वर्तमान के सियासी समीकरण समझने के लिए कई मर्तबा अतीत के सियासी चलचित्र में झांक लेना मददगार होता है। सो शुरुआत करते है 1998 के विधानसभा चुनाव से। 1985 के बाद ये पहला मौका था जब प्रदेश में कोई सरकार रिपीट करने की स्थिति में दिख रही थी। वीरभद्र सरकार को लेकर प्रो इंकम्बैंसी दिख रही थी और मिशन रिपीट लगभग तय लग रहा था। पर पंडित सुखराम कुछ और ही ठान चुके थे, और उन्होंने हिमाचल विकास कांग्रेस बनाकर कांग्रेस को झटका दे दिया। तब काँटे के मुकाबले में 23 सीटें ऐसी थी जहाँ जीत-हार का अंतर दो हज़ार वोट से कम था। इन से 14 सीटें कांग्रेस हारी थी और तीन सीटों पर तो उसे हिमाचल विकास कांग्रेस से सीधे मात दी थी। इसके अलावा कई सीटें ऐसी थी जहाँ कांग्रेस की हार का अंतर बेशक दो हज़ार वोट से अधिक था लेकिन पार्टी का खेल हिमाचल विकास कांग्रेस ने ही बिगाड़ा था। ये आंकड़ें इस बात की तस्दीक करते है की यदि हिमाचल विकास कांग्रेस न होती तो 1998 में वीरभद्र दूसरी बार रिपीट कर जाते। ऐसे में जाहिर है कि बेशक कभी हिमाचल में तीसरी पार्टी सरकार न बना पाई हो लेकिन नतीजे बदलने की कुव्वत तो रखती है। भाषणों -ब्यानों में तीसरी पार्टी को लेकर कुछ भी कहा जा रहा हो, लेकिन 1998 का ये इतिहास कांग्रेस और भाजपा दोनों की धुकधुकी जरूर बढ़ा रहा होगा। अब आते है वर्तमान स्थिति पर। करीब चार -पांच माह में हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है। भाजपा मिशन रिपीट के लिए और कांग्रेस सत्ता वापसी के लिए हाथ पाँव मार रहे है। और फिलवक्त प्रदेश में वो तीसरी पार्टी है आम आदमी पार्टी। अलबत्ता कांग्रेस -भाजपा दोनों आप के प्रभाव को सिरे से खारिज कर रहे है लेकिन टेंशन दोनों को है। दोनों को पता है कि आप को हल्के में लेने की भूल महंगी पड़ सकती है। बीते तीन चुनाव पर नज़र डाले तो प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में फ्लोटिंग वोट न तो सरकार के खिलाफ मुखर दिखा है और न ही समर्थन में, पर तीनों मर्तबा प्रदेश ने बदलाव के लिए वोट किया है। यानी वोटर की खामोशी सत्ता पर भारी पड़ती आ रही है। मौजूदा समय में जयराम सरकार को लेकर भी न एंटी इंकम्बेंसी दिख रही है और न ही प्रो इंकम्बैंसी। ऐसे में यदि बदलाव के लिए वोट होता है और आप उसमे सेंध लगाती है तो लाभ भाजपा को हो सकता है। हवा और माहौल के हिसाब से चलने वाला न्यूट्रल वोटर दोनों पार्टियों को ठेंगा दिखा सकता है। वहीँ आप के गुड गवर्नेंस मॉडल से यदि ये वोटर प्रभावित हुआ तो भाजपा का मिशन रिपीट भी खटाई में पड़ सकता है। सो कोई माने न माने, चिंता की आग दोनों तरफ बराबर लगी है। बात करें आम आदमी पार्टी की तो पंजाब में जीत के बाद जिस तरह का आगाज हुआ था वो पार्टी बरकरार नहीं रख पाई। पर अब प्रदेश में आम आदमी पार्टी फिर से तेवर में आती दिख रही है। बीते दिनों प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन भी हो गया है और वीआईपी दौरों का सिलसिला भी फिर से शुरू हो गया है। रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी वोट मांग रही है और इसी जद्दोजहद में है कि आगामी विधानसभा चुनाव में दमदार मौजूदगी दर्ज करवाई जा सके। बेशक खुले मंच से पार्टी के नेता सरकार बनाने के दावे कर रहे हो, लेकिन जाहिर है पार्टी का मकसद फिलहाल खुद को दमदार तरीके से हिमाचल की सियासत में स्थापित करना है, ताकि भविष्य के लिए नींव मजबूत की जा सके। फायदा होगा, बशर्ते चुनावी मेहमान न बन कर रह जाएं पार्टी पंजाब में सरकार बनने के बाद से अब तक आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हिमाचल प्रदेश के तीन दौरे कर चुके है। केजरीवाल कांग्रेस -भाजपा को खुलकर चुनौती दे रहे है कि जिन विकास के मुद्दों पर वो वोट मांग रहे है, वे भी उन पर वोट मांग कर दिखाएं। हाल ही में आप ने हिमाचल में एक शिक्षा संवाद भी किया है। निजी स्कूलों की बेलगाम फीस निसंदेह हिमाचल में एक बड़ा मुद्दा है और इसे भांपते हुए आप सही रास्ता पकड़े हुए दिख रही है। नजदीक भविष्य में न सही लेकिन इसका दूरगामी फायदा जरूर आप को मिल सकता है, बशर्ते पार्टी अब हिमाचल में परमानेंट सियासत करे, न कि चुनावी मेहमान की तरह। वहीँ फिलहाल हिमाचल में आप के लिए सबसे बड़ी कमज़ोरी किसी बड़े चेहरे का न होना है। पार्टी में ऐसा कोई चेहरा नहीं दिखाई देता जिसके दम पर पार्टी हिमाचल विधानसभा चुनाव जीत ले। सावधान कांग्रेस, हर जगह 'आप' ने बिगाड़ा है खेल माहिर मान रहे है कि संभवतः आप का पहला मकसद कांग्रेस को कमजोर करना हो ताकि न सिर्फ हिमाचल में बल्कि पूरे देश में विपक्ष का मुख्य चेहरा बन सके। जाहिर है यदि आगामी विधानसभा चुनाव में आप की मौजूदगी के चलते कांग्रेस के अरमानों पर पानी फिरता है तो 2027 में आप की भूमिका बड़ी हो सकती है। अतीत पर निगाह डाले तो आप हमेशा से ही कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ते आई है। पहले आप ने दिल्ली की सत्ता पर 15 साल से आसीन कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया और फिर अब पार्टी ने पंजाब भी कांग्रेस को बुरी तरह हराया। गोवा और उत्तराखंड में भी कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ने का श्रेय आप को ही दिया जाता है, जिससे भाजपा का मिशन रिपीट सफल हो पाया। उत्तराखंड में आप को 3.31 प्रतिशत वोट हासिल हुए, वहीं गोवा में आप को 6.77 प्रतिशत वोट हासिल हुए है। ये आंकड़े सत्ता पाने के लिए तो नाकाफी है, मगर अब कांग्रेस का सतर्क होना आवश्यक दिखाई देता है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि हिमाचल में आप के आने से कांग्रेस के लिए स्थिति मुश्किल हो सकती है। यदि सत्ता विरोधी वोट बांटने में आप कामयाब रही तो कांग्रेस के अरमानों पर पानी फिर सकता है। कुनबा न संभला, तो भाजपा होगी मुश्किल में हिमाचल का एक तबका ऐसा भी है जो आप के दिल्ली मॉडल का मुरीद है, ऐसे में गुड गवर्नेंस की बात करने वाली भाजपा के लिए भी चुनौती कम नहीं होने वाली। पहली बार शिक्षा संवाद जैसे कार्यक्रम आयोजित कर कोई पार्टी शिक्षा -स्वास्थ्य जैसे बुनियादों मुद्दों पर वोट मांग रही है, जाहिर है इसका नुकसान सत्तारूढ़ पार्टी को ज्यादा हो सकता है। वहीँ भाजपा में टिकट तलबगारों की बढ़ती संख्या भी आप में लिए अवसर है। अगर पार्टी के कुछ मजबूत नेता आप का रुख करते है, तो नुक्सान भाजपा का होगा। मसलन कसौली से भाजपा नेता हरमेल धीमान अब आप में है और निसंदेह भाजपा के अरमान कुचल सकते है। कई अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी हरमेल सरीखे भाजपाई पार्टी में उपेक्षित है और माना जा रहा है कि चुनाव नजदीक आते-आते आप के हो सकते है। ऐसे में भाजपा कुनबा नहीं संभाल पाती तो मिशन रिपीट मुश्किल है।
पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में शार्प शूटर संतोष जाधव को गिरफ्तार कर लिया गया है। शार्प शूटर संतोष जाधव की गिरफ्तारी के बाद अब मूसेवाला की हत्या को लेकर रहस्य से पर्दा उठ सकता है। हत्या किसने करवाई, मुखबिरी किसने की और हत्या का मकसद क्या था? ऐसे कई सवालों के जवाब तो मिलेंगे ही साथ ही फिल्म अभिनेता सलमान खान को दी गई धमकी से भी पर्दा उठ सकता है। फिलहाल पुणे रूरल क्राइम ब्रांच ने संतोष जाधव को पुणे के खेड के राजगुरूनगर लॉकअप में सुरक्षा कारणों के चलते शिफ्ट किया है। उससे पुणे रूरल क्राइम ब्रांच पूछताछ करेगी। पुणे ग्रामीण पुलिस के मुताबिक संतोष जाधव की पुरानी क्रिमिनल हिस्ट्री है। उसके ऊपर हत्या, फायरिंग, हत्या की कोशिश, हथियार रखने और बलात्कार के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा ओमकार उर्फ राण्या बाणखेले की हत्या के बाद उस पर मकोका लगाया गया था। तब से वो फरार था और रविवार के दिन गुजरात के कच्छ से उसे गिरफ्तार किया गया है। पुणे ग्रामीण पुलिस क़ी क्राइम ब्रांच ने उसकी कस्टड़ी ली है। कौन है संतोष संतोष जाधव शार्प शूटर संतोष जाधव महज़ 24 साल का है। संतोष मूल रूप से महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले के पारनेर तालुक़ा का रहने वाला है। पुणे के मंचर पुलिस थाने में संतोष जाधव के ख़िलाफ़ 4 मामले दर्ज है। साल 2019 में बलात्कार का मामला, अगस्त 2021 में ओमकार की हत्या का मामला, संतोष पर मंचर थाने में वसूली और चोरी का भी मामला दर्ज है। उसके खिलाफ राजस्थान के गंगानगर में भी हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था। सूत्रों के मुताबिक संतोष ने हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ली है। संतोष जाधव पिछली साल तक कोई नामी बदमाश नहीं था, पर सोशल मीडिया पर ऐलान कर ओमकार की हत्या करने के बाद यह सुर्ख़ियों में आया था। पुलिस के लिए संतोष जाधव कितना बड़ा अपराधी था, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि ओमकार की हत्या के बाद यह साल भर से फ़रार था लेकिन पुलिस कोई ख़ास प्रयास इसे पकड़ने के लिए नहीं कर रही थी। लेकिन जब मूसेवाला हत्याकांड में इसका नाम आया तो पुलिस ने दिन रात एक कर दिए। संतोष जाधव को सोशल मीडिया पर अपनी डॉन की छवि दिखाने का बहुत शौक है।
नियमित कक्षाएं लगाई, फीस भी दी, फिर सरकार इन छात्रों का क्या कसूर ! मानव भारती यूनिवर्सिटी में नियमित रूप से पढ़ाई करने वाले छात्र अब सड़कों पर आने को तैयार है। चार साल तक रोजाना कॉलेज जा कर पढ़ाई करने और लाखों रूपए फीस भरने के बावजूद अब तक इन छात्रों को डिग्री नहीं मिल पाई है। इन छात्रों का कहना है कि इन्हें दूसरों के बुरे कर्मों की सज़ा दी जा रही है। मानव भारती यूनिवर्सिटी पर फर्जी डिग्री का केस चलने की वजह से कई रेगुलर छात्रों का भविष्य भी थम सा गया है। मानव भर्ती यूनिवर्सिटी के ये छात्र हर तरफ से मजबूर हो गए है। न तो इन छात्रों को कहीं नौकरी मिल पा रही है और न ही आगे की पढ़ाई के लिए किसी अच्छे कॉलेज में एडमिशन। ये छात्र कई बार हिमाचल प्रदेश सरकार के आगे भी गुहार लगा चुके है, मगर अब तक इनके पक्ष में कोई फैसला नहीं लिया गया। इन छात्रों को अपनी पढ़ाई किये तीन साल से अधिक का समय बीत चूका ,है मगर अब तक इन्हें डिग्री न मिल पाने के कारण ये बेरोज़गार बनकर ठोकरें खा रहे है। ये छात्र हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग व है कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटा चुके है, मगर अब तक किसी ने इनकी नहीं सुनी। सरकार के आगे गुहार लगा लगा कर अब ये परेशान हो गए है और अब इन सभी छात्रों ने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। अब ये छात्र डिग्री न मिलने तक भूख हड़ताल करने को विवश है। मानव भारती विश्विद्यालय से नियमित तौर पर शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र दुर्गेश, आशीष, सुजीत, भावना, संस्कार, तुषार, संजीव, निशा, दीक्षा, शुभम, रजत व् अन्य छात्रों का कहना है कि विश्विद्यालय में एडमिशन लेने से पहले उन सभी को इस यूनिवर्सिटी में हो रहे गलत कार्यों के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे सभी इस विश्विद्यालय में बड़ी उम्मीदों के साथ अपना करियर बनाने के लिए पहुंचे थे। इन्होंने चार साल तक नियमित तौर पर इस विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की है, जैसे आम विश्वविद्यालयों के छात्र करते है। उन्होंने कहा की हमने नियमित तौर पर क्लास और लैब अटेंड की है, लाखों रुपए फीस भी जमा कराई है। यही नहीं विश्वविद्यालय में होने वाली एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में भी भाग लिया है, मगर अब ये डिग्री न मिलने से बहुत परेशान है। पढ़ाई करने के बावजूद ये बेरोज़गार है और मानसिक तनाव से जूझ रहे है, जो की गलत है। उन्होंने कहा की हम सरकार से हमारी ओर देखने का आग्रह करते है ताकि हमारे अधर में लटके हुए भविष्य का कुछ हो सके। इन छात्रों ने सरकार से ये सवाल किया है कि जब हमने कक्षाएं समय पर लगाई है, फीस समय पर भरी है तो हमें डिग्री समय पर क्यों नहीं मिल रही ? छात्रों ने कहा कि अगर अब भी इनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो ये अनिश्चित काल तक भूख हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे, जिसकी ज़िम्मेदार हिमाचल सरकार होगी। जेल में है राजकुमार राणा और उसके सहयोगी : फर्जी डिग्री मामले के बाद मानव भारती विवि के सभी रिकॉर्ड पुलिस के कब्जे में हैं। ऐसे में डिग्रियां न मिलने से वर्तमान में विवि से पढ़ाई कर रहे और कर चुके करीब 3000 विद्यार्थियों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार मानव भारती विवि में फर्जी डिग्री का खुलासा होने के बाद पुलिस ने विवि समेत विद्यार्थियों संबंधित तमाम रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया था। इसमें वर्ष 2009 से 2019 तक का रिकॉर्ड भी शामिल है। विद्यार्थियों को उनकी डिग्री समेत मार्कशीट न मिलने के कारण वह नौकरी सहित अन्य कार्य भी नहीं कर पा रहे हैं। बता दें की फर्जी डिग्री मामले में मानव भारती विवि के मालिक राजकुमार राणा, उसकी पत्नी समेत विवि के 20 अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंटों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की गई है। इनमें से कई इस वक्त जेल में है। फर्जी डिग्री बेचने के अलावा इस यूनिवर्सिटी के मालिक ने नियमित बच्चों का भविष्य भी खराब किया है। इतने साल नियामक आयोग क्या करता रहा ? बड़ा सवाल ये है कि मानव भारती यूनिवर्सिटी में जो कुछ भी हुआ उसकी भनक इतने सालों तक नियामक आयोग व अन्य संस्थाओं को कैसे नहीं लगी ? इतने साल नियामक आयोग क्या करता रहा ? इस दरमियान क्या कभी भी आयोग ने विवि की जांच की, रूटीन विजिट हुए ? अगर ऐसा किया गया तो आयोग को इसकी भनक कैसे नहीं लगी, ये बड़ा सवाल है। इस मामले के चलते आज सैकड़ों निर्दोर्ष छात्रों का भविष्य भी खराब होने की कगार पर है, आखिर उसका ज़िम्मेदार कौन है ? छात्रों ने की थी राज्यपाल से मुलाकात मानव भारती विश्वविद्यालय से डिग्री करने वाले कई छात्र राज्यपाल से मिले थे। छात्रों ने विश्वविद्यालय से नियमित पढ़ाई कर पास होने के बाद उनके साथ हो रही नाइंसाफी को रोकने के लिए नीति बनाने की मांग की थी। छात्रों ने विश्वविद्यालय की बदनामी की वजह से उनका रोजगार छीनने की भी शिकायत की थी। शिक्षा मंत्री बोले, नहीं खराब होने देंगे छात्रों का भविष्य : हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर का कहना है कि उन्हें छात्रों की प्रस्तावित भूख हड़ताल की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन हिमाचल सरकार छात्रों का भविष्य खराब नहीं होने देगी। ठाकुर ने कहा की सरकार हरसंभव समाधान को प्रतिबद्ध है।
चुनाव आयोग का कहना है कि चुनावों में वोट डालने के लिए प्रवासी वोटर्स का अपने घर लौटकर आना मुश्किल हो जाता है, इसलिए ऐसे वोटर्स के लिए रिमोट वोटिंग की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा, आप दिल्ली में रहते हैं, लेकिन आपका नाम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की वोटिंग लिस्ट में है, और वहां विधानसभा चुनाव होने हैं, तो क्या आप दिल्ली में बैठे-बैठे वोट डाल सकते हैं ? अभी इसका जवाब नहीं है, लेकिन हो सकता है कि अगले साल तक ऐसा हो जाए। दरअसल, चुनाव आयोग दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासी वोटर्स के लिए रिमोट वोटिंग की संभावनाएं तलाश रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासी वोटर्स चुनावों में वोट डाल नहीं पाते हैं और वोटिंग से वंचित रह जाते हैं। चुनाव आयोग ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रवासी वोटर्स पढ़ाई, रोजगार या किसी दूसरे काम से दूसरे राज्य में चले जाते हैं, उनके लिए वोट डालने के लिए वापस लौटना मुश्किल हो जाता है, इसलिए अब रिमोट वोटिंग की संभावनाएं तलाशने का समय आ गया है। चुनाव आयोग ने अपने बयान में बताया है कि प्रवासी वोटर्स के मुद्दों पर गौर करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। आयोग के मुताबिक, शुरुआत में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत हो सकती है।
