हिमाचल प्रदेश के शीतकालीन छुट्टियों स्कूलों की डेट शीट जारी कर दी गई है प्रदेश के सभी शीतकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में असेसमेंट परीक्षाएं 13 दिसंबर शुरू होंगी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने पहली, दूसरी, चौथी, छठी और सातवीं कक्षा की परीक्षाओं की डेटशीट जारी की है और इन कक्षाओं में किसी भी विद्यार्थी को फेल नहीं किया जाता है। इस परीक्षा में असेसमेंट में प्राप्त अंकों के आधार पर वार्षिक ग्रेडिंग तैयार की जाएगी। सभी केंद्रों में सुबह साढ़े दस बजे परीक्षा शुरू होगी और दोपहर डेढ़ बजे तक चलेगी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थी यह परीक्षाएं देंगे। परीक्षा परिणाम ई संवाद एप पर अपलोड किया जाएगा। 31 दिसंबर को इन स्कूलों में परिणाम घोषित होंगे और फरवरी 2023 से शीतकालीन स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा। प्रदेश के सभी सरकारी और स्कूल शिक्षा बोर्ड संबद्ध निजी स्कूलों में इन परीक्षाओं का आयोजन होगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी (उपायुक्त) डॉ. निपुण जिंदल ने शुक्रवार को ज़िला काँगड़ा के शाहपुर और नूरपुर उपमण्डल मुख्यालयों में बनाये गये स्टॉंग रूम के सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण किया और वहां तैनात जवानों को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि जिले में विधानसभा निर्वाचन को लेकर 12 नवंबर को संपन्न हुई मतदान प्रक्रिया के बाद ईवीएम मशीनों को संबंधित उपमंडल मुख्यालयों पर स्ट्रॉंग रूम में रखा गया है। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ईवीएम की सुरक्षा को लेकर अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाया गया है। इसके लिए तीन कॉर्डन बनाए गए है। केंद्रीय अर्ध सैनिक बल और पुलिस जवान 24 घंटे स्ट्रॉंग रूम की कड़ी पहरेदारी पर तैनात है। वहीं सीसीटीवी कैमरों से भी 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
'प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो, सुक्खू भाई जैसा हो' ,चुनाव प्रचार के दौरान नादौन विधानसभा क्षेत्र में ये नारा खूब बुलंद रहा। इस बार सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समर्थक उन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देख रहे है। नादौन में जहाँ भी सुक्खू प्रचार के लिए पहुंचे, समर्थक ये ही नारा दोहराते दिखे। इस बार कांग्रेस ने बेशक सामूहिक नेतृत्व में और बगैर सीएम फेस के चुनाव लड़ा है ,लेकिन इसमें कोई संशय नहीं है कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है और नादौन विधानसभा सीट से सुखविंद्र सिंह सुक्खू चुनाव जीत कर आते है तो मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सुक्खू का दावा बेहद मजबूत है। नादौन की सियासी फ़िज़ाओं में सुगबुगाहट तेज़ है कि मुमकिन है इस बार नादौन विधानसभा क्षेत्र को मुख्यमंत्री मिल जाएँ। ऐसे में जाहिर है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भावी सीएम फैक्टर का लाभ इस चुनाव में सुक्खू को मिला हो। नादौन के इतिहास की बात करें तो नादौन विधाभसभा सीट यूँ तो कांग्रेस का गढ़ रही है। यहां से नारायण चंद पराशर तीन बार विधायक रहे। नारायण चंद पराशर के बाद सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस सीट पर राज किया है। 2003 से अब तक सुखविंद्र सिंह सुक्खू नादौन सीट पर तीन बार जीत चुके है, हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में सुक्खू को 6750 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। पर फिर 2017 में सुक्खू ने जीत हासिल की। कांग्रेस में सुक्खू के अलावा कभी कोई अन्य चेहरा विकल्प के तौर पर नहीं उभरा। इस बीच भाजपा की बात करे तो एक बार फिर विजय अग्निहोत्री मैदान में है। अग्निहोत्री एक दफा सुक्खू को पटकनी भी दे चुके है और इस बार फिर मैदान में डटे हुए है। नादौन में भाजपा के लिए ऐसा भी कहा जाता है कि अगर यहां भाजपा एकजुट हो जाए तो शायद कांग्रेस की राह इतनी आसान न हो। अब भाजपा एकजुट है या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा। वहीँ इस बार आम आदमी पार्टी ने नादौन के सियासी समीकरण ज़रूर बदले है। दरअसल इस बार आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी शैंकी ठुकराल ने पुरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा है। अब देखना ये होगा कि शैंकी किसके वोट बैंक में कितनी सेंध लगाते है। नादौन में फिलवक्त सुक्खू जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है। सुक्खू ने भावी सीएम के टैग के साथ चुनाव लड़ा है। ऐसे में जाहिर है इसका लाभ भी उन्हें मिलता दिख रहा है। बहरहाल, जनादेश ईवीएम में कैद है और सभी अपनी -अपनी जीत का दावा कर रहे है।
हाल में हिमाचल प्रदेश विश्वविधालय द्वारा प्रथम वर्ष का परिणाम घोषित किया गया है। इस परिणाम की घोषणा होते ही छात्र संगठनों ने हल्ला बोल दिया है छात्र संगठनों का कहना है कि इस परिणाम में कई त्रुटियां है जो हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। इसी विषय को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आज धर्मशाला महाविद्यालय में प्रदर्शन किया गया। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि हाल ही में जारी हुए परीक्षा परिणामों में कई तरह की त्रुटियां पाई गई है ऊपर से रिजल्ट इतने लेट निकाला है कि छात्रों के दो-दो वर्ष बर्बाद हो रहे है। विद्यार्थी परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय इस परिणाम को 15 दिनों में फिर से ठीक करके जारी करे अन्यथा इसे लेकर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन होगा।
जिला सोलन में राशन डिपो उपभोक्ता अपने ईकेवाईसी नहीं करवा रहे है। शायद उपभोक्ताओं की रुचि अब सरकारी योजनाओं से उठती नज़र आ रही है। ज़्यादतर उपभोक्ता इसका उपयोग केवल एक दस्तावेज की तरह कर रहे है। ऐसा हम इस लिए कह रहे है क्योंकि विभाग के पास अभी 62.57 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने ही ईकेवाईसी करवाई है। जबकि अभी 38 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने केवाईसी करवाने में रुचि नहीं दिखाई है। जिस कारण खाद्य आपूर्ति नियंत्रक विभाग की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। गौरतलब है कि विभाग पिछले 6 माह से केवाईसी करने में जुटा है लेकिन अभी तक वह लक्ष्य से काफी दूर है। जब इस बारे में खाद्य आपूर्ति जिला नियंत्रक नरेंद्र धीमान ने बताया कि सोलन जिला में 5 लाख 45 हज़ार उपभोक्ता है जिसमें से अभी तक 3 लाख 41 हज़ार उपभोक्ताओं की केवाईसी हो पाई है। उन्होंने बताया कि उनके कर्मचारी घर घर जा कर भी उपभोक्ताओं को जागरूक कर रहे है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से उपभोक्ताओं को आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द केवाईसी करवाएं और जो उनका डिपो है वहां आवश्यक दस्तावेज दिखा कर औपचारिकताएं पूर्ण करें ताकि वह सरकारी योजनाओं का लाभ लें सकें। अन्यथा वह सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
बिजली की बढ़ रही खपत को लेकर बोर्ड ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। बोर्ड ने उपभोक्ताओं को सुबह अढ़ाई घंटे जबकि शाम को साढ़े तीन घंटे बिजली इस्तेमाल करने की बात की है। इसके साथ ही गीजर इस्तेमाल करने को लेकर भी बोर्ड ने दिशा-निर्देश दिए है। बोर्ड ने सुबह पांच से छह बजे के बीच गीजर से पानी गर्म करने की बात कही है और आवश्यकता अनुसार पानी गर्म होने के बाद बंद करने की सलाह दी है। प्रदेश भर में इन दिनों बिजली की खपत बढ़ रही है और विद्युत उपकरणों के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से लोड पर असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए बिजली बोर्ड प्रबंधन अब सक्रिय हो गया है। बोर्ड प्रबंधन के अनुसार सुबह 6:30 बजे से 9:00 बजे तक और शाम को 6:30 से रात 10:00 बजे के दौरान विद्युत उपकरणों का उपयोग विशेष रूप से आवश्यकता के अनुसार करना होगा। बोर्ड के अनुसार उपकरण अच्छी गुणवत्ता वाले खास कर बीईई स्टार रेटिंग उपकरण हो जिनके उपयोग से विद्युत लोड में कमी आएगी और विद्युत बिलों में भी उपभोक्ताओं की बचत होगी।बोर्ड ने पानी गर्म करने के लिए हस्त निर्मित फिलामेंट तार रॉड का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है।
पहाड़ों में कदमताल के शौकीन देश-विदेशी कई सैलानी प्रदेश में बिना पंजीकरण के कठिन व जोखिम भरे मार्ग में ट्रैकिंग के लिए निकल पड़ते हैं। ट्रेकर के रूट से भटकने के कई मामले सामने आ रहें हैं। यहां तक कई जान भी गवाँ चुके हैं। विभाग ने इन सभी परिस्थितियों से निपटने के लिए ऐप बनाई हैं। इस ऐप पर रेजिस्ट्रेशन के बाद ट्रेकर को रूट की सही जानकारी मिलेगी। पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक अमित कश्यप ने बताया कि प्रदेश में ट्रेकिंग के लिए आए सैलानी बिना पंजीकरण के रूट पर चले जाते हैं। रूट की सही जानकारी न होने से कई बार वह मुसीबत में फंस जाते हैं। पर्वतारोहियों की सुविधा के लिए विभाग ने एक ऐप बनाई है इसमें रूट की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। इसमें रेड, ऑरेंज व ग्रीन तीन श्रेणीयों में रुट्स को दर्शाया गया हैं। पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसका लिंक उपलब्ध करवाया गया है। ऐप में हिमाचल के सभी ट्रैकिंग रूट की जानकारी दी गई है। साल के कौन से समय में कौन सा रूट ट्रैकिंग के लिए उपयुक्त है, यह जानकारी भी इसमें दी गई हैं। ऐप में पंजीकरण के बाद इसकी जानकारी संबंधित उपायुक्त व एसएचओ को मिल जाएगी और यदि ट्रेकरस का दल बताई गई समयावधि में नहीं लौटता हैं तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को मिल जाएगी, जिससे रेस्क्यू में सहायता मिलेगी और समय रहते बचाव कार्य किया जा सकेगा।
पीएम मोदी आज गुजरात में चार जनसभाओं को सम्बोधित करेंगे। पीएम मोदी आज पालनपुर, मोडासा, देहगाम और बावला में रैली करेंगे। बता दें गुजरात में उनकी कुल करीब 51 रैलियां होंगी। पीएम मोदी गुजरात में अब तक 16 रैलियां कर चुके है और दूसरे चरण की वोटिंग से पहले पहले तक वो 35 और रैलियां करेंगे। गौरतलब है कि गुजरात में 182 विधानसभा सीटों के लिए 1 और 5 दिसंबर को दो चरणों में मतदान होगा और वोटों की गिनती आठ दिसंबर को होगी।
