शिमला के ऐतिहासिक आइस स्केटिंग रिंक में स्केटिंग का रोमांच शुरू हो गया है। एक लंबे इंतजार के बाद बुधवार को पहले सीजन का स्केटिंग सेशन हुआ। सुबह साढ़े आठ से दस बजे तक स्केटर्स ने बर्फ पर फिसलने का रोमांच का लिया। पहले दिन 16 लोग स्केटिंग करने पहुंचे। स्केटिंग के पहले दिन बच्चों व बड़ों में काफी उत्साह देखने को मिला। आइस स्केटिंग करने आए बच्चों का कहना था कि वे पूरे साल इस समय का इंतजार करते हैं। सर्दी के इस मौसम में उन्हें स्केटिंग करने में बहुत आनंद आता है। वे जमकर इन पलों का लुत्फ उठाते हैं। उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से स्केटिंग करते आ रहे हैं। आइस स्केटिंग क्लब के सचिव पंकज प्रभाकर ने बताया की पिछले साल 16 दिसंबर से स्केटिंग शुरू हुई थी। इस बार दो दिन पहले स्केटिंग की शुरुआत हुई है। इस बार 70 से 80 सेशन होने की उम्मीद है। पहले दिन कम बच्चे ही पहुंचे हैं। एक दिन पहले 16 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों पर बड़ा हमला बोला है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार आते ही बदले की भावना से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों को पूर्व सरकार ने खोला था, उनको अगर वर्तमान सरकार ने बंद किया तो उसके लिए भाजपा सड़कों पर उतरेगी और जरूरत पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि पूर्व सरकार ने जनहित में निर्णय लिए हैं। कई संस्थान में पूरा प्रशासन बैठकर कार्य करने में भी जुट गया है, ऐसे में संस्थानों को बंद करना सही नहीं है। कांग्रेस पर कड़ा हमला बोलते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि जब वह सत्ता में थे तो कांग्रेस हेलीकॉप्टर का दुरुपयोग करने पर सवाल उठाती थी, लेकिन अब हिमाचल जैसे छोटे राज्य में मुख्यमंत्री के अलावा उपमख्यमंत्री बना दिया गया है, जिससे आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ेगा। अब परिस्थिति यह हो चुकी है कि उपमुख्यमंत्री को छोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर जाता है और उसके बाद दोबारा मुख्यमंत्री को लेने के लिए हेलीकॉप्टर वापस आ रहा है। अभी एक और उप मुख्यमंत्री की लडाई कांग्रेस में चल रही है। यदि ऐसा हुआ तो हेलिकॉप्टर तीन के लिए उड़ेगा। जिससे प्रदेश पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बड़े प्रशासनिक फेरबदल के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन इन सब पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि फिलहाल कोई भी प्रशासनिक फेरबदल नही होगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने कहा कि वे सता के लिए नही व्यवस्था परिवर्तन के लिए आए है। अभी डीसी एसपी के तबादलो पर कोई विचार नही है और सभी डीसी एसपी को काम करने को कहा है। विधानसभा सत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि 28, से 30 दिसम्बर के बीच सेशन कराने की बात चली है, यदि नहीं हो पाया तो 15 जनवरी के बाद यह सत्र करवाया जाएगा। बता दें कि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू शिमला से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में पीएम से मिलने का टाइम मांगा गया है। उनसे शिष्टाचार भेंट करनी है। इसके अलावा कांग्रेस के नेताओ से मिलना है और मंत्रिमंडल विस्तार पर भी चर्चा होनी है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे 16 दिसम्बर को कांग्रेस के 40 विधायकों व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष समेत भारत जोड़ों यात्रा में शमिल होंगे।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 10वीं व 12वीं टर्म-1 परीक्षा में नकल करने का दोषी पाए जाने पर 12 परीक्षार्थियों को एक साल तक परीक्षा देने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। वहीं कुछ परीक्षार्थियों का संबंधित पेपर रद्द भी कर दिया है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित की गई 10वीं व 12वीं टर्म-1 परीक्षा में 114 नकल के मामले पकड़े गए हैं। 8वीं का एक, 10वीं के 41 व 12वीं के 72 मामले हैं। नकल करते पकड़े गए इन परीक्षार्थियों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने अपना पक्ष रखने का मौका भी प्रदान किया। नकल के मामलों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी के समक्ष इन परीक्षार्थियों ने अपना पक्ष रखा। कुछ मामले दोषमुक्त हुए हैं जबकि कुछ मामलों में परीक्षार्थियों को सजा प्रदान की गई है। सत्र नवम्बर 2022 में 8वीं के नकल के एक मामले में परीक्षार्थी का संबंधित पेपर रद्द कर दिया गया है। 10वीं के 7 मामलों में परीक्षार्थी एक साल तक परीक्षा देने के लिए अयोग्य घोषित हो गए है। वहीं 32 मामलों में परीक्षार्थी का संबंधित पेपर रद्द हुआ है तथा 2 मामले दोषमुक्त हुए हैं। इसके अलावा 12वीं में 5 मामलों में परीक्षार्थी पेपर देने के लिए एक साल तक अयोग्य घोषित हुए हैं। इसके अलावा 12वीं में ही 67 नकल के मामलों में बोर्ड ने संबंधित पेपर रद्द कर दिया है। वहीं सत्र जून-2022 (डीएलएड सीईटी) एंट्रैंस में एक मामले में परीक्षार्थी का पेपर रद्द कर दिया गया है। सत्र मार्च 2022 दूसरे टर्म में दसवीं के 15 तथा 12वीं के 81 नकल के मामले में बोर्ड ने परीक्षार्थी का संबंधित पेपर रद्द किया है। वहीं 10वीं के एक मामले में परीक्षार्थी दोष मुक्त हुआ है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड सचिव डाॅ. मधु चौधरी ने कहा कि 10वीं व 12वीं टर्म-1 परीक्षा में नकल करते कई परीक्षार्थी पकड़े गए थे। दोष साबित होने पर कुछ परीक्षार्थियों को एक साल तक परीक्षा देने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। कुछ परीक्षार्थियों का संबंधित पेपर रद्द भी कर दिया गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक चंद्र कुमार को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। चंद्र कुमार नव निर्वाचित सदस्यों को धर्मशाला में शपथ दिलाएंगे। विधानसभा का शीतकालीन सत्र धर्मशाला के तपोवन में होगा। चंद्र कुमार कांगड़ा जिला के जवाली विधानसभा क्षेत्र से छठी बार जीत कर आए हैं। चंद्र कुमार सबसे पहले 1982 में विधायक बने थे, जब ठाकुर रामलाल हिमाचल के मुख्यमंत्री होते थे। उसके बाद वह 1985, 1993, 1998 और 2003 में भी जीत कर आए तथा इसके बाद लोकसभा चले गए थे। बता दें कि जब नई विधानसभा गठित होती है तो विधानसभा में सबसे अधिक समय गुजारने वाले सदस्य या निर्वाचित सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है। सत्तारूढ़ दल प्रोटेम स्पीकर का नाम राज्यपाल के पास भेजता है। इसके बाद प्रोटेम स्पीकर को नियुक्त किया हैं, जो नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाता है।
हिमाचल की पूर्व जयराम सरकार में रहे उद्योग एवम परिवहन मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में जो प्रदेश की जनता ने जनमत दिया है, भाजपा उसे सम्मानपूर्वक स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने जो भाजपा को विपक्ष की भूमिका सौंपी है, भाजपा उसे बखूबी निभाएगी और जनहित के मुद्दों को सरकार के समक्ष उठाएगी। भाजपा नेता ने कहा कि हिमाचल की सता अब कांग्रेस पार्टी के पास है और भाजपा कांग्रेस पार्टी के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को बधाई और शुभकामनाएं देती है और आशवस्त करती है कि भारतीय जनता पार्टी एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार यदि हिमाचल और हिमाचल की जनता के विरुद्ध काम करेगी तो भाजपा उतनी ही मजबूती के साथ जनहित में विरोध भी करेगी। वहीं पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले ही दिन लिए गए निर्णय जनविरोधी है, जनता के हितों पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2022 के बाद पिछली सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों की समीक्षा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार लगातार काम करती है, परन्तु इस तरह बदले की भावना से काम करना यह किसी भी सरकार को शोभा नहीं देता और उसमें भी आगे बढ़कर यह बात कहना कि इस दौरान जो नए संस्थान बने या जो संस्थान स्तरोन्नत हुए उन्हें रद्द करने के तुगलकी फरमान की भारतीय जनता पार्टी कड़ी निंदा करती है। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि 5 वर्ष पूर्व भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रदेश में बनी थी और पहली ही कैबिनेट में जनहित के निर्णय लिए गए थे। 70 वर्ष से उपर के बुजुगों को आय सीमा को हटाकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन लगाई गई। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने इस निर्णय पर विचार करे क्योंकि यह निर्णय प्रदेश की जनता के हित में नहीं है। उन्हें मौका मिला है प्रदेश की जनता की सेवा करने का इसलिए उन्हें प्रदेश जनहित में निर्णय लेने चाहिए ।
