सरकार ने भारत में रह रहे अफगानिस्तान सहित सभी देशों के नागरिकों के सभी श्रेणी के वीजा को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि अफगानिस्तान के हालात को देखते हुए भारत में रह रहे किसी भी अफगान को बिना मंजूरी देश छोड़ने को नहीं कहा जाएगा। दरअसल एक पखवाड़ा पहले तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद नए शासकों के बदले की कार्रवाई से डरकर कई अफगान भारत आ गए थे। सरकार ने यह फैसला उस घटना के बाद लिया है, जिसमें एक अफगान महिला सांसद रंगीना कारगर को वैध दस्तावेज होने के बावजूद दिल्ली हवाईअड्डे से वापस इस्ताम्बूल भेज दिया गया था। सरकार ने हालांकि बाद में इसके लिए खेद जताया था।
शिमला: उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा सोमवार को प्रदेश के निजी और सरकारी कॉलेज प्रिंसिपलों को कॉलेजों में छह माह की एक साथ हॉस्टल और मेस फीस वसूल करने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। कोरोना काल में अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का हवाला देते हुए प्रिंसिपलों को विद्यार्थियों द्वारा मासिक या द्विमासिक आधार पर ही शुल्क लेने के लिए कहा गया है। उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा बताया कि प्रदेश के कई डिग्री, बीएड, लॉ और संस्कृत के निजी और सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों से छह माह या उससे अधिक समय की हॉस्टल और मेस फीस लेने की शिकायतें उन्हें मिली हैं। जिसके चलते उन्होनें बताया कि कोरोना काल के चलते बीते वर्ष से अभिभावकों की स्थिति अभी पटरी पर नहीं आ सकती। इस परिस्थिति के चलते अभिभावक छह माह की फीस चुकाने के लिए असमर्थ हैं। ऐसे मामलों के विद्यार्थियों से केवल एक या दो माह की हॉस्टल और मेस फीस ही वसूली जाए।
पहले मौसम की मार ने सेब की गुणवत्ता पर असर डाला, फिर रही सही कसर निजी कंपनियों ने सेब खरीद के कम दाम तय कर पूरी कर दी। इस पर कम दामों पर आयात हो रहे सेब से तो बाजार के सेंटीमेंट ही बिगड़ गए। निराश बागवानों को सरकार से हौंसला चाहिए था, पर मिले हताश करने वाले बयान। आखिर समस्या कहां है, कोई चूक हुई है, या खामी व्यवस्था की है ? इससे भी बड़ा सवाल ये है कि ये सिर्फ आज का मसला है या भविष्य के लिए एक चेतावनी है। गिरे सेब के दामों के मसले को फर्स्ट वर्डिक्ट ने हर पहलु से जानने-समझने का प्रयास किया, ताकि सही तस्वीर सामने आ सके। पेश है विशेष रिपोर्ट ..... हिमाचल सेब के दाम बाजार में गिर गए हैं जो बागवानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार सेब के दामों में करीब तीस फीसद की गिरावट दर्ज की जा रही है जिसका एक बड़ा कारण निजी कंपनियों द्वारा गिराए गए सेब के दाम बताया जा रहा है। अडानी कंपनी ने पिछले साल की तुलना में सेब के दाम प्रति किलो 16 रुपए कम तय किए है। बागवान मानते है कि कंपनी ने जैसे ही सेब खरीद मूल्य सार्वजनिक किये पूरे बाजार में सेब के दाम गिर गए। कंपनी 80 से 100 फीसदी रंग वाला एक्स्ट्रा लार्ज सेब 52 रुपए प्रति किलो जबकि लार्ज, मीडियम और स्मॉल सेब 72 रुपए प्रति किलो की दर पर खरीद रही है। बीते साल एक्स्ट्रा लार्ज सेब 68 जबकि लार्ज, मीडियम और स्मॉल सेब 88 रुपए प्रति किलो निर्धारित किया गया था। अडानी के बाद मंडियों के रेट भी कम होने से बागवान नाराज हैं। इस सीजन में 60 से 80 फीसदी रंग वाला एक्स्ट्रा लार्ज सेब 37 रुपए किलो जबकि लार्ज, मीडियम और स्मॉल आकार का सेब 57 रुपए प्रति किलो की कीमत पर खरीदा गया। 60 फीसदी से कम रंग वाले सेब की खरीद 15 रुपए प्रति किलो की कीमत पर हो रही है, जबकि पिछले साल ऐसा सेब 20 रुपए किलो खरीदा गया था। बागवानों के अनुसार अडानी कंपनी ने इस साल 10 साल पुराने रेट खोले हैं। 2011 में अडानी ने 65 रुपये प्रति किलो रेट पर सेब खरीद की थी। बागवान लगातार ये आरोप लगा रहे है कि अडानी ने हिमाचल आकर पहले सेब के दाम बढ़ाए जिससे छोटे कारोबारी खत्म हो गए और अब जब कम्पटीशन कम हो गया और बागवानों के पास बहुत कम अन्य विकल्प बचे है, तो दाम घटा दिए गए। अडानी के बाद सेब खरीद करने आई देवभूमि कोल्ड चेन प्राइवेट लिमिटेड ने भी बागवानों को झटका दिया है। इस कंपनी ने भी बीते साल के मुकाबले सेब के रेट 14 रुपये तक कम किए हैं। प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट सेब की मौजूदा मार्केट, किसान के हालात और अदानी एग्री फ्रेश द्वारा खोले गए रेट का असर बताते हुए कहते है कि अगर कोई बागवान 1000 पेटी सेब पैदा करता है तो उसमें 300 पेटी सेब प्रीमियम होता है बाकी 400-500 अच्छी क्वालिटी का और बाकी सेब कटा फटा बोरी में बेचने वाला होता है। बिष्ट कहते हैं, "सबसे अच्छी क्वालिटी का रेट 72 रुपए और सबसे निचली क्वालिटी के सेब का रेट सिर्फ 12 रुपए किलो ही है। बाग में तो हर तरह का सेब निकलता है, ऐसे में पूरी फसल का औसत रेट 30-50 रुपए किलो का बैठता है।" वो आगे कहते हैं, "किसान से 50 रुपए औसत में खरीदे गए इसी सेब को अदानी 3-4 महीने बाद 150 से 200 रुपए में बेचता है। अगर प्रति किलो पर कोल्ड स्टोरेज का 20-25 रुपए किलो का खर्च भी मान ले तो कंपनी को दोगुना-तिगुना मुनाफा होता है। अडानी की कंपनी अगर सेब की खरीद के वक्त 4-5 रुपए का अच्छा रेट दे देती तो उसके मुनाफे पर फर्क नहीं पड़ता लेकिन बागवान के लिए ये रकम बड़ी हो जाती।" वैसे इसमें भी कोई संशय नहीं है कि इस बार सेब की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण मौसम की मार भी है। सालभर सेब की फसल पर मौसम के विपरीत प्रभावों के बाद अब जब बाजार में बेचने का समय आया तो सीजन की शुरुआत तो अच्छे दामों से हुई, लेकिन फिर प्रति पेटी सेब के दामों में पांच सौ से हजार रुपये की कमी आ गई है। पहले सूखा और फिर अप्रैल में हुई बेमौसमी बर्फबारी व मई माह में हुई ओलावृष्टि व तूफान ने ऊपरी शिमला के अधिकतर स्थानों में सेब की फसल पर विपरीत असर डाला है, जिससे सेब की गुणवत्ता पर बुरा प्रभाव पड़ा है। वहीं इस साल ज्यादा फसल होने के साथ सेब का साइज भी छोटा है, जिससे मंडी में आ रही फसल में हर बागवान की खेप में अच्छी दर नहीं होने से सेब के दाम कम मिल रहे हैं। बागवान ये तो मानते है कि ओलावृष्टि से काफी फसल खराब हुई है, पर उनके अनुसार इसकी आड़ में आढ़तियों, व्यापारियों और कॉरपोरेट घरानों ने गुणवत्तापूर्ण सेब के भी रेट गिरा दिए। उधर, आढ़तियों का कहना है कि इस बार रेट कम मिलने का मुख्य कारण ओलावृष्टि से फसल का बहुत ज्यादा प्रभावित होना है। खराब सेब आ रहा है, ओलों का दागी सेब जो एचपीएमसी को बोरियों में जाना चाहिए, वह भी पेटियों में जा रहा है, जिस वजह से दाम गिरे है। ईरान और टर्की का सेब भी बना आफत हिमाचल की करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की सेब की आर्थिकी के लिए ईरान और तुर्की का सेब चुनौती बन गया है। पिछले साल की अपेक्षा सेब के दाम करीब तीस फीसदी तक कम मिलने का एक कारण ये भी है। बाजार में इस बार ईरान का सेब हिमाचली सेब को पछाड़ रहा है। ईरान का सेब रंग और स्वाद में श्रीनगर और किन्नौर की सेब की बराबरी करता है, जबकि वह एक हजार से 1500 रुपये प्रति पेटी तक उपलब्ध है। यह सेब मई से आना शुरू हो जाता है। वही मौसम की मार के चलते हिमाचल से आ रहा करीब 65 से 70 फीसदी सेब दागी और छोटे आकार का है। बड़े प्रदेशों और प्रमुख शहरों में बड़े आकार के सेब की मांग रहती है, इसलिए कम मांग के कारण भी दाम प्रभावित हुए हैं। बागवानों के अनुसार भारत में अफगानिस्तान के रास्ते ईरान और तुर्की से सेब का अनियंत्रित और अनियमित आयात हो रहा है जो बागवानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। बागवान वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखकर ईरान और तुर्की से सेब आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग भी कर चुके है। इनका मानना है कि भारी मात्रा में इन देशों से सेब का आयात होने के बाद मार्केट में हिमाचली सेब की मांग कम हुई है। चिंता की बात यह है कि ईरान और तुर्की से आयात होने वाले सेब पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है, जिसके चलते हिमाचल के सेब कारोबार पर इसका नकारात्मक असर पड़ा है। दरअसल अफगानिस्तान साफ्टा (SAFTA) दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र का हिस्सा है और यहां से सेब के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ईरान इस समझौते का हिस्सा नहीं है और माना जा रहा है कि इसलिए ईरान अपना सेब अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते अटारी बॉर्डर से भारत भेजता हैं। ऐसा हो रहा है तो एक कंटेनर पर आठ लाख के करीब आयात शुल्क की चोरी हो रही है। इसके कारण ईरान का सेब सस्ता बिकता है। यदि ये सेब ईरान के रास्ते आए तो इसमें पंद्रह प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी और 35 प्रतिशत सेस लगेगा। नैफेड से खरीद क्यों नहीं ? हिमाचल के बागवानों का मानना है की उनकी स्थिति इतनी बुरी नहीं होती अगर हिमाचल में भी कश्मीर की तरह नैफेड जैसी कोई केंद्रीय संस्था बागवानों का सेब खरीदती। दरअसल कश्मीर में केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जम्मू कश्मीर के सेब उत्पादकों और व्यापारियों की मदद के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआइएस) को मंजूरी दी गई है। एमआइएस के तहत नेशनल एग्रीकल्चर कोआपरेटिव मार्केटिग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नैफेड) किसानों और व्यापारियों से सीधे सेब खरीदती है। सेब की कीमत उसकी ग्रेडिंग के आधार पर होती है। इसका भुगतान सीधे बागवानों के बैंक खाते में होता है। इस योजना के तहत तीनों ग्रेड का सेब बागवानों से खरीदा जाता है। एमआइएस के तहत सेब खरीद की प्रक्रिया में ग्रामीण आबादी के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होते है। सेबों की पैकिंग, गाड़ियों में उनकी लदाई-ढुलाई और मंडियों तक पहुंचाने के काम में कई लोगों को रोजगार मिलता है और बागवानों को सेब के अच्छे दाम मिलते है। परन्तु हिमाचल में अब तक ऐसा कुछ भी नहीं है। इसीलिए हिमाचल के बागवान मांग कर रहे है कि जम्मू कश्मीर की तर्ज पर हिमाचल में भी सेब की खरीद की जाए। बागवानों ने सरकार काे तीन अलग अलग श्रेणियों में बांट कर अलग-अलग रेट भी सुझाएं है। बागवानों की मांग के बाद सरकार भी एक्शन में है। बागवानी विभाग ने नैफेड और जम्मू-कश्मीर के बागवानी विभाग से ग्रेड सिस्टम काे लेकर जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। विभाग