चीन में एक दिन में आए कोरोना के मामलों ने चौंका दिया है। चीन में फिर एक बार कोरोना मामलों में तेज बढ़ोतरी नजर आई है। बुधवार को चीन में एक दिन में कोरोना के 31,454 मामले सामने आए है। एक दिन में इतनी ज्यादा मामले सामने आने के बाद चीन सरकार लॉकडाउन, यात्रा पाबंदियां लगाने के अलावा परीक्षण व टीकाकरण को भी तेज कर रही है, ताकि कोरोना को और फैलने से रोका जा सके।
रेत, ईंट और बजरी के दामों में बढ़ोतरी के बाद अब घर बनाना करीब डेढ़ गुना तक महंगा हो गया है। बीते दिनों में रेत-बजरी और ईंट के दाम 25 फीसदी तक बढ़ गए है। पंजाब में खनन बंद होने और अन्य कारणों से हिमाचल में रेत, ईंट और बजरी के दामों में बढ़ोतरी हो गई है और जल्द ही सीमेंट के दाम भी बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, सरिये के भाव में आई कमी से लोगों को थोड़ी राहत मिली है। बिलासपुर में रेत के दाम की बात करें तो पहले रेत का एक टिपर (400 फीट) का दाम करीब 17 हजार रुपये तक था। लेकिन दो माह के भीतर ही इसके दाम 20 हजार के पार पहुंच गए है। बजरी के एक टिपर (400 फीट) के दाम 13 हजार से बढ़कर 14 हजार रुपये तक हो गए। ईंट के दाम में भी उछाल आया है। पहले नौ हजार रुपये में मिलने वाली एक हजार ईंट, अब एक से दो हजार तक महंगी हो गई है। वही सीमेंट के दाम में दो माह से कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है। अल्ट्राटेक सीमेंट 425 से 430 रुपये प्रति बैग, अंबुजा सीमेंट 430 रुपये और एसीसी सीमेंट का दाम भी 425 से 430 रुपये तक है।
भारतीय महिला हैंडबॉल टीम एशियन चैंपियनशिप के लिए कोरिया हुई रवाना, हिमाचल की खिलाडी भी टीम में शामिल
इंचियोन साउथ कोरिया में 24 नवंबर से 4 दिसम्बर तक होने वाली वरिष्ठ वर्ग की एशियन महिला हैंडबॉल चैंपियनशिप का आयोजन हो रहा है। जिसमें भारतीय वरिष्ठ महिला हैंडबॉल टीम भी आज कोरिया रवाना हो गई। भारतीय वरिष्ठ महिला हैंडबाल टीम के कोच सचिन चौधरी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम एशियन चैंपियनशिप में वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी क्वालीफाई मैच खेलेगी। उन्होंने बताया कि उनके साथ एम कार्तिकेन साई से, राजस्थान से मनीषा व भारतीय रेलवे से संध्या भी बतौर कोच भारतीय टीम के साथ गए है। भारतीय टीम के मैनेजर के रूप में हैंडबॉल एसोसिएशन इंडिया के महासाचीव तेजराज सिंघव हेड ऑफ दि डेलीगेट डॉक्टर आनंदेश्वर पांडे गए है। सचिन चौधरी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के मोरसिंघी गांव में चल रही मोरसिंघी हैंडबॉल नर्सरी की खिलाड़ी निधि शर्मा, दीक्षा ठाकुर, मेनिका पाल, प्रियंका ठाकुर, शालिनी ठाकुर, भावना शर्मा, भारतीय वरिष्ठ महिला टीम में शामिल है। बता दें कि मोरसिंघी हैंडबाल नर्सरी की खिलाड़ी आये दिन हर प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन कर मेडल जीत कर जिला, राज्य व देश का नाम रोशन कर रही है।
प्रदेश भर से आए दिन बस हादसों की खबरे सामने आ रही है। जिला कुल्लू के बंजर से भी एक ऐसे ही घटना सामने आयी है। लेकिन चालक की सूझबुझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया। कुल्लू जिला के बंजार में पास देते समय बस का टायर सड़क से बाहर उतर गया। बंजार से जौरी जा रही हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस का सुबह दनधार के पास दूसरी बस को पास देते हुए गला टायर सड़क से बाहर निकल गया। गनीमत यह रही कि बस सड़क किनारे रूक गई और बड़ा हादसा होने से टल गया। अगर बस चालक समय पर ब्रेक नहीं लगाता तो बड़ा हादसा पेश आ सकता था। चालक की सूझबूझ से 40 यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अनुपालना में निर्वाचन विभाग ने इन विधानसभा चुनावों के दौरान दिव्यांगजन मतदाताओं के लिए फार्म 12-डी और डाक मतपत्र प्रदान करने सहित अन्य सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित किया था। गर्ग ने बताया कि 40 प्रतिशत से अधिक शारीरिक दिव्यांगता वाले 6882 दिव्यांगजन मतदाताओं को डाक मतपत्र जारी किए गए थे जिनमें से 6426 ने निर्वाचन विभाग द्वारा तैनात की गई विशेष टीमों के माध्यम से अपने घरों से मतदान किया। सोलन जिला की अर्की विधानसभा क्षेत्र के बांजण गांव के पवन कुमार (34) एक ऐसे दिव्यांग मतदाता हैं जिन्होंने स्वंय निकटतम मतदान केन्द्र पर जाकर अपना मत डाला। पवन कुमार अर्की तहसील के जिले के मांगू के सरस्वती विद्या मंदिर में कंप्यूटर शिक्षक हैं। पवन ने बताया कि यद्यपि निर्वाचन विभाग ने दिव्यांगजन मतदाताओं के लिए घर से मतदान करने की व्यवस्था की थी लेकिन उन्होंने अपनी दिव्यांगता को दरकिनार करते हुए स्वंय मतदान केंद्र पर पहुॅंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जिसके लिए वह गर्व महसूस करते हैं। पवन कुमार ने बताया कि उन्हें अधिकारियों द्वारा व्हील चेयर की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इस सुविधा के बिना ही मतदान करने का निर्णय लिया। पवन कुमार का कहना है कि वह अपने जैसे अन्य मतदाताओं को प्रेरित कर जहां चाह वहां राह का सन्देश देना चाहते हैं। इसी प्रकार पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के बाग पशोग पंचायत के सेर-भराल गांव के ओम प्रकाश (50) जो चल-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं, ने 11 साल की अवधि के बाद डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान किया। ओम प्रकाश कहते हैं कि निर्वाचन आयोग की नई पहल के कारण राज्य में पहली बार डाक मतपत्रों के माध्यम से विशेष श्रेणी के मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया में शामिल किया गया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने तथा मतदान के लिए प्रेरित करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनीष गर्ग का आभार व्यक्त किया।
इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट नॉर्थ जॉन तीन दिवसीय बैडमिंटन चैंपियनशिप का आज से आगाज हो गया है। इस प्रतियोगिता में पांच राज्यों के खिलाड़ी भाग लेंगे। 23 से 25 नवंबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता का शुभारंभ हिमाचल के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर ने किया। इस प्रतियोगिता में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल के खिलाड़ी अपना दम खम दिखाएंगे। इस अवसर पर राज्यपाल ने सभी खिलाड़ियों का स्वागत किया और कहा कि खेल के बहाने सभी खिलाड़ी आए है और विभाग की यह बहुत अच्छी पहल है उन्होंने कहा ज्यादातर इस विभाग के अधिकारियों के हाथ मे पैन होता है, लेकिन आज विभाग के खिलाड़ी रैकेट ओर शटल से अपना दम दिखाएंगे। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के लिए इस प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दी।
26 नवम्बर 2008 का वो दिन, जब देश की सबसे व्यस्त शहर मुंबई रोजाना की तरह चहलकदमी कर रही थी। आम लोग अपने-अपने कार्यो के लिए घर से निकल रहे थे। मायानगरी में सब सामान्य था लेकिन सूर्य अस्त के बाद जैसे-जैसे रात बढ़नी शुरू हुई, वैसे-वैसे मुंबई की सड़कों पर चीख-पुकार भी तेज होती चली गई। उस रोज पाकिस्तान से आए जैश-ए-मोहम्मद के 10 आतंकवादियों ने मुंबई को बम धमाकों और गोलीबारी से दहला दिया था। आतंकियों के हमले में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 300 ज्यादा घायल हुए थे। दिल दहलाने वाले इस आतंकी हमले को आज 14 साल हो गए हैं लेकिन यह भारतीय इतिहास का वो काला दिन है जिसे कोई चाह कर भी नहीं भुला सकता। आपको बताते है समयवार उस दिन क्या हुआ ............. समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे थे आतंकी इस आतंकी हमले की शुरुवात हुई थी 23 नवंबर से, यानी हमले से तीन दिन पहले आतकंवादी कराची से समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचे थे। आतंकवादियों को हर हिन्दू से नफरत थी और जिस नाव से आतंकी आए थे उस पर सवार चार भारतीयों को मौत के घाट उतारते हुए उस पर कब्जा किया था। 23 नवम्बर की रात करीबन आठ बजे आतंकी कोलाबा के पास कफ परेड के मछली बाजार पर उतरे। यहां से वो चार टीमों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी-अपनी अटैक टारगेट पॉइंट की ओर बढ़ गए थे। बताया जाता है कि जब ये आतंकी मछली बाजार में उतरे थे तो इन्हें देखकर वहां के मछुआरों को शक भी हुआ था। जानकारी के अनुसार मछुआरों ने इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस के पास भी पहुंचई थी। लेकिन पुलिस ने इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया। पुलिस को रात के 09.30 बजे छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल पर गोलीबारी की खबर मिली। बताया गया कि यहां रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में दो हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। इन हमलावरों में एक मोहम्मद अजमल कसाब था, जिसे पकड़ने और फांसी देने में सफलता मिली थी है। दोनों हमलावरों ने एके47 राइफलों से 15 मिनट गोलीबारी कर 52 लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 100 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था। आतंकियों की यह गोलीबारी सिर्फ शिवाजी टर्मिनल तक सीमित नहीं रही थी। मुंबई का लियोपोल्ट कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था, जो आतंकी हमले का निशाना बना था। मुंबई के नामचीन रेस्त्रां में से एक इस कैफे में हुई गोलीबारी में मारे गए 10 लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे। साल 1871 से मेहमानों की खातिरदारी कर रहे इस कैफे की दीवारों में धंसी गोलियां हमले के निशान छोड़ गईं। आतंकियों का हौसंला बढ़ रहा था। रात 10.30 बजे खबर आई कि विले पारले इलाके में एक टैक्सी को बम से उड़ा दिया गया है। इस अटैक में चालक और एक यात्री मारा गया है, तो इससे करीब 15-20 मिनट पहले बोरीबंदर से भी इसी तरह के धमाके की खबर मिली थी जिसमें एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की मौत होने की जानकारी मिली थी। इन हमलों में तकरीबन 15 लोग घायल हुए थे। आतंकियों के तीन बड़े मोर्चे आतंकी हमलों में से एक इस हमले का यह दुखद सिलसिला यहीं नहीं थमा। 25 नवंबर तक मुंबई आने से पहले आतंकियों ने तीन बड़े भवन को उड़ाने का टारगेट किया था, जो सबसे बड़े तीन मोर्चों में शामिल थे। पहला था मुंबई का ताज होटल, दूसरा ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल और तीसरा नरीमन हाउस। 