हिमाचल प्रदेश में अभी मंत्री मंडल का विस्तार नहीं किया गया है। मंत्रिमंडल का गठन न होने तक मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने सभी विभाग आपस में बांट लिए हैं। हिमाचल सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में मंगलवार देर रात को अधिसूचना जारी कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने पास वित्त, सामान्य प्रशासन, गृह, योजना और कार्मिक विभाग रखे हैं। जबकि उप मुख्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री को जलशक्ति विभाग, परिवहन और भाषा कला एवं संस्कृति विभाग दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने पास पांच विभाग रखे हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री को तीन विभाग दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को मंत्रियों से पहले पोर्टफोलियो दे दिए गए हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री की नियुक्ति के साथ ही मंत्रियों की नियुक्तियां हो जाती थी, उसके बाद ही विभाग बांटे जाते थे। गौतलब है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के तीसरे दिन भी मंत्रियों पर फैसला नहीं हो पाया है। ऐसे में सरकारी कामकाज को चलाने के लिए दोनों को पोर्टफोलियो का आवंटन हो गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पदभार संभालने के बाद बीजेपी सरकार के फैंसलो को रिव्यु करने फैसला लिया हैं। जिसके बाद अब पक्ष व विपक्ष में ज़ुबानी जंग तेज़ हो गई हैं। बीजेपी ने सरकार पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया, जिसके बाद अब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पर पलटवार किया है और कहा है कि चुनावों में फ़ायदा लेने के मकसद से बिना बजट के घोषणाएं की गई थी, जिन्हें रिव्यू करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि चुनाव के समय मुख्यमंत्री ने बिना बजट के घोषणाएं की है। उन्होंने इन सभी कार्यों पर चर्चा की और पाया कि यह सभी संस्थान बिना बजट के खोले है। सीएम ने कहा कि हिमाचल में कैबिनेट गठन के बाद ओपीएस बहाल कर दी जाएगी। अटल टनल रोहतांग पट्टीका को रिस्टोर करने को लेकर सुक्खू ने कहा शिलान्यास पट्टीका लगाने के आदेश दिए गए है। वहीं उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की 100 दिन पूरे होने जा रहे हैं। अब 16 दिसम्बर को सीएम सुक्खू, उनके 40 विधायक और प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने जा रहे हैं।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संयुक्त सचिव गोकुल बुटेल को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का प्रधान सलाहकार आईटी नियुक्ति किया गया है। इस संबंध में मुख्य सचिव आरडी धीमान की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। वीरभद्र सिंह की सरकार में भी गोकुल बुटेल को सलाहकार(आईटी) नियुक्त किया गया था। पालमपुर से सम्बन्ध रखने वाले गोकुल बुटेल कांग्रेस के निष्ठावान बुटेल परिवार से आते है। गोकुल गाँधी परिवार के भी करीबी माने जाते है। चुनाव के दौरान कांग्रेस के वॉर रूम की ज़िम्मेदारी भी गोकुल बुटेल के ही पास थी।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से कुर्सी संभालते ही कई बड़े नितनय लिए है। वहीं इस पर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। सीएम जयराम ठाकुर ने मंगलवार को ट्वीट के माधयम से इन फैसलों पर विरोध जताया है । पूर्व जयराम ने ट्ववीट कर लिखा-स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, पुलिस स्टेशन, पुल, सड़क, पेयजल योजना इन सब कामों को लटकाने, अटकाने और भटकाने का काम शुरू हो गया है, जिसके लिए जनता इन्हें कभी माफ नहीं करेगी। गौरतलब है कि सीएम सुक्खू ने पूर्व जयराम सरकार के 1 अप्रैल 2022 के बाद कैबिनेट में लिए गए सभी फैसलों की समीक्षा करने का फैसला लिया है। साथ ही नए संस्थान खोलने और अपग्रेड करने के फैसले रिव्यू करने और डिनोटिफाई करने का भी फैसला लिया है। इसके अलावा भी कई अन्य निर्णय लिए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा बीते छह महीने के फैसले रिव्यू करने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसे जन भावनाओं के खिलाफ बताया है। इस पर किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हार के सदमे में हैं और इसलिए इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने जन भावनाओं के खिलाफ कोई फैसला नहीं लिया है। यह आम प्रक्रिया है। जब भी कोई सरकार आती है, तो चुनावी साल में लिए गए फैसले को रिव्यू किया जाता है। पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर के बयान पर भी जगत सिंह नेगी ने कहा कि जरूरत पड़ेगी, तो सरकार 6 महीने की नहीं पूरे 5 साल के फैसले रिव्यू करेगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर पूरे 5 साल का पोस्टमार्टम भी कर दिया जाएगा। वहीं हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल स्पीति में बनी अटल टनल में शिलान्यास पट्टिका को दोबारा लगाए जाने के मामले पर विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि बीजेपी अटल टनल को लेकर राजनीति करती है। अटल टनल के लिए पैसा तत्कालीन कांग्रेस सरकार में ही सैंक्शन किया गया था। बीजेपी सिर्फ और सिर्फ अटल टनल का श्रेय लेने का काम करती है। उन्होंने कहा कि पट्टिका सरकार ने नई पट्टिका लगाने का फैसला नहीं, बल्कि पुरानी पट्टिका को स्टोर रूम से बाहर निकाल कर दोबारा पुरानी जगह पर लगाने के लिए कहा है।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही बीजेपी सरकार के पिछले 8 महीनों के फैसलों को रिव्यु करने का निर्णय लिया हैं। वहीं इस पर बीजेपी ने कांग्रेस पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया हैं। बीजेपी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार जनता विरोधी निर्णय लेती है, तो उसे विपक्ष हरगिज बर्दाश्त नहीं करेगा। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सरकार को चेताया है कि यदि वह हिमाचल के हित में काम करेंगे तो सहयोग करेंगे, नही तो विपक्ष उनका विरोध करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार द्वारा पहले ही दिन लिए गए निर्णय जन विरोधी है। बीजेपी सरकार के 1 अप्रेल 2022 के बाद लिए निर्णयों को रिव्यु करना गलत है। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार ने पहले दिन से जनता के हित में काम किया है, ये तुगलकी फरमान है इसकी बीजेपी निंदा करती हैं। वंही रोहतांग टनल की शिलान्यास पट्टीका को पुनः स्थापित करने के फैसले पर रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार शिलान्यास पट्टिका को पुनः स्थापित करना चाहती है, यह उनका निर्णय है। लेकिन यह टनल पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी का सपना था। पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू दबाव में है। पहले मंत्रिमंडल का गठन करने के बजाए वह कुछ कर रहे है।
20 दिसंबर से कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर उत्तर रेलवे हॉलीडे स्पेशल ट्रेन का संचालन करेगा शुरू
20 दिसंबर से कालका-शिमला हेरिटेज रेलवे ट्रैक पर उत्तर रेलवे हॉलीडे स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरूकरेगा। क्रिसमस और न्यू ईयर से पहले शिमला आने वाले सैलानियों की सुविधा के लिए और भारी संख्या में यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए रेलवे प्रबंधन ने हॉलीडे स्पेशल गाड़ी चलाने का फैंसला लिया है। 20 दिसंबर से 31 दिसंबर तक इस अनारक्षित गाड़ी को चलाया जाएगा। रेल मोटरकार (72451), शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस (52451), हिमालयन क्वीन (52455), कालका शिमला एक्सप्रेस (52453), कालका शिमला एक्सप्रेस (52459), कालका शिमला एक्सप्रेस (52457) इन दिनों पैक चल रही हैं। अगले हफ्ते के लिए गाड़ियों में वेटिंग (इंतजार) 70 से अधिक पहुंच गई है। क्रिसमस और न्यू ईयर से 6 दिन पहले के लिए अधिकतर गाड़ियों में बुकिंग पूरी होने पर बंद कर दी गई है।
हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जयराम सरकार के दौरान लिए गए 1 अप्रैल 2022 के सभी फैसलों को रिव्यू करने के आदेश जारी किए हैं। इस पर हिमाचल प्रदेश के पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को केवल छह महीने ही नहीं बल्कि पूरे पांच साल के फैसले रिव्यू करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार ने कभी कोई गलत फैसला नहीं लिया। ऐसे में CM सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को सभी फैसले रिव्यू कर लेने चाहिए। हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जनता के बीच झूठ फैलाया है। जनता भी कांग्रेस पार्टी के झूठ में आ गई है। प्रदेश सरकार के वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है कि ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली की जा सके। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस के वादे पर विश्वास नहीं है। हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली नहीं की जा सकती।
हिमाचल प्रदेश में इस सर्दी में प्रदेश के कई भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया गया है। प्रदेश की राजधानी शिमला में भी अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शिमला के अनुसार प्रदेश के सभी भागों में पांच दिनों तक मौसम साफ रहने के आसार बताए है। प्रदेश में 13 से 17 दिसंबर तक मौसम शुष्क रहेगा। ऐसे में अधिकतम तापमान में और बढ़ाेतरी होने की संभावना है। वही विभाग के अनुसार मैदानी इलाकों में ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा के कुछ क्षेत्रों में 15 दिसंबर तक सुबह और शाम के समय धुंध छाए रहने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम साफ रहने से आज भी अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी के आसार है। सोमवार को ऊना में अधिकतम तापमान 28.6, सोलन में 26.0, बिलासपुर में 24.5, कांगड़ा में 24.3, नाहन में 24.2, हमीरपुर में 24.1, चंबा में 23.8, धर्मशाला में 23.7, मंडी में 23.1, भुंतर में 22.4, शिमला में 20.0, मनाली में 16.6, कल्पा में 14.6 और केलांग में 11.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में चक्रवाती तूफान 'मैंडूस' के कारण भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, दूसरी ओर उत्तर भारत और मध्य भारत में लगातार ठंड बढ़ रही है। सुबह और शाम के वक्त कोहरा रहने की वजह से तापमान में गिरावट दर्ज की गए है। कोहरे के कारण लोगों को यातायात में भी काफी परेशानी हो रही है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि यूपी-बिहार, झारखंड, दिल्ली, उत्तराखंड में आने वाले कुछ दिनों में और ज्यादा ठंड बढ़ सकती है। वहीं, आज तमिलनाडु, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और केरल में भारी बारिश होने की संभावना है । बिगड़ते मौसम को देख सभी मछुवारों को भी अलर्ट रहने और समुद्र की ओर न जाने की सलाह दी गई है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय बीटेक के पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर की नियमित और री अपीयर परीक्षाएं इसी माह करवा सकता है। परीक्षाओं के लिए 22 दिसंबर परीक्षा फार्म फीस के साथ जमा करवाने की अंतिम तिथि तय की गई है। इसके बाद जमा होने वाले परीक्षा फार्म पर लेट फीस देनी होगी। परीक्षा फार्म विवि के एग्जाम पोर्टल पर उपलब्ध करवाए गए है। वही ऑनलाइन परीक्षा फार्म भरे जाने के बाद विद्यार्थियों को फार्म की हार्ड कापी विवि में जमा करवानी होगी। एमएड की दूसरे सेमेस्टर की दिसंबर में होने वाली परीक्षा के लिए भी ऑनलाइन परीक्षा फार्म भरने को 22 दिसंबर अंतिम तिथि तय की गई है।
