Massive fire broke out in the fire cracker packing factory in Una's Gurpalah in the Tahliwal Industrial Area. In the incident, 6 workers were caught on fire and charred to death. Also, according to the SP reports, around 12 people were injured and immediately rushed to the Una regional hospital. SP Una Arjit Sen along with the fire department officials were present on the spot soon after the incident took place. He said the cause of the fire is being investigated.
डाडा सीबा के 25 वर्षीय आशीष भाटिया ने यूजीसी नेट परीक्षा पास करके क्षेत्र में अपने रिजल्ट का लोहा मनवाया है। आशीष भाटिया ने बताया कि हाल ही में उनका यह रिजल्ट आया जिसमें वह पास हुए हैं। आशीष भाटिया ने अपनी 10वीं एवं 12वीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला डाडा सीबा से की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई ढलियारा कॉलेज से की है। इस परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की जिसकी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता धर्म चन्द और माता चम्पा देवी को दिया है। 25 वर्षीय आशीष की इस सफलता से क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ उठी है।
बाबा बैद्यनाथ धाम की भूमि विश्वभर में प्रसिद्ध है लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस स्थान पर शिव-शक्ति का मिलन भी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवघर में शिव से पहले शक्ति का वास है। 52 शक्तिपीठों में इसे हाद्र पीठ के रूम में जाना जाता है। इस स्थान को चिता भूमि के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि जब राजा दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, तो सती बिना शिव की अनुमति लेकर मायके पहुंच गई और पिता द्वारा शिव का अपमान किए जाने के कारण उन्होंने मृत्यु का वरण किया। सती की मृत्यु सूचना पाकर भगवान शिव गुस्सा हो गए और सती के शव को कंधे पर लेकर भगवान शिव तांडव करने लगे। उस वक्त भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को 52 टुकड़ों में बांट दिया था। उस समय देवी सती का हृदय देवघर में ही गिरा था। मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं ने देवी सती के हृदय का यहाँ अंतिम संस्कार किया था, तभी से इसे चिता भूमि के नाम से भी जाना जाता है। कहा तो ये भी जाता है कि जहां पर देवी सती का हृदय गिरा था, वहीं पर बाबा बैद्यनाथ की स्थापना की गई है। यहां के श्मशान को महाश्मशान का दर्जा दिया गया है। तंत्र मार्ग में भी देवघर को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। बताया जाता है कि आज तक कोई भी तांत्रिक यहां अपनी साधना पूरी नहीं कर सका है। शक्तिपीठ होने के कारण इसे भैरव स्थान भी माना गया है। ऐसे स्थापित हुआ शिवलिंग: पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने हिमालय पर कठोर तप किया। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए वह एक-एक करके अपने सिर को काटते जा रहा था। जैसे ही उसने 10वां सिर काटना चाहा, भगवान शिव प्रकट हो गये और उससे वर मांगने को कहा। कथा के अनुसार, रावण ने भगवान शिव से कामनालिंग लंका ले जाने का वर मांगा। भगवान शिव ने रावण को 'कामनालिंग' ले जाने का वर दे दिया लेकिन साथ में ये भी शर्त रख दी कि वह रास्ते में कहीं पर भी उस शिवलिंग को जमीन पर नहीं रखेगा। यदि वह शिवलिंग जमीन पर रख दिया तो वे वहीं विराजमान हो जाएंगे। दूसरी ओर भगवान विष्णु नहीं चाहते थे कि यह ज्योतिर्लिंग लंका पहुंचे। इसे देखते हुए उन्होंने गंगा को रावण के पेट में समाने को कहा। वहीं, रावण के पेट में गंगा के आने के बाद रावण को लघुशंका की इच्छा हो उठी। इसके बाद वह ज्योतिर्लिंग रावण ने एक बैजू नामक ग्वाला को पकड़ने के लिए दे दिया और वह लघुशंका करने चला गया। कहा जाता है कि रावण कइ घंटों तक लघुशंका करता रहा, जो आज भी वहां एक तालाब के रुप में मौजूद है। इधर, ग्वाले के रूप खड़े भगवान विष्णु ने शिवलिंग वहीं पर रखकर स्थापित कर दिया। रावण जब लौटा तो देखा कि शिवलिंग जमीन पर रखा हुआ है। उसके बाद रावण ने शिवलिंग को उठाने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह उसे उठा नहीं सका। उसके बाद रावण ने गुस्से में शिवलिंग को अंगूठे से धरती के अंदर दबा दिया और लंका चला गया। बताया जाता है कि तब से ही यहां पर शिवलिंग स्थापित है, जिसे 'कामनालिंग' के नाम से जाना जाता है। ऐसे पड़ा बैद्यनाथ नाम : मान्यता है कि सतयुग में ही इस स्थान का नामकरण कर बैद्यनाथ रख दिया गया था। शिवपुराण के शक्ति खंड में इस बात का उल्लेख है कि माता सती के शरीर के 52 खंडों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने सभी जगहों पर भैरव को स्थापित किया था। देवघर में माता का हृदय गिरा था। इसलिए इसे हृदय पीठ या शक्ति पीठ भी कहते हैं। माना जाता है कि माता के हृदय की रक्षा के लिए भगवान शिव ने यहां जिस भैरव को स्थापित किया था, उनका नाम बैद्यनाथ था। इसलिए जब रावण शिवलिंग को लेकर यहां पहुंचा, तो भगवान ब्रह्मा और बिष्णु ने भैरव के नाम पर उस शिवलिंग का नाम बैद्यनाथ रख दिया। जानकारों की माने तो यहां के नामकरण के पीछे एक और मान्यता है। त्रेतायुग में बैजू नाम का एक शिव भक्त था। उसकी भक्ति से भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि अपने नाम के आगे बैजू जोड़ किया। इसी से यहां का नाम बैजनाथ पड़ा। कालातंर में यही बैजनाथ, बैद्यनाथ में परिवर्तित हुआ। सावन में यहाँ लगता है कांवड़ियों का तांता : वैसे तो साल भर इस मंदिर में शिव भक्तों की भीड़ रहती है, पर सावन महीने में यह पूरा क्षेत्र शिव भक्तों से भर जाता है। तब कांवड़ियों द्वारा सुल्तानगंज की गंगा से दो पात्रों में जल लाया जाता हैं। एक पात्र का जल बैद्यनाथ धाम देवघर में चढ़ाया जाता है, जबकि दूसरे पात्र से बासुकीनाथ में भगवान नागेश को जलाभिषेक करते हैं। बासुकीनाथ मंदिर परिसर में अलग-अलग देवी-देवताओं के बाईस मंदिर हैं। सावन में यहां प्रतिदिन करीब एक लाख भक्त जलाभिषेक करते हैं। यहाँ पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के भी दो अलग तरीके है। जो लोग किसी समय सीमा में बंधकर शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाते उन्हें 'साधारण बम' कहा जाता है। लेकिन जो लोग कावड़ की इस यात्रा को 24 घंटे में पूरा कर शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं उन्हें 'डाक बम' कहा जाता है। कुछ भक्त दंड प्रणाम करते हुए या दंडवत करते हुए सुल्तानगंज से बाबा के दरबार में आते हैं। यह यात्रा काफी कष्टकारी मानी जाती है। 105 किमी पैदल चलकर भक्त करते हैं जलाभिषेक : बैद्यनाथ धाम देश के बारह पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल है। यहां साल भर बाबा पर जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता ह। सावन में भक्त सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की कष्टप्रद पैदल यात्रा कर बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और बाबा पर जलाभिषेक करते हैं। यह सिलसिला पूरे एक महीना चलता है। भगवान शिव के इस रूप को यहां मनोकामना शिव भी कहते है। माना जाता है कि शिवलिंग के केवल दर्शन मात्र से भक्तों की साडी इच्छाऐ यहाँ पूरी हो जाती है। मंदिर के शीर्ष पर लगा है पंचशूल : बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके शीर्ष पर त्रिशूल नहीं पंचशूल है, जिसे सुरक्षा कवच माना गया है। धर्माचार्यो का इस पंचशूल को लेकर अलग-अलग मत है। मान्यता है कि पंचशूल के दर्शन मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि भगवान शंकर ने अपने प्रिय शिष्य शुक्राचार्य को पंचवक्त्रम निर्माण की विधि बताई थी, जिससे फिर लंकापति रावण ने इस विद्या को सिखा था और पंचशूल की अजेय शक्ति को प्राप्त किया। कहा जाता है कि रावण ने लंका के चारों कोनों पर पंचशूल का निर्माण करवाया था, जिसे तोड़ना भगवान श्रीराम के लिए भी आसान नहीं था। बाद में विभीषण द्वारा इस रहस्य की जानकारी भगवान राम को दी गई और तब जाकर अगस्त मुनि ने पंचशूल ध्वस्त करने का विधान बताया था। रावण ने उसी पंचशूल को इस मंदिर पर लगाया था, जिससे इस मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचा सके। कई धर्माचार्यों का मानना है कि पंचशूल मानव शरीर में मौजूद पांच विकार-काम, क्रोध, लोभ, मोह व ईर्ष्या को नाश करने का प्रतीक है। कहा जाता है कि पंचशूल पंचतत्वों-क्षिति, जल, पावक, गगन तथा समीर से बने मानव शरीर का द्योतक है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालु अगर बाबा के दर्शन किसी कारणवश न कर पाए, तो मात्र पंचशूल के दर्शन से ही उसे समस्त पुण्य फलों की प्राप्ति हो जाती है। मुख्य मंदिर में स्वर्ण कलश के ऊपर लगे पंचशूल सहित यहां बाबा मंदिर परिसर के सभी 22 मंदिरों पर लगे पंचशूलों को साल में एक बार शिवरात्रि के दिन पूरे विधि-विधान से नीचे उतारा जाता है और सभी को एक निश्चित स्थान पर रखकर विशेष पूजा कर फिर से वहीं स्थापित कर दिया जाता है।
धौलाधार की वादियों में लम्बे समय बाद लगेंगे चौके-छक्के सुनील समियाल. फर्स्ट वर्डिक्ट देश दुनिया में अपनी खूबसूरती के चलते धौलाधर पहाड़ियों की गोद में बसा और समुद्र तल से 1317 मीटर की उंचाई पर स्थित धर्मशाला का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम काफी प्रख्यात हो चुका है। आईपीएल के चलते भी धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम की खूबसूरती दुनिया के 190 देशों ने देखी है। धर्मशाला का क्रिकेट स्टेडियम दुनिया के सबसे खूबसूरत मैदानों में से एक है। धौलाधार की वादियों के ठीक नीचे बना हुआ है। मैदान को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में सैलानी भी आते हैं। धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य 2003 में शुरू हुआ था। इसकी भौगोलिक परिस्थिति के कारण इस स्टेडियम को बनाने में काफी दिक्कतें आई। 2004-2005 तक ये स्टेडियम बन कर पूरी तरह तैयार हो गया। उसके बाद यहां घरेलू क्रिकेट और रणजी ट्रॉफी जैसे मैच ही करवाए जाते थे। कई वर्षों के इंतज़ार के बाद 27 जनवरी, 2013 में पहली बार यह एक दिवसीय क्रिकेट मैच करवाया गया, जो कि भारत बनाम इंग्लैंड की टीम के बीच हुआ। इसके बाद 2 अक्टूबर 2015 को पहला टी 20 मैच भारत बनाम साउथ अफ्रीका हुआ था। इस स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया खेला गया था। 26 व 27 फरवरी को होंगे टी-20 मुकाबले : लम्बे समय बाद धौलाधार की पहाड़ियों के बीच धर्मशाला के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में एक बार फिर दर्शकों को चौके -छक्के देखने को मिलेंगे। बता दें की हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के खूबसूरत स्टेडियम धर्मशाला में लंबे समय बाद इंटरनेशनल मैच होने जा रहा है। धर्मशाला में 26 व 27 फरवरी को भारत और श्रीलंका के बीच दो टी-20 मुकाबले खेले जाएंगे। प्रस्तावित मैचों के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। तीन टी-20 मैचों की सीरीज का आगाज लखनऊ में 24 फरवरी से होगा। धर्मशाला में शाम सात बजे से होने वाले मैचों में दर्शकों को आने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, इस बारे में कोविड स्थितियों को देखते हुए बाद में विचार किया जा सकता है। भारत-श्रीलंका के बीच खेले जाने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज के दो मैच अब एचपीसीए के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में खेले जाएंगे। बीसीसीआई द्वारा श्रीलंका के 24 फरवरी से शुरू हो रहे भारत दौरे के तीन टी-20 मैचों की सीरीज को अब रि-शेड्यूल किया गया है। इससे पूर्व 15 मार्च को एक मात्र मैच धर्मशाला में होना था लेकिन नए कार्यक्रम के मुताबिक अब धर्मशाला में 26 व 27 फरवरी को दो मैच खेले जाएंगे। उधर सीरीज के रि-शेड्यूल होने के बाद 26 व 27 फरवरी को होने वाले दो टी-20 मैचों की तैयारी को लेकर एचपीसीए युद्ध स्तर पर जुट गया है। स्थानीय व्यापारियों को होता है फायदा : धर्मशाला स्टेडियम में पहला अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय मैच 27 जनवरी, 2013 को भारत-इंग्लैंड के बीच खेला गया था। उसके बाद 20 अक्तूबर, 2015 में भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच और 18 मार्च, 2016 को न्यूजीलैंड-ऑस्ट्रेलिया के बीच टी-20 वर्ल्ड कप का मैच खेला गया था। एचपीसीए स्टेडियम में बड़ा मैच होने से सैकड़ों कारोबारियों को फायदा होता है। इसमें टैक्सी चालक, होटल मालिक, रेस्तरां, होम स्टे, रेहड़ी संचालक आदि शामिल हैं। इसमें कोई संशय नहीं है की क्रिकेट ने धर्मशाला को पर्यटन के मानचित्र पर विशिष्ठ जगह दिलवाने में व्यापक भूमिका निभाई है। धर्मशाला में अब तक तीन मैच हुए हैं रद्द : धर्मशाला स्टेडियम में वर्ष 2016 से लेकर 2020 तक तीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच रद्द हो चुके हैं। वर्ष 2016 में धर्मशाला में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला टी-20 वर्ल्ड कप का मैच राजनीतिक कारणों से रद्द हुआ था। इसके बाद सितंबर 2019 और 12 मार्च, 2020 को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच बारिश के कारण रद्द हुआ। मार्च में अकसर धर्मशाला में ठंड होती है और बारिशों का दौर भी जारी रहता है। इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला में 2016 का विश्व कप टी-20 के ग्रुप-ए के क्वालिफायर मैच को बारिश ने धो डाला था। यह मैच 2016 में नीदरलैंड और ओमान के बीच होने वाला था जोकि बारिश के कारण मैच रद्द कर दिया गया था। मैच से पहले की इंद्रूनाग भगवान पूजा : धर्मशाला में मैच के आयोजकों को किसी भी मैच से पहले बारिश के देवता की शरण में जाना पड़ता है और बारिश न हो इसके लिए बाकायदा मंदिर में पूजा अर्चना व हवन करवाना पड़ता है। ऐसा न हो, तो बारिश ऐसा कहर बरपाती है कि बारिश के आगे सब प्रबंध भी फीके पड़ जाते है। यह स्टेडियम धर्मशाला शहर में स्थित है और धर्मशाला में सर्वाधिक बारिश के लिए प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। शुरूआती दौर में यहां होने वाले मैचो में बारिश ने काफी कहर बरपाया। जब भी यहां मैच का आयोजन होना, उसी दौरान बारिश शुरू हो जाती है। बारिश से बचने के सभी प्रबंध भी बारिश के आगे फीके पड़ जाते थे। इसके बाद किसी ने आयोजकों यानी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को धर्मशाला के ही खन्यारा गांव में भगवान इंद्रूनाग की शरण में जाने की सलाह दी।यह स्टेडियम हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में समुद्र तल से 1457 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इंद्रूनाग का यहां काफी पुराना मंदिर है और इंद्रूनाग को यहां बारिश का देवता कहा जाता है। यानी जब भी यहां सूखा पड़ा हो या फिर बारिश नहीं थम रही हो यहां के लोग इंद्रूनाग देवता की ही शरण में जाते है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां के लोगों में भगवान इंद्रूनाग के प्रति गहरी आस्था है और जब भी बारिश या सूखे से लोग तंग हुए है यहीं समस्या का समाधान हुआ है। एचपीसीए के प्रवक्ता संजय शर्मा का कहना है कि हर बार मैच से पहले यहां मंदिर में पूजा की जाती है। वर्ष 2005 में बने इस स्टेडियम में कई अंतरराष्ट्रीय मैच व आईपीएल का आयोजन हो चुका है। 2019 में हटाई गई थी पाकिस्तानी खिलाड़ियों की फोटो : कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकियों ने हमला हुआ था जिसमें 40 से ज्यादा जवानों के शहीद हुए थे। यह एक आत्मघाती हमला था। काफिले में सीआरपीएफ की करीब दर्जनभर गाड़ियों में 2500 से अधिक जवान सवार थे। आतंकियों ने सुरक्षाबलों की दो गाड़ियों को निशाना बनाया था। इसके चलते 2019 में एचपीसीए यानी हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में पुलवामा में जवानों पर हुए हमले पर बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम से पाकिस्तान के 13 खिलाड़ियों की फोटो हटा दी थी।
स्मार्ट सिटी के तहत 315 करोड़ रुपये की परियोजनाएं कार्यान्वित फर्स्ट वर्डिक्ट, धर्मशाला धर्मशाला शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ों रूपए की राशि विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च की जा रही है । बता दें की धर्मशाला शहर को और अधिक सुन्दर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी के द्वारा 315 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है । स्मार्ट सिटी योजना के तहत कुछ दिनों पहले शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने धर्मशाला में अधिकारीयों से बैठक की। इस दौरान उन्होंने बताया की धर्मशाला में स्मार्ट सिटी के तहत 115 करोड़ के 19 प्रोजेक्ट का कार्य पूर्ण हो चुका है। जिसमें तीन करोड़ की लागत से रूट जोन ट्रीटमेंट प्लांट, दो करोड़ नौ लाख की लागत से रूफ टॉप सोलर प्लांट, तीन करोड़ 55 लाख की लागत से स्मार्ट क्लास रूम, 23 करोड़ की लागत स्ट्रीट का निर्माण, छह करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड डस्टबिन, एक करोड़ 37 लाख की लागत से ई-नगरपालिका सुविधा, 26 लाख की लागत से पार्क, 36 लाख की लागत से वेबसाइट तथा एक करोड़ 29 लाख की लागत से जीआईएस वेब पोर्टल का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी के तहत अन्य विभागों के साथ मिलकर 19 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटिड हाउसिंग प्रोजेक्ट, 57 लाख की लागत से आश्रयहीनों को आवासीय सुविधा, तीन करोड़ 43 लाख की लागत से डीसी परिसर पार्किंग, 29 करोड़ से पेयजल सुधार परियोजना, तीन करोड़ 70 लाख भागसूनाग क्षेत्र के विकास पर, चार करोड़ 44 लाख से पैन सिटी सड़कों की अपग्रेडेशन, एक करोड़ 55 लाख से एलईडी स्ट्रीट लाइट, चार करोड़ से सिटी कनवेंशन सेंटर, दो करोड़ की लागत से स्किल डिवल्पमेंट सेंटर तपोवन इत्यादि प्रोजेक्ट्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। 165 करोड़ की 27 परियोजनाओं का कार्य किया जा रहा है, जबकि 150 करोड़ की 19 नई परियोजनाओं के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि धर्मशाला पर्यटन की दृष्टि से अहम स्थान रखता है। धर्मशाला राज्य के सबसे जीवंत शहर के रूप में उभरा है, जो हर साल न केवल देश बल्कि विदेशों से भी लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट इस शहर को विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा और स्थानीय लोगों को आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध होगी।
