स्पेन में चल रहे महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का सफर सोमवार को खत्म हो गया। यहां एक अहम मुकाबले में भारतीय टीम को मेजबान स्पेन के हाथों रोमांचक शिकस्त मिली। स्पेन ने फुल-टाइम से ठीक 3 मिनट पहले गोल कर भारत की सभी उम्मीदों को खत्म कर दिया। इससे पहले भारतीय टीम पूल-बी में हुए अपने तीनों मुकाबलों में भी कोई जीत दर्ज नहीं कर पाई थी। भारतीय टीम के दो मैच ड्रॉ रहे थे बाकि एक मुकाबले में उसे हार मिली थी। स्पेन के खिलाफ क्रॉस ओवर मुकाबले में भारतीय टीम ने शुरुआत में दमदार खेल दिखाया। दोनों टीमों के बीच तीन क्वार्टर तक बराबरी की टक्कर देखनें को मिली, लेकिन चौथे क्वार्टर में स्पेन के के हमले तेज हो गए। स्पेन के फॉरवर्ड लगातार भारतीय रक्षा पंक्ति को भेद रहे थे, हालांकि ये हमले गोल में तब्दील नहीं हो पा रहे थे। मैच में जब 3 मिनट का खेल बाकी था, तब भारतीय रक्षापंक्ति बिखर गई और स्पेन ने गोल कर दिया। यह गोल निर्णायक साबित हुआ और भारत 1-0 से हार गया। गौरतलब है कि भारत के लिए ये वर्ल्ड कप बेहद ही खराब साबित हुआ है। टीम को चार में से एक भी मुकाबले में जीत नसीब नहीं हुई। पूली बी के मुकाबलों में इंग्लैंड और चीन ने भारत के साथ 1-1 से मुकाबले ड्रॉ खेले। वहीं न्यूजीलैंड ने 4-3 और स्पेन ने 1-0 से भारतीय टीम को मात दी।
भारत को नॉटिंघम में खेले गए टी20 सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच में 17 रनों से हार का सामना करना पड़ा। टीम इंडिया के लिए इस मैच में सूर्यकुमार यादव ने तूफानी शतक जड़ा। हालांकि इसके बावजूद भारतीय टीम नहीं जीत सकी। लेकिन टीम इंडिया ने तीन मैचों की सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लिया है। इंग्लैंड ने आखिरी मैच में भारत को 216 रनों का लक्ष्य दिया था। इसके जवाब में भारतीय टीम 198 रन ही बना सकी।
इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में सूर्याकुमार यादव ने 117 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन इसके बावजूद इसके दूसरे बल्लेबाजों की ओर से साथ नहीं मिलने के चलते इंडिया ने यह मुकाबला 17 रन से गंवा दिया। टीम इंडिया की हार के बाद पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने खराब फॉर्म में चल रहे बल्लेबाजों पर निशाना साधा है। सहवाग का कहना है कि अच्छा परफॉर्म करने वाले बल्लेबाजों को बाहर बैठना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ''इंडिया के पास बहुत सारे ऐसे बल्लेबाज हैं जो पारी की शुरुआत से ही बड़े शॉट लगा सकते हैं। उनमें से कुछ को बाहर बैठना पड़ रहा है।" वहीं टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज वेंटकेश प्रसाद ने भी विराट कोहली को हमला बोला है। प्रसाद ने कहा कि जब सौरव, सहवाग, जहीर, युवराज और भज्जी जैसे खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया जा सकता है तो विराट कोहली को क्यों नहीं।
दुनियाभर में 11 जुलाई को हर साल विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। पहले इस दिन जनसंख्या के साथ-साथ इंसान के विकास और प्रगति को सेलिब्रेट किया जाता था। लेकिन अब केवल लोगों को बढ़ती जनसंख्या नियंत्रण और बढ़ती जनसंख्या की खामियां बताते हुए जागरूक किया जाता है। इस बार की वर्ल्ड पॉपुलेशन डे थीम भी इसी पर रखी गई है। वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, इस साल विश्व की आबादी करीब 8 अरब हो गई है। पिछले साल यह साढ़े सात अरब से अधिक थी। इस वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस की थीम '8 अरब लोगों की दुनिया: सभी के लिए लचीला भविष्य, अवसर, अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना' है। इस थीम से स्पष्ट हो रहा है कि दुनिया की आबादी आठ अरब के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है, लेकिन यह अधिकारों व अवसर की समानता दूर है। इस दिन पूरी दुनिया में जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए तरह-तरह से उपायों से लोगों को परिचित कराया जाता है। इसके अलावा परिवार नियोजन के मुद्दे पर भी बातचीत की जाती है। इस दिन जगह-जगह जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम होते हैं और उन कार्यक्रमों के जरिये लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जाती है, ताकि बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाई जा सके।
देश के पूर्वोत्तर राज्यों में बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ के हालात बने हुए हैं। कुछ राज्यों के कई इलाकों में भूस्खलन की वजह से कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। फिलहाल पूर्वोत्तर राज्यों में असम इन दिनों बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित है। असम में इस साल अब तक बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 192 हो गई है। असम के कुल 12 जिलों में अभी भी तकरीबन 5.39 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। बताया जा रहा है कि असम के हैलाकांडी जिले में पिछले 24 घंटों में बाढ़ के कारण पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। जिसके कारण अब इस साल असम में बाढ़ के कारण मरने वाले की संख्या 173 और भूस्खलन की वजह से मारे गए लोगों की संख्या 19 हो गई है।
देश के अधिकतर हिस्सों में बारिश देखने को मिल रही है। हालांकि, दिल्ली समेत उत्तर भारत के राज्यों में बारिश कुछ खास स्तर पर नहीं दिखी है और लोग लगातार गर्मी से जूझ रहे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, आज से इन राज्यों में भी बारिश देखने को मिलेगी। दिल्ली में आज से मौसम में बदलाव दिखेगा और अगले कुछ दिन दिल्लीवासियों को गर्मी से राहत मिलेगी। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में आज से पूरे हफ्ते बारिश हो सकती है। तापमान भी ठीक बना रहेगा। अधिकतम तापमान 36-37 तक जा सकता है तो वहीं न्यूनतम तापमान 28 तक देखने को मिलेगा। वहीं, इस दौरान बादल भी छाए रहेंगे। आज की बात करें तो सोमवार दिल्ली में बारिश के पूरे अनुमान बने हुए हैं। बिजली भी कड़कते हुए दिख सकती है साथ ही बादल भी छाए रहेंगे। इसके साथ ही पूरे उत्तर भारत का भी मौसम बदलते दिखेगा। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में भी बारिश होते दिखेगी। जम्मू कश्मीर में भी हल्की से मध्यम बारिश का पूरा अनुमान बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के मौसम पर नजर डालें तो लखनऊ से लेकर आगर, अलीगढ़, गौतमबुध नगर, वाराणसी, बरेली समेत अन्य जिलों के लोगों को गर्मी से राहत मिलते दिखेगी। इस पूरे हफ्ते बादल भी छाए रहेंगे और कई हिस्सों में बारिश देखने को मिलेगी।
मणिकरण घाटी के चोज में बुधवार सुबह बाढ़ आने से काफी नुकसान हुआ है। इस दौरान 4 लोग लापता हुए हैं, जिनकी तलाश जारी है। मकान, रेस्टोरेंट, ढाबे और गेस्ट हाउस भी बाढ़ की भेंट चढ़े हैं, जिससे करोड़ों के नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। वहीं आज हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति, राजस्व, बागवानी एवं सैनिक कल्याण मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर जिला कुल्लू में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर प्रभावित लोगों से बात चेतत की। उन्होंने प्रभावितों को सरकार की ओर से हर सम्भव सहायता करने का आश्वासन दिया। सतत ही उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के दिशा-निर्देश जारी किये। मौके पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड के जवान मलबा हटाने में जुटे हुए हैं। जबकि मलाना के पास बाढ़ आने से एक महिला की मौत हुई है। जहां प्रोजेक्ट के कार्यालय के साथ-साथ काफी शेड बह गए हैं। लिहाजा भारी नुकसान को देखते हुए जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर क्षेत्र का जायजा लेने के लिए यहां पहुंचे हैं।
राजधानी शिमला के ढली में भूस्खलन का क्रम जारी है। बीते बुधवार को भूस्खलन की चपेट में आने से एक बच्ची की जान चली गयी और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं आज भी शिमला के ढली में एक बार फिर लैंड स्लाइड हुआ है, जिसके नीचे एक कार दबकर क्षतिग्रस्त हो गई। गनीमत रही कि कार में लैंड स्लाइड के वक्त कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इस लैंड स्लाइड से वहां पर एक मकान भी खतरे की जद में आ गया है। जानकारी के मुतबिक ढली में एचआरटीसी वर्कशॉप के पास भूस्खलन के कारण गाड़ी नंबर HP 14 D-0661 मलबा के नीचे दब गई, जिससे गाड़ी को काफी नुकसान हुआ है। गाड़ी को सड़क किनारे पर पार्क किया गया था। हालांकि, पुलिस के जवानो ने मौके पर पहुंच कर ट्रैफिक को सुचारू कर दिया।
हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला शहर के टूटीकंडी स्कूल से एक छात्रा के लापता होने का मामला सामने आया है। स्कूल की टीचर ने पुलिस को तस्वीर देकर छात्रा की गुमशुदगी दर्ज कराई है। पुलिस छात्रा की खोजबीन में जुट गई है। हाई स्कूल टूटीकंडी की टीचर ललिता शर्मा ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा बिना कोई जानकारी दिए स्कूल से कहीं चली गई है। बीते बुधवार को 3:15 बजे लापता हुई छात्रा की हर संभावित जगह पर तलाश की गई, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चल पाया। लड़की की उम्र लगभग 14 साल है। शिकायत पर थाना बालूगंज पुलिस ने धारा 363 के तहत मामला दर्ज किया है। बालूगंज थाना के जांच अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने लड़की की तलाश के लिए एक जांच टीम गठित कर दी है। ऐसे में संभावित स्थानों के अलावा जिले के पुलिस थानों में भी इसकी सूचना दे दी गई है। पुलिस का दावा है कि लड़की को जल्द से जल्द ट्रेस कर लिया जाएगा। इसके अलावा स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं से भी इस संबंध में पूछताछ की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से चंद महीनों पहले कांग्रेस कमेटी ने शिमला ग्रामीण के अध्यक्ष पद की कमान अतुल शर्मा को सौंपी है। वीरवार को हिमाचल कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में अतुल शर्मा ने पद व गोपनीयता की शपथ लेकर कार्यभार संभाल लिया। इस दौरान उन्होंने अपने केंद्र नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। अतुल शर्मा ने कहा कि मौजूदा वक्त में हर वर्ग बीजेपी सरकार से त्रस्त है। उन्होंने मौजूदा बीजेपी सरकार को किसान, बागवान और युवा विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी बड़े-बड़े सपने दिखाकर सत्ता पर काबिज हुई थी, लेकिन आज जनता के सामने सरकार की वास्तविकता आ गई है। इस दौरान कांग्रेस शिमला ग्रामीण अध्यक्ष अतुल शर्मा ने हर हाल में कांग्रेस की सत्ता वापसी का भी दावा किया। अतुल शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का जिला शिमला से विशेष लगाव था। कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापस आकर वीरभद्र मॉडल को लागू कर प्रदेश भर में विकास करने का काम करेगी। उन्होंने मौजूदा बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सिर्फ सिराज और धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए, तो सरकार की ओर से पूरे प्रदेश की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश का सारा बजट इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में ही खर्च किया जा रहा है। वहीं, सेब सीजन से पहले कार्टन के दाम बढ़ने को लेकर भी अतुल शर्मा ने प्रदेश सरकार को आढ़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि शिमला सेब बहुल क्षेत्र है और प्रदेश सरकार मनमाने ढंग से काटन के दामों में बढ़ोतरी कर रही है। उन्होंने कहा कि कार्टन सप्लाई का टेंडर सिर्फ एक कंपनी को सौंप दिया गया है, जिसकी वजह से खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कार्टन के दाम बढ़ने की वजह से प्रदेश का बागवान परेशान है। अतुल शर्मा ने कहा कि आज प्रदेश भर में सड़कों की हालत भी खस्ता है और सेब सीजन शुरू होने के बावजूद अब तक भट्टाकुफर मंडी को शुरू नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि बागवान सरकार के इस रवैया से बेहद परेशान हैं।