हिमाचल में सीमेंट के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। सीमेंट कंपनियों ने सभी तरह के सीमेंट के दाम बढ़ाकर महंगाई का झटका दिया है। सोमवार से सीमेंट कंपनियों ने दाम 5 से 10 रुपए प्रति बैग बढ़ा दिए हैं। सरिया के दाम भी पिछले तीन दिन में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए हैं। सीमेंट और सरिया के दामों में हुई बढ़ोतरी के चलते घर बनाने वाले लोगों को झटका लगा है। सोमवार को बढ़े पांच रुपये को मिलाकर पिछले एक माह में सीमेंट के दामों में 15 से 20 रुपये का इजाफा हुआ है। एसीसी सुरक्षा सीमेंट के बैग का दाम अब 445 रुपये प्रति बैग हो गया है। एसीसी गोल्ड नाम से बिकने वाली सीमेंट अब 485 रुपये प्रति बैग हो गया है।
सुकेश चंद्रशेखर से जुडे़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया मोड़ आया है। बॉलीवुड की दो एक्ट्रेसेस इस केस की वजह से आमने सामने खड़ी हो गई हैं। नोरा फतेही ने दिल्ली कोर्ट में जैकलीन फर्नांडिस और कई मीडिया कंपनियों के खिलाफ मानहानि केस किया है। नोरा फतेही का आरोप है कि महाठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनका नाम जबरन इस्तेमाल किया गया है। एक्ट्रेस का कहना है कि सुकेश से उनका कोई सीधा संपर्क नहीं था। वो सुकेश की पत्नी लीना मारिया पॉल के जरिए सुकेश को जानती थीं। नोरा ने सुकेश चंद्रशेखर से गिफ्ट्स लेने का खंडन किया है। नोरा का कहना है कि मीडिया ट्रायल की वजह से उनकी रेप्यूटेशन को ठेस पहुंची है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED के निशाने पर जैकलीन फर्नांडिस और नोरा फतेही दोनों हैं। इस केस की तहकीकात के लिए ED दोनों ही एक्ट्रेसेस से कई बार पूछताछ कर चुकी है। नोरा फतेही पर भी सुकेश चंद्रशेखर से महंगे तोहफे लेने का आरोप है। हाालांकि नोरा ने हर बार पूछताछ में इन आरोपों को गलत ही बताया है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आज गांधीनगर में गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पटेल का यह लगातार दूसरा कार्यकाल है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नए सचिवालय के पास हेलीपैड ग्राउंड में आयोजित एक समारोह में पटेल को राज्य के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलायी। सीएम के साथ ही 16 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली जिनमें से आठ कैबिनेट रैंक के हैं। इनमें 11 पूर्व मंत्री भी शामिल हैं।
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी सपाट स्तर पर बंद हुए। बीएसई का सेंसेक्स 0.08 प्रतिशत यानी 51.10 अंकों की गिरावट के साथ 62,130.57 पर बंद हुआ। दूसरी तरफ, एनएसई का निफ्टी 0.55 अंकों की बढ़त के साथ 18,497.15 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में शामिल कंपनियों में BPCL, दिवीज लैब, कोल इंडिया, यूपीएल और नेस्ले इंडिया बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, एशियन पेंट्स, इंफोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन और आयशर मोटर्स गिरावट के साथ बंद हुए।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभालने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह प्रदेश सचिवालय में सभी विधायकों के साथ बैठक की। जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि अब हिमाचल सदन और हिमाचल भवन में विधायकों को भी आम आदमी जितने पैसे चुकाने होंगे। इससे पहले विधायकों को आम आदमी के मुकाबले रियायती दरों पर कमरे उपलब्ध करवाये जाते थे। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस नीतिगत फैसले से अब विधायकों को भी आम आदमी जितने पैसे चुकाने होंगे। CM सुक्खू ने कहा कि जल्द ही हिमाचल प्रदेश सरकार अपने वादे के मुताबिक ओल्ड पेंशन स्कीम की बहाली को लेकर भी फैसला लेगी।
देश में ठंडक बढ़ चुकी है। कश्मीर और हिमाचल समेत ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बाद पारा शून्य से नीचे पहुंच गया है। इसके कारण मैदानी इलाकों में भी तापमान गिरा है। हालांकि दिल्ली में अभी कड़ाके की सर्दी का इंतजार है। वहीं, मुंबई में हल्की बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया है। बाकी मैदानी इलाकों की बात करें, तो राजस्थान के चुरू में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री तक पहुंच गया है। वहीं, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में भी पारा गिरा है। चक्रवात मैंडूस के बाद दक्षिण के राज्यों में भी मौसम बदला है। कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में कई जगह बारिश हो रही है।
हिमाचल कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और विधायक विक्रमादित्य सिंह ने सचिवालय में पहुंचकर सुखविंदर सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने पर उन्हें बधाई दी। इस दौरान प्रतिभा सिंह मुख्यमंत्री सुक्खू को फूलों का गुलदस्ता भेंट करने लगीं, तभी मुख्यमंत्री ने उनके सम्मान में कहा कि आप नहीं मैं आपको गुलदस्ता भेंट करूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं पार्टी का सदस्य हूं और आप मेरी अध्यक्षा हैं। मैं पहला मुख्यमंत्री होऊंगा, जो आपको रिपोर्ट करेगा। मुख्यमंत्री ने पार्टी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के सम्मान में उन्हें माता की चुनरी भी भेंट की। वहीं इस दौरान विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भी गुलदस्ता भेंट करके मुख्यमंत्री सुक्खू का स्वागत किया।
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने और चांदी में गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय वायदा बाजार और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही मार्केट में गिरावट दर्ज की जा रही है। आज मार्केट खुलने के साथ ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में गोल्ड में गिरावट दर्ज की थी। यह 54,109 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला था। इसके बाद सोने में उठापटक के बाद यह 11:45 पर 54,140 रुपये पर कारोबार कर रहा है। पिछले कारोबारी दिन की बात करें तो सोना 0.45 फीसदी की बढ़त के बाद यह 54,295 रुपये पर बंद हुआ था। चांदी की बाद करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में यह 67,490 रुपये प्रति किलो के प्राइस पर खुला था। इसके बाद यह आज सबसे ऊपर 67,950 रुपये पर पहुंच गया था। इसके बाद अब यह गिरकर 11:45 बजे तक 67,835 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। वहीं पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 1,069 रुपये की बढ़ोतरी के बाद यह 68,103 रुपये पर बंद हो गया है।
प्रदेश के पहले उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने राज्य सचिवालय में अपना पदभार संभाल लिया। अपना पद ग्रहण के बाद मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कैबिनेट की पहली बैठक में ओपीएस का वादा पूरा होगा। उन्होंने कहा कि जल्द अगर मंत्रिमंडल का गठन नहीं होता है तो केवल दो लोग भी कैबिनेट कर सकते हैं। उनकी सरकार चलेगी दौड़ेगी और परफॉर्म भी करेंगी कोई परिंदा इस पर चोंच नहीं मार सकता। उन्होंने कहा कि जो भी वादे किए गए हैं पूरे किए जाएंगे। प्रियंका और राजीव शुक्ला से मीटिंग हुई हैं। हर वादा पूरा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के शपथ लेने के बाद अब 10 मंत्रियों के नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कैबिनेट का गठन करते वक्त न सिर्फ पार्टी के सामने अलग -अलग गुटों में संतुलन स्थापित करने का दबाव होगा, बल्कि पार्टी को क्षेत्रीय और जातीय संतुलन भी साधने होंगे। जाहिर है ऐसे में बचे हुए 38 में से 10 नामों पर मुहर लगाना आसान नहीं होने वाला। दरअसल वैधानिक रूप से प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री ही बनाये जा सकते है और एक उपमुख्यमंत्री होने से अब अधिकतम 10 मंत्री और बनेंगे। कांग्रेस की 40 में से एक चौथाई सीटें जिला कांगड़ा से मिली है और जिला शिमला में कांग्रेस को आठ में से सात सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा ऊना, हमीरपुर और सोलन में पार्टी पांच में से चार -चार सीटें जीतने में कामयाब रही है। यानी इन पांच ज़िलों से कांग्रेस को 29 सीटें मिली है और जाहिर है इन जिलों से इसी अनुरूप दावेदारी भी है। हमीरपुर को जहाँ मुख्यमंत्री पद मिल चुका है, वहीं जिला ऊना को उपमुख्यमंत्री पद मिला है और शेष तीन विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे है, ऐसे में ये लगभग तय है कि ऊना से कोई और मंत्री नहीं बनेगा। वहीं जिला सोलन से कर्नल धनीराम शांडिल और राम कुमार चौधरी मंत्रिपद की दौड़ में है। यहाँ इनमें से किसी एक को मंत्री पद मिल सकता है। सात सीटें देने वाले जिला शिमला से विक्रमादित्य सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर, अनिरुद्ध सिंह और रोहित ठाकुर मंत्री पद के प्रबल दावेदार है। माना जा रहा है कि पार्टी तीन को मंत्री पद दे सकती है, जबकि एक नेता को विधानसभा अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर एडजस्ट किया जा सकता है। इनमें से विक्रमादित्य सिंह का मंत्री बनना लगभग तय है। जिला कांगड़ा की बात करें तो पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, चौधरी चंद्र कुमार और आशीष बुटेल का नाम मंत्रिपद की दौड़ में आगे है। किन्नौर से विधायक जगत सिंह नेगी का भी मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इसी तरह जिला सिरमौर से हर्षवर्धन चौहान का नाम भी तय है। जिला कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, मंडी से इकलौते विधायक चंद्रशेखर, जिला चम्बा से कुलदीप पठानिया और जिला बिलासपुर से राजेश धर्माणी मंत्री पद के दावेदार है लेकिन माना जा रहा है कि किसी एक को ही मंत्री पद मिलेगा। अन्य नेताओं को विधानसभा स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और सीपीएस के पदों पर एडजस्ट किया जा सकता है। ये भी गौर रहे कि धर्माणी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आते है, जहाँ से सीएम और डिप्टी सीएम दोनों है। राणा को मिलेगा अहम दायित्व जिला हमीरपुर से प्रदेश को मुख्यमंत्री पद मिला है लेकिन इसी जिला से राजेंद्र राणा और इंद्रदत्त लखनपाल भी मंत्री पद के दावेदार है। स्वाभाविक है कि जिला को कोई मंत्री पद मिलना मुश्किल है, लेकिन विशेषकर राजेंद्र राणा को कोई अहम दायित्व दिया जा सकता है। इंद्रदत्त लखनपाल भी तीसरी बार विधायक बने है और उन्हें भी पार्टी किसी अहम पद पर एडजस्ट कर सकती है।
शिमला स्थित सचिवालय में हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पदभार ग्रहण कर लिया है। सीएम के सचिवालय पहुंचने पर महिला पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा कि एक गरीब परिवार का व्यक्ति भी मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा, यह उन्होंने कभी सोचा नहीं था। उन्होंने मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाने के लिए प्रदेश की जनता का आभार जताया। सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी। इसके लिए जल्द ट्रांसपेरेंसी एक्ट लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों ने जिस उम्मीद से उन्हें मौका दिया, उनकी सेवा करने का उससे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। सीएम ने कहा कि पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों से सीख कर सरकार को आगे चलाएंगे।
गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अहमदाबाद में रोड शो किया। रोड शो के दौरान पीएम मोदी ने जनता का आभार जताया। वहीं गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा के भूपेंद्र पटेल आज दूसरी बार शपथ ग्रहण करेंगे। पीएम मोदी इस समारोह शिरकत करने के लिए अहमदाबाद पहुंचे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शपथग्रहण समारोह में शामिल होंगे। पार्टी नेता भूपेंद्र पटेल 20 अन्य कैबिनेट मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। गौरतलब है कि 1960 में राज्य की स्थापना के बाद से गुजरात में भाजपा की लगातार सातवीं विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी जीत है। गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने भी इतिहास रचा। उन्होंने घाटलोडिया निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 1,92,000 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की। 2017 के पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 99 सीटों पर जीत हासिल की थी, कांग्रेस 77 पर रह गई थी और एनसीपी, बीटीपी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने क्रमशः 1, 2 और 3 सीटें हासिल की थीं।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में न सिर्फ सत्ता परिवर्तन हुआ बल्कि हिमाचल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत भी हुई। इस चुनाव ने प्रदेश की सियासत की तस्वीर भी बदली और कई दिग्गजों को आईना भी दिखा दिया। हिमाचल प्रदेश में चार लोकसभा क्षेत्र है, और दिलचस्प बात ये है कि इन चार के चार लोकसभा क्षेत्रों के सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी पार्टी को लीड नहीं दिला पाए है। चारो सांसदों के क्षेत्रों में उनकी पार्टी पिछड़ी है। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनुराग ठाकुर, कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के सांसद किशन कपूर और शिमला संसदीय क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप अपने क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी को बढ़त नहीं दिला पाए और सांसद प्रतिभा सिंह के मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस पिछड़ गई। इस चुनाव में सांसदों की परफॉर्मेंस के बाद चुनाव में इनका प्रभाव विश्लेषण का विषय बन गया है। अनुराग के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को सिर्फ 5 सीटें हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र सांसद अनुराग ठाकुर का गढ़ है। अनुराग ठाकुर सिर्फ सांसद ही नहीं केंद्रीय मंत्री भी है। हिमाचल प्रदेश के साथ साथ अनुराग ठाकुर पूरे देश में खासा प्रभाव रखते है। चुनाव से पहले उनके समर्थक लगातार उन्हें बतौर मुख्यमंत्री चेहरा भी प्रोजेक्ट कर रहे थे। अनुराग की लोकप्रियता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। परन्तु इस सबके बावजूद भी अपनी लोकसभा क्षेत्र में अनुराग ठाकुर अपनी साख नहीं बचा पाए। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 17 में से 10 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस की जीत हुई है जबकि 5 पर भाजपा और 2 पर निर्दलीय जीत कर आए है। खुद हमीरपुर जिले की पांच सीटों में से भाजपा एक सीट भी नहीं जीत पाई। हमीरपुर जिले की, भोरंज, नादौन, सुजानपुर, और बड़सर में कांग्रेस तो हमीरपुर में निर्दलीय की जीत हुई है। सुजानपुर में तो अनुराग और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल अपने चुनाव की तरह डटे रहे, परन्तु फिर भी भाजपा प्रत्याशी कैप्टन रंजीत सिंह राणा को जीत नहीं दिलवा पाए। इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ऊना की पांच सीटों में से सिर्फ एक ऊना सदर सीट पर भाजपा को जीत मिली, जबकि हरोली, गगरेट, चिंतपूर्णी और कुटलैहड़ में कांग्रेस ने बाजी मारी है। कुटलैहड़ में कांग्रेस ने 32 सालों बाद वापसी की है। यहाँ कांग्रेस प्रत्याशी दविंदर सिंह भुट्टो ने मंत्री वीरेंद्र कंवर को पटकनी दी। हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली जसवां परागपुर, बिलासपुर, झंडूता, नैना देवी और ऊना सीट पर ही भाजपा जीत दर्ज कर पाई है। किशन कपूर के संसदीय क्षेत्र में भाजपा 13 से 5 पर गिरी कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से सांसद किशन कपूर के गढ़ में भी भाजपा की परफॉर्मन्स खराब रही है। यहाँ की 17 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 पर कांग्रेस तो पांच पर भाजपा की जीत हुई है। भाजपा सिर्फ नूरपुर, डलहौज़ी, सुलह, चुराह और कांगड़ा में अपनी साख बचाने में कामयाब हुई है। इसके अतिरिक्त इंदौरा, फतेहपुर, ज्वाली, ज्वालामुखी, नगरोटा बगवां, शाहपुर, धर्मशाला, पालमपुर, बैजनाथ, जयसिंहपुर, चम्बा और भटियात में भारतीय जनता पार्टी को हार का मुँह देखना पड़ा है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र में भाजपा के दो मंत्रियों को भी हार का मुँह देखना पड़ा है। फतेहपुर से पूर्व मंत्री राकेश पठानिया तो शाहपुर से मंत्री सरवीण चौधरी की हार हुई है। साल 2017 के चुनाव में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र की 13 सीटें भाजपा की झोली में गई थी जबकि चार पर कांग्रेस को जीत मिली थी परन्तु इस बार स्थिति पूरी तरह बदल गई। सुरेश कश्यप के संसदीय क्षेत्र में भाजपा सबसे कमजोर शिमला संसदीय क्षेत्र से सुरेश कश्यप सांसद है। सुरेश कश्यप सिर्फ सांसद ही नहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी है, मगर खुद प्रदेश अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र में भाजपा की दुर्गति सबसे अधिक हुई है। शिमला की 13 सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई तो भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिल पाई है जबकि एक निर्दलीय विधायक जीत कर विधानसभा पहुंचे है। प्रदेश के चारों संसदीय क्षेत्रों में से शिमला संसदीय क्षेत्र में पार्टी सबसे कमजोर रही। शिमला संसदीय क्षेत्र में जिला सोलन की पांच सीटें आती है और ये सभी पांच सीटें भाजपा हारी है। इनमें से कसौली और दून सीट पर 2017 में भाजपा जीती थी, लेकिन ये दो सीटें भी भाजपा हार गई। इनमें कसौली सीट से मंत्री राजीव सैजल को शिकस्त मिली है। वहीं सोलन सीट पर भाजपा लगातार तीसरी बार हारी है। अर्की और नालागढ़ में तो भाजपा तीसरे स्थान पर रही है। नालागढ़ में भाजपा के बागी केएल ठाकुर ने जीत दर्ज की है। इस तरह संसदीय क्षेत्र के तहत जिला सिरमौर की सभी पांच सीटें आती है। यहाँ भी भाजपा को सिर्फ दो सीटें मिली है, जबकि तीन पर कांग्रेस का कब्जा रहा। ये सुरेश कश्यप का गृह जिला है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नाहन, पच्छाद और पांवटा साहिब सीट जीती थी और कांग्रेस को शिलाई और रेणुका जी में विजय मिली थी। इस बार भाजपा पच्छाद और पांवटा साहिब सीट पर कब्जा रखने में तो कामयाब यही लेकिन नाहन सीट हार गई। नाहन से पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को शिकस्त मिली है। वहीं रेणुका जी और शिलाई सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहा। संसदीय क्षेत्र शिमला के तहत जिला शिमला की सात सीटें आती है। जिला की रामपुर के अतिरिक्त सभी सीटें शिमला संसदीय क्षेत्र में ही आती है। इनमें से 6 पर कांग्रेस को जीत मिली है और सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में गई है। वहीं 2017 की बात करें तो