कानपुर हिंसा में अब तक 50 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि शहर प्रशासन ने आरोपियों की 147 अवैध संपत्तियों की पहचान की है। माना जा रहा है कि जल्द ही इनपर बुलडोजर चल सकता है। इसी बीच कानपुर शहर के काजी मौलाना अब्दुल कुद्दूस हादी ने कहा है कि अगर कानपुर में बुलडोजर चला तो लोग कफन बांध करके बाहर निकल आएंगे। दरअसल, कानपुर में मुस्लिम संगठनों ने 3 जून को बंद बुलाया था। मुस्लिम संगठन नूपुर शर्मा के पैंगबर मोहम्मद को लेकर दिए बयान का विरोध कर रहे थे। इस दौरान हिंसा फैल गई थी। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है। पुलिस ने आरोपियों के पोस्टर भी लगाए थे। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 50 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, पोस्टर में शामिल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ नाबालिग भी हैं। पुलिस सीसीटीवी के आधार पर उनकी भूमिका की जांच कर रही है। इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने खुद आकर सरेंडर भी किया है। प्रशासन ने 147 इमारतों की पहचान की जहां से पत्थरबाजी की गई थी। बताया जा रहा है कि सीसीटीवी से पहचान होने के बाद इन इमारतों की वैधता की जांच की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कश्मीर के हालात बिगड़ते जा रहे है। हर दिन खौफजदा लाचार कश्मीरी हिन्दुओं के पलायन की तस्वीरें सामने आ रही है। जो हिन्दुस्तान के लोगों ने हाल ही में आई फिल्म कश्मीर फाइल्स के ज़रिये पर्दे पर देखा उसकी एक झलक फिर कश्मीर में दिख रही है। दहशतगर्द फिर कश्मीर को 90 के दशक में वापस धकेलने का प्रयास कर रहे है। खासतौर से बीते एक माह में वहां लगातार हत्याएं हो रही है। गम, गुस्सा, बेबसी के बीच कश्मीरी पंडितों ने घाटी में हो रहे प्रदर्शन भी स्थगित कर दिए है, अब बस उम्मीद है। टारगेट किलिंग के इस बेपाक सिलसिले के चलते कश्मीरी हिन्दू डर में है कि न जाने कब, कौन, कहां से किसे गोली मार दे। हालांकि सुरक्षाबलों ने कई आतंकी भी ढेर कर दिए हैं, लेकिन बावजूद इसके टारगेट किलिंग की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। पिछले साल अक्टूबर में आतंकियों ने केमिस्ट एमएल बिंद्रू की हत्या कर दी थी। उसके बाद से ही आतंकी लगातार विशेषकर गैर-मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं। कश्मीर पुलिस ने इन सभी हत्याओं के लिए चरमपंथियों को जिम्मेदार ठहराया है। बीते दिनों एक बैंक मैनेजर और मजदूर की हत्या कर दी गई। इसके दो दिन पहले ज़िला कुलगाम के गोपालपुरा में जम्मू की रहने वाली एक हिन्दू शिक्षिका रजनी की उनके स्कूल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उससे पहले बुड़गाम के ही एक कश्मीरी पंडित राहुल भट्ट की उनके दफ़्तर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। फेहरिस्त लम्बी है और चिंता का सबब ये है कि ये सिलसिला थम नहीं रहा। बता दें कि प्रधानमंत्री के विशेष पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए करीब 4 हजार कश्मीरी हिन्दू यहां कार्यरत हैं। प्रॉक्सी वॉर ही है पाकिस्तान की रणनीति : पाकिस्तान अच्छी तरह जानता है कि आमने -सामने की लड़ाई में भारत का मुकाबला करने की उसकी औकात नहीं है। युद्ध में मैदान में पाकिस्तान ने हर बार भारत के आगे घुटने टेके है। इसीलिए वो दशकों से प्रॉक्सी वॉर की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। आतंकियों को बढ़ावा देकर पाकिस्तान कश्मीर को लहूलुहान करने में लगा है। आतंकियों को मुहतोड़ जवाब देने की तैयारी : श्रीनगर के विभिन्न इलाकों में तैनात कश्मीरी पंडितों का जिला मुख्यालय में ट्रांसफर या फिर समायोजन कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते शुक्रवार को एक हाई लेवल मीटिंग की थी। मीटिंग में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, जम्मू-कश्मीर के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस दिलबाग सिंह, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक कुलदीप सिंह और सीमा सुरक्षा बल के प्रमुख पंकज सिंह भी मौजूद थे। केंद्र सरकार ने आतंकियों के खिलाफ रणनीतिक चक्रव्यूह तैयार करने का फैसला किया है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के पूरे ढांचे को बदलने की तैयारी है। 'सॉफ्ट टारगेट' हत्याओं को रोकने के लिए पुलिस तंत्र को मजबूत करने पर फोकस किया गया है। जाहिर है केंद्र सरकार कोई कसार नहीं छोड़ रही है और आतंकियों को मुहतोड़ जवाब देने की तैयै है।
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में गुरूवार को आतंकवादियों ने मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले एक बैंक प्रबंधक की गोली मारकर हत्या कर दी। इलाकी देहाती बैंक के प्रबंधक विजय कुमार ने अस्पताल ले जाते हुए ही रस्ते में अंतिम सास ली। विजय कुमार मूल रूप से राजस्थान के हनुमानगढ़ के रहने वाले थे। मिली जानकारी के अनुसार कुलगाम जिले के अरेह मोहनपोरा स्थित इलाकी देहाती बैंक में आतंकियों ने बैंक मैनेजर पर फायरिंग कर दी, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ मंत्री सत्येंद्र जैन और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के बचाव में कहा कि मेरा प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि आम आदमी पार्टी के सभी मंत्रियों, विधायकों को एक साथ जेल में डाल दीजिए। सभी एजेंसियों को बोल दीजिए कि एक साथ सारी जांच कर लें। आप एक एक मंत्री को गिरफ़्तार करते हैं इससे जनता के लिए किये जाने वाले कामों में रुकावट होती है।स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन को ईडी ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अरेस्ट किया गया है। गुरुवार को की गयी पत्रकार वार्ता में केजरीवाल ने कहा कि "मुझे लगता है कि सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया को फर्जी मामलों में जेल में डालकर ये लोग दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो अच्छे काम हो रहे हैं उन्हें रोकना चाहते हैं। परन्तु चिंता मत कीजिए मैं ऐसा नहीं होने दूंगा, सभी अच्छे काम चलते रहेंगे"।
हरियाणा के नूंह जिले में एक सेप्टिक टैंक में गिरने से आठ साल के बच्चे की मौत हो गयी। पुलिस ने जानकारी दी कि घटना नूंह जिले के बिछोर गांव की है जिसमे मंगलवार को आठ साल का बच्चा खेलते हुए टैंक में गिर गया। बच्चे को बचाने के लिए उसके पिता और चाचा भी टैंक में उतरे और उनकी भी मौत हो गई। पुलिस ने भी इसकी पुस्टि की है कि इस दौरान तीनो कि मौत हो गई है। गांव वालों के अनुसार गांव वासी दीनू के घर के बाहर 20 फीट गहरा सेप्टिक टैंक बनाया गया था, जिसे पत्थर के स्लैब से ढ़का गया था। पुलिस के मुताबिक मंगलवार को दीनू का आठ वर्षीय पोता आरिज उस टैंक के पास खेलते खेलते उस टैंक पर खड़ा हो गया, जिससे उसका कवर टूट गया। परिवार ने इस घटना को लेकर पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की। परिजनों ने शवों को दफना दिया क्योंकि उनका कहना है की ये उनके लिए बहुत ही दुखदायी घटना थी।
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर आधारित अपनी फिल्म पर बोलते हुए कहा कि भारतीय राजाओं के बारे में इतिहास की किताबों में कम उल्लेख किया गया है, हलाँकि आक्रांताओं के बारे में अधिक लिखा गया है। अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर अभिनीत फिल्म 'पृथ्वीराज' इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। अक्षय कुमार ने एक साक्षात्कार में कहा कि दुर्भाग्य से हमारे इतिहास की किताबों में सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में केवल दो-तीन लाइनें हैं, लेकिन आक्रांताओं के बारे में बहुत कुछ उल्लेख किया गया है। अभिनेता ने शिक्षा मंत्री से अपील करते हुए कहा कि इतिहास की किताबों में हमारी संस्कृति और हमारे महाराजाओं के बारे में ज्यादा कुछ नहीं है।
देश की राजधानी दिल्ली में बुधवार को 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने और अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने के आसार हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग से यह जानकारी भी मिली है कि मौसम कार्यालय के अनुसार हरियाणा से बांग्लादेश के बीच पूर्व से पश्चिम कम दवाब क्षेत्र बना हुआ है, जिसके प्रभाव के चलते पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा हो सकती है। ‘स्काईमेट वेदर' के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार दिल्ली के कुछ हिस्सों में बुधवार को तेज हवाएं चल सकती हैं और बिजली चमक सकती है, जिससे तापमान में गिरावट आने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में एक सप्ताह तक लू चलने की संभावना नहीं है। गौरतलब है कि सोमवार शाम को राष्ट्रीय राजधानी में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं, जिससे कई पेड़ उखड़ गए थे और बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह दिल्ली में नौ जून 2018 के बाद आया सबसे गंभीर तूफान था। उस दौरान पालम में हवा की गति 104 किलोमीटर प्रतिघंटा मापी गयी थी। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि भीषण गर्मी और आर्द्रता के कारण मई और जून में इसी प्रकार के तेज तूफान की संभावना होती है। ऐसी स्थितियों के बारे में एक या दो दिन पहले पूर्वानुमान व्यक्त नहीं किया जा सकता।
पंजाबी सिंगर और कांग्रेसी नेता सिद्धू मूसेवाला मर्डर केस में पहली गिरफ्तारी की गयी। पुलिस ने इस मर्डर केस में मनप्रीत नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। उसे बीते कल उत्तराखंड से पकड़ा गया था। फिलहाल आरोपी मनप्रीत से पूछताछ जारी है। मनप्रीत पर आरोप है कि हमलावरों को बोलेरो गाड़ी और कोरोला गाड़ी उसकी मदद से ही मुहैया हुई थी। बठिंडा और फिरोजपुर जेल में बंद दो गैंगस्टर को 5 दिन के प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया है। ये दोनो लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शार्प शूटर और सक्रिय सदस्य है। कहा यह जा रहा है कि सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश दिल्ली के तिहाड़ जेल और पंजाब की जेल से रची गयी थी। मनप्रीत और शरद वर्चुअल नंबरो से कनाडा में बैठे गोल्डी बरार से लगातार सम्पर्क में रहते थे।
देश के मशहूर सिंगर केके का मंगलवार को कोलकाता में निधन हो गया। अधिकारियों ने बताया कि एक कॉलेज की तरफ से नजरूल मंच में एक समारोह का आयोजन किया गया था। वहां परफॉर्म करने के बाद जब केके वापस अपने होटल पहुंचे तो वह अस्वस्थ महसूस कर रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि गायक को एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केके की मौत की खबर ने हर किसी को हिला दिया है। सोशल मीडिया पर उनके फैन्स द्वारा सिंगर केके के अंतिम परफॉर्मेंस की कई वीडियो शेयर की जा रही हैं। कॉन्सर्ट के दौरान केके ने अपने सबसे मशहूर गीत ''हम रहे या ना रहें कल, कल याद आएंगे ये पल...'' को भी गया। उनके इस गाने पर लोग खूब झूम रहे थे। लेकिन किसी ने ये नहीं सोचा होगा कि ये गाना केके आखिरी बार गा रहे है। मगर वक्त को कुछ और ही मंजूर था। कॉन्सर्ट के बाद केके दुनिया को अलविदा कह गए।
भारत में कोरोनावायरस का कहर जारी है। रोजाना सैकड़ों नए मामले सामने आ रहे है। बीते 24 घंटे की ही बात करें तो देश में कोरोना के 2745 नए मामले सामने आए है। इससे पहले मंगलवार को COVID-19 के 2338 नए मामले दर्ज किए गए थे। ऐसे में देखा जाए तो कोरोना संक्रमण के नए मामलों में वृद्धि हुई है, जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 18,386 हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे के दौरान देश में कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना 0.60 प्रतिशत रही, जबकि उससे ठीक होने की संभावना 98.74 प्रतिशत है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी की गयी वैक्सीनेशन के आंकड़ों को देखें तो अब तक देश में 193.57 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है, जबकि कुल 85 करोड़ से अधिक लोगों के कोरोना टेस्ट किये जा चुके है। बीते 24 घंटे में साढ़े चार लाख से अधिक कोरोना टेस्ट किए गए, जिसमे से कुल 2236 लोगों ने कोरोना को मात दी है, और उनकी संख्या 4,26,17,810 पहुंच गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में COVID-19 के 2338 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं, उक्त समयावधि के दौरान कोरोना से 19 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2,134 लोग अस्पताल से डिस्चार्ज हुए, जिसके बाद भारत में कोरोना से कुल रिकवरी 4,26,15,574 तक पहुंच गई थी।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के आठ साल पूरा होने पर कांग्रेस ने चार सवाल पूछे हैं। मंगलवार को शिमला में भाजपा की तरफ से मनाए जा रहे जश्न पर हिमाचल कांग्रेस कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष व स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य सुखविंदर सिंह सुक्खू ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी शिमला आ रहे हैं, तो प्रदेश को कुछ सौगातें देकर जाएं, पिछले दौरों की तरह सपने न बेचें। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की जनता के साथ किया कोई भी वादा पूरा नहीं किया है। लोग खुद को ठगा महसूस करते आ रहे हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी कम करने के लिए क्या किया, प्रधानमंत्री को बताना होगा। सेब पर आयात शुल्क कब बढ़ेगा, हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा कब दिया जाएगा, मोदी इस पर भी अपनी चुप्पी तोड़ें। प्रदेश को विशेष आर्थिक पैकेज दें। प्रदेश में घोषित फोरलेन के लिए केंद्र सरकार जल्दी बजट करे। अभी तक यह जुमला साबित हुए हैं। भाजपा से कांग्रेस के सवाल--- आसमान छूती महंगाई कब कम होगी गैस सिलिंडर 1000 रुपये पार हो चुका है। पेट्रो पदार्थों की कीमतें 100 रुपये के आसपास हैं। यह 70 साल में पहली बार है। खाद्य पदार्थों के दामों में आग लगी है। आम जनता को कब राहत देंगे। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई कब-- हिमाचल की भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। पुलिस भर्ती पेपर लीक में करोड़ों रुपये की डील हुई। पुलिस के पास से ही पेपर लीक हो गया। स्वास्थ्य विभाग में कोविड काल में करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ। राजीव बिंदल को कुर्सी तक गंवानी पड़ी। सरकार पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबी है। भ्रष्ट नेताओं पर कब कार्रवाई करेंगे। बेरोजगारों को रोजगार कब-- हिमाचल प्रदेश में 12 लाख से अधिक बेरोजगार हैं। प्रदेश की जयराम सरकार रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही। डबल इंजन की सरकार बताए, बेरोजगारों को रोजगार कब तक मिलेगा। युवाओं के भविष्य से सरकार कब खिलवाड़ बंद करेगी। किसानों, हाटी समुदाय को सौगात क्यों नहीं-- सेब की खेती करने वाले किसानों को वादे के बावजूद आज तक राहत क्यों नहीं दी। क्यों सेब पर आयात शुल्क नहीं बढ़ाया। उनके साथ विश्वासघात कब बंद होगा। हाटी समुदाय को आज तक एसटी का दर्जा नहीं दिया। उनके अरमानों से डबल इंजन सरकार कब खेलना बंद करेगी।
