शिमला: न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालेंगे। इस संदर्भ में सोमवार 23 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर दी गई है। मौजूदा समय में हिमाचल से ही संबंध रखने वाले न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाल रहे थे। न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवारत थे। संभावना है कि न्यायमूर्ति संधवालिया इसी हफ्ते अपना कार्यभार संभालेंगे। सोमवार को केंद्र सरकार में जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी जगन्नाथ श्रीनिवासन की ओर से न्यायमूर्ति संधवालिया की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई। उल्लेखनीय है कि पूर्व में इसी साल जुलाई की 11 तारीख को न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया का नाम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सीजे के तौर पर अनुशंसित किया गया था। अब वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कार्यभार संभालेंगे। इससे पहले 19 अक्टूबर 2024 को न्यायमूर्ति राजीव शकधर हिमाचल हाईकोर्ट से रिटायर हुए थे। उनकी रिटायरमेंट के बाद से न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद पर सेवाएं दे रहे थे। न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया ने वर्ष 1986 में चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की फिर वर्ष 1989 में उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद वे पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में एडवोकेट के रूप में सक्रिय हुए। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया के पिता वर्ष 1978 और वर्ष 1983 के दरम्यान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। फिर वर्ष 1983 से 1987 तक उन्होंने पटना में हाईकोर्ट में सेवाएं दीं। फिलहाल, हिमाचल हाईकोर्ट में सेवारत न्यायधीशों की बात करें तो अभी न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान, न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा, न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ, न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य, न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा, न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह, न्यायमूर्ति रंजन शर्मा, न्यायमूर्ति बीसी नेगी व न्यायमूर्ति राकेश कैंथला का नाम आता है। न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया के पदभार संभालने के बाद अब हिमाचल हाईकोर्ट में सीजे सहित 12 जज हो जाएंगे।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के जलशक्ति विभाग के पांच पैरा पंप ऑपरेटर्स की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। मामले पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि उपरोक्त पांच पैरा पंप ऑपरेटर्स ने जो अनुभव प्रमाण पत्र यानी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट सबमटि किए थे। वे विज्ञापन के अनुसार निर्धारित प्राधिकारी की तरफ से जारी नहीं किए गए थे। अदालत ने इन पंप ऑपरेटरों की नियुक्ति को रद्द करने के साथ ही जल शक्ति विभाग को निर्देश दिया कि वे सभी उम्मीदवारों की योग्यता का पुनर्मूल्यांकन करे। विभाग को आदेश जारी किए गए कि वह आवेदकों द्वारा प्रस्तुत संबंधित कार्यकारी अभियंता की ओर से जारी किए गए अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर यह पुनर्मूल्यांकन करें। हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार की याचिका को मंजूर करते हुए उपरोक्त आदेश जारी किए। अदालत ने आदेश दिए हैं कि इन पांच निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति को रद्द किए जाने के कारण खाली होने वाले पदों पर योग्य उम्मीदवारों को योग्यता के आधार पर तैनाती दी जाए। राज्य के जलशक्ति विभाग ने पात्र अभ्यर्थियों से पैरा पंप ऑपरेटर्स के पदों के लिए आवेदन मांगे थे। विज्ञापन में ये स्पष्ट किया गया था कि यदि कोई अभ्यर्थी जल शक्ति विभाग, हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों आदि में या राज्य जल शक्ति विभाग में सेवा देने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी के संबंधित क्षेत्र में अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करेगा, तो केवल कार्यकारी अभियंता द्वारा जारी प्रमाण-पत्र को ही वैध माना जाएगा। याचिकाकर्ता राकेश कुमार के साथ-साथ पांच निजी प्रतिवादियों और अन्य ने चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। विभाग की तरफ से जारी मेरिट लिस्ट के अनुसार अदालत को सूचित किया गया कि कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति की पेशकश की गई थी। याचिकाकर्ता का नाम प्रतीक्षा सूची में क्रम संख्या एक पर था। निजी प्रतिवादियों की नियुक्ति को याचिकाकर्ता राकेश ने यह कहते हुए चुनौती दी थी कि निजी प्रतिवादियों को अनुभव के शीर्षक के तहत गलत तरीके से दो अंक दिए गए हैं, क्योंकि निजी प्रतिवादियों के अनुभव के संबंध में प्रस्तुत प्रमाण पत्र विज्ञापन में निर्धारित प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किए गए थे। कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड को देखने के बाद पाया कि 5 पैरा पंप ऑपरेटरों ने जो अनुभव प्रमाण पत्र पेश किए और जिनके आधार पर उन्हें अनुभव के अंक देकर चुना गया, वे वास्तव में विज्ञापन के अनुसार निर्धारित प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किए गए थे। इस पर ही हाईकोर्ट ने ये नियुक्तियां रद्द की हैं।
हिमाचल प्रदेश में एलोपैथी डॉक्टरों को सुक्खू सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए अध्ययन अवकाश अवधि (Study Leave Period) के दौरान एलोपैथी डॉक्टरों को शत-प्रतिशत वेतन देने का फैसला लिया है। स्टडी लीव पीरियड के दौरान एलोपैथी डॉक्टरों को ऑन ड्यूटी माना जाएगा। इससे पहले, स्टडी लीव पीरियड के दौरान एलोपैथी डॉक्टरों को वेतन का 40 प्रतिशत वेतन दिया जाता था। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार पहले से ही अध्ययन अवकाश अर्जित कर रहे पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स के लिए अध्ययनरत होम्योपैथी डॉक्टरों को पूरा वेतन प्रदान कर रही है। इसी तर्ज पर सरकार ने अब एलोपैथी डॉक्टरों के लिए भी इस नीति को अपनाने का फैसला लिया है। प्रदेश सरकार राज्य में गुणवत्तापूर्ण मेडिकल सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, हिमाचल प्रदेश में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल स्टूडेंट, शैक्षणिक प्रतिबद्धताओं के साथ-साथ मरीजों की चिकित्सा दायित्व में सामंजस्य स्थापित कर काम करते हैं। यह उनके मेडिकल फील्ड में स्पेशलाइजेशन और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार स्टडी लीव पीरियड के दौरान डॉक्टरों को पूरा वेतन देकर उनकी कार्यशैली में गुणवत्ता सुनिश्चित कर रही है, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया हो। सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार का ये फैसला प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
जिला शिमला में सोमवार को शहर के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई है। शिमला जिले में बर्फबारी के चलते 112 सड़कें बाधित है। शिमला ग्रामीण में 8, ठियोग में 1, कोटखाइ में 48, जुब्बल में 7, रोहड़ू 27, रामपुर में 7, चैपाल 1, कुपवी 2 और कुमारसैन 6 और डोडरा क्वार की 5 सड़कें बर्फबारी के कारण बाधित हुई है। इन सड़कों को खोलने का कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा शुरू कर दिया गया है और अगर मौसम साफ रहता है तो आज सभी सड़कों को यातायात के लिए बहाल कर दिया जाएगा। डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने बताया, सोमवार को हुई बर्फबारी के कारण शिमला के उपरी क्षेत्र में अनेकों सड़के बाधित हो गई हैं। शाम छह बजे तक 112 सड़के बंद होने की सूचना प्राप्त हुई है, जबकि चंडीगढ़ से शिमला और बिलासपुर धर्मशाला से शिमला मार्ग पूरी तरह से खुला है। वहीं, शिमला शहर का सर्कुलर मार्ग सभी वाहनों के लिए खुला हुआ है। बाधित सड़कों को खोलने का कार्य शुरू कर दिया गया है। डीसी शिमला अनुपम कश्यप ने कहा कि बागबानों और पर्यटकों के लिए बर्फबारी काफी सुखद साबित होने के संकेत है, लेकिन हमें बर्फबारी के दौरान अपने आप को सुरक्षित करना है। प्रशासन के दिशा निर्देशों के बाद ही आवाजाही करें। इसके अलावा बुजुर्ग बच्चों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखें। प्रशासन ने बर्फबारी को लेकर सारी पूर्व तैयारियां की हैं। शिमला शहर को 5 सेक्टर में बांटा जा चुका है. जबकि संवेदनशील मार्गों पर मिट्टी रखी गई है, जोकि बर्फबारी के दौरान सड़क को बहाल करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। इसके अलावा मशीनरी और पुलिस फोर्स, गृह रक्षकों की तैनाती भी की गई है। डीसी शिमला ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि प्रशासन के कार्यों में सहयोग करें। प्रशासन के समय-समय पर आने वाले आदेशों का पालन करें। इसके साथ ही कोई भी सूचना बर्फबारी, मार्गों से जुड़ी हो तो स्थानीय और जिला प्रशासन के साथ सांझा करें। डीसी अनुपम कश्यप ने कहा कि बर्फबारी के दौरान आवश्यक सूचना एवं निर्देश जिला उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के फेसबुक पेज पर अपलोड की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिमला में विंटर कार्निवल का आयोजन भी किया जा रहा है। ऐसे में यहां पर भी कई तरह की प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक संध्याओं को आयोजन किया जा रहा है। इसमें भी लोग बढ़चढ़ कर हिस्सा लें।
** जानें क्या थी 'नो डिटेंशन पॉलिसी' केंद्र सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अब कक्षा पांच और आठ में भी बच्चों को फेल किया जाएगा। कक्षा पांच और 8 की वार्षिक परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों को दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाएगा। अगर इसमें भी असफल रहते हैं तो उन्हें फेल कर दिया जाएगा और दोबारा उसी कक्षा में पढ़ना पड़ेगा। अभी तक आठवीं कक्षा तक बच्चों को फेल नहीं करने का प्रावधान था। साल 2010-11 से 8वीं कक्षा तक परीक्षा में फेल होने के प्रावधान पर रोक लगा दी गई थी। मतलब यह कि बच्चों के फेल होने के बावजूद अगली क्लास में प्रमोट कर दिया जाता था, लेकिन इससे देखा गया कि शिक्षा के लेवल पर धीरे धीरे गिरावट आने लगी, जिसका असर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं पर पड़ने लगा। काफी लंबे समय से इस मामले पर विचार विमर्श के बाद नियमों में बदलाव कर दिया गया। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने इसके संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि अगर स्टूडेंट परीक्षा में फेल होता है तो उसे 2 महीने के अंदर दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा लेकिन उसमें भी असफल होने पर अगली क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा, लेकिन इस दौरान फिर फेल होने वाले छात्र को सुधार का मौका दिया जाएगा। टीचर उस फेल होने वाले स्टूडेंट पर खास ध्यान देंगे साथ ही समय-समय पर पेरेंट्स को भी गाइड करेंगे। नो डिटेंशन पॉलिसी शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की एक अहम नीति थी। इस नीति के तहत कक्षा पांच और आठ के बच्चों को वार्षिक परीक्षा में फेल नहीं किया जाता था। इस नीति के तहत, सभी छात्र पारंपरिक परीक्षाओं का सामना किए बिना अपने आप अगली कक्षा में प्रमोट हो जाते थे। यह नीति बच्चों के सतत और व्यापक मूल्यांकन पर जोर देती थी।
हिमाचल में केंद्र की ओर से प्रायोजित योजनाएं अब समय पर पूरी होंगी। इसको लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र की ओर प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों को विभिन्न विभागों की ओर से क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि इन योजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके, जिससे लोगों को इसका लाभ मिले। बैठक के दौरान प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए सीएम सुक्खू ने नई परियोजनाएं बनाने और इन्हें प्राथमिकता प्रदान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र की ओर से प्रायोजित समाज कल्याण, अन्य पिछड़ा वर्ग और जनजातीय एवं महिला कल्याण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और कृषि संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी प्रगति की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने लोगों को इन योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के लिए इन्हें समयबद्ध पूर्ण करने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे इन परियोजनाओं की लागत वृद्धि से बचा जा सकता है। इससे प्रदेश के विकास को भी गति मिलेगी. प्रदेश सरकार लोगों को घरद्वार पर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्राथमिकता से कार्य कर रही है, जिसके लिए अधिकारियों को लक्षित समुदायों के कल्याण के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करना चाहिए। सीएम सुखविंदर सिंह ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान प्रदेश ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है और राज्य के लोगों के कल्याण के लिए अनेक अभिनव योजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने विभागों को राज्य सरकार की कल्याणकारी नीतियों के बारे में लोगों को जागरूक करने को कहा, ताकि संवेदनशील वर्गों के लोग इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। इस समीक्षा बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चन्द शर्मा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव सीपालरासू, राकेश कंवर, आशीष सिंघमार, राजेश शर्मा, राखिल काहलों, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा बैठक में उपस्थित रहे।
