आहिस्ता - आहिस्ता ही सही लेकिन उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से लग रही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर अब लगभग विराम लग चूका है और ये भी तय है की पार्टी जयराम ठाकुर के चेहरे पर ही अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी। बताया जा रहा है कि बीते दिनों दिल्ली में हुई भाजपा हाईकमान की बैठक में इस बात पर मुहर लग चुकी है, हालांकि इस संदर्भ में अब तक पार्टी ने औपचारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। जाहिर है अब जयराम समर्थक बाग-बाग है और उम्मीद लगाए बैठे अन्य नेताओं के समर्थकों के अरमानों पर पानी फिर चूका है। खैर ये सियासत है, यहां उतार चढ़ाव होते रहते है, अब असल सवाल ये है की जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा के लिए मिशन रिपीट की राह आसान होगी या कठिन। यहाँ ये जहन में रखना भी जरूरी है कि जयराम न सिर्फ सरकार का चेहरा है बल्कि भाजपा प्रदेश संगठन में भी फिलवक्त जयराम ठाकुर का असर दिख रहा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बेशक सुरेश कश्यप हो लेकिन जानकार मानते है कि संगठन के बड़े निर्णयों में जयराम ठाकुर का ही प्रभाव है। अब इसे लेकर माहिर बंटे हुए है, कुछ इसे पार्टी की ताकत मानते है तो कई का मानना है कि पार्टी को इसका नुक्सान होगा। यहाँ गौर करने वाली बात ये भी है कि सुरेश कश्यप की ताजपोशी के बाद जमीनी स्तर पर पार्टी संगठन में कोई व्यापक बदलाव नहीं हुआ है। यानि संगठन में अधिकांश वे ही लोग है जिनकी नियुक्ति पूर्व अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल के समय हुई थी। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि जो संगठन भाजपा की ताकत माना जाता है वो उपचुनाव में कुछ हद तक कमजोर दिखा था। अब इसके अपने सियासी मायने है और सबका अपना -अपना विश्लेषण। कयास लगते रहे, पर नहीं बदला संगठन : उपचुनाव में मिली शिकस्त के बाद ये कयास भी लग रहे थे कि संभवतः पार्टी संगठन में व्यापक बदलाव करें, पर ऐसा हुआ नहीं। पार्टी वर्तमान संगठन के साथ ही विधानसभा चुनाव के रण में उतरती है या इसे धार देने के लिए आवश्यक बदलाव होते है, ये देखना रोचक होगा। विशेषकर कई जिलों में पार्टी संगठन को पैना किये जाने की जरूरत है। मजबूत संगठन और नेतृत्व सुनिश्चित कर पार्टी कुछ हद तक अंतर्कलह और असंतोष को भी साधने में कामयाब हो सकती है। पर असल सवाल ये ही है कि क्या पार्टी के रणनीतिकार भी ऐसा सोचते है। पहला इम्तिहान शिमला नगर निगम चुनाव : ये जहन में रखना भी जरूरी है कि विधानसभा चुनाव से पहले जयराम ठाकुर के सामने एक बड़ा इम्तिहान और है, ये है शिमला नगर निगम चुनाव। यदि नगर निगम चुनाव में पार्टी बेहतर नहीं कर पाती है तो स्वाभाविक है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की स्थिति भी असहज हो सकती है। ऐसे में मुमकिन है कि नेतृत्व परिवर्तन का जिन्न फिर बाहर आ जाएं।
प्रदेश कांग्रेस के संगठन में हुए बदलाव के बाद भाजपा को एक बार फिर परिवारवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने का मौका मिल गया है। प्रतिभा सिंह की ताजपोशी के बाद से भाजपाई नेता लगातार वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला बोल रहे है। उधर कांग्रेसी भी ये याद दिलाने से नहीं चूक रहे कि जिन अनुराग ठाकुर को भाजपा का एक तबका भावी सीएम करार देने में जुटा है, वो भी उन्हीं के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र है। बहरहाल चुनावी बेला में आरोप - प्रत्यारोप का दौर जारी है। पर हिमाचल कि सियासत पर नज़र डाले तो वंशवाद और परिवारवाद नई बात नहीं है। चाहे वीरभद्र परिवार हाे, धूमल परिवार या अन्य कई नेता, राजनीतिक विरासत संभालने के लिए उनका परिवार हमेशा तैयार दिखा है। छ बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के निधन के बाद उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के हाथ में अब कांग्रेस की कमान है। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में वीरभद्र सिंह के साथ उनके पुत्र विक्रमदित्य भी चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसी तरह से धूमल परिवार में भी ऐसी ही स्थिति है। 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार पराजित हुए जिसके बाद धूमल परिवार की सियासी धाक कुछ कम हुई। मगर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने विरासत की सियासत काे ज़िंदा भी रखा और सियासी रसूख भी बढ़ाया। 2019 के आम चुनाव के बाद अनुराग केंद्रीय मंत्री हो चुके है। कांग्रेस के अन्य नेताओं की बात करें तो हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पूर्व स्पीकर बीबीएल बुटेल पिछले चुनाव से ही रिटायर हो गए और उनके बेटे आशीष बुटेल ने माेर्चा संभाल लिया। फतेहपुर उपचुनाव में पूर्व विधायक स्व सुजान सिंह पठानिया के पुत्र भवानी पठानिया जीतकर विधानसभा पहुंचे। वहीँ जुब्बल कोटखाई से पूर्व मुख्यमंत्री ठाकुर रामलाल के पौत्र रोहित ठाकुर तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंचे। पूर्व सांसद चंद्र कुमार के बेटे एवं पूर्व सीपीएस नीरज भारती भी 2012 में विधायक बने, हालांकि उन्हें 2017 में हार मिली। सुधीर शर्मा, जगत सिंह नेगी, अजय महाजन समेत कई ऐसे नेता हैं जाे सक्रीय राजनीति कर रहे हैं और अपने बुजुर्गों की राजनैतिक विरासत को संभाले हुए है। भाजपा में भी लिस्ट कम नहीं है। स्व कुंजलाल ठाकुर के पुत्र गाेविंद सिंह ठाकुर वर्तमान में मंत्री है। मंडी विधायक अनिल शर्मा भी पिछला चुनाव भाजपा के टिकट पर जीते थे। मंत्री महेंद्र सिंह की बेटी वंदना गुलेरिया जिला परिषद् सदस्य है और अब मंत्री के बेटे भी राजनीती में सक्रीय है। इसी तरह नरेंद्र ठाकुर भी परिवार की राजनैतिक विरासत को ही संभाल रहे है। क्या स्टैंड पर कायम रहेगी भाजपा : जुब्बल कोटखाई उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व विधायक स्व नरेंद्र बरागटा के पुत्र चेतन बरागटा को टिकट नहीं दिया और इसका कारण परिवारवाद बताया गया। पर सवाल ये है कि क्या भाजपा अपने स्टैंड पर कायम रहेगी। जानकार ऐसा नहीं मानते। मुमकिन है कि जल्द भाजपा में चेतन की एंट्री भी हो और अगली बार उन्हें टिकट भी मिले। ऐसे कई नेता भी है जिन पर परिवारवाद का टैग है और जो टिकट के दावेदार है। कोई नेता पुत्र है तो कोई पूर्व सांसद का भाई।
मंडी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला विधानसभा क्षेत्र सुंदरनगर सियासी तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, इस सीट पर राजपूत वोटरों का दबदबा होने के चलते विधायक भी राजपूत ही रहे है। इस सीट पर हर पांच साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है, इस बात की तस्दीक करते है 1998 से लेकर 2017 के विधानसभा चुनाव। भाजपा ने 1982 से 2007 तक रूप सिंह पर ही विश्वास जताया है। पहली बार उन्हें 1982 में टिकट मिला और वो लगातार 1990 तक विधायक बने। 1993 के चुनाव में कांग्रेस से शेर सिंह और भाजपा से रूप सिंह मैदान में थे और उस दौरान 5537 वोट के अंतर् से शेर सिंह ने रूप सिंह को हराया और 23 साल सियासी तौर पर दंडक वन में गुज़ारने के बाद कांग्रेस की सत्ता वापसी हुई। 1998 के चुनाव में भाजपा से फिर रूप सिंह ठाकुर को टिकट मिला जबकि कांग्रेस से शेर सिंह चुनावी मैदान में थे और रूप सिंह ने 769 वोट के अंतर से जीत हासिल की। 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने टिकट बदला और कांग्रेस ने सोहन लाल को प्रत्याशी बनाया जो कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता भी थे और कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव भी रहे और भाजपा ने फिर रूप सिंह को टिकट दिया और करीब 4638 के अंतर् से रूप सिंह हार गए। इसी तरह 2007 में रूप सिंह ने सोहन लाल को हराया। 2012 के चुनाव में भी सत्ता परिवर्तन हुआ और तब सोहन लाल जीते लेकिन उस दौरान भाजपा में काफी हलचल हुई। हमेशा की तरह भाजपा से रुप सिंह को टिकट मिलने के कयास लग रहे थे और टिकट की दौड़ में भाजपा के एक और नेता राकेश जम्वाल शामिल थे। उस चुनाव में भाजपा ने चेहरा बदला और राकेश जम्वाल को सुंदरनगर विधानसभा सीट से भाजपा का प्रत्याशी बनाया। तब रूप सिंह ने बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा। 2012 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अंतरकलह के कारण सुंदरनगर विधानसभा क्षेत्र में सोहन लाल ठाकुर बीजेपी को पीछे छोड़ने में सफल रहे। 2012 के चुनाव में सोहन लाल ठाकुर ने 8990 मतों से बड़ी जीत दर्ज की। 2012 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रुप सिंह ठाकुर दूसरे नंबर पर रहे जो इस विधानसभा को जीतने में सबसे ज्यादा बार सफल रहे थे। वह बीजेपी से टिकट न मिलने के कारण निर्दलीय चुनाव लड़े और बीजेपी प्रत्याशी राकेश जम्वाल को तीसरे नंबर पर करने में सफल रहे। बीजेपी में बगावत होने पर इसका सीधा फायदा कांग्रेस प्रत्याशी सोहन लाल ठाकुर को मिला। 2017 के चुनाव में भाजपा से राकेश जम्वाल जीते और सोहन लाल को करीब 9263 वोट से पराजित किया। सियासी माहिरों का मानना है कि इस बार के चुनाव में भी 2012 के चुनाव की तरह समीकरण बन सकते है। वर्तमान स्थिति को देखे तो पूर्व मंत्री रूप सिंह के बेटे अभिषेक ठाकुर भी चुनावी ताल ठोकते नज़र आ रहे हैं। मौजूदा दौर में भाजपा सरकार के प्रति एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर के साथ -साथ पंजाब जीत कर हिमाचल में राजनैतिक उलट-फेर करती नज़र आ रही आम आदमी पार्टी के चलते सुंदरनगर में भी रूप सिंह ठाकुर के राजनैतिक वारिस अभिषेक ठाकुर के पास भाजपा के सियासी आँकड़े बिगाड़ने का पुनः खुला मौक़ा है चाहे वो आम आदमी पार्टी से चुनावी मैदान में उतरे या आज़ाद लेकिन सीधे तौर पर यहाँ फिलहाल घाटे में भाजपा ही नज़र आ रही है।
पिछले चार सालो से लटकी जेबीटी भर्ती को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सशर्त मंजूरी दे दी है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने राज्य सरकार के इस आवेदन को स्वीकारते हुए कहा कि राज्य सरकार जेबीटी के पदों को एनसीटीई की ओर से जारी 28 जून 2018 की अधिसूचना के अनुसार ही भरे। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनर्विचार याचिका और सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय पर ही जेबीटी भर्ती निर्भर करेगी। राज्य के महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट से इस मामले पर दोबारा विचार करने और सरकार को इन पदों को भरने की अनुमति मांगी थी। उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर 2021 को हाईकोर्ट ने जेबीटी भर्ती मामले पर फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया था कि शिक्षकों की भर्ती के लिए एनसीटीई की ओर से निर्धारित नियम प्रारंभिक शिक्षा विभाग के साथ-साथ कर्मचारी चयन आयोग पर भी लागू होते हैं। कोर्ट के फैसले से जेबीटी पदों के लिए बीएड डिग्री धारक भी पात्र हो गए थे लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका में पारित आदेशों के अनुसार इस फैसले पर रोक लगा दी थी। इस रोक के बाद बीएड डिग्री धारक फि र से इन पदों की दौड़ से बाहर हो गए थे। बीएड डिग्री धारक याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि उन्हें भी जेबीटी भर्ती के लिए योग्य समझा जाए। वो बीएड डिग्री धारक होने के साथ टेट उत्तीर्ण भी हैं और एनसीटीई के नियमों के तहत जेबीटी शिक्षक बनने के लिए पात्रता रखते हैं। ज्ञात रहे कि एनसीटीई के नियमों के तहत बीएड डिग्री धारक जेबीटी के पदों की भर्ती के लिए सशर्त पात्र बनाए गए हैं। उन्हें नियुक्ति प्राप्त करने के बाद 6 महीने का अतिरिक्त ब्रिज कोर्स करना होगा।