मनाली-लेह मार्ग पर अब आधुनिक तकनीक से बर्फ को हटाया जाएगा। इसके लिए बीआरओ ने अब अमेरिकन स्नो कटर कोडिएक को सड़कों पर उतार दिया है। इस कटर की ख़ास बात यह है की यह बर्फ को दोगुनी स्पीड से बर्फ को साफ़ करेगा। बता दें की मनाली -लेह मार्ग पर अधिक बर्फ गिरने से मार्ग को खोलने में बीआरओ को काफी मुशकत करनी पड़ी है , लेकिन अब बीआरओ ने आधुनिक मशीनों से बर्फ को हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकन स्नो कटर एक घंटे में पांच हजार टन बर्फ हटाने की क्षमता रखता है। जानकारी के अनुसार जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में करीब 300 किलोमीटर सड़क का दायरा बीआरओ के अधीन है। इसे समय-समय पर बहाल करना पड़ता है। इसमें सामरिक महत्व का 427 किलोमीटर लंबा मनाली-लेह मार्ग और ग्रांफू-काजा-समदो मार्ग भी शामिल है। सीमा सड़क संगठन ने इस बार मार्च के बजाए फरवरी में लाहौल के अंतिम गांव दारचा से आगे बारालाचा और सरचू की तरफ बर्फ हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। इस बार अधिक बर्फ गिरने के चलते बीआरओ को बर्फ हटाने के लिए काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है की यातायात के लिए मनाली-लेह मार्ग मई तक बहाल हो सकता है। 15 दिसंबर 2021 से बंद है मार्ग -- मनाली-लेह मार्ग यह मार्ग 15 दिसंबर 2021 से बंद है। अब मौसम खुलते ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने दारचा से लेह मार्ग को बहाल करने का काम शुरू कर दिया है। दारचा से बारालाचा की तरफ बर्फ हटाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। मनाली-लेह मार्ग के अलावा लाहौल घाटी के भीतर सड़कों के किनारे लगे बर्फ के ढेरों को भी हटाया जा रहा है।
40 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने की तैयारी कर रहा हमीरपुर डिपो फर्स्ट वर्डिक्ट , हमीरपुर हिमाचल में प्रदूषण न फैले इसके लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम ने योजना तैयार की है । इसके लिए एचआरटीसी के हमीरपुर डिपो ने सरकार से 40 रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चलने की मांग की है। बताया जा रहा है की डिपो ने इन बसों को चलाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भी भेजा है। बता दें की प्रदेश के कुछ ज़िलों में अभी ये इलेक्ट्रिक बसें चल रही है। एचआरटीसी हमीरपुर डिपो ने जिले के 40 विभिन्न रूटों पर इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना तैयार की है। इस बारे में हमीरपुर एचआरटीसी प्रबंधन ने प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा है। यदि सरकार से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो शीघ्र ही जिले की सड़कों पर धुआं और ध्वनि रहित इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती हुई नजर आएंगी। इन इलेक्ट्रिक बसों की सबसे खास बात यह है की इन बसों को चलने से प्रदूषण नहीं फैलेगा व डीजल वाहनों की तुलना में एचआरटीसी को भी मुनाफा होगा। इसके लिए हमीरपुर में चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाने की योजना है । बता दें वर्तमान में हमीरपुर डिपो के पास कुल 149 बसें हैं। जो 186 विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। इसमें 49 बसें जेएनयूआरएम की भी शामिल हैं। इसके अलावा दो इलेक्ट्रिक मैक्सी कैब हैं, जो लोकल रूटों पर सेवाएं दे रही हैं।
सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने सड़क हादसे रोकने के लिए हिमाचल प्रदेश के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के नाहन में रोलर क्रैश बैरियर लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। ख़ास बात यह है की देश के पहले रोलर क्रैश बैरियर के ट्रायल जिला सिरमौर के नाहन में हो रहे है। पहले चरण में विभाग ने 500 मीटर एरिया में रोलर क्रैश बैरियर लगाने का काम शुरू कर दिया गया है. बता दें की 3 करोड़ 67 लाख की लागत से पहले चरण में एनएच 503 पर 300 मीटर, जबकि NH 907A पर 200 मीटर एरिया में सड़क किनारे रोलर क्रैश बैरियर का कार्य जोरों पर है। देश में सड़क हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को स्वकृति प्रदान की है। माना जा रहा है की इन रोलर क्रैश बैरियर के लगने से सड़क हादसों में कमी आएगी। मिली जानकारी के अनुसार पहली मर्तबा देश के भीतर यह ट्रायल किया जा रहा है इसकी खासियत यह है कि गाड़ी के रोलर क्रैश बैरियर में टकराने से गाड़ी को नुकसान नही होगा, गाड़ी सड़क से बाहर जाने की बजाए वापिस सड़क की तरफ आएंगी और अपनी स्पीड पकड़ेंगी जिससे दुर्घटना होने की संभावना है बिल्कुल कम हो जाएगी। जहां यह रोलर क्रैश बैरियर लगाए गए हैं यहां पर बकायदा सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएंगे जिसके बाद देखा जाएगा कि दुर्घटना को रोकने में यह क्रैश बैरियर कितने कारगर है। क्या कहते है इंजीनियर-- कंपनी के साईट इंजीनियर राजन्त कुमार ने बताया कि उनके द्वारा देश में पहली बार ट्रायल के तौर पर रोलर क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं जो सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में कारगर साबित है। उन्होंने कहा कि इन क्रैश बैरियर में जब स्पीड से आ रही गाड़ी टकराती है तो केनेटिक एनर्जी को रोटेशन एनर्जी में बदल देता है जिससे गाड़ी की गति कम हो जाती है और गाड़ी वापिस अपने पाथ पर आ जाती हिअ जिससे दुर्घटना की सम्भावना नही रहती।
देश विदेश से पर्यटन नगरी मनाली घूमने आने वाले पर्यटकों को अब ग्रीन टैक्स बैरियर पर कई घंटों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब मनाली पर्यटन विकास परिषद के साथ मिलकर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने फास्टैग से ग्रीन टैक्स भुगताने की सुविधा शुरू कर दी है। इससे इस बैरियर पर लंबे जाम से राहत मिलेगी और वाहन चालकों और पर्यटकों का समय भी बचेगा। खास बात यह है की फास्टैग का उपयोग करके ग्रीन टैक्स का भुगतान सुविधा शुरू करने वाला मनाली देश का पहला शहर है। देश में अब तक फास्टैग बैलेंस का इस्तेमाल टोल, ईंधन और पार्किंग शुल्क के भुगतान के लिए किया जाता रहा है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को पर्यटन विकास परिषद मनाली ने अधिग्रहणकर्ता बैंक के रूप में चुना है।बता दें कि हिमाचल प्रदेश में हर महीने 50 लाख पर्यटक देश विदेश से घूमने के लिए आते है, यह सुविधा मिलने के बाद अब पर्यटकों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। जाम से मिलेगी राहत -- ग्रीन टैक्स बैरियर पर फास्टैग से ग्रीन टैक्स का भुगतान होने से अब लोगों को जाम से निजात मिलेगी। बता दें की अभी तक मनाली आने वाले अन्य राज्यों में रजिसट्रर्ड वाहनों से ग्रीन टैक्स लिया जाता है। पर्ची सिस्टम होने से पहले इसमें काफी समय लगता था। इससे इस ग्रीन टैक्स बैरियर पर जाम लग जाता था। दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड मोटरसाइकिल पर 100 रुपये, कार पर 200, स्कॉर्पियो पर 300 और बसों पर 500 रुपये ग्रीन टैक्स लगता है। 60 लाख फास्टैग जारी -- आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 400 से अधिक टोल प्लाजा को सेवा देने वाला सबसे बड़ा अधिग्रहणकर्ता है और उसने करीब 60 लाख फास्टैग जारी किए हैं। इनकी मदद से प्रतिदिन औसतन लगभग 20 लाख का लेन-देन किया जाता है। फास्टैग प्रोग्राम को संयुक्त रूप से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा सभी राष्ट्रीय राजमार्ग प्लाजा पर टोल किराया स्वीकार करने के माध्यम के रूप में लॉन्च किया गया था।
प्रदेश में विलुप्त होती जड़ी बूटियों की पहचान करना अब आसान होगा , इसके लिए मंडी के जंजैहली घाटी के भूलाह में एक करोड़ की लागत से राज्य का पहला जैव विविधता पार्क तैयार किया गया है। ख़ास बात यह है की वादी-ए-भूलाह में प्रदेश के साथ-साथ देश-विदेश के शोधकर्ताओं, पर्यटकों और हिमालय की विलुप्त होती जड़ी-बूटियों के संरक्षण में अपना योगदान देंगे । प्रदेश का पहला बायोडायवर्सिटी पार्क (जैव विविधता उद्यान) हिमालय की विलुप्त होती जड़ी-बूटियों के संरक्षण के साथ-साथ शोधकर्ताओं व पर्यटकों के लिए भी वरदान साबित होगा। बता दें की राज्य के इस पहले जैव विविधता पार्क को हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा नेशनल मिशन आन हिमालयन स्टडीज प्रोजेक्ट के अन्तर्गत बनाया गया है। यह राज्य का पहला पार्क है जिसमें विलुप्त होती जड़ी-बूटियों को संरक्षित करने पर बल दिया गया है। पार्क को पयर्टन गतिविधियों से जोड़ने के साथ-साथ शोधकर्ताओं के लिए हिमालय में पाई जाने वाली विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों (हर्बल प्लांट्स) पर शोध करने के नए मौके देने के लिए भी तैयार किया गया है जो विलुप्त होने के कगार पर है। पार्क में प्रदर्शन के लिए पहाड़ों में विलुप्त हो रही जड़ी-बूटियों की हर्बल नर्सरी तैयार की गई है। इस नर्सरी में नाग छतरी, धूप, कडू, सर्पगंधा, चिरायता, टैक्स, बर्बरी, चैरा, पठानबेल, पत्थर चटा, भूतकेसी, न्यार, मुश्कवाला, वण, अजवायण, कूठ व वर्रे, संसरपाली, डोरी घास, रतन जोत, अतीश पतीश, वन ककड़ी, शिंगली मिगली, जगली लहसुन, डुंगतली, इत्यादि जड़ी बूटियां प्रदर्शित की गई है। यहां देश-विदेश का कोई भी शोधकर्ता इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर अपना शोध कार्य कर सकता है। इसके अतिरिक्त हर उस जड़ी बूटी पर भी खोज कार्य किया जा सकेगी, जिनकी अभी तक कोई पहचान नहीं हो पाई है। इस हर्बल नर्सरी में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 1200 पौधे शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र में स्थापित गए राज्य के पहले इस अनूठे पार्क को 5 हेक्टेयर यानि 60 बीघा से अधिक भूमि पर तैयार किया गया है। यहां शोधकर्ताओं के लिए विभिन्न मूलभूत सुविधाएं भी जुटाई गई हैं। भूलाह की सुंदर वादियों में स्थापित इस पार्क को चारों ओर से बाड़बंदी कर सुरक्षित बनाया गया है। एनएमएचएस प्रोजेक्ट के विभिन्न कार्य लगभग 15 हेक्टेयर भूमि पर किए गए है। शोधकर्ताओं व पर्यटकों के लिए एम्फी थियेटर--- यहां आने वाले शोधकर्ताओं व पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्क में एम्फी थियेटर भी बनाया गया है, जहां पहाड़ी क्षेत्रों में उगने वाली जड़ी बूटियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सकेगी। पार्क में देश-विदेश से आने वाले शोधकर्ताओं के लिए रहने खाने की व्यवस्था के लिए दो लाॅग हट भी निर्मित किए गए है। इसके अलावा दो लाॅग्स हट, वाॅटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, इंटरनल टैंक, 5 किलो वाट बिजली तैयार करने वाला प्रोजेक्ट, एम्फी थिएटर, पक्षियों के घोंसले, हर्बल नर्सरी, फूट ब्रिज व बिक्री केंद्र इत्यादि तैयार किया गया है। पर्यटकों के लिए पार्क में दो ट्री-हट भी तैयार किए गए हैं, जहां से वे पार्क सहित अन्य रमणीक स्थलों को निहार सकते हैं। इसके अलावा लगभग 2 किमी की दूरी तक नेचर ट्रेल्स बनाई गई हंै। 25 फीट ऊंची व 160 मीटर लंबी ट्री-वाॅक तैयार की गई है। इसके अलावा सात फुट ब्रिज बनाए गए हैं। पार्क के साथ लगते टैक्सस के जंगल में शोधकर्ताओं के लिए इंटरनल ट्रैक बनाया गया है, जिसमें वे आसानी से घूम कर अपना रिसर्च कार्य कर सकते हैं।
भगवान शिव और माता पार्वती का मिलन पर्व महाशिवरात्रि विश्व भर में मनाया जाता है, मगर छोटी काशी मंडी शहर की शिवरात्रि का अंदाज ही अनूठा है। यहां सात दिवसीय महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेले का तमगा प्राप्त है। ये सात दिन श्रद्धा और भक्ति से सराबोर होते है और लाखों श्रद्धालु इस उत्सव में भाग लेने पहुँचते है। शिवरात्रि के साथ ही हिमाचल प्रदेश में साल भर चलने वाले मेलों की शुरुआत होती है। मंडी नगरी में पावन शिवरात्रि पर्व से जुड़ी एक कथा भी है। इसके अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती को विदा कर ले जाते समय भगवान शिव को संसार का ध्यान आया तो वे बारातियों के साथ ही नई नवेली दुलहन को वहीं छोड़ कर तपस्या में लीन हो गए। शिव के न लौटने पर माता पार्वती विलाप करने लगी, जिसे सुनकर एक पुरोहित आगे आया। फिर भगवान शिव का आह्वान करने के लिए मंडप की स्थापना कराई गई। मंडप में प्रकट होकर भगवान शिव ने पूछा कि उन्हें क्यों बुलाया गया है, तो पुरोहित ने कहा कि आपकी याद में रोते-रोते पार्वती सो गई हैं। तभी से इस स्थान का नाम मंडप से मांडव्य और फिर मंडी पड़ा। माना जाता है कि पंद्रहवीं शताब्दी में राजा अजबर सेन ने बटोहली से अपनी राजधानी ब्यास नदी के उस पार स्थापित की थी। संभवत: इसी दौरान महाशिवरात्रि के पर्व का शुभारंभ हुआ। प्रारंभ में इसे दो दिन के लोकोत्सव के रूप में मनाया जाता था, जिसमें मंडी जनपद के लोक देवताओं की भागीदारी रहती थी। फिर सोलहवीं सदी के दौरान राजा सूरज सेन ने मंडी शिवरात्रि में जनपद के देवी-देवताओं को आमंत्रित करने और एक सप्ताह तक मेहमान बनाकर रखने की परंपरा भी डाली। तब से ये परंपरा चली आ रही है। सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से जुड़ा है मंडी का इतिहास : मंडी रियासत का इतिहास सुकेत रियासत की सातवीं पीढ़ी से प्रारंभ होता है, जब राजा साहूसेन के छोटे भाई बाहूसेन ने अपने भाई से रूष्ट होकर कुछ विश्वास पात्र सैनिकों को साथ लेकर लोहारा को छोड़कर बल्ह के हाट में अपनी राजधानी बसाई थी। इसी के साथ मंडी रियासत की स्थापना हुई थी। बाहूसेन ने ही हाटेश्वरी माता के मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद वे मंगलौर में जा बसे थे। 1280 ई.में बाणसेन ने मंडी शहर के भियूली में मंडी रियासत की राजधानी स्थपित की, जो बटोहली होते हुए 1527 ई. में अजबर सेन ने बाबा भूतनाथ के मंदिर के साथ ही आधुनिक मंडी शहर की स्थापना की थी। राज देवता माधोराय, बड़ादेव कमरुनाग और बाबा भूतनाथ से है नाता : मंडी शिवरात्रि में शैव मत का प्रतिनिधित्व जहां शहर के अधिष्ठदाता बाबा भूतनाथ करते हैं, तो वैष्णव का प्रतिनिधित्व राज देवता माधोराय और लोक देवताओं की अगुआई बड़ादेव कमरूनाग और देव पराशर करते हैं। इस लोकोत्सव में देवी देवताओं के साथ जनपद के लोगों की भागीदारी भी रहती थी, जो मंडी नगर में माधोराय के अलावा अपने राजा के दर्शन भी करते थे। मेले के दौरान जनपद के देवी-देवता राजदेवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। यह परंपरा भी राजा सूरज सेन के समय से ही है। शिवरात्रि का शुभारंभ बाबा भूतनाथ और माधोराय के मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ होता है। इसमें सबसे पहले बड़ा देव कमरूनाग मंडी नगर में पहुंचते हैं। इसके पश्चात ही शिवरात्रि के कार्य शुरू होते हैं। राजतंत्र के जमाने से ही राजदेवता माधोराय की जलेब निकलती है। देखने को मिलता है देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम : शिवरात्रि मेले के दौरान जनपद के सौ से अधिक देवी-देवता एक सप्ताह तक मंडी नगर में मेहमान बनकर रहते हैं। इस वर्ष 2 से 8 मार्च तक मनाए जाने वाले इस अन्तर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए भी 210 देवी-देवताओं को न्योता प्रशासन के माध्यम से भेजा जा रहा है। इसमें 190 के शिरकत करने की उम्मीद है। मंडी शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं का अनूठा देव समागम अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलता है। इस देव समागम में हिमाचल में पाई जाने वाली देव रथ शैलियों का अवलोकन करने को मिलता है। देव समागम में बैठने वाले देवताओं की वरिष्ठता का विशेष ध्यान रखा जाता है। लोक विश्वास के अनुसार जिस देवता की पालकी पहले बनी है वही वरिष्ठ होता है। राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में होता था शामिल : राजशाही के जमाने में राजा हाथी पर सवार होकर जलेब में शामिल होता था। शिवरात्रि की जलेब के कुछ चित्र प्राचीन हवेलियों में देखने को मिलते हैं। सेरी चानणी और घंटाघर के आसपास लगे मेले के दृश्य चित्रित हैं। वहीं पर जलेब देखने उमड़ी भीड़ और रनिवास के झरोखों से रानियों और राजपरिवार से जुड़ी महिलाओं के उत्सुकता से इस भव्य जलेब को देखने के दृश्य भी चित्रित हैं। वहीं इस बार 2 से 8 मार्च तक मनाए जाने वाले इस मेले का शुभारंभ मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। वे 2 मार्च को प्रथम जलेब की अगवानी करेंगे। मध्य जलेब 5 मार्च को निकाली जाएगी। तीसरी और अंतिम जलेब में 8 मार्च को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर शामिल होंगे। 50 साल के सफर को दिखाया जायेगा : दो मार्च से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी का स्वरूप इस वर्ष कुछ अलग देखने को मिलेगा। शिवरात्रि मेले में आने वाले लाखों लोग शिवरात्रि मेले के सफर से भी रूबरू होंगे। फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से जहां शिवरात्रि मेले के 50 साल के सफर को प्राचीन चित्रों से दिखाया जाएगा। इस वर्ष जत्थों में निकलेगी जलेब : इस वर्ष शिवरात्रि महोत्सव में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्यों की टीमें भाग लेंगी। वहीं, सांस्कृतिक संध्याएं बहुत ही सीमित होंगी। इनमें केवल स्थानीय कलाकार बुलाए जाएंगे। बॉलीवुड या पंजाब से इस बार कलाकारों को नहीं बुलाया जाएगा। मेले के दौरान लगने वाली देश-विदेश की प्रदर्शनियां और स्टॉल भी नहीं लगेंगे। यहां पर केवल हिमाचली प्रदर्शनियां और स्टॉल ही लगाए जाएंगे। इस वर्ष शिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवताओं की पहचान पगड़ियों के रंगों से हो सकेगी। हर देवी-देवता के 10 कारदारों को विशेष रंग की पगड़ियां प्रदान की जाएंगी। साथ ही पड्डल में देवी-देवताओं के बैठने के लिए विशेष प्रबंध किया जाएगा। कोविड नियमों की पालना के लिए इस वर्ष जलेब जत्थों (टुकड़ियों) में अलग-अलग चलेंगी। तारा रात्रि से होता है शिवरात्रि का आगाज : पुरातन काल से चली आ रही परंपराओं के अनुसार तारारात्रि से शिवरात्रि का आगाज माना जाता है। तारा रात्रि की रात को मंडी शहर के प्राचीन बाबा भूतनाथ मंदिर के शिवलिंग पर माखन का लेप चढ़ाने की परंपरा रही है। शिवरात्रि वाले दिन माखन को उतारकर इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। इस वर्ष के शिवरात्रि महोत्सव में तारा रात्रि 29 जनवरी को मनाई गई। बाबा भूतनाथ को 40 किलो मक्खन का लेप लगाया गया। पहले दिन माखन के लेप पर गसोता महादेव की आकृति बनाई गई। यह प्रसिद्ध मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला में स्थित है।