** महापौर उतरे फील्ड में ,डलवाई जा रही रेत, लक्कड़ बाजार में फंसी गाड़ी राजधानी शिमला में पिछले दो घंटे से बर्फबारी का दौर जारी है करीब 2 से 3 इंच तक बर्फ गिर चुकी है, जिससे सड़कों पर फिसलन बढ़ गई है कुफरी फागु में 5 इंच बर्फ गिरने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। लक्कड़ बाजार संजौली की ओर वाहनों की आवाजाही बन्द हो गई है। नगर निगम द्वारा शहर के रास्तों और सड़को पर फिसलन कम करने के लिए नगर निगम द्वारा रेत डलवाई जा रही है। वही नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान भी फील्ड में उतरे और शहर में सड़कों का जायजा ले रहे हैं। महापौर लक्कड़ बाजार पहुचे जहा टक्का बैंच से लक्कड़ बाजार में गाड़ी स्किट हो कर सड़क के बीच मे फंस गई वही गाड़ी को निकालने के लिए मजदूर बुलाए गए और गाड़ी को वहां से निकाला गया। महापौर ने कहा कि शहर के अस्पतालों के रास्तों ओर सड़को को प्राथमिकता पर खोलने के निर्देश दिए है। इसके लिए मशीनरी तैनात कर दी है।
** कसौली में 90, शिमला में 80, मनाली में 70 फीसदी होटल पैक शिमला में होटलों की ऑक्यूपेंसी 80, जबकि मनाली और धर्मशाला में 70 फीसदी तक क्रिसमस और नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों ने हिमाचल प्रदेश का रुख करना शुरू कर दिया है। इस वीकेंड से ही शिमला, मनाली, धर्मशाला, डलहौजी, कुफरी, नारकंडा और कसौली सैलानियों से पैक हो गए हैं। शिमला में होटलों की ऑक्यूपेंसी 80, जबकि मनाली और धर्मशाला में 70 फीसदी तक पहुंच गई है। वीकेंड पर कसौली में 90 फीसदी तक होटलों के कमरे पैक रहे। मौसम विभाग की ओर से प्रदेश 27 और 28 दिसंबर को प्रदेश में बर्फबारी के पूर्वानुमान के बाद सैलानियों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से सैलानी क्रिसमस और न्यू ईयर मनाने के लिए हिमाचल के पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं। अन्य पर्यटन स्थलों पर भी सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है। राजधानी शिमला में सैलानियों की भीड़ बढ़ते ही ट्रैफिक जाम की समस्या गहरा गई है। बीते दो दिनों से शहर के कार्ट रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। रोहतांग में बर्फबारी के बाद मनाली में भी सैलानियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। सैलानियों की भीड़ बढ़ने से पर्यटन कारोबारी खासे उत्साहित हैं। उधर, शिमला के रिज मैदान पर पहली बार 24 दिसंबर से विंटर कार्निवल का आयोजन हो रहा है। पहली बार यहां विंटर क्वीन भी चुनी जाएगी। सैलानियों के अलावा स्थानीय लोग भी कार्निवाल को लेकर खासे उत्साहित हैं। ऑफ हिमाचल होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह ठाकुर का कहना है कि क्रिसमस से पहले ही वीकेंड पर बड़ी संख्या में सैलानी प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर पहुंचने शुरू हो गए हैं। जनवरी के पहले सप्ताह तक सैलानियों की रौनक बनी रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने बर्फबारी का भी पूर्वानुमान जारी किया है। अगर अच्छी बर्फबारी होती है तो न्यू ईयर बनाने रिकाॅर्ड सैलानी हिमाचल पहुंचेंगे।
सामरिक महत्व की बिलासपुर- मनाली- लेह रेललाइन को वित्त और रक्षा मंत्रालय से हरी झंडी मिल गई है। अब इसकी फाइल मंजूरी के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के पास पहुंच गई है। एनएसए से चर्चा के बाद फाइल पीएमओ भेजी जाएगी। इसके बाद तय होगा कि रेललाइन के लिए कब और कहां से बजट दिया जाए और काम कब शुरू होगा। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक का संचालन अगले महीने शुरू होने की संभावना है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसके बाद केंद्र का पूरा ध्यान बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन पर होगा। भानुपल्ली से बिलासपुर तक वर्ष 2027 तक ट्रेन पहुंचाने का लक्ष्य है। रेललाइन प्रोजेक्ट की डीपीआर वर्ष 2022 में तैयार की जा चुकी है। इसके मुताबिक प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत एक लाख करोड़ से अधिक आंकी गई थी, लेकिन अब संशोधन के बाद बढ़ गई है। रेल मंत्रालय ने एस्केप टनलों (सुरक्षा सुरंगों) का आकार बढ़ाया है, इसके कारण लागत बढ़ी है। ये टनलें रेललाइन की मुख्य टनलों के साथ बनेंगी ताकि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। 2200 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण रेललाइन के लिए हिमाचल और लद्दाख में कुल 2200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें 26 फीसदी यानी 572 हेक्टेयर भूमि वन क्षेत्र की होगी। भूमि अधिग्रहण पर 11,500 करोड़ खर्च होंगे। रेललाइन का काम चार चरणों में होगा। पहला बिलासपुर से मंडी, दूसरा मंडी से मनाली, तीसरा मनाली से उपशी और चौथा उपशी से लेह तक रहेगा। काम लेह की तरफ से शुरू करने की योजना है। सेना की जरूरतों को देखते हुए लेह से चीन सीमा तक करीब 13 किमी ट्रैक अलग से बिछाया जाएगा। ट्रैक पर पांच स्टेशन होंगे, जिसमें सामान उतारने व चढ़ाने की सुविधा होगी। डीपीआर के अनुसार, करीब 62,000 करोड़ रुपये रेललाइन के पुलों और टनलों पर ही खर्च होंगे।
केंद्र सरकार ने हिमाचल सरकार को पत्र लिखकर कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने को कहा है। अगर ऐसा किया जाता है तो केंद्र सरकार हिमाचल को 1600 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देगी। केंद्र की ओर से जारी पत्र के अनुसार वर्ष 2022-23 और 2023-24 में अनुबंध पर नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को यूपीएस में लाने से फायदा होगा। हालांकि, राज्य सरकार ने पत्र को लेकर अभी कोई जवाब नहीं दिया है। यह उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने हिमाचल में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की है। केंद्र ने हिमाचल के 9,000 करोड़ रुपये देने हैं। यह राशि एनपीएस कर्मियों का केंद्र के पास जमा हिस्सा है। राज्य सरकार लगातार मामले को केंद्र के समक्ष उठा रही है। अभी यह बजट नहीं मिला है। राज्य सरकार का मानना है कि हिमाचल में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने के लिए केंद्र ने राज्य के लिए आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। लोन लेने की लिमिट 6600 करोड़ तय की गई है। यही नहीं, बाहरी सहायता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से आर्थिक सहायता के नए प्रस्तावों के लिए भी सीमा तय की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक हिमाचल केवल 2,944 करोड़ रुपए तक के प्रस्तावों की मंजूरी के लिए पात्र होगा। राज्य सरकार ने चुनावी गांरटी को पूरा करते हुए 1.36 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल की है। अब देखना यह है कि अब राज्य सरकार नए अनुबंध कर्मचारियों को यूपीएस के तहत लाने का निर्णय करती है या फिर उन्हें पुरानी पेंशन ही दी जाएगी।
** रोहतांग दर्रा के साथ ऊंची चोटियों पर बर्फबारी शुरू हिमाचल प्रदेश में मौसम ने करवट बदल ली है। सोमवार सुबह से रोहतांग दर्रा के साथ ऊंची चोटियों में बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। रोहतांग में 10 सेंटीमीटर तक ताजा बर्फबारी रिकार्ड की गई है। मौसम में आए बदलाव से कुल्लू व लाहौल प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। वहीं, राजधानी शिमला में भी बर्फ के फाहे गिर रहे हैं। बर्फबारी होता देख पर्यटकों में खुशी की लहर है, क्योंकि पर्यटक मन में बर्फबारी के दीदार की इच्छा लिए ही हिमाचल पहुंचते हैं। सैलानियों को बर्फ वाले इलाकों में न जाने की हिदायत दी है। वहीं, क्रिसमस व नए साल के जश्न के लिए बड़ी संख्या में सैलानियों ने कुल्लू-मनाली का रुख कर दिया है। रविवार को भी अटल टनल रोहतांग से 11,322 वाहन आर-पार हुए हैं। बर्फबारी से पर्यटकों व पर्यटन कारोबारियों को व्हाइट क्रिससम की उम्मीद जगी है। मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल में आज और कल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हो सकता है। निचले इलाकों में भीषण शीतलहर से लोगों को जूझना पड़ेगा। वहीं, 27 दिसंबर को पूरे प्रदेश में बारिश और कई इलाकों में बर्फबारी होने के आसार हैं। प्रदेश में अगले छह दिनों तक शीतलहर जारी रहेगी। मैदानी इलाकों में 24 और 25 को घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। मंडी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के कई इलाकों में पारा शून्य से नीचे पहुंच गया है। सोमवार को ताबो में माइनस 10.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर में भी कोहरे के चलते जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
धर्मशाला हिमाचल प्रदेश में आजकल हिमाचल के मौसम का आनंद लेने के लिए बॉलिवुड से मनीष मिश्रा और भानु सूर्यम ठाकुर आएं है, भानु सूर्यम ठाकुर धर्मशाला के डडीयाला कॉलोनी धडम के रहने वाले हैं । भानू सूर्यम ठाकुर ने कई सीरियल और वेब सीरीज में काम किया है जिसमे "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" व "अनुपमा" जैसी हैं इन्होंने बताया कि जैसे लोग हमे इतना आसान टीवी में देखते हैं उसका शूट टाईम उतना ही कठिन होता है और कभी कभी तो बिना कुछ खाए काम करना पड़ता है साथ में यह भी बताया कि अगर लगन हो तो मंज़िल मिल ही जाती हैं। उनके साथ आएबॉलिवुड एक्टर मनीष मिश्रा भी काफ़ी विज्ञापन में और कई सीरियल, तथा वेब सीरीज में काम कर रहें हैं, मनीष मिश्रा मशहुर कॉमेडियन मनमोजी के बेटे हैं आपको बता दें मनमौजी जी ने 1000 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है और इनको लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में उनका नाम हैं, उनका अभिनय हर फिल्म में अलग होता था। भानु सूर्यम ठाकुर और मनीष मिश्रा ने कलाकार लाइव से बात करके बताया कि आने वाले समय में बहुत ही बढ़िया प्रोग्राम सबके लिए लेकर आ रहे हैं तथा हिमाचल प्रदेश में भी बहुत अच्छे कलाकार हैं तो यहां पर भी हॉलीवुड होना चाहिए साथ में सभी नए नए कलाकारों को अच्छे सुझाव दिए। इस मौके पर मुनीष भाटिया, मनमोहन जैसवाल, राजकुमार डोगरा, मनीष शामिल थे।
** कहा, लोगों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने को प्रदेश सरकार वचनबद्ध हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और लोगों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं देने के लिए इस बार के बजट में 3,415 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने कांगड़ा जिले के सिविल अस्पताल फतेहपुर, ज्वाली, नूरपुर और इंदौरा के दौरे के दौरान दी। उन्होंने इन अस्पतालों का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र में एक आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किया जा रहा है। राज्य में कुल 68 आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाए जाएंगे, जिनमें से 45 पहले ही तैयार हो चुके हैं। इन संस्थानों में विश्वस्तरीय सुविधाएं दी जाएंगी और 6 विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि फतेहपुर अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति जल्द की जाएगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार ने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और उनके सम्मानजनक जीवन के लिए कई कल्याणकारी पहल की हैं। इस कड़ी में राज्य मंत्रिमंडल ने ‘महर्षि वाल्मीकि कामगार आवास योजना’ शुरू करने को मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य वाल्मीकि समुदाय के सफाई कर्मचारियों को तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत 2.5 लाख रुपये से कम वार्षिक आय और आवासीय सुविधा से वंचित लोग पात्र होंगे। योजना की जानकारी और आवेदन के लिए लोग संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। प्रदेश सरकार ने कल्याणकारी कदम उठाते हुए ‘मुख्यमंत्री विधवा एवं एकल नारी आवास योजना’ के तहत वित्तीय सहायता में भी वृद्धि की है। योजना के तहत अब विधवा और एकल महिलाओं को मकान बनाने के लिए सहायता राशि 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार वंचित वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और सरकार बेघर परिवारों को आश्रय प्रदान कर उनके जीवन स्तर में सुधार ला रही है। योजना के अंतर्गत बनाए गए घरों में पानी और बिजली कनेक्शन प्रदान करने को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत महिलाओं को भी मकान के निर्माण के लिए चार लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी जिसमें घर के लिए तीन लाख रुपये और रसोई, शौचालय और बाथरूम जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए दिए जाने वाले एक लाख रुपये शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल हिमाचल प्रदेश में कल्याणकारी योजनाओं से वंचित वर्गों का समग्र विकास सुनिश्चित करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के सरकार के प्रयासों को प्रदर्शित करती है।