भाजपा शिमला शहरी, जुब्बल कोटखाई और चौपाल में जीती थी, पर इस बार सिर्फ चौपाल सीट ही भाजपा के खाते में आई। वहीं शिमला ग्रामीण. कसुम्पटी, और रोहड़ू सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा बरकरार रहा। ठियोग सीट सीपीआईएम के कब्जे में थी, जिस पर इस बार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर जीते है। शिमला संसदीय क्षेत्र से जयराम कैबिनेट में तीन मंत्री थे, सुरेश भारद्वाज, डॉ राजीव सैजल और सुखराम चौधरी। इनमें से सिर्फ सुखराम चौधरी को ही जीत मिली है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल भी नाहन से चुनाव हार गए। वहीं हाटी फैक्टर का लाभ भी भाजपा को ज्यादा मिलता नहीं दिखा। हाटी बाहुल शिलाई और रेणुका जी सीट पर कांग्रेस को ही जीत मिली। प्रतिभा सिंह के संसदीय क्षेत्र में भाजपा भारी हिमाचल के तीन संसदीय क्षेत्रों में भाजपा का कब्जा है और सिर्फ मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस की सांसद है और 2022 के विधानसभा चुनाव में मंडी ही एक मात्र ऐसा संसदीय क्षेत्र है जहाँ कांग्रेस पिछड़ी है। मंडी से सांसद प्रतिभा सिंह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष भी है मगर उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में ही कांग्रेस पिछड़ गई है। मंडी में भारतीय जनता पार्टी को 12 तो कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली है। इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत मंडी जिला की कुल 9 सीटें आती है और 9 की 9 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है। माना जा रहा है कि मंडी के लोगों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के चेहरे पर वोट डाले है। मंडी की जनता को उम्मीद थी कि अगर भाजपा की सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री एक बार फिर से मंडी जिला से ही होगा। मंडी जिला के लोगों ने मंडी में तो भाजपा को जीता दिया परन्तु यहाँ से बाहर भाजपा कुछ ख़ास परफॉर्म नहीं कर पाई। इसके अतिरिक्त बंजार, आनी और भरमौर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा को जीत और कांग्रेस को हार मिली है। कांग्रेस पार्टी मंडी संसदीय क्षेत्र की सिर्फ कुल्लू , मनाली, लाहौल स्पीति, रामपुर और किन्नौर में ही कांग्रेस को जीत मिली है। यहाँ ये भी ध्यान रखना होगा की प्रतिभा सिंह को मंडी संसदीय उपचुनाव के दौरान 9 विधानसभा क्षेत्रों से लीड मिली थी, जबकि इस बार सिर्फ पांच में ही कांग्रेस हावी रही। हालांकि 2017 के नतीजों से तुलना करें तो तब संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस को चार सीटें मिली थी, जो अब बढ़कर पांच हो गई है।
जिला किन्नौर में इस बार भी विधानसभा चुनाव में भरपूर रोमांच देखने को मिला। पहले दिन से ही कांग्रेस और भाजपा दोनों तरफ जमकर खींचतान दिखी। कांग्रेस में जहाँ सीटिंग विधायक और वरिष्ठ नेता जगत सिंह नेगी का टिकट अंतिम समय तक लटका रहा, तो भाजपा ने पूर्व विधायक तेजवंत नेगी का टिकट काटकर युवा सूरत नेगी को मैदान में उतारा। खफा होकर तेजवंत भी चुनावी समर में कूद गए और इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। नतीजन, भाजपा के बगावत का फायदा कांग्रेस प्रत्याशी जगत सिंह नेगी को मिला और जगत नेगी हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे। जगत सिंह नेगी को 20696 मत मिले और भाजपा प्रत्याशी सूरत नेगी को 13732 वोट प्राप्त हुए जबकि भाजपा के बागी तेजवंत नेगी ने 8574 मत लेकर भाजपा को डैमेज किया। किन्नौर के चुनावी इतिहास पर नज़र डाले तो अब तक सिर्फ ठाकुर सेन नेगी (तेते जी) ही जीत की हैट्रिक लगा सके है। ठाकुर सेन नेगी 1967 से 1982 तक लगातार चार चुनाव जीते। दिलचस्प बात ये है कि वे तीन बार निर्दलीय और एक बार लोकराज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। फिर वे भाजपा में शामिल हो गए और एक बार 1990 में भाजपा टिकट से भी जीतने में कामयाब हुए। ठाकुर सेन नेगी के अलावा जगत सिंह नेगी ही इकलौते ऐसे नेता है जो हैट्रिक लगाने में सफल हुए है।
केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को संसद में कहा कि अगले साल 15 अगस्त तक पूरे देश में 1000 खेलो इंडिया केंद्र खोले जाएंगे। अनुराग ठाकुर ने यह जानकारी संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में दी। उन्होंने लोकसभा में कहा, "देशभर में 15 अगस्त 2023 तक 1000 खेलो इंडिया केंद्र खोले जाएंगे। 1000 केंद्रों में से 733 केंद्रों को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है।" कोच की नियुक्ति के संबंध में खेल मंत्री ने घोषणा की इस साल 21 खेलों के लिए 398 कोच की नियुक्ति की गई है। अनुराग ठाकुर ने आगे कहा कि नेशनल स्पोर्ट्स कोड संशोधन के पॉजिटिव परिणाम मिल रहे हैं. इसकी वजह से खेल संघों में खिलाड़ियों और महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। हाल ही में हुए भारतीय टेबल टेनिस महासंघ के महासचिव पद पर अर्जुन अवॉर्डी कमलेश मेहता बने हैं। अगर दो वोट हैं, तो उसमें से एक महिला का है। इसके अलावा अगले साल यानी 2023 से खेल संघों के संबंध में शिकायत और सुझाव ऑनलाइन किए जाएंगे।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप के संसदीय क्षेत्र में भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। संसदीय क्षेत्र की 17 सीटों में से भाजपा को सिर्फ 3 पर जीत मिली। इन 17 में से 13 पर कांग्रेस को विजय मिली तो एक पर निर्दलीय को। प्रदेश के चारों संसदीय क्षेत्रों में से शिमला संसदीय क्षेत्र में पार्टी सबसे कमजोर रही। शिमला संसदीय क्षेत्र में जिला सोलन की पांच सीटें आती है और ये सभी पांच सीटें भाजपा हारी है। इनमें से कसौली और दून सीट पर 2017 में भाजपा जीती थी, लेकिन ये दो सीटें भी भाजपा हार गई। इनमें कसौली सीट से मंत्री राजीव सैजल को शिकस्त मिली है। वहीं सोलन सीट पर भाजपा लगातार तीसरी बार हारी है। अर्की और नालागढ़ में तो भाजपा तीसरे स्थान पर रही है। नालागढ़ में भाजपा के बागी केएल ठाकुर ने जीत दर्ज की है। इस तरह संसदीय क्षेत्र के तहत जिला सिरमौर की सभी पांच सीटें आती है। यहाँ भी भाजपा को सिर्फ दो सीटें मिली है, जबकि तीन पर कांग्रेस का कब्ज़ा रहा। ये सुरेश कश्यप का गृह जिला है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नाहन, पच्छाद और पावंटा साहिब सीट जीती थी और कांग्रेस को शिलाई और रेणुकाजी में विजय मिली थी। इस बार भाजपा पच्छाद और पावंटा साहिब सीट पर कब्ज़ा रखने में तो कामयाब यही लेकिन नाहन सीट हार गई। नाहन से पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को शिकस्त मिली है। वहीं रेणुकाजी और शिलाई सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा बरकरार रहा। संसदीय क्षेत्र शिमला के तहत जिला शिमला की सात सीटें आती है। जिला की रामपुर के अतिरिक्त सभी सीटें शिमला संसदीय क्षेत्र में ही आती है। इनमें से 6 पर कांग्रेस को जीत मिली है और सिर्फ एक सीट भाजपा के खाते में गई है। वहीं 2017 की बात करें तो भाजपा शिमला शहरी, जुब्बल कोटखाई और चौपाल में जीती थी, पर इस बार सिर्फ चौपाल सीट ही भाजपा के खाते में आई। वहीं शिमला ग्रामीण, कसुम्पटी, और रोहड़ू सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा बरकरार रहा। ठियोग सीट सीपीआईएम के कब्जे में थी, जिस पर इस बार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर जीते है। दो मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हारे शिमला संसदीय क्षेत्र से जयराम कैबिनेट में तीन मंत्री थे, सुरेश भारद्वाज, डॉ राजीव सैजल और सुखराम चौधरी। इनमें से सिर्फ सुखराम चौधरी को ही जीत मिली है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल भी नाहन से चुनाव हार गए। वहीं हाटी फैक्टर का लाभ भी भाजपा को ज्यादा मिलता नहीं दिखा। हाटी बाहुल शिलाई और रेणुका जी सीट पर कांग्रेस को ही जीत मिली। दो सीटों पर कांग्रेस की बगावत ने बचाया अगर पच्छाद और चौपाल सीट पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवार मैदान में नहीं होते तो इन दोनों सीटों पर भी भाजपा की जीत मुश्किल हो सकती थी। एक किस्म से कांग्रेस की बगावत भाजपा के लिए संजीवनी सिद्ध हुई। ये भी बता दें कि नालागढ़ में कांग्रेस के सीटिंग विधायक को पार्टी में लेकर चुनाव लड़वाने का फैसला भी पार्टी को उल्टा पड़ा है।
मौसम विभाग ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए बेंगलुरु में बारिश और बादल छाए रहने का अनुमान लगाया है। बेंगलुरु में चार दिन बारिश होने की संभावना है। वहीं, पहाड़ी राज्यों की बात की जाए तो यहां ठंड बढ़ गई है। बर्फबारी और हल्की बारिश के कारण तापमान में भारी गिरवाट देखी गई है. ऐसे में अब पूरे उत्तर भारत में ठंड बढ़ने लगी है। राजधानी दिल्ली में पहले से ज्यादा ठंड बढ़ी है। मौसम विभाग के अनुसार अगले सप्ताह से ठंड और बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, अभी भी ठंड उतनी नहीं है जितनी दिसंबर के महीने में आमतौर पर होती है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में अभी कड़कड़ाती ठंड के लिए 15 दिसंबर तक इंतजार करना पड़ेगा, जब दिल्ली का अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा।
