उपमण्डल देहरा के अंतर्गत एचआरटीसी डीपू देहरा में कार्यरत पीस मील वर्करों ने बुधवार को पीस मील राज्य कमेटी के सलाहकार पप्पू कुमार (सिंटू) की अध्यक्षता में एचआरटीसी वर्कशॉप देहरा में एक बैठक का आयोजन किया । इस बैठक में पप्पू कुमार ने देहरा के पीस मील वर्करों को पिछले कल तारा देवी में हुई वर्करों की मीटिंग के बारे में अवगत करवाया साथ ही बताया कि अब पीस मील वर्कर निगम प्रबंधन से आर पार की लडाई लड़ने को तैयार है। हम सभी साथी इस लडाई को लड़ने के लिए तैयार है और 5 अगस्त को विधानसभा पर चढ़ाई करने की कवायद तेज कर दी गयी है क्यूंकि निगम प्रबंधन यूज सब के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है वहीं उन्होंने कहा कि लगभग 7 साल से वह सब एचआरटीसी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं बावजूद उसके निगम प्रबंधन ने आज दिन तक उनके बारे में कुछ भी नहीं सोचा। इससे अब 933 पिस मिल कर्मचारी बहुत हताश एवम नाराज है उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उनका शोषण हो रहा है ।अपने हक के लिए वह सब बड़ा से बड़ा आंदोलन करने के लिए तैयार हैं ।
उपमण्डल देहरा के तहत हरिपुर स्थित विश्राम गृह में ग्राम केंद्र हरिपुर के अंतर्गत आने वाले बूथों के अध्यक्ष, बूथ पालकों की एक सभा का आयोजन पूर्व मंत्री रविन्द्र सिंह अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। बैठक में जहां भारतीय जनता पार्टी संगठन द्वारा जारी नए निर्देशों के बारे में बूथ अध्यक्षों बूथ पालकों को अवगत करवाया गया वहीं पूर्व मंत्री रविंदर सिंह रवि ने कहा कि किसी भी पार्टी में उसका संगठन बहुत ही अहम भूमिका अदा करता है साथ ही कहा कि भारतीय जनता पार्टी भारत देश की ही नहीं बल्कि समस्त विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है, इसमे सबसे बड़ा हाथ संगठन का है। रविन्द्र रवि का कहना है कि समस्त कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर कार्य करना बहुत ही आवश्यक है। समस्त पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सरकार द्वारा किये जा रहे अथाह विकास कार्यों को जनता तक पहुंचना एवम जागरुक्त भी करना है ताकि लोग उक्त विकास योजनाओं का लाभ ले सके। इस अवसर पर देहरा मंडल अध्यक्ष निर्मल सिंह, ग्राम केंद्र प्रमुख संदीप शर्मा, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सर्वदर्शन शर्मा, भाजयुमो प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुकृत सागर, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष जसबीर गुलेरिया, मंडल सचिव प्रवीण कुमार, अरविंद शर्मा, रंजीत सिंह व्यापार मंडल अध्यक्ष हरिपुर अतुल महाजन व अन्य भाजपा कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
मुद्दा विहीन विपक्ष द्वारा देश विरोधी ताकतों के प्रभाव में तथ्य हीन आरोप लगाकर संसद की स्वस्थ परंपराओं को तोड़ना बेहद शर्मनाक है। मानसून सत्र के प्रारंभ में संसद में हुए विपक्ष के हंगामे पर तीखी प्रतिक्रिया करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने यह बात कही है उन्होंने कहा कि विघटनकारी और अवरोधक देश विरोधी ताकतों को भारत का आत्मनिर्भर बनते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ना रास नहीं आ रहा है। प्रोफेसर धूमल ने कहा कि संसद सत्र की कार्यवाही को निर्बाध और निर्विघ्न संपन्न कराने में योगदान देने के बजाय उसमें बाधा डालकर विपक्ष अस्थिरता और अराजकता का माहौल पैदा करना चाहता है। देश के लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए मानसून सत्र से ठीक पहले एक रिपोर्ट कुछ वर्गों द्वारा केवल एक ही उद्देश्य के साथ फैलाया गया है कि कैसे भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारा जाए और अपने पुराने प्रोपोगेंडे के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपमानित किया जाए। इसी आधार पर सारा हंगामा किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विस्तार में देश के हर कोने से, समाज के हर वर्ग विशेषकर महिलाओं, किसान, दलित और पिछड़े वर्ग से चुनकर आए सदस्यों को प्रधानमंत्री के द्वारा विशेष प्रतिनिधित्व दिया गया। लेकिन, कुछ ऐसी देशविरोधी ताकतें हैं जो मोदी द्वारा महिलाओं और समाज के पिछड़े व वंचित वर्ग को दिए गए सम्मान को पचा नहीं पा रही हैं। जब प्रधानमंत्री लोकसभा और राज्यसभा में अपने नये मंत्रिपरिषद का परिचय कराने के लिए उठे, जो संसद की एक पुरानी व समृद्ध परंपरा है, तो कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के नेताओं ने दोनों सदनों के वेल में आकर सदन की कार्यवाही को बाधित कर संसद की स्वस्थ और वर्षों पुरानी परम्पराओं को तोड़ा है। सदन को बाधित कर जनता से जुड़े हुए ज्वलंत मुद्दों को संसद में न उठने देना आम नागरिक के अधिकारों को दबाने का एक कुप्रयास है, जो विपक्ष ने किया है। पूर्व सीएम ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बना कर विश्व गुरु की राह पर अग्रसर करना मोदी सरकार की प्राथमिकता है और इस लक्ष्य को हासिल करने में, विपक्ष सहित तमाम देश विरोधी ताकतों के किसी भी तरह के झूठे प्रोपोगेंडे से निपट कर मोदी सरकार आगे बढ़ती रहेगी। कुंठित विपक्ष की देश और सरकार को अस्थिर करने की कुत्सित मंशाएं कभी पूरी नहीं होंगी। जनता जनार्दन समय आने पर उन्हें फिर से जवाब देगी।
एफआरए यानी फाेरेस्ट राइट एक्ट-2006 काे लाूग करने के लिए जिला किन्नौर में फिर से संघर्ष शुरु हाे गया है। पंचायत समिति पूह ने किन्नौर में एफआरए लागू करवाने के लिए महत्वपूर्ण बैठक की और प्रस्ताव पारित कर ज्ञापन जयराम सरकार काे भेजा गया। बीडीसी चेयरपर्सन इंदू किरण की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें राज्य सरकार द्वारा एफआरए लागू नहीं कर पाने पर राेष व्यक्त किया गया। पंचायत समिति ने एडीएम पूह अश्वनी कुमार के माध्यम से सीएम जयराम ठाकुर, जनजातीय विकास मंत्री डा. रामलाल मारकंडेय, डीसी किन्नौर समेत वन विभाग काे ज्ञापन भेजा गया। समिति का आरोप है कि जिला लाहाैल-स्पीति के कुछ क्षेत्राें में एफआरए लागू हाे सकता है ताे किन्नौर में क्याें नहीं? एफआरए सदस्य दाेर्जे नेगी ने जयराम सरकार से मांग की है कि फाेरेस्ट राइट एक्ट-2006 काे किन्नौर में भी जल्द से जल्द लागू करें, ताकि लाेगाें काे लाभ मिल सके। पंचायत समिति पूह की सदस्य प्रतिभा कुमारी, माया देवी, दाेर्जे नेगी, राम गाेपाल, रविंद्र कुमार, मीना, जय लक्ष्मी, पदम चंद, माेहन नेगी, दिनेश कुमार समेत सभी सदस्याें ने बैठक में भाग लिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने भाजपा के प्रांत स्तरीय चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए कहा की हम सबको पता है कि 2014 तक हमारी विदेश नीतियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव था और जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं तब से विदेश नीतियों में व्यापक बदलाव आया है जिसके कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिली है। आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अथक मेहनत से दुनिया का नजरिया भारत की ओर बदला है। उन्होंने कहा की नरेंद्र मोदी ने प्रथम दिन से ही विदेश नीति पर काम करना शुरू कर दिया था जब उन्होंने पड़ोसी देशों को शपथ ग्रहण समारोह में न्योता दिया जहां पाकिस्तान एवं बांग्लादेश को भी बुलाया गया यह हमारे देश की बदलती हुई सोच की पहचान थी। उन्होंने कहा कि एक समय था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री को दूसरे देश वीजा नहीं देना चाहते थे पर आज मोदी के स्वागत के लिए इंतजार करते हैं और जब मोदी किसी देश में जाते हैं तो मोदी मोदी के नाम के नारे लगते हैं। यह मोदी के अथक प्रयास है जब योगा को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जाता है, भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद ,कालाधन ,क्लाइमेट चेंज एवं ग्लोबल वार्मिंग जैसे बड़े मुद्दों पर कार्य कर रहा है। आज हमारा देश कोर्स-बोडर टेररिज्म के खिलाफ एक जंग लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के समय भी भारत ने सभी राष्ट्रों की मदद करने के लिए अग्रिम भूमिका निभाई, भारत ने कई देशों को इस महामारी से लड़ने के लिए दवाइयां भेजी और जब तक संभव था तब तक कई देशों को भारत ने कोविड-19 की वैक्सीन भी प्रदान की। कश्यप ने कहा अन्य देशों में लगभग 3.50 करोड़ देशवासी ऐसे हैं जो भारत मूल के हैं और सभी के लिए भारत ने एक नीति बनाई जिससे भारत के लोगों को एक पहचान मिली। वंदे भारत मिशन के तहत संकट काल के समय 70 लाख देशवासियों को सुरक्षित भारत पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि जब भी किसी पड़ोसी देश पर संकट आता है तो भारत अग्रिम भूमिका में रहकर उनकी मदद करता है जब नेपाल में भूकंप आया तो भारत ने अपनी एनडीआरएफ की टीम भेज नेपाल की मदद की। उन्होंने कहा कि जब चीन ने भारत की भूमि में अतिक्रमण करने की कोशिश की तब भी हमारी विदेश नीति काम आयी, सेना बल के दृढ़ निश्चय और विदेश नीति के बल पर चीन को वापस हटना पड़ा। आज रूस इजराईल एवं अमेरिका जैसे कई राष्ट्रों से हमारे मधुर संबंध है, पिछले 7 वर्षों में सारी दुनिया से भारत को भरपूर सहयोग मिल रहा है। हम सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले तीसरे राष्ट्र बने। आज कई देश भारत में एफडीआई के माध्यम से कार्य कर रहे हैं, जापान हमारे देश में बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट बना रहा है तो नमामि गंगे को लेकर अमेरिका कार्य कर रहा है इससे हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व गुरु बनेगा और जिस प्रकार से हम कार्य कर रहे हैं भारत का एक सुपर पावर बनना निश्चित है।
छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने विधानसभा के जल्द ही शुरू होने वाले मानसून सत्र में ही निजी स्कूलों को संचालित करने के लिए ठोस कानून बनाने की मांग की है। मंच ने 22 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में इस की प्रक्रिया पर मोहर लगाने की मांग की है। मंच ने सरकार को चेताया है कि अगर उसने कानून बनाने के लिए पहलकदमी न की तो मंच विधानसभा घेराव करेगा। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा, सदस्य भुवनेश्वर सिंह, योगेश वर्मा, विवेक कश्यप, फालमा चौहान, राकेश रॉकी व जय चंद ने कहा है कि प्रदेश सरकार निजी स्कूलों के साथ मिलीभगत के कारण प्रदेश में निजी स्कूलों के संचालन के लिए न तो ठोस कानून बना रही है और न ही प्रदेश में नियामक आयोग का गठन किया जा रहा है। मंच के प्रतिनिधि पांच मार्च 2021 को मुख्यमंत्री से मिले थे व उन्होंने मंच को आश्वासन दिया था कि मार्च के विधानसभा सत्र में ही कानून बना दिया जाएगा। परन्तु 19 मार्च की मंत्रिमंडल बैठक में इस कानून को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मंच के निरन्तर आंदोलनों के कारण बाद में प्रदेश सरकार ने कानून के प्रारूप पर 23 जून तक सभी स्टेकहोल्डरज़ से सुझाव मांगे थे। इसमें 22 जून को मंच ने भी इक्कीस सुझाव उच्चतर शिक्षा निदेशक को दिए थे। इन सुझावों की अंतिम तिथि गुजरने के बाद पूरा एक महीना बीत चुका है परन्तु सरकार कानून बनाने को लेकर चुप है। विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि 22 जुलाई को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में निजी स्कूलों के संचालन के सन्दर्भ में कानून को अंतिम रूप दिया जाए व विधानसभा के मानसून सत्र में इसे हर हाल में पारित किया जाए। उन्होंने प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह निजी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग साढ़े छः लाख छात्रों व उनके दस लाख अभिभावकों को न्याय प्रदान किया जाए तथा निजी स्कूलों की भारी फीसों व मनमानी लूट पर रोक लगाई जाए। उन्होंने हैरानी व्यक्त की है कि कोरोना काल में भी निजी स्कूलों ने पन्द्रह से लेकर पचास प्रतिशत तक की फीस बढ़ोतरी की है। निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग द्वारा कोरोना काल में फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के संदर्भ में निकाली गईं आधा दर्जन अधिसूचनाओं को ठेंगा ही दिखाया है। इस से साफ पता चलता है कि निजी स्कूल प्रदेश सरकार के आदेशों की कोई परवाह नहीं करते हैं। इसलिए कानून बनने से ही निजी स्कूलों की तानाशाही रुक सकती है।
आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को पेगासस जासूसी कांड में बेतुके बयानों से बचने की सलाह दी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री के उस बयान पर निशाना साधा है जिसमें उन्होंने जासूसी कांड को लेकर विपक्ष पर आरोप लगाए है। पार्टी ने एक बयान जारी करते हुए कहा की मुख्यमंत्री क्या यह कर बच सकते हैं कि कांग्रेस के शासन में कई हजार फोन और ईमेल की निगरानी की गई। क्या लोकतंत्र में सिर्फ में निजता का हनन करने का तर्क ये दिया जा सकता है कि पहले की सरकारों में यह होता था। विपक्ष के आरोपो को बेबुनियाद बताने वाले मुख्यमंत्री शायद भूल रहे है कि प्रदेश में उनकी ही पार्टी की सरकार पर पहले भी ऐसे आरोप लग चुके है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उन मामलों में अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। तो मुख्यमंत्री जासूसी से अनजान बनने का ढोंग न ही करे । पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा, इसरायली कंपनी से सीख ले जो अपने 'ग्राहकों' की निजता ज्यादा ध्यान उनसे ज्यादा रख रही है। इस गंभीर मसले पर मुख्यमंत्री को ऐसे बयानों से बचना चाहिए। पार्टी मांग करती है जासूसी कांड में निष्पक्ष जांच की जाए ताकि सच सबके सामने आ सके।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में पुलिस टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। सदर थाना के पास लगाए हुए नाके के दौरान पुलिस ने उत्तराखंड की एक महिला और युवक से 18 लाख रुपये की हिमालयन वियाग्रा (जड़ी-बूटी) के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी कुल्लू से लेकर यह जड़ी-बूटी उत्तराखंड ले जा रहे थे। सदर थाना के पास नाके में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया गया। पुलिस अनुसार, मंगलवार शाम को बाइक को टक्कर मारने के बाद पुलिस ने नाका लगाया था। कार सवारों पर बाइक को टक्कर मारने का आरोप था। इसलिए पुलिस ने मनाली की ओर से आ रही होंडा सिटी कार को चेकिंग के लिए रोका तो सवार पुलिस को देखकर घबरा गए। पुलिस को शक हुआ और चेकिंग के लिए गाड़ी से नीचे उतारा। गाड़ी की सीट के नीचे एक जड़ी बूटियों से भरा बैग मिला। पुलिस ने पूरी जांच पड़ताल की तो यह जड़ी-बूटी हिमालयन वियाग्रा निकली और बाजार में इसकी कीमत प्रति किलो 20 लाख रुपये आंकी गई है। 900 ग्राम इसका वजन है। क्या है हिमालयन वियाग्रा यह एक तरह का जंगली मशरूम है जो कैटरपिलर्स को मारकर उस पर पनपता है। इसे कॉर्डिसेप्स साइनेसिस और जिस कीड़े के कैटरपिलर्स पर ये उगता है उसका नाम हैपिलस फैब्रिकस है। विभिन्न स्थानों पर इसे अलग-अलग नाम से जाना जाता है। इसे यारचगुम्बा, यत्सा गनबू, यार्त्सा गनबा, यत्सुगुंबू और कीड़ा जड़ी नाम से जानते हैं। तिब्बत में यत्सा गनबू का अर्थ है ग्रीष्मकालीन घास सर्दी कीड़ा। इसे कीड़ा-जड़ी इसलिए कहते हैं, क्योंकि ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ी है। चीन-तिब्बत में इसे यारशागुंबा कहा जाता है। सबसे आसान भाषा में इसे हिमालय वियाग्रा के नाम से जानते हैं।
रोटरी क्लब ने छापरोट में महिला मंडल, लोकल प्रशासन, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ पौधा रोपण किया। कार्यक्रम में एसडीएम जोगिंदर नगर मेजर विशाल शर्मा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। मझारनु की प्रधान रीना देवी ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया। आज के कार्यक्रम में सभी ने पौधारोपण में जोर शोर से हिस्सा लिया और करीब 100 पोधे रोपे। रोपे गए पोधो में देवदार के पौधे रोपे गए। एसडीएम विशाल शर्मा ने सभी से पर्यावरण को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। रोटरी क्लब के अध्यक्ष रोटेरियन डॉक्टर भाग ठाकुर ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर नायब तहसीलदार सहित रोटरी क्लब के सदस्य अजय ठाकुर, इन.आर. बरवाल, रंजीत सिंह चौहान, राकेश धरवाल, नेक राम शास्त्री, रमेश कुमार पठानिया, अमर सिंह जसवाल, प्यार चन्द महंत आदि ने हिस्सा लिया। वहीं रोटरी क्लब द्वारा अगला पौधारोपण का प्रोग्राम गौ सदन भराड़ू में मनाने का फैसला किया गया।
सेब बागवानों को महंगाई का एक और झटका दिया गया है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने की दलील देकर ट्रकों से सेब ढुलाई पांच फीसदी महंगी कर दी गई है। ठियोग से दिल्ली के लिए प्रति पेटी न्यूनतम 67.40 और अधिकतम 77.40 रुपये जबकि कोटखाई के विभिन्न क्षेत्रों से न्यूनतम 72.40 रुपये और अधिकतम 81.40 रुपये भाड़ा तय किया गया है। पहली बार लिंक रोड से मुख्य मार्ग तक सेब पहुंचाने के लिए छोटे वाहनों का भाड़ा भी तय किया गया है। लोकल लिंक रोड पर पिकअप के लिए दस किलोमीटर तक प्रति पेटी प्रति किलोमीटर भाड़ा 1.12 रुपये तय किया गया है। दस किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर 85 पैसे प्रति पेटी प्रति किलोमीटर अतिरिक्त जोड़े जाएंगे। टाटा 407 और आईशर चार व्हीलर का भाड़ा प्रति पेटी प्रति किलोमीटर 1.71 रुपये तय किया गया है।