जोनल अस्पताल धर्मशाला में करीब एक माह से सर्जरी विशेषज्ञ न होने से मरीज़ों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्जरी विशेषज्ञ न होने के कारण ओपीडी पिछले एक माह से बंद हैं। मरीजों को सर्जरी के लिए टांडा अस्पताल भेजा जा रहा। वही, इसके चलते टांडा अस्पताल में रोजाना उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे हालात में धर्मशाला से टांडा अस्पताल जाने वाले मरीजों को लम्बी कतारों में खड़े रह कर अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इन सभी परेशानियों को देखते हुए मरीजों ने सरकार से मांग की है कि धर्मशाला अस्पताल में जल्द से जल्द सर्जरी विशेषज्ञ को नियुक्ति किया जाए। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि अस्पताल में सर्जरी और ईएनटी विशेषज्ञ के खाली पदों का मामला प्रदेश सरकार के ध्यान में लाया गया है। सरकार से इन पदों को जल्द भरने का अनुरोध किया गया है।
किन्नौर जिला में मूरंग थाने के तहत निर्माणाधीन टिडोऺग जल- विधुत परियोजना 150 मैगावाट में रोजाना की तरह सुरंग का कार्य करते समय शनिवार सुबह अचानक सुरंग में मलवा गिरने से 5 मजदूर मलबे में दब गए ,जबकि इस घटना में दो मजदूरों की मौत हो गई। बता दें की शनिवार सुबह अचानक निर्माणधीन सुरंग में मलबा गिर गया, इस मलबे की चपेट में 5 मजदूर आ गए , इसके बाद प्रशासन की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, बड़ी मुशकत के बाद टीम ने तीन लोगों को मलबे से बाहर निकला, जबकि इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई। घटना के बाद उपायुक्त किन्नौर आबिद हुसैन सादिक ने एडीएम पूह को मजिस्ट्रियल जांच कराने के दिये निर्देश है ।
हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक बार फिर अपनी दरियादिली दिखाई है। शनिवार को कुल्लू दौरे पर निकले जयराम ठाकुर ने अपना हेलीकॉपटर पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम के लिए मंडी में ही छोड़ दिया, जहाँ से पंडित सुखराम को सीएम के हेलीकॉपटर के माध्यम से दिल्ली शिफ्ट किया गया। शनिवार को पंडित सुखराम का हाल जानने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मंडी अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पंडित सुखराम का हाल जाना व उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से कुल्लू के लिए रवाना हो गए। बता दें कि पंडित सुखराम को बीती 4 मई को मनाली में ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसके बाद उन्हें जोनल हॉस्पिटल मंडी में उपचार के लिए भर्ती करवाया गया है। शनिवार को राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर के माध्यम से उन्हें दिल्ली ले जाया गया है, जहां पर उनका उपचार किया जाएगा। सीएम जयराम ठाकुर ने पंडित सुखराम सहित उनके परिजनों से मुलाकात की और डॉक्टरों से सेहत के बारे में जानकारी ली। इसके बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने बताया कि पंडित सुखराम की सेहत में सुधार हो रहा है जोकि अच्छी बात है। पंडित सुखराम प्रदेश के वरिष्ठ नेता हैं और प्रदेश के विकास में उनका योगदान रहा है।
डाडासीबा में गुरुवार को मकान और पशुशाला में आग लग जाने से डाडा सीबा बाजार में गोलगप्पे की रेहडी़ लगाने बाला दिनेश कुमार का सारा सामान जल राख हो गया था इस परिवार को डाडा सीबा के व्यापारियों द्वारा 5600 रूपये आर्थिक सहायता दी गई इस मौके पर व्यापार मंडल के प्रधान राजेंद्र सिंह गोगा, सचिव सुनील शर्मा, रितेश शर्मा ,गुरमीत सिंह, कृष्ण दत्त शर्मा ,वार्ड पंच कमल कुमार, सूरज वर्मा, राजेंद्र फौजी ,प्रवीण मेहता, रजत सूद, गुलशन चौहान व रमेश कुमार सहित अन्य व्यापारियों ने इस व्यापारी भाई की आर्थिक सहायता की गई।
आईपीएल के इस सीजन में मुंबई टीम का प्रदर्शन बेहद ख़राब रहा है। इस सीजन में मुंबई एक मैच को ही अपने नाम कर पाई है। प्लेआफ की दौड़ से पहले ही बाहर हो चुकी मुंबई के पास खोने के लिए कुछ नहीं हैं और अब टीम बस अपनी साख बचाने के लिए मैदान में उतरेगी। टीम का प्रदर्शन इस सीजन बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बेहद निराशाजनक रहा है। बल्लेबाजी में रोहित शर्मा और इशान किशन के बल्ले से रन नहीं निकले हैं तो गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह को दूसरे गेंदबाजों का साथ नहीं मिला है। मुंबई की ओपनिंग जोड़ी : मुंबई के लिए पारी की शुरुआत इशान किशन और रोहित शर्मा की जोड़ी करती है, लेकिन अब तक उऩकी ये जोड़ी टीम के लिए उतनी कारगर साबित नहीं हुई है जिसके लिए वो जानी जाती है। इशान किशन के बल्ले से शुरुआती कुछ मैचों में जरूर रन निकले हैं लेकिन बाद में उनका बल्ला खामोश ही रहा है। इस मैच में दोनों के ऊपर अच्छी शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी होगी। मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा लगातार अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं लेकिन टीम को जीत दिलाने के लिए ये काफी नहीं रहा है। उनके अलावा पिछले मैच में टिम डेविड ने अच्छी बल्लेबाजी की थी लेकिन कीरोन पोलार्ड का न चल पाना टीम के लिए चिंता का विषय रहा है।
प्रदेशभर में 27 मार्च को हुई पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने के बाद अब सरकार ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया है। शिमला में पत्रकारों को जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा की 27 मार्च को हुई परीक्षा में पेपर लीक होन के बाद सरकार ने यह निणर्य लिया गया है। इस मोके पर उन्होंने कहा की सरकार इस परीक्षा को दोबारा जल्द करवाएगी। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा की इस बार ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के हिसाब से यह परीक्षा होगी। बता दें की हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबलों के 1334 पदों के लिए 27 मार्च को भर्ती परीक्षा हुई थी। इनमें 932 पुरुष, 311 महिला कांस्टेबल, 91 पुरुष कांस्टेबल बतौर चालक पदों के लिए 5 अप्रैल 2022 को परिणाम घोषित हुआ, लेकिन पेपर लीक होने के बाद अब सरकार ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया है। पेपर लीक की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है। डीआईजी मधुसूदन एसआईटी के प्रमुख होंगे। टीम जांच कर तथ्य जुटाएगी और उसके बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि पुलिस की भर्ती पारदर्शिता के साथ पूरी हो सके और किसी को अंगुली उठाने की गुंजाइश न रहे। 74 हजार ने दी थी लिखित परीक्षा हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबलों के 1334 पदों के लिए 27 मार्च को भर्ती परीक्षा हुई थी। इनमें 932 पुरुष, 311 महिला कांस्टेबल, 91 पुरुष कांस्टेबल बतौर चालक पदों के लिए 5 अप्रैल 2022 को परिणाम घोषित हुआ। पहले चरण में लिखित परीक्षा का आयोजन प्रदेश में निर्धारित 81 केंद्रों पर किया गया था। लिखित परीक्षा में कांस्टेबल पुरुष के पदों के लिए 60 हजार से अधिक और कांस्टेबल महिला पदों के लिए 14 हजार से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे। भर्ती परीक्षा में पाए 90 में से 70 अंक 5 अप्रैल को लिखित परीक्षा का परिणाम निकलने के बाद पास हुए अभ्यर्थियों को पुलिस ने दस्तावेजों की जांच के लिए प्रदेशभर में बुलाया। इसके बाद नियुक्ति होनी थी। दस्तावेजों की जांच के दौरान एसपी कांगड़ा खुशहाल चंद शर्मा को तीन युवाओं पर शक हुआ। तीनों युवाओं के 90 में से 70 अंक थे। लेकिन दसवीं की कक्षा में उनके अंक 50 फीसदी भी नहीं थे। एसपी ने तीनों युवाओं से अलग-अलग कड़ी पूछताछ की। पुलिस पूछताछ में तीनों युवा फंस गए और उन्होंने माना कि लिखित परीक्षा से पहले ही 6 से 8 लाख रुपये देकर उन्हें टाइप्ड प्रश्नों के उत्तर मिल गए थे। उन्हें उत्तर रटने को कहा गया था।
हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मौसूम खराब होने का अंदेशा जताया जा रहा हैं। शिमला समेत आसपास के भागों में आज हल्के बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार मैदानी भागों में मौसम साफ रहेगा,वहीं 5 से 7 मई तक प्रदेश के मध्य व उच्च पर्वतीय कुछ स्थानों पर बारिश होने के आसार हैं। 8 व 9 मई को पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहेगा। बता दें की बीतें दिनों हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में हुई भारी वर्षा व ओलावृष्टि से बागवानों को काफी नुकसान हुआ है , अब आने वाले दिनों में फिर से मौसम विभाग ने बारिश होने का अनुमान लगाया है, जिसके चलते फिरसे प्रदेश के ऊपरी इलाकों व मध्यवर्ती क्षेत्रों में किसानों व बागवानों की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। क्षेत्र अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस में) ऊना 37.5 कांगड़ा 32.9 बिलासपुर 36.0 धर्मशाला 30.2 हमीरपुर 34.7 नाहन 30.0 सोलन 30.5 चंबा 30.7 शिमला 23.8 कल्पा 21.0 केलांग 17.2
बॉलीवुड में जगमगाते सितारे बॉलीवुड और हिमाचल का पुराना नाता है। बड़े - बड़े अभिनेता हिमाचल की हसीं वादियों में अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए तो आते ही है मगर ऐसे कई लोग है जो हिमाचल के छोटे- छोटे शहरों से निकल कर मुंबई गए और बॉलीवुड के बड़े सितारे बन गए। दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर, कंगना रनौत, प्रीति ज़िंटा, टिस्का चोपड़ा और यामी गौतम जैसे बॉलीवुड के कई बड़े सितारे हिमाचल से सम्बन्ध रखते है। हिमाचल के छोटे शहरों से होने के बावजूद बी टाउन में अपनी धाक बना कर इन सभी सितारों ने हिमाचल का नाम रोशन किया है। अनुपम खेर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर का जन्म शिमला में हुआ था। इनके पिता पुष्कर नाथ एक कश्मीरी पंडित थे, वे पेशे से क्लर्क थे। अनुपम ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1982 में 'आगमन' नामक फिल्म से की थी, लेकिन 1984 में आई 'सारांश' उनकी पहली हिट फिल्म मानी जाती है। इन्होंने स्पेशल 26, द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर, ए वेडनसडे, दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे, कुछ कुछ होता है, हम, और कश्मीर फाइल्स सहित कई शानदार फिल्में दी है। प्रीति जिंटा लाखो दिलों की धड़कन डिंपल गर्ल यानि प्रीति जिंटा हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्रियों में से एक हैं। हिमाचल प्रदेश के शिमला में जन्मी एक्ट्रेस हिन्दी, तेलगू, पंजाबी व अंग्रेजी फिल्मों में कार्य कर चुकी है। शुरुआत में प्रीति ने मॉडलिंग में अपनी किस्मत आजमाई। फिल्म 'दिल से' में प्रीती सहायक अभिनेत्री के तौर पर नजर आयीं थी। उनकी बतौर मुख्य नायिका फिल्म 'सोल्जर' थी। कंगना रनौत कंगना रनौत ने बॉलीवुड में लंबे संघर्ष के बाद कामयाबी हासिल की है। हिमाचल के भाम्बला में जन्मी कंगना के करियर की शुरुआत मॉडलिंग और थियेटर से हुई थी। उनके फिल्मी करियर की शुरूआत फिल्म 'गैंगस्टर' से हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उन्होंने 'वो लम्हें', 'लाइफ इन अ मेट्रो', 'फैशन', 'थलाईवी', 'तन्नू वेड्स मन्नू' और 'क्वीन' जैसी फिल्मों में उन्होंने जबरदस्त अदाकारी की है। टिस्का चोपड़ा टिस्का चोपड़ा बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय के लिए जानी जाती हैं। 