विधानसभा चुनाव के नतीजे तस्दीक करते है कि जयराम सरकार को उनके मंत्रियों का प्रदर्शन ले बैठा। खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस बार सबसे बड़ी जीत दर्ज की और उनके गृह जिला मंडी में भी पार्टी का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। किन्तु जयराम ठाकुर के अलावा उनकी कैबिनेट में मंत्री रहे बिक्रम ठाकुर और सुखराम चौधरी ही चुनाव जीत पाए है। कुल नौ मंत्रियों की सीट पर भाजपा हारी है और आठ मंत्री चुनाव हारे है। चुनाव हारने वाले मंत्रियों में सुरेश भारद्वाज, डॉ रामलाल मारकंडा, वीरेंद्र कंवर, गोविंद सिंह ठाकुर, राकेश पठानिया, डॉ. राजीव सैजल, सरवीण चौधरी और राजेंद्र गर्ग शामिल हैं। इनके अलावा जयराम कैबिनेट में जल शक्ति मंत्री रहे महेंद्र सिंह ठाकुर की सीट से उनके पुत्र रजत ठाकुर भी चुनाव हार गए। जाहिर है अगर ये मंत्री भी सरकार के मुखिया जयराम ठाकुर जैसा प्रदर्शन कर पाते तो संभवतः हिमाचल प्रदेश में रिवाज बदल गया होता। गौरतलब है कि जयराम ठाकुर के अलावा मंत्रिमंडल में शामिल 11 चेहरों में से इस बार पार्टी ने 10 को फिर मैदान में उतारा था। पर इनमें से दो मंत्रियों की सीट पार्टी ने बदल दी थी। ये मंत्री थे सुरेश भारद्वाज और राकेश पठानिया। ये फैसला उल्टा पड़ा और ये दोनों ही बड़े अंतर से चुनाव हारे। इसके अलावा डॉ रामलाल मारकंडा, वीरेंद्र कंवर, गोविंद सिंह ठाकुर, डॉ. राजीव सैजल, सरवीण चौधरी और राजेंद्र गर्ग भी चुनाव हारे। सिर्फ बिक्रम ठाकुर और सुखराम चौधरी ही चुनाव जीते सके। वहीं मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर अपनी सीट धर्मपुर से अपने पुत्र रजत ठाकुर के लिए टिकट चाहते थे और पार्टी ने रजत को ही टिकट दिया। दिलचस्प बात ये है कि इस सीट पर महेंद्र सिंह लगातार सात चुनाव जीत चुके थे लेकिन उनके बेटे को टिकट देना पार्टी को उल्टा पड़ गया। क्या एंटी इंकम्बेंसी नहीं भांप पाई भाजपा ? मंत्रियों की हार के बाद भाजपा के टिकट आवंटन को लेकर भी सवाल उठ रहे है। अगर मंत्रियों की हार के अंतर पर निगाह डाले तो वीरेंद्र कँवर 7579 वोट, राजेंद्र गर्ग 5611 वोट, सुरेश भारद्वाज 8655 वोट, राकेश पठानिया 7354 वोट, डॉ राजीव सैजल 6768 और सरवीण चौधरी 12243 के बड़े अंतर से चुनाव हारे। ये अंतर इन मंत्रियों के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी को दर्शाता है। मंत्री गोविंद ठाकुर 2957 और डॉ रामलाल मारकंडा 1616 के अंतर से हारे। सवाल ये है कि क्या भाजपा इस एंटी इंकम्बेंसी को भांप नहीं पाई। भाजपा के गढ़ को किया 32 साल बाद ध्वस्त कुटलैहड़ ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जो पिछले 32 वर्षों से भाजपा का अभेद्य दुर्ग रहा है, लेकिन इस चुनाव में पहले दिन से ही यहाँ भाजपा को कांग्रेस से कड़ी चुनौती देखने को मिली। इस बार फिर इस सीट से भाजपा ने वीरेंद्र कंवर को प्रत्याशी बनाया था, जो लगातार 4 बार के विधायक थे और जयराम सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रहे। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने देवेंद्र कुमार भुट्टो को चुनावी रण में उतारा था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को देवेंद्र कुमार भुट्टो से चुनाव में करिश्मे की आस थी। कांग्रेस के प्रत्याशी ने प्रदेश के मुद्दों और स्थानीय समस्याओं को जमकर भुनाया। नतीजन कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र कुमार भुट्टो ने मंत्री वीरेंद्र कंवर को 7579 मतों के बड़े अंतर से हराया। देवेंद्र कुमार ने शुरू से ही बढ़त बना ली,जिसे भाजपा प्रत्याशी अंत तक तोड़ नही पाए। देवेंद्र कुमार को कुल 66808 मतों में से 36636 मत पड़े,जबकि वीरेंद्र कंवर को 29057 मत मिले। शिक्षा मंत्री के हैट्रिक लगाने का सपना टूटा जयराम कैबिनेट में शिक्षा मंत्री रहे गोविन्द सिंह ठाकुर के टिकट को लेकर किन्तु-परन्तु की स्थिति पहले दिन से ही देखने को नहीं मिली थी। क्या इस सीट पर गोविन्द सिंह ठाकुर बेहतर कर पाएंगे, ये सवाल खूब उठे। सवाल उठना लाजमी था, पिछले साल हुए मंडी संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में भी गोविंद ठाकुर यहाँ पार्टी की साख नहीं बचा पाए थे। उस उपचुनाव में मनाली से भाजपा प्रत्याशी को लीड नहीं मिल पाई थी। जाहिर है ऐसे में उठ रहे सवालों पर विराम लगाने के लिए गोविन्द सिंह ठाकुर को मनाली सीट पर जीत हासिल करने का दबाव था, लेकिन उनके हैट्रिक लगाने के इस स्वप्न को कांग्रेस के भुवनेश्वर गौड़ ने तोड़ दिया और मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर चुनाव हार गए। भुवनेश्वर गौड़ परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई मनाली सीट से जीतने वाले कांग्रेस के पहले विधायक बने हैं। सोलन में भाजपा शून्य, स्वास्थ्य मंत्री भी हारे सोलन के पांच सीटों में से सोलन सदर, अर्की, दून और कसौली सीट पर कांग्रेस का हाथ भारी पड़ा जबकि नालागढ़ सीट पर निर्दलीय ने चुनाव जीता है। कसौली सीट पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव सैजल को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। वे यहां से लगातार 3 विधानसभा चुनाव जीत चुके थे। इस बार वे सियासी चौका लगाने को लेकर आश्वस्त थे किन्तु उन्हें इस सीट से तीसरी बार में कांग्रेस के उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सैजल चुनाव को 6768 मतों से हराया। वन मंत्री नहीं कर पाए फ़तेहपुर को फ़तेह फतेहपुर विधानसभा सीट पर भाजपा को टिकट बदलना भारी पड़ गया और फतेहपुर की जनता ने भाजपा के कद्दावर मंत्री राकेश पठानिया चुनाव हार गए। राकेश पठानिया इससे पहले नूरपुर सीट से चुनाव लड़ते आये है और इस बार भाजपा ने उनका टिकट बदल कर उन्हें फतेहपुर भेजा था। चुनाव जीतने के लिए उन्होंने पूरी ताकत झोंकी लेकिन वे विफल हुए और कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया ने जीत अपने नाम कर ली। उपचुनाव के बाद कांग्रेस के प्राइम फेस बने रहे भवानी सिंह पठानिया यहां से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। कांग्रेस के भवानी सिंह को 32452 वोट मिले, जबकि भाजपा के राकेश पठानिया को 25884 वोट हासिल हुए। मंत्री सरवीण को नहीं मिला शाहपुर का साथ शाहपुर सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस सीट पर तीन दशक से भाजपा की सरवीण चौधरी का वर्चस्व रहा। भाजपा की सरवीण चौधरी 2007 से लगातार चुनाव जीतती आ रही हैं। किन्तु इस विधानसभा चुनाव में जयराम कैबिनेट में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय संभाल रही सरवीण चौधरी अपनी सीट नहीं बचा पाई। इस बार कांग्रेस के केवल सिंह पठानिया ने कमल खिलने नहीं दिया। केवल सिंह को जहां 35862 वोट मिले हैं, वहीं, भाजपा की सरवीण चौधरी को 23931 वोट ही हासिल हुए। कुसुम्पटी सीट पर हार गए भारद्वाज कसुम्पटी विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रहा है। यहां से कांग्रेस पिछले 15 साल से जीत दर्ज करती आ रही है। इस बार भी कांग्रेस ने सिटींग एमएलए अनिरुद्ध सिंह को चुनावी मैदान में उतारा था जबकि भाजपा ने मंत्री सुरेश भरद्वाज को शिमला शहरी से टिकट न देकर कुसुम्पटी भेजा था। भाजपा को उम्मीद थी कि टिकट के फेरबदल से कुसुम्पटी सीट भाजपा के झोली में आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बार भी बड़े मार्जन के साथ अनिरुद्ध सिंह ने यहां से जीत दर्ज की। 2017 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के अनिरुद्ध सिंह 9800 वोटों से जीते थे और इस बार उन्होंने 8431 वोटों से जीत हासिल की। घुमारवीं में मंत्री राजेंदर गर्ग चुनाव हारे जिला बिलासपुर की घुमारवीं विधानसभा सीट पर खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंदर गर्ग को कांग्रेस के राजेश धर्माणी ने हराया। गर्ग करीब साढ़े पांच हजार के अंतर से चुनाव हारे। गर्ग की टिकट को लेकर भी सवाल उठते रहे और माना जा रहा था कि एंटी इंकम्बेंसी भांपते हुए पार्टी किसी नए चेहरे को मैदान में उतारेगी, किन्तु ऐसा हुआ नहीं और पार्टी ने राजेंद्र गर्ग को ही टिकट दिया। लाहौल स्पीति से तकनीकी शिक्षा मंत्री भी हारे लाहौल स्पीति में तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ रामलाल ठाकुर भाजपा प्रत्याशी के तौर पर तीसरी दफा चुनावी मैदान में थे और जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहे थे। उनके हैट्रिक लगाने की उम्मीदों पर कांग्रेस प्रत्याशी रवि ठाकुर ने पानी फेर दिया और 1616 मतों से कांग्रेस उम्मीदवार रवि ठाकुर ने मंत्री को पराजित किया है। इस क्षेत्र में मंडी संसदीय उपचुनाव में भी भाजपा पिछड़ी थी।
बेशक जयराम ठाकुर रिवाज न बदल सके हो लेकिन मंडी तो जयराम ठाकुर की ही रही है। जिला मंडी की 9 सीटों पर भाजपा का कब्जा दिखाता है कि मंडी वालों ने जयराम ठाकुर के नाम पर वोट दिया है। सिर्फ धर्मपुर को छोड़कर हर सीट भाजपा की झोली में गई है। जो दम खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने जिला में दिखाया अगर ऐसा ही मंत्री भी कर पाते तो सम्भवतः रिवाज भी बदल जाता। बहरहाल जयराम ठाकुर ने साबित कर दिखाया कि मंडी उन्हीं की है। 2017 के विधानसभा चुनाव में जिला मंडी की 9 सीटें भाजपा की झोली में गई थी, जबकि एक सीट जोगिन्दरनगर पर निर्दलीय विधायक प्रकाश राणा जीते थे। राणा पांच साल भाजपा के एसोसिएट विधायक रहे और चुनाव से कुछ वक्त पहले भाजपा में आ गए। इस तरह सभी दस सीटें भाजपा की ही रही थी। वहीं इस बार भी भाजपा ने नौ सीटें जीतकर साबित कर दिया कि मंडी में पार्टी का वर्चस्व कायम है। 