आज एनएसयूआई ने रोहडू सिविल अस्पताल में असुविधाओं के प्रति धरना प्रदर्शन किया और प्रदेष सरकार के प्रति नारेबाजी की एनएसयूआई राज्य उपाध्यक्ष वीनू मेहता ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से रोहडू सिविल अस्पताल में किसी भी तरह के टेस्ट नही हो रहे है। उपचाराधीन रोगियों व उनके परिजनों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। आम गरीब लोगों से निजी लेबो में पैसा वसूला जा रहा है। रोहडू की आवाम को लुटा जा रहा है। अल्ट्रा साउंड तक नहीं करवाए जा रहे लोगों को प्राइवेट अस्पतालों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। एनएसयूआई ने सरकार को चेताया की अगर सिविल अस्पताल में जल्द सारी सुविधाओं फ्री नही दी गई तो एनएसयूआई आने वाले दिनों में अगर प्रदर्षन करेगी। एनएसयूआई ने सिविल अस्पताल रोहडू में चिकित्सक अधीक्षक रविंद्र शर्मा को ज्ञापन भी सौंपा। इस धरने प्रदर्शन में एनएसयूआई रोहडू इकाई के रमीज रजा, विशाल बुशेहरी, प्रतीक कोशल, गौरव ठाकुर, सौरव ठाकुर, रविकांत शर्मा, अंशुल मिस्टा, अक्षु सिस्टा, यशिका कल्याण, साक्षी धारटा, सुनीता कोयलान, हिमांशी बेटान व अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहें।
जुब्बल कोटखाई से उप चुनाव में रहे प्रत्याशी चेतन सिंह बरागटा ने आज कोटखाई जोन के बाघी, रत्नाडी, कलबोग, क्यारवी, चोगन कुल्टी, रामनगर व चमेरा बूथ में जन आभार कार्यक़म में पहुंचे। इस दौरान जनता व कार्यकर्ताओं ने चेतन बरागटा का हर्षोल्लास से ढोल नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। गौरतलब है कि पिछले कल जुब्बल जोन के पंदराणु, हाटकोटी और मंढोल बुथों पर हुई बैठको में भी सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बूथ की बैठको में भारी भीड़ का इकट्ठा होना इस बात का परिचायक है कि चेतन बरागटा पर जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। चेतन ने कहा कि कलबोग में उप तहसील कार्यालय खोलने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धन्यवाद करते हैं। स्व. नरेन्द्र बरागटा के प्रयासों वो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के आशीर्वाद से गुम्मा बाघी 30 किलोमीटर सड़क को पक्का किया गया। आज उबादेश की सभी पंचायतों को जोड़ने वाली सभी सड़कें चका- चक है जिसका पुरा श्रेय प्रदेश सरकार जाता है। चेतन बरागटा ने कहा कि कलबोग से बखरेल, चूईला,मेल फर्स्ट और मेल सैकेंड की टायरिग आजकल युद्ध स्तर पर चल रही है जिसके लिए वो मुख्यमंत्री के आभारी हैं। स्व नरेंद्र बरागटा का जुब्बल नावर कोटखाई को आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाने का स्वप्न था। जिसके लिए उन्होंने कोविड काल के बावजूद जुब्बल शावर कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की लागत से विकासात्मक कार्यों को आरम्भ करवाया था। एस.डी. एम. कोटखाई की स्थायी नियुक्ति के लिए क्षेत्र की जनता की ओर से चेतन सिंह बरागटा ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया तथा जुब्बल में भी एस.डी.एम. की स्थाई नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया। चेतन बरागटा ने कहा कि कांग्रेस के मित्रो को कोटखाई में एस. डी.एम. की नियुक्ति से शायद प्रसन्नता नही हुई, शायद इसीलिए अभी तक प्रदेश सरकार का विधायक रोहित ठाकुर ने आभार तक व्यक्त नही किया है। बल्कि इसके उल्ट एस. डी. एम. की नियुक्ति पर हुई अटकलों पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया में जरूर दिखे। लेकिन अब एस डी एम कोटखाई की नियुक्ति पर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। चेतन सिंह बरागटा ने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हमे सकारात्मकता अपनाते हुए विकासात्मक कार्यों का स्वागत करना चाहिए। कार्यक्रमो में जिला परिषद सदस्य अनिल काल्टा, क्यारवी पंचायत प्रधान मंतीश चौहान, चौगन कुल्टी के प्रधान अंकुश,उप प्रधान संजीव किष्टा,कलबोग पंचायत उप प्रधान महेंद्र चौहान,रतनाडी पंचायत उप प्रधान प्रितम सिंह नेगी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जिला किन्नौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग -5 पर स्पीलो के पास रविवार देर शाम एक इनोवा गाडी के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक पर्यटक की मौत हो गई है जबकि इस हादसे में दो पर्यटक गम्भीर रूप से घायल हो गए हैं जिनका उपचार पी एच सी स्किबा में चल रहा है । मृतक की पहचान विनोद कुमार पुत्र स्वर्गीय राजकुमार गांव व डाकघर झांग तहसील जयसिंहपुर जिला कांगड़ा के रूप मे हुई जबकि घायलों में कमल कुमार पुत्र मस्त राम निवासी सेक्टर 14 बेस्ट चंडीगढ़ व सत्यवीर पुत्र जगराम निवासी अलकर (राजस्थान) शामिल हैं। जानकारी के अनुसार रविवार देर शाम चालक सत्यवीर अपने दो साथियों विनोद कुमार व कमल कुमार के साथ इनोवा गाड़ी एच आर 30 आर 4260 में पंचकुला से पूह की ओर घूमने जा रहे थे कि राष्ट्रीय उच्च मार्ग -5 पर स्पीलो के पास चालक गाड़ी से नियंत्रण खो बैठा,जिससे गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क से लगभग दो सो मीटर नीचे सतलुज नदी मे जा गिरी, जिससे विनोद कुमार की मौके पर ही मौत हो गई । हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची व स्थानीय लोगो की सहायता से घायलों को वहां से निकालकर उपचार के लिए पी एच सी स्किबा ले जाया गया तथा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए क्षेत्रीय चिकित्सालय ले जाया गया। दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है तथा पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। वहीं उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने बताया कि इस हादसे में कांगड़ा जिले के एक पर्यटक की मौत हो गई है जबकि दो अन्य घायल हुए हैं । उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है तथा मृतक व घायलों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है तथा पोस्टमार्टम होने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
मंडी/अजय सूर्या प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों को विडियो कांफेंस के माध्यम से संबोधित किया । इस अवसवर पर जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री केयर फंड के तहत दी जा रही सेवाओं व सहायता को जिला प्रशासन के माध्यम से बच्चों एवं उनके अभिभावकों को सुपुर्द किया गया । जिला मंडी में कोरोना महामारी के दौरान 6 बच्चों ने अपने माता-पिता खोए हैं, जिन्हें अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अश्वनी कुमार तथा एसडीएम सदर रितिका जिंदल ने प्रधानमंत्री केयर की सहायता कीट भेंट की। इस अवसर पर पर अश्वनी कुमार ने बताया कि पीएम केयर में इन बच्चों को निःशुल्क स्कूली शिक्षा के साथ उच्च शिक्षा ऋण की सहायता, शिक्षा ऋण के ब्याज का भुगतान पीएस केयर्स द्वारा, 23 वर्ष की आयु तक आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा, बीमा के प्रीमियम का भुगतान पीएम केयर्स द्वारा, पहली से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए 20 हजार रूपये प्रति वर्ष की छात्रवृति, तकनीकी शिक्षा के लिए स्वानाथ छात्रवृति इत्यादि प्रदान की जाती हैं । इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी कल्याण चंद तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी डीआर नायक उपस्थित थे ।
पंजाब में कल की घटना की शिवसेना कड़े शब्दों में निंदा करती है एक नौजवान गायक सिद्दू मूसेवाला का दिन दिहाड़े कत्ल सोच का विषय है। मौजूदा समय में आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में है और जब से आप की सरकार पंजाब में आयी है तब से पंजाब के हालात बद से बदतर होते जा रहे है आये दिन दिन- दिहाड़े क़त्ल हो रहे है और असमाजिक तत्व बेखौफ घटनाओ को अंजाम दे रहे है जब से आप की सरकार पंजाब में आयी है तब से खालिस्तानी आतंकी भी बेखौफ घटनाओं को अंजाम दे रहे है कभी मुख्य्मंत्री जयराम ठाकुर जी को धमकी देते है कभी विधानसभा भवन पर खालिस्तान के झंडे फहराते है,कभी जज को धमकी,कभी हरियाणा के नेताओं को धमकी | इस सारे घटना क्रम से लगता है की पंजाब में आप की सरकार फेल है और केंद्र सरकार को चाहिए की जल्द से जल्द आप की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। आप के शासन में गन और गैंग कल्चर को बढ़ावा मिला है और पंजाब में गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा कम करना भी इस घटनाक्रम की वजह रही है। आप के इस फैसले से सभी की जान खतरे में है और सिद्धू मूसेवाला को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को तुरंत फांसी पर लटका देना चाहिए। आप नेता पहले पंजाब के हालात सुधारे फिर हिमाचल की चिंता करें और बड़े बड़े झूठे बयान देने बंद करें।
सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश के आह्वान पर सीटू के 53वें स्थापना दिवस पर प्रदेशभर में झंडारोहण के साथ ही सेमिनार व शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किये गए। इस दौरान मजदूरों ने हलवा व मिठाईयां वितरित करके स्थापना दिवस का जश्न मनाया। मजदूरों ने केंद्र व प्रदेश सरकार की मजदूर,कर्मचारी व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने की शपथ ली। जिला व ब्लॉक मुख्यालयों में हुए विभिन्न कार्यक्रमों में डॉ कश्मीर ठाकुर,विजेंद्र मेहरा,प्रेम गौतम,जगत राम,अजय दुलटा,बिहारी सेवगी,कुलदीप डोगरा,एन डी रणौत,राजेश शर्मा,भूपिंद्र सिंह,राजेश ठाकुर,रविन्द्र कुमार,नीलम जसवाल,सुदेश ठाकुर,केवल कुमार,अशोक कटोच,जोगिंद्र कुमार,सुरेश राठौर,रंजन शर्मा,पदम् प्रभाकर,वीना देवी,बलबीर सिंह,ब्रिज लाल,हिमी देवी,संगीता ठाकुर,मदन नेगी,बालक राम,गुरदास वर्मा,नरेंद्र विरुद्ध,गुरनाम सिंह,विजय शर्मा,लखनपाल शर्मा,सर चंद,भूप सिंह,ओमदत,मोहित वर्मा,राजेन्द्र ठाकुर,लाल सिंह,आशीष कुमार,रामप्रकाश,पूर्ण चंद,राकेश कुमार,विकास कंवर,अंकुश कुमार,देवराज,सतपाल बिरसांटा व रंजीव कुठियाला आदि मौजूद रहे। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि इस दौरान मजदूरों के चबालिस कानूनों को खत्म करके चार लेबर कोड बनाने,सार्वजनिक क्षेत्र के विनिवेश व निजीकरण,ओल्ड पेंशन स्कीम बहाली,आउटसोर्स नीति बनाने,स्कीम वर्करज़ को नियमित कर्मचारी घोषित करने,मनरेगा मजदूरों के लिए 350 रुपये दिहाड़ी लागू करने,करुणामूलक रोज़गार देने,छठे वेतन आयोग की विसंगतियों को दूर करने,सेवाओं के निजीकरण,मोटर व्हीकल एक्ट में मालिक व मजदूर विरोधी संशोधनों व नेशनल मोनेटाइजेशन पाइप लाइन आदि मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार मजदूर,कर्मचारी,किसान,महिला,नौजवान,छात्र,दलित विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है व मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। पिछले सौ सालों में बने चौबालिस श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं अथवा लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कोरोना काल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश जैसी कई राज्य सरकारों ने आम जनता,मजदूरों व किसानों के लिए आपदाकाल को पूंजीपतियों व कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तब्दील कर दिया है। यह साबित हो गया है कि यह सरकार मजदूर,कर्मचारी व जनता विरोधी है व लगातार गरीब व मध्यम वर्ग के खिलाफ कार्य कर रही है। सरकार की पूँजीपतिपरस्त नीतियों से अस्सी करोड़ से ज़्यादा मजदूर व आम जनता सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। सरकार फैक्टरी मजदूरों के लिए बारह घण्टे के काम करने का आदेश जारी करके उन्हें बंधुआ मजदूर बनाने की कोशिश कर रही है। आंगनबाड़ी,आशा व मिड डे मील योजनकर्मियों के निजीकरण की साज़िश की जा रही है। उन्हें वर्ष 2013 के पैंतालीसवें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित कर्मचारी घोषित नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स,ठेका,दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। केंद्र व राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के मजदूरों के वेतन को महंगाई व उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के साथ नहीं जोड़ा जा रहा है। सातवें वेतन आयोग व 1957 में हुए पन्द्रहवें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार उन्हें इक्कीस हज़ार रुपये वेतन नहीं दिया जा रहा है। मोटर व्हीकल एक्ट में मालिक व मजदूर विरोधी परिवर्तनों से वे रोज़गार से वंचित हो जाएंगे व विदेशी कम्पनियों का बोलबाला हो जाएगा। मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण कोरोना काल में करोड़ों मजदूर बेरोज़गार हो गए हैं। मजदूरों को नियमित रोज़गार से वंचित करके फिक्स टर्म रोज़गार की ओर धकेला जा रहा है। वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग की है कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन इक्कीस हज़ार रुपये घोषित किया जाए। केंद्र व राज्य का एक समान वेतन घोषित किया जाए। आंगनबाड़ी,मिड डे मील,आशा व अन्य योजना कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। मनरेगा में दो सौ दिन का रोज़गार दिया जाए व उन्हें राज्य सरकार द्वारा घोषित साढ़े तीन सौ रुपये न्यूनतम दैनिक वेतन लागू किया जाए। श्रमिक कल्याण बोर्ड में मनरेगा व निर्माण मजदूरों का पंजीकरण सरल किया जाए। निर्माण मजदूरों की न्यूनतम पेंशन तीन हज़ार रुपये की जाए व उनके सभी लाभों में बढ़ोतरी की जाए। कॉन्ट्रैक्ट,फिक्स टर्म,आउटसोर्स व ठेका प्रणाली की जगह नियमित रोज़गार दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार समान काम का समान वेतन दिया जाए। नई पेंशन नीति(एनपीएस) की जगह पुरानी पेंशन नीति(ओपीएस) बहाल की जाए। सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश व निजीकरण बन्द किया जाए। मोटर व्हीकल एक्ट में परिवहन मजदूर व मालिक विरोधी धाराओं को वापिस लिया जाए। चबालिस श्रम कानून खत्म करके मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं(लेबर कोड) बनाने का निर्णय वापिस लिया जाए। सभी मजदूरों को ईपीएफ,ईएसआई,ग्रेच्युटी,नियमतित रोज़गार,पेंशन,दुर्घटना लाभ आदि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए। भारी महंगाई पर रोक लगाई जाए। पेट्रोल,डीज़ल,रसोई गैस की कीमतें कम की जाएं। रेहड़ी,फड़ी तयबजारी क़े लिए स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट को सख्ती से लागू किया जाए। सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को बिना शर्त करूणामूलक आधार पर नौकरी दी जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिमला आगमन के दौरान जिला किन्नौर में आयोजित कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। यह जानकारी आज यहां उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।उन्होंने कहा कि देश की आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 31 मई, 2022 को हिमाचल प्रदेश आगमन पर शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान से केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न महत्वकांशी योजनाओं के कुछ लाभार्थियों के साथ वर्चुअल माध्यम से संवाद स्थापित किया जाएगा। माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण लाभार्थियों तथा अन्य तक पहुंचाने के लिए रिकांग पिओ स्थित बचत भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसके लिए एक बड़ी एल.