तख्त पलट चुका है और सीएम पद का ताज अब सुखविंदर सिंह सुक्खू के सर पर है। कांग्रेस के वादों पर जनता ने ऐतबार किया और अब इन वादों को पूरा करने की बारी कांग्रेस की है। कांग्रेस की सत्ता वापसी की पटकथा रणनीतिकारों ने उन दस गारंटियों की बिसात पर लिखी थी जिन्हें अब पार्टी को पूरा करना होगा। पहली गारंटी यानी पुरानी पेंशन बहाल करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अब जल्द प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। पर नौ गारंटियां अभी बाकी है, सुक्खू सरकार का बड़ा इम्तिहान अभी बाकी है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू बार- बार दोहरा रहे है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा दी गई हर गारंटी पूरी होगी। पर सीएम ये याद दिलाना भी नहीं भूलते कि तमाम वादे पांच साल के लिए किये गए है। यानी स्पष्ट है कि सरकार इन वादों को पूरा करने की मंशा तो रखती है लेकिन उन्हें पूरा करने में वक्त लग सकता है। दरअसल प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति भी इन वादों को जल्द पूरा करने में बाधा है। प्रदेश पर 75 हजार करोड़ का कर्ज है और करीब 11 हजार करोड़ कर्मचारियों की देनदारी बकाया है। इस 86 हजार करोड़ के अतिरिक्त अब ओपीएस लागू करने से भी सरकार पर करीब 900 करोड़ का भार बढ़ा है। ऐसे में जाहिर है सरकार को वादे पूरे करने है तो आय भी बढ़ानी होगी। इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा। मसलन डीजल पर तीन रुपये प्रति लीटर वेट बढ़ाकर सरकार ने ओपीएस का प्रबंध किया है, ऐसा खुद सीएम का कहना है। आगे भी सरकार कड़े फैंसले लेगी, इसका इशारा भी सीएम दे चुके है। यानी अब सुक्खू सरकार के लिए ये तलवार की धार पर चलने के समान है। ये देखना दिलचस्प होगा कि किस तरह सुक्खू सरकार जनता की नाराजगी मोल लिए बिना इन वादों की कसौटी पर खरा उतरती है। कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में आने से पहले कई वादे किए थे, ये सिर्फ वादे नहीं थे, गारंटियां थी। इन्हीं गारंटियों के बूते कांग्रेस के प्रचार प्रसार को हवा मिली और पार्टी सत्ता कब्ज़ाने में कामयाब रही। एक गारंटी पूरी जरूर हुई है मगर अभी नौ शेष है। विधानसभा चुनाव तो पार्टी इन वादों के बूते जीत चुकी है मगर आने वाले लोकसभा चुनाव में भी इन वादों का असर दिख सकता है। यानी इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि सुक्खू सरकार का कामकाज और पूरी हुई गारंटियों का नंबर तय करेगा कि कांग्रेस 2024 लोकसभा चुनाव में बेहतर कर पाती है या फिर भाजपा का डंका बजता है। ऐसे में जाहिर है सुक्खू सरकार भी चाहेगी कि जल्द से जल्द, अधिक से अधिक गारंटियां पूरी हो। सुक्खू सरकार को अभी डेढ़ महीना भी नहीं हुआ है और सरकार पुरानी पेंशन का वादा पूरा कर चुकी है। इसी के साथ-साथ दो अन्य गारंटियों के लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन भी हो चुका है। सरकार ने पहली कैबिनेट की बैठक में महिलाओं को 1500 देने व युवाओं को रोज़गार देने के लिए सब कमेटी का गठन किया गया है। महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने के लिए चौधरी चंद्र कुमार, कर्नल धनीराम शांडिल और अनिरुद्ध सिंह के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई है। ये कमेटी 30 दिन में इस वादे को पूरा करने के लिए ब्लू प्रिंट सौपेंगी। वहीं माना जा रहा है कि इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। इसके साथ एक अन्य कैबिनेट सब कमेटी का भी गठन किया गया है जो प्रदेश की नई रोजगार नीति बनाने के लिए आगामी 30 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। यानी एक गारंटी पूरी हो चुकी है और बाकी दो गारंटियों के लिए सरकार तैयारी कर चुकी है। इन तीन गारंटियों के अलावा भी प्रदेश की जनता से कई बड़े वादे किये गए है। इनमें 300 यूनिट बिजली मुफ्त देना, दो रूपए किलो गोबर खरीदना, बागवानों द्वारा फलों की कीमत तय करने का वायदा, युवाओं के लिए 680 रुपये करोड़ का स्टार्ट-अप फंड बनाना, हर गांव में मोबाइल क्लीनिक से मुफ्त इलाज करवाना, हर विधानसभा में 4 अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलना ,गाय-भैंस पालकों से हर दिन 10 लीटर दूध खरीदने जैसे वादे पेंडिंग है। आगामी 25 जनवरी को हिमाचल का पूर्ण राज्यत्व दिवस समारोह भी होना है और उस दौरान प्रदेश की जनता को सरकार क्या देती है इसपर भी निगाहें रहेगी। माहिर मान रहे है कि स्टार्ट अप फण्ड और 300 यूनिट फ्री बिजली के वादे को लेकर जल्द कोई ऐलान हो सकता है। सुक्खू सरकार का आगाज अच्छा है... सुक्खू सरकार एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ काम करती दिख रही है। प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति पर सीएम सुक्खू खुलकर बोल रहे है और इसे स्वीकार भी कर रहे है। आर्थिकी की गाड़ी पटरी पर लाने के लिए सीएम खुलकर जनता से समर्थन मांग रहे है और हर वादे को पूरा करने का संकल्प भी बार -बार दोहरा रहे है। सुखाश्रय कोष की स्थापना हो और चयन आयोग को सस्पेंड करने का निर्णय, सक्खू सरकार के इन फैसलों को अच्छा जन समर्थन मिला है। ओपीएस लागू कर सीएम सुक्खू फिलहाल कर्मचारियों के हीरो भी बन चुके है। डी नोटिफाई के मुद्दे पर भी सीएम सुक्खू ने आर्थिक स्थिति के तर्क के साथ जनता के बीच अपना पक्ष मजबूती से रखा है। वहीं करीब चार साल बाद देश के किसी राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी है, ऐसे में जाहिर है पार्टी आलाकमान भी चाहेगा कि सुक्खू सरकार हर वादे की कसौटी पर खरा उतरे। बहरहाल आगाज अच्छा है, पर आगे डगर कठिन जरूर है। ऐसे में सीएम सुक्खू किस तरह जन अपेक्षाओं पर खरा उतारते है, ये देखना दिलचस्प होगा।
जोगिन्दरनगर से रोपा बनवार रूट पर निगम की बस एक बार ट्रायल के चलते शुरू हुई। यह बस सेवा बीते पांच महीने से भजेरा गाँव के पास भारी बरसात के चलते सड़क धसने के कारण बंद थी। परिवहन निगम द्वारा इस रूट के ट्रायल के लिए बस भेजी गई, जो रोपा बनवार के लिए तो निकली पर बनवार गाँव न पहुँच कर मगरूनाले के पास से ही वापिस हो गई, जिसके चलते गांव के लोगों ने आक्रोश जताया। गांव के लोगों का कहना है कि इस प्रकार से आधी अधूरी बस सेवा बहाल करने का उन्हें कोई लाभ नहीं है। उन्होंने परिवहन विभाग से मांग की है की इस बस रूट को पहले की भांति सुचारू रूप से चलाया जाए।
हिमाचल के सोलन जिले में पिछले 7 दिन में लंपी का एक भी पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है। इस समय जिला में सिर्फ 7 एक्टिव केस बचे हैं। एक समय जिले में रोजाना के 500 से 600 केस रोजाना दर्ज किए जा रहे थे। वहीं जिले में अब तक 1654 पशुओं की जान जा चुकी है। पशुपालन विभाग सोलन के सहायक परियोजना निदेशक डॉ मनदीप कुमार ने कहा कि पिछले साल अगस्त माह में लंपी वायरस के मामले आना शुरू हुए थे। उसके बाद से ही विभाग ने टीमें बनाकर एहतियात बरतनी शुरू कर दी थी। वायरस को पूरी तरह खत्म करने के लिए वैक्सीनेशन का काम युद्धस्तर पर चल है। इसके बाद आगे भी चलता रहेगा। वहीं उन्होंने कहा कि जिले में अब तक लंपी वायरस के कुल 18209 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 16552 पशु ठीक हो चुके हैं, वहीं 1654 पशुओं की मौत हुई है। जिले में अभी 7 मामले एक्टिव हैं। बॉर्डर एरिया होने के चलते विभाग ने कड़ी नजर लंपी वायरस के मामलों पर बना रखी है। अब धीरे-धीरे लंपी वायरस का ग्राफ जिले में गिरता नज़र आ रहा है।
टीम इंडिया के खिलाड़ी इस समय इंटरनेशनल क्रिकेट में व्यस्त हैं, जहाँ सीनियर खिलाड़ी जैसे विराट और रोहित आजकल अपने बल्ले से शानदार पारी खेल रहे है। वही, युवा खिलाड़ी शुभमन गिल और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाडी भी खुद को साबित करने में पीछे नहीं है। इसी कारण अब टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए युवा एवं सीनियर खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन करते रहना होगा। हालाकिं, कई खिलाड़ी ऐसे भी थे जो एक समय में टीम इंडिया के स्टार हुआ करते थे, लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ने के चलते टीम से उनका पत्ता कट चुका है और उनकी वापसी होना नामुमकिन सा हो गया है। इन खिलाड़ियों में सबसे पहला नाम है मनीष पांडे, पांडे ने साल 2015 में जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना वनडे और टी20 डेब्यू किया था। 33 साल के मनीष पांडे ने भारत के लिए 29 वनडे में 566 और 39 टी20 मुकाबलों में 709 रन बनाए है, दूसरे हैं इशांत किशन जिन्होंने नवंबर 2021 में न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच खेला था। इसके बाद नाम आता है आजिंक्य रहाणे का जिनकी कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में टेस्ट सीरीज में मात दी थी, जिसके लिए उनकी कप्तानी की खूब प्रशंसा हुई थी। एमएस धोनी के टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद ऋद्धिमान शाह को बतौर विकेटकीपर काफी मौके मिले थे, हालांकि बाद में ऋषभ पंत के टीम में आने से ऋद्धिमान शाह का करियर ढलान की ओर चला गया। ऋद्धिमान शाह ने आखिरी बार साल 2021 में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबला खेला था, उसके बाद से वह बाहर है। टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए वीरेंद्र सहवाग के अलावा सिर्फ करुण नायर ने तिहरा शतक बनाया था। हालांकि उस ट्रिपल सेंचुरी के बाद नायर का ग्राफ ऊपर चढ़ने की बजाय गिरता चला गया।
हिमाचल प्रदेश में बारिश और बर्फ़बारी का दौर जारी है। राजधानी शिमला में सोमवार सुबह के समय धूप खिली रही।मैदानी इलाकों में ऊना, बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर में भी सुबह और शाम के समय धुंध छाई रही। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की जानकारी के अनुसार मंगलवार को प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान जताया है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से प्रदेश में 18 से 22 जनवरी तक बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। वहीं धुंध छाए रहने से ठंड बढ़ गई है और सोमवार को शिमला के अधिकतम तापमान में भी कमी दर्ज हुई। रविवार रात को प्रदेश के सात क्षेत्रों का न्यूनतम तापमान माइनस में रिकॉर्ड हुआ। सोमवार को बिलासपुर में अधिकतम तापमान 21.5, ऊना में 19.8, मंडी में 17.9, भुंतर में 17.4, कांगड़ा में 16.8, हमीरपुर में 16.7, धर्मशाला-सोलन-सुंदरनगर में 16.0, नाहन में 14.7, शिमला में 11.4, मनाली में 9.6, कल्पा में 8.8 और केलांग में 3.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।
शपथ लेने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर कर्नल धनीराम शांडिल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नमोहल बिलासपुर का औचक निरीक्षण किया। मंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला निरीक्षण था। मंत्री ने मरीजों से मुलाकात की, उनसे ओपीडी में डॉक्टरों की उपलब्धता, अस्पताल में सेवा के बारे में पूछा, विभिन्न वर्गों का दौरा किया और व्यक्तिगत रूप से स्ट्रेचर जैसी चीजों की जांच भी की। मंत्री ने इस दौरान कहा कि प्रदेश की जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए वे प्रयासरत है, इसके लिए अधिकारियों से समय-समय में संवाद कर फीडबैक लिया जाएगा।
