हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को शूलिनी विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक तकनीक के साथ उभरती प्रौद्योगिकियों में एक अनुभव केंद्र का उद्घाटन किया। आईहब दिव्य संपर्क और टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब द्वारा समर्थित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी रूड़की द्वारा नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (एनएमआईसीपीएस) के तहत एक सहयोगात्मक प्रयास, अत्याधुनिक सुविधा परिवर्तनकारी प्रगति के लिए संवर्धित वास्तविकता (एआर), आभासी वास्तविकता (वीआर), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), और ड्रोन प्रौद्योगिकी में उत्प्रेरक बनने कोशिश। कल शूलिनी विश्वविद्यालय में 7वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र का उद्घाटन किया गया। केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर चांसलर प्रोफेसर पीके खोसला, प्रो चांसलर विशाल आनंद और ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के अध्यक्ष आशीष खोसला उपस्थित थे। कुलपति प्रोफेसर अतुल खोसला ने मनीष आनंद सीईओ आईहब, दिव्य संपर्क का परिचय दिया और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर), वर्चुअल रियलिटी (वीआर), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और ड्रोन टेक्नोलॉजी एक्सपीरियंस सेंटर लैब में शामिल विभिन्न तकनीकों के बारे में बताया। आईहब, दिव्य संपर्क के सीईओ मनीष आनंद ने कहा कि एआर/वीआर की भूमिका रियल एस्टेट, गेमिंग, शिक्षा और प्रशिक्षण में व्यापक अनुभव, इंटरैक्टिव सिमुलेशन और आभासी संपत्ति की खोज को जोड़ती है और उद्योगों को बदलने में मदद करेगी। टीओटी का उपयोग चीजों को अधिक कुशल बनाने और लोगों को जोड़ने के लिए किया जाएगा, जो स्मार्ट घरों, सटीक खेती, औद्योगिक स्वचालन और डेटा के आधार पर निर्णय लेने की अनुमति देता है। इस लैब का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के छात्रों को उन्नत तकनीकी कौशल प्रदान करके नौकरी बाजार के लिए प्रशिक्षित करना है। आईहब शूलिनी के समन्वयक प्रोफेसर दीपक कुमार ने इस अग्रणी केंद्र की स्थापना में आईहब दिव्यसंपर्क द्वारा दिए गए अमूल्य समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने दोनों संस्थानों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग पर भी प्रकाश डाला, जिसमें उद्योग-प्रासंगिक चुनौतियों का समाधान करना और इनक्यूबेशन और फंडिंग के लिए साइबर-फिजिकल सिस्टम (सीपीएस) डोमेन में स्टार्टअप की सहायता करना शामिल है।
-मुख्यमंत्री को 'सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस' से सम्मानित किया हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून सीजन में भारी बारिश, भू-स्खलन तथा बाढ़ से आई आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के तहत बेहतरीन नेतृत्व प्रदान के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयासों को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने भी सराहा है। उन्हें सशक्त राजनीतिक नेतृत्व तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ कर जनहित और जन कल्याण के लिए 'सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस' से सम्मानित किया गया है। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के अधिकारियों सुमित सिंगला और जसवीर सिंह ने मुख्यमंत्री को यह सम्मान प्रदान किया। इससे पहले वर्ल्ड बैंक और नीति आयोग ने भी आपदा के दौरान बेहतर राहत एवं बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयासों की प्रशंसा की है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने फंसे हुए लोगों की मदद के लिए आपदा के बीच 72 घंटे रहकर राहत एवं बचाव कार्यों का नेतृत्व किया। उनके मार्गदर्शन में 75 हजार पर्यटकों और 15 हजार गाड़ियों को प्रदेश से सुरक्षित निकाला गया। इसके साथ-साथ 48 घंटे की छोटी सी अवधि के दौरान बिजली, पानी और संचार सेवाओं जैसी आवश्यक को अस्थाई तौर पर बहाल कर दिया गया, जिससे स्थिति सामान्य हुई तथा लोगों को राहत मिली। मुख्यमंत्री स्वयं ग्राउंड जीरो पर रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर अधिकारियों को उचित निर्देश देते रहे। आपदा के बाद भी प्रभावितों की मदद के लिए राज्य सरकार गंभीरता से ठोस कदम उठा रही है। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 4500 करोड़ का विशेष राहत पैकेज घोषित किया है, जिसमें मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ाया गया है। पहले जहां पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकान की ऐवज में 1.30 लाख मिलते थे, इसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 7 लाख रुपए किया है। इसके साथ ही उन्हें घर बनाने के लिए 280 रुपए प्रति बोरी की दर से सीमेंट तथा बिजली-पानी का फ्री कनेक्शन भी उपलब्ध करवाएगी। घर को आंशिक नुकसान होने पर मुआवजा राशि में बढ़ोतरी कर इसे एक लाख रुपए किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार गाय व भैंस जैसे दुधारू की मृत्यु पर प्रति पशु 55 हजार रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है। भेड़ और बकरी की मृत्यु पर मिलने वाली वित्तीय सहायता को 4000 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस सम्मान के लिए वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स का आभार व्यक्त किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिभा सिंह ने जनजातीय क्षेत्र पांगी में सभी लोगों के लिए जलाने की लकड़ी, फ्यूल वुड पर मिलने वाली सब्सिडी को फिर से बहाल करने को लेकर प्रदेश सरकार से बात करने का आश्वासन लोगों को दिया है। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी पूरी करने के लिये इनको मिलने वाली प्रोत्साहन राशि, जनजातीय भत्ता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा है कि प्राय: देखा गया है कि कठिन भूगोलिक परिस्थितियों के चलते प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में स्थानांतरित अधिकारी व कर्मचारी अपनी सेवाएं देने से बचने का प्रयास करते है,इसलिए इन्हें इन क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिये प्रोत्साहन के साथ साथ इनका विशेष जनजातीय भत्ता बढ़ाएं जाने की बहुत आवश्यकता है। प्रतिभा सिंह ने आज यहां कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र मण्डी के जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के भरमौर विधानसभा क्षेत्र के किलाड़ का दो दिवसीय दौरा करके वापिस लौटी है। उन्होंने कहा कि उदयपुर से किलाड़ सड़क जो सीमा सड़क संगठन के पास है उसको जल्द पक्का करने व इसके सुधार का मामला भी सीमा सड़क संगठन के उच्च अधिकारियों के साथ उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बर्फबारी की बजह से यहां आने जाने वाले लोगों को सड़क सपंर्क टूटने की बजह से भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है इसलिए यहां के लोगों की मांग पर चैहणी पास में प्रस्तावित सुरंग निर्माण का मामला भी केंद्र सरकार से उठाया जाएगा,जिससे यह क्षेत्र पूरे साल सड़क सम्पर्क से जुड़ा रहें। प्रतिभा सिंह ने कहा कि पांगी घाटी में संचार नेटवर्क भी बहुत कमजोर है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह भारत दूर संचार, बीएसएनएल के अधिकारियों से भी एक बैठक कर संपूर्ण पांगी घाटी सहित लाहौल-स्पीति व किन्नौर में नेटवर्क सुदृढ़ करने व इसके और अधिक विस्तार करने की सम्भावनाओं का पता लगाने को कहेंगी। उन्होंने कहा कि दूरसंचार नेटवर्क अब आम आदमी की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है, इसलिए इसके नेटवर्क को मजबूत करना बहुत ही आवश्यक है। इसके लिए सभी पग उठाये जाने की बहुत जरूरत हैं। प्रतिभा सिंह ने कहा कि जल्द ही वह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलकर जनजातीय क्षेत्रों में लोगों की समस्याओं को लेकर इन्हें दूर करने पर आपसी विचार विमर्श कर इन समस्याओं को दूर करने का आग्रह करेंगी।
एएनटीएफ राज्य सीआईडी शिमला रेंज ने 1.290 किलो चरस के साथ दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गोपाल सिंह (30) पुत्र स्व. निक्का राम, गांव धरचानाना पोस्ट ऑफिस धार चान्ना, तहसील कुपवी, जिला शिमला और कमल सिंह (44) पुत्र स्व. शिव राम विला. बावट, पोस्ट ऑफिस धार चानना, तहसील कुपवी, जिला शिमला के रूप में हुई है। उन्होंने यह नशे की यह खेप एक गाड़ी में छिपाकर रखी थी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ पांवटा साहिब पुलिस थाने में मामला दर्ज कर गाड़ी को भी कब्जे में ले लिया है। मामले में आगामी कार्रवाई की जा रही है।
-पात्र विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये का ऋण प्रदान करने की सुविधा पर्यटन निगम के अध्यक्ष कैबिनेट रैंक आरएस बाली ने कहा कि राज्य सरकार ने पात्र हिमाचली विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज की दर पर ऋण प्रदान करने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 से डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना लागू की है। उन्होंने कहा कि इस योजना से यह सुनिश्चित होगा कि राज्य का कोई भी युवा वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण उच्च या व्यावसायिक शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार की वार्षिक आय 4 लाख रुपये से कम है, उस परिवार का छात्र इस योजना के तहत ऋण प्राप्त करने के लिए पात्र है। बली ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां बैंक को शुल्क राशि की पहली किस्त जारी करने में समय लग रहा है, संबंधित संस्थान को शुल्क राशि की पहली किस्त जारी करने के लिए सभी जिलों के उपायुक्त कार्यालय के स्तर पर एक कोष बनाया जाएगा ताकि छात्र को संस्थान में प्रवेश लेने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग से पात्र छात्रों द्वारा लिए गए शिक्षा ऋण के बदले ब्याज सब्सिडी का दावा करने के लिए नोडल बैंक नामित करेगी। उन्होंने कहा कि नोडल बैंक उच्च शिक्षा विभाग के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित करेगा। उन्होंने कहा कि ऋण लेने वाले विद्यार्थियों को अपनी पसंद के संस्थान में प्रवेश पाने से पहले पोर्टल पर अपना पंजीकरण करना होगा और योजना के तहत अपने आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। इसके पश्चात विद्यार्थी को प्रवेश में चयनित होने का प्रमाणन करने से संबंधित दस्तावेज भी अपलोड करने होंगे। विद्यार्थी के पात्र पाए जाने पर उच्च शिक्षा निदेशक ऋण की पहली किस्त जारी करने के लिए संबंधित बैंक को मामले की सिफारिश करेंगे। उन्हों ने कहा कि योजना के तहत पात्र विद्यार्थी हिमाचल प्रदेश में स्थित किसी भी अनुसूचित बैंक से शिक्षा ऋण प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि योजना के तहत विद्यार्थी बोर्डिंग, आवास, ट्यूशन फीस, किताबें और उनकी शिक्षा से जुड़े अन्य संबद्ध खर्चों को पूरा करने के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक ऋण की सुविधा का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों के पंजीकरण एवं प्रवेश तिथि को आयु सीमा 28 वर्ष निर्धारित की गई है।
-एक हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित होंगी पर्यटन गतिविधियां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में ईको-टूरिज्म पर्यटन को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा रही है। यह बात मुख्यमंत्री ने सोमवार सायं यहां हिमाचल प्रदेश ईको-टूरिज्म सोसाइटी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण वन क्षेत्रों में 11 ईको-पर्यटन स्थल चिन्हित किए गए हैं। इनमें पालमपुर वन मंडल में स्वार, सौरभ वन विहार, न्यूगल पार्क, बीड़-बिलिंग, पार्वती वन मंडल में कसोल, खीर गंगा व सुमारूपा, सिराज में सोझा, कोटगढ़ में नारकंडा और शिमला वन मंडल के तहत शोघी कैंपिंग स्थल व पोटर हिल कैंपिंग स्थल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ईको-पर्यटन स्थल एक हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। आउटसोर्सिंग के माध्यम से विकसित व संचालित किए जाने वाले इन स्थलों के लिए आरक्षित मूल्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल को अलौकिक सौंदर्य से नवाजा है और हिमाचल की मनभावन वादियां देश-विदेश सेे सैलानियों को आकर्षित करती हैं। उन्होंने कहा कि ईको-पर्यटन को प्रोत्साहित करने से राज्य में पर्यटकों की आमद बढ़ेगी और राजस्व में भी इजाफा होगा तथा प्रदेश में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में अन्य स्थानों पर भी ईको-पर्यटन स्थल चिन्हित कर उन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, मुख्य संसदीय सचिव राम कुमार व संजय अवस्थी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, सचिव वन अमनदीप गर्ग, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन राजीव कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विवेक भाटिया व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
-मुख्यमंत्री ने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के दिए निर्देश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित 'मंडे मीटिंगÓ की अध्यक्षता की। बैठक में प्रदेश में कार्यान्वित की जा रही विभिन्न विकासात्मक योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 अक्तूबर को पूरे प्रदेश में मुटेशन (इंतकाल) अदालत आयोजित की जाएगी। इसके तहत सभी तहसील व उप-तहसील तथा बंदोबस्त सर्कल स्तर पर केवल लम्बित मुटेशन सत्यापन के मामलों पर निपटरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 22000 से अधिक ऐसे मामले लम्बित पड़े हैं। मुटेशन अदालत से आम आदमी को सुविधा के साथ ही उन्हें मूटेशन के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों में जाने से भी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुटेशन की प्रक्रिया समयबद्ध पूरी न होने के कारण लोगों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इससे विकास कार्यों की प्रगति भी प्रभावित होती है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को पारदर्शी एवं संवेदनशील प्रशासन प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। व्यवस्था परिवर्तन के ध्येय के साथ सरकार हर क्षेत्र में सार्थक और सकारात्मक कदम उठा रही है। उन्होंने अधिकारियों को मुटेशन अदालत के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नये पाठ्यक्रम आरम्भ किये जाएंगे। यह पाठ्यक्रम रोजगारपरक और नवीन प्रौद्योगिकी पर आधारित होंगे। इनमें कृत्रिम मेधा का समावेश भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को गुणात्मक एवं व्यवहार्य बनाने के लिए निरन्तर प्रयास कर रही है। इससे युवाओं में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ेगी, साथ ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने अधिकारियों को हिमाचल मुजारियत एवं भू-सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 से संबंधित आवेदन की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से ही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इससे कार्य समयबद्ध होंगे और इनमें दक्षता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम के 1500 बसों के बेड़े को चरणबद्ध तरीके से विद्युत चालित वाहनों से बदला जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस सम्बन्ध में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में यू.वी. फिल्टरेशन यूनिट स्थापित करने के लिए स्थल चयनित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जल उपचार के लिए ब्लीचिंग पाउडर का इस्तेमाल चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, प्रधान सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, प्रधान सचिव वित्त मनीष गर्ग, विभिन्न विभागों के सचिव और मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा भी उपस्थित थे।