हिमाचल में भी नशे का कारोबार बढ़ने लगा है। नशे के मकड़जाल को खत्म करने के लिए जहां पुलिस मेहनत कर रही है वहीं नशा माफिया बेखौफ अपना कारोबार कर रहे है। हैरत करने वाली बात यह है कि नशे के कारोबार में युवा ही नहीं बल्कि महिलाएं भी संलिप्त है। आज राजधानी शिमला पुलिस ने डाउनडेल में एक महिला के घर पर दबिश दी। पुलिस को सूचना मिली थी कि महिला काफी समय से नशे की तस्करी में संलिप्त है। पुलिस ने सूचना के मुताबिक घर में दबिश दी और तलाशी ली। तलाशी के दौरान महिला के घर से करीबन 2.59 लाख रुपए कैश बरामद किया गया। पुलिस ने जब महिला से इतनी रकम कहाँ से आई इस बारे पूछा तो महिला ने जवाब दिया " यह रुपए मेरे नहीं पडोसी का है।" प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनीता देवी नशे के कारोबार में संलिप्त है। गुप्त सूचना पर पुलिस ने उसके घर पर छापा मारा था। जहां से पुलिस ने 2,59,600 रुपए कैश बरामद किया। सुनीता ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि है यह कैश उसके पड़ोसी का है। पुलिस ने कैश को अपने कब्जे में ले लिया है और महिला की बैंक डिटेल खंगाल रही है। पुलिस को शक है कि जो कैश इस महिला के घर से बरामद हुआ है, उसका कनेक्शन नशे के कारोबार से जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब इस कैश को इनकम टैक्स विभाग को सौंपेगी। महिला से फिलहाल पूछताछ चल रही है। बता दें कि डाउनडेल अपराध बस्ती के नाम से जानी जाती है। शुरू में कुछ लोग शराब की तस्करी करते थे लेकिन, धीरे-धीरे चोरियां और बाद में अन्य अपराध शुरू किए। इस छोटी सी बस्ती के लोगों पर करीब एक सौ केस दर्ज हैं। इनमें से कई चोरियों से संबंधित हैं, जबकि 50 के करीब मामले शराब तस्करी के हैं। करीब 15 केस एनडीपीएस के और कुछ अन्य आपराधिक केस इन पर दर्ज हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान वीरवार को डॉक्टर गुरप्रीत कौर के साथ परिणय सूत्र में बंधे। 12 बजे करीब दोनों शादी के बंधन में बंध गये। दिल्ली के सीएम केजरीवाल परिवार समेत शादी में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने ही शादी में पिता की रस्में अदा कीं। शादी में सीमित मेहमानों को बुलाया गया था, शादी का कार्यक्रम सीएम आवास पर ही रखा गया था। बता दें कि 32 साल की गुरप्रीत कौर भगवंत मान (उम्र 48) से 16 साल छोटी हैं। दोनों की मुलाकात करीब चार साल पहले हुई थी। भगवंत मान की यह दूसरी शादी है। पहली पत्नी से उन्होंने 2015 में तलाक लिया था। इसी क्रम में कनाडाई दूतावास के कौंसुल जनरल पैट्रिक हेबर्ट ने सीएम को बधाई दी। गुरप्रीत कौर पेशे से एक डॉक्टर हैं। हाल ही में भगवंत मान की शादी की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। जिसमें भगवंत और गुरप्रीत शादी की रस्में निभाते हुए नजर आ रहे हैं।
बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और झटका लगा है। गैस कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी कर दी है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ है। नए दाम बुधवार से प्रभावी है। पांच किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। पांच किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 18 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। जबकि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 8.50 रुपये की कमी आई है। कुछ दिनों पहले ही तेल वितरण कंपनियों की ओर से कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में इजाफा किया गया था। इसके बाद अब घरेलू सिलेंडरों की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। वहीं हिमाचल में भी घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम बाढ़ कर 945. 50 रूपए हो गए है। 5 किलो घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 334 रूपए हो गई है।
मानसून के दस्तक देते ही हिमाचल प्रदेश में तबाही के कई मंजर सामने आने लगे है। बुधवार को जिला कुल्लू के मणिकर्ण में बादल फटने से तीन कैंप साइट तबाह हो गई और बताया जा रहा है कि चार लोग इस हादसे का शिकार हो गए। उधर कुल्लू के मलाणा में एक महिला के बाढ़ की चपेट में आकर बहने की सुचना है। इस महिला का वीडियो भी सामने आया है। बादल फटने के बाद मणिकर्ण के चोज में पार्वती नदी में बाढ़ गई, जिसके चलते खासा नुकसान हुआ है। बाढ़ में बही महिला समेत कुल पांच लोग लापता बताये जा रहे है, जिनकी तलाश जारी है। जिला प्रशासन कुल्लू ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार तड़के जिला कुल्लू के मणिकर्ण में चोज नाले में बादल फट गया। इस हादसे में एक कैपिंग साइट तबाह हो गई है। हादसे के बाद से चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनकी पहचान मंडी के सुंदरनगर निवासी रोहित, राजस्थान के पुष्कर निवासी कपिल, धर्मशाला निवासी राहुल चौधरी और बंजार निवासी अर्जुन के तौर पर हुई है। हादसे में चोज को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है। उधर मलाणा गांव के पास मलाणा पावर प्रोजेक्ट की एडिट 1 (टनल) के समीप नाला में एक स्थानीय महिला शाजी देवी (उम्र 34 वर्ष ) पत्नी सिंगाराम निवासी साराबेहड़ मलाणा जिला कुल्लू के पानी में बहने की सूचना है। इसके अतिरिक्त 10 से 12 घोड़े व लोगों की गाड़ियों के बहने की खबर भी सामने आई है। मणिकरण के एक गेस्ट हाउस में मलबा आने से 6 कमरे क्षतिगस्त हो गए। कई कैफे व एक होम स्टे भी बाढ़ की चपेट में आ गए है। एक मछली फार्म व चार गायों सहित एक गौशाला के बहने की भी खबर है। कई ढाबे व कई स्थानीय लोगों के मकान भी क्षतिग्रस्त हुए है। कई जगहों पर सड़क के बंद होने से पर्यटक व आम लोग फंसे हुए है। पूरी पार्वती घाटी में अफरा-तफरी का माहौल है।
जिला किन्नौर में सुबह से हो रही लगातार बारिश के बाद ठंगी नाले मे बाढ आ गई। हालांकि अभी तक इस घटना में जानमाल के नुकसान की सुचना प्राप्त नहीं हुई है। वही जिला किन्नौर के निचार खण्ड में भारी बारिश का दौर जारी है तो कल्पा व पूह खण्ड में रुक रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश के चलते जिले के कई नालों में पानी का जल स्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। किन्नौर में बहने वाली सतलुज नदी का जल स्तर भी बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि किन्नौर में बरसात के दौरान भुसखलन, नदी नालो मे बाढ़, चट्टानों के खिसकने के मामले भी लगातार सामने आते है। वही दूसरी ओर मौसम विभाग ने भी आज जिला किन्नौर के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक द्वारा स्थानीय लोगों व पर्यटकों से आह्वान किया गया है कि अनावश्यक यात्रा ना करे व जिले में 8 जुलाई तक बारिश होने की संभावना है।
कुल्लू के साथ लगते बबेली स्थित ब्यास नदी में एक कार गिर गई है। हादसे में दो युवक लापता हो गए हैं, जबकि कार का चालक गंभीर रूप से घायल है। हादसा मंगलवार देर रात करीब डेढ़ बजे पेश आया है। कार मंडी से मनाली की तरफ जा रही थी। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इसके लिए आईटीबीपी की टीम बुलाई गई है। फिलहाल हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। मंगलवार देर रात से शिमला में लगातार भारी बारिश का क्रम जारी है। भारी बारिश के चलते शिमला के ढली इलाके में भूस्खलन हुआ। भूस्खलन की वजह से सड़क किनारे सो रही एक युवती की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हैं। घायलों का इलाज आईजीएमसी में चल रहा है। जानकारी के मुताबिक यह युवतियां मूल रूप से हरियाणा की रहने वाली हैं और सड़क किनारे दवा बेचने का काम करती हैं। मृतिका की पहचान 14 वर्षीय करीना के रूप में हुई है, जबकि 16 वर्षीय आशा और 14 वर्षीय कुलविंदर भूस्खलन की चपेट में आने से घायल हुई हैं।
हिमाचल के बेरोजगार युवाओं के लिए नौकरी पाने का सुनहरा मौका मिलने जा रहा है. हिमाचल सिलेक्शन एसोसिएशन लिमिटेड शिमला ने विभिन्न श्रेणियों के (634) पदों को भरने के लिए ऑनलाइन माध्यम द्वारा आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं. आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2022 निर्धारित की गई है. एसोसिएशन के एचआर निदेशक अश्वनी कुमार ने जानकारी देते हुए बताया, कि इसमें ब्रांच सेल्स ऑफिसर (18), बैंक कैश हैंडलिंग एग्जीक्यूटिव (19), एडमिनिस्ट्रेशन एग्जीक्यूटिव (20) , कस्टमर सपोर्ट रिप्रेजेंटेटिव (15), बैंक कैश कस्टोडियन (17), बैक एंड एग्जीक्यूटिव (12), रिलेशनशिप मैनेजर (50), सुरक्षा गार्ड (59), डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर (17), फॉर्म सेल्स एग्जीक्यूटिव (73),अकाउंटेंट फीमेल (22), वेल्डर (29), फिटर (32), टर्नर (39),इलेक्ट्रिशियन (35), कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव (20), बैंक लोनिंग एजेंट (19), ऑफिस क्लर्क (18), कार्यालय सहायक (22), स्टाफ नर्स एएनएम,जीएनएम (26), सिक्योरिटी सुपरवाइजर (16), एरिया मैनेजर (13) , बैंक एमआई रिकवरी एग्जीक्यूटिव (16), ड्राइवर (10), पीएन कम हेल्पर (17) पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की गई है. इन पदों के लिए आयु सीमा 18 वर्ष से लेकर 45 वर्ष तक निश्चित की गई है. उम्मीदवार यहां करें, आवेदन :- प्रदेश के इच्छुक महिला व पुरुष उम्मीदवार आवेदन करने के लिए एसोसिएशन के व्हाट्सएप नंबर 62304-06027 पर अपना बायोडाटा साधारण फोन नंबर सहित, आधार कार्ड, पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र लेटेस्ट, पैन कार्ड, हिमाचली बोनाफाइड, रोजगार कार्यालय पंजीकरण प्रमाण पत्र ,एवं शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्रों की छाया प्रति स्कैनड पीडीएफ (PDF) बनाकर निर्धारित तिथि 12 जुलाई 2022 तक अपना आवेदन भेज सकते हैं. एसोसिएशन द्वारा उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया छटनी परीक्षा/ लिखित परीक्षा (140) क्रमांक एवं इंटरव्यू (30) क्रमांक द्वारा ही किया जाएगा. लिखित परीक्षा में हिमाचल सामान्य ज्ञान, एवरीडे साइंस, कंप्यूटर न्यूमेरिकल एटीट्यूट, गणित, जनरल इंग्लिश, जनरल हिंदी ,समाजशास्त्र विषय से संबंधित ऑब्जेक्टिव टाइप (140) MCQ प्रश्न पूछे जाएंगे. संगठन द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की लिखित परीक्षा 30 जुलाई 2022 को उम्मीदवारों के व्हाट्सएप नंबर पर ऑनलाइन ही ली जाएगी. उम्मीदवार पदनाम एवं शैक्षणिक योग्यता की महत्वपूर्ण जानकारी एसोसिएशन की अधिकारिक वेबसाइट www.hpussa.in पर देख सकते हैं. यह सभी पद हिमाचल प्रदेश के लिए ही आरक्षित किए गए हैं. एसोसिएशन द्वारा लिखित परीक्षा का परिणाम 28 अगस्त 2022 को घोषित किया जाएगा. लिखित परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क सभी श्रेणियों के वर्गों की कैटेगरी जनरल ,एससी, एसटी, ओबीसी, फ्रीडम फाइटर, एपीएल, बीपीएल, फिजिकली डिसेबिलिटी, स्वतंत्रता सेनानी को (1770) रुपए आवेदन शुल्क जमा/चुकता करना होगा, जो कि नॉन रिफंडेबल रहेगा. यह सभी पद (2) वर्ष के लिए (कॉन्ट्रैक्ट) अनुबंध आधार पर भरे जाएंगे, जिन्हें बाद में रेगुलर किया जाएगा. असफल उम्मीदवारों को भी एसोसिएशन द्वारा (F.S.E) के पद पर तैनात किया जाएगा. एसोसिएशन द्वारा चयनित उम्मीदवारों का मासिक वेतनमान ग्रेड-पे 10,500/- से लेकर 32,810/- तक सीटीसी ग्रेड-पे दिया जाएगा. इसके अलावा प्रोविडेंट फंड ,जनरल प्रोविडेंट फंड, मेडिकल इंश्योरेंस, ओवरटाइम, प्रमोशन ,इंसेंटिव, बोनस की सुविधा भी मिलेगी. यह सभी पद (एमएनसी) मल्टीनेशनल कंपनियों , हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक , इंडस बैंक, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, रिलायंस बीपीओ कॉल सेंटर, चेकमेट, एचडीबी फाइनेंस, सतलुज मोटर्स, सिग्मा,गोदरेज, कैडबरी ,डावर इंडिया, मणिपुरम फाइनेंस, एलआईसी कॉरपोरेशन, सेक्टरों में भरे जाएंगे. इच्छुक उम्मीदवार अधिकतर जानकारी के लिए कार्यालय के दूरभाष नंबर 01907292034 एवं प्लेसमेंट अधिकारियों (एचआर) के मोबाइल नंबर 94181-39918, 62305-90985 ,94184-17434 पर संपर्क कर सकते हैं. नोट:( यह विज्ञापन सामग्री है)