26 नवंबर के आतंकियों ने जब तीन बड़े मोर्चों में हमला किया। उस दौरान ताज में 450 और ओबेरॉय में 380 मेहमान मौजूद थे। जाँच एजेंसियों के इन्वेस्टीगेशन रिपोर्ट के अनुसार हमले की अगली सुबह यानी 27 नवंबर को खबर मिली कि ताज होटल के सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है, लेकिन बाद में खबर मिली कि कुछ लोग अभी भी आतंकियों के कब्जे में हैं, जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं। हमलों के दौरान दोनों ही होटल रैपिड एक्शन फोर्ड (आरपीएफ), मरीन कमांडो और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो से घिरे रहे। मीडिया की लाइव कवरेज से आतंकवादियों को खासी मदद मिली क्योंकि उन्हें सुरक्षा बलों की हर हरकत के बारे में पता चल रहा था। तीन दिनों तक चलती रही मुठभेड़ इस हमले के दौरान सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच करीब तीन दिनों तक मुठभेड़ चलती रही थी। मुंबई नगरी में धमाके हुए, आग की लपटों में मौत का मंजर देखने के मिला। गोलियां की आवाज़ से हर एक व्यक्ति का दिल कमजोर हो रहा था। आतंकियों द्वारा बंधक बनाये गए कई लोगों की उम्मीदें टूट रही थी। दुनिया भर की नजरें ताज, ओबेरॉय और नरीमन हाउस पर टिकी हुई थीं। हर भारतीय टीवी पर पल पल की खबर के सुन देख रहे थे और सब सामान्य होने की कामना कर रहे थे। दो हमलावरों ने मुंबई में यहूदियों के मुख्य केंद्र नरीमन हाउस को भी अपने कब्जे में कर रखा था। वहां कई लोगों को बंधक बनाया गया। फिर एनएसजी के कमांडोज ने नरीमन हाउस पर धावा बोला और घंटों चली लड़ाई के बाद हमलावरों का सफाया किया गया, लेकिन एक एनएसजी कमांडो शहीद हो गए। हमलावरों ने इससे पहले ही रब्बी गैव्रिएल होल्ट्जबर्ग और छह महीने की उनकी गर्भवती पत्नी रिवकाह होल्ट्जबर्ग समेत कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया। बाद में सुरक्षा बलों को वहां से कुल छह बंधकों की लाशें मिली। हमले में 160 से ज्यादा लोगों की जान चली गईं। 29 नवंबर की सुबह तक नौ हमलावर आतंकियों का सफाया हो चुका था और अजमल कसाब के तौर पर एक हमलावर पुलिस की गिरफ्त में था। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ चुकी थी लेकिन 160 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी थी। एनएसजी कमांडो मेजर ने किया था आतंकियों को ढेर आतंकियों के साथ चली मुठभेड़ में एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन 28 नवंबर को शहीद हो गए थे। उन्हें होटल ताज का बचाव करने का जिम्मा सौंपा गया था। ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो का मोर्चा संभालते हुए मेजर उन्नीकृष्णन ने 28 नवंबर की रात करीब एक बजे 10 कमांडो के दल के साथ होटल में प्रवेश किया था और छठे फ्लोर पर पहुंचे। वहां मेजर कृष्णन को आभास हुआ कि आतंकी तीसरे मंजिल पर छुपे हैं। अपने दोनों हाथों में हथियार लिए मेजर उन्नीकृष्णन और उनकी टीम ने तीसरे तल पर होटल का दरवाजा तोड़ा और आतंकियों की गोलीबारी का सामना किया। इस मुठभेड़ में कमांडो सुनील यादव घायल हो गए। अपने साथी को घायल देख मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ने खुद मोर्चा संभालते हुए सुनील को अपनी पीठ पर लादकर उसका प्राथमिक उपचार भी किया। इस दौरान मेजर संदीप उन्नीकृष्णन आतंकियों की गोलीबारी का लगातार जवाब भी देते रहे। उन्नीकृष्णन ने फिर उन आतंकियों का होटल में ही पीछा किया। इस दौरान उन्होंने कुछ आतंकियों को ढेर कर दिया। इसी बीच उन्हें आतंकियों ने पीछे से गोली मार दी। अधिक खून बहने की वजह से मेजर संदीप उन्नी कृष्णन की मौत हो गई। मेजर संदीप को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। ऐसे पकड़ा गया था कसाब इन आतंकवादियों में सबसे खूंखार आतंकवादी अजमल कसाब था। कसाब उन आतंकी हमले में अकेला ऐसा पाकिस्तानी आतंकी था जिसे जिंदा पकड़ा गया था। आतंकी कसाब को जिंदा पकड़ने के लिए काफी कोशिशें की गई थी लेकिन बार-बार वह तमाम सुरक्षा जवानों को चकमा दे रहा था। आखिर में मुंबई पुलिस में बतौर सहायक इंस्पेक्टर तैनात रहे तुकाराम ओंबले ने सिर्फ एक लाठी के सहारे उसे पकड़ लिया। मुंबई की डीबी मार्ग पुलिस को करीब 10 बजे सूचना मिली की दो आतंकी जिनके पास भारी हथियार हैं, उन्होंने सीएसटी में यात्रियों को भून डाला है और सड़क पर एक गाड़ी की मदद से आतंक मचा रहा है। सूचना मिलते ही 15 पुलिसवालों को डीबी मार्ग से चौपाटी की ओर मरीन ड्राइव पर बैरीकेडिंग करने के लिए भेजा गया। वहीं पुलिस को देखते ही आतंकी ने अपनी गाड़ी को बैरीकेडिंग से 40 से 50 फीट पहले ही रोक दी और यू-टर्न ले लिया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी होने के कारण आतंकी भाग नहीं सके और चारो तरफ से घिर गए। इस दौरान पुलिस सभी आतंकी को जिंदा पकड़ना चाहते थे लेकिन आतंकियों ने फायरिंग कर दी और पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की जिसमें एक आतंकी मारा गया और कसाब ने मरने का नाटक शुरू कर दिया। उस समय तुकाराम ओंबले के पास सिर्फ एक लाठी थी और कसाब के पास एक एके-47 थी। ओंबले ने कसाब की बंदूक की बैरल पकड़ ली थी। उसी समय कसाब ने ट्रिगर दबा दिया और गोलियां ओंबले के पेट और आंत में लगीं। ओंबले वहीं गिर गए लेकिन उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक बैरल को थामे रखा था ताकि कसाब और गोलियां न चला पाए। उनकी बहादुरी को देखते हुए भारत सरकार की ओर से ओंबले को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। कसाब के मामले की सुनवाई में कब क्या हुआ कसाब को हमले के अगले ही दिन, यानी 27 नवंबर को जुहू चौपाटी से गिरफ्तार किया गया था। जनवरी 2009 में स्पेशल कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान कसाब को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा गया। सरकारी वकील को इस मामले में पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बनाया गया। 25 फरवरी को 11 हजार पन्नों की पहली चार्जशीट दाखिल की गई। इस दौरान कसाब के नाबालिग होने पर भी विवाद चलता रहा। इसी साल मई में पहले चश्मदीद गवाह ने कसाब के हमले में शामिल होने की पुष्टि की। मार्च 2010 में केस से जुड़ी सुनवाई पूरी हो गई। 3 मई 2010 को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कसाब को 26/11 हमले में दोषी पाया और 6 मई को फांसी की सजा सुनाई। 2011 में ये मामला बॉम्बे हाईकोर्ट के पास गया और हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। सुप्रीम कोर्ट ने भी कसाब को राहत नहीं दी और फांसी की सजा पर मुहर लगा दी। कसाब के पास अब केवल दया याचिका का एकमात्र विकल्प रह गया था। कसाब ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास दया याचिका भेजी, जिसे 5 नवंबर को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया। 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवडा जेल में सुबह कसाब को फांसी दी गई। भारत ने कसाब के शव को पाकिस्तान को सौंपने की पेशकश की थी, लेकिन पाकिस्तान के मना करने के बाद जेल में ही शव को दफन कर दिया गया।
शेयर बाजारों के लिए आज का दिन अच्छा साबित हो रहा है और बाजार की शुरुआत जबरदस्त तेजी के साथ हुई है। ग्लोबल बाजारों से सपोर्ट के साथ एसजीएक्स निफ्टी में भी उछाल देखा जा रहा है और बाजार हरे निशान में खुले हैं। आज बैंक निफ्टी ने फिर से रिकॉर्ड हाई लेवल दिखाया है और ये 42600 के पार निकल गया है। इसके अलावा आज मेटल सेक्टर में भी मजबूती बनी हुई है और आईटी सेक्टर में लिवाली देखी जा रही है। शेयर बाजार की शुरुआत में आज बीएसई का 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स 360.75 अंक यानी 0.59 फीसदी की उछाल के साथ 61,779.71 पर कारोबार की शुरुआत हुई है। इसके अलावा एनएसई का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी 81 अंक यानी 0.44 फीसदी की तेजी के साथ 18,325.20 के लेवल पर ट्रेड ओपन हुआ है।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की आज मध्य प्रदेश में पहुंच गई है। राहुल गांधी सुबह करीब सात बजे बुरहानपुर के रास्ते से मध्य प्रदेश पहुंचे। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोंदरली गांव से भारत जोड़ो यात्रा शुरू हुई, जो शाम 6 बजे ये यात्रा बुरहानपुर शहर पहुंचेगी। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मध्य प्रदेश पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं, कार्यकर्ताओं व आम लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इसके बाद राहुल गांधी ने मंच से लोगों को संबोधित करते हुए कहा, विपक्ष के लोगों ने कहा था कि हिंदुस्तान 3600 किमी लंबा है। इसे पैदल तय नहीं किया जा सकता। हम मध्य प्रदेश आ गए हैं। 370 किमी यहां चलेंगे। यह तिरंगा श्रीनगर तक जाएगा और हम डरने वाले नहीं है। यह यात्रा हिंदुस्तान में फैलाए जा रहे नफरत, हिंसा और डर के ख़िलाफ़ है।
हिमाचल की राजधानी शिमला में एशिया के पहले ओपन एयर आइस स्केटिंग रिंक में जल्द ही स्केटिंग का रोमांच शुरू होने वाला है। ऐसे में लंबे समय से स्केटिंग का इंतजार कर रहे स्केटिंग के दीवानों के लिए यह खुशी की खबर है। हालांकि आजकल मैदान में गड्ढे पड़ जाने के चलते उसकी साफ-सफाई का कार्य चल रहा है और इसे जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। मैदान को समतल करने के बाद जल्द स्केटिंग व अन्य आइस के खेल शुरू होंगे। आइस स्केटिंग क्लब के आयोजन ने जानकारी दी है कि पिछले साल 16 दिसंबर को स्केटिंग शुरू की गई थी। इस बार 30 नवंबर तक मैदान को समतल कर लिया जाएगा। पहली दिसंबर से बर्फ को जमाने का कार्य शुरू किया जाएगा और यदि मौसम ने साथ दिया तो 6 दिसम्बर तक स्केटिंग शुरू हो जाएगी।
नालागढ़ में कल कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के तहत 11 KV विद्युत उपकेन्द्र मंझोली और 11 केवी ढेरोवाल-11 फीडर के मरम्मत के चलते 23 नवंबर को बिजली बंद रहेगी। विद्युत उप मण्डल नंबर 01 के सहायक ने बताया कि मौसम खराब होने के कारण सुबह 9 बजे से सांय 6 बजे तक बहरामपुर, तेलीवाल, गिहार, नथू, पलास्सी और औद्योगिक इकाइयां सैनी स्टोन क्रेशर, बरसन स्टोन क्रेशर, हिमालय स्टोन क्रेशर, जय नैना देवी क्रेशर, बंसल जनरेशन, सुपर फ्रीज़ इंडस्ट्री, ग्रीन हॉक सॉल्यूशन, बैंस पाइप, शारदा इंडस्ट्री में विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी।