वन परिक्षेत्र दाड़लाघाट के तहत मंगलवार को वरिष्ठ पर्यवेक्षक अधिकारी किशोरी भारद्वाज की अध्यक्षता में मनलोग बड़ोग में पौधा रोपण किया गया। वरिष्ठ पर्यवेक्षक ने जामुन का पौधा रोप कर वन महोत्सव का शुभारंभ किया। इस दौरान वन रक्षक खुशबू व स्वाति शर्मा के साथ महिला मंडल बड़ोग मनलोग और महिला मंडल खालसा की लगभग 30 महिलाओं व स्थानीय लोगों ने खैर, दाडू, पाजा, बिउन्स आदि स्थानीय प्रजातियों के लगभग 100 पौधे रोपित किए। महिला मंडल मनलोग बड़ोग व खालसा की प्रधान सुनीता शर्मा और मीरा ने इस मौके पर हिमाचल प्रदेश वन विभाग के पौधारोपण कार्यक्रम की खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पौधरोपण से जहां पर्यावरण सरक्षण तो होता ही है साथ ही ग्रामीण लोगों को अपने मवेशियों के लिए हरा चारा व जलावन की लकड़ी की भी आपूर्ति होगी है, वातावरण भी हरा भरा रहता है, साथ ही उन्होंने कहा कि हम पौधों की देखरेख की जिम्मेवारी लेने का आश्वासन देते है । कार्यक्रम के बाद वरिष्ठ पर्यवेक्षक अधिकारी किशोरी भारद्वाज ने बाडीधार में भी पंचायत प्रतिनिधयों और वन रक्षकों के साथ मिलकर चिनार के पौधे रोपे।
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत बाल विकास परियोजना शिमला शहरी द्वारा लॉगवुड व कृष्णानगर में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक व जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। यह जानकारी देते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी शिमला शहरी ममता पॉल ने बताया कि लोक गीतों, पहाड़ी नाटी व नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बेटियों के जन्म को अभिशाप न समझकर इसे जन्मोहत्सव के रूप में मनाने के लिए आहवान किया गया। उन्होंने बताया कि बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच रख बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही साथ बालिकाओं की गर्भ से लेकर किशोरावस्था तक पोषण, शिक्षा व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के प्रति सजग किया गया। नुक्कड़ नाटक का आयोजन सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के सांस्कृतिक दल के माध्यम से किया गया। उन्होंने बताया कि शिशु लिंगानुपात, लिंग भेद व लिंग चयन रोकने जैसे विषयों पर भी नाटक के माध्यम से मंथन किया गया। बाल विकास परियोजना अधिकारी व वृत पर्यवेक्षिकाओं द्वारा उपस्थित प्रतिभागियों को विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं जैसे विधवा पुनर्विवाह, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, स्वयं रोजगार, मदर टेरेसा व बेटी है अनमोल योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि परियोजना द्वारा शिक्षा, सेवा, खेल, संस्कृति व अन्य क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वाली बेटियों व महिलाओं के लिए होर्डिंग, लॉगो पेस्टिंग व अनुशंसा पत्र द्वारा सम्मान दिया जा रहा है तथा नई जन्मी बेटियों के जन्म पर बधाई पत्र, पौधा रोपण व भेंट भी दी जा रही है। इस अवसर पर बाल विकास परियोजना अधिकारी ने गुड़िया हेल्पलाइन व शक्ति वहन एप के बारे में जानकारी भी प्रदान की। इस दौरान बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर शपथ भी दिलवाई गई व प्रतिभागियों को फल भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में कृष्णानगर से स्थानीय पार्षद बिटू कुमार, लॉगवुड में श्रीमती तनुजा चौधरी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी उपस्थित थी।
सोलन जिला में काविड-19 की सम्भावित तीसरी लहर को रोकने और बचाव के लिए गठित जिला निगरानी समीति की सदस्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन की सचिव गुरमीत कौर ने जिला के धर्मपुर, सोलन एवं कण्डाघाट विकास खण्ड की विभिन्न ग्राम पंचायतों का दौरा कर वहां लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव एवं नियम पालन की जानकारी प्रदान की। गुरमीत कौर ने धर्मपुर, गढ़खल-सनावर, पर्यटन क्षेत्र कसौली सहित धर्मपुर, भटोल, धार की बेड़, सिहारड़ी कुम्हारा, सिहारड़ी मुसलमाना और ग्राम पंचायत गढ़खल सनावर के गांव मोती काना, सनावर गढ़खल, बड़ाह, कीमूघाट, दोची गांव में लोगों को स्थानीय पंचायत प्रधान के माध्यम से कोविड-19 की तीसरी लहर से बचाव के विषय में विस्तार से अवगत करवाया। उन्होंने लोगों से उचित प्रकार से नाक से ठोडी तक ढकते हुए मास्क पहनने, सोशल डिस्टेन्सिग नियम का पालन करने और बार-बार अपने हाथ साबुन अथवा एल्कोहल युक्त सेनिटाईजर से साफ करने का आग्रह किया। जिला निगरानी समीति की सदस्य ने लोगो से आग्रह किया कि अनावश्यक अपने घरों से बाहर न निकलें। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों के पंचायत सदस्यों से आग्रह किया कि अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें ताकि शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त कर सभी को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके। गुरमीत कौर ने विकास खण्ड सोलन की ग्राम पंचायत चेवा एवं कुम्हारहट्टी के चेवा, हरिपुर उदयपूर, फलावन, खील, बढसेर, क्यार आदि गांव के लागों को भी कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बवाच के विषय में जागरूक किया। उन्होंने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान सोलन के अध्यापकों एवं कर्मियों व यहां निर्माण कार्य में संलग्न 14 ठेकेदारों एवं श्रमिकों को भी कोरोना से बचाव के विषय में जागरूक किया। उन्होंने कण्डाघाट विकास खण्ड की की विभिन्न ग्राम पंचायतों का औचक निरीक्षण भी किया। उन्होंने सभी स्थानों पर लोगों को कोविड नियमों का पालन करने व कोरोना से बवाच के लिए उपायों से अवगत करवाया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोलन की सचिव ने नागरिक अस्पताल धर्मपुर व चायल में कोविड-19 से बचाव के लिए की गई तैयारियों एवं व्यवस्थाओं की जांच की और उपस्थित लोगों की समस्याएं सुनीं। गुरमीत कौर ने कहा कि कोविड-19 से सम्बन्धित जानकारी व सहायता के लिए जिला आपात केन्द्र हेल्पलाईन नम्बर-1077, दूरभाष नम्बर 01792-221234 तथा मेडिकल हेल्पलाइन 01792-220882, 220049 व 221200 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोलन से शिमला के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग के फोरलेन कार्य के दृष्टिगत 22 जुलाई, 2021 को 11 केवी वाटर सप्लाई फीडर की आपूर्ति बाधित रहेगी। यह जानकारी मंगलवार को प्रदेश विद्युत बोर्ड के सहायक अभियन्ता आर. विदुर ने दी। उन्होंने कहा कि इस कारण 22 जुलाई, 2021 को प्रातः 09.30 बजे से सांय 06.00 बजे तक चम्बाघाट चौक, फॉरेस्ट कालोनी, बेर गांव, बेर पानी, बेर खास, करोल विहार, एनआरसीएम, जौणाजी, दामकड़ी, फलाई, शिल्ली, धाली, सेर चिराग, मशीवर, भाजो, कोटला, अश्वनी खड्ड, चंगर, राली धार, बजरोल, नडोह, शूलिनी नगर के कुछ क्षेत्रों, दुग्ध शीतन सयंत्र तथा इसके आस-पास के क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। उन्होंने कहा कि मौसम खराब होने की स्थिति में विद्युत आपूर्ति अगले कार्य दिवस पर बाधित की जाएगी। उन्होंने इस अवधि में लोगों से सहयोग की अपील की है।
भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक गोविंद शर्मा एवं भाजपा नेत्री एवं जिला परिषद सदस्य आशा परिहार कुनिहार विश्राम गृह में भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना से मिले उन्होंने भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना से बातचीत करते हुए कहा कि हम भारतीय जनता पार्टी के सच्चे सिपाही है और भाजपा के लिए हर दम कार्य करेंगे। भाजपा नेताओं ने कहा की आगामी पार्टी के कार्यक्रमों को लेकर सभी कार्य में लगे हैं और केंद्र एवं प्रदेश सरकार की जन कल्याण योजनाओं को लेकर घर घर जाकर इनका प्रचार भी करेंगे। भाजपा नेताओं ने कहा की वह भाजपा के प्रति समर्पित है। इस अवसर पर भाजपा शिमला संसदीय क्षेत्र के प्रभारी पुरुषोत्तम गुलेरिया, जिला अध्यक्ष आशुतोष वैद्य एवं भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री पवन राणा उपस्थित रहे।
कांगड़ा जिला में शनिवार को कोविड संक्रमण के 15 नए मामले सामने आए हैं और 21 कोविड संक्रमित स्वस्थ भी हुए हैं। उपायुक्त डाॅ. निपुण जिंदल ने जानकारी देते हुए बताया कि कांगड़ा जिला में अब कोविड के एक्टिव केस 136 हैं। सभी सक्रमित नागरिकों के उपचार के लिए उचित व्यवस्था की गई है, होम आईसोलेशन में रह रहे कोविड रोगियों को दवाइयां तथा आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उपायुक्त ने कहा कि सरकार तथा जिला प्रशासन कोविड संक्रमण से निपटने के लिए पूरी तरह से सतर्क और सजग है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर भी सामाजिक दूरी की अनुपालना सुनिश्चित करें तथा मास्क का उपयोग भी किया जाना जरूरी है तभी कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोविड से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान भी आरंभ किया गया है तथा सभी नागरिेकों को कोविड वैक्सीन दी जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर संक्रमण फैलने का खतरा नहीं रहे। उन्होंने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल की अनुपालना सभी नागरिकों को सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा कि टीकाकरण के बाद भी कोविड प्रोटोकॉल की अनुपालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि खांसी बुखार इत्यादि के लक्षण होने पर टेस्ट जरूर करवाएं तथा इस के लिए सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में टेस्ट की सुविधा प्रदान की गई है।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रदेशवासियों, विशेष तौर पर मुस्लिम भाई-बहनों को बुधवार को देश में मनाई जा रही ईद-उल-जुहा के शुभ अवसर पर बधाई दी। इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संदेश में सभी मुस्लिम भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके खुशहाल एवं समृद्ध जीवन की कामना की। उन्होंने सभी के लिए खुशहाली, शांति और समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईद-उल-जुहा सर्वोच्च बलिदान की भावना का प्रतीक है और यह त्यौहार समाज में शांति, प्रेम और करुणा को बढ़ावा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राज्य की प्रगति, समृद्धि और शांति के लिए मिल-जुलकर कार्य करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि ईद-उल-जुहा ईश्वर के प्रति त्याग और निष्ठा का त्यौहार है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह त्यौहार प्रेम और भाईचारे के बंधन को अधिक मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने त्यौहार मनाने के दौरान कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेशवासियों से कोविड उपयुक्त व्यवहार जैसे सामाजिक दूरी के नियमों का पालन और मास्क पहनना सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
Governor Rajendra Vishwanath Arlekar and Chief Minister Jai Ram Thakur have felicitated the people of the State particularly the Muslim brethren on the occasion of Id-ul-Zuha being celebrated on Wednesday in the country. The Governor has conveyed his greetings and best wishes to all Muslim brothers and sisters. He prayed for happiness, peace and prosperity of all sections of the society. CM Jai Ram Thakur said that Id-ul-Zuha symbolizes sacrifice, faith, devotion, the spirit of universal love and brotherhood. He appealed the people to work for peace, progress and prosperity of the State. He said that Id-ul-Zuha was a festival of sacrifice and devotion to the God. He hoped that this festival would further strengthen the bond of love and brotherhood. The Chief Minister has urged the people to celebrate this festival while ensuring Covid appropriate behaviour by wearing masks and maintaining social distancing etc. to avoid the spread of Covid-19 pandemic.
प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्योगपतियों एवं उद्यमियों को प्रदेश सरकार हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे लोगों को प्रदेश के विकास में भागीदार बनाने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। यह बात उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने मंगलवार को उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उद्योग क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस के क्षेत्र में देश में 7वें स्थान पर है। ईज ऑफ डुइंग बिजनेस के लिए रेडियो, प्रिंट तथा सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता गतिविधियां कार्यान्वित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के तहत दूसरा ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत अब तक 7367 करोड़ रुपये के निवेश के 138 समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए गए हैं। प्रदेश में सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी द्वारा 1236 करोड़ रुपये के निवेश की 80 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिससे 3814 लोगों को रोजगार मिला। बिक्रम सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना के तहत प्रदेश में 358 करोड़ रुपये के निवेश की 2057 इकाइयां स्थापित की गईं। योजना के तहत 131.11 करोड़ रुपये का उपदान प्रदान किया गया है तथा 6305 लोगों को रोजगार प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के जिला ऊना में लगभग 100 करोड़ रुपये के निवेश से मैगा फूड पार्क बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रोफूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजिज योजना को प्रदेश में भी कार्यान्वित किया जा रहा है जिसके तहत प्रदेश में पांच वर्षों में 54.57 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे। योजना के तहत वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पर भी बल दिया जाएगा। उद्योग विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग राम सुभग सिंह ने कहा कि प्रदेश में सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों आदि द्वारा गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जैम) के माध्यम से वस्तुओं व सेवाओं का प्रापन किया जा रहा है। जैम पोर्टल पर 2562 उपभोक्ता पंजीकृत हैं। इस पोर्टल पर प्रदेश के 10,780 विक्रेता पंजीकृत हैं। प्रदेश सरकार के विभिन्न 1492 कर्मचारियों व अधिकारियों तथा 280 स्थानीय कंपनियों को जैम से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया गया है और सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों आदि द्वारा 357 करोड़ रुपये की वस्तुओं व सेवाओं का प्रापन किया गया है। निदेशक उद्योग राकेश प्रजापति ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया तथा उद्योग मंत्री को आश्वस्त किया कि विभाग प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं के दृष्टिगत निरंतर प्रयास करते हुए उद्योग क्षेत्र को नई उंचाइयों तक पहुंचाएगा। इस अवसर पर विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कुल्लू जिला के निरमंड में लोगों की सुविधा के लिए उप-मंडलाधिकारी (नागरिक) कार्यालय खोलने की घोषणा की। वह आज कुल्लू जिला के निरमंड में 72वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने रूद्राक्ष का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र निथर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने, राजकीय उच्च विद्यालय दुराह और कुशवा को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में स्तरोन्नत करने, प्राथमिक विद्यालय देवारी को राजकीय माध्यमिक विद्यालय में स्तरोन्नत करने, शावर में जल शक्ति विभाग का उप मंडल खोलने, ब्रौ से हनुमान घाट, रामपुर बाजार तक फुट ब्रिज का निर्माण करने और पंजेरा पशु औषधालय को पशु अस्पताल में स्तरोन्नत करने की घोषणा की। जय राम ठाकुर ने कहा कि लुहरी से नोर सड़क को मुख्य जिला सड़क के रूप में स्तरोन्नत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की सुविधा के लिए आनी और निरमंड क्षेत्रों में अतिरिक्त बसों का परिचालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजकीय महाविद्यालय निरमंड के भवन के लिए पर्याप्त धनराशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुफराधार में हेलीपेड का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने आनी में प्रेस क्लब भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की घोषणा की। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने कुल्लू जिला के आनी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 234 करोड़ रुपये लागत की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किए। उन्होंने 44.60 करोड़ रुपये लागत की 12 विकासात्मक परियोजनाएं समर्पित कीं, जिसमें 3.35 करोड़ रुपये की लागत से निरमंड में निर्मित बस अड्डा, 5.77 करोड़ रुपये की लागत से अरसू-कुंडाकोड सड़क, 7.26 करोड़ रुपये की लागत से विकास खण्ड निरमंड के अन्तर्गत ग्राम पंचायत बाड़ी, तुनान, पोशना, बाहवा, खरगा और कुशवा गांवों के लिए जलापूर्ति योजना, विकास खण्ड आनी के तहत 4.71 करोड़ रुपये की लागत से ग्राम पंचायत शिल्ली, गमोघ, लोट, दुराह की शेष बस्तियों के लिए (एनसी,पीसी) उठाऊ पेयजल योजना, 3.55 करोड़ रुपये की लागत से विकास खण्ड आनी के अन्तर्गत सीवी फ्रानाली, डिंगीधार और बियुंगल की शेष बस्तियों के लिए उठाऊ पेयजल योजना, 1.87 करोड़ रुपये की लागत से देवथन, थारवी सड़क, 5.60 करोड़ रुपये की लागत से शारू कपटी सड़क, 9.15 करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भवन निरमंड, 51 लाख रुपये की लागत से कल्याण भवन आनी, 60 लाख रुपये की लागत से वन विश्राम गृह पनेऊ, 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित निरीक्षण कुटीर चुनागई और 1.98 करोड़ रुपये की लागत से धनुधार में 22 केवी कंट्रोल प्वाइंट के उद्घाटन शामिल हैं। जय राम ठाकुर ने 189.20 करोड़ रुपये की लागत की 17 विकासात्मक परियोजनाओं के शिलान्यास किए। इसमें विकास खण्ड निरमंड में 27.58 करोड़ रुपये की लागत से कुर्पण खड्ड के वाम तट पर विभिन्न जल आपूर्ति योजनाओं के संवर्धन का कार्य, 11.60 करोड़ रुपये की लागत से बहाव सिंचाई योजना कुर्पण कूहल के कमांद विकास क्षेत्र के निर्माण कार्य, विकास खण्ड निरमंड में 2.37 करोड़ रुपये की लागत से बहाव सिंचाई योजना नोर लांज के कमांद विकास क्षेत्र के निर्माण कार्य, विकास खण्ड निरमंड में 20.77 करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति योजना शानू, जटेहड़ का संवर्धन व पुनर्निर्माण, जलापूर्ति योजना निरमंड और जलापूर्ति योजना रैमू केदस, जलापूर्ति योजना चाटी, जलापूर्ति योजना बायल धरोपा और जलापूर्ति योजना कोयल का संवर्धन व पुनर्निर्माण, विकास खण्ड आनी में सीवी कशाईगाड और बिशलाधार के अंतर्गत 2.28 करोड़ रुपये की लागत से उठाऊ पेयजल योजना कशाईगाड, डगेड़ के संवर्धन कार्य का शिलान्यास, विकास खण्ड आनी की ग्राम पंचायत डिंगीधार में 3.20 करोड़ रुपये की लागत से बेहना खड्ड से शेगुबाग उठाऊ जलापूर्ति योजना, 1.78 करोड़ रुपये की लागत से उठाऊ जलापूर्ति योजना खुन्न बांदल कोहिला कमांद के संवर्धन कार्य का शिलान्यास, विकास खण्ड निरमंड में 2.63 करोड़ रुपये की लागत से बहाव सिंचाई योजना कोयल के कमांद विकास क्षेत्र के निर्माण कार्य का शिलान्यास, विकास खण्ड आनी में 21.35 करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति योजना खनाग, जलापूर्ति योजना नगोट, पाली परकौट और जलापूर्ति योजना खादवी काफटी के संवर्धन एवं पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने विकास खण्ड निरमंड में 17.69 करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति योजना राठीनाला, जलापूर्ति आपूर्ति योजना नागछो और जलापूर्ति आपूर्ति योजना निथर, देहरा तथा कठार का शिलान्यास किया। उन्होंने 6.85 करोड़ रुपये की लागत से दुराह से दवारच सड़क के स्तरोन्नयन, 1.12 करोड़ रुपये की लागत से विश्राम गृह आनी में छः अतिरिक्त कमरों, 55 लाख रुपये की लागत से कल्याण भवन निरमंड, 94 लाख रुपये की लागत से उप-कोषागार कार्यालय आनी के भवन, 1.55 करोड़ रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खनाग, 66.62 करोड़ रुपये की लागत से 100 बिस्तरों वाले नागरिक अस्पताल आनी और 30 लाख रुपये की लागत से निरीक्षण कुटीर सराहर के शिलान्यास किए। निरमंड में आयोजित जनसभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय राज्य होने के कारण हिमाचल में वनों का विशेष महत्व है। वह न केवल हिमालय क्षेत्र के पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं बल्कि राज्य की ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य के विभिन्न भागों में 14 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 1.40 करोड़ पौधे रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बालिकाओं के सशक्तिकरण और हरित आवरण को बढ़ाने के लिए एक बूटा बेटी के नाम कार्यक्रम शुरू किया गया है। जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमालय राष्ट्र को शुद्ध वायु प्रदान करता है और यह सभी का दायित्व है कि हम वनों का संरक्षण करें। उन्होंने कहा कि वनों के संरक्षण में स्वयं सहायता समूह, महिला मण्डल और गैर सरकारी संस्थाएं सराहनीय कार्य कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि 20 और 21 जुलाई को आयोजित किए जाने वाले अभियान के दौरान प्रदेश के विभिन्न वन मण्डलों में 246 स्थानों पर लगभग 11 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वन विभाग नगर परिषदों और पंचायतों के वार्ड सदस्यों को अपने संबंधित क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की सहायता से पौध रोपण के लिए 51-51 पौधे प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष रेडक्राॅस द्वारा एक लाख अतिरिक्त पौधे भी रोपित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष के दौरान क्षेत्र में 3500 हेक्टेयर भूमि को लेंटाना मुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पिछले लोकसभा निर्वाचन के दौरान भाजपा उम्मीदवार को 27 हजार मतों से बढ़त प्रदान करने के लिए आनी क्षेत्र के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना महामारी के प्रबन्धन में असाधारण रुप से सराहनीय कार्य किया है और इस दिशा में उठाए गए कदमों की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने टीकाकरण अभियान के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन के लिए भी प्रदेश सरकार की सराहना की है। उन्होंने कहा कि राज्य ने वैक्सीन का शून्य क्षय (वेस्टेज) सुनिश्चित किया है और राज्य के जनजातीय जिलों में शत प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक प्रदान की जा चुकी है। जय राम ठाकुर ने प्रदेश के लोगों के कल्याण और राज्य के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा आरम्भ की गई विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हिमकेयर, सहारा योजना, हिमाचल गृहिणी सुविधा योजना आदि याजनाएं प्रदेश के जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान सिद्ध हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ने राज्य के छः बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह को हाल ही खोया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों से सम्बन्ध होने के बावजूद हम दोनों में एक-दूसरे के प्रति परस्पर आदर था। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह की मृत्यु किसी एक राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि सम्पूर्ण प्रदेश के लिए क्षति है। मुख्यमंत्री ने वर्तमान प्रदेश सरकार के कार्यकाल के दौरान आनी विधानसभा क्षेत्र द्वारा हासिल की गई विकासात्मक उपलब्धियों पर आधारित एक पुस्तिका भी जारी की। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और गैर सरकारी संगठनों ने मुख्यमंत्री को इस अवसर पर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने पौध रोपण और वनों व वन्य जीवों के संरक्षण में अमूल्य योगदान के लिए वन अधिकारियों, कर्मचारियों, ग्राम वन समितियों इत्यादि को सम्मानित भी किया। उन्होंने नगर पालिकाओं और पंचायतों के वार्ड सदस्यों को स्थानीय समुदाय की सहायता से अपने-अपने क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए पौधे प्रदान किए। शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर ने 72वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव का आयोजन भगवान परशुराम की भूमि में करने के लिए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर और वन मंत्री राकेश पठानिया का धन्यवाद किया। उन्होंने प्रदेश में आॅक्सीजन, दवाइयां, मास्क और वैक्सीन की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करके कोरोना महामारी की परीक्षा की घड़ी में प्रदेश का सफल नेतृत्व करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान हर घर पाठशाला आरम्भ करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया ताकि इस दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो। वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि राज्य सरकार वन संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है और भू-जल स्तर बढ़ाने को महत्व दे रही है ताकि स्थानीय लोगों की पेयजल और सिंचाई संबंधी आवश्यकता को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वन विभाग ने 14000 हेक्टेयर वन क्षेत्र में लगभग 1.40 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि 20 और 21 जुलाई, 2021 को दो दिवसीय विशेष पौधरोपण अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसके तहत समाज के विभिन्न वर्गों, स्थानीय लोगों और संस्थाओं द्वारा 11 लाख पौधे लगाए जाएंगे। विधायक आनी किशोरी लाल ने मुख्यमंत्री एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए क्षेत्र की विभिन्न विकासात्मक मांगें प्रस्तुत की। उन्होंने आनी विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विकासात्मक कार्यों के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आनी क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का भी आग्रह किया। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र में 11 नई पंचायतें बनाने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया, जिससे जमीनी स्तर पर विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन डाॅ. सविता ने कहा कि विभाग का लक्ष्य इन पौधरोपण कार्यक्रमों के माध्यम से 2030 तक राज्य के हरित आवरण को 30 प्रतिशत तक बढ़ाना है जो वर्तमान में 27.72 प्रतिशत है। इस अवसर पर देहरा के विधायक होशियार सिंह, एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति के अध्यक्ष अमर सिंह ठाकुर, भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहिंदर ठाकुर, उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग, पुलिस अधीक्षक कुल्लू गुरुदेव शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
भाजपा प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि जिसके हाथ में कमल का फूल होगा कार्यकर्ता उसी के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता आधारित राजनीतिक दल है और इसमें कार्यकर्ता पार्टी का मजबूत स्तंभ माना जाता है, हमारे कार्यकर्ता को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर पूर्ण भरोसा है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक ऐसा वृक्ष है जो व्यक्ति इससे जुड़ा रहता है वह आगे बढ़ता है इससे टूट कर कभी भी कोई नेता नहीं बन पाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार अनेकों योजनाओं के माध्यम से अच्छा कार्य कर रही है और इनकी बनाई योजनाओं से जनता को बड़ा लाभ प्राप्त हो रहा है। वास्तव में केंद्र और राज्य मिलकर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार चला रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार और संगठन में अच्छा तालमेल है जिसके कारण कार्यकताओं में अद्भुत जोश देखने को मिला है। उन्होंने कहा मोदी सरकार एवं जयराम सरकार के सुशासन और सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास की नीति से देश व प्रदेश के हर वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना ,प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, जल जीवन मिशन, सोशल हेल्थ कार्ड, हिम केअर योजना, गृहिणी सुविधा योजना एवं अनेकों योजनाओं से जनता को लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन की मजबूती के लिए धरातल पर कार्य कर रही है जिसके अंतर्गत बूथ स्तर के ढांचे को और ज्यादा मजबूत किया जा रहा है जल्द ही बूथ स्तर पर बूथ कमेटियों का गठन होगा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में भाजपा अनेकों सम्मेलनों द्वारा संगठन को और मजबूत करने जा रही है।
भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन का कुल्लू जिला और मंडल के कार्यकर्ताओं द्वारा गरम जोशी से स्वागत किया गया। इस के पश्चात उन्होंने कुल्लू मंडल की बैठक को संबोधित किया जिसमें राकेश जामवाल प्रदेश महामंत्री, महेश्वर सिंह पूर्व सांसद, जिला अध्यक्ष भीमसेन, मंडल अध्यक्ष ठाकुर चंद, जिला प्रभारी संजीव कटवाल, सह प्रभारी नरेश चंदेल, मीडिया सह प्रभारी अमित सूद, जिला महामंत्री अखिलेश कपूर, पूर्णकालिक सुरेश शर्मा, जिला पदाधिकारी, मोर्चा पदाधिकारी, प्रकोष्ठ में जिला के संयोजक, प्रदेश में मोर्चा पदाधिकारी, जिला में मोर्चा पदाधिकारी, मंडल के संयोजक और नगर पंचायत अध्यक्ष उपस्थित रहे। बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा की जिस प्रकार से केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार कार्य कर रही है और प्रदेश में जयराम ठाकुर सरकार काम कर रही है हिमाचल में विकास की गति दोगुना बढ़ गई है। निश्चित रूप से हिमाचल प्रदेश में डबल इंजन की सरकार कार्यरत है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी हिमाचल प्रदेश से गहरा नाता है और वह हिमाचल की परिस्थितियों से खुद अवगत है, वह यहां प्रभारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले उपचुनावों के लिए भाजपा के कार्यकर्ता तैयार है और बूथ स्तर पर इसकी विस्तृत योजनाएं भी बन रही है, उन्होंने कहा कि मिशन 2022 को लेकर भी हम धरातल पर काम कर रहे हैं और इस बार एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार 2022 में स्थापित होने जा रही है इसके लिए हम सुदृण रूप से कार्य कर रहे हैं। इस बैठक में सभी कार्यकर्ताओं से केंद्र की उपलब्धियों और योजनाओं के बारे में पूछा और विस्तारपूर्वक बताया और इनके बारे में अपने क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति तक जागरूकता लाने के लिए कहा और मिशन रिपीट 2022 को कामयाब करने के लिए बूथ स्तर पर मेहनत करने के लिए आग्रह किया। भाजपा सह प्रभारी संजय टंडन ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व भाजपा अध्यक्ष और पूर्व मंत्री व विधानसभा उपाध्यक्ष खिमिराम से उनके निवास पर शिष्टाचार भेंट भी की।
हिमाचल प्रदेश राज्य तकनीकी कर्मचारी संघ का धरना प्रदेश अध्यक्ष दूनी चंद ठाकुर की अध्यक्षता में विद्युत भवन शिमला में 19 जुलाई को हुआ। जिसमें प्रदेश के सभी इकाइयों से तकनीकी कर्मचारी निर्धारित संख्या मैं उपस्थित हुए। सभी इकाइयों के प्रधान व सचिवों ने विद्युत बोर्ड प्रबंधन के तकनीकी कर्मचारियों की मांगों को न मानने पर कड़ा विरोध जताया व प्रदेश नेतृत्व को आश्वाशन दिया कि अगर प्रबंधन तकनीकी कर्मचरियों की मांगों को नहीं मानता है तो प्रदेश के सभी तकनीकी कर्मचारी फिर से बिजली बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ धरना करेंगे व तब तक मुख्यालय को नहीं छोड़ेंगे जब तक उनकी मांगों का निराकरण न हो। प्रदेश अध्यक्ष ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बोर्ड प्रबंधन से चार बार सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई व प्रबंधन ने 31 मई तक सभी बिषयों पर निर्णय लेने का आश्वाशन दिया। तकनीकी कर्मचारी संघ ने कोरोना की परिस्थितियों को मध्य नजर रखते हुए बोर्ड को जून माह में औऱ समय दिया उसके बाद 8 जुलाई को प्रबंधन के साथ पुनः संवाद स्थापित किया मगर बोर्ड के प्रबंध निदेशक का रवैया तकनीकी कर्मचारियों की समस्यायों के प्रति सकारात्मक नहीं था जिस को देखते हुए बोर्ड को 10 दिन का एक समयबद्ध नोटिस दिया गया जिसके लिए प्रबंध निदेशक की हठधर्मिता जिम्मेवार है।दूनी चंद ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान प्रबंधक वर्ग सर्विस कमेटी की बैठक नहीं करवा पाया है जो उनकी नाकामी को दर्शाता है व कर्मचारियों के प्रति उनकी मानसिकता को भी दर्शाता है। ठाकुर ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि तकनीकी कर्मचारी रात दिन लाखों उपभोक्ताओं को सुचारू बिजली उपलब्ध करवा रहा है उसके विपरीत मौजूदा प्रबंधन उनकी जायज मांगों को नहीं मान रहा जिसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है तकनीकी कर्मचारी संघ तकनिकी कर्मचरियों की मांगों को मनवाने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है प्रदेश अध्यक्ष ने बोर्ड प्रबंधन को चेताया कि वह तकनिकी कर्मचारियों का इम्तहान न लें व उनकी मांगों को तुरंत मानकर उनके आदेश जारी करें नहीं तो आने वाले समय में तकनिकी कर्मचारी संघ प्रदेश में एक बहुत बड़ा आंदोलन करेगा जिसकी रणनीति आगामी पदाधिकारी बैठक में तय की जायेगी जो कि शिमला में 27 जुलाई को रखी गई है। दूनी चंद ठाकुर ने प्रदेश सरकार से यह भी मांग की है कि बोर्ड में सेवा विस्तार की प्रथा को बंद किया जाये। इसके साथ ही तकनिकी कर्मचारी संघ बोर्ड के निजीकरण का भी विरोध करता है अगर केंद्र सरकार बोर्डो का निजीकरण करती है तो तकनीकी कर्मचारी संघ पूरे प्रदेश भर में आंदोलन शुरू करेगी ।