** नेता प्रतिपक्ष बोले, हमारे विरोध के बाबजूद सरकारी कर्मचारियों से जुड़े भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक पास होने से अनुबंध कर्मचारियों की वरिष्ठता और इंक्रीमेंट को लगेगा झटका ** कहा, दो साल में एक डॉक्टर तक भर्ती नहीं कर पाई सरकार और दुहाई उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं देने की दे रहे सुक्खू ** ओपीएस बहाल करने के नाम पर की वोट बैंक की राजनीति, अब कर्मचारियों को धोखा देने की तैयारी पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि झूठी गारंटियों के सहारे सत्ता में आई कांग्रेस सरकार का असली चेहरा अब सामने आ चुका है। पुरानी पेंशन बहाल करने के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करने वाली ये सरकार अब ऐसे पेंच फंसाकर कर्मचारियों का गला घोंटने जा रही है, जिससे लाखों कर्मचारी प्रभावित हो चुके हैं। आज सरकार के दबाब में कर्मचारी संगठन ज्यादा बोल नहीं पा रहे हैं लेकिन ये लावा जल्द फूटने वाला है। कई संगठन विरोध जता चुके हैं और सरकार कई कर्मचारी संगठनों की मनाने में जुटी है। हमारे विरोध के बाबजूद कांग्रेस सरकार ने बहुमत के नाम पर सरकारी कर्मचारियों से जुड़े भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक 2024 विधानसभा में पास कर दिया है इससे अब अनुबंध कर्मचारियों की सीनियोरिटी और इंक्रीमेंट को झटका लगेगा। जिन कर्मचारियों की सरकारी नियमित सेवा कम रही हो उनके वित्तीय लाभ कम हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि अनुंबध कर्मचारी भी पब्लिक सर्विस कमीशन और राज्य चयन आयोग का इंटरव्यू पास करके आते हैं। सरकार की पॉलिसी के तहत दो साल बाद इन्हें नियमित किया जाता है। इन कर्मचारियों का यह पीरियड सीनियोरिटी और अन्य लाभों के लिए कंसिडर हो इसका लाभ कर्मचारियों ने कोर्ट में जाकर लिया है, लेकिन आज इस संशोधन को लाकर सरकार उनके बेनिफिट को छीन रही है। ये बिल्कुल कर्मचारी विरोधी संशोधन है। इससे इस सरकार का कर्मचारी विरोधी चेहरा उजागर हो चुका है। जयराम ठाकुर ने कहा कि ये चाहे रेट्रोस्पेक्टिव हो या प्रोस्पेक्टिव, किसी भी स्तर पर संशोधन लाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। कोर्ट से निर्णय होने के बाद आप संशोधन विधेयक लाये हैं, जो ठीक नहीं है। आप बहुमत में है इसलिए आपने इस संशोधन को पास कर दिया लेकिन वो कर्मचारी फिर कोर्ट जाएंगे। सरकार जो पैसा बचाने की बात कर रही है उससे ज्यादा पैसा वकीलों को दिया जाएगा। जयराम ठाकुर ने कहा कि कभी मुख्यमंत्री कहते हैं हमने 31 हजार सरकारी नौकरियां दे दी और विधानसभा में जबाब दिया कि इनका प्रोसेस चला है। सच्चाई तो ये है कि इनमें अधिकांश भर्तियां हमारे समय शुरू हुई थीं और परिणाम अब निकाले जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि इस सरकार ने दो साल के अपने कार्य में एक भी डॉक्टर की भर्ती नहीं की है जबकि दुहाई रोज़ स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाब की दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो सरकार एक डॉक्टर तक भर्ती नहीं कर पाई हो वो कैसे स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर पाएगी ये चिंताजनक बात है।
** पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर दी थी दबिश राजधानी शिमला के सीमिट्री क्षेत्र में पुलिस ने किराए के मकान में चिट्टा तस्करी का मामला पकड़ा है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दबिश देकर आरोपियों को दबोचा।प्रारंभिक जांच में आरोपियों के कब्जे से 9.350 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है। पुलिस की दबिश के दौरान एक आरोपी मौके से भागने में कामयाब हो गया था जिसे बाद में पुलिस ने पकड़ लिया है। आरोपियों की पहचान त्रिलोक नेगी निवासी चिड़गांव रोहड़ू, सूरज प्रकाश निवासी मल्याणा शिमला और अनुपम निवासी रोहड़ू के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार स्पेशल सेल की टीम को शुक्रवार को शाम को गुप्त सूचना मिली की सीमिट्री क्षेत्र के एक मकान में चिट्टा बेचने का काम किया जा रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने मौके पर दबिश दी। इस दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को मौके पर ही पकड़ लिया, जबकि अनुपम मौके से भागने में कामयाब हो गया। पुलिस की टीम ने उसे कुछ समय के बाद ही दबोच लिया है। पुलिस अब मामले में यह पता करने की कोशिश कर रही है कि आरोपी चिट्टा कहां से लेकर आए थे और कितने समय से चिट्टा तस्करी के नेटवर्क से जुड़े हुए थे। एसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने बताया कि चिट्टा बेचने की सूचना मिली थी। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
मोहाली के सोहाना में शनिवार शाम को एक चार मंजिला इमारत गिर गई। इमारत के गिरते ही वहां अफरा-तफरी मच गई। कड़ी मशक्कत के बाद एनडीआरएफ की टीम ने एक महिला का शव मलबे के नीचे से निकाला। वहीं रविवार सुबह एक पुरुष का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान अंबाला के रहने वाले अभिषेक धनवाल के रूप में हुई है। भारतीय सेना और एनडीआरएफ के जवान बचाव अभियान में जुटे हैं। सेना के अनुसार, अभी मलबे में दो और शव दबे होने की संभावना है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार इमारत के साथ दूसरी इमारत की बेसमेंट का काम चल रहा था। बेसमेंट के लिए खुदाई की गई है। खुदाई किए जाने की वजह से इमारत की नींव हिल गई, जिससे बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। इमारत में जिम खोले गए थे। बताया जा रहा है कि मलबे के नीचे 10 से 15 लोगों के दबे होने की सूचना है। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव भी घटना स्थल पर पहुंचे हैं। वह स्थिति का जायजा ले रहे हैं। एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। मौके पर लोगों की खासी भीड़ लग गई है। पुलिस की तरफ से लोगों को आगे जाने से रोका गया है। घटना की सूचना मिलते ही मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह भी घटना स्थल पर पहुंचे हैं। कुलवंत सिंह का कहना है कि अभी राहत व बचाव का कार्य चल रहा है। एनडीआरएफ की टीमों को बुलाया गया है। वहीं पुलिस प्रशासन की तरफ से भी बचाव कार्य चलाया जा रहा है। घटना स्थल पर जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली) के सोहाना के पास एक बहुमंजिला इमारत के हादसे का दुखद समाचार मिला है। पूरा प्रशासन और अन्य बचाव कार्यों वाली टीमें मौके पर तैनात हैं। मैं प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हूं। प्रार्थना करते हैं कि कोई जान-माल का नुकसान ना हुआ हो, दोषियों पर कार्रवाई भी करेंगे। लोगों से अपील है कि प्रशासन का सहयोग करें।
शिमला: राजधानी में ओल्ड बस स्टैंड के साथ लगते कृष्णा नगर में शनिवार देर शाम को एक मकान में आग लग गई। इस घटना में एक मकान जलकर राख हो गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार ये मकान लोअर बाजार में एक कारोबारी का बताया जा रहा है, लेकिन काफी समय से ये खाली था। घटना शनिवार देर शाम 6:00 बजे के आसपास की है। जब शिमला के कृष्णा नगर में एक पुराने मकान में देखते ही देखते आग भड़क गई और पूरा मकान आग की चपेट आकर जलकर राख हो गया। बताया जा रहा है कि मकान पुराना था और वर्तमान समय में मकान में कोई नही रहता था, जिसके कारण घटना में किसी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि आग बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। ये मकान पुरानी लकड़ी से बना हुआ था, जिसके कारण चंद मिनटों में आग पूरे मकान में फैल गई। आग की लपटें उठते ही लोगों ने इसकी सूचना विभाग को दे दी। दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंचते ही आग बुझाने में जुट गई। दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद मकान में लगी आग पर काबू पाया और आस पास के घरों को भी नुकसान से बचा लिया गया। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को मेहली में आग लगने की घटना सामने आई थी, जबकि इससे पहले भी बस स्टैंड के समीप आग लगने का मामला सामने आया था। अब कृष्णा नगर में आग लगने का मामला सामने आया है। एसपी शिमला ने बताया कि, कृष्णा नगर में आग लगने का मामला सामने आया है आग पर काबू पाया लिया गया। आसपास के घरों को बचा लिया गया है।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में क्रिसमस और नए साल के जश्न की तैयारियां की जा रही हैं। वहीं, क्रिसमस और नए साल का जश्न मनाने के लिए सैलानी अब मनाली का रुख कर रहे हैं। वहीं, अटल टनल रोहतांग के जरिए सैलानी लाहौल घाटी भी पहुंच रहे हैं। ऐसे में सैलानियों को मूलभूत सुविधाएं मिल सके, इसके लिए प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन कुल्लू और लाहौल-स्पीति को निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने साफ तौर पर जिला प्रशासन कुल्लू और लाहौल-स्पीति को निर्देश दिए हैं कि अटल टनल के दोनों पोर्टल पर शौचालय की व्यवस्था की जाए और यहां पर सफाई कर्मचारी समेत अन्य कर्मचारियों के फोन नंबर भी दर्शाए जाएं, ताकि यहां पर सैलानियों को दिक्कत का सामना न करना पड़े। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि वो उत्तर पोर्टल अटल सुरंग, जंक्शन, कोकसर, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण सिस्सू और एसएडीए केलांग में संबंधित शौचालय के बाहर सफाई कर्मचारियों के नाम और मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश जारी करें। हिमाचल हाईकोर्ट ने उक्त शौचालयों के बाहर शिकायत संख्या के साथ-साथ वो दूरभाष नंबर प्रदर्शित करने के आदेश भी दिए गए, ताकि उस नंबर पर शिकायत दर्ज कराई जा सके। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने डीसी लाहौल-स्पीति को यह बताने का आदेश भी दिया कि मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर को बिजली क्यों नहीं दी जा रही है? कोर्ट कहा कि इन सेंटरों को जनरेटर के लिए एसएडीए द्वारा नौ लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई है। जो निश्चित रूप से प्रदूषण का ही कारण बनने जा रही है। गौरतलब है कि अटल-टनल के पास गंदगी रोकने के लिए सरकार ने स्वयं एक कमेटी का गठन किया है। कोर्ट ने अटल टनल के आसपास गंदगी को रोकने के लिए बनाए गए अथवा बनाए जाने वाले प्रावधानों की जानकारी मांगी थी। इसमें चेतावनी बोर्ड, डस्टबिन, पुरुषों व महिलाओं के लिए शौचालय और क्षेत्र को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे उपाय शामिल हैं।
हिमाचल में प्रचंड ठंड पड़ रही है। ताबों में माइनस 14 डिग्री के साथ प्रदेश के पांच जिलों में पारा शून्य से नीचे चला गया है। मैदानी इलाकों में घना कोहरा पड़ रहा है। कोहरे के चलते कुल्लू में शनिवार को तीसरे दिन भी उड़ानें नहीं हो सकीं। मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल में 23 और 24 दिसंबर को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात हो सकता है, लेकिन 27 दिसंबर को पूरे प्रदेश में बारिश और कई इलाकों में बर्फबारी होने के आसार हैं। प्रदेश में अगले छह दिनों तक शीतलहर जारी रहेगी। मैदानी इलाकों में 24 और 25 को घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। मंडी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और चंबा के कई इलाकों में पारा शून्य से नीचे पहुंच गया है। शनिवार को ताबों में इस सीजन में सबसे कम माइनस 14 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर में भी कोहरे के चलते जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मनाली, कल्पा, नारकंडा और सिस्सू सहित ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में 23 और 24 दिसंबर को बारिश बर्फबारी हो सकती है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट (पीडीएनए) के 9,977 करोड़ रुपये नहीं दिए तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह बात शनिवार को सदन में कही। वह इस संबंध में नियम 130 के तहत लाई गई चर्चा का जवाब दे रहे थे। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री के उत्तर के बीच हुई नोकझोंक के बीच विपक्ष नारेबाजी करता हुआ सदन से बाहर चला गया और बैठक में नहीं लौटा। उधर, शून्यकाल में भाजपा विधायक राकेश जंबाल की ओर से विधायकों की गाड़ियों पर झंडी लगाने का मामला उठाने के जवाब में सीएम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसको लेकर आगामी बजट सत्र में विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा राशि के मामले में वे दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मिलकर हिमाचल को उसका हक देने की मांग उठाएंगे। आग्रह के बावजूद अगर केंद्र सरकार राशि जारी नहीं करती है तो राज्य सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट जाने के बजाय कोई रास्ता नहीं बचेगा। सीएम ने कहा कि केंद्र से कोई खैरात नहीं मांगी जा रही है, बल्कि हिमाचल प्रदेश का अधिकार मांगा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने इतिहास की सबसे बड़ी आपदा को सहा है। सैकड़ों मौतें हो गईं। आपदा के बाद केंद्र सरकार की टीम आई और 9,977 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष क्षति का आकलन किया। अगर अप्रत्यक्ष तौर देखा जाए तो 12 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। केंद्रीय टीम ने नुकसान का जो आकलन किया है, पिछले एक साल से वही हिमाचल के अधिकार रूप में मांगा जा रहा है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि जयराम ठाकुर जब मुख्यमंत्री थे तो हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में पहले साल केंद्र से 11,431 करोड़ रुपये मिले। दूसरे साल 10,249 करोड़ और उसके बाद तीसरे साल 8058 करोड़ जारी किए गए। 