हिमाचल प्रदेश में बीते साल के मुकाबले इस साल पहले ही कार्टन के दाम 18 फीसदी बढ़ गए है। सेब सीजन के आते ही पैकिंग ट्रे के दाम बढ़ गए है। बीते साल 700 रूपये बिक रहा पैकिंग ट्रे का बंडल इस साल 45 रूपये महंगा हो गया है।कुछ क्षेत्रो में इसके दाम 780 रुपये प्रति बंडल तक पहुँच गया है। सेब की प्रति पेटी लागत बढ़ने से बागवान खासे परेशान हैं। सेब की पैकिंग के लिए बागवान मोहन फाइबर की ट्रे का इस्तेमाल करते है। इस महीने दामों में अधिक बढ़ोतरी होने का अनुमान है। मोहन फाइबर के एरिया मैनेजर का कहना है कि रद्दी की कीमत 18 से 34 रुपये किलो पहुंच गई है, रशिया यूक्रेन से रद्दी का आयात बंद हो गया है। ट्रांसपोर्टेशन भी महंगा हो गया है। जिसके कारण इसके दामों में बढ़ोतरी हुई है।
देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक कहे जाने वाले तिरुपति बालाजी में इस बार 6.18 करोड़ रुपये का दान हुआ है। यह एक रिकॉर्ड है। तिरुमला तिरुपति देवेस्थनाम के इतिहास में श्रिवारी को हुंडी राजस्व में रिकॉर्ड राशि मिली है। सोमवार को श्रीवारी हुंडी की आय 6.18 करोड़ रुपये दर्ज की गयी। तिरुमला तिरुपति देवास्थानम के अनुसार स्वामी की हुंडी आय पहली बार 6 करोड़ के पार हुई है। पिछली बार 1 अप्रैल 2012 को टीटीडी ने 5.73 करोड़ आय दर्ज की थी। आंध्रप्रदेश के तिरुपति में 7 पर्वत श्रंखलाओं से घिरी भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर तिरूमाल पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर को देश का सबसे प्रतिष्ठित और अमीर मंदिर माना जाता है। यह मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है और समुद्र तल से 2800 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में स्वयं भगवान वेंकटश्वर निवास करते हैं, जो विष्णु के अवतार हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर की कुलसंपत्ति लगभग 50,000 करोड़ है।
कर्नाटक पुलिस ने सब इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले के आरोप में 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी ADGP अमृत पॉल को गिरफ्तार किया है। CID ने चार बार पूछताछ के बाद अमृत पॉल को गिरफ्तार किया। वहीं 545 सिलेक्टेड कैंडिडेट्स में से 40 को भी गिरफ्त में लिया गया है। आरोप है कि ओएमआर शीट से टैंपर करने के लिए प्रत्येक कैंडिडेट से 30 से 80 लाख रुपए तक लिए गए थे। कर्नाटक सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए एडीजीपी अमृत पॉल को किया निलंबित कर दिया है। ये स्कैम जब सामने आया तब एडीजीपी अमृत पॉल रिक्रूटमेंट सेल के हेड थे और उन्हें बाद में इंटरनल सिक्योरिटी डिवीजन में ट्रांसफर कर दिया गया। आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में 545 पुलिस सब-इंस्पेक्टर की नियुक्ति के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें 54,041 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। कर्नाटक के 93 केंद्रों पर परीक्षा ली गई थी। वहीं रिजल्ट इस साल जनवरी में जारी किया गया। जिसके बाद कुछ छात्रों ने नंबर में गड़बड़ी की शिकायत की थी।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। मुंबई में मॉनसून की बारिश से एकदम बुरा हाल है। मुंबई समेत कई जगहों पर भारी बारिश और जलजमाव से आफत बनी हुई है। भारी बारिश की वजह से मुंबई की सड़कों पर जगह जगह जल भराव देखने को मिल रहा है। मुंबई के दहिसर में तेज बारिश की वजह से चेकनाका के पास की सड़क पानी में डूब गई तो वहीं नवी मुंबई से लेकर कल्याण और नालासोपारा तक लोगों को बारिश की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ा। महाराष्ट्र में अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश के मद्देनजर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्य सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव के साथ बैठक की और सभी संबंधित जिलों के संरक्षक सचिवों को निगरानी रखने और स्थिति को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है।
असम में बाढ़ का कहर लगातार जारी है। बाढ़ से अबतक 179 लोगों की मौत हो गई है। कई लोग बेघर हो गए हैं। असम में बाढ़ का सबसे अधिक कहर कछार जिले में देखने को मिला है। कछार जिले में बाढ़ के पानी ने सबसे अधिक तबाही मचाई है। पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की टीम राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है। इस बीच असम पुलिस ने कछार जिले में बराक नदी के तटबंध के टूटने के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनपर आरोप है कि उन्होंने बराक नदी पर बने तटबंध को जानबूझकर तोड़ा, जिसके कारण सिलचर शहर में बाढ़ आ गई। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनकी पहचान मिठू हुसैन लश्कर और काबुल खान के रूप में हुई है। कछार के पुलिस अधीक्षक ने आईएएनएस को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की पुष्टि की है। लेकिन पुलिस ने घटना में दोनों की भूमिका के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया है।
बीते दस वर्षों में सोलन निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस और कर्नल डॉ धनीराम शांडिल का वो अभेद किला बन चुका है जिसे भेद पाने में भाजपा नाकामयाब रही है। दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद इस बार फिर पुरानी कहानी रिपीट न हो, इसके लिए भाजपाई रणनीति तैयार करने में जुटे है। पर मौजूदा हाल और हालात दोनों भाजपा के पक्ष में नहीं दिखते। दरअसल डॉ राजीव बिंदल के नाहन जाने के बाद से ही सोलन में भाजपा के पास वो दमदार चेहरा नहीं दिखता जो कर्नल की स्वच्छ और बेदाग़ छवि के कवच को भेदने का सामर्थ्य रखता हो। कोई सामना करने को खड़ा होता भी है तो कांग्रेसियों से पहले भाजपाई ही बंदोबस्त कर देते है। ये गुटबाजी ही सोलन भाजपा का असल मर्ज है। रही सही कमी भाजपा आलाकमान पूरी करता आ रहा है, कभी गलत टिकट देकर तो कभी एक गुट को साइडलाइन करके। अब विधानसभा चुनाव से पहले चंद महीनों में क्या भाजपा इस तस्वीर को बदलकर अपनी तकदीर बदल पायेगी, ये फिलवक्त बड़ा सवाल है। सोलन भाजपा की वर्तमान सियासी तस्वीर को समझने के लिए शुरुआत करते है 2012 के विधानसभा चुनाव से। 2008 के परिसीमन के बाद सोलन सीट आरक्षित हो गई और जीत की हैट्रिक लगा चुके डॉ राजीव बिंदल नाहन का रुख कर गए। बिंदल के बाद उन्हीं के आशीर्वाद से टिकट मिला कुमारी शीला को। जबकि कांग्रेस ने पूर्व सांसद कर्नल धनीराम शांडिल को मैदान में उतारा। शांडिल के सामने कुमारी शीला टिक नहीं सकी और लम्बे समय बाद कांग्रेस की वापसी हुई। कांग्रेस की सरकार बनी और शांडिल मंत्री भी बन गए। उधर भाजपा में कुमारी शीला ही प्राइम फेस बनी रही। हालांकि कोशिश तरसेम भारती ने भी की, लेकिन बिंदल गुट ने उन्हें कभी स्थापित होने नहीं दिया। पर असली ट्विस्टआया 2017 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले। न कुमारी शीला को फिर मौका मिला और न तरसेम भारती के अरमान पूरे हुए, और टिकट ले गए पैराशूट से लैंड हुए डॉ राजेश कश्यप। यहां दिलचस्प बात ये है कि डॉ राजेश कश्यप को टिकट दिलवाने वाले थे डॉ राजीव बिंदल, और उनके टिकट का विरोध करने वाले भी उन्हीं के शागिर्द थे। भीतरखाते क्या हुआ ये तो चंद भाजपाई ही जानते होंगे लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि सत्ता विरोधी लहर के बावजूद कर्नल शांडिल फिर चुनाव जीत गए। उधर हार के बाद डॉ राजेश कश्यप मौके की नजाकत को समझते हुए डॉ बिंदल की सरपरस्ती से दूर हो गए और बिंदल विरोधी खेमे के सरदार बन गए। प्रदेश में जयराम राज आया तो बिंदल कमजोर हुए और सोलन में डॉ राजेश कश्यप मजबूत होते रहे। जयराम राज में डॉ राजेश कश्यप ही सोलन में प्राइम फेस रहे है। पर इन साढ़े चार सालों में भी डॉ कश्यप सबको साथ लाने में कामयाब नहीं दिखते और ये ही उनकी कमजोरी है। भाजपा दो गुटों में विभाजित है और इसका खामियाजा नगर निगम और जिला परिषद् चुनाव में भुगत चुकी है, बावजूद इसके भाजपा ने कोई सबक नहीं लिया। वर्तमान में एक तरफ डॉ राजेश कश्यप ताल थोक रहे है, तो दूसरी तरफ कभी तरसेम भारती की राह का रोड़ा बनने वाले ही उन्हें आगे बढ़ा रहे है ताकि कश्यप को रोका जा सके। यहां जिक्र कुमारी शीला का भी जरूरी है जो निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय है, लेकिन फिलहाल अलग- थलग दिख रही है। हालांकि इसमें कोई संशय नहीं है कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से जो जुड़ाव कुमारी शीला का दिखता है वैसा किसी अन्य नेता का नहीं है। ये तीन नेता फिलहाल प्रत्यक्ष तौर पर टिकट के दावेदार है। इस बीच सुगबुगाहट है कि भाजपा से 2017 की तरह ही एक नए उम्मीदवार को मैदान में उतारा जा सकता है। सूत्रों की माने तो एक अधिकारी से चर्चा भी हो चुकी है और उक्त अधिकारी जल्द वीआरएस लेकर सियासत में एंट्री कर सकता है। मसला अटका है टिकट की गारंटी को लेकर। दरअसल डॉ राजेश कश्यप मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के करीबी माने जाते है और ऐसे में वो टिकट की दौड़ में आगे भी है। अब किसी नए चेहरे की एंट्री होती है या नहीं, इसके लिए फिलहाल थोड़ा इन्तजार करना होगा। कांग्रेस में कर्नल के समकक्ष कोई नहीं : कांग्रेस में कर्नल धनीराम शांडिल एकलौते दावेदार है। यूँ तो टिकट के अन्य चाहवान भी है लेकिन उनका कद कर्नल के समकक्ष नहीं दिखता। खास बात ये है कि दस साल विधायक रहने के बावजूद कर्नल की छवि बेदाग है। पिछली सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने साढ़े चार सौ करोड़ से अधिक के विकास कार्य करवाएं तो मौजूदा कार्यकाल में भी अमूमन सभी क्षेत्रों में उनकी विधायक निधि पहुंची है। कहीं कम दिया तो कहीं ज्यादा, लेकिन कर्नल ने किसी को निराश नहीं किया। वहीं प्रदेश कांग्रेस में मुकेश अग्निहोत्री, सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रतिभा सिंह के अलावा कर्नल शांडिल भी एक ऐसा चेहरा है जिन्हें भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जाता है। कर्नल पार्टी आलाकमान के नजदीकी है और जानकार मानते है कि यदि गुटबाजी के चलते किसी के नाम पर सहमति नहीं बनती तो कर्नल के सिर भी सीएम का ताज सज सकता है। सरकार ने पैसा दिया, फिर भी मंद है विकास की रफ्तार : सोलन में विकास की मंद रफ्तार भी भाजपा के गले की फांस है। बीते साढ़े चार साल में भाजपा सरकार पहले से निर्माणधीन शामती बाईपास का लोकार्पण तक नहीं कर पाई है। पिछले साल अप्रैल में मुख्यमंत्री ने ऐलान किया था कि शूलिनी मेले में वे शामती बाईपास का लोकार्पण करेंगे, अगला मेला भी निकल गया लेकिन लचर कार्यशैली के चलते मुख्यमंत्री को अब तक ये सौभाग्य नहीं मिल पाया। इसी तरह अप्रैल 2018 में हुए ट्रांसपोर्ट नगर के शिलान्यास की तो पट्टिका भी टूट गई है लेकिन सरकार से एक ईंट तक नहीं लगी। फूड प्रोसेसिंग प्लांट का वादा भी हवा हवाई है। सोलन के ओल्ड बस स्टैंड पर प्रस्तावित पार्किंग की दिशा में कुछ नहीं हुआ। पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी लोग त्रस्त है। करीब 15 करोड़ के परक्युलेशन वेल के बावजूद पेयजल समस्या का हल नहीं हुआ है। वहीँ ओवरलोड बिजली विभाग की मुख्य समस्या है जिसके आगे अधिकारी भी बेबस है। ऐसा नहीं है कि जयराम सरकार ने सोलन के विकास को पैसा नहीं दिया, दरअसल लचर कार्यशैली के चलते कोई भी कार्य समस्य पर नहीं होता। इसका बड़ा कारण कमजोर और विभाजित स्थानीय नेतृत्व और अधिकारीयों की मनमानी भी है। अफसरशाही की मनमानी और नेताओं की कमजोर पकड़ की झलक बीते दिनों हुए शूलिनी मेले में भी दिखी जहाँ अव्यवस्था हावी रही। कथेड़ में हॉस्पिटल का निर्माण इस सरकार की बड़ी उपलब्धि जरूर है लेकिन फंड आवंटित होने के बावजूद काम ने रफ्तार नहीं पकड़ी। वहीँ कोठो में इंडोर स्टेडियम जरूर अब बनकर तैयार है। माना जा रहा है कि जल्द मुख्यमंत्री सोलन का दौरा करेंगे जहाँ सैकड़ों करोड़ के लोकार्पण और शिलान्यास होंगे। लोकार्पण तो ठीक है, पर अंतिम वर्ष के शिलान्यासों का भाजपा को कितना चुनावी लाभ होगा, ये देखना रोचक होगा।