प्रदेश के छह बार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह की स्मृति में प्रदेश कांग्रेस कमेटी वृक्षारोपण सप्ताह का आयोजन करेगी। प्रदेश के हर जिले में कांग्रेस पार्टी के सभी नेता, पदाधिकारी व कार्यकर्ता इस वृक्षारोपण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे। इस वृक्षारोपण का नाम वीरभद्र सिंह वृक्षारोपण सप्ताह रखा गया है जो उनकी पुण्य स्मृति के प्रति समर्पित होगा। कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने मंगलवार को कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी हर साल अपने सामाजिक दायित्व के प्रति वन महात्सव के तहत प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करती रही है।उन्होंने कहा कि चूंकि इस बार प्रदेश ने अपना एक महान नेता वीरभद्र सिंह को खोया है इसलिए उनकी स्मृति में 25 जुलाई से 31 जुलाई तक वृक्षारोपण सप्ताह उनके लिए कांग्रेस की श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में उनके बहुमूल्य योगदान को कभी नही भुलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह हमेशा ही कांग्रेस पार्टी के प्रेरणास्रोत रहेंगे। उनके आदर्शों और उनकी समग्र विकास की सोच के साथ प्रदेश में कांग्रेस आगे बढ़ेगी।तय कार्यक्रम के अनुसार शिमला में यह वृक्षारोपण 25 को जिला शिमला शहरी व 26 को शिमला ग्रामीण में आयोजित किया जाएगा। इसी तरह 27 जुलाई को ऊना और सिरमौर जिला, 28 को कांगड़ा व सोलन, 29 को हमीरपुर व कुल्लू, 30 को बिलासपुर व मंडी, 31 को लाहुल स्पीति व किन्नौर में यह वन महात्सव आयोजित किए जाएंगे।
क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी शिमला राजेश शर्मा ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लाईफ इंश्योरेंस शिमला यूनिट में डवल्पमेंट मैनेजर, फाईनेशियल एडवाईजर, उत्कर्ष पदों को भरने के लिए 24, 26 व 27 जुलाई, 2021 को कैम्पस इंटरव्यू का आयोजन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लाईफ इश्योरेंस छोटा शिमला में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 12वीं, ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमबीए शैक्षणिक योग्यता तथा 21 से 50 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार अपने अनिवार्य दस्तावेजों सहित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लाईफ इंश्योरेंस छठी मंजिल छोटा शिमला में प्रातः 10 बजे पहुंचकर कैम्पस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 86290-79666 पर सम्पर्क कर सकते हैं। इसी के साथ उन्होंने जानकारी दी की मैसर्ज सॉफ्ट ऐज इन्फोरमेशन टैक्नोलॉजी लिमिटिड शिमला यूनिट में डिलवरी एसोशिएट के 50 पदो को भरने हेतु 28 जुलाई, 2021 को कैम्पस इंटरव्यू का आयोजन सॉफ्ट ऐज इन्फोरमेशन टैक्नोलॉजी लिमिटिड शांति भवन, सैक्टर-6, फेस-3 शिमला में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त पदों के लिए 8वीं, 10वीं पास एवं इससे अधिक वाले शैक्षणिक योग्यता तथा आयु सीमा 18 से 40 वर्ष निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि इच्छुक उम्मीदवार 28 जुलाई, 2019 को प्रातः 10 बजे पहुंचकर कैम्पस इंटरव्यू में भाग ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 96430-57976 पर सम्पर्क कर सकते हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित होकर कार्य करें। डॉ. सैजल मंगलवार को सोलन जिला के कसौली विधानसभा क्षेत्र के दत्यार में 72वें जिला स्तरीय वन महोत्सव अभियान का शुभारम्भ करने के उपरान्त उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर वृक्षारोपण की जापानी पद्धति ‘मियावाकी’ के माध्यम से बरगद का पौधा रोपकर अभियान का शुभारम्भ किया। उन्होंने महत्वाकांक्षी ‘एक बूटा बेटी के नाम’ योजना के तहत पीपल का पौधा भी रोपा। इस अवसर पर पीपल, अर्जुन, दाढ़ू, बहेड़ा, शीशम इत्यादि के 500 पौधे रोपे गए। डॉ. सैजल ने इस अवसर पर कहा कि इस वित्त वर्ष में सोलन जिला में 386 हैक्टैयर भूमि पर विभिन्न प्रजातियों के 3,10,000 से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि गत 3.5 वर्ष की अवधि में सोलन जिला में 1650 हैक्टैयर भूमि पर वृक्षारोपण किया गया है। उन्होंने इस अवसर पर ग्राम पंचायत जाबली और कोटी नाभ के वार्ड सदस्यों को 51-51 पौधे रोपित करने के लिए प्रदान किए। आयुष मंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता रोपे गए वृक्षों की सुरक्षा पर निर्भर करती है। इस दिशा में युवा पीढ़ी की सहभागिता अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि युवा रोपित पौधों की देखभाल का प्रण लें तो धरती का हरित आवरण यथोचित बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि पौधरोपण अभियान की सफलता के लिए कार्य करें। डॉ. सैजल ने कहा कि समेकित बाल विकास परियोजना द्वारा दत्यार में गत एक वर्ष में ग्राम पंचायत जाबली और कोटी नाभ में जन्मी 52 बेटियों के नाम पर 52 पौधे रोपित कर बालिका सम्मान वाटिका स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि दत्यार को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है और राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित यह स्थल आने वाले समय में पर्यटकों के लिए प्राकृतिक दृश्यावली का प्रमुख स्थल बन कर उभरेगा। डॉ. सैजल ने इस अवसर पर जन समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को इनके निपटारे के निर्देश दिए। वन अरण्यपाल ई. विक्रम ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व के 50 वर्ष पूर्ण होने पर हाल ही में 04 स्वर्णिम वाटिकाएं स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि गत 02 वर्षों में सोलन जिला के वन क्षेत्र में 24.29 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। सोलन जिला में अगले 02 वर्षों में जल उपलब्धता की स्थिति में सुधार के उद्देश्य से जल भण्डारण योजना के तहत 10 लाख लीटर से अधिक क्षमता की 03 संरचनाएं निर्मित की जाएंगी। वन मण्डलाधिकरी यशुदीप सिंह ने धन्यावाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए वृक्षारोपण की जापानी पद्धति ‘मियावाकी’ की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि इस तकनीक में पौधों को एक दूसरे के समीप रोपा जाता है ताकि वे सूर्य के प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा कर कम समय में विकसित हो सकें। प्रदेश में इस तकनीक का प्रयोग पहली बार दत्यार में किया गया है। प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. डेजी ठाकुर, एपीएमसी सोलन के अध्यक्ष संजीव कश्यप, जिला सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ सोलन के अध्यक्ष सुन्दरम ठाकुर, बीडीसी धर्मपुर के उपाध्यक्ष मदन मोहन मेहता, भाजपा मण्डल कसौली के अध्यक्ष कपूर सिंह वर्मा, जोगेन्द्रा केन्द्रीय सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष यशपाल ठाकुर, युवा बोर्ड के निदेशक संजय ठाकुर, भाजपा मण्डल कसौली के उपाध्यक्ष महेन्द्र ठाकुर, ग्राम पंचायत जाबली की प्रधान कल्पना गर्ग, ग्राम पंचायत कोटी-नाभ की प्रधान सन्ध्या देवी, ग्राम पंचायत टकसाल की प्रधान सन्तोष, बीडीसी सदस्य मैना देवी एवं चम्पा ठाकुर, जिला भाजपा उपाध्यक्ष दौलत राम ठाकुर, भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष ममता ठाकुर, पूर्व बीडीसी सदस्य करनैल सिंह, ग्राम पंचायत जाबली के पूर्व प्रधान दूनी चन्द, ग्राम पंचायत गढ़खल-सनावर के उप प्रधान विपिन गुप्ता, वन अरण्यपाल ई.विक्रम, वन मण्डलाधिकरी यशुदीप सिंह, उपमण्डलाधिकारी कसौली डॉ. संजीव धीमान, खण्ड विकास अधिकारी सुभाष अत्री, वन मण्डलाधिकरी सोलन मुख्यालय ए.के. वर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेन्द्र टेगटा, भाजपा तथा भाजयुमो के विभिनन पदाधिकारी, अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
कोरोना संकटकालकाल में जिस तरह से आईपीएच, विद्युतकर्मी, तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी कार्य कर रहे हैं वो सराहनीय है, ये बात मंगलवाल को समाजसेवी मनीष शारदा ने गगरेट ब्लॉक के आईपीएच कर्मचारी, विद्युतकर्मी डॉक्टर, तहसील और एसडीएम कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को कोरोना किट से सम्मानित कर कहीं। समाजसेवी मनीष शारदा ने कहा कि जिस तरह से कोरोना संकटकाल की दो लहरों में सभी विभागों के कर्मचारियों द्वारा कार्य किया गया है वो सराहना के योग्य है, उन्होंने कहा कि अब कोरोना की संभावित तीसरी लहर आने वाली है ऐसे में सबको और भी ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कर्मचारियों को कोरोना किट देकर उनके कार्य की सराहना करते हुए उनसे कोरोना के प्रति सावधानी बरतने की अपील की है। इस मौके पर कोरोना किट में उक्त विभागों के कर्मचारियों को N-95 मास्क, विटामिन सी की गोलियां और सेनेटाइजर दिया गया है। इस अवसर पर समाजसेवी मनीष शारदा ने सभी से आग्रह किया कि कोविड-19 से बचाव के लिए यदि हम सही प्रकार से नाक से लेकर ठोडी तक ढकते हुए मास्क पहनें, बार-बार अपने हाथ साबुन अथवा एल्कोहल युक्त सेनिटाईजर से धोते रहें और सोशल डिस्टेन्सिग नियम का पालन करें तो निश्चित तौर पर कोरोना संक्रमण से सभी का बचाव किया जा सकता है। इस मौके पर उनके साथ करण ठाकुर, होशियार सिंह ( रोज़ी ), ओमपाल ठाकुर (लब्बी), नरेंद्र ( पिंटू ), रोहित मौजूद रहे।
सोलन विकास खण्ड की पँचायत पट्टाबरावरी के निर्माणाधीन बांके बिहारी मंदिर परिसर में 18 जुलाई से 25 जुलाई तक गुरुपूर्णिमा पर्व के उपलक्ष पर श्री बांके बिहारी विश्व मंगलम सेवाधाम के सौजन्य से श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य हरि महाराज अपनी मधुर वाणी से ज्ञान की गंगा का प्रवाह करके कथा स्रोताओं को श्रवण करवा रहे है। कथा के तीसरे दिन हरि महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया । प्रवचन देते हुए आचार्य ने कहा कि मनुष्य को हमेशा सत्य बोलना चाहिये सत्य बोलने से मनुष्य में शक्ति बनी रहती है जबकि झूठा व्यक्ति हर समय कमजोर व डरा हुआ रहता है। उन्होंने सभी स्रोताओं से आवाहन किया कि वह सत्य का मार्ग अपनाए। अगले प्रसंग में आचार्य ने कहा कि संसार मे बढ़ती जा रही कुरीतियों तथा बुराईयों को यदि हम रोक न सके तो संसार को खतरे का सामना करना पड़ सकता है। हरि माहराज ने कहा कि गुरु और शिष्य का आपस मे बहुत गहरा संबंध रहा है गुरु भक्ति ही सबसे श्रेस्ठ तीर्थ है गुरु नाम के जप से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते है गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है गुरु की आज्ञा का पालन हर शिष्य को करना चाहिए। विश्वमंगलम सेवाधाम के मीडिया प्रभारी एवम पूर्व पँचायत समिति सदस्य डी डी कश्यप ने जानकारी देते हुए कहा कि भागवत कथा को 25 जुलाई को विश्राम दिया जाएगा। कथा का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक है। उन्होंने सभी क्षेत्र वासियों से कथा श्रवण करने की अपील की है।
पुलिस थाना देहरा के अंतर्गत सुनहेत में मंगलवार को डीएसपी देहरा अंकित शर्मा के निर्देशानुसार बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के रेंडम सैंपल कोविड टेस्ट किए गए इस दौरान स्वास्थ्य व पुलिस प्रशासन के कर्मचारी भी मौजूद रहे। अधिक जानकारी देते हुए डीएसपी अंकित शर्मा ने बताया कि पुलिस थाना देहरा में बाहरी राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की रेंडम सेंपलिंग की जा रही है साथ ही बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आती है तो कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत उसे क्वारंटाइन किया जाएगा। कोरोना की रोकथाम के लिए यह प्रक्रिया समस्त उपमंडल देहरा में शुरू की गई है जिसमें पुलिस एवं स्वास्थ्य प्रशासन प्राथमिकता से कार्य कर रहा है इस दौरान टेस्टिंग के साथ लोगों को कोविड-19 निर्देशों से संबंधित जागरूक भी किया जा रहा है वहीं नियमों का पालन करने के लिए स्प्ष्ट तोर पर कहा जा रहा है।
सोलन : मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को उपायुक्त के माध्यम से सौंपा ज्ञापन
मंगलवार दिनांक 20 जुलाई, 2021 को मिड डे मील वर्कर्स यूनियन हिमाचल प्रदेश (संबंधित सीटू) जिला कमेटी सोलन ने राज्य स्तरीय आह्वान पर पूरे राज्य भर में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन भेजें। इस मौके पर जिला सोलन में भी सोलन, नालागढ़ व दाड़लाघाट के मिड डे मील वर्कर्स ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे। इस ज्ञापन के माध्यम से मिड डे मील वर्कर्स ने निम्नलिखित मांगे उठाई:- 1. मिड डे मील वर्करज़ को सरकार द्वारा घोषित 9000रु न्यूनतम वेतन दिया जाए। 2. हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में पार्ट टाईम मल्टी टास्क वर्करज़ की भर्ती में मिड डे मील वर्करज़ को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति दी जाए। 3. मिड डे मील वर्करज़ की नौकरी से संबंधित 25 बच्चों की शर्त को हटाया जाए। सभी स्कूलों में 2 मिड डे मील वर्करज की नियुक्ती की जाए। 4. मिड डे मील वर्करज़ को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। 5. मिड डे मील योजना का किसी भी रूप में निजीकरण न किया जाए। केन्द्रीय रसोईघरों पर रोक लगाई जाए। 6. मिड डे मील योजना में (DBT) योजना पर रोक लगाई जाए। स्कूलों में बच्चों को ताजा पका हुआ भोजन दिया जाए। 7. हिमाचल प्रदेश माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मिड डे मील वर्करज़ को 10 महीने के बजाए 12 महीने का वेतन देने के निर्णय को तुरन्त लागू किया जाए। नवम्बर 2019 से एरियर का भुगतान किया जाए। 8. मिड डे मील वर्करज़ को कई बार 3-4 महीने तक वेतन नहीं दिया जाता, मिड डे मील वर्करज़ को प्रतिमाह पहली तारीख को वेतन का भुगतान किया जाए। 9. मिड डे मील वर्करज़ को साल में दो वर्दी दी जाए। 10. मिड डे मील वर्करज़ के लिए आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश व मैडिकल अवकाश दिया जाए। 11. मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स व किसान विरोधी तीनों कृषि कानून वापिस लिए जाए। इस मौके पर सीटू जिला सचिव एनडी रणौत, जिला अध्यक्ष मोहित वर्मा, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन अध्यक्षा मीरा कश्यप, सचिव कमलेश सहित कुंता देवी, सुनील शर्मा, सपना ठाकुर, नर्मदा देवी, मीना, कमलेश आदी मौजूद रहे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने कहा की भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस द्वारा राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए लगाए गए तथ्यहीन, निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियों का पुरजोर खंडन करते हुए निंदा करती है। यह कांग्रेस की एक नई किस्म की निम्नतम स्तर की राजनीति है जिसने 50 से अधिक वर्षों से भारत पर शासन किया है। उन्होंने कहा यह पेगासस की फर्जी कहानी मानसून सत्र से ठीक पहले क्यों गढ़ी गई? क्या इसे मानसून सत्र से ठीक पहले लाना कुछ लोगों की पूर्व नियोजित रणनीति थी? जानबूझकर मानसून सत्र के समय सदन को बाधित करने और देश में बेबुनियाद एजेंडा खड़ा करने की कोशिशें की जा रही है और इसका कारण यह है कि कांग्रेस पार्टी अब सिमट रही है और हार रही है। कश्यप ने कहा इस फर्जी कहानी से भारत सरकार को जोड़ने वाले साक्ष्य का एक भी सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है। यह फर्जी रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र और इसकी सुस्थापित संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास प्रतीत होती है। उन्होंने कहा क्या हम इस बात से इनकार कर सकते हैं कि एमनेस्टी जैसी संस्थाओं का कई मायनों में भारत विरोधी घोषित एजेंडा रहा है? जब हमने उनसे कानून के अनुसार उनके विदेशी फंडिंग के बारे में पूछा तो वे भारत से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया। इस रिपोर्ट में संदिग्ध लोगों के साथ सांठगांठ चलाने वाले विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भी संलिप्तता है। यह शर्मनाक है कि कांग्रेस जैसी पार्टियां ऐसे संगठनों की लाइन को तोते की तरह दुहरा रही हैं! यदि हमारे विपक्षी दल ' सुपारी ' एजेंटों के रूप में शामिल हैं तो यह भारत के लिए एक नया निम्न स्तर है। उन्होंने कहा की 2013 के एक आरटीआई जवाब से पता चला कि उस समय कांग्रेस की यूपीए सरकार द्वारा हर महीने लगभग 9,000 फोन और 500 ईमेल खातों की निगरानी की जाती थी। यह भी सर्वविदित है कि हरियाणा के दो सिपाही राजीव गांधी के आस पास देखे गए तो उन्होंने केंद्र में चंद्रशेखर की सरकार गिरा दी थी । यही कांग्रेस का चरित्र है ।