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा पर नियमित गश्त के दौरान खाई में गिरने से शहीद हुए 23 वर्षीय अमित शर्मा पंचतत्व में विलीन हो गए। शहीद का सैनिक एवं राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। ग्राम पंचायत धनेड़ के तहत तलाशी खुर्द किरवीं गांव के रहने वाले भारतीय सैनिक अमित शर्मा बीती 10 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में खाई में गिरने से शहीद हो गए थे। उन के घरवाले उनकी पार्थिव देह आने का पिछले सात दिन से इंतजार कर रहे थे। पार्थिव देह घर पहुंचते ही शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शहीद अमित शर्मा अभी अविवाहित थे। परिजनों ने उन्हें दूल्हे की तरह सजाकर विवाह की रस्में पूरी कीं। पार्थिव देह पर पेंट-कोट, सेहरा, नोटों का हार पहनाया गया। इसके बाद उन्हें घर से विदा किया गया। सिपाही अमित शर्मा 2019 में सेना में शामिल हुए थे और हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के थे। उनके पिता विजय कुमार दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। माता अलका देवी गृहिणी हैं।अमित तीन भाई-बहनों मे सबसे छोटे थे। अमित शर्मा के निधन से क्षेत्र में माहौल गमगीन बना हुआ है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 18 जनवरी को करीब तीन हजार से अधिक किलोमीटर का सफर तय कर सुबह साढ़े छह बजे कांगड़ा जिला के मीलवां गाँव से हिमाचल प्रदेश में प्रवेश करेगी। प्रदेश में 24 किलोमीटर का सफर तय कर यात्रा की अगुवाई कर रहे पार्टी के नेता राहुल गांधी मलौट में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान हर जिला की लोक संस्कृति देखने को मिलेगी। यात्रा के लिए प्रदेश से कांग्रेस कार्यकर्ता भी मलौट पहुंचेंगे। हर जिला के कार्यकर्ता अपनी पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति की झलक पेश करते हुए यात्रा का भव्य स्वागत करेंगे। जनसभा के बाद भारत जोड़ो यात्रा पंजाब में प्रवेश करेगी और रात्रि विश्राम भी वहीं करेगी। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक केवल सिंह पठानिया ने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के स्वागत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।
हिमाचल प्रदेश में शनिवार को भी बर्फबारी का दौर जारी रहा। प्रदेश के ऊंचाई वालों क्षेत्रों में शनिवार को मनाली, नारकंडा, खड़ापत्थर, कुफरी और किन्नौर में बर्फबारी और राजधानी शिमला में बादल छाए रहे। शनिवार शाम तक हिमाचल प्रदेश में 276 सड़कें और 172 बिजली ट्रांसफार्मर बंद रहे। शुक्रवार रात को राजधानी शिमला के जाखू सहित कुफरी में बर्फबारी हुई। प्रदेश में 17 जनवरी तक मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। 18 से फिर बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। बर्फबारी से प्रदेश में शीतलहर बढ़ गई है। बर्फबारी के कारण शिमला-ठियोग राष्ट्रीय राजमार्ग, ठियोग-रामपुर और ठियोग-रोहड़ू राजमार्ग दोपहर एक बजे तक ठप रहा। कुल्लू और लाहौल घाटी में लगातार बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पर्यटन नगरी मनाली और बिजली महादेव में शनिवार को सीजन का पहला हिमपात हुआ। किन्नौर के छितकुल, रक्षम, सांगला, नाको, आसरंग, लिप्पा, नेसंग, कुन्नू चारंग, रूश्कलंग, नेंसग में ताजा बर्फबारी हुई है। शनिवार को लाहौल-स्पीति में 177, कुल्लू में 42, शिमला में 30, मंडी में 17, किन्नौर में पांच, चंबा में तीन और कांगड़ा में दो सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। कुल्लू में 126, शिमला में 28, चंबा में 10 और मंडी में आठ बिजली ट्रांसफार्मर बंद रहे।
सीएम सुखविंदर सुक्खू नए वित्त वर्ष के बजट से पहले विधायकों की प्राथमिकताएं जानेंगे। उन्होंने 30 और 31 जनवरी को विधायक प्रायोरिटी जानने हेतु सचिवालय में बैठक बुलाई है। इसमें सभी विधायकों से उनके चुनाव क्षेत्र से जुड़ी प्राथमिकताएं पूछी जाएंगी। इन प्राथमिकताओं को सरकार द्वारा आगामी वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। 30 जनवरी को 10:30 से दोपहर 1:30 बजे तक चंबा, शिमला, लाहौल स्पीति जिले के विधायकों की बैठक होगी। जबकि दोपहर बाद 2:00 से 5:00 बजे तक ऊना, हमीरपुर और सिरमौर जिले के विधायकों की बैठक होगी। वहीं अगले दिन यानी 31 जनवरी को कांगड़ा और किन्नौर जिले के विधायकों की बैठक सुबह 10:30 से 1:30 बजे बैठक होगी। जबकि दोपहर बाद सोलन, बिलासपुर और मंडी जिले के विधायकों की प्राथमिकता बैठक होगी। इनमें सभी विधायकों को एक-एक कर उनसे सड़क, पेयजल इत्यादि इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर प्राथमिकताएं पूछी जाएगी।
मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के अनाथ बच्चों के हित में कई अहम निर्णय लिए है। मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना लांच कर इसके तहत अनाथ बच्चों की पढ़ाई, पालन-पोषण, त्योहार पर 500-500 रुपए देने जैसे कई कदम उठाये गए हैं। अब सुक्खू सरकार ने एक बार फिर लोगों का दिल जीत लिया है। सुक्खू सरकार ने बेसहारा व अनाथ बच्चों को एक और तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने फैसला लिया है कि उनकी सरकार बेसहारा बच्चों को हवाई जहाज से घूमने ले जाएगी। इन बच्चों को थ्री-स्टार होटलों में ठहराया जाएगा। सरकार अनाथ बच्चों को 15 दिन घूमने भेजेगी, ताकि इन बच्चों को ऐसा एहसास न हो कि इनका कोई नहीं है। इसके लिए राज्य सरकार अनाथ आश्रम या किसी परिचित के घर पर रह रहे ऐसे बच्चों को घुमाने की योजना बना रही है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस मानवीय फैसले की आम लोग जमकर सराहना कर रहे है। सीएम सुक्खू कह चुके है कि बेसहारा बच्चों की मां भी सरकार है और पिता भी सरकार। इनका ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है। सीएम सुक्खू ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को ऐसे बच्चों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। इसी तरह एकल नारी, विधवा और वृद्धजन का भी मुख्यमंत्री ने इसी तरह ध्यान रखने के निर्देश दिए है। सीएम ने दिया है एक माह का वेतन अनाथ और बेसहारा बच्चों के लिए शुरू की गई सुख आश्रय योजना में सीएम सुक्खू ने अपना एक माह का वेतन दिया है। इसके अलावा कांग्रेस के सभी विधायकों ने इसमें एक -एक लाख रुपये का सहयोग किया है। ये देखना रोचक होगा कि क्या सरकार की इस अच्छी पहल को विपक्ष का सहयोग भी मिलेगा।
कर्ज के बोझ तले दबी हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सुक्खू सरकार कई सख्त निर्णय ले सकती है। बीत दिनों ही सरकार ने डीजल पर तीन रुपये प्रति लीटर वैट बढ़ाया है और अब सीएम ने संकेत दिए हैं कि इसी तरह के कई और निर्णय सरकार ले सकती है। सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने साफ कहा है कि प्रदेश पर कर्जे का बोझ लेकर आगे नहीं बढ़ा जा सकता है और आने वाले समय में और भी कड़े फैसले लेने होंगे। सरकार संसाधन बढ़ाने के लिए काम कर रही है और उन्होंने सभी से सहयोग की अपील की है। सीएम सुक्खू ने प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति के लिए जयराम सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। सीएम का कहना है कि जयराम सरकार प्रदेश पर करीब 75 हजार करोड़ का कर्ज छोड़कर गई है और इसके अलावा करीब 11 हजार करोड़ रुपये कर्मचारियों की बकाया देनदारी है। इस तरह 86 हजार करोड़ का कर्ज सरकार पर है जिसके साथ आगे नहीं बढ़ा जा सकता। ऐसे में कड़े आर्थिक निर्णय लेने के सिवाए सरकार के पास कोई विकल्प नहीं है। सरकार आने वाले समय में कर्ज का बोझ नहीं बढ़ाना चाहती। सीएम सुक्खू ने दो टूक कहा है कि चुनावी फायदे के लिए जयराम सरकार ने सात रुपये वैट घटाया था और अब उनकी सरकार ने सिर्फ तीन रुपये बढ़ाया है। इसके बाद भी हिमाचल प्रदेश में डीजल उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर से सस्ता है। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार ने चुनावी लाभ के लिए आखिरी 6 माह में 900 संस्थान खोले जिनके लिए कोई वित्तीय प्रबंध नहीं है। इन संस्थानों को चलाने के लिए करीब पांच हजार करोड़ की आवश्यकता है, ऐसे में सरकार इन्हें डी नोटिफाई किया है। जरुरत होने पर आवश्यक वित्तीय प्रबंध कर नीड बेस संस्थान खोले जायेंगे। एरियर भुगतान में लग सकता है तीन साल का वक्त सीएम सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों-पेंशनरों का बकाया एरियर देने के लिए सरकार को तीन वर्ष तक का समय लग सकता है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक होने के बाद ही कर्मचारियों के बकाया का भुगतान होगा। हालांकि संसाधन जुटाने पर इसका भुगतान जल्द भी हो सकता है। उन्होंने कर्मचारियों से सहयोग की अपील की है।
"पांच साल में सारे वादे, सारे वचन पूरे होंगे।" कांग्रेस घोषणा पत्र में शामिल सभी वादों को पूरा करने की बात एक बार फिर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराई है। सीएम सुक्खू ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के साथ ही सरकार ने पहली गारंटी पूरी कर दी है, वहीं एक साल में दो और गारंटियों को पूरा किया जायेगा। महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा भी जल्द पूरा होगा और रोजगार देने का भी। अन्य सभी वादों को पूरा करने के लिए सरकार के पास पांच साल का वक्त है और प्रदेश के वित्तीय हालत बेहतर कर हर वादा पूरा होगा। बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में कांग्रेस पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र को सरकार के नीति दस्तावेज के रूप में अपनाने का भी निर्णय लिया गया है और सभी संबंधित मंत्री व सचिव और विभागाध्यक्ष इसे अक्षरशः लागू करेंगे। वहीं इस दौरान महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह देने के लिए एक कैबिनेट सब कमेटी का भी गठन किया गया है जिसमें चौधरी चंद्र कुमार, कर्नल धनीराम शांडिल और अनिरुद्ध सिंह शामिल है। ये कमेटी 30 दिन में इस वादे को पूरा करने के लिए ब्लू प्रिंट सौपेंगी। वहीं माना जा रहा है कि इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। इसके साथ एक अन्य कैबिनेट सब कमेटी का भी गठन किया गया है जो प्रदेश की नई रोजगार नीति बनाने के लिए आगामी 30 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी भर्ती नीति बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सीएम ने कहा कि हिमाचल में युवा दर दर भटकते हैं। ऐसा रोजगार नहीं देना चाहते, जहां पेपर पहले ही बिक जाता हो या लीक हो जाता हो। मेरिट की उपेक्षा न हो, इस दृष्टि से काम करना चाहते हैं। क्या कामकाजी महिलाओं को रखा जाएगा योजना से बाहर ? प्रदेश की महिलाओं को 1500 रु माह देने का वादा सुक्खू सरकार कैसे पूरा करेगी ये देखना दिलचस्प होगा। बेशक सरकार ने इसके लिए कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया हो लेकिन एक साथ सभी महिलाओं के लिए ये योजना लागू होगी, ऐसा मुश्किल लगता है। सम्भवतः सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। इस योजना के दायरे से कामकाजी महिलाओं को क्या बाहर रखा जायेगा, ये देखना भी रोचक होगा। निजी उद्योगों में हिमाचलियों को नौकरी की सख्त नीति संभव कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पांच साल में पांच लाख रोजगार देने का वादा किया है। हर साल एक लाख नौकरियां देने का वादा किया गया है। अब सुक्खू सरकार इस वादे को कैसे पूरा करेगी, ये देखना रोचक होगा। अब तक सरकार ने भर्ती पॉलिसी में पारदर्शिता लाने को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई है लेकिन नए रोजगार कहाँ से और कैसे उत्पन्न होंगे, ये बड़ा सवाल है। जाहिर है ये रोजगार सरकारी और गैर सरकारी दोनों क्षेत्रों में मिलाकर दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है, पर सरकार किस नीति के साथ आगे बढ़ेगी इस पर निगाह रहने वाली है। माहिर मान रहे है कि प्रदेश के निजी उद्योगों में हिमाचलियों को रोजगार देने के लिए सख्त नीति बनाकर उसे सख्ती से लागू करने की दिशा में सुक्खू सरकार आगे बढ़ेगी।