शिमला के कोटखाई के तहत आने वाले बाघी व आसपास के क्षेत्रों में चेरी की फसल में फैले संक्रमण को रोकने के लिए प्लान तैयार कर लिया गया हैं। बुधवार को बागवानी निदेशालय में बागवानी विभाग के कार्यकारी निदेश सुदेश मोक्टा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई हैं। इस बैठक में नौणी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ बागवानी विभाग के एचडीओ और बागवान भी मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया हैं कि चेरी की फसल में इन्फेक्शन रोकने के लिए संक्रमित पौधों का उखाड़ा जाएगा। ताकि बागीचों में यह संक्रमण ज्यादा न फैले। इसके अलावा बागवानों को पर्चे बांटकर फाइटोप्लाजमा बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। चेरी से संक्रमित पौधों को बचाने के लिए बनाई गई योजना के लिए यूनिवर्सिटी सरकार व विभाग को फंड के उपलब्धता के लिए भी लिखेगा, क्योकि बैठक में नौणी यूनिवसिर्टी के प्रतिनिधियों ने फंड की कमी का जिक्र भी किया हैं। वहीं अप्रैल के महीने सेब के बागीचों को 3 जोन में बांटा जाएगा। इसमें रेड जोन, ओरेंज जोन और ग्रीन जोन होंगे। रेड जोन में पूरी तरह से संक्रमित क्षेत्र होंगे, ओरेंज जोन मेें कम संक्रमित जोन और ग्रीन जोन संक्रमित रहित क्षेत्र हैं। इस दौरान भी नौणी यूनिवर्सिटी की टीमें बागीचों का निरीक्षण करेगी। गौरतलब है कि बाघी क्षेत्र में चेरी के बगीचों में इसी साल सितंबर माह में अज्ञात बीमारी से 90 फीसदी पौधे सूख गए थे। इसके बाद बागवानी विभाग ने नौणी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की और बीमारी का पता लगाने के निर्देश दिए थे। कमेटी ने कई दिन तक बाघी क्षेत्र में डेरा डाले रखा। कमेटी की कई दिनों की जांच में पता चला कि बाघी व आसपास के क्षेत्रों में फाइटोप्लाज्मा वायरस से चेरी के बगीचे सूख रहे हैं। इसके बाद नौणी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बागवानों को कुछ छिड़काव का सुझाव दिया। कोटगढ़ के बागवान दीपक सिंघा का कहना है कि फाइटोप्लाजमा के कारण चेरी के 80 से 90 प्रतिशत पौधे सूख गए हैं। इससे अगले साल फसल लगने की संभावनाएं खत्म हो गई है। यदि इस बीमारी को कंट्रोल नहीं किया गया तो यह साथ लगते नारकंडा, थानाधार, कंडियाली, कुमारसैन आदि क्षेत्रों में भी फैल जाएगी। इससे क्षेत्र के बागवान चिंतित है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का भी नारकंडा के साथ लगते क्षेत्र में चेरी का बगीचा है। यहां आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बागवानों की रोजी-रोटी चेरी पर निर्भर है। दीपक सिंघा ने इस बीमारी को रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने की अपील की है।
दिल्ली नगर निगम के चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महाबल मिश्रा रविवार (20 नवंबर) को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। कांग्रेस से एक बार सांसद और तीन बार विधायक रह चुके महाबल मिश्रा ने पहाड़गंज में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में एक जनसभा के दौरान 'आप' की सदस्यता ग्रहण की है। बता दें कि दिल्ली नगर निगम के 250 पार्षदों को चुनने के लिए चार दिसंबर को मतदान होगा। मतगणना सात दिसंबर को होगी। एमसीडी के एकीकरण के बाद निगम का यह पहला चुनाव होगा। बता दें कि महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा पहले से ही आम आदमी पार्टी के नेता हैं। विनय द्वारका से 'आप' विधायक हैं। दिल्ली में रह रहे पूर्वांचल के मतदाताओं पर महाबल मिश्रा की खासी पकड़ बताई जाती है।
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के बाहरी इलाके शालतेंग में भारतीय सेना की शाखा 2 राष्ट्रीय राइफल्स और पुलिस ने तीन कथित हाइब्रिड आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से हथियार भी बरामद किए हैं। कश्मीर जोन पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया, ''सेना (2 आरआर) और श्रीनगर पुलिस ने तीन एके राइफल, दो पिस्तौल, नौ मैगजीन और 200 कारतूसों की बड़ी खेप के साथ श्रीनगर के बाहरी इलाके में तीन हाइब्रिड आतंकियों को गिरफ्तार किया है। जांच जारी है।'' इससे पहले रविवार (20 नवंबर) को ही अनंतनाग के बिजबेहरा में सुरक्षाबलों के एक तलाशी अभियान के दौरान मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का पूर्व सहयोगी सज्जाद तांत्रे मारा गया। तांत्रे को हाल में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) की हिरासत से रिहा हो गया था।
गुजरात में विधानसभा चुनाव को लेकर काफी गहमा-गहमी दिख रही है। प्रदेश में 27 साल से सरकार चला रही बीजेपी के प्रदर्शन पर सबकी निगाहें टिकी हैं। पार्टी एक बार फिर से राज्य में कमल खिलाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। लेकिन बागी नेता पूरा गेम बिगाड़ने में लगे हैं। बागियों पर अब बीजेपी ने सख्त एक्शन लिया है। गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने पार्टी से बगावत करने वाले 7 नेताओं को निष्कासित कर दिया है। इन नेताओं ने पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय नामांकन किया है। पार्टी से निष्कासित होने वाले नेताओ में मधु श्रीवास्तव, अरविंद लादानी, दीनू पटेल, हर्षद वसावा और धवल सिंह झाला सहित 7 लोगों का नाम है। प्रदेश अध्यक्ष ने इसको पार्टी के विरुद्ध कार्य करने के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी व पहाड़ों की रानी शिमला पर तीसरी आंख का पहरा लग गया है। राजधानी का चप्पा चप्पा अब तीसरी आंख की निगरानी में होगा। नगर निगम शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शिमला में विभिन्न जगहों पर 210 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा रहे है। इसके लिए निगम ने 71 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। इन कैमरों का कंट्रोल कैथ्यू पुलिस लाइन में रहेगा, जहां से शहर की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। शिमला में आने जाने वाला हर एक व्यक्ति तीसरी आंख की पैनी नजर से बच नहीं पाएगा। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में बढ़ते अपराधों को देखते हुए पुलिस विभाग आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर अपराधियों की धरपकड़ सुनिश्चित कर रहा है। इसके लिए बाकायदा हिमाचल पुलिस द्वारा रोडमैप तैयार किया गया है। हिमाचल में अपराध करने के बाद अपराधी फरार हो जाते है। ऐसे अपराधियों को पकड़ना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित होता है। CCTV लगने के बाद ऐसे अपराधियों पर कड़ी नज़र रखी जा सकेगी। इसके अलावा यातायात नियमों की अवहेलना करने वालों पर नकेल कसने के लिए 5 इंटेलिजेंस ट्रैफिक मोनिटरिंग सिस्टम (ITMS) भी लगाए गए है। आगामी 1 से डेढ़ माह में ये सारा कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।
लेह में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जम्मू शहर में शनिवार की सुबह कड़ाके की ठंड के साथ हुई। लेह में बीती रात का न्यूनतम तापमान माइनस 8.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कश्मीर में भी शीत लहर जारी है। यहां कई जिलों में रात का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री से नीचे चल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र श्रीनगर के अनुसार, अगले 24 घंटे में जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। कश्मीर के अधिकांश जिलों में दिन का तापमान भी 15 डिग्री के आसपास चल रहा है। राजधानी श्रीनगर में बीती रात का न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विश्व विख्यात पर्यटन स्थल पहलगाम में बीती रात का न्यूनतम तापमान माइनस 4.2, काजीकुंड में माइनस 0.4, कुपवाड़ा में माइनस 1.4, गुलमर्ग में माइनस 3.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज़ मैदान में भाषा एवं संस्कृति विभाग और राज्य संग्रहालय की ओर से विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। रिज मैदान पर लगा ये क्राफ्ट मेला स्थानीय लोगों को ही नहीं बल्कि सैलानियों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यहां हाथ से बनी वस्तुएं सबको पसंद आ रही है। चाहे बात की जाए कुल्लू-किन्नौरी शॉल से लेकर चंबा रुमाल तक या बुद्धिस्म को दर्शाने वाली थांका पेंटिंग की। पांच दिवसीय तक चलने वाले इस कला शिल्प मेले यह प्रदर्शनियाँ लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इन सबके बीच अगर बात की जाए चम्बा रुमाल की तो रेशम के धागों से कॉटन और खादी के इस रुमाल पर की गई कारीगरी को देख कर हर कोई आश्चर्यचकित हो रहा है। चंबा के इस एक रुमाल की कीमत 250 रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक है। इन महंगे रुमाल को बनाने के लिए 25 दिन लग जाते हैं। इस बाबत रुमाल कारीगर ने बताया कि इसके लिए विशेष धागा कई बार दिल्ली या अमृतसर से मंगवाना पड़ता है और कसीदाकारी किए रुमाल एक लाख रुपये तक बिकते है। इसी बीच बौद्धधर्म को दर्शाने वाली थांका पेंटिंग भी लोगों को खूब भा रहा है। एक थांका पेंटिंग का दाम एक लाख रुपये है। इस पेंटिंग का दाम सुन कोई इसे ख़रीदे या न ख़रीदे पर लोग इसे देखने की लिए दूर- दूर से पहुंच रहे है।
रामपुर में कुमारसैन के जाबली में SIU शिमला की टीम को ट्रैफिक नाके के दौरान चरस तस्कर को दबोचने में सफलता मिली है। आरोपी युवक की पहचान 19 वर्षीय दीवान सिंह पुत्र नोख सिंह गांव कानों तहसील बंजार जिला कुल्लू के तौर पर हुई है। SDPO रामपुर चंद्रशेखर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार को SIU शिमला की टीम ASI अम्बिलाल की अगुवाई में गश्त पर थी, इस दौरान नेशनल हाईवे-5 पर दुर्गा माता मंदिर जाबली के समीप ट्रैफिक नाके पर लिप्पा से सोलन की ओर जा रही HRTC बस HP-25ए-3324 को तलाशी के लिए रोका गया। पुलिस की तलाशी के दौरान बस की 10 नम्बर सीट पर बैठा युवक हड़बड़ा गया, जिसके आधार पर उससे पूछताछ की गई। पुलिस पूछताछ में युवक कोई संतोषजनक जवाब नही दे पाया। तलाशी लेने पर युवक के बैग से 802 ग्राम चरस बरामद हुई। SIU टीम ने आरोपी युवक को हिरासत में लिया और मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