'तारे जमीन पर', 'दिल तो बच्चा है जी' और 'अंकुर अरोड़ा मर्डर केस' जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं अदाकारा टिस्का चोपड़ा का जन्म हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ। उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत अजय देवगन के साथ 'प्लेटफॉर्म' (1993) नामक फिल्म से की थी। टिस्का ने टेलीविजन पर कई शार्ट फिल्मों और सीरियल में काम किया है। यामी गौतम : यामी गौतम हिमाचल के बिलासपुर में पैदा हुई थी। बाद में परिवार के साथ चंडीगढ़ चली आईं। पिता मुकेश गौतम पंजाबी फिल्मों के डायरेक्टर थे। उनकी बड़ी बहन सुरीली भी पंजाबी फिल्मों की एक्ट्रेस बन गईं। ऐसे में जो यामी बचपन से आईएएस बनना चाहती थी, वो भी इस फिल्मी माहौल से बच नहीं पाईं और मुंबई चली आई। दो टीवी सीरियल में काम मिला- ‘चांद के पार चलो’ और ‘ये प्यार ना होगा कम’। कुछ साउथ की फिल्में भी मिल गईं। हिंदी फिल्म में यामी पहली बार आयुष्मान खुराना के साथ फिल्म ‘विकी डोनर’ में नजर आई थीं। यहां से उनकी किस्मत चमकी। इसके बाद उन्हें 'बदलापुर', 'काबिल', 'सरकार 3', 'एक्शन जैक्सन', 'उरी' और 'बाला' जैसी कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला। रुबीना दिलैक : बिग बॉस 14 की विजेता रह चुकीं रुबीना दिलैक हिमाचल के शिमला के चौपाल से संबंध रखती हैं। रुबीना आईएएस बनना चाहती थीं, लेकिन मन में एक्टिंग का कीड़ा भी घुसा हुआ था। चंडीगढ़ में एक ऑडिशन दिया तो उनको जीटीवी के सीरियल ‘छोटी बहू’ में रोल मिल गया। यहीं से उनका ठिकाना मुंबई का ग्लैमर जगत बना। वह ‘सास बिना ससुराल’, जीटीवी का ‘पुर्नविवाह- एक नई उम्मीद’, ‘देवों के देव महादेव’ जैसे तमाम सीरियल में काम कर चुकी हैं। उन्होंने टीवी शो ‘शक्ति –अस्तित्व के अहसास की’ में सौम्या सिंह नाम की एक ट्रांसजेंडर का किरदार भी निभाया है। रुबीना ‘बिग बॉस 14’ भी जीत चुकी है। सेलिना जेटली: सेलिना जेटली 2001 की फेमिना मिस इंडिया का ताज अपने नाम कर चुकीं हैं। फेमिना मिस इंडिया का ताज जितने के बाद सेलिना ने हिंदी सिनेमा में अपना कदम रखा। सेलिना जेटली भी हिमाचल के शिमला से संबंध रखती है। उन्होंने साल 2003 में फिल्म जानशीन से फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। इस फिल्म में उनके अपोजिट फरदीन खान नजर आये थे। प्रिया राजवंश प्रिया राजवंश का नाम देव आनंद के भाई चेतन आनंद से जुड़ा था। चेतन अपनी पत्नी उमा से रिश्ते बिगड़ने के बाद उनसे अलग हो गए थे। फिर चेतन की जिंदगी में आईं प्रिया राजवंश। प्रिया का असली नाम था वेरा सुंदर सिंह। वह शिमला में पली बढ़ी थीं, लेकिन एक्टिंग की ट्रेनिंग उन्होंने लंदन में ली थी, उनके बोलचाल में अंग्रेजी का असर था। जब किसी ने चेतन को प्रिया की फोटो भेजी, तो उन्होंने फौरन उन्हें अपनी नई फिल्म ‘हकीकत’ के लिए साइन कर लिया। फिल्म ‘हकीकत’ आज भी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन वॉर फिल्मों में शुमार होती है। इसके बाद चेतन और प्रिया एक-दूसरे के करीब होते चले गए, जबकि उनकी उम्र में 16 साल का अंतर था। प्रेम चोपड़ा प्रेम चोपड़ा यूं तो लाहौर में पैदा हुए थे, लेकिन बंटवारे के बाद शिमला चले आए और फिर यहीं के होकर रह गए। तब प्रेम के पिता उनको डॉक्टर या आईएएस बनाने का सपना मन में पाले हुए थे। वो एक आईसीएस (जो अब आईएएस होता है) ऑफिसर के बेटे थे। प्रेम के 5 भाई थे और एक छोटी बहन। उन्होंने कॉलेज के थिएटर ग्रुप में एक्टिंग करनी शुरू की थी। पिता ने समझाया कि इस क्षेत्र में काफी अस्थिरता है, पर वो नहीं माने। तब पिता ने कहा कि तुम किसी दूसरी नौकरी के साथ एक्टिंग कर सकते हो। वह मुंबई आ गए। टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में उनकी नौकरी लग गई। वहां वह बंगाल, बिहार, उड़ीसा में अखबार के सर्कुलेशन का काम देखते थे। काम से फुरसत मिलने पर वह अपना पोर्टफोलियो लेकर स्टूडियो के चक्कर काटते और रोल देने की गुजारिश करते। मोहित चौहान मोहित चौहान हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नाहन में पैदा हुए थे। दिल्ली में पढ़ाई करने के बाद वह वापस हिमाचल चले आए। यह शानदार गायक दरअसल एक्टर बनना चाहते था। वह शौकिया तौर पर गाते-बजाते थे। मोहित अपने कॉलेज के दिनों में ही गिटार, हार्मोनिका और बांसुरी बजाने में दक्ष हो गए थे। एक्टर तो नहीं बन पाए, पर वह सिल्क रूट बैंड से जा जुड़े। मोहित को फिल्मों में गाने का पहला मौका 2002 में आई संजय दत्त की फिल्म ‘रोड’ में मिला था। वह ‘रंग दे बसंती’ के गाने ‘खून चला..’ ने घर-घर लोकप्रिय हो गए थे। सबको लगा कि इस आवाज में दम है। करीना-शाहिद की फिल्म ‘जब वी मेट’ के गाने ‘तुम से ही..’ से वह छा गए। 2010 में आई फिल्म ‘दिल्ली 6’ के गाने ‘मसक्कली’ के लिए उन्हें पहली बार फिल्म फेयर के लिए बेस्ट मेल सिंगर का अवॉर्ड मिला था। वहीँ फिल्म रॉकस्टार के गांव ने उन्हें बुलंदी पर पहुंचा दिया। ReplyForward
बांका हिमाचल : बीबीएन में होता है देश में बिकने वाली हर तीसरी दवा का निर्माण -इस समय भारत दुनिया की नई फार्मेसी बनने की डगर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस समय भारत का फार्मा उद्योग करीब 42 अरब डॉलर का है। माना जा रहा है कि यह 2026 तक 65 अरब डॉलर और 2030 तक 130 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। निःसंदेह कोरोना संक्रमण की आपदा भारत के लिए फार्मा और कोरोना वैक्सीन का मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का अवसर लेकर आई है। फार्मा उद्योग की इस प्रतिस्पर्धा में हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन का बीबीएन क्षेत्र भी तेज़ी से भाग रहा है। बीबीएन की पहचान एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब के तौर पर की जाती है। कोरोना के समय में इस एरिया की अहमियत और भी बढ़ी है। बता दें कि कोरोना महामारी की पहली लहर में दुनिया जब वैक्सीन के लिए रिसर्च कर रही थी तब ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीसीजीआई (DCGI) ने रूस की कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-वी (Sputnik-V) बनाने के लिए हिमाचल के बद्दी में स्थित पैनेशिया बायोटेक को मंजूरी दी। पैनेशिया बायोटेक पहली कंपनी है, जिसने स्पूतनिक-वी का निर्माण भारत में किया। स्पूतनिक-वी बनाने के लिए कुल 6 कंपनियों ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ एग्रीमेंट किया था, जिनमें पैनेशिया बायोटेक भी शामिल थी। वैश्विक महामारी कोविड-19 से उपजे संकट के इस दौर में जहां हिमाचल का फार्मा उद्योग देश व प्रदेश की दवा जरूरतों को प्राथमिकता से पूरा कर रहा है, वहीं कोरोना के उपचार से संबंधित आवश्यक दवाओं के उत्पादन में अग्रणी राज्य बनने की ओर अग्रसर है। बता दें कि देश में बिकने वाली हर तीसरी दवा का निर्माण हिमाचल के फार्मा उद्योगों में हुआ है। सालाना करीब 15 हजार करोड़ से ज्यादा की दवाओं का निर्यात यह से किया जा रहा है। कोरोना काल में अमेरिका को भेजी गई यहां बनी दवा : दुनिया में जिस समय वैश्विक महामारी कोरोना का संकटपूर्ण दौर आया, सबसे पहले चर्चा में आने वाला शब्द हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन था। पहली लहर में उक्त दवा के लिए दुनिया की नजरें भारत पर थीं। दुनिया भर में जितनी हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन तैयार होती है, उसका सत्तर फीसदी भारत में बनता है। देश में भी अधिकांश हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन बीबीएन में बनती है। अमेरिका को भी यहीं से सप्लाई दी गई थी। हिमाचल में करीब 700 दवा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा ईयू से, इतने ही डब्ल्यूएचओ व जीएमपी से तथा अन्य इकाइयां यूएसएफडीए से मंजूर हैं। ऐसे में यदि बीबीएन में और अधिक फार्मा इकाइयों को लाइसेंस मिल जाए तो देश भर की दवाइयों की जरूरत अकेले बीबीएन पूरी कर सकता है। हिमाचल में मात्र चार से पांच फीसदी दवा निर्माताओं के पास क्लोरोक्वीन व एंटीबॉयोटिक एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट का लाइसेंस है। यदि प्रदेश के हर फार्मा उत्पादक को लाइसेंस मिल जाता है तो पूरे देश के लिए यह दवा यहां से उपलब्ध करवाई जा सकती है। सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी : उद्यमियों की सुविधा के लिए हिमाचल सरकार ने बद्दी में सिंगल विंडो क्लियरिंग एजेंसी ऑफिस खोला है। यदि कोई निवेशक पांच करोड़ रुपए तक की मशीनरी का प्लांट लगाता है तो उसे कहीं भटकने की जरूरत नहीं है। मंजूरी से संबंधित सभी औपचारिकताएं इसी कार्यालय से पूरी हो जाती हैं। इससे ऊपर की मशीनरी लागत वाली इकाइयां मुख्य कार्यालय शिमला से मंजूर होती हैं। प्लांट व मशीनरी पर पचास फीसदी उपदान यानी सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा सेंट्रल ट्रांसपोर्ट सब्सिडी की सुविधा है। उधमियों के लिए प्लांट व भूमि नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर उपलब्ध है। 21 हजार करोड़ से भी ज्यादा औद्योगिक निवेश : बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ न केवल प्रदेश बल्कि देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में से एक हैं। हिमाचल में यदि उद्योगों की बात करें तो हज़ारों की संख्यां में कई छोटे-बड़े उद्योग हैं। प्रदेश में औद्योगिक निवेश 21 हजार करोड़ से भी ज्यादा है। राज्य सरकार के पास भी कई बड़े निवेश के प्रस्ताव विचाराधीन है। वर्तमान सरकार की इन्वेस्टर मीट के परिणाम भी अब धरातल पर दिखने लगे है। नालागढ़ में लगेगा देश का पहला एपीआई उद्योग - 850 करोड़ के प्रोजेक्ट से दो हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ के समीप पलासड़ा में प्रस्तावित बल्क ड्रग यूनिट में एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (एपीआइ) यानी दवा उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल बनाने का उद्योग लगेगा। सितंबर 2022 तक ट्रायल आधार पर इसका उत्पादन शुरू हो जाएगा। मुंबई की किनवान कंपनी को उद्योग विभाग ने पलासड़ा में 350 बीघा भूमि आवंटित कर दी है। यहां उत्पादन शुरू होने के बाद बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) सहित देशभर के फार्मा उद्योगों को एंटीबायोटिक दवाओं का कच्चा माल आसानी से मिल सकेगा। वर्तमान में फार्मा उद्योग एपीआइ के लिए चीन पर निर्भर हैं और करीब 80 फीसद एपीआइ चीन से ही आपूर्ति हो रहा है। पलासड़ा में लगने वाले इस उद्योग की उत्पादन क्षमता 400 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष होगी। यह देश का पहला एपीआई उद्योग होगा। यहां 576.12 बीघा भूमि विभाग के नाम हो चुकी है और मौजूदा समय में चयनित भूमि की डिमार्केशन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र पलासड़ा में उद्योग लगाने के लिये कई कंपनियों ने इच्छा जाहिर की है, जिनमें से एक कंपनी को पलासड़ा में 342 बीघा भूमि प्रदान भी कर दी गई है। बद्दी एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब है। पूरे प्रदेश में 750 फार्मा इकाइयां हैं, जिन्हें कच्चा माल दूसरे देशों से मंगवाना पड़ रहा है। अगर यहां पर दवा कंपनियों के लिए कच्चे माल का उद्योग खुल जाता है, तो एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब बद्दी की दवा कंपनियों को फायदा होगा। देश की 30 फीसदी दवाओं का उत्पादन हिमाचल प्रदेश में होता है। देश का यह पहला उद्योग होगा, जिसमें एंटीबायोटिक दवाइयों का सॉल्ट तैयार होगा और प्रदेश का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है। अभी तक दवा उद्योग के लिए कच्चा माल चीन से आता था, लेकिन अब यहां पर एपीआई उद्योग खुलने से जहां बीबीएन के दवा निर्माताओं को सीधा लाभ होगा, वहीं देश के अन्य दवा निर्माता कंपनियों को भी बाहर से कच्चा माल नहीं मंगवाना पड़ेगा। नालागढ़ के पलासड़ा में बड़े-बड़े औद्योगिक घराने आने शुरू हो गए हैं। 850 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से दो हजार युवाओं को रोजगार मिलेगा। ....................................................................................
भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन पर्व महाशिवरात्रि विश्व भर में मनाया जाता है, मगर छोटी काशी मंडी शहर की शिवरात्रि का अंदाज ही अनूठा है। यहां सात दिवसीय महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेले का तमगा प्राप्त है। ये सात दिन श्रद्धा और भक्ति से सराबोर होते है और लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में भाग लेने पहुँचते है। शिवरात्रि के साथ ही हिमाचल प्रदेश में साल भर चलने वाले मेलों की शुरुआत होती है। मंडी नगरी में पावन शिवरात्रि पर्व से जुड़ी एक कथा भी है। इसके अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती को विदा कर ले जाते समय भगवान शिव को संसार का ध्यान आया तो वे बारातियों के साथ ही नई नवेली दुलहन को वहीं छोड़ कर तपस्या में लीन हो गए। शिव के न लौटने पर माता पार्वती विलाप करने लगी, जिसे सुनकर एक पुरोहित आगे आया। फिर भगवान शिव का आह्वान करने के लिए मंडप की स्थापना कराई गई। मंडप में प्रकट होकर भगवान शिव ने पूछा कि उन्हें क्यों बुलाया गया है, तो पुरोहित ने कहा कि आपकी याद में रोते-रोते पार्वती सो गई हैं। तभी से इस स्थान का नाम मंडप से मांडव्य और फिर मंडी पड़ा। माना जाता है कि पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजबर सेन ने बटोहली से अपनी राजधानी ब्यास नदी के उस पार स्थापित की थी। संभवत दौरान महाशिवरात्रि के पर्व का शुभारंभ हुआ। प्रारंभ में इसे दो दिन के लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता था, जिसमें मंडी जनपद के लोक देवताओं की भागीदारी रहती थी। फिर सोलहवीं सदी के दौरान राजा सूरज सेन ने मंडी शिवरात्रि में जनपद के देवी-देवताओं को आमंत्रित करने और एक सप्ताह तक मेहमान बनाकर रखने की परंपरा भी डाली। तब से ये परंपरा चली आ रही है। सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से जुड़ा है मंडी का इतिहास : मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से प्रारंभ होता है, जब राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से रूष्ट होकर कुछ विश्वास पात्र सैनिकों को साथ लेकर लोहारा को छोड़कर बल्ह के हाट में अपनी राजधानी बसाई थी। इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई थी। बाहूसेन ने ही हाटेश्वरी माता के मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद वे मंगलौर में जा बसे थे। 1280 ई.में बाणसेन ने मंडी शहर के भियूली में मंडी रियासत की राजधानी स्थपित की, जो बटोहली होते हुए 1527 ई. में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ के मंदिर के साथ ही आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। श्रद्धा और भक्ति से सराबोर होता है अन्तर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन पर्व महाशिवरात्रि विश्व भर में मनाया जाता है, मगर छोटी काशी मंडी शहर की शिवरात्रि का अंदाज ही अनूठा है। यहां सात दिवसीय महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेले का तमगा प्राप्त है। ये सात दिन श्रद्धा और भक्ति से सराबोर होते है और लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में भाग लेने पहुँचते है। शिवरात्रि के साथ ही हिमाचल प्रदेश में साल भर चलने वाले मेलों की शुरुआत होती है। मंडी नगरी में पावन शिवरात्रि पर्व से जुड़ी एक कथा भी है। इसके अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती को विदा कर ले जाते समय भगवान शिव को संसार का ध्यान आया तो वे बारातियों के साथ ही नई नवेली दुलहन को वहीं छोड़ कर तपस्या में लीन हो गए। शिव के न लौटने पर माता पार्वती विलाप करने लगी, जिसे सुनकर एक पुरोहित आगे आया। फिर भगवान शिव का आह्वान करने के लिए मंडप की स्थापना कराई गई। मंडप में प्रकट होकर भगवान शिव ने पूछा कि उन्हें क्यों बुलाया गया है, तो पुरोहित ने कहा कि आपकी याद में रोते-रोते पार्वती सो गई हैं। तभी से इस स्थान का नाम मंडप से मांडव्य और फिर मंडी पड़ा। माना जाता है कि पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजबर सेन ने बटोहली से अपनी राजधानी ब्यास नदी के उस पार स्थापित की थी। संभवत दौरान महाशिवरात्रि के पर्व का शुभारंभ हुआ। प्रारंभ में इसे दो दिन के लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता था, जिसमें मंडी जनपद के लोक देवताओं की भागीदारी रहती थी। फिर सोलहवीं सदी के दौरान राजा सूरज सेन ने मंडी शिवरात्रि में जनपद के देवी-देवताओं को आमंत्रित करने और एक सप्ताह तक मेहमान बनाकर रखने की परंपरा भी डाली। तब से ये परंपरा चली आ रही है। सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से जुड़ा है मंडी का इतिहास : मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से प्रारंभ होता है, जब राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से रूष्ट होकर कुछ विश्वास पात्र सैनिकों को साथ लेकर लोहारा को छोड़कर बल्ह के हाट में अपनी राजधानी बसाई थी। इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई थी। बाहूसेन ने ही हाटेश्वरी माता के मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद वे मंगलौर में जा बसे थे। 1280 ई.में बाणसेन ने मंडी शहर के भियूली में मंडी रियासत की राजधानी स्थपित की, जो बटोहली होते हुए 1527 ई. में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ के मंदिर के साथ ही आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। राज देवता माधोराय, बड़ादेव कमरुनाग और बाबा भूतनाथ से है नाता : मंडी शिवरात्रि में शैव मत का प्रतिनिधित्व जहां शहर के अधिष्ठदाता बाबा भूतनाथ करते हैं, तो वैष्णव का प्रतिनिधित्व राज देवता माधोराय और लोक देवताओं की अगुआई बड़ादेव कमरूनाग और देव पराशर करते हैं। इस लोकोत्सव में देवी देवताओं के साथ जनपद के लोगों की भागीदारी भी रहती थी, जो मंडी नगर में माधोराय के अलावा अपने राजा के दर्शन भी करते थे। मेले के दौरान जनपद के देवी-देवता राजदेवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। यह परंपरा भी राजा सूरज सेन के समय से ही है। शिवरात्रि का शुभारंभ बाबा भूतनाथ और माधोराय के मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ होता है। इसमें सबसे पहले बड़ा देव कमरूनाग मंडी नगर में पहुंचते हैं। इसके पश्चात ही शिवरात्रि के कार्य शुरू होते हैं। राजतंत्र के जमाने से ही राजदेवता माधोराय की जलेब निकलती है। देखने को मिलता है देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम : शिवरात्रि मेले के दौरान जनपद के सौ से अधिक देवी-देवता एक सप्ताह तक मंडी नगर में मेहमान बनकर रहते हैं। मंडी शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। इस देव समागम में हिमाचल में पाई जाने वाली देव रथ शैलियों का अवलोकन करने को मिलता है। देव समागम में बैठने वाले देवताओं की वरिष्ठता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लोक विश्वास के अनुसार जिस देवता की पालकी पहले बनी है वही वरिष्ठ होता है। राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में होता था शामिल : राजशाही के जमाने में राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में शामिल होता था। शिवरात्रि की जलेब के कुछ चित्र प्राचीन हवेलियों में देखने को मिलते हैं। सेरी चानणी और घंटाघर के आसपास लगे मेले के दृश्य चित्रित हैं। वहीं पर जलेब देखने उमड़ी भीड़ और रनिवास के झरोखों से रानियों और राजपरिवार से जुड़ी महिलाओं के उत्सुकता से इस भव्य जलेब को देखने के दृश्य भी चित्रित हैं। तारा रात्रि से होता है शिवरात्रि का आगाज : पुरातन काल से चली आ रही परंपराओं के अनुसार तारारात्रि से शिवरात्रि का आगाज माना जाता है। तारा रात्रि की रात को मंडी शहर के प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर के शिवलिंग पर माखन का लेप चढ़ाने की परंपरा रही है। शिवरात्रि वाले दिन माखन को उतारकर इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।v देवता माधोरायनाथ से है नाता : मंडी शिवरात्रि में शैव मत का प्रतिनिधित्व जहां शहर के अधिष्ठदाता बाबा भूतनाथ करते हैं, तो वैष्णव का प्रतिनिधित्व राज देवता माधोराय और लोक देवताओं की अगुआई बड़ादेव कमरूनाग और देव पराशर करते हैं। इस लोकोत्सव में देवी देवताओं के साथ जनपद के लोगों की भागीदारी भी रहती थी, जो मंडी नगर में माधोराय के अलावा अपने राजा के दर्शन भी करते थे। मेले के दौरान जनपद के देवी-देवता राजदेवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। यह परंपरा भी राजा सूरज सेन के समय से ही है। शिवरात्रि का शुभारंभ बाबा भूतनाथ और माधोराय के मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ होता है। इसमें सबसे पहले बड़ा देव कमरूनाग मंडी नगर में पहुंचते हैं। इसके पश्चात ही शिवरात्रि के कार्य शुरू होते हैं। राजतंत्र के जमाने से ही राजदेवता माधोराय की जलेब निकलती है। देखने को मिलता है देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम : शिवरात्रि मेले के दौरान जनपद के सौ से अधिक देवी-देवता एक सप्ताह तक मंडी नगर में मेहमान बनकर रहते हैं। मंडी शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। इस देव समागम में हिमाचल में पाई जाने वाली देव रथ शैलियों का अवलोकन करने को मिलता है। देव समागम में बैठने वाले देवताओं की वरिष्ठता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लोक विश्वास के अनुसार जिस देवता की पालकी पहले बनी है वही वरिष्ठ होता है। राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में होता था शामिल : राजशाही के जमाने में राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में शामिल होता था। शिवरात्रि की जलेब के कुछ चित्र प्राचीन हवेलियों में देखने को मिलते हैं। सेरी चानणी और घंटाघर के आसपास लगे मेले के दृश्य चित्रित हैं। वहीं पर जलेब देखने उमड़ी भीड़ और रनिवास के झरोखों से रानियों और राजपरिवार से जुड़ी महिलाओं के उत्सुकता से इस भव्य जलेब को देखने के दृश्य भी चित्रित हैं। तारा रात्रि से होता है शिवरात्रि का आगाज : पुरातन काल से चली आ रही परंपराओं के अनुसार तारारात्रि से शिवरात्रि का आगाज माना जाता है। तारा रात्रि की रात को मंडी शहर के प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर के शिवलिंग पर माखन का लेप चढ़ाने की परंपरा रही है। शिवरात्रि वाले दिन माखन को उतारकर इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, देश भर में दुसरे नंबर पर है। प्रदेश की साक्षरता दर वर्ष 1971 में 31.96 प्रतिशत थी, 2021 में यह 86.60 प्रतिशत हो गई है और लगातार बेहतर होती जा रही है। हिमाचल में स्कूल, कॉलेजों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हुआ है। हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में उभरा है। वर्तमान में राज्य में 131 स्नातक महाविद्यालय, 1,878 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, 931 उच्च विद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। सरकार द्वारा राज्य में शिक्षा क्षेत्र को सशक्त करने के लिए अनेक बहुआयामी कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय उच्च स्तर शिक्षा अभियान को वर्ष 2013 में सबसे पहले हिमाचल ने ही लागू किया था। इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में हिमाचल देशभर में अग्रणी रहा है। पिछले वर्ष हिमाचल प्रदेश को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी किए जाने वाले परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में ग्रेड वन में शामिल किया गया था। वर्तमान में राज्य में 131 स्नातक महाविद्यालय, 1,878 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, 931 उच्च विद्यालय, पांच अभियान्त्रिकी महाविद्यालय, चार फार्मेसी महाविद्यालय 16 पॉलिटेकनिक महाविद्यालय और 138 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। एनआईटी हमीरपुर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर देश के 31 एनआईटी में से एक है, जो 7 अगस्त 1986 को क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में अस्तित्व में आया। स्थापना के समय, संस्थान में केवल दो विभाग थे, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग। 26 जून 2002 को, आरईसी हमीरपुर को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में अपग्रेड किया गया। बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के लिहाज से विश्व बैंक द्वारा इस संस्थान को सबसे अच्छी एनआईटी का दर्जा प्रदान किया गया है। संस्थान के पास उद्योग की आवश्यकताओं और तकनीकी दुनिया में होने वाली घटनाओं के जवाब में विकसित होने और बदलने का लचीलापन है। आईजीएमसी : हिमाचल प्रदेश मेडिकल कॉलेज शिमला (HPMC) की स्थापना वर्ष 1966 में पहले बैच में 50 छात्रों के प्रवेश के साथ की गई थी। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से संबंधित है। इंदिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज राज्य के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों के साथ पूरा कर रहा है। आईजीएमसी से अब तक 923 स्नातकोत्तर और 377 डिप्लोमा छात्र पास हो चुके हैं। आईजीएमसी में एमबीबीएस की सीटों को वर्ष 1978 बढ़ाकर 65 किया गया था। अब एमबीबीएस की सीटें 65 से बढ़ाकर 100 कर दी गई हैं। वर्ष 1981 में आईजीएमसी में 16 विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए गए थे। अब इन्हें 16 से 20 कर दिया गया है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला को भारत सरकार द्वारा क्षेत्रीय कैंसर केंद्र का दर्जा दिया गया है। आईआईटी मंडी आईआईटी मंडी के स्थाई परिसर के लिए 24 फरवरी 2009 को आधारशिला रखी गई थी। आईआईटी मंडी में बीटेक का पहला बैच वर्ष 2009 में बैठा। वर्ष 2013 में पहला बैच पास आउट हुआ उसके बाद आईआईटी मंडी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। देश भर से छात्र पढ़ाई करने के लिए यहां आ रहे हैं। अपनी स्थापना के बाद से ही यह संस्थान तेजी से प्रगति कर रहा है। आईआईटी मंडी में कई ऐसे पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं जो वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए सक्षम है। ये संस्थान मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 2008 में प्रौद्योगिकी संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2011 के तहत स्थापित आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में से एक है। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्थापना 22 जुलाई 1970 को हिमाचल प्रदेश की विधान सभा के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। यह राज्य का एकमात्र बहु-संकाय आवासीय और संबद्ध विश्वविद्यालय है जो शहरी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को औपचारिक और डिस्टेंस शिक्षा प्रदान करता है। विश्वविद्यालय का मुख्यालय शिमला के सुरम्य उपनगर समर हिल में स्थित है। यह राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद द्वारा एक ग्रेड 'ए' मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय के छात्र खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में राष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय प्रदर्शन करते आ रहे हैं। हर साल पर्याप्त संख्या में छात्र NET, SET, JRF और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करते हैं। बागवानी यूनिवर्सिटी हिमाचल डॉ यशवंत सिंह परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन की स्थापना 1 दिसंबर 1985 को बागवानी, वानिकी और सम्बंधित विषयों के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और वास्तुकार स्वर्गीय डॉ यशवंत सिंह परमार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को विकसित करने और सुधारने के लिए बागवानी और वानिकी के महत्व को महसूस किया जिसके कारण इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। यह विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नौणी में स्थित है। विश्वविद्यालय के चार घटक कॉलेज हैं, जिनमें से दो मुख्य परिसर नौणी में स्थित हैं, एक बागवानी के लिए और दूसरा वानिकी के लिए। तीसरा कॉलेज यानी बागवानी और वानिकी कॉलेज, हमीरपुर जिले के नेरी में नादौन-हमीरपुर राज्य राजमार्ग पर स्थित है। चौथा कॉलेज यानि कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, थुनाग (मंडी) थुनाग जिला मंडी में स्थित है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पांच क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, 12 सैटेलाइट स्टेशन और पांच कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) स्थित हैं। पालमपुर यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना 1 नवंबर, 1978 को हुई थी। यह आईसीएआर से मान्यता प्राप्त और आईएसओ 9001:2015 प्रमाणित संस्थान है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने इस विश्वविद्यालय को देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों में 14वां स्थान दिया है। विश्वविद्यालय को कृषि और शिक्षा की अन्य संबद्ध शाखाओं में शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रावधान करने के लिए, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण लोगों के लिए, इस तरह के विज्ञान के अनुसंधान और उपक्रम के विस्तार और अनुसंधान की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए जनादेश दिया गया है। आज राज्य ने पहाड़ी कृषि विविधीकरण के लिए अपना नाम कमाया है और कृषक समुदाय ने विश्वविद्यालय में अपना विश्वास स्थापित किया है।