बरसों का इन्तजार खत्म हुआ और हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई। बीते दिनों हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का ऐलान कर दिया है। जिस मसले ने प्रदेश की चुनावी हवा का रुख बदल कर रख दिया था, अब वो मसला हल हो गया है। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मानों कर्मचारियों के लिए मसीहा बनकर आए और उनकी पेंशन की सबसे बड़ी टेंशन को खत्म कर गए। कर्मचारी एक लम्बे अर्से से अपने बुढ़ापे की सुरक्षा की मांग रहे थे । पिछली सरकार ने जिन कर्मचारियों पर एफआईआर की इस सरकार ने उन्हीं कर्मचारियों को गले लगा लिया। जो कर्मचारी सचिवालय का घेराव किया करते थे, वो ही कर्मचारी सचिवालय के बाहर जश्न मनाते दिखाई दिए। नाचते गाते खुशियां मनाते दिखाई दिए। यही नहीं इन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री को नायक की उपाधि भी दे दी। हिमाचल में करीब सवा लाख कर्मचारी इस समय एनपीएस के दायरे में आते हैं और ये सवा लाख कर्मचारी और इनके परिवार लगातार पुरानी पेंशन की मांग कर रहे थे। अब कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के ऐलान के साथ ही एक लम्बे संघर्ष पर विराम लग गया है। इस संघर्ष की चिंगारी साल 2015 में भड़की थी और देखते ही देखते ये चिंगारी ज्वाला में बदल गई। जब प्रदेश में पुरानी पेंशन को हटा कर नई पेंशन लाई गई तो कर्मचारियों ने इसका स्वागत किया। लेकिन कुछ समय बाद जब इसके परिणाम सामने आए तो कर्मचारियों को समझ आ गया कि नई पेंशन स्कीम उनके लिए घाटे का सौदा है और फिर नई पेंशन को हटा पुरानी पेंशन की मांग की सुगबुगाहट तेज़ हो गई और साल 2015 तक कर्मचारी संगठित हो गए। साल 2017 से पहले जब भाजपा विपक्ष में थी तो पुरानी पेंशन कर्मचारियों को लौटाने के वादे किया करती थी। 2017 में जब भाजपा की सरकार बनी तो कर्मचारियों को उम्मीद थी कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रदेश सरकार कुछ कदम उठाएगी। दरअसल कर्मचारियों का कहना था कि इससे पहले जब भाजपा विपक्ष में थी तो खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इस मांग की पैरवी किया करते थे। परन्तु सत्ता में आने के बाद जब कोई बदलाव होता नहीं दिखा तो शुरुआत हुई उस संघर्ष की जो आगे चल कर प्रदेश के कर्मचारियों के सबसे बड़े आंदोलन में तब्दील हो गया। उस वक्त किसी ने ये सोचा भी नहीं था कि कर्मचारियों की मांग आगे चलकर इतना विशाल आंदोलन बन जाएगी। कर्मचारियों ने पेंशन बहाली के लिए खूब जतन किए। शुरुआत में कर्मचारियों ने विधायकों से मिलकर अपनी मांग को उठाया। ये सिलसिला लम्बे समय तक चलता रहा और कर्मचारियों ने प्रदेश के हर बड़े नेता के दर पर दस्तक दी। फिर धीरे-धीरे मांग बढ़ती गई और नेताओं की नजरअंदाजी के चलते नाराज़ कर्मचारी सड़कों पर उतरने लगे। 25 जुलाई, 2017 को शिमला सचिवालय के बाहर पहली रैली हुई थी। फिर कई पेन डाउन स्ट्राइक हुई तो इस मुद्दे को और हवा मिल गई। मगर जब किसी ने सुनी नहीं तो प्रदेश के कर्मचारी और भी भड़क गए और मामला विधानसभा घेराव तक पहुंच गया। कभी भारी संख्या में कर्मचारी धर्मशाला पहुंचे तो कभी शिमला, पेंशन व्रत हुए, पेंशन संकल्प रैली हुई, पेंशन अधिकार रैली हुई। कर्मचारियों के इन प्रदर्शनों में उमड़ा जनसैलाब स्पष्ट संकेत देता रहा था कि कर्मचारी मानने को तैयार नहीं थे। मगर सरकार हर बार आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देती रही। कर्मचारियों का ये संघर्ष बहुत कम समय में एक आंदोलन में बदल गया। जयराम सरकार द्वारा 2009 की अधिसूचना लागू कर प्रदेश के कर्मचारियों को मनाने का भी प्रयास हुआ मगर कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर अड़े रहे। इस मसले पर लगातार भाजपा आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देती रही। पूर्व सरकार ने कई बार स्पष्ट किया कि प्रदेश के आर्थिक हालात ऐसे नहीं है कि पुरानी पेंशन लागू की जाए, मगर संभावनाएं फिर भी तलाशी जाएंगी। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी स्पष्टीकरण देते रहे कि हिमाचल सरकार अपने बलबूते ओल्ड पेंशन का भुगतान नहीं कर पाएगी, क्योंकि राज्य का राजकोष केंद्र सरकार से मिलने वाले रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर चलता है। मगर ये सर्व विदित था की मसला सिर्फ आर्थिक स्थिति का नहीं है। दरअसल देश के 12 राज्यों में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है, जबकि 4 राज्यों में भाजपा समर्थित सरकार है। यदि किसी एक भी राज्य में भाजपा पुरानी पेंशन बहाल करती है तो बाकि राज्यों के कर्मचारी भी चाहेंगे कि उन्हें भी पुरानी पेंशन दी जाए और अंततः केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए भी पुरानी पेंशन बहाल करनी होगी। ऐसे में हकीकत ये थी कि चाहकर भी जयराम सरकार के लिए ऐसा करना मुश्किल था। वहीं कांग्रेस के लिए परिस्थितियां अलग थी। तीन राज्यों में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार है, हिमाचल, राजस्थान और छत्तीसगढ़। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी पहले ही पुरानी पेंशन लागू कर चुकी थी और अब हिमाचल में भी ऐलान कर दिया गया है। इसी के साथ झारखंड, तमिलनाडु और बिहार में कांग्रेस गठबंधन की सरकार है और झारखंड में भी पुरानी पेंशन की घोषणा हो चुकी है। जिस मुद्दे को भाजपा महज़ कर्मचारियों की एक मांग समझती रही कांग्रेस ने इस मुद्दे की गहराई को भांपा। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए भी इस मुद्दे का समर्थन कर इसे खूब हवा दी और अपने चुनावी घोषणा पत्र में कांग्रेस की पहली गारंटी भी पुरानी पेंशन की बहाली ही थी। उधर कर्मचारियों ने भी प्रदेश में 'वोट फॉर ओपीएस' अभियान चलाया और स्पष्ट कर दिया की जो पेंशन की बात करेगा कर्मचारी उसी को वोट देंगे। आम आदमी पार्टी ने भी इस मसले की गहराई को समझते हुए पहले पंजाब में पेंशन बहाली की घोषणा की और फिर हिमाचल में भी पुरानी पेंशन बहाली का वादा किया। जबकि भाजपा के घोषणा पत्र से ये वादा नदारद रहा। नतीजा सभी के सामने है। इस चुनाव में कांग्रेस ने कर्मचारियों से वादा किया और कर्मचारियों ने कांग्रेस का समर्थन किया। आज प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार है और कर्मचारियों को भी उनकी पुरानी पेंशन मिलने का ऐलान हो चुका है। इस वर्ष 800 करोड़ रुपये होंगे खर्च : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के अनुसार हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम देने के लिए इस साल करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वक्त में इसका बजट और बढ़ जाएगा। यह मालूम रहे कि प्रदेश में नई पेंशन स्कीम वाले इस साल 1500 से अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त होने हैं। छत्तीसगढ़ से मिलता-जुलता हो सकता है फार्मूला : हिमाचल प्रदेश में ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने का फार्मूला छत्तीसगढ़ से मिलता-जुलता हो सकता है। छत्तीसगढ़ में कर्मचारी केंद्र से पैसा वापस लाकर पिछली रकम को खुद जमा कर रहे हैं। वहां पर कर्मचारियों को ओपीएस में आने या एनपीएस में बने रहने के दोनों ही विकल्प दिए गए हैं। जहां तक छत्तीसगढ़ के फार्मूले की बात है तो वहां पर निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार के कर्मचारी एक नवंबर 2004 के स्थान पर एक अप्रैल 2022 को छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि के सदस्य बनेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अप्रैल 2022 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को एनपीएस में बने रहने या पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प दिया था। इसके लिए कर्मचारियों से वहां शपथ पत्र भी मांगा जा रहा है। यदि कोई कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना का विकल्प चुनता है, तो उसे 1 नवंबर 2004 से 31 मार्च 2022 तक सरकार के योगदान और लाभांश को एनपीएस खाते में राज्य सरकार को जमा करना पड़ता है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों को इस अवधि के दौरान एनपीएस में जमा कर्मचारी अंशदान और लाभांश एनपीएस नियमों के तहत देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, यह तो छत्तीसगढ़ की व्यवस्था है, पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल का अपना सर्वश्रेष्ठ मॉडल बताया है। ऐसे में लग रहा है कि यह छत्तीसगढ़ के मॉडल से कुछ भिन्न भी हो सकता है। खुद प्रियंका गांधी पहुंची थी मिलने प्रदेश में पुरानी पेंशन के मुद्दे की गहराई को समझते हुए खुद प्रियंका गांधी भी कर्मचारियों से मिलने पहुंची थी। दरअसल प्रदेश के कर्मचारी पुरानी पेंशन की मांग के लिए क्रमिक अनशन पर बैठे थे। इस अनशन के दौरान सरकार का कोई भी नुमाइंदा या भाजपा का कोई बड़ा नेता कर्मचारियों से मिलने नहीं पहुंचा। हालाँकि प्रियंका गाँधी सोलन में अपनी रैली के दौरान कर्मचारियों से मिलने पहुंची और उनसे उनका हाल जाना। पुरानी पेंशन लागू होने के बाद प्रियंका गाँधी ने कर्मचारियों को बधाई दी है। कर्मचारी इसलिए नहीं चाहते पुरानी पेंशन : साल 2004 में केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों की पेंशन योजना में एक बड़ा बदलाव किया था। इस बदलाव के तहत नए केंद्रीय कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना के दायरे से बाहर हो गए। ऐसे कर्मचारियों के लिए सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम को लॉन्च किया। यह 1972 के केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम के स्थान पर लागू की गई और उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए इस स्कीम को अनिवार्य कर दिया गया जिनकी नियुक्ति 1 जनवरी 2004 के बाद हुई थी। अधिकतर सरकारी कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम लागू होने के बाद से ही पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने को लेकर मुहिम चला रहे हैं। पश्चिम बंगाल को छोड़ देश के हर राज्य में नई पेंशन योजना को लागू किया गया। अधिकतर सरकारी कर्मी पुरानी पेंशन व्यवस्था को इसलिए बेहतर मानते हैं क्योंकि यह उन्हें अधिक भरोसा उपलब्ध कराती है। जनवरी 2004 में एनपीएस लागू होने से पहले सरकारी कर्मी जब रिटायर होता था तो उसकी अंतिम सैलरी के 50 फीसदी हिस्से के बराबर उसकी पेंशन तय हो जाती थी। ओपीएस में 40 साल की नौकरी हो या 10 साल की, पेंशन की राशि अंतिम सैलरी से तय होती थी यानी यह डेफिनिट बेनिफिट स्कीम थी। इसके विपरीत एनपीएस डेफिनिट कॉन्ट्रिब्यूशन स्कीम है यानी कि इसमें पेंशन राशि इस पर निर्भर करती है कि नौकरी कितने साल की गई है और एन्युटी राशि कितनी है। एनपीएस के तहत एक निश्चित राशि हर महीने कंट्रीब्यूट की जाती है। शुरूआती दौर में कर्मचारियों ने इस स्कीम का स्वागत किया, लेकिन जब एनपीएस का असल मतलब समझ आने लगा तो विरोध शुरू हो गया। नई पेंशन स्कीम के अंतर्गत हर सरकारी कर्मचारी की सैलरी से अंशदान और डीए जमा कर लिया जाता है। ये पैसा सरकार उसके एनपीएस अकाउंट में जमा कर देती है। रिटायरमेंट के बाद एनपीएस अकाउंट में जितनी भी रकम इक्कठा होगी उसमें से अधिकतम 60 फीसदी ही निकाला जा सकता है। शेष 40 फीसदी राशि को सरकार बाजार में इन्वेस्ट करती है और उस पर मिलने वाले सालाना ब्याज को 12 हिस्सों में बांट कर हर