-प्रभावितों के साथ मजाक कर रही है सुक्खू सरकार -निर्माण सामग्री नही मिलने से कैसे बनेंगे बर्बाद हुए घर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार आपदा प्रभावितों का पुनर्वास करने के बजाय उनके साथ मज़ाक़ कर रही है। प्रदेश में महीनों से क्रशर बंद होने की वजह से रेता बजरी आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही है। निर्माण कार्य बिना रेत और बजरी के नहीं हो सकता है। इस वजह से निर्माण कार्य रुके हुए हैं। आगे सर्दी का मौसम है। ऐसे में लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपदा में सरकार का रवैया बहुत निराशाजनक है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सर्दी का मौसम आने वाला है और ग्राम पंचायतों का काम देखने वाले ज़िला परिषद कर्मी हड़ताल पर हैं। ऐसे में मनरेगा के तहत होने वाला एक हज़ार करोड़ के काम समय पर कैसे होंगे। जयराम ने कहा कि सरकार ने तीन बार सीमेंट के दाम बढ़ा दिये जिससे लोगों के निर्माण का खर्च और भी बढ़ गया है। इसके बाद भी प्रदेश के लोगों को समय पर सीमेंट नहीं मिला रहा है। आपदा से जूझ रहे लोगों को मनमाने क़ीमत पर भी सीमेंट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिससे लोगों के निर्माण कार्य रुके हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय में सरकार ने ऐसे निर्णय लिए हैं कि आपदा प्रभावितों के ज़ख़्म और हरे हो जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान इस समय में आपदा प्रभावितों को ज़्यादा से ज़्यादा राहत देनें का होना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार का ध्यान चीजों को महंगा करके लोगों को परेशान करने का है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जिला परिषद के सभी कर्मचारी महीनों से हड़ताल पर हैं। चुनाव में किए गए वादे न पूरे किए जाने की वजह से वह महीनों से कोई काम नहीं कर रहे हैं। ग्राम पंचायतों के सारे काम ठप पड़े हैं। ऐसे में आपदा से निपटने के लक्ष्य कैसे हासिल होंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार ने एक हज़ार करोड़ रुपये मनरेगा के तहत खर्च करने की घोषणा की है। जब पंचायत का काम देखने वाले ज़िला परिषद कर्मी हड़ताल पर हैं और सामान्य काम तक नहीं हो रहे हैं तो मनरेगा के काम कैसे हो पायेंगे। उन्होंने कहा कि आपदा राहत के नाम पर प्रदेश की सुक्खू सरकार लोगों को राहत पहुंचाने के बजाय हास्यास्पद तरीके से काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार के इस तरह के फ़ैसलों की वजह से न तो लोगों को रेत बजरी उपलब्ध हो पा रही है और न ही सीमेंट और सरिया। प्रदेश में हाजाहज़ारों लोगों के घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। हज़ारों घर रहने लायक़ नहीं बचें हैं। ऐसे में सरकार द्वारा क्रशर बंद कर देने से यह समस्या और विकराल हो गई है। उन्होंने कहा कि क्रशर बंद करने का ख़ामियाज़ा प्रदेश के आपदा पीड़ित उठा रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि अब तो प्रदेश में बफ़र्बारी भी शुरू हो गई है ऐसे क्षेत्रों में आपदा राहत को कोई काम नहीं हुआ है। इन क्षेत्रों के आपदा प्रभावित लोग कैसे रहेंगे यह भी सोचना सरकार का काम है, लेकिन सरकार ने एक बार भी इनके बारे में नहीं सोचा।
स्वदेश लौटने से पूर्व गत रात्रि विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के सम्मान में स्विटजरलैंड में भारत के राजदूत मृदुल कुमार ने अपने निवास पर रात्रि भोज का आयोजन किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष की पत्नी नीना पठानिया, विधानसभा सचिव यशपाल शर्मा तथा उनकी पत्नी भी मौजूद थीं। रात्रि भोज के समय विधानसभा अध्यक्ष ने मृदुल कुमार को हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं बारे अवगत करवाया। पठानिया ने भारतीय राजनयिक से आग्रह किया कि वे भी हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं बारे स्विटजरलैंड पर्यटन विभाग से चर्चा करें तथा हिमाचल के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करवाएं। पठानिया ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यप्रणाली, क्रियाकलापों, ई-विधान प्रणाली तथा सदन संचालन बारे भी राजदूत को जानकारी दी। पठानिया ने कहा कि समय के बदलते परिवेश के साथ हमें भी अपनी कार्यशैली तथा कार्यप्रणाली में बदलाव की जरूरत है तथा विश्व संगठन के साथ हमें भी बदलना होगा। भारत एक विशाल देश है, जिसका लोहा पूरी दुनिया मानती है। भारत एक युवा देश है तथा हमें इस युवा ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल करना होगा, ताकि हम एक सशक्त, समृद्व तथा स्वावलंबी राष्ट्र बन सकंे। कुलदीप सिंह पठानिया आज रात्रि नई दिल्ली पहुंच रहे हैं।
-बोले, वीरभूमि हिमाचल के वीरों का बलिदान हमारी प्रेरणा, हमारी ऊर्जा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने मेरी माटी मेरा देश कार्यक्रम के अंतर्गत अपने संसदीय क्षेत्र के भोरंज, हमीरपुर व बड़सर विधानसभा में स्कूली छात्रों, अध्यापकों व स्थानीय जनता से इस कार्यक्रम की महत्ता पर। सार्थक संवाद किया व बड़ी संख्या में मेरी माटी मेरा देश कार्यक्रम में अपना योगदान देने की अपील की। अनुराग ने कहा कि यूक्रेन वॉर के दौरान ऑपरेशन गंगा के तहत जब हमारे देश के नागरिक और बच्चे वहां फंस गए थे तो केवल देश का तिरंगा झंडा अपनी बसों पर लगाकर वहां से वह सकुशल वापस अपने देश पहुंच पाए। कई अन्य देशों के लोग भी जो वहां फंसे हुए थे भारत का झंडा अपनी गाड़ियों पर लगाकर वहां से निकलकर अपने देश में पहुंचने में सफल हुए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत मजबूत हुआ है। हमारे तिरंगे की ताक़त बढ़ी है, यह एक बड़ा बदलाव है। यह बदलाव मजबूत नेता और मजबूत सरकार लेकर आई है देश को मजबूत नेता और मजबूत सरकार देने के लिए आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर अनोकों कार्यक्रम आयोजित किए, उसमें से घरों पर तिरंगा फहराना भी एक बड़ा कार्यक्रम था। देश के हर कोने हर घर हर गांव में जहां तक की कश्मीर के लाल चौक पर भी तिरंगा खुले मन से खुले दिल से घर-घर पर फहराया गया। एक समय था जब हमें तिरंगा फहराने के लिए तिरंगा यात्रा निकालने पड़ी थी। कांग्रेस की उस समय की सरकार ने जम्मू के श्रीनगर के लाल चौक पर हमें जाने नहीं दिया था, हम वहां पर तिरंगा झंडा फहराना चाहते थे। जब धारा 370- 35 ए मोदी जी ने हटा दी है।अब हम जब श्रीनगर के लाल चौक पर भी झंडा फहरा सकते हैं कोई हमें रोकने वाला नहीं है। आजादी के अमृत महोत्सव में हमको वीर सेनानियों को और बलिदानों को स्वतंत्रता युद्ध के वीर बलिदानियों को याद करना है। गांव गांव के स्कूलों में बड़े-बड़े बोर्ड लगवाएंगे जिसमें वहां के स्वतंत्रता सेनानियों के नाम वीर बलिदानियों के नाम वीर सैनिकों के नाम लिखे जाएंगे। ताकि वहां पर शिक्षा ग्रहण करने वाले आने वाली अगली पीढ़ी को यह ज्ञात हो हमारे आज के लिए पूर्व में अपना किसने देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया था।
-लिटफेस्ट के अंतिम दिन रियल और रील लाइफ पर रहा फोकस खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन कसौली क्लब में रियल और रील लाइफ पर फोकस रहा। फ़िल्म अभिनेता से राजनेता बने राज बब्बर ने कहा कि मैं अभिनेता हूं, अभिनय से ही मेरी पहचान है। मैंने न नौकरी करने और न डायरेक्टर बनने की कसम खाई है। सिर्फ एक्टिंग करना चाहता हूं, यही मेरी पहचान है। उन्होंने कहा कि बचपन से मेरी पहली मोहब्बत एक्टिंग थी। मैं सिर्फ एक्टर बनना चाहता था। आठवीं कक्षा से शुरू हुई मेरी एक्टिंग की आशिकी पटियाला में आकर परवान चढ़ी। उन्होंने बताया कि आठवीं कक्षा में चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी उसने कहा था में मुझे जर्मन सिपाही का रोल मिला। अच्छा किरदार न निभाने के कारण फिर मुझे कोई रोल नहीं मिला। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में कॉलेज का प्रधान बनने, फिर रोल मिला और फिर मेरी तालाश पूरी हुई। मुझे ओम पुरी, मीना टीवाना ने एनएसडी का रास्ता दिखाया। मैं पढ़ा-लिखा नहीं, लेकिन लिखा-पढ़ा जरूर हूं। यहां मेरे गुरु इब्राहिम से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने बताया कि पहली जनवरी 1979 में उन्होंने अपना बजाज स्कूटर 6 हजार रुपए में बेचा। अपनी पत्नी नादिरा और जूही को छोडक़र मुंबई चल गए। कई उतार-चढ़ाव देखे और मुंबई में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस सत्र में जाने-माने फिल्म अभिनेता और राजनेता राज बब्बर, उनकी बेटी जूही बब्बर सोनी और दामाद अनूप सोनी के बीच दिल को छू लेनी वाली चर्चा हुई। इसमें बाप-बेटी और ससुर-दामाद का संवाद का सभी ने आनंद उठाया। इस सत्र का संचालन अनूप सोनी ने किया। अनूप सोनी ने कहा कि जब घर पर भाई-बहन हंसी-मजाक करते हैं तो कहते हैं पापा आप रेप न करते तो हमारा घर नहीं चलना था। बात हो रही है फिल्म इंसाफ का तराजू की। हलांकि इससे पहले भी राज बब्बर 14 फिल्मों में छोटे -मोटे रोल कर चुके थे, लेकिन यह फिल्म उनके लिए टर्निंग प्वाइंट बनी। राज बताते हैं कि इससे बाद फिल्मों में उनका रोल तो बढ़ा, लेकिन पैसे नहीं बढ़े। 80 के दशक में उनका अभिनय पीक पर था। उन्होंने कहा कि वह एक दोस्त ने उन्हें राजनीति में आने की सलाह दी । मैं सोशलिस्ट रहा हूं। राजनीति में मदद भी कर रहा था। वह राजनीति में आ गए, उन्होंने मुझे राज्यसभा का मेंबर बना दिया। इस एहसान के बदले राजनीति में कूद पड़ा। जब जीत जाते तब लोकसभा और हार जाते तो राज्यसभा के सदस्य रहे। 27 साल वह एमपी रहे। आज तक कोई भी अभिनेता इतने लंबे समय तक नहीं रहा है। अब उन्होंने राजनीति को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन अभिनय को समर्पित है। अब राजनीति को अलविदा कहने बाद दोबारा आप उन्हें पर्दे पर देख सकेंगे। यह बात उनकी बेटी जूही बब्बर ने कही। वह वैब सीरिज में काम कर रहे हैं। 2024 का क्या प्लान है। इस पर वह कुछ नहीं बोले। क्या कहा जूही बब्बर ने.... जूही बब्बर ने एस सवाल के जबाव में कहा कि मेरे पापा कितने भी बिजी रहें, लेकिन कभी मेरा बर्थडे नहीं भूलते और आज तक कभी नहीं हुआ कि मेरी स्कूल इवेंट या कोई मेरा बर्थडे मिस किया हो। 20 जुलाई को मेरा बर्थडे होता है। जूही ने बताया कि मैं चार साल की थी, जब मुंबई आई थी। उस समय हमारे पास 2 बीएचके घर और एक कार होती थी। पापा कैसे मैनेज करते थे, यह बात आज महसूस करती हूं। हम न्यू ईयर, दीपावली और अन्य त्यौहार अपने घर में ही मनाते हैं। यह रिवायत पहले से ही हमारे परिवार में चली आ रही है।
सीपीएस की नियुक्ति पर हिमाचल हाई कोर्ट 4 नवंबर को अपना फैसला सुनाएगा। आज मैराथन सुनवाई के बाद हिमाचल हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिकाकर्ता के वकील संजय कुमार ने कहा कि हमें उम्मीद है कि फैसला हमारे पक्ष में होगा। दिल्ली स्थित वकील कल्पना देवी द्वारा दायर याचिका में नियुक्ति को अवैध और संविधान के विपरीत बताते हुए सभी सीपीएस को तत्काल हटाने की प्रार्थना की गई है। याचिका में आगे दावा किया गया है कि इन नियुक्तियों से राज्य के खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा। राज्य में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 8 जनवरी को 6 विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया था। याचिकाकर्ता एवं वरिष्ठ भाजपा नेता संजय कुमार की ओर से पेश वकील ने कहा कि सभी छह विधायकों राम कुमार चौधरी (दून), संजय अवस्थी (अर्की), मोहन लाल ब्राक्टा (रोहड़ू), सुंदर सिंह ठाकुर (कुल्लू), आशीष बुटेल की नियुक्ति (पालमपुर), और किशोरी लाल (बैजनाथ) को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। इस मामले की सुनवाई आने वाले सप्ताह में होने की उम्मीद है। संजय कुमार ने आगे कहा कि 6 मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की नियुक्ति को अवैध बताया गया और मांग की गई कि इन सभी विधायकों को सीपीएस के रूप में लाभ के पद पर रहने के लिए नोटिस जारी किया जाना चाहिए और त्वरित सुनवाई के बाद उन सभी को विधानसभा से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज पीटरहॉफ शिमला में हिमाचल प्रदेश कबड्डी एसोसिएशन द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में चीन के हांगझोऊ में सम्पन्न एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया। उन्होंने ऊना जिला के पुरूष वर्ग में कबड्डी खिलाड़ी विशाल भारद्धाज, भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान रितु नेगी तथा टीम की सदस्य निधि शर्मा, ज्योति, पुष्पा राणा और सुषमा शर्मा को शाल व टोपी से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि पर पूरे देश को गर्व है और इस बार के एशियन खेलों के आंकड़े हमारे खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शा रहे हैं। भारतीय दल ने कुल 107 पदक जीते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उनकी सफलता उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरक है। उन्होंने विजेता खिलाड़ियों से युवाओं को समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करने का आह्वान भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के सम्मान में शीघ्र ही एक गरिमापूर्ण समारोह आयोजित किया जाएगा। प्रदेश सरकार राज्य में आधारभूत खेल ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास कर रही है तथा राज्य की खेल नीति में परिवर्तन लाने पर भी विचार किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश कबड्डी एसोसिएशन के अध्यक्ष राज कुमार नीटू ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और एसोसिएशन की गतिविधियों बारे अवगत करवाया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेन्द्र चौहान, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष देवेेंद्र श्याम, हिमाचल प्रदेश ओलम्पिक एसोसिशियन के सचिव राजेश भंडारी, पार्षद, मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल शर्मा और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