इस वर्ष हिमाचल में चुनाव होने है और चुनावी वादों के इस दौर में कांग्रेस आए दिन ये ऐलान कर रही है कि सत्ता वापसी होते ही पुरानी पेंशन बहाल की जाएगी। कांग्रेस कर्मचारियों के इस मुद्दे का पूर्णतः समर्थन करती नज़र आ रही है। उधर, वार -पलटवार के इस दौर में भाजपा का पक्ष ये है कि कांग्रेस के सबसे बड़े नेता यानी वीरभद्र सिंह ही प्रदेश में नई पेंशन योजना लागू करने वाले नेता थे और आज यही कांग्रेस अपने नेता के निर्णय पर सवाल उठा उसे बदलने की कोशिश कर रही है। चुनाव है तो राजनीति होती रहेगी, मगर इस वक्त पुरानी पेंशन की बहाली प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में अधिकतम राज्यों के कर्मचारियों का सबसे बड़ा मसला है। कई बड़े संघर्ष और कई बड़े आंदोलन प्रदेश में इस मांग को लेकर कर्मचारी कर चुके है, मगर हल अब तक नहीं मिल पाया। हालांकि ये भी सत्य है कि जयराम सरकार इस मांग को पूरा करने से पूरी तरह पीछे नहीं हट रही। पुरानी पेंशन बहाली के लिए कमेटी बनाई गई है और बैठकों का दौर भी जारी है, मगर मुख्यमंत्री ये स्थिति पहले ही स्पष्ट कर चुके है कि कमेटी जो भी निर्णय लेगी उसे केंद्र भेजा जाएगा और अंत में हरी झंडी प्रधानमंत्री ही दिखाएंगे। पर क्या जयराम सरकार पुरानी पेंशन बहाल कर सकती है, ये असल सवाल है। दरअसल इस वक्त देश के 12 राज्यों में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है, जबकि 4 राज्यों में भाजपा समर्थित सरकार है। यदि किसी एक भी राज्य में भाजपा पुरानी पेंशन बहाल करती है तो बाकि राज्यों के कर्मचारी भी चाहेंगे की उन्हें भी पुरानी पेंशन दी जाए और अंततः केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए भी पुरानी पेंशन बहाल करनी होगी। ऐसे में हकीकत ये है कि चाहकर भी जयराम सरकार के लिए ऐसा करना मुश्किल होगा। हिमाचल में करीब सवा लाख कर्मचारी इस समय एनपीएस के दायरे में हैं और ये खुद के लिए ओल्ड पेंशन मांग रहे हैं। ये सवा लाख कर्मचारी और इनके परिवार लगातार पुरानी पेंशन की मांग कर रहे है। चुनाव के लिहाज़ से ये संख्या काफी महत्वपूर्ण है और वैसे भी हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी फैक्टर का असर सभी जानते है। भाजपा सरकार भी इस बात से भली भांति अवगत है और इसीलिए चुनावी वर्ष में कर्मचारियों की कई लंबित मांगें पूरी भी हुई है, लेकिन पुरानी पेंशन का मसला जस का तस है। आर्थिक स्थिति भी बाधा : इस योजना को लागू करने के लिए एकमुश्त दो हजार करोड़ रुपये चाहिए और हर माह 500 करोड़ की जरूरत होगी। सरकार पहले भी कई बार ये स्पष्ट कर चुकी है कि फिलवक्त [प्रदेश के आर्थिक हालात ऐसे नहीं है कि पुरानी पेंशन लागू की जाए, मगर संभावनाएं फिर भी तलाशी जा रही है। हिमाचल सरकार अपने बलबूते ओल्ड पेंशन का भुगतान नहीं कर पाएगी, क्योंकि राज्य का राजकोष केंद्र सरकार से मिलने वाले रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट पर चलता है। अब देखना यह होगा कि चुनावी वर्ष में जयराम सरकार ओल्ड पेंशन के मसले को किस तरह हल करती है। सरकार के पास एक विकल्प केंद्र से सहायता लेना भी है। कांग्रेस ने दो राज्यों में की बहाल : कांग्रेस की बात करें तो देश में सिर्फ दो राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, राजस्थान और छत्तीसगढ़। इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस पुरानी पेंशन लागू कर चुकी है। ऐसे में हिमाचल में यदि सरकार बनती है तो संभवतः कांग्रेस यहाँ भी इसे लागू करे।
हिमाचल प्रदेश के 19.50 लाख राशनकार्ड धारकों को डिपुओं में अगले माह आटा आधा किलो ज्यादा और चावल आधा किलो कम मिलेंगे। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने मई के लिए राशन की अलाटमेंट जारी कर दी है। अप्रैल में उपभोक्ताओं को प्रति राशनकार्ड 13.5 किलो आटा और छह किलो चावल मिले थे। मई में 14 किलो आटा और साढ़े पांच किलो चावल मिलेंगे। अन्य सस्ते राशन में तीन दालें मलका, माश और दाल चना, दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों), 500 ग्राम प्रति व्यक्ति चीनी और एक किलो नमक शामिल है। उपभोक्ताओं को यह राशन प्रदेश सरकार, जबकि आटा और चावल केंद्र सरकार सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश सरकार ने डिपो होल्डरों को महीने की पहली तारीख को गोदामों से राशन उठाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री राजेंद्र गर्ग ने बताया कि मई में उपभोक्ताओं के लिए राशन का कोटा जारी किया गया है। खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने जिला नियंत्रक अधिकारियों को डिपो से खाद्य वस्तुओं के सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं। खाद्य आपूर्ति निगम की आगामी निदेशक मंडल की बैठक में अधिकारियों से सैंपल रिपोर्ट के बारे में पूछा जाएगा।
भारत के कई राज्यों में तापमान की मार जारी है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में अप्रैल का तापमान साल 1900 के बाद से सबसे ज्यादा था और मई में भी उत्तर और पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के बाकी हिस्सों में तापमान मार्च और अप्रैल के स्तर नहीं छू पाएगा। मौसम विभाग ने एक बयान में शनिवार को बताया कि मई के दौरान, उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से कम न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। आईएमडी के डीजी मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मई के महीने में राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में गर्म हवाएं चलती रहेंगी। साल 1901 के बाद से इस साल अप्रैल का महीना भारत में चौथा सबसे गर्म रहा। जबकि भारत के उत्तर पश्चिम और मध्य क्षेत्र में अप्रैल 122 साल में सबसे गर्म रहा है। एक से 28 अप्रैल तक उत्तर पश्चिम भारत में औसत तापमान 35.9 डिग्री सेल्सियस था जबकि मध्य भारत में 37.78 डिग्री सेल्सिय। जब अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ऊपर होता है, तब हीटवेव घोषित कर दी जाती है। आईएमडी के अनुसार, अगर सामान्य तापमान से डिपार्चर 6.4 डिग्री ज्यादा है, तो एक गंभीर हीटवेव घोषित की जाती है। वहीं खतरनाक हीटवेव तब घोषित की जाती है जब कोई क्षेत्र अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज करता है। अधिकतम तापमान 47 डिग्री को पार करने पर भीषण लू की घोषणा की जाती है। उत्तर और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में तापमान नियमित रूप से 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है। हालांकि आईएमडी का मौसम मॉडल कहता है कि उभरते हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण मई के मध्य से गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। महापात्र ने कहा, 'अप्रैल में पांच पश्चिमी विक्षोभ बने थे, लेकिन उनमें से कोई भी उतना मजबूत नहीं था और इसलिए बारिश नहीं हुई.' उन्होंने कहा कि ला नीना की स्थिति के बावजूद भारत पर हीटवेव की स्थिति का होना अपेक्षाकृत असामान्य था। उन्होंने कहा कि मई में दक्षिण, मध्य और पूर्वी भारत में सामान्य से अधिक बारिश होगी, लेकिन इस महीने में बेस रेनफॉल कम होगी। जबकि मध्य और पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में बेहद कम। आईएमडी ने 'सामान्य' मानसून या 87 सेंटीमीटर के 99% लॉन्ग पीरियड एवरेज का अनुमान लगाया है और उम्मीद है कि मई के आखिर में केरल में मॉनसून आ सकता है।
पटियाला हिंसा के मास्टरमाइंड बरजिंदर सिंह परवाना को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उसे आज कोर्ट में पेश करेगी। पुलिस ने शनिवार को कहा था कि बरजिंदर सिंह परवाना की पहचान मुख्य आरोपी और शुक्रवार की घटना के मास्टरमाइंड के रूप में हुई है। पंजाब पुलिस ने शनिवार को खालिस्तान विरोधी मार्च को लेकर हुई झड़प में कथित रूप से शामिल दो और लोगों को गिरफ्तार किया और घटना के पीछे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले राजपुरा निवासी की पहचान की थी। पुलिस ने दलजीत सिंह और कुलदीप सिंह के रूप में पहचाने गए दो और आरोपियों की गिरफ्तारी की थी। शुक्रवार की झड़प के कुछ घंटे बाद पुलिस ने बिना अनुमति के जुलूस निकालने और हिंसा भड़काने के आरोप में हरीश सिंगला को गिरफ्तार किया था।
मई महीने की पहली तारीख के दिन आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। तेल कंपनियों ने एलपीजी गैस के दौम में 102.50 रुपये की बढ़ोतरी की है। 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर पर ये दाम बढ़ाए गए हैं। दाम बढ़ने के बाद अब इस सिलेंडर की कीमत 2355.50 रुपये हो गई है जो पहले 2253 रुपये हुआ करती थी। वहीं, 5 किलो का एलीपीजी सिलेंडर की कीमत इस वक्त 655 है। बता दें कि इससे पहले अप्रैल महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 250 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। दरअसल, कमर्शियल सिलेंडर का अधिकतर इस्तेमाल रेस्टारेंट और हलवाई करते हैं। 102.50 रुपये की बढ़ोतरी से उनका जाहिर तौर पर मासिक बजट बिगड़ेगा। वहीं, आने वाले महीनों में शादियों का दौर शुरू होने वाला है जिसमें इन सिलेंडरों की खास जरूरत पड़ती है। जिस कारण कैटरिंग सर्विस वाले भी अपने दामों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
GNA University with great pomp and grandeur organized its Convocation of 2015-2019 batches in the benign presence of the worthy Chief Guest Mr. VipinSondhi, the renowned business tycoon, Mr. Sarvjit Singh Samra, the Founder & MD of Capital Small Finance Bank as the Guest of Honour. S. Gursaran Singh Sihra, the Chancellor of GNA University presided over the Convocation ceremony. The Pro-Chancellor - Mr. Gurdeep Singh Sihra, the Vice-Chancellor – Dr. VK Rattan, Dean Academics- Dr. Monika Hanspaland the Registrar –Dr. RK Mahajangraced the occasion with the Guest of Honour. On the special and the most awaited occasion of the academic event, Mr.VipinSondhi, the Chief Guest honored 72 toppers of various academic programs bagging gold medals, 66 silver medals and 34 bronze medals. Nearly 1000 GNA University students were awarded degrees in the Faculty of Engineering Design & Automation, Hospitality, Business Studies, Computer Science, Animation, Liberal Arts, Natural Sciences, and Physical Education & Sports. Mr. AmritSagar Mittal, spearheading the internationally established group of tractors, Sonalika Ltd, and the Vice-Chairman of Punjab State Planned Board in the rank and status of the Cabinet Minister was bestowed with a degree of Doctor of Literature- the HonorisCausafor his exemplary contribution in the area of Business, Education and Humanity Mr.VipinSondhi, the Chief Guest congratulated the Award Winners and the alumni seeking degrees in the various faculties. He wished them success in their career and stressed being honest and committed to what they aspire to and keep the vision in life. He lauded the role of GNA Group both in industry and education and hoped that this would provide opportunities to the local youth in having access to high-quality education which will enable them to get employment across the globe. S. Gursaran Singh, the Chancellor, of GNA University congratulated all the degree recipients for the commencement of a new phase of their life. He stated that in a situation where the country is struggling hard to solve the problem of unemployment, the students graduating today are among the few privileged to pay tribute to their ‘Gurus’. S. Gurdeep Singh Sihra, the Pro-Chancellor, GNA University emphasized that the degree recipients should constantly ponder over the possibilities for the application of the latest updates happening in their sector to make a positive impact on the quality of life of people. He congratulated and encouraged them to spread their acquired knowledge across the globe and prove to be an asset to their alma mater. Dr. VK Rattan, the Vice-Chancellor, GNA reminded the degree recipients of the worth of education in preparing the foundation of a strong mind, hence, a strong nation, and that the responsibility to fulfill the vision of the nation lies on their young shoulders. Dr. Monika Hanspal, Dean of Academics, GNA University congratulated all the degree recipients for the commencement of a new phase of their life pay tribute to their ‘Gurus’ for all the care.” Dr. RK Mahajan, the Registrar, GNA University during his Vote of Thanks duly thanked all the Award Winners and the alumni seeking degrees for joining whole-heartedly over the virtual interface. He wished them success in their career and stressed being honest and committed to what they aspire to and keeping a clear vision in life. In his thanksgiving, he lauded the role of GNA Group both in industry and education and hoped that this would provide opportunities to the local youth in having access to high-quality education which will enable them to get employment across the globe. Overall the Convocation 2022 happily culminated with the National Anthem with the brimming faces of all the degree recipients along with their proud parents.