महीने पेंशन दी जाती है। यानी पेंशन का कोई तय राशि नहीं होती। पैसा कहां इन्वेस्ट करना है, ये फैसला भी सरकार का ही होगा। इसके लिए सरकार ने पीएफआरडीए नाम की एक संस्था का गठन किया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका पैसा बाजार में जोखिम के अधीन है और बाजार में होने वाले उलटफेर के चलते उनकी जमा पूंजी सुरक्षित नहीं है। पुरानी पेंशन स्कीम इससे कई ज़्यादा बेहतर मानी जाती है। उसमें सरकारी नौकरी के सभी लाभ मिला करते थे। पहले रिटायरमेंट पर प्रोविडेंट फण्ड के नाम पर एक भारी रकम और इसके साथ ताउम्र तय पेंशन जोकि मृत्यु के बाद कर्मचारी की पत्नी को भी मिला करती थी। पुरानी पेंशन योजना में ये हैं प्रावधान **इस योजना में सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के वेतन की आधी राशि पेंशन के रूप में दी जाती है। **कर्मचारी के वेतन से कोई पैसा नहीं कटता है। भुगतान सरकार की ट्रेजरी के माध्यम से होता है। **20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी की रकम मिलती है। सेवानिवृत्त कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को पेंशन राशि मिलती है। **पुरानी योजना में जनरल प्रोविडेंट फंड यानी जीपीएफ का प्रावधान है। इसमें महंगाई भत्ते को भी शामिल किया जाता है। वापस होंगे एनपीएस कर्मचारियों पर दर्ज मामले ओल्ड पेंशन बहाल करने को लेकर संघर्षरत एनपीएस कर्मचारियों पर दर्ज तमाम केस वापस होंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान चाहे शिक्षक हों या अन्य कर्मचारी सभी हक की लड़ाई लड़ रहे थे। अब इन कर्मचारियों को उस समय बनाए गए मामलों से भी छूट दिलाई जाएगी। उधर, इस मौके पर जोइया मामा नारा लगाने से फेमस हुए सिरमौर के शिक्षक ओम प्रकाश ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के बाद पेन किलर मिल गई है और अब धीरे-धीरे दर्द से राहत मिल रही है। ओम प्रकाश समेत अन्य शिक्षकों पर सचिवालय के बाहर नारेबाजी करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था। प्रदीप ठाकुर की रही अहम भूमिका पुरानी पेंशन की लड़ाई की शुरुआत नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के बैनर तले हुई। प्रदीप ठाकुर के नेतृत्व में इस संगठन ने कर्मचारियों को एकत्रित किया। उन्हें पुरानी पेंशन की एहमियत का एहसास करवाया, पुरानी पेंशन के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी । यूं तो प्रदेश में कई अन्य संगठन भी थे जो पुरानी पेंशन की मांग करते रहे, मगर जिस संगठन के लोगों ने तन-मन-धन से पुरानी पेंशन बहाली में योगदान दिया वो नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ ही है। पुरानी पेंशन देने वाला देश का छठा राज्य बना हिमाचल 2021 तक एकमात्र पश्चिम बंगाल ही वो राज्य था जहां कर्मचारियों को पुरानी पेंशन दी जाती थी, मगर अब ऐसा नहीं है। राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और पंजाब में वर्ष 2022 में पुरानी पेंशन बहाल कर दी गई। अब साल 2023 में हिमाचल प्रदेश पुरानी पेंशन बहाल करने वाला देश का पांचवां राज्य बन गया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों ने अपने चुनावी वायदे निभा दिए हैं। भाजपा शासित राज्यों में अभी भी इस बहाली का इंतजार है। राजस्थान सरकार ने 23 फरवरी 2022 को पुरानी पेंशन बहाल करने का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने चौथे बजट में यह घोषणा पूरी की। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मार्च 2022 में पेश किए बजट में पुरानी पेंशन देने की घोषणा की। एक सितंबर 2022 से झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार ने पुरानी पेंशन बहाल की थी। पंजाब में 21 अक्टूबर 2022 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंत्रिमंडल की बैठक में ओपीएस बहाल करने का निर्णय लिया। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकारें हैं।
हिमाचल प्रदेश के राशन डिपुओं में उपभोक्ताओं को अब सरसों का तेल नौ रुपये महंगा मिलेगा। खाद्य आपूर्ति निगम ने तेल की बढ़ी हुई कीमतें इसी माह से लागू कर दी हैं। यही नहीं पीओएस मशीनों में भी बढ़ी हुई कीमतों को अपडेट कर दिया गया है। जिसके बाद एपीएल परिवारों को 142 और एनएफएसए को 132 रुपये प्रति लीटर सरसों तेल मिलेगा। जिससे राशन कार्डधरकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। गौर रहे कि एपीएल धारकों को 133 रुपये और एनएफएसए कार्ड धारकों को 123 रुपये प्रति लीटर सरसों का तेल मिलता था। वर्तमान में भी लोगों को बढ़े हुए दाम पर ही सरसों तेल दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि तेल के दाम टेंडर पर निर्धारित होते हैं। जो हर माह बढ़ते-घटते हैं। लेकिन बीते दिनों चुनावों से पहले इसके दाम कम हुए थे। जो अब सरकार की ओर से फिर बढ़ा दिए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों बीती रात फिर ताजा हिमपात हुआ है। प्रदेश की राजधानी शिमला समेत कुल्लू, चंबा, मंडी, सिरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी हुई है। शिमला के माल रोड, US क्लब, जाखू की पहाड़ियों में बर्फ की सफ़ेद चादर बिछी गयी है। जिले के ऊंचे क्षेत्र कुफरी, नारकंडा, खड़ापत्थर व चौपाल के खिड़की में 3 से 4 इंच तक ताजा हिमपात हुआ है। इससे नेशनल हाईवे-5 सहित ग्रामीण क्षेत्रों की कई सड़कें यातायात के लिए अवरुद्ध हो गई हैं। जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों सहित सैलानियों को भी बर्फ में संभलकर गाड़ी चलाने की सलाह और अनावश्यक यात्राएं टालने की सलाह दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आज प्रदेश के कुछेक इलाकों में हल्की बारिश-बर्फबारी हो सकती है, मगर कल से 17 जनवरी तक मौसम साफ रहेगा। 18 और 19 को फिर बारिश-बर्फबारी होने की संभावनाएं बन रही हैं। मंडी जिले की चौहारघाटी व पराशर घाटी, लाहौल स्पीति के लोसर में, रोहतांग टनल, कुंजुमपास, बारालाचा में ताजा बर्फ की मोटी परत बिछी है। इसके बाद अधिक ऊंचे क्षेत्रों का पारा माइनस में चला गया है। प्रदेश में ताजा बर्फबारी के बाद 4 नेशनल हाईवे सहित 220 से ज्यादा सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। इससे ऊंचे क्षेत्रों लोगों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है।
वार्षिक बजट 2023-24 के लिए विधायक प्राथमिकताओं के निर्धारण के लिए विधायकों के साथ दो दिवसीय बैठकों का आयोजन 30 और 31 जनवरी, 2023 को हिमाचल प्रदेश सचिवालय के कांफ्रेंस हाल में किया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में 30 और 31 जनवरी, 2023 को वार्षिक बजट 2023-24 के लिए विधायक प्राथमिकताओं के निर्धारण के लिए विधायकों के साथ दो दिवसीय बैठकों का आयोजन हिमाचल प्रदेश सचिवालय के कांफ्रेंस हाल में किया जाएगा। 30 जनवरी सुबह 10:30 बजे से 1:30 बजे तक चंबा, शिमला और लाहौल-स्पीति और अपराह्न 2:00 बजे से 5:00 बजे तक ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और सिरमौर जिले के विधायकों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। 31 जनवरी को सुबह 10:30 बजे से 1:30 बजे तक कांगड़ा व किन्नौर जिलों तथा अपराह्न 2:00 से 5:00 बजे तक सोलन, बिलासपुर तथा मंडी के विधायकों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में वार्षिक बजट 2023-24 की विधायक प्राथमिकताओं के निर्धारण के लिए विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठकों में विधायकों से वर्ष 2023-24 के लिए मितव्ययिता उपायों, वित्तीय संसाधन जुटाने एवं बेहतर प्रशासन के संदर्भ में प्राप्त सुझावों पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज दुनिया के सबसे लंबे जलमार्ग पर चलने वाले गंगा विलास क्रूज यात्रा को वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। प्रधानमंत्री ने इस लग्जरी क्रूज को वाराणसी से डिब्रूगढ़ के लिए रवाना किया । 51 दिनों तक एडवेंचरस सफर पर निकलने वाला यह क्रूज 15 दिनों तक बांग्लादेश से गुजरेगा। इसके बाद असम के बह्मपुत्र नदी से डिब्रूगढ़ तक जाएगा। पीएम ने कहा कि हमने अर्थ गंगा का अभियान चलाने के साथ गंगा की सफाई पर फोकस किया है। गंगा विलास क्रूज अर्थ गंगा के अभियान को नई ताकत देगा। ये क्रूज 25 अलग-अलग नदियों की धाराओं से होकर गुजरेगा। जो लोग भारत के अलग-अलग खान पान का अनुभव लेना चाहते हैं, उनके लिए ये क्रूज यात्रा रोमांचकारी होगी। पीएम ने कहा जो लोग पहले ऐसे अनुभवों के लिए विदेश जाते थे अब वो भारत में ही इसका आनंद ले पाएंगे। देश के हर नदी मार्ग पर हम ऐसी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। छोटी नदियों पर भी हम छोटे क्रूज की व्यवस्था कर रहे हैं। देश में क्रूज टूरिज्म को हम बढ़ावा दे रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश में मौसम ने करवट ली है। जनजातीय जिला लाहौल स्पीति, अटल टनल, रोहतांग दर्रे समेत शिमला, कुफरी, पांगी, मशोबरा में ताज़ा हिमपात हुआ है। काँगड़ा जिला के धोलधार की पहाड़ियों पर भी हल्का हिमपात हुआ। बर्फबारी की वजह से पर्यटक वाहनों को सोलंगनाला बैरियर से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। सुबह 10 बजे से 3 बजे तक ही सिर्फ 4x4 व्हील गाडी ही अटल टनल के नार्थ पोर्टल तक ही जा सकेंगी। दोपहर 2:30 बजे के बाद जैसे ही लाहौल-स्पीति में बर्फबारी का दौर शुरू हुआ तो पर्यटक मनाली लौट आए। वहीं ताजा बर्फबारी से प्रदेश में तीन नेशनल हाईवे समेत 200 सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। 487 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हैं। कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट छा गया है। लाहौल के कोकसर में 10 सेंमी, अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल में 8 सेंमी, सिस्सू में 8 सेंमी, रोहतांग में 30 सेंमी, गोंधला में 12 सेंमी, साउथ पोर्टल में 25 सेंमी और दारचा में 12 सेंटीमीटर हुई। बर्फबारी से लाहौल की सभी सड़कें बंद हो गई है। अटल टनल से भी यातायात बंद कर दिया गया है। बता दें कि मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य में 11 से 13 जनवरी तक अधिकतर भागों में बारिश-बर्फबारी का पूर्वानुमान जताया है। इस दौरान निचले व मैदानी भागों में बारिश, जबकि मध्य व उच्च पर्वतीय भागों में बारिश-बर्फबारी के आसार हैं। 12 जनवरी को चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले के लिए भारी बारिश-बर्फबारी का येलो अलर्ट जारी किया गया है। स्थानीय लोगों व पर्यटकों को संबंधित विभागों की ओर से जारी एडवाइजरी व दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। स्थानीय लोगों व पर्यटकों को संबंधित विभागों की ओर से जारी एडवाइजरी व दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
प्रदेश में बीते कल से कई क्षेत्रों में बारिश बर्फबारी का दौर जारी है। सोलन जिला में भी करीब दो माह बाद गुरुवार रात को बारिश हुई। बीती रात हुई बारिश के बाद जिला में ठंड बढ़ गई है। जिला का सुबह का तापमान 3 से 5 डिग्री के बीच चल रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बारिश फसलों के लिए बड़ी लाभदायक है। हालांकि लंबे सूखे को तोड़ने के लिए यह बारिश काफी नहीं है। आज रात को फिर बारिश होने की संभावना है। गौरतलब है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 8 जनवरी को हल्की बारिश होने का अनुमान था, लेकिन बारिश न होने से किसानों की चिंता बढ़ने लगी, मगर देर रात हल्की बारिश हुई और सुबह करीब 5 बजे फिर कुछ देर के लिए बारिश हुई जिससे सूखा खत्म हो गया। जमीन में नमी होने पर किसान बची हुई भूमि पर रबी की फसल की बुआई कर पाएंगे।