ई.डी स्क्रीन लगाई गई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी करेंगे। इसके अलावा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण कृषि विज्ञान केंद्र रिकांग पिओ में भी एक बड़ी स्क्रीन के माध्यम से किया जाएगा। यहां पर भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकेंगे।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्र सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न योजनाओं जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण व शहरी), प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधी योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण व शहरी), जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री स्वानिधी योजना व एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, आयुष्मान भारत हैल्थ एवं वैलनेस सैंटर व प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जिले से संबंधित लाभार्थी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सासंद, स्थानीय विधायक, जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष, पंचायत समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों सहित अन्य को भी आमंत्रित किया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष अभी भी रजवादशाही में विश्वास करती हैं। भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने भाजपा मुख्यालय दीपकमल चक्कर शिमला में मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के हॉली लॉज में निमंत्रण पत्र देने पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह द्वारा दी गई टिप्पणियों को सुनकर काफी दुख हुआ है। भाजपा एक ऐसी संस्कृति का पालन करती है ,जो पार्टी लाइन से ऊपर है और प्रधानमंत्री के समारोह के लिए किसी विपक्षी दल के अध्यक्ष को आमंत्रित करना हमारे लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रीय अखंडता में विश्वास करते हैं जबकि कांग्रेस समाज के विभाजन में विश्वास करती है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एक सच्चे भाजपा कार्यकर्ता हैं और पार्टी की विचारधारा का पालन करते हैं ,जयराम एक कार्यकर्ता थे, फिर विधायक, मंत्री और अब एक मुख्यमंत्री और उन्हें पता है कि एक सच्चा कार्यकर्ता क्या है। खन्ना ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष में रानी की तरह काम करने की प्रवृत्ति है, वे एक आम आदमी के बारे में क्या जानते हैं। ऐसा लगता है कि कांग्रेस अभी भी रजवादशाही के पुराने जमाने और परंपरा से उबर नहीं पाई है और वे आम जनता से दूर रहना चाहती हैं। मैंने खुद देखा है कि जयराम ठाकुर आम आदमी के मुख्यमंत्री हैं जब बच्चे उनके साथ सेल्फी लेने के लिए हमेशा उत्साहित रहते हैं। कांग्रेस को छोटे मुद्दे पर राजनीति बंद कर देनी चाहिए और खुले दिल से हिमाचल की प्रगति को देखना चाहिए।
विनायक ठाकुर/ज्वालामुखी चंडीगढ़ में हुई ताइक्वांडो प्रतियोगिता में हिमाचल मार्शल आर्ट्स अकैडमी खुंडिया के बच्चों ने हिमाचल का नाम रोशन किया। 29 मई रविवार को चंडीगढ़ में हुई एमराल्ड ताइक्वांडो चैंपियनशिप प्रतियोगिता में हिमाचल मार्शल आर्ट्स एकेडमी के बच्चों ने गोल्ड सिल्वर और ब्राउंस मेडल जीतकर हिमाचल का नाम अपने कोच और माता-पिता का नाम रोशन किया। इनमें से गर्ल्स कैटेगरी में अंशिका गोल्ड, मानवी गोल्ड, वर्णिका गोल्ड, वंशिका राणा गोल्ड और खुशी सिल्वर , वंशिका सिल्वर , प्रांजल सिल्वर, भैरवी सिल्वर, और साइना ने ब्राउंस मेडल जीते और लड़कों की कैटेगरी में अथर्व गोल्ड, ऋषभ सिल्वर , करिश्मन सिल्वर, आदी कुमार सिल्वर, निशांत ने सिल्वर , मेडल जीते तथा बोर्ड ब्रेकिंग में जिसमें लकड़ी के बोर्ड को किक या पंच से तोड़ना होता है उसमें प्रांजल धीमान ने गोल्ड मेडल जीता l इस खुशी के मौके पर हिमाचल मार्शल आर्ट एकेडमी के प्रेसिडेंट सुनील कुमार और कोच मीना कुमारी का कहना है कि हमारी एकेडमी के बच्चे बहुत ही मेहनत करते हैं और ताइक्वांडो प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करके आते हैं हमें बहुत ही खुशी की बात है l हम सब लोगों से निवेदन करते हैं कि कृपया अपने बच्चों को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग जरूर दें और उन्हें हर ताइक्वांडो प्रतियोगिता में जरूर भेजें ताकि आपके बच्चों को इसका नालेज हो और उन्हें पता लगे की बाहर जाकर बच्चे कैसे खेलते हैं l हमारा मकसद है बच्चों को ओलंपिक तक लेकर जाना और खासकर गर्ल्स को ट्रेनिंग देना , जिससे खुद की रक्षा कर सकें l
भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने शिमला के ढली वार्ड में आम जनमानस से रैली में आने के लिए निमंत्रण दिया लोगों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा यह बड़े सौभाग्य की बात है कि केंद्र सरकार के 8 साल पूर्ण होने पर राष्ट्रीय कार्यक्रम शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में होने जा रहा है। इस मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को मोदी सरकार के 8 साल पूर्ण होने पर छोटी पत्रिका का वितरण भी किया। इस रैली को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। कुछ स्थानों से लाभार्थी सुबह 3:00 बजे इस कार्यक्रम को का हिस्सा बनने के लिए अपने घरों से निकलना शुरू हो जाएंगे ताकि वह समय पर पहुंचकर इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सके। उन्होंने कहा की इस समारोह से देश के किसानों को किसान सम्मान निधि का वितरण देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा और लगभग आधे घंटे तक पूरे देश के किसानों और लाभार्थियों के साथ वर्चुअल माध्यम से बातचीत की जाएगी। उन्होंने सभी से आग्रह किया है जब प्रधानमंत्री जी वर्चुअल माध्यम से लाभार्थियों के साथ बातचीत करेंगे सभी लोग शांति बनाए रखें ताकि सभी लाभार्थियों के साथ ठीक से बातचीत हो सके।
पुलिस पेपर लीक भर्ती मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस क्रमिक भूख हड़ताल पर लगातार 15 दिनों से सभी जिला मुख्यालय कार्यालय के बाहर बैठे थे, आज शिमला जिलाधीश कार्यालय के बाहर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी संजय दत्त जी और प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष नेगी निगम भंडारी जी की मौजूदगी में क्रमिक भूख हड़ताल पर फिलहाल विराम लगाकर अशन को तोड़ दिया गया है,सह प्रभारी संजय दत्त ने कहा के युवा कांग्रेस और कांग्रेस हिमाचल के सौहार्द को खराब नहीं करना चाहती है,हम नहीं चाहते कि देश के प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान प्रदेश का सौहार्द पूर्ण वातावरण खराब हो इसलिए हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस ने अपने क्रमिक अनशन को 15 दिन में समाप्त कर दिया है, यह भी कटु सत्य है कि प्रदेश में जब भी प्रधानमंत्री जी का दौरा हुआ है प्रदेश के लोगों को निराशा ही हाथ में लगी है,लेकिन हमारी यह अटल मांग है कि प्रदेश के 74000 युवाओं के साथ जो कुठाराघात हुआ है, और पात्र युवाओं को दरकिनार कर सरेआम नौकरियों को बेचा गया है इसमें जो भी लोग दोषी हैं वह सभी लोग सलाखों के पीछे होने चाहिए संजय दत्त ने कहा कि प्रधानमंत्री जी प्रदेश में आ रहे हैं और सीबीआई उनके अधिकार क्षेत्र में आती है युवा कांग्रेस की ये मांग है कि प्रधानमंत्री जी तुरंत हस्तक्षेप करें और सीबीआई को निर्धारित समय अवधि के अंदर इस जांच को पूरा करने के लिए आदेश दिए जाए। हिमाचल प्रदेश युवा कांग्रेस माननीय प्रधानमंत्री जी को प्रदेश के 12 जिलों के मुख्यालय में जिलाधीश के माध्यम से इस संदर्भ में ज्ञापन सौंपेगी , बाकी और अन्य 11 जिलों में आज क्रमिक भूख हड़ताल जारी रहेगी और कल दोपहर तक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के सहयोग से इसे भी तोड़ा जाएगा,अगर दोषियों पर कार्यवाही नही की जायेगी तो युवा कांग्रेस और सभी वरिष्ठ कांग्रेस के साथी आने वाले दिनों में जनता के सहयोग से इस आंदोलन को विधानसभा स्तर पर और उग्र करेगी और युवाओं को न्याय दिलवा कर रहेगी।
विनायक ठाकुर/देहरा संस्कृत भारती हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रतिवर्ष ग्रीष्मकाल में प्रान्तस्तरीय प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन प्रति वर्ष किया जाता है। इस वर्ष भी यह प्रशिक्षण वर्ग 10 जून 2022 से 21 जून 2022 तक हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में ग्राम टिप्पर, तहसील गलोड़ में आयोजित हो रहा है । इस वर्ग में भाग लेने वाले इच्छुक इस प्रशिक्षण वर्ग हेतु पूर्व पंजीयन कर रहे हैं । जानकारी देते हुए प्रांत सह प्रचार प्रमुख डा सत्यदेव ने बताया कि जिसने पूर्व मे प्रबोधन वर्ग, आवासीय वर्ग, नियमित रूप से साप्ताहिक मेलन, संघटन योजनानुसार विविधकार्यों व कार्यक्रमों में भाग ग्रहण किया हो, साथ ही भविष्य में संभाषण शिबिर चलाने हेतु समयदान का निश्चय किया हो, वह इस प्रशिक्षण वर्ग में भाग ले सकता है । उक्त जानकारी प्रांत सह प्रचार प्रमुख डा सत्यदेव ने दी।
नौणी विश्वविद्यालय की शिमला स्टूडेंट एसोसियेशन के द्वारा नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए स्वागत समारोह (गेट टुगेदर) जेष्ठ का आयोजन होटल शगुन में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ सुनील चौहान जी के द्वारा दीप प्रज्वलित करने के साथ हुई। इसके बाद कई सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ नृत्य-संगीत प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। जिसमे नवागंतुक विद्यार्थियों ने बढ चढ़ के हिस्सा लिया और प्रतिभागियों में से प्रदर्शन के अनुसार मिस शिमला और मिस्टर शिमला का चयन किया गया। कार्यक्रम में डॉ गोपाल, डॉ एनसी शर्मा, एवम चंदर मोहन चौहान मौजूद रहे उन्होंने विद्यार्थीयो का मार्गदर्शन किया। मौके पर डॉ बीएस डिल्टा ने नवागंतुक विद्यार्थियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से विद्यार्थी सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबी ज्ञान में निपुण होना नहीं है, बल्कि देश, समाज व संस्कृति को भी समझना होता है। सांस्कृतिक गतिविधियां हमें एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती हैं। कार्यक्रम में श्वेत सुनान्टा, विशांत सिंह मेहता, ईशान चौहान, एवम आश्रय वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने सभी को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
केंद्र में सरकार के आठ वर्ष पुरे होने पर 31 मई को ऐतिहासिक रिज मैदान पर होने वाली पीएम मोदी की रैली के लिए भाजपा ने निमंत्रण अभियान शुरू कर किया है।भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, भाजपा के प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना, शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज और महासचिव त्रिलोक जमवाल ने शिमला के मॉल रोड से निमंत्रण अभियान की। इस अभियान के तहत आम जनताऔर दुकानदारों को पीएम की रैली में आने के लिए इनिवेटशन कार्ड दिए गए। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कहा कि पीएम मोदी के लिए जनता से जो प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं वो अद्भुत हैं। शिमला और हिमाचल के लोग नरेंद्र मोदी को अपने शहर और राज्य में पाकर बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि हमारी युवा शक्ति भाजयुमो ने शिमला को भगवा शहर बनाने में बहुत अच्छा काम किया है।
रामपुर बुशहर के ठियोग उपमंडल के तहत सैंज में चोरों ने आभूषण की दुकान से 1.80 लाख रुपये की नगदी चुरा ली। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।पुलिस के मुताबिक घटना 24 मई रात की बताई जा रही है जब चोरों ने जितेंद्र वर्मा की दुकान का ताला तोड़कर 1.80 लाख रुपये की नगदी को चुरा लिया।अगले दिन जितेंद्र वर्मा दुकान में पहुंचे तो उन्हें वारदात की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने मामले की सूचना पुलिस को दी।दुकान मालिक ने पुलिस को सीसी टीवी फुटेज भी सौंपी है।दुकान में लगे सीसीटीवी में यह वारदात कैद हो गई।वह आभूषणों की दुकान के साथ-साथ मिनी बैंक भी चलाते हैं। यहाँ लोग रूपये भी जमा करते है। थाना प्रभारी कुलबीर सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर छानबीन में शुरू कर दी है। जल्द ही चोर पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
हिमाचल प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा का प्रश्नपत्र चार गिरोहों ने लीक करवाया है। गिरोह के किंगपिन ने अलग-अलग जिलों में प्रश्नपत्र लीक करवाए। पुलिस पूछताछ में यह खुलासा हुआ है।अभी तक दो गिरोह के किंगपिन सामने आए हैं।सूत्रों के अनुसार गिरोह के सदस्यों को पकड़ने के लिए हिमाचल से चार टीमें अलग-अलग राज्यों में गई हैं। यह टीमें पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और यूपी के इलाकों मेें दबिश दे रही हैं। एसआईटी का दावा है कि सप्ताह के भीतर इस मामले से पर्दा उठ जाएगा। पुलिस अब तक इस मामले में 93 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। 10 एजेंट बाहरी राज्यों से दबोचे गए हैं।अब तक की जांच में यह सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश के आठ जिलों में यह पेपर बंटा है। जब तक सीबीआई केस को नहीं संभालती है, तब तक एसआईटी जांच जारी रखेगी।जिला सोलन में राजस्थान के जिला सीकर के शांतिनगर निवासी सरकारी कर्मचारी आरोपी संदीप टेलर ने पेपर लीक करवाया था।आरोप है कि उसने दो बिचौलियों वीरेंद्र कुमार और देवराज के माध्यम से सोलन और अर्की क्षेत्र के सात अभ्यर्थियों को पेपर रटाने के बदले तीन लाख रुपये लिए थे। दोनों बिचौलिये पहले से गिरफ्तार हैं।आरोपी संदीप ने अपनी पत्नी के खाते में भी पैसा जमा करवाया है।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं-हमीरपुर नेशनल हाईवे में शनिवार सुबह एक सड़क हादसा हुआ है। जानकारी के अनुसार कार विपरीत दिशा में जाकर ट्रक से टकरा गयी और कार चालक की मौके पर मौत हो गयी। कार चालक की पहचान कमलेश चंद्र निवासी भरेटा, सदर, हमीरपुर के रूप में हुई हैं। शुरुआती जानकारी में पता चला है कि कमलेश बद्दी में नौकरी करता था और घुमारवीं से हमीरपुर की ओर जा रहा था। बताया जा रहा है कि ड्राइविंग करते हुए अचानक उसे नींद आ गई और इससे वजह से वह सामने से आ रहे ट्रक में विपरीत दिशा से जाकर टकरा गया हालांकि अभी तक हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया हैं। बिलासपुर पुलिस ने हादसे की पुष्टि की है और कारणों की जांच कर रही है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. मंडी विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और अमूमन हर क्षेत्र में विभिन्न राजनैतिक दलों से टिकट के चाहवान प्रो एक्टिव है। जिला मंडी का नाचन हलका भी इससे इतर नहीं है। टिकट की रस्साकशी के बीच नाचन का सियासी आंगन भी फिलवक्त टेढ़ा दिख रहा है। यहाँ जीत की हैट्रिक लगा चुकी भाजपा के सामने जहाँ सीट बचाने की चुनौती है तो कांग्रेस पर बेहतर करने का दबाव। मौजूदा विधायक विनोद कुमार लगातार दो जीत दर्ज कर चुके है और इस बार भी टिकट के प्रबल दावेदार है। किन्तु मंडी लोकसभा उपचुनाव में नाचन से कांग्रेस को मिली लीड उनकी राह का काँटा बन सकती है। लोकसभा सीट के तहत आने वाली जिला की नौ सीटों में से सिर्फ नाचन ही ऐसी सीट थी जहाँ भाजपा पिछड़ी। डॉ ललित चंद्रकांत भी भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार है। डॉ चंद्रकांत आईजीएमसी में सहायक प्रोफेसर हैं और सक्रिय राजनीति में उतरने के लिए उन्होंने सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी है। वह लम्बे वक्त से संघ से जुड़े हुए हैं। डॉ चंद्रकांत के अलावा कमलकांत भी टिकट की रेस में शामिल है। नाचन हलका अप्पर व लोअर नाचन में बंटा है। विनोद कुमार मूलतः अप्पर नाचन से संबंध रखते हैं। ऐसे में लोअर नाचन के विकास कार्यो की अनदेखी के आरोप उन पर लगते है। 