आगामी बजट सत्र से हिमाचल प्रदेश में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को काफी उम्मीदें है। ये कर्मचारी एक लम्बे समय से स्थाई नीति की मांग कर रहे है, मगर अब तक आश्वासनों के सिवा कुछ खास हाथ नहीं आया। अब बजट सत्र इनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है। ये बजट इस सरकार के कार्यकाल का अंतिम बजट है और इसीलिए कर्मचारियों को इससे खूब उम्मीदें है। बीते 18 सालों से आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश के विभिन्न विभागों में ड्यूटी दे रहे हैं लेकिन उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली कोई भी सुविधाएं नहीं मिलती। हालांकि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कैबिनेट की सब कमेटी का गठन जरूर किया गया परन्तु इस कमेटी की बैठक के बाद भी कर्मचारियों को बजट तक इंतजार करने का आश्वासन दिया गया। दरससल लम्बे समय से इन कर्मचारियों का ब्यौरा सरकार एकत्र करने का प्रयास कर रही है और इसी को विलम्ब का बड़ा कारण भी बताया जा रहा है। अब उम्मीद तो है परन्तु कर्मचारी पूरी तरह आश्वस्त हो ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसीलिए सरकार के आश्वासन के बाद भी आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ ने राज्य स्तरीय बैठक कर प्रदेश के 40 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग फिर दोहराई है। शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों के प्रतिनिधि जुटे और समस्याओं पर मंथन किया। हिमाचल आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ की मांग है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बजट सत्र में किसी ठोस नीति का प्रावधान किया जाए। इन कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस दफे भी इन कर्मचारियों को लटकाया गया तो ये सब मिलकर सरकार के खिलाफ संघर्ष का रास्ता अपनाएंगे। महासंघ का कहना है कि प्रदेश में विभिन्न कंपनियों व ठेकेदारों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई फैसला नहीं लिया है । हर बार आश्वासन ही दिए गए। आउटसोर्स कर्मचारी सोसाइटी और कंपनियों के माध्यम से लगे हैं। ये कर्मी पिछले 18 साल से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इन्हें स्थायी करने के बारे में सोचा नहीं जा रहा है। महासंघ का कहना है कि सोसाइटी या कंपनी विभाग की मांग के अनुसार पैनल बनाकर विभाग के पास नाम भेजती है। इसके बाद विभागीय कमेटी इंटरव्यू लेकर आउटसोर्स पर रखती है। पर इसके बाद भी इनको नियमित नहीं किया जा रहा। हिमाचल प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ का कहना है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा गया है लेकिन सरकार द्वारा इनके नियमितीकरण के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई है और न ही इनके शोषण को कम करने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं। इनका कहना हैं कि कोरोना काल जैसी विकट परिस्थिति में भी सरकार इनकी सेवाएं लेती रही, मगर जब बात इनकी मांगो को पूरी करने की आती हैं तो ये ही कर्मचारी सरकार की आंखों में चुभने लगते हैं। मुश्किल में कोई साथ नहीं देता : शैलेन्द्र हिमाचल आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र शर्मा के अनुसार कुछ दिन पहले ही एक मामला सामने आया था जिसमें बिजली विभाग में नियुक्त एक आउटसोर्स कर्मचारी की करंट लगने से हालत गंभीर हो गई। उसे आईजीएमसी तक रेफर कर दिया गया मगर न तो ठेकेदार ने उसकी कोई सहायता की और न ही सरकार ने। इसी तरह आउटसोर्स पर तैनात नर्सेज, अध्यापक और जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों के शोषण की खबर भी आये दिन सामने आती रहती है। कमीशन काटकर वेतन देते हैं ठेकदार : आउटसोर्स कर्मचारी वे कर्मचारी हैं जिनको सरकारी विभागों में अनुबंध आधार पर रखा जाता है। यानी कि ये सरकारी विभाग में तो हैं पर सरकारी नौकरी में नहीं हैं। इनकी नियुक्तियां या तो ठेकेदारों के माध्यम से की जाती है या किसी निजी कंपनी के माध्यम से। ये कर्मचारी काम तो सरकार का करते है मगर इन्हें वेतन ठेकेदार या कंपनी द्वारा मिलता है। न तो इन्हें सरकारी कर्मचारी होने का कोई लाभ प्राप्त होता है न ही एक स्थिर नौकरी। इन्हें जब चाहे नौकरी से निकाला जा सकता है। सरकार द्वारा वेतन तो दिया जाता है मगर ठेकेदार की कमिशन के बाद ही इन तक तक पहुंच पाता है। .......................................................................... मांग : वेतनमान में विसंगतियां दूर हो - हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ ने की सरकार से मांग फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ (एचपीएसएलए) ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि नए वेतनमान में विसंगतियों को दूर किया जाएं। संघ का कहना है कि हिमाचल सरकार का 1972 से कर्मचारियों से करार है कि पंजाब पे कमीशन को हिमाचल के कर्मचारियों पर यथावत रूप में लागू किया जाएगा, उसे सरकार पूरा करे। साथ ही संघ ने चेताया है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती तो जल्द ही एसोसिएशन जनरल हाउस बुलाकर सबकी सहमति से अगली रणनीति तैयार करेगी और सरकार को इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ का कहना है कि पंजाब में 2016 के बाद जितने भी नियमित कर्मचारी हैं उन सबको नियुक्ति की तिथि से गुणांक 2.59 और 2.25 दिए जा रहे हैं, जिनसे क्रमश: उनकी इनिशियल स्टार्ट 43000 और 47000 रुपए बनती है। इनकी मांग है कि जिस प्रकार पंजाब में बढ़े हुए ग्रेड पे 5400 के साथ 2016 में नियुक्त हुए नए प्रवक्ताओं को 47000 से इनिशियल स्टार्ट दिया है, इसी तरह हिमाचल में भी दिया जाए। संघ के प्रदेश महासचिव संजीव ठाकुर ने कहा कि पंजाब पे कमीशन को हिमाचल के कर्मचारियों पर यथावत रूप में लागू किया जाएं। ........................................................................................ पदोन्नति में समय अवधि कम करने पर जताया आभार फर्स्ट वर्डिक्ट . शिमला हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुनी चंद ठाकुर एवं प्रदेश महामंत्री नेकराम ठाकुर ने बिजली बोर्ड में कार्यरत जूनियर टी मेट एवं जूनियर हेल्पर की पदोन्नति के लिए समय अवधि 4 वर्ष से 3 वर्ष करने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त किया है। उन्हें 14 फरवरी 2022 की बिजली बोर्ड की बीओडी की बैठक में स्वीकृति दी गई है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने अपने प्रेस संबोधन में की है। तकनीकी कर्मचारी संघ ने भारतीय मजदूर संघ का भी धन्यवाद प्रकट किया है क्योंकि 8 फरवरी 2022 को भारतीय मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में ये मुद्दा उजागर किया था। इस बैठक में तकनीकी कर्मचारी संघ ने भी जूनियर टी मेट और जूनियर हेल्पर के विषय को बड़ी गंभीरता से रखा था जिस पर मुख्यमंत्री ने बिजली बोर्ड को उनकी घोषणा के अनुरूप आदेश करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने हिमाचल सरकार वह बिजली बोर्ड प्रबंधन से यह भी मांग की है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों को भी संशोधित वेतनमान तुरंत प्रभाव से दिए जाएं क्योंकि हिमाचल सरकार ने अन्य विभागों के कर्मचारियों को इस माह के वेतन को संशोधित वेतनमान के अनुसार वेतन देने के आदेश किए हैं जिस पर बिजली बोर्ड के कर्मचारी भी स्वभाविक तौर पर नए वेतन की आस लगाए हुए हैं। ............................................................................ पुरानी पेंशन : इंतजार की इन्तेहां हो गई, फिर विधानसभा घेराव की तैयारी फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला इंतजार की इन्तेहां हो गई है और अब कर्मचारी बात मानने के मूड में बिलकुल भी नजर नहीं आ रहे। पुरानी पेंशन बहाली के लिए कर्मचारियों की अनगिनत याचनाएं धरी की धरी है पर सुनवाई होती नहीं दिख रही। सुनवाई होती भी है तो कच्चे पक्के आश्वासन कर्मचारियों को थमा दिए जाते है, पर मांग को पूरी तरह मानने से सरकार बचती हुई दिखाई दे रही है। प्रदेश के हर विधायक, हर मंत्री के दर पर दस्तक देने के बावजूद कुछ ठोस होता नहीं दिख रहा। इसी बीच विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा हैं और संभवतः एक बार फिर कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिले। बस धर्मशाला के तपोवन की जगह कर्मचारी शिमला के चौड़ा मैदान में डेरा डालेंगे और पुरानी पेंशन के लिए विधानसभा का घेराव होगा। पुरानी पेंशन बहाली के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ अब प्रदेश सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। पुरानी पेंशन बहाली के लिए महासंघ ने प्रदेश के बजट सत्र के दौरान 3 मार्च को सरकार का घेराव करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय मंडी में आयोजित न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ की राज्य स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में महासंघ के साथ जुड़े प्रदेश भर के पदाधिकारी व कर्मचारी पहुंचे और तय किया गया कि अब याचना नहीं रण होगा। रणनीति विधानसभा के घेराव की बनाई गई है। प्रदेश के हज़ारों कर्मचारियों से शिमला आने की दरख्वास्त की जा रही और महासंघ की माने तो अधिकतर की सहमति मिलती भी दिखाई देने लगी है। यानि एक बार फिर विधानसभा के शीतसत्र के दौरान दिखा दृश्य शिमला में बजट सत्र के दौरान देखने को मिल सकता हैं। अब तक गठित नहीं हुई कमेटी : 10 दिसंबर को धर्मशाला के दाड़ी मैदान में भी कर्मचारियों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन सरकार के सामने किया था। एक नहीं अनेक संगठन पेंशन की मांग के लिए एकत्र हुए थे और अंत में सरकार को झुकना पड़ा और पुरानी पेंशन बहाली के लिए एक कमेटी गठन करने का आश्वासन दिया गया। अलबत्ता कमेटी अब तक गठित नहीं हो पाई है जिससे कर्मचारियों में नाराज़गी है। महासंघ का कहना है कि सरकार अब कमेटी के गठन को छोड़ पुरानी पेंशन बहाल करें। 2009 की अधिसूचना लागू ,पर कर्मचारी मांगे पुरानी पेंशन : हाल ही में सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक के दौरान 2009 की अधिसूचना लागू करने को मंजूरी दी गई है। मगर उससे भी कर्मचारी पिघलते हुए नजर नहीं आ रहे। कैबिनेट के अप्रूवल के बाद एनपीएस के तहत आने वाले सभी कर्मचारियों के लिए मृत्यु व अपंगता पर फैमिली पेंशन का प्रावधान किया गया है, मगर कर्मचारी अपनी एक मात्र मांग पुरानी पेंशन बहाली पर अटके हुए है। सरकार को कोई वित्तीय घाटा नहीं होगा : प्रदीप न्यू पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर का कहना हैं कि बजट सत्र के दौरान शिमला में प्रदेश भर से एक लाख से अधिक कर्मचारी एकत्रित होंगे। पुरानी पेंशन के लिए मंडी से शिमला तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी और फिर विधानसभा पहुंचकर बजट सत्र के दौरान सरकार का घेराव किया जाएगा। ठाकुर का कहना है कि धर्मशाला में रैली के बाद महासंघ की प्रदेश के सरकार के साथ बैठक भी हुई थी। बैठक में प्रदेश सरकार को सुझाव दिया गया था कि यदि सरकार पुरानी पेंशन बहाल करती है, तो सरकार को 2009 की अधिसूचना लागू की वृद्धि होगी। परन्तु 2 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अभी तक कमेटी तक का गठन नहीं किया है नई पेंशन स्कीम कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन का 10 प्रतिशत पैसा जबरदस्ती कंपनी को दिया जा रहा है और सरकार अपना 14 प्रतिशत पैसा भी कंपनी को दे रही है जिससे सरकार और कर्मचारी दोनों को नुकसान हो रहा है। नई पेंशन स्कीम से सिर्फ और सिर्फ कंपनी को ही फायदा हो रहा है जो सही नहीं है l पुरानी पेंशन पर सियासत भी भरपूर : पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सियासत भी तेज है। विपक्ष कर्मचारियों को आश्वासन देकर सत्ता वापसी की स्थिति में पेंशन बहाल करने के सपने दिखा रहा है और भाजपा कर्मचारियों को याद दिला रही है कि प्रदेश में एनपीएस लाने वाली कांग्रेस ही थी जो आज इसे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बता रही है। पेंशन के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि इस वक्त कोई भी प्रदेश पुरानी पेंशन देने की स्थिति में नहीं है। जहां कांग्रेस की सरकार है वहां भी पुरानी पेंशन कर्मचारियों को नहीं मिल रही। ऐसे में पहले से वित्तीय घाटे में चल रहे हिमाचल प्रदेश के लिए भी पुरानी पेंशन की वापसी करवाना आसान नहीं होगा।
2020 में हुए कैबिनेट फेरबदल के बाद जयराम कैबिनेट में बतौर वन, युवा एवं खेल मंत्री एंट्री हुई थी फायर ब्रांड नेता राकेश पठानिया की। उसी समय से कांगड़ा की सियासत में पठानिया ही भाजपा का प्राइम फेस बने हुए है। पठानिया नूरपुर से विधायक हैं और हर मसले पर बेबाक अंदाज में अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। विधानसभा में भी सत्ता पक्ष के बचाव में पठानिया की बुलंद आवाज खूब गूंजती रही हैं। फर्स्ट वर्डिक्ट मीडिया ने राकेश पठानिया से विशेष बातचीत की। वन विभाग में अनियमितताओं का मुद्दा हो या नई खेल नीति का विजन, नए ज़िलों के गठन का मुद्दा हो या कर्मचारियों की लंबित मांगो का प्रश्न, पठानिया ने खुलकर हर सवाल का अपने अंदाज में जवाब दिया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश .... पंकज सिंगटा। फर्स्ट वर्डिक्ट सवाल : सांसद खेल महाकुम्भ प्रदेश में फिर से शुरू हो गया है। जो युवा इसमें हिस्सा ले रहे है उनके लिए आगे क्या स्कोप रहेंगे ? उत्तर : लगभग पौने दो साल से कोरोना के चलते कई प्रतिबन्ध रहे हैं। स्कूल, स्टेडियम, जिम सब कुछ बंद था। पर अब लगता है कि तीसरी लहर जा चुकी है और हमारी इम्युनिटी भी ठीक है और बच्चों को भी टीके लग चुके है। कुछ ही समय में हम सांसद खेल महाकुम्भ को पूरे प्रदेश में लांच करेंगे। हमने 22 साल के बाद अपनी स्पोर्ट्स पॉलिसी भी लांच की है जो एक बैलेंस्ड स्पोर्ट्स पॉलिसी है। यह खेल महाकुम्भ टैलेंट सर्च का भी माध्यम हैं। मैं बिलासपुर, ऊना और अन्य क्षेत्रों के सांसद खेल महाकुम्भ के कार्यक्रमों में गया, जहां मैंने अचंभित करने वाली प्रतिभाएं देखी। पहले यह सांसद खेल महाकुम्भ था लेकिन अब इसके साथ प्रदेश सरकार ने इसे अपना लिया है। इससे फर्क ये पड़ा है कि अब हमने इवेंट्स बढ़ा दिए और टैलेंट स्पॉट शुरू कर दिया है। हमे बास्केटबॉल के टूर्नामेंट में 6 सवा 6 फुट की बेटियां मिली, जो शायद गांव से आती थी, अपना एक मैच खेलती थी और गांव चली जाती थी। अपना 10वीं, 12वीं, ग्रेजुएशन कर के शादी कर लेती थी। हिमाचल में इतना ज्यादा रिच टैलेंट है कि हम इस खेल महाकुम्भ के माध्यम से उन्हें आगे लेकर जा सकते है। हम स्पोर्ट्स पॉलिसी में लेकर आये है कि हर जिले में हम अकादमियां तैयार करेंगे। अब केंद्र में भी हमारी सरकार है और केंद्र में हमारा हिमाचल का ही एक नौजवान केंद्रीय मंत्री भी है। अनुराग ठाकुर से बहुत सी उम्मीदें है, निश्चित तौर पर हमें उनकी सहायता मिलेगी। सवाल : आप युवा सेवाएं मंत्री भी है, हाल ही में मंडी के अंदर नकली शराब कांड सामने आया था। प्रदेश में नशे का कारोबार भी लगातार बढ़ता जा रहा है। किस तरह के कार्य उसे रोकने के लिए किये जा रहे है ? उत्तर : मैं कहूंगा नशा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। रातों रात अमीर बनने के लिए जो लोग ये धंधा करते है वो समाज के सबसे बड़े दुश्मन है और इनका पोलिटिकल बैकग्राउंड कहाँ है वो आप सब को पता चल गया है। मैं समझता हूँ कि यदि हमारा युवा ही नशे में चला गया तो हमारा प्रदेश और देश दोनों का भविष्य ही खतरे में है। सरकार इसे लेकर संजीदा हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। सवाल : आप वन मंत्री है, वन विभाग के अंदर किस तरह के नए रिफॉर्म्स लाये गए है और किस तरह वन विभाग कार्य कर रहा है कि आर्थिकी को और ज्यादा मजबूत किया जाए ? उत्तर : वन विभाग में हम बहुत सारे रिफॉर्म्स लाये है और बहुत सारे काम अभी करने को है। अभी मुझे कुछ ज्यादा समय नहीं हुआ है पर उसके बावजूद भी हमने खेर के ऊपर भी बहुत सारा काम करना शुरू किया है। खेर की अगर बात करें तो हमारे पास यह एक बहुत बड़ी फारेस्ट वेल्थ है जिसका अगर ठीक से उपयोग किया जाये तो हम प्रदेश के रेवेन्यू में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन दे सकते है। इसी तरह इसकी प्रोसेसिंग में बहुत सी त्रुटियां थी जिसको हम ठीक करके प्रदेश के युवाओं को इस काम में लगाना चाहेंगे। हमारा जो माल है वो बाहर जाना बंद हो और हमारे लोग यही पर इसका प्रोसेस कर पाए, इसको लेकर हम बहुत जल्द कदम उठाएंगे। अन्य कई महत्वपूर्ण रिफॉर्म्स पर भी हम काम कर रहे हैं। पौधरोपण की बात करें तो इस साल हमने 15 हजार हेक्टेयर में पौधरोपण किया है और लगातार हमारा यह काम आगे बढ़ रहा है। वन विभाग में हमने 400 गार्ड भर्ती किये है और जो हमारी स्टाफ की कमी थी उसको भी हमने काफी हद तक पूरा किया है। आने वाले वक्त में भी आवश्यक निर्णय लिए जायेंगे। सवाल : वन विभाग में बहुत सारी अनियमितताएं है। कई स्थानों में कर्मचारी केवल रजिस्टर में ड्यूटी पर तैनात है लेकिन वह वहां मौजूद नहीं है। इसके अलावा और भी बहुत सारी अनियमितताएं है, उन्हें किस तरह से दूर किया जायेगा। उत्तर : मैं इस बात को मानता हूँ कि बहुत सारी अनियमितताएं है और इसमें समय लगेगा। हम लोग इस पर काम कर रहे है। मुझे उम्मीद है हमने जिस तरह से शिकंजा कसा है, जिस तरह से हम लोग पॉलिसी पर काम कर रहे है, सब ठीक होगा। हमें कोरोना काल में बहुत नुक्सान हुआ है जिस कारण हम अपने काम पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाए। इस दौरान हमारा हेल्थ सेक्टर प्राथमिकता बन गया और हमारा सारा फोकस जो था वो हिमाचल के लोगों को बचाने पर लग गया था। हमको समय थोड़ा कम मिला, लेकिन मुझे आशा है कि नतीजे अच्छे ही होंगे। सवाल : 2022 विधानसभा चुनाव बहुत नजदीक है और कांग्रेस लगातार कह रही है कि फिर से सत्ता में वापसी करेगी। आप भी मिशन रिपीट की बात कह रहे हैं। किस तरह होगा मिशन रिपीट ? उत्तर : कांग्रेस का यह एक बहुत बड़ा ख्वाब है, बहुत बड़ा सपना है जो बहुत जल्द टूटने वाला है। ये चार उपचुनाव में जो फैसले आये है, उसके बाद इनका जोश बढ़ा हुआ है। पर आज इनके पास दूल्हा कौन है ये भी इन्हें नहीं पता, किसकी बारात में इनको जाना है ये भी नहीं पता, कौन राज्य को लीड करने वाला है ये भी इनको नहीं पता। एक बिल्कुल कन्फ्यूज्ड और डिवाइडेड कांग्रेस है। देश के लोगों ने मन बना लिया है कि अब कांग्रेस के अलावा कुछ और सोचना पड़ेगा और उसका एक विकल्प केवल और केवल भाजपा है। एक समय था जब हमारे पास देश में एक मुख्यमंत्री नहीं होता था आज हमारे पास 16 है। कहाँ इनके पास 26 मुख्यमंत्री हुआ करते थे अब दो रह गए है। पंजाब वाला तो 4 दिन के बाद जाने वाला है। हमारी सरकार रिपीट करेगी इसकी हम आपको गारंटी देते है। सवाल : कर्मचारी सरकार से लगातार नाराज़ दिख रहे है। पुरानी पेंशन बहाली की बात हो, करुणामूलक संघ, एनएचएम कर्मचारी या अन्य कर्मचारी, सब लगातार नाराज दिख रहे है। आपको नहीं लगता कि इस तरह से भाजपा के लिए 2022 का चुनाव मुश्किल होने वाला है ? उत्तर : देखिये कर्मचारी अगर अब भी नाराज होंगे तो फिर अब कभी खुश नहीं हो सकते। जितना जयराम सरकार ने उन्हें दिया है उतना किसी भी सरकार ने उन्हें नहीं दिया है। साढ़े सात सौ करोड़ के बेनिफिट्स तो हमने अभी उनको दिए है। पुलिस के बच्चों की बात थी, उनके साथ इतना बड़ा धोखा हुआ था। ये 2015 में हुआ था और तब कांग्रेस की सरकार थी। हमने उसे सही किया। नई पेंशन स्कीम 2003 में कांग्रेस लेकर आई। जयराम ठाकुर ने कर्मचारियों को इतना दिया हैं कि गिनाने लगा तो शायद कोई अंत न हो। मैं यही कहूंगा कि जयराम सरकार कर्मचारी हितेषी सरकार हैं और कर्मचारी हित में हमने कई बड़े निर्णय लिए हैं और आगे भी हम सकारात्मक रुख रखते हैं। सवाल : नए जिलों को बनाने की मांग जोरों पर है और भाजपा सरकार का भी सकारात्मक रवैया इस मुद्दे को लेकर दिख रहा है। किस तरह से देखते है। उत्तर : मैं यह व्यक्तिगत तौर पर महसूस करता हूँ कि हिमाचल को और जिलों की जरुरत है। मैं यदि नूरपुर की ही बात करूँ तो हर काम के लिए लोगों को कांगड़ा जाना पड़ता हैं। हमने इस बात को उठाया है और मैं तो पिछले 17 सालों से इस बात की लड़ाई लड़ रहा हूँ। हमने धरने प्रदर्शन भी दिए है, हमने जुलुस भी निकाले है, हमने बहुत कुछ किया है। अब मैं मंत्री हूँ इसलिए मैं खुलकर कुछ नहीं बोल सकता, लेकिन मैंने अपने हाईकमान के आगे ये बात रखी है। मुख्यमंत्री से भी हमने निवेदन किया है। फैसला ये लोग करेंगे और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हिमाचल के हक में और नूरपुर के हक में ये फैसला होगा। सवाल : नूरपुर की यदि बात करे तो यहां पिछले कई सालों से ये देखने को मिल रहा है कि एक बार राकेश पठानिया जीत कर आते है और एक बार कांग्रेस के प्रत्याशी जीत कर आते है। क्या कहेंगे ? उत्तर : देखिये जब मैं 2007 में जीता था तो आज़ाद जीता था और मुझे 29900 वोट पड़े थे और भाजपा को 4 हजार और कांग्रेस के प्रत्याशी को 24000 वोट पड़े थे। 