उत्तराखंड के जोशीमठ में जो हो रहा है वह किसी त्रासदी से कम नहीं है। सैकड़ों मकानों में दरारें आ रही हैं। वहां की जमीन धंसने लगी हैं। आलम ये है कि अब जोशीमठ के लोग गांवों से पलायन को मजबूर हो गए हैं। सैकड़ों परिवारों को वहां से कहीं और शिफ्ट किया जा रहा है। बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे कुछ प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के प्रवेश द्वार जोशीमठ के सैकड़ों घरों में दरारें आ गई हैं। जोशीमठ शहर पर जमीन में समाने का खतरा हर घंटे के साथ बढ़ता जा रहा है। इस पूरे क्षेत्र को 'सिंकिंग ज़ोन' करार दिया गया है। ऐसे में सभी के जहन में एक ही सवाल उठा रहा है कि आखिर जोशीमठ में ऐसा हो क्यों रहा है ? ‘गेटवे ऑफ हिमालय’ के नाम से मशहूर जोशीमठ को ज्योतिर्मठ के नाम से भी जाना जाता है। यह 6150 फीट (1875 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है जो बद्रीनाथ जैसे तीर्थ केंद्रों का प्रवेश द्वार भी है। यह आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों में से एक है। हेमकुंड साहिब, औली, फूलों की घाटी आदि स्थानों पर जाने के लिए यात्रियों को इसी जोशीमठ से होकर गुजरना पड़ता है। 1970-71 की बाढ़ के बाद जोशीमठ में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने लगी। तब उत्तराखंड अलग राज्य नहीं था, बल्कि ये यूपी का ही हिस्सा हुआ करता था। उस समय तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने एक कमेटी गठित की थी। बताया जाता है कि गढ़वाल के कमिश्नर महेश चंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में भूगर्भीय अध्ययन के लिए एक कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने अध्ययन में पाया कि जोशीमठ ग्लेशियर द्वारा लाई गई मिट्टी पर बसा है। लिहाजा ये बहुत अधिक मजबूत चट्टान नहीं है। ये भूस्खलन वाला क्षेत्र ही है। उस वक्त ये कहा गया था कि यदि जोशीमठ को स्थाई रखना है, तो जोशीमठ में चट्टानों के साथ छेड़छाड़ न की जाए और जोशीमठ में भारी निर्माण कार्य न किए जाएं। साथ ही, भूस्खलन की घटनाओं को रोकने के लिए ढलानों पर पौधरोपण किया जाएं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। नतीज़न आज जोशीमठ जमींदोज़ होने की कगार पर है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने का मुख्य कारण एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगढ़ जल विद्युत परियोजना बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक बेहद ही गंभीर चेतावनी है, ऐसे में पुरानी स्थिति को फिर से बहाल कर पाना भी मुश्किल होगा। बिना किसी योजना के बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास हिमालयी पारिस्थिति की तंत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति और भी कमजोर बना रहा है। बताया जाता है कि जोशीमठ में जमीन धंसने की शुरुआत 90 के दशक में हुई थी जब जोशीमठ के निचले इलाके में जयप्रकाश कंपनी ने काम शुरू किया। उस समय एक सड़क का निर्माण किया गया था। 90 के दशक में इसी निर्माण कार्य के बाद से समस्याएं शुरू हुई। इसके बाद एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना शुरू हुई। तपोवन विष्णुगढ़ परियोजना भी शुरू हुई। 2010 में जब सुरंग में एक मशीन फंस गई तब उस सुरंग से 600 लीटर पानी प्रति सेकंड निकलने लगा, जिसके बाद पर्यावरण वैज्ञानिकों ने कहा कि जोशीमठ में इस सुरंग से असर पड़ रहा है। हालांकि एनटीपीसी के एक बयान के अनुसार 'एनटीपीसी द्वारा बनाए गए सुरंग जोशीमठ शहर के नीचे से नहीं गुजरती है। यह टनल एक टनल बोरिंग मशीन द्वारा खोदी गई है। वर्तमान में कोई धमाका भी नहीं किया जा रहा है। सुरंग नदी के पानी को संयंत्र की टरबाइन तक ले जाने के लिए है। ड्रेनेज व सीवेज व्यवस्था भी जमीन धंसने का कारण पिछले साल 16 से 19 अगस्त के बीच राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की एक टीम ने जोशीमठ का सर्वेक्षण किया था। शोध के बाद उन्होंने नवंबर माह में 28 पृष्ठों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसमें उन्होंने माना था कि जोशीमठ के नीचे अलकनंदा में कटाव के साथ ही सीवेज और ड्रेनेज की व्यवस्था न होने से पानी जमीन में समा रहा है। इससे जमीन धंस रही है। अनियंत्रित निर्माण कार्यों का बोझ जून 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, जिसने अप्रैल 2014 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) से ऊपर के क्षेत्रों को बांध परियोजनाओं से मुक्त रखने, पहाड़ों में वन-कटान, सुरंग निर्माण आदि के मद्देनजर क्षेत्र में हाइड्रो-जियोलॉजिकल प्रभावों का अध्ययन करने की सिफारिश की गई थी। उस दौरान एनजीटी, हाईकोर्ट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) सभी ने बेतरतीब विकास गतिविधियों को ‘रेसिपी फॉर डिसास्टर’ घोषित किया था। इसके बाद वर्ष 2014 में उत्तराखंड सरकार ने अपना ‘क्लामेट चेंज एक्शन प्लान’ जारी किया। इसमें धारण क्षमता के आधार पर ही पर्यटन, तीर्थाटन की नियमावली जारी की गई। अलकनंदा नदी में हो रहा भू-कटाव पिछले साल विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया था कि जोशीमठ शहर के नीचे अलकनंदा नदी से हो रहा कटाव भी खतरनाक साबित हो सकता है। इस वजह से भू धंसाव हो सकता है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की भूस्खलन वैज्ञानिक डॉ. स्वप्नामिता चौधरी भी वर्ष 2006 में अपने शोध में इस बात को स्वीकार कर चुकी हैं। तपोवन विष्णुगाड परियोजना भी हो सकता है कारण पिछले साल जुलाई में शोध करने वाले प्रो. एसपी सत्ती का कहना है कि 24 दिसंबर 2009 में हेलंग की तरफ से लगभग तीन किमी की दूरी पर इस सुरंग में टनल बोरिंग मशीन फंस गई थी। उसके कारण सेलंग गांव से तीन किमी ऊपर पानी के भूमिगत स्रोत को उसने छेड़ दिया। इसके बाद लगभग एक माह तक वहां पानी रिसता रहा। उन्होंने आशंका जताई कि यह पानी भी जोशीमठ के धंसने की वजह हो सकता है। इसके अलावा तपोवन में पिछले साल जो त्रासदी आई थी, उसके बाद सुरंग में पानी घुस गया था। संभव है कि यह पानी अब नए स्रोत के जरिए बाहर आ रहा है। इस गांव से हुई जमीन धंसने की शुरुआत जोशीमठ से करीब 8 किमी. ऊपर जाने पर 7000 फुट की ऊंचाई पर सुनील नाम का गांव है। सबसे पहले इसी गांव में जमीन धंसने की शुरुआत हुई थी। जोशीमठ की घटनाओं से महीनों पहले यहां के घरों की दीवारों में दरारें दिखना शुरू हो गई थीं। पिछले कई दिनों में ये दरारें इतनी बड़ी हो गई कि अब घर के घर टूट रहे है। पहाड़ की ढलान पर बसा यह गांव खत्म होने के कगार पर है। यहां रहने वाले कुछ परिवारों को शिफ्ट कर दिया गया है। जोशीमठ में जमीन धंसने की घटनाओं के चलते अब तक लगभग 723 घरों में दरारें पड़ चुकी हैं। 131 परिवारों को अस्थायी रूप से विस्थापित किया जा चुका है। इनमे से 10 परिवार ऐसे है जिनके आशियाने पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं । मैन्युअल रूप से धराशाई किया जाएगा जोशीमठ में जिन घरों में दरारें आ चुकी हैं और जो रेड जोन में आ गए हैं, उन्हें जल्द ही गिराने का कार्य शुरू किया जायेगा। स्थानीय लोगों और होटल मालिकों की तरफ से सरकार की इस कार्रवाई का लगातार विरोध किया गया है। होटल संचालकों की तरफ से मुआवजे की मांग सरकार से की जा रही है। दरअसल ‘माउंट व्यू' और ‘मालारी इन' नाम के होटलों को गिराने का फैसला किया गया था। इन दोनों ही होटलों में बड़ी दरार आ गयीं थी और दोनों एक-दूसरे की ओर झुक गये थे। इससे आसपास की इमारतों को खतरा पैदा हो गया था। विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने फैसला किया है कि किसी भी इमारत को गिराने के लिए बुलडोजर जैसी किसी भी हैवी मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जिससे जमीन के हिलने या झटके आने का खतरा हो। इमारतों-घरों को तोड़ने के लिए हथौड़े, ड्रिलर्स और अन्य सामान उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये है वर्तमान स्थिति - बीआरओ ने हेलंग बाईपास का काम रोका - एनटीपीसी पावर प्रोजेक्ट का काम रुका - जोशीमठ-औली रोपवे सेवा बंद - रोपवे के टावर नंबर 1 पर जमीन धंसी - दो हजार प्री-फैब्रिकेटेड मकान बनाने की तैयारी - एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम अलर्ट प्री-फैब्रिकेटेड भवन तैयार करने के आदेश भू-धंसाव की समस्या के समाधान के लिए जोशीमठ का जियो टेक्निकल और जियो फिजिकल अध्ययन कराया जाएगा। जिन क्षेत्रों में घरों में दरारें नहीं हैं वहां भवन निर्माण के लिए गाइडलाइंस जारी की गयी है। इस क्षेत्र का हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन भी कराया जाएगा। जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को शिफ्ट करने के लिए एनटीपीसी और हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) को 2000 प्री-फैब्रिकेटेड भवन तैयार करने के आदेश दिए हैं। 1.5 लाख की अंतरिम सहायता जोशीमठ में प्रभावित परिवारों को तात्कालिक तौर पर ₹1.5 लाख की धनराशि अंतरिम सहायता के रूप में दी जा रही है। उत्तराखंड सरकार का कहना है कि भू-धंसाव से जो स्थानीय लोग प्रभावित हुए हैं उनको मार्केट रेट पर मुआवजा दिया जाएगा। लोगों को पुनर्वास के लिए 45 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के करीबियों में गिने जाने वाले घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेश धर्माणी मंत्रिमंडल विस्तार के पहले चरण में मंत्री नहीं बन पाए हैं। चुनाव परिणामों के बाद से धर्माणी लगातार मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ थे। समर्थकों को उम्मीद थी कि बिलासपुर जिले से जीत कर आए एक मात्र कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी मंत्रिमंडल में शामिल होंगे। मगर अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। कहा तो ये भी गया कि धर्माणी से पूछा जा चुका था कि उन्हें कौन सा विभाग चाहिए, लेकिन अंतिम सूची से उनका नाम काट दिया गया। मंत्री पद न मिलने से धर्माणी के समर्थक खूब आहत हुए है। मंत्री न बनाने पर उनके एक समर्थक ने तो रोष प्रकट करते हुए मुंडन भी करवा लिया। सोशल मीडिया पर भी बिलासपुर जिले को मंत्री पद की खूब मांग हो रही है। अब धर्माणी को मंत्री पद मिलता है या नहीं ये तो वक्त ही बताएगा, बहरहाल इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि धर्माणी मंत्री पद के प्रबल दावेदार है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव राजेश धर्माणी इस मर्तबा भाजपा सरकार के मंत्री राजेंद्र गर्ग को हराकर विधानसभा पहुंचे है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के गृह जिला बिलासपुर के घुमारवीं से तीसरी बार विधायक बने राजेश धर्माणी की हाईकमान और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से भी नजदीकियां हैं। उनकी जुझारू छवि को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई जिम्मेदारियां भी सौंपी। बिलासपुर जिले से कांग्रेस का सिर्फ एक विधायक जीत कर आया है और वो राजेश धर्माणी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने मंत्रीमंडल में जिन प्रोफेशनल्स को शामिल करने की बात कही थी उनमे से एक राजेश धर्माणी भी हो सकते है। धर्माणी ने एनआईटी हमीरपुर से बीटेक सिविल और फिर एमबीए की पढ़ाई की है। 1990 में राजेश धर्माणी ने राजनीति में एंट्री की और इसके बाद वो प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव, जिला कांग्रेस के अध्यक्ष के पद पर रहे। धर्माणी कांग्रेस चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं। धर्माणी ने 2007 में घुमारवीं विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा था और तब भाजपा के कर्मदेव को 1931 वोटों से हराया था। फिर 2012 में राजेश धर्माणी ने भाजपा के राजेंद्र गर्ग को 3,208 वोट से हराया। उस समय सरकार ने उन्हें मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया, लेकिन 2017 के चुनाव में धर्माणी को 10,435 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इस बार धर्माणी पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग को हराने में कामयाब रहे। धर्माणी कांग्रेस के ईमानदार नेताओं में से एक है और अपनी स्वच्छ छवि के लिए जाने जाते है। इसके बावजूद उन्हें मंत्री पद नहीं मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। माना जा रहा है कि शिमला संसदीय सीट को अधिक तवज्जो देने के चक्कर में धर्माणी का पत्ता कटा है। धर्माणी के समर्थक तो ये तक कह रहे है कि सीएम सुक्खू पर भरोसे की वजह से धर्माणी ने अपने हक़ की लड़ाई नहीं लड़ी। अब कैबिनेट के अगले विस्तार में धर्माणी मंत्री बनते है या नहीं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है।