-कहा, मात्र 10 महीने में ही चरमराया कांग्रेस सरकार का आर्थिक प्रबंधन -केंद्रीय व्यापार और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से भी मिले -इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम के तहत राशि जारी करने पर जताया आभार शिमला : नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शनिवार देर शाम केंद्रीय उद्योग और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से शिष्टाचार भेंट की और हिमाचल प्रदेश के लिए इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम के तहत राशि जारी करने पर उनका आभार जताया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य सरकार का आर्थिक प्रबंधन मात्र दस महीनें में ही चरमरा गया है। सरकार आए दिन मनमाना कर्ज ले रही है और मनमाने नियम लाकर प्रदेश के लोगों को परेशान कर रही है। चुनाव के पहले कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने दस गारण्टियां दी थी, उनमें से एक भी पूरी नहीं की लेकिन दस महीनें में प्रदेश के दस हजार लोगों की नौकरी छीनकर प्रदेश को दस हज़ार करोड़ का कर्ज दे दिया है। जयराम ठाकुरने कहा कि एचआरटीसी में आम आदमी चलता है। एचआरटीसी का उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना नहीं है, बल्कि जनता की सेवा करना है। क्योंकि यह हर आम आदमी को घर तक पहुंचाने का साधन है। यह हास्यास्पद स्थिति है महिला को बस में शादी के एल्बम का भी किराया देना पड़ा। दो लैपटॉप एक साथ लेकर चलने पर पूरी सीट का किराया देना पड़ रहा है। यह व्यावहारिक तौर पर मजाक बन गया है। एचआरटीसी कर्मियों को एक-एक महीने बाद वेतन दिया जा रहा है, यह गलत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा घाटे की दलील देना उचित नहीं है, जब बीजेपी की सरकार थी तो हमने भी समय पर वेतन दिया था। सरकार की प्राथमिकताएं तय होनी चाहिए। एक लाख लोगों को हर साल नौकरी देने का वादा करने वाली कांग्रेस ने आते ही दस हज़ार लोगों का रोज़गार छीन लिया। दो हज़ार कोविड कर्मियों को छह माह का वेतन दिए बग़ैर ही बर्खास्त कर दिया। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा के समय में हिमाचल को केंद्र की ओर से सर्वाधिक मदद मिली । संसाधनों से लेकर नक़द धनराशि रूप में अब तक के इतिहास में सबसे ज़्यादा मिली। मैं ख़ुद कई बार दिल्ली गया और गृहमंत्री समेत सभी प्रमुख नेताओं से बात कर हिमाचल के लिये अधिक से अधिक सहयोग देने का निवेदन किया। सहयोग आया, आगे और भी आएगा लेकिन मुख्यमंत्री ने केंद्र को सहयोग के लिए धन्यवाद तक नहीं दिया बल्कि केंद्र की ओर से मदद नहीं मिलने की बात की गई। यह कहना सर्वथा अनुचित है, मुख्यमंत्री सुक्खू को भगवान से डरना चाहिए। जयराम ने कहा कि भारत का आतंकवाद के ख़िलाफ़ हमेशा कड़ा रुख़ अपनाने की नीति पर ही काम करेगा। हमास द्वारा इज़रायल पर किए गए हमले में प्रधानमंत्री ने हमास की कड़े शब्दों निंदा की और स्पष्ट तौर पर इसराइल के साथ खड़े रहने की बात की। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में भारत का क़द बहुत बढ़ा है। आज हर वैश्विक संकट में विश्व भारत की तरफ़ संकट के निराकरण के उद्देश्य से देखता है।
कहा, सुख आश्रय योजना के तहत 4.68 करोड़ के लाभ दे चुकी है सरकार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों को मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए इस वर्ष 7 नवंबर तक अनाथ बच्चों को समयबद्ध प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत प्रदेश के 4000 से अधिक अनाथ बच्चों को सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा अनाथ बच्चों को 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेटÓ के रूप में नामित करते हुए उनके लिए कानून बनाया गया है, जिससे सरकार की उनके अभिभावक के रूप में कानूनी जिम्मेवारी निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अनाथ बच्चों को अभी तक 4.68 करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ प्रदान कर चुकी है। योजना के तहत बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले 1,199 बच्चों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से 1.12 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की गई है। यह राशि जिला बाल संरक्षण अधिकारी के साथ संयुक्त रूप से संचालित आवर्ती जमा (आरडी) खातों में जमा की गई है। इसके अंतर्गत 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को 1,000 रुपये प्रतिमाह और 15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को 2,500 प्रति माह राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा 48 लाभार्थियों को उनकी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए संस्थागत शुल्क 15.52 लाख रुपये तथा प्रति व्यक्ति 4,000 रुपये प्रति माह की दर से व्यक्तिगत खर्च के लिए 11.52 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 17 लाभार्थियों को पाठ्यक्रम शुल्क (कोर्स फीस) के लिए 7.02 लाख रुपये और जेब खर्च के रूप में 4.08 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। एक पात्र को कौशल विकास पाठ्यक्रम के लिए 17,500 रुपये प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले बाल देखभाल केन्द्रों के 62 बच्चों को संस्थान की फीस के रूप में 15.66 लाख रुपये और जेब खर्च के रूप में 14.88 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के माध्यम से वंचित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन बच्चों को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता और 3 बिस्वा जमीन प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त इनके लिए हवाई किराया और तीन सितारा होटलों में रहने की सुविधा के साथ शैक्षणिक भ्रमण प्रायोजित किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत अब तक 3 लाभार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 6 लाख रुपये दिए गए हैं। अपने रिश्तेदारों के साथ रहने वाले 1106 बच्चों को उनकी शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 2.65 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शपथ लेने के उपरान्त उन्होंने सर्वप्रथम शिमला में बालिका आश्रम टूटीकंडी का दौरा कर उनकी आवश्यकताओं को जाना। यहीं से वह अधिकारों से वंचित अनाथ बच्चों के लिए एक योजना बनाने के लिए प्रेरित हुए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और वंचित वर्गों विशेषकर जरूरतमंदों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
घाना के अक्रा में 6 दिनों का राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन तथा 10 दिनों का स्पेन तथा स्विट्जरलैंड देशों का अध्ध्यन प्रवास संपन्न होने के पश्चात विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया कल ल्यूसर्न (स्विट्जरलैंड) से इस्तांबुल होते हुए नई दिल्ली पहुंचेंगे। स्वदेश वापसी की पूर्व संध्या पर पठानिया ने कहा कि आज दुनिया में पूरी तरह से तेजी से बदलाव हो रहा है। पठानिया ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व विकास के शिखर की ओर अग्रसर है। आधुनिक तकनीक के प्रयोग ने दुनिया को रंगीन तथा स्वावलंबी बना दिया है। आज छोटे से छोटे देश ने भी तरक्की की नई उंचाईयां हासिल कर ली हैं। टेक्नोलोजी के दृष्टिगत भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को स्मरण करते हुए पठानिया ने कहा की वे एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्हाने वर्ष 1985-86 में टेक्नोलोजी युग की कल्पना की थी तथा विश्व में आने वाले बदलाव के प्रति भारत के तकनिकि विशेषज्ञ को भी सचेत किया था। पठानिया ने कहा कि स्पेन तथा स्विट्जरलैंड जैसे छोटे-छोटे देशो ने भी नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल कर पर्यटन, सूचना एवं प्रोद्योगिकी तथा डेयरी फार्म जैसे सेक्टर में अविश्वसनीय कार्य किया है, जिसकी वजह से उन्होंने अपने देश की आर्थिकी को मजबूत किया है। पठानिया ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात हमारे देश ने भी अदभूत तरक्की की है लेकिन कूछ क्षेत्रो में हम अभी भी वह मुकाम हासिल नही कर पाये है, जिसकी हमने कल्पना की थी। हिमाचल का जिक्र करते हुए पठानिया ने कहा कि यहां कुदरत ने हमें बहुत कुछ दिया है, लेकिन हम इसका ठीक से दोहन नहीं कर पा रहे हंै। उन्होंने कहा कि हमें पर्यटन, ऊर्जा, वन तथा नकदी फसलों के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, ताकि हम अपने प्रदेश को स्वावलंबी बना सकें। पठानिया ने देश तथा प्रदेशवासियों को नवरात्र की बधाई दी है।
-हर्षिता वर्मा बनी मिस स्ट्रॉन्गेस्ट हिमाचली -एचपीयू में करवाई गई थी हैवीवेट चैंपियनशिप हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हैवीवेट चैंपियनशिप एनपीसी सीरीज़-2 का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में शिमला के मल्याणा निवासी विशाल ठाकुर ने स्ट्रॉन्गेस्ट मिस्टर हिमाचल का खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही हर्षिता वर्मा ने मिस स्ट्रॉन्गेस्ट हिमाचली का खिताब अपने नाम किया। आपको बता दें कि विशाल ठाकुर फिटनेस वर्ल्ड जिम के कोच भी हंै। यह जिम मल्याना में स्थित है। खिताब अपने नाम करने के बाद विशाल ठाकुर ने कहा कि वह कई वर्षों से वेट लिफ्टिंग करते आ रहे हैं और आज इस प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम करने पर बेहद उत्साहित महसूस कर रहे हैं। विशाल ने युवाओं से नशे से दूर रहकर खेलकूद और इस तरह की अन्य प्रतियोगिताओं में भाग लेने का आह्वान किया। ्र
-प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 666 किमी सड़कों के निर्माण में होगा तकनीक का उपयोग हिमाचल प्रदेश में पहली बार सड़कों का निर्माण फुल डेप्थ रेक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक पर किया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार देर सायं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की समीक्षा पर आयोजित एक बैठक में दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनने वाली सड़कों में इस तकनीक का उपयोग करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग को दिए और कहा कि शुरूआती चरण में विभिन्न जिलों में 666 किमी सड़कों का निर्माण इस तकनीक से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार व असम के बाद हिमाचल प्रदेश एफडीआर तकनीक का इस्तेमाल कर सड़क निर्माण करने वाला देश का चौथा राज्य बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तकनीक से सड़कें ज्यादा टिकाऊ बनती हैं और वाहनों के लिए भी यह सड़कें बेहतर हैं। साथ ही इसकी लागत भी कम है और यह तकनीक पारिस्थिकी के अनुकूल (इको फ्रेंडली) भी है। इस तकनीक में सड़क की सतह से सामग्री का उपयोग कर इसमें सीमेंट और एडिटिव को मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है, जिससे सड़कों का निर्माण किया जाता है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की सुविधा के लिए सड़क संपर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान केन्द्रित कर रही है। आने वाले समय में करीब 2682 किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से 666 किमी सड़कें एफडीआर तकनीक, 556 किमी सड़कें सीमेंट स्टेबलाइजेशन तथा 1460 किमी सड़कों का निर्माण परम्परागत तरीके से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन पर लगभग 2683 करोड़ रुपए व्यय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत प्रदेश में सड़कें लोगों की जीवन रेखा कही जाती हैं। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा इन सड़कों का निर्माण कार्य समयबद्ध पूरा करने के भी निर्देश दिए, ताकि लोगों को सड़क सुविधा का लाभ समय पर मिल सके। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, प्रधान सचिव, लोक निर्माण विभाग भरत खेड़ा, प्रमुख अभियंता अजय कुमार गुप्ता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
-मनाली-लेह एनएच-3 दारचा से सरचू के बीच बंद हिमाचल के लाहौल व कुल्लू की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई है। नेशनल हाईवे तीन मनाली-लेह बर्फबारी के चलते दारचा से सरचू के बीच बंद हो गया है। इसके साथ दारचा-शिंकुला सड़क भी बर्फबारी से बंद हो गई है। वहीं पुलिस ने शिकुंला में बर्फबारी के चलते फंसे नौ मजदूरों को रेस्क्यू किया है। यह मजदूर रात को बर्फबारी में फंस गए थे। जिन्हें रेस्क्यू कर सकुशल दारचा पहुंचाया गया। वहीं नेशनल हाईवे 505 ग्रांफू के रास्ते बर्फबारी के चलते बंद हो गया है। ग्रांफू-काजा-समदो सड़क फिलहाल सभी प्रकार के वाहनों के लिए ठप है। हालांकि तांदी-तिंदी, किलाड़-संसारी सड़क में वाहनों की आवाजाही जारी है। लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सड़कों की स्थिति को देखकर ही यात्रा करने का आग्रह किया है। हिमाचल प्रदेश के कई क्षेत्रों में रविवार और सोमवार को भारी बारिश और बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। 17 अक्तूबर तक प्रदेश में मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। 18 अक्तूबर से मौसम साफ रहने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 15 और 16 अक्तूबर को चंबा, कुल्लू, कांगड़ा और लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट का असर रहेगा। इस दौरान इन जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और अन्य क्षेत्रों में बारिश की चेतावनी जारी हुई है। शेष जिलों के लिए इस दौरान येलो अलर्ट जारी हुआ है।