--मुख्यमंत्री ने दिए 3 पुलिसकर्मियों के तबादले के आदेश, मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित पंजाब के पटियाला में बीते शुक्रवार दो गुटों में जुलूस के दौरान हिंसा भड़क गई। इसके बाद शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और रात 7 बजे से सुबह 6 बजे तक क्षेत्र में कर्फ्यू लगाया गया। जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके बाद पंजाब सरकार ने कई अधिकारियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। सीएम के निर्देश पर पटियाला के IG, SP और SSP का ट्रांसफर किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मुखविंदर सिंह चिन्ना को नया आईजी पटियाला नियुक्त किया गया है, जबकि दीपक पारिक और वजीर सिंह को क्रमशः पटियाला का नया एसएसपी और एसपी नियुक्त किया गया है। जिले में सुबह साढ़े नौ बजे से शाम छह बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद रखी गयी। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं (2जी/3जी/4जी/सीडीएमए) , सभी एसएमएस सेवाएं और वॉयस कॉल को छोड़कर मोबाइल नेटवर्क पर प्रदान की जाने वाली सभी डोंगल सेवाएं आदि" शनिवार शाम 6 बजे तक के लिए बंद कर दी गई हैं। साथ ही श्री फतेहगढ़ साहिब में धारा 144 लगायी गयी। पटियाला हिंसा के बाद शिव सेना हिंदुस्तान, शिव सेना बाल ठाकरे और अन्य हिंदू संगठनों ने पटियाला में बंद का ऐलान किया।
देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी पड़ रही है। देश के कई राज्य लू की चपेट में हैं। कई प्रदेशों में तापमान 46 डिग्री तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग की ओर से कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी महानिदेशक डॉ. एम महापात्र के मुताबिक अप्रैल 2022 में उत्तर पश्चिमी और मध्य भारत में औसत अधिकतम तापमान पिछले 122 सालों में क्रमशः 35.90 डिग्री सेल्सियस और 37.78 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे अधिक है। पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों और उत्तर-पूर्व भारत के उत्तरी हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान की संभावना है। दिल्ली में भीषण गर्मी की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर चिलचिलाती धूप में तप रहा है। लोग गर्मी से राहत पाने के लिए तरस रहे हैं। शनिवार को दोपहर 12 बजे तक दिल्ली का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। सफदरजंग वेधशाला ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन अधिकतम तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया था। वही इससे पहले 18 अप्रैल, 2010 को दिल्ली में अधिकतम तापमान 43.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। वही उत्तर प्रदेश के इलाकों में पारा 46 डिग्री के पार पहुंच गया है। राजस्थान के गंगानगर में पारा 46.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में पारा 4.2 डिग्री दर्ज किया गया है। इस साल मार्च महीने की शुरूआत से ही गर्मी ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भीषण गर्मी की वजह से लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं, मौसम विभाग ने भीषण गर्मी को लेकर आज कई राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी जारी की है। इसके अलावा महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और झारखंड के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है।
देश में कोरोना एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। तेजी से बढ़ते मामले प्रशासन और लोगों की चिंता को बढ़ा रहे हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 3 हजार 688 नए मामले दर्ज हुए हैं जो कल के मुकाबले ज्यादा है। वहीं, इस दौरान 50 लोगों की महामारी के चलते मौत हुई है। इन नए मामलों के बाद अब एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 18 हजार 684 हो गई है। वहीं, देश में कुल आंकड़े की बात करें तो ये संख्या 4 करोड़ 30 लाख 75 हजार 862 तक जा पहुंची है। इसके साथ ही देश भर में मरने वालों का आंकड़ा 5 लाख 23 हजार 803 हो गया है। 29 अप्रैल के कोरोना बुलेटिन के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 24 घंटे में 1607 नए कोरोना केस दर्ज हुए है। जानकारी के मुताबिक, 4 फरवरी के बाद से आंकड़ा सबसे ज्यादा दर्ज हुआ है। इस दौरान 2 मरीजों ने दम तोड़ा है। वहीं, अब दिल्ली में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5609 हो गई है।
Lieutenant General Baggavalli Somashekar Raju will take over as the Vice Chief of the Army Staff on May 1, 2022. An alumnus of Sainik School Bijapur and National Defence Academy, he was commissioned in the Jat Regiment on December 15, 1984. Prior to taking over as the Vice Chief of the Army Staff, the Lieutenant General was tenanting the appointment of Director General Military Operations during the standoff on the LAC. This is a rare incidence where an officer who has not been an Army Commander will be taking over as the Vice Chief. He commanded his Battalion during 'Operation Parakram' in the Western Theatre and in Jammu & Kashmir. He also holds the distinction of commanding the Uri brigade along the Line of Control, a Counter Insurgency Force, and the Chinar Corps in the Kashmir Valley. The officer also served as the Commandant, of the Indian Military Training Team in Bhutan. During his illustrious career spanning 38 years, he has tenanted many important regimental, staff, and instructional appointments in the Army Head Quarters and in field formations, including, Colonel Military Secretary Legal in the Military Secretary branch, Brigadier General Staff of the operationally active White Knight Corps, Deputy Director General Military Operations & Director General Staff Duties.
जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक खूबसूरती को हमेशा से सराहा गया है। लेकिन इस बार कश्मीर की एक खास तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है। कश्मीर में तंदूर पर कबाब बनाते एक दुकानदार की तस्वीर ने फूड से जुड़ी तस्वीरों की एक नामी प्रतियोगिता में पहला अवॉर्ड हासिल किया है। धुएं के बीच तंदूर पर कबाब बनाते दुकानदार की तस्वीर को फोटोग्राफर देवदत्त चक्रवर्ती ने खींचा है। स्ट्रीट फूड विक्रेता की इस तस्वीर के लिए देवदत्त को पिंक लेडी फूड फोटोग्राफर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड मिला है। ये तस्वीर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ली गई थी। देवदत्त चक्रवर्ती ने इस तस्वीर को एक अलग कबाबियाना नाम दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने ये तस्वीर रात को ली थी। ये तस्वीर उस जगह की है जहां काफी भीड़ भाड़ रहती है। पिंक लेडी फूड फोटोग्राफर ऑफ द ईयर अवार्ड की संस्थापक और निदेशक कैरोलाइन केन्योन ने इस खास तस्वीर को लेकर अपनी टिप्पणी करते हुआ कहा कि इस तस्वीर में खूबसूरती से लिया हुआ धुआं जो लहरा रहा है, सुनहरी रोशनी, खाना बनाते समय व्यक्ति की अभिव्यक्ति हमें आश्वस्त करने के लिए बहुत कुछ है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में पहले से कहीं ज्यादा हम प्यार के लिए आराम की जरूरत को महसूस करते हैं। उधर, फोटोग्राफर देवदत्त चक्रवर्ती ने अवॉर्ड मिलने पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि यह तस्वीर मुझे फोटोग्राफर ऑफ द ईयर बना देगा। उन्होंने बताया कि वो पिछले साल फरवरी की सर्द शाम में खयाम फूड स्ट्रीट पर कुछ तस्वीरें लेने के लिए पहुंचे थे। जहां इस तस्वीर को ली थी। उनका कहना था कि तस्वीर लेने के बाद स्ट्रीट फूड विक्रेता मुस्कुरा रहा था। बता दें कि इस प्रतियोगिता में 60 देशों से हजारों लोगों ने अपनी खींची गई तस्वीरें भेजी थी।
The recruitment process of constables for Himachal Pradesh Police is going to be completed shortly, which will be followed by medical and verification, said an official. He informed that the training of fresh recruits would tentatively start from 4th July 2022 and the Recruit Training Course (RTC) will run at 3 different centers simultaneously, due to a large number of recruits. The General Entry recruits will be trained at Police Training College, Daroh, District Kangra. These include both male and female recruits. The ex-servicemen recruits will be given training at the 1st Indian Reserve Battalion, Bangarh, District Una. The recruits of the driver cadre will be imparted training at the 4th Indian Reserve Battalion Jangalberi, District Hamirpur. All these training centers are well equipped to provide the most modern and contemporary training to the fresh recruits.
The Himachal Pradesh government has made important changes in the State Industrial Policy, 2019 to promote growth in the sector in the state, an official of the Industry department said on Friday. He said that the State Government had notified the Himachal Pradesh Industrial Investment Policy, 2019 on 16th August 2019 to provide incentives, concessions, and facilities for the Promotion of Investment in the State. Major incentives include 50 percent subsidy towards the cost of detailed project report, 3 percent interest subvention, 50 percent assistance for transportation of Plant and Machinery, 3.5 percent Transport subsidy, 50 percent assistance for quality certification, 25 percent assistance for setting up of Effluent Treatment Plant, 50-90 percent Net SGST reimbursement, etc. for MSME, Large and anchor enterprises. He said that on the basis of demand raised by Industrialists and field offices, the State Government today made some major changes in the State Industrial Policy. It redefined anchor enterprises as the first industrial enterprise in a notified industrial area or the first such unit outside an industrial area in a particular development block of a district with a minimum fixed capital investment. Enterprises with a minimum fixed capital investment of Rs. 200 crores and employing a minimum of 200 bonafide Himachalies would fall under Category A. Enterprises with a minimum fixed capital investment of Rs. 150 crores and employing minimum of 150 Bonafide Himachalies would fall under Category B. Enterprises with a minimum fixed capital investment of Rs. 100 crore and employing a minimum of 100 Bonafide Himachalies would fall under Category C. He said that Cost accountants were also included in the definition of consultant. Sunset clause for providing incentives under Policy extended from 31st December 2022 up to 31st December 2025. The eligible enterprise for availing SGST reimbursement who could not claim due to pending assessment of net SGST by the State Taxes & Excise Department could apply up to 31st December 2022. He said that a 5 percent reservation of land/plots/sheds shall be done where such land is to be used for the purpose of setting up of enterprise by the person(s) with Disability either individually or collectively in new notified Industrial Areas. Existing, as well as new Enterprises providing 5 percent employment to the persons with benchmark disability in the total workforce, would be eligible for an additional incentive of Rs.1000 per month per such employee for a period of 03 years, he added. The spokesperson said that new development blocks Shri Naina Devi Ji, Bali Chowki, Dhanotu, Nihri, Churag, Totu, Kupvi, Kothkhai, Tilordhar added to category B areas of the state. Skill Development Centre, Health Infrastructure, Hospital, Common Effluent Treatment Plant, Sewage Treatment Plant, Distribution of universal design, consumer product and accessories for general use of persons with disabilities also included in the list of specified category of service activities, he added.