'कांग्रेस आ रही है' पार्टी के होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री पर छापा ये नारा अब पार्टी के नेताओं की जुबां पर आ गया है और पुरे आत्मवश्वास के साथ पार्टी के तमाम बड़े नेता दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता वापसी का दावा कर रहे है। कांग्रेस के तमाम दिग्गज एक सुर में रिवाज बदलने का सियासी राग दोहरा रहे है। रिकॉर्ड मतदान और प्रदेश का सियासी इतिहास भी कांग्रेस के दावे को मजबूत करता है। इसके अलावा माहिर मानते है कि पुरानी पेंशन और महंगाई जैसे मुद्दे भी संभवतः कांग्रेस के पक्ष में गए है। बेहतर टिकट आवंटन और सीमित बगावत भी कांग्रेस के दावे को और बल दे रहे है। यानी कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो कहा जा सकता है कि कांग्रेस आ सकती है। हालांकि, जनादेश आठ दिसंबर को आएगा और तब तक इन दावों और विश्लेषणों में कितना दम है, इसके लिए इंतजार करना होगा। बहरहाल, अगर कांग्रेस सात में आई तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा, ये फिलवक्त सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में एक से बढ़कर एक दिग्गज नेता है, सब सियासी महारथी और सब दावेदार। कम से कम आठ चेहरे ऐसे है जिनका नाम उनके समर्थक खुलकर मुख्यमंत्री के लिए प्रोजेक्ट कर रहे है। हालांकि ये तमाम नेता खुद शांत है और उम्मीद से विपरीत इस अनुशासन के लिए निसंदेह पार्टी बधाई की हकदार भी है। वरना वीरभद्र सिंह के निधन के बाद एक बड़ा वर्ग ये मानता था कि पार्टी में 'अपनी डफली अपना राग' की स्थिति खुलकर सामने आ जाएगी। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस को लेकर सबसे बड़ा सवाल ये था कि पार्टी किसके चेहरे पर चुनाव लड़ेगी। पर कांग्रेस ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया और लड़ा भी। आगे भी ये एकजुटता और अनुशासन कायम रह पाता है या नहीं, ये तो समय के गर्भ में छिपा है पर चुनाव तक तो कांग्रेस ने कमाल कर के दिखा ही दिया। अब ज्यूँ ज्यूँ नतीजों का दिन नजदीक आ रहा है, पार्टी के भीतर की खलबली मचना स्वाभविक है। जाहिर है कई दिग्गज नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर निगाह गड़ाएं हुए है और अब पार्टी आलाकमान का आशीर्वाद और समर्थक विधायकों का संख्याबल ये तय करेगा कि किसके अरमान पूरे होते है। पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की बात करें तो प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर, रामलाल ठाकुर और आशा कुमारी वो प्रमुख नाम है जिनके समर्थक खुलकर उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट कर रहे है। इनके अलावा एक और नाम समर्थकों द्वारा जमकर प्रोजेक्ट किया जा रहा है, वो है युवा नेता विक्रमादित्य सिंह। हालांकि ये वर्तमान स्थिति में व्यावहारिक नहीं लगता, पर इससे विक्रमादित्य की लोकप्रियता का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है। बहरहाल मौजूदा परिवेश में नजर डाले तो सीएम पद की दौड़ में शामिल इन नेताओं में से किसकी इच्छा पूरी होती है, ये समर्थक विधायकों का संख्याबल भी तय करेगा। पार्टी के भीतर इसे लेकर सिसायत जरूर चरम पर है, पर सुखद बात ये है कि पार्टी के भीतर की ये सियासत अनुशासन के दायरे में हो रही है। 5नए सियासी गठजोड़ संभव कांग्रेस के टिकट आवंटन पर निगाह डाले तो होलीलॉज के निष्ठावानों के अलावा सबसे ज्यादा टिकट सुक्खू कैंप को मिले है। दोनों तरफ के निष्ठवानो में से किसके कितने समर्थक जीतकर आते है, ये सीएम पद के चयन के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा। इन दोनों के बीच ठाकुर कौल सिंह भी है जो जिला मंडी में कांग्रेस की प्रचंड जीत का दावा कर रहे है। कौल सिंह और होलीलॉज का सियासी गठजोड़ एक बार फिर मुमकिन है और ऐसे में प्रतिभा सिंह या ठाकुर कौल सिंह का दावा मजबूत हो सकता है। जानकार मान रहे है कि अगर प्रतिभा सिंह के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो होलीलॉज, कौल सिंह ठाकुर के साथ जा सकता है। हालांकि ये सिर्फ कयास है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री भी होलीलॉज के करीबी रहे है, ऐसे में उनका नाम भी खारिज नहीं किया जा सकता। आशा कुमारी भी दावेदार है और संभवतः होलीलॉज कैंप के साथ ही आगे बढ़ रही है। उधर सुखविंद्र सिंह सुक्खू तो अपने समर्थकों के साथ मजबूत दिख ही रहे है। रामलाल ठाकुर और हर्षवर्धन चौहान जैसे अन्य नेता किस रणनीति पर आगे बढ़ते है, ये देखना भी रोचक होगा। क्या होलीलॉज के समानांतर एक और सियासी गठजोड़ होता है या नहीं, ये देखना दिलचस्प होने वाला है। क्या होलीलॉज निष्ठावानों की गिनती भी कम -ज्यादा होगी, इस पर भी निगाह टिकी है। कमतर नहीं दिख रहे सुक्खू अपनी शर्तों पर सियासत करते आएं सुखविंद्र सिंह सुक्खू के दावे को कमतर आंकना किसी के लिए भी बड़ी भूल सिद्ध हो सकता है। जो नेता वीरभद्र सिंह से टकराते हुए खुद की सियासी जमीन बचा ले, वो आसानी से हार कैसे मान सकता है। सुक्खू के जिन समर्थकों को टिकट मिला है उनमें से अधिकांश अपनी अपनी सीटों पर अच्छा करते दिख रहे है। इसके अलावा होलीलॉज कैंप के बाहर के कई अन्य नेता भी खुद का दावा कमजोर पड़ने पर अपने समर्थकों सहित सुक्खू का साथ दे सकते है। यानी सुक्खू संख्याबल के मामले में भी कम नहीं माने जा सकते। पार्टी आलाकमान के भी वे नजदीकी माने जाते है। 'प्रतिभा' की 'प्रतिभा' पर संशय नहीं हिमाचल प्रदेश को आज तक महिला मुख्यमंत्री नहीं मिली है और ऐसे में प्रतिभा सिंह एक मजबूत दावेदार है। पार्टी आलाकमान को वीरभद्र सिंह के नाम के असर का बखूभी इल्म है और उपचुनाव के नतीजों में इसका असर भी दिख चूका है। इस बार भी चुनाव सामग्री में जिस तरह वीरभद्र सिंह के नाम का इस्तेमाल किया गया है वो इसे साफ़ दर्शाता है। मंडी संसदीय उपचुनाव जीतकर प्रतिभा सिंह भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी है और शायद ये ही बतौर प्रदेश अध्यक्ष उनकी नियुक्ति का अहम् कारण बना। जानकार मानते है कि अब भी बतौर मुख्यमंत्री प्रतिभा सिंह का दावा मजबूत है। सबसे वरिष्ठ कौल सिंह ठाकुर करीब 50 साल लम्बे राजनीतिक सफर में कौल सिंह ठाकुर ने पंचायत समिति से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का फासला तय किया है। वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे है और कांग्रेस ने निष्ठावान सिपाही है। जानकार मानते है कि अगर मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सहमति नहीं बनती है तो कौल सिंह ठाकुर वो नाम है जिसपर वरिष्ठता का हवाल देकर आलाकमान सबको मना सकता है। होलीलॉज से भी कौल सिंह ठाकुर के सम्बंध बेहतर दिख रहे है, ऐसे में वरिष्ठता का लाभ उन्हें मिल सकता है। होलीलॉज के समर्थक पर टिकी मुकेश की दावेदारी मुकेश अग्निहोत्री ने नेता प्रतिपक्ष रहते हुए बीते पांच साल में जयराम सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुकेश भी सीएम पद के प्रबल दावेदार है, हालांकि उनकी दावेदारी होलीलॉज के भरोसे ज्यादा टिकी दिखती है। दरअसल जिस तरह सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अपने कई समर्थक और निष्ठावान चुनावी मैदान में है, उस तरह मुकेश अग्निहोत्री का अपना कोई अलग कैंप नहीं दिखता। ऐसे में क्या होलीलॉज उन्हें प्रोजेक्ट करता है, ये देखना रोचक होगा। संभवतः मुकेश होलीलॉज के साथ ही आगे बढ़ेंगे, लेकिन उनकी दावेदारी को हल्का नहीं लिया जा सकता। वे होलीलॉज की पसंद भी हो सकते है।
अप्रैल 1983 में कांग्रेस आलाकमान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल को हटाकर वीरभद्र सिंह को हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। इसके बाद वीरभद्र सिंह के जीवित रहते जब भी कांग्रेस की सरकार बनी, सीएम वे ही बने। कुल 6 बार सीएम रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हुए है और यदि कांग्रेस सरकार बनाती है तो सीएम कौन होगा, ये देखना रोचक होने वाला है। ऐसा नहीं है कि 6 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना वीरभद्र सिंह के लिए आसान रहा हो। अपने सियासी तिलिस्म के बूते कई बार वीरभद्र सिंह ने हारी हुई बाजी पलट दी और साबित किया क्यों उनका कोई सानी नहीं रहा। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव 1987 में होने थे लेकिन वीरभद्र सिंह ने समय से पहले वर्ष 1985 में ही चुनाव करवा दिए। 1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद पुरे देश में कांग्रेस के पक्ष में लहर थी जिसे वीरभद्र भाप गए थे और उनका ये निर्णय ठीक साबित हुआ। 1985 में वीरभद्र सिंह दूसरी बार सीएम बने। 1990 आते -आते प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर हावी थी और कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद बाबरी मस्जिद प्रकरण के बाद केंद्र सरकार ने हिमाचल सरकार को भी बर्खास्त कर दिया और 1993 में फिर चुनाव हुए। शांता सरकार से कर्मचारियों की नाराजगी के चलते कांग्रेस प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल ये था की मुख्यमंत्री कौन होगा। दरअसल पंडित सुखराम भी सीएम पद के प्रबल दावेदार थे लेकिन वीरभद्र सिंह की सियासी गणित पंडितजी पर भारी पड़ी और वीरभद्र तीसरी बार सीएम बने। तब कौल सिंह ठाकुर ने वीरभद्र सिंह का साथ दिया था और ये टीस आज भी पंडितजी के परिवार की जुबां से छलक ही जाती है। 1993 में पंडित सुखराम सीएम बनते -बनते रह गए थे और ताउम्र सीएम नहीं बन पाएं। इसके बाद 1998 का चुनाव आया। तब वीरभद्र सिंह रिपीट को लेकर आश्वस्त थे। तब तक पंडित सुखराम और कांग्रेस की राह अलग हो चुकी थी और पंडित जी हिमाचल विकास कांग्रेस बना चुके थे। उस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा में कांटे का मुकाबला हुआ लेकिन निर्दलीय जीते रमेश धवाला और पंडित सुखराम आखिरकार भाजपा के साथ गए और पांच साल भाजपा और हिमाचल विकास कांग्रेस की सरकार चली। दिलचस्प बात ये है कि वीरभद्र सिंह 1998 में सीएम पद की शपथ भी ले चुके थे लेकिन उन्हें सुखराम का साथ नहीं मिला और बहुमत न होने के चलते उन्हें कुछ ही दिनों में इस्तीफा देना पड़ा। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता वापसी हुई लेकिन सीएम वीरभद्र सिंह ही होंगे ये तय नहीं था। नतीजे आने के बाद विद्या स्टोक्स भी दावेदारी की तैयारी में थी। कहते है मैडम स्टोक्स अपना दावा ठोकने दिल्ली चली गई थी। पर पीछे से शिमला में वीरभद्र ने बाजी पलट दी और मीडिया के सामने विधायकों की परेड कराकर उनके दावे पर पूर्ण विराम लगा दिया। इस तरह मैडम स्टोक्स को मात देकर वीरभद्र सिंह पांचवी बार सीएम बने। 2007 में कांग्रेस फिर सत्ता से बाहर हुई और 2012 में पार्टी ने फिर वीरभद्र सिंह के चेहरे पर चुनाव लड़ा और वीरभद्र सिंह छठी बार सीएम बने। 2012 में अपने ही अंदाज में चेताया था आलकमान को 2007 में सत्ता से बाहर होने के बाद वीरभद्र सिंह ने 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ा और केंद्रीय मंत्री बन गए। पर 2011 में वे केंद्र से फिर प्रदेश की सियासत में लौट आएं। तब कांग्रेस कौल सिंह ठाकुर के नेतृत्व में आगे बढ़ती दिख रही थी और वीरभद्र सिंह को फेस घोषित करने से पार्टी बच रही थी। इसी दौरान चुनाव से चंद दिन पहले वीरभद्र सिंह ने शिमला में पत्रकार वार्ता कर कहा कि अगर सोनिया गाँधी चाहे तो वे फिर कांग्रेस को सत्ता में ला सकते है। तब वीरभद्र सिंह ने आलकमान को चेताते हुए कहा था 'मैं ढोलक बजाऊंगा और मेरी सेना नृत्य करेगी।' दबाव रंग लाया और आलाकमान ने वीरभद्र सिंह को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद वे ही सीएम बने।