2012 में मैं फिर से आज़ाद था, मुझे 24000 के करीब वोट पड़े थे, भाजपा को 6400 के करीब और कांग्रेस को 26000 वोट पड़े थे। उस समय यदि टिकट मिली होती तो चुनाव हारने का कोई मतलब ही नहीं था। अब कोई टिकट की लड़ाई नहीं है। मैंने जब भी आजाद लड़ा है तो पूरी की पूरी भाजपा मेरे साथ रही है लेकिन बीच में कोई ऐसा एलिमेंट होता है जिनका नेशनल पार्टी के साथ थोड़ी सी एफिलेशन रहती है। विकास की अगर बात करें तो मैंने यहाँ के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जबकि कांग्रेस के राज में यहाँ फूटी कौड़ी का काम नहीं हुआ। जनता विकास को प्राथमिकता देंगी और फिर एक एक बार मौका देगी। सवाल : नूरपुर में भाजपा के अंदर अंतर्कलह देखने को मिल रही है। आपकी पार्टी के ही एक नेता है जो साफ तौर पर कह रहे है की वह 2022 में चुनाव लड़ने वाले है। इसी के साथ वह ये भी लगातार आरोप लगा रहे है की नूरपुर में कोई विकास नहीं हुआ है। यदि इस तरह की अंतर्कलह चलती रही तो आपको नहीं लगता कि कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा ? उत्तर : देखिये कोई अंतर्कलह नहीं है, जो लोग केवल भाजपा का ठप्पा लगा कर ये सब बोल रहे है उन लोगों ने आज तक किसी मंडल की बैठक में भाग नहीं लिया है। कभी जिले की बैठक में भाग नहीं लिया है। इन लोगों का भाजपा से कुछ भी लेना देना नहीं है। केवल एक माफिया है, यहाँ पर जिसके खिलाफ मैं कई सालों से लड़ाई लड़ रहा हूँ और आगे भी मेरी लड़ाई जारी रहेगी। माफिया को मैं परमिशन नहीं देने वाला हूँ कि वह खुल के हमारे खड्डों का बेडागर्क कर दे, खुल के यहाँ पर नशे का कारोबार हो। ये सारा काम हमने रोका है और इस काम को हम आगे भी रोकेंगे। मुझे और भाजपा को यहां कोई चिंता नहीं है। बेतहाशा विकास हुआ है, आप एक पंचायत मुझे गिनवाइये जहाँ काम नहीं हुआ है। मैं आपकी टीम के साथ हर पंचायत में चलने के लिए तैयार हूँ। आप खुद जनता से पूछियेगा। हर पंचायत , हर गांव, हर गली में काम हो रहा हैं, निरंतर विकास हो रहा हैं और आगे भी जारी रहेगा। चुनाव में काम बोलता हैं और मुझे यकीन मेरा काम बोलेगा।
सब कुछ बोल भी दिया जाएं और चुप्पी भी बरकरार रहे, ऐसी सियासी अदा कम ही नेताओं में देखने को मिलती है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेमकुमार धूमल एक ऐसे ही सियासतगर है। नपे तुले अंदाज में अपनी बात रखने का उनका हुनर बेजोड़ है और उन्हें दूसरे से अलग बनाता है। यूँ ही कुछ भी बोल देना प्रो. धूमल का मिजाज नहीं है, वो जो भी बोलते है उसके गहरे मायने होते है। फर्स्ट वर्डिक्ट के लिए नेहा धीमान ने प्रो. प्रेम कुमार धूमल से एक्सक्लूसिव बातचीत की। सवालों का दौर चला तो मिशन रिपीट के दावों से लेकर उपचुनाव के जख्मों तक हर विषय पर चर्चा हुई। उनके निष्ठावानों की उपेक्षा पर भी बात हुई और जिक्र हावी अफसरशाही का भी हुआ। प्रोफेसर ने हर सवाल पर अपनी बात रखी। कहीं उनके जवाब में टीस और शिकायत झलकी तो कहीं व्यक्ति विशेष पर चर्चा न कर उन्होंने बता दिया कि क्यों उन्हें सियासत का भी प्रोफेसर कहा जाता है। जहां बोलना था वहां प्रो धूमल खुलकर बोले, नसीहत भी दी और अनुभव भी साझा किया। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश ... ............................................................................. उपचुनाव हार के तीन कारण : -टिकट का आवंटन गलत हुआ -कार्यकर्ताओं की कम भागीदारी भी कारण -नोटा फैक्टर भी बना वजह ............................................................................... नसीहत : - रवैये में बदलाव हो, याद रहे शासन नहीं सेवा के लिए है सत्ता - शिकायत की ही शिकायत आना दुर्भाग्यपूर्ण ................................................ Defeat is Orphan उपचुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होने के बाद जाहिर है पार्टी के मिशन रिपीट के दावों पर सवाल उठे है। भाजपा को तीन बार सत्ता में लाने वाले प्रो. धूमल ने इस हार पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि Defeat is Orphan, सियासत में पराजय अनाथ होती है , कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। वहीं, उपचुनाव प्रचार से उनकी दूरी के प्रश्न पर प्रो. धूमल ने खुलकर कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का फोन आया था और उन्होंने कहा की अर्की में एक दिन लगा देना। किन्तु करीबी रिश्तेदार के देहांत के चलते वे जा नहीं सके। अपनी ही चिर परिचित शैली में धूमल ये बताने से भी नहीं चूके कि अन्य स्थानों पर उन्हें प्रचार के लिए बुलाया ही नहीं गया था। धूमल कहते हैं कि शायद लगा होगा की कम लोगों से काम चल जायेगा। ........................................................... जरूरी नहीं सबको टैग मिले : प्रो. प्रेमकुमार धूमल को सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहा जाता है। धूमल कहते है कि इस तरह के टैग लोग लगाते है । जब कार्यकाल पूरा होता है तो जनता कोई एक टैग दे देती है, उन्होंने हर क्षेत्र में बहुत काम किया लेकिन जनता ने सड़कों वाला मुख्यमंत्री कहा। जब हमने उनसे पूछा, उनके अनुसार जयराम ठाकुर को कौनसा टैग मिलना चाहिए तो प्रो. धूमल ने कहा कि ये जनता तय करेगी। आगे धूमल कहते है " वैसे जरूरी नहीं है कि सबको टैग मिले। " .......................................................... घर नया हो तो भी काम का सामान रखा जाता है : 1998 से लेकर 2017 तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रो. प्रेमकुमार धूमल के चेहरे पर आगे बढ़ी। धूमल का फेस ही पार्टी का ग्रेस बढ़ाता रहा। इनमें से तीन बार भाजपा सत्ता कब्जाने में कामयाब रही। माना जाता हैं की 2017 में पार्टी आलाकमान बिना चेहरे के चुनाव में जाना चाहता था, लेकिन स्थिति ठीक न देखकर चुनाव से दस दिन पहले प्रो प्रेम कुमार धूमल को सीएम फेस बनाना पड़ा। दांव ठीक पड़ा और भाजपा सत्ता में आई, हालाँकि खुद धूमल चुनाव हार गए। 2017 में जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने। इसके बाद से ही सियासी गलियारों में चर्चा आम रही है कि धूमल गुट उपेक्षा का शिकार हैं। इस मसले पर हमने प्रो. धूमल से सीधा सवाल किया। जवाब भी सीधा मिला, प्रो धूमल ने कहा कि " जब नेतृत्व बदलता हैं तो नया नेता अपने हिसाब से बदलाव करता हैं। पर पुराने काम के लोगों की उपेक्षा गलत हैं। नया भवन बनाइये लेकिन काम का सामान भी रखिये।" ........................................................................ वृक्ष हैं संगठन तो जड़ हैं कार्यकर्ता प्रो. प्रेमकुमार धूमल का राजनैतिक सफर किसी सियासी ग्रंथ से कम नहीं हैं। सरकार और संगठन दोनों पर उनकी समझ बेजोड़ हैं। चर्चा जब संगठन की चली तो प्रो. धूमल ने एक किस्सा साझा किया। पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वे ठियोग जा रहे थे तभी रास्ते में एक कार्यकर्ता ने उन्हें एक पत्र दिया। गाड़ी में उन्होंने पत्र पढ़ा तो उसमें उक्त कार्यकर्ता ने लिखा था कि एक आम कार्यकर्ता संघर्ष करता हैं, जैसे -तैसे कर सरकार बनती हैं और फिर ढाई साल में गिर जाती है। ( 1977 और 1990 में शांता कुमार के नेतृत्व में बनी सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई थी) प्रो. धूमल घर पहुंचे, देर रात 12 बजे तक काम निपटाया और फिर खुद उक्त खत के जवाब में एक पत्र लिखा। धूमल ने लिखा कि पार्टी एक वृक्ष है। कार्यकर्ता जड़े, मंत्री और पदाधिकारी फल और फूल। जब जड़े मजबूत होती है तो ही वृक्ष पनपता है। फल और फूल को लगता है कि वृक्ष की शोभा उनसे है लेकिन हकीकत ये हैं कि बिन जड़ वृक्ष ही नहीं हैं। जब जड़ को तरजीह नहीं मिलती तब अस्तित्व भी नहीं रहता। इस बीच एक माली आता है और उस वृक्ष को हटाकर दूसरा वृक्ष लगा देता है। ....................... सवाल : मौजूदा सरकार के कार्यकाल को 4 साल पूरे हो चुके है। ये वर्ष चुनावी वर्ष है और सियासत भी तेज़ हो गई है। 1985 के बाद से अब तक प्रदेश में कोई सरकार रिपीट नहीं कर पाई है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ये दावा कर रहे है कि सरकार रिपीट करेगी। आप भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेता है, हम आपसे जानना चाहेंगे कि क्या ये सरकार रिपीट करने की स्थिति में है ? जवाब : मैं व्यक्तियों पर चर्चा नहीं करता। मैं ये कहना चाहूंगा की भारतीय जनता पार्टी हमेशा इतिहास बनाती रही है। 1984 श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हमदर्दी की लहर चली और हमारे सिर्फ दो सांसद जीते थे, और पांच वर्ष के बाद 1989 में हम दो से 86 हो गए। इसी प्रकार से 77 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार अनेकों पार्टियों का गठबंधन था। जब 1990 में हमने सरकार बनाई तो हमारा गठबंधन जनता दल के साथ था। 1998 में हमारा गठबंधन हिमाचल विकास कांग्रेस के साथ था, लेकिन साल 2007 में पहली बार विशुद्ध भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाई। वो भी एक रिकॉर्ड था। अब 2022 में हम चाहते है कि फिर रिकॉर्ड बनें। एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने और हम फिर जनता की सेवा करें। सवाल : जो नतीजे बीते नगर निगम चुनाव और उपचुनाव में भाजपा के लिए रहे है क्या उन्हें देखने के बाद भी आप यही कहेंगे कि भाजपा रिपीट करेगी ? और अगर रिपीट करना है तो उसके लिए क्या करना होगा ? जवाब : हमारा संगठन सक्रीय है और सरकार के लेवल पर भी नगर निगम चुनाव और उपचुनाव के वक्त काम किया गया है। जब ठोकर लगती है तो इंसान संभालता है। सरकार ने भी हार के बाद अपने सबक लिए होंगे। जो लोग सत्ता में है, जो लोग सरकार चला रहे है वो देखेंगे कि क्या कमियां रही और उन कमियों को दूर कर पुनः चुनाव लड़ेंगे। सवाल : आज प्रदेश की सियासत में रूचि रखने वाला हर व्यक्ति ये जानना चाहता है कि क्या प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल इस बार के चुनाव के मैदान में उतरेंगे ? जवाब : यदि आप मेरा राजनैतिक जीवन देखे तो मैंने कभी पार्टी टिकट की मांग नहीं की। 1984 में जब इंद्रा जी का मर्डर हुआ तब बड़े- बड़े नेता मैदान छोड़ गए। कोई लड़ने के लिए तैयार नहीं था और उस वक्त मुझे कॉलेज से बुलाया गया और कहा की तुम लड़ोगे , तुम्हें लड़ना है और हम लड़े भी और हारे भी। उसके बाद से लगातार लोगों के बीच रहे। मैं तीन बार सांसद बना, दो बार मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश की सेवा की। जब पार्टी ने बोला मैंने चुनाव लड़ा, जो बोला वो किया और आगे भी जो भी पार्टी हाईकमान का आदेश होगा वो मैं करूंगा। सवाल : आपके समर्थक ये चाहते हैं कि यदि आप चुनाव लड़े तो मुख्यमंत्री का चेहरा भी आप ही हो। इस पर आप क्या कहेंगे ? जवाब : मुख्यमंत्री का चेहरा तो मुझे पिछली बार भी हाईकमान ने बनाया था, लेकिन लोगों ने मुझे नहीं चुना। फिर जयराम जी मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री का चेहरा हाईकमान और चुने हुए विधायक तय करते है। जो वो तय करेंगे वो होगा। सवाल : तो अपने निर्णय हाईकमान पर छोड़ दिया है ? जवाब : मेरी तो पूरी जिंदगी उन्ही के सहारे बीती है, अब इस पड़ाव पर आकर क्या करना हैं। सवाल : जयराम सरकार का यदि आप आंकलन करें , तो आप क्या बड़ी उपलब्धियां मानते है इस सरकार की ? जवाब : सरकार का दो साल का कार्यकाल कोरोना में गया और प्रधानमंत्री जी की अगुवाई और मार्गदर्शन में हम कोरोना से निपटने में कामयाब रहे। लोगों का भी सहयोग मिला। सामजिक क्षेत्र में सरकार ने अच्छा किया मसलन बुढ़ापा पेंशन की उम्र जताई गई। उद्योग की बात करें तो करीब 96 हजार करोड़ का निवेश आया। कई बार कुछ कार्य दूरगामी सोच के साथ भी किये जाते है जिनका परिणाम बाद में दिखता है। सवाल : ये सामान्य बात है कि जनता तुलना करती है। आप दस साल मुख्यमंत्री रहे और अब जयराम जी मुख्यमंत्री है । कई बार ये कहा जाता है कि जयराम सरकार की अफसरशाही पर पकड़ नहीं है। आप क्या मानते है ? जवाब : मैं शिमला बहुत कम जाता हूँ। सवाल : चलिए आपने बताया कि आप शिमला कम जाते है, तो अगले सवाल पर आते है । आप मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे और कई ऐसे वादे हैं जो कहा जाता है आपने किए थे लेकिन सरकार ने पुरे नही किए। दृस्टि पत्र में भी ये वादे शामिल थे। मसलन नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता हो या पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा। जो वादे आपने किए थे और पुरे नहीं हुए, उस पर आप क्या कहेंगे ? जवाब : मैं आपके माध्यम से स्पष्ट कर दूँ कि मैंने कोई वादा अलग से नहीं किया ताकि कोई गलतफहमी न रहे। चुनाव घोषणा पत्र व्यक्ति नहीं पार्टी जारी करती हैं। जो दृस्टि पत्र जारी हुआ उसके कन्वीनर रणधीर शर्मा थे और श्री जयराम जी खुद उसके मेंबर थे, जिस पर हस्ताक्षर है उनके। मैंने जो भी घोषणा की है उसके अनुसार ही की है। जहां तक पुरानी पेंशन बहाली की बात है मैंने तो कॉर्पोरेशन और बोर्ड के कर्मचारियों को भी पेंशन दी थी। नई पेंशन स्कीम 2004 में लागू हुई और इसके बाद जब 2007 से 2012 तक मैं मुख्यमंत्री था तो इसे हटाने की कोई मांग नहीं थी। अब ये बात सामने आई है। मुझे विश्वास है सरकार इस पर विचार कर रही होगी। सवाल : आप मानते हैं कि पुरानी पेंशन बहाल होनी चाहिए ? जवाब : मैं ये नहीं कह रहा कि बहाल होनी चाहिए, ये तो सरकार तय करेगी। पर जिस कर्मचारी ने सारी उम्र ईमानदारी से नौकरी की, बुढ़ापे में आकर उसको सम्मानजनक पेंशन मिलनी चाहिए। इस पर विचार करना चाहिए और संसाधन हो तो इसे बहाल करें। जिन्हें नुकसान हो रहा हैं, जीवन यापन मुश्किल हैं उनका पालन पोषण हमारा सामाजिक दायित्व हैं। सवाल : वर्तमान में प्रदेश में नए जिलों की मांग भी उठ रही हैं। आपको क्या लगता है क्या नए जिले बनने चाहिए ? जवाब : हमने तो बना दिए थे। नूरपुर, देहरा, पालमपुर, सुंदरनगर और जुब्बल कोटखाई में हमने एडीएम बिठा दिए थे। उसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ हुआ निर्णय पलट दिया गया। मैं मानता हूँ कि छोटी प्रशासनिक इकाइयां बेहतर काम करती हैं। पर चुनाव के दिनों में नए जिलों का गठन करना उचित नहीं है, ये योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए। सवाल : अनुभव का कोई पर्याय नहीं होता और बेहद अनुभवी नेता है। आप प्रदेश सरकार को क्या सुझाव देना चाहेंगे ? जवाब : पहला तो ऐटिटूड का बदलाव होना चाहिए। हम शासन नहीं सेवा करने के लिए सत्ता में आएं है। दूसरा सरकार और सामान्य नागरिक में कोई दुरी नहीं होनी चाहिए। बात सुनो , हर काम नहीं होंगे लेकिन यदि व्यक्ति कि शिकायत भी कोई सुन लेता है तो मन हल्का हो जाता है। उसे लगता है कि वो अपनी ही सरकार से बात कर रहा है । ईमानदरी से प्रयास होना चाहिए कि जो मुमकीन है वो हम करें। जो शिकायत आती है उसकी उलटी शिकायत नहीं आनी चाहिए। शिकायत की भी शिकायत आये ये दुर्भाग्यपूर्ण होता है। सवाल : क्या आपको लगता हैं की जनता से सरकार की दूरी ज्यादा हैं, शायद इसीलिए आप ऐटिटूड में बदलाव की बात कर रहे हैं ? जवाब : मैंने कहा शिमला तो मैं जाता नहीं और दूरी की बात मैं करता नहीं।
हिमाचल सरकार प्रदेश के किसानों व् बागवानों को अब कृषि करने की नयी सुविधा प्रदान करने जा रही है । प्रदेश के खेतों और बगीचों में जल्द ही ड्रोन खाद और दवाओं का स्प्रे करते नजर आएंगे। सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने ड्रोन की खरीद और किराये पर सुविधा देने के लिए नौ कंपनियों का चयन किया है।अब कोई भी विभाग या व्यक्ति शुल्क चुका कर यह सेवा ले सकेगा। ड्रोन को कृषि, बागवानी, मेलों, दवाइयां पहुंचाने, सुरक्षा दृष्टि के साथ अन्य आयोजनों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। सुविधा लेने के लिए आईटी विभाग से संपर्क करना होगा। विभाग की ओर से चयनित कंपनियों की सेवा लेने के लिए दाम तय किए गए हैं। दाम चुकाने के बाद इसकी सुविधा ले सकेंगे। विभाग के माध्यम से ड्रोन की खरीद भी की जा सकेगी। इस नई सुविधा से किसानों व बागवानों का समय भी बचेगा व किसानों को नई तकनीक से खेती करने का मौका भी मिलेगा। ख़ास बात यह है की प्रदेश सरकार ने कांगड़ा जिले के शाहपुर आईटीआई में ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल खोलने का फैसला लिया है। यहां किसानों व् बागवानों को ड्रोन चलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शाहपुर आईटीआई में शुरू होने वाले ड्रोन प्रशिक्षण स्कूल में दसवीं पास कोई भी व्यक्ति सात दिनों के कोर्स के लिए प्रवेश ले सकेगा। तमिलनाडु और तेलंगाना में हुआ ट्रायल -- केंद्र सरकार द्वारा आम बजट में फसलों पर दवा स्प्रे करने के लिए भी ड्रोन के इस्तेमाल करने का ज़िक्र किया गया था। बता दें की इस के चलते अब प्रदेश सरकार ने भी इस ओर कदम बढ़ाया है। अभी तक देश में तमिलनाडु और तेलंगाना में ड्रोन से खाद व स्प्रे करने का सफल ट्रायल किया गया है , जिसके बाद अब देश के अन्य प्रदेशों में भी इस नई सुविधा को शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बीते दिनों कुटलेहड़ और हरोली विधानसभा क्षेत्रों के लिए लगभग 67 करोड़ रुपये की विकासात्मक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किए । मुख्यमंत्री ने समूर कलां में 16.78 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कला केंद्र ऊना का लोकार्पण किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने थानाकलां में. राज्य विद्युत बोर्ड मंडल, बंगाणा में ग्रामीण विकास मंडल, बसाल में कृषि विभाग का एसएमएस कार्यालय, टयूरी बडोली और कियारियां में पटवार वृत्त, बीहरू में फील्ड कानूनगो कार्यालय खोलने, हरोट, चारड़ा, बल्ह खालसा और बोहरू में पशु चिकित्सा उपकेंद्र खोलने की भी घोषणा की।जयराम ठाकुर ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धमांदरी एवं रैंसरी में वाणिज्य कक्षाएं आरंभ करने तथा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समूर कलां में विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित करने की भी घोषणा की। मुख्य मंत्री ने कहा कि शीघ्र हि नाबार्ड के अन्तर्गत जिले की तीन प्रमुख सड़कों के क्रियान्वयन के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऊना जिला पिछले चार वर्षों में चहुंमुखी विकास का गवाह बना है। जिले के विभिन्न भागों में 1600 करोड़ रुपये के विकासात्मक कार्यों को समर्पित व पूरा किया जा रहा है।