यह जानने में जुट गया है कि बाजार में सेब के दामों गिरावट आने के बाद कैसे उसे स्थिर किया जाए साथ ताकि बागवानाें काे नुकसान न हाे। साथ ही ग्रेड के आधार किस तरह से सेब की खरीद की जाए। मंडी मध्यस्थता योजना में सुधार की दरकार हिमाचल में एचपीएमसी द्वारा भी 'सी' कैटेगरी के सेब को पूरी तरह से बाजार से बाहर नहीं किया जा रहा। मार्किट इंटरवेंशन स्कीम के तहत जो 'सी' कैटेगरी का सेब उठाया जाता है उसे भी एचपीएमसी पूरी तरह इस्तेमाल करने के बजाए उसका ऑक्शन कर देता है। ऑक्शन के बाद जो लोग इस सेब को खरीद रहे है वो इसे फिर मार्किट में ले आते है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। मौजूदा समय में 'सी' ग्रेड सेब भी मार्केट में पहुंच रहा है। इस कारण अच्छे सेब को भी बढ़िया रेट नहीं मिल पा रहे । बागवानों के अनुसार 'सी' ग्रेड सेब को मार्केट में जाने से रोकने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। जब मार्केट में ‘ए' और 'बी’ ग्रेड सेब ही पहुंचेगा तो रेट में सुधार आएगा। मंडी मध्यस्थता योजना में सरकार 9.50 पैसे प्रति किलो की दर से सेब खरीद रही है। पर बागवानों की माने तो निम्न गुणवत्ता वाले इस सेब को परवाणू में बोली के बाद डेढ़ से ढाई रुपये प्रति किलो के दाम पर बेचा जाता है, जिसके बाद यह सेब दोबारा मार्केट में पहुंच जाता है। ऐसे में अच्छे सेब की मार्केट भी गिर रही है। बागवानों का सुझाव है कि इस सेब को बागवानों से खरीदने के बाद नष्ट कर दिया जाए और सी ग्रेड के सेब को बोरी के स्थान पर पेटी में पैक कर जूस और जैम बनाने के लिए प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाया जाए तो फायदेमंद रहेगा। मौजूदा समय में बागवान सी ग्रेड सेब को पेटियों में पैक कर मंडियों में भेज रहे हैं। गुणवत्ता सही न होने के कारण मंडियों में ऐसे सेब को सही दाम नहीं मिल रहे साथ ही अच्छे सेब के रेट भी प्रभावित हो रहे हैं। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो सरकार का सी ग्रेड सेब स्टोर करने और ऑक्शन का खर्च भी बचेगा। अडानी और लदानी के बीच नेक्सस, तय हो दाम : विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण विधायक विक्रमादित्य सिंह खुद एक बागवान भी है। विक्रमादित्य सिंह कहते है कि " सेब के दाम लगातार गिरने से प्रदेश के बागवान परेशान है। सरकार को इन बागवानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। सेब के दामों को नियंत्रित करने के लिए और बागवानों की मदद के लिए एक कमिटी का गठन किया जाना चाहिए। अडानी और लदानी के बीच में जो नेक्सस बना हुआ है, और जो बड़े निजी घराने है जो सेब को जमा करने में लगे है, इनके लिए भी दाम तय किये जाने चाहिए। इसके साथ सेब की विभिन्न ग्रेड की उचित तरीके से श्रेणियां बनाई जानी चाहिए। सेब हिमाचल की आर्थिकी का बड़ा हिस्सा है और हम इस मुसीबत के समय में किसानों बागवानों के साथ खड़े है।" लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जरूरत : बरागटा भाजपा नेता चेतन बरागटा भी एक बागवान है और इनका कहना है कि इस बार हिमाचल का सेब ओलावृष्टि के कारण काफी अधिक प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से सेब की कीमतों में गिरावट आई है। परन्तु जो अच्छी गुणवत्ता का सेब है वो अब भी 2000 से अधिक कीमत पर बिक रहा है। बरागटा मानते है कि सेब के दामों पर नियंत्रण के लिए एक लॉन्ग टर्म प्लानिंग चाहिए, एक रात में कुछ भी नहीं बदलने वाला है। फ़ूड प्रोसेसेसिंग यूनिट्स चाहिए, सीए स्टोर्स चाहिए, सेब की प्रोडक्शन में गुणवत्ता का ध्यान रखने की ज़रूरत है, ऐसी बहुत सी चीज़ें है जिनके लिए किसी ने तैयारी नहीं की। अगर इन पर काम नहीं किया गया तो ये समस्या आने वाले कई सालों तक सामने आती रहेगी। तीन अलग क्षेत्र है जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। पहला है सेब की प्रोडक्शन, दूसरा है सप्लाई चेन और तीसरा है मार्केटिंग। इन तीनों में ही बहुत सी खामियां है जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है। बागवानों और सरकार को मिलकर काम करना होगा। कांग्रेस बार -बार कह रही है की सरकार की नाकामियों की वजह से दाम कम हो गए, पिछले साल जब सेब के दाम अच्छे थे तब क्या उन्होंने सरकार की सराहना की थी। अडानी के दाम गिराने से प्रभावित हुए दाम : मुंगटा बागवान एवं जिला परिषद् सदस्य कौशल मुंगटा मानते है कि हिमाचल में सेब के दाम गिरने का सबसे बड़ा कारण अडानी द्वारा कम किये गए सेब के दाम है। बीते साल के मुकाबले इस बार प्रति किलो के हिसाब से 16 रुपए कम रेट तय किए गए हैं। अडानी हिमाचल के सेब का सिर्फ 2 प्रतिशत ही खरीदता है, परन्तु फिर भी उनके दाम गिराने से हिमाचल में सेब के दाम प्रभावित हुए है। इनका आरोप है कि सेब मंडी में अडानी के इंटरफेरेंस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। हिमाचल में सेब पर एमएसपी भी नहीं है। कश्मीर में जिस तरह नैफेड के तहत सरकार सेब खरीदती है अगर ऐसी कोई व्यवस्था हिमाचल में भी हो तो बेहतर होगा। अफगानिस्तान के रास्ते बिना ड्यूटी भारत आ रहा सेब : बिष्ट प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकिन्दर सिंह बिष्ट के अनुसार इस बार सिर्फ बाजार के कारणों की वजह से ही सेब के दाम कम नहीं हुए है, बल्कि मौसम ने भी काफी काम बिगाड़ा है। इस साल शुरुआत में काफी सूखा पड़ा और बाद में ओला वृष्टि हुई ,जिसके कारण सेब की क्वालिटी प्रभावित हुई है। इस बार काफी छोटा सेब आया है। इसी का फायदा उठा कर आढ़तियों ने और बड़े कॉर्पोरेट्स ने सेब का दाम गिरा दिए। जहां दाम 400 से 500 तक गिराया जाना था वहां दाम 1000 रूपए तक गिरा दिया गया। इसके अलावा पिछले तीन सालों से तुर्की और ईरान का सेब भी भारत आ रहा है ये सेब उसी सीजन में आता है जब हिमाचल के सेब का पीक सीजन होता है। अफगानिस्तान के रास्ते ये सेब बिना ड्यूटी के भारत आ रहा है। ये सेब बहुत सस्ते दामों पर यहां आता है तो लदानी इसे खरीदते है जो हमारे सेब के दामों को प्रभावित करता है। बागवानों का खून चूस रही है निजी कंपनियां : पांजटा हिमालयन सोसाइटी फॉर हॉर्टिकल्चर एंड एग्रीकल्चर डेवलपमेंट के अध्यक्ष डिंपल पांजटा मानते है कि जो दूसरे और तीसरे ग्रेड का सेब बाजार में जा रहा है वो सेब के दाम कम होने का बड़ा कारण है। सरकार या एपीएमसी को चाहिए कि वो इस सेब को खरीद कर फ़ूड प्रोसेसेसिंग यूनिट्स में या किसी भी तरह बाजार से बाहर भिजवा दे। पांजटा मानते है कि इसके अलावा जो निजी कंपनियां जैसे अडानी या कोई अन्य भी यदि अपने रेट्स कम निकालते है तो भी दाम गिरते है। इस बार भी अडानी ने दाम बहुत कम किये है। मंडियों में जिस तरह सेब के रेट गिरे हैं, यह पूरी तरह सरकारी तंत्र की विफलता है। बागवान भी जागरूक नहीं है। निजी कंपनियां बागवानों का खून चूस रही है, इनपर लगाम होनी चाहिए। इन पर भी एमएसपी लागू की जानी चाहिए। नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बागवानों को निजी कंपनियों का बहिष्कार करना चाहिए। नैफेड के तहत हिमाचल का सेब भी खरीदा जाना चाहिए जिसकी कवायद हिमाचल सरकार द्वारा शुरू कर दी गई है। मंडियों में रेट गिरे, रिटेल में जस के तस : सुरेंद्र सिंह यंग एंड यूनाइटेड ग्रोवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह का कहना है कि संकट के समय में सेब बागवानों को राहत देने में राज्य सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। मंडियों में रेट गिर रहे हैं लेकिन रिटेल में रेट जस के तस हैं। एपीएमसी को बाहरी राज्यों की एपीएमसी के साथ तालमेल बैठा कर सेब के लिए सही मार्केट उपलब्ध कराना चाहिए। बागवानों को सरकार से अब कोई उम्मीद नहीं है, कारण है बागवानी मंत्री का बेतुका बयान। मंत्री जी कहते है बोरियों में सेब ले जाओ, जिस मंत्री की ये मानसिकता हो उससे क्या उम्मीद की जा सकती है। दूसरा सुरेश भारद्वाज जी के पास अगर किसान जाते है तो वे कहते है की मैं कुछ नहीं कर सकता, मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूँ। इन मंत्रियों को मार्किट इंटरवेंशन स्कीम का ही पता नहीं है। इन हालातों में मुझे नहीं पता कि क्या होगा। अच्छे माल को दाम मिलेंगे : हरीश ठाकुर पराला, ढली और भट्ठाकुफर आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं हरीश फ्रूट एजेंसी (एचएफए) के मालिक हरीश ठाकुर बिट्टू ने कहा कि रेट कम मिलने का मुख्य कारण ओलावृष्टि से फसल का बहुत ज्यादा प्रभावित होना है। खराब सेब आ रहा है। ओलों का दागी जो सेब एचपीएमसी को बोरियों में जाना चाहिए, वह भी पेटियों में जा रहा है। सेब के दाम मांग और आपूर्ति पर निर्भर करते हैं। रेट गिरे हैं, लेकिन अब लोग तुड़ान भी कम कर रहे हैं। लोग आढ़ती पर आरोप लगाते हैं। अडानी की बड़ी बातें हुईं, वह तो बढ़िया माल की पेटी भी 1400 रुपये ले रहे हैं, हम तो अच्छे माल के उससे भी ज्यादा दे रहे हैं। अच्छे माल को दाम मिलेंगे। आढ़ती और लदानी की सांठगांठ के आरोप गलत लगते हैं। पराला और भट्टाकुफर मंडियों की बात करें तो यहां ऐसा कुछ भी नहीं है। अगर कोई आढ़ती ऐसा करता भी है तो किसान उसके पास नहीं जाएगा।
हिमाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। अब प्रदेश की सभी ग्राम पंचायत कार्यालयों के सूचना बोर्ड पर पीएम किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की सूची होगी। इसके साथ ही प्रदेश राजस्व विभाग ने जिले के सभी पटवारियों, पंचायत सचिवों और नंबरदारों की कमेटी बनाकर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों की वेरिफिकेशन के निर्देश दिए हैं। संबंधित क्षेत्र का पटवारी यह लिखकर देगा कि लाभार्थी के पास इस योजना का लाभ उठाने के लिए नियमों के तहत जोताई योग्य भूमि है या नहीं। इसके साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव भी लाभार्थियों का सत्यापन करेंगे। इन दोनों कर्मचारियों की ओर से तैयार रिपोर्ट तहसीलदार और उसके बाद जिला राजस्व विभाग के पास पहुंचेगी। ज़मीनी स्तर पर वेरिफिकेशन होने से इस योजना में हो रहे भ्रष्टाचार पर विराम लगेगा। जिला हमीरपुर में कुछ अपात्र लोगों ने भी पूर्व में इस योजना के तहत आवेदन कर दिया था। जांच हुई तो पाया कि ये लोग इस योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र नहीं थे। अपात्र लोगों के पास सरकार का 98.40 लाख रुपये फंसा हुआ है। इसमें से अभी करीब 42 लाख रुपये रिकवर हुए हैं। उधर, जिला राजस्व अधिकारी देवराज भाटिया ने बताया कि जिले के सभी पटवारियों और पंचायत सचिवों को फील्ड स्तर पर प्रधानमंत्री किसान योजना के लाभार्थियों की जांच के निर्देश दिए हैं। पंचायतों में पात्र लाभार्थियों की सूची भी लगेगी।