पहाड़ी जिले किन्नौर में सियासी ताप हमेशा हाई रहता है। यूँ तो इस जिले में सिर्फ एक विधानसभा सीट है, लेकिन बावजूद इसके ये हमेशा चर्चा में रहा है। हल्के सियासी वजन वाले इस जिला में गुटबाजी हमेशा भारी रही है। गुटबाजी और अंतर्कलह की ये आग किसी एक दल में नहीं, अपितु दोनों तरफ बराबर लगी है। इस बार भी विधानसभा चुनाव से पहले ही दोनों ओर से अंतर्कलह से रुझान आने शुरू हो गए है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी काे कांग्रेस के जगत सिंह नेगी से पराजित हाेना पड़ा। अब प्रदेश में एक बार फिर विधानसभा चुनाव की हलचल शुरू हो चुकी है और जिला किन्नौर में भी सियासत परवान पर है। बीते दो चुनाव में यहाँ कांग्रेस विजयी हुई है और दोनों मर्तबा जगत सिंह नेगी ही कांग्रेस का चेहरा रहे है। अब जगत सिंह नेगी और कांग्रेस दोनों की निगाहें हैट्रिक पर है, तो वहीं भाजपा वापसी के लिए जद्दोजेहद कर रही है। दोनों ही राजनीतिक दल किन्नौर की एकमात्र विधानसभा सीट पर अपना कब्ज़ा जमाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। चुनावी रैलियां, प्रचार, प्रसार, जन सम्पर्क अभियान, किसी में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। पर दोनों ही राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच चल रहे आपसी मतभेद और मनभेद अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजानिक मंच तक पहुँच चुके है। ज़ाहिर है किन्नौर में जीत का मंत्र सिर्फ और सिर्फ आपसी अंतर्कलह को साधना ही होगा। जिसने भी अंतर्कलह को साध लिया उसकी नैया पार समझो। जगत सिंह का टिकट लगभग तय, अंतर्कलह से पार पाना चुनौती कांग्रेस के दिग्गज लगातार दोहरा रहे है कि कांग्रेस में न टिकट को लेकर कलह है और न मुख्यमंत्री की कुर्सी का मोह, बस फिक्र है कि पहले सत्ता का वनवास खत्म हो। हाथ का निशान सबसे ऊपर होगा और सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जायेगा। मगर जनता के सामने एकजुटता के कसीदे पढ़ने वाली कांग्रेस की असल स्थिति क्या है, इसकी झलकी हाल ही में किन्नौर में ही देखने को मिली थी। बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जब किन्नौर पहुंची तो स्थानीय विधायक और युवा कांग्रेस के समर्थक उनके सामने ही आपस में लड़ पड़े। लड़ाई इतनी ज्यादा बढ़ गई पुलिस को बीच में दखल देना पड़ा। किन्नौर विधायक जगत सिंह नेगी ने मंच से अपने संबोधन में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष निगम भंडारी और यूथ किन्नौर कांग्रेस को जमकर खरी खोटी सुनाई, उन्हें भाजपा की 'बी' टीम तक कह दिया, उन्हें फर्जीवाड़े का अध्यक्ष बताया। दरअसल जगत सिंह होलीलॉज के करीबी है, तो निगम भंडारी सुक्खू गुट के। निगम भंडारी की बढ़ती सक्रियता जगत सिंह नेगी और उनके समर्थकों को खूब खटक रही है। जगत सिंह का मानना है कि निगम और उनके समर्थक कांग्रेस के होने के बावजूद भी उनके खिलाफ काम करते रहे है। बेहद कम समय में निगम भंडारी एक प्रभावशाली युवा नेता के तौर पर उभरे है और पार्टी का एक तबका चाहता है कि निगम ही आगामी चुनाव में पार्टी प्रत्याशी हो। हालाँकि निगम भंडारी किन्नौर में जगत सिंह नेगी सा रुतबा रखते हो, ऐसा बिलकुल नहीं कहा जा सकता। पर उनकी मौजूदगी को नकारा भी नहीं जा सकता। जाहिर है ये दो गुटों का ये मनभेद कांग्रेस की राह मुश्किल कर सकता है। जहाँ तक टिकट का सवाल है तो जगत सिंह नेगी को कोई चुनौती मिलती नहीं दिखती। साथ ही होलीलॉज से उनकी करीबी भी उनके और कांग्रेस टिकट के बीच की दूरी को कम कर देती है। सूरत में ही दिख रही भावी प्रत्याशी की 'सूरत', क्या फीका पड़ेगा तेजवंत का 'तेज' ! किन्नौर में भाजपा की स्थिति भी कांग्रेस से इतर नहीं है। यहां भी टिकट को लेकर दो मज़बूत दावेदार मैदान में है। एक पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी और दूसरे है सूरत नेगी। 2017 के चुनाव में भी किन्नौर सीट से ये दाे नेता ही टिकट के चाहवान थे। सूरत नेगी ने पिछले चुनाव में टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने पूर्व विधायक तेजवंत नेगी पर ही भराेसा जताया। पर सूरत का टिकट कटने के बाद तेजवंत नेगी को हार का मुंह देखना पड़ा। बताया जाता है कि भाजपा में गुटबाजी नहीं हाेती ताे शायद तेजवंत सिंह नेगी इस वक्त विधायक होते। मगर 2017 के बाद से तेजवंत के लिए सियासी समीकरण बदल गए है दरअसल 2017 में विधानसभा में चुनाव लड़ने के बाद तेजवंत सिंह नेगी काे जयराम सरकार ने साइडलाइन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सीएम का फेस बदलने के साथ -साथ किन्नौर भाजपा का फेस भी बदल गया है। जब भाजपा सत्ता में आई ताे तेजवंत समर्थकों को काफी उम्मीदें थी कि बाेर्ड या किसी निगम में उन्हें अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद मिलेगा, मगर उन्हें मायूस होना पड़ा। दरअसल तेजवंत नेगी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल समर्थक हैं, जबकि सूरत नेगी को जयराम समर्थक माना जाता है। इसी वजह से ही सूरत नेगी काे वन विकास निगम में उपाध्यक्ष की कुर्सी मिली और तेजवंत की झोली खाली रही। अब भी तेजवंत को ज़्यादा तवज्जो नहीं दी जा रही। इस बार भी तेजवंत और सूरत दोनों ही टिकट की दावेदारी पेश कर चुके है, मगर सियासी माहिर मानते है कि इस बार भाजपा दो बार हार चुके तेजवंत को नहीं बल्कि सूरत नेगी को प्रत्याशी बना सकती है। ऐसे में जाहिर है कि मिशन -2022 से पहले भी भाजपा की गुटबाजी समाप्त होती नजर नहीं आ रही है। सिर्फ ठाकुर सेन नेगी लगा सके है हैट्रिक : किन्नौर के चुनावी इतिहास पर नज़र डाले तो अब तक सिर्फ ठाकुर सेन नेगी ही जीत की हैट्रिक लगा सके है। ठाकुर सेन नेगी 1967 से 1982 तक लगातार चार चुनाव जीते। दिलचस्प बात ये है कि वे तीन बार निर्दलीय और एक बार लोकराज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीते। फिर वे भाजपा में शामिल हो गए और एक बार 1990 में भाजपा टिकट से भी जीतने में कामयाब हुए। ठाकुर सेन नेगी के अलावा जगत सिंह नेगी ही इकलौते ऐसे नेता है जिन्होंने लगातार दो चुनाव जीते हो। पर क्या जगत सिंह नेगी हैट्रिक लगा पाएंगे या क्लीन बोल्ड होंगे, ये देखना रोचक होगा।
अमरावती उमेश कोल्हे की हत्या के पहले जितने लोगों ने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में व्हाट्सएप स्टेटस लगाने वाले लोगों को धमकी दिए जाने के कई मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने नूपुर शर्मा के बयान को समर्थन देने वाले पोस्ट को व्हाट्सएप पर स्टेटस के रूप में लगाया था जिसके बाद उन्हें कई बार धमकी भरे फ़ोन आए है।धमकी भरे फ़ोन के बाद धमकी देने वालों ने माफ़ी मांगने का वीडियो भी बनवाया और उसे व्हाट्सएप पर स्टेट्स लगावाया। ऐसी ही एक धमकी डॉक्टर राठी को आई थी जिसके बाद अब पुलिस ने अमरावती के निवासी डॉक्टर राठी का बयान दर्ज किया है। डॉक्टर राठी ने नूपुर शर्मा के बयान के समर्थन में व्हाट्सएप स्टेट्स लगाया था। बताया जा रहा है कि व्हाट्सएप स्टेट्स लगाए जाने के उन्हें फ़ोन पर धमकी मिली और धमकी देने वाले ने खुद को रहबर हेल्पलाइन का सदस्य बताया था। धमकी भरे फ़ोन के बाद डॉक्टर राठी ने माफ़ी मांगते हुए एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था।
गुड़िया मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बयान पर राजनीति लगातार गरमा रही हैं। शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा महिला मोर्चा पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। पिछले दिनों से ही भाजपा महिला मोर्चा पूरे प्रदेश में इस मामले पर सड़कों पर है और प्रतिभा सिंह से माफ़ी की मांग कर रही है। हालांकि प्रतिभा सिंह का ये कहना है उनका बयान जोड़ तोड़ कर पेश किया गया है। हाल ही में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्षा रश्मिधर सूद गुड़िया के अभिभावकों से मिलने तक पहुंच गई। इस पर शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा महिला मोर्चा पर निशाना साधते हुए कहा ये तब कहा सोयी थी जब एक इनके नेता एक महिला को रात को अपने पास बुलाते है, और जब जोगिंदरनगर में एक महिला की हत्या कर दी जाती है। साढ़े चार साल ये नेत्रियां कुम्भकरण की नींद सोयी रही। इलेक्शन नजदीक देख इस बयान पर राजनीति कर रही है, जबकि उस वक़्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तुरंत जांच को सीबीआई को सौंपा था। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ये नेत्रियां मात्र असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है, इससे प्रदेश के असली मुद्दे दबने वाले नहीं है।