हिमाचल का ग्लैडियोलस फूल अब विदेशों में भी अपनी खुशबु बिखेरेगा। जिला मंडी के थुनाग स्थित उद्यानिकी, वानिकी महाविद्यालय एवं रिसर्च सेंटर ने फूलों की पांच अंतरराष्ट्रीय प्रजातियां मंगला, एचबी 15-11, एचबी 1-27, एचबी 9-16 और एचबी 2-52 को तैयार करने में कामयाबी मिली है। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिको को इस प्रोजेक्ट में सफलता मिली है व फूलों की प्रजातियां इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के पूरे मानकों पर खरी उतरी हैं। बता दें की ग्लैडियोलस प्रजाति मूलतया अफ्रीका की है। इस फूल की जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात में भारी मांग है, इसके साथ ही देश में भी इस फूल की काफी डिमांड रहती है। ग्लैडियोलस फूल की ज्यादा मांग पांच सितारा होटलों और बड़े आयोजनों में रहती है। इसके साथ ही डिमांड आने पर इसे विदेशों में भी भेजा जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार मंडी जिला की सराजघाटी की आबोहवा, जलवायु, उपजाऊ मिट्टी, कम तापक्रम, अधिक जल, गुणवत्ता और प्रवर्धन अंतरराष्ट्रीय स्तर की ग्लैडियोलस किस्मों के लिए उपयुक्त है। सरकार ने भी इस संस्थान के वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाई है। ग्लैडियोलस की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। इसके लिए मृदा जिसका पीएच मान 5.5 से 6.5 के बीच हो। भूमि के जल निकास का उचित प्रबंध हो, वह सर्वोत्तम मानी जाती है। खुले स्थान जहां सूरज की रोशनी सुबह से शाम तक रहती हो, ऐसे स्थान पर ग्लैडियोलस की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 1685 हजार टन खुले फूल और 472 हजार टन कट फ्लावर का उत्पादन हुआ। क्या है ग्लैडियोलस फूल -- ग्लैडियोलस एक प्रमुख कट फ्लावर है। यह छोटे फूल बाली पर क्रम से एवं धीरे-धीरे खिलते हैं, जिससे कटे हुए फूलों को ज्यादा समय तक रख सकते हैं। ग्लैडियोलस विभिन्न रंगों में पाए जाते हैं। एक फूल स्टिक की कीमत 25 से 30 रुपये तक होती है।
प्रदेश सरकार हर विभाग को हाईटैक करने के प्रयास में जुटी हुई है । इसी के चलते अब सरकार पंचायती राज विभाग में कुछ बदलाव करने जा रही है । जानकारी के अनुसार सरकार ने परिवार रजिस्टर को ऑनलाइन करने का फैसला लिया है। इस सन्दर्भ में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने परिवार रजिस्टर ऑनलाइन करने के निर्देश विभाग को जारी किये है। बताया जा रहा है की ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर आईटी विभाग सॉफ्टवेयर बनाएगा। तीन महीने में इसका डाटा बेस तैयार किया जाएगा। खास बात यह है की परिवार रजिस्टर ऑनलाइन होने से विभिन्न कार्यों के लिए पंचायत सचिव के कार्यालय से नकल लेने के लिए लोगों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रदेश सचिवालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने परिवार रजिस्टर ऑनलाइन करने के निर्देश दिए । इस कार्य के लिए मुख्य सचिव रामसुभग ने ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी भी गठित की है। बता दें की रजिस्टर में परिवार के सभी सदस्यों की एक पंजीकृत इकाई होती है। इसमें परिवार के सभी लोगों का विवरण दर्ज होता है। यह पंचायत सचिव के कार्यालय में होता है। इसमें उस ब्लॉक के तहत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों के परिवारों की जानकारी और सदस्यों का विवरण होता है। परिवार रजिस्टर की नकल की जरूरत सरकार की ओर से दी जा रही विभिन्न सुविधाओं को प्राप्त करने में पड़ती है। इसकी नकल लेने के लिए ब्लॉक सेक्रेटरी के पास आवेदन देना पड़ता है। इस दस्तावेज के माध्यम से कोई भी सरकारी कागजात आसानी से बनवा सकते हैं। यह सुविधा शुरू होने से अब लोगों को पंचायत के चक्कर नहीं काटने होंगे। अभी पंचायतों में सेक्टरी द्वारा यह दस्तावेज लोगों को दिया जाता है।
देवभूमि की प्राकृतिक फिजा में जल्द ही विदेशी नस्ल के बुल्गारिया गुलाब की खुशबू महकेगी । कश्मीर के बाद बुल्गारिया गुलाब अब चंबा जिले के सेईकोठी में तैयार होगा । पुष्प उत्पादक लोभीराम ने ट्रायल के तौर पर एक बीघा जमीन में इसकी नर्सरी तैयार की है। ख़ास बात ये है कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बुल्गारिया गुलाब कि अधिक मांग है इस कारण एक किलोग्राम इत्र का मूल्य करीब आठ लाख रुपए है। बुल्गारिया गुलाब को इत्र बनाने वाली कंपनियां अच्छे दामों पर खरीदती हैं। चम्बा जिले में बुल्गारिया गुलाब के उत्पादन से यहाँ के लोगों की तकदीर बदल जाएगी। अब ग्रामीण कृषि और बागवानी के साथ पुष्प उत्पादन कर भी अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकेंगे। चुराह के सेईकोठी निवासी लोभीराम ने भी इस दिशा में प्रयास शुरू किए हैं। हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर से कलमें लेकर उन्होंने एक बीघा जमीन में नर्सरी में 25 हजार पौध तैयार की है। इसे बाद में एक हेक्टेयर जमीन में रोपित किया जाएगा। लोभी राम का कहना है कि हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर से बुल्गारिया गुलाब से कलमें लेकर एक बीघा जमीन में ट्रायल पर 25 हजार पौध तैयार की है। इसे एक हेक्टेयर में रोपित किया जाएगा। लोभी राम का कहना है कि महाराष्ट्र व दिल्ली से मांग आनी शुरू हो चुकी है इसके अलावा दुबई से भी ऑर्डर आया है। एक्सपोर्ट संबंधी लंबी औपचारिकताओं के चलते उसे फिलहाल टाल दिया गया है। बुल्गारिया गुलाब की विशेषता बुल्गारिया गुलाब की विशेषता है कि इसकी स्टिक, पौधे, फूल और ड्राई फ्लावर तक बिक जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो एक आम गुलाब के पौधे पर एक फूल तोड़ने पर दूसरा फूल आने में कई दिन लगते हैं, जबकि बुल्गारिया गुलाब के एक पौधे से फूल तोड़ने पर दूसरे ही दिन अन्य फूल अंकुरित होने शुरू हो जाते हैं। एक पौधा 100 से 150 फूल देता है। बुल्गारिया गुलाब में अन्य गुलाब कि किस्मों की अपेक्षा तेल और इत्र ज्यादा मात्रा में मिलता है। इससे गुलाब जल भी तैयार किया जाता है। इत्र, क्रीम और तेल बनाने में होता है उपयोग बुल्गारिया गुलाब से इत्र, क्रीम और तेल बनाया जाता है। इसकी मांग अरब के देशों, दुबई सहित भारत के विभिन्न राज्यों में अधिक है। बुल्गारिया गुलाब की पौध 70 से 80 रुपये में मिलती है। इसकी कलमें 15 से 20 रुपये में मिल जाती हैं। इसे नर्सरी, पी-बैग में तैयार किया जा सकता है। डॉ. राजीव चंद्रा, उद्यान विभाग उपनिदेशक उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव चंद्रा का कहना है कि प्रगतिशील पुष्प उत्पादक लोभी राम का ट्रायल सफल होने पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा और विभाग अपने स्तर पर भी पुष्प उत्पादकों के लिए अनेक योजनाएं क्रियान्वित कर रहा है।
चुनाव आयोग ने बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद को मोगा में मतदान केंद्रों पर जाने से रोक दिया, जहां से उनकी बहन कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। सोनू सूद पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। सोनू सूद एक पोलिंग बूथ के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान उनकी कार ज़ब्त की गई और उन्हें घर भेजा गया। अगर वह घर से बाहर निकलेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंजाब में 117 विधानसभा सीटों के लिए सुबह आठ बजे से मतदान शुरू हो गया, जबकि उत्तर प्रदेश की 59 सीटों के लिए तीसरे चरण का मतदान सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक होगा। पंजाब में मुकाबला कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन और राज्य के पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह के संगठन पंजाब लोक कांग्रेस के बीच है। दूसरी ओर, यूपी में करहल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भाजपा के एसपी सिंह बघेल के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज है। इस बीच सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के तीन पार्षदों समेत कई नेताओं ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। अमृतसर कांग्रेस पार्टी के पार्षद प्रियंका शर्मा, मंदीप अहूजा और गुरजीत कौर ने आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में शामिल हुए। इससे पहले अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे। विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस एक-दूसरे पर हमलावर हैं। केजरीवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि व्यापारियों का डर दूर करने के लिए हम इंस्पेक्टर राज, रेड राज खत्म करेंगे, ताकि कारोबार को सुरक्षित माहौल मिले। जैसे हमने दिल्ली के व्यापारियों का दिल जीता है, उसी तरह हम आपका भी दिल जीतेंगे। आप सरकार बनने के बाद यदि हमारा कोई विधायक या मंत्री किसी भी व्यापारी से शेयर मांगेगा, तो हम उस नेता के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई करेंगे। गौरतलब है कि सूबे की 117 सीटों पर 20 फरवरी को मतदान होगा। जबकि 10 मार्च को चुनाव परिणाम सामने आएंगे
अमेरिका ने बुधवार को कहा कि भारत नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है। अमेरिका ने उम्मीद जताई कि अगर रूस यूक्रेन पर आक्रमण करता है, तो भारत अमेरिका का साथ देगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि चार देशों (क्वाड) के विदेश मंत्रियों के बीच हाल में ऑस्ट्रेलिया की राजधानी मेलबर्न में हुई बैठक में रूस और यूक्रेन के मुद्दे पर चर्चा हुई। भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्री इस बैठक में शामिल हुए थे। प्राइस ने कहा, ‘‘बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि इस मामले के राजनयिक-शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत है। क्वाड नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने का पक्षधर है।
भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 30,757 नए मामले सामने आए, जिसके बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर, 27,54,315 हो गई। इसके साथ ही बीमारी से ठीक होने की दर एक बार फिर 98 प्रतिशत से ज्यादा हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बृहस्पतिवार को अद्यतन आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में 541 और मरीजों की मौत हो गई जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 5,10,413 हो गई। देश में लगातार 11 दिनों तक संक्रमण के दैनिक मामले एक लाख से कम दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 3,32,918 रह गई है, जो कि संक्रमण के कुल मामलों का 0.78 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तर पर कोविड-19 के मरीजों के ठीक होने की दर 98.03 प्रतिशत है। इस वर्ष पांच जनवरी को यह दर 98 प्रतिशत से अधिक 98.01 प्रतिशत दर्ज की गई थी। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 37,322 की गिरावट दर्ज की गई है। मंत्रालय के अनुसार, दैनिक संक्रमण दर 2.61 प्रतिशत है जबकि साप्ताहिक संक्रमण दर 3.04 प्रतिशत है। देश में संक्रमित होने के बाद अब तक 4,19,10,984 लोग ठीक हो चुके हैं जबकि महामारी से मौत की दर 1.19 प्रतिशत दर्ज की गई है। अब तक कोविड रोधी टीके की 174.24 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।
मगंलवार रात 11:45 बजे बप्पी दा इस दुनिया को छोड़ गए । 69 वर्ष में उन्होंने अंतिम सांस ली। निधन के अगले दिन यानि बुधवार को बप्पी दा का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका, क्योंकि उनके बेटे बप्पा लहरी अमेरिका में थे और वह बुधवार देर रात मुंबई पहुंचे। बप्पी लहरी की बेटी रीमा की बाहों में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली थी। उस दौरान वह मुंबई के जुहू स्थित क्रिटी केयर हॉस्पिटल में थे। सोने से लदे रहते थे बप्पी लहरी बप्पी दा को पहली फिल्म सफल होने के बाद मां से सोने की चेन मिली थी. इसके बाद उनके गाने लगातार हिट होते गए तो उन्होंने सोने को अपने लिए लकी मान लिया. इसके बाद तो वह हमेशा ही गहनों से लदे रहने लग गए थे। पहली फिल्म के बाद मां से मिली थी चेन लहरी अपने म्यूजिक के साथ ही सोना-चांदी और गहनों के शौक के लिए भी खूब चर्चा बटोरते थे, उन्हें गहनों से इतना लगाव था कि पत्नी को मिलाकर उनके पास करीब 1 करोड़ की ज्वेलरी थी । अंतिम पोस्ट में भी गोल्ड का जिक्र महज 2 दिन पहले अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने इंस्टाग्राम (Instagram) पर एक पोस्ट किया था. अपने आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट में भी वे गोल्ड को याद कर रहे थे. उन्होंने अपनी एक पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, 'ओल्ड इज ऑल्वेज गोल्ड.' उस पुरानी तस्वीर में भी वे गहनों से लदे नजर आ रहे हैं. बप्पीलहरी जवानी के दिनों की उस तस्वीर में सनग्लासेज लगाए हुए हैं और गले में सोने की चेन है. हाथों में भी उन्होंने सोने के गहने पहने हुए हैं ।
अभिनेता अमिताभ बच्चन के अंगरक्षक के रूप में अगस्त 2021 तक काम करने वाले मुंबई पुलिस के एक सिपाही को सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिपाही जितेंद्र शिंदे को निलंबित करने के आदेश मंगलवार को जारी किए गए और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। शिंदे इससे पहले मुंबई पुलिस की सुरक्षा शाखा में तैनात थे. जितेंद्र शिंदे ने 2015 से अगस्त 2021 तक अमिताभ बच्चन के अंगरक्षक के रूप में काम किया था। यह सामने आने के बाद कि शिंदे की वार्षिक कमाई 1.5 करोड़ रुपये तक हो गयी है, मुंबई के पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले ने शिंदे को वहां से हटा दिया था। अगस्त 2021 के बाद जितेंद्र शिंदे को मुंबई के डीबी मार पुलिस थाने में तैनात किया गया था। शिंदे के निलंबन का सही कारण पूछे जाने पर, मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सिपाही ने अपने वरिष्ठों को बताए बिना कम से कम चार बार दुबई और सिंगापुर की यात्रा की थी। सेवा नियमों के अनुसार, शिंदे को विदेश यात्रा करने के लिए अपने वरिष्ठों से अनुमति लेनी चाहिए थी।
पंकज सिंगटा। फर्स्ट वर्डिक्ट शहरी विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज भाजपा के वरिष्ठ नेता है और उन चंद नेताओं में शामिल है जिन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव से पहले शिमला नगर निगम के चुनाव होने है जिन्हें सत्ता का सेमिफाइनल कहा जा रहा है। भारद्वाज शिमला शहरी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक है और ऐसे में जाहिर है शिमला नगर निगम का चुनाव उनके लिए निजी तौर पर बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इसके साथ ही इन दिनों प्रदेश में नए जिलों की मांग जोरों पर है और कहीं न कहीं सरकार में शामिल कई नेताओं का भी इस ओर एक सकारात्मक रवैया रहा है। ऐसे ही कई मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने सुरेश भारद्वाज से खास चर्चा की। भारद्वाज ने हर मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। वहीं कांग्रेस नेता विक्रमादित्य सिंह के साथ उनकी सियासी नोक झोंक के प्रश्न पर उन्हें अपने ही चिर परिचित अंदाज में अपनी बात रखी। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश .... सवाल : विधानसभा चुनाव से पहले शिमला नगर निगम चुनाव होने है। आप शिमला शहर से विधायक है और कहीं न कहीं निजी तौर पर भी आपके लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण रहने वाला है। उपचुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। किस तरह से शिमला नगर निगम चुनाव को लेकर तैयारियां है ? उत्तर : हिंदुस्तान में चुनाव आते रहते है। 