भाजपा प्रभारी एवं चीफ पैट्रन भारतीय पैरालंपिक संघ अविनाश राय खन्ना ने रविवार को दिल्ली में पैरालंपिक 2020 के खिलाड़ियों का वापिस भारत पहुंचने पर स्वागत किया। उन्होंने पैरालंपिक मेडलिस्ट सुरेंद्र सिंह गुज्जर व भारत की भाविनाबेन पटेल जिन्होंने टेबल टेंनिस मुखाबले में रजत पदक जीत। उनके साथ इस अवसर पर भाजपा के कांगड़ा से सांसद कृष्ण कपूर भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि पैरालंपिक 2020 में भारत का जोरदार प्रदर्शन रहा है अभी तक भारत ने कुल 19 पदक जीत आपने नाम किए है , हमारे सभी खिलाड़ियों ने इस प्रदर्शन के लिए कड़ी महेनत की है जिसके कारण भारत का यह प्रदर्शन रहा है। उन्होंने कहा हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी खिलाड़ियों के मनोबल बढ़ाने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी है। मैं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने भी पैरालंपिक 2020 में जीते खिलाड़ी के लिए 1 करोड़ की राशि देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों एवं विभूतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।
हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह रविवार को चंडीगढ़ में 26 औद्योगिक घरानों के साथ वन टू वन रूबरू हुए और इस दौरान हिमाचल प्रदेश में इन औद्योगिक घरानों द्वारा 3307 करोड रुपए निवेश के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें करीब 15, 000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है । इस अवसर पर उद्योग निदेशक राकेश प्रजापति, उद्योग विभाग के अतिरिक्त निदेशक तिलक राज शर्मा, महाप्रबंधक ऊना एवम सिरमौर भी उपस्थित थे। जिन बड़ी कंपनियों के साथ आज समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, उनमें लुधियाना स्थित ट्राइडेंट कम्पनी द्वारा प्रदेश में टैक्सटाइल पार्क बनाने का प्रस्ताव दिया गया जिसमें करीब 800 करोड़ का निवेश होगा। उद्योग मंत्री द्वारा द्वारा टैक्सटाइल पार्क की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने के लिए विभाग के अधिकारियों को शीघ्र समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए। भारत सरकार के आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत पेट्रोल के आयात का खर्चा कम करने के लिए एथनॉल आधारित उद्योग स्थापित किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रदेश में लगभग एक हजार करोड़ निवेश के 6 एमओयू साइन किए गए। "बेटर टुमारो इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड" द्वारा प्रदेश में प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क के लिए 490 करोड रुपए का निवेश किया जाएगा जिसमें करीब 2000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा "माधव एग्रो " कंपनी द्वारा प्रदेश में 400 करोड रुपए की लागत से प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जाना प्रस्तावित है जिसमें 2,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। हिमालयन ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशंस द्वारा 150 करोड रुपए लागत की निजी क्षेत्र में हिमालयन स्किल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी जिसमें 450 लोगों को रोजगार मिलेगा। मैटेफिजिकल हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नालागढ़ क्षेत्र में डेढ़ सौ करोड रुपए की लागत से 250 बिस्तर का प्राइवेट हॉस्पिटल स्थापित किया जाना प्रस्तावित है जिसमें 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने इस अवसर पर उद्यमियों को हिमाचल प्रदेश में अधिकाधिक निवेश करने का खुला निमंत्रण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रदेश सरकार उद्यमियों को प्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सुविधाएं, प्रोत्साहन व रियायते प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा 2 साल पहले राज्य सरकार द्वारा राज्य की पहली ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन किया गया जिसकी बदौलत हमारा प्रदेश दूसरी औद्योगिक क्रांति का अग्रदूत बना। इस ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में दुनियाभर के निवेशकों ने भाग लिया और इस आयोजन के दौरान सरकार द्वारा 96 हजार करोड़ के प्रस्तावित निवेश के साथ सात सौ से अधिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए ।।इसके बाद 14500 करोड के निवेश की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया जिसमें 28000 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा इन्वेस्टर मीट के बाद किसी भी राज्य द्वारा आयोजित यह अब तक का सबसे तेज ग्राउंड ब्रेकिंग था। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अब दूसरी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी है ताकि बड़े औद्योगिक घराने प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा निवेश के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा प्रदेश सरकार ने भविष्य के लिए प्रस्तावित औद्योगिक विकास व औद्योगिक पार्कों के लिए पिछले वर्ष के दौरान 3000 एकड़ से अधिक का भूमि बैंक बनाया है। उन्होंने कहा जल्दी ही प्रदेश को संभावित 8000 करोड निवेश का बल्क ड्रग पार्क मिलने की भी आशा है जिसमें 15000 लोगों को रोजगार देने की क्षमता होगी। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश में दो नई पेपर मिल स्थापित होना भी प्रस्तावित है।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सराहां प्रवास के दौरान हाटी समिति राजगढ़ इकाई ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल द्वारा सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा देने की मांग की गयी। उन्होंने कहा कि लगभग पिछले पचास सालों से हाटी समुदाय अपनी माँग को लेकर लामबंद है। खुद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप और विधायक रीना कश्यप ने भी इस मांग को लेकर प्रतिबद्धता दिखाई है। हाटी समिति राजगढ़ तहसील के अध्यक्ष विकल्प ठाकुर ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि करीब तीन लाख हाटियों की उम्मीदें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रदेश सरकार से है। समिति का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और केंद्रीय जनजातीय मंत्री से भी मिल चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के समक्ष गिरिपार जनजातीय क्षेत्र का मुद्दा जोरदार ढंग से रखेंगे ताकि यथाशीघ्र हाटियों को उनका अधिकार मिल सके। इस प्रतिनिधिमंडल में हाटी समिति के महासचिव हरदेव भारद्वाज, रजनीश ठाकुर, अनिल ठाकुर, निशेष शर्मा और विशाल ठाकुर उपस्थित रहे।
छोटे पर्दे के मशहूर एक्टर और रिएलिटी शो बिग बॉस सीजन 13 के विनर सिद्धार्थ शुक्ला को लेकर चौंकाने वाली खबर आ रही है। बताया जा रहा है कि 40 की उम्र में उनका दुखद निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ शुक्ला को मैसिव हार्ट अटैक आया था। जिसके बाद उनका निधन हो गया। सामने आई जानकारी के मुताबिक एक्टर को कूपर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिद्धार्थ के निधन की खबर फैंस के साथ-साथ इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए बड़ा सदमा लेकर आई है। बीती रात ली थी दवाइयां सिद्धार्थ शुक्ला को मैसिव हार्ट अटैक आया था। जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने अस्पताल में बीती रात को ही दवाइयां ली थीं, वहीं आज गुरुवार को उनके निधन की दुखद खबर ने सभी को गहरा सदमा दिया। सिद्धार्थ टीवी शो 'बालिका वधू' में अहम किरदार में नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने बिग बॉस 13 भी जीता था। बताया जा रहा है कि उनके निधन की खबर की पुष्टि कूपर अस्पताल के ऑफिशियल ने की है। परिवार में मां और बहनें बता दें कि सिद्धार्थ के परिवार में उनकी मां और दो बहने हैं। सिद्धार्थ ने 2008 में शो 'बाबुल का आंगन छूटे ना' से एक्टिंग डेब्यू किया था। जिसके बाद 2014 में उन्होंने बॉलीवुड में 'हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया' में सपोर्टिंग रोल भी किया था। वो बिग बॉस के अलावा रिएलिटी शो 'खतरों के खिलाड़ी' में भी नजर आए थे।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में चार दिन बाद रॉयल सेब के दामों में उछाल आया है। मंगलवार को कुल्लू जिले की बंदरोल सब्जी मंडी में सुपर क्लास रॉयल सेब 60 रुपये प्रति किलो तक बिका है। इसके चलते बागवानों ने कुछ हद तक राहत की सांस ली है। इससे पूर्व इस सेब का 40 से 50 रुपये प्रति किलो भाव मिल रहा था। बंदरोल मंडी में दाम बढ़ने के बाद इसे प्रदेश की अन्य फल मंडियों में भी दाम अच्छे मिलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।अच्छी पैदावार के बावजूद कम दाम के चलते ज्यादातर बागवानों ने तुड़ान रोक दिया है प्रदेश की बंदरोल सब्जी मंडी में अभी रोजाना 22 से 25 हजार सेब के क्रेट पहुंच रहे हैं। पहले 50 से 60 हजार क्रेट आ रहे थे। अब दाम में हल्का उछाल आने से बागवानों में आगामी दिनों में दाम बेहतर मिलने की उम्मीद जगी है।
टोक्यो पैरालंपिक में ऊंची कूद में सिल्वर मेडल जीतने वाले निषाद कुमार के भारत लौटने केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने दिल्ली में अपने आवास पर उनका स्वागत किया। अनुराग ने निषाद की सफलता पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि निषाद के प्रदर्शन से युवाओं में नए जोश का संचार हुआ है। वे प्रेरणा का नया स्रोत बनकर उभरे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि निषाद का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। उन्होंने विकट परिस्थितियों में खुद को न केवल संभाल कर रखा बल्कि कुछ कर दिखाने के जज्बे को कायम रखा। इसी जोश के बलबूते उन्होंने टोक्यो में भारतीय तिरंगे का मान बढ़ाया। अनुराग ने निषाद को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
