलवा आने से पानी नियमित रूप से नहीं आ रहा है, लोगों को राहत देने के लिए पार्षद रचना शर्मा फील्ड में है ।लोगों के सहयोग से जहां परेशानियों को कम करने का काम किया जा रहा है ।वही नगर परिषद के अधिकारियों के सहयोग से नगर निगम के आपदा प्रबंधन की टीम को फील्ड में काम पर लगाकर मलबे को हटाया जा रहा है ,जिससे लोगों की आवाजाही में दिक्कत ना आए। रचना शर्मा ने कहा कि बारिश बहुत अधिक हुई है, जिसके कारण नुकसान हुआ है, जिसे नगर निगम के सहयोग से ठीक करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को जहां-जहां भी दिक्कत आई है हमने तुरंत कार्रवाई करने का प्रयास किया है ।उन्होंने कहा कि पानी की समस्या आ रही है ,पानी नहीं आ रहा है, जिसके कारण लोगों को दिक्कत है। उन्होंने कहा कि इस बारे भी नगर निगम में बात की गई है।पेयजल की योजनाओं में मलवा आया है, ऐसे में जल्द योजनाएं ठीक हो पानी नियमित हो इसका प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों को और तेज करवाया जाएगा और जो पेड़ कटवाने हैं उसके लिए भी कार्रवाई की जाएगी।रचना शर्मा ने कहा जो सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं उन्हें भी ठीक करवाया जाएगा। इस अवसर पर उनके साथ पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा, भाजपा कार्यकर्ता राजेश सैनी, जयराम गोल्डी, पारस जैन सहित अन्य स्थानीय निवासी भी उपस्थित रहे।
प्रदेश में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचा को भारी नुकसान हुआ है। इन सभी विपरीत एवं कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वर्तमान सत्र के लिए हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सरकारी, निजी स्कूलों में मानसून अवकाश को पुनर्निर्धारित और समय से पहले/समायोजित करने का निर्णय लिया है। छुट्टियों के दिनों की कुल संख्या समान रखने के लिए हरसंभव सावधानी बरती गई है, ताकि शिक्षण दिवस यथावत रहे। सरकार के आदेशों के अनुसार स्कूलों में मानसून ब्रेक 10 जुलाई से शुरू हो गया है। इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से कार्यालय आदेश जारी किए गए हैं। स्कूलों में अब यह रहेगा मानसून ब्रेक का शेड्यूल कुल्लू जिले के स्कूलों में अब मानसून अवकाश 10 जुलाई से 1 अगस्त तक 23 दिन का रहेगा। पहले यह 23 जुलाई से 14 अगस्त तक होना था। इसी तरह लाहौल-स्पीति जिले के स्कूलों में समर अवकाश 10 जुलाई से 20 अगस्त तक 42 दिन का रहेगा। पहले ये छुट्टियां 17 जुलाई से 20 अगस्त तक होनी थीं। जनजातीय क्षेत्र किन्नौर, पांगी व भरमौर में मानसून अवकाश 10 से 15 अगस्त तक छह दिन का रहेगा। मौजूदा शेड्यूल के मुताबिक यह ब्रेक 22 से 27 अगस्त तक होना था। प्रदेश के अन्य शीतकालीन अवकाश वाले स्कूलों में मानसून ब्रेक अब 10 से 15 जुलाई तक छह दिन का रहेगा। मौजूदा शेड्यूल के तहत मानसून ब्रेक 22 से 27 जुलाई तक होना था।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ठियोग से कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश सरकार से भारी बारिश व बाढ़ से ध्वस्त हुई सेब बहुल क्षेत्रों की संपर्क सड़कों की युद्ध स्तर पर मरम्मत करने व इन्हें बहाल करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में सेब बागवानों की आर्थिकी इसी पर निर्भर है और अगर इन क्षेत्रों में सड़कों को तुरंत ठीक नहीं किया गया तो बागवानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में एक पत्रकार वार्ता में कुलदीप राठौर ने कहा कि हिमाचल में भारी बारिश व बाढ़ का कहर बरपा है। लोग सहमे हुए हैं। नुकसान का तत्काल सही आकलन नहीं हो सकता पर इतना जरूर है कि यह नुकसान हजारों करोड़ का हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग करते हुए कहा कि पहले ही प्रदेश की आर्थिक स्थिति विकट है और इस त्रासदी से प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया है। राठौर ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर व भाजपा के तीनों सांसदों से भी प्रदेश की मदद का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर सभी नेताओं को इस आपदा की घड़ी में आगे आना चाहिए। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने इस दौरान पत्रकार वार्ता में केंद्र से इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। उन्होंने इस आपदा से हुए नुकसान के आकलन के लिए केंद्रीय टीम जल्द भेजने का भी आग्रह किया हैं। वहीं, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य प्रदेश मामलों के प्रभारी राजीव शुक्ला ने भी प्रदेश में भारी बारिश बाढ़ से हुए नुकसान पर दुख व्यक्त किया हैं। उन्होंने इस आपदा में मारे गए लोगों के प्रति भी अपनी संवेदना व्यक्त की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह ने प्रदेश में भारी बारिश व बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता हेतु प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में सूचना एवं समन्वय कक्ष स्थापित किया हैं। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर भी पार्टी महासचिवों व सचिवों को सहायता व समन्वय केंद्रों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। कांग्रेस महासचिव सगंठन रजनीश किमटा ने कार्यालय आदेश जारी करते हुए बताया कि राजीव भवन में कांग्रेस महासचिव यशपाल तनाईक, जिला कांग्रेस अध्यक्ष शहरी जितेंद्र चौधरी के अतिरिक्त कैप्टन एस के सहगल,गुलाब सिंह ठाकुर मान सिंह ठाकुर,परम देव शर्मा व विराज शर्मा को नियंत्रण कक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। शिमला नियंत्रण कक्ष का दूरभाष नंबर 0177 2650169 व 0177 2805522 पर कोई भी व्यक्ति किसी भी सहायता के लिए संपर्क कर सकता हैं। जिला मंडी के नियंत्रण कक्ष की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव चेतराम ठाकुर पवन ठाकुर,शशि शर्मा व जिलाध्यक्ष प्रकाश चौधरी को सौंपी गई हैं। कुल्लू जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव रोहित वत्स धामी व जिलाध्यक्ष सेस राम आजाद को सौंपी गई हैं। चंबा जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव डी एस पठानिया व जिलाध्यक्ष कमल ठाकुर को सौंपी गई हैं। शिमला जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव देवेंद्र बुशेहरी,जिलाध्यक्ष ग्रामीण अतुल शर्मा को सौंपी गई हैं। कांगड़ा जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस उपाध्यक्ष संजय चौहान, महासचिव विक्रम शर्मा विक्की व जिलाध्यक्ष करण पठानिया को सौंपी गई हैं। ऊना जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव अविनाश कपिला व जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह राणा को सौंपी गई हैं। बिलासपुर जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव विवेक कुमार व जिलाध्यक्ष अंजना धीमान को सौंपी गई हैं। हमीरपुर जिला की जिम्मेदारी जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को सौंपी गई हैं। सिरमौर जिला की जिम्मेदारी गीता राम ठाकुर व जिलाध्यक्ष आनंद परमार को सौंपी गई हैं। लाहौल स्पीति जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस सचिब प्यारेलाल शर्मा व जिलाध्यक्ष ग्यालछन ठाकुर को सौंपी गई हैं। सोलन जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस महासचिव हरदीप सिंह बावा व जिलाध्यक्ष शिव कुमार को सौंपी गई हैं। किन्नौर जिला की जिम्मेदारी कांग्रेस सचिव प्रताप नेगी व जिलाध्यक्ष उमेश नेगी को सौंपी गई हैं।


















