2012 में पहली बार विधायक बने विनोद कुमार ने क्षेत्र में अपनी अच्छी पैठ बनाई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह करीब 17 हजार मत से विजयी हुए थे। ऐसे में उनका दावा इस बार भी मजबूत होने वाला है। कांग्रेस की बात करें तो यहां एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है। पूर्व प्रत्याशी लाल सिंह कौशल के अलावा टिकट की दौड़ में बीडी चौहान, दामोदर चौहान, शिवानी चौहान, नरेश चौहान, जसबीर, संजू डोगरा, प्रेम लाल गुड्डू व सीएल चौहान भी शामिल हैं। सभी लोगों ने क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान छेड़ रखा है। टिकट को लेकर अपने आकाओं के यहां हाथ पैर पार रहे हैं। सभी ने अलग-अलग नेताओं की डोर पकड़ रखी है। पर लोकसभा उपचुनाव की तरह अगर सभी नेताओं ने एकजुटता दिखाई तो भाजपा की मुश्किल बढ़ना तय है। उधर, देश की सबसे युवा प्रधान रही जबना चौहान को भी यहां कम नहीं आंका जा रहा है। जबना 2016 में 21 वर्ष की उम्र में देश की सबसे युवा पंचायत प्रधान बनी थीं। अब जबना आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुकी है। भाजपा का मजबूत किला रहा है नाचन : जिला मंडी का नाचन निर्वाचन क्षेत्र को भाजपा का मजबूत किला माना जाता है। वर्ष 1980 में भाजपा का गठन हुआ था और उसके बाद 1982 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में ही नाचन में भाजपा का खाता खुल गया। तब भाजपा टिकट पर दिलेराम ने जीत दर्ज की थी, जो 1977 में भी जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने थे। इसके बाद 1990 और वर्ष 2007 में भी दिलेराम ने ये सीट भाजपा की झोली में डाली। इसके बाद 2012 और 2017 में मौजूदा विधायक विनोद कुमार ने भाजपा टिकट पर यहाँ से जीत दर्ज की। वहीँ कांग्रेस यहाँ से लगातार तीन चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस के लिए टेक चंद डोगरा लम्बे वक्त तक यहाँ मुख्य चेहरा रहे है। डोगरा ने पार्टी को 1985, 1998 और 2003 में जीत दिलाई, जबकि 1993 में वे बतौर निर्दलीय चुनाव जीते।
- रामपुर में घटता जा रहा कांग्रेस की जीत का अंतर फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला जिला शिमला का रामपुर निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस का अभेद गढ़ है। देश में आपातकाल के बाद हुए 1977 के चुनाव को छोड़ दिया जाएँ तो यहाँ हमेशा कांग्रेस का परचम लहराया है। वहीँ भाजपा की बात करें तो 1980 में पार्टी की स्थापना के बाद से 9 विधानसभा चुनाव हुए है ,लेकिन पार्टी को कभी जीत का सुख नहीं मिला। पर बीते कुछ चुनाव के नतीजों पर नजर डाले तो कांग्रेस और वीरभद्र परिवार के इस गढ़ में पार्टी की जीत का अंतर कम जरूर हुआ है। 1990 की शांता लहर में भी कांग्रेस के सिंघीराम यहाँ से 11856 वोट से जीते थे, लेकिन 2017 आते -आते ये अंतर 4037 वोटों का रह गया। 1993 में कांग्रेस यहाँ 14478 वोट से जीती तो 1998 में जीत का अंतर 14565 वोट था। जबकि 2003 के चुनाव में ये अंतर बढ़कर 17247 हो गया। तीनों मर्तबा यहाँ से सिंघी राम ही पार्टी प्रत्याशी थे। 2007 में कांग्रेस ने यहाँ से प्रत्याशी बदला और नंदलाल को मैदान में उतारा। नंदलाल को जीत तो मिली लेकिन अंतर घटकर 6470 वोट का रह गया। 2012 में नंदलाल 9471 वोट से जीते तो 2017 में अंतर 4037 वोट का रहा। रामपुर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह का गृह क्षेत्र है। वीरभद्र सिंह यहां के राजा थे और राज परिवार के प्रति यहाँ की जनता हमेशा निष्ठावान रही है। उनके निधन के बाद उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह को भी जनता का उतना ही प्यार मिलता रहा है, जैसा वीरभद्र सिंह को मिलता था। यहाँ से चेहरा कोई भी हो पर यहाँ प्रभाव राजपरिवार का ही है। अलबत्ता ये क्षेत्र आरक्षित होने के चलते यहाँ से कभी भी राज परिवार खुद चुनाव नहीं लड़ सका लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि वोट उन्हीं के चेहरे पर पड़ते है। 6 बार यहाँ से चुनाव जीत चुके सिंघीराम भी कभी वीरभद्र सिंह के करीबी थे, लेकिन दोनों में दूरियां बढ़ी तो राज परिवार का आशीर्वाद नंदलाल को मिला। इस बार भी कांग्रेस यहाँ से फिर नंदलाल को मौका दे सकती है, जो राजपरिवार के करीबी माने जाते है। भाजपा की बात करें तो 1990, 1993 और 1998 में भाजपा ने यहाँ से निन्जूराम को मैदान में उतारा, पर कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज की। 2003 में भाजपा ने उम्मीदवार बदला और बृजलाल को मौका दिया लेकिन बृजलाल रिकॉर्ड 17247 मतों से हारे। 2007 में भी भाजपा ने बृजलाल पर ही भरोसा जताया। तब हार का अंतर कम जरूर हुआ लेकिन जीत का सूखा कायम रहा। 2012 में भाजपा ने यहाँ से प्रत्याशी बदला और प्रेम सिंह धरैक को मौका दिया, पर प्रेम सिंह भी करीब साढ़े नौ हज़ार वोट से चुनाव हार गए। हालांकि 2017 में प्रेम सिंह का प्रदर्शन बेहतर रहा और हार का अंतर करीब चार हज़ार वोट रहा। कौल सिंह भी दावेदार : रामपुर में इस बार भाजपा टिकट के कई चाहवान है। बीते दो चुनाव लड़ चुके प्रेम सिंह धरैक के अलावा कौल सिंह नेगी को भी टिकट का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। कौल सिंह को हाल ही में हिमको फेडरेशन का चेयरमैन भी बनाया गया है। वहीं 6 बार कांग्रेस टिकट पर चुनाव जीतने वाले सिंघी राम भी अब भाजपा में शामिल हो चुके है। सिंघी राम ने लगाया छक्का, तो नंदलाल की हैट्रिक : 1977 में जनता दल के टिकट पर निन्जु राम ने यहां से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1982 से लेकर 2003 तक हुए लगातार 6 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सिंघी राम ने जीत दर्ज की। जबकि 2007, 2012 और 2017 में जीत दर्ज कर कांग्रेस के ही नंदलाल भी जीत की हैट्रिक बना चुके है।
फस्र्ट वर्डिक्ट । सिरमौर हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी किसी से छिपी नहीं है। शिक्षकों की इसी कमी से निजात दिलाएगा 20 फीट लंबा और एक फीट चौड़ा एक ऐसा पेन जो स्कूल में बच्चों की क्लास लेगा। सिरमौर जिले की नाहन विधानसभा के दुर्गम क्षेत्र में स्थित राजकीय उच्च विद्यालय नौरंगाबाद स्कूल के मुख्याध्यापक एवं विज्ञान के शिक्षक डॉ. संजीव अत्री ने एक ऐसा ही पेन तैयार किया है। लोहे और लकड़ी से तैयार स्याही वाले 41 किलोग्राम वजनी इन पेन में साउंड सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। कोई शिक्षक यदि अगले दिन अवकाश करने वाला है तो एक दिन पहले ही उससे बच्चों को पढ़ाई जाने वाली विषयवस्तु (चैप्टर) तैयार करवाकर पेन में डिलीवर कर दी जाएगी। अगले दिन बच्चों को पेन के समीप बिठाकर छुट्टी पर गए शिक्षक की आवाज में पढ़ाकर सेंसर अपना काम शुरू कर देगा। पेन के ढक्कन वाले हिस्से पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिसका नियंत्रण स्कूल प्रबंधन के पास रहेगा। कार्यालय में बैठकर स्कूल प्रबंधन परिसर में बच्चों पर नजर रख सकेगा और साउंड सेंसर के जरिए बच्चों का नाम भी पुकारा जा सकेगा। यह पेन रात के समय रोशनी भी बिखेरेगा। इस स्कूल में पीईटी नहीं है तो स्कूल में प्रार्थना सभा भी पेन करवाएगा। खाली पीरियड में पेन बच्चों को कहानी सुनाएगा। इस पेन से बच्चे गीत भी सुन सकते हैं। एक तरह से यह खोज शिक्षकों की कमी से निपटने में सहायक होगी। मुख्याध्यापक डॉ. संजीव अत्री ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर 31 मई को पेन स्थापित किया जाएगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए ऐसा पेन तैयार किया गया है। यह पेन स्कूल में किसी भी शिक्षक के अनुपस्थित होने पर उस शिक्षक का विषय पढ़ा सकता है। गौर हो कि यह वही स्कूल है, जहां मिनी सिनेमाघर तैयार किया गया है। पिछले साल इस स्कूल में बच्चों की संख्या 64 थी। इस बार यहां 115 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में की जा रही नई खोजों से बच्चों की इस स्कूल में रुचि बढ़ती जा रही है। मुख्याध्यापक ने बताया कि पेन तैयार करने में 45,000 रुपए लागत आई है। इस पेन को बिजली या सौर ऊर्जा से चार्ज किया जा सकेगा। इसे तीन हिस्सों में बनाया है। पहला ढक्कन, दूसरा बीच का हिस्सा और तीसरे हिस्से में आठ इंच लंबी इसकी निब है, जिससे लिखा भी जा सकता है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला बेदाग़ छवि वाले मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार पर अब पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले का दाग लगा है। जयराम सरकार की चुनरी में लगे इस दाग के धब्बे गहरे है और निश्चित तौर पर विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष इन्हें हल्का पड़ने नहीं देगा। तंत्र की इस नाकामी का ठीकरा सरकार के सर फूटना लाजमी है। हालांकि सरकार ने हरसंभव एक्शन लिया है लेकिन ये प्रकरण अब सियासी रंग ले चूका है। कोरोना काल में हुए स्वास्थ्य घोटाले के बाद ये पहला ऐसा बड़ा मामला है जिसने सरकार की छवि को तार -तार कर दिया है। स्वास्थ्य घोटाले की आंच मंद करने के लिए तब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को कुर्सी की बलि देनी पड़ी थी, तो अब सरकार ने मामला सीबीआई को सौप कर अपनी स्वच्छ छवि बचाये रखने का प्रयास किया है। पर असल बात ये है कि इस प्रकरण में सरकार की खासी छीछा लेदर हो चुकी है। व्यवस्था पर सवाल उठ रहे है और सवाल न सिर्फ विरोधी राजनैतिक दल उठा रहे है अपितु आम जनता भी सोशल मीडिया पर जमकर भड़ास निकाल रही है। व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी भी है क्यों कि सरकार और पुलिस प्रशासन की नाक तले पुलिस कांस्टेबल परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया। जिस पुलिस भर्ती परीक्षा के आयोजन पर हिमाचल पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही थी, वही लिखित परीक्षा खाकी पर दाग बन गई है। यहां बड़ा सवाल ये भी है की जब पुलिस महकमा ही अपनी परीक्षा पारदर्शिता के साथ नहीं करवा पा रहा है तो दूसरे विभागों में इसकी उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस मामले के सामने आते ही बेरोज़गारी के मसले पर सरकार को पहले से घेर रहा विपक्ष भी और अधिक सक्रीय हो गया है। ज़ाहिर है चुनाव से पहले यह मुद्दा सत्तारूढ़ भाजपा के लिए गले की फांस बन गया है। यह मामला हजारों परिवारों से जुड़ा है। पुलिस कांस्टेबल की भर्ती 70 हजार से अधिक युवाओं ने दी है। खासकर जिन युवाओं ने अपनी मेहनत से पेपर पास कर मेरिट में जगह बनाई है, उनके सपनों पर पानी फिर गया है। यही वजह है कि कांग्रेस के साथ -साथ आम आदमी पार्टी और माकपा भी इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही है। जयराम सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच का दावा ज़रूर कर रही है मगर आलोचनाओं का दौर थम नहीं रहा। हिमाचल में पुलिस भर्ती का लिखित पेपर पहली बार लीक हुआ है। दरअसल पुलिस ने पहली बार पेपर तैयार और प्रिंट करने का सिस्टम बदला था। अब आरोपों के घेरे मेें पुलिस भी है, इसलिए अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। जेओए भर्ती भी सवालों के घेरे में : इस मामले ने सिर्फ सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल ही खड़े नहीं किये बल्कि बीते कुछ सालों में सफल न हो पाई उन भर्ती प्रक्रियाओं की याद भी दिला दी जिनसे प्रदेश के बेरोज़गार युवा अब तक परेशान है। पुलिस भर्ती के आलावा जेओए भर्ती भी सवालों के घेरे में है। अन्य महकमों में भी भर्तियां अभी लंबित चल रही हैं। शिक्षा विभाग में आठ हजार मल्टी टास्क वर्करों की भर्ती अभी तक पूरी नहीं हुई है। जेबीटी भर्ती भी लटकी हुई है। दिन प्रति दिनप्रदेश में बेरोज़गार युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। बेरोज़गारी एक ऐसा मसला बन चूका जिसका निवारण सरकार के पास नहीं दिखाई देता। इस पर भर्ती परीक्षाओं के पेपर लेक होने से युवाओं में रोष है।
कृषि विभाग ने प्रस्तुत की रिपोर्ट फस्र्ट वर्डिक्ट । शिमला आज के समय में किसानी एक चुनौती सी बनती जा रही है। किसानों की फसल के कई दुश्मन बने हुए हैं। आवारा पशुओं और बंदरों ने तो नाक में दम कर रखा है। इसके अतिरिक्त हिमाचल की ज्यादातर कृषि पर निर्भर है। कहीं-कहीं सिंचाई के साधन तो उपलब्ध हैं मगर हर जगह ऐसा नहीं है। यही कारण है कि बरसात हो जाए तो फसल अच्छी होती है और न हो तो किसानों को भारी नुक्सान होता है। इस बार भी किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ी है। बताया जा रहा है कि इस बार सूखे से किसानों को 200 करोड़ रुपए से अधिक का नुक्सान हुआ है। कृषि विभाग ने फील्ड से आई नुक्सान की रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। जिला हमीरपुर, शिमला और सिरमौर के किसानों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। दूसरी ओर प्रदेश में सूखे और ओलावृष्टि से बागवानी फसलों खासकर सेब को हुई 34 करोड़ की क्षति हुई है। सरकार को भेजी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 4,13,057.60 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें 86,556.60 भूमि में कृषि फसलों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा 53,107.56 हेक्टेयर भूमि में 33 फीसदी से कम और 33,449.04 हेक्टेयर भूमि में 33 फीसदी से अधिक फसलों को नुकसान हुआ है। कृषि फसलों को कुल 207.14 करोड़ का नुकसान हुआ है। राज्य कृषि निदेशक नरेश कुमार ने कहा कि फसलों की 207 करोड़ के कृषि फसलों के नुकसान की रिपोर्ट फील्ड से मिल चुकी है। इसे सरकार को भेजा गया है।