प्रदेश सरकार ने राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कारों की सूची जारी कर दी है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के 17 शिक्षकों को इन पुरुस्कारों के लिए चुना है। 14 शिक्षकों का चयन किए गए आवेदनों में से किया है। इस चुनाव के लिए चयन कमेटी का गठन किया गया था। तीन शिक्षकों का चयन सरकार ने किया है। बता दें कि 5 सिंतबर को राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर शिक्षकों को यह पुरस्कार देकर सम्मानित करंगे। इस मौके पर शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर भी मौजूद रहेंगे। रिकांगपिओ स्कूल प्रिसिंपल जिया लाल नेगी, रामपुर स्कूल के लेक्चरर प्रेम पाल दुल्टा, शिमला के संजौली स्कूल के लेक्चरर अजय कुमार वशिष्ठ, सोलन के बघेरी स्कूल के डीपीई सुमित सिंह, शिमला के अरहाल स्कूल के टीजीटी पंकज शर्मा, सिरमौर के गलांघाट स्कूल के टीजीटी विवेक कुमार कौशिक, सोलन के हरदेव, ऊना के बसाल स्कूल के सुभाष चंद, सोलन के बरोटीवाला स्कूल के पीईटी सुरिंदर कुमार मेहता, मंडी के खदूना स्कूल के जेबीटी इंद्रेश कुमार, बिलासपुर के बालट का घाट के संजीव कुमार, हमीरपुर के बीर बघेरा स्कूल के सुरेश कुमार, लाहौल स्पीति के केलांग स्कूल के छिम्मे आंगमो और कांगड़ा के टिहरी स्कूल के राजिंद्र कुमार का राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। वंही, कुल्लू के नग्गर स्कूल के लेक्चरर धर्म चंद, मंडी डडोह स्कूल टीजीटी कुंजन वर्मा और मंडी के थुनाग स्कूल के सीएचटी इंद्र सिंह ठाकुर का चयन सरकार द्वारा किया गया है।
जम्मू और कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के लगभग दो साल बाद, लद्दाख के प्रशासन ने हिम तेंदुए को राज्य पशु और काली गर्दन वाली क्रेन को केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य पक्षी घोषित किया गया है। इस संबंध में केंद्र शासित प्रदेश के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई थी। काली गर्दन वाला सारस, जो कि तत्कालीन राज्य जम्मू-कश्मीर का राज्य पक्षी भी था, भारत में केवल लद्दाख में पाया जाता है। काली गर्दन वाली क्रेन "कमजोर" के रूप में वर्गीकृत एक लंबा पक्षी है। इसकी ऊंचाई लगभग 1.35 मीटर है, पंखों का फैलाव लगभग 2-2.5 मीटर है और इसका वजन लगभग 6-8 किलोग्राम है! इसके सिर पर एक चमकदार लाल मुकुट है। आमतौर पर यह जोड़ियों में देखा जाता है, उनके प्रेमालाप नृत्य ने लद्दाख के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में से एक-चार्ट्स को प्रेरित किया है। पश्चिमी और पूर्वी हिमालय का पहाड़ी क्षेत्र भारत में हिम तेंदुओं का निवास स्थान है। वे मुख्य रूप से लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में पाए जाते हैं। यह उल्लेख करना उचित है कि हंगुल पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर का राज्य पशु था जिसमें लद्दाख भी शामिल था।
केलांग में आज यानि बुधवार को पत्रकार वार्ता का आयोजन हुआ। इस दौरान पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह ने सरकार पर तंज कस्ते हुए कहा कि भाजपा नेता महेंद्र सिंह ठाकुर जयराम सरकार में सुपर चीफ मिनिस्टर बन गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल शक्ति विभाग की हालत तो ऐसी हो गई है कि जब तक मंत्री महोदय के आदेश उच्च अधिकारियों को नहीं होते हैं तब तक टेंडर तक नहीं करवाया जाता है। यही नहीं 'हर घर जल हर घर नल' योजना के तहत खरीदी गई पानी की पाइपों में भी जमकर गोलमाल किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग ने प्रदेश में इतनी पाइपे खरीदी है कि आगामी 15 सालों तक पाइपें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा है कि महेंद्र सिंह ठाकुर जयराम सरकार में सुपर चीफ मिनिस्टर बने हुए हैं। कभी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के साथ उनका उलझना चर्चा का विषय बन जाता है, तो कभी कर्मचारियों व शिक्षकों का सार्वजनिक स्थल पर वह सरेआम मजाक उड़ा देते हैं। ऐसे में जयराम सरकार के सुपर चीफ मिनिस्टर हिमाचल को किस ओर ले जाना चाहते हैं यह समझ से परे है। उन्होंने कहा है कि वर्तमान समय में जल शक्ति विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है जिस के पुख्ता सुबूत उनके पास है। कांग्रेस की सरकार सत्ता में आते ही जहां इस मामले की जांच करवाएंगे, वहीं उन्हें पूरा यकीन है कि जल शक्ति विभाग के कई बड़े अधिकारी भ्रष्टाचार में जांच के दौरान नपेंगे। पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा है कि वह मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हैं कि अगर हिम्मत है तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले साबित व दर्ज करवा कर दिखाएं। ठाकुर कौल सिंह ने कहा है कि सुपर चीफ मिनिस्टर जल शक्ति विभाग में पूरे प्रदेश भर में सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को रोजगार दे रहे हैं जो अन्य जिलों के लोगों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर भी जनता के बीच जाएगी। कौल सिंह ठाकुर ने कहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर प्रदेश में विकास करवाने का प्रयास करें न कि हवा में घोषणाएं कर जनता को गुमराह करने का।
इस महीने की शुरुआत महंगाई के झटके के साथ हुई है। एलपीजी सिलेंडर और महंगा हो गया है। आज एक सितंबर से गैर सब्सिडी घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 25 रुपये बढ़ा दी गई है। इस बढ़ोतरी के बाद अब दिल्ली में 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम बढ़कर 884.50 रुपये हो गया है। इससे पहले 18 अगस्त को सिलेंडर का दाम 25 रुपये बढ़ा था। इससे पहले एक जुलाई को रसोई गैस की कीमतों में 25.50 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। अब 14.2 किलो वाला गैर सब्सिडी LPG सिलेंडर दिल्ली-मुंबई में 884.5 रुपये, कोलकाता में 911 रुपये और चेन्नई में 900.5 रुपये बिक रहा है। इससे पहले सिलेंडर क्रमश: 859.5 रुपये, 886 रुपये और 875 रुपये बिक रहा था। घरेलू एलपीजी सिलेंडर ही नहीं, बल्कि 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर भी महंगा हो गया है। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 1618 रुपये की जगह अब 1693 रुपये बिक रहा है।
असम में लगातार बाढ़ से हालात बिगड़ रहे हैं। अब तक 21 से अधिक जिलों के 950 गांव बाढ़ की चपेट में हैं जिसके कारण करीब 3.63 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। वंही अब तक दो मासूमों की बाढ़ में बहने से मौत हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि वह हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है। वहां एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात की गई हैं। असम आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक राज्य के 21 से ज्यादा जिलों के 950 गांव में पानी घुस गया है। सरकारी तथ्यों के अनुसार बरपेटा जिले के चेंगा और मोरीगांव के मायोंग में एक-एक बच्चे की बाढ़ में बह जाने की वजह से मौत हो गई। इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात की और हालात की जानकारी ली। प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम को बाढ़ से निपटने में हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
हिमाचल सरकार कोविड के चलते बन्द किए गए जनमंच कार्यक्रम को फ़िर से शुरू करने जा रही है। 12 सिंतबर को 23 वाँ जनमंच रखा गया है। इसमें मंत्रियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है। प्रदेश के 12 स्थानों पर ये जनमंच कार्यक्रम आयोजित किया जायेंगे। जिसको लेकर सरकार ने शेड्यूल जारी कर दिया है।
हिमाचल : राज्य चुनाव आयोग ने जनजातीय क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की अधिसूचना की जारी
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में पंचायत चुनाव का बिगुल बज गया है। राज्य चुनाव आयोग ने मंगलवार को प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत लाहौल-स्पीति के उदयपुर व केलांग उपमंडल में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति व जिला परिषद के चुनाव होंगे। वहीं काजा में जिला परिषद व चंबा के पांगी उपमंडल में ग्राम पंचायत व पंचायत समिति के चुनाव होंगे। आयोग की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार मतदान दो चरणों में होगा। पहले चरण का मतदान 29 सितंबर को सुबह सात से तीन बजे तक होगा। जबकि दूसरे चरण का मतदान एक अक्तूबर को होगा। इस संबंध में राज्य चुनाव आयुक्त अनिल कुमार खाची की ओर से अधिसूचना जारी की गई है।
किन्नौर जिले में आज यानि मंगलवार को दो अलग-अलग स्थानों पर दो बसों व निजी वाहनों में टकराव हुआ है। हादसे के दौरान कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है, सभी यात्री सुरक्षित हैं। हालांकि वाहनों के आपस में टकराव से वाहनों को क्षति पहुंची है। दरअसल, रिकांगपिओ से सुबह 6 बजे चंडीगढ़ जा रही हिमाचल पथ परिवहन की बस और एक निजी वाहन का चौरा से 2 किलोमीटर पीछे अंधा मोड़ पर टकराव हो गया। आपसी टक्कर के कारण दोनों वाहनों को थोड़ी बहुत क्षति पहुँची है। गनीमत यह रही कि इस दौरान किसी भी व्यक्ति को कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। दूसरा मामला रिब्बा रिकांगपिओ का है। हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस रिब्बा रिकांगपिओ चंडीगढ़ सुबह सवा 7 बजे रिकांगपिओ से निकली थी। ककस्थल नामक स्थान पर बस एक निजी वाहन टिपर के साथ टकरा गई। इस हादसे में हिमाचल पथ परिवहन की बस को क्षति पहुंची है, हालांकि बस में सवार सभी 37 यात्री सुरक्षित है। रिकांगपिओ एचआरटीसी अड्डा सह प्रभारी गोपाल नेगी ने बताया कि हिमाचल पथ परिवहन निगम में बैठे सभी यात्री सुरक्षित है, तथा अन्य वाहन के साथ टकराने से बस को थोड़ी क्षति पहुंची है।
दुबई में जारी एशियाई युवा मुक्केबाजी चैंपियनशिप में सोमवार को भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा कायम रहा है। वंही 66 किलोग्राम वर्ग में यूएई की खिलाड़ी को हराकर किन्नौर जिला के सांगला से संबंध रखने वाली स्नेहा ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस खबर से किन्नौर जिला सहित प्रदेश भर में ख़ुशी की लहर है। बता दें कि स्नेहा कुमारी पुत्री मनोज कुमार किन्नौर जिला के सांगला से संबंध रखती है। वंही स्नेहा के बॉक्सिंग कोच श्याम रत्न रेपालटो बेरिंग नाग बॉक्सिंग क्लब सांगला में बच्चों को बॉक्सिंग का प्रशिक्षण देते हैं। स्नेहा के कोच श्याम रतन ने स्नेहा के गोल्ड जीतने पर प्रदेश व जिला वासियों को बधाई दी। उन्होंने स्नेहा को भी देश के लिए गोल्ड जीतने पर बधाई दी। गौरतलब है कि इससे पहले भी सांगला की स्नेहा ने असम में खेलो इंडिया खेलो 2020 में गोल्ड मेडल जीता है।