-मेजर ने खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में ताजा की पाकिस्तानी-बांग्लादेश युद्ध की यादें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन मेजर जनरल ईयान कार्डोजो की बुक वियोंड फियर पर उनके साथ सारा जैकब ने चर्चा की। उन्होंने 1971 के पाकिस्तानी-बांग्लादेश युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध के फैलने के दौरान वह कार्डोज़ो डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में एक पाठ्यक्रम में भाग ले रहे थे। उनकी बटालियन, 4/5 गोरखा राइफल्स, पहले से ही ऑपरेशन के पूर्वी मोर्चे पर तैनात थी। बटालियन का सेकेंड-इन-कमांड कार्रवाई में मारा गया और कार्डोज़ो को उसकी जगह लेने का आदेश दिया गया। सिलहट की लड़ाई के दौरान भारतीय सेना के पहले हेलिबोन ऑपरेशन में उनका साथ देने के लिए वह समय पर अपनी बटालियन में पहुंचे। यहां 9 दिन और 9 रात हमारे सैनिक दुश्मनों का मुकाबला करते रहे। न खाना न पानी। अदम्य साहस का परिचय देते हुए 352 सैनिकों ने पाकिस्तान के 8000 की आर्मी को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया था। ढाका के बाद कार्डोजो का पैर एक बारूदी सुरंग पर पड़ गया और उसका पैर गंभीर रूप से घायल हो गया। पेनकीलर व अन्य दर्द निवारक औषधी न होने और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण उसका पैर शल्य चिकित्सा द्वारा नहीं काटा जा सका। बाद में उन्होंने अपनी खुखरी का इस्तेमाल अपना पैर काटने के लिए किया। 9 माह अस्पताल में रहा। 6 माह बाद उनका वेतन आधा कर दिया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे मैं आहत हुआ। आर्मी ऑफिसर बोल नहीं सकता, लेकिन जनता तो बोल सकती है। एक मेजर आर्मी के इतने बड़े सिस्टम से कैसे लड़ सकता है। उन्होंने अपनी लड़ाई लड़ी। नकली पांव से वो सब कुछ किया , जो सामान्य कर सकते थे। उन्हें प्रेरणा मिली पुस्तक अस्पताल के दौरान पुस्तक रीच फॉर स्काई से। उन्होंने कहा कि उन्होंने आर्मी पैसे के लिए नहीं बल्कि वे ऑफ लाइफ के लिए चुना था। हर आर्मी ऑफिसर का सपना होता है कि वह कमांड करें। लिटफेस्ट के दूसरे दिन कार्डोजो की बुक वियोंड फियर पर चर्चा खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन मेजर जनरल ईयान कार्डोजो की बुक वियोंड फियर पर उनके साथ सारा जैकब ने चर्चा की। मेजर जनरल ईयान कार्डोजो से प्रश्न किया गया कि आपने 7 पुस्तकें लिख चुके हैं और अपने जीवनी लिखने की क्यों सोची। उन्होंने बताया कि खुशवंत सिंह के साथ अपना संस्मरण साझा करते हुए बताया कि एक बार खुशवंत सिंह ने उन्हें अपनी साथ वाली चेयर पर बिठाया और कहा कि मैं आपकी स्टोरी लिखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कोई स्टोरी नहीं है। खुशवंत सिंह ने कहा कि यस और नो। मैंने कहा नो। उन्होंने कहा कि फिर आप अपनी स्टोरी पढ़ लेना, कोई गलती हुई तो उसके लिए आप जिम्मेवार होंगे। फिर हम दोनों ने व्हीस्की ली। इसी से उन्हें अपनी जीवनी लिखने की प्रेरणा मिली। 1937 में मुंबई में हुआ था जन्म 1937 में मुंबई में जन्म ईयान कार्डोजो प्रारंभिक शिक्षा मुम्बई में हुई। कार्डोजो ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर भारतीय सैन्य अकादमी में भाग लिया। जहां से वह 5 गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फोसज़्) में शामिल हो गए और उन्हें कमीशन दिया गया। उन्होंने गोरखा राइफल्स के साथ भी काम किया है और उनके साथ दो युद्ध लड़े हैं-1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध और 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध।
शनिवार सुबह महिंद्रा पिकअप गाड़ी (एचपी 63 सी 5039) सड़क से 200 फीट नीचे टोंस नदी में जा गिरी। इस हादसे में गाड़ी में सवार शिमला जिले की नेरवा तहसील की टिक्करी पंचायत के रहने वाली तीन लोगों की मौत हो गई। हादसा उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र के मिनस पाटन के समीप हुआ। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान किसी को पता नहीं चला। इस बीच हिमाचल की तरफ से सड़क पार कर रहे ग्रामीणों ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को देखा और फिर फोन कर पाटन के लोगों को सूचना दी। सूचना मिलने पर एसडीआरएफ की टीम ने शव बाहर निकालकर पुलिस को सौंप दिए। मृतकों की पहचान चालक राकेश कुमार (26) निवासी हिराह, टिक्करी, वाहन मालिक सुरजीत सिंह (35) निवासी टिक्करी और श्याम सिंह (48) निवासी धनत, टिक्करी के तौर पर हुई है। ये तीनों शुक्रवार देर शाम उत्तराखंड के पाटन गांव में गोबर खाद लेने गए थे। शनिवार सुबह खाद लेकर वापस टिकरी जा रहे थे। हादसा इतना खतरनाक था कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। इसके बाद पुलिस, स्थानीय ग्रामीणों व एसडीआरएफ की टीम ने शव सड़क तक पहुंचाए। राजस्व निरीक्षक राजेंद्र लाल ने बताया कि घटनास्थल पर ही गाड़ी सवार तीनों की मौत हो चुकी थी।
सहकारिता सचिव सी. पालरासु ने आज यहां बताया कि प्रदेश के सहकारिता विभाग ने राज्य की प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के लिए नई पहल की हैं। इसके अन्तर्गत हिमाचल ने भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के साथ मिलकर, सहकारी क्षेत्र में लगभग 40 नई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य राज्य के सहकारी क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य सहकारी समितियों के उपनियमों से लेकर व्यवसाय विविधीकरण तक की संपूर्ण संरचना में संशोधन करना है। इसके दृष्टिगत जन औषधि केंद्रों के रूप में शामिल प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद सस्ती दरों पर जेनेरिक दवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। राज्य में लगभग 50 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों ने जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि सामान्य सेवा केंद्र (कॉमन सर्विस सेंटर) योजना के रूप में यह समितियां लोकमित्र केंद्रों के रूप में कार्य करेंगी, जो ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्र समयबद्ध और सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाएगी। इन केंद्रों के माध्यम से टेली-लॉ और टेली-मेडिसिन जैसी विभिन्न सेवाएं भी उपलब्ध हैं। प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में 80 से अधिक अधिक समितियां कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के लिए एलपीजी और पैट्रोल पंप खुदरा लाइसेंस भी खोले गए हैं। पालमपुर की एक सोसायटी ने भी इस योजना के अंंतर्गत आवेदन किया है और अगले 10 दिनों के भीतर कई अन्य सोसायटी द्वारा आवेदन करने की उम्मीद है। राज्य में अधिकांश सभाओं द्वारा आदर्श उपनियमों को भी अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि विभाग प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को कम्प्यूटरीकृत करने की दिशा में कार्य कर रहा है। अगले 2 महीने के भीतर हार्डवेयर की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी और सभी चिन्हित सोसायटियों को उनके दैनिक कारोबार के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाएं जाएंगे। उन्होंने कहा कि अनाज भंडारण कार्यक्रम में जिला ऊना की एक सोसायटी की पहचान की गई है और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश में लगभग 1300 समितियां प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में कार्य कर रही हैं। इसके अलावा राज्य के सभी जिलों में जिला सहकारी विकास समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं जिसमें विभिन्न विभाग सहकारी क्षेत्र के विभिन्न मामलों को सुलझातेे हैं। उन्होंने राज्य की सभी प्राथमिक समितियों से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी जैविक समिति लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति की सदस्यता प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में आगे आने की अपील की है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज सायं अपने सरकारी आवास ओक ओवर से सचिवालय पैदल पहुंचे। रास्ते में मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से संवाद किया और उनका हालचाल जाना। इस दौरान लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा और पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी भी उनके साथ थे।
-ट्रैकिंग डिवाइस व गाइड की सुविधा देने की हो रही तैयारी -ट्रैकर्स के लापता होने की घटनाओं पर लगेगा अंकुश मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश में साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा ट्रैकिंग के शौकीनों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार ठोस कदम उठा रही है। ट्रैकर्स के लापता होने की घटनाओं को कम करने के दृष्टिगत राज्य सरकार एक नई पहल करने जा रही है। ट्रैकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग को प्रदेश में ट्रैकिंग रूट्स अधिसूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। वन विभाग पहली बार मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप तथा उस रूट पर उपलब्ध ठहरने तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह ट्रैकिंग रूट्स अधिसूचित करेगा। विभाग इन रूट्स को ईको-टूरिज्म सोसाइटी के माध्यम से ट्रैकर्स को एक पैकेज के रूप में पेश करेगा, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और बेहतर सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। पैकेज में ट्रैकिंग रूट से संबंधित पूरी जानकारी प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैकर्स कई बार रूट पर जाकर भटक जाते हैं और उनके साथ अनहोनी घटनाएं भी सामने आती रहीं हैं। उन्हें ढूंढने के लिए राज्य सरकार को बचाव अभियान चलाने पड़ते हैं, जिसमें काफी संसाधन लगते हैं। ऐसे में वन विभाग ट्रैकर्स की सुविधा को देखते हुए इन रूट्स को अधिसूचित करेगा, जिससे ट्रैकर्स की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। ट्रैकिंग पर जाने से पहले इच्छुक व्यक्ति को पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा। उन्हें अनिवार्य रूप से ट्रैकिंग डिवाइस दिए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनकी भौगोलिक स्थिति का पता लगाने में आसानी हो और उन्हें समय पर मदद पहुंचाई जा सके। वन विभाग ट्रैकर्स को गाइड की भी सुविधा उपलब्ध करवाएगा। इन गाइड्स का भी पंजीकरण किया जाएगा और वन विभाग उन्हें प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में पर्यटन की मुख्य भूमिका है इससे राज्य सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है, वहीं हजारों परिवारों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी उपलब्ध होते हैं। ऐसे में राज्य सरकार प्रदेश में धार्मिक, साहसिक तथा ईको टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है। सरकार ने प्रतिवर्ष प्रदेश में 5 करोड़ पर्यटकों के आगमन का लक्ष्य रखा है तथा इसी के अनुरूप आधारभूत सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं।
हिमाचल प्रदेश में करीब 400 करोड़ रुपये का क्रिप्टो करेंसी फ्रॉड हुआ है। घोटाले में 2.5 लाख लोगों को चूना लगाया गया है। शुक्रवार को धर्मशाला में पत्रकारों से चर्चा के दौरान राज्य पुलिस प्रमुख संजय कुंडू ने बताया कि शातिरों ने इन सभी लोगों से 400 करोड़ रुपए का घोटाला किया है। उन्होंने यह बात मामले की जांच कर रहे एसआईटी की जांच से मिले नतीजों के आधार पर कही है। डीजीपी कुंडू ने बताया कि पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। इस घोटाले का सरगना मंडी जिले के सरकाघाट का रहने वाला सुभाष देश छोड़कर भाग चुका है। एसआईटी मामले के दो आरोपियों हेमराज और सुखदेव से पूछताछ कर रही है। डीजीपी ने बताया कि पुलिस को मामले में मोबाइल फोन, लैपटॉप, मर्सीडीज, टाटा कार और 10 हजार डॉलर की करेंसी भी हाथ लगी है। पुलिस आरोपियों की संपत्ति भी सीज कर रही है। डीजीपी कुंडू ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे झांसों में न फंसें। यह बहुत बड़ा फ्रॉड इससे पहले हिमाचल एसआईटी ने इस मामले में गुजरात से हेमराज और सुखदेव को गिरफ्तार किया था। कुंडू ने कहा कि यह बहुत बड़ा मामला है और इसके तार देश के अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं। एसआईटी मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ा रही है। फ्रॉड में महिला कॉन्स्टेबल का नाम इस फ्रॉड में पुलिस कनेक्शन को लेकर रोजाना नए-नए खुलासे हो रहे है। मोहाली में हिमाचल के हैड कॉन्स्टेबल की गिरफ्तारी के बाद अब हमीरपुर की एक महिला कॉन्स्टेबल के खिलाफ मंडी साइबर थाना में शिकायत पहुंची है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि महिला कॉन्स्टेबल ने पैसे दोगुना करने पर लाखों रुपये निवेश करवा दिए, लेकिन वापस कुछ नहीं मिला।
-आईजीएमसी के वार्षिक कार्यक्रम 'स्टिमुलस' के समापन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल, शिमला के वार्षिक कार्यक्रम 'स्टिमुलसÓ के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि 30 नवंबर तक राज्य में प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य पहचान-पत्र (हेल्थ आईडी कार्ड) तैयार कर लिया जाएगा, जिसमें मरीज की स्वास्थ्य सम्बंधी पूरी जानकारी होगी। यह चार दिवसीय कार्यक्रम 'स्टिमुलसÓ 10 अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रही है। आईजीएमसी शिमला में आगामी एक वर्ष में उच्च स्तरीय अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में डिपार्टमेंट ऑफ इमरजेंसी मेडिसन स्थापित किया जा रहा है। सुपर स्पेशएलिटी अस्पताल चमयाणा और आईजीएमसी शिमला में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गम्भीर बीमारियों के उपचार के लिए प्रदेश सरकार पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है और आधुनिक उपकरण भी स्थापित किए जा रहे हैं। युवा चिकित्सकों को प्रोत्साहित करते हुए ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि जीवन में हार से घबराने की आवश्यकता नहीं होती तथा सभी प्रशिक्षु लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कहा कि मेहनत के बिना जीवन में किसी भी मुकाम तक नहीं पहुंचा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए अपने छात्र काल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि कॉलेज के दिनों से ही वह राजनीति से जुड़ गए तथा इसी क्षेत्र में आगे जाने का लक्ष्य रखा था। छात्र जीवन में उन्होंने कई चुनाव लड़े और शिमला नगर निगम में पार्षद भी रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के अनेक पदों पर उन्होंने कई उत्तरदायित्वों का निर्वहन किया और वर्ष 2003 में विधायक का चुनाव जीता। कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल प्रदेश का अध्यक्ष बनने का भी उन्हें अवसर दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आईजीएमसी शिमला की एससीए को 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार भी वितरित किये। इस अवसर पर आईजीएमसी के डॉक्टरों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को आपदा राहत कोष में 6.11 लाख रुपए का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने 15 से 17 मार्च, 2024 तक मनाली में आयोजित होने वाली वार्षिक नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन का पोस्टर भी जारी किया। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम अपने छात्र जीवन काल की याद दिलाते हैं। ऐसे आयोजनों से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की नसीहत देते हुए कहा कि यह हमारे सामने आज सबसे बड़ी चुनौती है। नशे के कारण समाज में नई तरह की मुश्किलें सामने आ रही हैं। उन्होंने आईजीएमसी के स्थापना दिवस पर भी बधाई दी। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी, प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, मेयर सुरेंद्र चौहान, डिप्टी मेयर उमा कौशल, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी तथा अन्य गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।
युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार हिमाचल की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कृत संकल्प है। हाल ही में चीन के हवांगझाऊ में आयोजित एशियन खेलों के पदक विजेता हिमाचली खिलाड़ियों को सरकार द्वारा लगभग एक करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 29 सितंबर से 8 अक्तूबर तक आयोजित एशियन खेलों में हिमाचल के छह खिलाड़ी पदक विजेताओं में शामिल रहे, जबकि सात अन्य खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में भाग लिया। उन्होंने कहा कि कबड्डी महिला वर्ग में सिरमौर जिला की रितु नेगी, पुष्पा और कुमारी सुषमा, बिलासपुर की कुमारी निधि शर्मा, सोलन की कुमारी ज्योती तथा कबड्डी पुरूष वर्ग में ऊना जिला के विशाल भारद्वाज स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे हैं। इन सभी छह खिलाड़ियों को 15-15 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बिलासपुर जिला की दीक्षा कुमारी, प्रियंका ठाकुर व शालिनी ठाकुर, सोलन जिला की निधि शर्मा, मिताली शर्मा, भावना एवं मेनका ने हैंडबॉल खेल स्पर्धा में देश का प्रतिनिधित्व किया। इन सभी सात खिलाड़ियों को एक-एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इसके अतिरिक्त युवा सेवाएं एवं खेल विभाग द्वारा वर्ष 2022 में राष्ट्र मंडल खेलों में पदक जीतने वाले तीन खिलाड़ियों रेणुका ठाकुर, विकास ठाकुर तथा आशीष कुमार को पुरस्कार स्वरूप 63 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।
-मुख्यमंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर दिया सम्मान -स्कूल सेफ्टी मोबाइल ऐप का किया शुभारंभ -कहा, राज्य में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं का अध्ययन आवश्यक -सीबीआरआई रुड़की और हिमकॉस्टे के मध्य समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर आज शिमला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आपदा के दौरान बेहतरीन कार्य करने वाले विभागों और अधिकारियों को सम्मानित किया। साथ ही संकट की इस घड़ी में प्रदेशवासियों एवं विभिन्न संगठनों के प्रयासों की भी सराहना की। आपदा के दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के बेहतर कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावितों की मदद में सभी ने अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है। राज्य सरकार द्वारा राहत एवं बचाव अभियान के लिए उन्हें सभी तरह के संसाधन उपलब्ध करवाए गए। इसके अतिरिक्त स्थानीय लोगों एवं स्वयंसेवी संगठनों का भी भरपूर सहयोग मिला है। इस आपदा में हिमाचली लोगों के परस्पर सहयोग तथा संकट का एकजुट होकर सामना करने का जीवट भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं का अध्ययन करने की भी आवश्यकता है, क्योंकि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के साथ-साथ मैदानी क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षित भवन निर्माण के दृष्टिगत विभिन्न उपायों पर चर्चा के साथ ही इन्हें अमल में लाने के लिए कड़े कानून बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार मानसून में भारी तबाही हुई है, लेकिन प्रशासन के सामूहिक प्रयासों से विभिन्न स्थानों में फंसें 75 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला गया और 48 घंटों में सभी आवश्यक सेवाएं अस्थाई रूप से बहाल की गईं। ट्रैफिक में फंसे लोगों के लिए खाने-पीने सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रभावित परिवारों के लिए 4500 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज घोषित किया गया है। बेघर हुए परिवारों को किराए के आवास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 5 हजार और शहरी क्षेत्रों में 10 हजार रुपए प्रदान करने के साथ-साथ नि:शुल्क राशन भी दिया जा रहा है। आपदा में भूमिहीन हुए परिवारों को घर बनाने के लिए शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा भूमि देने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भीषण आपदा का दृढ़ता के साथ सामना करने के बाद अब राज्य सरकार हिमाचल को फिर से विकास की राह पर आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश पर 75 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है, लेकिन सरकार केवल कर्ज के सहारे ही नहीं चल सकती। ऐसे में राज्य सरकार अपने आर्थिक संसाधन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले चार वर्षों में हिमाचल को आत्मनिर्भर तथा दस वर्षों में देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्कूल सेफ्टी मोबाइल ऐप का शुभारम्भ भी किया। इस ऐप के माध्यम से स्कूल आपदा प्रबंधन की योजना बना सकेंगे और उसी के अनुरूप मॉकड्रिल का आयोजन कर सकेंगे, जिसकी निगरानी उच्च स्तर पर भी आसानी से की जा सकेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद (हिमकॉस्टे) के मध्य एक समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किया गया। सीबीआरआई की ओर से एसके नेगी और हिमकॉस्टे की ओर से डी.सी. राणा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भूकंप से भवनों की सुरक्षा तथा ग्रामीण हिमाचल में राज मिस्त्रियों की प्रशिक्षुता से संबंधित पुस्तक एवं मार्गदर्शिका का भी विमोचन किया। प्रधान सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा ने समर्थ कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की और इस दौरान आयोजित गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। विशेष सचिव डीसी राणा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र शर्मा, उप-महापौर उमा कौशल, उपायुक्त आदित्य नेगी, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
-उप मुख्यमंत्री ने निजी बस ऑपरेटर्ज के साथ हुई बैठक में की घोषणा उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज यहां प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर्ज के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्य कर रही है। सरकार प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर्ज के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य में निजी बस संचालकों के लिए 234 रूट और टैंपो ट्रैवलर्ज के लिए 100 से अधिक नए रूट संचालित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण हितैषी सतत् विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए राज्य में निजी एवं सरकारी क्षेत्रों के सहयोग से ई-वाहनों को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ई-बसों, ई-ट्रकों और ई-टैक्सी की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान कर रही है। उन्होंने सरकार की इस मुहिम में निजी बस ऑपरेटरों को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान भी किया। सरकार द्वारा 26 मार्गों पर ई-बसों से संचालन की अनुमति शीघ्र प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन बसों के लिए चार्जिंग सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी बस ऑपरेटज़र् की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में नियमों के अनुरूप रूट परमिट दिए जायेंगे और टैक्सियों के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा रूट परमिट जारी किए जायेंगे। आरटीओ स्तर पर स्थानीय निजी बस ऑपरेटज़र् के साथ नियमित तौर पर बैठकें आयोजित की जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश में अनाधिकृत रूप से गाड़ियों के संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए, ताकि इससे प्रदेश के राजस्व को होने वाली हानि को रोका जा सके। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के राजस्व में वृद्धि करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है और परिवहन विभाग द्वारा वीआईपी नम्बरों की बिक्री से छह करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है और भविष्य में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है। प्रदेश के निजी बस ऑपरेटज़र् के अध्यक्ष राजेश पराशर ने इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री को सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रधान सचिव परिवहन आरडी. नजीम, निदेशक परिवहन अनुपम कश्यप, प्रदेश के निजी बस ऑपरेटर्ज के प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
-मुख्यमंत्री ने नागरिक एकजुटता मार्च को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज ओक ओवर से अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस के अवसर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सौजन्य से आयोजित नागरिक एकजुटता मार्च को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मार्च रिज पर संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा से बेहतर ढंग से निपटने के लिए जागरूकता आवश्यक है क्योंकि सही जानकारी होने पर चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भूकंप सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है। उन्होंनेे कहा कि हिमाचल ने इस वर्ष मानसून में भारी बारिश तथा भूस्खलन से आई आपदा का डटकर मुकाबला किया है तथा इस मुश्किल घड़ी में सभी ने एकजुटता का परिचय दिया जोकि हमारी हिमाचली संस्कृति एवं संस्कारों में भी शुमार है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों की मदद के लिए स्थापित आपदा राहत कोष-2023 में लोगों के सहयोग से अभी तक लगभग 222 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त हो चुकी है। अंशदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लक के पैसे जमा कर इस कोष के लिए दान किए। वहीं सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों, विधायकों और समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर अपनी क्षमता के अनुसार इसमें अंशदान किया है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि अपने जीवन काल में उन्होंने इससे बड़ी आपदा नहीं देखी, जिसमें लगभग 500 से ज्यादा लोग काल का ग्रास बने, 16000 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा और प्रदेश में 12 हजार करोड़ से भी अधिक संपत्ति का नुकसान हुआ है। इस अभूतपूर्व त्रासदी को देखते हुए राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 4500 करोड़ रुपए का विशेष राहत पैकेज जारी किया है, जिसमें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घर का मुआवजा 1.30 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए किया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार प्रभावितों को घर बनाने के लिए 280 रुपए प्रति बोरी की दर से सीमेंट तथा नि:शुल्क बिजली-पानी कनेक्शन सुविधा उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर प्रभावित तक राहत सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं और मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने आपदा के बीच रहकर प्रभावितों की मदद की। देश के इतिहास में शायद पहली बार किसी मंत्री और मुख्य संसदीय सचिव ने चंद्रताल झील के पास फंसे लगभग 300 लोगों को निकालने के लिए ग्राउंड जीरो पर जाकर माइनस तापमान में एक बेहद मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो वर्तमान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और लोगों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने रिज मैदान पर आपदा उपकरणों, ड्रोन, संचार उपकरणों, निर्माण की सुरक्षित प्रौद्योगिकी तथा प्राकृतिक आपदाओं से बचाव में उपयोगी तकनीकों पर आधारित विभिन्न विभागों की एक प्रदर्शनी का शुभारंभ भी किया। यह प्रदर्शनी 15 अक्तूबर तक चलेगी। प्रधान सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 15 दिन के इस अभियान के तहत आपदा प्रबंधन पर ग्राम सभाओं में भी चर्चा की गई और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से समर्थ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिवर्ष 13 अक्तूबर को यह दिवस मनाया जाता है।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, जिला एवं ब्लॉक अध्यक्षों, जिला सोशल मीडिया को-ऑर्डिनेटर जिला अत्याचार निवारण समन्वयक की विशेष बैठक 17 अक्तूबर को सुबह 11 बजे होगी। बैठक कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन शिमला में होनी निश्चित हुई है। बैठक में मुख्यातिथि स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह उपस्थित रहेंगी। आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में आगामी बैठक के बारे में कोर कमेटी के सदस्यों के द्वारा एक बैठक की गई, जिसमें कोर कमेटी के सभी सदस्यों को जिम्मेवारियां सौंपी गईं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष अमित नंदा ने आग्रह किया है कि बैठक में हिमाचल कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के सभी पदाधिकारी अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने की कृपा करें।
रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित होने वाली वर्ल्ड ग्रैपलिंग चैंपियनशिप-2023 के लिए सब जूनियर और जूनियर वर्ग में हिमाचल प्रदेश से चयनित 10 खिलाड़ियों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाथ बढ़ाए हैं। हिमाचल प्रदेश ग्रैपलिंग कमेटी के महासचिव गोपाल चंद खिलाड़ियों के साथ आज ओक ओवर में सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिए आर्थिक मदद प्रदान करने का अनुरोध करने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को उन्हें तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए और खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। यह प्रतियोगिता 17 अक्तूबर से 20 अक्तूबर तक मॉस्को में आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल के खिलाड़ियों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। राज्य के खिलाड़ियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और राज्य सरकार खेलों के लिए बुनियादी ढांचा विकसित कर रही है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेहनत व प्रतिभा से देश तथा प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। हिमाचल प्रदेश ग्रैपलिंग कमेटी के महासचिव गोपाल चंद ने मुख्यमंत्री का इस आर्थिक मदद के लिए आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में भाग में लेने वाले कुछ बच्चे गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं और सरकार की मदद के बिना वे इस बड़े आयोजन में भाग लेने से वंचित रह जाते, लेकिन मुख्यमंत्री की उदारता से इन बच्चों को अपने जीवन का एक सुनहरी अवसर मिलने जा रहा है।
हिमाचल की सुक्खू सरकार ने प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों के अधिग्रहण पर रोक लगा दी है। मंत्रिमंडल ने सरकारी शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने के लिए यह बड़ा फैसला लिया है। सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाले कई शिक्षण संस्थानों का हर वर्ष अधिग्रहण होता रहा है। सुक्खू सरकार ने इस व्यवस्था को अब बदल दिया है। निजी स्कूलों-कॉलेजों की जगह सरकार अपने संस्थानों में ही हर सुविधा उपलब्ध करवाएगी। मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए विभागीय अधिकारियों की ओर से प्रस्तुति दी गई। इस दौरान कहा गया कि सरकार से अनुदान प्राप्त करने वाले निजी स्कूलों और कॉलेजों का अधिग्रहण नहीं करना चाहिए। सरकार की ओर से जितना बजट इन निजी शिक्षण संस्थानों पर खर्च किया जाता है, उतनी राशि को सरकारी शिक्षण संस्थानों पर खर्च किया जाए तो सरकारी स्कूल-कॉलेज मजबूत होंगे। बैठक के दौरान सरकारी स्कूलों में लगातार कम हो रही विद्यार्थियों की संख्या पर चिंता जताई गई। मंत्रिमंडल को बताया गया कि सरकारी स्कूलों में 46 फीसदी और निजी स्कूलों में 44 फीसदी विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों को अगर समय रहते मजबूत नहीं किया गया तो यहां विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम हो जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि निजी स्कूलों और कॉलेजों का अधिग्रहण करने पर स्टाफ को भी समायोजित करना पड़ता है। सरकार पर यह अतिरिक्त खर्च आ जाता है। इन सभी बिंदुओं पर चर्चा करने के बाद मंत्रिमंडल ने भविष्य में निजी स्कूलों और कॉलेजों के अधिग्रहण पर रोक लगाने का फैसला लिया।
-जनजातीय सलाहकार परिषद की 48वीं बैठक में बोले मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज यहां हिमाचल प्रदेश जनजातीय सलाहकार परिषद की 48वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का निपटारा करने को विशेष प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि परिषद की बैठकों के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों की समस्याएं राज्य सरकार के ध्यान में आती हैं, इसलिए ऐसी बैठकों का आयोजन निरंतर किया जाएगा ताकि वहां के लोगों की आशाओं एवं आकांक्षाओं के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकें। राज्य सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से लाहौल-स्पीति जिला के स्कूलों की विंटर क्लोजिंग पर विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है और इसके लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चौबीस घंटे विद्युत आपूर्ति के लिए सौर ऊर्जा के दोहन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि किन्नौर की हंगरंग घाटी में दो सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं। राज्य सरकार ने 250 किलोवाट से 2 मैगावाट तक की सौर परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए युवाओं को 40 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान किया है तथा जनजातीय क्षेत्र के युवाओं को सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इन सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली की आगामी 25 वर्षों तक खरीद करेगी, ताकि युवाओं के लिए एक स्थिर आय का स्रोत सुनिश्चित किया जा सके। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि लाहौल-स्पिति में पवन ऊर्जा के दोहन के लिए 84 मेगावाट क्षमता को चिन्हित किया गया है तथा इसके दोहन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विंड एनर्जी के साथ मामला उठाया गया है और इस संबंध में शीघ्र ही संस्थान की एक टीम काजा का दौरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं जनजातीय क्षेत्रों का निरंतर दौरा कर रहे हैं और वर्तमान राज्य सरकार ने हिमाचल दिवस का पहला राज्य स्तरीय कार्यक्रम काजा में मनाया, जो राज्य सरकार की जनजातीय क्षेत्रों के विकास के प्रति वचनबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुसार राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्र की महिलाओं को अधिक अधिकार देने पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़कें बनाने के लिए सुरंगों के निर्माण पर बल देने के निर्देश दिए। उन्होंने जनजातीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए विभागों को गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए ताकि राज्य सरकार, सरकारी संस्थानों को और सुदृढ़ कर सके। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन का आधारभूत ढांचा भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता को निहार सकें। उन्होंने कहा कि किन्नौर के कड़छम में निर्मित कृत्रिम झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू करने के लिए ट्रायल करवाया गया है और जल्द ही यहां पर शीघ्र ही जल क्रीड़ाएं शुरू की जाएंगीं ताकि स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके साथ ही जिला किन्नौर में धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तेमसो झील में भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा तथा राष्ट्रीय राजमार्ग-5 से झील को संपर्क मार्ग से जोड़ने पर विचार किया जाएगा, ताकि यहां पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। इसके साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में हेलीपोर्ट का निर्माण भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के अधिकारियों को जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर परियोजनाएं बनाकर उन्हें समयबद्ध धरातल पर उतारने के निर्देश दिए और कहा कि जनजातीय क्षेत्र के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। राजस्व एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि नई परिषद का गठन मई 2023 में किया गया था, लेकिन प्रदेश में भारी बारिश से आई आपदा के कारण इस बैठक के आयोजन में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षत्रों का दौरा कर वहां की समस्याओं एवं प्राथमिकताओं को समझा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है और बैठक में इन क्षेत्रों की ज्वलंत समस्याओं का उठाया जाता है तथा राज्य सरकार द्वारा उस पर कार्यवाही की जाती है। उन्होंने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठकें नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने जनजातीय सलाहकार परिषद के सभी मनोनीत सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ भी दिलाई। बैठक के दौरान सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं से अवगत करवाया, जिन पर विस्तार से चर्चा की गई।
-मुख्यमंत्री ने जुन्गा में किया शिमला फ्लाइंग फेस्टिवल का शुभारंभ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज से 15 अक्तूबर, 2023 तक शिमला जिला के कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र के जुन्गा में आयोजित शिमला फ्लाइंग फेस्टिवल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ऐसे आयोजनों से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अवसर उपलब्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला का बीड़-बिलिंग क्षेत्र पैराग्लाइडिंग के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। प्रदेश सरकार हिमाचल के वातावरण के अनुकूल हरित उद्योगों को बढ़ावा दे रही है, जिसमें पर्यटन भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए व्यापक योजना तैयार की है। कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने की घोषणा के साथ ही अन्य अनछुए गंतव्यों को विकसित किया जाएगा। साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने में इस तरह के आयोजन सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा के साथ ही उन्हें विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार कृतसंकल्प है। आपदा से उबरने के साथ ही हिमाचल पुन: पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में इस बार आपदा के दौरान बहुत अधिक नुकसान हुआ है और कई लोगों ने अमूल्य जीवन खोया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं विभिन्न आपदाग्रस्त क्षेत्रों में गए और प्रदेश सरकार ने तत्परता से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आपदा प्रभावितों की मदद के लिए 4500 करोड़ रुपये का विशेष राहत पैकेज जारी किया है। इसके तहत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों पर पहले मिलने वाले 1.30 लाख रुपए की आर्थिक मदद को बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही कच्चे और पक्के मकान को आंशिक नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे को बढ़ाकर एक लाख रुपये किया है। लोगों को अपना घर दोबारा बनाने के लिये राज्य सरकार 280 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से सीमेंट उपलब्ध करवाएगी। इसके साथ ही बिजली और पानी का कनेक्शन भी राज्य सरकार नि:शुल्क लगाएगी। राहत शिविरों में रह रहे लगभग तीन हजार परिवारों को राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में किराए का मकान लेने के लिए 5000 रुपए और शहरी क्षेत्रों में 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता भी दे रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पर 75 हजार करोड़ का ऋण और कर्मचारियों की 10 हजार करोड़ रुपए की देनदारियां होने के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से प्रभावित परिवारों की भरपूर मदद कर रही है। कार्यक्रम का आयोजन 'द ग्लाइड इनÓ कंपनी और पर्यटन विभाग मिलकर कर रहे हैं। 'द ग्लाइड इनÓ कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण रावत ने उत्सव के बारे में विस्तृत जानकारी दी। चार दिन तक चलने वाले इस उत्सव में देश-विदेश के 51 पैराग्लाइडर्स भाग ले रहे हैं। उन्होंने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की। प्रबन्ध निदेशक, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम अमित कश्यप ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज राजभवन में शशांक मणि की पुस्तक मिडल ऑफ डायमंड इंडिया का विमोचन किया। इस मौके पर लेडी गवर्नर जानकी शुक्ल भी मौजूद रहीं। राज्यपाल ने शशांक मणि के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मिडल आफ डायमंड इंडिया के माध्यम से लेखक ने भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीति का केंद्र उच्च वर्ग से परिवर्तित कर देश के उभरते मध्य वर्ग पर केंद्रित करने का साहसिक प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक हाशिए पर रहने वाले उन लोगों की अनसुनी कहानियों को उजागर करती है जिन्हें उनके स्थान और भाषा के कारण लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया है। शुक्ल ने कहा कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को भारत को एकजुट करने के लिए काम करने की आवश्यकता है और शशांक मणि द्वारा संचालित जागृति यात्रा यही काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत का अतीत गौरवशाली है और हमारी आध्यात्मिकता ने किसी न किसी रूप में समाज को एकजुट किया है। उन्होंने कहा कि हमारे ग्रामीण परिवेश में सामाजिक समरसता की मिसाल स्पष्ट रुप से दिखाई देती है। हर वर्ग के लोग एक साथ रहते हैं और यही भारत की ताकत है। यदि हम भारत को समझना चाहते हैं तो हमें राम को समझना होगा, क्योंकि भगवान राम ने समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आध्यात्मिकता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक देश के विकास में मध्यम वर्ग के योगदान और उनकी ताकत की भूमिका पर भी प्रकाश डालती है साथ ही यह भारत के प्रति एक नई सोच को भी प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भारत के इतिहास के बारे में भी गहराई से इंगित करती है जो उद्यमिता पर आधारित था और उस काल में देश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत थी। उन्होंने कहा कि उद्यमिता की मदद से हम मध्यम वर्ग को आगे ले जा सकते हैं और विकसित भारत के सपनों को पूरा कर सकते हैं। इस अवसर पर शशांक मणि ने राज्यपाल एवं लेडी गवर्नर का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 13 अध्याय से अधिक की यह पुस्तक अमृत काल पर भारत की एक नई दृष्टि को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि इन 13 अध्यायों में चार प्रमुख अवधारणाएं हैं और इन्हें कहानियों, उपाख्यानों और व्यापक शोध के माध्यम से प्रकाश में लाया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में पिछले 15 वर्षों से देश भर में आयोजित उनकी जागृति यात्रा, दुनिया की सबसे बड़ी रेल यात्रा का भी जिक्र है, जिसमें अब तक देश के 7500 युवाओं को प्रशिक्षित कर उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा एवं अन्य गणमान्य लोग भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों-बागवानों को लाभान्वित करने के निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) प्रदेश के बागवानों के लिए वरदान साबित होगी। यह बात बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां उद्यान विभाग और विभिन्न बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आरडब्ल्यूबीसीआईएस की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि योजना वास्तविक आधार पर होनी चाहिए। राज्य में बागवान फलों की खेती में उच्च घनत्व वाले पौधों की ओर रुख कर रहे हैं। वर्तमान टर्म शीट मानक पौधों के अनुसार बनाई गई है लेकिन इसे उच्च घनत्व वाले पौधों के लिए अद्यतन किया जाना चाहिए। ताकि, बागवानों को वास्तविक समय और परिस्थितियों के अनुसार योजना के तहत लाभ प्रदान किया जा सके। दावों को प्रमाणित करने के लिए किसानों को मौसम आधारित डेटा भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जगत सिंह नेगी ने कहा कि उद्यान विभाग को शीघ्र टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इस योजना से बागवानों को उनकी फलों की फसल को मौसम से होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलेगी। राज्य में तीन क्लस्टर हैं और प्रत्येक क्लस्टर में योजना के तहत चार जिले शामिल हैं। योजना में पहली बार अनार, लीची और अमरूद की फसल शामिल की जाएंगी। निदेशक उद्यान संदीप कदम, हिमाचल प्रदेश शिवा परियोजना के निदेशक देवेेंद्र ठाकुर, संयुक्त निदेशक उद्यान हेम चंद शर्मा, उद्यान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, प्रबंधक एचडीएफसी ईजीआरओ जीआईसी पार्थ शर्मा, प्रबंधक (विपणन) इफको-टोकियो जीआईसी अंकुश गुप्ता, प्रबंधक एआईसी जी.जी. राजू, राज्य प्रबंधक एसबीआई-जीआईसी सुप्रिया धोटा और राज्य समन्वयक क्षेमा जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड अरुण कुमार बैठक में उपस्थित थे।