फस्र्ट वर्डिक्ट । शिमला लोगों को घरद्वार के समीप बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए सर्वोच्च प्राथमितकता के साथ कार्य करत हुए प्रदेश सरकार ने जहां ग्रामीण क्षेत्रों में नए स्वास्थ्य संस्थान खोलने को अधिमान दिया है, वहीं स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए भी विशेषतौर पर प्रयास किए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों और पैरा-मेडिकल स्टाफ के खाली पड़े पदों को भरने के लिए नई नियुक्तियां की गई हैं। इन संस्थानों में बेहतर जांच सुविधाएं प्रदान करने के लिए आधुनिक मशीनों और उपकरणों की व्यवस्था की गई है। दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं घरद्वार पर उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री मोबाइल क्लीनिक योजना आरम्भ करने का निर्णय लिया गया है। इस वर्ष प्रत्येक स्वास्थ्य खंड में मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विकसित किया जाएगा। मरीजों की सुविधा के लिए 50 नई एंबुलेंस खरीदने का भी निर्णय लिया गया है। आईजीएमसी, शिमला में 103.18 करोड़ रुपए लागत से निर्मित भवन का लोकार्पण किया गया है। इस भवन के निर्माण कार्य पर 73 करोड़ रुपए की राशि वर्तमान प्रदेश सरकार के कार्यकाल में उपलब्ध करवाई गई। इस अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिसके आरम्भ होने से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को उपचार की बेहतर सुविधा प्रदेश के अंर ही उपलब्ध होगी।कोविड महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों के बाद राज्य सरकार ने स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूती प्रदान की है, ताकि भविष्य में किसी महामारी की स्थिति का सफलतापूर्वक सामना किया जा सके। आज प्रदेश में 48 ऑक्सीजन संयंत्रों, 1000 से अधिक वेंटिलेटर्स की सुविधा उपलब्ध है। उप-स्वास्थ्य केन्द्र स्तर तक 5000 से अधिक ऑक्सीजन कंसट्रेटर उपलब्ध हैं तथा 10 हजार से अधिक ऑक्सीजनयुक्त बिस्तरों की क्षमता सृजित की गई है। प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देने के लिए 33 नए उप-स्वास्थ्य केंद्र, 46 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आठ स्वास्थ्य उप-केंद्र खोले हैं। वहीं, 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को नागरिक अस्पताल के रूप में स्तरोन्नत किया गया है। इसके अलावा, विभिन्न अस्पतालों में बिसतरों की क्षमता बढ़ाई गई है और कई स्थानों पर नए शिक्षण संस्थान खोलने की मंजूरी प्रदान की गई है।वर्तमान राज्य सरकार ने 1654 चिकित्सा अधिकारियों, 975 स्टाफ नर्सों, 76 जूनियर ऑफिस असिस्टेंट, 199 महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, 194 प्रयोगशाला सहायकों, 35 ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट, 462 फार्मासिस्ट, 111 रेडियोग्राफर, 11 ऑपथेल्मिक अधिकारियों के पदों को भरा है। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष चिकित्सा अधिकारियों के 500 नए पद भरने का फैसला लिया है। इसके अलावा, आयुष विभाग में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारियों के 200 पद भरे जाएंगे जिनमें से 100 पद सीधी भर्ती और शेष बैचवार आधार पर भरे जाएंगे। आयुष विभाग में अनुबंध आधार पर आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के 100 पद भरने का भी निर्णय लिया गया है। इनमें से 52 पद सीधी भर्ती और 48 बैचवार भरे जाएंगे। पिछले चार वर्षों में 10 आयुर्वेद स्वास्थ्य केंद्र खोले गए और तीन आयुर्वेद अस्पतालों को स्तरोन्नत किया गया है। कांगड़ा जिले के पपरोला में 8.37 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सैंटर ऑफ एक्सिलेंस फॉर जेरीएट्रिक हैल्थ का शुभारम्भ किया जा चुका है। केंद्र सरकार के सहयोग से बिलासुपर में एम्स और ऊना में पीजीआई के सेटेलाइट सेंटर और तीन मेडिकल कॉलेजों की सौगात मिली है। भारत सरकार ने प्रदेश के लिए एक मेडिकल डिवाइस पार्क स्वीकृत किया है, जिसका कार्य इस वर्ष नालागढ़ में आरंभ हो जाएगा। इस पार्क से प्रदेश में 5 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा और 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।प्रदेश सरकार राज्य के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक तकनीकों की सुविधा प्रदान करने पर विशेष ध्यान दे रही है। डा. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज, नाहन में वायरोलॉजी लैब, ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र और एमजीएमएस संयंत्र को कार्यशील बनाया गया है। आईजीएमसी, शिमला में किडनी टांसप्लांट की सुविधा आरंभ की गई है।
फस्र्ट वर्डिक्ट । शिमला हालांकि प्रदेश में बेरोजगारी का ग्राफ अधिक है, मगर सरकार भी इसके लिए सतत प्रयासरत है। इसके लिए सरकार ने कई प्रयास किए हैं। इनमें मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना, रोजगार मेले और समय-समय सरकारी नौकरियों का भी प्रावधान किया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा बेरोजगारी पर काबू पाया जा सके और बेरोजगार अपने रोजगार के साधन जुटा सकें। हिमाचल प्रदेश में 476.35 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिली है। इससे 1379 लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग की अध्यक्षता में आयोजित सिंगल विंडो बैठक में यह निर्णय लिया गया। यह निवेश 38 इकाइयों के माध्यम से आएगा। इनमें 25 औद्योगिक इकाइयां हैं। इसके अलावा 11 पर्यटन इकाइयों एवं 2 पावर प्रोजेक्टों में भी निवेश होगा। बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि केंद्रीय पूंजी निवेश प्रोत्साहन के तहत निवेश करने वालों को सबसिडी मिलेगी। सबसिडी के लिए 478 इकाइयों को प्री-रजिस्टर किया गया है। अब तक 168.65 करोड़ रुपए की सबसिडी स्वीकृत हो गई है, जिसमें से केंद्र से 69.28 करोड़ रुपए मिल चुके हैं। सबसिडी के रूप में 56 करोड़ रुपए प्लांट एवं मशीनरी के लिए मिलेंगे। बैठक में केंद्रीय पूंजी निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत 118 दावों का निपटारा किया गया। हिमाचल प्रदेश में अब खनन से संबंधित स्वीकृति ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगी। अब तक उद्योग विभाग का खनन विंग ऑनलाइन नहीं जुड़ा था। इसको लेकर 1 माह के भीतर ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। इसके बाद वर्ष के अंत तक खनन विंग को ऑनलाइन किया जाएगा। इससे खनन लीज लेने, पुन: आबंटित करने, क्रशर के लिए आवेदन करने, नालों, खड्डों, व नदियों से खनिज रेत, पत्थर व रोड़ी निकालने संबंधी आवेदन भी ऑनलाइन हो सकेंगे। खनन के लिए ऑनलाइन स्वीकृतियां मिलने से अब जहां सरकारी कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, वहीं काम करवाने के लिए रिश्वत देने के मामलों पर भी विराम लग सकेगा।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला केंद्र की मोदी सरकार ने अपने आठ साल की वर्षगांठ मनाने के लिए शिमला को चुना है। 31 मई को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिमला आ रहे है। मोदी रिज मैदान से एक जनसभा को संबोधित करेंगे। सियासी चश्मे से देखे तो जाहिर है चुनावी वर्ष है इसीलिए इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम की मेजबानी का मौका शिमला को मिला है। पर कारण जो भी हो, हिमाचल प्रदेश के लिए ये एक उपलब्धि जरूर है। जाहिर है मोदी सरकार शिमला में आठ साल मनाएगी तो देश भर में इसकी चर्चा भी खूब होगी। मेजबानी हिमाचल प्रदेश कर रहा है तो हिमाचल का विशेष जिक्र भी होगा और सम्भवतः प्रदेश को कोई विशेष सौगात भी मिल जाएं। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी को बुलाने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खास प्रयास किये है और उनके निमंत्रण को स्वीकार कर पीएम मोदी ने भी जयराम को आशीर्वाद दे दिया है। हिमाचल प्रदेश में मिशन रिपीट को सफल करने के लिए 'मोदी मैजिक' भाजपा का सहारा है। दरअसल संगठनात्मक बदलाव के बाद प्रदेश कांग्रेस भी प्रोएक्टिव नज़र आ रही है और कांग्रेस में ज़मीनी स्तर पर बदलाव की भी उम्मीद है। कांग्रेस लगातार प्रदेश सरकार को महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर घेर रही है और अब पुलिस कांस्टेबल पेपर लीक मामले के बाद ये हमले और भी तेज़ होते दिखाई दे रहे है। वहीं इस बार आम आदमी पार्टी भी मैदान में है। भले ही आम आदमी पार्टी अब तक प्रदेश में संगठनात्मक तौर पर कुछ बड़ा न कर पाई हो मगर पार्टी को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसीलिए पार्टी विद डिसिप्लिन भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। ऐसे में पीएम मोदी का चेहरा आगे रखकर ही पार्टी मैदान में उतरने जा रही है। भाजपा ने साल 2017 का चुनाव प्रो प्रेम कुमार धूमल के चेहरे पर लड़ा था। तब अंतिम समय तक पार्टी ने चेहरा घोषित नहीं किया था। तब भाजपा तो चुनाव जीत गई मगर खुद धूमल सफल नहीं हो पाए थे। पर इस बार अभी से ये लगभग स्पष्ट किया जा चुका है कि चुनाव में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ही पार्टी को लीड करेंगे। हालांकि उपचुनाव में भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ही लीड कर रहे थे, मगर परिणाम अनुकूल नहीं रहे थे। बावजूद इसके पार्टी जयराम ठाकुर के चेहरे पर भरोसा जताती दिख रही है। उपचुनाव से सबक लेते हुए पार्टी कोई रिस्क नहीं ले रही है, इसीलिए अभी से भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा में भाजपा ने 50 हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस आयोजन के जरिये प्रदेश में भाजपा माहौल बदलने की तैयारी में है। खुद मुख्यमंत्री की देखरेख में आयोजन की रूपरेखा को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। क्या विधानसभा चुनाव में चलेगा मोदी मैजिक : मोदी मैजिक की बात करें तो ये ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है कि लोकसभा चुनाव में तो हिमाचल के लोग पीएम मोदी के नाम पर वोट करते है, लेकिन विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं होता। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी की चुनावी रैलियों के बावजूद पार्टी ऊना, फतेहपुर, कुल्लू और पालमपुर जैसे विधानसभा क्षेत्रों में अपना झंडा नहीं लहरा पाई थी।
- कांग्रेसी नेता भाजपा में जाकर बन रहे मुख्यमंत्री - परिवर्तन की जगह चिंतन मंथन के दौर में ही अटकी है पार्टी असम के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री मानिक साहा, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, नागालैंड में नेफियू रियो, अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, ये तमाम वो नेता है जो कांग्रेस से भाजपा में गए और मुख्यमंत्री बन गए। सेवन सिस्टर कहे जाने वाले नार्थ ईस्ट के साथ राज्यों में से इस वक्त पांच में भाजपा की सरकार है और इन पांचो राज्यों में मुख्यमंत्री वो नेता है जो कांग्रेस से भाजपा में गए। कांग्रेस आलाकमान की इससे बड़ी नाकामी भला और क्या हो सकती है। हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्य अब तक अपवाद जरूर है लेकिन बाकी देश में हाल बेहाल है। बीते कुछ समय में कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके है, तो कई हाशिए पर है और कभी भी इनकी रवानगी का समाचार मिल सकता है। बावजूद इसके नेतृत्व परिवर्तन की जगह पार्टी में अब तक चिंतन - मंथन का दौर ही चला हुआ है। 'ये खेल है कब से जारी, बिछड़े सभी बारी बारी'. कैफ़ी आजमी के लिखे गीत के ये अल्फ़ाज़ आज कांग्रेस की स्थिति बयां करने के लिए बिलकुल उपयुक्त है। जैसा कैफ़ी साहब ने लिखा था, वैसा ही कुछ कांग्रेस के साथ घट रहा है। एक - एक कर नेता -कार्यकर्त्ता पार्टी का साथ छोड़ते जा रहे है। हालहीं में उदयपुर में तीन दिन तक नव संकल्प शिविर में कांग्रेस का चिंतन -मंथन हुआ और इसके तीसरे ही दिन गुजरात से नतीजों का पहला रुझान आ गया। हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। साल के अंत में गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने है, इससे ठीक पहले हार्दिक का पार्टी से रुक्सत होना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। ये अचानक नहीं हुआ, कांग्रेस क्या पुरे देश को पता था कि पार्टी आलाकमान की लचर कार्यशैली से उकता चुके हार्दिक ऐसा कदम उठा सकते है। पर कांग्रेस को मानो इस बात का ही इन्तजार था, शायद हार्दिक पार्टी के लिए गैर जरूरी लग रहे होंगे। बहरहाल कारण जो भी हो हार्दिक का जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। इससे पहले कांग्रेस के नव संकल्प शिविर के दौरान ही पंजाब से पार्टी के दमदार नेता सुनील जाखड़ ने गुड बाय कह दिया था। उनके जाने के कुछ दिन पहले ही पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार ने पार्टी को अलविदा कहा था। वहीँ कैप्टेन अमरिंद्र सिंह को हटाकर और नवजोत सिंह सिद्धू को संगठन की कमान थमाकर पंजाब में हार की पटकथा तो पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले ही लिख चुकी थी। ये बेफिजूल के परिवर्तन नहीं किये गए होते तो संभवतः पार्टी पंजाब में बेहतर करती। कई दिग्गज भाजपा में हुए है शामिल : बीते एक दशक पर नज़र डाले तो कांग्रेस के कई दिग्गज भाजपा में शामिल हुए है। मध्यप्रदेश में युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधियां तो अपने साथ -साथ कांग्रेस की सरकार भी ले गए थे। यूपी में एक दिन के मुख्यमंत्री रहे जगदंबिका पाल 2014 में बीजेपी में शामिल हुए थे। वह लगातार दो बार से बीजेपी के टिकट पर डुमरियागंज से सांसद हैं। इसी तरह कांग्रेस की पूर्व दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी 2016 में बीजेपी में शामिल हुई थीं। उन्होंने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ा था। पार्टी का ब्राह्मण चेहरा जितेन प्रसाद भी पिछले साल भाजपा में शामिल हो गए। हरियाणा में चौधरी बीरेंद्र सिंह 2014 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत सिंह भी 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसी तरह महाराष्ट्र में कांग्रेस के दिग्गज नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल 2019 में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे भी अब भाजपा में शामिल हो चुके है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा भी अब भाजपा में है। ऐसी सैकड़ों उदहारण है जहाँ कांग्रेस के अच्छे जनाधार वाले नेताओं ने भाजपा में शामिल होकर पार्टी का जनाधार बढ़ाया है।
फर्स्ट वर्डिक्ट. कांगड़ा 'गुरु गुड़ रहे चेला हो गए शक्कर' , 2017 के विधानसभा चुनाव में नगरोटा बगवां निर्वाचन क्षेत्र में हाल ऐसा ही था। तब कभी स्व. जीएस बाली के समर्थक रहे अरुण कुमार 'कूका' ने चुनावी मैदान में बाली को पटकनी देकर अपना लोहा मनवाया था। अब खुद बाली दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनके पुत्र रघुवीर बाली कांग्रेस की अगुवाई करते दिख रहे है। वहीँ अरुण कुमार 'कूका' भाजपा का प्राइम फेस बने हुए है। ऐसे में आगामी चुनाव में संभवतः जूनियर बाली और कूका के बीच टक्कर देखने को मिले। नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र का विकास प्रदेश भर में चर्चा का विषय रहा है। टांडा मेडिकल कॉलेज, राजीव गांधी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, परिवहन निगम का डिपो व आरएम कार्यालय, सिविल अस्पताल और ऐसे अन्य कई बड़े काम स्वर्गीय जीएस बाली की फेहरिस्त में शामिल हैं जिनके माध्यम से क्षेत्र की जनता को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं मिली हो। अब उनके पुत्र रघुवीर अपने पिता द्वारा कराए गए कार्यों के सहारे उनकी सियासी विरासत सँभालते दिख रहे है। उधर भाजपा की बात करे तो अरुण कुमार 'कूका' ही भाजपा का प्राइम फेस है। एक समय कूका भी जीएस बाली के समर्थक थे। 2012 में कूका ने जीएस बाली के खिलाफ निर्दलीय मैदान में थे तब जीएस बाली ने कूका को 2743 वोटों से हराया था। फिर 2017 में कूका ने बाजी पलटी और भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ बाली को पटकनी दी। गुटबाजी बड़ी चुनौती : स्व. जीएस बाली और स्व वीरभद्र सिंह के बीच हमेशा खट्टे मीठे संबंध रहे है। 2017 में कांग्रेस की हार का बड़ा कारण गुटबाजी को भी माना जाता है। इस बार कांग्रेस रघुवीर को मैदान में उतारती है तो उनके लिए भी गुटबाज़ी साधना बड़ी चुनौती होगा। बाली का रहा है दबदबा : जीएस बाली1998 में पहली बार नगरोटा बगवां के विधायक चुने गए थे। उसके बाद 2003 व 2007 में उन्होंने चुनाव जीता। 2003 से 2007 के बीच वे परिवहन मंत्री रहे। 2012 में चौथी बार नगरोटा से उन्होंने चुनाव जीता और एक बार फिर परिवहन मंत्री बने। वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी माने जाते थे।