देश में आज गोल्ड के रेट में फिर गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमॉडिटी एक्स्चेंज में आज गोल्ड के दाम 0.20 फीसदी (97 रुपये) घट गए। आज यहां इसके रेट 47,441 रुपये प्रति दस ग्राम दर्ज किए गए है। वहीं चांदी आज पिछले दिनों की ही तरह स्थिर बनी हुई है। आज 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ इसके रेट 64,050 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किए गए हैं। आज स्पॉट गोल्ड के प्राइस 1,814.86 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किए गए हैं। वहीं यूएस गोल्ड फ्युचर के रेट 1,817 डॉलर प्रति औंस पर बने हुए हैं। वहीं आज ग्लोबल मार्केट में चांदी के रेट में भी 0.3 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखने को मिली है. आज यहां इनके रेट 24.07 डॉलर प्रति औंस दर्ज किए गए हैं। प्लैटिनम में भी आज 0.3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आज इसके रेट 1,011.23 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर दर्ज किए गए है।
पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में भारत-बांग्लादेश सीमा पर देर रात तनाव हो गई। दरअसल, बांग्लादेश की ओर से भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश कर रहे दो तस्करों को बीएसएफ ने मार गिराया। बीएसएफ की ओर से सोमवार को जारी किए गए बयान में बताया गया कि चांगड़ाबांधा चेक पोस्ट के पास तस्करों ने गश्त के दौरान बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवानों की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, 18 से 20 बांग्लादेशी तस्करों का समूह भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश में था, जिस समय यह वारदात हुई बीएसएफ के जवान गश्त कर रहे थे। उनकी ओर से हमला करने के बाद जवानों ने आत्मसुरक्षा में कार्रवाई की, जिसमें दो बांग्लादेशियों की मौत हो गई। बीएसएफ की ओर से बताया गया कि बांग्लादेशी तस्करों के शवों को खोजने के लिए भारत की सीमा के 100 मीटर अंदर तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों की एक और साजिश को नाकाम किया है। जम्मू कश्मीर के पुंछ में घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। आज तड़के ये आतंकी घुसपैठ की कोशिश कर रहा था। आतंकवादी को रोकने की कोशिश की गई लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी है। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में आतंकी मारा गया है। बता दें कि इस साल फरवरी के महीने में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर एग्रीमेंट के बाद यह एलओसी पर पहली घुसपैठ की कोशिश थी। फिलहाल इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है। मारे गए आतंकी के पास से एक AK-47 रायफल भी बरामद हुई है।
कसौली थाना के तहत जंगेशू रोड़ पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। टिप्पर के खाई में गिरने से चालक की मौत हो गई है। टिप्पर रोड़ी व सरिया से लोड था। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में ले लिया है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि टिप्पर परवाणू से कसौली की ओर आ रहा था और शिव मंदिर कबाड़दाना के पास टिप्पर करीब 300 फुट नीचे जा गिरा। टिप्पर चालक की पहचान राम पुत्र जीत सिंह ठाकुर निवासी गांव गढख़ल तहसील कसौली जिला सोलन के रूप में हुई है। एएसपी सोलन अशोक वर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया में मृतक चालक की लापरवाही के कारण यह हादसा होना प्रतीत हुआ है।
चम्बा के भरमौर-पठानकोट नेशनल हाईवे पर हुए हादसे में एक कार डैम में जा गिरी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हादसे में दो युवक लापता बताए जा रहे हैं। दरअसल सोमवार अल सुबह खड़ामुख के पास रात की शिफ्ट से दो युवक कार में लौट रहे थे। सुबह 11 बजे तक भरमौर प्रशासन के न पहुंचने पर ग्रामीण उग्र हो गए और चक्का जाम कर दिया। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि युवकों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया है।
टोक्यो पैरालंपिक में भारत की अवनि लेखरा ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर स्पर्धा एसएच-1 में यह स्वर्ण पदक जीता। टोक्यो पैरालंपिक में भारत का यह पहला स्वर्ण पदक है। पुरुषों की एफ-56 डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत के योगेश कथुनिया ने रजत पदक जीता। जबकि पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में देवेंद्र झाझरिया रजत पदक जीतने में सफल रहे। वहीं सुंदर सिंह गुर्जर ने कांस्य पदक पर कब्जा किया। बीता पांचवां दिन भारत के लिए शानदार रहा और तीन भारतीय एथलीट पदक जीतने में सफल हुए।
प्रदेश में इस बार सेब की बम्पर फसल हुई है। लेकिन वंही सेब के सही दाम ना मिल पाने की कारण बागवान मायूस है। अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए देश भर में प्रसिद्ध किन्नौरी सेब तक को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। बागवानों का कहना है कि इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले अच्छी फसल हुई है। लेकिन मंडियों में दाम गिरने के कारण बागवानों को आर्थिक नुकसान का डर सताने लगा है। सेब की 45,862 पेटिया अभी तक निचार, कल्पा और पूह खंड से मंडियों में भेजी जा चुकी है। 28 से 30 किलो पेटी का दाम 1500 से 1800 तक मिल रहा है ,जबकि इससे पहले 2000 से 3200 अधिकतम मूल्य बागवानों को मिलता था। 8 से 10 किलो पेटी का दाम 800 से 1200 मिल रहा है। गौरतलब है कि किन्नौर जिले से अभी तक रत्नपुर फल मंडी में 4546, शिमला 121, सोलन 2984, चंडीगढ़ 11263, दिल्ली 2622, मुंबई 6614, बिथल 6203, सैंज 2485, मतियाना 358, परवाणू 3510, नारकंडा 3103 और खेगसू मंडी में सेब की 1050 पेटियां भेजी गई हैं। टापरी फल मंडी में तीन दिनों में सेब की 2000 पेटियां पहुंची हैं। वंही, बागवानों ने प्रशासन और बागवानी विभाग से मांग की है कि बागवानों की हित में उचित कदम उठाया जाए।
क्या कोरोना की रोक थाम के लिए बनाए गए नियम कानून सिर्फ जनता के लिये है ? क्या हिमाचल के नेताओं को कोरोना नहीं होता ? नेता तीसरी लहर को आमंत्रित क्यों कर रहे है ? वर्तमान परिवेश में हर हिमाचल वासी के मुँह पर ये ही सवाल है। लम्बे समय तक घरो में बंद रहने के बाद और बहुत से अपनों को खोने के बाद हिमाचल प्रदेश बड़ी मुश्किल से कोरोना की चपेट से बाहर आ पाया था। परन्तु जिस तरह से अब हिमाचल में जनसंवाद, रोड शो और बड़ी रैलियां नेता कर रहे है हिमाचल की जनता को कोरोना की तीसरी लहर का खौफ सताने लगा है। नेता नेतागिरी के चक्कर में आम आदमी की जान को खतरे में डाल रहे है। बड़ी पार्टियां और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे है, जहां मास्क पहनना ज़रूरी नहीं समझा जाता। हिमाचल में एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे है। बता दें कि अब भी कोरोना के चलते सभी शिक्षण संस्थान बंद है। प्रदेश में प्रवेश के लिए भी सख्ती लागू की गयी है। बिना कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट के हिमाचल में आने की अनुमति नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क व सोशल डिस्टन्सिंग भी अनिवार्य है। पर शायद ये सभी नियम सिर्फ आम आदमी पर लागू होते है, इसीलिए नेता न तो सार्वजानिक स्थानों पर मास्क पहनते है न ही सोशल डिस्टन्सिंग का ख्याल रखते है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की जन आशीर्वाद यात्रा में न तो कोई सोशल डिस्टन्सिंग देखने को मिली ओर न ही नियमों का पालन। जनसभा मंच से खुद अनुराग ठाकुर ने मास्क पहने के लिए लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ाया लेकिन उसी मंच पर उनके साथी बिना मास्क के दिखे थे। 5 दिन तक चली इस जनआशीर्वाद यात्रा में कैबिनेट के कई मंत्री भी मौजूद रहे और कोविड नियमों की खूब धज्जिया उड़ी। नियम कायदों का मखौल उड़ाने में महिला नेता भी पीछे नहीं है। बीते दिनों सोलन में भाजपा महिला मोर्चा ने रही सही कसर पूरी कर दी। यहां भाजपा की महिला नेताओं ने तीज का त्यौहार मनाया , खूब नाच गाना हुआ और सरेआम कोरोना को दावत दी गई। यहां दो गज की दुरी तो दूर, मास्क से भी दूरी दिखी। कांग्रेस भी पीछे नहीं है, बीते दिनों हुए कार्यक्रमों की तस्वीरों से ये स्पष्ट होता है। चाहे युवा कांग्रेस के कार्यक्रम हो या श्रद्धांजलि समारोह, चाहे मंडी हो या लाहौल स्पीति या कांगड़ा, कांग्रेस के कार्यक्रमों में भी कोरोना गाइडलाइन्स की जमकर धाज्जियाँ उड़ी है। आम जनता में नेताओं के ऐसे आचरण को लेकर ख़ासा रोष है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे है। सवाल उन पुलिस कर्मियों से भी है जो आम आदमी द्वारा मास्क न पहनने पर चालान करते है और ऐसे मामलों पर आँखें बंद कर लेते है। यदि बच्चों के स्कूल जाने से कोरोना हो सकता है तो क्या इन जनसभाओं में कोरोना नहीं हो सकता। बहरहाल सरकार को ख्याल रखना होगा की आम जनता की नारजगी गुस्से का रूप ले रही है और हाल ऐसा ही रहा तो ये गुस्सा कहीं मुखालफत में तब्दील न हो जाए।