जयराम कैबिनेट के मंत्री डॉ राम लाल मार्कण्डेय उन नेताओं में से एक है जिनका जयराम राज में डिमोशन हुआ है। दरअसल 2017 में सरकार गठन के बाद डॉ मार्कण्डेय के पास तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास के साथ -साथ कृषि जैसा महत्वपूर्ण महकमा भी था, पर 2020 में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उनका पोर्टफोलियो हल्का कर दिया गया। डॉ मार्कण्डेय जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के वर्तमान में विधायक है और फिलवक्त बड़ा सवाल ये ही है कि क्या कैबिनेट में डिमोट हुए डॉ मार्कण्डेय को लाहौल स्पीति की जनता फिर प्रमोट करके विधानसभा भेजेगी ? लाहाैल-स्पीति की ठंडी फिजाओं में हर पांच साल बाद सियासत गर्मा जाती है। इस जिला में विधानसभा की महज एक ही सीट है, जो हर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन की साक्षी रही है। जाे भी राजनीतिक दल सत्ता में आता है उसी दल काे यहां जीत मिलती रही है,1993 से ऐसा ही चला आ रहा है। लाहाैल-स्पीति विधानसभा सीट पर 1993 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की और सरकार भी कांग्रेस की बनी। 1998 में जब पंडित सुखराम ने कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई तो उनकी पार्टी से लड़े डॉ रामलाल मारकंडा यहाँ से जीते। इसके बाद 2003 में कांग्रेस और 2007 में भाजपा को यहाँ जीत मिली। 2012 के चुनाव में यहाँ कांग्रेस के रवि ठाकुर काे जीत मिली थी और प्रदेश में भी कांग्रेस की ही सरकार बनी। इसी तरह से 2017 के चुनाव में फिर भाजपा के डा.रामलाल मारकंडा काे जीत मिली और वो प्रदेश में जयराम सरकार के कैबिनेट मंत्री भी बने। फिलवक्त तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ही यहाँ भाजपा के प्राइम फेस है, जबकि कांग्रेस में रवि ठाकुर के अतिरिक्त भी कई नए चेहरे उभर कर आये है। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने लाहौल-स्पिति विधानसभा सीट से रवि ठाकुर को चुनाव मैदान में उतारा था। कांग्रेस के रवि ठाकुर को भाजपा के रामलाल मारकंडा ने 1478 मतों से हराया। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में रवि ठाकुर ने डॉ रामलाल मार्कण्डेय को शिकस्त दी थी। पूर्व विधायक रवि ठाकुर के पिता निहाल चंद भी प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे चुके हैं। वहीं कैबिनेट मंत्री डॉ रामलाल मारकंडा लाहाैल-स्पीति से तीन बार चुनाव जीत चुके है। 1998 में वो हिमाचल विकास कांग्रेस के टिकट पर जीते, जबकि 2007 और 2017 में भाजपा टिकट पर। डा.रामलाल मारकंडा का राजनीतिक सफर एनएसयूआई यानी कांग्रेस के छात्र संगठन से शुरु हुआ था। वे हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में एनएसयूआई के छात्र नेता रह चुके हैं। धीरे-धीरे कांग्रेस में बात नहीं बनी ताे उन्हाेंने 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस से चुनाव लड़ा और जीत भी गए और भाजपा-हिविकां गठबंधन सरकार में मंत्री की कुर्सी भी मिली गई। उसके बाद जब हिमाचल विकास कांग्रेस में बिखराव शुरु हुआ ताे उन्हाेंने भाजपा का दामन थाम लिया। लाहौल स्पीति में पिछड़ी है भाजपा : पिछले साल लाहौल स्पीति में हुए पंचायत चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन फीका रहा था। हालाँकि जैसे -तैसे निर्दलियों की सहायता से पंचायत समिति में अल्पमत में होने के बाद भी भाजपा ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। पर नतीजों के बाद मंत्री राम लाल मारकंडा पर सवाल जरूर उठे। इसके बाद मंडी संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में भी वे भाजपा को लीड नहीं दिलवा पाए थे। इसे भी मंत्री की बड़ी नाकामी के तौर पर देखा गया। अटल टनल पर श्रेय की लड़ाई : अटल टनल राेहतांग के निर्माण से लाहाैल-स्पीति का नाम टूरिज्म सेक्टर में चमक गया है। निसंदेह इससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। हालांकि राेहतांग टनल निर्माण का प्रस्ताव और शिलान्यास पूर्व की यूपीए सरकार के समय का था, लेकिन ये माेदी सरकार के समय में बन कर तैयार हुई। ऐसे में दोनों राजनैतिक दल इसका श्रेय ले रहे है। श्रेय की ये लड़ाई इस चुनाव में भी देखने को मिल रही है। हाल ही मैं अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने लाहौल में कहा था की कि रोहतांग टनल कांग्रेस की देन है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने पहली किस्त के तौर पर 1355 करोड़ रुपए इसके लिए जारी किए थे, न की वर्तमान प्रधानमंत्री ने। मनमोहन सरकार में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा इसकी आधारशिला रखी गई थी। उन्होंने कहा था कि भाजपा की सरकार ने जहां रोहतांग टनल का नाम बदलकर अटल रोहतांग टनल किया वहीं, सरकार के नुमाइंदों ने कांग्रेस कार्यकाल में हुए टनल की शिलान्यास पट्टिका को भी हटा दिया है, जो शर्म की बात है।
देश में हेट स्पीच के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार अब सख्त नजर आ रही है। केंद्र सरकार जल्दी ही हेट स्पीच को लेकर सख्त कानून लेकर आने वाली है। सरकार ने इसकी तैयारी भी कर ली है। इस कानून के तहत हेट स्पीच की परिभाषा तय की जाएगी। कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। अब हेट स्पीच को लेकर पैमाना तय होगा। एंटी हेट स्पीच कानून बनाने की तैयारी केंद्र सरकार ने कर ली है इससे हेट स्पीच की परिभाषा तय होगी, केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर नफरती कंटेंट रोकने के लिए एंटी हेटस्पीच कानून बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हेटस्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, अन्य देशों के कानूनों और अभिव्यक्ति की आजादी के तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, इसे जल्द ही सार्वजनिक राय के लिए पेश किया जाएगा, इसमें हेटस्पीच की परिभाषा स्पष्ट होगी, ताकि लोगों को भी यह पता रहे कि जो बात वे बोल या लिख रहे हैं, वह कानून के दायरे में आती है या नहीं। कानून के दायरे में आएगी ये चीज़े विधि आयोग ने हेटस्पीचर अपने परामर्श पत्र में साफ किया है कि यह जरूरी नहीं कि सिर्फ हिंसा फैलाने वाली स्पीच को हेटस्पीच माना जाए, इंटरनेट पर पहचान छिपाकर झूठ और आक्रामक विचार आसानी से फैलाए जा रहे हैं, ऐसे में भेदभाव बढ़ाने वाली और नस्ली भाषा को भी हेटस्पीच के दायरे में रखा जाना चाहिए, इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुलेगा, हेट स्पीच की परिभाषा साफ होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर्स द्वारा फैलाई गईं फेक न्यूज या नफरत भरी बातों से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी, सोशल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भ्रामक फैलाई जाती हैं अब इनके खिलाफ सख्त कानून बनने से कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल जाएगा।
चुनाव नजदीक है और कसौली निर्वाचन क्षेत्र में फिर पुरानी कहानी दोहराने की तैयारी चल रही है। बीते दो चुनाव के नतीजों पर नजर डाले तो कांग्रेस का हाल एक कहावत से समझा जा सकता है, 'हाथ को आया पर मुँह न लगा'। दोनों मौकों पर कांग्रेस जीतते -जीतते हार गई और दोनों ही बार कारण रहा गुटबाजी और भीतरघात। इन दोनों ही मौकों पर प्रत्याशी थे विनोद सुल्तानपुरी। अब फिर चुनाव से पहले कांग्रेस का एक खेमा सुल्तानपुरी को पटकनी देने की तैयारी कर चूका है। हालांकि विनोद निरंतर सक्रिय भी है और अब उनकी पकड़ भी पहले से ज्यादा मजबूत दिखती है, पर विरोधी भी इस बार नए पैंतरे को आजमाते दिख रहे है। कोशिश है कि टिकट वितरण के स्तर पर ही सुल्तानपुरी को पटकनी दे दी जाएं। इसके लिए बकायदा चेहरा तैयार कर लिया गया है। एक अधिकारी वीआरएस के लिए आवेदन कर चुके है और जुलाई के दूसरे सप्ताह में सेवानिवृत होने जा रहे है। माना जा रहा है कि कांग्रेस का एक धड़ा इन्हीं के नाम को आगे बढ़ाएगा। सुलतानपुरी दो मौकों पर चूक चुके है, इस तथ्य को आलाकमान के समक्ष रखा जायेगा और प्रयास रहेगा कि उन्हें टिकट के स्तर पर ही सेटल कर दिया जाएं। उधर विनोद सुल्तानपुरी भी तैयार है। पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए विनोद इस बार कोई चूक नहीं करना चाहते। जाहिर है विनोद का इरादा चुनाव लड़ने का है और वो पीछे हटने के मूड में नहीं है। दिल्ली दरबार में उनकी सीधी पहुंच है सो टिकट पर उनकी दावेदारी फिलहाल इक्कीस है। माहिर भी ये ही मानते है कि विरोधियों के तमाम प्रयासों के बावजूद विनोद फिर टिकट लाने में कामयाब होंगे, फिलहाल तो स्थिति कुछ ऐसी ही है। असल सवाल ये है कि क्या तमाम अंतर्कलह और संभावित भीतरघात के बावजूद विनोद चुनाव जीत पाएंगे, या इस बार फिर इसका लाभ डॉ राजीव सैजल को होगा। तो फिर कमल खिलाएंगे सैजल : 2012 में सुल्तानपुरी महज 24 वोट से हारे तो 2017 में अंतर 442 वोट का रहा। इन दोनों ही मौकों पर कांग्रेस की अंतर्कलह डॉ राजीव सैजल के लिए संजीवनी सिद्ध हुई। अब डॉ सैजल तीन बार से विधायक है और प्रदेश में भी भाजपा सरकार है, ऐसे में सत्ता विरोधी लहर से उन्हें खतरा हो सकता है। पर यदि कांग्रेस एकजुट नहीं रहती है तो सैजल फिर कमल खिलाने में कामयाब होते दिख रहे है।
लाहुल स्पिति में आज भी बुछेन परम्परा करीब छह सौ वर्षो से मनाई जा रही है। स्पिति घाटी के पिन घाटी में इस परम्परा का निर्वहन करने के लिए पांच से छह समूह पीढ़ी दर पीढ़ी लगे हुए है। यह एक धार्मिक मान्यता पर आधारित परम्परा है जो एक थाड0 तोड0 ज्ञालवो नाम के सिद्ध पुरूष पर समर्पित है। कुछ दशकों पूर्व इस परम्परा का निर्वहन करने वाले समूहों की संख्या 20 से अधिक थी,लेकिन अब कई समूहों ने इस परम्परा का अनुसरण करना बंद कर दिया है। स्पिति के पिन घाटी के सगनम गांव में रहने वाले छेतन गटुक ने बताया कि बुछेन का अर्थ होता है बड़ा अध्यात्मिक पुत्र। ये पत्थर तोड़ने की परम्परा है। ज्ञालवो कागयुद परम्परा के स्काॅलर थे। इन्होंने महामुद्रा और महासम्पन्न में शिक्षा हासिल की हुई थी। भोट रवजंग पंचाग के अनुसार थाड0 तोड0 ज्ञलवो का जन्म तिब्बत के उपरी सांग प्रांत ल्हसे में 1385 में हुआ था, जो पंचाग के अनुसार बुड ऑक्स साल का छठा चक्र था। थाड0 तोड0 ज्ञालवो सिद्ध पुरूष होने के साथ साथ एक बहुत ही अच्छे इंजीनियर भी थे। उन्होंने अपने हुनर से कई पुल, नांव और कई स्तूपों का भी निर्माण स्वयं किया था। भवन निर्माण निपुणता के कारण ही थाड0 तोड0 ज्ञालवो को चांग सेम पा कहा जाता था। उस दौर में आसानी से लोग एकत्रित नहीं होते थे तो थाड0 तोड0 ज्ञालवो लोगों को मनोरंजन करने के कार्यक्रम आयोजित करते थे। जब लोग इन कार्यक्रमों को देखने आते थे तो थाड0 तोड0 ज्ञालवो पुल निर्माण के लिए आवश्यक चीजों को चंदे के तौर पर देने की मांग करते थे, जैसे की लोहा, कोयला, लकड़ी आदि दें। थाड0 तोड0 ज्ञलवो रिद्धी बल में काफी मजबूत थे। उन्होंने अपनी अध्यात्मिक शक्तियों का प्रयोग तब किया जब तिब्बत के ल्हासा में भंयकर महामारी फैली थी और इस महामारी को नियंत्रित किया था। जानकार छेतन गटुक ने बताया जाता है कि जब महामारी फैली थी तो कोई भी चिकित्सक वैद्य इसका इलाज नहीं ढूंढ पा रहा था। लोग घरों में ही मर रहे थे। यही रिन्पोछे तत्कालीन राजा थे। उन्हें किसी प्रसिद्ध व्यक्ति ने बताया कि इस बीमारी का इलाज केवल थाड0 तोड0 ज्ञालवो ही कर सकते है। राजा ने अपने दरबार से कुछ लोग थाड0 तोड0 ज्ञालवो के पास भेजे। लेकिन जब लोग थाड0 तोड0 ज्ञालवो के पास पहुंचे और राजा के बुलावे के बारे में बताया। ज्ञालवो ने कहा कि आप चलिए मैं स्वयं राज महल पहुंच जाउंगा। थाड0 तोड0 ज्ञलवो खुद एक गिद्ध पर सवार होकर महामारी को नियंत्रित करने के ल्हासा ल्हासा पहुंच गए। ज्ञालवो को राजा रे रिन्पोछे ने महामारी के बारे में विस्तृत रूम से बताया। ज्ञालपो ने कहा कि इस महामारी का इलाज मैं करता हूं। आप चिंता न करें। इसके बाद थाड0 तोड0 ज्ञालवो महल से बाहर खुले मैदान में चले जाते है। लेकिन कोई भी व्यक्ति घरों से बाहर निकल नहीं रहा था। ज्ञालपो का मानना था जब तक लोगों के दिलों में बैठा हुआ डर नहीं निकलेगा। इस बीमारी से कोई निजात नहीं दिलवा पायेगा। उन्होंने लोगों को घरो से बाहर निकालने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन कोई आ ही नहीं रहा था। फिर ज्ञालपो ने अपनी रिद्धि सिद्धि बल का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर उन्होंने अपनी अध्यात्मिक शक्ति से अपने हाथ की पांच उंगलियों के आधार पर स्वंय को छोड़ चार अँगुलियों से चार अन्य कलाकार बनाए। ऐसे वे पांच कलाकार बनाए और कार्यक्रम पेश किया। जब इन पांचों ने मैदान में कार्यक्रम पेश करके लेागों को हंसाना शुरू किया तो लोगों घरों की खिड़कियों से देख रहे थे कि इन पांच को तो कुछ हो नहीं रहा है। फिर धीरे धीरे लोग अपने घरों से बाहर निकल कर बाहर आने लगे और कार्यक्रम देखने लगे। कुछ मिनटों में सारे लोग घरों से बाहर निकल मैदान में पहुंच गए। यहीं वजह थी कि आज भी बुछेन में पांच ही कलाकार होते। फिर जब भीड़ बढ़ती गई तो थाड0 तोड0 ज्ञालवो ने लोगों को मणी जाप करवाया जो उस वक़्त पूजा पाठ का अहम हिस्सा था। पूरी मान्यता यह है कि कोई भी महामारी या आपदा होती है तो उसके पीछे कोई कारक होता है। थाड0 तोड0 ज्ञालवो महामारी के कारण को निकालना चाहते थे। भोटी भाषा में कारक को नेदक कहते है। फिर उन्होंने लोगों को कहा कि जो लोग महामारी की चपेट में उनमें नेदक भी होगा। मुझे नेदक चाहिए। उन्होंने अपनी सिद्धी बल से एक पत्थर ढूंढा। इसके बाद उन्होंने उस नेदक को उक्त पत्थर में मंत्रों के साथ समा दिया। थाड0 तोड0 ज्ञालवो के पास एक आयु और फुरवा नमक दो अस्त्र से उक्त पत्थर को तोड़ दिया। यही वजह है कि बुछेन में लोग आज भी पत्थर तोड़ते है। अब बुछेन में छाती पर पत्थर तोड़ते है। जैसे जैसे समय बीतने लगा कि बड़े से बड़ा पत्थर बुछेन में इस्तेमाल होने लगा। अब भी बुछेन परम्परा को इसलिए मनाया जाता है कि गांव में कुछ होने वाला हो या फिर कुछ अप्रिय घटित हो गया हो तो मंत्रो उच्चारण से उस पत्थर में समा देते है। बुछेन में पांच सदस्य होते है इनमें सेदो उन्पा जोकि हंसाने का कार्यक्रम पेश करते है। एक मुख्य सदस्य होता है जिसे मुख्य बुचेन यानि मेमे बुचेन। इसके साथ ही णांवा भी होते है जो हेल्पर की तरह होते है। जब यह बुचेन का प्रर्दशन करते है तो काफी लाभप्रद प्रवचन देते है।