अरविन्द शर्मा। फर्स्ट वर्डिक्ट आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र बढ़ते सियासी तपन की जद में जिला चंबा का भटियात निर्वाचन क्षेत्र भी आ चुका है। बीते कुछ वक्त में दूसरी बार विधायक बन विधानसभा पहुँचे विक्रम जरियाल ने ख़ुद अपनी लोकप्रियता को खासा नुकसान पहुँचाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह कई मौक़ों पर दिखने वाले विधायक के कड़े तेवर हैं, जो उनकी अपनी शालीन एवं सौम्य छवि के विपरीत हैं। साथ ही प्रदेश की अपनी ही सरकार होने के बावजूद भटियात क्षेत्र के लिए कोई बड़ी उपलब्धि लाना भी उनके लिए दूर की कौड़ी साबित हुआ है। पिछले साढ़े चार वर्ष में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी भटियात में एक मर्तबा पहुंचे हैं, जबकि बाकि समूचे चंबा में अक्सर मुख्यमंत्री के दौरे होते रहते हैं। कांगड़ा और चंबा की सीमा से लगते इस विधानसभा क्षेत्र के बाबत अगर बुनियादी सुविधाओं की बात की जाए तो अच्छे स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए यहाँ के बाशिंदों को टाँडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा और धर्मशाला का रुख करना पड़ता है। अगर इस क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों, आयुर्वेदिक डिस्पेंसरियो, प्लस टू किए गए स्कूलों की उद्घाटन पट्टिकाओं पर नज़र डालें तो ज्यादातर पर कुलदीप पठानिया का नाम दर्ज है। हालांकि पिछले दिनों कैबिनेट में भटियात को लेकर चवाड़ी में पीडब्ल्यूडी डिवीजन खोले जाने की घोषणा जरूर जरियाल के लिए हर्ष का विषय हो सकता है, पर अभी तक यह घोषणा ही है। मौजूदा संभावित प्रत्याशियों के परिपेक्ष में पूर्व के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भटियात विधानसभा में राजपूत व अनुसूचित जाति के मतदाताओं की बहुलता है। अगर 2012 के विधानसभा को देखें तो जरियाल यह चुनाव भारी मतों से जितने में सफल रहे थे, जबकि चार बार के विधायक रहे पठानिया आसानी से हार गए थे। इसका कारण था यहाँ से निर्दलीय उम्मीदवार रहे भूपिंदर सिंह चौहान जिन्होंने दस हज़ार के आस-पास मत प्राप्त किये थे। साफ़ तौर पर मतों का विभाजन यहाँ दिखता है। 2017 में फिर जरियाल को यहाँ के लोगों ने विधानसभा पहुँचाया। तब विक्रम सिंह जरियाल ने कुलदीप सिंह पठानिया को 6885 वोटों के मार्जिन से हराया था। इस बार यूँ तो दोनों ही मुख्य राजनीतिक दलों से टिकट के कई दावेदार है पर संभवतः जरियाल और पठानिया फिर आमने -सामने होंगे। आज के इस सूचना -क्रांति वाले आधुनिक दौर में भी कोई चाहे लाख ख़ुद को समझदार मान कर चलें लेकिन सियासी शतरंज की बिसात पुराने तरीके से ही बिछाई जाती हैं। भटियात में भी ये ही कहानी है। यहाँ भी जातीय ध्रुवीकरण और मत विभाजन फैक्टर पर आधारित वोट बैंक की राजनीति को नज़र अन्दाज़ नहीं किया जा सकता। इस सीट पर गुज्जर, गद्दी और पिछड़े वर्ग के मतदाता जिसके पक्ष में एकजुट होकर वोट करेंगे, उसकी राह आसान होगी। बाकि पिछले दो -एक महीनों से प्रदेश में सक्रिय हुई आम आदमी पार्टी का ऊँट इस विधानसभा क्षेत्र में किस करवट बैठता है यह देखना भी दिलचस्प होगा। शांता ने गोद लिया, पर हालात नहीं बदले ... दत्तक पुत्र नाम से जाने वाले लाहड़ू के साथ लगते गांव परछोड़ को सांसद रहते हुए शांता कुमार ने गोद लिया था, लेकिन शांता भी इस गांव को गोद लेने की घोषणा ही कर पाए थे और कभी इस गाँव में जा नहीं सके। परछोड़ गांव में फिन्ना सिंह नहर का निर्माण पिछले कई वर्षों से चल रहा है और उस नहर के निर्माण कार्य को शुरू करवाने के श्रेय का दावा कांग्रेसी और भाजपाई दोनों करते आए हैं। पर हकीकत ये है कि अब तक कार्य अधर में लटका है। जरियाल का प्रधान से विधायक तक का सफर : विक्रम सिंह जरियाल राजनीति में आने से पहले भारतीय सेना में रहे। इसके बाद वे टुंडी पंचायत के प्रधान रहे। तदोपरांत दो बार जिला परिषद सदस्य चुने गए, जिसके बाद भाजपा ने उन्हें ज़िला सचिव बनाया। 2012 के चुनावों में जरियाल पहली बार विधायक चुने गए।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला यूजीसी पे-स्केल जारी न करने के विरोध में अब प्रदेश विश्वविद्यालय का शिक्षक कल्याण संघ भी आंदोलन पर उतर आया है। प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ के महासचिव डा. जोगिंद्र सकलानी ने प्रदेश सरकार से यूजीसी के सातवें वेतन आयोग को जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि सात वर्षों के बाद भी इसे लागू न करना शिक्षक समुदाय के साथ धोखा है। इस बारे में प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ ने कई बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के समक्ष अपनी बात रखी हैं, परंतु हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिल रहा। सरकार ने अपने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को नया वेतनमान लागू कर दिया है केवल विश्वविद्यालय व कालेज प्राध्यापक वर्ग को इस से वंचित रखा गया है, जो इस समुदाय के सरासर अन्याय है। संघ की मांग है कि यदि जल्द से जल्द नए वेतनमान को लागू नहीं किया जाता है तो आने वाले समय में शिक्षक आंदोलन करने पर विवश होंगे और इसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से सरकार की होगी। डा. जोगिंद्र सकलानी ने कहा है कि जल्दी ही प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ की आम सभा बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ड्राइवर यूनियन ने निगम प्रबंधन के खिलाफ फिर मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि 29 मई तक सरकार व निगम प्रबंधन ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो वे 30 मई को बसें नहीं चलाएंगे। यानी हिमाचल प्रदेश में एक दिन के लिए 4000 सरकारी बसों के पहिए थम जाएंगे। शिमला में प्रदर्शन करते हुए एचआरटीसी ड्राइवर यूनियन ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए 'काम छोड़ों' आंदोलन का ऐलान किया है। ड्राइवर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने बताया कि 29 मई की रात 12 बजे से 30 मई की रात 12 बजे तक एचआरटीसी का कोई भी चालक बस नहीं चलाएगा। उन्होंने बताया कि यूनियन ने 25 अप्रैल को ही एचआरटीसी प्रबंधन को मांगे पूरी करने के लिए 12 मई तक का अल्टीमेटम दे दिया था, लेकिन एचआरटीसी प्रबंधन ने मांगे मानना तो दूर अब तक वार्ता के लिए भी नहीं बुलाया है। दरससल एचआरटीसी कर्मचारी राज्य सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर छठे वेतनमान के लाभ की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार अपने लगभग सभी कर्मचारियों को छठे वेतनमान के लाभ दे चुकी है लेकिन एचआरटीसी कर्मचारियों को अब तक इसके लाभ नहीं दिए गए। इसी तरह एचआरटीसी कर्मचारी 36 महीनों के लंबित पड़े ओवर टाइम के भुगतान, डीए का 2006 से लंबित पड़े एरियर के भुगतान और वरिष्ठ चालकों के पद सृजित करने की मांग कर रहे हैं। वरिष्ठ चालकों के पद सृजन की मांग को एचआरटीसी की निदेशक मंडल बैठक में भी पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। जाहिर है कि एचआरटीसी चालकों की हड़ताल से प्रदेशभर में आम आदमी को आवाजाही में कठिनाईयां झेलनी पड़ेगी क्योंकि प्रदेश में आवाजाही का एकमात्र साधन सड़कें ही है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में इससे लोगों को कठिनाईया झेलनी पड़ेगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला प्रदेश के स्कूलों में प्री-प्राइमरी में भर्ती को लेकर चल रही देरी पर प्रशिक्षत अध्यापिका संघ ने नाराजगी जताई है। लम्बे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रही एन.टी.टी. अध्यापिकाओं ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोप लग रहे है कि नर्सरी टीचर की भर्तियां न करने के लिए सरकार अलग-अलग बहाने ढूंढ रही है। प्री प्राइमरी स्कूलों में भर्ती न होने से ये अध्यापिकाएं काफी परेशान है। हिमाचल में राज्य सरकार ने 4000 से ज्यादा स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इनमें 700 स्कूल और जोड़े जा रहे हैं। अब तक 55,000 बच्चों का एनरोलमेंट यहां हो चुका है, लेकिन इन्हें संभालने और पढ़ाने के लिए टीचर की भर्ती अब तक नहीं हो पाई है। वर्तमान में सरकार ने जेबीटी को ही ये काम दे रखा है। प्री नर्सरी कक्षाएं अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा हैं, इसके बावजूद अब तक शिक्षकों की भर्ती के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए है। इसके लिए समग्र शिक्षा अभियान ने बजट भी दे रखा है, लेकिन भर्ती नीति फाइनल नहीं हो पा रही। एन.टी.टी. अध्यापिकाएं इस देरी से काफी परेशान है और सरकार से खफा भी। एन.टी.टी. प्रशिक्षित अध्यापिका महासंघ का कहना है कि पूरे भारत में प्री-प्राइमरी कक्षाएं सरकारी स्कूलों में चलाई जा रही हैं और हिमाचल प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में भी प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू की गई हैं, पर हिमाचल में अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही। उनका कहना है कि एनरोलमेंट नंबर की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों की नियुक्ति करने में सरकार रूचि नहीं दिखा रही। महासंघ का कहना है की पूरे प्रदेश में 15000 से ज्यादा नर्सरी ट्रेंड टीचर पिछले 23 वर्षों से रोजगार की राह ताक रहे हैं, परंतु सरकार इनकी कोई सुध नहीं ले रही। एनटीटी प्रशिक्षित महासंघ की महासचिव कल्पना शर्मा का कहना है कि इन महिलाओं ने नर्सरी अध्यापिका का प्रशिक्षण यह सोचकर प्राप्त किया था कि भविष्य में उन्हें रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इनमें से अधिकतर महिला गरीब परिवार से संबंधित है और कुछ महिलाएं विधवा है। सभी महिलाओं ने मिलकर बार-बार हिमाचल सरकार से रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए आग्रह किया हैं, लेकिन प्रदेश सरकार सुध लेने को तैयार नहीं। यहां 1997 के बाद इन नर्सरी ट्रेन्ड टीचर्स की कोई भर्ती आज तक नहीं की गई है। ये है एन.टी.टी. की मुख्य मांगे : - प्री प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं को नियुक्त किया जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं की नियुक्ति आरएंडपी रूल्स बनाकर की जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं की नियुक्ति नियमित आधार पर की जाए। - आयु सीमा में छूट दी जाए। - योग्यता प्लस टू पास हो व नर्सरी का विशेष प्रमाण पत्र रखा जाए। - वार्ड ऑफ़ एक्स सर्विस मैन का कोटा दिया जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिकाओं की नियुक्ति बैच वाइज की जाए। - उच्च शिक्षा प्राप्त प्रार्थी को शिक्षा योग्यता के अनुसार प्राथमिकता दी जाए। - प्रशिक्षित नर्सरी अध्यापिका की नियुक्ति बिना किसी शर्त के की जाए।
अरविन्द शर्मा। फर्स्ट वर्डिक्ट ज्वाली विधानसभा हलके में भाजपा के टिकट के लिए दो सशक्त दावेदार मैदान में है। एक फूल और दो माली वाली ये स्थिति भाजपा की चिंता बढ़ाती दिख रही है। 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में चुनाव न लड़ने वाले संजय गुलेरिया तब से न सिर्फ भाजपा संगठन में बने हुए है, बल्कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने ख़ुद को इस विधानसभा क्षेत्र में और मज़बूत किया है। जबकि अर्जुन ठाकुर विधायक तो है पर अपने कामकाज से कोई विशिष्ट पहचान स्थापित करते नहीं दिखते। मौजूदा दौर में जो राजनीतिक माहौल बनता दिख रहा है और जिस तरह के सियासी एक्सपेरिमेंट सत्ता प्राप्ति के लिए भाजपा द्वारा किए जा रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं कि एंटी इनकम्बेंसी वाले क्षेत्रों में पार्टी चेहरे बदलने से गुरेज न करे। हालांकि ज्वाली में अर्जुन ठाकुर के लिए यह कार्यकाल एक सुनहरा मौका था, लेकिन अर्जुन के तीर इस विधानसभा क्षेत्र में गढ़ी संजय की नज़रों को नहीं भेद पाए है। ज्वाली में भाजपा के दो गुटों का विभाजन इस तरह से किया जा सकता है, एक देहर के इस पार नगरोटा सूरियां -हरसर -घाड़ जरोट वाला इलाका जो कि संजय गुलेरिया का गुट है। इक्का -दुक्का लोगों को छोड़ दें तो ज़्यादातर यहाँ संजय समर्थक हैं। दूसरा देहर के उस पार ज्वाली -गुगलाड़ा वाला इलाका जिसमें ज्यादातर अर्जुन समर्थक हैं। पिछले चुनाव में अर्जुन का साथ देने वाले संजय गुलेरिया से उनकी दूरियों के मुख्य कारणों पर नज़र दौड़ाएँ तो सबसे बड़ी वजह गुलेरिया समर्थकों की उपेक्षा है। गुलेरिया समर्थकों का आरोप है कि अर्जुन ठाकुर पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं को जो कि हरबंस राणा के समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं, उनको पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाते। बुलाना तो दूर की बात अर्जुन उनको प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। उनका ये भी आरोप है कि अर्जुन ने भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं को नज़र अन्दाज़ कर अपने इर्द -गिर्द उन ठेकेदारों की फ़ौज जमा कर रखी है जिन्होंने पिछले साढ़े चार सालों में करोड़ों रुपए कमाए हैं। ये स्थिति निसंदेह भाजपा के लिए बेहतर नहीं हैं। अब बात करते हैं ग्राउंड रियलिटी की। ज्वाली में कई ऐसे मुद्दे है जो अर्जुन के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी का सूत्रधार बन सकते है। मसलन पिछले साढ़े चार साल से नगरोटा सूरियां कालेज में प्रिंसिपल की ख़ाली पड़ी पोस्ट, चार महीने पहले सीएम द्वारा नगरोटा को उप तहसील का दर्जा दिए जाने की घोषणा के बाद वहाँ तहसीलदार को ना ला पाना, पिछले साढ़े चार सालों से नगरोटा सूरियां में बीएमओ की ख़ाली पोस्ट, नगरोटा -देहरा चौक के पास सात वर्ष पूर्व शुरू किए गए टूरिज्म सेंटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर भी उद्घाटन नहीं कर पाना, अर्जुन खब्बल में टूरिज्म के तैयार हट्स का उद्घाटन नहीं करवा पाना ( फलस्वरूप उनको वाइल्ड लाइफ़ वालों को देना पड़ा लेकिन फिर भी क्रियान्वित नहीं हो पाए), लम्बे अरसे से गज खड्ड पर प्रस्तावित जरोट -नगरोटा सूरियाँ पुल के लिए शिलान्यास का एक भी पत्थर तक न लगवा पाना इत्यादि। इन मुद्दों को लेकर न केवल विपक्ष हमलावर है बल्कि भाजपा के अंदर से भी आवाज उठ रही है। पिछले लम्बे समय से संजय गुलेरिया की ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में निरंतर सक्रियता उनकी हर हाल में चुनावी मैदान में उतरने की मंशा को स्पष्ट ही नहीं करती बल्कि अर्जुन ठाकुर को भाजपा टिकट पाने की राह को और भी मुश्किल कर सकती है। इस बार ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के परिणाम तो ख़ैर भविष्य के गर्भ में छिपे हैं लेकिन फ़िलवक्त दो -दो प्रत्याशियों के चलते ज्वाली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की राह जरूर मुश्किल हो सकती है। पहले गुलेर अब ज्वाली, चौधरी चंद्र कुमार का रहा दबदबा : ज्वाली विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया। ये निर्वाचन क्षेत्र अनारक्षित है। इससे पहले फतेहपुर और ज्वाली दोनों एक हुआ करते थे। फ़तेहपुर को ज्वाली से अलग किया गया और पहले का गुलेर विधानसभा क्षेत्र अब ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। ज्वाली ( पहले गुलेर ) परंपरागत रूप से कांग्रेस के दबदबे वाली सीट रही है। हरबंस राणा ने यहां बीजेपी से तीन बार सफलता हासिल की है। इसके अलावा यहाँ ज़्यादातर चौधरी चंद्र कुमार ही जीतते आए हैं। परिसीमन के बाद पहली बार 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में चौधरी चंद्र कुमार के पुत्र नीरज भारती ने जीत दर्ज की। इससे पहले नीरज भारती 2007 में भी विधायक चुने गए थे। अगर पिछले चुनाव यानी 2017 की बात की जाए तो यहाँ भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। गुलेरिया के साथ आने से चंद्र कुमार का गढ़ भेद पाएं थे अर्जुन : 2017 के हुए चुनाव में भाजपा के अर्जुन ठाकुर ने चंद्र कुमार को 8213 वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। तब अर्जुन ठाकुर को कुल 36,999 मत मिले जबकि चौधरी चंद्र कुमार ने 28,786 वोट हासिल किए थे। 2017 के परिणामों का विश्लेषण करें तो अर्जुन ठाकुर की जीत का मुख्य कारण संजय गुलेरिया का उनके पक्ष में आना था। ज्वाली विधानसभा क्षेत्र तथा भाजपा में अपनी ख़ूब पैठ रखने वाले संजय गुलेरिया गज़ पार यानी नगरोटा सूरियाँ से ताल्लुक रखते हैं। पिछली बार अगर संजय गुलेरिया बतौर आजाद प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में उतरे होते तो भाजपा की इस सीट पर हार तय मानी जा रही थी, लेकिन भाजपा संगठन संजय गुलेरिया को मनाने में कामयाब रहा।