-जल रक्षकों, मल्टी टास्क वर्कर्स, पैरा फिटर तथा पैरा पंप ऑपरेटर के मानदेय में बढ़ोतरी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में वन विभाग की 'वन मित्र' योजना को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया, जिसके तहत 2061 वन बीटों में एक-एक वन मित्र को लगाया जाएगा। जमीनी स्तर के संस्थानों को शामिल करके वन क्षेत्रों की सुरक्षा, संरक्षण और विकास में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वन विभाग में अनुबंध के आधार पर वन रक्षकों के 100 रिक्त पदों को भरने की मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल ने जल शक्ति विभाग के जल रक्षकों, बहुउद्देश्यीय कार्यकर्ताओं, पैरा फिटर तथा पैरा पंप ऑपरेटरों के मानदेय में 200 रुपये की वृद्धि करने का निर्णय लिया। बैठक में जल शक्ति विभाग के जल रक्षकों, बहु उद्देशीय कार्यकर्ताओं, पैरा फिटर और पैरा पम्प ऑपरेटर के मानदेय को 500 रुपये मासिक बढ़ाकर क्रमशः 5000 रुपये, 4400 रुपये, 6000 रुपये और 6000 रुपये करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने ऊना जिला में श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत 76.50 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मोड में बाबा माई दास भवन पार्किंग चिन्तपूर्णी से मंदिर तक यात्री रोपवे प्रणाली स्थापित करने को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी प्रदान की। परिवहन विभाग में 15 ई-टैक्सियां किराए पर लेने को मंजूरी मंत्रिमंडल ने परिवहन विभाग में 15 ई-टैक्सियां किराए पर लेने को मंजूरी पदान की। बैठक में राज्य के सभी जिलों में आपात स्थिति के दौरान वैकल्पिक संचार के लिए एमेच्योर और सामुदायिक रेडियो को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया। इससे सूचना स्रोतों, आपातकालीन प्रबन्धकों और आपदा या आपातकालीन स्थितियों से प्रभावित लोगों के बीच प्रभावी सूचना आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा। बैठक में सीसे (लैड) पर अतिरिक्त माल कर 25 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से कम करने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल ने प्रदेश में लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा के लिए राज्य में निजी संचालकों के लिए 234 रूट और टैम्पो ट्रेवलर्ज के 100 अतिरिक्त रूट प्रदान करने का निर्णय लिया। बैठक में परिवहन विभाग के यातायात निरीक्षकों, मोटर वाहन निरीक्षकों, वरिष्ठ मोटर वाहन निरीक्षकों तथा पुलिस विभाग के सहायक उप-निरीक्षकों व हैड कांस्टेबल को मोटर वाहन अधिनियम-1988 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों को कम करने के लिए नामित प्राधिकारी घोषित करने की भी मंजूरी दी। मंत्रिमंडल ने आपदा के कारण बेघर हुए लोगों और जिन लोगों के पास नया घर बनाने के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं है उन्हें शहरी क्षेत्र में दो बिस्वा भूमि और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा भूमि प्रदान करने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल ने प्रदेश में आपदा प्रभावित परिवारों के लिए 30 सितम्बर, 2023 को घोषित विशेष राहत पैकेज को मंजूरी प्रदान की। इस विशेष पैकेज के तहत घर के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले 1.30 लाख रुपये के मुआवजे को साढ़े पांच गुणा बढ़ाकर सात लाख रुपये किया गया है। इसके अलावा कच्चे मकान के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले मुआवजे को 25 गुणा बढ़ाकर 4000 रुपये से एक लाख रुपये तथा पक्के घर के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले मुआवजे को साढ़े 15 गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। दुकान तथा ढाबा के क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले मुआवजे को 25000 रुपये से चार गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। प्रदेश सरकार गऊशाला को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी जाने वाली राशि को 3000 रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। प्रदेश सरकार किराएदारोें के सामान के नुकसान के लिए दी जाने वाली 2500 रुपये की राशि को 20 गुणा बढ़ाकर 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करेगी। दुधारू तथा भार उठाने वाले पशुओं की क्षति पर 55 हजार जबकि बकरी, सुअर, भेड़ तथा मेमने की मुआवजा राशि 6000 रुपये प्रति पशु की दर से प्रदान की जाएगी। कृषि तथा बागवानी भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए दी जाने वाली राशि मुआवजा राशि को 3615 रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति बीघा कर दिया है। फसलों कोे हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी जाने वाली राशि को 500 रुपये प्रति बीघा को आठ गुणा बढ़ाकर 4000 रुपये किया गया है। कृषि तथा बागवानी भूमि से सिल्ट हटाने के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 1384.61 प्रति बीघा से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है। यह विशेष पैकेज 24 जून, 2023 से 30 सितम्बर, 2023 तक प्रदान किया जाएगा। मंत्रिमंडल ने शिमला विकास योजना को संशोधित करने का निर्णय लिया। सड़क से ऊपर स्थित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में नवबहार से रामचन्द्रा चौक से मछीवाली कोठी से क्राइस्ट चर्च से लक्कड़ बाजार से आईजीएमसी से संजौली चौक से नवबहार तक जहां पेड़ नहीं हैं वहीं निर्माण की अनुमति दी जाएगी। शिमला विकास योजना के तहत ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में सिर्फ उन्हीं प्लाटों पर आवासीय निर्माण को अनुमति प्रदान की जाएगी जहां पेड़ नहीं हैं। मंत्रिमंडल ने नाला और खड्ड से क्रमशः पांच और सात मीटर की दूरी पर निर्माण को अनुमति देने के लिए हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना नियमों को संशोधित करने का निर्णय लिया।
-गैर-कानूनी रूप से अर्जित संपत्ति होगी जब्त मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मादक द्रव्यों और स्वापक औषधी मन: प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार रोकथाम अधिनियम-1988 के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। उन्होंने कहा कि एसओपी मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए तैयार की गई है। इसमें आरोपी को हिरासत में लेने, हिरासत के आदेशों को निष्पादित करने और गैर-कानूनी रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की विस्तृत प्रक्रिया बताई गई है। सीएम सुक्खू ने कहा कि अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी से समाज के लिए खतरा उत्पन्न होता है जो हम सभी के लिए चिंता का विषय है। इस खतरे से निपटना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों को रोकने के लिए एक समर्पित विशेष कार्य बल कार्य कर रहा है। इस संबंध में मार्गदर्शन करने के लिए एक सलाहकार बोर्ड भी स्थापित किया गया है। सीएम सुक्खू ने कहा कि ड्रग तस्करों की गतिविधियों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ये अवैध कार्य अत्यधिक संगठित तरीके से किए जाते हैं और गुप्त रूप से ड्रग तस्करी का पैमाना काफी बड़ा होता है, इसलिए ऐसी गतिविधियों की प्रभावी रोकथाम तथा इसमें संलिप्त लोगों की धरपकड़ नितांत आवश्यक होती है। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भरत खेड़ा, पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू, सचिव गृह डॉ. अभिषेक जैन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सतवंत अटवाल और अभिषेक त्रिवेदी इस अवसर पर उपस्थित थे।
अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के अनुमोदन के बाद प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष विधायक रवि ठाकुर ने राज्य कार्यकारणी व जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां कर दी हैं। राज्य कार्यकारणी में जिला किन्नौर से देवेंद्र सिंह नेगी को सदस्य, जबकि जिला कांगड़ा के पालमपुर से जोगिंदर पाल कपूर को सोशल मीडिया का समन्वयक बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जिला सिरमौर से जगमोहन सिंह नेगी, सोलन से नर्कीत जंगमो, कांगड़ा से प्रिथी करोड़ी, लाहौल-स्पीति से नितिन बोध, शिमला ग्रामीण से आनंद प्रकाश नेगी, किन्नौर से रिंगचेन एन विष्ट, चंबा से संजीव कुमार को जिलाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है। रवि ठाकुर ने बताया है कि यह नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से प्रभावी मानी गई हैं।
हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने जानकारी दी कि धर्मशाला का सुरम्य एचपीसीए स्टेडियम 2023/24 क्रिकेट सीज़न के दौरान 7 से 12 मार्च, 2024 तक इंग्लैंड के भारत दौरे के बहुप्रतीक्षित 5वें टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा। शांत हिमालय की तलहटी में बसा एचपीसीए स्टेडियम, क्रिकेट की दो शक्तियों-भारत और इंग्लैंड के बीच एक गहन रोमांचक लड़ाई के लिए मंच तैयार करेगा। 7 से 12 मार्च तक होने वाले इस मैच में असाधारण क्रिकेट प्रतिभा और खेल कौशल का प्रदर्शन होने की उम्मीद है, जो दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को आकर्षित करेगा। आईपीएल के अध्यक्ष अरुण धूमल ने इस महत्वपूर्ण टेस्ट मैच के लिए धर्मशाला को स्थल के रूप में चुने जाने पर उत्साह खुशी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत और इंग्लैंड के बीच धर्मशाला को 5वें टेस्ट मैच की मेजबानी मिलने से हम रोमांचित हैं। एचपीसीए स्टेडियम इस रोमांचक क्रिकेट टेस्ट मैच के लिए एक शानदार पृष्ठभूमि प्रदान करता है, जो खेल और क्षेत्र दोनों की सुंदरता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करता है। एचपीसीए मेजबानी का यह प्रतिष्ठित अवसर पाकर बहुत खुश है और पूरा क्रिकेट समुदाय उत्सुकता से दो क्रिकेट दिग्गजों के बीच रोमांचक मुकाबले का इंतजार कर रहा है, जो भारत और इंग्लैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे क्रिकेट संबंधों को और मजबूत करेगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिभा सिंह ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह महंगाई पर लोगों को गुमराह करने का असफल प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा के तानाशाही निर्णयों व नीतियों की वजह से देश में महंगाई व बेरोजगारी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पूर्व भाजपा सरकार ने जिस प्रकार से सरकारी खजाने को खाली किया, वह किसी से छुपा नहीं है। 70 हजार करोड़ से ऊपर का कर्ज व 10 हजार करोड़ की देनदारियां प्रदेश कांग्रेस सरकार को भाजपा से विरासत में मिली है। प्रतिभा सिंह ने आज एक बयान में कहा कि प्राकृतिक आपदा के चलते प्रदेश विकट आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता राहत के नाम पर झूठी बयानबाजी कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहें है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भी प्रदेश की ओर अपनी पूरी आंखें मूंद रखी हंै। उन्होंने कहा कि आपदा पर भाजपा का दोहरा चरित्र है। कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश के साथ केंद्र की भाजपा सरकार भेदभाव कर रही है, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा प्रभावित लोगों के लिये 4500 करोड़ का राहत कोष स्थापित कर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है जो बहुत ही सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रभावित लोगों की पीड़ा को भलीभांति समझती है और इसी पीड़ा को दूर करने के लिये पूरी कांग्रेस सरकार दिन रात काम कर रही है। प्रतिभा सिंह ने भाजपा नेताओं को सलाह दी है कि उन्हें प्रदेश में राहत,प्रभावित लोगों के पुनर्वास के साथ साथ भूस्खलन से ध्वस्त हुई सड़कों, पुलों व भवनों के पुन:निर्माण में प्रदेश सरकार को पूरा सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भाजपा सांसदों व नेताओं को प्रधानमंत्री से मिल कर इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करवा कर विशेष आर्थिक मदद की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि भाजपा को ऊलजलूल बयानबाज़ी से कुछ भी हासिल होने वाला नही। प्रदेश की जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है और आने वाले लोकसभा चुनावों में भी उसे प्रदेश में हार का मुंह देखना पड़ेगा।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया स्पेन की राजधानी मैड्रिड तथा बर्सिलोना शहर में 6 दिनों के अध्ययन प्रवास के बाद आज स्विटजरलैंड के खूबसूरत शहर ल्यूसर्न पहुंचे। कुलदीप सिंह पठानिया 11 से 16 अक्तूबर तक स्विटजरलैंड के अध्ययन प्रवास पर रहेंगे। गौरतलब है कि कुलदीप सिंह पठानियां राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने 1 अक्तूबर को घाना की राजधानी अक्रा गए थे। सम्मेलन उपरांत पठानियां 6 अक्तूबर से स्पेन तथा स्विटजरलैंड देशों के अध्ययन प्रवास पर हैं। पठानिया स्विटजरलैंड के शहर ल्यूसर्न तथा ज्यूरिख के अध्ययन प्रवास पर रहेंगे, जबकि वे 16 अक्तूबर को इस्तांबुल होते हुए नई दिल्ली स्वदेश लौटेंगे। पठानिया के साथ विधानसभा सचिव यशपॉल शर्मा भी अध्ययन प्रवास पर हैं।