देश के प्रथम नागरिक यानी भारत के राष्ट्रपति पहले भी हिमाचल विधानसभा की शाेभा बढ़ा चुके हैं। दो राष्ट्रपति अब तक हिमाचल विधानसभा को सम्बोधित कर चुके है और अब वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद भी विधानसभा काे संबाेधित करेंगे। हिमाचल के लिए यह गर्व की बात है कि देश के राष्ट्रपति का संबाेधन विधानसभा में सुनने काे मिलेगा, वह भी सदन में विराजमान सत्तापक्ष और विपक्ष के साथ। पूर्व में राष्ट्रपति स्व. एपीजे अब्दुल कलाम ने 23 दिसंबर 2004 काे हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदन काे संबाेधित किया था। उसके बाद पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी ने 23 मई 2013 काे विधानसभा के विशेष सत्र काे संबाेधित किया था। अब वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद 17 सितंबर काे हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विशेष सत्र काे संबाेधित करेंगे। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व स्वर्ण जयंती समारोह के चलते प्रदेश में विधानसभा का विशेष सत्र 17 सितंबर को होना है। एक दिन के इस विशेष सत्र को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद संबोधित करेंगे। उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश इस साल पूर्ण राज्यत्व की स्वर्ण जयंती मना रहा है। स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रदेश के विकास को दर्शाते 51 कार्यक्रमों के आयोजन की सरकार की योजना है। हालांकि कोरोना महामारी की वजह से कार्यक्रमों में विलंब हुआ है। बताया गया कि विधानसभा सत्र में भी प्रदेश की विकास यात्रा का उल्लेख होगा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 16 से 20 सितंबर तक शिमला प्रवास पर रहेंगे। प्रवास के दूसरे दिन 17 सितंबर को 11 बजे विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करेंगे। विधानसभा को संबोधित करने वाले वह देश के तीसरे राष्ट्रपति होंगे। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हिमाचल से था गहरा नाता पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का हिमाचल से गहरा नाता रहा है। वह हिमाचल आते-जाते रहे हैं। वह जब भी हिमाचल आते थे तो यहां की खूबसूरत वादियों, वातावरण और लोगों की तारीफ करते नहीं थकते थे। बतौर राष्ट्रपति वे साल 2004 के अपने दो दिवसीय दौरे में हिमाचल के कई क्षेत्रों में गए थे। पूर्व राष्ट्रपति डा.एपीजे अब्दुल कलाम की यादें हमीरपुर जिले से भी जुड़ी हुई हैं। डॉ. कलाम 3 जनवरी 2009 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हमीरपुर के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करने आए थे। हालांकि उस समय वह राष्ट्रपति नहीं थे। वहां पूर्व राष्ट्रपति ने संस्थान के इंजीनियरों में देशभक्ति का जोश भरा था। लाेकसभा स्पीकर भी बढ़ा चुके हैं विधानसभा की शाेभा हिमाचल प्रदेश विधानसभा में लाेकसभा स्पीकर भी आते रहे है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में दाे मर्तबा लाेकसभा स्पीकर शिरकत कर चुके हैं। पहली बार अक्तूबर 1997 में पीए सांगमा ने सदन काे संबाेधित किया था। उसके बाद लाेकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार ने 21अक्तूबर 2013 काे विधानसभा के विशेष सत्र काे संबाेधित किया था। उस वर्ष तत्कालीन वीरभद्र सरकार एवं विधनसभा के पूर्व स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने सत्तापक्ष और विपक्ष के साथ-साथ 160 पूर्व विधायकों काे निमंत्रण भी दिया था। विपिन सिंह परमार के नाम अब नया इतिहास हिमाचल प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रपति द्वारा संबाेधन करवाने के लिए अब स्पीकर विपिन सिंह परमार के नाम नया इतिहास रहेगा। उनके कार्यकाल में राष्ट्रपति रामनाथ काेविंद आ रहे हैं। जबकि 2004 में पूर्व स्पीकर गंगूराम मुसाफिर के कार्यकाल में डा. एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व स्पीकर बीबीएल बुटेल के कार्यकाल में पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी हिमाचल प्रदेश विधानसभा सदन काे संबाेधित कर चुके हैं। प्रवास के दौरान राष्ट्रपति कार्यालय द रिट्रीट में हाेगा शिफ्ट राजधानी के समीप मशोबरा की पहाड़ी की चोटी पर स्थित द रिट्रीट भवन का अधिग्रहण वायसराय द्वारा 1895 के दौरान किया गया था। राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान उनका कार्यालय भी रिट्रीट में स्थानांतरित हो जाता है। शिमला रिज टॉप से एक हजार वर्गफुट ऊंचा रिट्रीट रमणीय परिवेश में बसा हुआ है। इस स्थान की वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य ने इस रिट्रीट को शिमला में पर्यटन का एक आकर्षण बना दिया है। इस भवन की एक खासियत यह है कि यह दाज्जी दीवार के साथ पूरी तरह लकड़ी के ढांचे से बना हुआ है। मूलत: 1850 में निर्मित इस भवन का निर्मित क्षेत्र 10628 वर्ग फुट है। रिट्रीट में कुल 16 कमरे हैं। कोटी रियासत के राजा ने इस भवन का निर्माण1840 में कराया था। बाद में इसे भारत सरकार को स्थायी लीज पर सौंप दिया गया। आजादी के बाद से ही भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान भवन को राष्ट्रपति निवास का दर्जा प्राप्त था, लेकिन 1962 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जब इसे एडवांस्ड स्टडी के लिए दे दिया तो छराबड़ा के द रिट्रीट को राष्ट्रपति निवास बनाया गया। राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान उनका कार्यालय भी साथ रहता है यानि सारा कामकाज दिल्ली से शिमला पहुंच जाता है। इस मर्तबा राष्ट्रपति के पांच दिवसीय शिमला प्रवास के दौरान भी ऐसा ही होगा। तब नहीं मिली थी द रिट्रीट में एंट्री मशोबरा स्थित द रिट्रीट और रामनाथ कोविंद से जुड़ा एक रोचक किस्सा है। राष्ट्रपति बनने से रामनाथ कोविंद अपने शिमला दौरे के दौरान परिवार के साथ राष्ट्रपति रिट्रीट बिल्डिंग में जाना चाहते थे लेकिन इसके लिए उन्हें अनुमति नहीं दी गयी थी। तब उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था। दरअसल रामनाथ कोविंद गर्मी की छुट्टियां मनाने शिमला पहुंचे थे। इस दौरान वे हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल आचार्य देवव्रत के आधिकारिक मेहमान थे। तब उनका मन प्रेसिडेंट रिट्रीट देखने का हुआ, लेकिन क्योंकि उनके पास इसकी इजाजत नहीं थी, इसलिए उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया था। शिमला का प्रेसिडेंट रिट्रीट भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक रिट्रीट है। यहां पर राष्ट्रपति गर्मी की छुट्टियां बिताने आते हैं। प्रेसिडेंट रिट्रीट में जाने के लिए राष्ट्रपति भवन की अनुमति होना अनिवार्य है।स्वतंत्रता के बाद वाइसरीगल लॉज के बाद प्रेसिडेंशियल एस्टेट के हिस्से के तौर पर इसे रिट्रीट बनाया गया और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी को सौंप दिया गया। डॉ कलाम का 'ब्रांड हिमाचल', कुछ हुआ और बहुत शेष पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने 23 दिसंबर, 2004 को बतौर राष्ट्रपति खुद हिमाचल विधानसभा में सूबे के विकास के लिए विजन डाक्यूमेंट पेश किया था। इसमें उन्होंने हिमाचल को 2015 तक एक विकसित प्रदेश बनने का लक्ष्य दिया था। वे हिमाचल को 2015 तक एक ‘ब्रांड’ बनाना चाहते थे। डा. कलाम के ‘हिमाचल प्रदेश : मिशंस फॉर प्रोस्पेरिटी’ नामक इस विजन डाक्यूमेंट में कहा गया है कि हिमाचल वैश्विक दृष्टि से भी उल्लेखनीय राज्य बन सकता है। इसके लिए हिमाचल को एक ब्रांड बनाना होगा, जो भारत और विश्व में सफल हो सके। तब डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि विश्व के प्रत्येक व्यक्ति के मन में हिमाचल बसा हुआ है। सबसे नवीन पर्वत, ऊंचे शिखर, आध्यात्मिक श्रेष्ठता, प्राचीन ज्ञान, शांति, अनुपम सौंदर्य, सतलुज, ब्यास, झरनों का पानी और सबसे बढ़कर निश्छल-सुंदर लोग। हिमाचल के तैंतीस लाख युवा प्रदेश को ब्रांड बनाने की ताकत रखते हैं। डॉ.कलाम ने दिए थे ये 9 मिशन - शत-प्रतिशत साक्षरता, कौशल और सभी को चिकित्सा बीमा। - हर गांव में नॉलेज, इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल कनेक्टीविटी। - औषधीय पौधों, फूलों और सुगंधित पौधों के उत्पादन पर जोर। - सेब सहित तमाम फलों के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर बल। - वर्षा जल संचयन और हिम जल पर आधारित पेयजल व्यवस्था। - 10 हजार मेगावाट अतिरिक्त पन बिजली उत्पादन के लिए 50 हजार करोड़ निवेश। - सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी व्यवसाय को बढ़ावा देना। - घरेलू पर्यटक दोगुना और विदेशी पर्यटक छह गुणा बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाएं। - 1000 करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य तय कर ऊनी कपड़ा उद्योग की स्थापना। शिमला की वादियां खूब लुभाती थी प्रणव मुखर्जी को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को हिल्स क्वीन शिमला की वादियां खूब लुभाती थी। वे कई मर्तबा शिमला आये। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी वे छराबड़ा द रिट्रीट में सुकून के पल बिताने आते थे। शिमला दौरे के दौरान अक्सर वे रिट्रीट परिसर में हाथ में डंडा लेकर सुबह की सैर करते नजर आते थे। राष्ट्रपति कार्यालय से कई बार रिट्रीट की फोटो ट्विटर पर शेयर भी की गई थी। छराबड़ा के एक निजी स्कूल हिमालयन इंटरनेशनल के दस विद्यार्थी उनसे मिलने पहुंचे थे। श्रेया, अंकिता, जाह्नवी, अंशुल, मुस्कान, मानसी, उत्कर्ष, अभिषेक टनिश, दीक्षा और प्रधानाचार्य सरिता ठाकुर, वंदना ने उनके साथ चित्र भी खिंचवाया था। प्रणब मुखर्जी ने बच्चों को पढ़ाई में खूब मेहनत कर आगे बढ़ने को प्रेरित किया था। प्रणब मुखर्जी एचपीयू के दीक्षांत समारोह में तीन बार आए थे। उन्होंने सैकड़ों मेधावियों को डिग्रियां और उपाधियां देकर सम्मानित किया था। पहली बार वे 1984 में बतौर केंद्रीय वित्त मंत्री विवि के दीक्षांत समारोह में आए थे। प्रणव मुखर्जी दूसरी बार 17 सितंबर, 2009 में केंद्रीय वित्त मंत्री के नाते दीक्षांत समारोह में शिरकत करने आए थे। तीसरी बार 24 मई, 2013 को भारत के राष्ट्रपति रहते विवि के 20वें दीक्षांत समारोह में आए थे। उनका कहना था कि विश्वविद्यालयों में हमेशा शोध होता रहना चाहिए। देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए शोध की अहम भूमिका रहती है। भारत सरकार को नई नीतियां बनाने में सहयोग मिलता है। इस दौरान छराबड़ा स्थित राष्ट्रपति निवास में बेटी सर्मिष्ठा के साथ वे पांच दिन ठहरे थे। राष्ट्रपति निवास में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ बेहद गर्मजोशी के साथ मिले थे। उनकी स्मरण शक्ति इतनी थी कि लोग हैरत में पड़ गए थे। 24 मई, 2013 को उन्होंने एडवांस स्टडीज (राष्ट्रपति निवास व वायस रीगल) में संस्कृति व सभ्यता से जुड़े अनुसंधान व अध्ययन की सुविधा वाले केंद्र का लोकार्पण भी किया था।