2017 के विधानसभा चुनाव नतीजों में भाजपा का आंकड़ा 44 पहुंच गया था, पर जीते हुए उम्मीदवारों की सूची में खुद तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती का नाम नदारद था। ऊना सदर की जनता ने सत्ती की उम्मीद पर पानी फेर दिया और पांच साल के लिए सियासी जायदाद कांग्रेस के सतपाल रायजादा के नाम कर दी। लगातार तीन चुनाव जीतने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती का चुनाव हार जाना तब बड़ा घटनाक्रम था। दरअसल, भाजपा के सीएम उम्मीदवार प्रो प्रेम कुमार धूमल भी चुनाव हार चुके थे और जाहिर है अगर सत्ती चुनाव जीते होते तो सीएम पद की दौड़ में उनका नाम भी शामिल होता। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उनका दावा निसंदेह मजबूत रहने वाला था, मगर ऐसा हो न सका। अब इस वर्ष के अंत में फिर विधानसभा चुनाव होने है और एक बार फिर भाजपा के सतपाल का मुकाबला कांग्रेस के सतपाल से होना तय माना जा रहा है। यूँ तो दोनों तरफ टिकट के अन्य दावेदार भी है लेकिन फिलवक्त ऐसा कोई नहीं दिखता जो टिकेट की दौड़ में इन दोनों दिग्गजों को पछाड़ सके। ऊना के बढ़ते तापमान के साथ -साथ सियासी ताप भी प्रखर है और दोनों ही मुख्य उम्मीदवार अभी से दमखम सहित मैदान में टिके है। ऊना के सियासी अतीत की बात करें तो ऊना भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। भाजपा के गठन के बाद 1982 में हुए पहले ही विधानसभा चुनाव में ऊना में पार्टी का खाता खुल गया था। 1977 में जनता दाल के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले देशराज 1982 में भाजपा के उम्मीदवार थे और दोबारा जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। 1985 में कांग्रेस के वीरेंद्र गौतम ने ये सीट पार्टी की झोली में डाली लेकिन 1990 फिर एक बार भाजपा के देशराज यहाँ से विधायक बने। इसके बाद 1993 में कांग्रेस के ओपी रतन और 1998 में फिर कांग्रेस के वीरेंदर गौतम ने यहाँ से जीत दर्ज की। पर 2003 में भाजपा ने सतपाल सिंह सत्ती को मैदान में उतारा और सत्ती ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2007 और 2012 में भी सत्ती ही जीते। पर 2017 में जनता का साती से कुछ मोहभंग हुआ और कांग्रेस को जीत मिली। पर हार के बावजूद सत्ती निरंतर सक्रिय है और संभवतः इस बार भी पार्टी प्रत्याशी होंगे। तीसरी बार आमने -सामने हो सकते है सत्ती और रायजादा : ऊना में पिछले दो मुकाबले सतपाल रायजा और सतपाल सत्ती के बीच हुए है। 2012 में सतपाल सत्ती करीब 4700 वोट से जीते तो 2017 में सतपाल रायजादा करीब तीन हज़ार वोट से जीते। रायजादा कांग्रेस के सीएम पड़ा के प्रबल दावेदार सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाते है। बतौर विधायक उनका कामकाज ठीक ठाक है लेकिन सतपाल सिंह सत्ती की जमीनी पकड़ पर भी कोई संशय नहीं है। ये तय है कि इस बार भी यहाँ कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। ऊना में आम आदमी पार्टी पर भी नज़र रहने वाली है। ये क्षेत्र पंजाब से लगता हुआ है जहाँ आप की सरकार है। ऐसे में आप यहाँ कैसा करती है और किसके समीकरण बनाती -बिगाड़ती है , ये देखना भी रोचक होगा ।
कांग्रेस, कहीं नहीं जाऊंगा छोड़ कर - कहा पार्टी में पुराने लोगों को तवज्जो दिए जाने की जरूरत पंकज सिंगटा। धर्मशाला जिला कांगड़ा के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र से पूर्व में विधायक रहे और पूर्व में सीपीएस रहे नीरज भारती का विवादों से पुराना नाता रहा है। अपनी बेबाकी के चलते नीरज भारती अक्सर चर्चा में रहते है। नीरज भारती के बोल विपक्ष को तो चुभते ही है, लेकिन कई बार अपनी पार्टी को भी कठघरे में ला खड़ा करते है। पर नीरज भारती ताल ठोक कर कहते है कि कांग्रेस उनके खून में है। इस पर भी कोई सवाल नहीं है कि नीरज भारती के समर्थकों की खासी तादाद है। आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका, पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के साथ उनकी तल्खियां और कांग्रेस की वर्तमान स्थिति जैसे कई विषयों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने नीरज भारती से खास चर्चा की। पेश है इस चर्चा के मुख्य अंश .... सवाल : हो सकता है आप इस सवाल से ऊब गए हो परन्तु हम सर्व प्रथम ये ही जानना चाहते है कि आपके सुधीर शर्मा के साथ क्या मतभेद है ? जवाब : इस सवाल से मैं तो नहीं ऊबा हूँ लेकिन हो सकता है जो लोग मुझे सुनते है, वो इस बात से ऊब गए हो, लेकिन आपने यह सवाल किया है तो मैं जरूर जवाब दूंगा। ऐसी कोई गंभीर घटना नहीं थी, लेकिन छोटा मोटा मन मुटाव है और वह आगे भी रहेगा, क्योंकि मुझसे धोखेबाज़ी बर्दाश्त नहीं होती है। मैं यारी दोस्ती में जान देने और लेने के लिए भी तैयार हूँ। ऐसी ही धोखेबाज़ी धर्मशाला के पूर्व विधायक सुधीर शर्मा ने भी की थी। मैं फेसबुक पर बहुत सारी ऐसी चीजें लिखता रहता हूँ जो मुझे पसंद नहीं आती क्योंकि फेसबुक खुद ही पूछता है कि " व्हाट्स ऑन योर माइंड"। तो मैं लिख देता हूँ। उस समय जब धर्मशाला में यह घटना हुई थी उसका कारण यह था कि मैंने सुधीर के लिए कुछ लिखा था, लेकिन उनके जो समर्थक थे उन्हें वह बात पसंद नहीं आई। इस वजह से उनके साथ थोड़ा मन मुटाव हो गया था। उन लोगों से मेरी कोई निजी दुश्मनी नहीं है, सुधीर शर्मा से है और वह आगे भी जारी रहेगी। सवाल : आपने कहा कि सुधीर शर्मा ने धोखेबाज़ी की है, धर्मशाला में जो भी घटना हुई वह सबके सामने है। उस घटना से आपके निजी मतभेद सबके सामने आए। कांग्रेस में एक डिसीप्लेनेरी कमेटी बनाई गयी है, क्या इस घटना के बारे में वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई? जवाब : इस घटना में पार्टी के खिलाफ कोई भी बात नहीं हुई है। यह मेरा और सुधीर का निजी मामला है, हालाँकि वह कुछ नहीं बोलता क्योंकि उसे मंद मंद मुस्कुराने की आदत है। वह दूसरों के कन्धों पर बन्दुक रख कर चलाने वाला इंसान है, लेकिन मैं खुद सामने खड़ा होता हूँ। मेरे साथ कोई गलत करेगा तो मैं उससे खुद निपटना जानता हूँ। पार्टी में डिसीप्लेनेरी कमेटी है लेकिन वह तभी बोलती है, यदि हम पार्टी के खिलाफ कुछ बोलेंगे या पार्टी के खिलाफ कुछ गलत करें। सुधीर के साथ मेरी जो निजी रंजिश है वह तो रहेगी ही, फिर चाहे पार्टी मुझे स्वीकार करे या न करे। सवाल : आगामी चुनावों की बात करे तो यह बातें निकल कर आ रही है कि आपके पिता चौधरी चंद्र कुमार ज्वाली से चुनाव लड़ने वाले है, आप नहीं। यदि आपके पिता चुनाव लड़ते है तो आपने अपने लिए किस तरह की भूमिका तय की है? जवाब : ज्वाली, चौधरी चंद्र कुमार की कर्म भूमि रही है। पिछले दो चुनावों से ही हमें ज्वाली नाम सुनने को मिल रहा है, उससे पहले इस विधानसभा क्षेत्र का नाम गुलेर हुआ करता था। चौधरी चंद्र कुमार ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत इसी क्षेत्र से की है। हालांकि मैंने वहां से 3 चुनाव लड़े है। जब चौधरी चंद्र कुमार जी ने शांता कुमार को हराकर लोकसभा चुनाव जीता, उस समय 2004 में उपचुनाव हुआ। मैंने वह चुनाव लड़ा था लेकिन उस समय मैं जीत नहीं पाया था। इसके बाद 2007 में पार्टी ने मुझ पर विश्वास जताया और मुझे फिर से टिकट दिया और मैं वहां से चुनाव जीत गया। 2012 में एक बार फिर मुझे चुनाव लड़ने का मौका मिला और स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की सरकार बनी और मुझे मुख्य संसदीय सचिव के रूप में कार्य करने का मौका मिला और मुझे शिक्षा विभाग में जिम्मेवारी सौंपी गयी थी। मैंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए कई कार्य किये थे। अपने क्षेत्र के स्कूलों के विकास के लिए मैंने कई कार्य किये थे। जहाँ तक बात है 2017 के विधानसभा चुनावों की, तो मेरी ख्वाईश थी की मेरे पिता यहाँ से चुनाव लड़े और जीते और उसके बाद रिटायरमेंट ले ले, लेकिन 2017 का चुनाव हम नहीं जीत पाए। ज्वाली मेरे पिता की कर्मभूमि है और मैं चाहता हूँ कि वह यहाँ से विधायक बने और उसके बाद वह रिटायरमेंट ले। सवाल : हाल ही में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ है। नए अध्यक्ष नियुक्त किए गए है और चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए है। ऐसे में यदि इस बार कांग्रेस की सरकार बन कर आती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा। इस बारे में आप अपनी निजी राय क्या रखते है ? जवाब : मुख्यमंत्री बनने के लिए सबसे पहले तो अपनी अपनी सीटें जितनी पड़ेगी और सरकार बनानी पड़ेगी। अगर आप अपनी सीटें जीत भी जाते हैं और दूसरों को हराने की कोशिश करते हैं और सरकार नहीं बना पाते हैं तो मुख्यमंत्री बनने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के जाने के बाद कांग्रेस पार्टी में एक बड़ा रिक्त स्थान आ गया है और उनके जैसा नेता हिमाचल को मिलना बहुत ही मुश्किल है। सभी लोग कोशिश कर रहे है कि वह मुख्यमंत्री बने और सरकार बनाएं, लेकिन सबसे पहली बात यह है कि यदि जीतेंगे तभी सरकार बना पाएंगे। सबसे पहले अपनी सीटें जितनी होगी और उसके साथ साथ दूसरों की सीटें जितवानी होगी, तभी सरकार बनाएंगे। फिलहाल नाम तो मैं नहीं ले सकता क्योंकि जितने भी लोग इस दौड़ में है, सभी माननीय सम्मानीय है और सभी लोग योग्य भी है, लेकिन इसके बारे में आने वाला वक्त ही फैसला करेगा। सवाल : कांग्रेस को एक छोटे से राज्य में 4 कार्यकारी अध्यक्ष बनाने पड़े है। कांगड़ा जिला से भी पवन काजल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। आपको क्या लगता है कि यह फार्मूला कितना सही साबित हो सकता है ? जवाब : ऐसा फार्मूला तब बनाया जाता है जब कोई भाग रहा हो और उस पर बेड़ियाँ डालनी हो। ऐसी किसी पोस्ट से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि आखिर में फैसले तो अध्यक्ष ही करता है। आज कल तो वैसे भी पार्टियों को छोड़ने का रिवाज़ सा ही चल पड़ा है। इतने लोग कपड़े नहीं बदलते है जितनी लोग आज कल पार्टियां बदल रहे है। मैं बस यही कहना चाहूंगा कि जिन्हें भी पार्टी द्वारा कार्यकारी अध्यक्ष या अन्य जिम्मेवारियां दी गयी है, वह इसे अच्छे से निभाएं और अच्छा कार्य करें। मैं बस आलाकमान से एक आग्रह करना चाहूंगा कि पुराने लोगो को नज़रअंदाज़ न किया जाएं और उनके साथ विश्वासघात न किया जाएं। पुराने लोगों ने अपनी पूरी जवानी, अपनी पूरी उम्र पार्टी को बनाने में लगाई है और पार्टी के साथ स्तम्भ की तरह खड़े रहे है। आप पंजाब का ही हाल देख लीजिए, सुनील जाखड़ बीते दिनों पार्टी छोड़ कर चले गए और अब वह भाजपा में शामिल हो गए है। इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह पार्टी छोड़ गए है और इनके जैसे कई नेता पार्टी को छोड़ कर जा चुके है। मैं बस चाहता हूँ कि पुराने लोगों को नज़रअंदाज़ न किया जाए और उन्हें तवज्जो दी जाए। पुराने लोगों ने ही पार्टी के लिए कार्य किया है और पार्टी के लिए हमेशा आगे खड़े रहे है। सवाल : क्या आप मानते है कि चूक वहां हो रही है जहाँ पुराने लोगों को मौका नहीं दिया जा रहा है ? जवाब : बिल्कुल मैं यह बात मानता हूं क्योंकि पुराने लोग पार्टी के स्तंभ है। पुराने लोग पार्टी को इतना आगे लेकर आए है। हालांकि यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उन लोगों को भी पार्टी की वजह से ही सम्मान मिला है, लेकिन पार्टी भी उन्हीं लोगों की वजह से मजबूत हुई है। मैं कुछ दिन पहले सुन रहा था, राहुल गांधी बोल रहे थे कि हम अपनी विचारधारा की लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन विचारधारा की लड़ाई तो आप तब लड़ेंगे जब आपके पास अपनी विचारधारा रहेगी। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा भाजपा, जनसंघ और आरएसएस से बिल्कुल अलग है। वह लोग कट्टरपंथी है लेकिन कांग्रेस सब को एक साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। लेकिन भाजपा, आरएसएस और जनसंघ के कट्टरपंथी लोग पार्टी में आएंगे तो विचारधारा को कैसे बचाएंगे। पार्टी में पुराने लोगों को पूछे बिना पार्टी के अंदर फैसले लिए जाएंगे, और ऐसे लोगों की बातों पर फैसले लिए जाएंगे जो आज यहाँ है और कल वहां है तो विचारधारा कैसे बचेगी। सवाल : आरोप लगाने के बावजूद भी आप कांग्रेस पार्टी में टिके है, ऐसा क्या लगाव है पार्टी के साथ ? जवाब : मेरे तो खून में कांग्रेस पार्टी है। मेरे पिताजी कांग्रेस विचारधारा, गांधीवादी विचारधारा के आदमी है। उस समय इस विधानसभा क्षेत्र का नाम गुलेर हुआ करता था और उस वक्त दूर-दूर के इलाकों के विधायक बनते थे। भाजपा के हो या कांग्रेस के हो ज्वाली से कोई भी विधायक नहीं बनता था। मेरे पिता सरकारी नौकरी में थे और हमारे इलाके की नज़रअंदाजगी को लेकर उन्होंने सरकारी नौकरी का त्याग कर दिया। वह कांग्रेस विचारधारा के थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 1977 में पहला चुनाव बतौर आजाद उम्मीदवार लड़ा और वह बहुत ही कम अंतर से चुनाव हार गए। इसके बाद जनता पार्टी के लोगों ने मेरे पिता को पार्टी में शामिल होने और टिकट देने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने जनता दल का टिकट लेने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि मैं एक बार कांग्रेस पार्टी के टिकट के लिए फिर से कोशिश करूंगा यदि मुझे टिकट मिलती है तो मैं चुनाव लडूंगा, और यदि नहीं मिलती है तो मैं चुनाव नहीं लडूंगा। नौकरी से इस्तीफा देने के बाद वे शिमला के मशहूर कॉलेज सेंड बीट्स में बतौर जियोग्राफी के प्रोफेसर के रूप में नौकरी करने लगे। इसके बाद 1982 में उन्हें कांग्रेस का टिकट मिला और उन्होंने चुनाव लड़ा। तब से लेकर मेरे पिता कांग्रेस में है। मेरे खून में कांग्रेस है, हमने कांग्रेस पार्टी ही देखी है। यदि कांग्रेस पार्टी नज़रअंदाज़ करेगी तो, मैं भाजपा में या कहीं और नहीं जा सकता। मैं अपना विरोध दर्ज करता रहूंगा लेकिन कांग्रेस छोड़ किसी और पार्टी में नहीं जाऊंगा। अगर ज्यादा नज़रअंदाज किया जाता है तो पहला चुनाव भी पिता जी ने बतौर आज़ाद उमीदवार लड़ा था और अगला भी ऐसे ही लड़ लेंगे, लेकिन भाजपा या आम आदमी पार्टी में जाने का कोई मतलब नहीं बनता है। आम आदमी पार्टी ने तो वैसे भी ड्रामा बना के रखा है। उनसे दिल्ली अभी संभाली नहीं जा रही है |
मानव भारती विश्वविद्यालय की ओर से बेची गई फर्जी डिग्रियों का जाल देश के कई राज्यों में फैला है। अब तक करीब चालीस हज़ार से अधिक फर्जी डिग्रियां भी बरामद की गई हैं। मानव भारती विश्वविद्यालय वर्ष 2010 से इस फर्जीवाड़े को चला रहा था, पर सवाल ये उठता है की आखिर इतने वर्षों में निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग क्या करता रहा। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है और अब इस जांच की जद में निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग के कर्मचारियों और अधिकारीयों का आना भी तय माना जा रहा है।


















