हिमाचल प्रदेश में येलो अलर्ट के बीच बुधवार को अटल टनल रोहतांग, लाहौल - स्पीति और पांगी में ताजा बर्फबारी हुई है I नारकंडा और कुफरी में बर्फ के फाहे गिरे है। राजधानी शिमला सहित कई क्षेत्रों में दिन भर बादल छाए रहे। प्रदेश में बुधवार को 145 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। लाहौल-स्पीति में ही 139 सड़कें बंद हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने वीरवार और शुक्रवार को भी प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश व बर्फ़बारी का पूर्वानुमान जताया है। 14 जनवरी से मौसम साफ रहने के आसार हैं। केलांग में न्यूनतम तापमान के साथ अधिकतम तापमान भी माइनस में पहुंच गया है। मनाली-केलांग मार्ग पर वाहन आवाजाही पर रोक लगा दी है। केलांग में न्यूनतम तापमान के साथ अधिकतम तापमान भी माइनस में पहुंच गया है। बुधवार सुबह मनाली के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी हुई, जबकि मनाली सहित निचले इलाकों में हल्की बारिश हुई। लोगों को अटल टनल, हामटा और जलोड़ी दर्रा की ओर न जाने की हिदायत दी गई है। बुधवार को केलांग में अधिकतम तापमान -1.7, सोलन में 5.8 , कुकुमसेरी में 0.9, कल्पा में 4.1,मनाली में 8.2, बिलासपुर में 7.0 , डलहौजी में 9.8, ऊना में 12.6, शिमला में 12.9 और धर्मशाला में 14.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। वहीं कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिला में बर्फबारी से हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है। मनाली स्थित रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान ने अलर्ट जारी किया है। डीजीआरई ने हिमाचल से लेकर कुपवाड़ा व कारगिल के हिमालय इलाकों के सात जगहों पर हिमखंड गिरने की आशंका जताई है। अगले 24 घंटों में चंबा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल और स्पीति, गांदरबल, कुपवाड़ा, कारगिल में 2500 मीटर से ऊपर हिमस्खलन की आशंका है। सहायक उपायुक्त कुल्लू शशिपाल नेगी ने कहा कि डीजीआरई मनाली ने पर्वतीय क्षेत्रों में हिमस्खलन की चेतावनी जारी की है।
दिल्ली समेत उत्तर भारत के कुछ राज्यों में ठंड से राहत मिलने की अभी कोई भी संभावना नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार मैदानी इलाकों में तापमान -4 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक रहने वाला है। मौसम विभाग ने कई इलाकों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार 14 से 19 जनवरी के बीच पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश सप्ताह के दौरान भीषण शीतलहर की चपेट में रहेंगे।
Maruti Suzuki Jimny has finally been unveiled in a 5-door version at the Auto Expo 2023. The off-roader has been spotted several times during its test runs and TVC shoots on Indian roads. To be manufactured locally at Maruti Suzuki’s Gujarat facility, it will wage war against Mahindra Thar and Force Gurkha in India. The company has sold more than 3.2 million units of the Jimny in global markets to date. The JIMNY is built on the 4 essentials of an off-road machine – Ladder Frame Chassis, Ample Body Angles, 3-link rigid axle suspension, and ALLGRIP PRO (4WD) with low-range transfer gear (4L mode). ALLGRIP PRO offers the extreme off-road ability to meet the driver’s spirit of adventure. With a body-on-frame design, the rugged Jimny gets squared body proportions for a strong body profile. It gets signature design elements such as the clamshell bonnet, vertical slits in the front grille, and iconic round headlamps from the legendary Suzuki JIMNY. This JIMNY will be available in 7 color options including 5 monotone shades and 2 dual-tone options. It features the globally renowned Kinetic Yellow shade originally developed to make it stand out in poor weather conditions. This JIMNY comes loaded with safety features such as 6 airbags, Brake (LSD) Limited Slip Differential, ESP with hill hold assist, hill decent control, rear-view camera, and ABS with EBD. The Jimny will be powered by the K-series 1.5-litre engine with Idle Start-Stop technology and is mated to specially tuned 5-speed Manual and 4-speed Automatic Transmission options.
Chief Minister Sukhvinder Singh Sukhu has mourned the sad demise of Amit Sharma (23) son of Vijay Kumar of village Talasi Khurd, tehsil and district Hamirpur and Havildar Amrik Singh (39) of village Mandwara of Dhanari tehsil of district Una, of 14 Dogra Regiment who were martyred in an accident in Machhil Sector of Kupwara district of Jammu and Kashmir. He has also mourned the demise of Naib Subedar Purshottam Kumar from village Majua Uttmi of Jammu who also sacrificed his life in this tragic incident. Chief Minister, while expressing his condolences to the bereaved family members assured to extend all the possible help to the grief-stricken family from the government and also prayed to the Almighty to grant peace to departed souls and strength to the family members to bear this irreparable loss. Deputy Chief Minister, Mukesh Agnihotri also expressed deep anguish over the demise of army Jawans and prayed almighty to give strength to the bereaved family members. In his condolence message, he said that the government always holds the serving and ex-servicemen in high esteem. We can never forget the sacrifices of the brave soldiers towards the Nation, he said. The vehicles in which these three brave-hearts were traveling skidded off the road during patrolling on a regular operation task in the forward area of the Machhil sector late at night on Tuesday.
कुपवाड़ा उत्तरी कश्मीर के माछील सेक्टर में एलओसी के पास एक ऑपरेशन टास्क के दौरान सेना के 3 जवान खाई में गिर गए। हादसे में 3 जवान शहीद हो गए हैं । तीनों जवानों के पार्थिव शरीर को खाई से निकाल लिया गया है । जानकारी के मुताबिक शहीद होने वाले तीनों जवानों में एक जेसीओ (जूनियर कमीशंड ऑफिस ) और दूसरा ओआर (अन्य रैंक ) शामिल है। बताया जा रहा है कि जिस इलाके में यह जवान खाई में गिरे हैं वह बर्फीला इलाका है। भारतीय सेना ने बयान जारी कर कहा है कि एक नियमित ऑपरेशन टास्क के दौरान एक जेसीओ और दो अन्य रैंक का एक दल ट्रैक पर बर्फ गिरने के बाद गहरी खाई में फिसल गया। तीनों जवानों के पार्थिव शरीर को निकाल लिया गया है। आगे की कार्यवाही की जा रही है। वहीं इस हादसे में मारे गए दो जवान हिमाचल के हमीरपुर और ऊना जिला से संबंध रखते हैं जबकि अन्य एक जवान जम्मू से संबंध रखते थे। हिमाचल प्रदेश के 2 जवानों की पहचान हवलदार अमरीक सिंह(39) निवासी ग्राम मंडवारा, मारवाड़ी, तहसील घनारी जिला ऊना और अमित शर्मा निवासी तलाशी खुर्द,कीरवी हमीरपुर के तौर पर हुई है । हमीरपुर के सिपाही अमित शर्मा 4 साल पहले ही फौज में भर्ती हुए थे। साल 2019 में उन्होंने सेना ज्वाइन की थी। वह अपने पीछे माता-पिता को छोड़ गए हैं । वही ऊना के हवलदार अमरीक सिंह साल 2001 में सेना में भर्ती हुए थे। उनका 11 साल का एक बेटा है। वह अपने पीछे बेटे और पत्नी को छोड़ गए हैं। घटना के बाद से दोनों जवानों के घरों पर मातम छा गया है।
हिमाचल के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई है। लाहौल स्पीति जिले के लोसर में 2 इंच, रोहतांग टनल और कुंजुमपास, बारालाचा में 9 बजे तक 3 इंच ताजा हिमपात हुआ है। लाहौल स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चंबा के पांगी, भरमौर के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो रही है। शिमला में भी मौसम ने करवट बदली है। सुबह से आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक़ प्रदेश अगले 5 दिन मौसम खराब रहेगा। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि किन्नौर, लाहौल स्पीति और कुल्लू जिले में अधिक ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में भारी हिमपात का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि शिमला, चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिले के ऊंचे वाले इलाकों में भी अगले 3 दिन बर्फबारी हो सकती है।
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है I तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। भारत मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले 24 घंटे तक दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और पंजाब में घना कोहरा छाया रहेगा I पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है तो मैदानी राज्यों में शीतलहर का प्रकोप जारी है, जिसके चलते ठंड बहुत बड़ रही है I ठंड के साथ भीषण कोहरा भी पड़ रहा हैI सोमवार रात को भी कोहरे के चलते विजिबिलिटी काफी कम थी I वाहनों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत में कड़ाके ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग की वेबसाइट के मुताबिक सुबह दिल्ली में सुबह साढ़ें 5 बजे पारा 6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया I चंडीगढ़ में 9.8 डिग्री सेल्सियस, भोपाल 9.6 और पटना में तापमान 9.2 डिग्री रहा I उत्तर प्रदेश की बात करें तो झांसी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री रहा I
Snowfall has started in the higher altitude areas of Himachal. Losar in Lahaul Spiti district has received 2 inches of fresh snow, Rohtang Tunnel, Kunjumpas, and Baralacha have received 3 inches of fresh snow till 9 am. Light snowfall is received in higher altitude areas of Lahaul Spiti, Kinnaur, Kullu, and Chamba's Pangi, Bharmour. The weather has changed in Shimla as well. A fresh western disturbance has affected the western Himalayan region from the night of January 10, officials said. The Meteorological Centre, Shimla, has issued a warning for the possible disruption of essential services like water, electricity, communications, and related services.
हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। लाहौल स्पीति जिले के लोसर में 2 इंच, रोहतांग टनल, कुंजुमपास, बारालाचा में 9 बजे तक 3 इंच ताजा हिमपात हो चुका है। लाहौल स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और चंबा के पांगी, भरमौर के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी हो रही है। राजधानी शिमला में भी मौसम ने करवट बदल ली है सुबह से आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होने से अगले 5 दिन मौसम खराब रहेगा। किन्नौर, लाहौल स्पीति और कुल्लू जिले में अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि शिमला, चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिले के ऊंचे इलाकों में भी अगले 3 दिन बर्फबारी हो सकती है। वहीं मौसम विभाग ने चंबा के तीसा और भटियात में 12 व 13 जनवरी को भारी हिमपात का अलर्ट जारी किया है और सिरमौर जिले में परसों भारी बर्फबारी हो सकती है।
राजधानी शिमला में फर्जी दस्तावेज दे कर नोकरी लेने का एक और मामला सामने आया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिमला पोस्टल डिविजन के तहत देवनगर शाखा में एक व्यक्ति ने अपने फर्जी सर्टिफिकेट देकर नौकरी ले ली। आरोपी का नाम मनीष कुमार बताया जा रहा है I आरोपी सरकाघाट जिला मंडी का रहने वाला है। शिमला पोस्ट ऑफिस के सुपरिंटेडेंट विकास नेगी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि शिमला पोस्टल डिविजन के तहत देवनगर शाखा में ग्रामीण डाक सेवक शाखा पोस्ट मास्टर के चयन के लिए उम्मीदवारों के इंटरव्यू हुए थे। इस दौरान मनीष कुमार का चयन देवनगर शाखा में ग्रामीण डाक सेवक शाखा पोस्ट मास्टर के पद पर हुआ था। उसने गत 9 सितंबर 2022 को अपने पद पर जॉइन किया था। शिकायतकर्ता विकास नेगी का कहना है कि उक्त व्यक्ति का मैट्रिक सर्टिफिकेट जांच के लिए निदेशक झारखंड अकेडमिक काउंसिल ज्ञानदीप कैंपस भेजा गया। वहां पर जांच के दौरान उसका सर्टिफिकेट फर्जी निकला। सुपरिंटेडेंट विकास नेगी की शिकायत पर पुलिस ने थाना सदर में मामला दर्ज किया है। पुलिस आज इस मामले का पूरा रिकॉर्ड कब्जे में लेगी। इसके बाद आरोपी पर कार्रवाई की जाएगी I
021 में मंडी संसदीय उपचुनाव जीतने वाली कांग्रेस के लिए 2024 में प्रदर्शन दोहराना मुश्किल हो सकता है। प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी के बाद मंत्रिमंडल में मंडी संसदीय क्षेत्र को उचित तवज्जो मिलती नहीं दिखी है। हालांकि विधानसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा था और पार्टी 17 में से सिर्फ 5 सीटें ही जीती पाई थी। जो पांच विधायक जीते उनमें से दो मंत्री पद के प्रबल दावेदार थे, किन्नौर से जगत सिंह नेगी और कुल्लू से सुंदर सिंह। इनमें से जगत सिंह नेगी को तो मंत्री पद मिल गया लेकिन सुंदर ठाकुर को सीपीएस बनाकर एडजस्ट किया गया है। वहीं अगले कैबिनेट विस्तार में शेष तीन विधायकों में से किसी को भी मंत्री पद मिलेगा, ये मुश्किल लगता है। यानी ये लगभग तय है कि सुक्खू कैबिनेट में मंडी संसदीय क्षेत्र को सिर्फ एक ही मंत्री पद मिलेगा। गौरतलब है कि जयराम सरकार में मंडी संसदीय क्षेत्र से खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अलावा दो मंत्री थे। मनाली से विधायक रहे गोविन्द सिंह ठाकुर और लाहुल स्पीति से विधायक डॉ राम लाल मारकंडा को मंत्री पद मिला था। वहीं करीब डेढ़ वर्ष तक मंडी सदर विधायक अनिल शर्मा भी मंत्री रहे थे। वहीं इससे पहले वीरभद्र सरकार में मंडी संसदीय क्षेत्र से पांच मंत्री थे। विधानसभा चुनाव में कमजोर था कांग्रेस का प्रदर्शन बीते विधानसभा चुनाव में मंडी संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है। संसदीय क्षेत्र के अधीन जिला मंडी की 9 सीटें आती है और सभी पर कांग्रेस परास्त हुई। वहीँ कुल्लू की चार में से पार्टी को दो सीटें ही मिली। कुल्लू सदर सीट से सुंदर सिंह जीते और मनाली सीट से भुवनेश्वर गौड़। मंडी संसदीय क्षेत्र में आने वाली जिला चम्बा की इकलौती सीट भरमौर में भी कांग्रेस हार गई। हालांकि किन्नौर में कांग्रेस के जगत सिंह नेगी, लाहुल स्पीति में रवि ठाकुर और जिला शिमला की रामपुर सीट पर नंदलाल जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। अगले कैबिनेट विस्तार में भी संभावना नहीं ! अब तक सुक्खू कैबिनेट में मंडी संसदीय क्षेत्र की किन्नौर सीट से विधायक जगत सिंह नेगी को मंत्री बनाया गया है। जबकि कुल्लू सदर से विधायक सुंदर सिंह सीपीएस बने है। होली लॉज खेमे से रामपुर विधायक नंदलाल के लिए भी मंत्री पद की मांग थी लेकिन उन्हें मंत्री पद नहीं मिला। जिला शिमला को पहले ही तीन मंत्री पद मिल चुके है, ऐसे में उन्हें अगले विस्तार में भी मंत्री पद मिलने की कोई संभावना नहीं दिखती। वहीं जनजातीय जिला किन्नौर को भी मंत्री पद मिल चुका है, ऐसे में दूसरे जनजातीय जिला लाहुल स्पीति को मंत्री पद मिलना बेहद मुश्किल है। जिला कुल्लू को भी मंत्री पद मिलने की सम्भावना नहीं है। हालांकि शेष तीन विधायकों को बोर्ड -निगमों के नियुक्ति दी जा सकती है।
सुक्खू मंत्रिमंडल में सात मंत्रियों ने शपथ ले ली है लेकिन अब भी तीन मंत्री पद रिक्त है। मंत्री पद के प्रबल दावेदारों में शामिल सुधीर शर्मा और राजेश धर्माणी का नाम एक दिन पहले तक लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन सात नवनियुक्त मंत्रियों की लिस्ट में इन दोनों ही नेताओं के नाम पर मोहर नहीं लगी। लिहाजा दोनों ही नेताओं के समर्थकों में निराशा है। आलम ये है कि राजेश धर्माणी के एक समर्थक ने तो विरोध में अपने बाल तक मुंडवा लिए। इन दोनों के अलावा पहले मंत्रिमंडल विस्तार में एक और नेता के हाथ निराशा आई है, वो है सुंदर सिंह ठाकुर। मंत्री पद के चाहवान सुंदर सिंह ठाकुर को सीपीएस बनाकर सेट कर दिया गया। दरअसल माना जा रहा था कि मंडी संसदीय क्षेत्र से दो मंत्री पद दिए जा सकते है, एक नाम जगत सिंह नेगी का तय था और दूसरा नाम सुंदर ठाकुर का माना जा रहा था। किन्तु ऐसा हुआ नहीं। बहरहाल अब भी सुक्खू कैबिनेट के तीन स्थान रिक्त है और इन स्थानों के लिए सुधीर और राजेश धर्माणी के अलावा भी कई दावेदार है। इन तीन स्थानों को भरते वक्त कांग्रेस को क्षेत्रीय संतुलन के साथ -साथ जातिगत संतुलन का भी विशेष ख्याल रखना होगा। सीएम सहित अब तक नौ मंत्री शपथ ले चुके है। पहले जातिगत नजरिये से सुक्खू कैबिनेट पर निगाह डालते है। मुख्यमंत्री सहित कुल नौ मंत्रियों में से 6 राजपूत है, एक ब्राह्मण, एक एससी और एक ओबीसी। ऐसे में शेष तीन पदों पर मुमकिन है कि एससी और ब्राह्मण विधायकों को तवज्जो मिले। अब संसदीय क्षेत्रवार मौजूदा मंत्रिमंडल पर निगाह डाले तो शिमला संसदीय क्षेत्र को पांच, मंडी संसदीय क्षेत्र को एक और कांगड़ा संसदीय क्षेत्र को भी एक ही मंत्री पद मिला है। वहीँ मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री दोनों ही हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से आते है। जिला के हिसाब से देखे तो सबसे ज्यादा तीन मंत्री पद शिमला को मिले है, इसके अलावा सोलन, सिरमौर, कांगड़ा और किन्नौर को एक -एक मंत्री पद मिला है। मुख्यमंत्री हमीरपुर जिला से है, तो उप मुख्यमंत्री ऊना जिला से। चम्बा जिला को विधानसभा अध्यक्ष का पद मिला चुका है। अब तक सबसे बड़े जिला कांगड़ा को सिर्फ एक मंत्री पद मिला है और ऐसे में संभव है कि कांगड़ा को दो मंत्री पद और मिले। शेष एक मंत्री पद जिला बिलासपुर या जिला मंडी में से किसी एक को मिल सकता है। दिलचस्प बात ये है कि बिलासपुर और मंडी से कांग्रेस के सिर्फ एक -एक विधायक जीते है, मंडी की धर्मपुर सीट से चंद्रशेखर और बिलासपुर की घुमारवीं सीट से राजेश धर्माणी विधानसभा पहुंचे है। माहिर मान रहे है कि इन दोनों में से किसी एक को मंत्री पद मिल सकता है और दूसरे को कैबिनेट रैंक या विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर सेटल किया जा सकता है। रोचक बात ये है कि ये दोनों ही सीटें हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में आती है, यानी हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को सीएम और डिप्टी सीएम के अतिरिक्त एक मंत्री और मिल सकता है। जानकार मान रहे है कि शेष दो मंत्री जिला कांगड़ा और कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के हिस्से जायेंगे। इनमें से एक मंत्री एससी कोटे से हो सकता है और दूसरा ब्राह्मण। जो एससी चेहरा चर्चा में है वो है जयसिंहपुर से दूसरी बार विधायक बने यादविंदर गोमा। दरअसल बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान चाहता है कि अधिक से अधिक एससी चेहरों को कैबिनेट में जगह मिले, ऐसे में संभव है कि गोमा कई वरिष्ठ नेताओं को पछाड़ कर मंत्री पद ले जाएं। वहीँ ब्राह्मण चेहरे की बात करें तो सुधीर शर्मा के अलावा ज्वालामुखी विधायक संजय रतन मजबूत दावेदार है। इनके अलावा रघुबीर बाली भी ब्राह्मण है। पहले मंत्रिमंडल विस्तार में सुधीर शर्मा की शपथ न होने के बाद माहिर मान रहे है कि संजय रतन का दावा भी अब मजबूत है।
देश की राजधानी दिल्ली में लगातार कोहरे का असर बढ़ रहा है I कोहरे से यातायात प्रभावित हो रहा है I एक तरफ सड़कों पर जहां गाड़ियां रेंग रही हैं तो वहीं ट्रेनों की रफ्तार भी धीमी पड़ी है I दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब, कोलकाता समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आने-जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस सहित दर्जनों ट्रेनें देर से चल रही हैंI कई शहरों में तो घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम है, जिससे रेल यातायात से लेकर फ्लाइट्स तक प्रभावित हैं I दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर आज 9 जनवरी की सुबह 9 बजे तक के अपडेट के मुताबिक करीब 25 उड़ानें लेट हैं I जबकि दिल्ली आने-जाने वाली उत्तर रेलवे की 29 ट्रेन पहले ही अपने निर्धारित समय से देर से चल रही हैंI दिल्ली और पंजाब से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में घना कोहरा देखने को मिल रहा है I मौसम विभाग (IMD) के अनुसार सुबह 5.30 बजे पंजाब के बठिंडा, यूपी के आगरा, बरेली और लखनऊ में जीरो विजिबिलिटी दर्ज की गई I वहीं, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के कई इलाकों में भी जीरो विजिबिलिटी रही I इसके अलावा अमृतसर में विजिबिलिटी 25 मीटर रिकॉर्ड की गई है I
प्रदेश सरकार ने अधिसूचित प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को 25 हजार रुपये की सहायता राशि तुरंत जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस संदर्भ में जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निदेशक एवं विशेष सचिव राजस्व सुदेश मोक्टा ने बताया कि प्राकृतिक आपदा के कारण मृत्यु होने पर मृतक के निकटस्थ सम्बन्धी को 24 घंटे के भीतर सहायता राशि जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का प्रावधान है। इसमें से 25 हजार रुपये की सहायता राशि 24 घंटे के भीतर और शेष राशि भी चार दिन के भीतर जारी कर दी जाएगी। पूर्व में यह राशि जारी होने में अधिक समय लगता था। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों यदि वह आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर नहीं होते हैं, तो उन्हें न्यूनतम 5000 रुपये की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करने के उपरांत सामाजिक दायित्वों के निर्वहन को सर्वोच्च अधिमान दिया है। प्रदेश सरकार ने अपने निर्णयों से साबित किया कि सरकार समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत की महान टेनिस खिलाड़ियों में शुमार सानिया मिर्जा ने अपने प्रोफेशनल टेनिस करियर से रिटायरमेंट लेने का फैसला कर लिया है। पूर्व डबल्स नंबर एक सानिया मिर्जा 19 फरवरी से शुरू होने वाले WTA 1000 इवेंट दुबई टेनिस चैंपियनशिप में आखरी बार खेलेंगी। आपको बता दे की सानिया पिछले कई महीनो से चोट से जूझ रही है, जिसके चलते उन्होंने पिछले 6 महीनो में किसी भी तरह के टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है। उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वह 2022 के आखिर में रिटायरमेंट का ऐलान कर देगी। भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्जा फरवरी में दुबई टेनिस चैंपियनशिप में अपना आखिरी मैच खेलेंगी, जो इसी साल 19 फरवरी से शुरू होगीI इस के बाद वह टेनिस के अलविदा कह देंगी I सानिया ने भारत के लिए 6 ग्रैंडस्लैम खिताब अपने नाम किए हैं I वहीं सानिया मिर्जा 2004 में अर्जुन अवॉर्ड, 2006 पद्म श्री अवॉर्ड ,2015 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड और 2016 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी सम्मानित हैं I
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दी का सितम जारी हैI दिल्ली में कुछ जगहों पर पारा 2 डिग्री से भी नीचे लुढ़क गया हैI लोगों को शनिवार को लगातार तीसरे दिन कोहरे और शीतल हवाओं के चलते भीषण ठण्ड का सामना करना पड़ा I देश की राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान शिमला, मसूरी, नैनीताल जैसे हिल स्टेशन से भी नीचे पहुंच चुका है। सफरदरजंग में आज यानी शनिवार को न्यूनतम तापमान 2.2°C रिकॉर्ड किया गया, जबकि लोधी रोड पर 2.0°C और रिज में 1.5°C रिकॉर्ड किया गया है I ठंड, शीतलहर और कोहरा का ट्रिपल अटैक देखने को मिल रहा है I राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जनवरी में जमाने वाली ठंड पड़ रही है। दिन के समय भी लोग ठंड से ठिठुर रहे है I दिल्ली में खराब मौसम के चलते कोहरे की वजह से रेल और विमान सेवाओं पर भी प्रभाव पड रहा है I