कांग्रेस के कई बड़े नेता अपनी अपनी सम्बंधित सीटों पर कांटे के मुकाबले में फंसे दिख रहे है। इनमें से कई तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी है। नजदीकी मुकाबले में इन सीटों पर कुछ भी संभव है, ऐसे में जाहिर है आठ दिसम्बर को कई नेताओं के अरमानो पर पानी फिर सकता है। डलहौज़ी सीट पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आशा कुमारी और भाजपा के डीएस ठाकुर में कांटे का मुकाबला दिख रहा है। इस सीट पर सभी की निगाह टिकी है और यहाँ कुछ भी मुमकिन है। शायद ये ही कारण है कि चुनाव के दौरान आशा कुमारी ने अपनी सीट पर भी अधिकांश समय दिया। अन्य क्षेत्रों में आशा कुमारी प्रचार करती नहीं दिखी। इसी तरह सोलन सीट से कर्नल धनीराम शांडिल नजदीकी मुकाबले में फंसे दिख रहे है। उनका मुकाबला उनके दामाद और भाजपा प्रत्याशी डॉ राजेश कश्यप से है। दोनों के बीच 2017 में भी मुकाबला हुआ था, जिसे शांडिल ने महज 671 वोट के अंतर से जीता था। शिलाई में वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन चौहान और बलदेव तोमर में मुकाबला है। यहाँ हाटी फैक्टर के सहारे भाजपा जीत की उम्मीद में है और यदि हाटी फैक्टर चला है तो हर्षवर्धन की मुश्किल बढ़ सकती है। वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर ठियोग से चुनाव लड़ रहे है और बहुकोणीय मुकाबले में फंसे दिख रहे है। यहाँ निर्दलीय इंदु वर्मा, सीपीआईएम के राकेश सिंघा और भाजपा के अजय श्याम मैदान में है। इस सीट पर कुलदीप का असल इम्तिहान है। वहीं नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की सीट हरोली पर भी भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी है। यहाँ से प्रो रामकुमार मैदान में है और भाजपा नियोजित रणनीति के तहत यहाँ चुनाव लड़ती दिखी है। हालांकि मुकेश ने पुरे दमखम से चुनाव लड़ा है। इस सीट पर कितना अंतर रहता है इस पर निगाह जरूर टिकी है।
क्या हिमाचल प्रदेश में भाजपा संगठन में सर्जेरी की दरकार है, ये वो सवाल है जो या तो आठ दिसंबर के बाद तूल पकड़ेगा या गायब हो जायेगा। दरअसल, पिछले साल हुए मंडी संसदीय उपचुनाव और तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव में करारी शिकस्त के बाद भाजपा संगठन को लेकर कई सवाल उठे थे। तब कयास लग रहे थे कि पार्टी चेहरा बदल सकती है और संगठन में भी बदलाव संभव है। मंथन हुआ, चिंतन हुए लेकिन बदलाव नहीं हुआ। सरकार का फेस जयराम ही रहे और संगठन सुरेश कश्यप के हाथों में ही रहा। तब बदलाव न करने का निर्णय सही था या नहीं, ये भी आठ दिसम्बर को तय होगा। जाहिर है नतीजे प्रतिकूल रहे तो जवाब उन लोगों को देना होगा जिनके भरोसे पार्टी रिवाज बदलने का दावा करती रही है। पूर्व अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती की जगह भाजपा ने 2019 के अंत में डॉ राजीव बिंदल को प्रदेश संगठन की कमान सौंपी थी। बिंदल ने चार्ज लेते ही कई नियुक्तियां की और भाजपा संगठन में उनकी कार्यशैली की छाप स्पष्ट दिखने लगी। इसके बाद कोरोना काल में हुए स्वास्थ्य घोटाले में बिंदल का नाम उछला तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। दिलचस्प बात ये है की स्वास्थ्य महकमा सीएम के पास था और इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष ने दिया। हालांकि इसके बाद बिंदल को क्लीन चिट मिली। बिंदल के स्थान पर सुरेश कश्यप को नया अध्यक्ष बनाया गया। तब तक पार्टी की परफॉरमेंस अव्वल थी। 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप कर चुकी थी और दो उपचुनाव भी जीत चुकी थी। पर सुरेश कश्यप के आने के बाद पार्टी सिंबल पर हुए चार नगर निगम चुनाव में से पार्टी को दो में हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद एक लोकसभा उपचुनाव और तीन विधानसभा उपचुनाव भी पार्टी हार गई। जाहिर है ऐसे में सवाल उठना तो लाजमी है। अब विधानसभा चुनाव के नतीजे भी यदि प्रतिकूल रहते है तो बतौर अध्यक्ष सुरेश कश्यप की परफॉरमेंस पर बात तो होगी ही। पर यदि भाजपा हिमाचल प्रदेश में रिवाज बदलने में कामयाब रही तो प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप को भी इसका श्रेय मिलेगा। ऐसा हो पाया तो सुरेश कश्यप और जयराम ठाकुर मिलकर इतिहास रच देंगे। गजब का तालमेल, पक्ष में गया या नहीं ? डॉ राजीव बिंदल और सुरेश कश्यप दोनों का काम करने का तरीका अलग है। पर बिंदल ने अध्यक्ष रहते जो टीम नियुक्त की थी अमूमन उसी टीम के साथ कश्यप ने काम किया है। यानी अध्यक्ष तो बदला लेकिन भाजपा की टीम में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा आम तौर पर भाजपा में सरकार और संगठन दोनों अलग -अलग काम करते है, सामंजस्य होता है लेकिन दोनों स्वायत्त तरीके से काम करते है। पर सुरेश कश्यप के रहते सरकार और संगठन दोनों पर जयराम ठाकुर का ही पूर्ण प्रभाव दिखा। संगठन, सरकार की छाया बना दिखा। अब ये गजब का तालमेल भाजपा के पक्ष में गया या नहीं, ये नतीजे ही तय करेंगे। भीतरघात और बगावत ने बढ़ाई टेंशन ! भीतरघात की आशंका से झूझ रही भाजपा की चिंता कुछ वायरल ऑडियो भी बढ़ा रहे है। बीत दिनों एक पूर्व मंत्री का बताया जा रहा वायरल ऑडियो ये दर्शाने के लिए काफी है कि किस कदर पार्टी में अनुशासनहीनता है। हालांकि इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा करीब एक तिहाई सीटों पर बागियों का होना भी ये बताता है कि पार्टी में किस हद तक अंसतोष की स्थिति है।
हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो चूका है और प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। किसकी सरकार बनेगी और किसकी नहीं, इस सवाल के साथ-साथ एक और सवाल भी सियासी गलियारों में गूंज रहा है। ये सवाल है कि क्या इस बार सरकार बनाने में निर्दलीय अहम भूमिका निभाएंगे ? दरअसल, इस बार 412 प्रत्याशियों में से 99 प्रत्याशी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इन 99 निर्दलीयों में से मुख्य तौर पर करीब एक दर्जन चेहरों पर फिलवक्त दोनों मुख्य राजनैतिक दलों की निगाह टिकी है। निर्दलीयों की लम्बी फेहरिस्त में कम से कम एक दर्जन नाम ऐसे है जो अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव जीतने की स्थिति में दिखाई दे रहे है। इनमें से कितने जीतते है, ये तो आठ दिसम्बर को पता चलेगा, लेकिन इनमें से किसी को कम नहीं आँका जा सकता। दोनों पार्टियां यदि स्पष्ट बहुमत नहीं ले पातीं तो निर्दलीय चुनाव जीते नेता निश्चित तौर पर निर्णायक भूमिका में आ जाएंगे। बता दें की इस बार निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले बागियों में दो सीटिंग विधायक और 6 पूर्व विधायक शामिल है। पिछले चुनाव बतौर निर्दलीय जीत कर इस चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए बने देहरा विधायक होशियार सिंह और भाजपा की ज्यादा नहीं बनी और उन्हें फिर निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा। जबकि आनी से मौजूदा विधायक किशोरी लाल का टिकट भाजपा ने काटा तो वे भी निर्दलीय मैदान में उतर गए। इनके अलावा 6 पूर्व विधायकों ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा है। इनमें कांग्रेस से गंगूराम मुसाफिर, सुभाष मंगलेट, जगजीवन पाल का नाम शामिल है, तो भाजपा से तेजवंत नेगी, केएल ठाकुर और मनोहर धीमान बागी होकर चुनाव लड़ रहे है। जाहिर है निर्दलीय मैदान में उतरे इन आठ विधायकों और पूर्व विधायकों को कम नहीं आँका जा सकता। ये सभी वो चेहरे है जो फिर विधानसभा पहुंचने का दमखम रखते है। वहीं यदि कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला होता है तो इनमें से जीतने वालों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। इन आठ के अलावा कई निर्दलीय उम्मीदवार ऐसे है जो इस चुनाव में उलटफेर करने का दमखम रखते है। इनमें प्रमुख नाम है अर्की से राजेंद्र ठाकुर, हमीरपुर से आशीष शर्मा और ठियोग से इंदु वर्मा। राजेंद्र ठाकुर पूर्व कांग्रेसी है और अर्की उपचुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी। अब राजेंद्र ठाकुर खुलकर कह रहे है कि अगर वे विधायक बने तो वे उसके साथ जायेंगे जिसकी सरकार बनेगी। वहीं आशीष शर्मा ने चुनाव के दौरान कांग्रेस ज्वाइन की और दो दिन में छोड़ भी दी। आशीष ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और हमीरपुर में उनका दावा मजबूत है। वहीँ ठियोग से इंदु वर्मा पुरे दमखम से चुनाव लड़ी है। बड़सर से भाजपा के बागी संजीव शर्मा और जसवां परागपुर से निर्दलीय कैप्टन संजय पराशर को भी कम नहीं आँका जा सकता। अभी से जुटे दोनों राजनैतिक दल आठ दिसम्बर को नतीजे आएंगे और उससे पहले दोनों मुख्य राजनैतिक दल निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले नेताओं से संपर्क में है ताकि जरुरत पड़ने पर उनको साथ लिया जा सके। हिमाचल प्रदेश की सियासी अतीत पर निगाह डाले तो 1998 में एक निर्दलीय विधायक के हाथ में सत्ता की चाबी थी। जाहिर है कि ऐसे में दोनों प्रमुख राजनैतिक दल अभी से उन संभावित निर्दलीय उम्मीदवारों को साधने में जुट गए है जो विधानसभा की दहलीज लांघ सकते है। तब ध्वाला बने थे भाजपा के लिए हीरो साल 1998 के चुनाव में भी एक निर्दलीय ने प्रदेश की सियासत की स्थिति बेहद दिलचस्प बना दी थी। तब भाजपा के लिए निर्दलीय उम्मीदवार रमेश ध्वाला हीरो बनकर उभरे थे। रमेश ध्वाला को भाजपा ने टिकट नहीं दिया था, वह बागी बनकर बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते थे। इस चुनाव में न तो भाजपा को बहुमत मिला और न ही कांग्रेस को। सरकार बनाने की जोर आजमाइश जारी थी। ध्वाला ने बीजेपी को समर्थन देने के लिए शर्त रख दी कि प्रेम कुमार धूमल के बदले शांता कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए। पंडित सुखराम की हिमाचल विकास कांग्रेस ने बीजेपी को समर्थन दे दिया था। इस तरह बीजेपी के साथ भी विधायकों की संख्या 32 हो गई। हालांकि वो अब भी बहुमत के आंकड़े से पीछे थी। अब ध्वाला बतौर निर्दलीय उम्मीदवार अपना समर्थन देने के लिए शिमला की ओर चल पड़े। कहते है की ध्वाला जैसे ही शिमला पहुंचे, उन्हें