पटियाला मामले में शिवसेना ने अपने ही नेता को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताते हुए बर्खास्त कर दिया है। शिवसेना ने पार्टी के नेता हरीश सिंगला को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पंजाब में शिवसेना प्रमुख योग राज शर्मा की तरफ से जारी किए गए प्रेस नोट में इस संबंध में जानकारी शेयर की गई है। इसके साथ ही पटियाला में हुई हिंसा के बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। ये कर्फ्यू शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक के लिए लगाया गया है। पटियाला पुलिस ने कहा है कि हिंसा के मामले में FIR भी दर्ज होंगी और गिरफ्तारियां भी की जाएंगी। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच पीस कमेटी की मीटिंग करवाने की कोशिश की जा रही है। वहीं हिंसा के बाद सीएम ने एक बैठक भी की थी। पटियाला में हुई हिंसा की घटना पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि पटियाला में झड़प की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने डीजीपी से बात की, इलाके में शांति बहाल कर दी गई है। सीएम ने कहा कि हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और किसी को भी राज्य में अशांति पैदा नहीं करने देंगे। पंजाब की शांति और सद्भाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने स्थिति की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं घटना पर पटियाला जोन के आईजी राकेश अग्रवाल ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों और अफवाहों की वजह से ये घटना हुई है। हम शहर में फ्लैग मार्च कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि अफवाहों से बचें। पुलिस और सिविल प्रशासन ने सब कंट्रोल कर लिया है। कल पीस कमेटी की मीटिंग बुलाई है वो हम कल कर रहे हैं. लोगों से अपील है कि शांति बना कर रखें।
पिछले 2 महीने से रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। इन 2 महीनों में रूस ने युक्रेन के कई बड़े शहरों को तबाह कर दिया है। लाखों लोग अपने देश छोड़ पड़ोसी देशों में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। अब सेटेलाइट इमेज से जानकारी सामने आ रही है कि रूस ने इस जंग के मैदान में डॉल्फिन को उतार दिया है। दरअसल रूस ने काला सागर के नौसैनिक मिलिट्री अड्डे पर ट्रेंड मिलिट्री डॉल्फिन को तैनात किया है। इस तस्वीर के बाद क्यास लगाये जा रहे हैं कि रूस नौसेना के बेड़े पर पानी के भीतर से होने वाले हमले को रोकने के लिए डॉल्फिन का इस्तेमाल कर रहा है। बता दें कि यूएस नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) ने सैटेलाइट इमेज की जांच की। जांच से पता चला की फरवरी में जब रूस ने यूक्रेन पर अटैक की शुरुआत की थी तभी दो डॉल्फिनों को सैन्य अड्डे पर ले जाया गया था। वहीं सैन्य कार्यों के लिए डॉल्फिनों को ट्रेंड करवाने का पुराना इतिहास रहा है। रूस इन डॉल्फिन्स का इस्तेमाल समुद्र के नीचे मौजूद चीजों को खोजने और दुश्मन के गोताखोरों का पता लगाने के लिए करता है।
उत्तर भारत समेत देश की राजधानी में गर्मी का कहर लगातार चरम पर बना हुआ है। इन दिनों अधिकतम तापमान 40 डिग्री के पार मापा जा रहा है जिसके चलते कई राज्यों के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। आईएमडी के अनुसार दिल्ली में मौसम साफ रहेगा और तेज धूप निकलेगी, जिसकी वजह से अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आस-पास दर्ज होने की संभावना है। दिल्ली में आज जहां अधिकतम तापमान 44 रहने का अनुमान है तो वहीं न्यूनतम तापमान 29 रह सकता है। इससे पहले गुरुवार को सफदरजंग वेधशाला में अधिकतम तामपान 43.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो पिछले 12 साल में अप्रैल महीने में सबसे ज्यादा है। मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली में रविवार को आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे अस्थायी रूप से गर्मी से राहत मिल सकती है। राज्य के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है लेकिन कही भी भारी बारिश होने का अनुमान नहीं है। राज्य में अगले कुछ दिन बादल छाए रहेंगे। अधिकतर जिलों में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रह सकता है तो वहीं अधिकतम तापमान 26 डिग्री के रहने का अनुमान है। हालांकि राज्य में हीट वेव वाली गर्मी नहीं रहेगी।
देश में कोरोना के मामने दिन पर दिन अपनी रफ्तार पकड़ते दिख रहे हैं। तेजी से बढ़ते मामलों को देख प्रशासन और लोग चिंता में आ गए हैं। पिछले 24 घंटे में देश में 3,377 नए मामले दर्ज हुए हैं तो वहीं 66 लोगों की इस दौरान मौत हुई है। कोरोना के इन नए मामलों के दर्ज होने के बाद अब आंकड़ा 4 करोड़ 30 लाख 72 हजार 176 तक जा पहुंचा है। देश में एक्टिव मामलों की संख्या पर नजर डालें तो इस वक्त 17 हजार 801 मरीज सक्रिय हैं। वही, अब तक 4 करोड़ 25 लाख 30 हजार 622 लोग इस महामारी से ठीक हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामले फिर से हर दिन बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कोरोना के 258 नए मामले सामने आए हैं। ये लगाातार दूसरा दिन है जब राज्य में कोरोना के 250 से ज्यादा मामले सामने आए है। गुरुवार को भी राज्य में कोरोना के 261 मामले सामने आए थे। हालांकि पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कोरोना से एक की मौत हुई है।
कर्नाटक में एक ऐसा मामला सामने आया है जो काफी दर्दनाक है। कर्नाटक में लुका-छिपी खेलने के दौरान फ्रीजर में छिपने से 2 लड़कियों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक कर्नाटक के मैसूर जिले में मासेज गांव है। यहां नागराजू और चिक्कदेवम्मा की बेटी भाग्या (12 साल) पड़ोस में ही रहने वाले राजनायक और गोरम्मा की बेटी काव्या (7 साल) के साथ लुका-छिपी खेल रही थी। इनके साथ कुछ और बच्चे थे। काफी देर तक ये लोग लुका-छिपी खेलते रहे। जब भाग्या और काव्या का छिपने का नंबर आया तो इन्होंने जगह की तलाश शुरू की। इस दौरान इन्हें छिपने के लिए आइसक्रीम बॉक्स यानी फ्रीजर नजर आया। दोनों बच्चियां उसमें जाकर छिप गईं। उन्होंने उसका ढक्कन भी लगा दिया। दम घुुटने से इन दोनों की मौत हो गई।
देश में एक तरफ से जहां लगातार भीषण गर्मी पड़ रही है और कई राज्यों में तापमान 40 के पार है तो वहीं दूसरी तरफ पावर प्लांट्स में कोयले की कमी ने इस संकट को और गहरा दिया है। इसको लेकर जहां दिल्ली सरकार ने केन्द्र को आगाह करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के मेट्रो और अस्पतालों की सेवा पर असर इसका पड़ सकता है, तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष बिजली संकट को लेकर केन्द्र सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस प्रवक्त रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट करते हुए मोदी सरकार से सवाल किए और उसका उन्होंने जवाब मांगा। उन्होंने लिखा है कि आज 29 अप्रैल को 11 बजे तक देश में बिजली की मांग 12 हजार मेगावाट है। आज एनर्जी एक्सचेंज में बिजली खरीद की कीमत 12 रुपये प्रति यूनिट है। अगर केन्द्र सरकार आगे बढ़ मदद नहीं करेगी तो राज्य मंहगी बिजली कैसे खरीदेंगे? अब तक 12 रुपये में भी बिजली नहीं मिलती है।
बिजली संकट का असर देश की राजधानी पर भी पड़ता दिख रहा है। कोयले की किल्लत से गहराते बिजली संकट के बीच दिल्ली सरकार ने मेट्रो, अस्पतालों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निर्बाध (बिना बाधित) बिजली आपूर्ति मुहैया कराने में असमर्थता जताई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में बिना बाधित बिजली सप्लाई करना बहुत लंबे समय तक संभव नहीं है और इसमें दिक्कत आ सकती है। दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्थिति का आकलन करने के लिए गुरुवार को एक आपातकालीन बैठक की और केंद्र को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि वह दिल्ली को बिजली की आपूर्ति करने वाले बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
महाराष्ट्र से शुरू हुआ लाउडस्पीकर विवाद अब धीरे-धीरे दूसरे राज्यों में जाता दिख रहा है। कई राज्यों में सरकार इसे लेकर दिशा निर्देश जारी कर चुकी है। इस दिशा निर्देश के बाद लोकल स्तर पर प्रशासन ने भी इन्हें लागू कराना शुरू कर दिया है। इन सबके बीच वहां की सियासत भी गरमाने लगी है। महाराष्ट्र से चलकर लाउडस्पीकर विवाद सबसे पहले उत्तर प्रदेश पहुंचा। यहां पिछले दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे लेकर कई दिशा निर्देश दिए और बिना अनुमति के लगे लाउडस्पीकरों को हटाने के आदेश दिए। 23 अप्रैल को इस संबंध में आदेश का नोटिफिकेशन भी जारी हो गया। इस आदेश के बाद ही पुलिस एक्शन में आ गई और लगातार यूपी के अलग-अलग जिलों में अभियान चलाकर धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जा रहे हैं। अगर यूपी के गाजियाबाद की बात करें तो यहां गुरुवार को ही पुलिस ने करीब 250 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए। पूरे प्रदेश की बात की जाए तो अब तक यहां 37002 लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। 54593 लाउडस्पीकर से आवाज कम की जा चुकी है। लाउडस्पीकर विवाद का ही नतीजा है कि इस बार यूपी सरकार ने अलविदा जुमे की नमाज के मौके पर भी रोड पर नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी है। लाउडस्पीकर विवाद मध्य प्रदेश तक भी पहुंच चुका है। यहां खारगोन में राम नवमी के दौरान हुई हिंसा के बाद से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव की स्थिति है। वहां अब भी कर्फ्यू लगा है। टेंशन के बीच लाउडस्पीकर विवाद यहां भी पहुंचा गया है।
एंटी ड्रग्स एजेंसी NCB की दिल्ली यूनिट ने शाहीन बाग के जामिया नगर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 50 किलो हेरोइन और 47 किलो संदिग्ध नार्को बरामद किया है। इस दौरान 30 लाख कैश और नोट गिनने की मशीन भी एक घर से मिली है। DDG दिल्ली उत्तरी क्षेत्र ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि ये सारा सामान जूट के बैग और अन्य बैग में बांधा हुआ था। ड्रग्स की बरामदगी आवासीय परिसर से बुधवार को की गई। उन्होंने कहा कि अभी हमने 1 व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है। अभी तक की कार्रवाई से यह लगता है कि इसके पीछे एक अंतराष्ट्रीय संगठन का हाथ है और हम जल्द ही इसका पर्दाफाश करेंगे। एनसीबी के मुताबिक, अफगानिस्तान से ये हेरोइन आई थी, वहीं कैश हवाला के जरिये लाया गया था। ड्रग्स समंदर के रास्ते और बॉर्डर के रास्ते से लाई गई थी। फ्लिपकार्ट की पैकिंग में हेरोइन को पैक करके लाया जाता था।
तेल कंपनियों की तरफ से आज भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 105.41 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 96.67 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत 120.51 रुपये व डीजल की कीमत 104.77 रुपये प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल का दाम 115.12 रुपये जबकि डीजल का दाम 99.83 रुपये प्रति लीटर है। वहीं चेन्नई में भी पेट्रोल 110.85 रुपये प्रति लीटर तो डीजल 100.94 रुपये प्रति लीटर है। बता दें कि पिछले वर्ष 4 नवंबर के बाद से इन दोनों ईंधन के मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। सरकार के राजनीतिक विरोधियों का आरोप था कि पांच राज्यों के चुनाव के कारण मोदी सरकार ने तेल कंपनियों को मूल्य बढ़ाने से रोक रखा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 112 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने के बाद रविवार को तेल कंपनियों ने डीजल के थोक खरीदारों के लिए मूल्य में 25 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। तेल डीलरों का कहना है कि खुदरा मूल्य में धीरे-धीरे वृद्धि की जाएगी। बता दें कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पेट्रोल का भाव 100 रुपये से ऊपर चल रहा है। मुंबई में पेट्रोल की कीमत सबसे अधिक है।
प्रदेश में गर्मी का पारा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में अप्रैल में सामान्य से 4 से 5 डिग्री तापमान ज्यादा दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 28 से 30 मई तक ऊंचाई व मध्यवर्ती इलाको में अंधड़ व हल्की बारिश की चेतावनी जारी की है। जिससे झुलसाने वाली गर्मी से कुछ राहत मिलने के आसार है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेन्द्र पाल ने कहा कि शिमला का तापमान 27.1 दर्ज किया गया है जो सामान्य से ज्यादा है। इससे पूर्व 2016 में अप्रैल में 27.5 दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अन्य निचले इलाकों में 40 डिग्री तक तापमान पहुंच गया है। प्रदेश में आज से दो दिन ऊंचाई व मध्यवर्ती ऊंचाई वाले इलाकों में अंधड़ चलने की चेतावनी जारी की गई है। जिससे तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 296 अंक या 0.52 फीसदी की उछाल के साथ 57,115 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी सूचकांक ने 93 अंक या 0.55 फीसदी की तेजी लेते हुए 17,132 के स्तर पर कारोबारी की शुरुआत की। बाजार खुलने के साथ ही लगभग 1525 शेयरों में तेजी आई है, 398 शेयरों में गिरावट आई है और 78 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे पहले बुधवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुलकर दिनभर के कारोबार के बाद अंत में लाल निशान पर बंद हुआ था। बीएसई का सेंसेक्स सूचकांक 538 अंक फिसलकर 56,819 के स्तर पर, जबकि एनएसई का निफ्टी सूचकांक 162 अंक की कमी के साथ 17,038 के स्तर पर बंद हुआ था।
Gold Silver Price: गुरुवार को एमसीएक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। सोने की कीमत 0.40 फीसदी की कमी के साथ 50,994 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गई, जबकि चांदी के दाम में 0.88 फीसदी की गिरावट आई और इसका भाव कम होकर 64,111 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। बता दें कि आभूषण बनाने के लिए ज्यादातर 22 कैरेट का ही इस्तेमाल होता है। कुछ लोग 18 कैरेट सोने का भी इस्तेमाल करते हैं। आभूषण पर कैरेट के हिसाब से हॉल मार्क बना होता है। 24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999 लिखा होता है, जबकि 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है।