टीम इंडिया का श्री लंका के खिलाफ आज आखरी निर्णायक मैच है। यह मैच राजकोट में सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में शाम 7 बजे से शुरू होगा। अब देखना रोचक होगा कि अगर ये मैच टीम इंडिया जीत गयी तो लगातार पिछले 4 सालों में यह उसकी 10वीं टी-20 सीरीज में जीत होगी। आपको बता दे कि इससे पहले हुए मैचो में भारत ने शानदार तरीके से विजय हासिल की है। इस दौरान टीम इंडिया अपने घर में एक भी टी20 सीरीज नहीं हारी है। भारतीय टीम को अपने घर में पिछली बार फरवरी 2019 में हार मिली थी। तब ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टी20 सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप किया था। राजकोट मैदान की पिच रिपोर्ट यह बताती है कि पिच सपाट है और बल्लेबाजों की मददगार रहने की उम्मीद है। टॉस की भूमिका भी इस मैच में अहम होगी और दोनों कप्तान पहले गेंदबाजी करना पसंद करेंगे। राजकोट में खेले गए चार टी20 मैचों में पहले गेंदबाजी करने वाली टीम विजेता रही।
दिल्ली में मेयर पद का होने वाला चुनाव टल गया है I जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने सुबह दिल्ली नगर निगम मुख्यालय सिविक सेंटर में मनोनीत पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह शुरू होते ही पीठासीन अधिकारी के फैसले के खिलाफ हंगामा शुरू कर दिया और आसन के पास जाकर नारेबाजी करने लगे। ‘आप’ और भाजपा पार्षदों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। इस मारपीट में दोनों ओर के कुछ पार्षदों को चोटें भी लगी और महिला पार्षदों के साथ भी धक्का मुक्की की गयीI पुलिस ने बीच-बचाव किया, वहीं अब इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा और 'आप' के तमाम दिग्गज नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हंगामे के चलते आज दिन के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई हैI
भारतीय सेना में पहली बार महिला अधिकारियों को कर्नल बनाया जाएगा। इसके लिए 108 महिला अधिकारियों को कर्नल रैंक का प्रमोशन दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना में इंजीनियर्स, मिलिट्री इंटेलिजेंस, आर्मी एयर डिफेंस, आयुध और सेवा सहित शाखाओं में कमांड भूमिकाओं के लिए महिला अधिकारियों का चयन किया जाएगा I इसके लिए प्रक्रिया सोमवार 9 जनवरी से शुरू की जाएगी I यह कदम सियाचिन ग्लेशियर में एक महिला अधिकारी को तैनात किए जाने के तुरंत बाद उठाया गया है और अब लगभग सभी सेवाओं में ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को समान अवसर दिए जा रहे हैं I अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को पुरुषों के बराबर अवसर दिए जा रहे हैं I कर्नल रैंक में टेनेंट कमांड असाइनमेंट के लिए महिला अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है I बता दें कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए एक वर्ष में महिला कैडेटों के लिए 20 वैकेंसी निर्धारित की गई हैं I इसके अलावा, ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकेडमियों इसके अलावा, ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकेडमियों में एसएससी महिला अधिकारियों के लिए 80 वैकेंसी जारी की जाती हैं I सेना उड्डयन कोर की फ्लाइंग शाखा में महिला अधिकारियों की सीधी कमीशनिंग 2022 से शुरू हुई है I
न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP) में भारत की उच्च शिक्षा को ग्लोबल प्लेटफॉर्म में लाने की बात कही गई है। भारत में जल्द ही हायर एजुकेशन के लिए फॉरेन यूनिवर्सिटीज के कैंपस खुलेंगे। गुरुवार को मीडिया के साथ यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार ने इस ड्राफ्ट के खास बिंदु साँझा किए। फॉरेन यूनिवर्सिटीज को भारत में अपना कैंपस सेटल करने के लिए क्या नियम फॉलो करने होंगे, इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फॉरेन यूनिवर्सिटीज का सेटअप शुरू करने के लिए यूजीसी का अप्रूवल लेना होगा। इस अप्रूवल के लिए उन्हें यूजीसी के सभी तय नियमों पर खरा उतरना होगा। यहां विदेशी छात्र भी पढ़ाई कर सकेंगे।
टीम इंडिया के स्टार विक्केट किपर व बल्लेबाज ऋषभ पंत का 30 दिसंबर को रुड़की के पास कार एक्सीडेंट हुआ था। ऋषभ पंत को ठीक होने में काम से काम 5 से 6 महीने लगेंगे। वहीं आईपीएल सीज़न 2023 के अप्रैल में होगा। ऐसे में अब सबकी नज़र इस बात पर है कि इस बार दिल्ली कैपिटल्स का कप्तान कौन होगा। दिल्ली कैपिटल्स टीम के सामने ऋषभ पंत की जगह नया कप्तान चुनने की बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए टीम में दो प्लेयर ऑस्ट्रेलियाई ओपनर डेविड वॉर्नर और भारतीय ओपनर पृथ्वी शॉ बड़े दावेदार है। इनके अलावा भी ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर मिचेल मार्श और भारतीय स्टार मनीष पांडे भी रेस में बने हुए हैं। बीसीसीआई के मुताबिक ऋषभ पंत को काफी गंभीर चोटें लगी है, जिन्हे ठीक होने में कम से कम 3 से 6 महीने लग जाएंगे। ऐसे में ऋषभ पंत कबत क वापसी करेंगे, इसका सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है।
झारखंड के देवघर पुलिस ने 9 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने साइबर अपराधियों से 14 अवैध मोबाइल फ़ोन और 15 सिम कार्ड बरामद किए है। जानकारी के मुताबिक अपराधी PM किसान योजना निधि में पैसा दिलाने के नाम पर तो कभी बिजली का बिल न भरने के नाम पर लोगो से ठगी करते थे। इसके अलावा गूगल सर्च इंजन में कस्टमर केयर का फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर भी लोगों को शिकार बनाते थे। गौरतलब है कि देवघर पुलिस साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए अभियान चलती रहती है। उनके लिए यह एक बड़ी कामयाबी है। काफी दिनों से ठगी की शिकायतें मिलने के बाद से ही पुलिस इन ठगों की तलाश में जुटी हुई थी। फिलहाल, पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है, साथ ही यह जानने की कोशिश कर रही है कि अभी तक कितने लोगों को उन्होंने ठगी का शिकार बनाया है।
लाहौल स्पीति के केलोंग में बुधवार को -11 डिग्री तापमान जमाव बिंदु से भी नीचे हो गया। चंद्रभागा नदी सहित जल स्रोत जम चुके है, जिस कारण पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगो का कहना है कि पिछले कई दिनों से कड़ाके की ठण्ड हो रही है। दूसरी ओर सड़क पर फिसलन भी बढ़ गई है। डीसी लाहौल-स्पीति ने भी इस बाबत एडवाइजरी जारी की है। गौरतलब है कि मौसम विभाग ने वीरवार और शुक्रवार को प्रदेश में मौसम साफ बना रहने का पूर्वानुमान जताया है। सात-आठ जनवरी को कई क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश का पूर्वानुमान है। वीरवार को प्रदेश में ठंडी हवाएं चलने का येलो अलर्ट भी जारी हुआ है।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का गुरुवार यानी आज से हरियाणा में दूसरा फेज शुरू हो रहा है। राहुल गांधी सबसे पहले पानीपत पहुंचें। वे शाम करीब 6 बजे उत्तर प्रदेश से यमुना के रास्ते सनौली खुर्द में कार से पहुंचेंगे। वहाँ खेतों में बने टेंट हाउस में रात्रि ठहराव होगा। इसके बाद 6 जनवरी सुबह 6 बजे राहुल पैदल पुराने सनौली रोड से यात्रा की शुरुआत करेंगे। यहां से पैदल चलते हुए राहुल गांधी छाजपुर, निंबरी, उग्राखेड़ी, सनौली रोड और बबैल नाके से होते हुए पुरानी सब्जी मंडी शिव चौक से होकर संजय चौक तक पैदल जाएंगे। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का पहला रात्रि पड़ाव सनौली खुर्द में होगा। यहां उनके रुकने की व्यवस्था करने के लिए सनौली खुर्द गांव के मेन अड्डे पर करीब चार एकड़ जमीन को खाली कर साफ-सफाई कराई गयी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 जनवरी को होने वाली 'परीक्षा पर चर्चा' के आगामी 6वें संस्करण में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत करेंगेI यह कार्यक्रम तालकटोरा इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम जीवन को 'उत्सव' के रूप में मनाने के लिए तनाव पर काबू पाने में मदद करता है I यह कार्यक्रम पिछले पांच वर्षों से शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है I बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2018 में पहली बार परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम के तहत छात्रों, शिक्षकों व अभिभावकों के साथ संवाद किया था। इसके बाद से हर साल पीएम मोदी 'परीक्षा पे चर्चा' करते हैं। इस दौरान पीएम मोदी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ सीधे संवाद करते हैं। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार 'परीक्षा पर चर्चा' 2023 के लिए पंजीकरण वर्ष 2022 की तुलना में इस वर्ष दोगुने से अधिक हो गए हैं। लगभग 38.80 लाख प्रतिभागियों ने 'परीक्षा पर चर्चा' 2023 के लिए पंजीकरण कराया है, जबकि परीक्षा पर चर्चा' 2022 के लिए लगभग 15.7 लाख लोगों ने ही पंजीकरण करवाया था।
पांच बार के विधयाक कुलदीप सिंह पठानिया को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का 16वां अध्यक्ष चुना गया है। हिमाचल प्रदेश की चौदहवीं विधानसभा के शीत सत्र के दूसरे दिन सदन में कुलदीप सिंह पठानिया को विधानसभा अध्यक्ष बनाने के लिए तीन प्रस्ताव रखे गए थे। इस दौरान प्रोटेम स्पीकर चंद्र कुमार ने सदन की कार्यवाही का संचालन किया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पहला प्रस्ताव पेश किया कि कुलदीप सिंह पठानिया विधानसभा अध्यक्ष होंगे। इसका अनुमोदन नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा विधायक दल की ओर से किया जबकि दूसरा प्रस्ताव उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने पेश किया और इसका अनुमोदन शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान ने किया। इसके बाद तीसरा प्रस्ताव सोलन के कांग्रेस विधायक धनीराम शांडिल ने पेश किया। जिसका अनुमोदन सुलाह के विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने किया। प्रस्ताव पारित होने के बाद कुलदीप सिंह पठानिया को सीएम सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आसन पर बिठाया और दोनों ने नव निर्वाचित विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया को बधाई दी।
नीट पीजी स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कल यानी 6 जनवरी से शुरू हो रहा हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार, नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट काउंसलिंग 2023 स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड के लिए आवेदन प्रक्रिया कल से शुरू की जाएगी। सभी उम्मीदवार 8 जनवरी तक इसके लिए फीस का भुगतान कर सकते हैं। उम्मीदवारों को इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर जाकर लॉगइन करना होगा I एमसीसी की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार,सभी उम्मीदवारों को 6 जनवरी से 8 जनवरी के बीच च्वाइस भरने की अनुमति होगी, जबकि NEET-PG च्वाइस लॉकिंग विंडो 8 जनवरी को शाम 5 बजे से रात 11:59 बजे तक उपलब्ध रहेगी। उम्मीदवारों को काउंसलिंग में भाग लेने के लिए 50,000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट का भुगतान करना होगा। बता दें कि एमसीसी ने 2,244 पीजी सीटों और 62 एमडीएस सीटों को भरने के लिए नीट पीजी स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड काउंसलिंग आयोजित कर रहा है, जो पिछले राउंड के बाद खाली रह गई थी। 10 जनवरी को जारी होगा रिजल्ट नीट पीजी काउंसलिंग 2023 स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड अलॉटमेंट रिजल्ट 10 जनवरी को जारी किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को 10 जनवरी से 14 जनवरी तक आवंटित कॉलेज में रिपोर्ट करना होगा। वहीं इस काउंसिलिंग प्रक्रिया से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करना होगा।
जनवरी के पहले हफ्ते में दिल्ली का तापमान 2.2 डिग्री पहुंच गया हैI उत्तर भारत में शीतलहर के साथ कोहरे का सितम जारी है, लेकिन दिल्ली के तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। दिल्ली में मनाली, धर्मशाला, देहरादून, शिमला और नैनीताल से भी कम पारा दर्ज किया गया है। IMD के अनुासर कोहरे के कारण दिल्ली के पालम में बुधवार यानि 5 जनवरी को विजिबिलिटी 25 मीटर आंकी गई है। तापमान की बात करें तो दिल्ली के लोधी रोड पर आज सुबह इस सीजन का सबसे कम न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री दर्ज हुआ। वहीं सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री और अधिकतम 17 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। वहीं दूसरी तरफ देश के अन्य इलाकों पूर्वी विदर्भ, दक्षिण छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में हल्की बारिश हो सकती है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों और राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में कोहरा छा सकता है। वहीं बिहार, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तरी मध्य प्रदेश में भी घना कोहरा छाने की संभावना है I


















