-भर्ती में बीएड डिग्री धारक शामिल नहीं होंगे टीजीटी बैचवाइज भर्ती शुरू करने के बाद शिक्षा विभाग ने जेबीटी के 2521 पदों पर भी बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस बाबत जिला उप निदेशकों को पत्र जारी कर दिया। इस भर्ती में बीएड डिग्री धारक शामिल नहीं होंगे। जिला मंडी में सबसे ज्यादा 563, कांगड़ा में 416 और शिमला में 367 जेबीटी की भर्ती होगी। सोलन में 244, चंबा में 214, बिलासपुर में 164, हमीरपुर में 97, किन्नौर में 25, कुल्लू में 98, लाहौल-स्पीति में 32, सिरमौर में 155 और ऊना में 146 पद भरे जाएंगे। प्रदेश में मात्र एक-एक शिक्षक के सहारे चल रहे स्कूलों में इन अध्यापकों की तैनाती को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में भर्ती होने वाले नए शिक्षकों की नियुक्तियों में दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी। सिर्फ एक-एक शिक्षक के सहारे किसी स्कूल को नहीं रखा जाएगा। प्राथमिक शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने यह फैसला लिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक घनश्याम चंद बताया कि जिला स्तर पर बैचवाइज भर्ती के लिए काउंसलिंग की जाएगी। जेबीटी काउंसलिंग में मांगे जाएंगे जिलों के विकल्प जेबीटी काउंसलिंग के लिए सरकार एक नई व्यवस्था करने जा रही है। पहले की तरह अब बैचवाइज काउंसंलिंग के लिए अभ्यर्थियों को अधिक जिलों में नहीं जाना होगा। अपने गृह जिला में ही अभ्यर्थी काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे। इस दौरान ही अभ्यर्थियों से दूसरे जिलों में नियुक्ति लेने के विकल्प ले लिए जाएंगे। जेबीटी के लिए चयन होने पर अभ्यर्थी पसंदीदा जिला को चुन सकेंगे। इस नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों को अधिक जिलों में काउंसलिंग के लिए दौड़ नहीं लगानी होगी। इस संदर्भ में जल्द ही शिक्षा विभाग की ओर से अधिसूचना की जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2023 तथा भारत अंतरराष्ट्रीय नृत्य एवं संगीत उत्सव के 9वें संस्करण के उपलक्ष्य में आज नई दिल्ली में एक पूर्वावलोकन (कर्टन रेजर) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रदेश सरकार और भारतीय सांस्कृतिक सम्बंध परिषद (आईसीसीआर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मुख्य संसदीय सचिव एवं अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आयोजन समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर ने दशहरा उत्सव पर एक टीज़र जारी कर एक पुस्तिका का भी विमोचन किया। इस अवसर पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव 17वीं शताब्दी से आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष 24 से 30 अक्तूबर तक यह उत्सव आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रघुनाथ जी की रथयात्रा के साथ इस उत्सव का आगाज होता है और इसमें 300 से अधिक स्थानीय देवी-देवता भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दशहरा उत्सव में 25 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय कार्निवल तथा 30 अक्तूबर को कुल्लू कार्निवल भी आकर्षण के मुख्य केंद्र होंगे। उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा में इस बार अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 20 देशों के प्रतिभागियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें रूस, रोमानिया, कजाकिस्तान, क्रोएशिया, वियतनाम, थाईलैंड, ताइवान, पनामा, ईरान, मालदीव, मलेशिया, केन्या, दक्षिणी सुडान, जाम्बिया, घाना और इथोपिया इत्यादि देशों से कलाकार शामिल हैं। सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार दशहरा उत्सव को एक वैश्विक आयोजन बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने आपदा के उपरांत युद्ध स्तर पर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का संचालन किया है। उन्होंने कहा कि चण्डीगढ़ से कल्लू तक सड़क मार्ग से यात्रा के समय में लगभग दो घण्टे की अवधि कम हुई है और चार घण्टे में यह सफर तय किया जा सकता है। इस मार्ग में 15 में से 13 यातायात सुरंगें वाहनों के लिए खुल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की सुविधा के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ और अमृतसर से कुल्लू तक हवाई सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
एचपीयू में सोशल वर्क के छात्रों ने आज हड़ताल के दूसरे दिन सोशियोलॉजी और सोशल वर्क के अध्यापकों और विभाग अध्यक्ष का घेराव किया और कक्षाओं का बहिष्कार किया। पिछले लंबे समय से सोसियोलॉजी और सोशल वर्क का डिपार्टमेंट जो साथ चलता था, आज अध्यापकों की आपसी मतभेद के कारण छात्रों को आपस में बांटने की कोशिश की जा रही है, जिसमें सोशल वर्क के छात्रों के साथ सौतेला व्यवहार लगातार किया जा रहा है। विभाग के अध्यापकों के द्वारा फ्रेशर पार्टी के नाम पर ये बोला गया कि अगर डिपार्टमेंट की चेयरमैन पार्टी में आए तो बाकी दो अध्यापक नहीं आयेंगे, इस आधार साफ है कि किस तरह से बांटने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ कुछ प्रोफेसर हैं, जो बोल रहे हंै कि सोशल वर्क डिपार्टमेंट का हिस्सा नहीं है। लेकिन सोशल वर्क विभाग फिर भी सबको साथ लेकर चल रहा है। हम वे छात्र हैं जो क्लासरूम न होने की वजह से 1 बजे क्लास लगाते और न ही हमारे लोग हॉस्टल में लंच तक कर पाते। ऐसी परिस्थिति में आज सोशल वर्क ने क्लास का बहिष्कार कर दिया और पिछले कल से अपनी कक्षा सुभा समय पर लगाने के और सोशल वर्क के लिए अलग क्लास रूम लैब और पिछले चेयरमैन के समय सोशल वर्क के कुछ सालों से 5000, 14000 फीस का जवाब भी प्रशाशन से मांगा है। हमारी विभिन्न मांगें हैं। जब तक ये पूरी नहीं तोती, तब तक क्लास का बहिष्कार किया जाएगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सांसद प्रतिभा सिंह 12 से 17 अक्तूूबर तक अपने संसदीय क्षेत्र मंडी के दौरे पर रहेंगी। कांग्रेस महासचिव कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अमित पाल सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिभा सिंह 12 अक्तूबर को दोपहर 2 बजे शिमला से मण्डी के लिये रवाना होंगी। इस दिन रात्रि विश्राम मंडी परिधि गृह रहेगा। 13 अक्तूबर को प्रतिभा सिंह बंजार विधानसभा क्षेत्र के लारजी में पार्टी कार्यकर्ता आभार में हिस्सा लेंगी। उसके बाद उदयपुर को रवाना होंगी। रात्रि विश्राम लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह रहेगा। 14 अक्तूूबर को लाहौल स्पीति विधानसभा क्षेत्र के शौर, मंडल,चेरी बंगलो व किलाड़ में जन समस्याओं को सुनेगी। इसके बाद की किलाड़ में पांगी रीजन के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक भी करेंगी। इस दिन रात्रि विश्राम किलाड़ रहेगा। 15 अक्तूबर को प्रतिभा सिंह किलाड़ में स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इस दिन भी रात्रि विश्राम किलाड़ ही रहेगा। 16 अक्टूबर को प्रतिभा सिंह सुबह 9 बजे किलाड़ से उदयपुर के लिए प्रस्थान करेंगी। अल्प विश्राम के बाद उदयपुर से मंडी के लिए रवाना होंगी। रात्रि विश्राम मंडी परिधि गृह रहेगा। 17 अक्तूबर को प्रतिभा सिंह सुबह 7 बजे मंडी से शिमला के लिए प्रस्थान करेंगी।
-प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिला रोजगार कार्यालयों से मांगी सूची हिमाचल प्रदेश में 1,409 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) की बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से 25 वर्ष पहले बीएड करने वालों को भी सरकारी नौकरी करने का मौका मिलने जा रहा है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय टीजीटी कला संकाय के 652, नॉन मेडिकल के 492 और मेडिकल के 265 पद भरेगा। टेट पास अभ्यर्थी भर्ती के लिए पात्र होंगे। अनुबंध आधार पर भर्ती होने वाले शिक्षकों को 22,860 रुपये का फिक्स वेतन मिलेगा। विभाग ने प्रदेश के दुर्गम और दूरदराज के स्कूलों में सेवाएं नहीं देने के इच्छुक अभ्यर्थियों से काउंसलिंग में न आने की अपील की है। किस कोटे में कितने पद टीजीटी के 898 पद अनारक्षित, ईडब्ल्यूएस, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग से भरे जाएंगे। इसके अलावा पूर्व सैनिक कोटे से 353, खेल कोटे से 68 और दिव्यांग कोटे से 90 पद भरे जाएंगे। 898 पदों के लिए जिला रोजगार कार्यालयों से पात्र अभ्यर्थियों की सूची मांगी गई है। बीए, बीएससी और बीकॉम में 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले और बीएड पास अभ्यर्थी भर्ती के लिए पात्र होंगे। टीजीटी के 898 पदों की भर्ती के लिए नॉन मेडिकल संकाय में बीएड करने वालों का वर्ष 1999 का बैच पात्र होगा पूर्व सैनिक कोटे के तहत टीजीटी कला में 159, नॉन मेडिकल में 130 और मेडिकल में 64 पद भरे जाएंगे। निदेशक सैनिक कल्याण विभाग से पात्र अभ्यर्थियों की सूची प्राप्त होते ही प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को शुरू करेगा। बैचवाइज भर्ती के लिए कला संकाय में अनारक्षित वर्ग के लिए वर्ष 2001, मेडिकल में 2002 का बीएड बैच चल रहा है। कला संकाय की भर्ती के लिए आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग का मई 2003, ओबीसी का 2003, एससी और एसटी वर्ग का वर्ष 2004 का बैच चल रहा है। नॉन मेडिकल भर्ती के लिए ईडब्लूएस का 2002, ओबीसी का 2003, एससी का 2006 और एसटी का 2008 का बैच चल रहा है। मेडिकल संकाय में ईडब्लूएस का 2005, ओबीसी का 2006, एससी-एसटी का वर्ष 2006 का बैच चल रहा है 6 से 15 नवंबर तक जिला स्तर पर होगी काउंसलिंग टीजीटी की बैचवाइज भर्ती के लिए जिला स्तर पर 6 से 15 नवंबर तक काउंसलिंग होगी। जिला उप निदेशक शिक्षा भर्ती करेंगे। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने जिला रोजगार कार्यालयों से 20 अक्तूबर तक पात्र अभ्यर्थियों की सूची देने को कहा है। शिक्षा निदेशालय की जगह जिला उप निदेशक कार्यालयों में अभ्यर्थियों के नाम देने को कहा गया है।
-जातिगत सर्वेक्षण के बाद आर्थिक आधार पर भी होगा सर्वे हिमाचल प्रदेश में भी जातीय जनगणना होगी। दिल्ली में सोमवार को संपन्न कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी ) की मीटिंग में इसे लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया गया। सीडब्ल्यूसी की चार घंटे तक चली चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। इस प्रस्ताव के मुताबिक, कांग्रेस शासित हिमाचल, कर्नाटक, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भी जातीय गणना करेंगे। देश में आज से पहले कभी भी जातीय जनगणना नहीं हुई। खास बात यह है कि आर्थिक बदहाली झेल रहे प्रदेश में सरकार दूसरे चरण में आर्थिक सर्वेक्षण भी करेगी। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पिछड़े और गरीब तबके तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने को इस सर्वेक्षण का आधार बताया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) में बाकायदा इस बारे में प्रस्ताव पारित किया गया है। प्रस्ताव में कांग्रेस ने अन्य तीन राज्यों के साथ ही हिमाचल में भी जनगणना को जातिगत मोड़ देने का फैसला किया है। दरअसल, देश में कांग्रेस की सरकार चार राज्यों में है और इन सभी में भविष्य में एक साथ पहले जातिगत और उसके बाद आर्थिक आधार पर गणना होगी। हिमाचल के अलावा राजस्थान, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकारें हैं और यहां भी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने जातिगत सर्वेक्षण का फैसला किया है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में जातिगत सर्वे को लेकर प्रस्ताव पारित हुआ है। इसके साथ ही कांग्रेस देश की दूसरी ऐसी पार्टी भी बन गई है जो जातिगत आधार पर जनसंख्या की गणना करने जा रही है। इससे पूर्व हाल ही में बिहार सरकार ने जातिगत सर्वेक्षण किया है और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने इस सर्वेक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों को भी सार्वजनिक कर दिया है। खास बात यह है कि कांग्रेस ने इस सर्वे में आर्थिक आधार को भी जोड़ा है। पार्टी के इस फैसले को लोकसभा चुनाव से पहले बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े की अध्यक्षता में आयोजित सीडब्ल्यूसी की बैठक में फैसला आने के बाद सांसद राहुल गांधी ने मीडिया को कांग्रेस के इस कदम की जानकारी दी। जहां जीतेंगे, वहां जातिगत सर्वे करवाएंगे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा है कि हिमाचल, कर्नाटक, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जातीय जनगणना करवाई जाएगी। इसके बाद जिन राज्यों में भी कांग्रेस की सरकार बनेगी, उनमें भी जातिगत सर्वे करवाने का फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य है कि समाज का एक्स-रे होना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्स-रे करवाने से डर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों को उनका हक दिलवाने के लिए इसके बाद आर्थिक आधार पर भी सर्वेक्षण होगा।
-ट्रैकिंग, सफाई अभियान व ब्लड डोनेशन कैंप का होगा आयोजन हिमाचल प्रदेश फिटनेस ट्रेकर ग्रुप (एफटीजी) ने शिमला नगर में एक आदर्श और उभरता हुआ नाम बनाया है। हाल ही में 4 अक्टूबर को एफटीजी ने फ्रेंडशिप पीक 5289 मीटर का सफलतापूर्वक फतेह किया है, जिससे हमारे आदर्श और ध्यान देने योग्य प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति नई ऊर्जा की ओर कदम बढ़ाया गया है। अब यह शिमला में सफाई अभियान व रक्तदान शिविर लगाएंगे। एफटीजी ने पिछले कुछ वर्षों में ब्लैक पीक, हमप्ता पास, सार पास, पिन भाभा पास, चुड़धार, बिजली महादेव, शिकारी देवी जैसे खूबसूरत स्थलों पर ट्रेकिंग की है और इसके साथ ही पौधरोपण का भी समर्थन किया है, जिससे हमारे प्राकृतिक संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। यह सफलता न केवल प्राकृतिक सौंदर्य की महत्वपूर्ण दरबार को छूने का सबूत है, बल्कि यह भी हमें यह सिखाता है कि साथ में कठिनाइयों का सामना करने के साथ-साथ टीम क्षमता को हासिल कर सकती है। फिटनेस ट्रेकर ग्रुप को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और समर्थन मिल रहा है। इस अद्भुत कदम के साथ हम सभी को प्राकृतिक सौंदर्य की सदय सौगात की तरह हमें यहां से और भी नजदीक जाने का अवसर प्राप्त हो रहा है। वहीं फिटनेस ट्रैकर ग्रुप के पदाधिकारियों का कहना है कि भविष्य मे ग्रुप हिमाचल की सबसे ऊंची छोटी रिओ पारगिल की चढ़ाई करेंगे। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना व ट्रैकिंग, सफाई व ब्लड डोनेशन जैसे सामाजिक कार्यों कि तरफ आकर्षित करना है।


















