पूर्व मुख्यमंत्री और अर्की विधायक वीरभद्र सिंह अब नहीं रहे और नतीजन जल्द अर्की निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव होना तय है। अर्की निर्वाचन क्षेत्र की सियासत बेहद रोचक रही है। अतीत पर नजर डाले तो यहां कांग्रेस -भाजपा दोनों को बराबर प्यार मिलता रहा है। वर्ष 1980 में भाजपा की स्थापना हुई थी और उसके बाद से अब तक 9 विधानसभा चुनाव हुए है। इनमें कांग्रेस पांच मर्तबा तो भाजपा ने चार मर्तबा बाजी मारी है। पहले करीब ढाई दशक तक अर्की की सियासत हीरा सिंह पाल और नगीन चंद्र पाल के बीच घूमती रही, तो 1993 में कांग्रेस नेता धर्मपाल ठाकुर के विधायक बनने के बाद अर्की वालों ने उन पर लगातार तीन बार भरोसा जताया। फिर कर्मचारी राजनीति से सियासत में कदम रखने वाले गोविंद राम शर्मा दो बार जीते। पर 2017 के विधानसभा चुनाव में खुद सूबे के मुख्यमंत्री ( तत्कालीन ) वीरभद्र सिंह ने अर्की से मैदान में उतरने का निर्णय लिया और अर्की के विधायक बने। अब वीरभद्र सिंह के निधन के बाद होने वाले उपचुनाव को लेकर कयास और चाहवानों के प्रयास शुरू हो चुके है। असंतोष और अंदरूनी खींचतान की आग दोनों ही राजनीतिक दलों में बराबर लगी है। वर्ष विधायक पार्टी 1967: हीरा सिंह पाल निर्दलीय 1972: हीरा सिंह पाल लोक राज पार्टी 1977: नगीन चंद्र पाल जनता पार्टी 1982: नगीन चंद्र पाल भारतीय जनता पार्टी 1985: हीरा सिंह पाल कांग्रेस 1990: नगीन चंद्र पाल भारतीय जनता पार्टी 1993: धर्मपाल ठाकुर कांग्रेस 1998: धर्मपाल ठाकुर कांग्रेस 2003: धर्मपाल ठाकुर कांग्रेस 2007: गोविन्द राम शर्मा भारतीय जनता पार्टी 2012: गोविन्द राम शर्मा भारतीय जनता पार्टी 2017 : वीरभद्र सिंह कांग्रेस 2007 में कांग्रेस को भारी पड़ी गलती : वर्ष 1993, 1998 और 2003 में कांग्रेस के धर्मपाल ठाकुर लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके थे। 2003 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी और धर्मपाल ठाकुर को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया गया था। वे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी नेताओं में थे। अर्की क्षेत्र में भी उनकी अच्छी पकड़ थी। पर बावजूद इसके 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बड़ी चूक हो गई और धर्मपाल ठाकुर का टिकट काट दिया गया। कहते है वीरभद्र सिंह इसके पक्षधर नहीं थे, वे धर्मपाल ठाकुर को ही टिकट देने के हिमायती थे। पर कांग्रेस आलाकमान ने वीटो इस्तेमाल करते हुए प्रकाश चंद करड को टिकट थमा दिया। आखिरकार हुआ वो ही जिसका अंदेशा था, हवा - हवाई उम्मीदवार देने का खामियाजा कांग्रेस ने भुगता और पार्टी तीसरे स्थान पर रही। प्रकाश चंद बुरी तरह चुनाव हारे। वहीँ दूसरे स्थान पर रहने वाले थे धर्मपाल ठाकुर जो कांग्रेस से टिकट कटने के बाद बतौर निर्दलीय मैदान में थे। प्रकाश चंद को जहां करीब साढ़े सात हज़ार वोट ही मिले थे वहीँ धर्मपाल ठाकुर को निर्दलीय लड़ने के बावजूद करीब साढ़े चौदह हजार वोट मिले थे। जाहिर सी बात है कि कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई का फायदा तब भाजपा को मिला था। माहिर मानते है की अगर कांग्रेस ने धर्मपाल ठाकुर का टिकट नहीं काटा होता तो संभवतः कांग्रेस अर्की में जीत का चौका लगाती। 2012 में बगावत ने बिगाड़े अवस्थी के समीकरण : 2012 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो कांग्रेस ने संजय अवस्थी को उम्मीदवार बनाया था। दरअसल 2008 में धर्मपाल ठाकुर का देहांत हो चूका था और 2007 का चुनाव लड़ चुके प्रकाश चंद भी तब तक खुद को स्थापित नहीं कर पाए थे। ऐसे में पार्टी को एक दमदार चेहरा चाहिए था और संजय अवस्थी पर पार्टी ने भरोसा जताया। पर अंदरूनी खींचतान और बगावत पार्टी को भारी पड़ी। दरअसल उस चुनाव में पार्टी के ही अमर चंद पाल बतौर निर्दलीय मैदान में उतरे और 10 हजार से ज्यादा वोट लेकर कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया। नतीजन संजय अवस्थी करीब दो हजार वोट से चुनाव हार गए, पर तब से संजय अवस्थी ही स्थानीय कांग्रेस का मुख्य चेहरा बने हुए है। 2017 में वीरभद्र ने करवाई वापसी : 2017 विधानसभा चुनाव से कई माह पहले से ही अर्की में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विशेष मेहरबानी दिखने लगी थी। वीरभद्र सिंह के लगातार दौर और कई सौगातों ने संकेत दे दिए थे कि खुद वीरभद्र सिंह अर्की से मैदान में उतर सकते है। दरअसल वीरभद्र सिंह शिमला ग्रामीण की अपनी सीट से अपने पुत्र विक्रमादित्य सिंह को विधानसभा भेजना चाहते थे। हुआ भी ऐसा ही। उन्होंने विक्रमादित्य के लिए शिमला ग्रामीण सीट छोड़ दी और खुद अर्की से मैदान में उतर गए। जब खुद वीरभद्र सिंह मैदान में थे तो जाहिर सी बात है खुलकर कोई विरोध नहीं हुआ। जैसा अपेक्षित था वीरभद्र सिंह चुनाव जीत गए और दस साल बाद अर्की सीट वापस कांग्रेस के कब्जे में आ गई। पर उनके आने से संजय अवस्थी का इंतज़ार बढ़ गया। 2012 के बाद से ही संजय अवस्थी तैयारी में जुटे थे लेकिन तब उन्हें चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला। फिर अवस्थी को मिलेगा टिकट ! वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अर्की उपचुनाव जीतना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होगा। बहरहाल, यक्ष प्रश्न ये है कि कांग्रेस किसे मैदान में उतारती है। एक पक्ष ये भी है कि वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह अर्की उप चुनाव लड़े। पर वे सक्रीय राजनीति में लौटती है तो उनके मंडी संसदीय चुनाव लड़ने की सम्भवना अधिक है। यदि प्रतिभा सिंह नहीं तो कौन, ये बड़ा सवाल है। जमीनी बात करें तो संजय अवस्थी ही फिलवक्त मजबूत दावेदार लग रहे है। हालांकि राजेंद्र ठाकुर भी स्व. वीरभद्र सिंह से नजदीकी के बुते टिकट की दौड़ में रहेंगे लेकिन अवस्थी के रहते पार्टी उन्हें मौका दे, ऐसा मुश्किल लगता है। जाहिर सी बात है इस तमाम खींचतान में सबको एकजुट रखकर चुनाव लड़ना कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती होने वाली है। दो बार कमल खिलाने वाले गोविन्द राम साइडलाइन : 1993 से 2003 तक अर्की में लगातार तीन चुनाव हारने के बाद भाजपा बैकफुट पर थी। अर्की कांग्रेस का गढ़ बन चूका था और इसे ढहाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती थी। पर जब कांग्रेस ने सीटिंग विधायक धर्मपाल ठाकुर का टिकट काटा तो भाजपा को वापसी की उम्मीद दिखी। 2007 के चुनाव में भाजपा ने कर्मचारी नेता रहे गोविन्द राम शर्मा को टिकट दिया था और गोविंद राम के चेहरे और कांग्रेस में हावी बगावत के बूते अर्की में भाजपा का वनवास खत्म हुआ। इसके बाद 2012 में चुनाव में भी पार्टी ने गोविन्द राम शर्मा को मैदान में उतारा और वे दूसरी बार चुनाव जीत गए। पर 2017 में भाजपा ने गोविन्द राम शर्मा का टिकट काट कर रतन सिंह पाल को मैदान में उतारा और भाजपा अर्की का चुनाव हार गई। हालांकि अर्की से खुद वीरभद्र सिंह मैदान में थे लेकिन भाजपा के टिकट वितरण को लेकर सवाल उठे। कहते है तब बगावत साधने को भाजपा ने गोविन्द राम शर्मा को आश्वस्त किया था कि सरकार बनने की स्तिथि में उन्हें कोई महत्वपूर्ण पद और ज़िम्मेदारी मिलेगी, पर ऐसा हुआ नहीं। गोविन्द राम शर्मा एक किस्म से साइडलाइन कर दिए गए। वीरभद्र से हारकर भी फायदे में रहे रतन पाल : 2017 में रतन सिंह पाल का मुकाबला खुद वीरभद्र सिंह से था। माना जा रहा था वीरभद्र सिंह आसानी से चुनाव जीतेंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उनकी जीत का अंतर करीब छ हजार वोट रहा जो उनके कद के लिहाज से कम था। वहीं वीरभद्र सिंह को टक्कर देने के बाद रतन सिंह पाल एक किस्म से हार कर भी जीत गए। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें हिमाचल प्रदेश कोआपरेटिव डेवलपमेंट फेडरेशन का चेयरमैन बनाया गया। संगठन में भी रतन पाल को प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष का दायित्व मिला। कुल मिलाकर रतन सिंह पाल अर्की भाजपा का प्राइम फेस बन गए और अब भी बने हुए है। निकाय चुनाव में खरे नहीं उतरे पाल : इसी वर्ष हुए स्थानीय निकाय चुनाव के टिकट वितरण में रतन सिंह पाल की ही चली। पर जिला परिषद में पार्टी के कई दिग्गजों के टिकट काटने का खामियाजा भाजपा ने भुगता। अंत में इन्हीं दिग्गजों के सहारे जैसे तैसे जिला परिषद् पर भाजपा का कब्ज़ा तो हो गया लेकिन रतन सिंह पाल के खिलाफ खुलकर आवाज उठने लगी। वहीँ अर्की नगर पंचायत चुनाव में भी भाजपा को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। बीडीसी पर भी कांग्रेस का कब्ज़ा रहा। हालांकि ये चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं हुए थे। विरोधी एकजुट नहीं हुए तो रतन पाल की राह आसान : इसमें कोई संशय नहीं है कि वर्तमान में अर्की भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा भी अब खुलकर मैदान में है और टिकट की मांग कर रहे है। उनके साथ भाजपा का एक बड़ा गुट दिख रहा है और गोविन्द राम पूरी तरह एक्शन में है। गोविन्द राम के अलावा और भी कई चाहवान है जो टिकट चाहते है। कई ऐसे भी है जो पहले भी विधायक बनने की चाह में बागी बन चुके है। पर जानकार मानते है कि पार्टी का झुकाव फिलवक्त रतन सिंह पाल की तरफ ही दिख रहा है। हां यदि रतन सिंह पाल के विरोधी एकजुट होकर एक चेहरे पर सहमति बना ले तो शायद पार्टी को सोचना पड़े। पर अगर सबकी अपनी डफली अपना राग ही रहा तो टिकट के लिए रतन सिंह पाल की राह आसान होगी।
छह दफे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद प्रदेश कांग्रेस में ऐसा कोई कद्दावर नेता नहीं दिख रहा है, जो उनके निधन के बाद उपजे शून्य को भर सके। ये पार्टी के लिए खतरे की घंटी है। आज विरोधी दल ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के अपने नेता भी यही मान रहे हैं कि हिमाचल में वीरभद्र सिंह जैसा नेता कोई नहीं हाे सकता। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी राजीव शुक्ला खुद भी यही मानते हैं। निसंदेह वीरभद्र सिंह का जाना हिमाचल कांग्रेस की राजनीति काे करारा झटका है। उनके बाद ऐसा कोई नेता नहीं दिख रहा जो सबको स्वीकार्य हो, यानी कांग्रेस राह बहुत कठिन होने वाली है। वीरभद्र सिंह के बगैर कांग्रेस स्थिति, पार्टी नेतृत्व, आगामी चार उपचुनाव, 2022 की तैयारी और पार्टी संगठन और हावी गुटबाजी जैसे कई अहम मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला से चर्चा की, पेश है उसके अंश... सवाल: वीरभद्र सिंह नहीं रहे, ताे ऐसे में उनके बाद प्रदेश कांग्रेस के पास क्या विकल्प है ? ऐसा कोई नेता आप मानते है जो पार्टी में दम भर सके, जो उनका स्थान ले सके ? जवाब: वीरभद्र सिंह के जाने से हिमाचल ही नहीं पूरे देश की राजनीति काे क्षति हुई है। हिमाचल में कोई दूसरा वीरभद्र सिंह नहीं हाे सकता है। पूर्व में वे हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे और केंद्र में कई बार मंत्री रहे, लेकिन आज पूरे देश ने विकास पुरुष खो दिया। हालांकि कई नेता तैयार होते हैं, लेकिन वीरभद्र जैसे नेक, विकासशील नजरिये वाला, सबको साथ लेकर चलने वाला नेता हिमाचल में कोई हाे नहीं सकता। वीरभद्र सिंह के चले जाने से प्रदेश कांग्रेस में जो शून्य उपजा है उसे भरने में समय लग सकता हैं। हिमाचल में कई वरिष्ठ नेता हैं, अब उन्हें साथ मिलकर संगठन काे और मजबूत करने की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। मुझे अभी तक याद है कि वीरभद्र सिंह के फैसले काे पार्टी हाईकमान भी इनकार नहीं करता था। उन जैसा मजबूत और ताकतवर शायद कोई दूसरा न हो। राजनीति से लेकर अफसरशाही को काबू में रखने वाला ऐसा बेमिसाल नेता शायद ही कोई मिलेगा। फिलहाल उनके बगैर हमें संगठन काे और सशक्त करने के लिए एकजुट होकर काम करना पड़ेगा। सवाल: अब तक वीरभद्र सिंह खुद ही एक चेहरा थे, उनके बगैर प्रदेश कांग्रेस अगले चुनाव में भाजपा काे कैसे टक्कर देगी? जवाब: यह बात बिलकुल सही है कि प्रदेश कांग्रेस में अब तक वीरभद्र सिंह ही अकेले चेहरा थे, जिन्होंने अपने दम पर भी पार्टी काे सत्ता तक पहुंचाया। उनकी कमी प्रदेश की राजनीति में जरूर खलेगी, मगर हमें विरोधी राजनीतिक दलों काे पराजित करने एवं मुंह तोड़ जवाब देने के लिए वीरभद्र सिंह द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलना हाेगा। अगले साल चुनाव भी है और उससे पहले हिमाचल में चार उपचुनाव होने हैं। इसके लिए हमें दिन -रात मेहनत करनी हाेगी। वीरभद्र सिंह किस तरह से काम करते थे, उसी तर्ज पर सभी वरिष्ठ नेताओं काे काम करना पड़ेगा। सिर्फ भाजपा काे टक्कर देने की बात नहीं, बल्कि उसे पराजित करने के लिए कांग्रेस के पास पूरा तंत्र है। आज पूरा देश आहत है कि मोदी सरकार क्या कर रही है? सात साल से लाेगाें ने अच्छे दिन नहीं देखे। प्रदेश सरकार भी पूरी तरह विफल है। सवाल: कांग्रेस में पहले से ही गुटबाजी हावी रही है, ये कैसे शांत होगी ? जवाब: पूर्व में क्या रहा, क्या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मगर वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता एकजुट हैं और आगामी रणनीति के लिए हर राेज रूपरेखा तैयार की जाती है। कांग्रेस में गुटबाजी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश भाजपा में यह परंपरा चरम सीमा पर है। आज भाजपा के दूसरे गुट के नेता सीएम जयराम ठाकुर से खुश नहीं हैं। उनकी सरकार में कुछ मंत्री भी गुटबाजी का शिकार हाे चुके हैं। मैं साफ कहना चाहूंगा कि हिमाचल कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं हैं। हाईकमान के आदेशों का पालन हाे रहा है और सभी संगठन की मजबूती के लिए मेहनत कर रहे हैं। सवाल: हिमाचल में 4 उपचुनाव होने हैं, इस वक्त कांग्रेस कहां पर खड़ी है? जवाब: हिमाचल में होने वाले 4 उपचुनाव के लिए कांग्रेस पूरी तरह से तैयार हैं। पहले ताे तीन ही उपचुनाव तय थे, लेकिन दुर्भाग्य से वीरभद्र सिंह जी के निधन के बाद अब अर्की विधानसभा क्षेत्र में भी उपचुनाव होना है। मंडी संसदीय क्षेत्र समेत फतेहपुर, जुब्बल-कोटखाई और अर्की में जब भी उपचुनाव की तिथि घोषित होगी कांग्रेस अपने प्रत्याशियों काे मैदान में उतार देगी। 2019 के लाेकसभा चुनाव में हम किन कारणाें से हारे उन सभी खामियों काे ध्यान में रखते हुए मेहनत कर रहे हैं। कांग्रेस पूरी ताकत के साथ खड़ी है और मंडी संसदीय क्षेत्र के साथ तीनों विधानसभा उपचुनाव पर कांग्रेस की ही जीत तय है। काश वीरभद्र सिंह जी हाेते ताे संगठन में और जान आ जाती। सवाल: भाजपा ने मिशन रिपीट के लिए अभी से ही ताकत झोंक दी, कांग्रेस ने कोई रोडमैप तैयार किया है? जवाब: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा मिशन रिपीट का सपना ही देख रही है, जाे कभी साकार नहीं हाे सकता। इस वक्त भाजपा सत्ता में हैं ताे ताकत झोंकेंगी, लेकिन कांग्रेस कभी दिखावा नहीं करती है। हमने जमीनी स्तर पर रूपरेखा तैयार कर दी है। बीते दिनों धर्मशाला, कांगड़ा और ऊना में बैठक हुई जिसमें सभी पदाधिकारियों से फीडबैक लिया। जल्द ही मंडी संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में भी बैठक की जाएंगी। इसके साथ-साथ जुब्बल-कोटखाई, फतेहपुर और अर्की विधानसभा क्षेत्र के लिए सशक्त प्रत्याशियों की तलाश भी जारी है। उपचुनाव की घोषणा होते ही हम उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर देंगे। फतेहपुर और अर्की विधानसभा सीट कांग्रेस के पास ही थी। जबकि जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र और मंडी संसदीय क्षेत्र में हम और अधिक मेहनत करेंगे। जहां तक उपचुनाव के लिए टिकट का सवाल है, पार्टी हाईकमान ही इस पर फैसला करेगा। हिमाचल की जनता उपचुनाव में भाजपा को आईना दिखाएगी और 2022 के चुनाव में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।
वीरभद्र सिंह के निधन के बाद क्या उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने आगे आएगी ? क्या प्रतिभा सिंह आगामी उपचुनाव से चुनावी राजनीति में कमबैक करेंगी ? अगर प्रतिभा सिंह उपचुनाव लड़ती है, तो क्या वे मंडी संसदीय क्षेत्र का उपचुनाव लड़ेगी या अर्की विधानसभा का उपचुनाव ? फिलवक्त ये वो सवाल है जिनका जवाब सब तलाश रहे है। सबकी नजरें वीरभद्र सिंह के परिवार की तरफ टिकी है, विशेषकर वीरभद्र सिंह के समर्थकों और निष्ठावानों की। हालांकि माहिर मानकर चल रहे है कि आगामी उपचुनाव से प्रतिभा सिंह की सक्रिय राजनीति में वापसी तय है, पर जब तक वीरभद्र सिंह के परिवार का कोई बयान नहीं आता, ये सिर्फ कयास ही है। 1962 में वीरभद्र सिंह पहली बार सांसद बने थे, तब से अब तक बुशहर रियासत की सियासत में भरपूर भागीदारी रही है। सिर्फ आपातकाल के दौरान 1977 से 1980 तक ही ऐसा वक्त आया है जब बुशहर रियासत से कोई संसद या विधानसभा में न रहा हो। इन तीन वर्षों को छोड़ कर खुद वीरभद्र सिंह किसी न किसी सदन का हिस्सा रहे है। वहीं उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह भी मंडी सीट से दो बार सांसद रही है। वर्तमान में वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह भी शिमला ग्रामीण सीट से विधायक है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वीरभद्र सिंह कितने मजबूत नेता रहे है और बुशहर रियासत का लोकतांत्रिक राजनीति में क्या रसूख है। जाहिर सी बात है कि वीरभद्र सिंह के जाने के बाद अब उनके समर्थक चाहेंगे कि उनकी इस पकड़ को बरकरार रखा जा सके। पर अंतिम निर्णय तो वीरभद्र सिंह के परिवार को ही लेना है। अगर कांग्रेस पार्टी के लिहाज से बात करें तो वीरभद्र सिंह के साथ लोगों की सहानुभूति और संवेदनाएं दोनों है और इसी लहर पर सवार होकर कांग्रेस उपचुनाव का रण जीतने की आस में होगी। ऐसे में यदि प्रतिभा सिंह उपचुनाव में मैदान में होती है तो कांग्रेस के लिए जीत की आस और प्रबल होगी। निसंदेह यदि प्रतिभा सिंह इच्छा जताती है तो पार्टी बिना देर लगाएं उनके पीछे खड़ी होगी। मंडी में कैलक्युलेटेड, तो अर्की में हाई रिस्क ! प्रतिभा सिंह यदि चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त करती तो मैदान मंडी संसदीय क्षेत्र होगा या अर्की विधानसभा क्षेत्र, ये यक्ष प्रश्न है। अर्की वीरभद्र सिंह का आखिरी निर्वाचन क्षेत्र रहा है। ऐसे में अर्की उपचुनाव को जीतना कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठता का सवाल होगा। वहीं वीरभद्र सिंह के परिवार के लिए भी ये चुनाव वर्चस्व बरकरार रखने की चुनौती है। उनकी पत्नी और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को अर्की से चुनाव लड़वाने की मांग अभी से जोर पकड़ने लगी है। दरअसल अर्की में कांग्रेस की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है और एक गुट विशेष प्रतिभा सिंह को मैदान में उतारने का पक्षधर है। पर इस स्थिति में वीरभद्र परिवार का सब कुछ दांव पर होगा। खुदा न खास्ता नतीजा प्रतिकूल रहा तो वर्चस्व भी धुंधला जायेगा। वहीं प्रतिभा सिंह यदि मंडी संसदीय क्षेत्र से मैदान में होती है तो उन्हें बुशहर रियासत के दायरे में आने वाले क्षेत्रों से अच्छी सहानुभूति मिल सकती है, विशेषकर रामपुर, किन्नौर, आनी, करसोग और सिराज में। 2014 की मोदी लहर में भी प्रतिभा सिंह मंडी से करीब 40 हजार वोट से ही हारी थी जो अंतर आश्रय शर्मा के उम्मीदवार रहते 2019 में करीब चार लाख पहुंच गया था। ऐसे में सहानुभूति के रथ पर सवार होकर प्रतिभा सिंह 2014 के 40 हजार के अंतर को पाट सकती है। और अगर नतीजा उनके पक्ष में नहीं आता है तो भी उन्हें आश्रय शर्मा की तरह एकतरफा हार मिलेगी, ऐसा नहीं लगता। सो प्रतिभा सिंह के लिए मंडी से चुनाव लड़ना नपातुला जोखिम है। जबकि अर्की का चुनाव मंडी के बनिस्बत छोटा जरूर है पर वहां जोखिम बड़ा होगा।