सेब की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट के बाद प्रदेश के किसानों -बागबानों के समर्थन में किसान नेता राकेश टिकैत हिमाचल के दौरे पर है। बागवानों के समर्थन से पूरे देश में बड़े आंदोलन की हुंकार टिकैत ने शिमला से भर दी। सरकार अगर किसानों व बागवानों के हितों में फैसले नही लेती है तो शिमला को दिल्ली बनते हुए देर नही लगेगी। यह बात राष्ट्रीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कही। राकेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली में 9 महीने से ज्यादा समय से किसान आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन सरकार किसानों की बात मानने को तैयार नही है। वन्ही अब हिमाचल के सेब में आई गिरावट अडानी के द्वारा प्रदेश में बनाये कोल्ड स्टोर है। अभी बागवानों से सस्ते सेब खरीद कर स्टोर करके दोगुने रेट पर बेचे जाएंगे। उन्होंने कहा कि सेब बागवानों को बेमौसमी बारिश से भी नुकसान हुआ है। इसलिए वह यहां के किसानों दर्द जानने आये है। टिकैत ने कहा कि उद्योगपति किसानों की जमीनें हड़पना चाहते है। इसलिए यह साजिश रची जा रही है। प्रदेश के किसान इस आंदोलन से जुड़े हुए है। इनके हित्तों की रक्षा के लिए बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक तीन काले कानून वापिस नही लिए जाते हैं उनका आंदोलन जारी रहेगा। सेब के दामों में गिरावट कांट्रेक्ट फार्मिंग का ही उदाहरण है। अडानी ने किसानों से सस्ते दामों पर सेब खरीदा ओर फिर महंगे दामों में मार्केट में उतारा। इन कानूनों से विदेश में भी किसान बर्बाद हो गए है। वह किसान आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सरकार किसी एक पार्टी की नही है बल्कि पूंजीपतियों की सरकार है इसलिए ऐसा षड्यंत्र हो रहा है।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में रात को भारी बारिश के कारण नुकसान हुआ है। आनी उपमंडल के अमरबाग कुशकुटल में भारी बारिश ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। तेज बारिश के बाद आई बाढ़ से क्षेत्र में उपजाऊ भूमि सहित फलदार सेब पौधे को नुकसान हुआ है। इसके अलावा सड़क किनारे खड़ा टिप्पर भी बाढ़ की चपेट में आ गया। इसके अलावा एक छोटा पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। बाढ़ के खौफ से ग्रामीण बेहद सहमे हुए हैं। उधर अमरबाग क्षेत्र में तीन-चार घरों को भूस्खलन से खतरा पैदा गया है। इन परिवारों के लोगों ने रिहायशी मकान छोड़कर खौफ के साये में खुले में रात गुजारी। भारी बारिश से हुई इस क्षति का जायजा लेने के लिए आनी से पुलिस व प्रशासन की टीम जल्द मौके के लिए रवाना हो गई है। वहीं आउटर सिराज में लगातार बारिश होने से भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों के घरों में दरारें आ गई हैं। सेब के बगीचे बह गए हैं। एक छोटा पुल भी बह गया है। कुटल अमरबाग में रिहायशी मकानों को भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
सिरमौर के उपमंडल राजगढ़ में नेपाली मूल की एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस ने नाबालिग का अपहरण करने वाले नेपाली युवक को घटना के तीन दिन बाद जिला किन्नौर से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने नाबालिग को परिजनों को सौंप दिया है। जबकि, आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जानकारी के मुताबिक यशवंत नगर पुलिस चौकी के तहत एक नाबालिग नेपाली लड़की को 24 वर्षीय नेपाली युवक 22 अगस्त को भगाकर ले गया था। लिहाजा, लड़की के पिता ने इसकी प्राथमिकी यशवंत नगर चौकी में करवाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए साइबर सेल की मदद से युवक के फोन की डिटेल हासिल की। पुलिस ने कड़ी दर कड़ी जोड़ते हुए किन्नौर में युवक और लड़की को खोजने की मुहिम चलाई। डीएसपी भीष्म ठाकुर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 363 के तहत मामला दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है। लड़की को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने आरोपी को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
प्रधानमंत्री जन-धन योजना के सात साल पूरे चुके है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के सात साल पूरे होने के अवसर पर कहा कि इस पहल ने ना सिर्फ भारत के विकास की गति को हमेशा के लिए बदल दिया है बल्कि इसने अनगिनत भारतीयों का वित्तीय समावेशन, सम्मान का जीवन और सशक्तीकरण सुनिश्चित किया है। बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा देश के नागरिकों तक बैंकिंग सुविधाओं की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2014 में शुरू की गई PMJDY ने 28 अगस्त 2021 को सात वर्ष पूरे किए हैं। इस योजना के तहत देश के गरीबों का खाता जीरो बैलेंस पर बैंक, पोस्ट ऑफिस और राष्ट्रीयकृत बैंको में खोला जाता है। जिन खातों से आधार कार्ड लिंक होगा उन्हें 6 महीने बाद ओवरड्राफ्ट सुविधा, 2 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर, लाइफ कवर के साथ कई सुविधाएं दी जाती हैं। जन धन खाता योजना के तहत अब तक देशभर में 38 करोड़ से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। सरकार आगे भी इस खाते के जरिए गरीबो की मदद कर सकती है।
शिमला: प्रदेश में सेब सीजन के चलते सड़क हादसे भी सामने आ रहे है। वंही अप्पर शिमला के कोटखाई में एक दर्दनाक हादसा पेश आया है। सेब को ट्रक में लादकर बेचने के लिए फल मंडी जा रहे दो बागवानों की सड़क हादसे में मोैत हो गई। सेब की 365 पेटियों से लदा ट्रक (एचपी 62ए-1587) कोटखाई के निहारी में खाई में जा गिरा। हादसे में दो बागवानों की मौेत हो गई है और ट्रक चालक सहित दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला रेैफर किया गया है। बता दें कि हादसा बीती रात 1 बजे के करीब पेश आया है। मृतकों की पहचान 51 वर्षीय ध्यान सिंह निवासी चिड़गांव जिला शिमला व 62 वर्षीय टिक्कम राम निवासी कल्पा जिला किन्नौेर के रूप में हुई है। ये दोनों बागवान थे व सेब बेचने ट्रक में सोलन की तरफ़ जा रहे थे। इस दुर्घटना में बिलासपुर निवासी ट्रक चालक जगजीवन शर्मा ओैर राहुल ठाकुर घायल हुए हैं। कोटखाई पुलिस ने सड़क हादसे को लेकर मामला दर्ज कर लिया है।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शुक्रवार को एशिया के सबसे ऊंचे गांव कौमिक पहुंचे। उन्होंने चीन सीमा से सटे लांगचा, हिक्किम, ताबो और कीह गोंपा का भी दौरा किया। राज्यपाल ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर वहां की संस्कृति के बारे में जाना। उन्होंने लोगों की समस्याएं भी सुनीं। राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज समृद्ध हैं। यहां के लोगों ने अपनी इस पहचान को कायम रखा है। शुक्रवार को राज्यपाल काजा में जनजातीय संस्कृति से भी रूबरू हुए। एडीएम मोहन दत्त ने उन्हें पारंपरिक वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत आज शिमला में सेब के गिरते दामों पर सरकार को घेरेंगे। दोपहर बारह बजे टिकैत प्रेस क्लब शिमला में पत्रकार वार्ता करेंगे। टिकैत का आज को होने वाला दौरा प्रदेश का तीसरा दौरा है। इससे पहले भी बागवानों से लूट के मामलों को टिकैत जोरदार तरीके से उठा चुके हैं। टिकैत के इस दौरे से दिल्ली में जारी किसान आंदोलन को हिमाचल के सेब बागवानों का समर्थन मिल सकता है। बता दें कि आज सुबह यानि शनिवार को राकेश टिकैत ने सोलन फल मंडी का सुबह दस बजे निरीक्षण किया। इस दौरान स्थानीय किसानों के साथ बैठक की। अप्रैल में एक वीडियो जारी कर भी राकेश टिकैत ने सेब बागवानों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया था। उस समय सेब की फ्लावरिंग और सेटिंग के समय हुए नुकसान को उठाया गया था। इस वीडियो के जारी होने के बाद हरकत में आई सरकार ने कई कदम उठाए थे। अब प्रदेश में सेब के दाम एकाएक गिरने से प्रभावित हो रहे बागवानों के हक में दोबारा से राकेश टिकैत आवाज बुलंद करेंगे।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में हिमाचल पथ परिवहन निगम की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार हादसे में 10 यात्री घायल हुए हैं। मौके पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार सुलह विधानसभा क्षेत्र के चंबी के पास शुक्रवार दोपहर बाद एचआरटीसी की एक बस बेकाबू होकर सड़क से बाहर चली गई। हादसे में घायल 10 यात्रियों को नगरोटा बगवां सिविल अस्पताल लाया गया है। हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। गनीमत रही कि बस खाई में नहीं गिरी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
कुल्लू जिले में सैंज घाटी में भारी बारिश के बीच भूकंप आया है। शुक्रवार प्रातः 5 बजकर 30 मिनट पर सैंज घाटी में भूकंप के हल्के झटके लगे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने इसकी पुष्टि की है साथ ही जानमाल का किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.9 रही है। जिला कुल्लु में भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बीच भूकंप के झटके लगे हैं। वंही सूबे की राजधानी शिमला में सुबह आठ बजे के करीब भूकंप आया है। मौसम विभाग के शिमला केंद्र ने इसकी पुष्टि की है। फिलहाल जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। जानकारी के अनुसार रिक्टर स्कैल पर इसकी तीव्रता 2.8 मापी गई है। अगर हिमाचल में सबसे अधिक भूकंप की बात करे तो चंबा जिले में सबसे अधिक भूकंप आते हैं। इसके बाद किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और मंडी संवेदनशील जोन में हैं। शिमला जिले को लेकर भी चेतावनी दी गई थी कि यह शहर भूकंप जैसी आपदा के लिए तैयार नहीं है।
जेओए आईटी का टाइपिंग टेस्ट स्थगित होने पर अभ्यर्थी भड़के उठे हैं। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर में जेओए आईटी का टाइपिंग टेस्ट देने पहुंचे सैकड़ों अभ्यर्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दरअसल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग ने बीते गुरुवार शाम को जेओए टाइपिंग टेस्ट स्थगित करने की सूचना दी। लेकिन प्रदेशभर से दर्जनों अभ्यर्थी एक दिन पहले ही हमीरपुर पहुंच चुके थे। कई अभ्यर्थियों को बस सुविधा न मिलने के कारण हमीरपुर पहुंचने के लिए निजी टैक्सियों में पांच से 10 हजार रुपये खर्च करने पड़े। टाइपिंग टेस्ट स्थगित होने की सूचना सही समय पर न मिलने के कारण अभ्यर्थी नाराज हैं। समय पर सूचना न मिलने के कारण शिमला, किन्नौर, चंबा सहित प्रदेश भर से उम्मीदवार हमीरपुर पहुंच गए हैं। अभ्यथियों ने चयन आयोग के सचिव को ज्ञापन सौंपा कर समस्या का समाधान मांगा।
बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी तेलगू फिल्म की शूटिंग के लिए मनाली पहुंच गए हैं। बीती रात करीब डेढ़ बजे वह बड़ाग्रां रिजॉर्ट पहुंचे। फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी के लिए मनाली के घुड़दौड में बड़ाग्रां रिजॉर्ट और स्पा में ठहरने की व्यवस्था की गई है। वह 10 दिन तक यहीं रुकेंगे। रिजॉर्ट के संचालक नकुल खुल्लर ने बताया कि इस तेलगू फिल्म की शूटिंग मनाली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोलंगनाला, नग्गर और मनाली के आसपास की जाएगी। इस फिल्म में वरुन तेज भी अभिनय कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के अंब क्षेत्र में प्रदेश का दूसरा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने केलिए प्रशासन ने कदमताल शुरू कर दी है। नैहरी क्षेत्र में 144 कनाल भूमि चिह्नित कर ली गई है। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कॉलेज के खुलने से ऊना के अलावा हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा सहित अन्य जिलों के युवाओं को लाभ मिलेगा। मौजूदा समय में प्रदेश में केवल एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज पपरोला में है। ऊना जिले में दूसरा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज स्थापित होने से स्थानीय लोगों के अलावा प्रदेश के लोगों को काफी लाभ मिलेगा।
प्रदेश में बरसात के मौसम में कुदरत का कहर लगातार बरप रहा है। हिमाचल प्रदेश में लगातार भूस्खलन के मामले सामने आ रहे है। वंही एक बार फिर चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे भूस्खलन के चलते बंद हो गया है। जानकारी के अनुसार मंडी और कुल्लू के बीच भूस्खलन की वजह से रात लगभग 12 बजे से नेशनल हाईवे फिर बंद हो गया है। चंबा जिले में भी भूस्खलन से पांच सड़कें बंद हो गई है। वहीं, बाया कटोला मंडी-कुल्लू मार्ग पर भारी जाम लग गया। हाईवे बंद होने के चलते इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक लोड से कई किलोमीटर लंबी लाइन गई। उधर, चंबा जिले के तुन्नूहट्टी-ककीरा मार्ग पर देररात भारी बारिश नाले में बढ़े जलस्तर की वजह से एक व्यक्ति की बहने से मौत हो गई। म़ृतक की पहचान कर्म चंद पुत्र जीतो राम निवासी लड़ेरा के रूप में हुई है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची बकलोह पुलिस की टीम ने शव को कब्जे में लेकर डलहौजी अस्पताल पहुंचाया। हादसे की पुष्टि एसपी चंबा अरुल कुमार ने की है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भटियात विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार सुबह तीन संदिग्धों के देखे जाने के बाद क्षेत्र की धुलारा पंचायत के सराली और खिल्ला में दहशत का माहौल बन गया है। धुलारा पंचायत के एक युवक ने पुलिस को सूचना दी कि उसने तीन संदिग्ध लोगों को देखा, जिनकी लंबी दाड़ी थी और जम्मू-कश्मीर के लोगों की तरह दिखते थे। उनके पास बड़े-बड़े बैग थे। सूचना मिलने पर पुलिस की दो टीमों ने आसपास के गांवों और जंगल में सर्च ऑपरेशन छेड़ दिया है। स्थानीय पुलिस ने उच्चाधिकारियों को भी इसके बारे में जानकारी दे दी है। बता दें कि यह इलाका जम्मू से सटा हुआ नहीं है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल ने ट्विटर पर केंद्र पर तंज करते हुए लिखा कि खेत को रेत नहीं होने देंगे, मित्रों को भेंट नहीं देने देंगे। कृषि विरोधी कानून वापस लो। ट्विटर पर वापसी के कुछ दिनों बाद अब एक बार फिर राहुल गांधी केंद्र पर लगातार आक्रामक नजर आ रहे हैं। सोमवार को उन्होंने राष्ट्रीय मौद्रिकरण पाइपलाइन (NMP) के मुद्दे पर मोदी सरकार को निशाने पर लिया था और इसे 'राष्ट्रीय मित्रिकरण योजना' बताया था। बता दें कि राहुल गांधी लगातार केंद्र से कृषि कानूनों पर चर्चा की बजाय इन्हें रद करने की बात कहते आ रहे हैं। मानसून सत्र के दौरान भी उन्होंने अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर इन कानूनों का विरोध किया था। साथ ही वो साथी पार्टियों के साथ किसानों को समर्थन देने के लिए जंतर मंतर भी पहुंचे थे।
प्रदेश में लगातार भूस्खलन के मामले सामने आ रहे है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में गुरुवार सुबह सात मील के पास भूस्खलन के कारण चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे-3 करीब तीन घंटे बंद रहा। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। हालांकि वैकल्पिक मार्ग वाया बजौर से वाहनों की आवाजाही की गई, लेकिन जाम की वजह इस मार्ग पर भी लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ी। करीब तीन घंटों बाद हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया गया है। मंडी के एएसपी आशीष शर्मा ने कहा हाईवे को बहाल कर दिया गया है। बता दें मंगलवार रात को भी रात करीब एक बजे सात मील के पास भूस्खलन के कारण एनएच बंद हो गया था जो बुधवार दोपहर एक बजे खुला।
सेब की कीमत गिरने से जहाँ बागवान परेशान है, वंही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी चिंतिति नजर आ रहे है। जम्मू-कश्मीर की बाद देशभर में हिमाचल दूसरे नंबर पर सेब का उत्पादन करता है। जम्मू कश्मीर जहा 70% सेब उत्पादन करता है तो हिमाचल 27 % ही उत्पादन कर पाता है। सालाना 5000 करोड़ के क्षमता रखना वाला हिमाचल अगर उम्मीद से कम उत्पादन करेगा तो यह चिंता का विषय है। सेब की पैदावार कम होने से प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ सकती है, हिमाचल के सात जिले सेब का उत्पादन करते है, जिसमें शिमला 70 % सेब उगाता है। इसके बाद कुल्लू और किन्नौर में सेब की अधिक पैदावार होती है। हालाँकि अब मंडी, काँगड़ा, सिरमौर, चम्बा आदि के कुछ इलाकों भी सेब की पैदावार शुरू हो गई है। वंही, अगर मौजूदा समय की बात करे तो हिमाचल पर 60,000 करोड़ का ऋण है। रोजगार के अवसर ना मिल पाने की स्थिति में युवाओं का बागवानी की तरफ रुझान देखने को मिला है। राज्य के एक लाख परिवार बागवानी से जुड़े है, लेकिन सेब के उचित दाम ना मिलने से सभी बागवान मायूस है।
तालिबान के आफगानिस्तान पर कब्जे के बाद वहां उत्पन्न हुई बड़े मानव संकट को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अफगान नागरिकों को ई-वीजा देने को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि जो भी अफगान नागरिक भारत में शरण लेना चाहते हैं वह ई-वीजा के लिए अप्लाई करें। इस मामले में गृह मंत्रालय ने इस मामले पर बयान जारी करके कहा है कि जिन अफगान नागरिकों का पासपोर्ट खो गया है या उन्हें पहले से वीजा जारी किया गया है वह सब अब रद्द किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जिन अफगान नागरिक के पास भारत का वीजा है लेकिन, वह देश में नहीं हैं उनका वीजा भी रद्द किया गया है। गृह मंत्रालय ने बताया है कि अफगानिस्तान के हालात को देखते हुए यहां के लोगों के वीजा के लिए एक स्पेशल ई-वीज़ा कैटेगरी तैयार किया गया है।
प्रख्यात तबला वादक पंडित शुभंकर बनर्जी का कोलकता शहर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह कोरोना संक्रमण से पीड़ित थे और पिछले दो महीने से उनका उपचार चल रहा था। वह 54 वर्ष के थे। बनर्जी के निधन की सूचना उनके परिवार के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को दी। उन्होंने बताया कि बनर्जी का बुधवार को निधन हो गया। बनर्जी ने पंडित रविशंकर और उस्ताद अमजद अली खान से लेकर पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और पंडित शिव कुमार शर्मा जैसे कई दिग्गज शास्त्रीय संगीतकारों के साथ जुगलबंदी की थी। बनर्जी को 20 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह कई माह से चिकित्सकीय ऑक्सीजन के सहारे सांस ले रहे थे। दिग्गज तबला वादक जाकिर हुसैन ने बुधवार रात ट्वीट किया,‘‘मुझे उनकी याद आएगी, तबला जगत को उनकी कमी खलेगी, भारतीय संगीत को उनकी कमी खलेगी. ईश्वर शुभंकर भाई की आत्मा को शांति प्रदान करें।
हिमाचल प्रदेश की एक और बेटी भारतीय महिला क्रिकेट टीम में दमखम दिखाने जा रही है। शिमला की ही सुषमा ठाकुर के बाद अब रेणुका सिंह ठाकुर टीम इंडिया का हिस्सा होंगी। उन्हें आस्ट्रेलिया के खिलाफ होने जा रही टी-20 शृंखला के लिए भारतीय महिला क्रिकेट टीम में चुना गया है। वह पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए चुनी गई हैं। रेणुका का जन्म हिमाचल के शिमला जिले के रोहुडूं के पारसा गांव में हुआ है। रेणुका जब तीन साल की थी, तब उनके पिता का निधन हो गया था। अब वह अपने पिता का सपना पूरा करन जा रही हैं। उनके पिता केहर सिंह चाहते थे कि उनकी बेटी क्रिकेटर बने। मीडिया से बातचीत में रेणुका ने बताया कि यह उनके लिए यह काफी भावुक क्षण है। उनके पिता को क्रिकेट से काफी प्यार था।
हिमाचल प्रदेश में सेब के दामों में भारी गिरावट से अरबों के कारोबार पर संकट पैदा हो गया है। बीते 15 दिनों के भीतर सेब के दाम 1000 से 1200 रुपये प्रति पेटी तक गिर चुके हैं। मंडियों में रेट गिरने पर बागवान निजी कंपनियों से अच्छे रेट की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन सेब खरीद करने वाली अडानी की कंपनी ने इस साल 10 साल पुराने रेट खोले हैं। 2011 में अडानी ने 65 रुपये प्रति किलो रेट पर सेब खरीद की थी। इस साल भी कंपनी करीब इसी रेट पर सेब खरीद शुरू करने जा रही है। इस साल प्रदेश में करीब साढ़े चार करोड़ पेटी सेब उत्पादन का अनुमान है। करीब 3 करोड़ पेटी सेब अभी मंडियों में जाना बाकी है। सरकार की ओर से भी कोई राहत न मिलने से बागवान निराश हैं।ओलावृष्टि और बेमौसम बर्फबारी के कारण इस साल फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। वंही, मार्केट में रेट गिरने और निजी कंपनियों के शोषण से आहत बागवान सेब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग उठा रहे हैं। सेब बागवानों ने निजी कंपनियों के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया पर अभियान भी शुरू कर दिया है। सेब के रेट गिरने के बाद बागवानों ने दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में भी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। बागवानों का कहना है कि सरकार ने निजी कंपनियों को करोड़ों रुपये अनुदान दिया है। बावजूद इसके कंपनियां बागवानों को राहत देने के स्थान पर उनका शोषण कर रही है।
हिमाचल प्रदेश में 30 अगस्त तक मौसम खराब रहने का पूर्वानुमान है। इस दौरान मानसून सक्रिय होने की संभावना है साथ ही निचले और मध्य क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 30 अगस्त तक प्रदेश के मैदानी, मध्य व उच्च पर्वतीय भागों में बारिश के आसार हैं। वहीं, प्रदेश में मंगलवार को मौसम मिलाजुला रहा। वही मंडी जिला में सबसे ज्यादा बारिश 73 मिलीमीटर और कांगड़ा जिले में 63 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सुरेन्द्र पॉल का कहना है कि काँगड़ा, ऊना सहित कई जिलो में 7 से 12 मिलिमीटर बारिश की संभावना है जबकि अन्य जिलो में 4 से 6 मिलिमीटर बारिश होने की संभावना है जबकि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश की संभावना कम है।


















