2024-25 में 6258 करोड़ रुपये जारी हो रहे हैं। अगले साल तो यह घटकर 3257 करोड़ रुपये रह जाएगी। यानी यह 8000 करोड़ रुपये कम हो जाएंगे। सीएम ने कहा कि हिमाचल की जनता के साथ खड़े न होकर सदन में जो व्यवहार भाजपा ने किया है, वह निंदनीय है। अगर विपक्ष के लोगों ने दिल्ली साथ चलना है तो ठीक है, वरना नहीं भी चलना हो तो यह लोग जानें। प्रस्ताव चर्चा के लिए धर्मपुर के कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने लाया, जबकि विपक्ष की ओर से विपिन सिंह परमार ने चर्चा में भाग लिया। इससे पूर्व नेता प्रतिपक्ष जयराम ने कहा कि केंद्र सरकार के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव पहली बार लाया जा रहा है। उनकी बात को सुनते हुए स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने केंद्र से मांग के रूप में प्रस्ताव में संशोधन की बात कर इस पर चर्चा शुरू करवाई। शनिवार को तपोवन में शीत सत्र के अंतिम दिन शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक राकेश जंबाल के मामला उठाने पर मुख्यमंत्री ने इस पर स्थिति स्पष्ट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के समय में इसके बारे में मंजूरी दी गई थी। अब अगले सत्र में इसको लेकर चर्चा की जाएगी। विधायक जंबाल ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन हो चुका है। उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, जिला परिषद अध्यक्ष सहित कई अफसरों की गाड़ियों में झंडी लगी है। विधायकों को अपनी पहचान बतानी पड़ रही है, ऐसे में विधायकों की झंडी मिलनी चाहिए।
** घर में घुसकर किया था हमला जिला अदालत ने शनिवार को घर में घुसकर मारपीट करने और सामूहिक हिंसा के मामले में माैत मामले में चौपाल के 33 लोगों को दोषी करार देते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई। मारपीट और सामूहिक हिंसा में चौपाल निवासी नरवीर ठाकुर की जान गई थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग ने दोषियों को सजा सुनाते हुए शिकायतकर्ता वीरेंद्रा देवी को लगी चोटों के लिए 10 हजार मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सजा न्याय प्रशासन में जनता के विश्वास और समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के सिद्धांत को कायम रखेगी। जिला न्यायवादी मुक्ता कश्यप ने बताया कि अदालत ने धारा 148 के तहत 3 वर्ष, 440 में 3 साल, 325 के तहत 5 साल और 452 के तहत 7 साल की सजा सुनवाई।अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि नरवीर की मृत्यु या तो भीड़ की हिंसा के परिणामस्वरूप हुई होगी या उसके बाद पीछा करने के दौरान किसी कठोर वस्तु पर गिरने से। केस में किसी भी उचित संदेह से परे यह साबित नहीं होता है कि यह केवल आरोपीगण थे, जिन्होंने अवैध रूप से एकत्रित होने के साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए नरवीर की मृत्यु का कारण बना। पुलिस के मुताबिक चौपाल के तुइल गांव में 11 मार्च 2015 को कुछ लोग नरवीर के घर में घुस गए। नरवीर ने पत्नी और अपने बचाव में बंदूक निकाली। एक व्यक्ति ने नरवीर पर दरांती से हमला कर बंदूक छीनने का प्रयास किया। हाथापाई के दौरान बंदूक चल गई और गोली बंटू को लगी। गुस्साए लोग नरवीर को घसीटकर खेत ले गए। 12 को नरवीर का शव बरामद हुआ था।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज राजभवन में परागण करने वाले कीटों पर वैज्ञानिक शोध पर आधारित ‘‘इन्सेक्ट पॉलिनेटरस डॉयवर्सिटी’’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के जैव विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नीलम कुमारी, डॉ.वाई.एस. परमार औद्योनिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी बागवानी अनुसंधान केंद्र मशोबरा की वैज्ञानिक डॉ.संगीता शर्मा तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के डॉ.नितेश कुमार एवं डॉ. हीरेन्द्र सिंह बनियाल द्वारा लिखी गई है। उन्होंने राज्यपाल को अवगत करवाया कि पुस्तक में परागण करने वाले कीटों तथा कृषि एवं बागवानी में उनके महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि फलों की बेहतर पैदावार में परागण करने वाले कीट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा यह पुस्तक किसानों, बागवानी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के लिए लाभकारी साबित होगी। राज्यपाल ने बागवानों और किसानों के लिए शोध पर आधारित पुस्तक प्रकाशित करने के लिए सभी लेखकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि किसानों और बागवानों को जब खेतों में शोध आधारित बेहतर परिणाम मिलते हैं तो इससे शोध की सार्थकता साबित होती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वह भविष्य में भी इस तरह के प्रयास जारी रखेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा भी मौजूद थे।
संजौली मस्जिद मामले पर शनिवार को नगर निगम आयुक्त शिमला की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दाैरान मस्जिद कमेटी ने कोर्ट ने अवैध निर्माण तोड़ने के लिए समय मांगा। इस पर आयुक्त कोर्ट ने कमेटी को 15 मार्च तक मस्जिद का सारा अवैध निर्माण तोड़ने के आदेश दिए। आयुक्त कोर्ट ने पिछले आदेशों में मस्जिद की तीन अवैध मंजिलों को गिरने के आदेश दिए थे। अभी तक अवैध निर्माण तोड़ने का 50 फीसदी काम हुआ है। आयुक्त कोर्ट में मस्जिद की निचली मंजिलों को लेकर भी चर्चा हुई। मस्जिद कमेटी ने उनके कब्जे से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड पेश करने के लिए भी कोर्ट से समय मांगा है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के लिए पार्टी ने चुनाव करवाए थे। बीते रोज़ इसके परिणाम सामने आए है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई कार्यकारिणी बन चुकी है। ऐसे में कई युवाओं को कांग्रेस ने मौका दिया है। इसी कड़ी में विजय चौहान(विक्की) जिला शिमला के दूरदराज क्षेत्र कुपवी के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए है। विजय युवा है और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके है। विजय ने बताया कि वह अपनी इस नई जिम्मेवारी का बेहतर तरीके से निर्वहन करेंगे। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद किया है। विजय ने विशेष तौर पर चौपाल से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी रजनीश कीमटा का धन्यवाद किया है। बता दें कि हाल ही में हुए मुर्गा प्रकरण पर भी विजय ने विपक्ष पर निशाना साधा था। उन्होंने विपक्ष पर कुपवी क्षेत्र को बदनाम करने के आरोप लगाए थे।
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को आईजीएमसी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी से जुड़े विवाद का हल निकालने के आदेश जारी किए है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने वित्त सचिव को आदेश दिए हैं कि दो दिनों के भीतर याचिकाकर्ता मेसर्स कॉरपोरेट केयर और मेसर्स शिमला क्लीनवेज को देय राशि जारी करे। कोर्ट ने वित्त सचिव को इन आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट 24 दिसंबर 2024 को पेश करने के आदेश भी दिए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मेसर्स कॉरपोरेट केयर और मेसर्स शिमला क्लीनवेज के प्रति सरकार पर 30 नवंबर, 2024 तक क्रमशः 1,97,55,819 रुपये और 1,63,34,391 रुपये बकाया राशि है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को सूचित किया गया था कि आउटसोर्स कर्मचारियों को दो माह की सैलरी नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह संभवतः अंतर-विभागीय मुद्दे के कारण है कि वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। कोर्ट ने इसे अंतर-विभागीय मुद्दे से संबंधित मानते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को उक्त मुद्दे को हल करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि आईजीएमसी में पिछले दो माह से 132 ऑउटसोर्स कर्मचारी सैलरी से वंचित हैं। इन्हें 2 महीने से सैलरी नहीं मिली है। याचिकाकर्ता मेसर्स कॉरपोरेट केयर और मेसर्स शिमला क्लीनवेज का आरोप है कि सरकार उनके साथ हुए करार को बीच में ही छोड़ कर एचपीएसईडीसी के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती करना चाहती है। एकल पीठ ने मेसर्स कॉरपोरेट केयर और मेसर्स शिमला क्लीनवेज कंपनियों की याचिका 50,000 रूपये कॉस्ट के साथ खारिज कर दी थी। एकल पीठ ने कंपनियों पर तथ्यों को छुपाने और छेड़छाड़ वाले दस्तावेज के आधार पर कोर्ट को गुमराह कर अंतरिम आदेश की गुहार लगाने का दोषी पाया था। कंपनियों ने एकल पीठ के इस फैसले को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा शीतसत्र के अंतिम दिन पूर्व भाजपा सरकार के समय में खोले गए संस्थानों को बंद करने के विरोध में विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए वाकआउट कर दिया। संस्थानों को बंद करने पर सीएम के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। इससे पहले सदन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि जहां बच्चे नहीं हैं, वहां संस्थान बंद कर दिए। 1100 प्राइमरी स्कूल बंद किए गए। ऐसा नहीं है कि वहां पर बच्चे नहीं हैं, बच्चे घर बैठ गए हैं। आपने बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया। पहले भी मुख्यमंत्री रहे हैं। आप तार्किक होकर सोचें। बच्चे स्कूल की पढ़ाई से महरूम किए गए हैं। जयराम बोले, हम आपके ससुराल के विरोध में नहीं हैं। चंबा, पांगी सभी जगह की बात है। देहरा में तो सीएम का कार्यालय भी खुल गया। हमेशा कैंप ऑफिस होता है। मेरे सराज में भी कैंप ऑफिस था। पर आप भाभी जी से डर गए, खोलिए। लेकिन अन्य जगह कार्यालय बंद कर आपने पाप किया है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने जयराम को संक्षेप में अपनी बात पूरी करने को कहा। जयराम बोले- सच्चाई यह है कि सरकार का यह फैसला सही नहीं है। सुक्खू ने कहा कि नौ मिनट 18 सेकंड विपक्ष के नेता बोले। अगर ये जनता के सच्चे सेवक थे तो अंतिम वर्ष में 1 अप्रैल 2022 के बाद संस्थान खोलने की क्या जरूरत थी। हमारी तरह पहले खोल देते। इस अवधि के पहले के 2-4 संस्थान बंद किए। सीएम ने कहा कि 675 स्कूलों में जीरो एनरोलमेंट थी। इस पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। विधानसभा परिसर में जयराम ने कहा कि पूर्व में भाजपा सरकार की ओर से खोले 1865 संस्थान वर्तमान सरकार ने बंद किए। लेकिन वर्तमान दो साल में सरकार ने 37 संस्थान खोले और 103 की अतिरिक्त अधिसूचना जारी की।
** वित्त विभाग ने HRTC को दी कार्य करने की मंजूरी... हिमाचल प्रदेश में नाबार्ड के सौजन्य से 128 करोड़ से बनने वाले ई-चार्जिंग स्टेशन और ई-वर्कशॉप निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। वित्त विभाग ने एचआरटीसी को इसके लिए निर्माण कार्य करने की मंजूरी दे दी है। अब परिवहन विभाग का बस अड्डा विकास प्राधिकरण प्रदेशभर में बनने वाले ई-चार्जिंग स्टेशन और ई-वर्कशॉप की निर्माण प्रक्रिया शुरू कर पाएगा। पहले सरकार ने परिवहन विभाग को ई-चार्जिंग स्टेशन बनाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन विभाग ने इस कार्य को लेकर असमर्थता जताई थी। इस वजह से प्रोजेक्ट निर्माण को लेकर मामला काफी समय से उलझ हुआ था। अब वित्त विभाग ने दोबारा एचआरटीसी को कार्य के लिए अधिकृत कर दिया है। प्रदेश सरकार ने ई-चार्जिंग स्टेशनों के लिए 128 करोड़ रुपये की सहमति दी है। योजना में 90 फीसदी की राशि नाबार्ड से बतौर ऋण ली जाएगी, जबकि 10 फीसदी राशि का वहन प्रदेश सरकार करेगी। इसको लेकर नाबार्ड ने पहले चरण में 30 फीसदी रकम यानी करीब 35 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है, लेकिन पूरे मामले की वजह से प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी। गौर हो कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ई-वाहनों को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा ई-टैक्सियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट के तहत प्रदेशभर में ई-चार्जिंग स्टेशन का निर्माण किया जाएगा तो वहीं एचआरटीसी ई-वर्कशॉप का निर्माण करने जा रहा है। इसमें इलेक्ट्रिक बसों की मरम्मत की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसमें अधिकांश जिलों को शामिल किया गया है। योजना के तहत जिला शिमला में दो जगह ई-वर्कशॉप का निर्माण किया जाएगा। इसमें ढली और तारादेवी को शामिल किया गया है। यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस ई-वर्कशॉप का निर्माण होना प्रस्तावित है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसों की मरम्मत कार्य को लेकर एचआरटीसी संबंधित कंपनियों पर ही निर्भर है। नई इलेक्ट्रिक बसों को पांच साल की एमसी पर खरीदा जा रहा है, लेकिन यह समय अवधि खत्म होने के बाद निगम को खुद अपने स्तर पर ही बसों के रखरखाव और मरम्मत का कार्य करना होगा। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार सभी जिलों में ई-वर्कशॉप बनाने की योजना पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि रेडियोग्राफरों का वेतन बढ़ाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग में जल्द विभिन्न श्रेणियों की भर्तियां की जाएंगी। जिन संस्थानों में मशीनें हैं, वहां स्टाफ भी जल्द दिया जाएगा। प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आईजीएमसी में 133 और केएनएच में 42 प्रकार के स्वास्थ्य टेस्ट निशुल्क किए हैं। पूर्व सरकार के समय में 56 प्रकार के टेस्ट निशुल्क होते थे। कांग्रेस सरकार ने निशुल्क टेस्टों की संख्या बढ़ाकर 175 कर दी है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में लोग प्राइवेट लैब जा रहे हैं। भाजपा विधायक दीपराज और विनोद कुमार ने प्रश्नकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के कामकाज पर सवाल उठाया। विधायक दीपराज ने कहा कि आईजीएमसी में अधिकांश टेस्ट बाहर करवाने पड़ रहे हैं। इसके लिए लोगों को 1500 से लेकर दस हजार रुपये तक का शुल्क चुकाना पड़ रहा है। करसोग अस्पताल में कोई भी टेस्ट नहीं हो रहा है। करसोग में मशीनें उपलब्ध हैं। फिर भी मरीजों को टेस्ट करवाने के लिए बाहर भेजा जा रहा है। विधायक विनोद कुमार ने कहा कि निशुल्क टेस्ट करवाने की बात गलत है। सच्चाई यह है कि टेस्ट निशुल्क नहीं हो रहे। स्टाफ ही कहता है कि रिपोर्ट जल्दी चाहिए तो बाहर से करवा लो। सवाल में पूछी गई जानकारी नहीं मिलने पर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा और विपिन सिंह परमार ने नाराजगी जताई। रणधीर ने बीते एक साल के दौरान प्रदेश में खोले गए संस्थानों की जानकारी मांगी। लिखित जवाब में बताया गया कि सूचना एकत्रित की जा रही है। इस पर विधायक ने कहा कि सब जानते हैं कि नादौन, देहरा, हरोली और कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों में ही संस्थान खुले हैं। इसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सारी जानकारी है तो सवाल को बंद कर दिया जाए। दूसरे सवाल में परमार ने असुरक्षित भवनों को लेकर जानकारी मांगी थी। इसमें भी अभी सूचना एकत्र करने की जानकारी देने पर विधायक ने कहा कि छोटी-छोटी जानकारियां नहीं मिलना दुभार्ग्यपूर्ण है। सैनिक कल्याण मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने बताया कि प्रदेश में 1714 युद्ध हताहत सैन्य अधिकारी और जवान हैं। कांगड़ा जिला में सबसे अधिक 736 और इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के तहत नौ युद्ध हताहत सैन्य अधिकारी और जवान हैं। विधायक मलेंद्र राजन के सवाल का जवाब देते हुए शांडिल ने बताया कि युद्ध में मृत्यु को प्राप्त होने वाले वीर सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को सरकारी कागजात में भारत सरकार की ओर से युद्ध हताहत घोषित किया जाता है। मरणोपरांत के निकटतम परिजनों को अनुग्रह राशि, एचआरटीसी की बसों में निशुल्क बस यात्रा की सुविधा, युद्ध विधवाओं की पुत्रियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता और एक परिजन को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार की सुविधा भी दी जा रही है। कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि धर्मपुर बस डिपो की हालत खराब हो गई है। पूर्व सरकार के समय में यहां जुगाड़ से बसें दी गई थीं। कुल 51 बसों में से 36 की अवधि पूरी हो चुकी है। दो बार चलती बसों के टायर खुल चुके हैं। डिपो में सिर्फ छह नई बसें हैं। स्टाफ के छुट्टी पर जाने से सेवाएं ठप हो जाती है। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि जल्द 700 नई बसों की खरीद की जा रही है। आवश्यकता अनुसार धर्मपुर को भी बसें दी जाएंगी। मैं स्वयं धर्मपुर का दौरा कर स्थिति का जायजा भी लूंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसहारार पशुओं और बंदरों के लिए नीतिगत बदलाव कर उचित कदम उठाए जा रहे हैं। बेसहारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए समाज को भी आगे आना चाहिए। मैंने खुद एक स्ट्रे डॉग को गोद लिया है। उन्होंने कहा कि बंदरों के लिए जंगलों में फलदार पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि जंगलों में 60 फीसदी तक फलदार पौधे लगाए जाएं, ताकि बंदरों को आबादी क्षेत्रों में आने से रोका जा सके। प्रदेश में 1.87 लाख बंदरों की नसबंदी की गई है। उन्हाेंने लोगों से रिहायशी क्षेत्रों में कूड़ा व बचा हुआ भोजन खुले स्थान पर न फेंकने का आह्वान भी किया। उधर, नाहन से कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में बंदरों और आवारा पशुओं ने समस्याओं को बढ़ा दिया है।
हिमाचल प्रदेश में करीब दो महीने से सूखे जैसे हालात हैं। बारिश, बर्फबारी न होने से सेब के बगीचे सूखे की चपेट में हैं। बगीचों में चिलिंग ऑवर्स पूरे होने का संकट हो गया है। मौसम ऐसा ही रहा तो सेब उत्पादन गिर सकता है। बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र मशोबरा ने इसे देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र मशोबरा के सह निदेशक डॉ. दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि सेब के पौधों के लिए 7 डिग्री से कम तापमान में 800 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। सूखे के कारण इस सीजन में अगर चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं होते तो फ्लावरिंग पर प्रभाव पड़ सकता है। एक समान फ्लावरिंग नहीं होगी और कमजोर फ्लावरिंग से फूल झड़ने की समस्या पेश आ सकती है। इससे सेब उत्पादन प्रभावित हो सकता है। अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश और बर्फबारी की आवश्यकता है। बागवान इस समय बगीचों में काट-छांट कर सकते हैं। नए बगीचे या फलदार पौधे लगाने के लिए जमीन में पर्याप्त नमी नहीं है। दिसंबर में बगीचों मे फॉस्फोरस और पोटाश खाद डाली जाती है, जिससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और जड़ें मजबूत होती हैं। नमी न होने के चलते खाद डालने का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। सिंचाई या नमी के अभाव में उर्वरकों का प्रयोग करने से बचें और नमी को बचाए रखने के लिए मल्चिंग करें। शुष्क मौसम में बगीचों में वूली एफिड का प्रकोप बढ़ सकता है। कीटों की संख्या नियंत्रित रखने के लिए वूली एफिड, स्केल, टहनियों के छेदक कीट तथा माइट ग्रसित टहनियों को काट कर नष्ट कर दें। घाव पर ताजा गोबर, गीली मिट्टी या चौबाटिया पेस्ट लगाएं। बोरर तथा वूली एफिड ग्रसित पौधों के तौलियों में जड़ों को खोद कर जड़ छेदक की सुंडियों को एकत्र कर डरमेट (800 मि. ली./200 ली. पानी) से उपचारित करें। नया पौधा लगाने से पहले उसे भी डरमेट के घोल में डुबोकर ही लगाएं। सूखे से पौधे कैंकर की चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचाव के लिए तने पर बोर्डो पेंट या ताजे गोबर और मिट्टी का लेप लगाएं, ताकि सूर्य की किरणों से होने वाले नुकसान को बचाया जा सके। कांट-छांट के बाद बोर्डो मिश्रण का स्प्रे जरूर करें। नये पौधे रोपित करने के तुरंत बाद सिंचाई जरूर करें। प्राकृतिक खेती करने वाले किसान जीवामृत को फोलीयर स्प्रे के रूप में 10-20 प्रतिशत और 15 दिनों के अंतराल में ड्रेंचिंग जरूर करें।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार से वन संरक्षण अधिनियम 1980 (एफसीए) में संशोधन करने के लिए सरकारी संकल्प प्रस्ताव लाया। प्रस्ताव को पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने ध्वनि मत के साथ पारित किया। इस भाजपा विधायकों ने एक कमेटी बनाकर इस सिफारिश को तैयार करने की बात कही। राजस्व मंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव को लाने का मकसद आपदा के दौरान खेती योग्य भूमि बह जाने पर तबादले में सरकारी वन भूमि व लघु एवं सीमांत किसानों को 10 बीघा तक सरकारी वन भूमि खेती करने के लिए देना था। कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार यदि 1980 के तहत राहत दे तो हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावित और भूमिहीन लोगों को खासी राहत मिल सकती है। वहीं, विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि संशोधन बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि बोह वैली में पिछले दिनों एक आपदा आई थी। इसमें 24 लोगों की मौत हो गई थी और जो बच गए थे, वे भूमिहीन हो गए थे। आपदा में भूमिहीन हुए इन लोगों को राहत देने के लिए सरकार जमीन देना चाहती है, लेकिन एफसीए के नियम उनके आड़े आ रहे हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, विधायक नीरज नैय्यर, भुवनेश्वर गौड़, बलवीर वर्मा, चंद्र शेखर और सुखराम चौधरी ने भी विचार रखे। विधायक बलवीर वर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार को पहले आंकड़ा तैयार कर लेना चाहिए कि आपदा के कारण कितने लोग बेघर हुए हैं और कितने भूमिहीन हैं। रणधीर शर्मा ने कहा कि एफसीए संशोधन के लिए भेजे जाने वाले प्रस्ताव में भागड़ा बांध सहित अन्य कारणों से विस्थापित होने वाले लोगों को भी जमीन देने का प्रावधान करवाने की बात रखी जाए।
** दो जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी हिमाचल में पांच जिले शीतलहर की चपेट में हैं। कड़ाके की ठंड पड़ने से सड़कों समेत नालों में पानी जम रहा है। वहीं, तीन जिलों में भीषण कोहरा पड़ रहा है। कोहरे के कारण शुक्रवार को कुल्लू के भुंतर हवाई अड्डे से एक भी उड़ान नहीं हो पाई। न्यूनतम तापमान में गिरावट आने से राजधानी शिमला की सड़कों पर भी पानी जम रहा है। प्रदेश के 9 क्षेत्रों में न्यूनतम पारा माइनस में पहुंच गया है। उधर, मौसम विभाग ने सात जिलों में अगले चार दिन भीषण शीतलहर का ऑरेंज और दो जिलों में तीन दिन घना कोहरा रहने का येलो अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को कुल्लू, बिलासपुर और मंडी जिले में कोहरे का कहर रहा। कुल्लू जिले के भुंतर एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी कम होने से शुक्रवार को दिल्ली से भुंतर और भुंतर से अमृतसर की दोनों उड़ानें रद्द हो गईं। उड़ानें रद्द होने से विंटर टूरिस्ट सीजन में पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा है। भुंतर एयरपोर्ट अथॉरिटी के निदेशक सिद्धार्थ कदम्ब ने कहा कि विजिबिलिटी कम होने से दो दिन से हवाई उड़ानें नहीं हो पाईं। ऊना, मंडी, हमीरपुर, चंबा और बिलासपुर में शीतलहर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने बिलासपुर, मंडी, हमीरपुर, ऊना जिले कांगड़ा, चंबा, सोलन के कुछ स्थानों पर अगले चार दिन के लिए रात को भीषण शीतलहर की चेतावनी जारी है। जबकि मंडी की बल्हघाटी, बिलासपुर में गोबिंद सागर क्षेत्र में तीन दिन घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। 23 दिसंबर को प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में एक दो-स्थानों और 26 दिसंबर को मध्य पर्वतीय और उच्च क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। हालांकि, मैदानी क्षेत्रों में 26 तक पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहेगा।
हिमाचल विधानसभा में शुक्रवार को विपक्ष के कड़े विरोध और तीखी नोकझोंक के बीच हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक, पंचायती राज संशोधन विधेयक और पुलिस अधिनियम में संशोधन विधेयक समेत चार विधेयक पारित किए गए। वहीं, भूजोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक पारित होते ही अब भोटा अस्पताल की 30 एकड़ जमीन हस्तांतरित हो सकेगी। अनुबंध कर्मियों के विधेयक पर मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रुटि को दुरुस्त किया गया है। अनुबंध वालों को नियमित कर्मचारियों के समान मानने से सरकार पर बोझ पड़ेगा और इससे वरिष्ठता भी प्रभावित होगी। उधर, विपक्ष ने कहा कि संशोधन विधेयक को पिछले तिथि से लागू करना ठीक नहीं, इससे पदोन्नत हो चुके अनुबंध कर्मी प्रभावित होंगे।भर्ती एवं सेवा शर्तें संशोधन विधेयक में नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की सेवा शर्तों को अलग किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि अनुबंध नीति के अनुसार नियमित और अनुबंध सेवाओं में अंतर होता है। अनुबंध कर्मियों की सेवा शर्तों को नियमित से अलग तरीके से प्ररिभाषित करना आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि अनुबंध कर्मियों को नियमित कर्मियों के समान मानना राज्य के खजाने पर भारी बोझ डालेगा और नियमित कर्मियों की वरिष्ठता को भी प्रभावित करेगा। सुक्खू ने कहा कि त्रुटि के कारण नियमित कर्मचारियों को डिमोट करने की नौबत आ रही थी, जो नहीं आनी चाहिए। कुछ लोग कोर्ट जा रहे हैं और वहां से भी निर्णय आ रहे हैं कि लाभ पहले की तिथि से दिया जाए, ऐसे कर्मियों की संख्या ज्यादा नहीं है। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि 12 दिसंबर 2003 के बाद जो भी अनुबंध पर लगे हैं, सुप्रीम कोर्ट तक हारने के बाद उनके बारे में विधेयक लाया गया है। यह संशोधन पिछली तिथि से लागू हो रहा है। अनुबंध कर्मचारी इससे परेशान होंगे। उनकी पदोन्नति का क्या होगा। सरकार अगर इसे अगली तिथि से लागू करने की बात करती है तो भी इस पर विचार किया जा सकता है। इसे वापस लिया जाए। भाजपा विधायक जीतराम कटवाल ने भी कहा कि प्रावधान को पिछली तिथि से लागू न किया जाए। विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि इसे प्रतिष्ठा का सवाल न बनाकर फैसले को वापस लिया जाए। भाजपा विधायक हंसराज ने भी कहा कि विधेयक पर पुनर्विचार होना चाहिए। हिमाचल विधानसभा में धर्मार्थ संस्थाओं के लिए 30 एकड़ जमीन हस्तांतरित करने का विधेयक पारित हो गया। भूजोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2024 पर पहले सदन में चर्चा हुई। विपक्ष ने कहा कि इसे पारित करते समय जल्दबाजी न की जाए। राधास्वामी सत्संग संस्था की मदद होनी चाहिए, मगर विधेयक को विचार-विमर्श के लिए पहले विधानसभा की सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की नोकझोंक के बीच विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। संशोधन विधेयक के पारित होने और इसके कानून बनने के बाद राधास्वामी सत्संग ब्यास भोटा अस्पताल और इसकी जमीन जगत सिंह सेवा ट्रस्ट को हस्तांतरित कर सकेगा। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने चर्चा के दौरान कहा कि संस्था और संगठन से ऊपर मेरे लिए प्रदेश है। संस्था के लिए पूरा आदर है, पर विधेयक को पारित करने से पहले सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। विधेयक के पारण के बाद मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक दल का धन्यवाद किया और कहा कि भाजपा के विधायकों ने इसका समर्थन नहीं किया। एक तरह से साइलेंट विरोध किया। सेलेक्ट कमेटी को भेजने की बात करना भी एक तरह से विराेध करना है। यह दुख की बात है। सूक्खू ने कहा कि उनके लिए हिमाचल के हित सर्वोपरि हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह केवल एक समय के लिए प्रावधान है। कोई भी धार्मिक, आध्यात्मिक या चैरिटेबल संस्था इसे केवल ऐसे ही कार्यों के लिए 30 एकड़ तक ही दूसरी उसी तरह की संस्था को जमीन हस्तांतरित कर सकेगी। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा भी चाहती है कि राधास्वामी ब्यास संस्था की समस्या का समाधान होना चाहिए, मगर इस कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जयराम ठाकुर ने कहा कि राधास्वामी संस्था ने कोविडकाल में बढ़िया किया है, मगर इससे अन्य संस्थाओं की ओर से दुरुपयोग करने की संभावना है। तीन सरकारों में धूमल, वीरभद्र और उनके समय भी मामले में जल्दबाजी नहीं की गई। पिछली भाजपा सरकार में यह मामला मंत्रिमंडल तक आया था, वहीं लंबित हो गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि कि हिमाचल के हितों को नहीं बेचा जाएगा। सरकार एक रुपये में किसी उद्योगपति को जमीन नहीं दे रही है, जैसा पिछली सरकार में हुआ। वह नेक काम करने वाली संस्थाओं की मदद कर रहे हैं।
राज्य सरकार की अनुमति से ही ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा सकेगा। कांस्टेबलों का काडर भी अब राज्य स्तर का होगा। भर्ती राज्य पुलिस बोर्ड करेगा। इस संबंध में विपक्ष के विरोध पर भी शुक्रवार को पुलिस विधेयक पारित हो गया। हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम में संशोधन पर विधेयक को पारित करने से पहले चर्चा लाई गई। इस पर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने लोक सेवक को किसी भी कार्य पर ड्यूटी करने के दौरान गिरफ्तार करने से पहले सरकार की मंजूरी लेने की धारा डालने पर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस अधिकारी अपना काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। त्रिलोक जम्वाल ने कहा कि पोक्सो एक्ट के तहत अगर किसी कर्मचारी को गिरफ्तार करना होगा तो क्या सरकार को पूछना होगा कि उसे गिरफ्तार करें कि नहीं। क्या यह व्यवस्था किसी विशेष व्यक्ति को लाभ देने के लिए तो नहीं किया जा रही है। सीएम ने कहा कि भाजपा के लोग कर्मचारियों के हितों में ही नहीं है। इससे यह जाहिर होता है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि रिश्वत, खून जैसे संगीन मामलों में गिरफ्तारी करने से संबंधित मामलों में गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं होगी। ये ऐसे मामलों के लिए है कि कार्यालय में कोई एक अधिकारी द्वेष भावना से किसी कर्मचारी के खिलाफ कुछ गलत कार्रवाई करे तो ही यह प्रावधान लागू होगा। इसका एसओपी आएगा। उसमें स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे कई मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इसमें सरकार की अनुमति से ही गिरफ्तारी का प्रावधान होगा। सीएम सुक्खू ने कहा कि रणधीर शर्मा काल्पनिक बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल कर रहे हैं। विजिलेंस मैन्युअल को नहीं बदला गया है। कई बार अधिकारी द्वेष भावना से एफआईआर दर्ज कर लेते हैं। हिमाचल में अब 25 हजार की कम संख्या होने पर भी जिला परिषद वार्ड बनेंगे। इसके लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शीत सत्र में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित करने का प्रस्ताव रखा। इससे पहले विधेयक पर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने चर्चा में भाग लिया और उन्होंने जिला परिषद बनाने के लिए न्यूनतम जनसंख्या जाहिर नहीं करने पर सवाल उठाए। भाजपा विधायक ने कहा कि जिला परिषद वार्ड बनाने के लिए संख्या 25 हजार से ऊपर ही होनी चाहिए। जिस विधेयक को सरकार लाई है, उसमें यह तय नहीं किया गया है कि प्रदेश में जिला परिषद वार्ड बनाने के लिए लोगों की न्यूनतम संख्या कितनी हो। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार विधेयक इसलिए ला रही है, ताकि जनजातीय क्षेत्रों में भी जिला परिषद के वार्डों का गठन किया जा सके। चर्चा के बाद विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
हिमाचल में उपभोक्ताओं को सस्ते राशन के डिपुओं से खाद्य तेल खरीदने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। रेट पर सहमति न बनने पर सरकार ने टेंडर रद्द कर दिया है। अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। हिमाचल में दो माह से उपभोक्ताओं को तेल नहीं मिला है। इधर, सरकार की ओर से दावा किया गया है कि अगले महीने टेंडर प्रक्रिया पूरी करके उपभोक्ताओं को तीन महीने का तेल एक साथ दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश में साढ़े 19 लाख राशन कार्ड धारक हैं। दो माह से डिपुओं में तेल न होने से उपभोक्ताओं को बाजार का रुख करना पड़ रहा है। बाजार में सरसों तेल 160 से 200 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। इस माह विभाग की ओर से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। इससे उपभोक्ताओं को जल्द तेल मिलने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन रेट अधिक होने पर सरकार ने टेंडर रद्द दिया। अब खाद्य आपूर्ति निगम ने नए सिरे से तेल टेंडर के लिए कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की है। सरसों तेल के लिए 3 और रिफाइंड तेल के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 4 जनवरी निर्धारित की है। विभाग का दावा है कि निविदाएं आने के बाद अगर प्रक्रिया जल्द पूरी हुई तो उपभोक्ताओं को तीन महीने का तेल एक साथ देंगे। उधर, खाद्य आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल ने बताया कि पुराना टेंडर रद्द कर दिया है। अब नए सिरे से तेल के कंपनियों से निविदाएं मांगी गई हैं। उपभोक्ताओं को एक साथ तीन महीने तेल का कोटा दिया जाएगा।
** विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायक दल का प्रदर्शन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने आज विधानसभा परिसर तपोवन धर्मशाला, जिला कांगड़ा में भाजपा के केंद्रीय वरिष्ठ नेता द्वारा संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा पर डॉ.बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाया और कहा कि संविधान निर्माता के अपमान पर उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा ‘‘संविधान निर्माता के बारे में जो अपशब्द कहे गए, वो गलत हैं और कांग्रेस पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विविधता में एकता का देश है और बाबा साहेब ने देश के सामने समानता का विचार दिया, जिससे देश में लोकतंत्र की नींव मजबूत हुई। उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने भी भाजपा के वरिष्ठ नेता के बयान की निंदा करते हुए कहा कि वह सत्ता के नशे में इतना चूर हो गए हैं, कि देश को संविधान देने वाले बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान कर रहे हैं। विधायक सुरेश कुमार ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस पहले भी दलित समुदाय की विरोधी थी और आज भी विरोधी है। यही भाजपा का असली चेहरा है। इस प्रदर्शन में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य और कांग्रेस के विधायक शामिल हुए।
आज शिक्षित बेरोज़गार संघ हिमाचल प्रदेश द्वारा हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा 1लखा सरकारी नौकरी और सरकारी स्कूलो में गेस्ट अध्यापक भर्ती करवाये जाने के निर्णय आउटसोर्स भर्ती के खिलाफ तपोवन शीतकाल सत्र धर्मशाल के बाहर बेरोजगार युवाओं के धरना प्रदर्शन में शामिल हुए। शिक्षित बेरोज़गार संघ हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार द्वारा गेस्ट अध्यापक की भर्तिया करवाने के विरोध में शिमला तपोवन शीतकाल सत्र धर्मशाल के बहार धरना प्रदर्शन किया शिक्षित बेरोज़गार संघ अध्यक्ष बाल कृष्ण मानना है की प्रदेश सरकार छात्र विरोधी और युवा विरोधी निर्णय लेकर लगातार प्रदेश सरकार युवाओ को बेरोजगारी की और धकेल रही है, जिसके कारण प्रदेश के युवाओं में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश सरकार ने दो साल पूरे होने का जश्न पूरी धूमधाम से बनाया, लेकिन युवाओं ने जिस मंशा से प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अव्यवस्था से तंग आकर प्रदेश में कांग्रेस का समर्थन किया था आज इसी बात से तंग आकर खुद को ही कोस रहे हैं। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर युवाओं व छात्रों को बड़ी तेजी के साथ बेरोजगारी के गर्त में धकेला जा रहा है। शिक्षित बेरोज़गार संघ हिमाचल प्रदेश अध्यक्ष बाल कृष्ण ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रदेश में पूर्व भाजपा सरकार की तरह युवा विरोधी नीतियां लाकर लगातार प्रदेश को पीछे धकेलने का काम कर रही है। शिक्षित बेरोज़गार संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा लाई गई गेस्ट अध्यापक की नीति का कड़े शब्दों में विरोध करती है। क्योंकि वर्ष 2013 में बिल्कुल इसी तर्ज पर स्कूल में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए SMC के माध्यम से हजारों युवाओ को भरा गया था लेकिन सालों से उन लोगों का शोषण ही हुआ और अब जाकर उन लोगो के लिए नियमित भर्ती में 5 प्रतिशत आरक्षण दिया गया और कुछ ही लोगो को नियमित किया गया। बिल्कुल ऐसा ही गेस्ट टीचरों के साथ भी होगा। ये उन तमाम युवाओं के साथ धोखा है जो सालों से सपने संजो कर मेहनत कर रहा है। शिक्षित बेरोज़गार संघ हिमाचल प्रदेश सरकार के निर्णय का विरोध करती है, जिसमें गेस्ट टीचर नियुक्त किए जा रहे हैं, जबकि प्रदेश में नियमित अध्यापको की नियुक्ति की जानी चाहिए। यह निर्णय NEP-2020 के कार्यान्वयन का हिस्सा है, जो बिना किसी सही योजना और विचार के लागू किया जा रहा है। यह नीति न केवल शिक्षा के स्तर को गिरा रही है, बल्कि हमारे राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रही है। इसलिए, शिक्षित बेरोज़गार संघ द्वारा तत्काल गेस्ट टीचर नीति की समाप्ति और NEP-2020 के वर्तमान रूप में कार्यान्वयन की वापसी की मांग करती है। राज्य सरकार को सरकारी स्कूलों में सभी खाली पदों में स्थाई भर्तिया जल्द से जल्द करवाने की जरूरत एसएफआई HPRCA के माध्यम से योग्य और स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। लेकिन बीते दो सालों में सरकारी भर्तियों में ग्रहण लगा है राज्य चयन आयोग भी दो साल से बंद पड़ा था परन्तु कुछ दिनों पहले से पुराने भर्तियों के परिणाम निकाले जा रहे है। इन परिणामों के लिए भी प्रदेश के युवाओं को कई दिनों तक आंदोलन करने पड़े उसके बाद इन परिणामों को घोषित किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा पुरानी स्वीकृत भर्तियों को निरस्त कर दिया गया है और आउटसोर्स के नाम पर धांधलियों को अंजाम दिया जा रहा है। शिक्षित बेरोज़गार संघ यह मांग करती है की जो प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में गेस्ट अध्यापक भर्ती करने का निर्णय लिया है उसे वापिस लिया जाए और प्रदेश सरकार से यह भी मांग करती है की छात्र व युवा विरोधी इस पालिसी को न अपनाया जाए और गेस्ट टीचर और आउटसोर्स के बजाय नियमित भर्तीया करवाई जाए। ताकि प्रदेश के युवाओं को स्थाई रोजगार मिल सके।