मंडी संसदीय सीट पर हाेने वाले उपचुनाव की राह में भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। हालांकि इस सीट पर पिछले दाे चुनाव से भाजपा का ही कब्जा है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भाजपा की चिंता जरूर बढ़ी है। फिलहाल प्रदेश के दाेनाें प्रमुख राजनीतिक दलों काे चुनाव आयोग की ओर से उपचुनाव की घोषणा का इंतजार है। पर घोषणा से पहले ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हाे चुकी है। प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन दोनों मंडी संसदीय उपचुनाव जीतने के लिए अभी से भरपूर ताकत लगा रहे हैं। भाजपा ने मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर काे चुनाव प्रभारी भी नियुक्त किया है और वे पहले दिन से ही मंडी संसदीय क्षेत्राें का दाैरा करते आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के निधन के उपरांत यकायक मंडी संसदीय क्षेत्र के समीकरण बदल गए है। दरअसल अब मंडी सीट से वीरभद्र सिंह की पत्नी और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के चुनाव लड़ने की सम्भावना है। ऐसा होता है तो जाहिर है भाजपा को टक्कर में कोई मजबूत प्रत्याशी देना होगा। इसी को लेकर चिंतन मंथन का दौर जारी है। जानकार मानते है की अब बदले समीकरण के बाद भाजपा यहाँ से अपने किसी मंत्री को भी मैदान में उतारने पर भी विचार कर सकती है। वहीँ यदि प्रतिभा सिंह मैदान में नहीं होती है तो भाजपा की राह कुछ आसान जरूर होगी। कुल्लू दौरे के दौरान संगठन काे रिचार्ज कर गए जेपी नड्डा : भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के कुल्लू दौरे के दौरान उन्होंने संगठन काे रिचार्ज करने में कोई कमी नहीं छाेड़ी। कुल्लू में मंडी संसदीय क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं की एक बैठक का भी आयोजन किया गया। इस बैठक में भाग लेने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी विशेष रूप से पहुंचे तो वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बैठक में भाग लेकर कार्यकर्ताओं को संगठन की मजबूती की घुट्टी पिलाई। दरअसल जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हिमाचल में पहली बार किसी लोकसभा सीट पर चुनाव होगा, सो जाहिर है इस चुनाव में नड्डा की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है। रामपुर-आनी समेत अन्य क्षेत्रों में कई घोषणाएं कर गए महेंद्र : हाल ही में जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने रामपुर, आनी समेत मंडी संसदीय क्षेत्र के कई स्थानों पर विकास कार्यों के लिए घोषणाएं की थी। एक तरफ उन्होंने किसानों के समर्थन में बात की ताे दूसरी तरफ माकपा पर निशाना भी साध गए। इस दौरान महेंद्र सिंह के आनी दौरे के दौरान एक वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा कि वे कामरेडों के काम नहीं करेंगे। हालांकि ये किस संदर्भ में कहा गया या सिर्फ मजाक के तौर पर कहा गया, ये स्पष्ट नहीं है ,किन्तु आगामी समय में मंडी उपचुनाव के घमासान में वार -पलटवार तय है।
प्रदेश में होने वाले चार उप चुनाव से पहले प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा में हाई वोल्टेज ड्रामा शुरु हाे चुका है। यह संगठन के लिए खतरे की घंटी है। बताया जा रहा है कि भाजपा महिला माेर्चा के भीतर ये खींचतान और अंतर्कलह पिछले साल से ही शुरु हाेने लगी थी, जाे अब खुलकर उजागर हो रही है। बहरहाल महिला माेर्चा की पदाधिकारियाें के बीच बहस और संगीन आरोपों का ऑडियो वायरल हुआ ताे खुन्नस की राजनीति भी सामने आ गई। हालांकि भाजपा में गुटबाजी बहुत कम सामने आती है, लेकिन महिला माेर्चा की पदाधिकारियाें की ऑडियो लीक होने के बाद अब गुटबाज़ी खुल कर सामने आ रही है। गौरतलब है की प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कभी पत्र बम ताे अब महिला मोर्चा का ऑडियो वायरल होने से संगठन काे भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिला मोर्चा की जिन दाे पदाधिकारियाें के बीच ऐसा सब कुछ हुआ उनमें से एक महामंत्री और एक साेशल मीडिया एवं आईटी सेल की प्रभारी थी। दोनों ही अपने समय में छात्र राजनीति का जाना माना नाम रही हैं। वहीँ ऑडियो सामने आने के बाद प्रदेश संगठन ने दाेनाें पदाधिकारियाें के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी प्राथमिक सदस्य्ता रद्द कर दी है, लेकिन मामला अभी शांत होगा, ऐसा लगता नहीं है। प्रदेश में हाेने वाले चार उपुचनावाें से पहले महिला माेर्चा में चल रही इस खींचतान से संगठन काे कहीं न कहीं नुकसान उठाना पड़ सकता है। निसंदेह इससे भाजपा की अनुशासित पार्टी की छवि धूमिल हुई है। संगठन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी : कश्यप प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि संगठन में अनुशासनहीनता बिलकुल बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हाल में सोशल मीडिया में वायरल हुए भाजपा महिला मोर्चा के कथित ऑडिओ का कड़ा संज्ञान लेते हुए महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री शीतल व्यास तथा सोशल मीडिया एवं आईटी प्रभारी डॉ. अर्चना ठाकुर की प्राथमिक सदस्यता को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही दोनों पदाधिकारियों को संगठन के सभी दायित्वों से भी तुरंत प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासित राजनीतिक दल है और यहां पर किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कदमताल शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा लगाना चाहती है। इस संदर्भ में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अनुमति मांगी है। सीएम को लिखे पत्र में राठौर ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के जन नायक हम सबके लोकप्रिय नेता वीरभद्र सिंह 8 जुलाई 2021 की सुबह अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर इस दुनिया को अलविदा कह गए। प्रदेश के नव निर्माण में उनके योगदान को कभी न तो भुलाया जा सकता है और न ही कम आंका जा सकता है। उनके अंतिम संस्कार में उमड़े जन सैलाब से साफ है कि वीरभद्र सिंह कितने लोकप्रिय व जन मानस के नेता थे। पीसीसी चीफ कुलदीप सिंह राठौर कहते हैं कि हमारे बीच से एक ऐसा लोकप्रिय नेता चला गया जो सबके दिलों में वास करता था। अब हमारे पास उनकी स्मृतियां शेष रह गई हैं। उन स्मृतियों को याद रखना हमारा नैतिक कर्तव्य ही नहीं है, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी भी है। लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक दल की सरकार आती है जाती हैं। किसी भी राजनीतिक दल के कुछ ही नेता लोगों के दिलों में अपनी अमिट छाप छोड़ पाते है ,जो लोगों के दिलो में बस जाती है। वीरभद्र सिंह उनमें से एक हैं जो लोगों के दिलों में बस गए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां प्रदेश के निर्माण में डॉ.यशवंत सिंह परमार के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, वहीं प्रदेश के नव निर्माण में राजा वीरभद्र सिंह को भी कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। पहाड़ी राज्यों के विकास में आज हिमाचल प्रदेश एक विशेष स्थान रखता है जिसका श्रेय वीरभद्र सिंह को ही जाता है। रिज पर स्मारक के लिए मांगा उपयुक्त स्थान पीसीसी चीफ कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की यह इच्छा है कि वीरभद्र सिंह की याद में शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में उनकी स्मृति में कोई स्मारक बने। अतः प्रदेश कांग्रेस उनकी एक प्रतिमा रिज मैदान में स्थापित करना चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि रिज मैदान पर कांग्रेस को कोई उपयुक्त स्थान उपलब्ध करवाया जाए, जिससे वह अपने जन नायक और आधुनिक हिमाचल के निर्माता स्व. वीरभद्र सिंह की प्रतिमा को स्थापित कर सकें। साथ ही सीएम यह भी आग्रह किया है कि सरकार किसी बड़े सरकारी संस्थान का नाम स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नाम पर रखे, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले रिज मैदान पर अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा इंदिरा गांधी व डा. वाईएस परमार की प्रतिमा भी लगी हुई है।
मात्र पांच विधानसभा सीटाें वाले जिला सिरमौर का कद प्रदेश की राजनीति में तेजी से बढ़ा है। प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ यशवंत सिंह परमार सिरमौर से ही ताल्लुख रखते थे लेकिन उनके बाद प्रदेश की सियासत में सिरमौर को उचित स्थान तो मिला पर सिरमौर सियासत के शिखर तक नहीं पहुंचा। पर अब जयराम राज में सियासत के गगन पर सिरमौर का सितारा फिर चमका है। हालांकि पांच विधानसभा सीट वाले इस जिला में भाजपा ने 2017 में तीन सीटें ही जीती थी, पर सरकार और संगठन दोनों में सिरमौर का जलवा दिखा है। वर्तमान में जिला सिरमौर से एक मंत्री तो है ही, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद भी सिरमौर से है। कई बॉर्ड निगमों में भी सिरमौर को उचित प्रतिनिधित्व दिया गया है। दिलचस्प बात ये है कि भाजपा के तेजतर्रार नेता और नाहन विधायक डॉ राजीव बिंदल एक किस्म से पूरी तरह साइडलाइन है, न सरकार में उन्हें अहमियत दी जा रही है और न ही संगठन में कोई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी। उन्हें दरकिनार कर जयराम राज में कई अन्य नेताओं की ताकत बढ़ी है जिससे समीकरण संतुलित रह सके। 2017 के चुनाव में नाहन, पांवटा साहिब और पच्छाद सीट पर भाजपा को जीत मिली ताे नाहन विधायक डा. राजीव बिंदल काे विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी मिली।हालांकि तब प्रो प्रेमकुमार धूमल के चुनाव हारने के बाद बिंदल भी सीएम पद के दावेदारों में थे, पर राजनैतिक बिसात पर वे पिट गए और उन्हें कैबिनेट मंत्री तक का पद नहीं दिया गया। सांत्वना स्वरुप तब उन्हें माननीय विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया था। पर 2019 में डॉ राजीव बिंदल ने स्पीकर पद से इस्तीफा दिया और उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान मिल गई। पर साल 2020 में काेविड-19 के दौर में स्वास्थ्य विभाग घाेटाले के चलते डा. बिंदल काे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा देना पड़ा। पर पार्टी ने उनका रिप्लेसमेंट भी सिरमौर से ही ढूंढा। सांसद सुरेश कश्यप काे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का ज़िम्मा मिल गया। सिरमौर काे तवज्जो मिलने का सिलसिला जारी रहा और पिछले साल मंत्रिमंडल विस्तार में पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुखराम चाैधरी काे मंत्री की कुर्सी मिल गई। यहीं से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला सिरमौर काे सरकार और संगठन में विशिष्ट स्थान प्राप्त है। सुरेश कश्यप बने प्राइम फेस : पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे सुरेश कश्यप काे भाजपा ने 2019 में लाेकसभा चुनाव के मैदान में उतारा और उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। शिमला संसदीय क्षेत्र से पहली बार सिरमौर का कोई नेता सांसद बना। उसके बाद हुए उपचुनाव में संगठन ने एक युवा महिला नेता काे टिकट के काबिल समझा और रीना कश्यप काे पच्छाद उपचुपनाव में जीत मिली। हालांकि भाजपा से बागी उम्मीदवार दयाल प्यारी भी मैदान में थी पर यहां भी सुरेश कश्यप ने जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अपनी काबिलियत सिद्ध की। इसके बाद 2020 में डॉ राजीव बिंदल के इस्तीफा देने के बाद अपनी स्वच्छ छवि और सीएम जयराम ठाकुर से नजदीकी के बुते सुरेश कश्यप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे। पच्छाद में दयाल प्यारी फैक्टर पर रहेगी नजरें : पच्छाद उपचुनाव में भाजपा की बागी रही दयाल प्यारी अब कांग्रेस में शामिल हो चुकी है। यहां से कांग्रेस के लिए हार की हैट्रिक लगा चुके वरिष्ठ नेता गंगूराम मुसाफिर की जगह पार्टी 2022 में दयाल प्यारी को मौका दे सकती है। माना जाता है कि मुसाफिर को वीरभद्र सिंह का करीबी होने के नाते मौके मिलते आ रहे थे, पर अब वीरभद्र सिंह के निधन के बाद स्तिथि बदल चुकी है। ऐसे में भाजपा और सुरेश कश्यप के लिए 2022 में पच्छाद जीतना मुश्किल हो सकता है। वैसे पच्छाद में भाजपा की स्तिथि कुछ कमजोर जरूर हुई है, जिला परिषद और स्थानीय निकाय के नतीजे भी इसकी तस्दीक करते है। आसान नहीं होगी 2022 की राह : मंत्री सुखराम चौधरी के क्षेत्र पावंटा साहिब में भीतरखाते मंत्री की मुखालफत की झलकियां अभी से दिखने लगी है। निकाय चुनाव में भी भाजपा को मनमाफिक नतीजे नहीं मिले थे। नाहन में जरूर डॉ राजीव बिंदल खुद को साबित करते आ रहे है लेकिन मौजूदा स्तिथि में वे पूरी तरह हाशिए पर दिख रहे है। रेणुकाजी और शिलाई में फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है और 2022 के लिए अभी से भाजपा को यहां कड़ी तैयारी करनी होगी।
चुनाव के आगोश में, जीत की खातिर नेता न जाने क्या क्या वादें कर देते है। उस वक्त न तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति का ख्याल रखा जाता है और न ही संसाधनों का। बस जनता को लुभाने के लिए वादों की बरसात होती है, ऐसे वादे जो सत्ता में आने के बाद भुला दिए जाते है l ऐसा ही एक वादा पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अनुबंध कर्मचारियों से किया था। 2017 की एक चुनाव रैली में उन्होंने कहा था कि जैसे ही उनकी सरकार सत्ता में आएगी वे अनुबंध काल को 3 से घटा कर दो वर्ष कर देंगे। सत्ता में आने के बाद भाजपा तो ये वादा भूल गई पर हताश कर्मचारी अब भी इंतज़ार में है की आज नहीं तो कल सरकार अपना चुनावी वादा पूरा करेगी। कर्मचारियों से किया ये वादा भाजपा के 2017 के चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल था। सरकार को सत्ता में आए साढ़े तीन वर्ष का समय बीत चुका है, मुख्यमंत्री अपना चौथा बजट पेश कर चुके है पर आज तक अनुबंध काल को कम करने हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया। हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ पिछले तीन वर्षों से अनुबंध काल को दो वर्ष करने की मांग उठा रहा है, महासंघ लगातार संघर्ष काट रहा है, मगर हुआ कुछ नहीं। महासंघ के कर्मचारी कभी मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते है तो कभी बाकि मंत्रियों के दफ्तर के चक्कर काटते है, मगर सरकार की तरफ से बस कोरोना काल और आर्थिक संकट का हवाला देकर आश्वासन ही दिया जाता है। कर्मचारियों के इस मसले को लेकर फर्स्ट वर्डिक्ट ने बात की हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अरुण भारद्वाज से, पेश है बातचीत के कुछ अंश .... सवाल : अपने संगठन के बारे में थोड़ी जानकारी हमें दें और इस संघ से कितने कर्मचारी जुड़े है ये भी स्पष्ट करें ? जवाब : हमारा संगठन यानी हिमाचल प्रदेश सर्व अनुबंध कर्मचारी महासंघ जैसा कि नाम से स्पष्ट है अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गठित किया गया एक संगठन है। इस संगठन में किसी विशेष विभाग के कर्मचारी ही शामिल नहीं हैं बल्कि हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विभागों में अनुबंध आधार पर कार्यरत कर्मचारियों का ये संगठन है और यह संघ अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से मान्यता प्राप्त है। इस समय प्रदेश में लगभग 19000 कर्मचारी अनुबंध आधार पर विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं तथा पूरी ईमानदारी व कर्तव्य निष्ठा से अपनी सेवाएं दूर दराज के इलाकों में दे रहे हैं। ये सभी कर्मचारी हमारे इस संगठन से जुड़े है। सवाल : आपके संघ की मुख्य मांग क्या है ? जवाब : देखिये हमारे संघ की मुख्य मांग है अनुबंध अवधि को 2 वर्ष करवाना। हमारा मानना है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में अनुबंध प्रथा होनी ही नहीं चाहिए, क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां काफी अलग हैं। हमारे पड़ोसी राज्य पंजाब की अगर बात करें तो वहां पर इस तरह की अनुबंध प्रथा नहीं है। हिमाचल के कई जिलों में अति दुर्गम क्षेत्र भी हैं और वहां पर जो कर्मचारी अनुबंध आधार पर नियुक्त है उनके लिए अपने वेतन से तो अपने परिवार का भरण पोषण करना भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए अनुबंध प्रथा बंद होनी चाहिए लेकिन यदि कोरोना महामारी के चलते सरकार अनुबंध प्रथा को फिलहाल समाप्त नहीं कर सकती तो कम से कम अपने वादे के अनुसार अनुबंध अवधि को घटा कर 2 वर्ष तो करे। सवाल : कॉन्ट्रैक्ट पीरियड पहले 8 साल हुआ करता था अब ये घटकर तीन साल हो गया है। पहले के मुकाबले सहूलियत बेहतर है तो अब कॉन्ट्रैक्ट पीरियड दो साल करने की मांग क्यों ? जवाब : जी बिलकुल, पहले अनुबंध 8 साल का होता था फिर कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व.