Weather: देश की राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत में दिन पर दिन गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राज्यथान समेत कई राज्य हीट वेव की चपेट में रहेंगे। मध्य प्रदेश में हीट वेव लगातार अगले कुछ दिनों तक परेशान करती रहेगी। राज्य के अधिकतर जिलों में आज यानि वीरवार को न्यूनतम तापमान 27 डिग्री तो वहीं अधिकतम तापमान 42 डिग्री तक रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, आज से अगले पूरे हफ्ते तक मौसम का हाल कुछ ऐसा ही बना रहेगा। साथ ही अगले दो दिन के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी कर दिया है। वंही राजस्थान में भी लू का कहर देखने को मिल रहा है। राज्य में आज से 1 मई से लू से थोड़ी राहत मिलते दिखेगी। कुछ जिलों में हल्की बारिश होने का भी अनुमान जाहिर किया गया है। हालांकि तापमान 40 डिग्री के पार ही बना रहेगा। आज की अगर बात करें तो राज्य के अधिकतर जिलों में आज अधिकतम तापमान 43 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 31 डिग्री रह सकता है। मौसम विभाग ने तापमान की स्थिति को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया हुआ है। यूपी में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। राज्य में 2 मई के बाद गर्मी से थोड़ी राहत देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के अधिकतर सभी जिलों में 2 मई से पहले अधिकतम तापमान 40 के पार ही बना रहेगा। वंही, 2 मई के बाद ये पारा गिरकर 36 डिग्री तक आ सकता है। आज की अगर बात करें तो राज्य के अधिकतर हिस्सों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री रह सकता है तो वहीं न्यूनतम तापमान 26 डिग्री रह सकता है। वंही उत्तराखंड राज्य के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है लेकिन कही भी भारी बारिश होने का अनुमान नहीं है। राज्य में अगले कुछ दिन बादल छाए रहेंगे। अधिकतर जिलों में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रह सकता है तो वहीं अधिकतम तापमान 27 डिग्री के रहने का अनुमान है। हालांकि राज्य में हीट वेव वाली गर्मी नहीं रहेगी।
Booster Dose: भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अब सरकार जल्द ही कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक और बूस्टर डोज के बीच के अंतराल को कम कर सकती है। जानकारी के मुताबिक, टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह यानी NTAGI इस अंतराल को कम करने की सिफारिश कर सकता है जिसपर 29 अप्रैल को बैठक होने वाली है। दरअसल ICMR की जांच में पता चला है कि प्रारंभिक टीकाकरण से करीब छह महीने बाद एंटीबॉडी का स्तर कम होने लगता है। बूस्टर खुराक देने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। जिस कारण जांच के आधार पर अब वैक्सीनेशन की दूसरी डोज और बूस्टर डोज के बीच का अंतर 9 महीने से घटा कर 6 महीने करने की पूरी संभावना है।
देश के कई हिस्सों में बिजली संकट पैदा हो गया है और बिजली में कटौती देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य बिजली संकट से जूझ रहे हैं वहीं इसके पीछे कोयला की भारी कमी बतायी जा रही है। बिजली घरों में कोयले की कमी को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने कोयला ले जाने वाली मालगाड़ियों को यात्री गाड़ी से पहले ग्रीन सिग्नल देने का निर्देश दिया है। रेलवे ने इसके अलावा, 28 अप्रैल यानी आज से 8 पैसेंजर गाड़ियों को अगले आदेश तक रद्द भी कर दिया है। वहीं, इस सब के बीच बिजली संकट को लेकर विपक्ष मोदी सरकार पर तीखा प्रहार कर रहा है।
The Uniform Civil Code is back in the news again. On Tuesday, the All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) called attempts by various state governments and the Centre to introduce a Uniform Civil Code in India “an unconstitutional and anti-minorities move”. The Muslim law board’s comment came a day after Uttarakhand Chief Minister Pushkar Singh Dhami said that his government was preparing the first draft of a Uniform Civil Code to be implemented in the state. Before the Uttarakhand Assembly election, Dhami had said that a UCC would be implemented in the state if BJP is voted back to power and his government now seems to be working on its promise. But what is a Uniform Civil Code? Will Uttrakhand be the first state to introduce a UCC? Which other states are planning to bring in a UCC? How will it affect the citizens of India and why is there so much opposition to it? India Today dives deep into the issue and tries to explain it. WHAT IS A UNIFORM CIVIL CODE? The Uniform Civil Code, which comes under Article 44 of the Constitution of India, proposes to introduce personal laws that would apply to all citizens equally, irrespective of their religion, gender, caste, etc. Uniform Civil Code essentially refers to a common set of laws governing personal matters such as marriage, divorce, adoption, inheritance, and succession. Article 44 states, “The State shall endeavour to secure for the citizens a uniform civil code throughout the territory of India”. However, since the article comes under the directive principles of state policy, they are regarded as only guidelines and it is not mandatory to use them. At present, the personal laws of various communities are largely governed by their religion
While virtually interacting with the Chief Ministers of several States today, Prime Minister Narendra Modi warned that the Covid challenge has not yet been over. Despite managing the Covid crisis we can see an uptick in cases in the States now. We have to stay alert, Shri Modi said. Chief Minister Jai Ram Thakur also attended the meeting virtually from Shimla. Union Home Minister Amit Shah conducted the proceedings of the meeting. During this Secretary Health made a detailed presentation regarding Covid situation in the country. Health Minister Dr. Rajiv Saizal, Chief Secretary Ram Subhag Singh, Principal Secretary to Chief Minister Subhasish Panda, Director NHM Hemraj Bairwa also attended the meeting with the Chief Minister at Shimla.
तमिलनाडु के तंजावुर में एक बड़ा हादसा हुआ है। तंजावुर जिले में बुधवार सुबह मंदिर उत्सव के दौरान यह हादसा हुआ है जिसमें करंट लगने से 11 लोगों की जान चली गई है। जानकारी के मुताबिक जुलूस के वक्त रथ ऊपर से गुजर रहे हाई टेंशन तार के कॉटैक्ट में आ गया जिसके बाद पूरे रथ पर करंट फैल गया और आग लग गई। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु सड़क से गुजर रहे थे तभी किसी तरह ऊपर से गुजर रहा बिजली का तार रथ के संपर्क में आ गया और करंट फैल गया। इस हादसे में कई लोगों के घायल होने और झुलसने की भी खबर है। मौके पर उच्च अधिकारियों ने पहुंचकर राहत और बचाव का काम किया। हादसे के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया गया है। इलाके के आईजीवी बालकृष्णन ने बताया कि इस हादसे में 15 लोग घायल है। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान रथ बिजली के नंगे तार के संपर्क में आ गया था जिसके बाद यह हादसा हुआ है। जावुर जिले में बुधवार सुबह मंदिर उत्सव के दौरान यह हादसा हुआ है जिसमें करंट लगने से 11 लोगों की जान चली गई है। जानकारी के मुताबिक जुलूस के वक्त रथ ऊपर से गुजर रहे हाई टेंशन तार के कॉटैक्ट में आ गया जिसके बाद पूरे रथ पर करंट फैल गया और आग लग गई।
देश में बढ़ते हुए कोरोना के मामलों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्रियों से बातचीत की है। इस बातचीत का उद्देश्य राज्यों में कोविड के नियमों को फिर से लागू करने पर था जिससे कोरोना के बढ़ते मामलों को समय रहते रोका जा सके। प्रधानमंत्री के साथ हुई इस मीटिंग के बाद महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि अगर हम महाराष्ट्र की बात करें तो अभी यहां पर कोरोना के मामले उतने नहीं बढ़ रहे हैं। इसलिए चिंता की बात नहीं है, लेकिन हम सबको समय रहते जरूरी कदम उठाये जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य के सभी जिलों के जिला अधिकारियों से बात करने वाले हैं। इस बातचीत पर कोरोना की स्थिति और उसके रोकथाम को लेकर कदम उठाने पर बात की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इस बात की संभावना जताई कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे मास्क फिर से अनिवार्य करने को लेकर विचार विमर्श कर रहे हैं, लेकिन अभी उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। आपको बता दें कि देश के कई राज्यों में मास्क अनिवार्य कर दिया गया है साथ ही मास्क ना लगाने वालों पर दंड भी लगाया गया है। इसी को देखते हुए महाराष्ट्र में भी मास्क लगाने को लेकर सरकार जल्द ही निर्णय ले सकती है।
मोदी सरकार देश में बड़े कानून बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने नामी लॉ यूनिवर्सिटीज, सांसदों, कानूनविदों और पूर्व जजों से सुझाव भी मांग लिए है। सुझाव मिलने के बाद मोदी सरकार कानूनों में बड़े बदलाव करेगी। जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट में बदलाव किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इसे लेकर सुझाव मांगे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि बहुत से कानून अब अप्रासंगिक हो चुके हैं, जबकि बहुत से नए नेचर के मामले आ चुके हैं, जिसमें पॉलीग्राफ टेस्ट, डीएनए टेस्ट आदि की धाराएं नहीं हैं। इसलिए गृहमंत्री अमित शाह ने देश की नामी लॉ यूनिवर्सिटी, कानूनविद, सांसदों, पूर्व आईपीएस अधिकारियों और पूर्व जजों से कानूनों में बदलाव को लेकर सुझाव मांगे हैं। साथ ही एसपी सिंह बघेल ने ये भी कहा कि इनका यूनिफॉर्म सिविल कोड से कोई लेना-देना नहीं है।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज नई दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में प्रदेश मीडिया केन्द्र का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज नई दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में प्रदेश मीडिया केन्द्र का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मीडिया कर्मियों के साथ नियमित संवाद को एक प्रभावी मंच प्रदान करने के लिए यह मीडिया केन्द्र स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस सेन्टर का निर्माण 16.5 लाख रुपये की लागत से किया गया है और यहां पत्रकारों को मूलभूत सुविधाएं तथा कार्यस्थल की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। इस अवसर पर राष्ट्रीय मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सामाजिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है तथा पिछली सरकार के 400 करोड़ रुपये तुलना में इस पर 1300 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वृद्धजनों को अधिक संख्या में लाभान्वित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा 70 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष किया गया है। प्रदेश में 6,35,375 व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के अन्तर्गत 20 लाख लोगांे को लाभान्वित किया जा रहा है जबकि इस योजना से छूटे पात्र लाभाथर््िायों कोे मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अन्तर्गत अब तक लगभग 2.40 लाख लोगों ने निःशुल्क उपचार सुविधा का लाभ उठाया है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी घरों को गैस कुनैक्शन प्रदान करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि लगभग एक लाख लोगों को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के अन्तर्गत लाया गया है तथा प्रदेश सरकार ने शेष व्यक्तियों को कवर करने के लिए मुख्यमंत्री गृहिणी सुविधा योजना शुरू की है जिसके अन्तर्गत 3.25 लाख गैस कुनैक्शन प्रदान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों लाभान्वित करने के लिए शुरू की गई अभिनव योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री सहारा योजना, मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना, मुख्यमंत्री शगुन योजना इत्यादि के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के लिए जन मंच शुरू किया गया है। हर माह, हर जिले में मंत्रियों की उपस्थिति में जन मंच का आयोजन किया जाता है और लोगों की शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जाता है। जन शिकायतों के समाधान के लिए मुख्यमंत्री सेवा हेल्पलाइन-1100 भी एक और प्रभावी मंच है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि धर्मशाला में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और दो ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के परिणामस्वरूप 41000 करोड़ का निवेश आया है। मुख्यमंत्री ने कोविड प्रबंधन के लिए किए गए प्रभावी उपायों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य कोविड टीकाकरण की पहली और दूसरी खुराक लगाने वाला देश में पहला राज्य है। हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर, मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, प्रधान अवासीय आयुक्त एस.के. सिंगला, निदेशक पर्यटन अजित कश्यप, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क हरबंस सिंह ब्रसकोन सहित अन्य इस अवसर पर उपस्थित थे।


















