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए मैदान में अब सिर्फ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष के प्रत्याशी यशवंत सिन्हा ही रह गए हैं। चुनाव के लिए कुल 96 लोगों का नॉमिनेशन अलग-अलग कारणों से रद्द कर दिया गया है। द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा के नॉमिनेशन को ही वैध माना गया है। राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को चुनाव होना है। 21 जुलाई को इसके नतीजे आएंगे। दरअसल भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को ख़त्म हो रहा है और संविधान के मुताबिक़ नए राष्ट्रपति का चुनाव उससे पहले पूरा हो जाना चाहिए। राष्ट्रपति को चुनने वाले इलेक्टोरल कॉलेज में संसद के दोनों सदनों के अलावा विधानसभा और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य होते हैं। सत्ताधारी एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष की तरफ से यशवंत सिन्हा उम्मीदवार हैं। दोनों ने अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में बीते दिनों द्रोपदी मुर्मू ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया। बद्दी के किशनपुरा स्थित एक निजी होटल में उन्हें अपना समर्थन देने के लिए प्रदेश भाजपा विधायक दल ने बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में मुर्मू विशेष रूप से पहुंची थीं। यहां उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पार्टी विधायकों, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने अपना समर्थन दिया। अब तक अधिकतम पार्टियों ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। अकाली दल ने भी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। अब तक भाजपा के अलावा बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, शिरोमणि अकाली दल, जेडीयू, एआईएडीएमके, लोक जन शक्ति पार्टी, अपना दल (सोनेलाल), निषाद पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले), एनपीपी, एनपीएफ, एमएनएफ, एनडीपीपी, एसकेएम, एजीपी, पीएमके, एआईएनआर कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी, यूडीपी, आईपीएफटी, यूपीपीएल जैसी पार्टियों ने समर्थन दे दिया है। विपक्ष में होने के बाद भी बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, जनता दल सेक्युलर, अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी ने एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को समर्थन दिया है। इन सभी के पास 6 लाख वैल्यू से ज्यादा के वोट हैं। मुर्मू के साथ संख्या बल ज़रूर दिख रहा है मगर यशवंत सिन्हा के आत्मविश्वास में भी कमी नज़र नहीं आ रही। उन्हें अब भी उम्मीद है कि अंत तक उनके समर्थन में और लोग भी आगे आएंगे। यूँ तो राष्ट्रपति चुनाव के लिए ज्यादातर बड़ी पार्टियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन अभी भी कुछ दलों की स्थिति स्पष्ट नहीं है। पंजाब और दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि उनका समर्थन किसे मिलेगा। आप के 10 राज्यसभा सांसद भी हैं। इसके अलावा टीडीपी, झामुमो ने भी अब तक कुछ साफ नहीं किया है। शिवसेना में भी आंतरिक कलह के चलते अब तक किसी भी उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि, भाजपा के साथ सरकार बनाने वाले विधायक और ज्यादातर सांसद एनडीए के उम्मीदवार को सपोर्ट कर सकते हैं। ऐसे में यशवंत सिन्हा को आम आदमी पार्टी, टीडीपी और झामुमो से बड़ी उम्मीदें हैं। अगर ये दल सिन्हा को समर्थन दे देते हैं तो वह द्रौपदी मुर्मू के कुछ हद तक करीब पहुंच सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में सोमवार सुबह बड़ा सड़क हादसा पेश आया है। हादसे में अभी तक 12 लोगों की मौत होने की सुचना प्राप्त हुई है। वहीं 3 लोग घायल हुए हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। आसपास के लोगों के साथ मिलकर बचाव अभियान चलाया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है। तहसीलदार सैंज हीरालाल ने बताया कि राहत कार्य जारी है। जानकारी के अनुसार, कुल्लू जिले के सैंज के शैंशर में एक निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। बस जांगला गांव से करीब 200 मीटर दूर सड़क से नीचे खाई में गिर गई। बताया जा रहा है कि शव बस के अंदर फंसे हुए हैं। जिन्हें निकालने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद ही मृतकों का सही आंकड़ा सामने आएगा। यह हादसा सोमवार की सुबह करीब 8:45 बजे हुआ। बस शैंशर से औट जा रही थी। बस में कुल 15 से अधिक लोग सवार थे। वहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बस हादसे पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि पूरा प्रशासन मौके पर है और बचाव कार्य में लगा है।
'कुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है' 2017 में प्रो प्रेम कुमार धूमल की हार ने हिमाचल भाजपा की तस्वीर तो बदली ही, कई नेताओं की तकदीर भी बदल कर रख दी। एकाध अपवाद छोड़ दें तो धूमल निष्ठावान जयराम राज में हाशिए पर है। कुछ निष्ठा बदल चुके है तो कुछ हालात से समझौता करते दिख रहे है। हालांकि प्रो साहब के सियासी रसूख में कोई कमी नहीं दिखती। समीरपुर में अरदास लेकर पहुंचे लोगों का हुजूम बयां करता है कि अलबत्ता सीएम न सही पर प्रोफेसर अब भी भाजपा की सियासत के हेडमास्टर जरूर है। इस पर उनके सुपुत्र और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का बढ़ता कद भी निष्ठावानों को ठंडक देता है। पर जो सुकून प्रदेश की सत्ता में है वो भला और कहाँ ? प्रो धूमल वो शख्स है जिनकी पकड़ प्रदेश के हर हलके में है। अब भी धूमल हमीरपुर से निकलकर कहीं और जाते है तो एक अदद मुलाकात के लिए उमड़ी भीड़ ये साबित करने के लिए काफी है कि उनका अब भी कोई सानी नहीं है। पर माहिर मानते है कि बेटे अनुराग की ऊँची सियासी उड़ान ने धूमल साहब को अब जमीन पर ही रहने को मजबूर कर दिया है। यानी अब प्रोफेसर की मुख्यधारा की राजनीति से विदाई तय है। अब वर्तमान भी अनुराग है और भविष्य भी अनुराग। उधर विरोधी खेमे ने उपेक्षा का दंश झेल रही धूमल ब्रिग्रेड को पूरी तरह सेटल करने की तैयारी कर ली है। जहाँ -जहाँ धूमल के निष्ठावान ताकतवर है, वहां - वहां समानांतर गुट तैयार है। माहिरों के अनुसार योजना ये है कि टिकट वितरण के स्तर पर ही इन्हें दौड़ से बाहर कर दिया जाएं। मसलन रविंद्र रवि, तेजवंत नेगी, ठाकुर गुलाब सिंह सहित कई नेताओं का टिकट काटने की बिसात तैयार है। धूमल गुट के कई नेताओं को तो बोर्ड निगमों तक में एडजस्ट नहीं किया गया है। पर प्रश्न ये ही है कि क्या ऐसा करके मिशन रिपीट मुमकिन हो पायेगा ? ईमानदारी से कहे तो शायद नहीं। बेशक धूमल गुट कुछ कमजोर हुआ है लेकिन इतना भी नहीं कि उसे दरकिनार कर चुनाव जीता जा सके। वहीँ उपेक्षित धूमल निष्ठावान इसी उम्मीद में है कि धूमल न सही अनुराग ही प्रदेश में लौट आएं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या ऐसा होना मुमकिन है ? माहिर मानते है कि ऐसा हो सकता है। दरअसल हिमाचल विधानसभा चुनाव जीतना जितना भाजपा के लिए जरूरी है उतना ही जगत प्रकाश नड्डा के लिए भी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के गृह राज्य में पार्टी हारी तो सवाल उठना लाज़मी होगा, ऐसे में हमेशा जयराम ठाकुर की ढाल बनने वाले नड्डा क्या अनुराग पर भी मेहरबान हो सकते है, ये ही यक्ष प्रश्न है। जानकार मान रहे है कि यदि चुनाव से पहले भाजपा को मिशन रिपीट खतरे में दिखा तो पार्टी 'असम फार्मूला' के साथ मैदान में उतर सकती है, यानी बिना सीएम फेस। इस फॉर्मूले से जाहिर है दोनों गुटों को सीएम पद की आस रहेगी और भीतरघात और अंतर्कलह को कम किया जा सकेगा। और नतीजे अगर पार्टी के पक्ष में आएं तो बदलाव भी मुमकिन होगा। हिमाचल की सियासत में प्रो प्रेम कुमार धूमल निसंदेह असरदार है और अनुराग ठाकुर का सियासी वजन लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में बाप -बेटे की ये जोड़ी भाजपा के मिशन रिपीट के लिए बेहद अहम है। चुनाव से पहले अभी हिमाचल भाजपा की सियासत में कई उतार चढ़ाव आने बाकी है। अपने हर निर्णय से चौकाने वाले पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी न जाने हिमाचल में कौन सा दांव खेल दे।
हिमाचल प्रदेश के कोटखाई में गुड़िया निर्मम हत्या और दुष्कर्म मामला 5 साल बाद फिर गर्म आता हुआ नजर आ रहा है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह द्वारा गुड़िया मामला को छोटा मामला बताने पर भाजपा महिला मोर्चा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्रदेश भर में धरना प्रदर्शन किए जा रहे हैं वहीं रविवार को भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रशिम धर सूद गुड़िया के गांव शिवगिरि पहुंच गई और वहां पर उनके माता-पिता से बात की उनसे बात करते हुए एक वीडियो जारी किया गया जिसमें गुड़िया के पिता ने प्रतिभा सिंह के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है । साथ ही प्रतिभा सिंह पर झूठ बोलने के आरोप लगाए हैं। गुड़िया के पिता ने कहा कि प्रतिभा सिंह ने गुड़िया मामले को मामूली घटना का बयान दिया है जिससे उन्हें दुख हुआ है प्रतिभा सिंह ने यह गलत बात की है उनकी बेटी हो या किसी की हो भी ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए उनकी इस तरह की बातें सुनकर दुख और परेशान होते हैं प्रतिभा सिंह झूठ बोल रही थी कि जब गुड़िया की मौत हुई तो उनके घर वे दूसरे दिन पैदल पहुंचे जबकि वह 7 दिन बाद आई थी। वहीं भाजपा अध्यक्ष रश्मि धर सूद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह झूठ पर झूठ बोल रही है और आज वह गुड़िया के परिजनों से दोबारा से मिलने के लिए उनके घर आई है प्रतिभा सिंह ने गुड़िया मामले को एक छोटी सी घटना कहा था अगर यह मामूली सी बात होती तो पूरा प्रदेश में चक्का जाम नहीं होता लोग सड़कों पर नहीं उतरते और सीबीआई से इस मामले की जांच ना होती। उन्होंने कहा कि प्रतिभा सिंह आप कह रही है कि मैं यहां पर मिलने पहुंची थी लेकिन गुड़िया के पिता कह रहे हैं। कि 7 दिन बाद वह यहां पर आई है जबकि भाजपा शुरू से ही गुड़िया के ऊपर परिवार वालों के साथ खड़े हैं और उम्मीद है कि जल्द गुड़िया के परिवार वालों को न्याय भी मिले।