MS राहुल राव बोले, उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद होगी मामले में कार्रवाई... हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के IGMC अस्पताल में सफाई कर्मियों ने वेतन न मिलने पर प्रदर्शन किया। सफाई और अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों को पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला, जिससे वे काफी परेशान हैं। महिला कर्मचारी भी इस समस्या से जूझ रही हैं। वेतन न मिलने पर कर्मचारियों ने अस्पताल गेट के बाहर काले रिबन बांधकर विरोध जताया।सफाई कर्मियों ने चेतावनी दी है कि अगर 23 दिसंबर तक उनका बकाया वेतन नहीं मिला, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। इस आंदोलन में सचिवालय घेराव, डीसी ऑफिस तक मार्च और रिज पर गांधी प्रतिमा के नीचे हड़ताल की जाएगी। इस मामले पर IGMC अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट राहुल राव ने कहा कि अस्पताल में नई इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर शुरू करने के लिए कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने इस मुद्दे पर संबंधित कंपनी से बात की है।राहुल राव ने कहा कि अब तक 10 महीने का वेतन दिया जा चुका है, लेकिन 2 महीने का वेतन बकाया है। इसी दौरान कंपनी ने मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा दिया है, और इस पर सुनवाई होनी है। उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। साल 2003 से यह व्यवस्था लागू होने जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस संदर्भ में सदन के पटल पर हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा की शर्तें विधेयक रखा। वीरवार को सदन में चर्चा के यह विधेयक पारित होगा। इस विधेयक को लाने के पीछे एक प्रमुख चिंता राज्य पर पड़ने वाला संभावित वित्तीय बोझ है। अनुबंध सेवाकाल का लाभ देने से कर्मचारियों को न केवल अतिरिक्त संसाधनों का भारी आवंटन करना पड़ेगा, बल्कि पिछले 21 वर्षों से अधिक समय से वरिष्ठता सूची में भी संशोधन करना होगा। राज्य की कांग्रेस सरकार इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश के कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। विधेयक पारित होने के बाद कर्मचारियों को ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नहीं मिलेंगे। कर्मचारियों की वरिष्ठता अब उनके नियमित होने के बाद तय की जाएगी। अनुबंध सेवाकाल को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए हैं जिनकी वरिष्ठता को लेकर पहले अदालत से आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों के चलते राज्य खजाने पर बोझ बढ़ने की संभावना थी। विधेयक के अनुसार बिल का उद्देश्य नियमित सरकारी कर्मचारियों व अनुबंधित नियुक्तियों के हितों के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। मुख्यमंत्री की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है कि यह विधेयक भारत के संविधान के अनुच्छेद-309 से अधिकार लेता है, जिसके तहत सार्वजनिक कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को नियंत्रित किया जाता है। हिमाचल में अनुबंध आधार पर नियुक्तियां 2003 में शुरू हुईं, जिसमें नियुक्ति पत्रों में सेवा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख किया गया। कर्मचारियों को यह अवगत कराया गया था कि अनुबंध के तहत उनका कार्यकाल वरिष्ठता या नियमित कर्मचारियों को मिलने वाले अन्य लाभों के लिए नहीं गिना जाएगा। इसके बावजूद अनुबंध नियुक्तियों को भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शामिल करने से यह धारणा बनी कि ऐसी नियुक्तियां नियमित रोजगार के बराबर हैं। विधेयक के अनुसार अनुबंध के आधार पर नियुक्ति करने का उद्देश्य उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान मानने का कभी नहीं था। उनकी सेवा शर्तें उनकी ओर से हस्ताक्षरित समझौतों से नियंत्रित होती हैं और इस प्रकार वे नियमित नियुक्तियों के समान सार्वजनिक सेवाओं का हिस्सा नहीं हैं। सरकार के उच्च अधिकारियों ने बताया कि कोर्ट के माध्यम से कई कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता लाभ देना पड़ा है। रोजाना इस प्रकार के मामले कोर्ट में लग रहे हैं। ऐसे में सरकार को विधेयक लाकर इस व्यवस्था को बंद करना पड़ रहा है। ताज मोहम्मद बनाम लेखराज केस ने सरकार की इन दिनों परेशानी बढ़ाई हुई है। विधेयक पारित होने के बाद अनुबंध सेवाकाल से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राज्य विधानसभा के शीत सत्र के पहले दिन बुधवार को सदन में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2024 पेश किया। 1972 के लैंड सीलिंग एक्ट में संशोधन के रूप में इस विधेयक को प्रस्तुत करने के बाद यह आज पारित किया जा सकता है। इसके तहत अब धार्मिक और चैरिटी के लिए 30 एकड़ जमीन या भूमि पर बने ढांचे को हस्तांतरित किया जा सकेगा। अगर नियमों की अवहेलना की गई तो सरकार ऐसी जमीन या इस पर बनी संरचना को अपने कब्जे में ले लेगी। इस संशोधन विधेयक के उद्देश्यों में सरकार ने स्पष्ट किया है कि राधास्वामी सत्संग ब्यास पूरे देश में अपना क्रियाकलाप चलाने वाला एक धार्मिक और आध्यात्मिक संगठन है। इसने राज्य में नैतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा के कई केंद्र स्थापित किए हैं। इस संस्था ने हमीरपुर जिला के भोटा में एक अस्पताल भी स्थापित किया है। यह लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्ति कर रहा है। इस संगठन के पास लैंड सीलिंग एक्ट के तहत अनुमानित सीमा से अधिक जमीन है, जिसे अधिनियम की धारा पांच के खंड -झ के उपबंध के तहत छूट दी गई है। राधास्वामी सत्संग ने कई बार सरकार से अनुरोध किया है कि उसे भोटा चैरिटेबल अस्पताल की भूमि और भवन को चिकित्सा सेवाओं के लिए बेहतर प्रबंधन को जगत सिंह मेडिकल रिलीफ सोसाइटी को हस्तांतरित करने की अनुमति दी जाए। इसे इसका एक सहयोगी संगठन कहा गया है। मगर धारा पांच का खंड झ इसमें रोक लगाता है। ऐसे में कुछ शर्तों के साथ हस्तांतरण की अनुमति सरकार कुछ शर्तों के साथ देगी। इसके लिए धारा पांच का खंड झ में संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
** सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी हिमाचल प्रदेश में मुर्गा प्रकरण पर सियासत गरमा गई है। मामले में धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें कुछ मीडिया कर्मी भी शामिल हैं। इसके विरोध में गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की अगवाई में विपक्ष ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। इस दाैरान नेता प्रतिपक्ष सहित भाजपा विधायकों ने हाथों में मुर्गे के पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। विपक्ष ने भाजपा विधायक और मीडिया पर एफआईआर दर्ज करना शर्मनाक बताया। साथ ही वन्यजीव अधिनियम में मामला दर्ज कर जांच की मांग उठाई। पत्रकारों से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि सीएम के कुपवी दाैरे के दाैरान रात्रि भोज के मेन्यू में 12 नंबर पर जंगली मुर्गे का भी जिक्र था। सीएम ने डिनर के दाैरान खुद जंगली मुर्गे का जिक्र किया। कहा कि जंगली मुर्गा जंगल में ही मिलता है। मामले में सरकार ने कई स्पष्टीकरण देने की बातें हुईं। लेकिन हैरानी बात है कि सीएम के डिनर वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर पर विधायक व कुछ मीडिया के लोगों पर एर्फआईआर दर्ज की गई, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। मुर्गा प्रकरण में कुपवी की कुलग पंचायत की प्रधान सुमन चौहान और नीटू परमार की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। शिकायत में महिला प्रधान ने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और कई लोगों ने व्यक्तिगत हैंडल पर फर्जी मेन्यू शेयर किया। इसकी वजह से इलाके के पारंपरिक भोजन और संस्कृति को नुकसान पहुंचा है। इस तरह का दुष्प्रचार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि 13 दिसंबर को उनके गांव टिक्कर में विशेष अतिथि आए थे, जिनके स्वागत के लिए गांव की महिलाओं ने पारंपरिक भोजन तैयार किया गया था। लेकिन एक फर्जी मेन्यू शेयर किया गया। पुलिस ने शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा-353 और 356 के तहत केस दर्ज किया है। गाैरतलब है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू 13 दिसंबर को कुपवी इलाके के दौरे पर थे। रात को उन्होंने टिक्कर गांव में विश्राम किया था। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ता के घर पर डिनर किया था। डिनर का मेन्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। इसमें पहाड़ी मुर्गे का भी जिक्र था। यहां तक कि सीएम भी मुर्गा परोसने के बात कहते हुए नजर आए थे। सीएम का वीडियो और मेन्यू काफी ज्यादा वायरल हुए थे। हालांकि, सीएम ने मीट खाने से इन्कार किया था। सीएम के कार्यक्रम में जंगली मुर्गा परोसने पर सवाल उठाए गए थे। डीएसपी चौपाल सुशांत शर्मा ने केस दर्ज करने की पुष्टि की है। उधर, विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि सरकार डर के मारे एफआईआर कर रही है। कितने मुर्गे कटे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। सीएम के मेन्यू में मुर्गे का जिक्र था।
हिमाचल प्रदेश में अब कांस्टेबलों का भी जिला के बजाय राज्य काडर होगा। इनकी भर्ती भी अब राज्य काडर में पुलिस बोर्ड करेगा। बुधवार को सदन में इसके लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस संशोधन विधेयक 2024 पेश किया गया। इसके पारित होने के बाद अब पुलिस कांस्टेबलों के एक जिले से दूसरे जिले में तबादले किए जा सकेंगे। राज्य विधानसभा के शीत सत्र के पहले दिन बुधवार को सदन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम 2007 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश किया। नए संशोधन के लागू होने के बाद गैर राजपत्रित पुलिस अधिकारियों (ग्रेड-दो) की भर्ती अब पुलिस भर्ती बोर्ड करेगा। इस श्रेणी में कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल आते हैं। यह भर्ती अब राज्य काडर में भी होगी, जिससे प्रदेश में एक एकीकृत प्रक्रिया सुनिश्चित होगी। पुलिस कर्मियों की इन श्रेणियों के लिए जिला और राज्य रोल की आवश्यकता को हटाया जाएगा, जिससे प्रक्रिया सरल होगी। नए संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद अब ड्यूटी पर तैनात लोक सेवकों यानी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा की भी व्यवस्था की गई है। इसके अनुसार पुलिस अधिनियम की धारा-65 की उपधारा-तीन में संशोधन किया जाएगा। यानी सरकारी कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना किसी भी लोक सेवक की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। यानी सरकार की अनुमति के बगैर गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। इससे वह निडर होकर कर्तव्य निर्वहन कर सकेंगे। जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरणों में नियुक्तियों में लचीलापन लाया जा रहा है। यानी ऐसे मामलों में जहां निर्दिष्ट रैंक के वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, वहां राज्य सरकार को इन प्राधिकरणों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करते हुए कनिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारियों को नामित करने का अधिकार होगा। अभी तक सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक, जिला न्यायवादी, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या इससे ऊपर के सेवानिवृत्त अधिकारियों को ही इस प्राधिकरण में नामित करने की व्यवस्था रही है, मगर अब ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारियों के उपलब्ध नहीं होने पर कनिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान होगा।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने पीएचडी में पंजीकृत शोधार्थियों की परेशानियों को खत्म में करते हुए बड़ा फैसला लिया है। पीएचडी की अब साल में दो बार कोर्स वर्क की परीक्षाएं होंगी। इन्हें दिसंबर और जून में करवाया जाएगा। शोधार्थियों को इस फैसले के बाद अब कोर्स वर्क की परीक्षा के लिए साल भर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अभी विवि मार्च और अप्रैल में परीक्षा करवाता है। विवि साल में दो बार पीएचडी में प्रवेश देता है। इसमें प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिया जाता हैं और दूसरा राष्ट्रीय स्तर की स्कॉलरशिप जेआरएफ आदि में पास अभ्यर्थियों के लिए सीधे प्रवेश की व्यवस्था लागू थी। इसमें एक बार में दो से ढाई सौ छात्र पीएचडी के विवि के विभिन्न विभागों में चलाए जा रहे कोर्स में प्रवेश पाते हैं। साल में दो बार पीएचडी में प्रवेश दिए जाने के बाद अब विवि कोर्स वर्क की परीक्षाएं भी दो बार ही करवाएगा। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्याम लाल कौशल ने माना कि विवि ने पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षाओं को साल में दो बार जून और दिसंबर में करने का फैसला लिया है। इससे शोधार्थियों को कोर्स वर्क की परीक्षा देने के लिए पूरे साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा । इससे उनका शोध कार्य और बेहतर ढंग से चलेगा और समय से पूरा हो सकेगा। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने साल में दो बार पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षाओं को करवाने का फैसला लेने के साथ ही दिसंबर 2024 से ही इस फैसले के अनुरूप परीक्षाएं करवाने का फैसला ले लिया है। इसके लिए विवि के परीक्षा नियंत्रक ने सभी पीएचडी कोर्स वर्क की दिसंबर में होने वाली परीक्षाओं का शेड्यूल भी जारी कर वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। पीएचडी कोर्स वर्क विज्ञान विषय की ये परीक्षाएं 24 दिसंबर से शुरू होंगी। परीक्षाओं का विस्तृत शेड़्यूल विवि की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। इन परीक्षाओं के लिए एचपीयू बिजनेस स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