2017 से भी हम अगर देखे तो हमने पहले नगर निगम का चुनाव लड़ा। उसके बाद हमने विधानसभा का चुनाव लड़ा, 2019 में लोकसभा के चुनाव हुए, उसके बाद 2019 में ही उन सीटों पर चुनाव हुए जो खाली हुई थी। इसके बाद 2021 में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निगम के चुनाव हुए। फिर उपचुनाव हुए। कुछ ही समय में अब शिमला नगर निगम का चुनाव है और उसके साथ ही विधानसभा का चुनाव आएगा। आजकल भी कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे है और हमारे बहुत सारे कार्यकर्त्ता उसमें व्यस्त है। कुल मिलाकर चुनाव एक सतत प्रक्रिया है और इसमें हार जीत चलती रहती है, तो इसमें कोई बहुत बड़ा मसला नहीं है। शिमला नगर निगम ने इस बार बहुत अच्छे काम किये है और मैं समझता हूँ कि उसके आधार पर भाजपा वहां पर विजय हासिल करेगी। सवाल :क्या इस बार भी नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्हों पर करवाए जायेंगे ? उत्तर : पहले नगर निगम चुनाव बिना पार्टी सिंबल के होते थे लेकिन पिछले नगर निगम के चुनाव पार्टी सिंबल पर हुए है। अब इस पर सरकार में विचार किया जाएगा कि ये पार्टी सिंबल पर हो या इन्हें फ्री सिंबल कर दिया जाये। अभी इस पर चर्चा नहीं हुई है। इस पर मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल से चर्चा की जाएगी और उसके बाद तय किया जाएगा। सवाल : शिमला नगर निगम में कुछ नए वार्डों बनाये गए है और कांग्रेस इसे लेकर विरोध भी जता रही है। क्या कहेंगे ? उत्तर : डीलिमिटेशन एक क़ानूनी प्रक्रिया है और जनसंख्या के अनुसार वार्ड बनते है। कांग्रेस के समय में 2017 में डीलिमिटेशन की गयी लेकिन वो एक तरफ़ा की गयी और इर्रेशनल थी। प्रशासन ने प्रयास किया है कि जो बहुत बड़े वार्ड है उनको दूसरों के बराबर किया जाए और जो छोटे वार्ड है उनकी जनसंख्या इधर उधर से डाल कर बड़ा किया जाए। ये सब प्रशासन ने किया है और उनका निर्णय है। सच कहूं तो अभी तक डीलिमिटेशन में क्या किया है वो मैंने विस्तार पूर्वक नहीं देखा है क्यूंकि जिस दिन इसका नोटिफिकेशन आया था मैं उस दिन से टूर पर हूँ। डीलिमिटेशन की प्रोसेस में अभी ओब्जेक्शन्स का टाइम है। यदि किसी को उसमे आपत्ति हो और वह आपत्ति दर्ज़ कर सकता है और प्रशासन उसे ठीक करेगा। सवाल : कांगड़ा के अंदर नए जिलों को बनाने की मांग जोरों पर उठ रही है और भाजपा का भी एक सकारात्मक रवैया इसकी ओर दिख रहा है। बीते दिनों तो एक फेक न्यूज़ भी वायरल हुई थी कि नए जिले बना दिए गए है। तो क्या नए जिले बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ? उत्तर : मैं मानता हूँ कि प्रशासनिक दृष्टि से जो छोटी इकाइयां है वो विकास कार्यों में लाभकारी रहती है। जयराम ठाकुर की सरकार में हमने बहुत स्थानों पर उपमंडल बनाये है। जिन्हें कांग्रेस की सरकारें अनदेखा करती थी, उन स्थानों पर हमने नए उपमंडल बनाए है। इसी तरह कई स्थानों पर तहसील यूनिट बनाए गए है। जिलों को लेकर भी विचार जब होगा, मन्त्रिमण्डल के समुख आएगा तो हम अपनी राय उसमे देंगे, लेकिन ये मुख्यमंत्री के ऊपर निर्भर करता है कि उनके आंकलन में जिला बनाना उपयोगी है या नहीं है। जब वह विषय को मन्त्रिमण्डल में लाएंगे तो हम सब विचार करेंगे पर अभी तक सीधे तौर पर यह विषय चर्चा के लिए नहीं आया है। फेक न्यूज़ मैंने भी देखी है, उसमे तो जिले बना दिए गए है, अब किसने बनाए है यह मुझे मालूम नहीं है। सवाल : 2022 विधानसभा के चुनाव बहुत नज़दीक है और भाजपा मिशन रिपीट को लेकर बात कर रही है और कांग्रेस कह रही है कि वो 2022 में सत्ता में फिर वापसी करेगी। विधानसभा चुनाव को किस तरह से देखते है? उत्तर : देखिये अगर आप हिंदुस्तान की बात करे तो आज कांग्रेस बिलकुल हाशिये पर है और आपको कांग्रेस मुक्त भारत बनता दिखाई दे रहा होगा। जो अभी 5 राज्यों के चुनाव भी हो रहे है उसमें उत्तर प्रदेश जैसा बहुत बड़ा राज्य है, वहां पर कांग्रेस कभी थी, अब तो उसकी गिनती ही नहीं होती है। तो कांग्रेस का जो भविष्य है वो बहुत सुखद नहीं है। केवल मात्र एक माता है, एक बेटी है, एक बेटा है उसके इर्दगिर्द सारी कांग्रेस चलती है। हिमाचल प्रदेश में भी यदि देखा जाए तो इनके पास न कोई पॉलिसी है ना कोई विज़न है और न कोई लीडरशिप है। तो ऐसे में कांग्रेस का भविष्य बहुत ज्यादा नहीं है। हम आंकलन केवल एकाध चुनाव के जीतने हारने पर करेंगे तो उससे पूरी विधानसभा के चुनाव के रुख का अंदाज़ा नहीं लगा सकते है। इस बार जयराम ठाकुर की सरकार ने गरीब हितेषी सरकार बन कर दिखाया है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार इस बार रिपीट करेगी और हिमाचल प्रदेश में इतिहास बनेगा, कांग्रेस कहीं देखने को नहीं मिलेगी। सवाल : आप वरिष्ठ नेता है और मुख्यमंत्री के करीबी भी माने जाते है। प्रदेश भर में पुरानी पेंशन का मुद्दा गूंज रहा है जिसको लेकर कर्मचारी संघर्षरत है। इन दिनों डॉक्टर्स भी हड़ताल कर रहे है, और भी कई कर्मचारी मसले है। आपको नहीं लगता कि विधानसभा चुनाव में इसका असर पड़ सकता है ? उत्तर : जो ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर होता है, जो सरकार से वेतनमान प्राप्त करता है उनमे अपने वेतन विसंगतियों को लेकर इस प्रकार की नाराज़गी और प्रसन्नता चलती रहती है। हिमाचल प्रदेश ऐसा राज्य है जहाँ पर पंजाब वेतनमान प्रदेश की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के बावजूद भी जारी किया गया है। आगे भी जो विसंगतियां है उनको भी दूर किया जा रहा है। अब आपको इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि 2015 में जब स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की सरकार थी, तब पुलिस कर्मचारियों के साथ एक अन्याय किया था, उनको 8 साल तक इनिशियल स्टेज पर रखा गया बल्कि जो उनके साथ के कर्मचारी थे उनको 2 साल में पूरा हो जाता था। उस अन्याय को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दूर किया है। इसी प्रकार से और भी बहुत सारे ऐसे मसले है जिनको ये सरकार दूर कर रही है। हिमाचल प्रदेश का कर्मचारी जानता है कि कौन सी सरकार उनके हित में है। जयराम सरकार कर्मचारियों की हित चिंतक सरकार है इसलिए कर्मचारी मांग भी इसी सरकार से करते है। जयराम ठाकुर की सरकार ने पैट, पेरा, पीटीए इन सबको नियमित कर दिया है और बाकी जो हमारे आउटसोर्स के कर्मचारी है उनके लिए कैबिनेट सब कमेटी बनाई है। उसके लिए विचार विमर्श हो रहा है कि किस प्रकार से उनको राहत दी जाएगी। बाकि भी जो कर्मचारियों के मसले है समय-समय पर वह उठते भी रहते है और उनका निदान भी होता रहता है। मैं समझता हूँ कि ये कोई ऐसे मसले नहीं है कि जिन पर हिमाचल प्रदेश की सरकार के ऊपर असर पड़ेगा। जयराम सरकार कर्मचारियों के हित में हरसंभव कदम उठा रही है। सवाल : पिछले सत्र में सवर्ण आयोग की मांग रखी गयी थी और जमकर हंगामा हुआ था। सरकार ने मांग तो मान ली थी लेकिन फिलहाल क्या स्थिति है सवर्ण आयोग को लेकर ? सवर्ण आयोग का यदि गठन नहीं होता है तो बजट सत्र के दौरान घेराव की चेतावनी भी दी गई थी। उत्तर : देखिये हिमाचल सरकार ने उस दौरान मांग में ली थी लेकिन यह तय नही है कि आयोग का नाम क्या होगा। जरूरी नही है कि उसका नाम सवर्ण आयोग ही रखा जाए। उसका नाम कुछ भी हो सकता है। जितना मेरी जानकारी है धर्मशाला में ही सेशन के दौरान इस हेतु नोटिफिक्शन जारी कर दिया गया था। बाकि प्रक्रिया मुख्यमंत्री के संज्ञान में है, वो इस पर उचित समय पर निर्णय लेंगे और उसके अनुसार काम होगा। सवाल : आजकल सोशल मीडिया पर आपकी और विक्रमादित्य की नोंक झोंक या कह लीजिये वार पलटवार लगातार चल रहा है, उसको लेकर क्या कहेंगे ? उत्तर : मेरा विक्रमादित्य के साथ नोंक झोंक का प्रश्न ही पैदा नहीं होता है। कोई वार या पलटवार नहीं है। विक्रमादित्य अपने शिमला ग्रामीण से विधायक है, वह अपनी बात कर सकते है। शायद पार्टी में वो और ज्यादा आगे बढ़ने की कोशिश करते है तो शायद इस लिए बहुत सारे मसलों पर वो बात करते है। हमारी उनके साथ कोई बराबरी नहीं है क्यूंकि वो राजा है, अब आजकल राजा तो रहते नहीं है लेकिन फिर भी राजा बने है। इसलिए हमारी उनके साथ किसी प्रकार की कोई बराबरी नहीं है। मैं शिमला शहर से विधायक हूँ वो शिमला ग्रामीण में अपने पिता की सीट खाली करके वहां से विधायक बने है। तो वो अपना काम करते है और मैं अपना काम करता हूँ, तो वार - पलटवार का कोई सवाल पैदा नहीं होता।
फर्स्ट वर्डिक्ट । धर्मशाला कांग्रेस की वरिष्ठ नेता विप्लव ठाकुर हर मसले पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जानी जाती है। पूर्व में मंत्री रही विप्लव राज्यसभा सांसद भी रही है और अपने लंबे राजनीतिक जीवन में एक सच्चे सिपाही की तरह कांग्रेस के लिए डटी रही है। इन दोनों विप्लव ठाकुर कांग्रेस की डिसिप्लिनरी कमिटी की अध्यक्ष भी है। कांग्रेस में दिख रही गुटबाजी, भाजपा का मिशन रिपीट का दावा, और विधानसभा चुनाव में उनकी दावेदारी को लेकर फर्स्ट वर्डिक्ट ने विप्लव ठाकुर से विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश .... सवाल : धर्मशाला में हाल ही में कांग्रेस नेताओं के बीच हुई आपसी नोक-झोंक के कारण अनुशासनहीनता देखने को मिली है, इसे लेकर आप क्या कहेंगी ? आप पर तो पूरे प्रदेश में पार्टी को अनुशासन में रखने का दायित्व है। उत्तर : यह कांग्रेस नेताओं की नोक-झोंक नहीं है बल्कि दो 2 भाइयों की आपसी मतभेद है। मेरा मानना है कि इस सम्बन्ध में कोई भी बात कहना अनुचित है। इनके झगड़े का कारण कम्युनिकेशन गैप या आपस में मन मुटाव हो सकता है, जो बाहर आ गया हो। इस पूरे परिदृश्य में पार्टी के खिलाफ दोनों गुटों में से कोई नहीं बोला और जब तक पार्टी के खिलाफ न बोले या पार्टी की पॉलिसी की निंदा न करे तब तक ये अनुशानहीनता में नहीं आता। मेरा मानना है कि किसी के निजी जीवन के बारे में टिप्पणी करना गलत होगा। सवाल - इस पूरे प्रकरण को देख कर आपको ऐसा नहीं लगता कि धर्मशाला में कांग्रेस दो गुटों में बंट गयी है। 2017 और 2019 के चुनाव में भी पार्टी इसका खामियाजा भुगत चुकी है, क्या कहेंगी आप ? उत्तर : मैं अगर बात करूं 2019 उपचुनाव की तो मेरा मानना यह है कि उस वक़्त जो सरकार सत्ता में होती है उसका प्रभाव जनता पर होता है और जनता उसके साथ ही चली जाती है। धर्मशाला की जनता को मालूम था कि अभी इनका समय है और हम लोगों को काम करवाने है। यदि विपक्ष का विधायक ले भी आए तो वह कुछ ज्यादा कर नहीं पाएगा। लोग विकास को प्राथमिकता देते है और उसी के मुताबिक वोट डालते है, खास कर उपचुनाव में ऐसा ही होता है। जहाँ तक गुटों का सवाल है तो ये बताइये कि कौन सी पार्टियों में गुटबाजी नहीं है, आप भाजपा में ही देख लीजिये, सांसद किशन कपूर और वर्तमान विधायक नैहरिया के बीच मतभेद दिखता है। ये हर पार्टी में होता है, असल बात तब सामने आती है जब चुनाव वर्ष नजदीक होते है। गुटबाज़ी की यदि बात करें तो अलग-अलग राय हो सकती है लेकिन विचारधारा से सब बंधे होते है, उसे मैं गुटबाजी नहीं कहती। अब परिवार में भी मतभेद हो जाते है, इसे गुटबाजी नहीं कहते। मैं इतना ही कहूंगी कि कांग्रेस में मनभेद नहीं है। सवाल : प्रदेश सरकार दावा कर रही है कि इन चार सालों में अथक विकास कार्य हुए है, भाजपा सरकार की नीतियों के बारे में आप क्या कहेंगी। उत्तर : भाजपा सरकार की कोई नीतियां ही नहीं है। मुझे अफ़सोस होता है कि प्रधानमंत्री जिस तरह से बोल रहे है, जिस तरह से वह बात कर रहे है, वो कोई विचारधारा की बात नहीं है, कोई विकास की बात नहीं है। वो केवल कटाक्ष करना जानते है। प्रदेश की बात की जाये तो विकास के दावे करने और घोषणाएं करने मात्र से विकास नहीं होते, इसके लिए धरातल पर काम करना पड़ता है। भाजपा का एक ही मकसद है और इनके लिए राजनीति का एक ही पर्याय है, घोषणाएं कीजिये और मंच से वाहवाही लूटिए। इनकी कोई भी नीति नहीं है। महंगाई चरम पर है , युवा बेरोजगार है और किसान भी परेशान है। सवाल : ओपीएस बहाली का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन चुका है। इसी बीच भाजपा लगातार कह रही है कि प्रदेश में नई पेंशन कांग्रेस सरकार के समय लागू हुई। इसे लेकर क्या कहेगी ? उत्तर : देखिये भाजपा पार्टी की एक नीति है कि जिन मसलों का हल करने में भाजपा के हाथ पैर फूल जाते है, उसका सारा ठीकरा वो कांग्रेस पर फोड़ते है। ये इनकी पुरानी और अहम नीति है। ये हर चीज के लिए कांग्रेस सरकार को कह देते है कि अगर ये खराब हो गया तो नेहरू जी कर गए, बारिश नहीं आ रही तो नेहरू का कसूर है, बाढ़ आ गई तब नेहरू का कसूर है। सात साल से तो भाजपा सत्ता में है, उसी के साथ वाजपेयी भी पीएम रहे है, हिमाचल में भी भाजपा की सरकार काफी वर्ष रही है। जरा इनसे पूछिए कि इन्होंने क्या किया है, आप अपने दादा को ही कोसते रहोगे और पोता ये कहेगा कि मैं अगर कुछ नहीं कर पाया तो ये दादा का कसूर है। यह तो बात नहीं बनती है, आप अपना बताइये कि आपका क्या रिकॉर्ड है, आपने क्या किया है, आपकी क्या नीति है। अगर कांग्रेस सरकार की तरफ से गलत हुआ है तो आप उसे सॉल्व कीजिये, आप इसका समाधान कीजिये। किसलिए लोगों ने आपको चुना है। आपको दो टर्म्स दे दी और बहुमत दिया। इसके बावजूद भी आप कांग्रेस को ही कोसते हो तो इसका मतलब है कि कमी आप में है। अब इसी कमी को दुरुस्त तो भाजपा को स्वयं करना होगा, थोड़ा कार्यशैली में सुधार कीजिये और कांग्रेस पर ठीकरा फोड़ना छोड़ दीजिये। सवाल : उपचुनाव में कांग्रेस चारों सीटों पर काबिज हुई लेकिन भाजपा लगातार कह रही है कांग्रेस की जीत का कारण सहानुभूति फैक्टर है, इस बात को लेकर आपकी क्या राय है। उत्तर : देखिये सहानुभूति का फैक्टर कोई नहीं है, आप मंडी सीट हार रहे है, वहां से आप मुख्यमंत्री है, महेंद्र सिंह एक ताकतवर मंत्री है, आपने सारी सीटें विधायक की वहां जीती है, उसके बावजूद हार रहे है, इसकी क्या वजह है। कोई तो कारण है, अगर सहानुभूति की ही बात होती तो फिर तो हम लाखों सीटें जीत चुके होते। लोगों के दिलों में भाजपा के लिए सब कुछ खत्म हो चुका है क्यूंकि जितना ये झूठ बोलते है, जितनी ये बाते करते है वो ग्राउंड पर तो है ही नहीं। लोग इस बात को समझने लग गए है कि भाजपा की कथनी और करनी के बीच कोई मेल नहीं है। भाषण देने के लिए आप तैयार है और मंडी में सबसे बड़ी बात है कि, महेंद्र देख रहे है और जयराम अपना देख रहे है, बाकि सारा सफा है। सवाल : कांगड़ा में नए जिले बनाने की मांग लगातार उठ रही है और कहीं न कहीं भाजपा का एक सकारात्मक रवैया भी इस ओर देखने को मिल रहा है। आप कैसे देखती है ? उत्तर : सकारात्मक रवैया नहीं है, ये केवल राजनीतिक स्टंट है, चार साढ़े चार साल ये क्या करते रहे। शुरू में इन्होंने जिले क्यों नहीं बना दिए। भाजपा के लोग चुनाव के नजदीक आते ही जनता के हर मुद्दे का जवाब हाँ में हाँ कर के देते है। प्रदेश की भोलीभाली जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा, चुनाव के बाद इनको यह नहीं पता होता कि किसने इन्हें वोट दिया। सवाल : यदि भाजपा चुनाव से पहले ये जिले बना लेती है तो आपको नहीं लगता कांग्रेस को इसका नुक्सान हो सकता है ? उत्तर : नहीं, नुक्सान कैसे होगा। इतनी ज्यादा तहसीलें वीरभद्र सिंह के समय पर खुली है, इतने एसडीएम दफ्तर खुले है, इतने कॉलेज खुले थे , लोगों ने क्यों नहीं वोट दिया हमें। कांगड़ा में ही मेरी जानकारी अनुसार बहुत ज्यादा कालेज खोले गए, तहसीलें खोली गई, एसडीएम के दफ्तर खोले गए और विकास के इतने कार्य किये गए। जब चुनाव आता है तो जनता के मुद्दे और होते है। आज सबसे बड़े मुद्दे है बेरोज़गारी, महंगाई, सड़कों की बुरी हालत, इस ओर जनता न देखे, न सोचे, इसलिए इन्होंने जिलों का शगूफा छेड़ दिया। अगर जिले बनाने थे तो 4 साल क्या सोचते रहे। क्यों नहीं बना दिए जिले, चुनाव के समय पर ही भाजपा को जिले बनाने का ख्याल आता है। आपका शिमला भी इतना बड़ा है, क्यों वहां नया जिला नहीं बना रहे। मंडी में 10 विधानसभा है, कांगड़ा में 15 है , क्यों मंडी में नया जिला नहीं बना रहे। ये तो हम कांगड़ा वालों की नालायकी है कि हम एकत्र नहीं होते, नहीं तो आज मुख्यमंत्री कौन होता और कौन नहीं होता, यह सब हमारे हाथ में होता। सवाल : 2022 का चुनाव नज़दीक है, क्या तैयारियां है और जरूर जानना चाहेंगे कि क्या आप 2022 में चुनाव लड़ेगी ? उत्तर : मेरा तो कोई विचार नहीं है चुनाव लड़ने का। पिछली बार भी मैं नहीं लड़ना चाहती थी, हाईकमान ने कहा तो मैंने चुनाव लड़ा लेकिन अभी मेरा कोई विचार नहीं है। वहीं 2022 को लेकर हमारी ब्लॉक स्तर पर मेम्बरशिप हो रही है, हर कोई ब्लॉक में जा रहा है। जो विधायक है वो अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में जा रहे है। भाजपा की जो कमियां है उनको उभारा जा रहा है। युवा कांग्रेस अलग लगी हुई है, महिला कांग्रेस अलग है, सेवा दल अलग है, हर कांग्रेस कार्यकर्ता इसके लिए कार्य कर रहा है और जो हमारे सीएलपी लीडर है वो भी काम कर रहे है। प्रदेश अध्यक्ष राठौर भी पूरे हिमाचल का दौरा कर रहे है, काम कर रहे है। हर कोई कांग्रेस के लिए कार्य कर रहा है। अगर हम ये 4 उपचुनाव जीते है तो सहानुभूति हो सिर्फ वजह नहीं है, कांग्रेस में जो एकता थी, जो कांग्रेस ने एकता दिखाई है, इसलिए हम 4 सीटें जीते है। इस वर्ष होने वाले चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी एकता का प्रमाण नतीजों से देगी और मुझे पूरी उम्मीद है जनता का साथ कांग्रेस को मिलेगा। सवाल : विप्लव जी लेकिन भाजपा तो मिशन रिपीट का दावा कर रही है और लगातार कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पास न दिशा है न ही कोई मुख्य चेहरा। उत्तर : मुझे एक नया प्रोजेक्ट बता दीजिये जो ये लाये हो। कोई भी नया काम नहीं किया है, सड़कों का, नेशनल हाईवे का, गडकरी घोषणाएं कर के गए थे, कोई बना? फोरलेन की बात चल रही है, कहाँ है वो फोरलेन। जो लोग बेचारे बेघर हो रहे है उनको अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। आप धर्मशाला में ही ले लीजिए, स्मार्ट सिटी की बात कर गए, धरातल पर क्या किया ? जो पहले का बजट था वही लगा है। पालमपुर वाले रो रहे है कि निगम तो बना दी है लेकिन न तो स्टाफ है न बजट है। क्रिएट करने के लिए आपको इंफ्रास्ट्रक्चर तो देना चाहिए। टनल की बात करते है, टनल तो कांग्रेस के समय पर ही शुरू हो गई थी। उसका डीपीआर बन गई थी, सब कुछ बन गया था। हम इनकी तरह तो नहीं घोषणा कर देते कि बुलेट ट्रैन आ रही है, वन्दे भारत ट्रेनें आ रही है, हम ये दे रहे है वो दें रहें है। एक एम्स तक तो बिलासपुर का बना नहीं है इनसे समय पर। कांग्रेस पार्टी संगठित है और दमदार तरीके से चुनाव भी लड़ेंगे। इन लोगों को मेरी नसीहत है कि मुंगेरी लाल के हसीं सपने देखना बंद कीजिये और देश प्रदेश में जो आपकी बदहाली की स्थिति है उस वास्तविकता को समझिये और खुद को सक्षम कीजिये। सवाल : देहरा से 2017 में आपने चुनाव लड़ा था और देहरा में कांग्रेस अध्यक्ष ने हाल ही में नए साल का कैलेंडर जारी किया था जो काफी विवादों में रहा था, उन्होंने कैलेंडर में कांग्रेस को देश की माँ कहा था। क्या इसको लेकर कहेंगी ? उत्तर : ठीक किया है, अगर वो करते है तो ये भी ठीक है। वो ठीक कर रहा है, ब्लॉक प्रधान ने निजी तौर पर उसे बनाया है। माँ ही है, आज़ादी की आप लड़ाई से देख लीजिये, अगर आज इस देश को आजादी मिली है, इस देश की ये तस्वीर बनी है तो ये कांग्रेस पार्टी ने ही दी है। कांग्रेस पार्टी ने इस देश को माँ की तरह सींचा है। चाहे नेहरू थे, पटेल थे, मौलाना आज़ाद थे, सभी कांग्रेसी थे। माँ का काम होता है, वो बच्चे को सींचती है, बच्चे का भविष्य बनाती है, बच्चे को संस्कार देती है, कांग्रेस ने यही किया है। मैं इसको बिलकुल सही मान रही हूँ। मुझे बता दीजिए किस तरह से नहीं सिचा, आज जो 70 साल में आप सारा इंफ्रास्ट्रक्चर देख लीजिए कि क्या हमारे बुज़ुर्गों का था और आज क्या है। गाड़ियां देख लीजिए, कारें देख लीजिए, क्या ये सात साल में मोदी ले कर आये है। कांग्रेस ने आजादी की लड़ाइयां भी लड़ी, विकास भी किया, टेक्नोलॉजी भी लाई। आज जितने भी ये चंद्रयान जा रहे है या बाकि सब है उसकी फाउंडेशन किसने रखी, भामा को कौन लाया, सारा भाई को कौन लाया, तो ये माँ का ही काम होता है।