राजा वीरभद्र सिंह ने इसे घटा कर 3 वर्ष तक कर दिया था। सहूलियतों के साथ-साथ महंगाई भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और जो कर्मचारी अपने घरों से 300 से 500 किलोमीटर दूर अति दुर्गम क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं उन्हें अपने अनुबंध वेतन से अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है। यदि ऐसा कोई कर्मचारी जो अपने घर से 500 किलोमीटर दूर कार्यरत है और महीने 2 महीने में भी यदि घर आता है तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि उसका आने जाने का बस किराया ही लगभग 2500 रुपए बन जाता है। और मान लीजिये यदि किसी कर्मचारी को लॉक डाउन जैसी परिस्थिति में किसी आपात स्थिति में प्राइवेट वाहन से घर आना पड़ा तो एक माह का वेतन तो किराए में ही चला जायेगा। इस स्थिति में परिवार के अन्य खर्चे कैसे चलेंगे। दिन रात सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का ये शोषण नहीं तो और क्या है। सवाल : क्या सरकार आपकी सुनती है ? अब तक आपके संघर्ष को कितनी कामयाबी मिली ? जवाब : बात ये नहीं है कि सरकार हमारी सुनती है या नहीं। क्योंकि अगर नही सुनते तो मुख्यमंत्री हमें हर बार आश्वस्त नहीं करते। बजट सत्र से पहले हमारी राज्य कार्यकारिणी मुख्यमंत्री से उनके आवास ओक ओवर में मिली थी और उन्होंने उस वक्त साफ शब्दों में कहा था कि हमारी सरकार ने आपके लिए कुछ खास सोचा है और हम जल्द ही आपकी इस मांग को एक खास मौके पर पूरा करने वाले हैं। इसीलिए समस्त अनुबंध कर्मचारी देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर अनुबंध अवधि 2 वर्ष होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सवाल : बीते विधानसभा सत्र के दौरान आपने सरकार पर ये आरोप लगाए थे कि इस सरकार को ये तक नहीं मालूम की हिमाचल में कितने अनुबंध कर्मचारी है। क्या अब ये गिनती पूरी हो पाई है ? जवाब : जी सरकार ने खुद यही जवाब दिया था कि वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं है और आगामी सत्र में इसकी पूरी जानकारी दी जाएगी तो आशा करते हैं कि आने वाले मानसून सत्र में स्थिति स्पष्ट हो जायेगी। सवाल: आपका संगठन 15 अगस्त तक मांगें पूरी करने के लिए आवाज़ उठा रहा है, यदि आपकी मांगें पूरी नहीं होती है तो संगठन की आगामी रणनीति क्या होगी ? जवाब : जी, क्योंकि मुख्यमंत्री ने बजट सत्र से पहले वादा किया था कि सितंबर से पहले पहले आपकी मांग को पूरा कर दिया जायेगा। अब देखना है कि भाजपा सरकार अपना वादा निभाती है या फिर अपने वादों को सिर्फ चुनावी स्टंट ही बनाना चाहती है। क्योंकि यदि घोषणा मार्च 2022 में की जाती है तो किसी को भी इसका फायदा नहीं होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि वर्तमान सरकार के सत्तासीन होने के बाद जनवरी 2018 से सितंबर 2018 तक जो भी नियुक्तियां हुई हैं उनका अनुबंध कार्यकाल गत मार्च 2021 में और आने वाले सितंबर 2021 में पूरा होने वाला है। वर्ष 2019 में नियुक्त होने वालों के भी 2 साल से अधिक हो चुके हैं और कोविड के चलते वर्ष 2020 में भर्तियां नही हो पाई हैं। इस प्रकार यदि इस मांग को अभी पूरा नहीं किया गया तो कर्मचारियों में सरकार के प्रति एक नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा हो सकता है जिस से न तो सरकार को कोई फायदा होगा और न ही कर्मचारियों को और यदि सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो तो ये मांग आंदोलन का रूप ले लेगी। मैं सरकार से ये ही कहूंगा कि सब्र अब टूटने लगा है, ख्याल रहे देर न हो जाएं। सवाल : हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी नेताओं को लेकर ये धारणा बनी हुई है कि कर्मचारी नेता कर्मचारियों की मांग उठाने से ज्यादा अपनी राजनीति चमकाने में विश्वास रखते है, क्या आपके इरादे भी कुछ ऐसे ही है ? क्या आप आने वाले समय में किसी राजनैतिक दल में शामिल होंगे ? जवाब : हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी नेताओं को लेकर सबकी अपनी अपनी सोच और धारणा हो सकती है लेकिन मेरे लिए सिर्फ कर्मचारियों की मांग सर्वोपरि है। इस संगठन की कमान संभालने से पहले ही मैंने कर्मचारियों के इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया था और इसमें हमारे साथ जुड़े हमारी राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों और सभी जिला कार्यकारिणी के सदस्यों ने मेरा पूरा सहयोग किया। इसके लिए मैं आपके माध्यम से सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं और आशा करता हूं कि सभी साथियों का सहयोग आगे भी मिलता रहेगा। बाकी रही बात राजनीति चमकाने की तो आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है और न ही मैं सक्रिय राजनीति में आना चाहता हूं। सवाल : आप इस संगठन के प्रदेश अध्यक्ष है मगर बीते कुछ समय से आपके और आपके संगठन के बीच तालमेल नज़र नहीं आ रहा इसके पीछे क्या कारण है ? क्या आपका संगठन आपके नेतृत्व से संतुष्ट नहीं ? जवाब : जी ऐसी कोई बात नहीं है, सभी साथी एकजुट हैं और सभी की एक ही मांग है और आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हमारी यूनियन तो एक अल्पकालिक यूनियन है। आज मैं हूं कल कोई और होगा । जैसा कि आप जानते हैं कि मेरी नियुक्ति भी मेरे घर से लगभग 350 किलोमीटर दूर अति दुर्गम क्षेत्र में है और यहां पर नेटवर्क और बिजली की भी समस्या रहती है इसलिए कई बार साथियों से संपर्क नहीं हो पाता लेकिन इसका मतलब ये नही की तालमेल नहीं है। हमारी टीम एक है और हमेशा एक रहेगी। बाकी रही बात कर्मचारियों की , तो इस मांग के लिए मैंने और मेरी पूरी राज्य टीम तथा जिला टीमों ने ऐसा कोई मंच नहीं छोड़ा जिस के माध्यम से अपनी आवाज सरकार तक नहीं पहुंचाई। मुख्यमंत्री को ही लगभग 50 से ज्यादा ज्ञापन विभिन्न जिला टीमों द्वारा भेजे गए है। अभी हाल ही में जिला शिमला के जुब्बल कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में हमने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को भी ज्ञापन देकर इस मांग को पूरे जोरों शोर से उठाया है।
रुझान आने शुरू हो गए है। मुख्यमंत्री पद पर जिला कांगड़ा का दावा आ चुका है। बाकी भी पूरी तैयारी में दिख रहे है। वीरभद्र सिंह का निधन प्रदेश कांग्रेस के लिए बड़ी आपदा है, और राजनीति में आपदा में अवसर तलाशना कोई नई बात नहीं है। ये अलग बात है कि सिर्फ तलाशने से कुछ नहीं मिलता। ये अलग बात है कि मुख्यमंत्री बनने के लिए पहले पार्टी को सत्ता में लाना होगा। पर फिलवक्त, तो डर यही है कि नेताओं की निजी महत्वकांक्षाएं कहीं इतनी हावी न हो जाएं कि न खुदा मिले, न विसाल-ए-सनम। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह बेशक बीते दो-तीन साल से अधिक सक्रिय नहीं थे फिर भी पार्टी का चेहरा वीरभद्र सिंह ही रहे। उनके रहते कई नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा दबी सी रही, कोई सियासी शूरवीर ऐसा नहीं दिखा जो उनके वर्चस्व के आगे ठहर पाया हो। यानी बेशुमार गुटबाजी के बावजूद वीरभद्र सिंह पार्टी के सर्वमान्य नेता बने रहे। पर अब पुराने निष्ठावानों का महत्वाकांक्षी होना तो जायज है, पर कई दूसरी -तीसरी पंक्ति के नेता भी सीएम बनने का ख्वाब संजोये बैठे है। वीरभद्र सिंह के निधन से उपजे शून्य में ये गुटबाजी पार्टी की नैया डुबाने के लिए काफी है। अगर समय रहते आलाकमान ने पार्टी की दशा सुधारने हेतु उचित दिशा तय नहीं की तो 2022 में डगर बेहद मुश्किल होने वाली है। दरअसल, कांग्रेस में ऐसे कई चेहरे है जो सीएम बनने के इच्छुक माने जाते है या जिनके समर्थक अभी से उन्हें बतौर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करना शुरू कर चुके है। 2017 से ही इनमें से कुछ के सितारे अच्छे चल रहे है तो कुछ हाशिए पर है, पर वीरभद्र सिंह के निधन के उपरांत सारा गुणा भाग बदल गया है। वीरभद्र के बाद कौन, फिलवक्त ये ही यक्ष प्रश्न है। संगठन मेक ओवर नहीं हुआ तो सत्ता का टेक ओवर मुश्किल : बीते कुछ वक्त में कांग्रेस का जनाधार तेजी से घटा है। इस पर गुटबाजी और अंतर्कलह ने पार्टी की परेशानी में और इजाफा किया है। इसका सबसे बड़ा कारण है लचर और प्रभावहीन नेतृत्व। प्रदेश नेतृत्व से लेकर जिला और ब्लॉक तक नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे है। ऐसे में समय रहते संगठन का मेक ओवर नहीं होता है तो 2022 में सत्ता का टेक ओवर मुश्किल होगा। वैसे जानकार मानते है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को अब तक वीरभद्र सिंह की गुड बुक्स में होने का लाभ मिलता रहा, पर अब उन्हें बदले जाने को लेकर सुर तेज हो सकते है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से सीएम की कुर्सी तक का सफर आसान हो सकता है, ऐसे में माना जा रहा है कि कई चाहवानों की नजर राठौर की कुर्सी पर टिकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के चाहवान उन्हें फिर से प्रदेश संगठन की कमान दिए जाने की मांग करने लगे है। वीरभद्र सिंह उन्हें ख़ास पसंद नहीं करते थे और ये ही सुक्खू के अपदस्थ होने का मुख्य कारण भी था। पर अब बदले समीकरण में सुक्खू का दावा कमतर नहीं होगा। पहला दावा कांगड़ा का, पर बाली या सुधीर ! सीएम पद के लिए खुलकर पहला दावा जिला कांगड़ा का आया है। या यूं कहे कि जिले के नाम पर ही सही पर पूर्व मंत्री जीएस बाली ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोक दिया है। बीते दिनों बाली ने कहा कि जिला कांगड़ा का मुख्यमंत्री की सीट पर पूरा अधिकार है। सूबे की सियासत की गाड़ी यहीं से निकलती है, तभी वह शिमला पहुंचती है। बाली की बात ठीक भी है, इतिहास तस्दीक करता है कि हिमाचल प्रदेश में सत्ता सुख उसी राजनैतिक दल का नसीब होता हैं जिसपर जिला कांगड़ा की कृपा बरसती हैं। जो कांगड़ा फ़तेह नहीं कर पाता उसे सत्ता विरह ही मिलता है। वर्ष 1985 से ऐसा ही ट्रेंड है। 1985, 1993, 2003 और 2012 में कांग्रेस पर कांगड़ा का वोट रुपी प्यार बरसा तो सत्ता भी कांग्रेस को ही मिली। वहीं 1990, 1998, 2007 और 2017 में कांगड़ा में भाजपा इक्कीस रही और प्रदेश की सत्ता भी भाजपा को ही मिली। असल सवाल तो ये है कि अगर कांगड़ा को सीएम पद मिल भी जाता है तो क्या बाली ही सर्वमान्य चेहरा है ? दरअसल कांगड़ा में एक और कांग्रेसी पंडित भी है जो फिलवक्त अपनी सियासी जमीन समतल करने की जद्दोजहद में लगे है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाने वाले सुधीर शर्मा पिछली सरकार में नंबर दो माने जाते थे और सीएम फेस के लिए उनका दावा भी बाली से कम नहीं होने वाला। ये भी जगजाहिर है कि कांगड़ा के ये दोनों दिग्गज एक दूसरे की जमीन खोदते आ रहे है। इसी खींचतान का नतीजा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में ये दोनों ही धराशाई हो गए थे। अब इन दोनों में से कोई भी एक दूसरे के नाम पर सहमत होगा, ऐसा नहीं लगता। और इन दोनों के बिना कांगड़ा फ़तेह हो सकता है, ऐसा भी नहीं लगता। बाकी राजनीति में कुछ भी मुमकिन है, दूरियां कब नजदीकियों में बदल जाए मालूम नहीं। मंडी भी कम नहीं, कौल सिंह का दावा तय ! जिला कांगड़ा के बाद सबसे ज्यादा सियासी वजन जिला मंडी का है जिसमें 10 विधानसभा सीटें आती है। यहां का सियासी मिजाज भी जिला कांगड़ा जैसा ही है, जिस भी राजनैतिक दल ने मंडी जीता वही सत्ता पर काबिज हुआ। मंडी में अगर कांग्रेस की बात करें तो कौल सिंह ठाकुर इस वक्त सबसे बड़ा चेहरा है। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले भी वे सीएम पद के दावेदार थे, हालांकि तब उनके अरमान अधूरे रहे। फिर 2017 में वे खुद भी चुनाव हारे और उनकी बेटी चंपा ठाकुर भी, जो कौल सिंह ठाकुर के लिए बड़ा झटका था। पर बीते कुछ समय से कौल सिंह ठाकुर की सक्रियता बढ़ी है और उनके समर्थक वीरभद्र सिंह के जीवित रहते भी उन्हें बतौर सीएम प्रोजेक्ट करते रहे है। अलबत्ता वे 2017 में हार गए थे लेकिन उनकी जमीनी पकड़ पर कोई संशय नहीं है। जानकार मानते है कि सीएम पद के लिए कौल सिंह ठाकुर का दावा भी तय है। कौल सिंह ठाकुर बीते वर्ष लंच डिप्लोमेसी को लेकर भी चर्चा में रहे थे। तब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू के साथ उनके सहभोज ने नए समीकरणों को हवा दी थी। अब माहिर मानते है कि सत्ता शीर्ष पर पहुंचने के लिए कौल सिंह ठाकुर व कुछ अन्य नेता एक साथ आ सकते है। माना जा रहा है कि आगामी कुछ वक्त में कांग्रेस में कई आंतरिक गठबंधन बनते बिगड़ते दिखेंगे। संगठन की कमान मिली तो आसान हो सकती है राह ! 2017 में सत्ता गंवाने के बाद मुकेश अग्निहोत्री नेता प्रतिपक्ष बने। वास्तव में तब कौल सिंह ठाकुर, जीएस बाली, सुधीर शर्मा सहित कई नेता जीतकर सदन में ही नहीं पहुंचे थे, सो अग्निहोत्री की नेता प्रतिपक्ष बनने की राह ज्यादा कठिन नहीं थी। इस पर उन्हें वीरभद्र सिंह की कृपा भी प्राप्त रही। समर्थक लगातार उन्हें भावी सीएम प्रोजेक्ट करते आ रहे है और अग्निहोत्री एक मंझे हुए नेता की तरह नाप तोल कर सियासत कर रहे है। पर अग्निहोत्री की स्वीकार्यता अब तक पूरे प्रदेश में नहीं दिखी है। उनकी राजनीति शिमला और ऊना तक ही सीमित रही है, बाकी जिलों में न तो उनके निष्ठावानों की ब्रिगेड दिखती है और न ही उनकी खास दखल। अब वीरभद्र सिंह के निधन के बाद अग्निहोत्री की डगर भी मुश्किल होगी। माना जाता है कि मुकेश अग्निहोत्री भी उन नेताओं में है जो संगठन की कमान अपने हाथ में चाहते है। निसंदेह यदि ऐसा करने में अग्निहोत्री सफल हुए तो समीकरण उनके पक्ष में बनने लगेंगे, पर फिलवक्त तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आशावान है आशा के समर्थक : आशा कुमारी भी उन नेताओं में से है जिन्हें सत्ता वापसी की स्थिति में सीएम पद का दावेदार माना जाता है। समर्थक अभी से उन्हें प्रदेश की भावी सीएम और प्रदेश की होने वाली पहली महिला मुख्यमंत्री करार देने लगे है। आशा कुमारी निसंदेह तेजतर्रार भी है और अच्छी वक्ता भी। सदन में भी सक्रिय दिखती है और जब शिमला में होती है तो सरकार को घेरने में भी पीछे नहीं रहती। इस पर गांधी परिवार से उनकी नजदीकी भी उनका दावा जरूर मजबूत करेगी। पर अतीत के कई विवाद आशा कुमारी का पीछा आसानी से नहीं छोड़ेगे। इस पर पार्टी में व्याप्त अंतर्कलह भी उनके रास्ते में आएगी। उनकी स्तिथि भी मुकेश अग्निहोत्री जैसी है, शिमला और अपने जिले में तो ठीक है पर पूरे प्रदेश में उन्हें अपनी स्वीकार्यता सिद्ध करनी होगी। गुटबाजी से दूर, डार्क हॉर्स है कर्नल शांडिल कर्नल धनीराम शांडिल; दो बार सांसद, दो बार विधायक, पूर्व मंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के पूर्व सदस्य रहे है । शांडिल गांधी परिवार के करीबी है और बेदाग़ छवि उनका दावा और मजबूत करती है। विपक्ष में रहते हुए जब भाजपा कांग्रेस के मंत्रियों के खिलाफ चार्जशीट लाई थी तो उसमें भी कर्नल शांडिल का नाम नहीं था। यानी कह सकते है कि भाजपा भी उन्हें ईमानदार मानती रही है। पर कर्नल शांडिल का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ये है कि वे किसी गुट में नहीं है। गुटबाजी से ये दूरी उन्हें सीएम की रेस में डार्क हॉर्स साबित कर सकती है। हालांकि राजनीति के लिहाज से शांडिल बहुत बेहतर वक्ता नहीं है और न ही उनकी पकड़ सोलन के बाहर दिखती है, पर विरोधी भी अक्सर कर्नल धनीराम को किस्मत का धनी कहते है।
हिमाचल प्रदेश में आज भी मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में 25 जुलाई तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले तीन घंटों के दौरान प्रदेश के कांगड़ा, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, चंबा और मंडी में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। जबकि इस दौरान शिमला, कुल्लू, सोलन और सिरमौर में हल्की बारिश की संभावना है। खराब मौसम के चलते हुई तबाही के कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है। वहीं, चंबा-तीसा मार्ग भारी बारिश के बाद भूस्खलन से नकरोड बाजार के पास बंद हो गया। सूचना मिलने के बाद विभागीय मशीनरी मौके के लिए रवाना हुई। उधर, चंबा में भरमौर-पठानकोट नेशनल हाईवे गैहरा के पास भूस्खलन से बाधित हो गया है। सैलानियों और स्थानीय लोगों से नदी-नालों से दूर रहने की अपील की गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि जहां भी सड़क अवरुद्ध होती है, उसे रिस्टोर किया जाए। उन्होंने पर्यटकों से आग्रह किया है कि वे नदी, नालों और पानी वाली जगहों पर न जाएं। भारी बारिश से नदी-नाले ऊफान पर हैं। ऐसे में इनके नजदीक जाना खतरनाक साबित हो सकता है। इसको देखते हुए प्रशासन ने एहतियात बरतने की सलाह दी है।
उपमंडल देहरा के अंतर्गत पड़ते बनखंडी समीपवर्ती सीरा द भरो में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसा होने की जानकारी प्रकाश में आई है जिसमें 27 वर्षीय युवक की मौत हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार पीआरटीसी की बस जो धर्मशाला की ओर जा रही थी और वही एक बाइक स्वार जो अम्ब की ओर आ रहा था की अचानक सीरा द भरो नामक स्थान पर दोनों वाहनों में आपसी टक्कर हो गयी जिसमें 27 वर्षीय युवक की मौके पर मौत हो गई। सूत्रों के अनुसार उक्त युवक पोकलेन मशीन चलाता था वहीं अपने घर में सबसे छोटा भाई था। मृतक की पहचान बंटी सुपुत्र वतन चंद गाँव बदायूं डाकघर अंदोरा तहसील अम्ब जिला ऊना के रूप में हुई है वहीं मौके पर रानीताल पुलिस उक्त स्थान पर पहुंची वहीं घायल युवक को प्राथमिक उपचार हेतु देहरा अस्पताल लाया गया जहां पर चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया । मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी अंकित शर्मा ने बताया कि पीआरटीसी बस चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगामी कार्यवाही शुरू कर दी गई है वही कल पोस्टमार्टम करके मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा । जानकारी मिलते ही बंटी का परिवार देहरा अस्पताल पहुंचा वहीं उक्त युवक की मौत की वजह से समस्त गांव में शोक की लहर है।