2017 के बाद से अगर जिला मंडी में भाजपा के प्रदर्शन पर निगाह डाले तो हर मौके पर पार्टी हावी रही है। पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव के बाद पार्टी ने मंडी नगर निगम चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की। इसके बाद पिछले वर्ष के अंत में हुए मंडी संसदीय उपचुनाव के नतीजे पर अगर निगाह डाले तो संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली जिला की नौ में से आठ सीटों पर भाजपा को लीड मिली थी। तब अन्य क्षेत्रों से मिली जीत ही प्रतिभा सिंह की जीत का कारण बनी। यानी 2017 से कांग्रेस लगातार जिला मंडी में हारती आ रही है। इस बार के चुनाव की अगर बात करें तो मंडी में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ठाकुर कौल सिंह ने खुद को एक किस्म से मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर चुनाव लड़ा। शायद वे मान कर चल रहे थे कि वे तो चुनाव जीत ही रहे है, उनके नाम पर बाकी सीटों पर भी कांग्रेस को फायदा होगा। पर नतीजों ने वहम तोड़ दिया है। खुद कौल सिंह चुनाव हार गए। उनकी पुत्री चंपा ठाकुर भी चुनाव हारी। कांग्रेस से हारने वाले बड़े नेताओं में जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी और पूर्व सीपीएस सोहन लाल भी शामिल है। मंडी में ओपीएस का मुद्दा भी हावी था, पर मंडी वालों में मतदान करते वक्त जयराम ठाकुर के चेहरे को सबसे ज्यादा तवज्जो दी। ये रहे परिणाम : सराज : रिकॉर्ड अंतर से जीते जयराम सराज में खुद सीटिंग सीएम जयराम ठाकुर मैदान में थे और उनकी जीत को लेकर किसी के मन में कोई संशय नहीं था। जयराम कितने अंतर से जीतेंगे, इसी पर सबकी निगाहें टिकी थी। जयराम ठाकुर ने रिकॉर्ड 38183 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। मंडी सदर : यहाँ पंडित सुखराम परिवार अपराजित मंडी सदर सीट पर पंडित सुखराम के परिवार का कब्जा बरकरार रहा। एक बार फिर इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी अनिल शर्मा ने जीत दर्ज की है। उनका मुकाबला ठाकुर कौल सिंह की बेटी चंपा ठाकुर से था लेकिन अनिल शर्मा दस हज़ार से भी ज्यादा मार्जन से जीते। इस सीट पर पंडित सुखराम का परिवार अपराजित है। सुंदरनगर : बगावत भी नहीं रोक पाई जम्वाल को इस सीट पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री राकेश जम्वाल ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की। भाजपा के बागी प्रत्याशी अभिषेक ठाकुर के मैदान में होने के बावजूद जम्वाल आठ हज़ार से ज्यादा अंतर से जीते। यहाँ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोहनलाल को हार का सामना करना पड़ा। द्रंग : मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, विधायक भी नहीं बन पाएं द्रंग से ठाकुर कौल सिंह की हार ने बता दिया कि जिला मंडी में कांग्रेस किस कदर कमजोर है। कौल सिंह वरिष्ठता और अनुभव का राग अलापते हुए सीएम पद पर दावेदारी जताते रह गए और जनता ने उन्हें लगातार दूसरी बार विधानसभा भी नहीं पहुंचने दिया। उन्हें भाजपा के पूर्ण चंद ठाकुर ने 618 वोट से पराजित किया। बल्ह : चौधरी की लगातार दूसरी हार बल्ह से पूर्व मंत्री और कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रकाश चौधरी लगातार दूसरी बार हारे। इस बार भी उन्हें भाजपा के इन्द्र सिंह ने हराया। चौधरी 1307 वोट से हार गए। जोगिन्दर नगर : फिर जीत गए राणा पिछली बार निर्दलीय चुनाव जीते प्रकाश राणा इस बार यहाँ से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़े और 4339 वोट से जीते। यहाँ माना जा रहा था कि ठाकुर गुलाब सिंह को टिकट न देने के चलते दिख रहे रोष का खमियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कांग्रेस ने यहाँ से सुरेंद्र पाल को टिकट दिया था। सरकाघाट : कमल खिलने से नहीं रोक पाएं पवन जानकार मान रहे थे कि इस बार सरकाघाट सीट पर कांग्रेस वापसी कर सकती है। पार्टी प्रत्याशी पवन कुमार ने दमखम से चुनाव भी लड़ा था लेकिन वे 1807 वोट से हार गए। यहाँ भाजपा ने नए चेहरे दिलीप ठाकुर को मैदान में उतारा था। करसोग : दस हजार से अधिक अंतर से जीते दीप राज इस सीट से भाजपा ने सीटिंग विधायक हीरालाल का टिकट काटकर दीप राज को मैदान में उतारा था। उधर, कांग्रेस ने दिग्गज नेता मनसा राम के पुत्र महेश राज पर दांव खेला। यहाँ दीप राज ने दस हज़ार से ज्यादा अंतर से शानदार जीत दर्ज की। नाचन : संसदीय उपचुनाव का नतीजा नहीं दोहरा पाई कांग्रेस मंडी संसदीय उपचुनाव में नाचन जिला मंडी का इकलौता ऐसा निर्वाचन क्षेत्र था जहाँ कांग्रेस को लीड मिली थी। बावजूद इसके भाजपा ने सीटिंग विधायक विनोद कुमार पर भरोसा जताया और वे भरोसे पर खरा भी उतरे। विनोद ने 8956 वोट से कांग्रेस के नरेश कुमार को हराया। धर्मपुर : सिर्फ यहाँ ही जीती कांग्रेस इस सीट पर 1990 से लगातार महेंद्र सिंह ही जीते, चाहे पार्टी कोई भी हो। यहाँ आखिरी बार 1993 में कांग्रेस जीती थी और तब महेंद्र सिंह ही पार्टी प्रत्याशी थे। इस बार यहाँ भाजपा ने महेंद्र सिंह की जगह उनके बेटे रजत ठाकुर को मैदान में उतारा ,लेकिन रजत कांग्रेस के चंद्रशेखर से 3026 वोट के अंतर से हार गए। बदलाव और बगावत के बावजूद जीती भाजपा भाजपा ने जिला मंडी में चार सीटिंग विधायकों को इस बार टिकट नहीं दिया। बदलाव के बावजूद तीन जीतने में कामयाब रहे। सिर्फ महेंद्र सिंह की सीट धर्मपुर में भाजपा हारी। वहीं मंडी सदर और सुंदरनगर सीट पर भाजपा बगावत के बावजूद जीत दर्ज करने में कामयाब रही।
हिमाचल प्रदेश में इस बार 19 नए चेहरे विधायक विधान सभा पहुंचे है। सबसे ज्यादा कांग्रेस से इस बार नए चेहरे विधान सभा पहुंचे हैं। वहीं भाजपा से 7 व एक निर्दलीय चेहरा विधान सभा पंहुचा है। कांग्रेस के नए विधायकों में चिंतपूर्णी से सुदर्शन सिंह बबलू, धर्मपुर से चंद्रशेखर, गगरेट से चैतन्य शर्मा, इंदौरा से मलेंद्र राजन, कसौली से विनोद सुल्तानपुरी, कुटलैहड़ से देवेंद्र कुमार भुट्टो, मनाली से भुवनेश्वर गौड़, नगरोटा बगवां से रघुवीर सिंह बाली, शाहपुर से केवल सिंह पठानिया, शिमला शहरी से हरीश जनारथा और ठियोग से कुलदीप सिंह राठौर शामिल हैं। इसके अलावा भाजपा के नए विधायकों में आनी से लोकेंद्र कुमार, भरमौर से डॉ.जनकराज, बिलासपुर सदर से त्रिलोक जम्वाल, डलहौजी से डीएस ठाकुर, करसोग से दीपराज, नूरपुर से रणवीर सिंह निक्का और सरकाघाट से दलीप ठाकुर शामिल हैं। हमीरपुर सदर से निर्दलीय जीत दर्ज करने वाले आशीष शर्मा भी नए विधायक हैं।
हिमाचल में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बहुमत प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कसरत शुरू हो गई है। विधायक दल का नेता चुनने के लिए कांग्रेस की आज दोपहर बाद कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में बैठक होगी जिसमे हिमाचल चुनाव प्रभारी राजीव शुक्ला व पर्यवेक्षक भूपेंद्र हुड्डा, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल शामिल होंगे। इसी के साथ कांग्रेस के जीते हुए कुछ विधायक होली लॉज प्रतिभा सिंह से मिलने पहुंच रहें है ठियोग से नवनिर्वाचित विधायक कुलदीप सिंह राठौर भी होलीलॉज पहुंचे। 3 बजे होनी वाली बैठक में केंद्रीय प्रयवेशक हुड्डा , छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश मामलों के प्रभारी राजीव शुक्ला भी पहुंच रहे है। बैठक में पार्टी के मापदंडों पर चर्चा होगी। बैठक में सभी विधायकों से चर्चा की जाएगी उसके बाद फिर आलाकमान के पास जो भी रिपोर्ट जाएगी उसी के आधार पर मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डाडा सीबा में चल रहे सात दिवसीय एनएसएस कैंप का आज समापन हो गया। इस समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ गणेश दत शर्मा ने कहां कि शिक्षा अनमोल है, शिक्षा के बिना विद्यार्थी का जीवन अधूरा है। विद्यार्थी के जीवन में शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है जिससे विद्यार्थी उन्नति की मंजिले तय कर सकता है। डॉक्टर गणेश दत्त शर्मा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि समारोह में बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर एनएसएस शिविर के प्रभारी अशवनी सपेहिया ने बताया कि शिविर में 55 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और इन 7 दिनों में राधा कृष्ण मंदिर मुख्य बाजार तालाब की सफाई, रास्तों की सफाई, सिविल हॉस्पिटल में स्वच्छता अभियान चलाया गया व स्कूल के कॉम्प्लेक्स को सुंदर बना कर पेश किया गया। इस अवसर पर स्कूल के एनएसएस प्रभारी अशवनी सपेहिया, पीओ सरोज कुमारी, एसएमसी प्रधान नीलम चौधरी, कमेटी सदस्य व स्कूल का स्टाफ कार्यक्रम में उपस्थित रहा।
पेंशनर्ज एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन जिला सोलन का जिला स्तरीय पेंशनर्ज दिवस समारोह 17 दिसम्बर को नालागढ़ में धूमधाम से मनाया जाएगा।जानकारी देते हुए संगठन के जिला प्रेस सचिव डीडी कश्यप ने बताया कि गत दिनों नालागढ़ में हुई नालागढ़ यूनिट की बैठक में संगठन जिला सोलन के अध्यक्ष एवं राज्य कार्यकारणी के मुख्य सलाहकार केडी शर्मा की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया कि इस बार जिला स्तरीय पेंशनर्ज दिवस समारोह नालागढ़ के गुरु रविदास गुरुद्वारा परिसर में मनाया जाएगा। इस समारोह को आकर्षक बनाने के लिए सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के सांस्कृतिक नाट्य दल को आमंत्रित किया जाएगा तथा अन्य कार्यक्रम भी इस समारोह में आयोजित किए जाएंगे।
फतेहपुर निर्वाचन अधिकारी (एसडीएम) विश्रुत भारती की अध्यक्षता में वज़ीर राम सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देहरी में मतगणना कार्य की अंतिम तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान सहायक निर्वाचन अधिकारी (तहसीलदार) हंस राज रावत, निर्वाचन कानूनगो राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी व कर्मी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि विधानसभा निर्वाचन-2022 के लिए 8 दिसम्बर को देहरी कॉलेज में सम्पन्न होने वाली मतगणना के लिए प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली है। उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र के लिए कुल बारह राउंड में मतगणना की प्रक्रिया पूरी होगी। 12 नवंबर को 112 मतदान केंद्रों पर सम्पन्न हुए मतदान में ईवीएम में दर्ज 62852 मतों की प्रत्येक राउंड की गणना के लिए 10 टेबल लगाए गए है। इसके अतिरिक्त डाक मत पत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती के लिए चार अलग टेबल लगाए गए है। विश्रुत भारती ने बताया कि ईवीएम के लिए स्थापित प्रत्येक टेबल पर एक-एक माईक्रो ऑब्जर्वर, मतगणना पर्यवेक्षक और मतगणना सहायक नियुक्त किये गए है। वहीं पोस्टल की गिनती के लिए स्थापित प्रत्येक टेबल में एक-एक माईक्रो ऑब्जर्वर और मतगणना पर्यवेक्षक तथा दो मतगणना सहायक तैनात रहेंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार का एक एजेंट भी प्रत्येक मतगणना टेबल पर मौजूद रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी के आधिकारिक काउंटिंग एजेंट तथा मतगणना कार्य के लिए नियुक्त किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जारी प्रदत पहचान पत्र के विना मतगणना केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। विश्रुत भारती ने बताया कि मतगणना केंद्र पर मोबाईल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने बताया कि प्रेस प्रतिनिधियों की सुविधा के लिए मतगणना केंद्र परिसर में मीडिया सेंटर की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त उनके बैठने एवम रुझानों बारे समय-समय पर जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए भी विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में तैनात डेढ़ हजार से अधिक डीपीई (डेमोस्ट्रेटर ऑफ फिजिकल एजूकेशन) को बड़ी राहत खबर दी है। अदालत ने उन्हें सभी सेवा लाभों के लिए प्रवक्ता की श्रेणी में गिने जाने के आदेश दिए है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने शिक्षा विभाग को आदेश दिए है कि दो माह के भीतर डीपीई को प्रवक्ता की श्रेणी में लाने के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाए जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि डीपीई वरीयता का लाभ पाने के हकदार भी होंगे।
राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर स्थित क्राइस्ट चर्च शिमला का माइल स्टोन माना जाता है। लेकिन करोना के कारण 2 साल से इसकी रोकन में कमी देखने को मिली है पर इस साल कोरोना के बाद 25 दिसंबर को खूब हलचल देखने को मिलेगी और कोरोना काल के बाद यहां पूरी परंपरा अनुसार आराधना होगी। इस चर्च में 150 साल पहले इंग्लैंड से लाई कॉल बेल का अपना महत्व है जिसे प्रार्थना से पहले बजाया जाता है। कहा जाता है कि यह बेल कोई साधारण घंटी नहीं है बल्कि यह मैटल से बने छह बड़े पाइप के हिस्से है। इस बेल को बजाते समय इस से संगीत के सात सुर की ध्वनि आती है। इस बेल रस्सी से खींचकर कर बजाया जाता है और इस रस्सी को किसी मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से खींचकर बजाई जाती है। चर्च के इंचार्ज सोहन लाल ने कहा कि क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए चर्च की मरम्मत की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्रिसमस और न्यू ईयर के मौके पर रात 12 बजे इस बेल को बजाकर जश्न मनाया जाता है। इसी तरह यहां भी रविवार को प्रार्थना से ठीक 15 मिनट पहले इसे बजाया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यह बेल 1982 में खराब हो गए थी जिसे 2019 में दोबारा ठीक करवाया गया और कोरोना के बाद इस साल इसे दुबारा से उपयोग में लाया गया है।
हिमाचल प्रदेश में प्रॉपर्टी टैक्स जमा ना भरने वालों की संख्या 500 पहुंच गई है और अब प्रॉपर्टी टैक्स जमा ना करने पर नोटिस देने का सिलसिला जारी हो गया है। शिमला नगर निगम ने टैक्स जमा नहीं करवाने वाले लोगों को नोटिस जारी किए है। कोरोना काल से लेकर अब तक लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स नहीं दिया है। आज शिमला नगर निगम के कमिश्नर आशीष कोहली ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि, यदि लोगों ने समय रहते टैक्स नहीं भरा तो लोगों की नागरिक सुविधाएं बंद की जा सकती है। वही उन्होंने कहा की शिमला आईएसबीटी के पास सबसे ज्यादा 4 करोड़ की देनदारी है।
हिमाचल प्रदेश में पहली बार रेशम विभाग एरी रेशम कीट पालन की खेती शुरू करने जा रहा है। किसान इस पौधे से एक साल में छह बार रेशम प्राप्त कर सकते है और यह गर्म इलाकों में उगाया जाएगा। हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर जिलों में इसका ट्रायल सफल रहा है। यह कीट अरंडी के पौधे पर तैयार होता है और ट्रायल सफल होने पर विभाग ने 500 किसानों के साथ इसे शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए विभाग केंद्र सरकार से प्रदेश में एक प्रोजेक्ट स्वीकृत करवा रहा है। बिलासपुर से 200, ऊना से 100, सिरमौर से 100 और हमीरपुर से 100 किसानों के साथ इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी। रेशम विभाग के उपनिदेशक बलदेव चौहान ने बताया कि ट्रायल के बाद प्रदेश में एरी रेशम कीट पालन शुरू किया जा रहा है और बिलासपुर की बंदलाधार और सिरमौर जिले से धौलाकुआं, हमीरपुर, सोलन और ऊना इसके लिए उचित स्थान है।
हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड ने बिजली बिल वसूली में लापरवाही करने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करना शुरू कर दी है इसी के साथ बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक पंकज डडवाल ने सभी अधीक्षण और अधिशाषी अभियंताओं को सख्ती बरतने के निर्देश दिए है। साथ उन्होंने सरकारी विभागों से भी बिजली बिल वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा है। बिजली बोर्ड मुख्यालय शिमला से वर्चुअल बैठक में प्रबंध निदेशक ने कहा कि घरेलू, कामर्शियल, औद्योगिक, जल शक्ति विभाग, स्ट्रीट लाइट कनेक्शन से संबंधित विभाग से राजस्व प्राप्ति प्रबंधन पर जोर देना होगा।
महाराष्ट्र के पुणे में जापानी इंसेफेलाइटिस का पहला मामला सामने आया है। पहला मामला सामने आने के बाद जानवरों, मच्छरों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए है। पुणे नगर निगम (पीएमसी) के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को पुष्टि की है कि जापानी बुखार के परीक्षण के लिए मच्छर, कुत्ते और सूअरों के सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) भेजे गए है। वडगांवशेरी में चार साल के बच्चे में इस बीमारी की पुष्टि होने के बाद ये कदम उठाया गया है। बच्चा फिलहाल ससून जनरल अस्पताल में भर्ती है।
दिसंबर के महीने में मौसम तेजी से बदल रहा है। जिस कारण लगातार तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर जारी है तो दक्षिण भारत में बारिश आफत बढ़ा रही है। मौसम विभाग की ओर से संभावना जताई गई है कि पारा अभी और नीचे जाएगा। दिल्ली-NCR से लेकर यूपी-बिहार तक न्यूनतम तापमान में करीब 5 डिग्री तक पारा लुढ़का है। इसके चलते लोगों को दिनभर ठंड महसूस हो रही है। दिल्ली-एनसीआर के कई जगहों में आज सारा दिन बादल छाए रहेंगे। रात को तापमान में काफी गिरावट हो जाती है। शीतलहर के चलते दिन में भी ठिठुरन महसूस होगी।
** मुश्किल हो सकती है भाजपा और आप की राह 'प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो, सुक्खू भाई जैसा हो' ,चुनाव प्रचार के दौरान नादौन विधानसभा क्षेत्र में ये नारा खूब बुलंद रहा। इस बार सुखविंद्र सिंह सुक्खू के समर्थक उन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देख रहे है। नादौन में जहाँ भी सुक्खू प्रचार के लिए पहुंचे, समर्थक ये ही नारा दोहराते दिखे। इस बार कांग्रेस ने बेशक सामूहिक नेतृत्व में और बगैर सीएम फेस के चुनाव लड़ा है ,लेकिन इसमें कोई संशय नहीं है कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है और नादौन विधानसभा सीट से सुखविंद्र सिंह सुक्खू चुनाव जीत कर आते है तो मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में सुक्खू का दावा बेहद मजबूत है। नादौन की सियासी फ़िज़ाओं में सुगबुगाहट तेज़ है कि मुमकिन है इस बार नादौन विधानसभा क्षेत्र को मुख्यमंत्री मिल जाएँ। ऐसे में जाहिर है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भावी सीएम फैक्टर का लाभ इस चुनाव में सुक्खू को मिला हो। नादौन के इतिहास की बात करें तो नादौन विधाभसभा सीट यूँ तो कांग्रेस का गढ़ रही है। यहां से नारायण चंद पराशर तीन बार विधायक रहे। नारायण चंद पराशर के बाद सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस सीट पर राज किया है। 2003 से अब तक सुखविंद्र सिंह सुक्खू नादौन सीट पर तीन बार जीत चुके है, हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में सुक्खू को 6750 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। पर फिर 2017 में सुक्खू ने जीत हासिल की। कांग्रेस में सुक्खू के अलावा कभी कोई अन्य चेहरा विकल्प के तौर पर नहीं उभरा। इस बीच भाजपा की बात करे तो एक बार फिर विजय अग्निहोत्री मैदान में है। अग्निहोत्री एक दफा सुक्खू को पटकनी भी दे चुके है और इस बार फिर मैदान में डटे हुए है। नादौन में भाजपा के लिए ऐसा भी कहा जाता है कि अगर यहां भाजपा एकजुट हो जाए तो शायद कांग्रेस की राह इतनी आसान न हो। अब भाजपा एकजुट है या नहीं ये तो आने वाला समय ही बताएगा। वहीँ इस बार आम आदमी पार्टी ने नादौन के सियासी समीकरण ज़रूर बदले है। दरअसल इस बार आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी शैंकी ठुकराल ने पुरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा है। अब देखना ये होगा कि शैंकी किसके वोट बैंक में कितनी सेंध लगाते है। नादौन में फिलवक्त सुक्खू जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त है। सुक्खू ने भावी सीएम के टैग के साथ चुनाव लड़ा है। ऐसे में जाहिर है इसका लाभ भी उन्हें मिलता दिख रहा है। बहरहाल, जनादेश ईवीएम में कैद है और सभी अपनी -अपनी जीत का दावा कर रहे है।
जवाली पुलिस थाना में गुप्त सूचना के आधार पर शिव मंदिर कुठेड़ के पास कार से 5.22ग्राम चिट्टा बरामद हुआ है। मिली जानकारी अनुसार पुलिस ने कुठेड़ में चेकिंग के दौरान कार (एचपी 90-9092) को रोका था जिससे 5.22ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। पुलिस ने कार में सवार चार व्यक्तियों की पुष्ठि अभिनंदन कुमार निवासी शाहपुर, मनोज कुमार निवासी नडोली, रजत नरियाल निवासी कुठेड व मनु कुमार निवासी सिहोलपुरी (शाहपुर) के तौर पर की गई है तथा चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उन पे पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।


















