- पदनाम बदलने की मांग भी कर रहा हिमाचल प्रदेश अस्पताल फार्मासिस्ट संघ हिमाचल प्रदेश अस्पताल फार्मासिस्ट संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि फार्मासिस्टों का 2 साल का प्रोबेशन समय समाप्त किया जाए। फार्मासिस्ट लगभग साढ़े 9 वर्ष का अनुबंध काल पूरा कर नियमित हुए हैं। इसके अलावा इन फार्मासिस्टों को सितंबर 2012 से 16290 बेसिक के हिसाब से वेतन दिया जाना चाहिए। वहीं पंजाब की तर्ज पर पे फिक्सेशन के लिए तीनो गुणांक भी दिए जाए ताकि रिकवरी से बचा जा सके। इनकी मांग है कि इनका पदनाम भी फार्मासिस्ट से फार्मेसी अफसर और चीफ फार्मासिस्ट से चीफ फार्मेसी अफसर किया जाए। संघ के अध्यक्ष चमन ठाकुर व महासचिव मनोज शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में सितंबर 2002 में अनुबंध आधार पर 71 फार्मासिस्टों की भर्ती हुई थी जो कि अब 50 ही रह गए हैं। इनकी भर्ती हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड हमीरपुर से 4550 रुपये प्रतिमाह वेतन पर हुई थी। लगभग साढ़े नौ साल बाद जनवरी 2012 में नियमित हुए। इनको 11470 बेसिक पर नियमित किया गया। सितंबर 2012 में पंजाब की तर्ज पर वेतन आयोग की सिफारिशों का हिमाचल प्रदेश में पुन: निर्धारण किया गया था। इसमें इनिशियल वेतन पंजाब की तर्ज पर 16290 न देकर 14500 रुपये दो साल के राइडर के बाद मिला। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने जो पंजाब पे कमीशन के हिसाब से अधिसूचना जारी की है, उस तर्ज पर दोनों गुणांकों 2.25 और 2.59 से इन फार्मासिस्टों को लगभग दो लाख की रिकवरी देनी पड़ जाएगी और यदि 15 फीसदी वेतन वृद्धि का विकल्प भी होता है तब भी इस बेसिक के हिसाब से रिकवरी देनी होगी। संघ ने सरकार से मांग की है कि इनकी मांगों का निवारण जल्द से जल्द किया जाए।
फर्स्ट वर्डिक्ट. शिमला हिमाचल प्रदेश समस्त विभाग लिपिक वर्ग कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार से छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत लिपिक वर्ग को हो रहे सीधे-सीधे नुकसान व परेशानियों को देखते हुए जल्द इस वर्ग के वेतन निर्धारण बारे संशोधन की मांग की है। संगठन के राज्याध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा व महासचिव एल डी चौहान ने संयुक्त ब्यान में कहा कि सचिवालय, न्यायालय सहित हर विभाग की लिपिक वो श्रेणी है जो एक प्रशासनिक अधिकारी, नेता, शिक्षक से लेकर हर छोटी- बड़ी सभी श्रेणियों का रिकॉर्ड, स्थापना सहित लेखा-जोखा रखती है। बावजूद इसके पिछले वेतन आयोगों की सिफारिशों से लेकर वर्तमान तक इस श्रेणी को वेतन लाभ के मामले में चतुर्थ श्रेणी से भी नीचे लाया जा रहा है ,जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। बात चाहे न्यायालय के केस रिप्लाई की हो, कैबिनेट के लिए एजेंडा तैयारी की हो, किसी भी श्रेणी की भर्ती या पदोन्नति की हो, विधानसभा सत्रों की हो या मुख्यमंत्री सहित अन्य मंत्री की विशेष स्पीच की तैयारी की हो, एक लिपिक वर्ग ही पूरी फ़ाइल तैयार करके पटल तक पहुंचाता है लेकिन अफसोस इससे सम्बंधित संगठनों के कर्मचारी नेताओं की लापरवाही व सुस्त कार्यप्रणाली की वजह से आज ये श्रेणी बैकफुट पर है। जबकि दूसरी श्रेणियों के कर्मचारी संगठनों ने अपनी एकता के दम पर पूर्व में सरकारों को वोटबैंक के दबाव में लेकर अपने वेतनों में लिपिक वर्ग से कहीं ऊपर की बढ़ोतरी करवाई है। चौहान ने कहा कि दो वर्ष पूर्व इस श्रेणी के उत्थान हेतु संगठन का गठन किया गया था तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस संगठन को तवज्जो दी थी और इस संगठन द्वारा रखी गयी मांग लिपिक से वरिष्ठ सहायक पदोन्नति हेतु कार्यकाल 10 से 7 साल करने को पूरा किया था। वर्तमान में लिपिक वर्ग के प्रोबेशन पीरियड सहित अन्य मसलों पर वेतन आयोग की सिफारिशों से हो रहे नुकसान बारे संगठन द्वारा मांग पत्र मुख्यमंत्री व अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त को दिया जा चुका है और आवश्यक संशोधन बारे आश्वस्त किया गया है। चौहान ने कहा कि उनसे सम्बंधित हर संगठन सदैव सरकार के साथ खड़ा रहा है, और दूसरे संगठनों की तरह छोटी-छोटी बातों पर विरोध की बात नहीं करता है। प्रदेश सरकार जल्द वेतन आयोग में लिपिक वर्ग को हो रहे घाटे पर आवश्यक संशोधन कर अधिसूचित करें, यदि सरकार फिर भी हर विभाग की इस महत्वपूर्ण श्रेणी को अनदेखा करती है तो मजबूरन संगठन को हजारों लिपिकों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ेगा, जिसकी लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।
फर्स्ट वर्डिक्ट. सोलन हिमाचल प्रदेश को चार नए जिलों की सौगात मिल चुकी है, बीते दिनों ये 'फेक न्यूज़' सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। कोई इसे गलत करार देता रहा तो किसी ने इसे अंदर की खबर मान लिया। बहरहाल न सरकार ने कोई ऐसा ऐलान किया है और न इस सम्बन्ध में चर्चा की कोई पुष्ट खबर सामने आई, पर सुगबुगाहट जरूर है कि चुनावी साल में सरकार नए जिलों के गठन को हरी झंडी दे सकती है। हालांकि ये निर्णय मिशन रिपीट में कितना कारगर सिद्ध होता है इसे लेकर माहिरों की राय बंटी हुई है। कुछ मानते है कि यदि ऐसा हुआ तो ये मिशन रिपीट में भाजपा का मास्टर स्ट्रोक सिद्ध हो सकता है। वहीं कुछ इसे दोधारी तलवार मान रहे है। दरअसल माजरा ये है कि इस वक्त प्रदेश में करीब आठ नए जिले बनाने की मांग है। अकेले जिला कांगड़ा में नूरपुर, पालमपुर और देहरा को नया जिला बनाने की मांग उठ रही है। जिला मंडी से करसोग और सुंदरनगर, जिला सोलन से बीबीएन और जिला शिमला से रोहड़ू व रामपुर को अलग जिला बनाने की मांग उठ रही है। बहरहाल इतना भी तय हैं कि सियासी ठाठ के लिए आठ नए जिले बनाना मुमकिन नहीं हैं और न ही सरकार किसी को नाराज करने की स्थिति में हैं। सो ऐसे में यदि सिर्फ कुछ नए जिले बनते है तो मुमकिन है बात बनेगी कम और बिगड़ेगी ज्यादा। यूँ तो चुनावी मौसम में नए जिलों का जिन्न अक्सर बाहर निकल आता है, पर 1972 के बाद प्रदेश में कोई नया जिला नहीं बना है। यानी पचास वर्ष में किसी नए जिले का गठन नहीं हुआ, जबकि विशेषकर बीते दो दशक से कई नए जिलों के गठन की मांग जोर शोर से उठी है। हाल ही में हुए उपचुनावों के दौरान भी ये मुद्दा खूब गूंजा था। खबरें तो ये तक थी कि हिमाचल में नए जिलों के गठन के लिए भाजपा संगठन व सरकार में अंदर खाते मंथन हो रहा है। हालांकि अंत में ये सिर्फ और सिर्फ चुनावी शगूफा ही साबित हुआ। पॉलिटिकल माइलेज के लिए यदि वर्तमान सरकार नए जिलों के गठन की मांग को मान भी लेती है तो भी असल सवाल ये है कि क्या प्रदेश सरकार नए जिलों के वित्तीय व्यय का प्रबंधन करने में सक्षम है ? प्रदेश पर लगातार बढ़ता कर्ज का बोझ किसी से छिपा नहीं है, ऐसे में नए जिलों के गठन का खर्च कहाँ से आएगा ? संभवतः यदि ऐसा हुआ तो नया कर्ज लेना ही सरकार के सामने एकमात्र विकल्प होगा। कांगड़ा : या तो तीन या कोई नहीं ! वर्ष 1985 से अब तक प्रदेश में उसी की सरकार बनी है जिसने कांगड़ा फतेह किया है। 15 विधानसभा सीटों वाला ये जिला ही हिमाचल में सत्ता की राह प्रशस्त करता है। अब इसी कांगड़ा में तीन नए जिले बनाने की मांग उठा रही है। यहां नूरपुर, पालमपुर और देहरा को जिला घोषित करने की मांग हो रही है। नूरपुर विधायक व वन मंत्री राकेश पठानिया जहां नूरपुर को जिला घोषित करवाने के पक्ष में है, तो वहीं पालमपुर विधायक आशीष बुटेल भी लगातार पालमपुर को जिला घोषित करने की मांग कर रहे है। वहीं धरातल स्थिति ये है कि देहरा का दावा भी नकारा नहीं जा सकता। कांगड़ा के विभाजन में सरकार के समक्ष दो चुनौतियां है। एक, अगर कांगड़ा का विभाजन होता है तो निसंदेह इसका सियासी दम भी कम होगा और इसी के चलते एक वर्ग इसके विरोध में है और इस तबके का गुस्सा सरकार को भोगना पड़ सकता है। दूसरा, सरकार या तो तीनों नए जिले बनाये अन्यथा जो भी कृपा से वंचित रहेगा उस क्षेत्र की कोप दृष्टि निसंदेह सरकार पर बनी रहेगी। ऐसे में सियासी नुक्सान तय होगा। माहिर मानते हैं कि या तो जयराम सरकार तीन नए जिले बनाये या फिर चुपचाप इस मुद्दे पर बचती रहे। " यदि नए जिलों का गठन होता हैं काँगड़ा का विभाजन होगा और क्षेत्रफल के साथ -साथ वोटर्स भी बटेंगे। यहां कुछ को नए जिले की ख़ुशी होगी तो कुछ को जिले के छोटा हो जाने का मलाल भी होगा। ज़ाहिर है ये दोधारी तलवार है। ध्यान इस बात का भी रखना ज़रूरी है की यहां मांग तीन नए जिलों की है। वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए यदि सरकार एक या दो नए जिले बना भी दे तो शेष की नाराज़गी भी सरकार को झेलनी पड़ सकती है। " करसोग से मंडी और रामपुर से शिमला बहुत दूर : मंडी जिले के करसोग और सुंदरनगर क्षेत्र के लोग भी कठिन भौगौलिक परिस्थितियों का तर्क देकर इन दोनों क्षेत्रों को जिला बनाने की मांग कर रहे है। विशेषकर करसोग की जनता का कहना है कि करसोग क्षेत्र जिला हेडक्वार्टर मंडी से कुल 120 किलोमीटर दूर है। छोटे बड़े कार्यों के लिए क्षेत्रवासियों को 120 किलोमीटर का लम्बा सफर तय करना पड़ता है। वहीं सुंदरनगर से मंडी की दूरी तो कम है मगर तर्क है की सुंदरनगर एकमात्र ऐसा स्थान है, जिसे जिला बनाने की सूरत में सरकार पर अधिक आर्थिक बोझ नहीं बढ़ेगा। आज़ादी के बाद हिमाचल प्रदेश की लगभग सभी बड़ी रियासतों को जिलों का दर्जा मिला लेकिन केवल पूर्व की सुकेत रियासत जो वर्तमान में सुंदरनगर के नाम से जानी जाती है, जिला बनने से रह गई थी। ये भी एक कारण है की सुकेत रियासत के लोग इसे जिला बनाने की मांग कर रहे है। इसी तरह जिला शिमला के रोहड़ू व रामपुर को भी जिला बनाने की मांग है। यहाँ महासू के रूप में एक नए जिले की मांग भी हैं ताकि ऊपरी क्षेत्रों को इस नए जिले में शामिल किया जा सकते। रोहड़ू व रामपुर सहित ऊपरी शिमला के कई क्षेत्र जिला मुख्यालय से काफी दूर है। ऐसे में यदि एक नया जिला भी बनता है तो ऊपरी शिमला के लोगों को सहूलियत होगी। बीबीएन को लेकर भी उठती रही हैं मांग : एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब और प्रदेश के सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया बद्दी -बरोटीवाला - नालागढ़ यूँ तो जिला सोलन के अधीन आता हैं लेकिन यहाँ का रहन -सहन, बोली -भाषा, खान -पान सबकुछ जिला के अन्य क्षेत्रों से अलग हैं। प्रदेश के राजस्व में सबसे ज्यादा योगदान ये ही क्षेत्र देता हैं। सोलन के पांच में से दो विधानसभा क्षेत्र बीबीएन में आते हैं, दून और नालागढ़। इस क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग काफी वक्त से उठती रही हैं। हालांकि इस मांग ने कभी आंदोलन का रूप नहीं लिया लेकिन बीच -बीच में इसे लेकर सुगबुगाहट जरूर होती हैं। ऐसे में यदि चुनावी समां में प्रदेश में नए जिलों का जिन्न बाहर निकलता हैं तो बीबीएन में भी ये चुनावी मुद्दा बन सकता हैं।
पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की रैलियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू को अपना भाई बताया। मुख्यमंत्री चन्नी ने कहा कि भगवंत मान 12वीं पास है, उसमें भी उसने 3 साल लगाए हैं। कोई क्वालिफिकेशन भी तो चाहिए। कल को कितनी फाइलें देखनी हैं। केजरीवाल हरियाणा से हैं और दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और हमारा हरियाणा से पानी का विवाद है। उन्होंने कहा कि साल 2002 से मैंने कुछ प्रॉपर्टी का काम किया था और 2006 में 10 एकड़ बना लिया था। मैंने तीन चुनाव लड़े हैं और सब बेच दिया है। अब मेरे पास एक एकड़ भी नहीं है। हर चुनाव में प्रॉपर्टी बेचनी पड़ी है, यह लोग हर चुनाव में बनाते हैं और मुझे बेचना पड़ा है। मैंने तीन चुनाव विधानसभा के लड़े हैं, तीन एमसी के लडे हैं, स्कूल और कॉलेज में चुनाव लड़ा है। मेरे पास प्रॉपर्टी कम हुई है ज्यादा नहीं हुई है। गोलकीपर रहे हैं चन्नी हिन्दी न्यूज चैनल आज तक के चुनावी कार्यक्रम 'पंचायत पंजाब' में कहा कि चन्नी ने कहा कि मैं हैंडबॉल का प्लेयर रहा हूं और गोलकीपर था। तीन बार हमने पंजाब विश्वविद्यालय की तरफ से 3 बार गोल्ड मेडल जीता और नेशनल भी खेला। गोलकीपर हैंडबॉल में गोल भी बचाता है औऱ टीम को आगे खेलने का मौका देता है और पीछे से बॉल फेंककर हर किसी जगह को जगह देता है जिससे गोल हो सके। ऐसे में हम गोल करना भी जानते हैं और रोकना भी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री ने हिजाब विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिजाब का मामला बेवजह ही उछाला जा रहा है. जब से स्कूलों की शुरुआत हुई है यूनिफार्म का प्रचलन तभी से है । उन्होने कहा कि जानबूझकर चुनावी समय में इसे विवाद का रूप दिया जा रहा है। इसका कोई औचित्य नहीं है। वहीं उन्होने चुनावी मतदान पर कहा कि मैं खुद उत्तर प्रदेश जाकर आया हूं और वहां देखा है कि वहां एक तरफा भाजपा की लहर चल रही है. वहां बीजेपी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी । क्योंकि जनता समझ चुकी है कि ये ही एक ऐसी पार्टी है जो सिर्फ कहने में नहीं बल्कि करने में विश्वास रखती है। उन्होने कहा कि उत्तराखंड में भी भारतीय जनता पार्टी की स्थिति अच्छी है। और वहां भी सरकार बनेगी । विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि वो बोखला कर तरह-तरह के ऐलान कर रहे हैं । जिस तरह केजरीवाल ने पंजाब में महिलाओं को 1 हजार रुपए देने की घोषणा कि तो कांग्रेस ने दो हजार रुपए देने की घोषणा कर दी ये सिर्फ ढकोसला बाजी है। पंजाब में कांग्रेस की असलियत यह है कि उनके पास सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे तक नहीं है।
विश्व रेडियो दिवस के प्रसंग पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने बताया है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को विशनखेड़ी में नवनिर्मित परिसर में सामुदायिक रेडियो 'कर्मवीर' की स्थापना के लिए नियति पत्र प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय की ओर से सामुदायिक रेडियो स्टेशन के लिए आवश्यक प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह सामुदायिक रेडियो न केवल विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण होगा बल्कि विशनखेड़ी क्षेत्र में विकास संचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कुलपति प्रो. सुरेश ने रीवा में तैयार हुए नवनिर्मित परिसर में भी सामुदायिक रेडियो स्थापित करने की बात कही है। एमसीयू का नया परिसर विशनखेड़ी में 50 एकड़ में बनकर तैयार है। विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और विकास संचार का बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन ने नये परिसर में सामुदायिक रेडियो की स्थापना के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय में आवेदन किया था। जिस पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए विश्वविद्यालय को 'नियति पत्र' प्रदान कर दिया है। विश्वविद्यालय में स्थापित होनेवाले सामुदायिक रेडियो का नाम स्वतंत्रता सेनानी एवं महान संपादक पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के सुप्रसिद्ध समाचारपत्र 'कर्मवीर' पर रखा गया है। इस कम्युनिटी रेडियो के प्रारंभ होने से विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रेडियो के कार्यक्रम निर्माण से लेकर उसके प्रसारण एवं व्यवहारिक तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।
जय श्रीराम के नारों के जवाब में अल्लाह हू अकबर जैसे नारे देने के बाद मौलाना से लेकर मुस्लिम संगठन की पहली पसंद बनीं बीबी मुस्कान खान ने कहा कि मैंने सांप्रदायिक आधार पर अल्लाह-हू अकबर नहीं चिल्लाया। अगली बार हिंदुस्तान जिंदाबाद बोलूंगी। मुस्कान ने कहा कि मैंने सांप्रदायिक आधार पर अल्लाह-हुअकबर नहीं चिल्लाया। मैं हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा नहीं करना चाहती। भले ही पूरे देश में लोग उसके शब्दों को लेकर बहस कर रहे हों वाणिज्य द्वितीय वर्ष की छात्रा और जिम मालिक की बेटी 19 वर्षीय मुस्कान कानून की पढ़ाई करना चाहती हैं। उसके पास कोई तत्काल रोल मॉडल नहीं है, लेकिन वह अपने विश्वास और अल्लाह के सिद्धांत में ताकत मिलती है।
कर्नाटक हिजाब विवाद तब भड़क उठा जब युवा मुस्लिम छात्रों के एक समूह को हिजाब पहनने के कारण उडुपी जिले में उनके कॉलेज में प्रवेश नहीं करने दिया गया। यह मुद्दा पूरे राज्य में फैल गया क्योंकि कॉलेजों और स्कूलों ने इसी तरह के फरमान जारी किए। हिजाब विवाद के बीच कर्नाटक के उडुपी जिले के सभी हाई स्कूलों में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, निषेधाज्ञा 14 फरवरी सोमवार को सुबह 6 बजे से प्रभावी होगी और 19 फरवरी शनिवार को शाम 6 बजे तक लागू रहेगी। यानी शनिवार तक जिले के हाईस्कूलों के आसपास के इलाके में सभी के जमा होने और आंदोलन पर रोक लगा दी गई है। पुलिस अधीक्षक द्वारा उडुपी में उपायुक्त कूर्मा राव से अनुरोध करने के बाद धारा 144 लागू की गई थी। उन्होंने अनुरोध किया कि जिले के उच्च विद्यालयों के आसपास 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की जाए। इससे पहले, बेंगलुरु में अधिकारियों ने शहर के स्कूलों और कॉलेजों के आसपास किसी भी तरह के जमावड़े को प्रतिबंधित करने के लिए निषेधाज्ञा लागू की थी। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 बेंगलुरु के स्कूलों, पीयू कॉलेजों, डिग्री कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के आसपास लागू की गई थी। निषेधाज्ञ 22 फरवरी तक प्रभावी रहेगी।
भोपाल मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के मामलों में आ रही कमी के बीच राज्य सरकार ने जेल के कैदियों को उनके परिजन से मुलाकात करने की स्वीकृति फिर से दे दी है। मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि राज्य सरकार ने कोरोना वायरस बीमारी से बचाव हेतु कैदियों की परिजन से मुलाकात पर 31 मार्च 2022 तक रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा, ‘‘जेल विभाग ने 12 फरवरी से कैदियों की उनके परिजन से मुलाकात को प्रारंभ करने की स्वीकृति प्रदान की है।’’ अधिकारी ने बताया कि बंदियों को उनके परिजनों से मुलाकात के दौरान जेल मेन्युअल एवं जेल मुख्यालय के परिपत्र में दिये गये निर्देशों तथा कोविड-19 संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करवाना होगा।
गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर से करीब 200 किलोमीटर दूर जिले के सिहोर कस्बे के पास स्थित अरिहंत फर्नेस रोलिंग मिल में रविवार रात विस्फोट हो गया।विस्फोट में नौ कर्मचारी घायल हो गए है। विस्फोट के समय कर्मचारी फैक्टरी में काम कर रहे थे। विस्फोट में घायल हुए सभी नौ लोगों को भावनगर स्थित एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विस्फोट के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रचार पर कोविड-19 के कारण लगे प्रतिबंधों में शनिवार को ढील देते हुए सीमित संख्या में लोगों के साथ पदयात्राओं की अनुमति दे दी और साथ ही प्रचार अभियान के लिए एक दिन में चार घंटे का समय बढ़ा दिया।आयोग के अनुसार, चुनाव प्रचार अब सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक के बजाय सुबह छह बजे से रात 10 बजे के बीच किया जा सकता है, जिसमें कोविड उपयुक्त व्यवहार और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इससे उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को एक दिन में प्रचार करने के लिए चार घंटे और मिलेंगे। निर्वाचन आयोग ने आठ जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के चलते प्रत्यक्ष रैलियों, रोड शो और पदयात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। आयोग समय-समय पर महामारी की स्थिति की समीक्षा कर रहा है और कुछ छूट दे रहा है। निर्वाचन आयोग ने एक बयान में कहा कि राजनीतिक दल और उम्मीदवार निर्धारित खुले स्थानों की क्षमता के अधिकतम 50 प्रतिशत या राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा निर्धारित सीमा, जो भी कम हो, के साथ खुले क्षेत्रों में प्रचार कर सकते हैं। अभी तक सभा और रैलियों जैसे बाहरी आयोजनों की सीमा खुली जगह या मैदान की क्षमता का 30 प्रतिशत थी। पदयात्राओं पर निर्वाचन आयोग ने कहा कि इस तरह के जमावड़े में राज्य आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा अनुमत संख्या से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते तथा इसके लिए जिला अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी होगी। विधानसभा चुनाव 10 फरवरी को शुरू हुए और सात मार्च को समाप्त होंगे। परिणाम 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे।