कांग्रेस नेताओं ने अपने कब्जे में ले लिया और उन्हें सीधे होली लॉज ले गए। वीरभद्र सिंह समेत तमाम नेताओं ने उन्हें कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का आग्रह किया। तमाम तरह के प्रलोभन भी दिए गए। कहा जाता है की धवला को डराया धमकाया भी गया था। ध्वाला ये सब खुद स्वीकार कर चुके हैं। फिर अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ध्वाला ने बताया कि वे वीरभद्र सिंह को अपना समर्थन देते हैं। उन्होंने एक और विधायक के समर्थन का दावा किया था। वीरभद्र सिंह ने तत्कालीन राज्यपाल रमा देवी के पास जाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। रात के 2 बजे विधायकों की परेड हुई और वीरभद्र सिंह की सरकार बन गई। रमेश ध्वाला को सरकार में मंत्री पद भी दिया गया। हालाँकि ये कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, ध्वाला भाजपा के बागी थे और कांग्रेस को डर था की वे समर्थन वापस ले सकते है, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री आवास में रखा गया था। कुछ दिनों बाद नरेंद्र मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि रमेश ध्वाला को हम वापस लाएंगे और कांग्रेस की सरकार गिरेगी। कहा जाता है कि सीएम आवास में काम करने वाले एक कर्मचारी के ज़रिये नैपकिन पर रमेश धवाला के लिए एक संदेश लिखकर भेजा गया। फिर उसी कर्मचारी के जरिये ध्वाला ने भी मैसेज भेजा कि उन्हें सीएम आवास से निकाला जाए, तो वे बीजेपी के साथ आ जाएंगे। ध्वाला वहां से निकले और सीधे नरेंद्र मोदी के पास पहुंचे। फिर नरेंद्र मोदी ने राज्यपाल को फोन कर बताया कि सरकार का एक विधायक उन्हें समर्थन दे रहा है, इसलिए बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए। कहा जाता है की उस वक्त राज्यपाल ने बीजेपी को मना कर दिया। परन्तु कुछ समय बाद जब दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी। तब राज्यपाल ने खुद प्रेम कुमार धूमल को फोन किया कि आइए और सरकार बनाने का दावा पेश कीजिए। 12 मार्च 1998 को विधानसभा का सत्र बुलाया गया। रमेश ध्वाला और हिमाचल विकास कांग्रेस के सभी विधायक भी आए। दूसरी ओर वीरभद्र सिंह दावा करते रहे कि उनके पास अब भी रमेश ध्वाला का समर्थन है। अंत में जब बहुमत साबित करने की बात आई तो उससे पहले ही वीरभद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया और उनकी सरकार गिर गई।
(IGNOU) में जनवरी सत्र 2023 के लिए पंजीकरण शुरू हो गया है। सोलन राजकीय महाविद्यालय के इग्नू केंद्र के समन्वयक डॉ राजेंद्र कश्यप ने बताया की (IGNOU) में जनवरी सत्र 2023 के लिए पुनः पंजीकरण शुरू कर दिया है। यह पंजीकरण ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। जो भी शिक्षार्थी जनवरी 2022 सत्र में दाखिला ले चुके है वह अपना पुनः पंजीकरण 31 दिसंबर से पहले करवाले। साथ ही समन्वयक डॉ राजेंद्र कश्यप ने बताया कि इग्नू की दिसंबर 2022 में होने वाली परीक्षा से संबंधित असाइनमेंट जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2022 है। जो भी छात्र इग्नू की दिसंबर 2022 की परीक्षा के लिए अपना परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाए है वह भी विलंब शुल्क Rs1100/- के साथ ऑनलाइन माध्यम से परीक्षा फॉर्म भर सकते है और अधिक जानकारी के लिए छात्र इग्नू केंद्र राजकीय महाविद्यालय से संपर्क कर सकते है।
राजधानी शिमला के ठियोग में प्रदेश स्तरीय रेटिड शतरंज प्रतियोगिता शुरू हो गई है। यह प्रतियोगिता प्रदेश शतरंज संघ द्वारा ठियोग में 18 से 20 नवंबर तक होगी। प्रतियोगिता का शुभारंभ ठियोग के एसडीएम सौरभ जस्सल ने किया। प्रदेश संघ के अध्यक्ष अरुण कंबोज ने जानकारी दी कि यह प्रतियोगिता ठियोग के शिमला हिल्स होटल में यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता में पुरुष, महिला, वरिष्ठ नागरिक, अंडर-19,अंडर-13 और जिला शिमला के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को नगद और ट्राफी देकर सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में सभी आयु वर्ग में अंतरराष्ट्रीय रेटिड अंक पाने के लिए खेली जाएगी और अंतरराष्ट्रीय रेटिड पाने के लिए जिला शिमला में पहली बार इस तरह का आयोजन किया जा रहा है।
आईजीएमसी शिमला द्वारा इंडियन एसोसिएशन ऑफ गैस्ट्रो इन्टेस्टाइनल एण्डो सर्जियन (आईएजीईएस) के संयुक्त तत्वावधान में सर्जरी के क्षेत्र में तीन दिवसीय फेलोशिप प्रोग्राम और सम्मेलन का आज से आरम्भ किया गया है। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भाग लिया। इस सम्मलेन में राज्यपाल ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन से स्वास्थ्य और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में किस प्रकार से नई टेक्नोलॉजी और ज्ञान का इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर विचार किया जाएगा और प्रशिक्षु डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने में लाभ होगा। उन्होंने बताया कि एलोपैथी और नई तकनीकों के साथ-साथ हमारी संस्कृति में पुराने समय से उपलब्ध चिकित्सीय ज्ञान को संजोने और बढ़ाने की जरूरत है। राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य चिकित्सा के तहत एलोपैथी,आयुर्वेद और होम्योपैथी के सिवा हमारे संस्कृति मे बहुत से ऐसे विधाएं है, जो स्थानीय स्तर पर है और उन्हें पहचानने व अपनाने की जरूरत है। राज्यपाल ने लाहौल स्पीति की प्राचीन पद्धति किमची और कांगड़ा की कान-गढ़ा चिकित्सा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल मे ऐसे बहुत ज्ञान और प्राचीन पद्धतिया है जो दर्शाती हैं कि चिकित्सा के क्षेत्र में कितना व्यापक ज्ञान प्राचीन समय से ही उपलब्ध है। गौरतलब है कि इस सम्मेलन में देश भर से लगभग 200 प्रतिष्ठित शल्य चिकित्सक हिस्सा लें रहे है। आईआईएमसी के शल्य चिकित्सा के विभागाध्यक्ष डॉ आर.एस. जोबटा ने बताया कि फेलोशिप कार्यक्रम में शल्य चिकित्सा की बारीकियों और नई तकनीकों के लिए चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया जाएगा और खास बात यह है कि हिमाचल के लगभग 90% सर्जन इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं जिससे हिमाचल में शल्य चिकित्सा के नई तकनीकों का इस्तेमाल बेहतर ढंग से किया जा सकेगा और प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में भी यह डॉक्टर लोगों को बेहतर सुविधाएं दे पाएंगे। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में प्रतिभागियों के लेप्रोस्कोपिक कौशल को निखारने तथा मिनिमल इनवेसिव सर्जरी की नई चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।
हिमाचल में कसौली के राजकीय स्वर्ण जयंती उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल चामियां के 4 छात्रों ने जिला स्तरीय लोक कला उत्सव में अपनी छाप छोड़ी है। स्कूल के रोहित ने लोक गीत गायन में प्रथम व लोक वाद्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया, साथ ही स्कूल की तमन्ना ने कबाड़ से जुगाड़ (पाइन आर्ट) में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया। स्कूल की जिया राणा ने क्सालिकल नृत्य में और हर्षिता ने द्विआयामी चित्रकला में दूसरा स्थान प्राप्त कर स्कूल का नाम ऊंचा किया। स्कूल के रोहित और तमन्ना अब राज्य स्तर पर लोक कला उत्सव में जिला सोलन का प्रतिनिधित्व करेंगे। पिछ्ले कल इन सभी बच्चों को उप शिक्षा निदेशक सोलन जगदीश नेगी ने सम्मानित किया।
हिमाचल प्रदेश में कल से मौसम का मिज़ाज बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 19 नवंबर यानि कल से ऊंचाई वाले क्षत्रों में भारी बारिश और बर्फ़बारी का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात होगा, जबकि निचले क्षेत्रों में हल्की बारिश होगी। इससे लोगों को सूखी ठंड से काफी राहत मिलेगी। वही शिमला, कुल्लू, मंडी, किन्नौर, लाहौल स्पीति और चंबा की ऊंची चोटियों पर ताजा हिमपात होने की संभावना भी जताई गई है, जबकि इन जिलों के निचले क्षेत्रों में बारिश होने का अंदेशा है वही कुछ जिले कोहरे की चपेट में रहेंगे जिसमे बिलासपुर ,मंडी , हमीरपुर शामिल है। अधिकांश क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम रहने वाला है। जिला लाहौल स्पीति का न्यूनतम तापमान और पर्यटक नगरी मनाली का तापमान भी जमाव बिंदु के पास पहुंच गया है। वही अन्य जिले का तापमान शिमला का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री, सुंदर नगर का 4, भुंतर का 3, कल्पा का एक, धर्मशाला का 8, ऊना का 6 और धर्मशाला का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। वही आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट दर्ज किए जाने की संभावना जताई गई है।
कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी के खुंडियां क्षेत्र में आर्जीमोन सीड मिले सरसों के तेल के सेवन से एक व्यक्ति की मृत्यु का मामला सामने आया है। जिसके बाद डीसी कांगड़ा डॉ. निपुण जिंदल ने लोगों से यह अपील की है कि पिछले दिनों जिस किसी ने भी खुले बाजार से सरसों खरीदी हो वे उसका या उससे निकलवाये तेल का उपयोग न करें। खुंडियां क्षेत्र के मामले में प्रभावित परिवार ने खुले बाजार से सरसों खरीदकर कोल्हू से उसका तेल निकलवाया था, जिसके सेवन से परिवार के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक तेल में आर्जीमोन सीड मिला होने के कारण व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ा और उसकी दुखद मृत्यु हो गई। उपायुक्त ने बताया कि यह खुली सरसों खुंडियां बाजार से खरीदी गई थी। पड़ताल के बाद पता चला है कि इस सरसों के बीज का विक्रेता परागपुर में है, जिसके कारण संभव है कि इस बीज का विक्रय अन्य क्षेत्रों में भी हुआ हो। ऐसे में पिछले दिनों जिस किसी ने भी खुले बाजार से सरसों खरीदी हो वे उसका या उससे निकलवाये तेल का इस्तेमाल न करें। डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि इस विषैले सरसों के बीज या उससे निकले तेल के सेवन से ड्रॉप्सी नामक बीमारी होती है शरीर में विशेषकर पैरों, एड़ियों और टांगों में सूजन आना इसके लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्रों में यदि किसी भी व्यक्ति ने खुली सरसों या उससे निकलवाये तेल का पिछले दिनों सेवन किया है और उनके शरीर में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं तो वह तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर अपना उपचार करवाएं। डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि स्वास्थ विभाग और पूरे जिले में स्वास्थ संस्थानों और अधिकारियों को इसके उपचार संबंधित निर्देश दे दिए गए हैं।