विवादों में रही हिमाचल पुलिस भर्ती परीक्षा का फिर से आज प्रदेश भर में आयोजित की गई है। परीक्षा के लिए शिमला शहर में 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए है।जहा अभ्यर्थी सुबह 10 बजे से पहुचने शुरू हो गए है और पुलिस द्वारा चेकिंग के बाद ही परीक्षा केंद्रों में भेजा गया। परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरे से नजर रखी जा रही है । और किसी भी तरह की चीजें अंदर अभ्यार्थियों नहीं ले जा सकते हैं यहां तक कि फोन भी बाहर ही रखे जा रहे हैं ।डीएसपी शिमला कमल वर्मा ने कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा का आयोजन आज करवाया जा रहा है और शिमला शहर में 11 केंद्र इसके लिए बनाए गए हैं कुल अभ्यार्थी 5144 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे अभ्यार्थियों को पहले ही रोल नंबर भेज दिए गए हैं और कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा का आयोजन किया जाएगा परीक्षा केंद्रों के अंदर सीसीटीव कैमरे से नजर रखी जा रही है इसके अलावा वीडियोग्राफी भी की जा रही है। दोपहर 1 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद परीक्षार्थी बाहर आये तो उन्होंने कहा कि पिछली बार पेपर लीक होने से वह काफी मायूस हैं क्योंकि पिछली बार उन्होंने परीक्षा उतीर्ण कर ली थी। लेकिन पेपर लीक होने के चलते यह परीक्षा रद्द कर दी गई और आज दोबारा से परीक्षा आयोजित की गई इस बार पिछले बार के मुकाबले पेपर काफी कठिन था इस बार पेपर लीक होने का डर नहीं सता रहा है अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा को लेकर काफी ज्यादा तैयारियां की थी। लेकिन पेपर लीक हो गया और अब दोबारा से पेपर लीक होने की संभावना नही लग रही।अभ्यर्थियों ने पिछली बार उनका चयन हो गया था और पिछले कल से ट्रेनिंग आरम्भ हो जानी थी लेकिन अब दुबारा से परीक्षा दे रहें है।अब पता नही है कि इस बार परीक्षा में उतीर्ण होंगे य नही पता नही।वहीं कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि वह आहत हैं कि पिछली बार की परीक्षा रद्द हो गयी अब इस बार चयन का पता नही।उन्होंने कहा काफी मेहनत और कोचिंग के बाद परीक्षा उतीर्ण की थी परन्तु वहीं अब दो माह बाद फिर परीक्षा दी है चयन का कह नही सकते।
भीम आर्मी भारत एकता मिशन के राष्ट्रीय संयोजक चंद्रशेखर रावण की राजस्थान में गिरफ्तारी पर हिमाचल भीम आर्मी भड़क गई है ओर राजस्थान की कांग्रेस सरकार को उन्हें जल्द रिहा करने की चेतावनी दी है और उन्हें रिहा नही किया जाता है तो हिमाचल में कांग्रेस के खिलाफ भी मोर्चा खोलने की बात कही है। चन्द्रशेखर की रिहाई को लेकर शिमला में भीम आर्मी भारत एकता मिशन के प्रदेश अध्यक्ष रवि कुमार दलित ने एसडीएम के माध्यम से राष्ट्पति को ज्ञापन भेजा। और जल्द रिहाई की मांग की है। रवि कुमार दलित ने कहा कि राजस्थान के अंदर कांग्रेस सरकार निरंकुश हो गई है। पिछड़े लोगों की आवाज उठाने वाले चंद्रशेखर रावण को गिरफ्तार किया गया है जबकि वह शांतिपूर्वक सी एच ए कर्मचारियों के समर्थन में वहां पर पहुंचे थे । गहलोत सरकार ने वादा किया था कि उन्हें पक्का किया जाएगा लेकिन अब उन्हें नौकरी से निकालने की पूरी तैयारी कर चुके हैं इसी बात को लेकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया जिस का कड़ा विरोध जताते हुए एसडीएम शिमला शहरी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया है और जल्द से जल्द बिना शर्त चंद्रशेखर रावण को छोड़ने की मांग की गई है अगर जल्द से जल्द उन्हें नहीं छोड़ा गया तो यह लड़ाई राजस्थान में ही नहीं पूरे हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस का विरोध कर लड़ी जाएगी पूरी तरह से कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया जाएगा।
एंकर।। शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के परिणाम हिमाचल कर्मचारी आयोग द्वारा सात माह पहले घोषित कर दिया गया है लेकिन सात माह बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति नही मिल पाई है। जिसके चलते अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान कर दिया है। रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता कर सरकार को जल्द नियुक्तियां देने की मांग की।आचार्य हीरा शर्मा ने कहा कि शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 का परिणाम निकले 7 महीने बीत गए है लेकिन अभी तक नियुक्ति नही दी गई है। पहले ही इसका परिणाम 1 साल बाद निकाला गया।और अब नियुक्ति में 7 महीने बीत गए हैं ऐसे में शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के अभ्यार्थी मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य भी मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये मामला कोर्ट में है और अब 7 जुलाई को सुनवाई है। जिसमें सरकार को अपना पक्ष रखना है। शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के कुछ अभियार्थी ने R&P नियम को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की है ।ओर R&P नियम को गलत बताया है । लेकिन इसमें सरकार से जवाब तलब किया गया है। अब 7 जुलाई वाली सुनवाई में सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखे ।और इसमें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कोई ऐसा ठोस कदम उठाए ।ताकि जो 7 महीने से नियुक्तियां नहीं हुई है वह इसी महीनें में हो। यदि नियुक्तियां जल्दी नहीं हुई तो शास्त्री कमीशन पोस्ट कोड 813 के अभ्यार्थी आने वाले समय में सड़कों पर उतर कर उग्र धरना प्रदर्शन करेंगे।
शिमला के संजोली कॉलेज में स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश व युवाह (YOUVAH) संस्था की ओर से अंगदान के विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 60 प्रतिभागियो ने अंग दान करने की शपथ ली।इस मौके पर स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) हिमाचल प्रदेश के नोडल अधिकारी व आईजीएमसी के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ पुनीत महाजन ने अंगदान के विषय में प्रतिभागियों को अवगत करवाया।उन्होंने बताया कि मरने के बाद भी व्यक्ति अपने आप को दूसरे के शरीर में जिंदा रख सकता है यह अंगदान से संभव हो सकता है । अंगदान से व्यक्ति एक नहीं बल्कि 8 लोगों का जीवन बचा सकता है।वहीं दूसरी ओर देश में हर साल करीब दो लाख लोगों को ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। बदलती जीवन शैली के चलते ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय की बीमारी, ब्रेन स्ट्रोक व फेफड़े की बीमारियां बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से किडनी हॉर्ट और लीवर बड़ी संख्या में फेल हो रहे हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए कहां अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टर मरीज को हर संभव मेडिकल इलाज उपलब्ध करवाते हैं। इसके बावजूद अगर मरीज में इंप्रूवमेंट नहीं होती है और मरीज ब्रेन डैड की स्थिति में पहुंच जाता है तभी अंगदान के बारे में तीमारदारों को अवगत करवाया जाता है। तीमारदारों की रजामंदी के बाद ही मरीज के शरीर से अंग निकाले जाते हैं। साथ ही कई बार तीमारदारों की धारणा होती है कि ब्रेन डेड होने के बाद भी मरीज वापस जिंदा हो सकता है, उन्होंने बताया कि मरीज कोमा से वापस आ सकता है लेकिन ब्रेन डेड होने के बाद उसका रिकवर होना असंभव है। वही लोगों को लगता है कि अमीर मरीजों की जान बचाने के लिए ब्रेन डेड की स्थिति में चल रहे मरीज से अंग लिए जाएंगे जबकि निकाले गए अंगों को दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित करने से पहले कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। अंग दाता और अंग लेने वाले मरीज के ब्लड सैंपल मैच के जाते हैं, टिशु टाइपिंग, ऑर्गन साइज, मेडिकल अर्जेंसी, वेटिंग टाइम और भौगोलिक स्थिति के आधार पर दान किए गए अंग दूसरे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट किए जाते हैं।अस्पताल के किसी भी वार्ड के आईसीयू में अगर कोई मरीज ब्रेन डेड की स्थिति में पहुंचता है तो ब्रेन डेथ कमेटी एक्टिवेट हो जाती है।यह कमेटी आगामी 36 घंटे के भीतर मरीज की पूरी तरह से मॉनिटरिंग करती है पूरी तरह से आश्वस्त होने के बाद ही मरीज को ब्रेन डेड डिक्लेअर किया जाता है। उन्होंने कहा की युवा अवस्था में जहां आजकल के युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं वही इस संस्था के युवा स्वस्थ समाज बनाने में अपनी भागीदारी दे रहे हैं। कार्यक्रम में युवा संस्था के अध्यक्ष सुमित ठाकुर, कार्यकारी निदेशक ललित कुमार डोगरा, संयोजक सुधांशु ठाकुर, महासचिव कपिल देव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सिद्धांत चौहान, उपाध्यक्ष साक्षी धीमान, संयुक्त सचिव हर्षदीप कौर व व रवीना खत्री, कोषाध्यक्ष भार्गव तोमर, सहयोगी कोषाध्यक्ष नेहा शर्मा, मीडिया प्रभारी दीक्षित, कार्यक्रम प्रभारी जय राज, सहयोगी कार्यक्रम प्रभारी रितु सहित सोटो के ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नरेश कुमार और प्रोग्राम असिस्टेंट भारती कश्यप मौजूद रही।
--बैठक में शामिल होंगे भाजपा के शीर्ष नेता भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, सह प्रभारी संजय टंडन और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन राणा ने शनिवार को हैदराबाद में शुरू हुई दो दिवसीय भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लिया। हैदराबाद इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, 19 राज्यों के मुख्यमंत्री और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कश्यप ने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर में हुए विधानसभा चुनावों, कुछ निकाय चुनावों, रामपुर, आजमगढ़ के लोकसभा उपचुनावों और त्रिपुरा के विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को भारी जीत मिली है। उन्होंने कहा कि अभी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, आज पूरी दुनिया की आर्थिक विकास दर औसतन 6% है। वहीं, भारत की अर्थव्यवस्था 8.7% की दर से आगे बढ़ रही है। यह भी हमारी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। बूथ को मजबूत करना बहुत जरूरी है। बूथ अध्यक्ष और बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क हमारे लिए बहुत जरूरी है। क्योंकि वे कार्यकर्ता हैं जो क्षेत्र में हमारी बात घर घर पहुंचा सकते हैं और अपनी बात सबके सामने रख सकते हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हमारे लिए एक बड़ी सीखने की प्रक्रिया है। यह 2022 विधानसभा चुनावों में हमारी जीत का मार्ग प्रशस्त करेगी।
मणिपुर के नोनी जिले में 29 जून को हुए भूस्खलन में अब तक 81 लोग लापता हैं। जबकी 18 टेरिटोरियल आर्मी जवानों के शवों का रेस्क्यू किया गया है। यहां फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव का काम जारी है। इस बीच मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने मंत्रियों के साथ घटनास्थल का दौरा किया और बचाव अभियान की समीक्षा की। सीएम एन बीरेन सिंह ने मरने वालों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। गौरतलब है कि मणिपुर में बुधवार यानी 29 जून को देर रात नोनी जिले में तुपुल रेलवे स्टेशन पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। घटना बुधवार आधी रात के करीब उस वक्त हुआ जब जिरीबाम से राजधानी इंफाल तक बनने वाली रेलवे लाइन की सुरक्षा के लिए टेरिटोरियल आर्मी का एक कैंप वहां तैनात था। दरअसल जिरीबाम को इंफाल से जोड़ने के लिए एक रेलवे लाइन का निर्माण हो रहा था जिसकी सुरक्षा के लिए 107 टेरिटोरियल आर्मी के जवानों को तैनात किया गया था. इस भूस्खलन में कई जवान दब गए। सेना ने फंसे लोगों के बारे में बात करते हुए जानकारी दी की फिलहाल बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू अभियान के तहत मलवे में फंसे लोगों को बचाया जा रहा है। वहीं इस भूस्खलन में घायल हुए लोगों का इलाज नोनी आर्मी मेडिकल यूनिट में किया जा रहा है। भारतीय सेना द्वारा गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को निकालने का कार्य जारी है।