बजाज ग्रुप के पूर्व चेयरमैन और बजाज मोटर्स के संस्थापक राहुल बजाज का 83 साल की उम्र में निधन हो गया है। वो पिछले काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। राहुल बजाज का जन्म 10 जून 1938 को कोलकाता में हुआ था। राहुल बजाज मारवाड़ी बिजनेसमैन परिवार से थे। राहुल बजाज ने एक लंबे वक्त तक बजाज ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली थी। साल 1965 में उन्होंने बजाज की कमान अपने हाथ में ली। राहुल बजाज करीब 50 साल तक बजाज ग्रुप के चेयरमैन रहे। साल 2001 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राहुल बजाज स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज के पोते थे। उनकी पढ़ाई दिल्ली के ही सेंट स्टीफेंस कॉलेज से हुई थी, हालांकि लॉ की डिग्री हासिल करने के लिए वो मुंबई पहुंचे। उनके नेतृत्व में बजाज ऑटो का टर्नओवर 7.2 करोड़ से 12 हजार करोड़ तक पहुंच गया और देश की अग्रणी स्कूटर और दोपहिया वाहन बेचने वाली कंपनी बन गई थी।
छत्तीसगढ़ में पुटकेल के जंगल में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की खबर सामने आई है। आईजी बस्तर पी सुंदरराज ने बताया है कि इस मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल 168 बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट शहीद हो गए हैं। वहीं एक जवान भी घायल है। घटना जिले के तिम्मापुर में उस वक्त हुई, जब सीआरपीएफ की 168वीं बटालियन का एक गश्ती दल सड़क मार्ग खुलवाने और सफाई की ड्यूटी के लिए निकला था। अधिकारियों ने बताया कि सहायक कमांडेंट एस बी टिर्की को गोली लगी और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। राजधानी रायपुर से करीब 440 किलोमीटर दूर इलाके में फिलहाल तलाश अभियान जारी है।
मुंबई के अंबोली इलाके में शुक्रवार सुबह एक व्यक्ति को उसकी पत्नी और बेटे ने कथित तौर पर इस वजह से मार डाला क्योंकि वो अपने लड़के को न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने जाने के लिए पैसे नहीं दे रहा था। दोनों ने उसे पीट-पीट कर पहले मारने की कोशिश की और जब वो नहीं मरा तो दोनों आरोपियों ने मृतक को इमारत के 7वे मंजिले से नीचे फेंक दिया जिसके बाद शख्स की मौत हो गई। मृतक का नाम संतान शेषाद्री है जिसकी उम्र 55 साल है। अंबोली पुलिस स्टेशन को जब इस मौत की जानकारी मिली तो वो घटनास्थल पर गए और तब समझ में आया की ये आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या हो सकती है। पुलिस ने पाया कि उसके बेडरूम में खून के दाग थे और कुछ कपड़ों में भी खून लगा हुआ था। मृतक की पत्नी जयशिला से जब पूछताछ की गई तो उसने पुलिस को बयान में बताया कि उसके पति ने 2 बार आत्महत्या की कोशिश की है। पहली कोशिश साल 2005 में की थी, जब वे मुंबई में थे। उस समय वो कूदकर आत्महत्या करना चाहते थे पर किसी ने देख लिया और उसे बचा लिया था। इसके बाद दूसरी कोशिश साल 2011 में की थी जब वो हैदराबाद में रहते थे। उस समय उसने अपने हाथ काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में जयशिला और उसके लड़के अरविंद को गिरफ्तार किया है क्योंकि दोनों का जब बयान लिया जा रहा था, तब दोनों ने अलग-अलग कहानी बताई थी। पुलिस अधिकारी शेख ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि परिवार में अक्सर झगड़े होते थे और संतोष अलग कमरे में रहता था। उसकी पत्नी और बेटा अलग रहते थे। एक ने बयान में बताया कि संतोष उन्हें पैसे भी नहीं देता था। महीने के 10 हजार रुपये मुश्किल से देता था। ऐसे तमाम झगड़ों के चलते इनके बीच कुछ ठीक से नहीं चल रहा था। उन्हें पता था कि वो शुगर का मरीज है और वो दवा खाने के बाद गहरी नींद में सो जाता है जिसके बाद मां बेटे ने सुबह 4 बजे का अलार्म लगाया और उठाकर उसे मारना शुरू किया। पहले उसका सिर बेड की लकड़ी पर कई बार पटका और फिर उसके हाथ की नस काटी ताकि इसे आत्महत्या का रूप दिखा सके। इसके बावजूद जब वो नहीं मरा तब उन लोगों ने उसे 7वीं मंजिल से नीचे फेंक दिया। बेटे ने अपने बयान में बताया कि उसका पिता बार-बार यह धमकी देता था कि वो आत्महत्या कर लेगा और इन लोगों को उसकी आत्महत्या के आरोप में फंसा देगा। इतना ही नहीं, मृतक के घरवालों ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी उसे किसी से मिलने नही देती थी। मृतक का एक भाई BARC में वैज्ञानिक रह चुका है। एक और बात पुलिस के सामने आई है कि मृतक को उसकी पत्नी पसंद नहीं थी। उसे इसके साथ शादी नहीं करनी थी और वो जिस तरह से अकेले रहता था उसे देख उन्हें शक होता था कि उसका किसी और के साथ प्रेम संबंध हो सकता है। पुलिस आज इन दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करेगी।
NCB के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेडे को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की तरफ से बड़ी राहत मिली है। बीते शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए SC आयोग ने ये मान लिया कि समीर वानखेडे अनुसुचित जाति के ही हैं और इसके साथ ही काफी महीनों से चल रहे इस मामले में समीर वानखेड़े ने राहत की सांस ली है। बता दें कि महाराष्ट्र कैबिनेट के मंत्री नवाब मलिक ने नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी समीर वानखेड़े पर फर्जी सर्टिफिकेट से मौकरी पाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि वानखेडे मुस्लिम थे, वे अनुसूचित जाति महार समुदाय के नहीं थे। मलिक का कहना था कि वानखेडे ने नकली जाति सर्टिफिकेट के जरिए UPSC की परीक्षा पास की थी। नवाब मलिक ने अपने आरोप को साबित करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने ट्विटर पर साझा किए सर्टिफिकेट को वानखेड़े का असली बर्थ सर्टिफिकेट बताया था। दरअसल महाराष्ट्र कैबिनेट के मंत्री नवाब मलिक ने साल 2021 के ऑक्टूबर महीने में अपने सोशल मीडिया पर दो ट्वीट किए थे। पहले ट्वीट में उन्होंने वानखेडे की एक फोटो शेयर की। इस फोटो को शेयर करते हुए मलिक ने लिखा पहचान कौन? जबकि एक अन्य ट्वीट में उन्होंने नगर निगम के प्रमाण पत्र की तस्वीर साझा की। इस प्रमाण पत्र में समीर के पिता का नाम 'दाउद क. वानखेडे' लिखा है। वहीं धर्म की जगह पर 'मुस्लिम' लिखा है। हालांकि इस मामले में वानखेडे के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने मलिक पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था मैंने कभी भी धर्म नहीं बदला। उन्होंने कहा कि ये सारे आरोप गलत है। उनकी इंटरकास्ट शादी हुई थी, लेकिन उन्होंने या उनकी पत्नी ने कभी अपना धर्म परिवर्तन नहीं किया था।
गुरग्राम के बाद अब दिल्ली में एक बिल्डिंग गिरने की घटना सामने आई है। दिल्ली के बवाना इलाके में जेजे कॉलोनी की ये घटना बताई जा रही है। जिसमें चार लोगों की मलबे में दबने से मौत हो चुकी है। इससे पहले पुलिस ने बताया था कि तीन लोगों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया है, वहीं बाकी लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था। हालांकि अब भी लोगों की तलाश की जा रही है। डीसीपी आउटर नॉर्थ ब्रिजेंद्र यादव ने इस घटना की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि, कुल 6 लोगों के बिल्डिंग के मलबे में फंसे होने की जानकारी मिली थी, जिनमें से 3 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बाकी फंसे लोगों को निकालने की कोशिश भी की जारी है। पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब 2:45 पर एनआईए थाने की पुलिस को जानकारी मिली कि दिल्ली जल बोर्ड के पास एक बिल्डिंग गिरी है। जिसमें कुछ लोग दब गए हैं, मलबे में बच्चों के दबे होने की भी जानकारी मिली। तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची और राहत बचाव कार्य शुरू किया गया। ये बिल्डिंग राजीव रतन आवास में बनी थी। जहां करीब 300-400 फ्लैट हैं।
हिमाचल प्रदेश के राशन कार्ड धारकों के लिए अच्छी खबर निकल कर सामने आई है। मार्च के महीने में हिमाचल प्रदेश के बीपीएल व राशन उपभोक्ताओं को मार्च से रिफाइंड तेल 11 रुपये और एपीएल को 13 रुपये सस्ता मिलेगा। खाद्य आपूर्ति निगम ने रिफाइंड का टेंडर फाइनल कर दिया है। एपीएल उपभोक्ताओं को रिफाइंड 122 रुपये, जबकि गरीब परिवारों को 104 रुपये तक मिलेगा। गौरतलब है कि अभी एपीएल उपभोक्ताओं को डिपो में रिफाइंड 135 रुपये और बीपीएल को 115 रुपये प्रति लीटर दिया जा रहा है। वर्तमान सरकार हिमाचल के राशनकार्ड परिवारों को तीन दालें (मलका, माश और दाल चना), दो लीटर तेल (रिफाइंड और सरसों), 500 ग्राम प्रति व्यक्ति चीनी और एक किलो आयोडीन नमक सब्सिडी पर दे रही है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को एमपी कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया है। वीडियो में सीएम शिवराज से एक शख्स यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी की स्थिति के बारे में बता रहे हैं। इस वीडियो को कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं। दरअसल वायरल वीडियो में शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि मुझे तो लगता है कि यूपी में कोई संदेह नहीं, उत्तराखंड में बीजेपी ही है, लेकिन थोड़ा मुकाबला है। वीडियो को शेयर करते हुए एमपी कांग्रेस ने लिखा है कि यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी की बेहद कमजोर स्थित की जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते बीजेपी तो गई। वहीं इससे पहले मध्य प्रदेश के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की गुरुवार को जुबान फिसल गई थी। उन्होंने 5 राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनवा दी थी। मंत्री से 5 राज्यों में हो रहे चुनाव को लेकर सवाल किया गया। इस पर गोविंद ने कहा कि राम मंदिर पीएम मोदी के सहयोग से और सीएम योगी के विशेष प्रयास से बना रहा है, तो चाहे उत्तरांचल हो चाहे गोवा हो, चाहे पंजाब हो या उत्तर प्रदेश हो सब जगह कांग्रेस का बहुमत होगा और कांग्रेस बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
राजधानी भोपाल में लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाही की है। लोकायुक्त टीम ने नगर निगम जोन-4 के सफाई अधिकारी सतीश टांग को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सतीश ने रिश्वत नगर निगम जोन-5 के स्वास्थ्य अधिकारी अजय श्रवण के लिए मांगी। दरअसल भोपाल के नगर निगम जोन-5 के स्वास्थ्य अधिकारी अजय श्रवण पर लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाही की है। टीम ने अजय श्रवण के अलग अलग ठिकानों पर गुरुवार देर रात छापेमार कार्रवाही की। वहीं अधिकारी ने एक प्लास्टिक व्यापारी से 10 हजार रूपए की मांग की गई थी। जिसकी शिकायत फरियादी पंकज खूबचंदानी ने लोकायुक्त से की। इस मामले की जांच के दौरान हेल्थ ऑफिसर अजय श्रवण को दोषी पाया गया । आपको बता दें कि टीम ने अधिकारी के सहयोगी नगर निगम जोन-4 के सफाई अधिकारी सतीश टांग को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोचा है। इसी के साथ ही लोकायुक्त ने श्रवण को भी आरोपी बनाया है। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। टीम ने सतीश को भोपाल रेलवे स्टेशन के पास गुरुवार रात ट्रैप किया। लोकायुक्त अजय श्रवण की तलाश में जुटी है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बृहस्पतिवार को 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर 60.17 प्रतिशत मतदान हुआ। कोविड प्रोटोकॉल के कारण एक घंटे के विस्तार के बाद शाम छह बजे मतदान बंद हुआ। कुछ स्थानों पर ईवीएम में मामूली तकनीकी खराबी के साथ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने ट्वीट कर कहा, उप्र विधानसभा 2022 का प्रथम चरण आज शांतिपूर्वक सम्पन्न हो गया। लोकतंत्र के महोत्सव में अपने अमूल्य मत का प्रयोग कर सहभागिता करने वाले सभी सम्मानित मतदाताओं का हार्दिक धन्यवाद। आपका मतदान नए उत्तर प्रदेश की नींव को मजबूती प्रदान करेगा। भारत माता की जय। अपर मुख्य चुनाव अधिकारी (एसीईओ) बीडी राम तिवारी ने बताया, कुछ जगहों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी की खबरें आई हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद उन ईवीएम को बदला जा रहा था। समाजवादी पार्टी के इस आरोप पर कि कैराना विधानसभा क्षेत्र के दुंदुखेड़ा गांव मेंमतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करने दिया गया, तिवारी ने कहा कि संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को मामले को देखने के लिए कहा गया था। निर्वाचन आयोग कार्यालय के मुताबिक मतदान कार्य कोविड प्रोटोकॉल के तहत सुबह सात बजे शुरू हुआ जो शाम छह बजे तक चलेगा।
शहर के एक मोहल्ला निवासी 22 वर्षीय युवती आठ दिसंबर 2021 को रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी। लड़की की मां की ओर से पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह के बेटे पर इसको लेकर आरोप लगाया गया था। एक ओर जहां उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज है, वहीं दूसरी और उन्नाव में एक दलित युवती की हत्या मामला अब गर्म होता दिखाई दे रहा है। हत्या का आरोप किसी और पर नहीं बल्कि पूर्व मंत्री के बेटे पर है। यही कारण है कि मामला अब पूरी तरीके से राजनीतिक होता जा रहा है। मायावती ने भी समाजवादी पार्टी के नेता पर सवाल उठा दिए हैं। मायावती ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्नाव जिले में सपा नेता के खेत में दलित युवती का दफनाया हुआ शव बरामद होना अति-दुःखद व गंभीर मामला। परिवार वाले पहले से ही उसके अपहरण व हत्या को लेकर सपा नेता पर शक कर रहे थे। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे। उन्नाव जिले में सपा नेता के खेत में दलित युवती का दफनाया हुआ शव बरामद होना अति-दुःखद व गंभीर मामला। परिवार वाले पहले से ही उसके अपहरण व हत्या को लेकर सपा नेता पर शक कर रहे थे। राज्य सरकार पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों के खिलाफ तुरन्त सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
सॉलिस्टर जनरल की बात पर सीजेआई ने आगे कहा कि, राज्य की स्थिति और हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर रखी जा रही हैं। यह देखना होगा कि, यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहिए या नहीं। हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देने का वक्त सही है या नहीं यह देखना भी जरूरी होगा। कर्नाटक हिजाब विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। बता दें कि, कर्नाटक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई अब जारी है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में हिजाब का समर्थन कर रहे कांग्रेस नेता और वकील देवदत्त कामत ने कहा कि, इस ममाले पर सोमवार को सुनवाई की जाए। सीजेआई ने कहा कि, इस मामले को बड़े स्तर में न फैलाएं। सॉलिस्टर जनरल ने कहा कि, हिजाब विवाद पर हाई कोर्ट को फैसला देना चाहिए और इसपर कोई राजनीति न की जाए।सॉलिस्टर जनरल की बात पर सीजेआई ने आगे कहा कि, राज्य की स्थिति और हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर रखी जा रही हैं। यह देखना होगा कि, यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर लाना चाहिए या नहीं। कर्नाटक सरकार ने राज्य में कर्नाटक एजुकेशन एक्ट 1983 की धारा 133 लागू कर दी है। जिसके कारण सभी स्कूल और कॉलेज में यूनिफॉर्म को अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके तहत सरकारी स्कूल और कॉलेज में तय की गई यूनिफॉर्म पहनी जाएगी। वहीं प्राइवेट स्कूल में अपने यूनिफॉर्म का चयन खुद कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज है। इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ ने कुछ ऐसा बयान दिया जिसकी वजह से अब विरोधी उन पर हमलावर हो गए हैं। दरअसल, गुरुवार को उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए पहले चरण के वोट डाले गए। पहले चरण के लिए मतदाताओं से वोट डालने की अपील करते हुए योगी आदित्यनाथ ने उन्हें आगाह भी कर दिया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर इस बार मतदाता चूक गए तो उत्तर प्रदेश को कश्मीर, बंगाल और केरल बनते देर नहीं लगेगी। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने यह भी बता दिया कि उनकी सरकार ने दंगाइयों और आतंकवादियों पर अंकुश लगाया है। योगी ने अपने टि्वटर हैंडल के जरिये साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि आज मुझे कोई चिंता है तो केवल एक है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में जिन-जिन दंगाइयों और आतताइयों पर अंकुश लगा है, वे सब मचल रहे हैं। आतंकी बार-बार धमका रहे हैं कि एक बार सरकार आने दीजिए। आप सावधान रहिए। आप चूके, तो पांच साल की मेहनत पर पानी फिर जाएगा और इस बार उत्तर प्रदेश को कश्मीर, बंगाल और केरल बनते देर नहीं लगेगी। योगी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान आपने किसी घोटाले के आरोप नहीं सुने। मैं एक योगी हूं और मेरे भगवे पर कोई दो पैसे के भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा सकता, लेकिन इस बात के लिए भी मैं आपसे अपना वोट नहीं मांगूंगा। यह मुझे शोभा नहीं देता। मुझे सबसे बड़ा संतोष इस बात का है कि आज हमारा उत्तर प्रदेश गुंडों, बदमाशों, दंगाइयों, उगाही गिरोह, पेशेवर अपराधियों और माफियाओं के आतंक से मुक्त है। उन्होंने कहा कि पलायन कर गए हिंदू अब अपने घरों को लौट चुके हैं। उन्हें धमकाने और प्रताड़ित करने वाले लोग या तो जेलों में बंद हैं या फिर सहम कर कहीं दुबक गए हैं। पुलिस भी अब बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के काम करती है। अब इसी को लेकर राजनीतिक बवाल शुरू हो गया है


















