शिमला में करीब 1 माह तक अपने निजी आवास छराबडा में रहने के बाद प्रियंका गांधी वापिस दिल्ली लौट गई है। चुनावी थकान मिटाने के बाद सुबह सड़क मार्ग से प्रियंका गांधी शिमला से चंडीगढ़ की तरफ रवाना हो गई है। हिमाचल विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने अकेले ही चुनाव प्रचार की कमान संभाली और पांच रैलियां व रोड शो किए। इस बीच सोनिया गांधी भी शिमला आई लेकिन उन्होंने चुनावी प्रचार नही किया। हिमाचल में 12 नवंबर को 14 वीं विस के लिए मतदान हुआ जिसके नतीजे 8 दिसम्बर को आएंगे।
ज्वालामुखी पुलिस थाना के अंतर्गत एक मलकीती जमीन से 4 चन्दन के पेड़ काटने का मामला सामने आया है। पुलिस थाना ज्वालामुखी में शिकायतकर्ता के तौर पर वन विभाग में बतौर बीओ ज्वालामुखी राजेश कुमार ने पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने राकेश और त्रिपुरारी मिश्रा की मलकिती जमीन से 16 नवम्बर की रात को 4 चंदन के पेड़ काटे दिए हैं। पुलिस ने शिकायतकर्ता की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की पुष्टि डीएसपी ज्वालामुखी चन्द्रपाल ने की।
राजधानी शिमला में बंदरों ने उत्पात मचा रखा है। वीरवार को शिमला में माल रोड पर बीएसएनएल के कार्यालय में फोन का बिल जमा करवाने पहुंचे एक व्यक्ति के हाथों से नोटों से भरा बैग छीनकर एक उत्पाती बंदर भाग गया। देखते ही देखते बीएसएनएल कार्यालय के अंदर और बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। दुकानदारों और नगम निगम के कर्मचारियों ने भी बैग वापस लेने के बहुत प्रयास किए। बताया जा रहा है की बैग में 75 हजार रुपये थे। कुछ देर में बंदर के वहाँ से जाने के बाद बैग में 70 हज़ार रुपए मिल गए है। एक हजार रुपये के नोट बंदर ने फाड़ दिए और करीब 4 हजार रुपये गायब हैं। प्रत्यक्ष दर्शी ने बताया कि व्यक्ति बीएसएनएल काउंटर पर बिल जमा करवा रहा था और अचानक बंदर अंदर आया और झपटा मारकर पैसे का बैग छीन कर भाग गया।
देश में कोरोना संक्रमण फ़िलहाल थमा नहीं है। भारत में बीते 24 घंटे में कोरोना वायरस के 635 नए मामले दर्ज हुए है। इस दौरान 11 लोगों ने संक्रमण से अपनी जान गंवा दी। वहीं वर्तमान में कोरोना सक्रमण की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 46 लाख 67 हजार 311 हो गई है। इसी के साथ देश में कोरोना के एक्टिव केस संख्या 7 हजार 561 से घटकर 7 हजार 175 रह गए। देश में पिछले 24 घंटो में एक हज़ार से लोग ठीक भी हुए है। अभी तक कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 5 लाख 30 हजार 546 पहुंच गई है। नए आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना वायरस संक्रमण के एक्टिव मरीजों की संख्या घटकर 7 हजार 175 रह गई है, जो कुल मामलों का 0.02 फीसदी है। पिछले 24 घंटे में एक्टिव मरीजों की संख्या में 386 की कमी दर्ज की गई है। वहीं, मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.79 फीसदी है।
हिमाचल प्रदेश में आगामी पांच दिनों तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश में 22 नवंबर तक मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। इस दौरान लोगों को ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि 19 नवंबर को ऊपरी कुछ इलाकों में बारिश - बर्फ़बारी हो सकती है। वहीं बीते दिनों हुई बर्फ़बारी के बाद लाहौल-स्पीति में 90, कुल्लू में 6, कांगड़ा में 3 और चंबा में 2 सड़कें बंद हैं। कुल मिला कर पुरे प्रदेश भर में 102 सड़के पर आवाजाही ठप रही, जिससे लोगों को काफी दिक्तो का सामना करना पड़ा। अटल टनल में बर्फ़बारी के बाद भी लाहौल-कुल्लू के बीच बस से सफर जारी है। वहीं सोमवार को बर्फ़बारी और धुंध के कारण लाहौल,समेत अटल टर्नल रोहतांग सोमवार और मंगलवार दो तीन के लिए बंद रही।
देश के महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की पुण्यतिथि पर देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है। शिमला में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। स्कैंडल प्वाइंट पर स्थित लाला लाजपत राय की प्रतिमा पर उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी व नगर निगम आयुक्त सहित शहर की जनता ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। लाला लाजपत राय ने देश को आजाद करवाने के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। लाजपत राय ने अपनी पढ़ाई के दौरान लाहौर में भारत को पूर्ण राज्य दिलाने का फैसला कर लिया था और इस सोच के साथ उन्होंने 1928 में साइमन कमीशन के विरोध में प्रदर्शन किया। जिसमें वह अंग्रेजों द्वारा किए गए लाठीचार्ज में बुरी तरह से घायल हो गए थे।17 नवंबर1928 को इनकी मृत्यु हो गई थी। लाजपत राय ने उसी दौरान कह दिया था कि उनके सिर पर पड़ने वाली एक-एक लाठी अंग्रेजी हुकूमत को खत्म करने के लिए कील का काम करेगी।
हिमाचल प्रदेश के इन इलाकों में बीती रात महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 4.1 रही तीव्रता
हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बीती रात को भूकंप के झटके महसूस किए गए। बुधवार रात करीब 9:33 बजे मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला, बिलासपुर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिला मंडी के जोगिन्दरनगर में भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 मापी गए है। भूकंप का केंद्र जोगिन्दनगर में जमीन के भीतर पांच किलोमीटर की गहराए में था। वहीं इस दौरान कुछ लोग घरों से बाहर भी निकल गए। वहीं डीसी मंडी अरिंदर चौधरी ने जानकारी देते हुए कहा की भूकंप से कहीं भी नुकसान की सूचना नहीं है।
हिमाचल के मनाली, नारकंडा, शिकारी देवी व बिजली महादेव में बीते 24 घंटे के दौरान इस सीजन का पहला हिमपात हुआ है। वहीं मैदानी इलाकों में विंटर सीजन की पहली बारिश हुई। हिमाचल समेत उत्तराखंड और कश्मीर घाटी में ताजा बर्फबारी के बाद पूरे उत्तर भारत में ठंड बढ़ेगी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने हिमाचल प्रदेश में मंगलवार और बुधवार को मौसम साफ रहने की संभावना जताई है। 17 और 18 नवंबर को फिर बारिश और बर्फबारी होने का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि पहाड़ों पर ताजा हिमपात के बाद उत्तर भारत में धुंध छाने से विजिबिलिटी कम होगी। उन्होंने बताया कि उत्तर भारत के ज्यादातर शहरों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे आ जाएगा। इससे सुबह व शाम के वक्त ठंड से बचने के लिए लोगों को आग जलाने की नौबत आएगी। वहीं प्रदेश में येलो अलर्ट के बीच सोमवार को मनाली शहर, शिमला के नारकंडा, हाटू पीक, मंडी की शिकारी देवी, कमरूनाग और कुल्लू के बिजली महादेव में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। प्रदेश की चोटियां और कई रिहायशी इलाके बर्फ से लकदक हो गए हैं।
भारत में कोरोना संक्रमण का कहर अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। देश में पिछले 24 घंटे में कोविड के 547 नए मामले सामने आए और 1 संक्रमित ने अपनी जान गंवा दी। अब कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4 करोड़ 46 लाख 66 हजार 924 हो गई है। पिछले 24 घंटे में एक हजार से अधिक लोग ठीक भी हुए। इसी के साथ कोरोना एक्टिव मरीजों की संख्या घटकर 9 हजार 468 रह गई। देश में अब तक करीब 220 करोड़ कोरोना वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में 20 हजार 465 ने कोरोना से बचाव करने के लिए वैक्सीन ली। कोरोना से मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 5 लाख 30 हजार 532 पहुंच गया।
उत्तराखंड की बेटी ने एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। गोल्डन गर्ल के नाम से मशहूर चमोली गढ़वाल की धावक मानसी नेगी ने नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने ये मेडल 37वें जूनियर नेशनल गेम्स में 10 किलोमीटर वाक रेस में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुआ जीता है। जानकारी के अनुसार आसाम के गुवाहाटी में खेले जा रहे 37वें जूनियर नेशनल गेम्स के 10 हजार मीटर वॉक रेस में मानसी ने 47:30.94 मिनट का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। दूसरे स्थान पर हरियाणा की रचना और तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र की सेजल अनिल सिंह रही। मानसी नेगी की जीत पर जहां प्रदेश को उनपर गर्व है। वहीं सीएम धामी ने भी उन्हें नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम करते हुए स्वर्ण पदक जीतने पर हार्दिक बधाई दी है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को रविवार को गुजरात में उस वक्त विरोध का सामना करना पड़ा, जब वो एक रैली को संबोधित कर रहे थे। ओवैसी की पार्टी गुजरात में करीब तीन दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इस बीच सूरत में एक जनसभा के दौरान मुस्लिम युवकों ने ही ओवैसी को काले झंडे दिखाकर उनका विरोध किया और मोदी-मोदी के नारे लगाए। असदुद्दीन ओवैसी के विरोध का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि सांसद ओवेसी की इसपर अभी तक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ओवैसी सूरत पूर्वी सीट से अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए सभा करने पहुंचे थे। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक वारिस पठान भी उनके साथ मौजूद थे। ओवैसी ने मंच पर जैसे की अपना भाषण शुरू किया वहां मौजूद लोगों ने उनका नारे लगाकर विरोध कर दिया। युवकों ने मोदी-मोदी के नारे लगाकर उनको काले झंडे दिखाए।
केरल के कोट्टयम जिले में एक गैर सरकारी संगठन की ओर से चलाए जा रहे आश्रय गृह से नौ लड़कियां सोमवार सुबह लापता हो गई है। इस बात की जानकारी पुलिस ने दी। यह एनजीओ का नाम समाख्या है। इसके द्वारा संचालित आश्रय गृह को सामाजिक न्याय विभाग और बाल कल्याण समिति से मान्यता भी प्राप्त है। पुलिस ने बताया कि इस घटना के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है और पॉक्सो अधिनियम के तहत पीड़ित लड़कियों सहित लापता लड़कियों की तलाश की जा रही है। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमें सुबह शिकायत मिली कि लड़कियां आश्रय गृह से लापता हो गई हैं।’’ पुलिस ने कहा कि आश्रितों को सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर आश्रय गृह में रखा गया था।


















