कन्हैलाल हत्याकांड में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ से 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उदयपुर के टेलर कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच कर रही NIA ने इस मामले में नया खुलासा किया है। NIA की पूछताछ में सामने आया कि इस हत्याकांड में मोहम्मद गौस और रियाज के अलावा कुल पांच लोग शामिल थे। टेलर कन्हैयाला की हत्या को पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया था। वहीं वारदात के दौरान किसी गड़बड़ी से बचने के लिए एक बैकअप प्लान भी बनाया गया था, जिसमें तीन लोग शामिल थे। हत्या को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने मीटिंग की थी। कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच कर रही NIA ने इस हत्याकांड के मुख्य आरोपियों मोहम्मद गौस और रियाज के दो साथियों मोसिन और आसिफ को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की। इन दोनों ने NIA की टीम को बताया कि हत्या के बाद मोहम्मद गौस और रियाज को एक सेफ पैसेज देने के लिए बैकअप प्लान भी तैयार था। इस बैकअप प्लान में तीन लोग शामिल थे। प्लान के मुताबिक, मोसिन और उसका साथी आसिफ कन्हैयालाल की दुकान से थोड़ी दूरी पर खड़े थे। वहीं उनका एक अन्य साथी स्कूटी पर नजदीक मौजूद था।
दिल्ली से जबलपुर जा रहे स्पाइसजेट के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है। बताया गया कि जब विमान ने उड़ान भरी तो कुछ ही देर बाद विमान के अंदर काला धुंआ दिखाई देने लगा। धुंआ देखने के बाद सभी पैसेंजर पैनिक में आ गए और पायलट ने वापस मुड़कर दिल्ली में लैंड करने का फैसला लिया। सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। बताया गया है कि स्पाइसजेट के इस विमान में 50 से अधिक यात्री सवार थे। जब प्लेन करीब 5 हजार फीट की ऊंचाई पर गया तो अचानक स्मोक नजर आने लग। यात्रियों को पहले तो समझ नहीं आया कि ये सब क्या हुआ, लेकिन जैसे ही धुआं बढ़ता गया, लोग परेशान होने लगे। लेकिन जब पायलट ने सुरक्षित विमान की लैंडिंग दिल्ली एयरपोर्ट पर कराई तो लोगों ने राहत की सांस ली। इस दौरान लोगों को विमान में हाथ वाले पंखों की मदद से धुएं को दूर करते हुए भी देखा गया। फिलहाल विमान को रनवे में खड़ा किया गया है, जहां उसकी जांच की जा रही है।
हिमाचल में लगातार बारिश का कहर जारी रहा। जिला चम्बा के साथ लगती ग्राम पंचायत सरोल तथा हरिपुर में बारिश के कारण भरी मात्रा में पानी व मलबा लोगों के घरो में घुस गया। लोगो को जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। इसके अलावा खेतो में भी पानी व मालवा आने से मक्की की फसलों को काफी नुकसान हुआ। इससे पहले लोग कुछ समझ पाते वे पहाड़ी की ओर भागने लगे। इस हादसे में अभी तक किसी तरह का जानी नुक्सान होने की कोई सुचना नहीं है। वीरवार को हुई बारिश के कारण चम्बा - पठानकोट एनएच् पर चनेड , उदयपुर तड़ोली में मालवा सड़को पर आ गया। जिस कारण मार्ग पर करीब आधा घंटा वाहनों की आवाजाही बंद रही। इसके अलावा चम्बा-सुंडला-सलूणी मार्ग पर कैला मोड़ पर डंगा गिर गया। जिसके कारण वहां से गुजर रही कार का एक हिस्सा लटक गया। इसके अलावा शहर के कई क्षेत्रो में भी काफी नुक्सान हुआ।
दिल्ली में भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए मॉनसून की बारिश राहत लेकर आ गया है। राजधानी में मॉनसून की शुरुआत के साथ ही भारी बारिश हो रही है। शहर के जिन हिस्सों में आज बारिश हुई उसमें ईस्ट ऑफ कैलाश, बुराड़ी, शाहदरा, पटपड़गंज, आईटीओ क्रॉसिंग और इंडिया गेट शामिल हैं। इन इलाकों में आज तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। IMD की मानें को राजधानी में कल रात यानी 29 जून से ही मौसम में बदलाव नजर आ गया था और आज यानी 30 जून की सुबह दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में बादल छाए हुए हैं। राजधानी में गुरुवार सुबह से कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हो रही है। फिलहाल दिल्ली के द्वारका से लेकर गाजियाबाद में झमाझम बारिश हो रही है, वहीं दूर के कईं इलाकों में बादल छाए हुए हैं और किसी भी वक्त बादल बरस सकते हैं। शहर के कुछ हिस्सों से लगातार हुई बारिश के कारण जलमग्न सड़कें दिखाई दे रही हैं, वहीं बारिश के कारण ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने भी यात्रियों के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. बता दें कि मौसम विभाग ने आज सुबह एक ट्वीट में शहर में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की पुष्टि की है। IMD ने गुरुवार को शहर के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और शुक्रवार को हल्की बारिश की चेतावनी भी दी है।
अमेरिकी करेंसी डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 13 पैसे मजबूत होकर 78.90 प्रति डॉलर पर खुला है। इंटरबैंक फॉरेन करेंसी बाजार में रुपया ऊंचाई में 78.90 और नीचे में 78.94 तक गया। पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 79.03 के निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशों में डॉलर में आई मजबूती और विदेशी पूंजी की सतत निकासी से रुपये में गिरावट जारी बनी हुई है। रुपये में इस महीने में अभी तक 1.97 फीसदी की गिरावट आ चुकी है जबकि इस साल की शुरुआत से रुपये का मूल्य 6.39 फीसदी घट चुका है। इस बीच, छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.13 फीसदी की तेजी के साथ 104.64 पर आ गया है।
भारत सरकार ने देशभर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में दूरदर्शी निर्णय किया है। इसके तहत भारत सरकार ने हर पंचायत में अगले आम चुनाव से पहले प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटी (पैक्स) का गठन करने और उसे एक सॉफ्टवेयर के जरिये उसका डिजिटलाइजेशन करने की योजना बनाई है। इसी क्रम में बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने देशभर के 63000 पैक्स का कम्प्यूटरी करण किए जाने को मंजूरी दे दी है। इसके तहत भारत सरकार करीब 2516 करोड़ खर्च करेगी। जिसे 2024 तक बढ़ाकर प्रत्येक पंचायत तक ले जाने की योजना है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से न केवल आम किसानों को फायदा होगा बल्कि इससे देश कि अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अनुराग ठाकुर के मुताबिक देश की समस्त सहकारी संस्थाओं को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। जिससे घपला और धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सकेगी। वहीं भारत सरकार सहकारिता सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम कर रही है जिसके तहत सरकार राष्ट्रीय सहकारिता विश्वविद्यालय बनाने की योजना तैयार कर रही है। फिलहाल सरकार इसके लिए विशेषज्ञयों की राय ले रही है। इसमें सहकारी क्षेत्र को लेकर ही पढ़ाई होगी। कृभको और अमूल और अन्य सहकारी संसथाओं को आटा सहित कई अन्य उत्पाद बेचने की इजाजत दी जाएगी। ये संस्थाएं जैविक उत्पाद बेचेग। इससे अमूल या अन्य सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों की कमाई बढ़ेगी।
दिल्ली सरकार ने गांवों के विकास को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवालने कहा कि एक विधानसभा के अंदर जितने गांव हैं, उन सभी के बजट को मिलाकर विकास कार्य किए जा सकेंगे। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के गांवों का विकास करने के लिए हर गांव में दो करोड़ रुपए के विकास कार्य करने की योजना की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस योजना के तहत ऐसी संपत्ति जो कई गांव की है, उनका इस स्कीम के तहत रखरखाव नहीं हो पा रहा थ। लेकिन अब उन गांवों के बजट को मिलाकर खर्च किया जा सकेगा। केजरीवाल सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर इस समस्या को दूर कर दिया है। अब अगर गांव मिलकर कोई मांग करते हैं तो बजट उनको दे दिया जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के गांवों का विकास करने के लिए हमने कुछ साल पहले स्कीम निकाली थी कि हर गांव में दो करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए जाएंगे। वहां के लोग बताएंगे कि यहां पर सड़क बना दो, यहां नल लगा दो और यहां चौपाल बना दो। इसका मतलब जो लोग बताएंगे, हम वह काम करेंगे।
महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद से उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद बीजेपी खेमे में हलचल और तेज हो गई है। उद्धव के सीएम की कुर्सी खाली करने के साथ ही बीजेपी खेमे में खुशी की लहर है। इस बीच सरकार बनाने की भी तैयारी की जा रही है। आज बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक ( होगी जिसमें सरकार बनाने की रणनीति पर मंथन किया जाएगा। 2 जुलाई से पहले सरकार गठन को लेकर तैयारी की जा रही है। बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक में आगे की रणनीति तय होगी। जानकारी के मुताबिक 1 या 2 जुलाई को बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। गौरतलब है कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की बगावत से बने सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे की कुर्सी जा चुकी है। कल तक उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के सीएम थे लेकिन अब वो कार्यवाहक सीएम बन गए हैं। ऐसे में अब बीजेपी सरकार बनाने की कवायद में पूरी तरह से जुट गई है। आज सुबह 11 बजे देवेंद्र फडणवीस के घर कोर ग्रुप की बैठक होगी। महाराष्ट्र बीजेपी प्रभारी सीटी रवि बैठक में मौजूद रहेंगे। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बैठक में चर्चा होगी।
महाराष्ट्र में बड़े सियासी बदलाव के साथ उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सियासी संकट के दौरान राज्यपाल और पार्टी नेताओं के बीच तकरार जैसी स्थिति भी बनी। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने जब उद्धव ठाकरे को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया तो शिवसेना के नेता के तेवर कड़े हो गए। हालांकि पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी लेकिन फ्लोर टेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। बुधवार को पार्टी के नेता संजय राउत भी भड़क उठे थे। उन्होंने राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक तक करार दिया था। दरअसल, महाराष्ट्र के राज्यपाल ने बुधवार 29 जून को कहा था कि उद्धव सरकार गुरुवार सुबह 11 बजे फ्लोर टेस्ट का सामना करें, जिसके बाद शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा था कि संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खुद सीएम ने भी इस फैसले को लेकर अप्रत्यक्ष तौर पर नाराजगी जताई थी।


















