चंबा: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मोबाइल ब्लास्ट होने के कारण गंभीर रूप से घायल युवती ने टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया है। युवती चंबा जिले के सलूणी क्षेत्र की रहने वाली थी। पुलिस ने मृतका का पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है। हिमाचल में इस तरह का ये पहला मामला है, जिसमें मोबाइल ब्लास्ट के चलते मौत हुई है। डीएसपी सलूणी रंजन शर्मा ने बताया कि सलूणी क्षेत्र के विचूणी गांव की 20 वर्षीय किरण देवी 9 दिसंबर को जब अपने घर में मोबाइल फोन चला रही थी, तो अचानक हाथ में पकड़ा फोन बम की तरह जोरदार धमाके के साथ फट गया, जिससे युवती के कपड़ों ने भी तुरंत आग पकड़ ली। परिजनों ने कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग को बुझाया, लेकिन तब तक युवती बुरी तरह से आग में झुलस गई थी। जिसके बाद परिजन युवती को घायल अवस्था में इलाज के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए टांडा मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान 15 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि जब मोबाइल फोन में ब्लास्ट हुआ उस समय युवती ने फोन चार्जिंग पर लगा रखा था। डीएसपी सलूणी रंजन शर्मा ने बताया, मोबाइल ब्लास्ट में घायल युवती की इलाज के दौरान टांडा मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई है। सूचना मिलते ही चंबा से पुलिस टीम टांडा मेडिकल कॉलेज पहुंची। जहां पोस्टमार्टम समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
क्रिसमस और नव वर्ष बनाने के लिए हिमाचल के पर्यटन स्थल सैलानियों से गुलजार रहेंगे। क्रिसमस से पहले वीकेंड पर 21 दिसंबर से ही सैलानियों के पहुंचने का क्रम शुरू हो जाएगा जो जनवरी के पहले हफ्ते तक जारी रहेगा। क्रिसमस और न्यू ईयर के लिए शिमला, मनाली, धर्मशाला, कुफरी, नारकंडा, कसौली, चायल, किन्नौर और लाहौल-स्पीति के लिए सबसे अधिक इंक्वायरी आ रही है। प्रदेश के बड़े समूहों के होटलों में 50 फीसदी तक एडवांस बुकिंग हो चुकी है। विंटर टूरिस्ट सीजन के दौरान बड़ी संख्या में सैलानियों के हिमाचल पहुंचने की संभावना के चलते होटल कारोबारियों और ट्रैवल एजेंट्स ने खास तैयारियां शुरू कर दी हैं। करीब 15 से 20 दिन चलने वाले सीजन के लिए होटल संचालकों ने अतिरिक्त स्टाफ का बंदोबस्त करना शुरू कर दिया है। ट्रैवल एजेंट्स अतिरिक्त गाड़ियों का बंदोबस्त कर रहे हैं ताकि सैलानियों को लाने ले जाने और साइट सीन के लिए गाड़ियां उपलब्ध करवाई जा सकें। निजी होटल संचालकों और पर्यटन विकास निगम ने क्रिसमस और नववर्ष की पार्टी के लिए खास इंतजाम किए हैं। पर्यटन विकास निगम के होटलों में इस दौरान फूड फेस्टिवल का आयोजन होगा। दिल्ली से शिमला, मनाली सहित अन्य पर्यटन स्थलों के लिए अतिरिक्त वोल्वो बसों का संचालन होगा। एचआरटीसी भी मांग के अनुसार दिल्ली से पर्यटन स्थलों के लिए अतिरिक्त वोल्वो चलाएगा। हिमाचल के पर्यटन स्थल 21 दिसंबर से जनवरी के पहले हफ्ते तक सैलानियों से गुलजार रहेंगे। होटल संचालकों के पास बड़ी संख्या में इंक्वायरी आ रही है। बड़े होटलों में 50 फीसदी तक एडवांस बुकिंग भी हो गई है। भारी संख्या में सैलानियों के पहुंचाने की संभावना के चलते पर्यटन कारोबारी भी तैयारियों में जुट गए हैं।
हिमाचल प्रदेश के कई जिले शीतलहर की चपेट में हैं। माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अगले छह दिनों तक निचले पहाड़ी, मैदानी क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर शीतलहर चलने के आसार हैं। बीते 24 घंटों के दाैरान ऊना, हमीरपुर, मंडी और सुंदरनगर में शीतलहर दर्ज की गई है। विभाग ने 19 से 22 दिसंबर के दौरान बिलासपुर, हमीरपुर, ऊना, चंबा कांगड़ा व मंडी जिले के कुछ इलाकों में तेज शीतलहर चलने का ऑरेंज-येलो अलर्ट जारी किया है। उधर, राज्य के सात स्थानों पर न्यूनतम तापमान माइनस में व तीन स्थानों पर शून्य में दर्ज किया गया है। माैसम केंद्र शिमला की ओर से प्रदेश में अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, चंबा व लाहाैल-स्पीति जिले के उच्च पर्वतीय एक-दो स्थानों पर आज हल्की बारिश-बर्फबारी हो सकती है। अन्य भागों में 24 दिसंबर तक माैसम साफ बना रहने का पूर्वानुमान है। अगले 24 घंटों तक न्यूनतम और अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद अगले तीन दिनों तक राज्य के कुछ हिस्सों में तापमान में धीरे-धीरे 2-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी।
हिमाचल में सीमेंट फिर महंगा हो गया है। डीलरों ने प्रति बैग 5 से 20 रुपये तक दाम बढ़ाए हैं। हालांकि, डीलर दाम में बढ़ोतरी की वजह कंपनी की ओर से डिस्काउंट बंद करना बता रहे हैं। एसीसी सीमेंट विक्रेता पवन बरूर ने बताया कि एसीसी सुरक्षा सीमेंट पहले 430 रुपये प्रति बैग बिक रहा था, जो अब 440 रुपये में उपलब्ध होगा। एसीसी गोल्ड 480 के बजाय 485 रुपये में मिलेगा। अंबुजा सीमेंट विक्रेता रोहित शर्मा ने बताया कि पहले अंबुजा सीमेंट 435 रुपये प्रति बैग बिक रहा था। अब दाम बढ़कर 455 रुपये हो गए हैं। डीलरों के अनुसार, पहले कंपनियां अलग-अलग जोन बनाकर उन्हें डिस्काउंट देती थीं, इससे वह ग्राहकों को रियायती दरों पर सीमेंट बेच पाते थे। हाल ही में कंपनियों ने डिस्काउंट बंद कर दिया है। अब मुनाफा घटने के कारण उन्हें कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। कंपनियों ने अपनी बिलिंग में कोई बदलाव नहीं किया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले के बल्ह में चिट्टे के मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे मांगे जाने पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई से जांच करवाने के आदेश दिए हैं। याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।अदालत ने एफआईआर नंबर 106/2024 पर सीबीबीआई के पुलिस अधीक्षक को तुरंत आपराधिक रिपोर्ट दर्ज करने और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के निर्देश दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने डीजीपी को तीन दिन के अंदर मामले से संबंधित सारा रिकाॅर्ड सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए। अदालत ने मुख्य सचिव को भी संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है। अदालत ने फैसले में कहा है कि पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की सांविधानिक पीठ की ओर से ललिता कुमारी बनाम यूपी में जारी दिशा-निर्देशों की अनुपालना नहीं की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में घटनाक्रम की वीडियो दिखाई। इसमें कुछ पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में चिट्टा गाड़ी में रखते और आरोपियों को ले जाते पाए गए हैं। बल्ह में तीन युवकों को 287 ग्राम चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि किसी ने उनसे फिरौती की मांग की थी और कहा कि अगर पैसों का इंतजाम किया तो आपके बेटे पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत में बताया कि युवकों को गलत तरीके से फंसाया है। दलील में कहा कि 31 मार्च को याचिकाकर्ता को शाम करीब 6:00 बजे एक नंबर से फोन आया और बताया कि उसके बेटे दीपक की गाड़ी में सवार दो लोगों को पुलिस ने चिट्टे के साथ गिरफ्तार किया है। याचिकाकर्ता ने बेटे को छोड़ने का आग्रह किया तो बदले में एक लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा गया। कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो बेटे को मामले में फंसाया जाएगा। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पैसे का प्रबंध किया और तीन रिश्तेदार के साथ नेरचौक रवाना हुए। बीच रास्ते में बाबा बालक नाथ मंदिर के नजदीक पुलिस मिली और याचिकाकर्ता ने पुलिस को आपबीती सुनाई। पुलिस ने याचिकाकर्ता की बातों पर ध्यान नहीं दिया। अदालत के आदेशों की अनुपालना की अगली सुनवाई 3 मार्च को होगी।
धर्मशाला के तपोवन में बुधवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच खूब घमासान होगा। इस बात का संकेत विपक्ष ने मंगलवार को उस समय दे दिया, जब उसने सत्र से पहले मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से किनारा कर लिया। मंगलवार को दिन में करीब साढ़े 12 बजे विधानसभा अध्यक्ष ने तपोवन स्थित अध्यक्ष के चैंबर में सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, लेकिन विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष सहित किसी भी सदस्य ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। सत्र से पहले बुलाई गई इस बैठक में दोनों पक्षों की ओर से सत्र को सुचारू रूप से चलने देने के लिए सहमति बननी थी, लेकिन विपक्ष के कड़े तेवरों के चलते बैठक में किसी ने भी हिस्सा नहीं लिया। उधर, बाद में मीडिया से बात करते हुए संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इसे विपक्ष का एक अनैतिक और गैर जिम्मेदाराना रवैया करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बैठक एक महत्त्वपूर्ण बैठक थी। सत्र को सुचारू रूप से चलाने और विपक्ष के सहयोग के लिए इस बैठक को बुलाया गया था, लेकिन न ही नेता प्रतिपक्ष और न ही उनका कोई अन्य सदस्य इस बैठक में पहुंचा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में इस तरह का रवैया पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर सोमवार देर शाम धर्मशाला पहुंच गए थे, लेकिन मंगलवार को बैठक में हिस्सा नहीं लिया। नेता प्रतिपक्ष तबीयत ठीक न होने के कारण बैठक में भाग न ले पाने की बात कर रहे थे। सर्वदलीय बैठक में हिस्सा नहीं लेने से एक बात स्पष्ट हो गई है कि इस बार विपक्ष न सिर्फ सदन के भीतर बल्कि सदन के बाहर भी सरकार को घेरने का मन बना चुका है। विधानसभा शीतकालीन सत्र में चार बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इस बार के सत्र में विधानसभा सदस्यों द्वारा 248 तारांकित और 68 अतारांकित प्रश्न सदन में उठाए जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने तपोवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि चार बैठकों के दौरान विभिन्न नियमों के तहत 14 विषयों पर चर्चा भी सदस्यों द्वारा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सक्षम नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) की नियंत्रित वातावरण भंडारण (सीए स्टोर) क्षमता को पिछले दो वर्षों के दौरान दोगुना किया गया है। राज्य में 7 सीए स्टोर में कुल भंडारण क्षमता वर्ष 2023 से पहले 3380 मीट्रिक टन थी, जिसे सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप अब बढ़ाकर 8260 मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में बागवानों और किसानों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और सीए स्टोर की क्षमता में वृद्धि इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। इससे बागवानी क्षेत्र से जुड़े हजारों परिवार लाभान्वित होंगे। अब बागवानों को ऑफ-सीजन के दौरान अपनी उपज के बेहतर दाम मिलना सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों को बेहतर मूल्य प्रदान करने के उद्देश्य से एचपीएमसी बुनियादी अधोसंरचना को विस्तार प्रदान कर रही है। इस कड़ी में गुम्मा सीए स्टोर की क्षमता 640 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 2017 मीट्रिक टन कर दी गई है और जरोल-टिक्कर सीए स्टोर की क्षमता अब 640 मीट्रिक टन से बढाकर 2062 मीट्रिक टन किया गया है। इसी प्रकार से रोहड़ू सीए स्टोर की क्षमता 700 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 2031 मीट्रिक टन कर दी गई है। इसके अतिरिक्त किसानों की सुविधा के लिए रिकांगपिओ में 250 मीट्रिक टन और चच्योट में 500 मीट्रिक टन की क्षमता वाले नए सीए स्टोर स्थापित किए गए हैं। बागवानों और किसानों को और अधिक सहायता प्रदान करने के लिए सरकार ने सीए स्टोर बुकिंग दरें भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम प्रतिमाह से घटाकर 1.60 रुपये प्रति किलोग्राम प्रतिमाह की हैं, जिससे किसानों और बागवानों को वित्तीय राहत मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान अनेक निर्णय लिए हैं। प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन की शुरुआत की है और सेब के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 10 रुपये से बढ़ाकर 12 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत 12 रुपये प्रति किलो की दर से सेब की खरीद की जा रही है। इसके अतिरिक्त सरकार ने कीटनाशकों पर सब्सिडी फिर से शुरू कर दी है, जिसे पिछली भाजपा सरकार ने बंद कर दिया गया था। सरकार ने मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत सेब उत्पादकों को 150 करोड़ रुपये के लंबित भुगतान भी जारी किए हैं।


















