डाडासीबा के तहत पड़ते गाँव बनेर के 48 वर्षीय व्यक्ति ने जहर खाकर अपनी इहलीला समाप्त करने की जानकारी प्रकाश में आई है। मृतक की पहचान राकेश कुमार सुपुत्र गुरदास राम निवासी गांव बनेर डाकघर स्यूल के रूप में हुई है। बताया जा रहा उक्त व्यक्ति द्वारा जहर खाने की जानकारी मिलते ही परिवारजन दौलतपुर के निजी अस्पताल में ले गए जहां तबियत बिगड़ने पर उक्त व्यक्ति को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था वहीं उक्त 48 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गयी है। मृतक के बेटे ने अपने बयान में कहा है कि उसके पिता अपनी पत्नी की मृत्यु के उपरान्त डिप्रेशन में रहने लगे थे। मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी अंकित शर्मा ने बताया कि धारा 174 सीआरपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है वहीं पुलिस मामले की गहनता से तफ़्तीष कर रही है।
पौधरोपण वन सरक्षंण ओर पर्यावरण को बचाने में ग्राम पंचायत रौडी के फाउंटेन यूथ क्लब द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फाउंटेन यूथ क्लब रौडी के सौजन्य से 15 जुलाई 2021 से 18 जुलाई 2021 तक पौध रोपण का अभियान चलाया। इस दौरान देवदार,आंवला व अन्य फलदार पौधे एसीएफ फाउंडेशन के सहयोग से प्राप्त करके जगह जगह रोपण किया गया। क्लब के प्रधान अजय कुमार ने बताया कि भविष्य में भी युवाओं को पर्यावरण के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस दौरान क्लब सदस्यों द्वारा ग्रामवासियों को कोरोना कोविड-19 से बचाव के नियमों के बारे में बताया,अथवा उनसे इन नियमों का पालन करने हेतु आग्रह किया। इस मौके पर क्लब के युवाओं ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लिया। क्लब का सहयोग एसीएफ,ग्राम पंचायत प्रधान रौडी व अन्य बड़े बुजुर्गो द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्लब प्रधान अजय कुमार,कोषाध्यक्ष विनय शर्मा,तरुण,तनुज,प्रदीप,अरुण,कमल,राहुल,निखिल,हरीश,नवीन,सनी,राकेश सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
यह सर्व विधित है की हिमाचल व उत्तराखंड को देव भूमि कहा और माना जाता है । इस घोर कलयुग में भी देव भूमि मे आए दिन देव शक्तियां अपने होने का प्रमाण दिखाया करती है । ऐसा ही एक प्रमाण गांव कलोटी रोहडू हिमाचल प्रदेश मे देखने को मिला है जहां खुदाई के दौरान साड़े 4 फीट का एक शिवलिंग व शिव परिवार की मूर्तियां जमीन से प्रकट हुई है । जिस स्थान पर यह मूर्तियां मिली है उस स्थान का नाम देवरा है। जिस का अर्थ होता है देवी देवताओं के बैठने का चिन्हित स्थान । यूं तो इस गांव मे यह थान पहले से ही पूजित था व इस शिवलिंग का थोड़ा सा हिस्सा कई वर्षो से दिखाई पड़ता था लेकिन यह भेत नही था की यह दिखने वाला पत्थर एक विशालकाय शिवलिंग है बल्कि इसे स्थानीय लोग भीम की गदा समझा करते थे । मान्यता अनुसार यह माना जाता था की इस स्थान पर पुराना कोई मंदिर भी हुआ करता था । ऐसा कहा जाता था की इस स्थान पर धान की खेती हुआ करती थी तब यहां पर लोग जब रात के समय रहते थे, बारिश के समय पनाह लेते थे या राह चलते आराम करते थे तो यहां पर शक्तियां अपने यहां होने का प्रमाण निरंतर दिया करती थी व गांव के लोगो को निरंतर स्वप्न मे यह दिखता रहता था की इस स्थान पर कई शक्तियों का वास है । समय के साथ गांव के लोगो ने इस जगह का पुनर्निर्माण करने की सोची तो गुडारू महारान गांव गवास को इस संदर्भ में पूछा गया तो महाराज ने तुरंत इस स्थान पर खुदाई के आदेश दिए जिस के बाद यहां से शिव परिवार प्रकट हुआ जिस से की पूरे क्षेत्र में एक खुशी की लहर दौड़ गई । इस खुदाई के दौरान 1. साड़े 4 फीट का एक शिवलिंग 2. शिव की एक पत्थर पर गढ़ित प्राचीन मूर्ति 3. शिवलिंग के विराजित होने की शक्ति की पिंडी 4. भगवान गणेश की पत्थर पर बनी मूर्ति 5. कार्तिकेय महाराज की पिंडी मिली यह भी बताते चले की यह क्षेत्र श्री गुडारू महाराज गवास के अधीन आता है व महाराज के आदेश अनुसार ही आज दिनाक 19 जुलाई 2021 को इस शिवलिंग को पुनः स्थापित किया गया है जिस के बाद पूरे क्षेत्र में भारी वर्षा शुरू हो चुकी है जिस से ऊपरी हिमाचल प्रदेश में पड़ा हुआ सूखा खत्म हुआ है ।
बाहरा विश्वविद्यालय में ‘कीप हिमाचल क्लीन एण्ड ग्रीन’ कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा आयुष मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि प्रकृति और मानव का सम्बन्ध शाश्वत है तथा प्रकृति के संरक्षण में ही पृथ्वी की रक्षा निहित है। डॉ. सैजल सोमवार को सोलन जिला के कण्डाघाट स्थित बाहरा विश्वविद्यालय में ‘कीप हिमाचल क्लीन एण्ड ग्रीन’ कार्यक्रम का शुभारम्भ करने के उपरान्त उपस्थित अध्यापकों एवं अन्य को सम्बोधित कर रहे थे। डॉ. सैजल ने इस अवसर पर विज्ञान तथा गणित के अध्यापकों के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षमता उन्नयन कार्यशाला का शुभारम्भ भी किया। उन्होंने इस अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दाड़लाघाट के अध्यापक तेजेन्द्र शर्मा तथा जिला विज्ञान पर्यवेक्षक सोलन अमरीश शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘वाईब्रेन्ट साईंस क्विज’ का विमोचन भी किया। यह पुस्तक छठी कक्षा से 12वीं कक्षा के छात्रों को प्रशनोत्तरी प्रतियोगिताओं की तैयारी में सहायता प्रदान करेगी। डॉ. सैजल ने कहा कि प्राचीन काल से ही मनुष्य प्रकृति से सीख लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की दौड़ में हम सभी को यह स्मरण रखना होगा कि प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा कर ही सुखद भविष्य की नींव रखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति को संरक्षित रख कर ही बच्चों को स्वच्छ एवं सुरक्षित धरा प्रदान की जा सकती है। आयुष मन्त्री ने कहा कि हमें वृक्षों के जीवनदायी पक्ष को समझना होगा और भावी पीढ़ी को यह समझाना होगा कि सभी वृक्षों में औषधीय गुण होते हैं और इनके वैज्ञानिक दोहन से ही आर्थिकी को सुदृढ़ करने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने कहा कि ‘कीप हिमाचल क्लीन एण्ड ग्रीन’ कार्यक्रम एक वर्ष तक प्रदेश में कार्यान्वित किया जाएगा। अभियान के माध्यम से प्रदेश वासियों एवं पर्यटकों को हिमाचल को स्वच्छ रखने एवं प्रदेश के अनुपम सौन्दर्य को संरक्षित रखने के लिए जागरूक बनाया जाएगा। प्रदेश की विभिन्न ग्राम पंचायतों में अभियान के तहत पौधरोपण अभियान भी कार्यान्वित किया जाएगा। विज्ञान तथा गणित के अध्यापकों के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षमता उन्नयन कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए उन्होंने अध्यापकों का आह्वान किया कि नई शिक्षा नीति का अनुसरण करते हुए छात्रों के व्यक्तित्व को पल्लवित एवं पोषित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अध्यापन की नई विधाएं विकसित हो रही हैं और इनकी जानकारी छात्रों को बेहतर सीख प्रदान करने में सहायक हो सकती है। डॉ. सैजल ने कहा कि शिक्षा, प्राचीन को नवीन से जोड़ने में सहायक होनी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जानकारी प्राप्त कर देश को विश्व अग्रणी बनाने की दिशा में सहायक बने। स्वास्थ्य मंत्री ने इस अवसर पर सभी से आग्रह किया कि कोविड-19 से बचाव के लिए यदि हम सही प्रकार से नाक से लेकर ठोडी तक ढकते हुए मास्क पहनें, बार-बार अपने हाथ साबुन अथवा एल्कोहल युक्त सेनिटाईजर से धोते रहें और सोशल डिस्टेन्सिग नियम का पालन करें तो निश्चित तौर पर कोरोना संक्रमण से सभी का बचाव किया जा सकता है। इस अवसर पर आविष्कार फाऊंडेशन पालमपुर की संध्या गुप्ता ने ‘गणित विषय को कैसे रोचक बनाया जा सकता है’ विषय पर सारगर्भित जानकारी प्रदान की। बाहरा विश्वविद्यालय के कुलपति गुरविन्दर सिंह बाहरा, उप कुलपति प्रो. बी.एस. नागेन्द्र पराशर, कुल सचिव विनीत कुमार, निदेशक अनुराग अवस्थी, उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा शिमला भाग चन्द चौहान, उप निदेशक उच्च शिक्षा शिमला अशोक शर्मा, उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा सोलन रोशन जसवाल, जिला परियोजना अधिकारी चन्द्रमोहन शर्मा, तहसीलदार कण्डाघाट अमन राणा, अध्यापक एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
GNA University organized an Interactive Session on Entrepreneurship and Motivation with respect to the entrepreneurial journey of a renowned entrepreneur for all the students of GNA Business School via the Online Platform, Blackboard. The esteemed resource person for the Webinar was Mrs. Harbhajan Kaur, a 94 year old successful woman entrepreneur and the founder of Harbhajan’s Made With Love (Besan Ki Barfi). The revered resource person has served as a epitome of hard work and the fact that age is no deterrent to one’s dreams. The webinar started with the welcoming of the resource person by Ms. Neetu Mahendru and Dr. Manpreet Kaur, Assistant Professor, GNA Business School. Mrs. Harbhajan then shared about her journey with the students and faculty members and her key principles and values that she follows in her business. She explained about how the idea of Besan Barfi evolved into her mind and how slowly she diversified her business while the interaction with her daughter Mrs. Raveena Suri. Not only barfi, but today Mrs. Harbhajan diversifies in many other products such as pickles, traditional sausages. The session then ended with a Vote of Thanks by Dr. Sameer Verma, Dean- GNA Business School wherein he expressed his sincere thanks to Mrs. Harbhajan Kaur for taking out her precious time and interacting with the students. S. Gurdeep Singh Sihra, the Pro-Chancellor, GNA University expressed, “I appreciate the endeavours of the Department for organising such trending lectures for the students of GBS.” Dr. VK Rattan, the Vice-Chancellor, GNA University said, “The University is always ready to offer the best to our GUites in all the various upcoming spheres.” Dr. Monika Hanspal, Dean Academics, GNA University said, “I am really happy to witness the active participation of the faculty एंड students in these Guest Lectures.
जिला दण्डाधिकारी एवं उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी ने सोमवार को बताया कि कोविड महामारी की सुरक्षा के दृष्टिगत माल रोड एवं रिज मैदान के बैंचों पर आम जनता एवं पर्यटकों के बैठने पर पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने बताया कि यह आदेश वरिष्ठ नागरिकों एवं बीमार लोगों पर लागू नहीं होंगे तथा यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदित्य नेगी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक शिमला इन आदेशों की अनुपालना करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इन आदेशों की अवहेलना करने वालों पर कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि ये आदेश सुरक्षा के दृष्टिगत लागू किए गए हैं, क्योंकि पर्यटकों द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा था तथा कोविड महामारी की रोकथाम के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाए हैं। जिला दण्डाधिकारी ने लोगों से सहयोग की अपील की है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों के घरों में पीने के पानी के लिए जल कनैक्शन की सुविधा प्रदान कर जल जीवन मिशन के अंतर्गत राहत पहुंचाई जा रही है। जलशक्ति मंडल रामपुर के तहत पानी की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन में 29 हजार 346 कनैक्शन अप्रैल, 2021 तक प्रदान किए जा चुके हैं। मिशन के तहत शेष बचे 6938 नलों में से इस वर्ष 4432 कनैक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक घर को नल में जल देने की 85 परियोजनाएं स्वीकृत हुई थी, जिनमें से 64 परियोजनाओं का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है, जिसके अनुमानित लागत 31 करोड़ रुपये है। अन्य क्षेत्रों के तहत 4 योजनाएं अनुसूचित जाति, जनजाति घटक के तहत मंडल में चल रही है, जिनकी लागत 7 करोड़ रुपये है। इस योजना में इस वर्ष एक करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। नाबार्ड के तहत स्वीकृत 8 योजनाओं पर लगभग 32 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित योजनाओं के लिए इस वर्ष 5 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया गया है। 6 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत की 5 सिंचाई योजनाएं भी स्वीकृत हुई है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 3 योजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 2 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं तथा एक का कार्य गति पर है। इन योजनाओं पर 4 करोड़ 90 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा पोषित 7 योजनाएं क्रियान्वित हैं, जिनकी अनुमानित लागत 2 करोड़ 24 लाख रुपये है। शहरी क्षेत्र की एक योजना पूर्ण हो चुकी है जिस पर 19 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। नगर परिषद रामपुर के तहत वार्ड नंबर 8 और 9 ढकोलर और खनेरी के लिए 17 करोड़ रुपए की सीवरेज योजना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 8 प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 77 करोड़ रुपए है।
वनों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने और पौधरोपण में उनकी सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रदेश में हर वर्ष वन महोत्सव आयोजित किया जाता है। इस वर्ष राज्य स्तरीय वन महोत्सव 20 जुलाई, 2021 को कुल्लू जिला के निरमंड में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर करेंगे। वन विभाग के एक प्रवक्ता ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान प्रदेश में 14 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। विभाग द्वारा नगर परिषदों और पंचायतों के प्रत्येक सदस्य को स्थानीय लोगों की सहायता से पौधरोपण के लिए 51 पौधे प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 20 एवं 21 जुलाई को दो दिवसीय बृहद पौधरोपण अभियान आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों और संस्थाओं द्वारा 10 लाख पौधे रोपित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य रेड क्राॅस सोसाइटी द्वारा स्थानीय संस्थाओं के सहयोग से एक लाख पौधे भी रोपित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व के स्वर्ण जंयती वर्ष के अवसर पर वन विभाग द्वारा प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्वर्णिम वाटिकाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य के विभिन्न भागों में 34 स्वर्णिम वाटिकाएं तैयार की जा चुकी हैं। इस वर्ष 3500 हेक्टेयर क्षेत्र को लैंटाना से मुक्त कर वहां पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2018 से वन महोत्सव के दौरान वन विभाग द्वारा चिन्हित स्थानों पर स्थानीय समुदायों के सहयोग से विशेष पौधरोपण अभियान आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2018 में तीन दिनों तक आयोजित अभियान के दौरान प्रदेश में लगभग 600 स्थानों पर सरकारी विभागों, स्थानीय समुदायों, आम लोगों, महिला मंडलों, पंचायती राज संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों और स्कूलों के विद्यार्थियों की मदद से लगभग 26 लाख 50 हजार पौधे रोपित किए गए। वर्ष 2019 में वन महोत्सव के दौरान आयोजित 5 दिवसीय अभियान के दौरान 1 लाख 35 हजार लोगों की सहभागिता से 31 लाख 60 हजार पौधे रोपित किए गए। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यावरण संरक्षण में वनों का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान है। राज्य के 37,948 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को वन क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें से 4.96 प्रतिशत आरक्षित वन क्षेत्र, 33.87 प्रतिशत सीमांकित वन, 42.25 प्रतिशत गैर सीमांकित संरक्षित वन और 18.87 प्रतिशत अन्य वन हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार राज्य में 27.72 प्रतिशत हरित आवरण है। वन विभाग ने वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 30 प्रतिशत और बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग द्वारा अनेक पहल की गई हैं। पौधरोपण बढ़ाने और वनों का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय समुदायों के सहयोग से एक बूटा बेटी के नाम, वन समृद्धि जन समृद्धि योजना, सामुदायिक वन संवर्धन योजना, विद्यार्थी वन मित्र योजना सहित अनेक महत्त्वकांक्षी कार्यक्रम आरम्भ किए गए हैं।


















































